Tag: Monsoon

  • बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: उत्तराखंड में यात्रा पर ब्रेक, छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से पांच की मौत, कई राज्यों में रेड अलर्ट

    बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: उत्तराखंड में यात्रा पर ब्रेक, छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से पांच की मौत, कई राज्यों में रेड अलर्ट


    नई दिल्ली । देशभर में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश आम जनजीवन पर भारी पड़ रही है। उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को एहतियातन दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। वहीं चंपावत बागेश्वर और टिहरी जिलों में खराब मौसम के चलते कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    राजस्थान में भी तेज बारिश ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। धौलपुर सहित कई शहरों के बाजारों और निचले इलाकों में पानी भर गया जिससे यातायात प्रभावित हुआ और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित रहीं। चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद प्रसिद्ध मेनाल जलप्रपात पूरे वेग से बहने लगा जबकि रणथंभौर क्षेत्र में कई स्थानों पर जलस्तर बढ़ने से रास्तों पर पानी बहता दिखाई दिया।

    छत्तीसगढ़ में बारिश के साथ आकाशीय बिजली ने कहर बरपाया। राज्य के अलग अलग हिस्सों में बिजली गिरने की तीन घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि ग्यारह लोग घायल हो गए। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

    गुजरात में भी लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति का असर औद्योगिक गतिविधियों पर देखने को मिला। साणंद स्थित टाटा मोटर्स प्लांट और उसके आसपास स्थित कई सप्लायर इकाइयों का संचालन अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ। वहीं महिसागर जिले का प्रसिद्ध सात कुंड जलप्रपात भी बारिश के बाद पूरे उफान पर पहुंच गया।

    उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित कई शहरों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई जिससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिहार के कई जिलों में भी लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और निचले इलाकों में पानी भरने लगा है।

    भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस समय देश के ऊपर दो मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय हैं। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा झारखंड और छत्तीसगढ़ से आगे बढ़ते हुए मध्य एवं उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर रहा है। इसी कारण मध्य भारत उत्तर पश्चिम भारत और पूर्वी राज्यों में अगले चार से पांच दिनों तक सामान्य से अधिक तथा कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।

    दिल्ली में भी मंगलवार को 50 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। राजधानी के कई इलाकों में जलभराव हुआ मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया तथा कई पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग ने लोगों से नदी नालों के पास जाने से बचने सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने की अपील की है क्योंकि आने वाले दिनों में मानसून का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है।

  • बारिश में जानलेवा रोमांच! प्रतिबंध के बावजूद झरनों तक पहुंच रहे लोग, पांच साल में 70 मौतों के बाद भी नहीं सबक

    बारिश में जानलेवा रोमांच! प्रतिबंध के बावजूद झरनों तक पहुंच रहे लोग, पांच साल में 70 मौतों के बाद भी नहीं सबक


    इंदौर । बारिश का मौसम आते ही इंदौर और आसपास के झरने व प्राकृतिक पर्यटन स्थल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने लगते हैं। हालांकि यह रोमांच कई बार जानलेवा साबित हो रहा है। प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की बार-बार चेतावनी के बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही थमने का नाम नहीं ले रही है। नतीजा यह है कि पिछले पांच वर्षों में इंदौर और महू क्षेत्र के 13 प्रमुख पिकनिक स्पॉट पर 70 युवाओं की जान जा चुकी है। इसके बावजूद लोग बैरिकेड्स पार कर और जंगल के रास्तों से प्रतिबंधित इलाकों तक पहुंच रहे हैं।

    बीते दो दिनों में ही इंदौर के तीन लोगों की अलग-अलग हादसों में मौत हो चुकी है। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लगातार हादसों और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बावजूद लोग अपनी जान जोखिम में डालने से क्यों नहीं बच रहे हैं। सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो बनाने की चाहत भी इस लापरवाही की बड़ी वजह मानी जा रही है।

    महू और उसके आसपास स्थित कई पर्यटन स्थलों पर मानसून के दौरान प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। इनमें तिंछा फॉल, चोरल फॉल, चोरल डैम, शीतला माता फॉल, कजलीगढ़, गेंदी कुंड, जामन्या कुंड, मोहदी फॉल, रतवी फॉल, लोधिया कुंड, जूनापानी, चिड़िया भड़क, बामनिया कुंड, जोगी भड़क और हत्यारी खो जैसे स्थान शामिल हैं। इन जगहों पर तेज जलधारा, फिसलन, गहरी खाई और अचानक बढ़ते जलस्तर के कारण हर साल हादसे होते हैं। इसके बावजूद कई पर्यटक चेतावनी बोर्ड और बैरिकेड्स को नजरअंदाज कर खतरनाक इलाकों तक पहुंच जाते हैं।

    हाल ही में महेश्वर के सहस्त्रधारा घाट पर हुआ हादसा भी ऐसी ही लापरवाही का उदाहरण है। इंदौर निवासी अजीत हाड़ा अपने परिवार और दोस्तों के साथ घूमने पहुंचे थे। नर्मदा की तेज धारा में बहने के बाद उनका शव करीब 200 मीटर दूर एक खोह में फंसा मिला। यह घटना उनके परिजनों की आंखों के सामने हुई और पूरे परिवार को गहरा सदमा दे गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के दौरान झरनों और नदियों का जलस्तर कुछ ही मिनटों में तेजी से बढ़ सकता है। ऊपर के इलाकों में हुई बारिश का असर नीचे अचानक दिखाई देता है, जिससे सुरक्षित दिखने वाली जगह भी पलभर में खतरनाक बन जाती है। ऐसे में बैरिकेड्स और प्रतिबंध केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं।

    प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि मानसून के दौरान प्रतिबंधित पिकनिक स्पॉट और झरनों के मुहानों तक जाने से बचें। थोड़ी सी लापरवाही न केवल अपनी बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल सकती है। रोमांच का आनंद तभी तक अच्छा है, जब तक वह सुरक्षित हो। चेतावनियों को नजरअंदाज करना साहस नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही है।

  • मानसून में टायर प्रेशर से न करें समझौता, सही हवा और बेहतर ग्रिप से कम होगा हादसों का जोखिम

    मानसून में टायर प्रेशर से न करें समझौता, सही हवा और बेहतर ग्रिप से कम होगा हादसों का जोखिम


    नई दिल्ली ।
    बारिश का मौसम शुरू होते ही सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं और ऐसे में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए वाहन की तकनीकी स्थिति पर विशेष ध्यान देना आवश्यक हो जाता है। अधिकांश चालक इस दौरान वाइपर, ब्रेक और हेडलाइट की जांच तो कराते हैं, लेकिन टायर प्रेशर की अनदेखी कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सही टायर प्रेशर वाहन की ग्रिप, ब्रेकिंग क्षमता और सड़क पर संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए मानसून के दौरान टायर में हवा का स्तर हमेशा निर्माता कंपनी की सिफारिश के अनुरूप ही होना चाहिए।

    हर वाहन के लिए टायर प्रेशर अलग-अलग निर्धारित किया जाता है। इसकी जानकारी आमतौर पर ड्राइवर साइड के दरवाजे पर लगे स्टिकर या वाहन के ओनर मैनुअल में उपलब्ध रहती है। मौसम बदलने के कारण अपनी ओर से टायर में हवा कम या ज्यादा करना उचित नहीं माना जाता। वाहन निर्माता जिस प्रेशर की सलाह देते हैं, उसी का पालन करने से टायर का सड़क से संपर्क संतुलित बना रहता है और वाहन की पकड़ बेहतर रहती है।

    यदि टायर में आवश्यकता से अधिक हवा भर दी जाए तो उसका सड़क से संपर्क क्षेत्र कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में गीली सड़क पर टायर की ग्रिप कमजोर पड़ सकती है। तेज गति में अचानक ब्रेक लगाने या मोड़ लेने पर वाहन के फिसलने की आशंका बढ़ जाती है। अधिक हवा होने से बारिश के दौरान नियंत्रण बनाए रखना कठिन हो सकता है, जिससे दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    दूसरी ओर, कई लोगों का मानना है कि बारिश में टायर का प्रेशर थोड़ा कम रखने से सड़क पर पकड़ बेहतर होती है। हालांकि विशेषज्ञ इस धारणा को सही नहीं मानते। कम हवा होने पर टायर का घिसाव तेजी से बढ़ सकता है, ईंधन की खपत अधिक हो सकती है और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान टायर का तापमान भी सामान्य से अधिक बढ़ सकता है। इससे टायर की कार्यक्षमता प्रभावित होने के साथ उसके क्षतिग्रस्त होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

    मानसून के दौरान केवल टायर प्रेशर ही नहीं, बल्कि टायर की स्थिति की नियमित जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि टायर का ट्रेड काफी घिस चुका हो या उसकी ग्रिप कमजोर हो गई हो, तो समय रहते उसे बदल देना चाहिए। घिसे हुए टायर गीली सड़क पर पानी को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाते, जिससे वाहन के फिसलने का खतरा बढ़ सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महीने में कम से कम एक बार टायर प्रेशर की जांच अवश्य करानी चाहिए। यदि लंबी यात्रा पर जाना हो तो प्रस्थान से पहले टायर की हवा, ट्रेड की गहराई और किसी भी प्रकार की क्षति की जांच कर लेना बेहतर होता है। साथ ही स्पेयर टायर की स्थिति भी देखनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में परेशानी न हो।

    बारिश के मौसम में सुरक्षित ड्राइविंग केवल सावधानी से वाहन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहन के रखरखाव पर भी समान रूप से निर्भर करती है। सही टायर प्रेशर, अच्छी ग्रिप वाले टायर और नियमित निरीक्षण न केवल वाहन के प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना को भी कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में मानसून के दौरान टायरों की नियमित देखभाल को अपनी ड्राइविंग आदत का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए।

  • चार दिन तक बारिश का डबल अटैक एमपी के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

    चार दिन तक बारिश का डबल अटैक एमपी के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। प्रदेश में बने मजबूत मानसूनी सिस्टम के कारण अगले चार दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग ने सोमवार के लिए उमरिया शहडोल अनूपपुर डिंडौरी मंडला और बालाघाट जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि 27 से 30 जुलाई के बीच कई इलाकों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की जा सकती है इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के ऊपर से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही एक निम्न दबाव क्षेत्र और डिप्रेशन सक्रिय है जबकि पश्चिमी विक्षोभ भी जल्द प्रभाव दिखाएगा। इन सभी मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ने लगी हैं। रविवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई और अब इसका असर पूरे प्रदेश में देखने को मिलेगा।

    भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच आगर मालवा मंदसौर शाजापुर देवास रतलाम नर्मदापुरम बैतूल हरदा ग्वालियर गुना शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर जबलपुर कटनी छिंदवाड़ा सिवनी नरसिंहपुर पांढुर्णा रीवा सतना सीधी सिंगरौली मऊगंज मैहर सागर पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत अधिकांश जिलों में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ तेज बारिश और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 13.2 इंच यानी 334.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है जबकि इस समय तक 15.5 इंच यानी 395.2 मिलीमीटर बारिश हो जानी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब भी करीब 15 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में करीब 13 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से केवल 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई है जबकि 41 जिले अब भी सामान्य से कम बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। निवाड़ी पूर्वी मध्य प्रदेश का एकमात्र जिला है जहां औसत से अधिक वर्षा हुई है। दूसरी ओर भोपाल इंदौर सीहोर राजगढ़ देवास हरदा बुरहानपुर नीमच मंदसौर दमोह सिवनी आगर मालवा और भिंड जैसे जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से बेहतर रहा है।

    मौसम विभाग का कहना है कि जून महीने में कमजोर मानसून के कारण बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रह गया था। जुलाई के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी लेकिन पिछले कुछ दिनों तक बारिश कमजोर रहने से प्रदेश फिर औसत से नीचे पहुंच गया। अब सक्रिय मानसूनी सिस्टम से उम्मीद है कि बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई मध्य प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बारिश वाला महीना होता है क्योंकि पूरे मानसून की लगभग 40 प्रतिशत वर्षा इसी महीने में होती है। प्रदेश की सामान्य वार्षिक बारिश 37.3 इंच मानी जाती है जबकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य वर्षा 38 से 39 इंच के बीच रहती है। मौसम विभाग ने लोगों को नदी नालों से दूर रहने और भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

  • उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत

    उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले दस दिनों से जारी बारिश के कारण प्रदेश की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। लखीमपुर खीरी में शारदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटीय गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। खेत, सड़कें और निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं। कई स्थानों पर मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचते दिखाई दिए, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।

    सोनभद्र जिले में घाघरा नदी के तेज बहाव ने जिला जेल को जोड़ने वाली सड़क का बड़ा हिस्सा बहा दिया, जिससे आवागमन बाधित हो गया। वहीं गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और चेतावनी स्तर के पार पहुंचने के बाद प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। जिले की सभी बाढ़ चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। पिछले एक सप्ताह में नदी करीब 10 फीट ऊपर आ चुकी है। अस्सी घाट से नमो घाट तक करीब 50 छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो गए हैं। घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील की गई है।

    मौसम का असर राजधानी लखनऊ, नोएडा, कानपुर, आगरा और अन्य शहरों में भी देखने को मिल रहा है। बुधवार सुबह से कई स्थानों पर रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि पूरे प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने 10 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।

    बारिश के बीच हादसों का सिलसिला भी जारी है। उन्नाव में तेज हवा के दौरान चलती बाइक पर अचानक पेड़ गिर गया, जिससे युवक की गर्दन टूट गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना लगातार खराब मौसम के बीच सावधानी बरतने की जरूरत को भी रेखांकित करती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में व्यापक बारिश हुई। अब मानसूनी ट्रफ दक्षिण की ओर खिसक रही है, जिससे अगले एक-दो दिनों में कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद बारिश में कुछ कमी आने की संभावना है, लेकिन 26 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होकर प्रदेश में तेज बारिश का नया दौर शुरू कर सकता है।

  • अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट

    अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून अपने पूरे शबाब पर है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटे के दौरान 35 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 4.2 इंच वर्षा नर्मदापुरम में रिकॉर्ड की गई, जबकि भोपाल सहित कई शहरों में पूरी रात रुक-रुककर बारिश होती रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले 24 से 48 घंटे तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार नर्मदापुरम के अलावा नरसिंहपुर में 2.5 इंच, राजगढ़ में 2.4 इंच, सीहोर और मलाजखंड में 2.2 इंच, भोपाल में 2.1 इंच, पचमढ़ी और मंडला में 1.8 इंच, श्योपुर में 1.5 इंच, सिवनी में 1.3 इंच तथा खरगोन में 1.1 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा उमरिया, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, टीकमगढ़, खंडवा, छतरपुर, सतना, बैतूल, दमोह, जबलपुर, इंदौर, रतलाम, दतिया, उज्जैन, धार, सीधी, ग्वालियर, सागर, शाजापुर, विदिशा, देवास, आगर-मालवा, बड़वानी और बुरहानपुर सहित कई जिलों में भी तेज बारिश और हवाओं का असर देखने को मिला।

    लगातार बारिश का असर जलाशयों और नदियों पर भी दिखाई देने लगा है। उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जलाशय का जलस्तर बढ़ने के बाद एक गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। वहीं रायसेन और नर्मदापुरम सहित कई इलाकों में खेत पानी से लबालब भर गए हैं। कई शहरों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति भी देखने को मिली।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर मजबूत हो गया है। प्रदेश के ऊपर सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र, लगातार बादलों की मौजूदगी और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी से मिल रही भरपूर नमी बारिश को लगातार बढ़ावा दे रही है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार अच्छी वर्षा हो रही है।

    बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान 22 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है। सुबह और रात के समय मौसम काफी सुहावना हो गया है तथा लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है। वातावरण में सापेक्षिक आर्द्रता 75 से 95 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे गरज-चमक वाले बादलों का तेजी से निर्माण हो रहा है और वर्षा की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं।

    मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। कुछ स्थानों पर हवा के झोंके 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। यही हवाएं समुद्र से नमी लेकर मध्य प्रदेश तक पहुंच रही हैं और मानसून को लगातार मजबूत बनाए हुए हैं।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, मंडला, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, बैतूल तथा आसपास के जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने लोगों से नदी-नालों, पुल-पुलियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

  • बारिश के मौसम में चिपचिपी त्वचा से पाएं राहत, मुल्तानी मिट्टी, बेसन और खीरे से करें स्किन की नेचुरल केयर

    बारिश के मौसम में चिपचिपी त्वचा से पाएं राहत, मुल्तानी मिट्टी, बेसन और खीरे से करें स्किन की नेचुरल केयर

    नई दिल्ली ।मानसून का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन हवा में बढ़ी नमी और उमस त्वचा, खासकर ऑयली स्किन वाले लोगों के लिए कई परेशानियां लेकर आती है। इस दौरान चेहरे पर अतिरिक्त तेल जमा होने लगता है, जिससे त्वचा चिपचिपी महसूस होती है। साथ ही पिंपल्स, ब्लैकहेड्स और रोमछिद्र बंद होने जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में त्वचा की नियमित देखभाल और सही घरेलू उपाय अपनाकर इन समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    ऑयली स्किन की देखभाल के लिए मुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल का फेस पैक एक लोकप्रिय घरेलू विकल्प माना जाता है। मुल्तानी मिट्टी अतिरिक्त तेल और गंदगी को सोखने में मदद करती है, जबकि गुलाब जल त्वचा को ठंडक और ताजगी प्रदान करता है। इसे तैयार करने के लिए दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी में आवश्यकतानुसार गुलाब जल मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस मिश्रण को चेहरे पर लगभग 15 मिनट तक लगाकर रखें और सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें। सप्ताह में एक या दो बार इसका उपयोग किया जा सकता है।

    बेसन और दही का फेस पैक भी त्वचा की सफाई और देखभाल के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। बेसन त्वचा की सतह पर जमी गंदगी और अतिरिक्त तेल हटाने में मदद करता है, जबकि दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को मुलायम बनाए रखने में सहायक माना जाता है। इसके लिए दो चम्मच बेसन में एक चम्मच ताजा दही मिलाकर पेस्ट तैयार करें। चाहें तो इसमें एक चुटकी हल्दी भी मिलाई जा सकती है। इसे चेहरे पर 15 मिनट तक लगाने के बाद हल्के हाथों से मसाज करते हुए धो लें।

    खीरा और एलोवेरा जेल का फेस पैक भी मानसून में त्वचा को ठंडक और नमी प्रदान करने के लिए उपयोगी माना जाता है। आधे खीरे को पीसकर उसमें एक चम्मच एलोवेरा जेल मिलाएं और तैयार मिश्रण को चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगाकर रखें। इसके बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। यह फेस पैक त्वचा को ताजगी देने के साथ अतिरिक्त तेल कम करने में भी मदद कर सकता है।

    घरेलू फेस पैक के साथ-साथ त्वचा की नियमित देखभाल भी बेहद जरूरी है। दिन में दो बार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करना, ऑयल-फ्री मॉइस्चराइजर का उपयोग करना और मौसम चाहे कोई भी हो, सनस्क्रीन लगाना त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और संतुलित आहार लेना भी त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे का असर भी अलग-अलग हो सकता है। पहली बार किसी फेस पैक का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। यदि त्वचा पर लालपन, जलन, खुजली या एलर्जी जैसी समस्या दिखाई दे तो उसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। लगातार मुंहासे, संक्रमण या अन्य गंभीर त्वचा संबंधी समस्याओं की स्थिति में त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

  • यूपी में बारिश का कहर, सड़कों पर दिखे मगरमच्छ; घरों में घुसा पानी, 66 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    यूपी में बारिश का कहर, सड़कों पर दिखे मगरमच्छ; घरों में घुसा पानी, 66 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मंगलवार सुबह से लखनऊ, कानपुर, बाराबंकी, प्रयागराज, वाराणसी समेत करीब 20 शहरों में रुक-रुककर तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश की संभावना जताई है, जबकि 66 जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

    सबसे चिंताजनक स्थिति लखीमपुर खीरी में देखने को मिली, जहां शारदा नदी का पानी गांवों में घुस गया। बाढ़ के साथ मगरमच्छ भी आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच गए। खेतों, सड़कों और गांवों में मगरमच्छों के दिखाई देने से लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है और प्रशासन प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    प्रयागराज में बीते 24 घंटों के दौरान हुई मूसलाधार बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी। कई सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और अंडरपास में करीब दो फीट तक पानी भर जाने से यातायात रोकना पड़ा। जलभराव के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लगा और लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। वहीं कौशांबी में घरों के भीतर पानी भर जाने से सोफा, कुर्सियां और अन्य घरेलू सामान पानी में तैरते नजर आए। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।

    वाराणसी और प्रयागराज में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की कई सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। काशी में करीब 50 छोटे मंदिरों तक नदी का पानी पहुंच गया है। उन्नाव और फिरोजाबाद के सरकारी अस्पतालों में भी घुटनों तक पानी भर गया, जिससे मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शामली में नहर टूटने से करीब 10 फीट सड़क धंस गई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।

    खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं। पीलीभीत और बहराइच में सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम और सक्रिय मानसूनी ट्रफ के कारण प्रदेश में 24 जुलाई तक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद भी कई इलाकों में अगले तीन से चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी।

    लगातार हो रही बारिश और आकाशीय बिजली की घटनाओं ने भी जनहानि बढ़ाई है। पिछले तीन दिनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। राहत एवं बचाव दल भी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

  • यूपी में मानसून का कहर सड़कों से लेकर मंदिरों तक पानी ही पानी सात की मौत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात

    यूपी में मानसून का कहर सड़कों से लेकर मंदिरों तक पानी ही पानी सात की मौत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में हालात बिगाड़ दिए हैं। राजधानी लखनऊ समेत कानपुर वाराणसी प्रयागराज अयोध्या गोरखपुर बरेली और प्रदेश के करीब 20 शहरों में सोमवार को दिनभर बारिश का दौर जारी रहा। लगातार बरसात के कारण कई स्थानों पर सड़कें धंस गईं अस्पतालों में पानी भर गया और धार्मिक स्थलों तक में जलभराव की स्थिति बन गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के 69 शहरों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    बारिश का सबसे अधिक असर फिरोजाबाद में देखने को मिला जहां सरकारी अस्पताल परिसर में पानी भर जाने से मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं पुलिसकर्मी घुटनों तक भरे पानी में जूते हाथ में लेकर ड्यूटी करते दिखाई दिए। शामली जिले में नहर टूटने से आसपास की सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया और नहर का पानी गांवों तथा खेतों में फैल गया जिससे किसानों की फसलें प्रभावित होने लगी हैं।

    लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण प्रदेश की प्रमुख नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। वाराणसी और प्रयागराज में गंगा का जलस्तर बढ़ने से कई घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। काशी में प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर सहित अनेक छोटे मंदिरों में भी पानी भर गया है। वहीं अयोध्या में सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जिससे नदी किनारे के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

    बलिया में सरयू नदी और लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के किनारे कटान शुरू हो गया है। प्रशासन को आशंका है कि यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो बड़ी संख्या में गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। संतकबीरनगर में लगातार बारिश के कारण करीब तीन सौ वर्ष पुराना बाबा बैजूनाथ मंदिर भी ढह गया जिससे क्षेत्र में धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों में चिंता का माहौल है।

    पिछले चौबीस घंटों के दौरान बारिश और आकाशीय बिजली से जुड़े हादसों में सात लोगों की जान चली गई। मुजफ्फरनगर में कच्चा मकान गिरने से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई जबकि बलिया और चंदौली में खेतों में काम कर रहे दो किसानों की बिजली गिरने से मृत्यु हो गई। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और खेतों में जाने से बचने की अपील की है।

    मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने मौसमीय तंत्र और सक्रिय मानसूनी रेखा के कारण प्रदेश में अगले पांच से छह दिनों तक भारी वर्षा का सिलसिला जारी रह सकता है। 22 जुलाई तक कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है जबकि उसके बाद भी कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।

    लगातार हो रही बारिश ने जहां एक ओर भीषण गर्मी से राहत दी है वहीं दूसरी ओर जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। अब सभी की नजर मौसम के अगले दौर पर है क्योंकि आने वाले कुछ दिन उत्तर प्रदेश के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • सतना में जुलाई में अब तक सामान्य से 3 इंच कम बारिश अब अगले 10 दिनों में झमाझम बरसात की उम्मीद

    सतना में जुलाई में अब तक सामान्य से 3 इंच कम बारिश अब अगले 10 दिनों में झमाझम बरसात की उम्मीद


    सतना । सतना जिले में मानसून इस बार अब तक अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। जुलाई का अधिकांश समय बीत जाने के बावजूद जिले में सामान्य से करीब तीन इंच कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि मौसम विभाग ने राहत भरी संभावना जताई है कि महीने के अंतिम दिनों में मानसून सक्रिय होगा और 31 जुलाई तक वर्षा का कोटा काफी हद तक पूरा हो सकता है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में जिले में हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर तेज बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है।

    रविवार को पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहे। बंगाल की खाड़ी से पहुंच रही नमी भरी हवाओं के कारण मौसम सुहावना बना रहा और अधिकतम तापमान में करीब चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान घटकर 31.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली। इसके बावजूद मौसम विभाग द्वारा जारी येलो अलर्ट के अनुरूप व्यापक बारिश नहीं हो सकी और जिले के अधिकांश हिस्सों में केवल हल्की बूंदाबांदी ही दर्ज हुई।

    मानसून सीजन की बात करें तो अब तक जिले में करीब 11 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि इस अवधि तक सामान्य रूप से लगभग 14 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। यानी फिलहाल जिले में करीब तीन इंच बारिश की कमी बनी हुई है। जून महीने में भी मानसून कमजोर रहा था। सामान्य तौर पर जून में 5.25 इंच बारिश होती है लेकिन इस वर्ष केवल लगभग 3 इंच वर्षा दर्ज की गई। जुलाई में अब तक करीब 8 इंच बारिश हुई है लेकिन यह भी सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।

    रविवार को न्यूनतम तापमान 25.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह के समय हवा में नमी 86 प्रतिशत और शाम तक 79 प्रतिशत रही। वातावरण में नमी अधिक होने के कारण बादल बने रहे लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं हो सकी। पिछले वर्ष की तुलना करें तो स्थिति अलग नजर आती है। पिछले साल इसी अवधि तक सतना जिले में लगभग 23 इंच बारिश हो चुकी थी जबकि इस वर्ष अब तक केवल 11 इंच के आसपास वर्षा दर्ज हुई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल सकता है। फिलहाल मानसून ट्रफ लाइन बंगाल की खाड़ी से रांची वाराणसी हरदोई रोहतक होते हुए गंगानगर तक सक्रिय बनी हुई है। इसके अलावा उत्तर पंजाब बंगाल की खाड़ी ओडिशा पश्चिम मध्य प्रदेश और हरियाणा के आसपास ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। इन सभी मौसमी सिस्टम के संयुक्त प्रभाव से रीवा संभाग सहित सतना जिले में अगले एक सप्ताह तक गरज चमक के साथ अच्छी बारिश होने के आसार हैं।

    मौसम विभाग का मानना है कि यदि अनुमान के अनुरूप बारिश होती है तो जुलाई के अंतिम सप्ताह तक जिले में वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। इससे किसानों को राहत मिलेगी और खरीफ फसलों की बढ़वार के लिए भी अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी। साथ ही जलाशयों और भूजल स्तर में भी सुधार की उम्मीद है।