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  • भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट

    भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर आज हाईकोर्ट की इंदौर बेंच का अहम फैसला आ सकता है। वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील मामले में कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया गया है।

    फैसले को देखते हुए इंदौर और धार जिले में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। खास बात यह है कि आज शुक्रवार का दिन है और इसी दिन भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा की जाती है, जिससे स्थिति की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

    धार शहर में करीब 1200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को 12 लेयर में बांटा गया है, जिसमें रिजर्व पुलिस फोर्स और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी शामिल किया गया है। पुलिस कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जा रही है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात है।

    भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कलेक्टर और एसपी ने खुद सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या अफवाह को फैलने से रोका जा सके।

    यह विवाद 2022 में दायर याचिकाओं के बाद और अधिक चर्चा में आया था, जिसमें भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर अदालत में मांगें रखी गई थीं। हिंदू पक्ष ने इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर बताते हुए नियमित पूजा का अधिकार मांगा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे लंबे समय से उपयोग में रही मस्जिद बताता है।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी इस मामले में 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों में अलग-अलग दावे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कुछ व्यवस्थाओं को लेकर अनुमति दी थी, जिसके बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया।

    फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं।

  • ईंधन हुआ और महंगा: भोपाल-इंदौर में पेट्रोल 109 रुपए पार, MP में नई दरें लागू

    ईंधन हुआ और महंगा: भोपाल-इंदौर में पेट्रोल 109 रुपए पार, MP में नई दरें लागू


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब ₹3 प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। नई दरें आज सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं पर खर्च का बोझ बढ़ गया है।

    मध्य प्रदेश में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद प्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब ₹3 प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। नई दरें आज सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं, जिससे परिवहन और रोजमर्रा की लागत पर सीधा असर देखने को मिल रहा है।

    राजधानी भोपाल में पेट्रोल का दाम बढ़कर ₹109.71 प्रति लीटर और डीजल ₹94.88 प्रति लीटर हो गया है। वहीं इंदौर में पेट्रोल ₹109.86 प्रति लीटर और डीजल ₹95.06 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसी तरह उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों में भी ईंधन के दाम बढ़े हैं।

    सबसे महंगा पेट्रोल मंडला और पांढुर्णा में दर्ज किया गया है, जहां कीमत ₹111.29 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इसके अलावा कई जिलों में भी पेट्रोल ₹111 के आसपास बिक रहा है, जबकि डीजल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं।

    तेल कीमतों में यह उछाल वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इसी दबाव के कारण तेल कंपनियों ने घरेलू स्तर पर कीमतों में संशोधन किया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी शुरुआती है और अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले समय में और इजाफा हो सकता है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां समय-समय पर टैक्स और सब्सिडी के जरिए कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश करती रही हैं।

    देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लंबे समय से स्थिर थीं, लेकिन वैश्विक घटनाओं के चलते अब इसमें बदलाव देखने को मिल रहा है। इससे ट्रांसपोर्ट, खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    प्रधानमंत्री की हालिया अपील में भी पेट्रोलियम उत्पादों के संयमित उपयोग की बात कही गई थी, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके।

    कुल मिलाकर ईंधन की बढ़ती कीमतें आम लोगों के बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं और आने वाले दिनों में महंगाई की रफ्तार और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

  • मनमानी बिजली समझौतों पर लगेगी रोक, सरकार ने तय किए नए नियम

    मनमानी बिजली समझौतों पर लगेगी रोक, सरकार ने तय किए नए नियम


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सरकार ने बिजली क्षेत्र में बड़ा नीति परिवर्तन करते हुए यह निर्णय लिया है कि अब किसी भी नए बिजली खरीद समझौते (Power Purchase Agreement – PPA) या बिजली आपूर्ति समझौते (PSA) को कैबिनेट की मंजूरी के बिना लागू नहीं किया जाएगा। यह फैसला राज्य की ऊर्जा खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

    राज्य में वर्ष 2003 के बाद बिजली संकट से उबरने के लिए बड़ी संख्या में बिजली उत्पादन कंपनियों के साथ समझौते किए गए थे। इन समझौतों के कारण जहां बिजली आपूर्ति व्यवस्था मजबूत हुई, वहीं कई मामलों में इन अनुबंधों को लेकर विवाद और वित्तीय बोझ की स्थिति भी बनी।

    वर्तमान में प्रदेश में लगभग 1795 बिजली खरीद समझौते (PPA) पहले से मौजूद हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 26,012 मेगावाट बताई जाती है। इन समझौतों के कारण मध्य प्रदेश को अब ऊर्जा सरप्लस राज्य के रूप में देखा जा रहा है।

    सरकार का मानना है कि दीर्घकालिक बिजली समझौते बड़े वित्तीय दायित्व होते हैं, जो लंबे समय तक राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। इसलिए अब यह जरूरी समझा गया है कि ऐसे सभी नए समझौतों पर शीर्ष स्तर यानी कैबिनेट की मंजूरी ली जाए।

    इसके पीछे एक कारण यह भी है कि ऊर्जा क्षेत्र में सौर, पवन, बायोमास, न्यूक्लियर और बैटरी स्टोरेज जैसी नई तकनीकें तेजी से उभर रही हैं, जिनसे जुड़े अनुबंधों में विशेषज्ञ और वित्तीय मूल्यांकन की आवश्यकता बढ़ गई है।

    अब तक यह निर्णय पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के बोर्ड स्तर पर लिया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत पहले ऊर्जा मंत्री की मंजूरी और फिर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट से अंतिम स्वीकृति जरूरी होगी।

    सरकार का दावा है कि यह कदम भविष्य में ऊर्जा खरीद को अधिक संतुलित, पारदर्शी और राज्य हित में बनाएगा।

  • सुरक्षा के कड़े इंतजाम: भोपाल की प्रमुख मस्जिदों पर पुलिस की विशेष निगरानी

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम: भोपाल की प्रमुख मस्जिदों पर पुलिस की विशेष निगरानी


    नई दिल्ली । भोपाल में आज जुमे की नमाज को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। शहर के संवेदनशील और अति संवेदनशील इलाकों में सुबह से ही अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। प्रमुख मस्जिदों के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार निगरानी रख रही है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    यह कदम हाल ही में सामने आए कुछ घटनाक्रमों और बढ़े हुए तनाव को देखते हुए उठाया गया है। प्रशासन के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस ने साफ किया है कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ गतिविधि पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    शहर के विभिन्न समुदायों के धार्मिक नेताओं ने भी शांति बनाए रखने की अपील की है। शहर काजी ने लोगों से संयम रखने और किसी के बहकावे में न आने की बात कही है, जबकि पुलिस कमिश्नर ने भी नागरिकों से शहर में अमन-चैन बनाए रखने का आग्रह किया है।

    प्रमुख मस्जिदों जैसे ताजुल मसाजिद, मोती मस्जिद, जामा मस्जिद, पीरगेट और पुराने भोपाल की अन्य मस्जिदों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने बैरिकेडिंग भी की है और भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त बल लगाया गया है।

    नमाज का समय दोपहर के आसपास निर्धारित है, जिसके दौरान पुलिस विशेष रूप से सतर्क रहेगी। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शहर में शांति बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

  • पीएम की अपील पर सवाल: 9 BJP नेताओं ने निकाले काफिले, एक पर कार्रवाई से उठा विवाद

    पीएम की अपील पर सवाल: 9 BJP नेताओं ने निकाले काफिले, एक पर कार्रवाई से उठा विवाद


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में ईंधन के संयमित उपयोग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील के बाद मध्य प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। पीएम ने हाल ही में देशवासियों से कार पूलिंग, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की बात कही थी, ताकि वैश्विक परिस्थितियों में संसाधनों की बचत की जा सके।

    हालांकि, इस अपील के बाद भी राज्य में कई नेताओं के बड़े-बड़े काफिले निकलते नजर आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां दर्जनों से लेकर सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन किया।

    कुछ मामलों में पार्टी स्तर पर कार्रवाई भी हुई है। भिंड में किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया, क्योंकि वे लगभग 100 वाहनों के काफिले और बग्घी के साथ कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहीं, पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष पर भी कार्रवाई करते हुए उनका अधिकार सीमित कर दिया गया, जब उन्होंने उज्जैन से भोपाल तक करीब 700 वाहनों का काफिला निकाला, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।

    लेकिन कई अन्य मामलों में अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। कुछ विधायकों और मोर्चा पदाधिकारियों पर भी इसी तरह के काफिलों के आरोप लगे हैं, जहां 200 से अधिक गाड़ियों के साथ रैलियां निकाली गईं। इनमें मंदिर दर्शन, स्वागत कार्यक्रम और पार्टी आयोजनों के दौरान शक्ति प्रदर्शन के दृश्य सामने आए हैं।

    वहीं दूसरी ओर कुछ उदाहरण ऐसे भी सामने आए हैं जो अलग संदेश देते हैं, जैसे एक मंत्री द्वारा बस से यात्रा कर आम लोगों के बीच पहुंचना और ईंधन बचत की अपील को समर्थन देना।

    इस पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि जहां एक तरफ जनता से संयम की अपील की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी संस्कृति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है और लोग नेताओं के इस दोहरे रवैये पर सवाल उठा रहे हैं।

    अब देखना होगा कि सरकार और पार्टी संगठन इस पर आगे क्या सख्त कदम उठाते हैं, या यह विवाद सिर्फ नोटिस और बयानबाजी तक सीमित रह जाता है।

  • गूगल मैप की गलती या किस्मत? शराब से भरा ट्रक सीधे थाने पहुंचा, 1500 पेटी जब्त

    गूगल मैप की गलती या किस्मत? शराब से भरा ट्रक सीधे थाने पहुंचा, 1500 पेटी जब्त


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के सागर जिले में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जहां गूगल मैप के चक्कर और ड्राइवर की थकान के कारण शराब से भरा ट्रक सीधे पुलिस थाने के पास पहुंच गया। मकरोनिया थाना पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए ट्रक को रोक लिया और उसमें भरी करीब 1500 पेटी बॉम्बे व्हिस्की को जब्त कर लिया।
    यह ट्रक (MP 09 DF 0620) खरगोन जिले के बड़वाह से लोड होकर जबलपुर होते हुए रीवा जा रहा था, लेकिन रास्ते में ड्राइवर की आंख लग जाने और गलत नेविगेशन के कारण वाहन सागर की ओर मुड़ गया।
     कैसे भटका ट्रक?
    पूछताछ में ड्राइवर रामचंद्र वर्मा ने बताया कि सफर के दौरान वह थकान के कारण सो गया था। इस दौरान हेल्पर ने वाहन संभाला और गूगल मैप की मदद से रास्ता तय करने की कोशिश की। लेकिन गलत रूटिंग के चलते ट्रक सागर पहुंच गया और बहेरिया मार्ग पर मकरोनिया थाना क्षेत्र में पुलिस चेकिंग के दौरान पकड़ लिया गया।
    शराब की खेप और दस्तावेजों की जांच
    पुलिस के अनुसार ट्रक में भारी मात्रा में शराब की खेप मिली है, जिसे फिलहाल सुरक्षित रखवा दिया गया है। ड्राइवर और हेल्पर ने बताया कि यह खेप वैध है और सभी दस्तावेज मौजूद हैं।
    हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि:
    सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है
    सत्यापन के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी
    शराब की खेप की वैधता की पुष्टि जरूरी है

    पुलिस की कार्रवाई
    मकरोनिया थाना पुलिस ने ट्रक को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी के अनुसार, बिना सत्यापन किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। दस्तावेजों की जांच के बाद ही तय किया जाएगा कि मामला सामान्य परिवहन का है या इसमें कोई अनियमितता है।

    चर्चा में आया मामला
    इस घटना ने इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है, जहां लोग इसे “गूगल मैप का कन्फ्यूजन” और “ड्राइवर की गलती” से जोड़कर देख रहे हैं।
  • मंदसौर में नशे के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, खेतों के बीच छिपी अवैध ड्रग्स लैब का खुलासा..

    मंदसौर में नशे के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, खेतों के बीच छिपी अवैध ड्रग्स लैब का खुलासा..

    मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान एक बड़ी सफलता सामने आई है, जहां खेतों के बीच छिपाकर संचालित की जा रही एक अवैध सिंथेटिक ड्रग्स निर्माण इकाई का पर्दाफाश हुआ है। यह कार्रवाई उस समय सामने आई जब लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के बाद एक विशेष टीम ने गुप्त रूप से तैयार की गई इस लैब पर छापा मारा। सामान्य रूप से दिखने वाले एक ग्रामीण इलाके में इस तरह का नेटवर्क संचालित होना जांच एजेंसियों के लिए भी चौंकाने वाला रहा।

    जांच के दौरान यह सामने आया कि यह पूरी गतिविधि बेहद सुनियोजित तरीके से चलाई जा रही थी, जहां एक कमरे और उसके आसपास के हिस्से को प्रयोगशाला में बदलकर मेफेड्रोन जैसे खतरनाक सिंथेटिक नशीले पदार्थों का निर्माण किया जा रहा था। तकनीकी निगरानी और खुफिया इनपुट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में यह स्पष्ट हुआ कि यह केवल एक छोटा संचालन नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

    छापेमारी के दौरान टीम ने जब पूरे स्थान की तलाशी ली तो वहां से बड़ी मात्रा में तैयार और निर्माणाधीन मादक पदार्थ बरामद हुए। इसके साथ ही कई प्रकार के रसायन और प्रयोगशाला उपकरण भी मिले, जिनका उपयोग अवैध ड्रग्स बनाने में किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क के पीछे सप्लाई चैन और वितरण व्यवस्था भी सक्रिय हो सकती है, जिसकी जांच अब आगे बढ़ाई जा रही है।

    इस कार्रवाई में मौके से दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में संबंधित कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार राज्य के बाहर तक जुड़े होने की संभावना भी हो सकती है। इसी कारण अब पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन, केमिकल सप्लाई स्रोत और संभावित सहयोगियों की गहन जांच की जा रही है।

    अधिकारियों के अनुसार इस तरह की गुप्त लैब का खुलासा नशे के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है। सिंथेटिक ड्रग्स का उत्पादन न केवल अवैध है बल्कि यह समाज के लिए गंभीर खतरा भी पैदा करता है, खासकर युवाओं पर इसका प्रभाव अत्यधिक हानिकारक होता है। इसी कारण इस तरह के नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है।

    इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि अवैध नशा कारोबार अब केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में भी अपनी जड़ें फैलाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में लगातार निगरानी और समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी हो जाती है, ताकि इस तरह के नेटवर्क को बढ़ने से पहले ही रोका जा सके।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ अभियान आगे भी इसी तरह सख्ती के साथ जारी रहेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • अब नहीं छूटेगा साल 5वीं 8वीं के फेल और अनुपस्थित छात्रों के लिए जून में फिर परीक्षा

    अब नहीं छूटेगा साल 5वीं 8वीं के फेल और अनुपस्थित छात्रों के लिए जून में फिर परीक्षा


    भोपाल । मध्यप्रदेश के भोपाल सहित पूरे प्रदेश में कक्षा 5वीं और 8वीं के छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है जहां फेल और अनुपस्थित विद्यार्थियों को एक और मौका दिया जा रहा है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब ये छात्र 1 जून से 6 जून 2026 के बीच आयोजित होने वाली पुन परीक्षा में शामिल हो सकेंगे जिससे उनका एक शैक्षणिक वर्ष बच सकता है।

    शिक्षण सत्र 2025 26 की मुख्य परीक्षा में असफल या अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। इस पुन परीक्षा में सरकारी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों अनुदान प्राप्त संस्थानों और पंजीकृत मदरसों में पढ़ने वाले छात्र भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई केवल एक परीक्षा के कारण बाधित न हो।

    परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश पत्र 25 मई तक उपलब्ध करा दिए जाएंगे। छात्र अपना एडमिट कार्ड राज्य शिक्षा केंद्र के आधिकारिक पोर्टल www.rskmp.in से डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए शाला प्रमुख जनशिक्षा केंद्र प्रभारी और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि सभी छात्रों तक समय पर प्रवेश पत्र पहुंचाया जाए।

    पुन परीक्षा की तैयारी को लेकर भी खास व्यवस्था की गई है। परीक्षा से पहले शाला स्तर पर विषयवार अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाएंगी ताकि छात्र बेहतर तरीके से तैयारी कर सकें। जिन छात्रों ने पहले प्रोजेक्ट कार्य पूरा नहीं किया था या जिनके अंक कम थे उन्हें दोबारा प्रोजेक्ट पूरा करने और मूल्यांकन का अवसर भी दिया जाएगा।

    इस बार परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था भी अलग तरीके से की गई है। सभी परीक्षा केंद्र जनशिक्षा केंद्र स्तर पर बनाए जाएंगे ताकि परीक्षा प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी रहे। यदि किसी केंद्र पर 500 से अधिक छात्र होते हैं तो राज्य शिक्षा केंद्र की अनुमति से अतिरिक्त केंद्र भी बनाए जा सकेंगे।

    परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रश्न पत्रों की ऑन द स्पॉट प्रिंटिंग की जाएगी। यानी प्रश्न पत्र सीधे परीक्षा केंद्र पर ही डाउनलोड और प्रिंट किए जाएंगे जिससे लीक जैसी समस्याओं की संभावना कम होगी।

    गर्मी के मौसम को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। हर परीक्षा केंद्र पर पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी। साथ ही बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी पिलाने लू और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ORS उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

    कुल मिलाकर यह पहल उन छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है जो किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो पाए थे। अब उनके पास अपनी मेहनत से खुद को साबित करने और अगली कक्षा में आगे बढ़ने का एक और सुनहरा अवसर है।

  • गाय बचाने की कोशिश में दर्दनाक हादसा सीहोर में बस पेड़ से टकराई हेल्पर की मौत

    गाय बचाने की कोशिश में दर्दनाक हादसा सीहोर में बस पेड़ से टकराई हेल्पर की मौत


    सीहोर/आष्टा। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में इंदौर भोपाल राज्यमार्ग पर एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है जहां तेज रफ्तार बस अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई। आष्टा के कोठरी के पास हुए इस हादसे में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चार अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार अहमदाबाद से भोपाल जा रही वर्मा ट्रेवल्स की बस सुबह के समय इस मार्ग से गुजर रही थी। तभी अचानक सड़क पर एक गाय आ गई जिसे बचाने के प्रयास में चालक ने जोर से ब्रेक लगाया। इसी दौरान बस का टायर फट गया और वाहन का संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते बस सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई और जोरदार आवाज के साथ हादसा हो गया।

    हादसे की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। केबिन में बैठे हेल्पर सुनील मुकाती जो बड़ी पोलाई के निवासी थे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वह केबिन में बुरी तरह फंस गए थे और उन्हें बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू टीम को कटर की मदद लेनी पड़ी।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और राहत बचाव दल मौके पर पहुंचा और तत्काल घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। चार यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार हादसे का प्राथमिक कारण गाय को बचाने के प्रयास में अचानक ब्रेक लगाना और उसी दौरान टायर फटना माना जा रहा है। हालांकि पूरे मामले की जांच की जा रही है ताकि सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

    इस घटना के बाद कुछ समय के लिए मार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ जिसे बाद में नियंत्रित किया गया। स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में सहयोग किया और घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की।

    यह हादसा एक बार फिर यह संकेत देता है कि सड़क पर अचानक आने वाली बाधाएं और तेज रफ्तार किस तरह जानलेवा साबित हो सकती हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है।

  • मध्यप्रदेश में MPPSC एग्जाम शुरू, नए नियम लागू 90 मिनट पहले पहुंचना जरूरी

    मध्यप्रदेश में MPPSC एग्जाम शुरू, नए नियम लागू 90 मिनट पहले पहुंचना जरूरी


    भोपाल । मध्यप्रदेश में आज राज्य सेवा और राज्य वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित की जा रही है। राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में यह परीक्षा 365 केंद्रों पर आयोजित हो रही है जहां लाखों अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। इस बार परीक्षा को लेकर नियमों में कई बदलाव किए गए हैं और सुरक्षा व्यवस्था को पहले से ज्यादा मजबूत किया गया है।

    यह परीक्षा दो सत्रों में आयोजित की जा रही है जिसमें पहला सत्र सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरा सत्र दोपहर 2.15 बजे से शाम 4.15 बजे तक चलेगा। परीक्षा के लिए प्रदेश के 54 जिला मुख्यालयों में केंद्र बनाए गए हैं ताकि अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को सुविधा मिल सके।

    इस बार सबसे खास बात यह है कि परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश के लिए थ्री लेयर सिक्योरिटी सिस्टम लागू किया गया है। उम्मीदवारों को पहले बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से गुजरना होगा इसके बाद एडमिट कार्ड की स्कैनिंग की जाएगी और अंत में हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर के जरिए तलाशी ली जाएगी। इन सभी चरणों से गुजरने के बाद ही उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा।

    परीक्षा प्रबंधन के अनुसार हर उम्मीदवार की जांच में लगभग 5 से 7 मिनट का समय लग सकता है इसलिए सभी अभ्यर्थियों को निर्देश दिया गया है कि वे परीक्षा शुरू होने से कम से कम 90 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचें। इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले केंद्र के प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे और इसके बाद किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

    केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ साथ अनुशासन बनाए रखने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों के बाहर और अंदर वर्जित वस्तुओं की सूची चस्पा की गई है ताकि उम्मीदवार पहले से ही सतर्क रहें और किसी भी प्रकार की परेशानी से बच सकें।

    प्रशासन का कहना है कि इन सख्त नियमों का उद्देश्य परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और नकल की घटनाओं को देखते हुए इस बार कोई भी लापरवाही नहीं बरती जा रही है।

    कुल मिलाकर MPPSC की यह परीक्षा न केवल अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि प्रशासन के लिए भी एक बड़ी जिम्मेदारी है जिसमें सुरक्षा और व्यवस्था दोनों पर खास ध्यान दिया जा रहा है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे सभी नियमों का पालन करें और समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचकर अपनी तैयारी को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करें।