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  • कांग्रेस-BJP कार्यकर्ताओं के साथ हादसा, CM मोहन यादव की एक टिप्पणी से चौंके विधायक, मंत्री को कह दिया सेठ जी

    कांग्रेस-BJP कार्यकर्ताओं के साथ हादसा, CM मोहन यादव की एक टिप्पणी से चौंके विधायक, मंत्री को कह दिया सेठ जी


    सिलवानी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों विरोध प्रदर्शन से लेकर नेताओं के बयानों और नौकरशाही के अंदरूनी घटनाक्रम तक कई दिलचस्प मामले सामने आ रहे हैं। रायसेन के सिलवानी में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता आग की चपेट में आ गया तो ग्वालियर में भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान भी एक कार्यकर्ता झुलस गया। वहीं रतलाम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के एक संबोधन ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी। उन्होंने मंत्री चैतन्य काश्यप को सेठ जी कहकर संबोधित किया तो रतलाम ग्रामीण के विधायक मथुरालाल डामर को पूर्व विधायक बता दिया। दूसरी ओर शत्रु संपत्ति को लेकर हुई सरकारी बैठक में एक प्रमुख सचिव के बचाव का मामला भी चर्चा में रहा।

    रायसेन जिले के सिलवानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाया जा रहा था तभी अचानक आग भड़क उठी और एक कार्यकर्ता इसकी चपेट में आ गया। युवक के सिर और कपड़ों में आग लग गई। अचानक हुई घटना से घबराया कार्यकर्ता वहां से भागा। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए आग बुझाई जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि राजनीतिक विरोध के दौरान उत्साह के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।

    इधर ग्वालियर में भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान भी कुछ ऐसा ही घटनाक्रम हुआ। सांसद भरत सिंह कुशवाह मशाल लेकर चल रहे थे। इसी दौरान एक उत्साहित कार्यकर्ता सेवा ज्योति को यात्रा रथ पर स्थापित करने के लिए ऊपर चढ़ गया। जब उसे मशाल सौंपी जा रही थी तभी उसकी लौ से आग कार्यकर्ता के कपड़ों पर गिर गई। देखते ही देखते उसकी शर्ट जलने लगी। आसपास मौजूद लोगों ने उसे आग लगने की जानकारी दी जिसके बाद युवक ने किसी तरह आग बुझाई और नीचे उतर आया। इस घटना में सांसद भरत सिंह कुशवाह भी आग की चपेट में आने से बाल बाल बच गए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    उधर रतलाम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वर्चुअल संबोधन ने अलग ही चर्चा पैदा कर दी। बलराम महोत्सव में उन्होंने मंत्री चैतन्य काश्यप को सेठ जी कहकर संबोधित किया और उनके लिए तालियां भी बजवाईं। इसके बाद रतलाम ग्रामीण के विधायक मथुरालाल डामर को पूर्व विधायक कह दिया। मुख्यमंत्री की जुबान फिसलने से विधायक के चेहरे के भाव देखने लायक हो गए। कार्यक्रम में रतलाम के महापौर प्रहलाद पटेल की गैरमौजूदगी पर भी मुख्यमंत्री ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि महापौर किसानों के कार्यक्रम में आने के बजाय अपना मैरिज गार्डन चला रहे हैं और नगर निगम भी संभाल रहे हैं। कुछ देर बाद महापौर पहुंचे तो मुख्यमंत्री ने उन्हें और उनके साथ आए नेता को राम लक्ष्मण कहकर संबोधित किया। उनके इस अंदाज की सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है।

    इसी बीच शत्रु संपत्ति को लेकर हुई सरकारी बैठक में एक प्रमुख सचिव बिना पूरी तैयारी के पहुंच गए और मांगी गई जानकारी नहीं दे पाए। नाराजगी सामने आने पर उन्होंने जानकारी नहीं मिलने की बात कही लेकिन संबंधित अतिरिक्त मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सूचना पहले ही भेजी जा चुकी थी। मामला बिगड़ता देख बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रमुख सचिव का बचाव किया और कहा कि उन्हें जानकारी नहीं मिली थी। इस तरह बैठक का माहौल संभल गया। मध्य प्रदेश में इन घटनाओं ने राजनीति के साथ प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चाओं को हवा दे दी है।

  • जुबिन की परफॉर्मेंस से पहले भोपाल में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग को लेकर पुलिस से झड़प, छात्रा भीड़ में दबी

    जुबिन की परफॉर्मेंस से पहले भोपाल में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग को लेकर पुलिस से झड़प, छात्रा भीड़ में दबी


    भोपाल । भोपाल के लाल परेड मैदान में मंगलवार को आयोजित सीएम यूथ कॉन्क्लेव 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं से सीधा संवाद किया। कार्यक्रम में अलग अलग कॉलेजों से पहुंचे विद्यार्थियों ने रोजगार शिक्षा तकनीक खेल कृषि और नशामुक्ति जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री से सवाल किए। मुख्यमंत्री ने युवाओं को लेकर कई घोषणाएं भी कीं लेकिन संवाद कार्यक्रम खत्म होने के बाद सिंगर जुबिन नौटियाल की परफॉर्मेंस के दौरान अचानक माहौल गर्म हो गया। बैरिकेडिंग को लेकर छात्रों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति बन गई।

    जुबिन नौटियाल के कार्यक्रम में अंदर जाने की कोशिश कर रहे कुछ स्टूडेंट्स बैरिकेड्स पर चढ़ गए। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते मौके पर हंगामा बढ़ गया। छात्रों की ओर से कुर्सियां और धूल फेंकने की बात सामने आई। इसी दौरान भीड़ में एक छात्रा दब गई और उसके साथ धक्का मुक्की की स्थिति बनी। स्थिति संभालने के दौरान पुलिसकर्मियों ने कुछ छात्रों को थप्पड़ मारे और हल्का बल प्रयोग कर उन्हें पीछे हटाया।

    हंगामा बढ़ने के बाद कुछ बीजेपी नेता मौके पर पहुंचे और पुलिसकर्मियों को पीछे हटने के लिए कहा। इसके बाद पुलिस बल को वहां से वापस बुला लिया गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया। इसी बीच कार्यक्रम में जुबिन के साथ रोबोट की परफॉर्मेंस भी आकर्षण का केंद्र रही। लाइव प्रस्तुति के दौरान रोबोट के डांस मूव्स देखकर मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुस्कान भी नजर आई।

    यूथ कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए जिलास्तर पर सरकारी कॉलेजों में निशुल्क कोचिंग शुरू की जाएगी। एमपीपीएससी की परीक्षा अगले साल दो बार कराने की घोषणा भी की गई। इनमें से एक विशेष परीक्षा होगी। रिसर्च के लिए मिलने वाली राशि को 16 हजार रुपए से बढ़ाकर 25 हजार रुपए किया गया है।

    युवाओं को तकनीक और स्टार्टअप से जोड़ने के लिए सभी सरकारी कॉलेजों में एआई लैब खोलने की बात कही गई। स्टार्टअप से जुड़े नए विचारों को बढ़ावा देने के लिए पांच करोड़ रुपए का आइडिया फंड बनाने की घोषणा हुई। सरकार एक लाख युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने की दिशा में काम करेगी। वर्ष 2027 में रोजगारपरक उद्योगों पर आधारित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित करने की भी बात कही गई। इसके अलावा 12 नए मेडिकल कॉलेज और 12 नई यूनिवर्सिटीज खोलने की घोषणा की गई।

    एआई और स्टार्टअप को लेकर सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में एआई सिटी नॉलेज सिटी और साइंस सिटी विकसित की जा रही है। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप के लिए युवाओं को पांच लाख रुपए तक का अनुदान देने की व्यवस्था है। सरकार युवाओं को केवल नौकरी पाने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में काम कर रही है। इंदौर रीवा और उज्जैन में आईटी पार्क तथा ग्वालियर में टेलीकॉम हब विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया गया।

    खेलों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बड़ा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है। प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर खेल मैदान विकसित करने की योजना है। कृषि के क्षेत्र में खेत से फूड प्रोसेसिंग तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के साथ ड्रैगन फ्रूट और मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही गई। ऑर्गेनिक फार्मिंग कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और डेयरी क्षेत्र पर भी सरकार के फोकस का उल्लेख किया गया।

    नशे के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वर्ष 2029 तक प्रदेश और देश को नशामुक्त करने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नशे के कारण परिवार और युवा पीढ़ी प्रभावित होती है और सरकार इस दिशा में कठोर कार्रवाई करेगी।

  • बरेला में अचानक रुका CM मोहन यादव का काफिला, सड़क किनारे ढाबे पर पी चाय, फ्री कोचिंग देने वाले युवा का किया सम्मान

    बरेला में अचानक रुका CM मोहन यादव का काफिला, सड़क किनारे ढाबे पर पी चाय, फ्री कोचिंग देने वाले युवा का किया सम्मान


    जबलपुर। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार रात मंडला से सड़क मार्ग के जरिए जबलपुर लौट रहे थे। इसी दौरान बरेला में उनका काफिला अचानक रुक गया। मुख्यमंत्री ने सड़क किनारे स्थित चाय की दुकान पर पहुंचकर चाय पी और स्थानीय लोगों से बातचीत की। करीब रात 10 बजे हुए इस अचानक चाय स्टॉप के दौरान मुख्यमंत्री के साथ भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने बच्चों को निशुल्क कोचिंग देने वाले युवा मयंक साहू का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया और उसके प्रयास की सराहना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंडला में आयोजित तेंदूपत्ता बोनस वितरण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कार से डुमना विमानतल की ओर जा रहे थे। बरेला में शारदा माता मंदिर के सामने बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए जमा थे। जब मुख्यमंत्री की नजर लोगों पर पड़ी तो उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया। इसके बाद वे सड़क किनारे स्थित अग्रवाल होटल नाम की चाय की दुकान पर पहुंचे और वहां बैठकर चाय पी।

    मुख्यमंत्री के अचानक दुकान पर पहुंचने से वहां मौजूद लोग भी उत्साहित नजर आए। मुख्यमंत्री ने दुकान संचालक से बातचीत की और चाय के पैसे भी खुद चुकाए। इस दौरान स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मौके पर भाजपा के जबलपुर नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर और भाजपा दिव्यांगजन प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष संदीप रजक सहित अन्य नेता और अधिकारी मौजूद थे।

    इसके बाद मुख्यमंत्री का काफिला बरेला के सनराइज फैमिली ढाबे पर भी रुका। यहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने ढाबे पर भी चाय पी और संचालक परिवार से बातचीत की। यह ढाबा सास और बहू द्वारा मिलकर संचालित किया जाता है। मुख्यमंत्री ने ढाबा संचालक आरती दुबे और उनकी बहू सुरभि दुबे से मुलाकात कर परिवार के सदस्यों का हालचाल जाना।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने बरेला के बच्चों के लिए निशुल्क कोचिंग चलाने वाले युवा मयंक साहू को भी सम्मानित किया। डॉ. मोहन यादव ने मयंक को शॉल ओढ़ाया और बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के उसके प्रयास की तारीफ की। मयंक स्थानीय बच्चों को बिना किसी शुल्क के पढ़ाने का काम कर रहा है। मुख्यमंत्री ने उसके इस प्रयास को समाज के लिए उपयोगी बताते हुए प्रोत्साहित किया।

    मुख्यमंत्री के इस अचानक रुकने से बरेला में मौजूद लोगों के लिए यह रात खास बन गई। आमतौर पर सुरक्षा घेरे और निर्धारित कार्यक्रमों के बीच चलने वाले मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों के बीच रुककर चाय पी और उनसे बातचीत की। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में सामाजिक स्तर पर बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रहे युवा को सम्मान देकर उसका उत्साह भी बढ़ाया। मुख्यमंत्री का यह दौरा किसी निर्धारित कार्यक्रम के बजाय रास्ते में अचानक लिए गए इन छोटे पड़ावों के कारण चर्चा में रहा।

  • लाड़ली बहना के सवाल पर ठहाकों से गूंजा बुंदेली समागम, CM मोहन यादव बोले मुझे क्या पता था इतनी भारी मार पड़ेगी

    लाड़ली बहना के सवाल पर ठहाकों से गूंजा बुंदेली समागम, CM मोहन यादव बोले मुझे क्या पता था इतनी भारी मार पड़ेगी


    भोपाल । भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अलग अंदाज देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान बुंदेली कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने मुख्यमंत्री से कई सवाल पूछे। इसी दौरान छतरपुर की बुंदेली कंटेंट क्रिएटर बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री से महिलाओं और बेटियों को लेकर सवाल किया। इस पर मुख्यमंत्री ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया और लाड़ली बहना योजना का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें पता चला कि इस योजना की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है।

    बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्होंने अपनी जिज्जियों यानी बहनों के लिए तो काफी कुछ किया है लेकिन उनकी बिन्नुओं यानी बेटियों के लिए वह क्या करना चाहते हैं। सवाल सुनकर मुख्यमंत्री ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि उन्हें क्या पता था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है। मुख्यमंत्री के इस जवाब के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच ठहाके गूंजने लगे।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनकी बहनों के लिए किसी तरह की परेशानी नहीं है। उन्होंने लाड़ली बहना योजना की शुरुआत में मिलने वाली एक हजार रुपए की राशि का जिक्र किया। साथ ही बताया कि अब यह सहायता बढ़कर डेढ़ हजार रुपए तक पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री ने बिन्नू रानी से मजाकिया अंदाज में कहा कि अभी वह लाड़ली बहना योजना के लिए छोटी हैं और जब बड़ी हो जाएंगी तो उन्हें भी इसका लाभ दिया जाएगा।

    बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री से बुंदेलखंड के विकास और युवाओं से जुड़े सवाल भी किए गए। एक युवा ने उनसे पूछा कि अगर बुंदेलखंड के युवाओं की कोई एक समस्या 24 घंटे में हल करनी हो तो वह क्या करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड जैसी बड़ी समस्या को 24 घंटे में हल करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के लोगों में क्षमता योग्यता और बुद्धिमत्ता की कमी नहीं है। सरकार का काम उन्हें आगे बढ़ने के लिए अवसर उपलब्ध कराना है।

    मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड से होने वाले पलायन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले रोजगार और पानी से जुड़ी समस्याओं के कारण क्षेत्र से पलायन की स्थिति बनती थी। अब सरकार सिंचाई का रकबा बढ़ाने पर काम कर रही है। इसी क्रम में केन बेतवा जैसी बड़ी परियोजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी की उपलब्धता बढ़ने से क्षेत्र के कई सेक्टर में बदलाव आने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता मुकेश तिवारी के साथ बड़ी संख्या में बुंदेली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनसे संवाद किया और उनके सवालों के जवाब भी दिए। कार्यक्रम में बुंदेली संस्कृति और क्षेत्र की समस्याओं के साथ सरकार की योजनाओं को लेकर भी चर्चा हुई।

    लाड़ली बहना योजना की बात करें तो इसकी घोषणा 28 जनवरी 2023 को तत्कालीन शिवराज सरकार ने की थी। योजना का औपचारिक शुभारंभ 5 मार्च 2023 को हुआ था। शुरुआत में पात्र महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान था। जून 2023 में योजना की पहली किस्त जारी की गई थी।

    शुरुआती चरण में करीब एक करोड़ 25 लाख महिलाएं योजना के लिए पात्र थीं। पहली किस्त के दौरान एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को भुगतान किया गया था। इसके बाद समय के साथ योजना की मासिक सहायता राशि बढ़ाई गई। सितंबर 2026 में जारी 40वीं किस्त के दौरान करीब एक करोड़ 25 लाख महिलाओं के खातों में राशि भेजी गई। मौजूदा समय में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए की सहायता राशि मिल रही है।

    बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री की लाड़ली बहना पर की गई टिप्पणी भले ही मजाकिया अंदाज में रही हो लेकिन इसके जरिए उन्होंने योजना की जिम्मेदारी और महिलाओं के लिए सरकार की आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों की प्रतिक्रियाओं और सवाल जवाब के बीच मुख्यमंत्री का यह अंदाज चर्चा का विषय बना रहा।

  • अमित शाह के दौरे से पहले भोपाल में हलचल तेज, CM ने ली तैयारियों की जानकारी, पदोन्नति पर भी चर्चा

    अमित शाह के दौरे से पहले भोपाल में हलचल तेज, CM ने ली तैयारियों की जानकारी, पदोन्नति पर भी चर्चा


    भोपाल ।  केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मध्यप्रदेश दौरे को लेकर भोपाल में तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मंत्रालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर अमित शाह के प्रस्तावित कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में दौरे से जुड़े इंतजामों के साथ ही सरकार के विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग समेत अन्य विभागों के अधिकारियों से पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में संभावित बदलावों को लेकर जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री ने आने वाले समय में फिर से शुरू की जाने वाली पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने पदोन्नति से संबंधित प्रस्तावित सुझावों और प्रक्रिया में किए जाने वाले संभावित बदलावों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि विभागीय स्तर पर लंबित मामलों को किस तरह आगे बढ़ाया जाए और संबंधित प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जाए।

    बैठक में उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह समेत अन्य मंत्री भी मौजूद रहे। मंत्रियों ने अपने अपने विभागों से संबंधित विषयों की जानकारी मुख्यमंत्री के सामने रखी। विभागीय योजनाओं की प्रगति और आने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा की गई। पशुपालन विभाग से जुड़े मामलों को भी बैठक में विशेष रूप से शामिल किया गया क्योंकि अमित शाह के भोपाल प्रवास के दौरान इस विभाग से संबंधित योजनाओं का शुभारंभ प्रस्तावित है।

    अमित शाह मध्यप्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर आने वाले हैं। उनके कार्यक्रम में भोपाल सहकारी दुग्ध संघ परिसर में तैयार किए गए फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का शुभारंभ प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 3 अक्टूबर को इस संयंत्र का उद्घाटन किया जाएगा। इस प्लांट को मध्यप्रदेश में दुग्ध प्रसंस्करण और मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर तैयार किया गया है।

    फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट की कुल परियोजना लागत 16.80 करोड़ रुपए बताई गई है। इसमें भारत सरकार की ओर से 6 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया है जबकि भोपाल सहकारी दुग्ध संघ ने 10.80 करोड़ रुपए का अंशदान किया है। प्लांट की दूध प्रसंस्करण क्षमता करीब 40 हजार लीटर प्रतिदिन है। इसके जरिए दूध से जुड़े मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ाने की योजना है।

    अमित शाह के दौरे को लेकर सरकार और प्रशासन की तैयारियां लगातार आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री की बैठक में कार्यक्रमों से जुड़े विभागों को लेकर अलग अलग स्तर पर चर्चा हुई। साथ ही शासन के स्तर पर चल रही पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया भी बैठक के प्रमुख विषयों में रही। ऐसे में एक ही बैठक में प्रशासनिक मामलों और केंद्रीय मंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रमों की तैयारियों पर चर्चा हुई।

    अब अमित शाह के दौरे से जुड़े कार्यक्रमों को अंतिम रूप देने के साथ ही संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां तय करने पर फोकस है। वहीं पदोन्नति प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलावों को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से दिए गए सुझावों पर आगे की कार्रवाई को लेकर भी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन मामलों से जुड़े फैसलों और कार्यक्रमों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • मध्यप्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर अस्थायी सूची में जगह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई

    मध्यप्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर अस्थायी सूची में जगह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई


    मध्यप्रदेश: की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने से प्रदेशवासियों में खुशी और गर्व का माहौल है। राज्य के चार प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों उदयगिरि गुफाएं, बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला और चंबल घाटी के मंदिर समूह को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में स्थान मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की समृद्ध पुरासंपदा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना सभी के लिए हर्ष और गौरव का विषय है। इन स्थलों को अस्थायी सूची में जगह मिलने से प्रदेश की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों की पहचान विश्व स्तर पर पहुंची है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी विश्व पटल पर पहचान प्राप्त हो रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में स्थान मिला है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे मध्यप्रदेश की पुरासंपदा और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का अवसर मिला है।

    डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उदयगिरि गुफाएं, बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला और चंबल घाटी के मंदिर समूह को अस्थायी सूची में शामिल किया जाना राज्य की सांस्कृतिक संपदा के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से अपनी विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी मध्यप्रदेशवासियों को अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने और उनके महत्व को समझने के लिए साझा संकल्प को और मजबूत करना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने विरासत को विश्वभर तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संपदा को संरक्षित करने के साथ-साथ उसकी पहचान दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने के प्रयास किए जाने चाहिए। इसके लिए प्रदेशवासियों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के संकल्प को मजबूत करना होगा। यूनेस्को की अस्थायी सूची में इन चार स्थलों को स्थान मिलने के अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और इसे मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों के लिए गौरव का विषय बताया।

  • मध्य प्रदेश कैबिनेट के 24,500 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मंजूर, सिंचाई परियोजनाओं से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक बड़े फैसले

    मध्य प्रदेश कैबिनेट के 24,500 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मंजूर, सिंचाई परियोजनाओं से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक बड़े फैसले

    मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 29 सितंबर को मंत्रालय में हुई मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में करीब 24,500 करोड़ रुपये के विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के गायन के साथ हुई। इसमें स्कूली शिक्षा, सिंचाई, पर्यटन, स्वास्थ्य, न्यायिक सुविधाओं और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। स्वीकृत प्रस्तावों में पुनरीक्षित और संशोधित योजनाओं के साथ विभिन्न योजनाओं को निरंतर जारी रखने से संबंधित निर्णय भी शामिल हैं। कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि विकास और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है।

    कैबिनेट ने प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए चार बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी। दतिया की मां रतनगढ़ सिंचाई परियोजना के लिए 1,608 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके माध्यम से 78,484 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। रामपुरा-मनासा सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिए 524 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे 65,400 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित की जाएगी। सागर सिंचाई परियोजना के लिए 1,052 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं, जिसके माध्यम से 80,000 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। उज्जैन की खान डायवर्सन योजना के तहत क्षिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से 30 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना का 51 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा दमोह-कटनी 105 किलोमीटर लंबे विंध्य विकास पथ के लिए 4,470 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

    स्वास्थ्य और न्यायिक सुविधाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण फैसले लिए। मेडिकल कॉलेजों से जुड़े प्रस्तावों में सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में 150 एमबीबीएस सीटों के लिए 372 करोड़ रुपये के पुनरीक्षित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज की लागत 768 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 953 करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके साथ ही कोर्ट भवनों के निर्माण के लिए 651 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 3,113 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इन निर्णयों के माध्यम से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और न्यायिक सुविधाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार का रास्ता तैयार किया गया है। सिंचाई परियोजनाओं से किसानों को लाभ पहुंचाने और कृषि क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

    शिक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़े प्रस्तावों में शासकीय स्कूलों के कक्षा 1 से 8 तक के 58 लाख विद्यार्थियों को गणवेश के लिए प्रति विद्यार्थी 600 रुपये देने का फैसला किया गया। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना के तहत राज्य सरकार कुल 348 करोड़ रुपये प्रदान करेगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने विशेष अभियान चलाकर वर्षों से लंबित 900 से अधिक पदों पर अनुकंपा नियुक्तियां भी की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लंबित अनुकंपा नियुक्तियों के संबंध में अन्य विभागों को भी आवश्यक निर्देश दिए हैं। इसके अलावा विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध घुमंतू वर्गों के छात्रावासों, कल्याण आश्रमों और संबंधित संस्थानों को अब एक रुपये प्रति किलो की दर से अनाज उपलब्ध कराया जाएगा। पहले इन संस्थानों को 12 किलो अनाज पांच रुपये प्रति किलो की दर से दिया जाता था, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वर्गों के छात्रावासों को एक रुपये प्रति किलो की दर से अनाज मिलता था।

    बैठक में पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के विकास पर भी चर्चा हुई। मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में भारत के 78 स्थलों में मध्य प्रदेश के 19 स्थल शामिल हैं। इनमें बाग गुफाओं की चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि की गुफाएं शामिल हैं। प्रदेश में पर्यटन सुविधाओं और टाइगर रिजर्व तथा वन्यजीव अभयारण्यों के विकास पर लगातार काम किया जा रहा है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय विकास के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने हिंदी फिल्मों के अभिनेता मुश्ताक खान को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने लगभग 500 फिल्मों में अभिनय किया था। उनका जन्म, बचपन और शिक्षा-दीक्षा बालाघाट में हुई थी। बैठक में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का भी उल्लेख किया गया, जिसका शुभारंभ 25 सितंबर को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया था। इसी अवसर पर भोपाल का लंबित मास्टर प्लान जारी किया गया और जनता से सुझाव मांगे गए।

  • गडकरी ने RTO को चेताया तो करण सिंह वर्मा ने कहा अगले जन्म में नाग बनोगे, सीधी में कीचड़ में फंसी महापौर की कार

    गडकरी ने RTO को चेताया तो करण सिंह वर्मा ने कहा अगले जन्म में नाग बनोगे, सीधी में कीचड़ में फंसी महापौर की कार


    भोपाल । मध्य प्रदेश में 21 साल बाद सरकारी बस सेवा की शुरुआत के साथ ही प्रदेश के सियासी गलियारों में कई दिलचस्प तस्वीरें और बयान चर्चा में हैं। भोपाल में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बसों की फिटनेस और RTO व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को सख्त संदेश दिया। वहीं सीहोर में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने अपने भाषण में अच्छे कर्म करने और किसी का बुरा नहीं चाहने की सीख देते हुए कहा कि गलत काम करने वालों को अगले जन्म में नाग बनना पड़ सकता है। इसी बीच सीधी जिले में सड़क निर्माण की मांग को लेकर चल रहे धरने में पहुंचीं सिंगरौली की महापौर रानी अग्रवाल की गाड़ी कीचड़ में फंस गई और उन्हें करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर धरना स्थल तक पहुंचना पड़ा।

    भोपाल में सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने बसों की गुणवत्ता और फिटनेस को लेकर RTO अधिकारियों को चेतावनी दी। उन्होंने अपने संबोधन में व्यंग्य करते हुए कुछ अधिकारियों को गांधीवादी बताया और कहा कि गांधी की नोट दिखाई देने पर तुरंत ठप्पा लगाने की बात कही। गडकरी का यह बयान RTO व्यवस्था में भ्रष्टाचार के आरोपों पर उनके सख्त रुख के तौर पर देखा गया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि किसी ऐसी बस को मंजूरी दी जाती है जो निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरती तो संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है।

    गडकरी का जोर बसों की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा पर था। उन्होंने कहा कि बसों को सड़क पर उतारने से पहले कड़ी जांच और परीक्षण जरूरी है। फिटनेस मानकों पर खरी उतरने के बाद ही किसी बस को सड़क पर चलने की अनुमति मिलनी चाहिए। मध्य प्रदेश में शुरू हुई नई परिवहन सेवा के तहत 351 बसें उतारी गई हैं जिनमें 180 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं।

    इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई बसों के भगवा रंग को लेकर कांग्रेस पर तंज किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सड़कों पर भगवा रंग की बसें चलना उनके लिए खुशी की बात है और विपक्ष को यह पसंद नहीं आएगा। सरकारी बस सेवा के दोबारा शुरू होने के मौके पर मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

    उधर सीहोर जिले में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का बयान भी चर्चा में आ गया। एक कार्यक्रम में उन्होंने लोगों को किसी का बुरा नहीं करने और बदले की भावना से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि गलत काम करने वालों को सुधर जाना चाहिए वरना अगले जन्म में नाग बनना पड़ेगा। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम का यह हिस्सा सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में सुर्खियों में रहा।

    अब बात सीधी की जहां सड़क की बदहाली ने एक जनप्रतिनिधि को भी रास्ते में रोक दिया। खड्डी खुर्द के बगैहा टोला में सड़क निर्माण की मांग को लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर लीला साहू ग्रामीणों के साथ 11 दिनों से धरने पर थीं। इसी आंदोलन को समर्थन देने सिंगरौली की महापौर और आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल पहुंचीं। लेकिन धरना स्थल तक पहुंचने से पहले ही उनकी गाड़ी कच्ची और कीचड़ भरी सड़क में फंस गई। ग्रामीणों ने धक्का देकर वाहन को बाहर निकाला। इसके बाद महापौर को करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर धरना स्थल तक जाना पड़ा।

    महापौर रानी अग्रवाल ने मौके पर सड़क की स्थिति देखी और ग्रामीणों की परेशानी को लेकर सरकार को पत्र लिखने की बात कही। ग्रामीणों के अनुसार यह रास्ता आसपास के कई गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ता है और बारिश के दौरान कीचड़ के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है।

    इस तरह एक ही दिन मध्य प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को लेकर गडकरी की सख्त चेतावनी से लेकर मंत्री के धार्मिक संदर्भ वाले बयान और खराब सड़क में फंसी महापौर की गाड़ी तक कई घटनाएं चर्चा में रहीं। इन घटनाओं ने सरकारी परिवहन व्यवस्था से लेकर सड़क और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर अलग-अलग सवालों को सामने ला दिया है।

  • 27% OBC आरक्षण को लेकर राहुल गांधी का CM मोहन यादव को पत्र, 2022 से नियुक्ति के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए उठाई आवाज

    27% OBC आरक्षण को लेकर राहुल गांधी का CM मोहन यादव को पत्र, 2022 से नियुक्ति के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए उठाई आवाज


    भोपाल। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण और इससे जुड़ी रुकी नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की है। 22 सितंबर को लिखे गए पत्र को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी सार्वजनिक किया। उन्होंने यह मुद्दा इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान सामने आने के बाद उठाया है।

    राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि इंदौर के कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के कई छात्रों ने शिक्षा रोजगार और भविष्य से जुड़े सवाल उनके सामने रखे थे। इनमें OBC आरक्षण के तहत रुकी नियुक्तियों का मामला भी प्रमुखता से सामने आया। राहुल गांधी के अनुसार छात्रों ने बताया कि उन्होंने परीक्षाएं पास करने के साथ चयन प्रक्रिया भी पूरी कर ली है लेकिन 87:13 व्यवस्था के तहत OBC आरक्षण से जुड़े 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां लंबित हैं। उनके मुताबिक इन पदों पर चयनित अभ्यर्थी वर्ष 2022 से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

    राहुल गांधी ने पत्र में यह भी कहा कि 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया था लेकिन इसके बावजूद मामला अभी तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की बात सुनने और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर रास्ता निकालने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से इंतजार कर रहे युवाओं का समय और अधिक नहीं बीतना चाहिए।

    यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के प्रावधान और इसके खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। इसके बाद इस बढ़ोतरी को अदालत में चुनौती दी गई। इसी कानूनी विवाद के बीच भर्ती प्रक्रिया में 87:13 व्यवस्था अपनाई गई जिसमें 87 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां की जाती रहीं जबकि विवादित 13 प्रतिशत पदों को लंबित रखा गया।

    इंदौर के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में भी इसी मुद्दे को लेकर अभ्यर्थियों ने राहुल गांधी के सामने अपनी बात रखी थी। छात्रों ने बताया था कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नियुक्तियां लंबित रहने से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी बातचीत के बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले के समाधान की मांग की।

    दूसरी ओर इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि OBC आरक्षण से जुड़े विवाद को तथ्यों के साथ समझना चाहिए और सरकार की ओर से 13 प्रतिशत पदों को मनमाने तरीके से रोकने की बात सही नहीं है। वहीं मंत्री विश्वास सारंग ने राहुल गांधी के पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि OBC आरक्षण का विवाद पिछली कांग्रेस सरकार के फैसले से जुड़ा है और मौजूदा सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    इस बीच OBC आरक्षण से जुड़ा मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। भर्ती और आरक्षण से जुड़े अलग अलग मामलों में अदालत की कार्यवाही के कारण 27 प्रतिशत आरक्षण के विवादित हिस्से पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार बना हुआ है। अदालत में 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर पक्ष और विपक्ष में दलीलें पेश की जा चुकी हैं।

    राहुल गांधी की चिट्ठी के बाद अब 27 प्रतिशत OBC आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। एक ओर चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति और आरक्षण से जुड़े मामले के समाधान की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर सरकार इस विवाद की जिम्मेदारी को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठा रही है। ऐसे में आगे की स्थिति न्यायिक प्रक्रिया और सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर रहेगी।

  • राहुल गांधी के लेटर में बड़ी चूक, दो पैराग्राफ दोहराए गए, पुराना पत्र हटाकर क्यों जारी करना पड़ा नया लेटर

    राहुल गांधी के लेटर में बड़ी चूक, दो पैराग्राफ दोहराए गए, पुराना पत्र हटाकर क्यों जारी करना पड़ा नया लेटर


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों कई ऐसे मामले चर्चा में हैं जिनमें नेताओं के बयान कार्यक्रमों की व्यवस्थाएं और प्रशासनिक घटनाक्रम सुर्खियां बटोर रहे हैं। इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखी चिट्ठी से लेकर जबलपुर में सेवा संकल्प यात्रा की दिशा को लेकर सामने आए अलग अलग बयानों और बड़वानी में दिव्यांगों के उपकरण वितरण कार्यक्रम के टलने तक तीन मामले चर्चा में हैं।

    इंदौर में 19 सितंबर को हुए छात्रों की गूंज कार्यक्रम में ओबीसी आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा उठा था। इसके बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की। राहुल गांधी ने 22 सितंबर को पत्र लिखा था और 23 सितंबर को इसे सार्वजनिक किया। उन्होंने पत्र में छात्रों की ओर से उठाए गए शिक्षा रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया।

    हालांकि पत्र सार्वजनिक होने के बाद इसका एक संशोधित संस्करण सामने आया। शुरुआती पोस्ट में पत्र के अंतिम हिस्से के दो पैराग्राफ दोहराए गए थे। इसके बाद पुरानी पोस्ट हटाकर संशोधित पत्र साझा किया गया। इस वजह से पत्र में हुई टाइपिंग या संपादन संबंधी गलती भी चर्चा में आ गई। दूसरी ओर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि 13 प्रतिशत पदों का मामला न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। ऐसे में इस मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के बीच राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप भी देखने को मिल रहे हैं।

    दूसरा मामला जबलपुर में सेवा संकल्प यात्रा के स्वागत से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के तहत यात्राएं निकाली जा रही हैं। जबलपुर में यात्रा के स्वागत के दौरान यात्रा की दिशा को लेकर भाजपा नेताओं के बयानों और यात्रा के साथ चल रहे कलश पर लिखी जानकारी में अंतर की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री राकेश सिंह और भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने यात्रा के वडनगर से वाराणसी जाने की जानकारी दी जबकि यात्रा के साथ मौजूद कलश पर वाराणसी से वडनगर की दिशा लिखी होने का उल्लेख किया गया। इसी वजह से स्वागत कार्यक्रम के दौरान यात्रा की दिशा को लेकर चर्चा शुरू हुई।

    तीसरा मामला बड़वानी के पानसेमल का है जहां करीब 200 दिव्यांग और उनके परिजन सहायक उपकरण लेने पहुंचे थे। 21 सितंबर को आयोजित सामाजिक सशक्तीकरण शिविर में व्हीलचेयर ट्राइसाइकिल और दूसरे उपकरण वितरित किए जाने थे। शिविर की तैयारियां पूरी थीं और लाभार्थी भी पहुंच चुके थे लेकिन कार्यक्रम अचानक स्थगित हो गया। रिपोर्टों के अनुसार निर्धारित कार्यक्रम में विधायक की मौजूदगी नहीं हो पाने के कारण वितरण टल गया और लाभार्थियों को बिना उपकरण लिए लौटना पड़ा।

    बाद में दोबारा कार्यक्रम आयोजित कर उपकरण वितरित किए गए। इस घटनाक्रम के बाद कार्यक्रमों की तैयारी और लाभार्थियों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठे। रिपोर्ट में विधायक की ओर से कार्यक्रम की जानकारी नहीं होने की बात भी सामने आई है जबकि कार्यक्रम के बैनर पर उनका नाम मुख्य अतिथि के रूप में दर्ज था।

    इन तीनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े अलग अलग पहलुओं को सामने रखा है। एक तरफ ओबीसी आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। दूसरी तरफ सेवा संकल्प यात्रा के दौरान सामने आया दिशा संबंधी अंतर चर्चा में रहा। वहीं पानसेमल में दिव्यांग लाभार्थियों को कार्यक्रम टलने के कारण दोबारा इंतजार करना पड़ा। इन घटनाओं के जरिए प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों के साथ साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों की योजना और क्रियान्वयन भी चर्चा में आ गया है।