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  • सावन की शुरुआत पर बाबा महाकाल का अद्भुत दर्शन, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

    सावन की शुरुआत पर बाबा महाकाल का अद्भुत दर्शन, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब


    उज्जैन। सावन मास के शुभारंभ के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। गुरुवार तड़के तीन बजे मंदिर के पट खुलते ही भगवान महाकाल की पारंपरिक भस्म आरती का आयोजन हुआ। सावन के पहले ही दिन बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने के लिए देशभर से आए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटे। पूरा महाकाल धाम हर हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा।

    नियमों के अनुसार सबसे पहले भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध दही घी शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ। अभिषेक के बाद भगवान को भस्म अर्पित की गई और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक परंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

    भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का भव्य राजा स्वरूप श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग चंदन त्रिपुंड रजत चंद्र और सुगंधित गुलाब के पुष्पों से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट रजत शेषनाग मुकुट रुद्राक्ष की माला रजत मुंडमाला और आकर्षक पुष्पहार पहनाए गए। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

    भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में विराजमान सभी देवी देवताओं का भी विधि विधान से पूजन किया गया। प्रथम घंटा बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के साथ पूजा संपन्न हुई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और इस दिव्य दर्शन का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

    सावन के पहले दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए। मंदिर समिति के अनुसार पूरे सावन माह में लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए दर्शन व्यवस्था सुरक्षा और अन्य सुविधाओं को और अधिक मजबूत किया गया है ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान महाकाल मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजन अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। सावन के पहले दिन बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन और भस्म आरती ने श्रद्धालुओं की आस्था को नई ऊर्जा प्रदान की और पूरे महाकाल धाम को शिवमय बना दिया।

  • दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह 7 बजे से मतदान शांतिपूर्ण माहौल में जारी है। मतदान को लेकर मतदाताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह 10 बजे तक 16.33 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। ग्रामीण इलाकों सहित कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मतदान प्रक्रिया शाम 6 बजे तक जारी रहेगी।

    मतदान शुरू होने से पहले तीन मतदान केंद्रों पर ईवीएम से जुड़े उपकरणों में तकनीकी खराबी सामने आई। मतदान केंद्र क्रमांक 186 पर वीवीपैट, 108 पर बैलेटिंग यूनिट (BU) और 290 पर कंट्रोल यूनिट (CU) में समस्या आने पर मॉक पोल के दौरान सभी एजेंटों और कैमरों की मौजूदगी में उपकरण बदल दिए गए। इसके बाद निर्धारित समय पर मतदान शुरू कराया गया। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि तकनीकी खामी का समय रहते समाधान कर लिया गया था, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।

    इधर, बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा लगाते हुए मतदान का बहिष्कार किया। सूचना मिलने पर एसडीएम अशोक अवस्थी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। समझाइश के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने मतदान किया।

    कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने मतदान करने के बाद अपनी जीत का दावा करते हुए कहा कि जनता भाजपा के अहंकार का जवाब देगी। वहीं भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले पीतांबरा पीठ में दर्शन कर प्रदेश और दतिया के विकास, युवाओं को रोजगार तथा भयमुक्त वातावरण की कामना की। इसके बाद उन्होंने मतदान केंद्र क्रमांक 158 पहुंचकर पोलिंग एजेंटों से मुलाकात की और भाजपा के पक्ष में भारी मतदान होने का दावा किया।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर 2 लाख 20 हजार 400 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला ने विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। वहीं, जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि सभी केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रहा है। इस दौरान पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

  • आर्थिक संकट और मानसिक तनाव ने ली दो जिंदगियां इंदौर में मां बेटे की मौत ने झकझोर दिया पूरा शहर

    आर्थिक संकट और मानसिक तनाव ने ली दो जिंदगियां इंदौर में मां बेटे की मौत ने झकझोर दिया पूरा शहर


    इंदौर । इंदौर के परदेशीपुरा क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है जहां आर्थिक तंगी और लंबे समय से मानसिक बीमारी से जूझ रहे मां और बेटे ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया था लेकिन इलाज के दौरान पहले बेटे और फिर मां की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है और एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य तथा आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुलिस के अनुसार 62 वर्षीय इंदिरा और उनके 35 वर्षीय बेटे संजय मंगलवार दोपहर अपने घर से करीब 100 मीटर दूर स्थित एक बगीचे में पहुंचे थे। वहीं दोनों ने जहरीला पदार्थ खा लिया। कुछ समय बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें बेसुध हालत में देखा और परिजनों को सूचना दी। सूचना मिलते ही दोनों को तत्काल एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान बुधवार शाम संजय ने दम तोड़ दिया जबकि गुरुवार सुबह इंदिरा की भी मौत हो गई।

    परदेशीपुरा थाना पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों ने अपनी इच्छा से जहरीला पदार्थ खाया था। अस्पताल में होश आने पर दिए गए शुरुआती बयान में भी मां और बेटे ने किसी पर आरोप नहीं लगाया और स्वयं जहर खाने की बात स्वीकार की थी। पुलिस अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि की जा सके।

    परिजनों ने बताया कि इंदिरा के पति का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। इसके बाद वह अपनी बहन और उनके परिवार के साथ रह रही थीं। परिवार ही उनके रहने खाने और अन्य जरूरतों का पूरा खर्च उठाता था। बेटा संजय भी किसी प्रकार का रोजगार नहीं करता था और लंबे समय से घर पर ही रह रहा था। आर्थिक परेशानियों के साथ दोनों मानसिक बीमारी से भी पीड़ित थे जिसके चलते उनका इलाज बाणगंगा स्थित मानसिक चिकित्सालय में चल रहा था।

    रिश्तेदारों के अनुसार मंगलवार दोपहर एक परिचित ने सूचना दी कि मां और बेटा घर के पास बने बगीचे में बेहोश पड़े हैं। जब परिवार मौके पर पहुंचा तब दोनों की सांसें चल रही थीं। आसपास मौजूद लोगों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों को बचाया नहीं जा सका।

    पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं। मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है और जहरीले पदार्थ के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी तरह की आपराधिक साजिश के संकेत नहीं मिले हैं लेकिन सभी तथ्यों की जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।

    यह घटना समाज के सामने मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक संकट जैसी गंभीर चुनौतियों को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक आर्थिक दबाव और मानसिक बीमारी का समय पर उपचार तथा सामाजिक सहयोग न मिलने पर व्यक्ति गहरे अवसाद में जा सकता है। ऐसे मामलों में परिवार समाज और स्वास्थ्य संस्थाओं की समय पर मदद कई बार बड़ी त्रासदी को टाल सकती है।

  • वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं पर बरसी हैवानियत नाबालिग ने डंडे से पीटा वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप

    वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं पर बरसी हैवानियत नाबालिग ने डंडे से पीटा वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप


    इंदौर । इंदौर के एक वृद्धाश्रम से सामने आया मारपीट का वीडियो लोगों को झकझोर देने वाला है। वीडियो में एक नाबालिग लड़का वृद्ध महिलाओं पर डंडे से हमला करता दिखाई दे रहा है। बीच बचाव करने पहुंची अन्य महिलाओं के साथ भी उसने हाथापाई की। घटना सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन सक्रिय हो गया है तथा मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नाबालिग की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं बताई जा रही है और इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    घटना शहर के मरीमाता पानी की टंकी के पास स्थित महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संचालित वृद्धाश्रम की है। वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि करीब 14 वर्षीय लड़का हाथ में डंडा लेकर एक बुजुर्ग महिला पर लगातार हमला कर रहा है। जब आश्रम में मौजूद अन्य महिलाएं उसे रोकने की कोशिश करती हैं तो वह उनके साथ भी मारपीट करने लगता है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग उठने लगी।

    मामले की जानकारी मिलते ही बाणगंगा थाना पुलिस ने वृद्धाश्रम की संचालिका नीलम दुबे को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पुलिस ने उनसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए आवश्यक निर्देश दिए। फिलहाल पुलिस ने संचालिका को समझाइश देकर छोड़ दिया है जबकि पूरे मामले की जांच जारी है।

    एसीपी रुबीना मिजवानी के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि नाबालिग करीब पांच महीने पहले अपनी मां के साथ वृद्धाश्रम में रहने आया था। उसकी मां गंभीर रूप से झुलस गई थीं और कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। मां के निधन के बाद से लड़का वहीं रह रहा था। पुलिस के अनुसार बुधवार को किसी बात को लेकर उसका एक बुजुर्ग महिला से विवाद हो गया जिसके बाद उसने गुस्से में डंडा उठाकर हमला कर दिया। वीडियो में यह भी दिखाई दे रहा है कि बीच बचाव करने वाले लोगों के साथ भी उसने आक्रामक व्यवहार किया।

    पुलिस का कहना है कि बच्चे की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं होने की जानकारी मिली है इसलिए उसके साथ संवेदनशील तरीके से कार्रवाई की जाएगी। सबसे पहले उसकी विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग कराई जाएगी ताकि उसकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति का सही आकलन किया जा सके। इसके साथ ही वृद्धाश्रम प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि उसे तत्काल बुजुर्गों से अलग रखा जाए ताकि किसी अन्य व्यक्ति की सुरक्षा को खतरा न हो।

    प्रशासन ने यह भी निर्णय लिया है कि नाबालिग को वृद्धाश्रम से हटाकर बाल संरक्षण से जुड़ी संस्था के सुपुर्द किया जाएगा जहां उसकी उचित देखभाल इलाज और काउंसलिंग की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि उसकी परिस्थितियों और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की दिशा में काम करना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    इस घटना ने वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसे संस्थानों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की नियमित निगरानी मानसिक स्वास्थ्य की जांच और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि बुजुर्ग सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन व्यतीत कर सकें। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और वीडियो के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

  • मूंग खरीदी विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल किसानों ने पूछा मुख्यमंत्री रहते बढ़ा कोटा अब कृषि मंत्री बनकर क्यों नहीं मिली राहत

    मूंग खरीदी विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल किसानों ने पूछा मुख्यमंत्री रहते बढ़ा कोटा अब कृषि मंत्री बनकर क्यों नहीं मिली राहत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन भले ही फिलहाल समाप्त हो गया हो लेकिन इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। प्रदेश के किसान अब यह जानना चाहते हैं कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्रीय कृषि मंत्री भी मध्य प्रदेश से ही आते हैं तो फिर समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने में देरी क्यों हुई। किसानों का कहना है कि इसी मुद्दे को लेकर उन्हें तीन दिन तक राजधानी भोपाल में आंदोलन करना पड़ा जबकि समय रहते फैसला लिया जाता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।

    दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने का अनुरोध किया था। हालांकि केंद्र से अतिरिक्त कोटे की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर पात्र किसानों से 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करने का निर्णय लिया और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की।

    किसान संगठनों का आरोप है कि पहले भी ऐसे हालात बनते रहे हैं लेकिन उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र से बातचीत कर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा बढ़वाने में सफल रहते थे। इस बार ऐसा नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ी है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर मूंग उत्पादन होता है लेकिन खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को अपनी उपज का बड़ा हिस्सा खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ता है जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

    भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों का असर किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान निकाल लिया जाता तो किसानों को आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान संगठनों ने यह भी कहा कि सरकारों को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए।

    किसानों की नाराजगी के पीछे आर्थिक कारण भी हैं। इस वर्ष मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि खुले बाजार में किसानों को लगभग 5500 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। शुरुआत में प्रति एकड़ केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही थी जबकि शेष उपज बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही थी। इससे प्रति एकड़ किसानों की आय में हजारों रुपए का अंतर आ रहा था और बड़े किसानों को लाखों रुपए तक का नुकसान होने की आशंका थी।

    इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश सरकार को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आशा योजना के नियमों के अनुसार केंद्र अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादन ही समर्थन मूल्य पर खरीद सकता है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में स्वीकृत कुल खरीदी का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को दिया गया है जो किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है।

    हालांकि प्रदेश सरकार का तर्क है कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक मूंग उत्पादन और खरीदी करने वाला राज्य है इसलिए अन्य राज्यों में उपयोग नहीं हो रहे कोटे का हिस्सा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके। फिलहाल सरकार द्वारा 60 प्रतिशत खरीदी की घोषणा के बाद आंदोलन थम गया है लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं जाएगी तब तक यह मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

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    MadhyaPradesh, MoongProcurement, FarmersProtest, ShivrajSinghChouhan, MSP मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन भले ही फिलहाल समाप्त हो गया हो लेकिन इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। प्रदेश के किसान अब यह जानना चाहते हैं कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्रीय कृषि मंत्री भी मध्य प्रदेश से ही आते हैं तो फिर समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने में देरी क्यों हुई। किसानों का कहना है कि इसी मुद्दे को लेकर उन्हें तीन दिन तक राजधानी भोपाल में आंदोलन करना पड़ा जबकि समय रहते फैसला लिया जाता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।

    दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने का अनुरोध किया था। हालांकि केंद्र से अतिरिक्त कोटे की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर पात्र किसानों से 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करने का निर्णय लिया और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की।

    किसान संगठनों का आरोप है कि पहले भी ऐसे हालात बनते रहे हैं लेकिन उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र से बातचीत कर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा बढ़वाने में सफल रहते थे। इस बार ऐसा नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ी है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर मूंग उत्पादन होता है लेकिन खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को अपनी उपज का बड़ा हिस्सा खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ता है जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

    भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों का असर किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान निकाल लिया जाता तो किसानों को आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान संगठनों ने यह भी कहा कि सरकारों को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए।

    किसानों की नाराजगी के पीछे आर्थिक कारण भी हैं। इस वर्ष मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि खुले बाजार में किसानों को लगभग 5500 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। शुरुआत में प्रति एकड़ केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही थी जबकि शेष उपज बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही थी। इससे प्रति एकड़ किसानों की आय में हजारों रुपए का अंतर आ रहा था और बड़े किसानों को लाखों रुपए तक का नुकसान होने की आशंका थी।

    इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश सरकार को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आशा योजना के नियमों के अनुसार केंद्र अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादन ही समर्थन मूल्य पर खरीद सकता है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में स्वीकृत कुल खरीदी का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को दिया गया है जो किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है।

    हालांकि प्रदेश सरकार का तर्क है कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक मूंग उत्पादन और खरीदी करने वाला राज्य है इसलिए अन्य राज्यों में उपयोग नहीं हो रहे कोटे का हिस्सा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके। फिलहाल सरकार द्वारा 60 प्रतिशत खरीदी की घोषणा के बाद आंदोलन थम गया है लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं जाएगी तब तक यह मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

  • मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान

    मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान


    भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बुधवार को किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बनी रही। मूंग की शत प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर नर्मदापुरम संभाग से पैदल पहुंचे हजारों किसान राजधानी की सड़कों पर डटे रहे। आंदोलन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया। दिनभर चले प्रदर्शन और सरकार के साथ बातचीत के बाद देर रात सरकार ने किसानों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई जिसके बाद आंदोलन धीरे धीरे समाप्त होने लगा और किसानों ने सड़कें खाली करना शुरू कर दीं।

    किसानों का कहना था कि मूंग की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी न हो। इसके अलावा खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था को भी समाप्त करने की मांग उठाई गई। किसानों का आरोप था कि मौजूदा व्यवस्था के कारण समय पर खाद नहीं मिल पाती जिससे खेती प्रभावित होती है और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर डेरा डाल दिया। बाणगंगा चौराहे समेत कई स्थानों पर किसान देर रात तक जमे रहे। सरकार की ओर से मांगें स्वीकार करने की घोषणा के बाद भी प्रदर्शनकारी तत्काल हटने को तैयार नहीं हुए और लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वापस लौटने की प्रक्रिया शुरू की।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की की स्थिति भी बनी। कुछ किसानों के कपड़े फट गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारी पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास पहुंचे जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद उनका जत्था मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रोशनपुरा चौराहे से मुख्यमंत्री निवास तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कई स्थानों पर बसों और डंपरों से बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद किए गए ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने विरोध दर्ज कराने के लिए अलग अलग तरीके अपनाए। कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया जबकि कई प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही दाल बाटी बनाकर भोजन तैयार किया। किसानों के समर्थन में बड़ी संख्या में युवा भी पहुंचे जिन्होंने सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना करते हुए हवन किया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी का सामान्य जनजीवन प्रभावित कर दिया और लोगों को घंटों ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।

    सरकार ने देर रात जारी बयान में किसानों की कई मांगें स्वीकार करने की घोषणा की। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि प्रदेश सरकार अब 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करेगी। नर्मदापुरम सीहोर और हरदा जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी जाएगी। इसके साथ ही स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है जबकि समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त निर्धारित की गई है। सरकार ने किसानों से आंदोलन समाप्त कर अपने घर लौटने की अपील भी की।

    सरकार की घोषणा के बाद अधिकांश किसानों ने देर रात वापस लौटना शुरू कर दिया और राजधानी की सड़कों पर यातायात धीरे धीरे सामान्य होने लगा। हालांकि किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि घोषित फैसलों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का रेड जोन तैयार तीन मौसमी सिस्टम से अगले चार दिन आफत की आशंका बैतूल में दीवार गिरने से मजदूर की मौत

    मध्य प्रदेश में बारिश का रेड जोन तैयार तीन मौसमी सिस्टम से अगले चार दिन आफत की आशंका बैतूल में दीवार गिरने से मजदूर की मौत


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार इस समय मानसून ट्रफ साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन जैसे तीन मजबूत मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं जिसके कारण अगले चार दिनों तक पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इन सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव से कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। इसके चलते प्रशासन को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    राजधानी भोपाल में गुरुवार सुबह से लगातार रुक रुककर बारिश हो रही है। वहीं इंदौर ग्वालियर जबलपुर रीवा सतना और कई अन्य जिलों में भी गरज चमक के साथ बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले चौबीस घंटों में कुछ इलाकों में चार इंच से अधिक बारिश हो सकती है जिससे नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है।

    बारिश के बीच बैतूल जिले से एक दुखद हादसा भी सामने आया है। गंज थाना क्षेत्र में देर रात हुई तेज बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल पास बनी एक झोपड़ी पर गिर गई। हादसे के समय झोपड़ी में सो रहे 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके मलबे में दब गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उनके साथी शनि सिंह को मामूली चोटें आई हैं। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति का जायजा लिया।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अलग अलग स्तर के अलर्ट जारी किए हैं। धार देवास बुरहानपुर हरदा और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उज्जैन शाजापुर सीहोर बड़वानी खरगोन खंडवा रायसेन सागर बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

    लगातार हो रही बारिश का असर प्रदेश के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। बालाघाट में कई नदी नाले उफान पर हैं और ग्रामीण इलाकों के कई मार्ग बंद हो गए हैं। बैहर परसवाड़ा मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हुआ। ग्वालियर और अन्य शहरों में भी जलभराव की स्थिति बनने लगी है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय किया जा रहा है।

    मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार वर्तमान मौसमी सिस्टम दो अगस्त तक सक्रिय बने रहेंगे। इस दौरान प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि लगातार वर्षा से नदी नालों में अचानक जलस्तर बढ़ सकता है। किसानों के लिए यह बारिश फायदेमंद मानी जा रही है लेकिन शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ग्रामीण इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और अनावश्यक जोखिम से बचना बेहद जरूरी होगा।

  • मध्यप्रदेश में बाघों पर मंडरा रहा खतरा सबसे ज्यादा टाइगर होने के बावजूद बढ़ रही मौतें संरक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल

    मध्यप्रदेश में बाघों पर मंडरा रहा खतरा सबसे ज्यादा टाइगर होने के बावजूद बढ़ रही मौतें संरक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल


    मध्यप्रदेश । विश्व बाघ दिवस के अवसर पर जहां पूरे देश में बाघ संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है वहीं देश के सबसे बड़े टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश के सामने एक गंभीर चुनौती भी खड़ी नजर आ रही है। प्रदेश में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन उनके संरक्षण की राह पहले से अधिक कठिन होती जा रही है। जंगलों का घटता दायरा बढ़ती मानवीय गतिविधियां और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव अब बाघों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। यही कारण है कि वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही प्रदेश में 29 बाघों की मौत दर्ज की गई है जिसने वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी से 29 अप्रैल 2026 के बीच हुई 29 बाघों की मौतों में पांच मामलों में बिजली के करंट को कारण माना गया है। एक मामले में शिकार की पुष्टि हुई जबकि अन्य मौतें आपसी संघर्ष बीमारी कुएं में गिरने और अन्य प्राकृतिक कारणों से हुईं। करंट से मौत के अधिकांश मामले मंडला शहडोल उमरिया और सिवनी जैसे वन क्षेत्रों में सामने आए जहां खेतों के आसपास लगाए गए बिजली के तार वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

    राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के आंकड़े भी मध्यप्रदेश के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। वर्ष 2012 से 2025 के बीच पूरे देश में 1581 बाघों की मौत दर्ज की गई जिनमें अकेले 423 मौतें मध्यप्रदेश में हुईं। यह आंकड़ा बताता है कि देश में सबसे अधिक बाघों वाला राज्य होने के साथ साथ सबसे अधिक टाइगर मॉर्टेलिटी भी यहीं दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की बढ़ती संख्या के साथ उनके लिए सुरक्षित आवास और प्राकृतिक कॉरिडोर का विस्तार भी उतना ही जरूरी है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बाघों की सबसे अधिक मौतें आपसी क्षेत्रीय संघर्ष के कारण होती हैं। जब किसी जंगल में बाघों की संख्या बढ़ती है तो वे नए क्षेत्र की तलाश में जंगल से बाहर निकलने लगते हैं। ऐसे में उनका सामना खेतों गांवों और मानव बस्तियों से होता है जहां करंट वाले तार सड़क दुर्घटनाएं और अन्य खतरे उनका इंतजार कर रहे होते हैं। इसके अलावा अवैध शिकार और जहरीले पदार्थों का इस्तेमाल भी बाघों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।

    आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 मध्यप्रदेश के लिए सबसे घातक साबित हुआ जब पूरे वर्ष में 55 बाघों की मौत दर्ज की गई। इससे पहले वर्ष 2024 में 47 और वर्ष 2023 में 45 बाघों की मौत हुई थी। वहीं 2026 के केवल पहले चार महीनों में 29 मौतें दर्ज होना इस बात का संकेत है कि यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह संख्या और बढ़ सकती है। औसतन हर चार दिन में एक बाघ की मौत होना संरक्षण व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है।

    राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े यह भी बताते हैं कि अब बाघ केवल जंगलों के भीतर ही नहीं बल्कि उनके बाहर भी असुरक्षित हो गए हैं। लगभग आधी मौतें टाइगर रिजर्व के बाहर दर्ज हुई हैं। इतना ही नहीं बाघों की खाल और अन्य अंगों की अधिकांश बरामदगी भी संरक्षित क्षेत्रों के बाहर हुई है जिससे स्पष्ट होता है कि वन्यजीव अपराधियों की गतिविधियां अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी बाघ संरक्षण को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि केवल बाघों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उनके प्राकृतिक आवास और टाइगर कॉरिडोर को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन होना चाहिए ताकि जंगलों और वन्यजीवों पर अनावश्यक दबाव न बढ़े।

    वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे का मानना है कि बाघों की मौत रोकने के लिए वन विभाग को जमीनी स्तर पर निगरानी मजबूत करनी होगी। प्रशिक्षित वन अधिकारियों की संख्या बढ़ाने मुखबिर तंत्र को सक्रिय करने स्थानीय ग्रामीणों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने और वन्यजीव अपराधों में दोष सिद्धि की दर बढ़ाने की जरूरत है। उनका कहना है कि कानून का सख्ती से पालन और त्वरित कार्रवाई ही शिकारियों और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगा सकती है।

    विश्व बाघ दिवस पर मध्यप्रदेश के सामने सबसे बड़ा संदेश यही है कि केवल बाघों की संख्या बढ़ाना सफलता नहीं बल्कि उन्हें सुरक्षित जीवन देना ही वास्तविक संरक्षण है। यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे प्राकृतिक कॉरिडोर संरक्षित होंगे और मानव तथा वन्यजीवों के बीच संतुलन कायम रहेगा तभी टाइगर स्टेट की पहचान भविष्य में भी मजबूती के साथ कायम रह सकेगी।

  • दस साल बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया विवादों में गृह विभाग के अधिकारियों ने खोला मोर्चा नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप

    दस साल बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया विवादों में गृह विभाग के अधिकारियों ने खोला मोर्चा नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में लगभग एक दशक बाद शुरू हुई शासकीय पदोन्नति प्रक्रिया अब बड़े विवाद का कारण बनती दिखाई दे रही है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पदोन्नति नियम 2025 के क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पहले वाणिज्यिक कर विभाग में नियमों के पालन को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं और अब गृह विभाग के अधिकारियों ने भी पदोन्नति प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई है और उनकी मनमानी व्याख्या कर बड़ी संख्या में पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित कर दिया गया है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो मामला न्यायालय तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।

    शिकायत करने वाले अधिकारियों ने गृह विभाग की सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपते हुए कहा है कि पदोन्नति नियम 2025 के स्पष्ट प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों के बजाय अलग तरीके से पात्रता तय की गई जिससे सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के हजारों कर्मचारी और अधिकारी प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि यदि नियमों का सही तरीके से पालन किया जाता तो कई और अधिकारी पदोन्नत होने के पात्र होते।

    सबसे अधिक विवाद पुलिस विभाग में हुई पदोन्नतियों को लेकर सामने आया है। राज्य सरकार के अनुसार पुलिस विभाग में करीब 25 हजार पदोन्नतियां की गई हैं और इसे प्रशासनिक दृष्टि से बड़ी उपलब्धि माना गया है। मुख्यमंत्री भी सार्वजनिक मंचों से इस प्रक्रिया की सराहना कर चुके हैं। लेकिन अब कई अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि विभागीय अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की और बाद में त्रुटियों की जानकारी होने के बावजूद उन्हें सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

    शिकायतकर्ताओं के अनुसार लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 की कंडिका 6 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी चयन वर्ष की विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक समय पर नहीं हो पाती तो अगली बैठक में सबसे पहले उसी लंबित चयन वर्ष के लिए अलग चयन सूची तैयार की जानी चाहिए। इसके बाद वर्तमान और भविष्य की रिक्तियों के लिए नई चयन सूची बनाई जानी चाहिए। अधिकारियों का आरोप है कि अधिकांश विभागों ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया और वर्ष 2025 की रिक्तियों के लिए निर्धारित प्रक्रिया की बजाय बाद के वर्षों की गोपनीय चरित्रावली और अन्य अभिलेखों के आधार पर पदोन्नति आदेश जारी कर दिए।

    सामान्य प्रशासन विभाग ने 19 जून 2025 को पदोन्नति नियम लागू किए थे और 30 जून 2025 को जारी स्पष्टीकरण में यह भी स्पष्ट किया था कि अलग अलग चयन वर्षों के लिए किस अवधि की गोपनीय चरित्रावली को आधार बनाया जाएगा। विशेष पदोन्नति समिति के लिए वर्ष 2022 से 2023 और उससे पहले की निर्धारित अवधि की सीआर पर विचार किया जाना था जबकि अन्य चयन वर्षों के लिए अलग समय सीमा तय की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि इन दिशा निर्देशों का पालन नहीं होने से पूरी प्रक्रिया विवादों में आ गई है।

    पदोन्नति से वंचित अधिकारियों ने मांग की है कि पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कर नियमों के अनुरूप संशोधित आदेश जारी किए जाएं ताकि किसी भी पात्र अधिकारी के साथ अन्याय न हो। उनका कहना है कि यदि विभाग समय रहते आवश्यक सुधार नहीं करता तो वे न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होंगे।

    लंबे समय बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया से कर्मचारियों और अधिकारियों को जहां बड़ी उम्मीदें थीं वहीं अब उस पर उठ रहे सवाल प्रशासन के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और संबंधित विभाग इस विवाद का किस तरह समाधान निकालते हैं इस पर हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों की नजर टिकी हुई है।

  • बाघों की दहाड़ से गूंजेगा मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को मिलेगी नई मजबूती

    बाघों की दहाड़ से गूंजेगा मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को मिलेगी नई मजबूती


    भोपाल । अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश ने एक बार फिर देश के टाइगर स्टेट के रूप में अपनी मजबूत पहचान दोहराई। भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विश्वास जताया कि प्रदेश में बाघों की संख्या जल्द ही एक हजार के करीब पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 की बाघ गणना के अनुसार मध्यप्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे और जिस गति से संरक्षण कार्य चल रहे हैं उसे देखते हुए अगली गणना में यह आंकड़ा लगभग एक हजार तक पहुंच सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संरक्षण केवल पर्यावरण बचाने का अभियान नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला भी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश आज देश में बाघ संरक्षण का सबसे मजबूत केंद्र बन चुका है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ इंसानों के सबसे निकट प्राकृतिक वातावरण में रहते हैं तो वह भोपाल और उसके आसपास का क्षेत्र है। यह प्रदेश के समृद्ध जंगलों और सफल वन प्रबंधन की पहचान है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है जिससे जंगलों का प्राकृतिक संतुलन बना रहे और वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन व्यतीत कर सकें।

    डॉ मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार केवल बाघों तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य वन्यजीवों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की नदियों में घड़ियालों का संरक्षण और पुनर्वास अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। पहले प्रदेश में छोड़े गए घड़ियालों का अधिक लाभ दूसरे राज्यों को मिलता था लेकिन अब ऐसी रणनीति बनाई जा रही है जिससे घड़ियाल मध्यप्रदेश की नदियों में ही सुरक्षित रह सकें और उनकी संख्या लगातार बढ़े।

    गुरु पूर्णिमा के अवसर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है बल्कि अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति सदियों से प्रकृति के सम्मान और संरक्षण की शिक्षा देती आई है। महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ों में जीवन होने की अवधारणा भारत की प्राचीन संस्कृति का हिस्सा रही है और आज आधुनिक विज्ञान भी इस सत्य को स्वीकार कर चुका है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ओरछा स्थित माता महालक्ष्मी मंदिर की भव्यता की सराहना करते हुए कहा कि शासन के सभी विभाग महत्वपूर्ण हैं लेकिन वन विभाग के साथ काम करना उन्हें विशेष संतोष देता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार अन्य राज्यों के साथ वन्यजीवों के आदान प्रदान और संरक्षण को लेकर भी सकारात्मक पहल कर रही है। हाथियों की आवाजाही और उससे होने वाली जनहानि को कम करने के लिए किए गए प्रयासों के भी अच्छे परिणाम सामने आए हैं।

    इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन ने कहा कि स्वस्थ जंगल की सबसे बड़ी पहचान वहां सुरक्षित बाघ और उनके शावक होते हैं। उनका कहना था कि बाघों का संरक्षण केवल एक वन्यजीव की रक्षा नहीं बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र और मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी और स्थानीय समुदाय मिलकर इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के लिए उपलब्ध कराए गए नए वाहनों का लोकार्पण किया और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। साथ ही विभागीय प्रकाशनों का विमोचन किया गया और वन्यजीव प्रबंधन पर आधारित वृत्तचित्रों के टीजर जारी किए गए। वन सुरक्षा समितियों ईको विकास समितियों ग्राम वन समितियों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन कर्मियों को सम्मानित भी किया गया। स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में भी देश में वन्यजीव संरक्षण का अग्रणी राज्य बने रहने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।