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  • विजयादशमी पर इंदौर में शस्त्र पूजन के साथ पुलिस को बड़ा तोहफा, लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम से लैस होंगी 50 आधुनिक बाइक

    विजयादशमी पर इंदौर में शस्त्र पूजन के साथ पुलिस को बड़ा तोहफा, लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम से लैस होंगी 50 आधुनिक बाइक


    इंदौर । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर इंदौर की डीआरपी लाइन में शस्त्र पूजन करेंगे। इस कार्यक्रम में इंदौर पुलिस को होंडा कंपनी की ओर से कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR फंड के तहत 50 हाईटेक बाइक भी सौंपी जाएंगी। इन आधुनिक बाइकों के मिलने से शहर में पुलिस की गश्त को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिसकर्मियों को तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी। इन बाइकों में पुलिस लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

    इंदौर की डीआरपी लाइन में हर साल विजयादशमी पर शस्त्र पूजन का आयोजन किया जाता है। इस बार मुख्यमंत्री की मौजूदगी को देखते हुए परिसर में विशेष तैयारियां की गई हैं। पूजा स्थल को सजाया गया है और कार्यक्रम के लिए अन्य व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गई हैं। आयोजन में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजेश सिंह और मयंक अवस्थी सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। शस्त्र पूजन विजयादशमी की परंपरा का हिस्सा है और पुलिस विभाग में इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

    कार्यक्रम के दौरान पुलिस को मिलने वाली 50 बाइक की खासियत भी चर्चा में है। ये 350 सीसी क्षमता वाली बाइक होंगी जिनमें पुलिस लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम लगाया गया है। जरूरत पड़ने पर पुलिसकर्मी इन बाइकों पर लगे सिस्टम के माध्यम से लोगों तक जरूरी संदेश पहुंचा सकेंगे। इसके अलावा बाइकों में हेलमेट रखने की व्यवस्था भी की गई है। इन सुविधाओं का उद्देश्य पुलिस की गश्त को अधिक सुविधाजनक बनाना और आपात स्थिति में मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने में मदद करना है।

    शहर के कई हिस्सों में ऐसी संकरी गलियां और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र हैं जहां बड़े पुलिस वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाते। ऐसे स्थानों पर बाइक से गश्त करना अपेक्षाकृत आसान होता है। नई बाइक मिलने के बाद पुलिसकर्मी संकरी सड़कों और घनी आबादी वाले इलाकों में बेहतर तरीके से आवाजाही कर सकेंगे। किसी घटना या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर मौके तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है। इससे पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    पुलिस की गश्त व्यवस्था में दोपहिया वाहनों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। बड़े वाहनों की तुलना में बाइक से तंग रास्तों पर पहुंचना और भीड़ के बीच से निकलना आसान होता है। अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए पुलिसकर्मी भीड़ को दिशा-निर्देश देने या जरूरी सूचना प्रसारित करने का काम भी कर सकेंगे। हालांकि इन सुविधाओं का वास्तविक असर इनके उपयोग और तैनाती के तरीके पर निर्भर करेगा। पुलिस विभाग की ओर से इन बाइकों का इस्तेमाल शहर की जरूरतों के अनुसार किया जाएगा।

    विजयादशमी के अवसर पर इंदौर के विभिन्न थानों में भी शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संबंधित थानों में अधिकारी अपने स्तर पर पूजा-अर्चना करेंगे। वहीं डीआरपी लाइन में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में होने वाला आयोजन खास रहेगा क्योंकि इसी अवसर पर पुलिस को 50 आधुनिक बाइक भी सौंपी जाएंगी। इस पहल से इंदौर पुलिस की गश्त व्यवस्था को बेहतर बनाने और शहर के अलग-अलग इलाकों में तेजी से पहुंचने की क्षमता बढ़ाने की उम्मीद है।

  • ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल

    ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के प्रवेश द्वार पर हुए भीषण हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी बनी हुई है। हादसे में अपनों को खोने वाले परिजन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ग्वालियर दौरे से पहले पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हो गए। जिला प्रशासन पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों ने अस्पताल से लेकर पीड़ित परिवारों के घरों तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर रुचिका चौहान और एसपी धर्मवीर सिंह यादव भी मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले संबंधित स्थानों पर पहुंचे और तैयारियों की जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के साथ पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। हालांकि कई परिवारों के साथ उनकी मुलाकात तीन से सात मिनट तक ही रही। इस दौरान परिजनों ने नौकरी आवास और आर्थिक सहायता की मांग रखी। लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच ट्रक मंदिर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई जैसे सवाल इन मुलाकातों में प्रमुखता से सामने नहीं आए।

    मुख्यमंत्री के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के दौरान बाहर मौजूद कुछ घायलों और उनके परिजनों ने इलाज को लेकर नाराजगी जताई। शिवम ने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा जहां 15 हजार रुपये खर्च हुए। उनका कहना था कि प्रशासन मुफ्त इलाज की बात कर रहा है लेकिन खर्च की गई रकम वापस नहीं मिली। वहीं कोमल ने शिकायत की कि घायल कल्पना परिहार को 24 घंटे तक जरूरी पट्टा नहीं मिला और उन्हें बाजार से 15 हजार रुपये में खरीदना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शैलेंद्र शर्मा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के आने से पहले अस्पताल में पंखे लगाए गए जाले हटाए गए और बेडशीट बदली गईं। उन्होंने मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाने की भी शिकायत की।

    महेशपुरा में मुख्यमंत्री शाम करीब 4 बजकर 57 मिनट पर पहुंचे। इससे पहले स्थानीय नेता वीरेंद्र गुर्जर मृतक दिव्यांश कुशवाह के भाई शुभम को समझाते नजर आए। मुख्यमंत्री के काफिले के आने की सूचना मिलने पर उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने दिव्यांश के पिता अशोक कुशवाह और उनके बेटे शुभम को सांत्वना दी। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार के मकान और आवास योजना के बारे में पूछा। अशोक कुशवाह ने बताया कि उनका एक कमरे का अपना मकान है और उन्होंने शुभम के लिए नौकरी की मांग रखी। करीब तीन मिनट में यह मुलाकात समाप्त हो गई।

    इसके बाद मुख्यमंत्री महलगांव में मृतक सतेंद्र गुर्जर के घर पहुंचे। वहां उनके पिता जगदीश गुर्जर भावुक हो गए। सतेंद्र के ताऊ रामचित्र ने परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग रखी। पार्षद गिर्राज कंसाना के अनुसार मुख्यमंत्री ने जरूरी दस्तावेज भेजने को कहा और आर्थिक सहायता का चेक देकर आगे बढ़ गए। गल्ला कोठार में मुख्यमंत्री ने मृतक प्रिंस और निकेश के परिवारों से मुलाकात की। परिजनों ने कमाने वाले बेटों की मौत से आजीविका पर आए संकट की जानकारी दी और नौकरी तथा आवास की मांग रखी।

    गदाईपुरा के शिवनगर में मुख्यमंत्री ने मृतक हेमंत राठौर पवन राठौर और लव अमन तथा अशोक त्यागी के परिजनों से भी मुलाकात की। यहां कांग्रेस नेता सुनील शर्मा और स्थानीय लोगों ने ज्ञापन सौंपकर मृतकों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये घायलों को 10-10 लाख रुपये और प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। हादसे के बाद परिवारों के सामने आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की चिंता बनी हुई है। वहीं ट्रक मंदिर परिसर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी इन सवालों का जवाब हादसे की जांच के लिहाज से अहम बना हुआ है।

  • विजयादशमी पर मध्यप्रदेश में होगा शस्त्र-पूजन, इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे पूजा, 31 जिलों में मंत्री संभालेंगे जिम्मेदारी

    विजयादशमी पर मध्यप्रदेश में होगा शस्त्र-पूजन, इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे पूजा, 31 जिलों में मंत्री संभालेंगे जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश: में विजयादशमी के अवसर पर 20 अक्टूबर 2026 को प्रदेशव्यापी शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस आयोजन के लिए जिलों के अनुसार जिम्मेदारियां तय की हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर शस्त्र-पूजन करेंगे। वहीं, प्रदेश के 31 जिलों में मंत्री और अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। शेष 24 जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा को आगे बढ़ाना और सुरक्षा, साहस तथा राष्ट्र के प्रति सम्मान के भाव को रेखांकित करना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस परंपरा को देश की सैन्य शक्ति, सुरक्षा और स्वतंत्रता के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि शस्त्र-पूजन को साहस, आत्मरक्षा और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की भावना से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

    इन जिलों में प्रमुख नेता करेंगे शस्त्र-पूजन
    राज्य सरकार ने कई जिलों में मंत्रियों और प्रमुख जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी है। इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव शस्त्र-पूजन करेंगे। ग्वालियर में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे। मंदसौर में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और रीवा में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल शस्त्र-पूजन में शामिल होंगे।

    राजधानी भोपाल में मंत्री विश्वास सारंग पूजा-अर्चना करेंगे। धार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। नरसिंहपुर में मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और जबलपुर में मंत्री राकेश सिंह शस्त्र-पूजन करेंगे। सीहोर में मंत्री करण सिंह वर्मा तथा नर्मदापुरम में मंत्री उदय प्रताप सिंह कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे।इनके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। सरकार की योजना के अनुसार, कुल 31 जिलों में मंत्री स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    24 जिलों में प्रशासन संभालेगा जिम्मेदारी
    प्रदेश के बाकी 24 जिलों में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दी गई है। इन स्थानों पर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मिलकर आयोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। इस तरह सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित कार्यक्रम संबंधित जिलों में आयोजित हो सके। शस्त्र-पूजन में सुरक्षा से जुड़े विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।

    विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन का धार्मिक महत्व
    सनातन परंपरा में शस्त्रों को शक्ति, साहस और आत्मरक्षा का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा का उद्देश्य शक्ति के सदुपयोग और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की भावना को मजबूत करना है। इस अवसर पर सैनिक और पुलिसकर्मी अपने हथियारों की पूजा करते हैं, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में लोग अपने कामकाज से जुड़े औजारों का पूजन करते हैं।


    शस्त्र-पूजन की एक मान्यता महाभारत काल से जुड़ी है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने हथियार शमी के पेड़ के नीचे छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने के बाद अर्जुन ने शमी के पेड़ से अपने शस्त्र निकाले और राजा विराट के राज्य की रक्षा के लिए कौरवों की सेना का सामना किया। इसी मान्यता के कारण कई स्थानों पर विजयादशमी के दिन शमी के पेड़ और शस्त्रों की पूजा की जाती है।

    राम और दुर्गा की विजय से जुड़ा पर्व
    विजयादशमी को भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है। दोनों प्रसंग बुराई, अन्याय और अधर्म पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं। इसी भावना के साथ शस्त्र-पूजन में शक्ति का इस्तेमाल सही उद्देश्यों, सुरक्षा और धर्म की रक्षा के लिए करने का संकल्प लिया जाता है।

    मध्यप्रदेश में होने वाला यह आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी के महत्व को भी सामने रखेगा। प्रदेश के सभी 55 जिलों में तय व्यवस्था के अनुसार कार्यक्रम संपन्न कराने की जिम्मेदारी मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गई है।

  • सीएम के दौरे से प्रशासन की फुर्ती, बदहाल सड़क कुछ घंटों में चकाचक, नरसिंहपुर में हेलिकॉप्टर की लैंडिंग से उड़ा तंबू

    सीएम के दौरे से प्रशासन की फुर्ती, बदहाल सड़क कुछ घंटों में चकाचक, नरसिंहपुर में हेलिकॉप्टर की लैंडिंग से उड़ा तंबू


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हालिया दौरों से जुड़े कुछ दिलचस्प नजारे चर्चा में हैं। कहीं मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान तेज हवा से तंबू उड़ गया तो कहीं उनके दौरे से पहले प्रशासन ने कुछ ही घंटों में सड़क की मरम्मत कर दी। दूसरी ओर अशोकनगर में सिंधिया की बैठक के दौरान खाली कुर्सियां दिखाई दीं। इन घटनाओं ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है।
    पहला मामला नरसिंहपुर का है जहां मुख्यमंत्री मोहन यादव के हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान तेज हवा के झोंकों से वहां लगाया गया तंबू उड़ गया। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए मंत्री विधायक सांसद और अधिकारी हेलिपैड के पास मौजूद थे। हेलिकॉप्टर के पंखों से उठी तेज हवा के कारण धूल उड़ने लगी और तंबू भी हवा में उखड़ गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से मौके पर मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या नुकसान की खबर सामने नहीं आई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
    दूसरा मामला मुरैना का है जहां मुख्यमंत्री को एक स्कूल का निरीक्षण करना था। स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क की हालत खराब बताई गई थी। मुख्यमंत्री के दौरे की जानकारी के बाद प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए कुछ ही घंटों में सड़क को दुरुस्त कर दिया। आम दिनों में बदहाल सड़कों से परेशान रहने वाले लोगों के लिए यह बदलाव चर्चा का विषय बन गया। इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि जब किसी वीआईपी दौरे के दौरान प्रशासन इतनी तेजी से काम कर सकता है तो आम दिनों में भी सड़कों की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं पर इसी तरह ध्यान क्यों नहीं दिया जाता। हालांकि सड़क निर्माण और मरम्मत के काम की वास्तविक स्थिति तथा उसकी गुणवत्ता का आकलन संबंधित विभाग की जानकारी के आधार पर ही किया जा सकता है।
    तीसरा मामला केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अशोकनगर दौरे से जुड़ा है। यहां वे जनप्रतिनिधियों की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम में बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां लगाई गई थीं लेकिन कई कुर्सियां खाली नजर आईं। सिंधिया के मंच पर पहुंचने के दौरान खाली कुर्सियों को हटाने की कवायद भी दिखाई दी। इस दृश्य के बाद कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की कम मौजूदगी को लेकर चर्चा होने लगी। हालांकि बैठक में उपस्थिति कम रहने की वजह स्पष्ट नहीं है। यह आयोजन की व्यवस्था से जुड़ा मामला था या जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के पीछे कोई अन्य कारण था इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
    इसी दौरे के दौरान सिंधिया अशोकनगर में आयोजित जनजातीय सम्मेलन में भी शामिल हुए। यहां आदिवासी परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया गया और उन्हें विशेष मुकुट पहनाया गया। सिंधिया पूरे कार्यक्रम के दौरान मुकुट पहने नजर आए और उन्होंने इसी रूप में भाषण भी दिया। उनके इस अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। पारंपरिक स्वागत और पहनावे की तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।
    इन घटनाओं के बीच प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले सड़क का तेजी से दुरुस्त होना सरकारी मशीनरी की तत्परता को दिखाता है लेकिन आम नागरिकों के लिए भी ऐसी ही नियमित व्यवस्था जरूरी है। वहीं राजनीतिक कार्यक्रमों में उपस्थिति और आयोजन की तैयारियां भी चर्चा का हिस्सा बनी हुई हैं। फिलहाल इन घटनाओं की खासियत यही है कि एक ही दौर में प्रशासनिक फुर्ती से लेकर राजनीतिक आयोजनों के अलग-अलग दृश्य सामने आए हैं।

  • आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन

    आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन


    सीहोर । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। गुरुवार देर शाम केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास पर मुलाकात की। बैठक में वन विभाग की कार्रवाई से प्रभावित आदिवासी परिवारों की स्थिति और उनकी समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस घटनाक्रम के बाद प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
    मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल में प्रभावित आदिवासी परिवारों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। शिवराज सिंह चौहान ने कोसमी गांव में हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की। वह पहले भी इस मामले पर नाराजगी जता चुके हैं। उनका कहना था कि मौके पर उन्होंने बच्चों को परेशान होते और महिलाओं को कठिन परिस्थितियों से गुजरते देखा था। अब मुख्यमंत्री के सामने मामला रखने के बाद उन्होंने प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान की जरूरत पर जोर दिया।
    जानकारी के मुताबिक 11 अक्टूबर को कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 परिवारों के मकान तोड़े गए थे। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने अपने नुकसान को लेकर सवाल उठाए और मुआवजे की मांग की। परिवारों का कहना है कि उन्हें जमीन के पट्टे दिए जाएं और मकानों के साथ फसलों को हुए नुकसान की भरपाई की जाए। उन्होंने कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कदम उठाने की मांग की है। फिलहाल इस पूरे मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री के आश्वासन पर परिवारों की नजर बनी हुई है।
    बैठक के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कलेक्टर के. बालागुरु रात में कोनझीर पहुंचे और प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। परिवारों को बस के जरिए वापस उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी आदिवासी परिवार को परेशान नहीं किया जाए और जहां लोग स्थापित हैं वहां उनके साथ संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाए। हालांकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और कार्रवाई की परिस्थितियों का स्पष्ट होना जांच के बाद ही संभव होगा।
    कोसमी गांव की घटना अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। प्रभावित परिवारों की मांग है कि उन्हें केवल आश्वासन ही नहीं बल्कि वास्तविक राहत भी मिले। उनके अनुसार मकान और फसलें प्रभावित होने से उनके सामने रहने और आजीविका से जुड़ी समस्याएं खड़ी हुई हैं। ऐसे में मुआवजे और जमीन के पट्टों से संबंधित मांगों पर निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
    इधर कोसमी मामले को लेकर आदिवासी समुदाय के कुछ लोगों ने भोपाल की ओर पैदल मार्च भी शुरू किया है। जानकारी के अनुसार ये परिवार शुक्रवार शाम तक राजधानी पहुंच सकते हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि मकान तोड़े जाने के मामले में न्याय मिले और हुए नुकसान की भरपाई की जाए। मुख्यमंत्री की ओर से जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रभावित परिवारों को किस तरह राहत मिलती है इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • भोपाल में गरबा की धूम, सीएम मोहन यादव ने दिया संस्कृति और संस्कारों को सहेजने का संदेश, नवरात्रि में दिखी भक्ति की झलक

    भोपाल में गरबा की धूम, सीएम मोहन यादव ने दिया संस्कृति और संस्कारों को सहेजने का संदेश, नवरात्रि में दिखी भक्ति की झलक


    भोपाल । भोपाल के जंबूरी मैदान में गुरुवार को भोजपाल गरबा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव की शुरुआत की। इस दौरान गरबा की आकर्षक प्रस्तुतियों और भक्ति गीतों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मुख्यमंत्री ने भजन गायन भी किया और प्रदेशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए मां दुर्गा से सभी के सुख समृद्धि और कल्याण की कामना की। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय संस्कृति परंपराओं और विरासत पर गर्व करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और समाज कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए उसे अपनी जड़ों से जुड़ा रहना चाहिए। जिन समाजों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखा है वे विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। यहां कन्या को देवी का स्वरूप माना जाता है और मातृशक्ति के रूप में भी पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि नारी नारायणी हैं और शक्ति का प्रतीक हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूप हमें साहस पराक्रम और आत्मविश्वास की प्रेरणा देते हैं। शक्ति की भक्ति में ही सभी का कल्याण निहित है। नवरात्रि का पर्व केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमें अपनी परंपराओं को समझने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का अवसर भी प्रदान करता है।
    मुख्यमंत्री ने लोगों से समाज में सद्भाव बढ़ाने और महिलाओं के सम्मान को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहारों की सार्थकता तभी है जब उनके माध्यम से समाज में प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत हो। लोगों को गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में खुशियां लाने का संकल्प भी लेना चाहिए। भोजपाल गरबा महोत्सव में भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भारतीय परंपराओं की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में भोजपाल महोत्सव मेला समिति के संयोजक विकास वीरानी और समिति के अध्यक्ष सुनील यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में भोजपाल गरबा महोत्सव लगातार भव्य और व्यापक होता गया है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोग आयोजन में शामिल होने पहुंचे हैं। गरबा केवल नृत्य का कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह शक्ति की आराधना से मिलने वाली शांति खुशी और उत्साह को सामूहिक रूप से व्यक्त करने का माध्यम है। ऐसे आयोजन लोगों को एक साथ लाने और आपसी मेलजोल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खेल और शारीरिक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए ताकि लोग स्वस्थ और सक्रिय रह सकें।
    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में प्रमुख त्योहार और सांस्कृतिक आयोजन सामूहिक उत्साह के साथ मनाए जाएं। मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव सर्दियों में भोपाल उत्सव और जन्माष्टमी जैसे आयोजनों के माध्यम से सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का अवसर देते हैं और समाज में एकता की भावना को मजबूत करते हैं।
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत के बढ़ते मान सम्मान का भी उल्लेख किया। उन्होंने आशा जताई कि वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने तक भारत हर क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल होगा। उन्होंने भारतीय संस्कृति और गौरव का परचम पूरी दुनिया में ऊंचा रखने का आह्वान किया। साथ ही लोगों को आगामी दशहरे की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए अपनी परंपराओं को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया। भोजपाल गरबा महोत्सव का शुभारंभ भक्ति उल्लास और सांस्कृतिक गौरव के माहौल में हुआ।

  • कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले 9 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि, 21 अक्टूबर को परिजनों से मिलेंगे CM, लंबित भुगतान के निर्देश

    कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले 9 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि, 21 अक्टूबर को परिजनों से मिलेंगे CM, लंबित भुगतान के निर्देश


    भोपाल । मध्य प्रदेश में कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के परिवारों को राहत देने के लिए पुलिस मुख्यालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर 21 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों से मुलाकात करेंगे। इस कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने संबंधित अधिकारियों को अनुकंपा नियुक्ति और लंबित देयकों के भुगतान से जुड़े मामलों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है ताकि प्रत्येक प्रकरण की समीक्षा की जा सके और परिवारों को मिलने वाली सहायता की स्थिति स्पष्ट हो सके।
    पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी पत्र के अनुसार 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच ड्यूटी के दौरान दिवंगत हुए नौ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय से प्राप्त हुई है। इन सभी के परिजनों को पुलिस स्मृति दिवस के कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा। मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और उनके लंबित भुगतान का निपटारा किया जाए। इस पहल का उद्देश्य उन परिवारों के मामलों को प्राथमिकता देना है जिन्होंने अपने परिजन को पुलिस सेवा के दौरान खोया है।
    सूची में भोपाल की 25वीं वाहिनी में पदस्थ निरीक्षक आशीष शर्मा का नाम शामिल है। इसके अलावा उज्जैन जिले के सब इंस्पेक्टर अशोक शर्मा सहायक उप निरीक्षक मदनलाल निनामा और महिला आरक्षक आरती पाल भी सूची में शामिल हैं। उमरिया के प्रधान आरक्षक ओम प्रकाश भवेदी राजगढ़ के प्रधान आरक्षक सर्जन सिंह भील मुरैना के प्रधान आरक्षक परिमाल सिंह तोमर सतना के आरक्षक विकास चतुर्वेदी और शहडोल के आरक्षक महेश प्रसाद पाठक ने भी ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाई थी। इन सभी पुलिसकर्मियों के परिजनों से संबंधित मामलों में नियुक्ति और बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
    सूची में शामिल निरीक्षक आशीष शर्मा नक्सल विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए थे। वे मध्य प्रदेश हॉक फोर्स में पदस्थ थे और छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव क्षेत्र के जंगलों में संयुक्त पुलिस अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अभियान में मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की पुलिस टीमें शामिल थीं। जंगल में पेट्रोलिंग के दौरान नक्सलियों की ओर से फायरिंग की गई थी। इस घटना में घायल आशीष शर्मा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनका बलिदान नक्सल विरोधी अभियान में पुलिसकर्मियों के सामने आने वाले जोखिमों की याद दिलाता है।
    उज्जैन जिले के तीन पुलिसकर्मियों की जान सितंबर 2025 में एक सड़क हादसे में गई थी। जानकारी के अनुसार लापता लड़की से जुड़े मामले की जांच के दौरान सुराग का पीछा करते समय उन्हेल थाने की कार शिप्रा नदी में गिर गई थी। इस दुर्घटना में सब इंस्पेक्टर अशोक शर्मा सहायक उप निरीक्षक मदनलाल निनामा और आरक्षक आरती पाल की मृत्यु हो गई थी। वहीं अन्य पुलिसकर्मियों की मौत सड़क दुर्घटनाओं और ड्यूटी से जुड़े हादसों में हुई। सागर जिले में बांदरी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड की वैन ट्रक से टकरा गई थी। इस दुर्घटना में प्रधान आरक्षक परिमाल सिंह तोमर शहीद हो गए थे।
    पुलिस स्मृति दिवस हर साल उन पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। इस दिन शहीद जवानों और अधिकारियों को याद करने के साथ उनके परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदना भी व्यक्त की जाती है। मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये की सम्मान निधि देने की घोषणा की थी। इस बार कार्यक्रम से पहले अनुकंपा नियुक्ति और लंबित देयकों के भुगतान पर जोर दिया गया है। अब संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई रिपोर्ट और परिवारों से मुख्यमंत्री की मुलाकात पर नजर रहेगी।

  • मध्य प्रदेश के विकास को मिलेगी नई दिशा, 55 जिलों के लिए चयनित CM Fellows का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

    मध्य प्रदेश के विकास को मिलेगी नई दिशा, 55 जिलों के लिए चयनित CM Fellows का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में सुशासन और विकास कार्यों को प्रभावी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। बुधवार 14 अक्टूबर 2026 को भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत चयनित सीएम फेलोज के पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 55 जिलों के लिए चयनित सीएम फेलोज शामिल हो रहे हैं। इसका उद्देश्य युवा पेशेवरों को शासन व्यवस्था और विकास से जुड़े कार्यों की बेहतर समझ प्रदान करना है।

    मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत चयनित इन प्रतिभागियों को पांच दिनों तक कार्यक्रम से संबंधित जरूरी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें विकास योजनाओं की प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलेगा। इस पहल के माध्यम से युवा पेशेवरों को प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों से जोड़ने और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया से परिचित कराने पर जोर दिया जा रहा है।

    राज्य सरकार की इस पहल में जिलों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय जरूरतों की समझ जरूरी होती है। ऐसे में सीएम फेलोज के प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें शासन की प्रक्रियाओं से परिचित कराना और विकास संबंधी कार्यों में उनकी भागीदारी के लिए तैयार करना है। प्रदेश के 55 जिलों के लिए चयनित प्रतिभागियों को एक साथ प्रशिक्षण दिए जाने से उन्हें कार्यक्रम के उद्देश्यों और काम करने के तरीकों को समझने का अवसर मिलेगा।

    भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में आयोजित यह कार्यक्रम सुशासन और नीति निर्माण से जुड़े विषयों पर केंद्रित है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम की कार्यप्रणाली और उसके उद्देश्यों की जानकारी दी जाएगी। इसके जरिए युवा पेशेवरों को प्रशासनिक व्यवस्था के साथ समन्वय बनाकर काम करने और विकास योजनाओं की प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है।

    सीएम फेलोज कार्यक्रम को युवा प्रतिभाओं और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। विकास कार्यों में प्रभावी भागीदारी के लिए योजनाओं की जानकारी के साथ उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को समझना भी जरूरी है। पांच दिवसीय प्रशिक्षण इसी दिशा में एक कदम है। इसके माध्यम से चयनित प्रतिभागियों को अपनी जिम्मेदारियों और कार्यक्रम की अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश में विकास और सुशासन से जुड़ी पहल को आगे बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है। अब प्रशिक्षण के दौरान दी जाने वाली जानकारी और उसके बाद जिलों में सीएम फेलोज की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। उम्मीद है कि इस कार्यक्रम से युवा पेशेवरों को प्रशासनिक कामकाज की समझ विकसित करने और विकास संबंधी गतिविधियों में योगदान देने में मदद मिलेगी।

  • मध्य प्रदेश में पटवारियों की दोटूक, पहले बहाली के आदेश जारी करें कलेक्टर फिर करेंगे स्वामित्व योजना का काम, सरकार के सामने नई चुनौती

    मध्य प्रदेश में पटवारियों की दोटूक, पहले बहाली के आदेश जारी करें कलेक्टर फिर करेंगे स्वामित्व योजना का काम, सरकार के सामने नई चुनौती


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत होने वाली मुफ्त रजिस्ट्रियों पर एक बार फिर संकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद काम पर लौटने की सहमति देने वाले पटवारियों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि जब तक निलंबन और बर्खास्तगी के आदेश वापस नहीं लिए जाते तब तक वे योजना का काम नहीं करेंगे। पटवारी संघ का कहना है कि सरकार के स्तर पर सहमति बनने और राजस्व विभाग की ओर से कानूनी संरक्षण से जुड़ा आदेश जारी होने के बावजूद जिलों में कलेक्टरों ने बहाली की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। ऐसे में पटवारी स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री की कार्रवाई शुरू करने के लिए तैयार नहीं हैं।
    रविवार शाम मध्य प्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह और प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी ने वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद राजस्व विभाग ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 218 के तहत आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री से जुड़े विवाद या न्यायालयीन प्रकरण की स्थिति में पटवारियों के खिलाफ केस चलाने से संरक्षण दिया गया है। हालांकि संघ का कहना है कि 17 सितंबर के बाद पटवारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को शून्य करने पर सहमति बनी थी लेकिन अब तक संबंधित कलेक्टरों ने बहाली के आदेश जारी नहीं किए हैं। इसी वजह से प्रदेश के पटवारी फिलहाल योजना के काम से अलग रहेंगे।

    इससे पहले 9 अक्टूबर की शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पटवारी संघ के बीच बातचीत के बाद सहमति बनने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद संघ ने 12 अक्टूबर से काम शुरू करने का ऐलान किया था। उस समय न्यायिक संरक्षण के आदेश जारी करने और 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाई को समाप्त करने पर सहमति बनने की बात कही गई थी। वेतन विसंगति के मुद्दे पर आयोग के गठन के बाद विचार करने और 27 अक्टूबर को प्रस्तावित महासम्मेलन में आर्थिक मांगों पर घोषणा करने का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन बहाली के आदेश जारी नहीं होने से सहमति के बावजूद विवाद फिर गहरा गया है।
    स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत गांवों की आबादी वाली भूमि का ड्रोन सर्वे कराकर संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनके घर और जमीन से जुड़े अधिकारों का दस्तावेज उपलब्ध कराना है। मध्य प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक करीब 50 लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इन रजिस्ट्रियों के लिए हितग्राहियों से स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जा रहा है। इसका खर्च सरकार उठा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं जिनमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं।
    पटवारियों की मुख्य आपत्ति रजिस्ट्री की प्रक्रिया में उनकी भूमिका और संभावित कानूनी जिम्मेदारी को लेकर है। संघ के मुताबिक दस्तावेजों में ग्रामीण को क्रेता और पटवारी को विक्रेता या निष्पादक की भूमिका दी गई है। पटवारियों का कहना है कि वे जमीन के मालिक नहीं हैं और न ही उन्हें हर मामले में मालिकाना हक तय करने का अधिकार है। ऐसे में भविष्य में जमीन की सीमा हिस्सेदारी या कब्जे को लेकर विवाद होने पर उनके हस्ताक्षर के आधार पर उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने का डर है।
    संघ ने रिकॉर्ड में गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया है। गुना में पटवारी संघ के अनुसार कुछ मामलों में मौके पर कब्जा एक भाई का है जबकि दस्तावेजों में तीन भाइयों के नाम दर्ज हैं। ऐसे मामलों में भविष्य में विवाद की आशंका बनी रहती है। पटवारी संघ का कहना है कि उसे योजना से आपत्ति नहीं है लेकिन निष्पादक की भूमिका और उससे जुड़ी कानूनी जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। अब निगाहें सरकार और जिला प्रशासन के अगले कदम पर हैं क्योंकि बहाली के आदेश जारी नहीं हुए तो मुफ्त रजिस्ट्रियों का काम प्रभावित हो सकता है।
  • मोहन यादव ने नरसिंहपुर से कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपना इतिहास देखे पार्टी

    मोहन यादव ने नरसिंहपुर से कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपना इतिहास देखे पार्टी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधा है। नरसिंहपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था। मुख्यमंत्री ने इस पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस को अपने इतिहास पर नजर डालने की नसीहत दी। उनके बयान के बाद SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।
    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस जब चुनाव में सफलता हासिल करती है तो उसे चुनावी प्रक्रिया में कोई खामी नजर नहीं आती लेकिन जब परिणाम उसके पक्ष में नहीं आते तो वह चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगती है। उन्होंने केरल और हिमाचल प्रदेश का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अलग-अलग परिस्थितियों में अलग रुख अपनाती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने से पहले राजनीतिक दलों को अपने पुराने फैसलों और व्यवहार पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के खिलाफ लगाए जाने वाले गंभीर आरोपों के लिए ठोस तथ्यों और प्रमाणों की जरूरत पर भी जोर दिया।
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने टीएन शेषन और लालकृष्ण आडवाणी के बीच हुए चुनाव का जिक्र किया। दरअसल पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर गुजरात की गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ा था। इस सीट पर उनका मुकाबला भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से हुआ था। मुख्यमंत्री ने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर कांग्रेस के मौजूदा रुख पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने वाली पार्टी को अपने पुराने राजनीतिक निर्णयों को भी याद रखना चाहिए।
    मोहन यादव ने अपने भाषण में पूर्व आईपीएस अधिकारी केपीएस गिल का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक हितों के लिए अधिकारियों और संवैधानिक पदों से जुड़े लोगों को राजनीति में अवसर दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने नेहरू-गांधी परिवार पर परिवारवाद को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश की करीब 600 रियासतों ने अपने अधिकार सौंपे थे लेकिन उनके मुताबिक कांग्रेस ने राजनीतिक नेतृत्व को एक परिवार तक सीमित रखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया। ये आरोप मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक संबोधन के दौरान लगाए।
    गौरतलब है कि कांग्रेस SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी कर रही है। इसी मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के विरोध को उसके राजनीतिक रुख से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियां चुनावी मतदाता सूची की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता से संबंधित हैं।
    नरसिंहपुर में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान उन्होंने संदीपनी एक्सीलेंस स्कूल के नए भवन का उद्घाटन किया और विद्यार्थियों के लिए बस सेवा को हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों के खातों में राशि हस्तांतरित करने और विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल रहे। इस तरह शिक्षा और विकास कार्यों के बीच मुख्यमंत्री ने SIR विवाद को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर चल रही बहस में पार्टी के पुराने राजनीतिक इतिहास का हवाला दिया।