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  • आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा: नौ अस्पताल सस्पेंड, 28 पर कार्रवाई की तैयारी

    आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा: नौ अस्पताल सस्पेंड, 28 पर कार्रवाई की तैयारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस नीति अब सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर भी दिखाई दे रही है। श्योपुर जिले में कलेक्टर अर्पित वर्मा के नेतृत्व में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ एक जबरदस्त अभियान चलाया गया है जिससे कॉलोनी माफिया की कमर टूट गई है। प्रशासन ने श्योपुर जैदा और जाटखेड़ा क्षेत्रों में पांच अवैध कॉलोनियों पर एक साथ बुलडोजर कार्रवाई की और यह स्पष्ट कर दिया कि अब अवैध कॉलोनी विकास और सरकारी भूमि के गलत इस्तेमाल को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।शनिवार को प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों में बनी सड़कें सीसी रोड और आंतरिक मार्ग ध्वस्त किए और जमीन की बुनियाद पर सीधा वार किया। इस कार्रवाई के दौरान एसडीएम श्योपुर गगन सिंह मीणा तहसीलदार मनीषा मिश्रा और पूरा राजस्व अमला मौके पर मौजूद था।

    शांतिपूर्ण लेकिन सख्त कार्रवाई

    काफी पुलिस बल की मौजूदगी में यह कार्रवाई शांतिपूर्ण लेकिन सख्त रही। तहसीलदार मनीषा मिश्रा ने बताया कि जैदा के सर्वे क्रमांक 75/8 पर अवैध कॉलोनी में बने मार्ग तोड़े गए जबकि जाटखेड़ा में अवैध सीसी सड़कें और रास्ते ध्वस्त किए गए। इसके अलावा श्योपुर कस्बे में पंजाब नेशनल बैंक के पीछे और अस्पताल के पास बने अवैध कॉलोनी के निर्माणों को भी तोड़ा गया।

    कलेक्टर ने 23 कॉलोनियों को रडार पर लिया

    कलेक्टर अर्पित वर्मा ने जिले की 23 कॉलोनियों को संदेह के घेरे में लिया है। उन्होंने एसडीएम श्योपुर को इन कॉलोनियों की जांच के निर्देश दिए हैं जो जमीन पर जाकर हर पहलू की पड़ताल करेंगे। यह जांच कागजी नहीं होगी और इसमें भूमि के मूल स्वरूप कॉलोनी विकास अनुमति ड्रेनेज मार्गों पर अतिक्रमण वृक्षों की अवैध कटाई और प्लॉट विक्रय जैसे सभी बिंदुओं की गहन जांच होगी।

    दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

    कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि यदि किसी कॉलोनी में अवैध गतिविधियाँ पाई जाती हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए एक जिला कॉलोनी सेल का गठन किया गया है जो अवैध कॉलोनियों की जांच करेगी और आम जनता को यह जानकारी देगी कि कौन सी कॉलोनी वैध है और कौन सी अवैध।

    रजिस्ट्री-नामांतरण पर प्रतिबंध

    कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए हैं कि बिना कॉलोनी विकास अनुमति या नियमितीकरण प्रमाणपत्र के किसी भी भूखंड की रजिस्ट्री और नामांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध होगा। संबंधित सर्वे नंबरों पर अवैध कॉलोनियों की प्रविष्टि की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार का क्रय-विक्रय संभव न हो सके। इस निर्णय से कॉलोनी माफिया को बड़ा झटका लगा है क्योंकि यह उनके व्यापार को सीधा नुकसान पहुंचाएगा।

  • धार में भूमि पूजन देश का पहला पीपीपी मॉडल मेडिकल कॉलेज बनेगा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वास्थ्य क्रांति का केंद्र

    धार में भूमि पूजन देश का पहला पीपीपी मॉडल मेडिकल कॉलेज बनेगा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वास्थ्य क्रांति का केंद्र


    धार । मध्य प्रदेश के धार जिले में मंगलवार को एक ऐतिहासिक अवसर आया जब देश के पहले पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के मेडिकल कॉलेज का भूमि पूजन हुआ। इस ऐतिहासिक समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने प्रमुख रूप से हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यह मेडिकल कॉलेज अपने आप में एक अनोखा प्रयास है जो केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह मेडिकल कॉलेज ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देने का काम करेगा।

    नड्डा ने इस मौके पर बताया कि यह मेडिकल कॉलेज पब्लिक और प्राइवेट क्षेत्र की साझेदारी से बनाया जा रहा है और यह देश में अपनी तरह का पहला संस्थान है। उन्होंने यह भी कहा कि धार में स्थापित होने वाला यह मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य सेवा में क्रांति लाएगा। यहां से पास होने वाले एमबीबीएस डॉक्टर देश के दूरदराज के गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगे जिससे ग्रामीण इलाकों में चिकित्सकीय सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।

    इस परियोजना के तहत छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दी जाएगी और उन्हें प्रैक्टिकल अनुभव के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा जाएगा जिससे वे वहां के स्वास्थ्य मुद्दों को समझकर समाधान ढूंढ सकें। साथ ही कॉलेज के निर्माण से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे जिससे जिले की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।

    इस योजना के सफल होने के बाद इसे दूसरे राज्यों में भी लागू किया जा सकता है जिससे भारत के अन्य क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके। इस पहल से यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी को दूर किया जाएगा और गांवों में अधिक से अधिक डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने संबोधन में बताया कि यह मेडिकल कॉलेज न केवल शिक्षा का केंद्र बनेगा बल्कि यह धार जिले और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक स्वस्थ भविष्य का मार्गदर्शन करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट के जरिए प्रदेश में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा प्राप्त होगी।

  • पूर्व विधायक के पोते पर जूनियर डॉक्टरों का हमला शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में हंगामा

    पूर्व विधायक के पोते पर जूनियर डॉक्टरों का हमला शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में हंगामा


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के बाहर चाय की दुकान पर पूर्व विधायक ओम प्रकाश खटीक के पोते देबू खटीक और उनके साथ भाजपा नेता प्रशांत राठौर और कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष के बेटे नलिन पंडित पर जूनियर डॉक्टरों ने हमला कर दिया। यह घटना तब हुई जब ये तीनों युवक चाय पीने पहुंचे थे और जूनियर डॉक्टरों के साथ उनकी किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी।

    पुलिस के अनुसारविवाद की शुरुआत तब हुई जब जूनियर डॉक्टर अपनी एप्रेन एक कुर्सी पर रखकर चाय पी रहे थे। युवकों ने एप्रेन हटाने के लिए कहालेकिन जब डॉक्टरों ने ऐसा करने से मना कियातो दोनों पक्षों के बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई। इसके बादजूनियर डॉक्टरों ने मिलकर युवकों पर हमला कर दिया।

    युवक अपनी जान बचाने के लिए वहां से कार में भागेलेकिन जूनियर डॉक्टरों ने उनका पीछा किया और कार पर पथराव कर दिया। इस हमले में कार का कांच टूट गया और गेट भी डेमेज हो गए। पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी है।

    घटना के बादजूनियर डॉक्टरों का एक दल कोतवाली थाने पहुंचाजहां उन्होंने अपनी ओर से बयान दिया कि युवकों ने पहले कुछ डॉक्टरों से मारपीट की थी। पुलिस ने पूछा कि अगर वे घायल थे तो वे थाने क्यों नहीं आएलेकिन इस पर जूनियर डॉक्टर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई जो पुलिस की मध्यस्थता से अधिक बढ़ नहीं पाई।

    टीआई कृपाल सिंह राठौड़ ने डॉक्टरों से समझाइश देने की कोशिश की और कहा कि इस तरह के बेवजह के झगड़े ठीक नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो पुलिस एफआईआर भी दर्ज कर सकती है। इस पर जूनियर डॉक्टरों ने कड़ी आवाज में प्रतिक्रिया दी कि क्रिया की प्रतिक्रिया तो होगीचाहे फिर कुछ भी हो। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों को सुरक्षा के लिए कोतवाली में बिठा लिया। इस घटना से मेडिकल कॉलेज परिसर में तनाव का माहौल बन गया हैऔर पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

  • छिंदवाड़ा में कानून की धज्जियाँ जन्मदिन पर तलवार लहराते युवक का वायरल वीडियो कोर्ट परिसर में पुलिसकर्मी के साथ बनाई रील

    छिंदवाड़ा में कानून की धज्जियाँ जन्मदिन पर तलवार लहराते युवक का वायरल वीडियो कोर्ट परिसर में पुलिसकर्मी के साथ बनाई रील


    छिंदवाड़ा । मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा शहर के कुण्डीपुरा थाना क्षेत्र में एक युवक का जन्मदिन पार्टी के दौरान तलवार लहराते हुए वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो ने एक बार फिर शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वीडियो में युवक तेज संगीत पर अपने दोस्तों के साथ नाचते हुए खुलेआम तलवार लहरा रहा है जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया है। यह वीडियो इंस्टाग्राम पर ‘सुमित मालवी’ नाम की एक आईडी से पोस्ट किया गया था और इसके बाद से यह शहर भर में चर्चा का विषय बन गया। विशेष रूप से रिहायशी इलाके में इस तरह के हथियारों का प्रदर्शन स्थानीय लोगों में डर और चिंता का कारण बन रहा है।

    दूसरी ओर हैरान करने वाली बात यह है कि युवक का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें वह छिंदवाड़ा जिला न्यायालय परिसर के भीतर एक पुलिसकर्मी के साथ रील बनाता हुआ नजर आ रहा है। इस वीडियो में बैकग्राउंड में गाने के बोल हैं  कचहरी अपना ठिकाना है” और कोतवाली से रिश्ता पुराना है जो उसकी बेखौफ मानसिकता को उजागर करता है।इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पुलिस का कहना है कि यह घटना कानून और व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती पेश करती है। पुलिस ने इंस्टाग्राम आईडी के आधार पर युवक की पहचान शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक रूप से हथियारों का प्रदर्शन और प्रतिबंधित क्षेत्रों में इस तरह की रील बनाने के लिए युवक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने यह भी दर्शाया कि युवा वर्ग में कानून के प्रति कितनी लापरवाही और बेखौफ मानसिकता फैल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ समाज में असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं और पुलिस प्रशासन को इसे सख्ती से नियंत्रित करना चाहिए।

  • MP पुलिस को बड़ी सफलता बालाघाट के जंगल से नक्सलियों का ₹11.57 लाख का 'खजाना' और भारी हथियार बरामद

    MP पुलिस को बड़ी सफलता बालाघाट के जंगल से नक्सलियों का ₹11.57 लाख का 'खजाना' और भारी हथियार बरामद


    बालाघाट । मध्य प्रदेश पुलिस को यह बड़ी सफलता आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिली गोपनीय जानकारियों के आधार पर प्राप्त हुई है। बालाघाट पुलिस ने एक प्रेस नोट में बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों से उनके सहयोगियों और जंगल में छिपाए गए डंप गुप्त ठिकाने के संबंध में लगातार पूछताछ की जा रही थी इसी पूछताछ के आधार पर बालाघाट के विभिन्न जंगलों में छिपाकर रखे गए ₹11 57 385/- ग्यारह लाख सत्तावन हजार तीन सौ पचासी रुपये नगद की बरामदगी की गई। पुलिस के अनुसार यह बालाघाट क्षेत्र में नक्सलियों से की गई अब तक की सबसे बड़ी कैश रिकवरी है।
    भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक जब्त
    नगदी के अलावा आत्मसमर्पण किए हुए नक्सलियों की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल के डंप से भारी मात्रा में युद्ध सामग्री भी जब्त की है। बरामदगी में निम्नलिखित प्रमुख सामग्रियां शामिल हैं
    श्रेणीबरामदगी की संख्या/मात्राराइफल4 सेमी-ऑटोमैटिक राइफल 1 बोल्ट एक्शन राइफल 8 पम्प एक्शन सिंगल शॉट राइफलविशेष हथियार1 ग्रेनेड लॉन्चर1 हैंड मेड देशी कट्टागोला-बारूद451 राउंड कारतूस 26 मैगजीनविस्फोटक/IED16 किलो विस्फोटक सामग्री 5 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर 500 ग्राम बारूद 1 क्लेमोर माइन्स पाइपइलेक्ट्रॉनिक सामान4 मोटोरोला मैन पैक सेट 1 कैमरा 1 वोल्ट मीटर 4 बैटरी सेल अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसअन्य सामग्री22 नग मेटल स्पाइक्स 2 किलो बोल्ट व छर्रे इसके अतिरिक्त पुलिस को नक्सल वर्दी पिड्डु बैग टेंट बनाने का सामान राशन सामग्री हथियार मेंटेनेंस सामग्री ड्रिल मशीन और महत्वपूर्ण नक्सल साहित्य भी प्राप्त हुआ है।

    नक्सल विरोधी अभियान को मिली गति

    यह सफलता ऐसे समय में मिली है जब मध्य प्रदेश में नक्सल विरोधी अभियान निर्णायक दौर में है। हाल ही में मुठभेड़ में मारे जाने के डर से मध्य प्रदेश में बचे हुए अंतिम 2 नक्सलियों पक उर्फ सुधाकर और ACM रोहित उर्फ मंगलू ने 11 दिसंबर को शासन की नीतियों पर विश्वास जताते हुए आत्मसमर्पण किया था। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में इस साल अब तक सबसे ज्यादा 13 हार्डकोर सशस्त्र वर्दीधारी नक्सलियों ने संविधान के प्रति निष्ठा जताते हुए आत्मसमर्पण किया है। वहीं सुरक्षाबलों द्वारा 10 हार्डकोर नक्सलियों को धराशायी भी किया गया है। बालाघाट पुलिस की यह कार्रवाई राज्य में नक्सलवाद की कमर तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

  • माओवादियों को बड़ा झटका: MMC ज़ोन कमांडर समेत दो ACM का सरेंडर 20 लाख का इनाम था घोषित

    माओवादियों को बड़ा झटका: MMC ज़ोन कमांडर समेत दो ACM का सरेंडर 20 लाख का इनाम था घोषित


    नई दिल्ली महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ MMC ज़ोन में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। दर्रेकसा एरिया कमेटी के कमांडर रोशन उर्फ मारा इरिया वेदजा और दो ACM एरिया कमेटी मेंबर ने गोंदिया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन तीनों पर कुल ₹20 लाख का इनाम था।  महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ MMC ट्राई-जंक्शन पर सक्रिय माओवादी संगठन को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दर्रेकसा एरिया कमेटी के कमांडर समेत कुल तीन प्रमुख माओवादी कैडरों ने महाराष्ट्र के गोंदिया पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिए हैं।
    आत्मसमर्पण करने वाले इन तीनों माओवादियों पर कुल ₹20 लाख रुपये का नकद इनाम घोषित था जो इनकी संगठनात्मक महत्ता को दर्शाता है। यह आत्मसमर्पण तीनों राज्यों महाराष्ट्र मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता है जो लंबे समय से इन क्षेत्रों में शांति बहाली के लिए प्रयासरत थीं।आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख माओवादी कैडर समर्पण करने वाले माओवादी दर्रेकसा एरिया कमेटी के प्रमुख सदस्य थे। इनमें निम्नलिखित लोग शामिल हैं:

    रोशन उर्फ मारा इरिया वेदजा 35:

    पद: दर्रेकसा एरिया कमेटी का कमांडर।मूल निवास: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का मेंदरी गांव।इनाम राशि: ₹8 लाख रुपये घोषित। सुभाष उर्फ पोज्जा बंडू राववा 26: पद: एरिया कमेटी मेंबर ACM। मूल निवास: बीजापुर जिले की उसूर तहसील का वेरापल्ली गांव। इनाम राशि: ₹6 लाख रुपये घोषित। रतन उर्फ मनकू ओमा पोय्याम 25: पद: एरिया कमेटी मेंबर ACM। मूल निवास: नारायणपुर जिले का रेखापाल गांव। इनाम राशि: ₹6 लाख रुपये घोषित।तीनों माओवादियों ने गोंदिया में पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर विधिवत आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि इन कैडरों ने माओवादी संगठन के भीतर बढ़ती असुरक्षा पुलिस और सुरक्षा बलों की लगातार और प्रभावी कार्रवाई तथा मुख्यधारा में लौटने की प्रबल इच्छा के कारण यह निर्णय लिया। सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर अब ये सामान्य जीवन जी सकेंगे।

    MMC ज़ोन में समर्पण की लहर
    यह आत्मसमर्पण MMC ज़ोन में चल रहे व्यापक आत्मसमर्पण अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। हाल के सप्ताहों में माओवादी कैडरों द्वारा मुख्यधारा में लौटने के मामलों में तेजी आई है जो सुरक्षा एजेंसियों के बढ़ते दबाव और सामुदायिक सहयोग का परिणाम है: 28 नवंबर का बड़ा सरेंडर: इससे पहले माओवादियों की एमएमएसी ज़ोन के प्रवक्ता और जेआरबी डिवीजन के इंचार्ज विकास नागपुरे उर्फ रमेश सय्याना भास्कर समेत दस अन्य माओवादियों ने भी गोंदिया पुलिस के सामने समर्पण किया था। 7 दिसंबर की कार्रवाई: 7 दिसंबर को भी 11 माओवादियों ने बालाघाट पुलिस मध्य प्रदेश के सामने हथियार डाले थे।

    8 दिसंबर की ऐतिहासिक सफलता: सबसे बड़ी कामयाबी 8 दिसंबर को छत्तीसगढ़ की सुरक्षा एजेंसियों को मिली जब माओवादियों के शीर्ष लीडर एक करोड़ पांच लाख रुपये के इनामी रामधेर और उनके 11 साथियों ने अविभाजित राजनांदगांव जिले में समर्पण किया। इन लगातार सफलताओं के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि MMC ज़ोन में माओवादी हिंसकों के मुख्यधारा में लौटने का यह आखिरी दौर शुरू हो चुका है। पुलिस सूत्रों के अनुसार अब इस पूरे ज़ोन में केवल एक माओवादी रंजीत ही शेष बचा है और सुरक्षा एजेंसियां जल्द ही उसके भी समर्पण किए जाने का दावा कर रही हैं।यह घटना न केवल माओवादी संगठन की कमर तोड़ने का काम करती है बल्कि यह भी स्थापित करती है कि सरकार की पुनर्वास नीतियां माओवादियों को हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं जिससे इन क्षेत्रों में विकास और शांति की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।

  • दमोह में दिल दहला देने वाला हादसा: चूल्हे की चिंगारी से झोपड़ी में लगी आग, 4 महीने के मासूम की जिंदा जलकर मौत

    दमोह में दिल दहला देने वाला हादसा: चूल्हे की चिंगारी से झोपड़ी में लगी आग, 4 महीने के मासूम की जिंदा जलकर मौत


    मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है जहां एक छोटी-सी लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली। देहात थाना क्षेत्र के ग्राम बांसातारखेड़ा के चिथरयाऊ टोला में खेत पर बनी कच्ची झोपड़ी में आग लगने से चार महीने के मासूम बच्चे की जिंदा जलकर मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजन गहरे सदमे में हैं।

    खेत में काम कर रहे थे माता-पिता

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बांसातारखेड़ा निवासी जितेंद्र गौंड गांव के ही किसान शैलेंद्र तिवारी के खेत में सिंचाई का ठेका लेकर काम करता था। खेत की देखरेख के लिए उसने वहीं एक अस्थायी झोपड़ी बना रखी थी, जहां वह अपने परिवार के साथ रहता था।शनिवार की रात जितेंद्र अपनी पत्नी धनाबाई के साथ खेत में पानी देने गया हुआ था। इस दौरान उनका चार महीने का बेटा निशांत झोपड़ी के अंदर सो रहा था। झोपड़ी में चूल्हा जल रहा था जिस पर खाना बनाया गया था।

    चूल्हे की चिंगारी बनी काल
    बताया जा रहा है कि रात के समय चूल्हे से निकली एक चिंगारी झोपड़ी में रखे कपड़ों पर गिर गई। देखते ही देखते आग भड़क उठी। झोपड़ी कच्ची होने और आसपास सूखी घास व अन्य ज्वलनशील सामग्री मौजूद होने के कारण आग ने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया। आग लगने के बाद झोपड़ी के अंदर सो रहा मासूम जोर-जोर से रोने लगा। उसकी चीखें सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीणों ने शोर मचाया और माता-पिता को सूचना दी।

    अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ा दम

    ग्रामीणों की आवाज सुनते ही जितेंद्र और धनाबाई दौड़ते हुए झोपड़ी की ओर पहुंचे। किसी तरह आग की लपटों के बीच से वे अपने झुलसे हुए बच्चे को बाहर निकाल पाए। आनन-फानन में मासूम को इलाज के लिए जिला अस्पताल दमोह ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इस हादसे में पूरी झोपड़ी जलकर खाक हो गई। परिवार के पास रहने और खाने तक का सामान भी नहीं बचा।

    प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची
    घटना की सूचना मिलते ही देहात थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। देर रात एएसपी सुजीत सिंह भदोरिया, दमोह एसडीएम आर.एल. बागरी और पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। नगर पुलिस अधीक्षक एच.आर. पांडेय ने बताया कि यह एक दुर्घटनाजन्य मामला प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    पोस्टमार्टम के बाद सौंपा जाएगा शव

    मासूम के शव को जिला अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखवाया गया है। प्रशासन के अनुसार, रविवार को तहसीलदार की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। घटना के बाद से परिजन गहरे सदमे में हैं और रात में ही अपने गांव लौट गए थे।

    पीड़ित परिवार को मिलेगी आर्थिक सहायता

    दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने बताया कि घटना बेहद दुखद है। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही शासन की योजनाओं के तहत मिलने वाली मदद भी सुनिश्चित की जाएगी। देहात थाना प्रभारी रचना मिश्रा ने कहा कि मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण चूल्हे की चिंगारी ही सामने आया है।

    गांव में शोक का माहौल

    इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है। हर कोई इस बात से आहत है कि महज चार महीने का मासूम इस तरह काल का शिकार हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में बनी कच्ची झोपड़ियों में आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन मजबूरी में लोग वहीं रहने को विवश होते हैं।

  • मंत्री विजय शाह का वायरल बयान 50 हजार लाड़ली बहनें CM के सम्मान कार्यक्रम में आएंन आने पर आधार लिंक चेक कराएं'

    मंत्री विजय शाह का वायरल बयान 50 हजार लाड़ली बहनें CM के सम्मान कार्यक्रम में आएंन आने पर आधार लिंक चेक कराएं'


    रतलाम । मध्य प्रदेश के वनपर्यावरण एवं प्रभारी मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह अपने सख्त तेवरों और अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के कारण सुर्खियों में हैं। रतलाम में आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की पहली बैठक में दिए गए उनके निर्देश का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    लाड़ली बहनों को कार्यक्रम में लाने का निर्देश

    यह बैठक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मान समारोह की तैयारियों को लेकर आयोजित की गई थी। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुई इस बैठक मेंमंत्री शाह ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी से जिले में लाड़ली बहनों की संख्या के बारे में जानकारी ली। जब अधिकारी ने बताया कि जिले में लाभार्थियों की संख्या लगभग 2.5 लाख हैतो मंत्री डॉ. शाह ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम में कम से कम 50 हजार लाड़ली बहनें तो आ ही जानी चाहिए।

    मंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अगर ये नहीं आती हैं तो इनके आधार लिंक आदि की जांच कराएं। हालांकिउन्होंने यह भी जोड़ा कि वे ज्यादा परेशान भी नहीं करना चाहते। मंत्री का यह बयान राज्य की सबसे बड़ी लाभार्थी योजना ‘लाड़ली बहना योजना’ के हितग्राहियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों पर डाले गए दबाव को दर्शाता है।

    अनुपस्थित अधिकारियों पर फूटा गुस्सा

    बैठक में मंत्री डॉ. शाह ने केवल कार्यक्रम की तैयारियों पर ही सख्ती नहीं दिखाईबल्कि बैठक से कई विभागों के अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारियों की गैर मौजूदगी को मंत्री शाह ने गंभीरता से लिया। उन्होंने क्रमवार जानकारी लेते हुए अपने निजी सहायक पीए को अनुपस्थित अधिकारियों की सूची बनाने का निर्देश दिया।
    मंत्री की नाराज़गी तब और बढ़ गई जब अक्षय ऊर्जा विभाग की ओर से बैठक में एक वरिष्ठ अधिकारी के बजाय मैकेनिक को भेज दिया गया।
    डॉ. शाह ने अपनी तीस वर्षों की राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए सख्त लहजे में कहा 30 साल से मंत्री हूंहल्के में ले रहे हो। मंत्री का यह बयान स्पष्ट करता है कि वह प्रशासनिक लापरवाही और महत्वपूर्ण बैठकों में अधिकारियों की गैर-जिम्मेदारी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों के सामने अधिकारियों को यह स्पष्ट संदेश दिया कि उन्हें शासकीय कार्यों और बैठकों को प्राथमिकता देनी होगी।

  • ग्वालियर में आत्महत्या की घटनाओं की श्रृंखला: एक प्रधान आरक्षक सहित तीन मामलों से सनसनी

    ग्वालियर में आत्महत्या की घटनाओं की श्रृंखला: एक प्रधान आरक्षक सहित तीन मामलों से सनसनी


    ग्वालियर ।ग्वालियर शहर और उसके सीमावर्ती क्षेत्रों से हाल ही में आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयास की तीन अलग-अलग घटनाओं की खबर आई है जिन्होंने स्थानीय निवासियों और पुलिस विभाग के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। ये मामले अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दर्ज किए गए हैं और पुलिस अब इन घटनाओं के पीछे के कारणों की गहराई से जांच कर रही है।

    प्रधान आरक्षक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

    सबसे चौंकाने वाली घटना ग्वालियर पुलिस लाइन में हुई जहां थाटीपुर थाना में पदस्थ प्रधान आरक्षक दीपक श्रीवास ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। यह दुखद घटना बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस लाइन में स्थित उनके सरकारी क्वार्टर में हुई।जानकारी के अनुसार प्रधान आरक्षक दीपक श्रीवास ने अपने क्वार्टर में फांसी लगाई। घटना के बाद परिवार के सदस्य उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह घटना पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी क्षति है और इसने अन्य पुलिसकर्मियों को भी स्तब्ध कर दिया है।

    बहोड़ापुर पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। हालांकि प्रधान आरक्षक द्वारा इतना बड़ा कदम उठाने के पीछे का वास्तविक कारण अभी तक साफ नहीं हो पाया है। पुलिस की प्राथमिक जांच जारी है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है जिससे मृत्यु के कारणों और परिस्थितियों के बारे में अधिक जानकारी मिल सके।

    फोन पर बहस के बाद युवक ने किया आत्महत्या का प्रयास

    दूसरी घटना भितरवार नगर के वार्ड 4 की है जहां एक 24 वर्षीय युवक शाहिद खान ने आत्महत्या का प्रयास किया। यह घटना शनिवार की शाम करीब 7:30 से 8:00 बजे के बीच हुई। परिजनों के अनुसार यह कदम युवक ने फोन पर किसी से हुई तीखी बहस के बाद उठाया। बहस के तुरंत बाद शाहिद खान अपने कमरे में गया अंदर से दरवाजा बंद किया और फांसी का फंदा गले में डालकर झूल गया।

    घर में मौजूद परिजनों ने जब उसे फंदे पर लटका देखा तो उन्होंने तुरंत दरवाजा खोलने की कोशिश की लेकिन असफल रहे। इसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। भितरवार पुलिस ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद दरवाजा खोला और युवक को अचेत अवस्था में फंदे से नीचे उतारा। उसे तुरंत सामुदायिक अस्पताल पहुंचाया गया। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर कर दिया। युवक की स्थिति में सुधार होने पर ही पुलिस उसके द्वारा उठाए गए इस कदम के बारे में पूरी जानकारी जुटा पाएगी।

    मेला ग्राउंड में अज्ञात युवक का शव लटका मिला

    तीसरा मामला ग्वालियर के मेला ग्राउंड से सामने आया है जहां एक अज्ञात युवक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में लटका हुआ पाया गया है। यह घटना गोला का मंदिर थाना क्षेत्र की है। युवक का शव दोपहर करीब तीन बजे बाल रेल की पटरी के पास बने भवन के लोहे के एंगल से लटका हुआ मिला। राहगीरों ने जब यह दृश्य देखा तो इलाके में सनसनी फैल गई और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।

    गोला का मंदिर थाना प्रभारी हरेंद्र शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को नीचे उतारा। पुलिस को आत्महत्या की आशंका है। मृतक के कपड़ों की तलाशी ली गई लेकिन पुलिस को ऐसी कोई वस्तु या दस्तावेज नहीं मिला जिससे उसकी शिनाख्त हो सके। युवक की उम्र 35 से 40 वर्ष के बीच लग रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया है और उसकी शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। सभी संबंधित थानों को भी इस संबंध में सूचना दी गई है ताकि गुमशुदा व्यक्तियों के रिकॉर्ड से मिलान किया जा सके। शिनाख्त होने के बाद ही पोस्टमार्टम किया जाएगा और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू होगी।

  • रतलाम मंडी में प्याज की छटनी को लेकर किसान-व्यापारी के बीच विवादनीलामी हुई रद्द

    रतलाम मंडी में प्याज की छटनी को लेकर किसान-व्यापारी के बीच विवादनीलामी हुई रद्द


    रतलाम । रतलाम के महू रोड स्थित कृषि उपज मंडी में गुरुवार सुबह एक बड़ा विवाद हुआ। प्याज की नीलामी के बाद छटनी के दौरान किसान और व्यापारी के बीच तीखी बहस और गाली-गलौज हुईजिससे स्थिति बिगड़ गई। इस विवाद ने मंडी में कामकाज ठप कर दिया और सभी व्यापारियों ने नीलामी रोकने का फैसला किया। नीलामी रुकने से मंडी में हलचल मच गई और व्यापारियों ने अपना विरोध मंडी सचिव के पास पहुंचकर दर्ज कराया।

    यह घटना करीब 11 बजे हुई जब प्याज की नीलामी के बाद छटनी की प्रक्रिया शुरू हुई। सांवरिया ट्रेडर्स डीएम में व्यापारी और किसान के बीच प्याज की गुणवत्ता और मूल्य को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए। गाली-गलौज तक पहुंचने के बाद व्यापारियों ने नीलामी रोक दी और विरोध जताया।

    सूत्रों के अनुसारकिसान ने बाद में अपने व्यवहार के लिए माफी भी मांगीलेकिन व्यापारी इस मामले में संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने मंडी सचिव के कार्यालय पहुंचकर इस विवाद को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। इस दौरान मंडी सचिव लक्ष्मी भंवर और अन्य अधिकारी इस विवाद को शांत करने के लिए दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश करते रहे।

    इस मामले मेंव्यापारी और किसान के बीच पारदर्शी और उचित व्यापारिक प्रथाओं की आवश्यकता को लेकर सवाल उठे हैं। छटनी के दौरान उचित व्यवहार और सम्मान का अभाव होने के कारण विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकिमंडी प्रशासन ने स्थिति को सामान्य बनाने के लिए प्रयास जारी रखा।

    मंडी अधिकारियों का प्रयास

    मंडी सचिव लक्ष्मी भंवर ने किसान और व्यापारियों को शांत करने और आपसी तालमेल स्थापित करने के लिए कई बार संवाद का प्रयास किया। अधिकारियों ने भी इस मुद्दे पर विचार करते हुए किसानों और व्यापारियों के बीच समझौता करने की कोशिश की। हालांकिस्थिति कुछ समय तक तनावपूर्ण रहीलेकिन मंडी अधिकारियों की कोशिशों से अंततः कुछ हद तक स्थिति पर काबू पाया गया।

    मंडी के कामकाज पर असर

    इस विवाद का असर मंडी के सामान्य कामकाज पर पड़ा। नीलामी रुकने से कई व्यापारियों और किसानों को आर्थिक नुकसान हुआसाथ ही समय भी नष्ट हुआ। इस तरह के विवादों से न केवल मंडी की छवि पर बुरा असर पड़ता हैबल्कि किसानों और व्यापारियों के बीच आपसी विश्वास भी कमजोर होता है।

    भविष्य में समाधान की आवश्यकता

    इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मंडी में पारदर्शिता और उचित व्यापारिक प्रक्रिया की जरूरत है। किसान और व्यापारी दोनों के लिए एक ऐसे माहौल की आवश्यकता हैजिसमें उनके अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट हों और वे एक दूसरे के साथ सम्मानजनक तरीके से पेश आएं।

    इसके अलावामंडी प्रशासन को इस तरह के विवादों से बचने के लिए ठोस कदम उठाने होंगेताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों का सामना न करना पड़े। समय रहते यदि उचित कदम नहीं उठाए गएतो ऐसी घटनाएं किसानों और व्यापारियों के बीच और मंडी के कामकाज में और समस्याएं पैदा कर सकती हैं।

    रतलाम मंडी में प्याज की नीलामी को लेकर हुए विवाद ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि किसानों और व्यापारियों के बीच आपसी तालमेल कितना महत्वपूर्ण है। मंडी प्रशासन को इस मुद्दे को लेकर जल्द से जल्द समाधान ढूंढना होगाताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके और मंडी में कामकाज को सुचारु रूप से चलाया जा सके।