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  • भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार महाराष्ट्र पहुंचे नितिन नबीन, सिद्धिविनायक और लालबागचा राजा के किए दर्शन

    भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार महाराष्ट्र पहुंचे नितिन नबीन, सिद्धिविनायक और लालबागचा राजा के किए दर्शन

    नई दिल्ली ।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन बुधवार को गणेशोत्सव के बीच अपने पहले महाराष्ट्र दौरे पर मुंबई पहुंचे। भाजपा अध्यक्ष का पद संभालने के बाद यह उनका महाराष्ट्र का पहला दौरा है। मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। इसके बाद नितिन नबीन लालबागचा राजा के दरबार में पहुंचे और गणपति बप्पा का आशीर्वाद लिया।

    नितिन नबीन के मुंबई दौरे के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम भी उनके साथ मौजूद रहे। गणेशोत्सव के माहौल में हुए इस दौरे के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। दर्शन के बाद नितिन नबीन ने कहा कि गणेश उत्सव के अवसर पर महाराष्ट्र आना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के दर्शन को विशेष अनुभव बताया।

    नितिन नबीन ने कहा कि महाराष्ट्र में गणेश उत्सव के दौरान आकर वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन के बाद लालबागचा राजा के दर्शन उनके लिए बेहद खास क्षण है। उन्होंने महाराष्ट्र के लोगों और देशवासियों के कल्याण की कामना करते हुए प्रार्थना की।

    महाराष्ट्र में इस वर्ष गणेशोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर से हुई है। मुंबई में गणेश उत्सव के दौरान सिद्धिविनायक मंदिर, लालबागचा राजा समेत कई प्रमुख गणपति स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। लालबागचा राजा का गणेशोत्सव भी 14 सितंबर से शुरू हुआ है और 25 सितंबर तक चलेगा। ऐसे समय में नितिन नबीन का मुंबई दौरा गणेशोत्सव से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों के बीच हुआ।

    मुंबई में दर्शन के बाद नितिन नबीन के एक दिवसीय महाराष्ट्र दौरे में पुणे जाने का कार्यक्रम भी शामिल रहा। उनके कार्यक्रम में मुंबई और पुणे के प्रमुख गणपति मंदिरों तथा गणेश मंडलों में दर्शन और पूजा-अर्चना रखी गई। मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के बाद उनका कार्यक्रम मालाबार हिल, बांद्रा रिक्लेमेशन और अन्य गणपति स्थलों पर दर्शन से जुड़ा था।

    मालाबार हिल में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के अलावा एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के आवास पर स्थापित गणपति के दर्शन का कार्यक्रम भी रखा गया था। इसके बाद बांद्रा रिक्लेमेशन में गणपति दर्शन का कार्यक्रम निर्धारित था। दौरे के अगले चरण में नितिन नबीन के पुणे पहुंचने का कार्यक्रम था, जहां कसबा गणपति और दगडूशेठ हलवाई गणपति समेत अन्य गणपति मंडलों में दर्शन किए जाने थे।

    पुणे के कार्यक्रम में साने गुरुजी तरुण मित्र मंडल और कोथरूड स्थित श्री साई मित्र मंडल के गणपति दर्शन भी शामिल रहे। इस दौरान गणेशोत्सव के धार्मिक माहौल में पूजा-अर्चना और भगवान गणेश के दर्शन उनके दौरे का प्रमुख हिस्सा रहे।

    नितिन नबीन के महाराष्ट्र दौरे की शुरुआत मुंबई में गणेश दर्शन से हुई। सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अमित साटम की मौजूदगी रही। भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद नबीन का यह पहला महाराष्ट्र दौरा गणेशोत्सव के दौरान हुआ, जिसमें उन्होंने मुंबई और पुणे के प्रमुख गणपति स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और महाराष्ट्र तथा देश के कल्याण की कामना की।

  • महाराष्ट्र के आदिवासी स्कूलों को लेकर सीजेपी का नया अभियान, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से जुड़ने की अपील

    महाराष्ट्र के आदिवासी स्कूलों को लेकर सीजेपी का नया अभियान, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से जुड़ने की अपील

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र में आदिवासी बच्चों की शिक्षा और सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सीजेपी ने नया अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों और आदिवासी स्कूलों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने की बात कही है। उन्होंने इस अभियान से स्वयंसेवकों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के जुड़ने की अपील की है।

    अभिजीत दीपके ने सरकारी आदिवासी स्कूलों की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन स्कूलों में आदिवासी बच्चे पढ़ते हैं, वहां पढ़ाई के लिए जरूरी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आदिवासी बच्चों को अच्छी और सम्मानजनक शिक्षा मिल सके।

    दीपके ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों यानी EMRS की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए बनाए गए इन स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और व्यवस्थाओं की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।

    उन्होंने स्वयंसेवकों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान से जुड़ें। उनके अनुसार अभियान के जरिए यह सुनिश्चित करने में मदद की जानी चाहिए कि आदिवासी बच्चों को उनके अधिकार के अनुरूप अच्छी शिक्षा और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

    दीपके ने महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में बच्चों की मौत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में इन स्कूलों में 590 से अधिक बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने इन घटनाओं के पीछे स्कूलों में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, सांप के काटने की घटनाओं और बच्चों के लिए पर्याप्त बिस्तरों की उपलब्धता नहीं होने जैसी समस्याओं का उल्लेख किया।

    उन्होंने कहा कि बिस्तरों की कमी के कारण बच्चों को जमीन पर सोना पड़ता है और ऐसी परिस्थितियों में सांप के काटने की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने इसे सरकार की ओर से मेडिकल लापरवाही का मामला बताया।

    सीजेपी का कहना है कि आदिवासी समुदाय का संसाधनों पर पहला हक है और शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। संगठन के अनुसार आदिवासी बच्चों को बेहतर से बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि उन्हें अपने अधिकार के अनुरूप शैक्षणिक अवसर मिल सकें।

    दीपके ने आदिवासी स्कूलों से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुल 720 स्कूलों को मंजूरी मिली है, लेकिन इनमें से केवल 477 स्कूल ही संचालित हो रहे हैं। उनके अनुसार सिर्फ 341 स्कूलों के पास अपनी पक्की इमारतें हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन स्कूलों में 28 हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं।

    उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन स्कूलों का उद्देश्य आदिवासी बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना था, तो बड़ी संख्या में बच्चे अभी भी स्कूलों, शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं का इंतजार क्यों कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर सीजेपी ने अभियान के माध्यम से संबंधित व्यवस्थाओं पर ध्यान देने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने की अपील की है।

    अभियान के तहत संगठन ने आदिवासी बच्चों की शिक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाने और स्कूलों की स्थिति में सुधार के लिए स्वयंसेवकों, शिक्षाविदों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को साथ आने का आह्वान किया है। संगठन ने कहा है कि आदिवासी बच्चों को अच्छी और सम्मानजनक शिक्षा मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

  • अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, फिर आंदोलन की तैयारी; MPSC अभ्यर्थियों के साथ महाराष्ट्र में उतरेंगे मैदान में

    अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, फिर आंदोलन की तैयारी; MPSC अभ्यर्थियों के साथ महाराष्ट्र में उतरेंगे मैदान में

    मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक दीपके और CJP के अन्य नेता महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ऑनलाइन परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के साथ प्रदर्शन में शामिल होंगे। पार्टी ने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र की भाजपा नीत सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।

    CJP ने रविवार को जारी विज्ञप्ति में कहा कि अभिजीत दीपके और पार्टी के अन्य नेता MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन में उनके साथ खड़े होंगे। इससे पहले कुछ MPSC अभ्यर्थियों ने छत्रपति संभाजीनगर के वालुज क्षेत्र स्थित दीपके के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी।

    24 सितंबर तक का दिया अल्टीमेटम

    CJP ने MPSC के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही है। पार्टी के अनुसार यदि 24 सितंबर तक मांग पूरी नहीं हुई तो अभ्यर्थियों से बातचीत के लिए राज्यव्यापी दौरा किया जाएगा।

    MPSC अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद जारी वीडियो संदेश में दीपके ने कहा कि वह और CJP अभ्यर्थियों की लड़ाई में उनके साथ हैं और इस्तीफा होने तक उनका समर्थन जारी रहेगा।

    प्रथमेश देशमुख की मौत के बाद गरमाया मुद्दा

    MPSC परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 28 वर्षीय प्रथमेश देशमुख की पुणे में मौत के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया था। उसके पास मिले कथित सुसाइड नोट में करीब 2.5 लाख रुपये के कर्ज का उल्लेख था। इसके बाद CJP ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देशमुख ने व्यवस्था, बेरोजगारी और ग्रामीण युवाओं की आर्थिक स्थिति से परेशान होकर यह कदम उठाया।

    अभिजीत दीपके ने इसी सप्ताह प्रथमेश देशमुख के परिजनों से भी मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने कहा था कि देशमुख नौकरी हासिल कर परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के सपने के साथ पुणे गया था। दीपके ने आरोप लगाया कि पेपर लीक और परिणामों में देरी के कारण अभ्यर्थियों पर दबाव बढ़ रहा है और इसे व्यवस्था की विफलता बताया।

    जंतर-मंतर आंदोलन के बाद फिर सक्रिय CJP

    इससे पहले अभिजीत दीपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। करीब एक महीने पहले उन्होंने आंदोलन के ‘सीजन-2’ का संकेत देते हुए कहा था कि देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर फिर आंदोलन शुरू किया जा सकता है।

    मनोज जरांगे को भी दिया समर्थन

    इस बीच दीपके ने महाराष्ट्र में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे मनोज जरांगे को भी समर्थन दिया है। वह शुक्रवार को जरांगे से मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के बाद उन्होंने सरकार से जरांगे की मांगों पर बातचीत करने की अपील की।

    दीपके ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेताओं के पास दूसरे लोगों से मिलने का समय है, लेकिन जरांगे से बातचीत क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जरांगे के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

    CJP के नए ऐलान के बाद MPSC अभ्यर्थियों का आंदोलन और महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ दीपके की राजनीतिक सक्रियता आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

  • MPSC छात्र की आत्महत्या के बाद अभिजीत दीपके परिवार से मिलेंगे, कर्ज और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

    MPSC छात्र की आत्महत्या के बाद अभिजीत दीपके परिवार से मिलेंगे, कर्ज और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी फाउंडर अभिजीत दीपके MPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र के परिवार से मिलने पहुंच रहे हैं। छात्र ने पुणे में खुदकुशी कर ली थी। पुलिस को शक है कि कर्ज से परेशान होकर यह कदम उठाया गया है। मृतक की पहचान प्रथमेश देशमुख के रूप में हुई है।

    दीपके ने गुरुवार को पोस्ट किया, ‘मैं MPSC के एक छात्र प्रथमेश देशमुख के शोकाकुल परिवार से मिलने जा रहा हूं, जिन्होंने कल आत्महत्या कर ली थी।’ खबर है कि सीजेपी पदाधिकारी सौरभ दास भी नोएडा पहुंच रहे हैं, जहां वह प्रशासन की तरफ से 5 लाख का नोटिस पाने वाले छात्र अक्षत से मुलाकात करेंगे।

    पुलिस उपायुक्त कृषिकेश रावले ने बताया कि मृतक प्रथमेश देशमुख एमपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए पुणे के नवी पेठ इलाके में किराये के मकान में रह रहा था। उन्होंने बताया कि वह सुबह कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया, जिसके बाद कुछ निवासियों ने पुलिस को सूचना दी। उन्होंने बताया कि आत्महत्या का सही समय पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    सुसाइड नोट मिला

    पुलिस ने जानकारी दी है, ‘देशमुख कथित रूप से आर्थिक दबाव में था और उसे कई लोगों के करीब ढाई लाख रुपये लौटाने थे। उसका परिवार भी आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा था। उसने एक नोट छोड़ा है, जिसमें लोगों से लिए कर्ज और लौटाई जा चुकी रकम के बारे में जानकारियां दी गईं हैं।’

    बताया गया कि दो पन्नों के इस नोट में 8-19 लोगों के नाम लिखे हैं। पुलिस यह पता लगाने के लिए उसके परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रही है कि उसने पैसे क्यों उधार लिए थे और मामले की जांच जारी है।

    छत्रपति संभाजीनगर में हो रहा है प्रदर्शन

    मंगलवार को छत्रपति संभाजीनगर में MPSC में कथित भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। खास बात है कि यह दीपके का गृहनगर भी है। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आयोग में शीर्ष पदों पर साफ छवि वाले अधिकारियों को नियुक्त किया जाए। इससे पहले सोमवार को पुणे में भी प्रदर्शन हुआ था और देशमुख ने पुणे में ही आत्महत्या की है।

    इसके अलावा प्रदर्शनकारी पूर्व में हुई परीक्षाओं पर भी सवाल उठा रहे हैं और जांच की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के बाद हुई परीक्षाओं को लेकर भी संदेह है। एक छात्र ने कहा था, ‘हमें पता होना चाहिए कि आखिर क्या हो रहा है। मैं चार साल से पढ़ाई कर रहा हूं और परीक्षाएं दे रहा हूं। आज पैसे वाले लोग इसका फायदा उठा रहे हैं।’

  • मनोज बाजपेयी ने महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की तारीफ कर समाज पर सवाल उठाए

    मनोज बाजपेयी ने महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की तारीफ कर समाज पर सवाल उठाए

    नई दिल्ली । मनोज बाजपेयी ने तुकाराम मुंढे के काम की तारीफ करते हुए कहा कि आज के दौर में पूरी ईमानदारी और लगन से अपनी जिम्मेदारी निभाने वाला व्यक्ति भी लोगों के लिए असाधारण बन जाता है। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी का अपने कर्तव्य को निष्ठा से निभाना अब लोगों को इतना प्रभावित करता है कि वह व्यक्ति चर्चा में आकर सेलिब्रिटी जैसा बन जाता है।

    महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के प्रमुख तुकाराम मुंढे इन दिनों अपने काम करने के तरीके और सख्त रवैये को लेकर चर्चा में हैं। खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े मामलों में उनकी सक्रियता की वजह से उन्हें लेकर लोगों के बीच काफी चर्चा देखने को मिल रही है। उनके काम की सराहना करने वालों में अब अभिनेता मनोज बाजपेयी का नाम भी जुड़ गया है।

    मनोज बाजपेयी ने कहा कि समाज में ईमानदारी और निष्ठा से काम करने वाले लोगों को देखकर लोगों का हैरान होना अपने आप में सोचने वाली बात है। उनके मुताबिक जब किसी अधिकारी को एक जिम्मेदारी सौंपी जाती है और वह व्यक्ति बिना किसी समझौते के अपना काम करता है, तो आज के समय में उसका इस तरह चर्चा में आना समाज की बदलती सोच को भी दिखाता है।

    अभिनेता ने उदाहरण देते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी या तुकाराम मुंढे जैसे अधिकारी जब अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाते हैं, तो लोग उन्हें अलग नजर से देखने लगते हैं। उनका मानना है कि कर्तव्य के प्रति निष्ठा सामान्य व्यवस्था का हिस्सा होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यही बात लोगों को असाधारण लगने लगी है।

    तुकाराम मुंढे को लेकर सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच भी लगातार चर्चा रही है। उनके सख्त प्रशासनिक रवैये और काम के प्रति गंभीरता को लेकर उन्हें रियल लाइफ हीरो तक कहा जा रहा है। मनोज बाजपेयी की टिप्पणी इसी चर्चा के बीच सामने आई है और इससे अधिकारी की कार्यशैली को लेकर जारी सार्वजनिक बहस को और बल मिला है।

    वहीं मनोज बाजपेयी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म लास्ट मैन इन टावर को लेकर भी चर्चा में हैं। फिल्म का निर्देशन बेन रेखी ने किया है और इसमें मनोज बाजपेयी के साथ दिव्या दत्ता और बोमन ईरानी जैसे कलाकार नजर आएंगे। यह फिल्म लेखक अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है।

    फिल्म में मनोज बाजपेयी एक सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक का किरदार निभा रहे हैं, जिसे मास्टरजी के नाम से जाना जाता है। कहानी एक ऐसी इमारत के निवासियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां एक बड़े बदलाव को लेकर लोगों के बीच मतभेद पैदा हो जाते हैं। मनोज बाजपेयी का किरदार अपनी कम्युनिटी की इच्छा के विपरीत फैसला लेता है, जिसके बाद इमारत में रहने वाले लोगों के बीच तनाव बढ़ता है।

    लास्ट मैन इन टावर 11 सितंबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म को लेकर मनोज बाजपेयी के प्रशंसकों के बीच भी उत्सुकता बनी हुई है। अभिनेता इससे पहले कई अलग-अलग तरह के किरदारों में नजर आ चुके हैं और अपनी अभिनय क्षमता के लिए लंबे समय से दर्शकों के बीच पहचान रखते हैं।

    तुकाराम मुंढे की कार्यशैली पर मनोज बाजपेयी की टिप्पणी ने एक बार फिर इस सवाल को चर्चा में ला दिया है कि क्या आज के समय में ईमानदारी और जिम्मेदारी से काम करना ही किसी अधिकारी को आम लोगों की नजर में खास बना देता है। उनके बयान का केंद्र यही विचार रहा कि अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभाना किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान होनी चाहिए।

  • मराठी नहीं आई तो 20 हजार जुर्माना!’ अफवाह से सड़क पर उतरे ऑटो-टैक्सी ड्राइवर, फडणवीस बोले- ऐसा कोई मकसद नहीं

    मराठी नहीं आई तो 20 हजार जुर्माना!’ अफवाह से सड़क पर उतरे ऑटो-टैक्सी ड्राइवर, फडणवीस बोले- ऐसा कोई मकसद नहीं


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के विरोध प्रदर्शन तक पहुंच गया है। राज्य सरकार के मराठी भाषा से जुड़े फैसले को लेकर सोमवार को मुंबई और आसपास के कई इलाकों में ड्राइवरों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान ड्राइवरों के बीच भारी जुर्माने और लाइसेंस रद्द होने जैसी खबरें तेजी से फैलने लगीं। मामला बढ़ता देख मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ड्राइवरों को मराठी भाषा का विशेषज्ञ बनाना नहीं है बल्कि उन्हें इतनी मराठी सिखाना है जिससे वे यात्रियों से सामान्य बातचीत कर सकें।

    मुंबई के कांदिवली मलाड वेस्ट दहिसर अंधेरी और आसपास के कई इलाकों में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के विरोध की खबर सामने आई। कुछ जगहों पर प्रदर्शन कर रहे ड्राइवरों ने दूसरे ड्राइवरों को यात्रियों को ले जाने से रोकने की कोशिश भी की। इससे सुबह के व्यस्त समय में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। विरोध के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैल गया कि अगर किसी ड्राइवर को कामकाजी मराठी नहीं आती है तो उस पर 5 हजार से 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

    इसी अफवाह ने ड्राइवरों की चिंता बढ़ा दी। अधिकारियों के मुताबिक ड्राइवरों के बीच भ्रामक जानकारी फैलने के कारण स्थिति बिगड़ी। बोरीवली RTO के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी माना कि इस मुद्दे को लेकर गलत जानकारी प्रसारित हुई थी। इसके बाद सरकार को स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत महसूस हुई।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार का मकसद किसी ड्राइवर को मराठी का एक्सपर्ट बनाना नहीं है। उन्हें सिर्फ इतनी मराठी आनी चाहिए जिससे वह यात्रियों से बातचीत कर सकें और रोजमर्रा के काम में भाषा का इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया गया है और अगर उन्हें अतिरिक्त समय की जरूरत होगी तो सरकार उस पर भी विचार कर सकती है।

    फडणवीस ने यह भी कहा कि किसी भी ड्राइवर का लाइसेंस केवल इस वजह से तुरंत रद्द नहीं किया गया है। उनका कहना था कि भाषा सीखने के मामले में सरकार का जोर समझ विकसित करने पर है न कि अनावश्यक सख्ती पर। यानी सरकार चाहती है कि दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र में आकर काम करने वाले ड्राइवर भी स्थानीय यात्रियों से बुनियादी स्तर पर मराठी में संवाद कर सकें।

    वहीं परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने नियमों को लेकर एक और महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि अगर कोई RTO अधिकारी निर्धारित समय से पहले ड्राइवर पर जुर्माना लगाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सरकार की ओर से भाषा सीखने के लिए तय समयसीमा को लेकर आगे की प्रक्रिया भी बताई गई है। मंत्री के मुताबिक निर्धारित अवधि में कामचलाऊ मराठी नहीं सीखने वाले ड्राइवरों को अतिरिक्त समय दिया जा सकता है और नियमों के अनुसार आगे कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे विवाद के बीच शिवसेना नेता संजय निरुपम भी सरकार से ड्राइवरों पर तत्काल जुर्माना न लगाने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि कुछ ड्राइवरों को नोटिस अवधि पूरी होने से पहले ही भारी जुर्माने का डर दिखाया जा रहा है। अब मुख्यमंत्री की सफाई के बाद सरकार की कोशिश यही है कि भाषा सीखने के फैसले को लेकर फैली अफवाहों पर विराम लगे और ड्राइवरों को नियमों की वास्तविक स्थिति समझाई जा सके।

  • मंगलवार की जगह सोमवार को होगी महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक, वर्षा बंगले पर महायुति नेताओं के डिनर ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चाएं

    मंगलवार की जगह सोमवार को होगी महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक, वर्षा बंगले पर महायुति नेताओं के डिनर ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चाएं


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र में साप्ताहिक कैबिनेट बैठक के कार्यक्रम में अचानक बदलाव ने राज्य की राजनीति में चर्चाओं को तेज कर दिया है। नियमित रूप से मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक अब सोमवार दोपहर सह्याद्री गेस्ट हाउस में आयोजित की जाएगी। बैठक के कार्यक्रम में हुए इस बदलाव की आधिकारिक वजह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का मंगलवार को मुंबई से बाहर धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना बताई गई है।

    कैबिनेट बैठक के दिन में बदलाव अपने आप में प्रशासनिक कारणों से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन इसके तुरंत बाद होने वाली महायुति के प्रमुख नेताओं की बैठक ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास वर्षा बंगले पर सोमवार को गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के लिए डिनर का कार्यक्रम रखा गया है।

    इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े प्रमुख नेताओं की मौजूदगी रहने की संभावना है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के बीच भी चर्चा प्रस्तावित है। ऐसे में कैबिनेट बैठक और उसके बाद होने वाली राजनीतिक बैठक को लेकर गठबंधन के भीतर समन्वय और रणनीति से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की संभावना जताई जा रही है।

    मुख्यमंत्री फडणवीस का हालिया दिल्ली दौरा भी इस पूरे घटनाक्रम के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। दिल्ली दौरे के बाद राज्य में राजनीतिक गतिविधियों के बढ़ने और अब कैबिनेट बैठक के कार्यक्रम में बदलाव के कारण सत्ता के गलियारों में संभावित बदलावों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।

    हालांकि, अभी तक सरकार या महायुति की ओर से किसी बड़े राजनीतिक बदलाव, मंत्रिमंडल फेरबदल या गठबंधन के समीकरण में परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए मौजूदा परिस्थितियों को फिलहाल राजनीतिक गतिविधियों और आपसी समन्वय के संदर्भ में ही देखा जा रहा है।

    सरकारी स्तर पर कैबिनेट बैठक और गठबंधन नेताओं की बातचीत का उद्देश्य सरकार के कामकाज में बेहतर तालमेल, आपसी मतभेदों को दूर करना और प्रशासनिक फैसलों में तेजी लाना बताया जा रहा है। महायुति सरकार के सामने विभिन्न राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर समन्वय बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

    सोमवार को होने वाली बैठक में सरकार से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय लिए जाने की संभावना है। इसके बाद वर्षा बंगले पर होने वाली बैठक में गठबंधन के नेताओं के बीच राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर विचार-विमर्श हो सकता है।

    महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के बीच समन्वय सत्ता के संचालन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में शीर्ष नेताओं का एक साथ बैठना राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, बैठक के एजेंडे को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल कैबिनेट बैठक को एक दिन पहले करने का कारण प्रशासनिक कार्यक्रम बताया गया है, जबकि उसके बाद होने वाली महायुति नेताओं की बैठक ने संभावित राजनीतिक फैसलों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में इस बैठक के बाद सामने आने वाले फैसलों और नेताओं के बयानों से तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।

  • महाराष्ट्र में अचानक बदला कैबिनेट मीटिंग का दिन, फडणवीस की ‘डिनर डिप्लोमेसी’ से सियासी अटकलें तेज

    महाराष्ट्र में अचानक बदला कैबिनेट मीटिंग का दिन, फडणवीस की ‘डिनर डिप्लोमेसी’ से सियासी अटकलें तेज


    मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में सोमवार को बैठकों का दौर देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नियमित तौर पर मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक को इस बार एक दिन पहले सोमवार को बुलाया है। इसके बाद महायुति के प्रमुख नेता वर्षा बंगले पर बैठक करेंगे और फिर गठबंधन के नेताओं के लिए डिनर रखा गया है। बैठकों के इस कार्यक्रम ने राजनीतिक हलकों में अटकलों को हवा दे दी है।

    हालांकि सरकार की ओर से कैबिनेट बैठक की तारीख बदलने की वजह मुख्यमंत्री फडणवीस का मंगलवार को मुंबई से बाहर एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना बताया गया है। लेकिन कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद महायुति के वरिष्ठ नेताओं की बैठक और डिनर के कार्यक्रम को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं।

    कैबिनेट के बाद महायुति नेताओं की बैठक
    कैबिनेट की बैठक सोमवार दोपहर सह्याद्री गेस्ट हाउस में होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा बंगले पर महायुति के प्रमुख नेताओं की बैठक प्रस्तावित है।

    बैठक में फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार की मौजूदगी रहेगी। इसके बाद बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के प्रमुख नेताओं तथा गठबंधन के मंत्रियों के लिए डिनर रखा गया है।

    सरकारी तौर पर इस बैठक का उद्देश्य गठबंधन के भीतर बेहतर तालमेल बनाना, आपसी मतभेदों को दूर करना और सरकार के कामकाज को गति देना बताया जा रहा है।

    बदलाव की अटकलें क्यों?
    महाराष्ट्र में पिछले कुछ समय से संभावित राजनीतिक बदलाव को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में कैबिनेट बैठक का अचानक एक दिन पहले होना और उसके तुरंत बाद महायुति के शीर्ष नेताओं का साथ बैठना इन अटकलों को और बढ़ा रहा है। हालांकि आधिकारिक सूत्रों ने किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की संभावना से इनकार किया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री फडणवीस राज्य के कामकाज पर लगातार सक्रियता से नजर बनाए हुए हैं।

    सैनी ने वर्षा बंगले पर की फडणवीस से मुलाकात
    इस बीच रविवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। सैनी वर्षा बंगले पहुंचे, जहां फडणवीस ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात को फिलहाल शिष्टाचार भेंट बताया गया है।

    अब निगाहें सोमवार को होने वाली कैबिनेट और महायुति नेताओं की बैठकों पर टिकी हैं। इन बैठकों में होने वाली चर्चा और नेताओं के बयानों से ही साफ होगा कि यह महज संगठनात्मक समन्वय की कवायद है या महाराष्ट्र की राजनीति में किसी बड़े फैसले की भूमिका तैयार हो रही है।

  • देश में 1,800 किलोमीटर नए एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क को मंजूरी, 7,000 करोड़ रुपये के निवेश से मजबूत होगी गैस आपूर्ति

    देश में 1,800 किलोमीटर नए एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क को मंजूरी, 7,000 करोड़ रुपये के निवेश से मजबूत होगी गैस आपूर्ति

    नई दिल्ली । देश में रसोई गैस की आपूर्ति व्यवस्था को अधिक मजबूत, सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड ने लगभग 1,800 किलोमीटर लंबे नए एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क के विकास को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर करीब 7,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। नई पाइपलाइनों के जरिए एलपीजी की लंबी दूरी तक आपूर्ति को सड़क परिवहन की तुलना में अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जाएगा।

    स्वीकृत परियोजनाएं तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा में विकसित की जाएंगी। इनका उद्देश्य देश के एलपीजी परिवहन ढांचे का विस्तार करना और विभिन्न क्षेत्रों में रसोई गैस की आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाना है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, जिसके बाद इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जाता है।

    नई पाइपलाइन परियोजनाओं के पूरा होने से आयातित एलपीजी को संबंधित क्षेत्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। पाइपलाइन के जरिए परिवहन से सड़क मार्ग पर निर्भरता कम होगी और एलपीजी की आवाजाही के लिए इस्तेमाल होने वाले टैंकरों की संख्या में भी कमी आ सकती है।

    स्वीकृत प्रमुख परियोजनाओं में तेलंगाना के चेरलापल्ली से महाराष्ट्र के नागपुर तक 556 किलोमीटर लंबी एलपीजी पाइपलाइन शामिल है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के झांसी से उत्तराखंड के सितारगंज तक 611 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन विकसित की जाएगी। महाराष्ट्र के शिकरापुर से गोवा और कर्नाटक के हुबली तक 633 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन परियोजना को भी मंजूरी दी गई है।

    इन सभी परियोजनाओं के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी गेल इंडिया लिमिटेड संभालेगी। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड द्वारा अधिकृत सामान्य वाहक एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क की कुल लंबाई करीब 7,700 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 9,500 किलोमीटर हो जाएगी। इस तरह देश के अधिकृत एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क में लगभग 23.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

    यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब देश में एलपीजी के सुरक्षित और कम लागत वाले परिवहन के लिए पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। इससे पहले कांडला-गोरखपुर एलपीजी पाइपलाइन परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है। लगभग 2,757 किलोमीटर लंबी यह परियोजना देश की सबसे लंबी एलपीजी पाइपलाइन परियोजना मानी जाती है।

    नियामक के अनुसार, एलपीजी को पाइपलाइन के माध्यम से परिवहन करना सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर विकल्प है। सड़क परिवहन में बड़ी संख्या में टैंकरों की आवाजाही होती है, जबकि पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार से इस निर्भरता को कम किया जा सकता है।

    टैंकरों की आवाजाही घटने से सड़क सुरक्षा में सुधार और परिवहन व्यवस्था पर दबाव कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत और ईंधन खपत में कमी आ सकती है। पाइपलाइन आधारित परिवहन से कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलने की संभावना है।

    नियामक बोर्ड का दीर्घकालिक लक्ष्य एलपीजी को बॉटलिंग संयंत्रों तक पहुंचाने में सड़क परिवहन पर निर्भरता को न्यूनतम करना है। छह राज्यों में प्रस्तावित नई परियोजनाओं को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इनके पूरा होने से देश के एलपीजी परिवहन ढांचे का विस्तार होने के साथ ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और कुशल बनाने में मदद मिल सकती है।

  • भारत का डेटा सेंटर बाजार तेजी से बढ़ा, छह वर्षों में लाइव आईटी क्षमता चार गुना होकर 1.7 गीगावाट पहुंची

    भारत का डेटा सेंटर बाजार तेजी से बढ़ा, छह वर्षों में लाइव आईटी क्षमता चार गुना होकर 1.7 गीगावाट पहुंची

    नई दिल्ली ।भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बाद सबसे बड़े डेटा सेंटर बाजार के रूप में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। पिछले छह वर्षों में देश की लाइव आईटी क्षमता करीब चार गुना बढ़कर 1.7 गीगावाट हो गई है। डेटा सेंटर क्षेत्र में बढ़ती मांग, मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे और बड़े निवेश के कारण आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के और विस्तार की उम्मीद है।

    भारत में डेटा सेंटर परियोजनाओं की एक बड़ी पाइपलाइन भी तैयार हो चुकी है। वर्तमान में करीब 1.3 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन है। इसके अलावा लगभग 3.2 गीगावाट क्षमता वाली ऐसी परियोजनाएं भी मौजूद हैं, जिनके लिए जमीन, बिजली और निर्माण से संबंधित जरूरी मंजूरियां हासिल की जा चुकी हैं। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में देश की डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

    डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार में बिजली की उपलब्धता और फाइबर कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। भारत में इंटरनेट उपयोग, क्लाउड सेवाओं, डिजिटल भुगतान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा स्टोरेज तथा प्रोसेसिंग की जरूरत लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि वैश्विक और घरेलू कंपनियां भारत में बड़े स्तर पर निवेश की योजनाएं बना रही हैं।

    महाराष्ट्र देश का सबसे प्रमुख डेटा सेंटर बाजार बना हुआ है। भारत की कुल लाइव आईटी क्षमता में राज्य की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत है। निर्माण शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरियां प्राप्त कर चुकी परियोजनाओं की सबसे बड़ी पाइपलाइन भी महाराष्ट्र में मौजूद है। मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में पहले से विकसित डिजिटल और बिजली संबंधी बुनियादी ढांचा इस क्षेत्र के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    डेटा सेंटर विकास का अगला चरण केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहने वाला है। आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में भी कंपनियां बड़े निवेश और नई परियोजनाओं की घोषणाएं कर रही हैं। इन राज्यों में जमीन, बिजली, कनेक्टिविटी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के कारण भविष्य में नई क्षमता विकसित होने की संभावना है।

    घरेलू कारोबारी समूहों ने देश में डेटा सेंटर विकास के लिए करीब 210 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह घोषित कुल निवेश का लगभग 45 प्रतिशत है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र का विकास केवल विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि घरेलू उद्योग भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है।

    वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां भी भारत के डेटा सेंटर बाजार में बड़े निवेश की तैयारी कर रही हैं। गूगल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने मिलकर करीब 84 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। घोषित कुल निवेश का लगभग 95 प्रतिशत बड़े हाइपरस्केल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैंपस से जुड़ा है।

    डेटा सेंटर के विस्तार का सीधा असर बिजली की मांग पर भी पड़ेगा। भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र की बिजली खपत 2025 में करीब 11 टेरावाट-घंटे से बढ़कर 2035 तक 91 टेरावाट-घंटे पहुंचने का अनुमान है। यानी एक दशक में मांग आठ गुना से अधिक बढ़ सकती है।

    बढ़ती बिजली जरूरत के बीच अक्षय ऊर्जा की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। कई बड़ी हाइपरस्केल कंपनियों ने वर्ष 2030 तक नेट-जीरो लक्ष्य निर्धारित किए हैं। ऐसे में डेटा सेंटर संचालन के लिए सौर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से बिजली की मांग बढ़ने की संभावना है। भारत की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में 2021 से अब तक 7.1 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है।