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  • भोपाल के यूनियन कार्बाइड इलाके में 42 बस्तियों की बड़ी आबादी मल-मूत्र और रसायन मिला पानी पीने को मजबूर हालत बदतर

    भोपाल के यूनियन कार्बाइड इलाके में 42 बस्तियों की बड़ी आबादी मल-मूत्र और रसायन मिला पानी पीने को मजबूर हालत बदतर


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास बसी 42 बस्तियों की एक बड़ी आबादी अब भी गंदा और दूषित पानी पीने को मजबूर है। यह पानी मल-मूत्र और घातक रसायनों से भरा हुआ है जो न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है। नगर निगम ने 2017 में इन बस्तियों में पाइपलाइन के जरिए जलापूर्ति शुरू की थी लेकिन यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजरती है जिससे पानी की गुणवत्ता पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।

    गैस त्रासदी से पीड़ित इन इलाकों के लोग अब तक बेहतर पानी की सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गैस पीड़ित संगठनों की शिकायतों पर सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2012 में एक निगरानी समिति का गठन किया था। इस समिति ने इन बस्तियों में स्थित हैंडपंप और कुओं के पानी की जांच की और उसमें भारी मात्रा में हैवी मेटल डाइक्लोरोइथीन जैसे रसायन पाए गए।

    इसके बाद समिति ने नगर निगम को पेयजल के लिए पाइपलाइन डालने का निर्देश दिया। हालांकि यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजर रही थी जिसके कारण इसमें भारी मात्रा में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। ई. कोलाई बैक्टीरिया सामान्यतः मलजल में पाया जाता है और यह इंसान के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है।

    2018 में किए गए पानी की जांच में यह खुलासा हुआ कि पाइपलाइन के पानी में ई. कोलाई बैक्टीरिया की मात्रा बहुत अधिक थी जो लोगों के लिए गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। इसके बावजूद नगर निगम और प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए और आज भी लोग इस गंदे पानी को पीने को मजबूर हैं।

    गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए यह स्थिति और भी दर्दनाक है क्योंकि पहले ही वे जानलेवा गैसों से प्रभावित हुए थे और अब उन्हें दूषित पानी पीने के कारण नए स्वास्थ्य संकटों का सामना करना पड़ रहा है। इन बस्तियों के निवासी बार-बार प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन अब तक कोई सार्थक समाधान नहीं निकल सका है।

    इस संकट की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए गैस पीड़ित संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने कई बार प्रदर्शन भी किया है लेकिन शासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। 2017 में नगर निगम ने सर्वोच्च न्यायालय में एक शपथपत्र देकर जलापूर्ति में सुधार करने का वादा किया था लेकिन सात साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

    यह संकट सिर्फ पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है बल्कि यह स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी खतरा बन चुका है। नागरिक समाज और विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं ताकि इन 42 बस्तियों के लोगों को साफ पानी मिल सके और उनका स्वास्थ्य सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।

  • कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया

    कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके आरोप लगाया कि 2019 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने मध्य प्रदेश सरकार को इंदौर और भोपाल में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    कैग की 2019 की रिपोर्ट में साफ तौर पर दोनों शहरों की जल आपूर्ति में गंभीर कमियों का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां थीं जिनमें पानी के नमूनों का परीक्षण भी सही नहीं किया गया था और कई नमूनों में गंदगी और मल कोलिफॉर्म पाए गए थे जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरे का कारण हैं। इस रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जिससे अब इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है।

    उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक एडीबी से 906 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था ताकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर में पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। हालांकि इस कर्ज का इस्तेमाल किया गया था लेकिन कैग की रिपोर्ट में यह साफ सामने आया कि इन शहरों में पानी का प्रबंधन अपर्याप्त था और भ्रष्टाचार के कारण पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।कैग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया गया था:

    इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में पांच जोनों को ही नियमित पानी की आपूर्ति हो रही है। शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से केवल 5.30 लाख परिवारों को नल कनेक्शन मिल पाए हैं।2013 से 2018 तक 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे।दोनों शहरों में 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए थे।नगर निगमों ने रिसाव को ठीक करने में बेहद लंबा समय लिया था 22 से 182 दिन ।पानी के 30 से 70 प्रतिशत हिस्से का कोई हिसाब नहीं था जो पानी बिना कारण बर्बाद हो रहा था।

    उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कैग ने 2019 में ही इन मुद्दों को उठाया था लेकिन सरकार तब भी सोती रही और अब जब बड़ा हादसा हो चुका है तब सरकार जागी है। सिंघार का कहना था कि बिना किसी बड़ी त्रासदी के सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती और अब सरकार को इस गंभीर लापरवाही पर जवाब देना चाहिए।इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

  • इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर बोला हमला

    इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर बोला हमला


    इंदौर । इंदौर में गंदा पानी पीने से हुए मौतों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 338 नए मरीजों में से 32 की हालत गंभीर है। गंदे पानी की लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया। इस पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर में आम आदमी को पानी नहीं बल्कि जहर दिया गया है। उनका कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ है और अब भी कार्रवाई नहीं हो रही है।

    राहुल गांधी ने ट्विटर पर इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि “इंदौर में पानी नहीं जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में था। घर-घर मातम है गरीब बेबस हैं लेकिन भाजपा के नेता घमंड में चूर हैं। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है उन्हें सांत्वना मिलनी चाहिए थी लेकिन सरकार ने घमंड परोस दिया।” उन्होंने यह भी पूछा कि गंदा पानी प्रशासन ने क्यों नहीं रोका और सीवर पानी पीने का कारण क्या था। राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “क्यों नहीं कार्रवाई की गई।

    इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बयान दिया था जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के बाहर प्रदर्शन किया। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने दूषित पानी की आपूर्ति पर सरकार से जवाबदेही की मांग की। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया।

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार प्रशासन और नेतृत्व इस घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने मध्य प्रदेश को कुप्रशासन का एपिसेंटर बताया और कहा कि यहां लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिनमें गरीबों की जान जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर हमेशा की तरह खामोश रहते हैं जब गरीब मरते हैं। इस घटना के बाद से जनता में गुस्सा और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश फैल गया है और इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और प्रदर्शनों का दौर जारी है।

  • नए साल 2026: भोपाल में 26 ट्रेनों की टाइमिंग बदली, बिजली कटौती नहीं, कृषि उद्योगों पर सरकार का फोकस

    नए साल 2026: भोपाल में 26 ट्रेनों की टाइमिंग बदली, बिजली कटौती नहीं, कृषि उद्योगों पर सरकार का फोकस


    भोपाल। नए साल 2026 की शुरुआत मध्यप्रदेश और राजधानी भोपाल के लिए कई महत्वपूर्ण अपडेट के साथ हुई। रेलवे शेड्यूल से लेकर बिजली, सरकारी योजनाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक-ज का दिन आम लोगों के लिए कई मायनों में खास रहा।

    रेलवे अपडेट:

    1 जनवरी से भोपाल, रानी कमलापति और संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन से चलने वाली 26 ट्रेनों की टाइमिंग में बदलाव किया गया है। रेलवे ने नया शेड्यूल जारी किया है और अब ट्रेन रिजर्वेशन चार्ट 10 घंटे पहले तैयार होगा।

    कुछ प्रमुख ट्रेनों का नया समय:

    22145 भोपाल-रीवा एक्सप्रेस: रात 11:05 → 11:00

    19324 भोपाल-डॉ. अंबेडकर नगर एक्सप्रेस: शाम 5:00 → 5:10

    14814 भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस: शाम 4:55 → 4:40

    12185 रानी कमलापति-रीवा एक्सप्रेस: रात 10:00 → 9:55

    22172 रानी कमलापति-पुणे एक्सप्रेस: दोपहर 3:50 → 3:40

    रेलवे ने यात्रियों से यात्रा से पहले अपडेटेड टाइमिंग देखने की अपील की है।

    बिजली की राहत:

    भोपालवासियों को नए साल की शुरुआत में बड़ी राहत मिली। आज शहर में कहीं भी बिजली मेंटेनेंस नहीं किया जाएगा, जिससे पूरे दिन निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित रहेगी।

    कृषि आधारित उद्योग वर्ष:

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में सरकार ने 2026 कोकृषि आधारित उद्योग वर्ष घोषित किया है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं:सिंचाई रकबा 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्यकेन-बेतवा परियोजना शुरू पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना पर काम जारी

    मेगा तापी रिचार्ज परियोजना को मंजूरी

    राजनीतिक गतिविधि:

    नए साल से कांग्रेस ने प्रदेशभर में गांव चलो अभियान’ की शुरुआत की। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भोपाल के गांवों से अभियान का आगाज किया। इसका मुख्य फोकस पंचायत स्तर पर संगठन को मजबूत करना है।

    सरकारी भर्ती: 

    मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडलMPESB ने 474 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
    अंतिम तिथि: 7 जनवरी 2026संशोधन की अंतिम तिथि: 12 जनवरी 2026

    सांस्कृतिक कार्यक्रम:

    भोपाल में नए साल के अवसर पर शलाका चित्र प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। स्थान: जनजातीय संग्रहालय समय: दोपहर 12 बजे से नए साल 2026 के पहले दिन मध्यप्रदेश और भोपालवासियों के लिए यह दिन परिवहन, ऊर्जा, कृषि और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिहाज से खास रहा।
  • नववर्ष 2026: मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नए साल का भव्य आगाज

    नववर्ष 2026: मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नए साल का भव्य आगाज


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में नववर्ष 2026 की पहली सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्साह के बीच शुरू हुई। 1 जनवरी की सुबह होते ही प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में तड़के चार बजे से दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह नौ बजे तक लगभग 80 हजार श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके थे। प्रशासन के अनुसार दिनभर यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।महाकाल मंदिर में नए साल के अवसर पर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई और श्रद्धालुओं के लिए कतारबद्ध दर्शन की सुविधा सुनिश्चित की गई। इस दौरान महिला क्रिकेट विश्वकप विजेता भारतीय टीम की सदस्य भी मंदिर पहुंचीं और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंधन समिति ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।

    उज्जैन के अलावा नर्मदा तट पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी सुबह से भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से सजाया गया और मंगला आरती के बाद दर्शन खोले गए। इसके साथ ही ओरछा के रामराजा मंदिर, मैहर के शारदा देवी मंदिर, नलखेड़ा के मां बगलामुखी धाम और देवास के प्रमुख मंदिरों में भी हजारों भक्त नए साल की पहली सुबह दर्शन के लिए पहुंचे।सीहोर जिले के प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर में ठंड और कोहरे के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। दमोह जिले के बांदकपुर स्थित जागेश्वरनाथ धाम में भी विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। गुना के हनुमान टेकरी मंदिर में सुबह की आरती के साथ ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा, जहां प्रशासन ने अनुमान लगाया कि एक लाख से अधिक भक्त पहुंचे।

    धार्मिक गतिविधियों के साथ ही प्रदेश के शहरों और पर्यटन स्थलों पर नए साल का जश्न भी देर रात तक चलता रहा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में लोग सड़कों, होटलों और सार्वजनिक स्थलों पर एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दे रहे थे। मांडू और पचमढ़ी जैसे पर्यटन केंद्रों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत और अलाव के माध्यम से नए साल का स्वागत किया गया।जबलपुर के भेड़ाघाट धुआंधार में साल के पहले सूर्योदय को देखने बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचे। उगते सूर्य के साथ लोगों ने नए साल की शुरुआत को यादगार बनाया। इस प्रकार, मध्यप्रदेश में नववर्ष 2026 की सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्सव दोनों के लिए विशेष रही।

  • रतलाम में फर्जी पहचान से महिला को झूठे प्रेम जाल में फंसाने का मामला, पुलिस जांच जारी

    रतलाम में फर्जी पहचान से महिला को झूठे प्रेम जाल में फंसाने का मामला, पुलिस जांच जारी


    रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम में एक सनसनीखेज मामला सामने आया हैजिसमें एक व्यक्ति ने अपनी असली पहचान छुपाकर एक शादीशुदा महिला को प्रेम जाल में फंसाया और उसकी जिंदगी को प्रभावित किया। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी जैसी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

    पीड़िता के अनुसारआरोपी ने खुद को अलग नाम से पेश किया और शादी का झांसा देकर करीब पांच साल तक महिला के साथ लगातार शारीरिक उत्पीड़न किया। घटना की शुरुआत 2020 में हुईजब महिला की मुलाकात रतलाम के राम मंदिर क्षेत्र में आरोपी से हुई। उस समय आरोपी ने खुद को सोनू बताकर महिला को भरोसा दिलाया कि वह भी उसी धर्म का है। महिला की मौजूदा शादी थीलेकिन आरोपी ने धीरे-धीरे उसके विश्वास को तोड़ा और उसे अपने प्रेम जाल में फंसाया।2023 में आरोपी ने महिला को अपने संपर्क में लिया और उसे अपने पति से तलाक लेने के लिए उकसाया। महिला ने उसकी बातों में आकर जुलाई 2023 में अपना घर छोड़ दिया और अपने पिता के पास रहने लगी। कुछ ही समय बाददोनों नयागांव में किराए के कमरे में रहने लगे और पति-पत्नी की तरह व्यवहार करने लगे। इस दौरान आरोपी ने लगातार महिला का शारीरिक उत्पीड़न किया।

    कुछ समय बाद महिला को पता चला कि जिसे वह सोनू समझ रही थीअसल में उसका नाम इमरान था। इसके बावजूद महिला ने शादी की उम्मीद में उसका साथ रखा। नवंबर 2024 में महिला का पति से आधिकारिक तलाक हो गयालेकिन आरोपी ने शादी करने से इनकार कर दिया। दिसंबर 2025 में जब महिला ने शादी का दबाव डालातो आरोपी ने उस पर हिंसा की और जान से मारने की धमकी दी।पीड़िता ने आखिरकार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि आरोपी ने उसे कई जगहों पर पत्नी के रूप में पेश किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जांच में पता चला कि आरोपी पहले ड्रग तस्करी के मामले में जेल जा चुका है। पुलिस अब उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।

    इस मामले ने महिलाओं की सुरक्षा और समाज में जागरूकता पर भी सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले हमें चेतावनी देते हैं कि व्यक्तिगत पहचान की पुष्टि और भरोसेमंद रिश्तों में सावधानी बहुत जरूरी है। पुलिस और कानून व्यवस्था लगातार ऐसे अपराधों पर नज़र रखती हैंलेकिन पीड़ितों की सुरक्षा और कानूनी मदद सुनिश्चित करना सबसे अहम है।इस घटना ने रतलाम और मध्य प्रदेश में लोगों को व्यक्तिगत सुरक्षारिश्तों में सतर्कता और धोखाधड़ी से बचाव के महत्व के प्रति जागरूक किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी जल्द ही पकड़ा जाएगा और कानून के तहत सजा भुगतने के लिए तैयार होगा।

  • कलेक्टर–CEO के दावों की परतें खुलीं: राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे का सच, जांच टीम के सामने बेनकाब हुआ ‘जल संरक्षण’ का फर्जीवाड़ा

    कलेक्टर–CEO के दावों की परतें खुलीं: राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे का सच, जांच टीम के सामने बेनकाब हुआ ‘जल संरक्षण’ का फर्जीवाड़ा



    खंडवा। खंडवा जिले को जल संरक्षण के नाम पर मिले राष्ट्रपति पुरस्कार को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जहां एक चर्चित अखबार के पड़ताल के बाद भोपाल से सीनियर आईएएस दिनेश कुमार जैन के नेतृत्व में दो सदस्यीय जांच दल मंगलवार को खंडवा पहुंचा और मौके पर जाकर तथाकथित जल संरचनाओं का ‘रियलिटी चेक’ किया। जांच के दौरान जो सामने आया, उसने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी।

    जांच दल चर्चित अखबार के रिपोर्ट के आधार परहरसूद जनपद समेत कई गांवों में पहुंचा।

    कहीं कागजों में तालाब मिले, तो जमीन पर सिर्फ मिट्टी का ढेर। कहीं 6 फीट गहरे सोख्ता गड्ढों का दावा था, लेकिन हकीकत में 1 फीट से भी कम गहराई निकली। टीम ने किसानों और ग्रामीणों से बात की, खुद गड्ढे खुदवाकर देखे और कई जगह देखकर चौंक गई।

    डोटखेड़ा गांव में खेत के बीच कागजों में तालाब दिखाया गया था, लेकिन मौके पर कोई जल संरचना नहीं मिली। सिर्फ मिट्टी फैलाकर तालाब का रूप देने की कोशिश की गई थी।

    पलानी माल गांव में ग्रामीणों ने खुद अधिकारियों को उन जगहों पर ले जाकर दिखाया, जहां सरकारी रिकॉर्ड और जमीन की सच्चाई बिल्कुल अलग थी। आंगनवाड़ी भवन में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अधूरा मिला, पाइप ही गायब था। आरोग्य केंद्र में सोख्ता गड्ढा नाममात्र का निकला, जिसे बारिश में ओवरफ्लो के बाद तोड़ दिया गया था।

    सबसे चौंकाने वाला मामला शाहपुरा माल गांव में सामने आया, जहां जांच दल के आने की सूचना मिलते ही पंचायत सचिव ने सुबह-सुबह जेसीबी से नया गड्ढा खुदवा दिया।

    जबकि रिकॉर्ड में उसका भुगतान पहले ही हो चुका था। तय साइज 10×10 फीट था, लेकिन मौके पर सिर्फ 1 फीट गहरा गड्ढा मिला, वो भी खेत के ऐसे कोने में जहां उसका कोई मतलब नहीं था।

    पूरा मामला तब उजागर हुआ जब 11 नवंबर को केंद्र सरकार ने खंडवा जिले को जल संरक्षण के लिए नेशनल वाटर अवॉर्ड और 2 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। प्रशासन ने 1.29 लाख जल संरचनाओं के निर्माण का दावा किया था। लेकिन जांच में सामने आया कि कई तालाब, डक वैल और स्टॉप डैम सिर्फ कागजों में थे। कुछ तस्वीरें तो एआई द्वारा जनरेटेड पाई गईं। कहीं 150 सोख्ता गड्ढे दिखाए गए, तो जमीन पर 1–2 फीट के गड्ढे या सिर्फ पाइप नजर आए। कहीं 11 तालाबों का दावा था, लेकिन एक भी मौजूद नहीं था।

    अखबार के खुलासे के बाद अब भोपाल की टीम इन फर्जीवाड़ों की आधिकारिक तस्दीक कर रही है।

    साफ है कि खंडवा को मिला यह पुरस्कार जल संरक्षण की सफलता नहीं, बल्कि कागजी आंकड़ों और झूठे दावों पर खड़ा किया गया अब तक का सबसे बड़ा सरकारी भ्रम साबित हो रहा है।

    खंडवा के नारायण नगर इलाके में सामने आया मामला जल संरक्षण के नाम पर किए गए फर्जीवाड़े की एक और बानगी बन गया है।

    यहां रहने वाली शिक्षिका संध्या राजपूत को उच्च अधिकारियों की ओर से निर्देश दिया गया था कि वह अपने घर पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाएं। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।

    जांच में सामने आया कि संध्या राजपूत के घर पर कोई वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मौजूद नहीं था। इसके बजाय उनके घर से कुछ मकान दूर स्थित एक अन्य घर की छत से लगी पाइप को ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बताकर पेश कर दिया गया। यह पाइप दरअसल छत का पानी सीधे नाली में पहुंचाने के लिए लगाई गई थी, जिसका जल संरक्षण या रिचार्ज से कोई लेना-देना नहीं था।

    इसके बावजूद उसी मकान की फोटो खींचकर प्रशासन को सौंप दी गई और कागजों में इसे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के रूप में दर्ज कर दिया गया। यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि कैसे जमीनी हकीकत को दरकिनार कर सिर्फ फोटो और फाइलों के सहारे योजनाओं की सफलता दिखाई गई, जबकि वास्तविकता में जल संरक्षण का कोई काम नहीं हुआ।

  • पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी से मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड, मंदसौर सबसे ठंडा, शीतलहर का अलर्ट

    पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी से मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड, मंदसौर सबसे ठंडा, शीतलहर का अलर्ट

    भोपाल । पहाड़ी राज्यों में हो रही लगातार बर्फबारी का असर अब मध्यप्रदेश में साफ नजर आने लगा है। प्रदेश कड़ाके की ठंड की चपेट में है। भोपाल, इंदौर सहित पांच जिलों में शीतलहर चल रही है, जबकि मंदसौर प्रदेश का सबसे ठंडा जिला बन गया है, जहां न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीती रात प्रदेश के करीब 30 शहरों में पारा 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। उत्तरी जिलों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ।मौसम विभाग ने रविवार को भोपाल, इंदौर, शाजापुर, सीहोर और राजगढ़ में कोल्ड वेव का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में दिन का तापमान 25 डिग्री से नीचे रहने की संभावना है, जिससे दिन में भी ठंड का एहसास बना रहेगा। लोगों को आवश्यक सावधानी बरतने और गर्म कपड़े पहनकर ही बाहर निकलने की सलाह दी गई है।

    मालवा-निमाड़ में ठंड का सबसे ज्यादा असर

    प्रदेश में ठंड का सबसे ज्यादा असर मालवा और निमाड़ अंचल में देखने को मिल रहा है। इंदौर और उज्जैन संभाग के 15 जिलों में तापमान लगातार गिरा है। मंदसौर के बाद शाजापुर दूसरा सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3.1 डिग्री दर्ज किया गया। पांच बड़े शहरों में भोपाल में 4.6 डिग्री, इंदौर में 6.2 डिग्री, ग्वालियर में 6.7 डिग्री, उज्जैन में 7.3 डिग्री और जबलपुर में 7.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    शनिवार की रात में शहडोल के कल्याणपुर में 3.2 डिग्री, राजगढ़ में 3.8 डिग्री, नौगांव में 4.6 डिग्री, उमरिया में 4.7 डिग्री, पचमढ़ी में 4.8 डिग्री, खजुराहो में 5 डिग्री, मलाजखंड में 5.6 डिग्री और रीवा में तापमान 5.8 डिग्री रहा। वहीं, रायसेन, शिवपुरी, दमोह, मंडला, दतिया, सतना, गुना, श्योपुर, धार, रतलाम समेत करीब 30 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। इधर, 16 से ज्यादा जिलों में कोहरे का असर भी देखा गया।

    कोहरे से रेल यातायात प्रभावित

    शनिवार को ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली सहित कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा। कोहरे और सर्द हवाओं के चलते दिल्ली से मध्यप्रदेश आने वाली कई ट्रेनें देरी से पहुंचीं। भोपाल, इंदौर, मंदसौर, शाजापुर और आसपास के जिलों में तेज सर्द हवाओं ने ठंड का असर और बढ़ा दिया।

    आगे और बढ़ सकती है ठंड

    मौसम विभाग के अनुसार, 30 दिसंबर को पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करेगा, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है। सर्द हवाओं और जेट स्ट्रीम के सक्रिय रहने से आने वाले दिनों में ठंड और तेज होने की संभावना जताई गई है।

  • मप्र में खेती बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, टमाटर कर रहा किसानों को समृद्ध

    मप्र में खेती बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, टमाटर कर रहा किसानों को समृद्ध

     अब यह सिर्फ जीवन-यापन का साधन नहीं रही है, राज्‍य में खेती करना मतलब किसानों की समृद्धि, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन बनना है। खासतौर पर टमाटर की खेती ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।

    निरंतर बढ़ते रकबे, रिकॉर्ड उत्पादन, आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते आज देश का सबसे बड़ा टमाटर उत्पादक राज्य बनकर मप्र उभरा है। दिसंबर 2025 के संदर्भ में देखें तो मध्य प्रदेश सब्जी उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर अपनी स्थिति और मजबूत कर चुका है। प्रदेश में अब लगभग 13 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सब्जियों की खेती हो रही है, जिसमें टमाटर का योगदान सबसे अधिक है।

    वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत तक टमाटर की खेती का रकबा बढ़कर करीब 1 लाख 35 हजार हेक्टेयर के आसपास पहुँच चुका था। अनुमान है कि इससे 38 से 40 लाख मीट्रिक टन तक टमाटर उत्पादन हो रहा है, जोकि देश की कुल सब्जी आपूर्ति में मध्य प्रदेश की अहम भूमिका को दर्शाता है। इसके साथ ही स्‍वभाविक तौर पर दिसम्‍बर तक उत्‍पादन का आंकड़ा ओर ऊपर गया है। पिछले पाँच वर्षों में टमाटर के रकबे में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021-22 में जहाँ टमाटर की खेती लगभग 1.10 लाख हेक्टेयर में होती थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह आंकड़ा लगभग 25 हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी के साथ नए रिकॉर्ड पर पहुँच गया है। यह विस्तार सिर्फ क्षेत्रफल तक सीमित नहीं रहा है गुणवत्ता, उत्पादकता और बाजार में विश्वसनीयता का भी प्रमाण है।

    उल्‍लेखनीय है कि प्रदेश के टमाटर की मांग महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलावा दिल्ली-एनसीआर, गुजरात और पूर्वी भारत के कई बड़े मंडी केंद्रों तक है। ताजगी, बेहतर आकार, लंबी शेल्फ लाइफ और स्वाद के कारण मध्य प्रदेश का टमाटर थोक व्यापारियों और प्रोसेसिंग उद्योगों की पहली पसंद बन गया है। उत्पादकता के मामले में भी राज्‍य ने अच्‍छी प्रगति की है। दिसंबर 2025 तक टमाटर की औसत उत्पादकता लगभग 29 से 30 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुँच गई है, जोकि प्रदेश की औसत उद्यानिकी उत्पादकता से लगभग दोगुनी है। यह सफलता उन्नत बीजों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तथा समय पर तकनीकी मार्गदर्शन का परिणाम है।

    प्रदेश में कुल उद्यानिकी फसलों का रकबा अब लगभग 27 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है, जिसमें सब्जियों का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। टमाटर के साथ-साथ धनिया और लहसुन के उत्पादन में भी मध्य प्रदेश दिसंबर 2025 तक देश में प्रथम स्थान बनाए हुए है। इससे राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बहुआयामी मजबूती मिली है। राज्य सरकार की योजनाओं ने इस परिवर्तन में निर्णायक भूमिका निभाई है। टमाटर के प्रमाणित बीजों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान, सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं में सब्सिडी, फसल बीमा और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से सामूहिक विपणन ने किसानों का जोखिम कम किया है। साथ ही प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना के तहत टमाटर आधारित प्रसंस्करण इकाइयों की संख्या भी 2025 तक तेजी से बढ़ी है।

    अनूपपुर जिला इस सफलता की जीवंत मिसाल बनकर उभरा है। दिसंबर 2025 तक जिले में लगभग 16 हजार किसान टमाटर की खेती से जुड़े हैं और उत्पादन 1.5 लाख मीट्रिक टन के करीब पहुँच गया है। जैतहरी, अनूपपुर और पुष्पराजगढ़ के क्लस्टरों से टमाटर अब मध्यप्रदेश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बड़े बाजारों में भेजा जा रहा है। किसानों की आमदनी में भी बड़ा बदलाव आया है। जहाँ पहले पारंपरिक फसलों से सीमित आय होती थी, वहीं अब टमाटर की खेती से प्रति एकड़ औसतन 80 हजार से एक लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ संभव हो रहा है। महिला किसानों की भागीदारी भी बढ़ी है, जिससे सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है।

    कृषि विशेषज्ञों का इस संबंध में मानना है कि यदि दिसंबर 2025 के बाद कोल्ड स्टोरेज, परिवहन, निर्यात और बड़े स्तर के प्रसंस्करण ढांचे को और सशक्त किया जाए, तो मध्य प्रदेश न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी टमाटर उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इस तरह देखें तो दिसंबर 2025 में टमाटर मध्य प्रदेश के किसानों के लिए ‘लाल सोना’ साबित हुआ है, जिसने उनकी आय, आत्मविश्वास और भविष्य तीनों को नई दिशा दी है।

  • 1 जनवरी से ब्लैक लिस्ट हो जाएंगे ये राशन कार्ड फ्री अनाज और 7 बड़ी योजनाओं का लाभ मिलेगा रुक

    1 जनवरी से ब्लैक लिस्ट हो जाएंगे ये राशन कार्ड फ्री अनाज और 7 बड़ी योजनाओं का लाभ मिलेगा रुक


    नई दिल्ली । राशन कार्ड धारकों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई हैजिससे हजारों लाभार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप राशन कार्ड का लाभ उठाते हैंतो 31 दिसंबर से पहले एक जरूरी काम पूरा करना होगा। इस समय सीमा के बाद अगर आप यह काम नहीं करतेतो 1 जनवरी से राशन मिलना बंद हो सकता है और सात प्रमुख सरकारी योजनाओं का लाभ भी रुक सकता है।

    ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य

    दरअसलसरकार ने राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी इलेक्ट्रॉनिक-नो योर कस्टमरको अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब है कि सभी राशन कार्ड धारकों को अपनी पहचान और अन्य जानकारी ऑनलाइन अपडेट करनी होगी। यदि यह प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरी नहीं होतीतो 1 जनवरी से आपके राशन कार्ड का लाभ रुक सकता हैऔर आप फ्री राशन और अन्य योजनाओं से वंचित हो सकते हैं।

    किसे-किसे पर पड़ेगा असर

    राशन कार्ड से जुड़ी यह प्रक्रिया हर परिवार के लिए लागू हैजिनके पास सरकारी राशन कार्ड है। इसका सीधा असर उन लाभार्थियों पर होगा जो अब तक अपनी ई-केवाईसी नहीं करवा पाए हैं। इन लाभार्थियों को 1 जनवरी से राशन मिलने में समस्या हो सकती है। इसके अलावासात बड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ भी इन कार्ड धारकों को नहीं मिल पाएगाजिनमें प्रमुख रूप से फ्री राशन योजनापेंशन योजनाएंबीमा योजनाएं अन्य सरकारी मदद शामिल हैं।

    ई-केवाईसी कैसे करें

    खुशखबरी यह है कि इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आपको किसी सरकारी दफ्तर या केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं है। ई-केवाईसी मोबाइल फोन से भी किया जा सकता है। इसके लिए आपको निम्नलिखित कदम उठाने होंगे

    स्मार्टफोन या कंप्यूटर का इस्तेमाल करें।

    राज्य सरकार के आधिकारिक राशन कार्ड पोर्टल या एप्लिकेशन पर जाएं। अपना राशन कार्ड नंबर और अन्य जरूरी जानकारी डालें। आधार कार्ड और फोटो अपलोड करें।
     एक बार जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाएतो आपको एक कन्फर्मेशन मैसेज मिलेगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद आपको कोई परेशानी नहीं होगी और आप बिना किसी रुकावट के सभी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते रहेंगे।

    क्यों जरूरी है ई-केवाईसी

    ई-केवाईसी से राशन कार्ड की जानकारी को सही तरीके से अपडेट किया जा सकेगा और यह सुनिश्चित होगा कि केवल असली और पात्र लाभार्थी ही सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। इस प्रक्रिया से राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी।

    समय रहते सुधार लें
    अगर आपने अभी तक अपनी ई-केवाईसी नहीं करवाई हैतो यह समय है कि आप इसे जल्दी से जल्दी पूरा कर लें। ऐसा करने से आप 1 जनवरी से होने वाली किसी भी परेशानी से बच सकते हैं और आपके राशन कार्ड से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा।