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  • महाकाल दरबार में श्रद्धा का विशेष उपहार: परिवार सहित पहुंचे भक्त ने चढ़ाया चांदी का दिव्य छत्र

    महाकाल दरबार में श्रद्धा का विशेष उपहार: परिवार सहित पहुंचे भक्त ने चढ़ाया चांदी का दिव्य छत्र


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के दरबार में एक बार फिर श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। राजस्थान के जयपुर से आए एक भक्त परिवार ने बाबा महाकाल के चरणों में अपनी आस्था अर्पित करते हुए लाखों रुपए मूल्य का चांदी का भव्य छत्र समर्पित किया। इस विशेष भेंट ने न केवल मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया बल्कि यह भी साबित किया कि महाकाल के प्रति भक्तों का विश्वास और समर्पण समय के साथ और अधिक मजबूत होता जा रहा है।

    जयपुर के सन सिटी नीदड़ निवासी भागचंद बलेसरा लंबे समय से भगवान महाकाल के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं। इसी श्रद्धा भाव के साथ उन्होंने विशेष रूप से 1 किलो 300 ग्राम चांदी से एक सुंदर और कलात्मक छत्र तैयार करवाया। इस छत्र की अनुमानित कीमत करीब 3 लाख 25 हजार रुपए बताई जा रही है। भागचंद बलेसरा अपने पूरे परिवार के साथ उज्जैन पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद इस दिव्य छत्र को बाबा महाकाल को अर्पित किया।

    इस धार्मिक अवसर पर उनकी धर्मपत्नी सीता देवी, पुत्र गोविंद बलेसरा और सीताराम बलेसरा, पुत्रियां ममता, सुमन और अनिता तथा पौत्र महावीर बलेसरा भी मौजूद रहे। पूरे परिवार ने बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

    महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ छत्र का पूजन कराया। इसके बाद विशेष अनुष्ठान संपन्न कर यह चांदी का छत्र भगवान महाकाल के मुखमंडल पर धारण कराया गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने इस दिव्य क्षण को श्रद्धा और भक्ति के साथ देखा। पूजा के दौरान वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।

    छत्र अर्पण के बाद मंदिर समिति की ओर से भागचंद बलेसरा और उनके परिवार का सम्मान भी किया गया। श्रद्धालु परिवार ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें जीवन में अनेक उपलब्धियां और खुशियां मिली हैं। इसी कृतज्ञता और आस्था के भाव से उन्होंने यह विशेष भेंट समर्पित की है।

    महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा सोने-चांदी के आभूषण, मुकुट, छत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। देश और विदेश से आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान को बहुमूल्य उपहार भेंट करते हैं। विशेष बात यह है कि सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने के बावजूद धार्मिक दान और भेंट की भावना में कोई कमी नहीं आई है।

    महाकालेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जयपुर से आए इस श्रद्धालु परिवार द्वारा अर्पित किया गया चांदी का छत्र भी इसी अटूट विश्वास और भक्ति का प्रतीक बनकर सामने आया है।

  • भस्म आरती बुकिंग पर सख्ती: एक मोबाइल नंबर से बार-बार नहीं होगी एंट्री, महाकाल मंदिर समिति का फैसला

    भस्म आरती बुकिंग पर सख्ती: एक मोबाइल नंबर से बार-बार नहीं होगी एंट्री, महाकाल मंदिर समिति का फैसला


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती में शामिल होने के लिए अब श्रद्धालुओं को नई व्यवस्था का पालन करना होगा। मंदिर समिति ने भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी श्रद्धालु को एक ही मोबाइल नंबर से तीन माह के भीतर दोबारा भस्म आरती की अनुमति नहीं मिलेगी। यह नियम सामान्य श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रोटोकॉल के माध्यम से अनुमति प्राप्त करने वालों पर भी समान रूप से लागू रहेगा।

    महाकाल मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। सीमित संख्या में उपलब्ध अनुमति के कारण लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग एक ही मोबाइल नंबर या पहचान का उपयोग कर बार-बार अनुमति प्राप्त कर लेते हैं जबकि कई श्रद्धालु वर्षों तक भस्म आरती के दर्शन का अवसर नहीं पा पाते। इसी समस्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

    दरअसल वर्ष 2024 में भी भस्म आरती की अनुमति को लेकर लगातार शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने ऑनलाइन बुकिंग करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर से तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति देने का नियम लागू किया था। कुछ समय तक यह व्यवस्था प्रभावी रही लेकिन बाद में इसका पालन अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाया। अब फिर से शिकायतें मिलने के बाद मंदिर समिति ने इस नियम को सख्ती के साथ लागू करने का फैसला किया है।

    नई व्यवस्था के अनुसार अब कोई भी श्रद्धालु चाहे वह ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से आवेदन करे या किसी विशेष प्रोटोकॉल के तहत अनुमति प्राप्त करने का प्रयास करे उसे एक ही मोबाइल नंबर से बार-बार अनुमति नहीं मिलेगी। एक बार भस्म आरती में शामिल होने के बाद उसी नंबर से अगली अनुमति प्राप्त करने के लिए कम से कम तीन माह का इंतजार करना होगा।

    मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को भस्म आरती में शामिल होने का अवसर मिलेगा और अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही लंबे समय से उठ रहे पक्षपात और बार-बार अनुमति मिलने जैसे आरोपों पर भी रोक लग सकेगी।

    महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है लेकिन अब इसे और अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। उनका कहना है कि एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग रोकने से वास्तविक श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा और भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष बन सकेगी।

    महाकाल मंदिर समिति के इस फैसले को श्रद्धालुओं के बीच सकारात्मक कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि नई व्यवस्था से भस्म आरती में शामिल होने की इच्छा रखने वाले अधिक लोगों को अवसर मिल सकेगा और व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और संतुलित बनेगी।

  • महाकाल की नगरी में योग का महाकुंभ, उज्जैन ने दिया स्वास्थ्य और अनुशासन का संदेश

    महाकाल की नगरी में योग का महाकुंभ, उज्जैन ने दिया स्वास्थ्य और अनुशासन का संदेश


    मध्यप्रदेश । उज्जैन में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। जिला स्तरीय मुख्य कार्यक्रम राजाभाऊ महाकाल स्टेडियम (दशहरा मैदान) में आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में नागरिकों, विद्यार्थियों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

    कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री Narendra Modi और मुख्यमंत्री Mohan Yadav के संबोधन के सीधा प्रसारण से हुई। इसके बाद योगाचार्यों के मार्गदर्शन में सामान्य योग प्रोटोकॉल के अनुसार विभिन्न योगासन और प्राणायाम कराए गए। प्रतिभागियों ने नियमित योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

    बारिश के बावजूद नहीं टूटा उत्साह
    योग दिवस से एक दिन पहले हुई बारिश के कारण दशहरा मैदान के कई हिस्सों में कीचड़ हो गया था। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करते हुए मैदान में पत्थर की चूरी डलवाई और बड़े कपड़े व मैट बिछाकर प्रतिभागियों के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की। मौसम की चुनौती के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और बड़ी संख्या में नागरिक कार्यक्रम में शामिल हुए।

    महाकाल की नगरी में योग और अध्यात्म का संगम
    उज्जैन स्थित प्रसिद्ध Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple परिसर में भी योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। योगाभ्यास के माध्यम से लोगों ने स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दिया। धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण में योग का यह आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

    भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में 1000 बंदियों ने किया योग
    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर उज्जैन की भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में भी विशेष योग सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक कृष्णा गुरुजी के मार्गदर्शन में लगभग 1000 पुरुष और महिला बंदियों ने योगाभ्यास किया। इस दौरान ग्रीवा संचालन, स्कंध संचालन, ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, कपालभाति और अनुलोम-विलोम जैसे योग अभ्यास कराए गए। इसके बाद ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें बंदियों ने एकाग्रचित्त होकर भाग लिया।

    गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजा गया दावा
    जेल प्रशासन के अनुसार कार्यक्रम से जुड़े दस्तावेज और प्रमाण Guinness World Records तथा International Yoga Book of Records को भेजे गए हैं। दावा किया गया है कि यह “Largest Yoga Session of Prisoners” श्रेणी में रिकॉर्ड बन सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित संस्थाओं द्वारा जांच के बाद लिया जाएगा।

    योग गुरु कृष्णा गुरुजी ने कहा कि योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की कला है। योग शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित कर जीवन को नई दिशा देता है।

  • भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल: रजत चंद्र, त्रिशूल मुकुट और आभूषणों से हुआ अलौकिक श्रृंगार

    भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल: रजत चंद्र, त्रिशूल मुकुट और आभूषणों से हुआ अलौकिक श्रृंगार


    मध्यप्रदेश । धर्मनगरी उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के भस्म आरती के दौरान भक्तों को बाबा महाकाल के दिव्य और मनमोहक स्वरूप के दर्शन हुए। प्रातःकालीन बेला में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधानों के बीच भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में गूंजते मंत्रों और घंटियों की ध्वनि ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

    मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले सभा मंडप में विराजमान वीरभद्र भगवान के समक्ष स्वस्ति वाचन किया गया और भगवान महाकाल से पूजा-अर्चना की आज्ञा ली गई। इसके पश्चात चांदी के पट खोले गए और गर्भगृह में विशेष अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। पुजारियों ने भगवान महाकाल का पूर्व श्रृंगार उतारकर विधिवत जलाभिषेक किया।

    इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद तथा विभिन्न फलों के रस से निर्मित पंचामृत द्वारा भगवान का अभिषेक किया गया। वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न इस पूजन के बाद कर्पूर आरती की गई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर भाग लिया।

    भस्म आरती के दौरान नंदी हॉल में नंदी महाराज का भी स्नान, ध्यान और विशेष पूजन किया गया। वहीं भगवान महाकाल का भव्य श्रृंगार रजत चंद्र, त्रिशूल मुकुट और आकर्षक आभूषणों से किया गया। भगवान को भांग, चंदन, ड्रायफ्रूट और पवित्र भस्म अर्पित कर उनका दिव्य स्वरूप सजाया गया।

    भस्म अर्पण के पश्चात बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पों की विशेष मालाएं धारण कराई गईं। इस अलौकिक श्रृंगार ने भगवान महाकाल के स्वरूप को और अधिक दिव्यता प्रदान की। पूजन के समापन पर फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया।

    भस्म आरती में देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। परंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। यह भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण और अद्वितीय धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है।

    धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। इसी कारण प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं और बाबा महाकाल की कृपा प्राप्त करते हैं।

  • महाकाल की शरण में पहुंचे युजवेंद्र चहल, भस्म आरती में हुए शामिल; बोले- यह अनुभव शब्दों से परे

    महाकाल की शरण में पहुंचे युजवेंद्र चहल, भस्म आरती में हुए शामिल; बोले- यह अनुभव शब्दों से परे


    मध्यप्रदेश । भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल शुक्रवार सुबह धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। चहल ने तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती में भाग लिया और करीब दो घंटे तक मंदिर परिसर में रहकर पूजा-अर्चना की। उनके मंदिर पहुंचने की खबर मिलते ही श्रद्धालुओं और क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह देखने को मिला।

    जानकारी के अनुसार, युजवेंद्र चहल सुबह करीब 3 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती का दर्शन किया। आरती के दौरान चहल पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे नजर आए और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते दिखाई दिए। महाकाल मंदिर की आध्यात्मिक और दिव्य वातावरण ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया।

    भस्म आरती में शामिल होने के बाद चहल ने नंदी महाराज का पूजन और अभिषेक किया। परंपरा के अनुसार उन्होंने नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना भी कही। इसके बाद चांदी द्वार से भगवान महाकाल को जल अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों के माध्यम से उन्होंने विशेष पूजा कर बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया।

    दर्शन और पूजन के उपरांत श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से युजवेंद्र चहल का सम्मान किया गया। मंदिर प्रशासन ने उन्हें बाबा महाकाल का प्रसाद और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।

    महाकाल के दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में युजवेंद्र चहल ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उन्हें जो आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ है, उसे शब्दों में व्यक्त करना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। चहल ने यह भी कहा कि जब भी उन्हें बाबा महाकाल का बुलावा मिलेगा, वे दोबारा उज्जैन आकर दर्शन अवश्य करेंगे।

    गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। क्रिकेट, फिल्म और राजनीति जगत की कई नामचीन हस्तियां भी समय-समय पर बाबा महाकाल के दरबार में मत्था टेकने आती रही हैं। अब इस कड़ी में भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल का नाम भी जुड़ गया है।

  • महाकाल नगरी में लापरवाही का वीडियो वायरल: ई-रिक्शा की छत पर बैठाकर घुमाया श्रद्धालु, पुलिस ने किया जब्त

    महाकाल नगरी में लापरवाही का वीडियो वायरल: ई-रिक्शा की छत पर बैठाकर घुमाया श्रद्धालु, पुलिस ने किया जब्त


    मध्यप्रदेश । उज्जैन में महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के बीच यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क है। इसी बीच एक ई-रिक्शा चालक की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने न केवल यातायात नियमों की अनदेखी की बल्कि एक यात्री की जान भी जोखिम में डाल दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और संबंधित चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।

    वायरल वीडियो में ई-रिक्शा क्रमांक 4778 दिखाई दे रहा है, जिसमें निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई गई थीं। इतना ही नहीं, एक यात्री वाहन की छत पर बैठकर सफर करता नजर आया। सड़क पर चल रहे अन्य लोगों ने इस खतरनाक दृश्य का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया।

    वीडियो सामने आने के बाद उज्जैन यातायात पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। जांच में वीडियो सही पाए जाने पर ई-रिक्शा को जब्त कर लिया गया और चालक के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती थी।

    यातायात डीएसपी दिलीप परिहार ने बताया कि चालक द्वारा वाहन में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाना और यात्री को छत पर बैठाकर परिवहन करना गंभीर नियम उल्लंघन है। इसी आधार पर कार्रवाई करते हुए वाहन का चालान तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही चालक का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

    पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे मामलों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

    पुलिस ने श्रद्धालुओं और वाहन चालकों से अपील की है कि यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें। कुछ समय बचाने या अधिक कमाई के लालच में नियमों की अनदेखी करना जानलेवा साबित हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से आग्रह किया है कि वे ओवरलोड वाहनों में सफर न करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही दिखाई देने पर तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।

  • महाकाल मंदिर में गर्भगृह प्रवेश पर फिर विवाद, डिजिटल क्रिएटर की तस्वीरों से उठा VIP कल्चर का मुद्दा; सांसद फिरोजिया ने जताई नाराजगी

    महाकाल मंदिर में गर्भगृह प्रवेश पर फिर विवाद, डिजिटल क्रिएटर की तस्वीरों से उठा VIP कल्चर का मुद्दा; सांसद फिरोजिया ने जताई नाराजगी


    मध्यप्रदेश ।उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर गर्भगृह प्रवेश को लेकर विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ तस्वीरों ने मंदिर प्रशासन की व्यवस्था और आम श्रद्धालुओं के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है। तस्वीरों में दिल्ली निवासी डिजिटल क्रिएटर अक्षय आनंद अपनी पत्नी और मित्रों के साथ महाकाल मंदिर के गर्भगृह में दर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने वीआईपी संस्कृति और दोहरे मापदंडों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार यह तस्वीरें 15 जून की बताई जा रही हैं। उस दिन सोमवती अमावस्या होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। इसी दौरान अक्षय आनंद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गर्भगृह में दर्शन करते हुए तस्वीरें साझा कीं। तस्वीरों में वे पारंपरिक धोती-सोला पहनकर गर्भगृह में मौजूद नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, गर्भगृह परिसर में फोटो भी खिंचवाई गईं, जबकि मंदिर परिसर में फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लागू है।

    तस्वीरें वायरल होने के बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि जब आम भक्तों को वर्षों से गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं है, तो कुछ चुनिंदा लोगों को विशेष सुविधा कैसे दी जा रही है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे वीआईपी कल्चर का उदाहरण बताया।

    विवाद बढ़ने के बाद महाकाल मंदिर प्रशासन की ओर से सफाई भी सामने आई। मंदिर प्रशासक ने बताया कि अक्षय आनंद और उनके साथ मौजूद अन्य लोग हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के साथ मंदिर पहुंचे थे। इसी वजह से उन्हें गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। हालांकि इस स्पष्टीकरण के बाद भी लोगों की नाराजगी कम होती दिखाई नहीं दे रही है।

    मामले में उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने भी खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महाकाल मंदिर में वीआईपी संस्कृति का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय है और वे इसके घोर विरोधी हैं। सांसद ने कहा कि वे स्वयं आज भी सामान्य श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगकर भगवान महाकाल के दर्शन करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी माताजी पिछले कई दशकों से नियमित रूप से महाकाल मंदिर जाती हैं और कभी किसी विशेष सुविधा का लाभ नहीं लेतीं।

    सांसद फिरोजिया ने कहा कि भगवान के दरबार में सभी समान हैं। यहां किसी राजा और रंक में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को भी चेताते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि अंततः सभी को भगवान महाकाल की शरण में ही जाना है।

    उन्होंने मांग की कि प्रतिदिन कम से कम दो घंटे के लिए महाकाल मंदिर का गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए, ताकि भक्त स्वयं जलाभिषेक और पूजन कर सकें। उन्होंने बताया कि इस विषय पर वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा कर चुके हैं।

    गौरतलब है कि महाकाल मंदिर का गर्भगृह जुलाई 2023 में श्रावण मास के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए आम श्रद्धालुओं के लिए बंद किया गया था। उस समय इसे अस्थायी व्यवस्था बताया गया था, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बाद भी गर्भगृह आम भक्तों के लिए नहीं खोला गया। अब वायरल तस्वीरों ने एक बार फिर मंदिर में वीआईपी व्यवस्था और श्रद्धालुओं के अधिकारों को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

  • महाकाल मंदिर में मुस्लिम युवक से मारपीट: आधार कार्ड देखने के बाद हुआ विवाद, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

    महाकाल मंदिर में मुस्लिम युवक से मारपीट: आधार कार्ड देखने के बाद हुआ विवाद, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो


    मध्य प्रदेश । विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे एक युवक के साथ हुई मारपीट की घटना ने उज्जैन में चर्चा का विषय बना दिया है। घटना उस समय हुई जब युवक मंदिर की चलित भस्मारती में शामिल होने के लिए कतार में खड़ा था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ लोग युवक से बहस करते और उसके साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। घटना के बाद पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर युवक को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और पूरे मामले की जानकारी जुटानी शुरू की।

    पुलिस के अनुसार, महाराष्ट्र के पुणे जिले के पिंपरी क्षेत्र का रहने वाला 26 वर्षीय सरफराज शेख एक हिंदू युवती के साथ महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने आया था। दोनों देर रात मंदिर पहुंचे और चलित भस्मारती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की कतार में लग गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक ने माथे पर चंदन का त्रिपुंड लगाया हुआ था और ‘महाकाल’ भी लिखा हुआ था, जिससे वह सामान्य श्रद्धालुओं की तरह दिखाई दे रहा था।

    बताया जा रहा है कि कतार में खड़े कुछ लोगों को युवक पर संदेह हुआ। इसके बाद उसकी पहचान जानने के लिए आधार कार्ड देखा गया। आधार कार्ड में उसका नाम और पहचान सामने आने के बाद वहां मौजूद कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। देखते ही देखते कुछ लोगों ने युवक के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी।

    घटना के दौरान युवक अपनी बात रखने और खुद को छोड़ने की गुहार लगाता रहा, लेकिन माहौल लगातार गर्माता गया। आसपास मौजूद लोगों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस पूरे घटनाक्रम को वहां मौजूद कुछ लोगों ने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद मामला सार्वजनिक चर्चा में आ गया।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस अधिकारियों ने युवक और उसके साथ आई युवती से पूछताछ की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों दर्शन करने के उद्देश्य से उज्जैन आए थे। पुलिस ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए दोनों के परिजनों को भी उज्जैन बुलाया है।

    महाकाल थाना पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। हालांकि वायरल वीडियो और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यदि कोई शिकायत प्राप्त होती है तो कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था, पहचान को लेकर उत्पन्न होने वाले विवादों और सोशल मीडिया के प्रभाव पर चर्चा का कारण बनी है। प्रशासन का प्रयास है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न होने दी जाए। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है और संबंधित लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है।

  • महाकाल की शरण में पहुंचे नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद महेश केवट, बोले- जीत बाबा के आशीर्वाद और कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम

    महाकाल की शरण में पहुंचे नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद महेश केवट, बोले- जीत बाबा के आशीर्वाद और कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम


    मध्यप्रदेश । नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद Mahesh Kevat सोमवार को उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में बाबा महाकाल के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद पहली बार महाकाल मंदिर पहुंचे केवट ने इसे अपने लिए आध्यात्मिक और भावनात्मक क्षण बताया। उन्होंने भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की।

    मंदिर पहुंचने पर भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उनके साथ भाजपा जिला अध्यक्ष संजय अग्रवाल सहित संगठन के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। दर्शन के दौरान महेश केवट ने नंदी हॉल में बैठकर ध्यान लगाया और परंपरा के अनुसार नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना भी व्यक्त की।

    दर्शन-पूजन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए महेश केवट ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा की सफलता को बाबा महाकाल का आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के तीनों प्रत्याशियों की जीत संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत और जनता के विश्वास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पूरी निष्ठा के साथ संगठन को मजबूत बनाने का कार्य किया है, जिसका सकारात्मक परिणाम चुनावों में देखने को मिला।

    इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। केवट ने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निरस्त होना भाजपा की किसी रणनीति का परिणाम नहीं था, बल्कि कांग्रेस की अपनी प्रक्रियागत कमियों और लापरवाही का नतीजा था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार भ्रम और झूठ की राजनीति कर रही है तथा जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।

    महेश केवट ने कहा कि न्यायिक और संवैधानिक संस्थाओं के निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को अपनी आंतरिक कमजोरियों पर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है, बजाय इसके कि वह हर मुद्दे पर दूसरे दलों को जिम्मेदार ठहराए।

    लोकसभा चुनावों को लेकर भी उन्होंने भाजपा की जीत का भरोसा जताया। केवट ने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा को जनता का व्यापक समर्थन प्राप्त है और आने वाले चुनावों में भी पार्टी मजबूत प्रदर्शन करेगी। उन्होंने दावा किया कि जनता विकास, सुशासन और स्थिर नेतृत्व के पक्ष में खड़ी है।

    राज्यसभा सांसद के रूप में अपनी प्राथमिकताओं पर बात करते हुए महेश केवट ने कहा कि वे प्रदेश के विकास, गरीबों, किसानों, युवाओं और समाज के सभी वर्गों के हितों से जुड़े मुद्दों को संसद में मजबूती से उठाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और मध्य प्रदेश के विकास को नई गति देने के लिए वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे।

    महाकाल मंदिर में दर्शन के बाद उन्होंने देशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि बाबा महाकाल का आशीर्वाद सभी पर बना रहे और प्रदेश निरंतर विकास की राह पर आगे बढ़ता रहे।

  • महाकाल मंदिर में भस्म आरती पासों की कथित दलाली पर बवाल, युवा कांग्रेस ने किया प्रदर्शन

    महाकाल मंदिर में भस्म आरती पासों की कथित दलाली पर बवाल, युवा कांग्रेस ने किया प्रदर्शन


    मध्यप्रदेश । उज्जैन स्थित Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में भस्म आरती के वीआईपी और प्रोटोकॉल पासों की कथित दलाली को लेकर सोमवार को राजनीतिक माहौल गरमा गया। युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए भस्म आरती की प्रोटोकॉल अनुमति व्यवस्था पर सवाल उठाए। संगठन ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं को मिलने वाले प्रवेश पासों की कथित रूप से खरीद-फरोख्त की जा रही है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    प्रदर्शन का नेतृत्व महिदपुर विधानसभा युवा कांग्रेस अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह डोडिया ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भस्म आरती के प्रवेश पास 2 से 3 हजार रुपए या उससे अधिक राशि में बेचे जा रहे हैं। उनका दावा है कि जनप्रतिनिधियों को मिलने वाले प्रोटोकॉल पासों का दुरुपयोग कर उन्हें अन्य लोगों को बेचा जा रहा है। डोडिया ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं को निर्धारित शुल्क से कहीं अधिक राशि लेकर अनुमति दिलाने का लालच दिया जाता है, जिससे धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    युवा कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था के अलावा प्रतिदिन बड़ी संख्या में प्रोटोकॉल पास जारी किए जाते हैं और इसी व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। संगठन ने मांग की कि पूरे सिस्टम की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

    प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने डिप्टी कलेक्टर सरिता लाल को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि ज्ञापन में मीडिया में सामने आई खबरों और शिकायतों के आधार पर जांच की मांग की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ज्ञापन संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

    युवा कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें वीआईपी और प्रोटोकॉल कोटे की संपूर्ण जांच, पासों की कथित खरीद-फरोख्त में शामिल एजेंटों और बिचौलियों की पहचान, दोषियों के खिलाफ एफआईआर, तथा पास आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने की मांग शामिल है। संगठन ने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष में जारी विशेष श्रेणी के सभी पासों का ऑडिट कराया जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

    ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि यदि किसी जनप्रतिनिधि या प्रभावशाली व्यक्ति के नाम का दुरुपयोग हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी तंत्र और शिकायत हेल्पलाइन शुरू करने की भी मांग की गई है।

    युवा कांग्रेस ने प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। संगठन का कहना है कि यदि निर्धारित समय के भीतर जांच शुरू नहीं हुई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो महाकाल मंदिर के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

    गौरतलब है कि हाल के महीनों में भस्म आरती की अनुमति दिलाने के नाम पर कथित ठगी के कई मामले सामने आए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कुछ मामलों में श्रद्धालुओं से पैसे लेने के आरोप में व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों से आए श्रद्धालुओं द्वारा शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। पुलिस ने उन मामलों में शिकायत के आधार पर जांच और कार्रवाई की थी। हालांकि प्रोटोकॉल पास व्यवस्था में किसी व्यापक अनियमितता के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और संबंधित मामलों की जांच अलग-अलग स्तर पर जारी है।