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  • सियासी घटनाओं से गरमाया MP, संसद में तीखे तेवर, नर्स का अनोखा विरोध और शाह-वीडी बैठक सुर्खियों में

    सियासी घटनाओं से गरमाया MP, संसद में तीखे तेवर, नर्स का अनोखा विरोध और शाह-वीडी बैठक सुर्खियों में


    भोपाल। मध्य प्रदेश में राजनीति और प्रशासन से जुड़ी कई घटनाएं शनिवार को चर्चा का केंद्र बनी रहीं। एक ओर संसद में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए उसके विरोध प्रदर्शन को सड़क छाप राजनीति करार दिया तो दूसरी ओर भाजपा सांसद विष्णु दत्त शर्मा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। इसी बीच अनूपपुर जिले से सामने आया एक वीडियो सरकारी व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत बयां करता नजर आया जिसमें एक नर्स मोबाइल नेटवर्क की तलाश में पेड़ पर चढ़कर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की कोशिश करती दिखाई दी।

    राज्यसभा में उस समय माहौल गरमा गया जब विपक्ष ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। सभापति की ओर से अनुमति नहीं मिलने पर विपक्षी सदस्य नारेबाजी करने लगे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सदन में लोकतंत्र की मर्यादा को तार तार किया जा रहा है और विपक्ष केवल अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और ऐसे व्यवहार को कभी स्वीकार नहीं करेगी। हालांकि विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा और सदन में नारेबाजी होती रही।

    इधर दिल्ली में भाजपा सांसद विष्णु दत्त शर्मा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या पार्टी उन्हें कोई नई जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से हटने के बाद फिलहाल वे सांसद के रूप में सक्रिय हैं लेकिन अमित शाह से मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अलग अलग अर्थ निकाल रहे हैं। हालांकि भाजपा की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

    राजनीति के साथ साथ प्रशासनिक व्यवस्था की एक तस्वीर अनूपपुर जिले से सामने आई जिसने सभी का ध्यान खींचा। पुष्पराजगढ़ के गन्नागोडा स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एक नर्स ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए पेड़ पर चढ़ गई। स्वास्थ्य केंद्र में मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण उसे मजबूरी में यह तरीका अपनाना पड़ा। वायरल वीडियो में नर्स यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि जब तक ऑनलाइन अटेंडेंस नहीं लग जाएगी तब तक वह नीचे नहीं उतरेगी। यह घटना ग्रामीण इलाकों में डिजिटल व्यवस्था और नेटवर्क की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े करती है।

    उधर दतिया उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज बनी हुई है। मतदान संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक दल अपने अपने दावे कर रहे हैं। इसी बीच यह चर्चा भी सामने आई कि मतदान से पहले एक होटल में हुई रणनीतिक बैठक में विरोधी दल के साथ कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे जिन्हें राजनीतिक तौर पर दूसरे खेमे के करीबी माना जाता है। बताया जा रहा है कि बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए होटल के सीसीटीवी कैमरे तक बंद करा दिए गए थे। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन चुनावी नतीजों से पहले इस तरह की चर्चाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

    संसद की तल्ख बहस हो या संगठन की गतिविधियां अथवा सरकारी व्यवस्था की चुनौतियां मध्य प्रदेश से जुड़ी ये घटनाएं फिलहाल राजनीति और प्रशासन दोनों की दिशा पर सवाल भी खड़े कर रही हैं और चर्चा भी बटोर रही हैं। अब सबकी नजर आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी नतीजों पर टिकी हुई है।

  • जुलाई की झमाझम भी नहीं भर सकी कमी, मध्य प्रदेश के 42 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश

    जुलाई की झमाझम भी नहीं भर सकी कमी, मध्य प्रदेश के 42 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून ने जुलाई के आखिरी दिन राहत जरूर दी लेकिन तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। पूरे महीने के दौरान दो लंबे ब्रेक आने के बावजूद जुलाई का बारिश कोटा पूरा हो गया। इसके बावजूद जून में कमजोर मानसून का असर अब भी प्रदेश पर दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि अब तक पूरे प्रदेश में सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है और 55 में से 42 जिले अभी भी औसत से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। मौसम विभाग का मानना है कि अगस्त के दौरान अच्छी बारिश होने पर यह कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। फिलहाल अगले चार दिनों तक प्रदेश में कहीं भी व्यापक स्तर पर भारी बारिश की संभावना नहीं जताई गई है।

    बीते दो दिनों में सक्रिय रहे तीन मजबूत मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी मध्य प्रदेश में देखने को मिला। खरगोन जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान करीब 2.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। झिरनिया में सबसे ज्यादा 3.8 इंच वर्षा हुई जबकि गोगांवा में 3.5 इंच कसरावद में 3.1 इंच महेश्वर में 2.6 इंच और सेगांव में करीब 1.9 इंच बारिश दर्ज की गई। भीकनगांव सनावद बड़वाह और खरगोन शहर में भी अच्छी बारिश हुई जिससे नदियों और जलप्रपातों का जलस्तर बढ़ गया। लगातार दो दिन हुई तेज बारिश के कारण प्रसिद्ध कुंदा जलप्रपात उफान पर पहुंच गया और सुरक्षा को देखते हुए सिरवेल महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रोक लगा दी गई।

    रतलाम जिले में भी शनिवार सुबह से रुक रुककर बारिश जारी रही। जिले में अब तक 13 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है जिससे शहर का हनुमान ताल पूरी तरह भर गया और जुलाई महीने का वर्षा लक्ष्य भी पूरा हो गया। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अब तक लगभग 9 इंच कम बारिश हुई है। पिछले साल इसी अवधि तक जिले में करीब 22 इंच पानी गिर चुका था जबकि इस बार आंकड़ा 13 इंच के आसपास ही है।

    भोपाल मंदसौर सहित कई जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रहा। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल सक्रिय मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ रही हैं इसलिए अगले चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना कम रहेगी। हालांकि यदि बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में नया सिस्टम विकसित होता है तो मौसम अचानक बदल सकता है और कुछ इलाकों में फिर से भारी वर्षा देखने को मिल सकती है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 15.4 इंच यानी 390.3 मिलीमीटर बारिश हुई है जबकि सामान्य स्थिति में इस समय तक 17.6 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में करीब 2.3 इंच यानी 13 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा की कमी 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत दर्ज की गई है।

    स्थिति यह है कि अनूपपुर बालाघाट छतरपुर जबलपुर सागर सतना भोपाल ग्वालियर उज्जैन विदिशा रतलाम मंदसौर रायसेन शिवपुरी सहित कुल 42 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। वहीं मऊगंज उमरिया शहडोल खंडवा बड़वानी खरगोन इंदौर देवास राजगढ़ सीहोर सहित 13 जिलों में औसत से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगस्त का महीना प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। यदि मानसून सक्रिय बना रहा और लगातार अच्छे सिस्टम बनते रहे तो न केवल बारिश की मौजूदा कमी पूरी हो सकती है बल्कि खरीफ फसलों को भी बड़ा फायदा मिलेगा। फिलहाल किसानों और आम लोगों की निगाहें अगस्त की बारिश पर टिकी हुई हैं।

  • सागर और सिवनी एयरक्रैश की जांच रिपोर्ट आई सामने, 48 घंटे में हुए दोनों हादसों की वजहों से उठा पर्दा

    सागर और सिवनी एयरक्रैश की जांच रिपोर्ट आई सामने, 48 घंटे में हुए दोनों हादसों की वजहों से उठा पर्दा


    भोपाल। पिछले वर्ष दिसंबर में मध्य प्रदेश में महज 48 घंटे के भीतर हुए दो ट्रेनी विमान हादसों की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार दोनों दुर्घटनाएं अलग-अलग तकनीकी कारणों से हुईं। एक हादसा सिवनी में इंजन की शक्ति कम होने के कारण हुआ, जबकि दूसरा सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर गो-अराउंड प्रक्रिया के दौरान विमान के अनियंत्रित होने से हुआ। राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और प्रशिक्षु पायलट तथा प्रशिक्षक सुरक्षित बच गए।

    रिपोर्ट के मुताबिक पहला हादसा 8 दिसंबर को सिवनी जिले के सुकतारा एयरफील्ड के पास हुआ था। रेडबर्ड एविएशन अकादमी का टेकनम पी-मेंटर प्रशिक्षण विमान लैंडिंग की तैयारी कर रहा था, तभी अचानक इंजन के आरपीएम में गिरावट दर्ज की गई। प्रशिक्षक के निर्देश पर थ्रॉटल बढ़ाने के बावजूद इंजन से अपेक्षित शक्ति नहीं मिली। स्थिति को देखते हुए प्रशिक्षक ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर खेत में आपातकालीन लैंडिंग कराने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान विमान बिजली के तारों से टकरा गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

    इसके ठीक दो दिन बाद 10 दिसंबर को सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर चाइम्स एविएशन अकादमी का सेसना-172एस प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार विमान लैंडिंग के दूसरे प्रयास में निर्धारित टचडाउन क्षेत्र से आगे तक हवा में तैरता रहा। जब रनवे समाप्त होने की स्थिति बनी तो एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने पायलट को गो-अराउंड करने का निर्देश दिया। जैसे ही ट्रेनी पायलट ने थ्रॉटल बढ़ाया, विमान अचानक तेजी से ऊपर उठा और बाईं ओर झुकते हुए नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद वह रनवे से बाहर कच्चे क्षेत्र में गिर गया।

    AAIB की शुरुआती जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि दोनों विमानों के रखरखाव में कोई गंभीर कमी नहीं मिली। उड़ान से पहले दोनों विमानों की नियमित तकनीकी जांच पूरी की गई थी और किसी प्रकार की खराबी दर्ज नहीं थी। दोनों प्रशिक्षु पायलटों और प्रशिक्षकों का ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण भी सामान्य पाया गया, जिससे किसी प्रकार के नशे या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की आशंका से इनकार किया गया है।

    हालांकि जांच एजेंसी ने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विस्तृत तकनीकी विश्लेषण जारी रखा है। दोनों विमानों के डिजिटल डिस्प्ले से प्राप्त मेमोरी कार्ड, इंजन कंट्रोल यूनिट, सीसीटीवी फुटेज और ईंधन के नमूनों को विशेषज्ञ प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट आने के बाद दुर्घटनाओं के अंतिम कारणों की पुष्टि की जाएगी।

    चूंकि दोनों विमान विदेशी निर्माताओं के थे, इसलिए अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के तहत अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) और जर्मनी की बुंडेसस्टेले फ्यूर फ्लुगउनफालउनटर्सुखुंग (BFU) को भी जांच की जानकारी भेजी गई है। जरूरत पड़ने पर इन एजेंसियों से तकनीकी सहयोग भी लिया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण उड़ानों में छोटी तकनीकी गड़बड़ी या प्रक्रिया संबंधी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में इन दोनों मामलों की अंतिम जांच रिपोर्ट देश की फ्लाइंग ट्रेनिंग अकादमियों के लिए महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकती है। इससे भविष्य में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने तथा प्रशिक्षण प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज


    मध्य प्रदेश। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर संसद के मानसून सत्र के दौरान हुए राजनीतिक विवाद की गूंज अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गई है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने शनिवार को इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि संसद परिसर में विपक्षी सांसदों द्वारा साधु वेश धारण कर किया गया सांकेतिक प्रदर्शन भगवान श्रीराम, संत समाज और करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था का अपमान है। इसी के विरोध में भोपाल में बड़ा मार्च निकाला जाएगा।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के अनुसार प्रदर्शन दोपहर में व्यापम चौराहे से शुरू होगा और कांग्रेस कार्यालय तक जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, साधु-संत और सनातन धर्म से जुड़े लोग शामिल होंगे। प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा जा सकता है। आयोजकों का कहना है कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं के सम्मान और आस्था से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराना है।

    पूरा विवाद संसद के मानसून सत्र के दौरान उस समय शुरू हुआ जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र और साधु वेश में संसद परिसर पहुंचे। उनके साथ विपक्ष के कुछ अन्य सांसद भी मौजूद थे। विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के उपयोग को लेकर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    हालांकि इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक परंपराओं और संत समाज का अपमान बताया। संगठनों का कहना है कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर साधु वेश धारण कर इस तरह का प्रदर्शन करना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। उनका आरोप है कि इस प्रकार के प्रदर्शन से धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग किया गया है।

    दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि उनका विरोध किसी धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं था, बल्कि राम मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर था। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि सार्वजनिक दान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और इसी मुद्दे को उठाने के लिए सांकेतिक प्रदर्शन किया गया।

    भोपाल में होने वाले विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाने की संभावना है। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद को देखते हुए पुलिस और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

    विश्व हिंदू परिषद ने सभी सनातन धर्मावलंबियों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। ऐसे में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा। भोपाल में होने वाला यह प्रदर्शन अब प्रदेश की राजनीति और सामाजिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।

  • मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर

    मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। एक अगस्त से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के नए दाम लागू हो गए हैं। प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 190 से 194 रुपए तक की कमी की गई है। कीमतों में आई इस गिरावट से व्यापारियों की संचालन लागत कम होने की उम्मीद है और आने वाले समय में ग्राहकों को भी खाने-पीने की सेवाओं में राहत मिल सकती है।

    नई दरों के अनुसार राजधानी भोपाल में अब 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 2743 रुपए में उपलब्ध होगा। वहीं इंदौर में इसकी कीमत घटकर 2846 रुपए रह गई है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भी नई दरें लागू कर दी गई हैं। सबसे महंगा कमर्शियल सिलेंडर रीवा में 2991.50 रुपए का मिलेगा। इसके अलावा सिंगरौली और नरसिंहपुर में इसकी कीमत 2989.50 रुपए तथा सतना में 2989 रुपए निर्धारित की गई है। दूसरी ओर शाजापुर प्रदेश का सबसे सस्ता शहर बन गया है, जहां यह सिलेंडर 2749.50 रुपए में मिलेगा।

    होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ने से उनकी लागत काफी बढ़ गई थी। गैस महंगी होने के कारण कई प्रतिष्ठानों को अपने मेन्यू की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी थी। अब गैस सस्ती होने से कारोबारियों को राहत मिलेगी और यदि कीमतें स्थिर रहीं तो आने वाले समय में ग्राहकों को भी इसका फायदा मिल सकता है।

    कैटरिंग व्यवसाय पर भी गैस की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ा था। कारोबारियों के अनुसार लगभग 500 लोगों के भोजन वाले एक आयोजन की लागत में 45 से 50 हजार रुपए तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो गई थी। इसके चलते कई कैटरर्स ने प्रति प्लेट चार्ज बढ़ा दिए थे। अब कमर्शियल एलपीजी सस्ती होने के बाद आयोजन की लागत में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    व्यापारियों का कहना है कि कुछ महीने पहले ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा था। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई दिया और कई शहरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3300 रुपए से अधिक तक पहुंच गई थी। जबकि इससे पहले यही सिलेंडर लगभग 1800 से 2000 रुपए के बीच उपलब्ध था। अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में कुछ राहत मिलने के बाद कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

    इस बीच घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए गैस कंपनियों ने महत्वपूर्ण सूचना भी जारी की है। कंपनियां उपभोक्ताओं को एसएमएस भेजकर आधार आधारित बायोमेट्रिक ई-केवाईसी कराने की अपील कर रही हैं। निर्धारित समय सीमा तक ई-केवाईसी पूरी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू दर पर एलपीजी सिलेंडर मिलने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं से समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने की अपील कर रही हैं।

    कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आई यह कमी फिलहाल होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। यदि आने वाले महीनों में कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका लाभ कारोबारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है।

  • बैतूल हादसे के बाद बढ़ी चिंता, तीन मानसूनी सिस्टम सक्रिय; मध्य प्रदेश के 12 जिलों में रेड अलर्ट जैसे हालात

    बैतूल हादसे के बाद बढ़ी चिंता, तीन मानसूनी सिस्टम सक्रिय; मध्य प्रदेश के 12 जिलों में रेड अलर्ट जैसे हालात


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। प्रदेश में एक साथ तीन मजबूत मौसम प्रणालियों के प्रभाव से अगले 48 घंटे तक भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने खास तौर पर मालवा और निमाड़ क्षेत्र के साथ इंदौर और उज्जैन संभाग के कई जिलों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदी नाले उफान पर हैं और कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित होने लगा है।

    मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को रतलाम झाबुआ अलीराजपुर और धार जिलों में अति भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा नीमच आगर मालवा उज्जैन देवास बड़वानी खरगोन बुरहानपुर और छिंदवाड़ा में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है। राजधानी भोपाल सहित इंदौर जबलपुर ग्वालियर रायसेन सीहोर विदिशा नर्मदापुरम बैतूल हरदा शाजापुर मंदसौर खंडवा शिवपुरी गुना दतिया मुरैना भिंड सागर रीवा सतना सीधी शहडोल और अन्य जिलों में भी रुक रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई गई है।

    गुरुवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई। भोपाल उज्जैन रतलाम हरदा और खरगोन सहित कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे दर्दनाक घटना बैतूल जिले में हुई जहां मूसलाधार बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल पास की झोपड़ी पर गिर गई। इस हादसे में 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना ने लगातार हो रही बारिश के बीच कमजोर निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    बारिश के बढ़ते दबाव को देखते हुए बैतूल के सारणी स्थित सतपुड़ा बांध के सात गेट इस मानसून में पहली बार खोल दिए गए हैं ताकि अतिरिक्त पानी की निकासी की जा सके। प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और नदी नालों के पास नहीं जाने की सलाह दी है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 14 दशमलव 7 इंच वर्षा दर्ज की गई है जबकि इस समय तक 17 दशमलव 2 इंच बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अभी भी लगभग 15 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। हालांकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से यह अंतर आने वाले दिनों में कम होने की संभावना है।

    प्रदेश के 47 जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इनमें उज्जैन रतलाम धार झाबुआ बैतूल हरदा छिंदवाड़ा जबलपुर सागर रीवा सतना ग्वालियर शिवपुरी और विदिशा जैसे जिले शामिल हैं। दूसरी ओर भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ भिंड मंदसौर और बुरहानपुर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक वर्षा हो चुकी है। देवास में सामान्य से लगभग 29 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई मानसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है और इसी दौरान प्रदेश में कुल वर्षा का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है। यदि अगले दो दिनों तक मौसम विभाग का अनुमान सही साबित होता है तो वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

  • धरती आबा योजना में एमपी का विरोधाभासी प्रदर्शन, बुनियादी सुविधाओं में आगे लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में फिसड्डी

    धरती आबा योजना में एमपी का विरोधाभासी प्रदर्शन, बुनियादी सुविधाओं में आगे लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में फिसड्डी


    भोपाल। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत आदिवासी क्षेत्रों के समग्र विकास को लेकर संसद में पेश हुई रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश की तस्वीर को दो अलग-अलग पहलुओं में सामने ला दिया है। एक ओर राज्य को देश में सबसे अधिक 308 करोड़ 65 लाख रुपए का आवंटन मिला है और कई योजनाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज हुई हैं वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण और जनजातीय छात्रावास जैसे बुनियादी विकास कार्यों में शून्य प्रगति ने गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

    राज्यसभा में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में सबसे अधिक वित्तीय सहायता मिली। इस राशि का उद्देश्य आदिवासी बहुल गांवों में पेयजल आवास सड़क बिजली मोबाइल नेटवर्क शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करना है। हालांकि जमीनी स्तर पर सभी योजनाओं का प्रदर्शन एक समान नहीं रहा।

    नल जल योजना के तहत मध्य प्रदेश ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य के 11309 लक्षित गांवों में से 6112 गांवों तक नल से जल पहुंच चुका है जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर माना गया है। इसी तरह ग्रामीण आवास योजना में भी राज्य को सबसे अधिक 368395 मकानों की स्वीकृति मिली जिनमें से 152309 मकान बनकर तैयार हो चुके हैं। बिजली कनेक्शन के मामले में भी राज्य का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर दर्ज किया गया है और हजारों आदिवासी परिवारों तक बिजली पहुंचाई गई है।

    मोबाइल नेटवर्क विस्तार के क्षेत्र में भी प्रगति देखने को मिली है। नेटवर्क विहीन 776 आदिवासी गांवों में से 571 गांवों तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में संचार व्यवस्था मजबूत हुई है। हालांकि इस क्षेत्र में भी अभी काफी काम बाकी है।

    सबसे बड़ी चिंता सड़क निर्माण और छात्रावास परियोजनाओं को लेकर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में 913 किलोमीटर लंबाई की 345 सड़कें स्वीकृत की गई थीं लेकिन अब तक एक भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो सका। इसी तरह आदिवासी विद्यार्थियों के लिए 104 छात्रावासों की स्वीकृति और करोड़ों रुपए जारी होने के बावजूद एक भी छात्रावास का निर्माण पूरा नहीं हुआ। यह स्थिति दर्शाती है कि शिक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित गति नहीं मिल सकी है।

    इन कमियों के बावजूद राज्य ने एलपीजी गैस कनेक्शन वितरण में पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। स्वीकृत दो लाख से अधिक कनेक्शनों में से लगभग चालीस हजार गैस कनेक्शन आदिवासी परिवारों तक पहुंचाए जा चुके हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन पशुधन विकास और अन्य आजीविका से जुड़ी योजनाओं में भी सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बजट आवंटित करना पर्याप्त नहीं होता बल्कि योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक है। यदि सड़क और छात्रावास जैसी बुनियादी परियोजनाओं में तेजी लाई जाए तो आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है। आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि जिन योजनाओं में काम पूरी तरह रुका हुआ है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए ताकि धरती आबा अभियान का वास्तविक लाभ आदिवासी समाज तक पहुंच सके।

  • Datia by-election: दतिया विधानसभा उपचुनाव में शाम 5 बजे तक 69.36% मतदान

    Datia by-election: दतिया विधानसभा उपचुनाव में शाम 5 बजे तक 69.36% मतदान

    भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार को सुबह 7 बजे से मतदान जारी है। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, शाम 5 बजे तक 69.36 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरे क्षेत्र में मतदान को लेकर उत्साह बना रहा। मतदान शाम 6 बजे तक जारी रहेगा।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी गई।

    मतदान के दौरान कांग्रेस ने सिरोल और जिगना क्षेत्रों में फर्जी मतदान की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराई। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से चर्चा की। वहीं, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव में हार की आशंका होने पर कांग्रेस इस तरह के आरोप लगाती है और यह उसकी हताशा को दर्शाता है।

    उधर, बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पहले मतदान का बहिष्कार किया और “सड़क नहीं तो वोट नहीं” के नारे लगाए। बाद में एसडीएम अशोक अवस्थी की समझाइश के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने मतदान किया।

    इसी बीच रामसागर गांव के एक मतदान केंद्र से पुलिस कांग्रेस के एक पोलिंग एजेंट को अपने साथ ले गई। उस पर मतदाताओं से बातचीत करने का आरोप लगाया गया था। कांग्रेस नेताओं के थाने पहुंचने और विरोध दर्ज कराने के बाद पुलिस ने एजेंट को छोड़ दिया।

    इस उपचुनाव में 23 उम्मीदवार मैदान में हैं, हालांकि सीधा मुकाबला कांग्रेस के घनश्याम सिंह और भाजपा के आशुतोष तिवारी के बीच माना जा रहा है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 3 अगस्त को मतगणना होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    गौरतलब है कि दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को सहकारी ग्रामीण विकास बैंक फर्जीवाड़ा मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट से दो वर्ष की सजा मिलने के बाद रिक्त हुई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 80.2 प्रतिशत मतदान हुआ था। तब राजेंद्र भारती ने भाजपा के नरोत्तम मिश्रा को 7,742 मतों से पराजित किया था। उन्हें 88,977 और नरोत्तम मिश्रा को 81,235 वोट मिले थे, जबकि NOTA को 1,452 मत प्राप्त हुए थे।

  • मध्य प्रदेश में मानसून का प्रचंड रूप भोपाल उज्जैन से लेकर हरदा और खरगोन तक झमाझम बारिश बैतूल में दर्दनाक हादसा

    मध्य प्रदेश में मानसून का प्रचंड रूप भोपाल उज्जैन से लेकर हरदा और खरगोन तक झमाझम बारिश बैतूल में दर्दनाक हादसा


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और एक साथ तीन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश के कई जिलों में लगातार तेज बारिश का दौर जारी है। मानसून ट्रफ साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन के एक साथ सक्रिय होने के कारण राजधानी भोपाल सहित उज्जैन रतलाम हरदा और खरगोन में रुक रुक कर तेज बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने आने वाले घंटों में कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    बारिश के बीच बैतूल जिले से दुखद खबर सामने आई है। बुधवार देर रात गंज थाना क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल उसके पास बनी झोपड़ी पर गिर गई। हादसे के समय झोपड़ी में सो रहे 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसका साथी शनि सिंह घायल हो गया। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से राहत कार्य किया गया तथा घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले चौबीस घंटों में छिंदवाड़ा जिले के हर्रई में लगभग छह इंच बारिश दर्ज की गई जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। इसके अलावा पचमढ़ी में करीब पांच इंच और बैतूल के भैंसदेही क्षेत्र में चार इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। बैतूल जिले के अधिकांश इलाकों में तेज बारिश हुई जबकि छिंदवाड़ा के तामिया नरसिंहपुर के गाडरवारा देवास के खातेगांव और शिवपुरी के पोहरी में भी जोरदार बारिश दर्ज की गई।

    प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी। भिंड जिले में सबसे तेज करीब पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली। इसके अलावा नर्मदापुरम सीहोर इंदौर रायसेन दतिया बड़वानी बैतूल सिवनी जबलपुर उमरिया सागर पन्ना छिंदवाड़ा और सीधी में भी तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। कई स्थानों पर पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की भी खबरें सामने आई हैं।

    राजधानी भोपाल में सुबह से मौसम का मिजाज लगातार बदलता रहा। कभी तेज धूप तो कभी घने बादलों के साथ बारिश का सिलसिला चलता रहा। उज्जैन में भी सुबह से अच्छी बारिश हुई जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हरदा में कई सड़कें पानी से भर गईं जबकि खरगोन में रुक रुक कर बारिश का दौर जारी रहा। रतलाम में दोपहर के समय तेज बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया।

    मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए प्रदेश के सत्रह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। धार देवास बुरहानपुर हरदा और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं उज्जैन शाजापुर सीहोर बड़वानी खरगोन खंडवा रायसेन सागर बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि तीनों मौसम प्रणालियों के सक्रिय रहने के कारण अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। प्रशासन ने नदी नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने भी नागरिकों से बिजली गिरने और तेज बारिश के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

  • भोपाल में किसानों का शक्ति प्रदर्शन, राजधानी दो दिन रही थमी, सरकार ने मानी बड़ी मांगें, आंदोलन हुआ खत्म

    भोपाल में किसानों का शक्ति प्रदर्शन, राजधानी दो दिन रही थमी, सरकार ने मानी बड़ी मांगें, आंदोलन हुआ खत्म


    भोपाल । भोपाल में किसानों के आंदोलन ने दो दिनों तक राजधानी की रफ्तार लगभग थाम दी। मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर नर्मदापुरम हरदा सीहोर समेत कई जिलों से आए हजारों किसानों ने ऐसा दबाव बनाया कि आखिरकार सरकार को बातचीत की मेज पर आना पड़ा। किसान एक के बाद एक 22 बैरिकेड पार करते हुए मुख्यमंत्री निवास से महज एक किलोमीटर पहले तक पहुंच गए। उनके सामने केवल तीन बैरिकेड शेष थे। इसी दौरान सरकार ने वार्ता का रास्ता अपनाया और देर रात आंदोलन समाप्त हो गया।

    आंदोलन के चलते रोशनपुरा न्यू मार्केट और मुख्यमंत्री निवास के आसपास का पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। कई स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी जबकि प्रमुख मार्गों पर स्कूल बसों और गिट्टी से भरे डंपरों को बैरिकेड के रूप में खड़ा कर यातायात रोकने की कोशिश की गई। इसके बावजूद किसानों का काफिला लगातार आगे बढ़ता रहा और पुलिस की अधिकांश रणनीतियां नाकाम साबित हुईं।

    सुबह मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कृषक कल्याण वर्ष के तहत किसानों से संवाद कर समस्याओं का समाधान निकालने की बात कही थी। लेकिन जब प्रदर्शनकारी रोशनपुरा तक पहुंच गए तब सरकार ने कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना विश्वास सारंग और कृष्णा गौर सहित चार मंत्रियों की समिति गठित कर किसान नेताओं से बातचीत शुरू कराई। मंत्रालय में करीब दो घंटे चली चर्चा के बाद सरकार ने कई अहम घोषणाएं कीं।

    सरकार ने मूंग खरीदी की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का फैसला लिया। इसके साथ ही खाद वितरण की ई टोकन व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया। स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 10 अगस्त तक और खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त तक बढ़ा दी गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में खाद वितरण हाईब्रिड व्यवस्था के तहत किया जाएगा जिसमें आधार नंबर मोबाइल नंबर और वितरण का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज रहेगा।

    हालांकि किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है लेकिन उनकी मूल मांग अब भी पूरी नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि उनकी पूरी मूंग की फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जानी चाहिए और वे इस मांग से पीछे नहीं हटेंगे। संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि आगे भी जरूरत पड़ी तो आंदोलन दोबारा किया जाएगा।

    इस आंदोलन के दौरान पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए। नर्मदापुरम हरदा इटारसी और भैरूंदा सहित कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश हुई। करीब 60 किसान नेताओं को हिरासत में भी लिया गया लेकिन बाद में उन्हें छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद किसान बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचने में सफल रहे और सरकार को अंततः वार्ता के लिए मजबूर होना पड़ा।

    इधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सरकार को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि केंद्र ने मध्य प्रदेश को देश में सबसे अधिक 4.54 लाख टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी है। उन्होंने कहा कि पहले स्वीकृत कोटे की पूरी खरीदी की जाए उसके बाद अतिरिक्त कोटे पर विचार किया जाएगा।

    करीब दो दिन तक चले इस आंदोलन के बाद देर रात किसानों ने धरना समाप्त कर दिया और वापस लौटना शुरू किया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन खत्म होने के बाद गुरुवार से स्कूल और सामान्य यातायात पूर्ववत संचालित होंगे।