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  • नई दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आज बंद रहेगा महाराष्ट्र

    नई दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आज बंद रहेगा महाराष्ट्र


    मुंबई।
    वंचित बहुजन आघाड़ी (Vanchit Bahujan Aghadi) ने नई दिल्ली (New Delhi) के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन (Student movement) के पक्ष में गुरुवार को ‘महाराष्ट्र बंद’ का आह्वान किया है। वीबीए अध्यक्ष और डॉ बाबासाहेब आंबेडकर (Dr. Babasaheb Ambedkar) के पोते प्रकाश आंबेडकर (Prakash Ambedkar) ने यहां प्रेस वार्ता में बताया कि वामपंथी राजनीतिक दलों, शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग सेंटरों ने बंद का समर्थन किया है।


    क्या खुला रहेगा, क्या बंद

    बंद के समर्थन में कुछ क्षेत्रों ऐच्छिक रूप से कुछ दुकानें और बाजार बंद रह सकते हैं। हालांकि, इस दौरान जरूरी सेवाएं जारी रहेंगी। खबर है कि इस दौरान पब्लिक ट्रांसपोर्ट सामान्य रूप से चल सकता है। हालांकि, अगर प्रदर्शन होता है तो यातायात व्यवस्था, रोड ब्लॉक जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


    क्यों बुलाया बंद

    उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार छात्र आंदोलनों से इतनी डरी हुई है कि उसने प्रादेशिक सेना तक को तैनात कर दिया है। वामपंथी दलों और शैक्षणिक संस्थानों ने हमारे बंद का समर्थन किया है, वहीं राज्य के कोचिंग संस्थान भी हमारे संपर्क में हैं।’


    राहुल गांधी से कर दी डिमांड

    उन्होंने कहा, ‘हम नई पीढ़ी खड़ी करने का प्रयास कर रहे हैं। मेरा मानना है कि सरकार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। छात्रों के आंदोलन पर सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है, इसलिए 23 जुलाई का महाराष्ट्र बंद होकर रहेगा। मेरी यह भी राय है कि राहुल गांधी को जंतर-मंतर जाकर विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।’

    उन्होंने यह भी कहा कि यह छात्र आंदोलन हालांकि उनका नहीं है, फिर भी वह इसका पूरा समर्थन करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के छात्र संगठन से भी इस इस बंद में हिस्सा लेने की अपील की।


    चर्चाएं जारी

    वीबीए प्रमुख ने कहा, ‘इस बंद को सफल बनाने के लिए हम मजदूर यूनियनों, बेस्ट यूनियनों, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की यूनियनों और अन्य श्रमिक संगठनों से चर्चा कर रहे हैं। दिल्ली में छात्रों पर अमानवीय अत्याचार हुए हैं, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है। कई संगठन इस बंद में शामिल होने को उत्सुक हैं।’


    रिजर्व पुलिस फोर्स बुलाने पर आपत्ति

    उन्होंने कहा ‘दिल्ली में छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए कश्मीर से रिजर्व पुलिस बल बुलाये गए हैं, जिसका हम कड़ा विरोध करते हैं। हमारी कोशिश है कि सरकार छात्रों पर आंसू गैस या बल प्रयोग न करे। हमने भाजपा को छोड़कर सभी दलों से बंद में शामिल होने की अपील की है, ताकि आंदोलनकारी छात्रों के प्रति एकजुट होकर हम समर्थन दिखा सकें।’


    दादर में पुलिस कार्रवाई

    इससे पहले मुंबई पुलिस ने आज दादर वेस्ट में समुद्र तट पर स्थित ऐतिहासिक चैत्यभूमि पर वामपंथी दलों की ओर से आयोजित शांतिपूर्ण सभा को तितर-बितर कर दिया। यह स्थान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का समाधि स्थल होने के साथ-साथ दलित समुदाय के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल भी है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार एहतियाती तौर पर चैत्यभूमि से हिरासत में लिए गये भाकपा के कॉमरेड मिलिंद रानाडे और अन्य कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया गया है। वहीं माकपा के कॉमरेड शैलेंद्र कांबले और शेतकारी कामगार पार्टी (पीडब्ल्यूपी) के राजू कोरडे के आवासों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।

    उन्होंने बताया कि एहतियाती कार्रवाई के तहत भाकपा से जुड़े अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसएफ) के युवा नेता कॉमरेड आमिर काजी और पीडब्ल्यूपी के साम्य कोरडे को चेतावनी दी गई है कि यदि वे अपने घरों से बाहर निकले तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जायेगा।

    इस बीच मुंबई पुलिस ने चैत्यभूमि को भारी बैरिकेड्स और नाकेबंदी लगाकर पूरी तरह से सील कर दिया है, जहां पहले से ही एक स्थायी पुलिस चौकी मौजूद है। प्रदर्शनकारी जहां तक संभव हो छोटे समूहों में जुटने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी तंग गलियों से होते हुए चैत्यभूमि पहुंचे, तो कुछ ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए।

    कांग्रेस भी साथ
    महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल कहा कि कांग्रेस ने गुरुवार को वीबीए के बुलाए गए महाराष्ट्र बंद का समर्थन किया, जो राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में है।

  • राम मंदिर दान विवाद के बीच शिंदे-उद्धव में बढ़ी सियासी तल्खी, हिंदुत्व की विरासत और ‘राम रक्षा’ अभियान पर छिड़ा नया संग्राम

    राम मंदिर दान विवाद के बीच शिंदे-उद्धव में बढ़ी सियासी तल्खी, हिंदुत्व की विरासत और ‘राम रक्षा’ अभियान पर छिड़ा नया संग्राम

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व और राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी राजनीति अब सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक सुविधा पर आधारित हो गई है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने पहले हिंदुत्व की विचारधारा से दूरी बना ली थी, वे अब राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने पर भगवान राम का नाम लेकर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

    एकनाथ शिंदे ने कहा कि हिंदुत्व किसी अवसर के अनुसार अपनाई या छोड़ी जाने वाली विचारधारा नहीं है। उनके अनुसार यह एक स्थायी आस्था और जीवन मूल्यों से जुड़ा विषय है, जिसे राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदला नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने अपनी मूल विचारधारा से समझौता किया और अब जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बनाए रखने के लिए राम और हिंदुत्व का सहारा लिया जा रहा है।

    राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। इसी विषय को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने राज्यभर में ‘राम रक्षा आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    इसी घटनाक्रम के बीच नागपुर में एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उद्धव ठाकरे ने भी राज्य सरकार और अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा। उन्होंने हिंदुत्व और भगवान राम के नाम पर राजनीति करने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था को राजनीतिक लाभ का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए।

    उद्धव ठाकरे की टिप्पणियों का जवाब देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि जब राजनीतिक आधार कमजोर पड़ने लगा तो भगवान राम का नाम लिया जाने लगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “जब भगवा लगा घटने तब राम का नाम लगे रटने।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति भगवान राम के आदर्शों से दूर है, वह जनता के विश्वास पर भी खरा नहीं उतर सकता। उनके इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में हिंदुत्व, राम मंदिर और धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। विभिन्न दल इन विषयों पर अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत जनता के बीच संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में बयानबाजी और वैचारिक टकराव का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है।

    महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह विवाद केवल नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंदुत्व की विरासत, राजनीतिक पहचान और जनसमर्थन की प्रतिस्पर्धा का भी प्रतीक बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों की रणनीति और जनता की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • महाराष्ट्र: उल्हास नदी पर बन रहे बुलेट ट्रेन पुल के बहने की खबर वायरल, NHSRCL ने बताया क्या है सच्‍चाई

    महाराष्ट्र: उल्हास नदी पर बन रहे बुलेट ट्रेन पुल के बहने की खबर वायरल, NHSRCL ने बताया क्या है सच्‍चाई


    मुंबई। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भारी बारिश के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुई उस खबर का नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत उल्हास नदी पर बन रहा पुल बह गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कोई भी स्थायी पुल क्षतिग्रस्त या बहा नहीं है।

    NHSRCL ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि भारी बारिश और उल्हास नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण केवल निर्माण कार्य के लिए बनाया गया अस्थायी एक्सेस मार्ग प्रभावित हुआ है। यह मार्ग मजदूरों, मशीनरी और निर्माण सामग्री के आवागमन के लिए तैयार किया गया था और इसका मुख्य पुल की संरचना से कोई संबंध नहीं था।

    निर्माण कार्य पर नहीं पड़ा कोई असर
    अधिकारियों के अनुसार, इस घटना का पुल के डिजाइन, सुरक्षा या निर्माण कार्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। परियोजना का निर्माण कार्य तय योजना के अनुसार जारी है और सभी गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।

    भारी बारिश के बाद फैली थी भ्रम की स्थिति
    हाल ही में ठाणे जिले में हुई तेज बारिश के कारण उल्हास नदी उफान पर आ गई थी, जिससे आसपास के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। इसी दौरान कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि निर्माणाधीन पुल बह गया है। हालांकि, NHSRCL ने स्पष्ट किया कि प्रभावित हिस्सा केवल अस्थायी निर्माण मार्ग था, स्थायी पुल नहीं।

    1.08 लाख करोड़ रुपये की है परियोजना
    मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है और इसे करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा है।

    NHSRCL ने लोगों से अपील की है कि परियोजना से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक या अपुष्ट खबरों से बचें। निगम के अनुसार, ठाणे सहित सभी निर्माण स्थलों पर परियोजना का कार्य पारदर्शिता के साथ लगातार जारी है।

  • शिवसेना यूबीटी के पूर्व सांसद विवादों में बहू ने लगाए काला जादू और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप

    शिवसेना यूबीटी के पूर्व सांसद विवादों में बहू ने लगाए काला जादू और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ा एक मामला इन दिनों सुर्खियों में है जहां शिवसेना यूबीटी के पूर्व सांसद विनायक राउत और उनके परिवार के खिलाफ उनकी बहू ने गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में शारीरिक मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना के साथ काला जादू कराने तथा अंधविश्वास से जुड़ी कथित गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है जबकि पूर्व सांसद ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए उन्हें परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया है।

    पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2017 में उसकी शादी विनायक राउत के बेटे जितेश से कराई गई जबकि परिवार को पहले से यह जानकारी थी कि वह वैवाहिक संबंध निभाने में सक्षम नहीं है। महिला का दावा है कि जब उसने इस विषय पर सवाल उठाए तो उसकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उसने आरोप लगाया कि उसे यह कहकर बहलाया गया कि उसके वैवाहिक जीवन में किसी बाहरी बाधा का असर है और उसे दूर करने के लिए कथित धार्मिक अनुष्ठानों का सहारा लिया गया।

    महिला का यह भी आरोप है कि इन कथित अनुष्ठानों के दौरान कुछ लोगों ने उसके साथ अशोभनीय और आपत्तिजनक व्यवहार किया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उसे विभिन्न देशों की यात्राओं के दौरान भी मानसिक दबाव और दुर्व्यवहार झेलना पड़ा। इसके अलावा उसने अपनी सास पर आरोप लगाया कि उसे मासिक धर्म रोकने वाली दवाएं लेने के लिए मजबूर किया गया जिससे उसकी सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ा। महिला का यह भी कहना है कि उचित चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराने के बजाय वैकल्पिक तरीकों से गर्भधारण कराने की सलाह दी गई।

    पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ महाराष्ट्र मानव बलि और अन्य अमानवीय बुरी एवं अघोरी प्रथाओं तथा काला जादू निवारण कानून के तहत भी प्रकरण दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    दूसरी ओर पूर्व सांसद विनायक राउत ने सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके बेटे और शिकायतकर्ता के बीच तलाक की प्रक्रिया पहले से चल रही है। उन्होंने दावा किया कि समझौते के दौरान महिला की ओर से करोड़ों रुपये की आर्थिक मांग की गई थी जिसे स्वीकार नहीं किया गया। राउत का आरोप है कि इसके बाद परिवार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से यह शिकायत दर्ज कराई गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका परिवार तंत्र मंत्र या काले जादू जैसी किसी भी गतिविधि में विश्वास नहीं करता और लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह झूठे हैं।

    यह मामला अब कानूनी प्रक्रिया के अधीन है और पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल दोनों पक्ष अपने अपने दावे कर रहे हैं लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

  • शरद पवार की शिंदे के केबिन में मौजूदगी से तेज हुई सियासी चर्चाएं, दोनों पक्षों ने बताया महज शिष्टाचार और सुविधाजनक मुलाकात

    शरद पवार की शिंदे के केबिन में मौजूदगी से तेज हुई सियासी चर्चाएं, दोनों पक्षों ने बताया महज शिष्टाचार और सुविधाजनक मुलाकात

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के बीच वरिष्ठ नेता शरद पवार की उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय में मौजूदगी ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। विधानसभा परिसर में हुई इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में संभावित नए समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गईं। हालांकि कुछ ही समय बाद दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात किसी राजनीतिक बदलाव का संकेत नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुरूप हुई एक सामान्य और शिष्टाचार आधारित बैठक थी।

    जानकारी के अनुसार शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद से संबंधित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में भाग लेने के लिए विधानसभा पहुंचे थे। समिति की बैठक समाप्त होने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी एनसीपी (एसपी) के विधायकों से मुलाकात की। यह बैठक उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के केबिन में आयोजित हुई, जिसके बाद राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। बाद में एकनाथ शिंदे भी वहां पहुंचे और उन्होंने शरद पवार का स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत भी हुई, लेकिन उसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

    एनसीपी (एसपी) के नेताओं ने इस घटनाक्रम को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि बैठक के पीछे कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था। पार्टी नेताओं के अनुसार शरद पवार को लंबी दूरी तक पैदल चलने में असुविधा होती है। इसी कारण निकास द्वार के निकट स्थित उपमुख्यमंत्री के कार्यालय को बैठक के लिए उपयुक्त स्थान के रूप में चुना गया। उनका कहना है कि जब शरद पवार वहां पहुंचे, उस समय एकनाथ शिंदे अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे और बाद में उन्हें जानकारी मिलने पर उन्होंने शिष्टाचारवश मुलाकात की।

    उधर, एकनाथ शिंदे खेमे ने भी इस मुलाकात को सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा बताया। सरकार की ओर से कहा गया कि महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा में वरिष्ठ नेताओं का सम्मान किया जाता है और इसी भावना के तहत उनका स्वागत किया गया। इस मुलाकात का किसी संभावित राजनीतिक गठबंधन, दल परिवर्तन या नए समीकरण से कोई संबंध नहीं है।

    मुलाकात के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या राज्य की राजनीति में कोई नया मोड़ आने वाला है। हालांकि एनसीपी (एसपी) ने इन सभी अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। पार्टी नेतृत्व ने कहा कि उनका महा विकास अघाड़ी के प्रति रुख पहले जैसा ही है और किसी अन्य राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने या किसी प्रकार के विलय की चर्चाओं में कोई तथ्य नहीं है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं की हर मुलाकात स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाती है। विशेष रूप से विधानसभा सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच होने वाली मुलाकातों को अक्सर राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जाता है। हालांकि कई बार ऐसी मुलाकातें केवल प्रशासनिक, औपचारिक या व्यक्तिगत शिष्टाचार तक ही सीमित होती हैं।

    फिलहाल दोनों पक्षों के आधिकारिक बयानों के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि इस मुलाकात को किसी नए राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बावजूद राज्य की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • भारी बारिश से महाराष्ट्र-गुजरात में बढ़ी चुनौती, अमित शाह ने दोनों मुख्यमंत्रियों से की बात, केंद्र ने हरसंभव सहायता का दिया भरोसा

    भारी बारिश से महाराष्ट्र-गुजरात में बढ़ी चुनौती, अमित शाह ने दोनों मुख्यमंत्रियों से की बात, केंद्र ने हरसंभव सहायता का दिया भरोसा

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र और गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन पर पड़े व्यापक असर के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोनों राज्यों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से अलग-अलग फोन पर बातचीत कर मौजूदा हालात की जानकारी ली और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। इस पहल को दोनों राज्यों में मौसम से उत्पन्न चुनौतियों के बीच केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

    महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने से सड़क यातायात धीमा पड़ गया, जबकि उपनगरीय लोकल ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित रहीं। कार्यालय जाने वाले लोगों को लंबी देरी और असुविधा का सामना करना पड़ा। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण शहर के कई निचले क्षेत्रों में पानी भरने की समस्या बनी हुई है।

    मुंबई को पेयजल उपलब्ध कराने वाले प्रमुख जलाशयों में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। भारी वर्षा के चलते तुलसी झील अपने अधिकतम स्तर तक पहुंचकर ओवरफ्लो होने लगी है। मौसम विभाग ने आने वाले समय में भी मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना जताई है, जिससे प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है।

    दूसरी ओर गुजरात के दक्षिणी हिस्सों में भी भारी बारिश ने व्यापक प्रभाव डाला है। विशेष रूप से सूरत जिला सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा, जहां कई स्थानों पर अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर राहत अभियान चलाया गया। प्रशासन ने हजारों लोगों को सुरक्षित आश्रयों में पहुंचाकर राहत कार्य तेज किए हैं।

    भारी वर्षा के कारण दक्षिण गुजरात के कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ। एहतियात के तौर पर कई स्थानों पर स्कूल और कॉलेज बंद रखने का निर्णय लिया गया। लगातार बारिश के चलते स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन दल और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। प्रभावित इलाकों में आवश्यक सेवाएं बनाए रखने और लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के प्रयास भी जारी हैं।

    मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर रेल और सड़क परिवहन पर भी दिखाई दिया। जलभराव और अन्य बाधाओं के कारण गुजरात जाने वाली कई लंबी दूरी की रेल सेवाएं प्रभावित हुईं। वहीं मुंबई-पुणे मार्ग पर पहले हुए भूस्खलन के कारण यातायात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका। प्रशासन लगातार मार्गों की निगरानी कर रहा है ताकि परिवहन व्यवस्था को जल्द से जल्द सुचारु बनाया जा सके।

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोनों राज्यों में राहत और बचाव कार्यों के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दोनों मुख्यमंत्रियों से की गई बातचीत में प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, राहत अभियानों की प्रगति और भविष्य की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। लगातार बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन लोगों से सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील कर रहा है।Aksharam Media and

  • UCC की दिशा में महाराष्ट्र सरकार का बड़ा कदम, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में बनेगी समिति

    UCC की दिशा में महाराष्ट्र सरकार का बड़ा कदम, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में बनेगी समिति


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। सरकार कानून का प्रारूप तैयार करने के लिए दो सप्ताह के भीतर एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की तैयारी में है। प्रस्तावित समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे और उसका मुख्य दायित्व यूसीसी से संबंधित कानूनी मसौदा तैयार करना होगा। हालांकि समिति के गठन, सदस्यों और कार्यक्षेत्र को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है।

    सरकारी स्तर पर चल रही तैयारियों के अनुसार समिति विभिन्न कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसके बाद राज्य में लागू किए जाने वाले संभावित कानून का विस्तृत प्रारूप तैयार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ऐसा मसौदा तैयार करना है, जो संवैधानिक प्रावधानों और मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुरूप हो तथा सभी आवश्यक पहलुओं को समाहित कर सके।

    राज्य सरकार की ओर से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का निर्णय नीति स्तर पर लिया जा चुका है। इसी क्रम में विधानसभा में भी सरकार ने स्पष्ट किया था कि इस दिशा में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रस्तावित समिति का गठन उसी प्रक्रिया का पहला औपचारिक चरण माना जा रहा है।

    यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य विवाह, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। वर्तमान में इन विषयों पर विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। यूसीसी का विचार इन सभी मामलों में एक समान नागरिक कानून लागू करने की अवधारणा पर आधारित है।

    सरकार का मानना है कि समान नागरिक संहिता से कानूनी व्यवस्था में एकरूपता आएगी और नागरिक अधिकारों के क्रियान्वयन में समानता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही लैंगिक समानता, न्यायसंगत अधिकारों और समान अवसरों को भी इससे मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इस विषय पर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी स्तरों पर अलग-अलग मत भी सामने आते रहे हैं।

    विशेषज्ञ समिति के गठन के बाद उसके सुझावों और सिफारिशों के आधार पर कानून का प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके पश्चात सरकार आगे की विधायी प्रक्रिया अपनाएगी। यदि मसौदे को मंजूरी मिलती है तो इसे राज्य की विधानमंडलीय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।

    महाराष्ट्र सरकार की इस पहल को राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर प्रस्तावित समिति के गठन, उसके कार्यक्षेत्र और भविष्य में तैयार होने वाले विधेयक के स्वरूप पर रहेगी, क्योंकि यही दस्तावेज राज्य में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया की आधारशिला साबित होगा।

  • महाराष्ट्र में भी लागू होगा UCC…. ड्राफ्ट तैयार करने के सरकार बनाएगी कमेटी

    महाराष्ट्र में भी लागू होगा UCC…. ड्राफ्ट तैयार करने के सरकार बनाएगी कमेटी


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) में यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code- UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है. जानकारी के मुताबिक कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए जल्द ही एक कमेटी का गठन किया जाएगा.

    अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करने हेतु दो हफ्ते के भीतर एक कमेटी बना सकती है. उन्होंने जानकारी दी कि कमेटी के गठन और इसके काम करने के दायरे को अभी फाइनल किया जाना बाकी है।

    जानकारी के मुताबिक एक अधिकारी ने जानकारी दी कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी बनाने का प्रोसेस चल रहा है और अगले दो हफ्तों के भीतर इसका गठन कर दिया जाएगा।

    बता दें कि पिछले हफ्ते ही गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने विधानसभा में जानकारी दी थी कि महाराष्ट्र में यूसीसी लागू किया जाएगा और इस कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में कमेटी बनाई जाएगी.

    यूनिफॉर्म सिविल कोड एक संवैधानिक निर्देश है, जिसका मकसद सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, विरासत और एडॉप्शन जैसे मामलों में एक समान कानून लागू करना है. कानून की नजर में सब एक समान होते हैं. शादी, तलाक, एडॉप्शन, उत्तराधिकार, विरासत लेकिन सबसे बढ़कर लैंगिक समानता वो कारण है, जिस वजह से यूनिफार्म सिविल कोड की जरूरत महसूस की जाती रही है।

    यूसीसी का मतलब है कि शादी, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में सभी नागरिकों पर एक समान कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो. जिस राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होगी, वहां इन मामलों में सभी धर्मों के लोगों के लिए एक ही कानूनी व्यवस्था लागू होगी।

  • मॉनसून में 15 अगस्त तक समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक, महाराष्ट्र सरकार दे सकती है ₹50 हजार की सहायता

    मॉनसून में 15 अगस्त तक समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक, महाराष्ट्र सरकार दे सकती है ₹50 हजार की सहायता


    मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने मॉनसून के दौरान समुद्र में मछली पकड़ने पर लगने वाले वार्षिक प्रतिबंध की अवधि बढ़ाकर 15 अगस्त तक कर दी है। प्रतिबंध से प्रभावित मछुआरों को आर्थिक राहत देने के लिए सरकार प्रति मछुआरे 50 हजार रुपये तक की सहायता देने पर विचार कर रही है।

    विधानसभा में मछली पालन मंत्री नितेश राणे ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के देर से सक्रिय होने के कारण केंद्र सरकार ने पहले पश्चिमी तट पर 1 जून से 31 जुलाई तक मछली पकड़ने पर रोक लगाई थी। अब राज्य सरकार ने इस अवधि को बढ़ाकर 15 अगस्त तक कर दिया है।

    क्यों बढ़ाया गया प्रतिबंध?
    मंत्री के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य समुद्री जैव विविधता और मछलियों के प्रजनन चक्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रतिबंध के दौरान समुद्री प्रजातियों को अंडे देने और प्राकृतिक रूप से विकसित होने का पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे भविष्य में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा मॉनसून के दौरान तेज हवाएं, ऊंची लहरें, चक्रवात और खराब समुद्री मौसम के कारण मछुआरों की सुरक्षा भी इस निर्णय की प्रमुख वजह है।

    मछुआरों को मिलेगी आर्थिक राहत
    नितेश राणे ने कहा कि प्रतिबंध बढ़ने से मछुआरों की आजीविका प्रभावित होगी। इसे देखते हुए सरकार ने प्रत्येक मछुआरे को 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजने का निर्णय लिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिल जाएगी।

    मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए कई नई पहल
    मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा प्रदान किया है, जिससे मछुआरों को किसानों की तरह विभिन्न सब्सिडी और सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

    इसके अलावा मछली बीज (सीड) उत्पादन बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। जिला नियोजन समितियों को अपनी 5 प्रतिशत राशि मत्स्य पालन विकास पर खर्च करने की सलाह दी गई है। पहली बार आंतरिक (इनलैंड) मत्स्य पालकों को प्राकृतिक आपदाओं और अनियमित बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 100 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। तालाब आवंटन, समितियों के पंजीकरण और अन्य प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित डिजिटल प्रणाली विकसित की जा रही है।

    मत्स्य बाजारों का होगा आधुनिकीकरण
    मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 1,240 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस धनराशि से आधुनिक मछली बाजार विकसित किए जाएंगे, जिससे मछुआरों को सीधे बाजार तक पहुंच मिलेगी और उपभोक्ताओं को ताजी मछली उपलब्ध कराई जा सकेगी। सरकार का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र को अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाना है।

  • देश का 16 फीसदी केला देता है महाराष्ट्र का यह जिला, आधुनिक खेती और GI टैग ने बनाया ‘बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया’

    देश का 16 फीसदी केला देता है महाराष्ट्र का यह जिला, आधुनिक खेती और GI टैग ने बनाया ‘बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया’

    नई दिल्ली । भारत दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई मानी जाती है। देश में हर वर्ष करोड़ों टन केले का उत्पादन होता है, जिसमें महाराष्ट्र अग्रणी राज्य है। इसी राज्य का जलगांव जिला अपनी असाधारण उत्पादन क्षमता के कारण ‘बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। यह जिला अकेले देश के कुल केला उत्पादन में लगभग 16 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि महाराष्ट्र में केले की खेती के कुल क्षेत्रफल का करीब 69 प्रतिशत हिस्सा भी यहीं स्थित है।

    जलगांव की सफलता के पीछे उसकी अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां सबसे बड़ा कारण मानी जाती हैं। उत्तर में सतपुड़ा और दक्षिण में अजंता पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित यह क्षेत्र उपजाऊ काली मिट्टी, पर्याप्त धूप और गर्म जलवायु के कारण केले की खेती के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। यहां की मिट्टी में नमी बनाए रखने की क्षमता अधिक है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं।

    केले की खेती केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि जलगांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव भी है। जिले के हजारों किसान सीधे तौर पर इस फसल पर निर्भर हैं। इसके अलावा परिवहन, पैकेजिंग, भंडारण, प्रसंस्करण और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। इस कारण केला उत्पादन यहां की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार बन चुका है।

    जलगांव के किसानों ने समय के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को तेजी से अपनाया है। टिश्यू कल्चर पौधों का उपयोग, ड्रिप सिंचाई प्रणाली और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन ने उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। विशेष रूप से ड्रिप सिंचाई तकनीक ने पानी की बचत के साथ पौधों तक आवश्यक मात्रा में सिंचाई सुनिश्चित की है, जिससे लागत कम हुई और गुणवत्ता में सुधार आया।

    इस जिले में कई लोकप्रिय केले की किस्मों की खेती होती है। बसराई किस्म अपनी गुणवत्ता, स्वाद और लंबे समय तक ताजा रहने की क्षमता के कारण देशभर के बाजारों में पसंद की जाती है। वहीं जी-9 (G-9) किस्म अधिक उत्पादन, बड़े आकार, रोग प्रतिरोधक क्षमता और निर्यात की संभावनाओं के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है। इन उन्नत किस्मों ने जलगांव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत पहचान दिलाई है।

    जलगांव की एक और बड़ी ताकत उसका बेहतर परिवहन नेटवर्क है। सड़क और रेल मार्ग से देश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से जुड़ा होने के कारण यहां से केले की आपूर्ति तेजी और आसानी से की जाती है। भुसावल जंक्शन देश के महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों में शामिल है, जिससे कृषि उत्पादों का परिवहन और भी सुगम हो जाता है।

    जलगांव के केले को वर्ष 2016 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी प्राप्त हो चुका है। यह मान्यता इस बात का प्रमाण है कि यहां उत्पादित केले की गुणवत्ता और विशेषताएं इस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी हुई हैं। आधुनिक कृषि तकनीक, अनुकूल प्राकृतिक संसाधन, मजबूत परिवहन व्यवस्था और किसानों की नवाचार अपनाने की क्षमता ने जलगांव को देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी केले के प्रमुख उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित किया है।