क्या है पूरा मामला?
सीरेगांव के सरपंच महेंद्र कुशवाहा का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से वे अपनी पंचायत में विकास कार्य कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, ग्राम पंचायत में निर्माण कार्यों और अन्य विकास परियोजनाओं में लगातार बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। सरपंच का कहना है कि उन्होंने ग्राम स्तर की समस्याओं के निराकरण के लिए कई बार जनपद पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर तक का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने दर्जनों बार लिखित आवेदन दिए, जनसुनवाई में अपनी बात रखी, लेकिन हर बार उन्हें केवल ‘आश्वासन’ का झुनझुना थमा दिया गया।
सरपंच का दर्द यह है कि एक चुना हुआ जनप्रतिनिधि होने के बावजूद वे अपने क्षेत्र की जनता की सेवा नहीं कर पा रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
वीडियो संदेश और ‘अंतिम फैसला’
पंचायत भवन में खुद को कैद करने के बाद सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने एक वीडियो जारी किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सरपंच काफी भावुक और व्यथित नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं पिछले दो साल से प्रशासन से निवेदन कर रहा हूं कि मुझे काम करने दिया जाए और विकास कार्यों में सहयोग किया जाए, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। पिछले मंगलवार की जनसुनवाई में भी मैंने गुहार लगाई थी, पर मुझे सिर्फ प्रताड़ना मिली।”
सरपंच ने वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा कि यह उनका ‘अंतिम फैसला’ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हुआ, तो वे पंचायत भवन के भीतर ही खुद को आग लगा लेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि उन्हें कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी।
प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप
जैसे ही सरपंच के कैद होने और आत्मदाह की चेतावनी की खबर फैली, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह का चरम कदम उठाना जिले की कानून-व्यवस्था और छवि के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और तहसील स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे और सरपंच को समझाने-बुझाने का दौर शुरू हुआ।यह घटना केवल एक सरपंच की नाराजगी भर नहीं है, बल्कि यह उस नौकरशाही की तस्वीर पेश करती है जहाँ एक जनप्रतिनिधि को अपनी आवाज सुनाने के लिए मौत को गले लगाने जैसी धमकी देनी पड़ती है। सीरेगांव की जनता अब इस उम्मीद में है कि शासन उनकी पंचायत की समस्याओं पर ध्यान देगा और सरपंच को न्याय मिलेगा, ताकि गांव में विकास के पहिये फिर से घूम सकें। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन सरपंच को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिशों में जुटा है।









