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  • महाराष्ट्र से दिल्ली और बिहार के बाद यूपी तक पहुंचा विनोद तावड़े का सफर, संगठनात्मक अनुभव पर भाजपा ने जताया भरोसा

    महाराष्ट्र से दिल्ली और बिहार के बाद यूपी तक पहुंचा विनोद तावड़े का सफर, संगठनात्मक अनुभव पर भाजपा ने जताया भरोसा

    नई दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक फेरबदल के तहत राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाकर उन्हें बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी सौंपी है। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है और ऐसे में तावड़े की नियुक्ति को पार्टी की संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर महाराष्ट्र की छात्र राजनीति से शुरू होकर राष्ट्रीय संगठन तक पहुंचा है। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से सक्रिय राजनीति में कदम रखा और लंबे समय तक संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से संपर्क और संगठन के विस्तार का अनुभव उनके राजनीतिक सफर की प्रमुख विशेषता रहा है।

    मुंबई में जन्मे तावड़े ने छात्र जीवन के दौरान संगठन के साथ काम करना शुरू किया था। आगे चलकर उन्हें महाराष्ट्र भाजपा में विभिन्न जिम्मेदारियां मिलीं। उन्होंने मुंबई भाजपा अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया और बाद में महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य बने। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने के बाद उनका सक्रिय राजनीतिक प्रभाव और बढ़ा।

    2014 में तावड़े पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर महाराष्ट्र की राजनीति में सीधे निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में पहुंचे। भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्हें स्कूली शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा और संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। हालांकि 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया। उस समय उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुईं।

    इसके बाद तावड़े ने चुनावी राजनीति से दूरी के बावजूद संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रियता बनाए रखी। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर किसी बड़े विवाद या असंतोष का रास्ता नहीं अपनाया और पार्टी संगठन में अपनी भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया। इसी अवधि में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां मिलने लगीं और उनका राजनीतिक दायरा महाराष्ट्र से बाहर फैलता गया।

    राष्ट्रीय संगठन में आने के बाद तावड़े को पहले राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिली और बाद में उन्हें महासचिव बनाया गया। हरियाणा और फिर बिहार जैसे राज्यों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने चुनावी प्रबंधन और संगठन के बीच समन्वय में अपनी भूमिका मजबूत की। बिहार में गठबंधन की राजनीति के बीच सीट बंटवारे और संगठनात्मक तालमेल जैसे विषयों में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं।

    तावड़े ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों के दौरान भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं। भाजपा के सदस्यता अभियान में उनकी भूमिका भी चर्चा में रही। पार्टी के भीतर उनकी पहचान ऐसे नेता के रूप में बनी, जिन्हें चुनावी परिस्थितियों के अनुसार संगठन को सक्रिय करने और अलग अलग समूहों के बीच समन्वय स्थापित करने का अनुभव है।

    अब उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी उनके सामने है। राज्य में भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़ाने और सरकार तथा पार्टी संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की चुनौती होगी। उत्तर प्रदेश में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संगठन की रणनीति को जमीन तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

    2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदर्शन ने पार्टी के सामने कई राजनीतिक चुनौतियां रखी हैं। ऐसे माहौल में तावड़े के अनुभव का इस्तेमाल संगठन को दोबारा मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी को गति देने में किया जा सकता है।

    महाराष्ट्र की राजनीति में मंत्री और संगठन के पदाधिकारी के रूप में काम करने से लेकर राष्ट्रीय महासचिव और विभिन्न राज्यों के प्रभारी तक पहुंचे तावड़े का सफर अब उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी के साथ एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। पार्टी ने उन्हें यह दायित्व ऐसे समय सौंपा है जब उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक मजबूती और चुनावी रणनीति दोनों उसके लिए प्राथमिकता हैं।

  • Maharashtra: नासिक में सुबह-सुबह महसूस किए गए भूकंप के झटके… तीव्रता 3.4 रही

    Maharashtra: नासिक में सुबह-सुबह महसूस किए गए भूकंप के झटके… तीव्रता 3.4 रही


    नासिक।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) के नासिक (Nashik) में शुक्रवार सुबह-सुबह भूकंप के झटके (Earthquake tremors) महसूस किए गए। जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 5 बजकर 32 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता 3.4 बताई जा रही है.

    इससे पहले महाराष्ट्र के पालघर में भी सोमवार रात करीब एक घंटे के अंदर भूकंप के दो झटके महसूस किए गए. दोनों झटकों की तीव्रता 3.4 रही थी। महाराष्ट्र के पालघर में पहला झटका रात 10:04 बजे महसूस किया गया. करीब 56 मिनट बाद 11 बजे फिर भूकंप आया. दोनों की तीव्रता 3.4 मापी गई।

    बता दें, भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है. 7.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप को खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है. वहीं, 2.0 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप माइक्रो भूकंप कहते हैं, जिन्हें अधिकांश लोग महसूस भी नहीं कर पाते. दूसरी ओर, 4.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।

    इस बीच, लद्दाख के लेह में भी गुरुवार को सुबह-सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, सुबह 6:05 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.5 दर्ज की गई।


    कैसे आता है भूकंप?

    धरती के अंदर 7 प्लेट्स ऐसी होती हैं जो लगातार घूम रही हैं. ये प्लेट्स जिन जगहों पर ज्यादा टकराती हैं, उसे फॉल्ट लाइन जोन कहते हैं. बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं. जब प्रेशर ज्यादा बनने लगता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं. इन प्लेट्स के टूटने के कारण अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है. इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

  • महाराष्ट्र FDA की बड़ी कार्रवाई, 434 आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं की जांच के बाद 135 को शोकॉज नोटिस, 10 लाइसेंस रद्द

    महाराष्ट्र FDA की बड़ी कार्रवाई, 434 आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं की जांच के बाद 135 को शोकॉज नोटिस, 10 लाइसेंस रद्द

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र में आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी FDA ने सख्त कार्रवाई की है। राज्यभर में लाइसेंस प्राप्त 434 आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली इकाइयों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान अलग-अलग स्तर पर नियमों का उल्लंघन और निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आने के बाद 135 निर्माताओं को शोकॉज नोटिस जारी किए गए हैं।

    FDA की इस कार्रवाई का उद्देश्य आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना है। जिन कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों पर स्पष्टीकरण देने और निर्धारित नियमों के अनुपालन की दिशा में आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।

    जांच अभियान के दौरान ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 और शेड्यूल टी के तहत निर्धारित प्रावधानों के पालन की जांच की गई। शेड्यूल टी में आयुर्वेदिक, सिद्ध और यूनानी दवाओं के लिए गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस यानी GMP से जुड़े मानक निर्धारित हैं।

    निरीक्षण में कुछ इकाइयों में योग्य या स्वीकृत तकनीकी कर्मचारियों की कमी सामने आई। ऐसी स्थिति भी पाई गई जहां आवश्यक तकनीकी स्टाफ की पर्याप्त मौजूदगी के बिना दवा निर्माण किया जा रहा था। कई कंपनियों में गुणवत्ता नियंत्रण विभाग अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर रहे थे।

    कुछ निर्माण इकाइयों में दवाओं के उत्पादन और परीक्षण के लिए जरूरी मशीनरी तथा उपकरणों की भी कमी पाई गई। इसके अलावा साफ-सफाई से जुड़े मानकों में खामियां, बैच उत्पादन के रिकॉर्ड का अभाव और कच्चे माल से संबंधित दस्तावेजों में अनियमितताएं सामने आईं।

    जांच के दौरान कुछ उत्पादों के लेबल पर गलत निर्माण तिथियां दर्ज होने की बात भी सामने आई। कच्चे माल और तैयार उत्पादों की जांच से जुड़े रिकॉर्ड तथा परीक्षण व्यवस्था में भी कमियां पाई गईं। कुछ निर्माताओं के पास कच्चे माल का उचित रिकॉर्ड नहीं था और कुछ निर्माण इकाइयों का लेआउट स्वीकृत व्यवस्था के अनुरूप नहीं पाया गया।

    तकनीकी कर्मचारियों और श्रमिकों की मेडिकल जांच से जुड़े रिकॉर्ड का अभाव भी निरीक्षण में सामने आया। इसके अलावा कुछ कंपनियों में कर्मचारियों को दी गई ट्रेनिंग का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। कंट्रोल सैंपल और मास्टर फॉर्मूला रिकॉर्ड जैसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता नियंत्रण दस्तावेज भी कुछ इकाइयों में नहीं मिले।

    दवा निर्माण के दौरान क्रॉस-कंटामिनेशन रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की कमियां भी सामने आईं। क्रॉस-कंटामिनेशन की स्थिति में एक उत्पाद या कच्चे पदार्थ का दूसरे उत्पाद में अनजाने में मिलना दवा की गुणवत्ता और सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

    सबसे गंभीर मामलों में FDA ने 10 आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए। इन इकाइयों में ऐसी कमियां पाई गईं जिन्हें दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता के लिए गंभीर माना गया। कार्रवाई का उद्देश्य ऐसी निर्माण प्रक्रियाओं पर रोक लगाना है जिनसे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका हो सकती है।

    महाराष्ट्र FDA ने आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं को स्पष्ट किया है कि पारंपरिक आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण मान्यता प्राप्त संदर्भ ग्रंथों और निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। वहीं पेटेंट और प्रोप्राइटरी आयुर्वेदिक दवाओं के लिए निर्धारित गुणवत्ता नियंत्रण आवश्यकताओं का पालन जरूरी है।

    राज्यभर में चलाया गया यह निरीक्षण अभियान आयुर्वेदिक दवा निर्माण क्षेत्र में नियामकीय अनुपालन मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। FDA ने संकेत दिया है कि शेड्यूल टी के GMP मानकों का पालन नहीं करने वाली इकाइयों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इससे निर्माताओं पर गुणवत्ता नियंत्रण, दस्तावेजीकरण, स्वच्छता और सुरक्षित उत्पादन व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

  • खाने की चीजों में गंदगी मिलने पर दो कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड, FSSAI ने लिया सख्त एक्शन

    खाने की चीजों में गंदगी मिलने पर दो कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड, FSSAI ने लिया सख्त एक्शन

    नई दिल्ली ।देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की दो खाद्य कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। जांच के दौरान खाद्य पदार्थों में जिंदा कीड़े, फंगस, चूहे की बीट और गंदगी जैसी गंभीर खामियां मिलने की बात सामने आई है। खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को देखते हुए दोनों कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    जिन कंपनियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें उत्तर प्रदेश की वीकेसी नट्स प्राइवेट लिमिटेड और महाराष्ट्र की छेड़ा स्पेशियलिटीज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। संबंधित इकाइयों में खाद्य पदार्थों के उत्पादन और रखरखाव से जुड़े मानकों की जांच की गई थी। निरीक्षण के दौरान ऐसी परिस्थितियां सामने आईं, जिन्हें खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना गया।

    जांच के दौरान पिस्ता समेत कुछ खाद्य सामग्री में जिंदा कीड़े पाए जाने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा फंगस और चूहे की बीट मिलने की बात भी कही गई है। खाद्य पदार्थों के आसपास गंदगी की स्थिति भी निरीक्षण के दौरान सामने आई। ऐसे हालात में तैयार या संग्रहित खाद्य सामग्री की स्वच्छता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

    खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने इन खामियों को उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए संभावित खतरा माना है। खाद्य पदार्थों में कीड़े, फंगस या चूहों से जुड़ी गंदगी की मौजूदगी खाद्य स्वच्छता के बुनियादी मानकों के विपरीत है। इसी वजह से संबंधित कंपनियों के खिलाफ लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई की गई।

    खाद्य कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए उत्पादन परिसर की साफ-सफाई, कच्चे माल का सुरक्षित भंडारण, कीट नियंत्रण और तैयार उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी होता है। निरीक्षण के दौरान इन क्षेत्रों में गंभीर कमियां मिलने पर नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है। मौजूदा मामले में भी खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन में कमी को कार्रवाई का आधार बनाया गया है।

    उत्तर प्रदेश की वीकेसी नट्स प्राइवेट लिमिटेड के परिसर में सूखे मेवों और अन्य खाद्य सामग्री से संबंधित जांच के दौरान गंभीर कमियां सामने आईं। पिस्ता में कीड़े और अन्य संदूषण से जुड़ी स्थिति को लेकर खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल उठे। इसके बाद कंपनी के लाइसेंस को निलंबित करने का फैसला लिया गया।

    महाराष्ट्र की छेड़ा स्पेशियलिटीज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की गई। जांच के दौरान खाद्य सामग्री और परिसर में स्वच्छता से जुड़ी खामियों की जानकारी सामने आई। जिंदा कीड़े, फंगस और चूहे की बीट जैसी स्थितियां मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।

    प्राधिकरण की इस कार्रवाई को खाद्य कारोबारियों के लिए नियमों के पालन का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। खाद्य पदार्थों के उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और भंडारण तक हर स्तर पर स्वच्छता और सुरक्षा मानकों को बनाए रखना जरूरी है। लापरवाही मिलने पर लाइसेंस निलंबन सहित अन्य नियामकीय कदम उठाए जा सकते हैं।

    खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में नियमित निरीक्षण का उद्देश्य उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और मानक के अनुरूप खाद्य सामग्री पहुंचाना है। दो कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए जाने की कार्रवाई इसी निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा है। आने वाले समय में जांच के आधार पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ आगे की नियामकीय कार्रवाई भी हो सकती है।

  • पंकजा मुंडे के राजनीतिक भविष्य पर बढ़ी चर्चा, कांग्रेस नेता बोले- भाजपा छोड़ें, पहली ओबीसी महिला सीएम बनाने में करेंगे सहयोग

    पंकजा मुंडे के राजनीतिक भविष्य पर बढ़ी चर्चा, कांग्रेस नेता बोले- भाजपा छोड़ें, पहली ओबीसी महिला सीएम बनाने में करेंगे सहयोग


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में उस समय एक नया मोड़ देखने को मिला, जब राज्य सरकार में मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता पंकजा मुंडे को विपक्षी खेमे से एक बड़ा राजनीतिक प्रस्ताव मिला। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि यदि पंकजा मुंडे भाजपा का साथ छोड़ने का मन बनाती हैं, तो कांग्रेस और उसके सहयोगी दल उन्हें महाराष्ट्र की पहली ओबीसी महिला मुख्यमंत्री के रूप में समर्थन देने पर विचार कर सकते हैं। यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है, जब पंकजा मुंडे ने हाल ही में सार्वजनिक मंच से अपने संन्यास के संकेत दिए थे।

    विजय वडेट्टीवार ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा कि पंकजा मुंडे राज्य की एक कद्दावर ओबीसी नेता हैं और उन्हें इतनी जल्दी सार्वजनिक जीवन से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वे भाजपा त्यागती हैं, तो वे व्यक्तिगत रूप से पार्टी के शीर्ष कमान से सिफारिश करेंगे कि उन्हें कांग्रेस में ससम्मान शामिल किया जाए। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि यह उनका अपना निजी दृष्टिकोण है और इसे पार्टी का औपचारिक अधिकारिक निमंत्रण नहीं समझा जाना चाहिए, क्योंकि इस विषय पर अंतिम मोहर केंद्रीय नेतृत्व ही लगाएगा।

    कांग्रेस नेता ने इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल में पिछड़ा वर्ग के प्रमुख चेहरों को हाशिये पर धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं में उपेक्षा को लेकर भारी असंतोष व्याप्त है, क्योंकि उनकी निष्ठा और जनाधार को उचित सम्मान नहीं मिल पा रहा है। वडेट्टीवार के अनुसार, पंकजा मुंडे की हालिया भावुक टिप्पणी इसी अंदरूनी घुटन और उपेक्षा का परिणाम मानी जा सकती है।

    उल्लेखनीय है कि पंकजा मुंडे ने बीते दिनों अपने गृहांचल पारली में बुनियादी विकास और सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। उन्होंने कहा था कि निरंतर प्रयासों के बावजूद क्षेत्र की स्थिति में अपेक्षित सुधार न होना उनके लिए निराशाजनक है। इसी क्रम में उन्होंने यह टिप्पणी की थी कि वे मौजूदा राजनीतिक ढर्रे से थक चुकी हैं और राजनीति को अलविदा कहने पर विचार कर रही हैं, यद्यपि उन्होंने यह भी जोड़ा था कि उन्होंने इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

    पंकजा मुंडे के इस बयान के बाद राज्य के सियासी गलियारों में कयासों का दौर बेहद तेज हो गया। मध्य प्रदेश समेत देशभर के राजनीतिक विश्लेषक महाराष्ट्र में बन रहे इस नए घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। विपक्ष के कई अन्य नेताओं ने भी उनकी स्थिति पर सहानुभूति प्रकट करते हुए अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

    इस बीच, कांग्रेस नेता के इस लुभावने ऑफर पर पंकजा मुंडे या उनके करीबी सूत्रों की तरफ से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। दूसरी ओर, भाजपा संगठन ने भी इस सियासी बयानबाज़ी पर फिलहाल अपनी चुप्पी बरकरार रखी है। जानकारों का मानना है कि आगामी चुनाव से ठीक पहले इस प्रकार की हलचल महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों को नया आकार दे सकती है। अब सभी की निगाहें पंकजा मुंडे के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

  • उद्धव ठाकरे ने पार्टी नेताओं को लगाई फटकार, अभिजीत दीपके का उदाहरण देकर गुटबाजी पर जताई नाराजगी

    उद्धव ठाकरे ने पार्टी नेताओं को लगाई फटकार, अभिजीत दीपके का उदाहरण देकर गुटबाजी पर जताई नाराजगी

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) की एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक के दौरान पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का बेहद सख्त रुख चर्चा का विषय बना हुआ है। ठाणे-कल्याण क्षेत्र के प्रमुख पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने स्थानीय नेताओं के बीच जारी आपसी खींचतान और पद-प्रतिष्ठा को लेकर चल रहे विवादों पर खुलकर अपनी तीव्र नाराजगी व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के हालिया आंदोलन का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए पार्टी पदाधिकारियों से बड़े राजनीतिक लक्ष्यों और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह समीक्षा बैठक कल्याण लोकसभा क्षेत्र में कई निष्ठावान और पुराने कार्यकर्ताओं को सांगठनिक जिम्मेदारियों से अलग किए जाने के बाद पनपे असंतोष की पृष्ठभूमि में बुलाई गई थी। बैठक के दौरान वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और नए मनोनीत पदाधिकारियों के बीच वर्चस्व की जंग और नेतृत्व के मसले को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में संगठनात्मक स्थिति की गहन समीक्षा की जा रही थी, जहां आंतरिक गुटबाजी स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई।

    अपने आक्रामक संबोधन में उद्धव ठाकरे ने पदाधिकारियों को स्पष्ट ताकीद दी कि राज्य के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में सभी को निजी महत्वाकांक्षाओं का त्याग कर बड़े जनहित के मुद्दों के लिए एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि एक तरफ जब देश और राज्य में जनसमस्याओं को लेकर विभिन्न स्तरों पर संघर्ष किए जा रहे हैं, तब दल के भीतर आंतरिक पदों के लिए खींचतान होना संगठन की नींव को कमजोर करता है। इसी परिपेक्ष्य में उन्होंने अभिजीत दीपके द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए नेताओं से राजनीतिक सक्रियता और अनुशासन की सीख लेने को कहा।

    सूत्रों का कहना है कि पार्टी प्रमुख का यह कड़ा रुख केवल मौखिक चेतावनी तक सीमित नहीं रहने वाला है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि संगठन में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नेतृत्व का मानना है कि यदि इस गुटबाजी को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका सीधा नकारात्मक असर धरातल पर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ेगा। मध्य प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों के राजनीतिक विश्लेषक भी महाराष्ट्र के इस तेजी से बदलते सियासी घटनाक्रम और शिवसेना (यूबीटी) की अंदरूनी हलचलों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

    इसके अतिरिक्त, हालिया खबरों में यह बात भी सामने आई है कि उद्धव ठाकरे और अभिजीत दीपके के मध्य टेलीफोन के माध्यम से सीधी बातचीत हुई थी। इस संवाद के दौरान ठाकरे ने उनके द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की प्रगति जानी और उन्हें मुंबई स्थित अपने निजी निवास मातोश्री आने का न्योता भी दिया। यद्यपि, इस मुलाकात और बातचीत के विस्तृत एजेंडे को लेकर दोनों ही खेमों की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

    ठाणे और उसके समीपवर्ती इलाके ऐतिहासिक रूप से शिवसेना के सबसे मजबूत गढ़ माने जाते रहे हैं। ऐसे में आगामी स्थानीय निकायों और अन्य चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में किसी भी तरह की दरार पार्टी के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकती है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उद्धव ठाकरे की यह सख्त नसीहत पार्टी के भीतर अनुशासन, एकजुटता और कैडर को पुनः सक्रिय करने का एक रणनीतिक प्रयास है। अब देखना यह होगा कि शीर्ष नेतृत्व की इस चेतावनी के बाद संगठन में क्या जमीनी बदलाव आते हैं।

  • सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे को लेकर राज ठाकरे के आरोप से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, जांच की मांग तेज

    सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे को लेकर राज ठाकरे के आरोप से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मंदिरों के चढ़ावे और ट्रस्टों की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई स्थित प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर के दान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर में आने वाले दान में हर वर्ष लगभग 18 करोड़ रुपये की कथित चोरी होती है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है और विभिन्न दलों की ओर से इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

    राज ठाकरे ने अपनी पार्टी की छात्र इकाई के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान की पारदर्शिता सुनिश्चित होना आवश्यक है। उनका आरोप है कि सिद्धिविनायक मंदिर के दान प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों में आने वाले धन का सही उपयोग और उसका पारदर्शी लेखा-जोखा सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है।

    एमएनएस प्रमुख ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कुछ ट्रस्टियों ने राज्य के उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनके अनुसार, पत्र में यह आशंका जताई गई है कि मंदिर के दान से जुड़े वित्तीय मामलों में अनियमितताएं हुई हैं और कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अपने संबोधन के दौरान राज ठाकरे ने अयोध्या के राम मंदिर के दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े ऐसे मामलों पर व्यापक स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस प्रकार के आरोपों पर स्पष्ट रुख अपनाने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े किसी भी संस्थान में वित्तीय पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    राज ठाकरे के आरोपों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रसिद्ध गणेश मंदिर के बारे में इस तरह के आरोप लगाने से पहले ठोस प्रमाण सामने आने चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक संस्थानों की प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी और संयम के साथ बयान दिए जाने चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों।

    सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और समृद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में हर वर्ष करोड़ों रुपये का दान प्राप्त होता है, जिसके प्रबंधन की जिम्मेदारी ट्रस्ट के पास होती है। ऐसे में मंदिर के वित्तीय संचालन को लेकर लगाए गए आरोप स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं।

    फिलहाल इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। तब तक यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर चल रही बहस का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।

  • अभिजीत दीपके से मिलने पहुंचे शिंदे सेना के नेता, आंदोलन की सराहना की, सुरक्षा देने की भी उठाई मांग

    अभिजीत दीपके से मिलने पहुंचे शिंदे सेना के नेता, आंदोलन की सराहना की, सुरक्षा देने की भी उठाई मांग


    नई दिल्ली। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके से मिलने नेताओं का सिलसिला जारी है। गुरुवार को शिवसेना (शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (MLC) बच्चू कडू ने छत्रपति संभाजीनगर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और उनके आंदोलन की सराहना की। इससे पहले राज्य सरकार में मंत्री संजय शिरसाट भी दीपके और उनके परिवार से मिल चुके हैं।

    बच्चू कडू ने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल या सरकार के प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि एक आंदोलनकारी के तौर पर अभिजीत दीपके से मिलने पहुंचे हैं। उन्होंने कहा, “मैं यहां एक आंदोलनकारी के रूप में दूसरे आंदोलनकारी से मिलने आया हूं।” उन्होंने जंतर-मंतर पर किए गए प्रदर्शन के लिए दीपके को बधाई भी दी।

    धमकियों पर जताई चिंता
    अभिजीत दीपके को कथित तौर पर मिल रही धमकियों के सवाल पर बच्चू कडू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को उन लोगों से बात करनी चाहिए जो ऐसी धमकियां दे रहे हैं और अनुचित व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार है और इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए।

    संजय शिरसाट ने भी की थी मुलाकात
    इससे पहले महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने भी दीपके के परिवार से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें अपने क्षेत्र के निवासी अभिजीत दीपके पर गर्व है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। शिरसाट ने कहा कि वह इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात करेंगे।

    आंदोलन की खुलकर की तारीफ
    संजय शिरसाट ने बताया कि अभिजीत दीपके को अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में पढ़ाई के बाद नौकरी का अवसर मिला था, लेकिन उन्होंने छात्रों के हितों के लिए काम करने का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि दीपके ने किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं को लेकर आंदोलन किया और उनकी सफलता में समाज के व्यापक समर्थन की बड़ी भूमिका रही। मंत्री ने यह भी कहा कि आंदोलन के बाद छात्रों की प्रमुख मांगों पर कार्रवाई हुई और इस पहल ने राज्य ही नहीं, देशभर में चर्चा बटोरी।

  • शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर संजय राउत का तंज, बोले- देवेंद्र फडणवीस इस जिम्मेदारी के लिए बेहतर विकल्प

    शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर संजय राउत का तंज, बोले- देवेंद्र फडणवीस इस जिम्मेदारी के लिए बेहतर विकल्प

    नई दिल्ली । शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नए शिक्षा मंत्री के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को दी जानी चाहिए, जिसका इस क्षेत्र से गहरा जुड़ाव और समझ हो। इसी दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम लेते हुए तंज भरे अंदाज में उन्हें इस पद के लिए बेहतर विकल्प बताया।

    संजय राउत ने कहा कि उनके अनुसार देवेंद्र फडणवीस शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी बेहतर तरीके से निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि फडणवीस शिक्षित और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले नेता हैं तथा उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि वर्तमान व्यवस्था में जिस तरह मंत्रालयों का बंटवारा किया जा रहा है, उस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

    राउत ने नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि शिक्षा क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े अनुभव वाले व्यक्ति को यह जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रह्लाद जोशी को उनके पहले के मंत्रालय में ही रहने दिया जाता तो अधिक उचित होता। हालांकि यह उनका राजनीतिक मत है और इसे लेकर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    राज्यसभा सांसद ने यह भी दावा किया कि इससे पहले भी वह कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि देवेंद्र फडणवीस शिक्षा मंत्री की भूमिका निभाने में सक्षम हैं। उन्होंने अपने पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय जैसे अहम विभाग में ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है, जो नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सके।

    केंद्र सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए संजय राउत ने आरोप लगाया कि देश में शिक्षा क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार समय-समय पर सामने आने वाले पेपर लीक जैसे मामलों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाई है।

    राउत ने अपने बयान में केंद्र सरकार की नीतियों की भी आलोचना की और कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल मंत्रालय में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता, संस्थानों की मजबूती और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों पर अधिक गंभीरता से काम करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कुछ राजनीतिक टिप्पणियां भी कीं, जिनमें उन्होंने सरकार के निर्णयों पर सवाल उठाए।

    राजनीतिक हलकों में संजय राउत का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए उनके बयान को विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार पर एक और राजनीतिक हमला माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के परिणामों से उपजे तनाव के कारण छात्रा ने उठाया खौफनाक आत्मघाती कदम

    राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के परिणामों से उपजे तनाव के कारण छात्रा ने उठाया खौफनाक आत्मघाती कदम

    नई दिल्ली । चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितता और मानसिक दबाव का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश की राजधानी में बीते एक महीने से चल रहा विरोध प्रदर्शन और अनशन भले ही सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद समाप्त हो गया हो, लेकिन परीक्षा के नतीजों और प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में उपजा मानसिक तनाव अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। इस बीच महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के कर्जत तालुका से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां मेडिकल की पढ़ाई का सपना देख रही उन्नीस वर्षीय छात्रा ने परीक्षा में कम अंक आने से निराश होकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

    घटना के संदर्भ में मिली जानकारी के अनुसार, उक्त छात्रा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के नतीजों को लेकर पिछले कुछ समय से अत्यधिक मानसिक दबाव का सामना कर रही थी। शनिवार को जब परिवार के सदस्य किसी कार्यवश घर से बाहर गए हुए थे, तब छात्रा ने घर पर अकेले रहते हुए यह अतिवादी कदम उठाया। जब परिजन वापस लौटे, तो उन्होंने स्थिति देखकर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया। पुलिस दल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि छात्रा ने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगाई थी, लेकिन घोषित नतीजों में उसे बेहद कम अंक प्राप्त हुए। डॉक्टर बनने के अपने सपने के टूटने और भविष्य की अनिश्चितता के डर से वह गहरे अवसाद में चली गई थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रहे हैं और परिजनों व आसपास के लोगों से पूछताछ कर घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटे हैं।

    गौरतलब है कि हाल के दिनों में राष्ट्रीय स्तर की इस प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक और पुनरीक्षा से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण देशभर में लाखों छात्र और उनके अभिभावक भारी मानसिक दबाव से गुजर रहे थे। परीक्षा प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थियों द्वारा तनाव में आकर ऐसे खौफनाक कदम उठाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। छात्र संगठनों और शिक्षाविदों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

    राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों द्वारा पिछले एक महीने से लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। इस आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, गड़बड़ियों की उच्च स्तरीय जांच और छात्रों के लिए बेहतर व्यवस्था की मांग उठाई थी। सरकार की ओर से उच्च स्तरीय समिति के गठन और सुधार संबंधी आश्वासन मिलने के बाद यह धरना-प्रदर्शन समाप्त किया गया था, लेकिन इस प्रशासनिक घटनाक्रम के बीच छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा का मुद्दा अब भी गंभीर बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का अत्यधिक दबाव और असफलता का डर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों और समाज को एक साथ मिलकर युवाओं को यह समझाने की आवश्यकता है कि कोई भी परीक्षा जीवन का अंतिम विकल्प नहीं होती। प्रशासनिक स्तर पर परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ अभ्यर्थियों के लिए नियमित परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली स्थापित करना बेहद जरूरी हो गया है ताकि इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।