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  • इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक: इंडियामार्ट से एसी गैस खरीदने और बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर 1.72 लाख उड़ाए

    इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक: इंडियामार्ट से एसी गैस खरीदने और बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर 1.72 लाख उड़ाए


    इंदौर । इंदौर में साइबर अपराधियों ने एक ही दिन में दो अलग-अलग वारदातों को अंजाम देकर दो लोगों से कुल 1.72 लाख रुपए की ठगी कर ली। एक मामले में इंडियामार्ट पर एसी गैस बेचने के नाम पर ऑटो पार्ट्स कारोबारी से 82 हजार रुपए हड़प लिए गए, जबकि दूसरे मामले में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को उसके बेटे की रेप केस में गिरफ्तारी का डर दिखाया गया और जमानत के नाम पर 90 हजार रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। दोनों मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला छोटी ग्वालटोली थाना क्षेत्र का है। रानी बाग निवासी ऑटो पार्ट्स व्यापारी पवनदीप सिंह खनूजा ने एसी गैस खरीदने के लिए इंडियामार्ट पर सप्लायर का नंबर तलाशा। वहां उन्हें श्रुति इंटरप्राइजेज के नाम से कुलदीप अग्रवाल का मोबाइल नंबर मिला। बातचीत के बाद आरोपी ने व्हाट्सएप पर एसी गैस के 220 टिन का इनवॉइस और फोटो भेजकर 82 हजार रुपए ऑनलाइन जमा कराने को कहा।

    व्यापारी ने भरोसा कर मुंबई स्थित बैंक खाते में भुगतान कर दिया। इसके बाद आरोपी ने गति इंटरप्राइजेज के नाम से एक बिल्टी भी भेजी, लेकिन काफी समय तक सामान नहीं पहुंचा। जांच करने पर पता चला कि भेजी गई बिल्टी एआई तकनीक से तैयार की गई फर्जी दस्तावेज थी। जब आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया, तब व्यापारी को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने बैंक में भुगतान रोकने का प्रयास किया और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।

    दूसरी घटना कनाड़िया थाना क्षेत्र की है। राज वर्मा के पास व्हाट्सएप कॉल कर खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उनके बेटे को रेप के आरोप में तीन अन्य युवकों के साथ गिरफ्तार किया गया है। ठग ने बेटे को जेल से बचाने के लिए तत्काल तीन लाख रुपए की मांग की और डर का माहौल बनाकर पैसे भेजने का दबाव बनाया।

    घबराए राज वर्मा ने अपने पास केवल 90 हजार रुपए होने की बात कही। इसके बाद ठगों ने बताए गए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करा ली। कुछ देर बाद जब उन्होंने अपने बेटे से संपर्क किया तो पता चला कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

    दोनों मामलों में साइबर हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों के आधार पर संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों की पहचान में जुटी है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान केवल सत्यापित विक्रेताओं से ही लेनदेन करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अग्रिम भुगतान न करें और यदि कोई पुलिस, सीबीआई या अन्य अधिकारी बनकर फोन पर गिरफ्तारी या जमानत के नाम पर पैसे मांगे तो पहले संबंधित व्यक्ति या स्थानीय पुलिस से पुष्टि जरूर करें। ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन धोखाधड़ी की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में दें।

  • नाना पटवारी ने मानी पुरानी ड्रग्स की लत, बोले- रिहैब के बाद छोड़ा नशा; कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध

    नाना पटवारी ने मानी पुरानी ड्रग्स की लत, बोले- रिहैब के बाद छोड़ा नशा; कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। शुक्रवार को इंदौर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाना पटवारी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वे करीब तीन साल पहले तक ड्रग्स का सेवन करते थे, लेकिन रिहैब सेंटर में इलाज के बाद उन्होंने नशा पूरी तरह छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि आज उनका ड्रग तस्करी से कोई संबंध नहीं है और उनकी सबसे बड़ी गलती सिर्फ इतनी है कि वे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई हैं।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाना पटवारी ने दावा किया कि ड्रग्स मामले में गिरफ्तार आरोपियों से उनका कोई लेन-देन या संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि वे अपनी कार की सर्विसिंग कराने गए थे, तभी पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। उनके अनुसार थाने में उनसे केवल सामान्य पूछताछ की गई, लेकिन हिरासत में लेने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे दिन उन्हें अलग-अलग स्थानों पर घुमाया गया और देर रात बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।

    नाना पटवारी ने कहा कि उनकी कार संजय कौशल उर्फ रॉनी के सर्विस सेंटर पर सर्विस होती है और वहीं काम करने वाले कुछ लोगों के बारे में पुलिस ने उनसे पूछताछ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस स्कॉर्पियो वाहन की चर्चा हो रही है, वह उनकी नहीं बल्कि संजय कौशल की है और उसमें मिले किसी भी सामान से उनका कोई संबंध नहीं है।

    इस पूरे मामले को कांग्रेस ने राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को निशाना बना रही है। उनका कहना है कि नाना पटवारी का ड्रग तस्करी प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें केवल राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से हिरासत में लिया गया।

    दूसरी ओर इंदौर पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह जांच के आधार पर की गई। डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक राजेंद्र नगर क्षेत्र से ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार दो आरोपियों इरफान खान उर्फ गोलू चंदेरी और संजय कौशल उर्फ रॉनी ने पूछताछ के दौरान नाना पटवारी और मानव गंगवानी का नाम लिया था। इसी आधार पर दोनों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि फिलहाल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है और जांच में जिसकी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    नाना पटवारी पहले भी कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनके खिलाफ हत्या के प्रयास सहित लगभग दस आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आ चुकी है। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया था। वहीं वर्ष 2025 में जमीन विवाद और 2018 में महिला से कथित अभद्रता के मामले में भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। उनका नाम खुशी कूलवाल आत्महत्या मामले की जांच के दौरान भी सामने आया था, हालांकि उस मामले में उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।

    फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

  • खेती छोड़ बना ड्रग तस्कर, मंदसौर से ब्राउन शुगर लाकर इंदौर में करता था सप्लाई, 11 लाख का माल जब्त

    खेती छोड़ बना ड्रग तस्कर, मंदसौर से ब्राउन शुगर लाकर इंदौर में करता था सप्लाई, 11 लाख का माल जब्त


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के अभियान के तहत इंदौर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। खजराना थाना पुलिस ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए 110 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है। बरामद मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 11 लाख रुपए आंकी गई है। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया है कि वह मंदसौर से सस्ते दामों पर ब्राउन शुगर खरीदकर इंदौर में ऊंचे दामों पर बेचता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध कारोबार के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

    पुलिस के अनुसार मुखबिर से सूचना मिली थी कि बायपास स्थित वाघेला गार्डन के पास एक युवक बड़ी मात्रा में ब्राउन शुगर लेकर ग्राहकों की तलाश में घूम रहा है। सूचना मिलते ही खजराना थाना पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की और संदिग्ध युवक को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 110 ग्राम ब्राउन शुगर और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

    गिरफ्तार आरोपी की पहचान 28 वर्षीय रामकिशन उर्फ रामनिवास गिरी निवासी ग्राम काटिया थाना सुवासरा जिला मंदसौर के रूप में हुई है। वह आठवीं तक पढ़ा है और खेती का काम करता था। पूछताछ में उसने बताया कि वह स्वयं भी नशे का आदी है। इसी लत और जल्दी पैसा कमाने की चाहत ने उसे नशे के कारोबार में धकेल दिया। आरोपी ने स्वीकार किया कि वह मंदसौर के कोटड़ी क्षेत्र से ब्राउन शुगर खरीदकर इंदौर लाता था और यहां अधिक कीमत पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाता था।

    थाना प्रभारी मनोज सिंह सेंधव ने बताया कि आरोपी को पुलिस रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य ब्राउन शुगर की सप्लाई चेन का पता लगाना और उन लोगों की पहचान करना है जो इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं। पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन की भी जांच कर रही है ताकि उसके संपर्क में रहने वाले सप्लायरों और ग्राहकों तक पहुंचा जा सके।

    इंदौर पुलिस का कहना है कि शहर में नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास नशे की खरीद-फरोख्त या संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। जनसहयोग और सख्त कार्रवाई के जरिए ही युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाया जा सकता है और समाज को इस गंभीर खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू

    मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू


    भोपाल । भोपाल के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान को लेकर जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक शुक्रवार को राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गई। मास्टर प्लान के लंबे समय से लागू नहीं होने के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने बैठक में तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजधानी के विकास का सबसे अहम दस्तावेज ही लागू नहीं हो पा रहा है तो विकास समीक्षा बैठकों का क्या औचित्य रह जाता है। इसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के हस्तक्षेप से माहौल और अधिक गरमा गया और बैठक में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।

    विवाद के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी बात सांसद से हो रही थी ऐसे में बीच में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसे है। दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि कुछ समय तक बैठक का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है और नाराज होकर बैठक से बाहर निकल गए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने दोनों नेताओं को रोकने और समझाने का प्रयास किया लेकिन वे वापस नहीं लौटे।

    बैठक के बाद सांसद आलोक शर्मा ने भी स्वीकार किया कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात कर मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह किया जाएगा। उनका मानना है कि राजधानी के भविष्य के विकास और बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित बनाने के लिए मास्टर प्लान सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

    बैठक के दौरान केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना भी जनप्रतिनिधियों के निशाने पर रही। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने परियोजना की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़े निर्माण तो हुए लेकिन नागरिक सुविधाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई इमारतों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और दशहरा मैदान जैसी महत्वपूर्ण जगहों का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी के बड़े व्यावसायिक प्लॉट छोटे किए जाएं ताकि उनकी बिक्री आसान हो और परियोजना की आय बढ़ सके।

    महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइट जैसी सामान्य समस्याओं का समाधान भी समय पर नहीं हो पाता जिससे आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इस पर कलेक्टर एवं स्मार्ट सिटी बोर्ड के अध्यक्ष प्रियंक मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि अलग बैठक कर सभी समस्याओं की समीक्षा की जाएगी और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाने का सुझाव दिया ताकि सभी विभाग मिलकर बेहतर तरीके से काम कर सकें। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं तो अधिकारियों को उन्हें गंभीरता से लेकर जल्द समाधान करना चाहिए।

    बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन को लेकर भी पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार संभागायुक्त को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाए जबकि भोपाल और सीहोर के कलेक्टर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के पास भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी बैठक में प्रमुखता से उठाई गई।

  • मोहन सरकार का बड़ा फैसला तहसीलदार और नायब तहसीलदार को मिले सब रजिस्ट्रार के अधिकार 48 लाख परिवारों को मिलेगा फायदा

    मोहन सरकार का बड़ा फैसला तहसीलदार और नायब तहसीलदार को मिले सब रजिस्ट्रार के अधिकार 48 लाख परिवारों को मिलेगा फायदा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण आबादी की भूमि पर वर्षों से काबिज लाखों परिवारों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 के तहत तहसीलदार प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार को सब रजिस्ट्रार के अधिकार प्रदान कर दिए हैं। इस फैसले से प्रदेश के 48 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को मुफ्त रजिस्ट्री कराने में सुविधा मिलेगी और उन्हें सरकारी कार्यालयों के बार बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

    सरकार का उद्देश्य ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि का वैधानिक स्वामित्व दिलाना है ताकि भविष्य में वे अपनी संपत्ति का कानूनी उपयोग कर सकें। इसके साथ ही राज्य सरकार ने स्टाम्प शुल्क पंजीयन शुल्क और पंचायत उपकर पूरी तरह माफ करने का फैसला भी लागू कर दिया है। इन सभी रियायतों का वित्तीय भार सरकार स्वयं उठाएगी। अनुमान है कि इस योजना पर सरकार को लगभग 3800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ वहन करना पड़ेगा।

    पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में आवश्यक अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं। नई व्यवस्था के अनुसार अब केवल उप पंजीयक कार्यालय ही नहीं बल्कि तहसीलदार प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी स्वामित्व योजना के अंतर्गत आने वाली भूमि की रजिस्ट्री कर सकेंगे। इससे प्रदेश में मौजूद सीमित संख्या वाले उप पंजीयक कार्यालयों पर दबाव कम होगा और ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रजिस्ट्री की सुविधा मिल जाएगी।

    सरकार का मानना है कि जब ग्रामीणों के नाम पर भूमि का विधिवत पंजीयन हो जाएगा तो उन्हें बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से आसानी से ऋण मिल सकेगा। इसका उपयोग वे मकान निर्माण छोटे व्यवसाय कृषि कार्य और अन्य आर्थिक गतिविधियों में कर सकेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ लोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आने की उम्मीद है।

    योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक आयुक्त कोष एवं लेखा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी और एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे। समिति समय समय पर योजना की समीक्षा करेगी दिशा निर्देश जारी करेगी और प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आवश्यक निर्णय लेगी।

    सरकार ने योजना के प्रचार प्रसार जनजागरूकता और आवश्यक मुद्रण कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए हैं। राजस्व विभाग को योजना से जुड़े परिपत्र जारी करने और आवश्यक स्पष्टीकरण देने का अधिकार दिया गया है ताकि पूरे प्रदेश में प्रक्रिया एक समान और पारदर्शी तरीके से लागू हो सके।

    इस फैसले को ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकार मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुफ्त रजिस्ट्री और स्थानीय स्तर पर पंजीयन की सुविधा मिलने से लाखों परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।

    English Tags:
    MadhyaPradesh, SwamitvaYojana, PropertyRights, LandRegistration, RuralDevelopment

  • वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विरोध ताजुल मसाजिद से सरकार तक पहुंचेगा मुस्लिम समाज का संदेश

    वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विरोध ताजुल मसाजिद से सरकार तक पहुंचेगा मुस्लिम समाज का संदेश


    भोपाल । मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजधानी भोपाल में एक बड़े प्रतीकात्मक विरोध के रूप में सामने आने जा रहा है। शुक्रवार को ऐतिहासिक ताजुल मसाजिद में शहरभर से आने वाले नमाजी हाथों पर काली पट्टी बांधकर जुमे की नमाज अदा करेंगे और सरकार के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आपत्ति सरकार तक पहुंचाना है।

    जानकारी के अनुसार भोपाल के अलग अलग इलाकों से बड़ी संख्या में लोग जुमे की नमाज के लिए ताजुल मसाजिद पहुंचेंगे। नमाज के दौरान सभी लोग काली पट्टी बांधकर वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले के खिलाफ अपनी असहमति व्यक्त करेंगे। आयोजकों का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार के निर्णय के विरोध में है।

    वक्फ बोर्ड के गठन के बाद से राजधानी में विरोध लगातार तेज होता गया है। सबसे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इस नियुक्ति का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया था। इसके बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर वर्तमान वक्फ बोर्ड को भंग करने और नियुक्ति संबंधी आदेश वापस लेने की मांग भी की गई। इस घटनाक्रम के बाद विरोध का दायरा लगातार बढ़ता गया।

    इसी बीच निकाह काजी मोहम्मद मआज़ खान नोमानी नदवी ने दीनी तालीमी बोर्ड के महासचिव पद से इस्तीफा देकर अपने वैचारिक मतभेद सार्वजनिक किए। उन्होंने वक्फ बोर्ड के कुछ सदस्यों के समर्थन पर असहमति जताते हुए अपने पद से अलग होने का फैसला लिया। उनके इस्तीफे के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया।

    पिछले दो दिनों के दौरान कई उलेमा और मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के सदर मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता के नाम पर वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम प्रतिनिधियों को शामिल कर रही है तो यही व्यवस्था अन्य धार्मिक संस्थाओं में भी समान रूप से लागू की जानी चाहिए। नायब सदर मुफ्ती जिया कासमी ने भी इसी तरह की मांग उठाते हुए सभी धार्मिक संस्थाओं के लिए समान नीति अपनाने की बात कही।

    विवाद उस समय और गहरा गया जब मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के नव नियुक्त अध्यक्ष सनव्वर पटेल के स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के बाद कई धार्मिक पदाधिकारियों और संगठनों ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई। कुछ ने वीडियो संदेश जारी किए तो कई लोगों ने बयान देकर अपने विरोध को दर्ज कराया।

    आज ताजुल मसाजिद में होने वाला काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह अब तक हुए ज्ञापनों प्रदर्शन इस्तीफों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पहला बड़ा सामूहिक और प्रतीकात्मक आयोजन होगा। प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है जबकि आयोजकों ने सभी लोगों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है।

  • भोपाल में दर्दनाक घटना लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे बुजुर्ग ने किया सुसाइड

    भोपाल में दर्दनाक घटना लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे बुजुर्ग ने किया सुसाइड


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है जहां लंबे समय से गंभीर बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे 60 वर्षीय बुजुर्ग ने घर के भीतर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है जबकि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि मृतक पिछले कई महीनों से पैरालिसिस की बीमारी से पीड़ित थे और इसी कारण गहरे अवसाद में चले गए थे।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान मनोहर लाल रैकवार पिता मोहनलाल रैकवार निवासी बेटा गांव बैरागढ़ के रूप में हुई है। वह पेशे से प्लंबर थे और अपने परिवार के साथ रहते थे। करीब आठ महीने पहले उन्हें पैरालिसिस का अटैक आया था जिसके बाद उनके शरीर का एक हिस्सा ठीक से काम नहीं कर रहा था। बीमारी के चलते उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई थी और सामान्य काम भी दूसरों की मदद के बिना कर पाना मुश्किल हो गया था।

    परिजनों के अनुसार लगातार बिगड़ती सेहत और शारीरिक असहायता ने उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान कर दिया था। धीरे धीरे वह अवसाद की स्थिति में पहुंच गए थे और अधिकतर समय घर में ही रहते थे। बीमारी के कारण उनका सामाजिक और पेशेवर जीवन भी प्रभावित हो गया था जिससे उनकी चिंता और बढ़ती चली गई।

    शुक्रवार सुबह जब उनकी पत्नी नींद से उठकर घर की पहली मंजिल पर पहुंचीं तो उन्होंने मनोहर लाल को पाइप के सहारे बनाए गए फंदे पर लटका देखा। यह दृश्य देखकर उन्होंने तुरंत शोर मचाया जिसके बाद आसपास रहने वाले रिश्तेदार और पड़ोसी मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर उन्हें नीचे उतारा लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना तत्काल बैरागढ़ थाना पुलिस को दी गई।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में बीमारी और उससे उपजे मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या की आशंका सामने आई है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि गंभीर बीमारी केवल शरीर को ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक चलने वाली शारीरिक समस्याएं कई बार व्यक्ति को अवसाद और निराशा की ओर धकेल देती हैं। ऐसे समय में परिवार और समाज का भावनात्मक सहयोग तथा समय पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से मानसिक तनाव अवसाद या निराशा से जूझ रहा हो तो उसकी भावनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए और उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। समय पर संवाद और चिकित्सकीय सहायता कई बार किसी की जिंदगी बचा सकती है।

  • हाईकोर्ट सख्त, आदेश नहीं मानने पर ACS मनीष रस्तोगी समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ वारंट

    हाईकोर्ट सख्त, आदेश नहीं मानने पर ACS मनीष रस्तोगी समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ वारंट


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और लगातार गैरहाजिर रहने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए बड़ा संदेश दिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने अवमानना मामले में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनीष रस्तोगी, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेलवेन्द्रम और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक अजय गुप्ता के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने तीनों अधिकारियों को 15 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

    यह मामला कृषि विभाग, जबलपुर के सेवानिवृत्त उप संचालक देवदत्त विश्वकर्मा की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के अनुसार 30 जून 2023 को सेवानिवृत्ति के समय उनसे 2.10 लाख रुपए की वसूली की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 8 मई 2024 को आदेश दिया था कि वसूली गई पूरी राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस की जाए। आरोप है कि स्पष्ट न्यायिक आदेश के बावजूद संबंधित विभाग ने राशि वापस नहीं की, जिसके चलते अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद तीनों वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए। एसीएस मनीष रस्तोगी की ओर से न तो कोई अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुआ और न ही व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए कोई आवेदन दिया गया। वहीं अन्य दो अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता तो मौजूद रहे, लेकिन अधिकारी स्वयं कोर्ट नहीं पहुंचे। अदालत ने इसे न्यायालय के आदेशों की गंभीर अवहेलना माना।

    हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि तीनों अधिकारियों के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी किए जाएं। साथ ही संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से इन वारंटों की तामील सुनिश्चित की जाए, ताकि अगली सुनवाई पर सभी अधिकारी अदालत में उपस्थित हों।

    सुनवाई के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी एस.के. निगम और संभागीय पेंशन अधिकारी नमिता भी प्रारंभिक रूप से कोर्ट में उपस्थित नहीं थे। इस पर न्यायालय ने राज्य शासन के अधिवक्ता को तत्काल दोनों अधिकारियों से फोन पर संपर्क कर अदालत में बुलाने के निर्देश दिए। बाद में उनके उपस्थित होने पर अदालत ने उनसे भी यह स्पष्ट करने को कहा कि पहले से आदेश होने के बावजूद वे समय पर कोर्ट में क्यों नहीं पहुंचे।

    हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 तय करते हुए निर्देश दिए हैं कि 8 मई 2024 के मूल आदेश का पूर्ण अनुपालन करते हुए विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति भी अनिवार्य रहेगी। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसे मामलों में और कठोर रुख अपनाया जा सकता है।

  • उमरिया में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रक में घुसी कार; सरपंच, हेड कॉन्स्टेबल समेत 4 की मौत, युवती की CPR से बची जान

    उमरिया में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रक में घुसी कार; सरपंच, हेड कॉन्स्टेबल समेत 4 की मौत, युवती की CPR से बची जान


    उमरिया मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में गुरुवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे ने एक पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। नेशनल हाईवे-43 पर तेज रफ्तार अर्टिगा कार सड़क किनारे खड़े ट्रक में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार चार लोगों की मौके पर या इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल एक युवती की अस्पताल में समय रहते सीपीआर देने से सांसें लौट आईं। उसकी हालत गंभीर होने पर उसे जबलपुर रेफर किया गया है।

    यह हादसा कोतवाली थाना क्षेत्र की सिविल लाइन चौकी के पास भरौला स्थित सिद्ध बाबा क्षेत्र में तड़के करीब तीन से चार बजे के बीच हुआ। पुलिस के अनुसार कार में सवार सभी लोग अनूपपुर जिले के लीला गांव के निवासी थे और परिवार की युवती खुशबू मार्को को परीक्षा दिलाने के लिए चित्रकूट जा रहे थे।

    हादसे में लीला गांव के सरपंच कुलपत सिंह, उनकी पत्नी और हेड कॉन्स्टेबल सविता सिंह मार्को, तीन वर्षीय पुत्र रुद्र प्रताप तथा कुलपत सिंह के भाई की बेटी प्रियंका सिंह की मौत हो गई। वहीं खुशबू मार्को गंभीर रूप से घायल हो गई। डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल पहुंचने तक उसकी सांसें थम चुकी थीं, लेकिन तत्काल सीपीआर देने के बाद उसकी धड़कनें फिर से चलने लगीं। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए जबलपुर रेफर किया गया।

    हादसे के बाद कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए पुलिस और 108 एंबुलेंस की टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक व्यक्ति कार के अंदर बुरी तरह फंसा हुआ था, जिसे रेस्क्यू कर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बाद में इलाज के दौरान एक अन्य घायल ने भी दम तोड़ दिया।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार के कारण चालक का वाहन पर नियंत्रण खोना हादसे की वजह माना जा रहा है। पुलिस दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    कार चालक ददन सिंह से जब पुलिस और मीडिया ने घटना के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसे हादसे की कोई जानकारी याद नहीं है। उसके कपड़ों पर खून के निशान थे और वह बार-बार यही पूछता रहा कि आखिर क्या हुआ और वह अस्पताल कैसे पहुंचा।

    इस दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत से गांव में शोक का माहौल है, जबकि घायल युवती के जल्द स्वस्थ होने की सभी कामना कर रहे हैं।

  • 'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव

    'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र में मंगलवार रात उस समय दहशत फैल गई, जब देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर एक तेंदुआ रिहायशी इलाके में पहुंच गया। तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे दो बाइक सवारों पर झपट्टा मारा और इसके बाद एक मकान के बाथरूम में जा घुसा। इस दौरान घर में मौजूद बुजुर्ग महिला मुन्नीबाई और उनका मानसिक रूप से बीमार पोता करीब एक घंटे तक घर के भीतर कैद रहने को मजबूर हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग देर रात तक दहशत में रहे।

    मुन्नीबाई ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह घर में खाना बना रही थीं। तभी बाहर अचानक शोर सुनाई दिया। जब उन्होंने दरवाजे से झांककर देखा तो सामने तेंदुआ बैठा था। यह नजारा देखते ही उन्होंने तुरंत घर के दोनों दरवाजे बंद कर दिए। उस समय उनका मानसिक रूप से बीमार पोता भी घर में मौजूद था। दोनों करीब एक घंटे तक घर से बाहर नहीं निकल सके। बाहर लोगों की आवाजें और चीख-पुकार सुनाई देती रही, लेकिन डर के कारण बाहर जाने की हिम्मत नहीं हुई।

    जानकारी के अनुसार यह घटना बिचौली मर्दाना इलाके में रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे एक बाइक सवार पर हमला किया। युवक किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला। इसके बाद तेंदुआ भागते हुए पास के एक मकान में घुस गया और बाथरूम के पास जाकर बैठ गया। इससे पूरे परिवार में दहशत फैल गई।

    घटना की सूचना मिलते ही आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन तेंदुए के डर से कोई भी घर के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। लोगों ने तुरंत पुलिस और वन विभाग को सूचना दी। हालांकि वन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही तेंदुआ बाथरूम के पास बनी दीवार फांदकर बाहर निकल गया और श्रीजी वैली की दिशा में चला गया।

    वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे घर की तलाशी ली। जब अधिकारियों को पूरी तरह भरोसा हो गया कि तेंदुआ वहां से जा चुका है, तब परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली।

    स्थानीय निवासी अभिषेक जाधव ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि कोई बड़ी बिल्ली होगी, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि वह तेंदुआ है। इसके बाद लोगों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को सतर्क किया और पुलिस तथा वन विभाग को सूचना दी।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में वन विभाग की नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

    वन विभाग के रेंजर योगेश के अनुसार तेंदुआ संभवतः देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर आबादी वाले इलाके में आ गया था। घटनास्थल जंगल से करीब आधा किलोमीटर दूर है और इस क्षेत्र में पहले भी तेंदुओं की आवाजाही होती रही है। विभाग का मानना है कि तेंदुआ रात में ही वापस जंगल की ओर लौट गया और बुधवार सुबह तक उसके दोबारा दिखाई देने की कोई सूचना नहीं मिली।