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  • 'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव

    'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र में मंगलवार रात उस समय दहशत फैल गई, जब देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर एक तेंदुआ रिहायशी इलाके में पहुंच गया। तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे दो बाइक सवारों पर झपट्टा मारा और इसके बाद एक मकान के बाथरूम में जा घुसा। इस दौरान घर में मौजूद बुजुर्ग महिला मुन्नीबाई और उनका मानसिक रूप से बीमार पोता करीब एक घंटे तक घर के भीतर कैद रहने को मजबूर हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग देर रात तक दहशत में रहे।

    मुन्नीबाई ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह घर में खाना बना रही थीं। तभी बाहर अचानक शोर सुनाई दिया। जब उन्होंने दरवाजे से झांककर देखा तो सामने तेंदुआ बैठा था। यह नजारा देखते ही उन्होंने तुरंत घर के दोनों दरवाजे बंद कर दिए। उस समय उनका मानसिक रूप से बीमार पोता भी घर में मौजूद था। दोनों करीब एक घंटे तक घर से बाहर नहीं निकल सके। बाहर लोगों की आवाजें और चीख-पुकार सुनाई देती रही, लेकिन डर के कारण बाहर जाने की हिम्मत नहीं हुई।

    जानकारी के अनुसार यह घटना बिचौली मर्दाना इलाके में रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे एक बाइक सवार पर हमला किया। युवक किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला। इसके बाद तेंदुआ भागते हुए पास के एक मकान में घुस गया और बाथरूम के पास जाकर बैठ गया। इससे पूरे परिवार में दहशत फैल गई।

    घटना की सूचना मिलते ही आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन तेंदुए के डर से कोई भी घर के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। लोगों ने तुरंत पुलिस और वन विभाग को सूचना दी। हालांकि वन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही तेंदुआ बाथरूम के पास बनी दीवार फांदकर बाहर निकल गया और श्रीजी वैली की दिशा में चला गया।

    वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे घर की तलाशी ली। जब अधिकारियों को पूरी तरह भरोसा हो गया कि तेंदुआ वहां से जा चुका है, तब परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली।

    स्थानीय निवासी अभिषेक जाधव ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि कोई बड़ी बिल्ली होगी, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि वह तेंदुआ है। इसके बाद लोगों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को सतर्क किया और पुलिस तथा वन विभाग को सूचना दी।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में वन विभाग की नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

    वन विभाग के रेंजर योगेश के अनुसार तेंदुआ संभवतः देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर आबादी वाले इलाके में आ गया था। घटनास्थल जंगल से करीब आधा किलोमीटर दूर है और इस क्षेत्र में पहले भी तेंदुओं की आवाजाही होती रही है। विभाग का मानना है कि तेंदुआ रात में ही वापस जंगल की ओर लौट गया और बुधवार सुबह तक उसके दोबारा दिखाई देने की कोई सूचना नहीं मिली।

  • इंदौर में दौड़ती बस बनी आग का गोला, टायर फटने के बाद भड़की लपटें, समय रहते खाली कराई गई बस

    इंदौर में दौड़ती बस बनी आग का गोला, टायर फटने के बाद भड़की लपटें, समय रहते खाली कराई गई बस


    इंदौर । इंदौर के शिप्रा थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया, जब रीवा से इंदौर आ रही जय अंबे ट्रेवल्स की यात्री बस में अचानक आग लग गई। घटना सुबह करीब 11 बजे शिप्रा थाने के सामने हुई। बस में सवार यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई, लेकिन चालक की सूझबूझ और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के चलते सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस इंदौर की ओर बढ़ रही थी, तभी उसका एक टायर अचानक फट गया। टायर फटने के बाद चालक ने बस पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की। इसी दौरान टायर और सड़क के बीच हुए तेज घर्षण के कारण बस के अगले हिस्से से धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग की लपटें दिखाई देने लगीं।

    चालक ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत बस रोक दी और यात्रियों को तेजी से नीचे उतरने के निर्देश दिए। यात्रियों ने भी बिना घबराहट के बस खाली कर दी, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। कुछ ही मिनटों में बस पूरी तरह खाली करा ली गई और संभावित बड़ा हादसा टल गया।

    घटना की सूचना मिलते ही शिप्रा थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। दमकल कर्मियों ने तत्काल आग बुझाने का अभियान शुरू किया और कुछ ही समय में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। इससे आग बस के अन्य हिस्सों में फैलने से रोक दी गई।

    हादसे के बाद पुलिस ने सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें दूसरी बस की व्यवस्था कर इंदौर के लिए रवाना किया। घटना के कारण कुछ समय तक क्षेत्र में यातायात भी प्रभावित रहा, जिसे बाद में सामान्य कर दिया गया।

    पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में टायर फटने के बाद हुए घर्षण को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि, आग लगने की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच कराई जाएगी। बस की यांत्रिक स्थिति और अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    समय रहते चालक की सतर्कता, यात्रियों के सहयोग और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटना में किसी यात्री के घायल होने या हताहत होने की सूचना नहीं है।

  • इंदौर में पुलिस महकमे पर दाग, हेड कॉन्स्टेबल पर महिला साथी से छेड़छाड़ और धमकी देने का मामला दर्ज

    इंदौर में पुलिस महकमे पर दाग, हेड कॉन्स्टेबल पर महिला साथी से छेड़छाड़ और धमकी देने का मामला दर्ज


    इंदौर । इंदौर में पुलिस विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। महिला कॉन्स्टेबल की शिकायत पर देवास पुलिस लाइन में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल राहुल शर्मा के खिलाफ छेड़छाड़, पीछा करने, धमकी देने, मारपीट करने और कार में बंधक बनाने के आरोप में बाणगंगा थाने में मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी लंबे समय से उस पर शादी का दबाव बना रहा था और मना करने के बावजूद लगातार उसका पीछा कर मानसिक रूप से परेशान करता रहा।

    पुलिस के अनुसार महिला कॉन्स्टेबल ने अपनी शिकायत में बताया कि करीब एक वर्ष पहले देवास में पदस्थापना के दौरान उसकी पहचान राहुल शर्मा से हुई थी। शुरुआती दिनों में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती थी, लेकिन कुछ समय बाद आरोपी ने लगातार फोन करना शुरू कर दिया। महिला के बार बार मना करने के बावजूद वह बातचीत के लिए दबाव बनाता रहा और निजी संबंध बनाने की कोशिश करता रहा।

    पीड़िता का कहना है कि राहुल की हरकतों से परेशान होकर उसने अपना तबादला देवास से इंदौर करा लिया ताकि उससे दूरी बनाई जा सके। हालांकि स्थानांतरण के बाद भी आरोपी का व्यवहार नहीं बदला। महिला ने उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया, लेकिन वह अलग अलग नंबरों से कॉल करता रहा और लगातार संपर्क करने की कोशिश करता रहा। आरोप है कि कई बार उसने महिला का पीछा भी किया और उसे मानसिक दबाव में रखने का प्रयास किया।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी कई बार आत्महत्या करने की धमकी देकर महिला पर बात करने और शादी के लिए सहमत होने का दबाव बनाता था। एक बार वह उस समय भी सरकारी अस्पताल पहुंच गया जब महिला एक मामले में पीड़ित का मेडिकल कराने गई थी। वहां भी उसने बातचीत करने की कोशिश की और विवाद खड़ा कर दिया।

    महिला ने आरोप लगाया कि एक दिन राहुल शर्मा ने जबरन उसे अपनी कार में बैठा लिया। बाणगंगा क्षेत्र में उसने कार के दरवाजे लॉक कर दिए, उसका मोबाइल फोन छीन लिया और शादी के लिए दबाव बनाने लगा। विरोध करने पर आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट भी की और उसे बाहर निकलने नहीं दिया।

    इसी दौरान महिला की मां का फोन आया। महिला ने किसी तरह उन्हें पूरी घटना की जानकारी दी और बताया कि उसे कार में बंधक बनाकर रखा गया है। सूचना मिलते ही महिला के पिता और भाई मौके पर पहुंच गए। उन्हें आता देख आरोपी कार लेकर वहां से फरार हो गया।

    घटना के बाद महिला कॉन्स्टेबल ने थाना प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया। शिकायत की जांच के बाद बाणगंगा पुलिस ने हेड कॉन्स्टेबल राहुल शर्मा के खिलाफ छेड़छाड़, धमकी, मारपीट, अवैध रूप से बंधक बनाने और अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

    पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी की तलाश की जा रही है। साथ ही शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। फिलहाल इस मामले ने पुलिस महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है।

  • बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा घोटाले की जांच शुरू, सरकारी समिति के रहते बनी निजी कमेटी, अफसरों की भूमिका पर सवाल

    बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा घोटाले की जांच शुरू, सरकारी समिति के रहते बनी निजी कमेटी, अफसरों की भूमिका पर सवाल


    मध्यप्रदेश । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद अब मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर भी विवादों के केंद्र में आ गया है। मंदिर में श्रद्धालुओं से चढ़ावा लेने और उसे निजी बैंक खातों में जमा करने के आरोपों ने प्रशासन और मंदिर प्रबंधन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है और कलेक्टर प्रीति यादव ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को सात दिन के भीतर यह बताने के निर्देश दिए गए हैं कि गड़बड़ी कहां हुई कितनी राशि का मामला है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मंदिर के संचालन के लिए पहले से शासकीय प्रबंध समिति मौजूद है जिसके पदेन अध्यक्ष संबंधित एसडीएम होते हैं। इसके बावजूद वर्ष 2024 में नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति नाम से एक निजी समिति बनाई गई। आरोप है कि इस समिति के सदस्य मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से नकद राशि और चांदी के रूप में दान लेने लगे तथा अपनी अलग रसीदें जारी करते रहे। बताया जा रहा है कि चांदी के अलावा मिलने वाली नकद राशि सरकारी खाते में जमा करने के बजाय निजी बैंक खातों में जमा की जाती रही।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी समिति के रहते निजी समिति आखिर कैसे बनाई गई और तीन वर्षों तक प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उसका संचालन कैसे चलता रहा। शिकायतों के अनुसार तत्कालीन एसडीएम और बाद में पदस्थ अन्य अधिकारियों के कार्यकाल में भी इस व्यवस्था पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही वजह है कि अब जांच की आंच केवल समिति तक सीमित नहीं है बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

    मंदिर परिसर में लगे शिलालेखों में लगभग 170 श्रद्धालुओं द्वारा चांदी दान किए जाने का उल्लेख मिलता है लेकिन उसके बाद कितने लोगों ने दान दिया कितना चढ़ावा आया और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। आरोप है कि समिति का नियमित ऑडिट भी नहीं कराया गया जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। हालांकि समिति के सदस्यों का कहना है कि तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की जानकारी और सहमति से ही समिति का गठन किया गया था तथा उसका विधिवत पंजीयन भी कराया गया था।

    शिकायत के आधार पर गठित जांच समिति कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की पड़ताल कर रही है। इसमें गर्भगृह में लगाए गए चांदी के वास्तविक उपयोग की जांच के साथ यह भी देखा जाएगा कि कुल कितना चढ़ावा प्राप्त हुआ और उसे सरकारी खाते में जमा क्यों नहीं कराया गया। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि सरकारी मंदिर में निजी समिति का गठन नियमों के अनुरूप था या नहीं।

    मां बगलामुखी मंदिर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और विशेष अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में पहले से 27 सरकारी दान पेटियां और ऑनलाइन दान की व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में समानांतर निजी व्यवस्था चलने से मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

    मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि मंदिर की प्रतिष्ठा और श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है जिससे यह स्पष्ट होगा कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का है या फिर चढ़ावे के नाम पर बड़े वित्तीय घोटाले का।

  • आयशर कॉलेज के पास जल उठा एथेनॉल टैंकर का केबिन, दमकल की तत्परता से बची बड़ी तबाही

    आयशर कॉलेज के पास जल उठा एथेनॉल टैंकर का केबिन, दमकल की तत्परता से बची बड़ी तबाही


    भोपाल । राजधानी भोपाल में गुरुवार सुबह उस समय अफरा तफरी मच गई जब आयशर कॉलेज के पास एथेनॉल से भरे एक टैंकर के केबिन में अचानक आग भड़क उठी। घटना सुबह करीब सवा ग्यारह बजे की बताई जा रही है। आग की लपटें उठती देख आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और तत्काल इसकी सूचना दमकल विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम तेजी से मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। दमकल कर्मियों की मुस्तैदी के चलते आग पर कुछ ही देर में काबू पा लिया गया जिससे एक संभावित बड़ा हादसा टल गया।

    प्राथमिक जानकारी के अनुसार टैंकर पूरी तरह एथेनॉल से भरा हुआ था जिसकी पुष्टि संबंधित डिपो के अधिकारियों ने भी की है। एथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ माना जाता है और यदि आग टैंकर के मुख्य हिस्से तक पहुंच जाती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। राहत की बात यह रही कि आग केवल चालक के केबिन तक सीमित रही और टैंकर में भरे एथेनॉल तक नहीं पहुंच सकी। इससे किसी बड़े विस्फोट और जनहानि की आशंका पूरी तरह टल गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार केबिन से अचानक धुआं और आग की लपटें निकलने लगीं जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों ने सुरक्षित दूरी बना ली। कुछ ही देर में घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने बिना समय गंवाए आग बुझाने का अभियान शुरू किया और एक फायर ब्रिगेड वाहन की मदद से आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि यदि कुछ मिनट और देरी होती तो आग टैंकर तक पहुंच सकती थी जिससे बड़ा नुकसान हो सकता था।

    दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती जांच में इसे अज्ञात कारणों से लगी आग माना जा रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से यह जांच की जाएगी कि आग शॉर्ट सर्किट किसी तकनीकी खराबी या अन्य वजह से लगी थी। इसके साथ ही टैंकर की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा मानकों की भी जांच की जाएगी।

    घटना के समय टैंकर चालक मौके पर मौजूद नहीं मिला। ऐसे में यह भी जांच का विषय बन गया है कि हादसे के दौरान चालक कहां था और आग लगने के समय परिस्थितियां क्या थीं। पुलिस चालक की तलाश करने के साथ उससे पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सटीक जानकारी सामने आ सके।

    अधिकारियों के अनुसार आग में टैंकर का केबिन पूरी तरह जलकर खाक हो गया है लेकिन टैंकर में भरा एथेनॉल सुरक्षित बचा हुआ है। यही वजह रही कि एक बड़ा औद्योगिक हादसा टल गया। घटना के दौरान किसी व्यक्ति के घायल होने या जनहानि की सूचना नहीं मिली है। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच कर रहे हैं तथा आग लगने के कारणों का पता लगाने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर ज्वलनशील पदार्थों के परिवहन के दौरान सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।

  • मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को नई रफ्तार, 40 रूटों पर दौड़ेंगी सरकारी बसें, हर 10 सेकेंड मिलेगी लोकेशन

    मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को नई रफ्तार, 40 रूटों पर दौड़ेंगी सरकारी बसें, हर 10 सेकेंड मिलेगी लोकेशन


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने प्रदेश के 40 प्रमुख इंटरसिटी बस रूटों पर सरकारी बस सेवा शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। परिवहन विभाग ने राज्य सड़क परिवहन योजना का प्रारूप जारी करते हुए इस पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से तीस दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। तय प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन मार्गों पर सरकारी बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश के यात्रियों को सुरक्षित समयबद्ध और तकनीक आधारित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।

    सरकार की इस नई योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यात्रियों को पूरी तरह डिजिटल सुविधाएं मिलेंगी। बसों में इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग सिस्टम लागू किया जाएगा जिससे टिकट लेने की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी होगी। इसके साथ ही हर बस में आधुनिक ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाएंगे जो हर दस सेकेंड में वाहन की लाइव लोकेशन अपडेट करेंगे। यात्री वेबसाइट के माध्यम से बस की वास्तविक स्थिति जान सकेंगे जिससे उन्हें बस के आने और पहुंचने का सही समय पता चल सकेगा और अनावश्यक इंतजार से राहत मिलेगी।

    परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन बसों का संचालन मध्यप्रदेश यात्री बस परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के माध्यम से किया जाएगा। राज्य परिवहन उपक्रम के नाम पर परमिट जारी किए जाएंगे जबकि संचालन सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल के तहत निजी बस संचालकों के सहयोग से किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से बेहतर संसाधनों का उपयोग होगा और यात्रियों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। योजना लागू होने के सात दिन के भीतर बसों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

    नई परिवहन नीति के तहत प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहर और जिले आपस में बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। इसमें भोपाल इंदौर उज्जैन ग्वालियर जबलपुर रीवा सागर छिंदवाड़ा खंडवा खरगोन बड़वानी रतलाम धार नीमच मंदसौर शिवपुरी गुना शाजापुर देवास सीहोर नरसिंहपुर सहित अनेक जिलों को जोड़ने वाले 40 प्रमुख मार्ग शामिल किए गए हैं। इन मार्गों पर यात्रियों की संख्या और ट्रैफिक के अनुसार बसों की संख्या भी तय की जाएगी ताकि भीड़भाड़ वाले रूटों पर लोगों को अधिक सुविधा मिल सके।

    योजना में यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग अलग श्रेणी की बसों का संचालन किया जाएगा। सामान्य मार्गों पर 23 से 34 सीटों वाली मिडी बसें चलाई जाएंगी जिनमें साधारण सेमी डीलक्स और डीलक्स श्रेणी शामिल होगी। वहीं लंबे और व्यस्त इंटरसिटी मार्गों पर 35 से 70 सीटों वाली स्टैंडर्ड बसें संचालित होंगी जिनमें एसी डीलक्स एसी लग्जरी और एसी सुपर लग्जरी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। इससे यात्रियों को उनकी जरूरत और बजट के अनुसार यात्रा का विकल्प मिलेगा।

    सरकार का मानना है कि नई परिवहन नीति लागू होने से प्रदेश में सार्वजनिक बस सेवा अधिक व्यवस्थित सुरक्षित और समयबद्ध बनेगी। साथ ही निजी और सरकारी भागीदारी के जरिए परिवहन व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। डिजिटल टिकटिंग और लाइव ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाएंगी और सार्वजनिक परिवहन पर लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो मध्यप्रदेश में बस यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक और तकनीक आधारित हो जाएगी।

  • स्कूल वैन हादसे से मची अफरा-तफरी, चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, महिला स्टाफ घायल

    स्कूल वैन हादसे से मची अफरा-तफरी, चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, महिला स्टाफ घायल


    मध्यप्रदेश । भोपाल में गुरुवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा होते होते टल गया जब बच्चों को स्कूल लेकर जा रही एक स्कूल वैन कोहेफिजा थाना क्षेत्र के फ्लाईओवर पर अनियंत्रित होकर बिजली के खंभे से टकरा गई। हादसे के समय वैन में छह स्कूली बच्चे और स्कूल की एक महिला स्टाफ सदस्य सवार थीं। राहत की बात यह रही कि सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित बच गए जबकि आगे की सीट पर बैठी महिला कर्मचारी के सिर में चोट आई जिसे तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उपचार शुरू कराया गया। इस घटना के बाद इलाके में कुछ देर के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    जानकारी के अनुसार भोपाल गर्ल्स स्कूल की वैन सुबह पंचवटी क्षेत्र से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। जैसे ही वाहन कोहेफिजा थाने के सामने बने फ्लाईओवर पर पहुंचा तभी चालक का वाहन पर नियंत्रण बिगड़ गया और वैन सीधे बिजली के खंभे से जा टकराई। तेज आवाज सुनते ही आसपास मौजूद लोग मौके की ओर दौड़े और बिना समय गंवाए वैन में फंसे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। स्थानीय लोगों ने घायल महिला को भी तुरंत अस्पताल पहुंचाने में मदद की जिससे उसे समय पर इलाज मिल सका।

    घटना की सूचना मिलते ही कोहेफिजा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दूसरी गाड़ी की व्यवस्था कर उन्हें सुरक्षित स्कूल के लिए रवाना किया। हादसे के बाद अभिभावकों में कुछ समय के लिए चिंता का माहौल रहा लेकिन बच्चों के सुरक्षित होने की जानकारी मिलते ही सभी ने राहत की सांस ली।

    कोहेफिजा थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि वैन के सामने अचानक एक बड़ा वाहन आ गया था। चालक ने टक्कर से बचने की कोशिश की लेकिन इसी दौरान वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा और वैन बिजली के खंभे से टकरा गई। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं वाहन के ब्रेक में तकनीकी खराबी तो नहीं थी। यदि ब्रेक ने अचानक काम करना बंद किया होगा तो चालक ने बड़ा हादसा टालने के लिए जानबूझकर वैन को खंभे से टकराकर रोकने का प्रयास किया हो सकता है।

    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए स्कूल वैन की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाएगी। वाहन की ब्रेक प्रणाली स्टीयरिंग और अन्य मैकेनिकल हिस्सों की जांच विशेषज्ञों से कराई जाएगी। साथ ही चालक से भी विस्तार से पूछताछ की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही तो नहीं थी।

    इस घटना ने एक बार फिर स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और नियमित फिटनेस जांच की आवश्यकता को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को लेकर चलने वाले सभी वाहनों की समय समय पर तकनीकी जांच होना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार की खराबी समय रहते सामने आ सके। फिलहाल इस हादसे में किसी बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचा है लेकिन यह घटना भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जरूर बन गई है।

  • वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद, जमीयत उलेमा ने सरकार के फैसले पर उठाए तीखे सवाल

    वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद, जमीयत उलेमा ने सरकार के फैसले पर उठाए तीखे सवाल


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के बाद प्रदेश में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस फैसले को लेकर मुस्लिम संगठनों की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। जमीयत उलेमा मध्यप्रदेश के सदर मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने सरकार के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पारदर्शिता के नाम पर वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि जो लोग अपनी धार्मिक संस्थाओं और उनसे जुड़े मामलों को प्रभावी ढंग से नहीं संभाल पा रहे हैं वे वक्फ की धार्मिक संपत्तियों और संस्थाओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि वह अपनी धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन पर ध्यान दे और मुस्लिम समाज को उसकी धार्मिक संपत्तियों और संस्थाओं का संचालन स्वयं करने दे।

    मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता स्थापित करना चाहती है तो यही व्यवस्था मंदिरों और अन्य धार्मिक संस्थाओं में भी लागू की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी धार्मिक संस्था में दूसरे समुदाय के लोगों को शामिल करने का सिद्धांत अपनाया जा रहा है तो यह सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। केवल वक्फ बोर्ड में ऐसा करना समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास में अब तक सभी धार्मिक संस्थाओं का संचालन उसी समुदाय के लोगों द्वारा किया जाता रहा है और पहली बार मुस्लिम समाज की धार्मिक संस्था में इस प्रकार का बदलाव किया गया है जिससे समाज में असंतोष पैदा हुआ है।

    उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ की जमीनें और संपत्तियां सरकार की नहीं बल्कि समाज के लोगों द्वारा धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए समर्पित की गई हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से लोगों का भरोसा कमजोर होगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले से वक्फ बोर्ड में सरकारी अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी और प्रशासनिक प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते रहे हैं और इस व्यवस्था पर कभी कोई आपत्ति नहीं रही। लेकिन गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को पारदर्शिता का नाम देकर उचित ठहराना समझ से परे है।

    जमीयत उलेमा मध्यप्रदेश के नायब सदर मुफ्ती जिया कासमी ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार की मंशा निष्पक्ष है तो सभी धर्मों की धार्मिक समितियों में समान व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। केवल वक्फ बोर्ड में यह प्रयोग करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि किसी एक समुदाय की धार्मिक संस्था में हस्तक्षेप उचित नहीं माना जा सकता।

    इधर इस विवाद के बीच भोपाल के निकाह काजी मोहम्मद मआज खान नोमानी नदवी ने अपने पद से इस्तीफा देकर मामले को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने निकाह काजी के साथ साथ दीनी तालीमी बोर्ड और जमीयत उलेमा मध्यप्रदेश के महासचिव पद से भी त्यागपत्र सौंपते हुए वर्तमान परिस्थितियों में पद पर बने रहना संभव नहीं बताया। दूसरी ओर वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम को लेकर भी संगठन के भीतर मतभेद सामने आए हैं।

    गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भोपाल में ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के नेतृत्व में वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन भी किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग करते हुए इसे मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया था। वहीं जमीयत उलेमा ने साफ किया है कि संगठन इस पूरे मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखेगा और सुप्रीम कोर्ट में अपने पक्ष को मजबूती से रखेगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज शादी लिव इन और तलाक के लिए बनेंगे एक समान कानून गुजरात मॉडल पर तैयार ड्राफ्ट

    मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज शादी लिव इन और तलाक के लिए बनेंगे एक समान कानून गुजरात मॉडल पर तैयार ड्राफ्ट


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। राज्य के लिए यूसीसी का प्रारूप तैयार हो चुका है और इसे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत भी किया गया है। मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए सुझावों को शामिल करने के बाद समिति अंतिम ड्राफ्ट सरकार को सौंपेगी। माना जा रहा है कि यह कानून लागू होने के बाद शादी तलाक लिव इन रिलेशनशिप उत्तराधिकार और वसीयत जैसे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करेगा।

    सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश का प्रस्तावित यूसीसी काफी हद तक गुजरात में लागू समान नागरिक संहिता के मॉडल पर आधारित है। बताया जा रहा है कि ड्राफ्ट के अधिकांश प्रावधान गुजरात कानून से प्रेरित हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासी भी इस कानून के दायरे में आएंगे जबकि अपनी पारंपरिक जनजातीय रीति रिवाजों का पालन करने वाले आदिवासियों को इससे बाहर रखा जाएगा।

    प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार धार्मिक परंपराओं में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। सभी समुदाय अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार विवाह कर सकेंगे। हिंदू विवाह के फेरे मुस्लिम निकाह सिख आनंद कारज ईसाई चर्च विवाह और अन्य मान्य पद्धतियां पहले की तरह जारी रहेंगी। अंतर केवल इतना होगा कि विवाह से जुड़े कानूनी अधिकार और जिम्मेदारियां सभी नागरिकों के लिए समान होंगी।

    ड्राफ्ट में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान रखा गया है। विवाह होने के 60 दिन के भीतर उसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यदि निर्धारित समय में पंजीकरण नहीं हो पाता है तो बाद में तय प्रक्रिया के तहत इसे कराया जा सकेगा। हालांकि केवल रजिस्ट्रेशन न होने से विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा लेकिन नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई संभव होगी। नई शादियों के साथ पहले से हुए विवाह और तलाक का भी सरकारी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य में दस्तावेजों और कानूनी विवादों में पारदर्शिता बनी रहे।

    यूसीसी के तहत पति पत्नी और बच्चों के अधिकारों को लेकर भी समान नियम प्रस्तावित किए गए हैं। भरण पोषण की परिभाषा केवल भोजन और आवास तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि शिक्षा स्वास्थ्य वस्त्र और अन्य आवश्यक जरूरतें भी इसमें शामिल होंगी। अदालत परिस्थितियों के अनुसार स्थायी गुजारा भत्ता तय कर सकेगी। बच्चों की अभिरक्षा और देखभाल से जुड़े मामलों में भी समान कानूनी प्रावधान लागू होंगे।

    संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में भी एक समान नियम लागू करने की तैयारी है। यदि कोई व्यक्ति बिना वसीयत के निधन करता है तो उसकी संपत्ति का बंटवारा तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा। गर्भ में पल रहे बच्चे के अधिकारों को भी मान्यता दी जाएगी। वहीं यदि कोई व्यक्ति मृतक की हत्या का दोषी पाया जाता है तो उसे संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा। बीमारी या शारीरिक दिव्यांगता के आधार पर किसी भी उत्तराधिकारी के अधिकार समाप्त नहीं किए जा सकेंगे।

    ड्राफ्ट में वसीयत तैयार करने उसे संशोधित करने या निरस्त करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है। यदि किसी वसीयत के पीछे दबाव धोखाधड़ी या जबरदस्ती साबित होती है तो उसे अमान्य माना जाएगा। संपत्ति विवाद की स्थिति में अदालत संपत्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा सकेगी और जरूरत पड़ने पर संरक्षक नियुक्त कर सकेगी।

    प्रस्तावित कानून के तहत शादी तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए रजिस्ट्रार जनरल और रजिस्ट्रार की नियुक्ति होगी। यदि किसी व्यक्ति का आवेदन अस्वीकार किया जाता है तो उसे अपील का अधिकार भी मिलेगा। रिकॉर्ड में छेड़छाड़ झूठी जानकारी देने या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर दंड का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से पारिवारिक मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी नागरिकों को समान कानूनी संरक्षण मिल सकेगा।

  • एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, सात जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट; सड़कों पर बही बाइकें, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

    एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, सात जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट; सड़कों पर बही बाइकें, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात


    मध्य प्रदेश :
    में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और इसके साथ ही कई जिलों में भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने बालाघाट और डिंडौरी में अति भारी वर्षा तथा देवास, हरदा, बैतूल, पांढुर्णा और छिंदवाड़ा सहित कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई स्थानों पर जलभराव, तेज बहाव और यातायात बाधित होने जैसी स्थितियां सामने आई हैं।

    प्रदेश में मानसून अब जबलपुर, भोपाल, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, सागर और इंदौर संभाग के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले एक-दो दिनों में मानसून उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के शेष क्षेत्रों को भी पूरी तरह कवर कर लेगा। इसके साथ ही प्रदेशभर में बारिश की गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई गई है।

    सीहोर जिले के आष्टा में मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद सड़कें नदी जैसी दिखाई देने लगीं। कई इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया और तेज बहाव के कारण सड़क किनारे खड़ी मोटरसाइकिलें बहने लगीं। स्थानीय लोगों ने वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का प्रयास किया, जबकि कई स्थानों पर आवागमन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। इस घटना के वीडियो भी व्यापक रूप से सामने आए, जिनमें बारिश की तीव्रता स्पष्ट दिखाई दे रही है।

    बालाघाट में बुधवार तड़के से लगातार हो रही बारिश ने किसानों के लिए राहत लेकर आई है। लंबे इंतजार के बाद अच्छी वर्षा मिलने से अब खेतों में बोनी का कार्य तेज होने की उम्मीद है। हालांकि प्रशासन ने लोगों को आकाशीय बिजली, तेज हवाओं और भारी वर्षा के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। लगातार बारिश को देखते हुए कुछ सरकारी सेवाओं के संचालन समय में भी बदलाव किया गया है।

    मौसम विभाग ने भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, सतना, सिवनी, मंडला, सीधी, सिंगरौली और कई अन्य जिलों में तेज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना व्यक्त की है। वहीं प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया गया है।

    लगातार वर्षा के कारण कई स्थानों पर जोखिम भरी घटनाएं भी सामने आई हैं। खरगोन जिले में तेज बहाव के बावजूद यात्रियों से भरी एक निजी बस को पुलिया पार कराए जाने का मामला चर्चा में रहा। दूसरी ओर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आकाशीय बिजली गिरने और तेज बहाव की घटनाओं में जनहानि की भी सूचना मिली है। प्रशासन ने लोगों से नदी, नालों और पुल-पुलियों को पार करने में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

    मौसम विभाग के अनुसार जून महीने में प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने के संकेत हैं। प्रदेश की वार्षिक औसत वर्षा का बड़ा हिस्सा जुलाई में ही दर्ज होता है और इसी अवधि में खेती-किसानी के लिए सबसे महत्वपूर्ण बारिश होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में वर्षा का यह क्रम बना रहता है तो कृषि गतिविधियों को गति मिलेगी, हालांकि अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों पर लगातार निगरानी बनाए रखना आवश्यक होगा।