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  • हर-हर महादेव से गूंजा मध्य प्रदेश, महाकाल से ओंकारेश्वर तक विशेष पूजा; 6 क्विंटल फूलों से सजे भोजेश्वर के होंगे भव्य दर्शन

    हर-हर महादेव से गूंजा मध्य प्रदेश, महाकाल से ओंकारेश्वर तक विशेष पूजा; 6 क्विंटल फूलों से सजे भोजेश्वर के होंगे भव्य दर्शन


    उज्जैन सावन के चौथे और आखिरी सोमवार पर मध्य प्रदेश के शिवालयों में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। सुबह से ही उज्जैन से लेकर ओंकारेश्वर भोजपुर टीकमगढ़ इंदौर मंदसौर और ग्वालियर तक शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं। हर तरफ हर हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंज रहे हैं। भगवान शिव के प्रिय सावन महीने के अंतिम सोमवार को लेकर मंदिरों में विशेष पूजा अभिषेक और आकर्षक श्रृंगार किया गया है।

    उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में सोमवार तड़के भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट 2:30 बजे खोल दिए गए। परंपरा के अनुसार सभा मंडप में भगवान शिव के गण वीरभद्र के कान में स्वस्ति वाचन कर बाबा की आज्ञा ली गई। इसके बाद चांदी का पट खोलकर कर्पूर आरती की गई। नंदी हॉल में नंदी का स्नान ध्यान और पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध दही घी शक्कर शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष पूजन हुआ।

    भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का बेहद आकर्षक श्रृंगार किया गया। भगवान को रजत चंद्र त्रिशूल मुकुट और अन्य आभूषण धारण कराए गए। भांग चंदन और ड्रायफ्रूट से श्रृंगार करने के बाद भस्म अर्पित की गई। बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट रजत की मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। फूलों की माला से भी भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। फल और मिठाई का भोग लगाया गया। बाबा के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

    महाकाल मंदिर में आज शाम 4 बजे बाबा की राजसी सवारी भी निकलेगी। पूजा अर्चना के बाद भगवान महाकाल को पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण कराया जाएगा। सवारी में भगवान के अलग अलग स्वरूपों के दर्शन होंगे। चंद्रमौलेश्वर पालकी में मनमहेश गजराज पर शिव तांडव गरुड़ रथ पर और उमा महेश नंदी रथ पर विराजमान होंगे। घुड़सवार पुलिस दल सशस्त्र बल होमगार्ड भजन मंडलियां और पुलिस बैंड सवारी का हिस्सा होंगे। रामघाट पर शिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन किया जाएगा।

    ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। यहां बाबा का रुद्राभिषेक और विशेष पूजन किया जा रहा है। शाम को भगवान ओंकारेश्वर का नौका विहार होगा। पारंपरिक सवारी के दौरान हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की जाएगी। सवारी में पुलिस बैंड सात ढोल बैंड और धार्मिक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

    भोजपुर के ऐतिहासिक भोजेश्वर महादेव मंदिर में भी सावन के अंतिम सोमवार को विशेष आयोजन हुआ। यहां भगवान भोजेश्वर महादेव को महाकालेश्वर स्वरूप में सजाया गया है। भोलेनाथ का करीब 6 क्विंटल फूलों से भव्य श्रृंगार किया गया। टीकमगढ़ के शिवधाम कुंडेश्वर में रिमझिम बारिश के बीच श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। इंदौर के गेंदेश्वर महादेव मंदिर में प्रतीकात्मक रूप से 12 ज्योतिर्लिंग बनाए गए हैं जहां सुबह से भक्त दर्शन कर रहे हैं।

    मंदसौर के अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर में मंगला आरती के बाद अभिषेक और पूजन शुरू हुआ। वहीं इंदौर के पंचकुइयां स्थित प्राचीन भूतेश्वर महादेव मंदिर में बेलपत्र और फूलों से बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया। रतलाम से सांवरिया मित्र मंडल की पैदल कांवड़ यात्रा केदारेश्वर के लिए रवाना हुई है जिसमें ढोल ताशे डीजे और धार्मिक झांकियां शामिल हैं। श्योपुर में भी कांवड़िए भूतेश्वर महादेव का जलाभिषेक करेंगे।

    सावन के अंतिम सोमवार पर मध्य प्रदेश का माहौल पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है। मंदिरों में विशेष श्रृंगार से लेकर अभिषेक कांवड़ यात्राओं और भव्य सवारियों तक हर जगह श्रद्धा और उत्साह का संगम दिखाई दे रहा है। शाम को महाकाल की राजसी सवारी और ओंकारेश्वर की पारंपरिक यात्रा के साथ शिवभक्ति का यह पर्व और भव्य रूप लेगा।

  • बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे कार्तिक आर्यन, नंदी के कान में कही मनोकामना; भस्म आरती में शामिल हुए ओडिशा के मंत्री

    बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे कार्तिक आर्यन, नंदी के कान में कही मनोकामना; भस्म आरती में शामिल हुए ओडिशा के मंत्री


    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार देर रात आस्था और श्रद्धा का विशेष माहौल देखने को मिला। बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन भगवान महाकाल के दरबार पहुंचे और रात्रिकालीन शयन आरती में शामिल होकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने बाबा महाकाल से देश-दुनिया की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। वहीं मंगलवार तड़के ओडिशा सरकार के राज्य मंत्री गोकुला नंदा ने भी प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए।

    कार्तिक आर्यन साधारण वेशभूषा में नीली जींस और सफेद शर्ट पहनकर महाकाल मंदिर पहुंचे। उन्होंने नंदी हॉल में श्रद्धाभाव से हाथ जोड़कर शयन आरती में हिस्सा लिया। पूरे समय अभिनेता पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ आरती में शामिल रहे। आरती के बाद उन्होंने परंपरा के अनुसार नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कही और भगवान महाकाल के चरणों में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    जैसे ही मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं और प्रशंसकों की नजर कार्तिक आर्यन पर पड़ी, उन्हें देखने और उनकी एक झलक पाने के लिए उत्साह बढ़ गया। हालांकि अभिनेता ने पूरी सादगी और शांत भाव से दर्शन किए तथा किसी तरह की औपचारिकता के बिना मंदिर से रवाना हो गए। उनकी मौजूदगी से मंदिर परिसर में कुछ देर तक खासा उत्साह बना रहा।

    कार्तिक आर्यन इन दिनों अपनी आगामी फिल्मों को लेकर भी चर्चा में हैं। उनकी आने वाली फिल्मों में फैंटेसी कॉमेडी ‘नागजिला’, एक देशभक्ति आधारित एक्शन ड्रामा और निर्देशक कबीर खान की स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म शामिल है। ‘चंदू चैंपियन’ के बाद यह उनकी अगली स्पोर्ट्स फिल्म होगी, जिसका प्रशंसकों को बेसब्री से इंतजार है।

    इधर मंगलवार तड़के ओडिशा सरकार के मत्स्य पालन एवं पशु संसाधन विकास तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गोकुला नंदा भी महाकाल मंदिर पहुंचे। उन्होंने प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर विधि-विधान से भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की और देश तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की।

    दर्शन के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से इंजीनियर शिवकांत पांडे ने राज्य मंत्री का सम्मान किया। उन्हें बाबा महाकाल का प्रसाद और सम्मान स्वरूप स्मृति-चिह्न भेंट किया गया।

    श्रावण मास के दौरान महाकाल मंदिर में देशभर से श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि, उद्योगपति, कलाकार और खिलाड़ी बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार रात अभिनेता कार्तिक आर्यन और मंगलवार सुबह ओडिशा के राज्य मंत्री की मौजूदगी ने श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण पैदा किया। महाकाल मंदिर में इन दिनों भक्ति, आस्था और धार्मिक उल्लास का माहौल चरम पर है।

  • बाबा महाकाल को चढ़े दुनिया के सबसे महंगे आम, 2.70 लाख रुपए किलो वाला मियाज़ाकी भी भोग में शामिल

    बाबा महाकाल को चढ़े दुनिया के सबसे महंगे आम, 2.70 लाख रुपए किलो वाला मियाज़ाकी भी भोग में शामिल


    उज्जैन । श्रावण मास में उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का एक अनोखा और आकर्षक दृश्य देखने को मिला। जबलपुर निवासी एवं महाकाल हाइब्रिड फार्म के संचालक संकल्प सिंह परिहार अपनी पत्नी रानी सिंह परिहार के साथ बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे और उन्होंने भगवान को दुनिया की सबसे दुर्लभ तथा महंगी किस्मों के आम भोग स्वरूप अर्पित किए। इस बार भोग में कुल आठ विदेशी और प्रीमियम वैरायटी के आम शामिल रहे, जिनमें जापान का चर्चित मियाज़ाकी आम सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बना।

    संकल्प सिंह परिहार और उनकी पत्नी ने विधि-विधान से भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना करने के बाद लगभग पांच किलोग्राम वजन के आठ अलग-अलग प्रीमियम आम अर्पित किए। श्रद्धालुओं के अनुसार यह परंपरा पिछले 12 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। वर्ष 2014 से वे अपने बगीचे की पहली और सबसे श्रेष्ठ उपज सबसे पहले बाबा महाकाल को समर्पित करते हैं। उनका मानना है कि उनके 12 एकड़ में फैले महाकाल हाइब्रिड फार्म की सफलता बाबा महाकाल के आशीर्वाद का ही परिणाम है।

    इस बार चढ़ाए गए आमों में सबसे खास जापान के मियाज़ाकी प्रांत में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध किस्म मियाज़ाकी रही। इसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 2.70 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है। यह आम अपने गहरे लाल रंग, बेहतरीन मिठास, सुगंध और पोषण गुणों के कारण पूरी दुनिया में बेहद लोकप्रिय है। इसमें सामान्य आमों की तुलना में अधिक प्राकृतिक शर्करा, एंटीऑक्सीडेंट, बीटा-कैरोटीन और फोलिक एसिड पाया जाता है, जो इसे बेहद खास बनाता है।

    मियाज़ाकी के अलावा भोग में ऑस्ट्रेलिया की R2E2, अमेरिका, मलेशिया और भारत की प्रीमियम किस्मों के आम भी शामिल रहे। इनमें भारत की लोकप्रिय मल्लिका वैरायटी भी प्रमुख रही। सभी आमों का चयन विशेष रूप से उनके स्वाद, गुणवत्ता और दुर्लभता को ध्यान में रखकर किया गया।

    रानी सिंह परिहार ने बताया कि उनके लिए यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि गहरी आस्था का विषय है। उन्होंने कहा कि उनके फार्म का नाम भी महाकाल हाइब्रिड फार्म है और वे बाबा महाकाल को ही अपने बगीचे का वास्तविक स्वामी मानते हैं। इसी कारण हर वर्ष श्रावण मास में पहली और सबसे अच्छी फसल भगवान को अर्पित की जाती है। उनका विश्वास है कि महाकाल के आशीर्वाद से ही उनका बगीचा निरंतर प्रगति कर रहा है।

    श्रावण मास में बाबा महाकाल के दरबार में देश-विदेश से श्रद्धालु अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार विशेष भेंट लेकर पहुंचते हैं। इस बार दुनिया के सबसे महंगे आमों का भोग चर्चा का विषय बन गया। मंदिर में दर्शन करने आए श्रद्धालुओं ने भी इस अनोखी भेंट को आस्था और भक्ति का प्रतीक बताया।

    श्रावण के पावन अवसर पर महाकाल के चरणों में समर्पित यह विशेष भोग एक बार फिर यह संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धा में भेंट का मूल्य नहीं, बल्कि भाव का महत्व सबसे बड़ा होता है।

  • महाकाल दर्शन कर लौट रही श्रद्धालु की दर्दनाक मौत देवास में सड़क पार करते समय तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर

    महाकाल दर्शन कर लौट रही श्रद्धालु की दर्दनाक मौत देवास में सड़क पार करते समय तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर


    देवास । महाकाल की नगरी उज्जैन से दर्शन कर लौट रही एक श्रद्धालु की यात्रा देवास में दर्दनाक हादसे का शिकार हो गई। रविवार को सिविल लाइन थाना क्षेत्र में सड़क पार करते समय तेज रफ्तार कार की टक्कर से 65 वर्षीय महिला की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत घायल महिला को जिला अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना से महिला के परिवार और साथियों में शोक की लहर दौड़ गई।

    मृतका की पहचान खरगोन जिले के बहगांव पुनर्वास गांव निवासी गहना केवट के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार गहना केवट अपनी कुछ महिला साथियों के साथ कार से उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने गई थीं। बाबा महाकाल के दर्शन और पूजा अर्चना के बाद सभी श्रद्धालु वापस अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में देवास के सिंगावदा क्षेत्र के पास स्थित एक रेस्टोरेंट पर भोजन करने के लिए वाहन रोका गया था।

    बताया गया कि भोजन के दौरान गहना केवट सड़क पार कर रही थीं। इसी बीच तेज गति से आ रही एक कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गईं। आसपास मौजूद लोगों और उनके साथियों ने बिना देर किए उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनकी जान नहीं बच सकी।

    घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद पोस्टमार्टम कराया और शव परिजनों को सौंप दिया। हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया। हालांकि घटनास्थल से कार की नंबर प्लेट बरामद हुई है जिससे वाहन के इंदौर जिले में पंजीकृत होने की जानकारी मिली है।

    मृतका के परिजन रविंद्र ने बताया कि गहना केवट धार्मिक यात्रा पर गई थीं और परिवार को उनकी सकुशल वापसी का इंतजार था लेकिन रास्ते में हुए हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। उन्होंने दोषी चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर वाहन चालक की तलाश तेज कर दी है। पुलिस का कहना है कि नंबर प्लेट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि हादसे की पूरी परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपी चालक के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • सोमवार की भस्म आरती में दिव्य आभा से आलोकित हुए बाबा महाकाल पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप में दिए अलौकिक दर्शन

    सोमवार की भस्म आरती में दिव्य आभा से आलोकित हुए बाबा महाकाल पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप में दिए अलौकिक दर्शन


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा परिसर हर हर महादेव और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। गर्भगृह में विराजित सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन किया गया जिसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न हुआ। इसके पश्चात दूध दही घी शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से ज्योतिर्लिंग का अभिषेक किया गया। इस पावन अनुष्ठान के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया और उपस्थित श्रद्धालु शिव भक्ति में भाव विभोर नजर आए।

    पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। प्रथम घंटा बजाकर वैदिक मंत्रों के बीच हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात बाबा महाकाल के मस्तक पर भांग चंदन और त्रिपुंड अर्पित कर उन्हें दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु इस अलौकिक श्रृंगार के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते दिखाई दिए। पूरे अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना रहा।

    श्रृंगार की अगली प्रक्रिया में ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म रमाने के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट रजत मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पों से सजाया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों से सुसज्जित बाबा महाकाल का राजाधिराज स्वरूप अत्यंत मनोहारी दिखाई दिया। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया तथा विशेष आरती संपन्न हुई। इस दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।

    भस्म आरती में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन कर सुख समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। सनातन परंपरा में यह मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल मंदिर की भस्म आरती को विश्वभर के श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ देखते हैं।

    सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में इस दिन आयोजित भस्म आरती का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है जहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत स्वरूप मानी जाती है। बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन और भव्य श्रृंगार ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आस्था और विश्वास से जुड़ी यह परंपरा आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक शक्ति का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है।

  • महाकाल दरबार में श्रद्धा का विशेष उपहार: परिवार सहित पहुंचे भक्त ने चढ़ाया चांदी का दिव्य छत्र

    महाकाल दरबार में श्रद्धा का विशेष उपहार: परिवार सहित पहुंचे भक्त ने चढ़ाया चांदी का दिव्य छत्र


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के दरबार में एक बार फिर श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। राजस्थान के जयपुर से आए एक भक्त परिवार ने बाबा महाकाल के चरणों में अपनी आस्था अर्पित करते हुए लाखों रुपए मूल्य का चांदी का भव्य छत्र समर्पित किया। इस विशेष भेंट ने न केवल मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया बल्कि यह भी साबित किया कि महाकाल के प्रति भक्तों का विश्वास और समर्पण समय के साथ और अधिक मजबूत होता जा रहा है।

    जयपुर के सन सिटी नीदड़ निवासी भागचंद बलेसरा लंबे समय से भगवान महाकाल के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं। इसी श्रद्धा भाव के साथ उन्होंने विशेष रूप से 1 किलो 300 ग्राम चांदी से एक सुंदर और कलात्मक छत्र तैयार करवाया। इस छत्र की अनुमानित कीमत करीब 3 लाख 25 हजार रुपए बताई जा रही है। भागचंद बलेसरा अपने पूरे परिवार के साथ उज्जैन पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद इस दिव्य छत्र को बाबा महाकाल को अर्पित किया।

    इस धार्मिक अवसर पर उनकी धर्मपत्नी सीता देवी, पुत्र गोविंद बलेसरा और सीताराम बलेसरा, पुत्रियां ममता, सुमन और अनिता तथा पौत्र महावीर बलेसरा भी मौजूद रहे। पूरे परिवार ने बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

    महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ छत्र का पूजन कराया। इसके बाद विशेष अनुष्ठान संपन्न कर यह चांदी का छत्र भगवान महाकाल के मुखमंडल पर धारण कराया गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने इस दिव्य क्षण को श्रद्धा और भक्ति के साथ देखा। पूजा के दौरान वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।

    छत्र अर्पण के बाद मंदिर समिति की ओर से भागचंद बलेसरा और उनके परिवार का सम्मान भी किया गया। श्रद्धालु परिवार ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें जीवन में अनेक उपलब्धियां और खुशियां मिली हैं। इसी कृतज्ञता और आस्था के भाव से उन्होंने यह विशेष भेंट समर्पित की है।

    महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा सोने-चांदी के आभूषण, मुकुट, छत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। देश और विदेश से आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान को बहुमूल्य उपहार भेंट करते हैं। विशेष बात यह है कि सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने के बावजूद धार्मिक दान और भेंट की भावना में कोई कमी नहीं आई है।

    महाकालेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जयपुर से आए इस श्रद्धालु परिवार द्वारा अर्पित किया गया चांदी का छत्र भी इसी अटूट विश्वास और भक्ति का प्रतीक बनकर सामने आया है।

  • भस्म आरती बुकिंग पर सख्ती: एक मोबाइल नंबर से बार-बार नहीं होगी एंट्री, महाकाल मंदिर समिति का फैसला

    भस्म आरती बुकिंग पर सख्ती: एक मोबाइल नंबर से बार-बार नहीं होगी एंट्री, महाकाल मंदिर समिति का फैसला


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती में शामिल होने के लिए अब श्रद्धालुओं को नई व्यवस्था का पालन करना होगा। मंदिर समिति ने भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी श्रद्धालु को एक ही मोबाइल नंबर से तीन माह के भीतर दोबारा भस्म आरती की अनुमति नहीं मिलेगी। यह नियम सामान्य श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रोटोकॉल के माध्यम से अनुमति प्राप्त करने वालों पर भी समान रूप से लागू रहेगा।

    महाकाल मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। सीमित संख्या में उपलब्ध अनुमति के कारण लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग एक ही मोबाइल नंबर या पहचान का उपयोग कर बार-बार अनुमति प्राप्त कर लेते हैं जबकि कई श्रद्धालु वर्षों तक भस्म आरती के दर्शन का अवसर नहीं पा पाते। इसी समस्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

    दरअसल वर्ष 2024 में भी भस्म आरती की अनुमति को लेकर लगातार शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने ऑनलाइन बुकिंग करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर से तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति देने का नियम लागू किया था। कुछ समय तक यह व्यवस्था प्रभावी रही लेकिन बाद में इसका पालन अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाया। अब फिर से शिकायतें मिलने के बाद मंदिर समिति ने इस नियम को सख्ती के साथ लागू करने का फैसला किया है।

    नई व्यवस्था के अनुसार अब कोई भी श्रद्धालु चाहे वह ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से आवेदन करे या किसी विशेष प्रोटोकॉल के तहत अनुमति प्राप्त करने का प्रयास करे उसे एक ही मोबाइल नंबर से बार-बार अनुमति नहीं मिलेगी। एक बार भस्म आरती में शामिल होने के बाद उसी नंबर से अगली अनुमति प्राप्त करने के लिए कम से कम तीन माह का इंतजार करना होगा।

    मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को भस्म आरती में शामिल होने का अवसर मिलेगा और अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही लंबे समय से उठ रहे पक्षपात और बार-बार अनुमति मिलने जैसे आरोपों पर भी रोक लग सकेगी।

    महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है लेकिन अब इसे और अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। उनका कहना है कि एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग रोकने से वास्तविक श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा और भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष बन सकेगी।

    महाकाल मंदिर समिति के इस फैसले को श्रद्धालुओं के बीच सकारात्मक कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि नई व्यवस्था से भस्म आरती में शामिल होने की इच्छा रखने वाले अधिक लोगों को अवसर मिल सकेगा और व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और संतुलित बनेगी।

  • महाकाल की नगरी में योग का महाकुंभ, उज्जैन ने दिया स्वास्थ्य और अनुशासन का संदेश

    महाकाल की नगरी में योग का महाकुंभ, उज्जैन ने दिया स्वास्थ्य और अनुशासन का संदेश


    मध्यप्रदेश । उज्जैन में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। जिला स्तरीय मुख्य कार्यक्रम राजाभाऊ महाकाल स्टेडियम (दशहरा मैदान) में आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में नागरिकों, विद्यार्थियों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

    कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री Narendra Modi और मुख्यमंत्री Mohan Yadav के संबोधन के सीधा प्रसारण से हुई। इसके बाद योगाचार्यों के मार्गदर्शन में सामान्य योग प्रोटोकॉल के अनुसार विभिन्न योगासन और प्राणायाम कराए गए। प्रतिभागियों ने नियमित योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

    बारिश के बावजूद नहीं टूटा उत्साह
    योग दिवस से एक दिन पहले हुई बारिश के कारण दशहरा मैदान के कई हिस्सों में कीचड़ हो गया था। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करते हुए मैदान में पत्थर की चूरी डलवाई और बड़े कपड़े व मैट बिछाकर प्रतिभागियों के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की। मौसम की चुनौती के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और बड़ी संख्या में नागरिक कार्यक्रम में शामिल हुए।

    महाकाल की नगरी में योग और अध्यात्म का संगम
    उज्जैन स्थित प्रसिद्ध Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple परिसर में भी योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। योगाभ्यास के माध्यम से लोगों ने स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दिया। धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण में योग का यह आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

    भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में 1000 बंदियों ने किया योग
    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर उज्जैन की भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में भी विशेष योग सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक कृष्णा गुरुजी के मार्गदर्शन में लगभग 1000 पुरुष और महिला बंदियों ने योगाभ्यास किया। इस दौरान ग्रीवा संचालन, स्कंध संचालन, ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, कपालभाति और अनुलोम-विलोम जैसे योग अभ्यास कराए गए। इसके बाद ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें बंदियों ने एकाग्रचित्त होकर भाग लिया।

    गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजा गया दावा
    जेल प्रशासन के अनुसार कार्यक्रम से जुड़े दस्तावेज और प्रमाण Guinness World Records तथा International Yoga Book of Records को भेजे गए हैं। दावा किया गया है कि यह “Largest Yoga Session of Prisoners” श्रेणी में रिकॉर्ड बन सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित संस्थाओं द्वारा जांच के बाद लिया जाएगा।

    योग गुरु कृष्णा गुरुजी ने कहा कि योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की कला है। योग शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित कर जीवन को नई दिशा देता है।

  • भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल: रजत चंद्र, त्रिशूल मुकुट और आभूषणों से हुआ अलौकिक श्रृंगार

    भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल: रजत चंद्र, त्रिशूल मुकुट और आभूषणों से हुआ अलौकिक श्रृंगार


    मध्यप्रदेश । धर्मनगरी उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के भस्म आरती के दौरान भक्तों को बाबा महाकाल के दिव्य और मनमोहक स्वरूप के दर्शन हुए। प्रातःकालीन बेला में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधानों के बीच भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में गूंजते मंत्रों और घंटियों की ध्वनि ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

    मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले सभा मंडप में विराजमान वीरभद्र भगवान के समक्ष स्वस्ति वाचन किया गया और भगवान महाकाल से पूजा-अर्चना की आज्ञा ली गई। इसके पश्चात चांदी के पट खोले गए और गर्भगृह में विशेष अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। पुजारियों ने भगवान महाकाल का पूर्व श्रृंगार उतारकर विधिवत जलाभिषेक किया।

    इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद तथा विभिन्न फलों के रस से निर्मित पंचामृत द्वारा भगवान का अभिषेक किया गया। वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न इस पूजन के बाद कर्पूर आरती की गई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर भाग लिया।

    भस्म आरती के दौरान नंदी हॉल में नंदी महाराज का भी स्नान, ध्यान और विशेष पूजन किया गया। वहीं भगवान महाकाल का भव्य श्रृंगार रजत चंद्र, त्रिशूल मुकुट और आकर्षक आभूषणों से किया गया। भगवान को भांग, चंदन, ड्रायफ्रूट और पवित्र भस्म अर्पित कर उनका दिव्य स्वरूप सजाया गया।

    भस्म अर्पण के पश्चात बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पों की विशेष मालाएं धारण कराई गईं। इस अलौकिक श्रृंगार ने भगवान महाकाल के स्वरूप को और अधिक दिव्यता प्रदान की। पूजन के समापन पर फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया।

    भस्म आरती में देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। परंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। यह भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण और अद्वितीय धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है।

    धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। इसी कारण प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं और बाबा महाकाल की कृपा प्राप्त करते हैं।

  • महाकाल की शरण में पहुंचे युजवेंद्र चहल, भस्म आरती में हुए शामिल; बोले- यह अनुभव शब्दों से परे

    महाकाल की शरण में पहुंचे युजवेंद्र चहल, भस्म आरती में हुए शामिल; बोले- यह अनुभव शब्दों से परे


    मध्यप्रदेश । भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल शुक्रवार सुबह धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। चहल ने तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती में भाग लिया और करीब दो घंटे तक मंदिर परिसर में रहकर पूजा-अर्चना की। उनके मंदिर पहुंचने की खबर मिलते ही श्रद्धालुओं और क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह देखने को मिला।

    जानकारी के अनुसार, युजवेंद्र चहल सुबह करीब 3 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती का दर्शन किया। आरती के दौरान चहल पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे नजर आए और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते दिखाई दिए। महाकाल मंदिर की आध्यात्मिक और दिव्य वातावरण ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया।

    भस्म आरती में शामिल होने के बाद चहल ने नंदी महाराज का पूजन और अभिषेक किया। परंपरा के अनुसार उन्होंने नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना भी कही। इसके बाद चांदी द्वार से भगवान महाकाल को जल अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों के माध्यम से उन्होंने विशेष पूजा कर बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया।

    दर्शन और पूजन के उपरांत श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से युजवेंद्र चहल का सम्मान किया गया। मंदिर प्रशासन ने उन्हें बाबा महाकाल का प्रसाद और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।

    महाकाल के दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में युजवेंद्र चहल ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उन्हें जो आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ है, उसे शब्दों में व्यक्त करना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। चहल ने यह भी कहा कि जब भी उन्हें बाबा महाकाल का बुलावा मिलेगा, वे दोबारा उज्जैन आकर दर्शन अवश्य करेंगे।

    गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। क्रिकेट, फिल्म और राजनीति जगत की कई नामचीन हस्तियां भी समय-समय पर बाबा महाकाल के दरबार में मत्था टेकने आती रही हैं। अब इस कड़ी में भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल का नाम भी जुड़ गया है।