Tag: MadhyaPradesh

  • पहली बारिश में बह गई करोड़ों के पुल की सुरक्षा दीवार निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच

    पहली बारिश में बह गई करोड़ों के पुल की सुरक्षा दीवार निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच


    देवास । देवास जिले के होशियारी और मकोडिया गांवों को जोड़ने वाला करोड़ों रुपए की लागत से बना स्टॉप डैम कम पुल पहली ही बारिश के बाद सवालों के घेरे में आ गया है। मानसून की शुरुआती बारिश में ही पुल के दोनों ओर बनाई गई प्रोटेक्शन वॉल बह गई जबकि उसके पीछे भरी गई मिट्टी भी कई स्थानों से कट गई। इस घटना ने निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुल पर आवागमन जारी है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में तेज बारिश या बाढ़ का दबाव बढ़ा तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

    मौके पर निरीक्षण के दौरान पुल के दोनों सिरों पर सुरक्षा दीवार के कई हिस्से क्षतिग्रस्त मिले। जहां मजबूत प्रोटेक्शन वॉल बनाई गई थी वहां अब केवल कंक्रीट के अवशेष और बह चुकी मिट्टी दिखाई दे रही है। पुल के एप्रोच मार्ग के पास भराव मिट्टी के बह जाने से कई स्थानों पर गड्ढेनुमा स्थिति बन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तक नदी में बड़ा उफान भी नहीं आया है। केवल सामान्य बारिश और शिप्रा नदी में छोड़े गए पानी के बहाव से ही यह नुकसान हुआ है। ऐसे में यदि मानसून के अगले दौर में जलस्तर बढ़ा तो पुल की नींव तक खतरा पहुंच सकता है।

    ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इरफान पटेल धीरज बना गोलू वर्मा टेपू शेख रंजन सिंह चौहान लाखन सिंह राठौर नवाब शेख और शेर मोहम्मद पटेल सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। उनका आरोप है कि सरियों और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता कमजोर रही जिसके कारण पहली ही बारिश में सुरक्षा दीवार टिक नहीं सकी। ग्रामीणों के अनुसार मार्च में भूमिपूजन के बाद जल्दबाजी में करीब 28 दिनों के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया था। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए की इस परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    मामला सामने आने के बाद हाटपीपल्या विधायक मनोज चौधरी ने पुल का निरीक्षण किया और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर निर्माण गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है और यदि जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जहां कमी पाई गई है उसे तत्काल दूर कराया जाएगा ताकि भविष्य में किसी तरह की दुर्घटना की आशंका न रहे।

    सिंचाई विभाग की एसडीओ नेहा दुबे ने बताया कि पुल की मुख्य संरचना पूरी तरह सुरक्षित है और नुकसान केवल प्रोटेक्शन वॉल तथा उसके पीछे की भराव मिट्टी तक सीमित है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अभी जारी है और ग्वालियर की कटारे कंस्ट्रक्शन कंपनी इस परियोजना का निर्माण कर रही है। एजेंसी का अंतिम भुगतान भी अभी नहीं किया गया है। विभाग के अनुसार क्षतिग्रस्त हिस्से की दोबारा मरम्मत कराई जाएगी तथा पूरी प्रोटेक्शन वॉल नए सिरे से बनाई जाएगी। बारिश का दौर थमने के बाद शेष निर्माण कार्य भी पूरा कराया जाएगा।

    फिलहाल इस पूरे मामले में ग्रामीणों और विभाग के दावों के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। एक ओर ग्रामीण निर्माण में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी ओर विभाग मुख्य पुल को सुरक्षित बताते हुए केवल सुरक्षा दीवार की मरम्मत की बात कह रहा है। अब सभी की नजर प्रस्तावित तकनीकी जांच और मानसून के अगले दौर पर टिकी है क्योंकि तेज बारिश ही यह तय करेगी कि पुल का निर्माण वास्तव में कितना मजबूत और सुरक्षित है।

  • माता टेकरी में हादसे की आहट कुमार गंधर्व द्वार से टूटे पत्थर एक श्रद्धालु घायल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

    माता टेकरी में हादसे की आहट कुमार गंधर्व द्वार से टूटे पत्थर एक श्रद्धालु घायल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप


    देवास । देवास की आस्था का प्रमुख केंद्र माता टेकरी शनिवार सुबह उस समय अचानक चर्चा का विषय बन गया जब रपट मार्ग पर स्थित कुमार गंधर्व प्रवेश द्वार से पत्थर टूटकर नीचे गिर पड़े। इस अप्रत्याशित घटना में एक व्यक्ति घायल हो गया जबकि संयोग से बड़ा हादसा टल गया। जिस समय यह घटना हुई उस दौरान द्वार के आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी थी और कुछ लोग पास में खड़े होकर चाय पी रहे थे। यदि उस समय वहां अधिक भीड़ होती तो स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह अचानक प्रवेश द्वार के ऊपरी हिस्से से लाल पत्थरों के कई टुकड़े टूटकर नीचे आ गिरे। किसी को संभलने का मौका भी नहीं मिला और एक बड़ा पत्थर नीचे खड़े व्यक्ति के पैर पर गिर गया जिससे उसे चोट लग गई। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायल की मदद की और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। घटना के बाद कुछ देर के लिए वहां अफरा तफरी का माहौल बन गया और श्रद्धालु भयभीत नजर आए।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि माता टेकरी देवास का प्रमुख धार्मिक स्थल है जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती है। ऐसे में प्रवेश द्वार जैसी महत्वपूर्ण संरचना से पत्थर गिरना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह की संरचनाओं की नियमित जांच और मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।

    घटना के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रवेश द्वार और रपट मार्ग की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही जिन स्थानों पर पत्थर ढीले हैं या संरचना कमजोर हो चुकी है वहां तत्काल मरम्मत कराई जाए ताकि किसी भी श्रद्धालु की जान जोखिम में न पड़े। लोगों ने यह भी कहा कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

    माता टेकरी न केवल देवास बल्कि आसपास के जिलों के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है। फिलहाल इस घटना में केवल एक व्यक्ति घायल हुआ है लेकिन इसे चेतावनी के रूप में देखते हुए प्रशासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रवेश द्वार की मजबूती की जांच कराएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करेगा ताकि श्रद्धालु बिना किसी भय के माता टेकरी के दर्शन कर सकें।

  • सरदार सरोवर वन टाइम सेटलमेंट बना सियासी मुद्दा क्या मध्य प्रदेश ने घाटे का सौदा किया या बचाए 1268 करोड़

    सरदार सरोवर वन टाइम सेटलमेंट बना सियासी मुद्दा क्या मध्य प्रदेश ने घाटे का सौदा किया या बचाए 1268 करोड़


    मध्य प्रदेश। करीब तीन दशक से लंबित सरदार सरोवर डैम विवाद पर आखिरकार वन टाइम सेटलमेंट हो गया लेकिन इस समझौते ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जिस राज्य ने अपनी हजारों हेक्टेयर जमीन डूबने और सैकड़ों गांवों के विस्थापन के बदले गुजरात से 7669 करोड़ रुपए का मुआवजा मांगा था उसे अब यह दावा पूरी तरह छोड़ना पड़ा है। इतना ही नहीं राज्य सरकार को गुजरात को 231 करोड़ 80 लाख रुपए का भुगतान भी करना होगा। यही वजह है कि इस समझौते को लेकर सरकार और विपक्ष आमने सामने हैं।

    सरदार सरोवर परियोजना नर्मदा नदी पर गुजरात में बनाई गई थी लेकिन इसके बैकवाटर का सबसे बड़ा असर मध्य प्रदेश पर पड़ा। डैम की ऊंचाई बढ़ने के बाद प्रदेश के 192 गांव और करीब 21 हजार हेक्टेयर भूमि स्थायी रूप से डूब क्षेत्र में आ गई। इसके बाद नए भूमि अधिग्रहण कानून के आधार पर मध्य प्रदेश ने गुजरात से 7669 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की थी। दूसरी ओर गुजरात पुराने दावों के आधार पर सीमित भुगतान की बात करता रहा और निर्माण लागत में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी का मुद्दा उठाता रहा। इसी विवाद के कारण मामला वर्षों तक अटका रहा।

    दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में चार राज्यों के बीच हुए समझौते में पुरानी फाइल को हमेशा के लिए बंद करने पर सहमति बनी। इसके तहत मध्य प्रदेश ने अपना पूरा मुआवजा दावा वापस ले लिया जबकि गुजरात की ओर से निर्माण लागत में प्रदेश की करीब 1500 करोड़ रुपए की संभावित देनदारी घटाकर केवल 231.80 करोड़ रुपए तय कर दी गई।

    यही फैसला अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने प्रदेश के किसानों आदिवासियों और विस्थापित परिवारों के हितों से समझौता किया है। विपक्ष का कहना है कि हजारों करोड़ रुपए के दावे को छोड़ना प्रदेश के अधिकारों का नुकसान है और सरकार को इस पूरे समझौते पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।

    वहीं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और सरकार इस समझौते को प्रदेश के हित में लिया गया व्यावहारिक फैसला बता रहे हैं। उनका कहना है कि गुजरात किसी भी स्थिति में 7669 करोड़ रुपए देने को तैयार नहीं था। ऐसे में लंबे कानूनी विवाद को समाप्त करते हुए राज्य ने 1500 करोड़ रुपए की संभावित देनदारी को घटाकर केवल 231.80 करोड़ रुपए में निपटा लिया जिससे सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय बोझ टल गया।

    सरकार यह भी तर्क दे रही है कि सरदार सरोवर परियोजना से मध्य प्रदेश को दीर्घकालिक लाभ लगातार मिल रहे हैं। परियोजना से बनने वाली जल विद्युत का सबसे बड़ा हिस्सा प्रदेश को मिलता है। साथ ही लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई और कई बड़े शहरों की पेयजल आपूर्ति भी इसी परियोजना पर निर्भर है। इसलिए सरकार इस समझौते को भविष्य के हितों और व्यावहारिक समाधान के रूप में देख रही है।

    हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब उन विस्थापित परिवारों को लेकर है जिनके पुनर्वास और मुआवजे की जिम्मेदारी अब पूरी तरह मध्य प्रदेश सरकार पर आ गई है। चूंकि गुजरात से कोई मुआवजा राशि नहीं मिलेगी इसलिए राज्य सरकार को ही अपने संसाधनों से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और भुगतान की व्यवस्था करनी होगी। ऐसे में यह समझौता कानूनी विवाद का अंत जरूर है लेकिन इसके आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव आने वाले समय में भी चर्चा का विषय बने रहेंगे।

  • मध्य प्रदेश के युवाओं का महाकुंभ इंदौर में आज जुटेंगे 5 हजार युवा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव देंगे विकास का मंत्र

    मध्य प्रदेश के युवाओं का महाकुंभ इंदौर में आज जुटेंगे 5 हजार युवा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव देंगे विकास का मंत्र


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और नेतृत्व क्षमता को नई दिशा देने के उद्देश्य से 11 जुलाई को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में माय यूथ माय प्राइड कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। वन स्टेट वन जनरेशन वन संकल्प थीम पर आधारित इस कॉन्क्लेव में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग पांच हजार युवा शामिल होंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विशेष रूप से उपस्थित रहकर युवाओं को संबोधित करेंगे और विकसित, आत्मनिर्भर तथा समृद्ध मध्य प्रदेश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेंगे।

    सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इस कॉन्क्लेव में युवाओं को प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार और सुझाव रखने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे कार्यक्रम में पहुंचकर युवाओं से संवाद करेंगे और उन्हें प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने का संदेश देंगे। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रेरित करना नहीं, बल्कि उन्हें विकास के वास्तविक एजेंडा से जोड़ना है।

    कॉन्क्लेव में शिक्षा, कौशल विकास, खेल, स्टार्टअप, एमएसएमई, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, संस्कृति, पर्यटन और जनभागीदारी जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े युवा भाग लेंगे। विभिन्न संवाद सत्रों और कार्यशालाओं के माध्यम से प्रतिभागी अपने क्षेत्रों की चुनौतियों, संभावनाओं और समाधान पर चर्चा करेंगे। इससे युवाओं को नीति निर्माण और विकास योजनाओं में अपनी भूमिका समझने का अवसर मिलेगा।

    कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता पांच समानांतर विषयगत कार्यशालाएं होंगी। इन कार्यशालाओं में युवा समूहों में बैठकर व्यवहारिक और क्रियान्वयन योग्य सुझाव तैयार करेंगे। इन सुझावों को संकलित कर प्रदेश के युवाओं का सामूहिक युवा संकल्प तैयार किया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के भविष्य के विकास का विजन प्रस्तुत करेगा। आयोजकों के अनुसार यह संकल्प केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि युवाओं की आकांक्षाओं और जिम्मेदारियों का साझा घोषणापत्र बनेगा।

    कॉन्क्लेव को युवाओं के लिए आकर्षक और प्रेरक बनाने के लिए कई विशेष गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। इसमें मोटर साइकिल और साइकिल रैली, प्रेरणादायी उद्बोधन, युवा उपलब्धि सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, संवादात्मक सत्र, म्यूजिक स्टेज, इंदौरी फूड स्ट्रीट और सामूहिक युवा संकल्प कार्यक्रम शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य युवाओं में उत्साह, रचनात्मकता और सहभागिता की भावना को बढ़ाना है।

    कार्यक्रम के अंत में पांच हजार युवा एक साथ विकसित मध्य प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेंगे। आयोजकों का मानना है कि यह कॉन्क्लेव प्रदेश के युवाओं को एक साझा मंच प्रदान करेगा जहां वे अपने विचार, ऊर्जा और सपनों को राज्य के विकास से जोड़ सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही है क्योंकि उनके मार्गदर्शन में युवाओं को प्रदेश की विकास यात्रा में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश मिलेगा।

    इंदौर में आयोजित होने वाला यह कॉन्क्लेव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के युवाओं की सामूहिक शक्ति, संकल्प और भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है।

  • मध्य प्रदेश में मानसून का बदला मिजाज फिलहाल रिमझिम बारिश का दौर अगले हफ्ते कई जिलों में फिर भारी बारिश के आसार

    मध्य प्रदेश में मानसून का बदला मिजाज फिलहाल रिमझिम बारिश का दौर अगले हफ्ते कई जिलों में फिर भारी बारिश के आसार


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच अब मौसम कुछ राहत देने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रहेगा और कहीं भी अत्यधिक वर्षा की संभावना नहीं है। हालांकि यह राहत ज्यादा लंबी नहीं होगी क्योंकि अगले सप्ताह एक नया मौसम तंत्र सक्रिय होने के साथ ही कई जिलों में फिर से भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। ऐसे में लोगों को एक बार फिर सतर्क रहने की जरूरत होगी।

    मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल सक्रिय मानसूनी सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। इसी वजह से ग्यारह जुलाई से तेरह जुलाई तक अधिकांश जिलों में रुक रुक कर हल्की बारिश होने का अनुमान है। शनिवार को भोपाल इंदौर उज्जैन जबलपुर ग्वालियर सहित प्रदेश के सभी जिलों में गरज चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। कई स्थानों पर चालीस से पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की भी संभावना जताई गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पाकिस्तान के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है जिसका असर अगले सप्ताह मध्य प्रदेश के मौसम पर दिखाई देगा। चौदह जुलाई से कई जिलों में फिर तेज बारिश की संभावना बन रही है। यदि नया सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हुआ तो प्रदेश के कई हिस्सों में एक बार फिर भारी वर्षा देखने को मिल सकती है।

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल तेज बारिश का रुकना खरीफ फसलों के लिए राहत की खबर है। पिछले कुछ दिनों में कई जिलों में लगातार भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया था जिससे फसलों में गलन और नुकसान की आशंका बढ़ने लगी थी। अब हल्की बारिश और मौसम में संतुलन रहने से फसलों को बेहतर बढ़वार मिलने की उम्मीद है।

    बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार जून महीने में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी लेकिन जुलाई के शुरुआती दिनों ने पूरी तस्वीर बदल दी है। प्रदेश में अब तक लगभग नौ दशमलव पांच इंच बारिश हो चुकी है जो सामान्य से अधिक है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से काफी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है जबकि पूर्वी हिस्से के कुछ जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है।

    प्रदेश के लगभग तीस जिलों में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें भोपाल इंदौर देवास हरदा उज्जैन रतलाम राजगढ़ सीहोर शाजापुर ग्वालियर गुना खंडवा खरगोन और विदिशा जैसे जिले शामिल हैं। वहीं अनूपपुर बालाघाट जबलपुर कटनी रीवा सतना सागर और शहडोल सहित कई जिलों में अभी भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज हुई है।

    देवास इस समय प्रदेश का सबसे अधिक बारिश वाला जिला बन गया है जहां अब तक करीब अठारह इंच पानी गिर चुका है। वहीं इंदौर और सीहोर में चौदह इंच से अधिक तथा भोपाल में तेरह इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर आलीराजपुर सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है जहां अब तक केवल लगभग सवा दो इंच वर्षा हुई है।

    मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई का महीना प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानसूनी महीना माना जाता है क्योंकि सामान्य तौर पर पूरे सीजन की लगभग चालीस प्रतिशत बारिश इसी महीने होती है। ऐसे में अगले कुछ दिनों का मौसम किसानों और आम लोगों दोनों के लिए बेहद अहम रहने वाला है।

  • कार्यवाहक प्रमोशन पर चला सरकार का बड़ा फैसला हजारों पुलिसकर्मियों की बढ़ी मुश्किलें मूल पद पर लौटाने की तैयारी शुरू

    कार्यवाहक प्रमोशन पर चला सरकार का बड़ा फैसला हजारों पुलिसकर्मियों की बढ़ी मुश्किलें मूल पद पर लौटाने की तैयारी शुरू


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में नए पदोन्नति नियम लागू होने के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले कई वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे करीब पंद्रह हजार पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों पर अब मूल पद पर लौटने का खतरा मंडरा रहा है। सरकार द्वारा मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम दो हजार पच्चीस लागू किए जाने के बाद पुलिस मुख्यालय ने नियमित विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके साथ ही कार्यवाहक पदोन्नति के सभी मामलों की चरणबद्ध समीक्षा शुरू कर दी गई है जिससे पूरे विभाग में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है।

    दरअसल वर्ष दो हजार सोलह के बाद लंबे समय तक नियमित पदोन्नतियां नहीं हो सकीं। विभाग में रिक्त पदों और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए वर्ष दो हजार इक्कीस से बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को कार्यवाहक पदोन्नति देकर उच्च पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब नए नियम लागू होने के बाद इन सभी मामलों का दोबारा परीक्षण किया जा रहा है ताकि नियमित पदोन्नति केवल पात्र और योग्य कर्मचारियों को ही मिल सके।

    इस प्रक्रिया की पहली बड़ी कार्रवाई पांढुर्णा जिले में देखने को मिली है जहां कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में काम कर रहे बत्तीस पुलिसकर्मियों से प्रभार वापस लेकर उन्हें फिर से आरक्षक पद पर पदस्थ कर दिया गया। पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी आदेश के बाद सभी कर्मचारियों ने अपने मूल पद पर कार्यभार संभाल लिया। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई नए पदोन्नति नियमों और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है।

    सूत्रों के अनुसार नियमित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक से पहले प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी के पिछले पांच वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। इसमें वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन अनुशासनात्मक कार्रवाई निलंबन विभागीय दंड और न्यायालयों में लंबित मामलों का भी मूल्यांकन किया जा रहा है। जिन कर्मचारियों का रिकॉर्ड निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होगा उन्हें नियमित पदोन्नति नहीं मिलेगी और उनका कार्यवाहक प्रभार भी समाप्त कर दिया जाएगा।

    पुलिस मुख्यालय के प्रारंभिक आकलन के अनुसार फिलहाल करीब एक हजार अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं जिन पर इस प्रक्रिया का सीधा प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है। विभागीय अधिकारियों का अनुमान है कि आगे चलकर प्रभावित होने वालों की संख्या पंद्रह हजार तक पहुंच सकती है।

    वर्षों से उच्च पदों पर कार्य कर रहे कई पुलिसकर्मियों का मानना है कि यदि उन्हें फिर से मूल पद पर भेजा गया तो इससे उनका मनोबल प्रभावित होगा और कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और नियम आधारित होगी ताकि योग्य कर्मचारियों को ही स्थायी पदोन्नति का लाभ मिल सके।

    बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा सभी विभागों से पदोन्नति प्रक्रिया की जानकारी मांगे जाने के बाद पुलिस विभाग सहित कई विभागों में लंबित पदोन्नति मामलों पर तेजी से काम शुरू हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर नरोत्तम को झटका शिवराज की कसम टूटी और अफसरों का हुआ शुगर टेस्ट

    मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर नरोत्तम को झटका शिवराज की कसम टूटी और अफसरों का हुआ शुगर टेस्ट


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों लगातार ऐसे घटनाक्रमों की गवाह बन रही है जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सबसे बड़ी चर्चा दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर रही जहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट मिलने की पूरी उम्मीद थी लेकिन पार्टी ने अंतिम समय में आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताकर सभी को चौंका दिया। लंबे समय से चुनावी तैयारियों में जुटे नरोत्तम मिश्रा लगातार क्षेत्र में सक्रिय थे और जनता के बीच पहुंचकर समर्थन जुटा रहे थे। टिकट की घोषणा के बाद उनके समर्थकों में मायूसी साफ दिखाई दी और राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

    भारतीय जनता पार्टी के फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि संगठन में अंतिम निर्णय नेतृत्व का होता है और आखिरी समय तक किसी भी नाम पर मुहर लगना तय नहीं माना जा सकता। यही कारण है कि दतिया का चुनाव अब नए समीकरणों के साथ आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    राजनीतिक हलकों में दूसरी बड़ी चर्चा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राकेश यादव को लेकर रही। दिलचस्प बात यह रही कि एक दिन पहले तक जिन राकेश यादव को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पहचानने से इनकार कर रहे थे अगले ही दिन वही भाजपा में शामिल हुए और उन्हें प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक नई बहस छेड़ दी और विपक्ष को भी भाजपा पर तंज कसने का मौका मिल गया।

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी एक बार फिर चर्चा में रहे। गंजबासौदा दौरे के दौरान समर्थकों ने उनका फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया। खास बात यह रही कि शिवराज पहले कई बार सार्वजनिक मंचों से नेताओं के अत्यधिक स्वागत और मालाओं से परहेज की अपील कर चुके हैं। ऐसे में उनका मालाओं से लदा हुआ वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया। हालांकि समर्थकों का कहना है कि यह जनता का स्नेह है जिसे ठुकराना संभव नहीं होता।

    प्रशासनिक स्तर पर रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेंद्र सिंह की पहल भी सुर्खियों में रही। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने देखा कि कई अधिकारी और कर्मचारी बार बार बाहर जा रहे हैं। पूछताछ में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने मौके पर ही मेडिकल टीम बुलाकर सभी की शुगर जांच कराई। जांच में कई कर्मचारियों का शुगर स्तर सामान्य से अधिक मिला। इस पहल को स्वास्थ्य जागरूकता और नियमित जांच अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इधर राजधानी भोपाल के मंत्रालय का पांचवें फ्लोर का एक कमरा भी चर्चाओं में बना हुआ है। बताया जा रहा है कि पिछले ढाई वर्षों में वहां बैठने वाले कई अधिकारियों का लगातार तबादला हो चुका है। इसी वजह से अब यह कमरा लंबे समय से खाली पड़ा है। कुछ लोग इसे महज संयोग मान रहे हैं जबकि कुछ इसे वास्तु से जोड़कर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की बातों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है लेकिन सियासी और प्रशासनिक गलियारों में यह विषय लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बना हुआ है।

  • हवाई पट्टी इलाके में मिला युवक का शव: घर से निकला था, फिर कैसे पहुंचा मौके तक? जांच में जुटी पुलिस

    हवाई पट्टी इलाके में मिला युवक का शव: घर से निकला था, फिर कैसे पहुंचा मौके तक? जांच में जुटी पुलिस


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में हवाई पट्टी क्षेत्र स्थित पानी से भरे गड्ढे में मिले युवक के शव की पहचान 20 वर्षीय जाहिद खान के रूप में हो गई है। युवक बुधवार शाम घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। गुरुवार शाम उसका शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार मृतक जाहिद खान, मोमीन मोहल्ला वार्ड क्रमांक-21 का निवासी था। परिजनों ने बताया कि वह बुधवार शाम घर से बाहर गया था। देर रात तक उसके वापस नहीं लौटने पर परिवार ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

    गुरुवार शाम देहात थाना क्षेत्र के हवाई पट्टी इलाके में पानी से भरे गड्ढे में एक युवक का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया। बाद में परिजनों ने उसकी पहचान जाहिद खान के रूप में की।

    परिवार के मुताबिक जाहिद मिर्गी की बीमारी से पीड़ित था। हालांकि, वह शहर से दूर हवाई पट्टी क्षेत्र तक कैसे पहुंचा और घटना के समय उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति मौजूद था या नहीं, इस संबंध में फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    देहात थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे। साथ ही घटनास्थल और युवक की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह हादसा था या इसके पीछे कोई अन्य कारण है।

    फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की गहन जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • शुक्रवार भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत चंद्र-त्रिशूल मुकुट से हुआ अलौकिक श्रृंगार

    शुक्रवार भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत चंद्र-त्रिशूल मुकुट से हुआ अलौकिक श्रृंगार


    इंदौर । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। निर्धारित परंपरा के अनुसार सबसे पहले मंदिर के कपाट खोले गए और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन की प्रक्रिया संपन्न हुई। इसके बाद भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक कर विशेष श्रृंगार किया गया।

    भस्म आरती की शुरुआत सभा मंडप में वीरभद्रजी के कान में स्वस्तिवाचन से हुई। घंटी बजाकर भगवान से आज्ञा लेने के बाद सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए। गर्भगृह के कपाट खुलने पर पुजारियों ने भगवान का पूर्व श्रृंगार उतारकर विधि-विधान से पूजन किया। जलाभिषेक के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। इसके पश्चात कर्पूर आरती की गई।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार रजत चंद्र, त्रिशूल मुकुट और रजत आभूषणों से किया गया। उन्हें रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पमालाएं धारण कराई गईं। साथ ही भांग, चंदन, ड्राय फ्रूट और पवित्र भस्म अर्पित की गई। अंत में फल और मिष्ठान का भोग लगाकर आरती संपन्न हुई।

    नंदी हाल में भी नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। भस्म आरती के दौरान महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।

    भस्म आरती में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की। पूरे मंदिर परिसर में शिवभक्ति, वैदिक मंत्रों और हर-हर महादेव के जयघोष से आध्यात्मिक वातावरण गूंज उठा।

  • करोड़ों खर्च, पहली बारिश में ध्वस्त पुल: देवास में निर्माण कार्य पर सवाल, वीडियो वायरल

    करोड़ों खर्च, पहली बारिश में ध्वस्त पुल: देवास में निर्माण कार्य पर सवाल, वीडियो वायरल


    देवास । मध्य प्रदेश के देवास जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बने एक पुल की गुणवत्ता पहली ही तेज बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। होशियारी और मकोडिया गांवों के बीच करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पुल का एक हिस्सा बारिश के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि पुल का निर्माण कार्य महज तीन-चार महीने पहले ही पूरा हुआ था, लेकिन पहली ही बारिश का दबाव वह नहीं झेल सका।

    गुरुवार को पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया। वीडियो में पुल का एक हिस्सा बहा हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस पुल के बनने से वर्षों पुरानी आवागमन की समस्या दूर होने की उम्मीद थी, लेकिन पहली ही बारिश में पुल का हिस्सा बह जाने से लोगों का भरोसा टूट गया है। उनका आरोप है कि निर्माण में गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण करोड़ों रुपये की परियोजना इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त हो गई।

    ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुल निर्माण में यदि किसी प्रकार की लापरवाही या घटिया सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    फिलहाल प्रशासन की ओर से पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारणों की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नुकसान अत्यधिक बारिश और तेज जलप्रवाह के कारण हुआ या निर्माण कार्य में किसी प्रकार की तकनीकी खामी रही। वहीं, पुल क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र के लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है और वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है।