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  • MP Weather: मप्र में 16 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम, फिलहाल 22 जिलों में आज हल्की बारिश के आसार

    MP Weather: मप्र में 16 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम, फिलहाल 22 जिलों में आज हल्की बारिश के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। प्रदेश के करीब 60 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल छंट चुके हैं, जिसके चलते अगले पांच दिनों तक कहीं भी भारी या अति भारी बारिश की संभावना नहीं है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 16 जुलाई से एक नया मौसम तंत्र सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश में फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने के संकेत हैं।

    फिलहाल प्रदेश में हल्की बारिश और बूंदाबांदी का सिलसिला जारी रहेगा। सोमवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार और अलीराजपुर जिलों में बादल छाने के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है।

    वहीं, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, आगर-मालवा, इंदौर, उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, देवास, विदिशा, भोपाल, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, दमोह, पन्ना, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया और ग्वालियर में मौसम सामान्य रहने के साथ धूप निकलने के आसार हैं।

    फिलहाल रिमझिम बारिश, भारी बरसात के संकेत नहीं
    मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर बनी हुई है। इसी वजह से पिछले चार-पांच दिनों से प्रदेश में कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। आने वाले कुछ दिनों तक केवल हल्की बारिश या रिमझिम फुहारें पड़ने की संभावना है, जबकि 16 जुलाई के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

    मानसून की रफ्तार क्यों हुई धीमी?
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून को सक्रिय बनाए रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ गई हैं या उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर हो गया है। इसी कारण अधिकांश इलाकों में केवल बादल छाए रहने और हल्की बारिश जैसी स्थिति बनी हुई है।

    बंगाल की खाड़ी से नए सिस्टम का इंतजार
    मौसम विभाग का अनुमान है कि 13 से 19 जुलाई के बीच उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) बनने की संभावना है। यदि यह आगे चलकर निम्न दाब क्षेत्र में परिवर्तित होता है तो मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। इसके अलावा प्रशांत महासागर में तीन नए मौसम तंत्र विकसित होने की संभावना जताई गई है। इनमें से यदि कोई एक बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है, तो मानसून दोबारा सक्रिय होकर प्रदेश में अच्छी बारिश करा सकता है।

    सामान्य से सिर्फ 1 प्रतिशत अधिक बारिश
    पिछले पांच दिनों से भारी बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश में वर्षा का अतिरिक्त आंकड़ा लगातार घटा है। पहले यह सामान्य से करीब 30 प्रतिशत अधिक था, जो अब घटकर सिर्फ 1 प्रतिशत रह गया है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य औसत 239.8 मिमी (9.4 इंच) है। यानी अब तक सामान्य से केवल 1 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है, जो पूरे मानसून कोटे का लगभग 25 प्रतिशत है।

  • 13 जुलाई को उत्तर भारत में गर्मी और उमस का डबल अटैक, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में तेज धूप के आसार, पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

    13 जुलाई को उत्तर भारत में गर्मी और उमस का डबल अटैक, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में तेज धूप के आसार, पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

    नई दिल्ली । 13 जुलाई को देश के मौसम में क्षेत्रवार बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने के कारण लोगों को तेज धूप, बढ़ते तापमान और उमस का सामना करना पड़ सकता है। वहीं पूर्वी भारत के कुछ राज्यों में मानसून सक्रिय रहने से भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का स्वरूप अलग-अलग रहेगा।

    दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के अधिकांश मैदानी क्षेत्रों में सोमवार को तेज धूप निकलने की संभावना है। हवा की गति कम रहने और वातावरण में नमी अधिक होने से उमस का असर काफी बढ़ सकता है। दोपहर के समय तापमान सामान्य से अधिक महसूस होगा और लोगों को लंबे समय तक खुले में रहने से बचने की सलाह दी गई है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, चंडीगढ़ और जयपुर जैसे शहरों में भी गर्म और उमस भरा मौसम बने रहने का अनुमान है।

    उत्तर प्रदेश में मौसम दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धूप और उमस का प्रभाव अधिक रहेगा, जबकि पूर्वी जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। लखनऊ और नोएडा में दिनभर गर्मी और उमस बनी रह सकती है, जबकि गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश से तापमान में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

    बिहार में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पटना, भागलपुर, पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ जलभराव जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। लोगों को आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने और मौसम से जुड़ी स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

    पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों, विशेषकर दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी में भारी वर्षा का अनुमान है। वहीं कोलकाता और दक्षिणी जिलों में हल्की बारिश के साथ उमस बनी रह सकती है। लगातार नमी के कारण लोगों को गर्मी का अधिक अहसास होगा, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और जलभराव जैसी स्थितियों पर भी प्रशासन नजर रख सकता है।

    मध्य प्रदेश में मौसम मिला-जुला रहने की संभावना है। भोपाल और इंदौर में दिन के समय उमस अधिक रह सकती है, जबकि शाम के समय कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी से राहत मिल सकती है। ग्वालियर में तेज धूप और बढ़ते तापमान का असर देखने को मिल सकता है, जबकि जबलपुर के आसपास हल्की वर्षा की संभावना बनी हुई है।

    उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी उमस का असर बना रह सकता है, हालांकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहेगा। देहरादून और हरिद्वार में हल्की बारिश के बावजूद उमस महसूस हो सकती है, जबकि शिमला, मनाली और मसूरी जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में ठंडी हवाओं और हल्के बादलों के कारण मौसम आरामदायक रहने का अनुमान है।

    कुल मिलाकर 13 जुलाई को देश में मौसम का प्रभाव क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग रहेगा। जहां उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में लोगों को तेज धूप और उमस का सामना करना पड़ सकता है, वहीं पूर्वी राज्यों में भारी बारिश जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मौसम के बदलते हालात को देखते हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार आवश्यक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

  • बारिश के मौसम में बढ़ जाता है पेट की बीमारियों का खतरा, इन आसान उपायों से रखें डाइजेशन बेहतर और शरीर फिट

    बारिश के मौसम में बढ़ जाता है पेट की बीमारियों का खतरा, इन आसान उपायों से रखें डाइजेशन बेहतर और शरीर फिट

    नई दिल्ली । मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ पाचन तंत्र से जुड़ी कई स्वास्थ्य चुनौतियां भी लेकर आता है। वातावरण में बढ़ी नमी के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनप सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग, गैस, अपच, दस्त, पेट दर्द और एसिडिटी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में खानपान और व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान देकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में हमेशा ताजा और गर्म भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखा हुआ या बासी भोजन बैक्टीरिया की वृद्धि का कारण बन सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बाहर मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थ, पहले से कटे फल और बिना ढके रखे भोजन से बचना बेहतर माना जाता है। घर पर ताजा तैयार किया गया भोजन पाचन तंत्र के लिए अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित होता है।

    मानसून में सुरक्षित पेयजल का सेवन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूषित पानी पेट संबंधी संक्रमण का प्रमुख कारण बन सकता है। इसलिए फिल्टर किया हुआ या अच्छी तरह उबाला गया पानी पीने की सलाह दी जाती है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और पाचन प्रक्रिया सामान्य रूप से काम करती है। यदि घर से बाहर जा रहे हों, तो अपने साथ साफ पानी की बोतल रखना एक अच्छी आदत हो सकती है।

    पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों को भी आहार में शामिल किया जा सकता है। दही और छाछ जैसे खाद्य पदार्थ आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं। इसके साथ ही खिचड़ी, दलिया, सूप, उबली सब्जियां और अन्य हल्के भोजन का सेवन पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालता और भोजन आसानी से पचने में मदद करता है।

    स्वच्छता का पालन मानसून में बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। भोजन करने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोना, फल और सब्जियों को अच्छी तरह साफ करना तथा रसोई और बर्तनों की नियमित सफाई बनाए रखना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है। छोटी-छोटी स्वच्छता संबंधी आदतें भी स्वास्थ्य की दृष्टि से बड़ा अंतर पैदा कर सकती हैं।

    बारिश के मौसम में तली-भुनी और अत्यधिक मसालेदार चीजें खाने की इच्छा बढ़ जाती है, लेकिन इनका अधिक सेवन पाचन संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है। अधिक तेल और मसाले वाला भोजन एसिडिटी, गैस और अपच जैसी परेशानियों का कारण बन सकता है। इसलिए संतुलित, पौष्टिक और हल्का भोजन चुनना अधिक लाभदायक माना जाता है।

    यदि लगातार पेट दर्द, दस्त, उल्टी, तेज बुखार या निर्जलीकरण जैसे लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकता है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मानसून के मौसम में पाचन तंत्र को बेहतर स्थिति में रखा जा सकता है और पूरे मौसम का आनंद स्वस्थ रहकर लिया जा सकता है।

  • पहली बारिश में बह गई करोड़ों के पुल की सुरक्षा दीवार निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच

    पहली बारिश में बह गई करोड़ों के पुल की सुरक्षा दीवार निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच


    देवास । देवास जिले के होशियारी और मकोडिया गांवों को जोड़ने वाला करोड़ों रुपए की लागत से बना स्टॉप डैम कम पुल पहली ही बारिश के बाद सवालों के घेरे में आ गया है। मानसून की शुरुआती बारिश में ही पुल के दोनों ओर बनाई गई प्रोटेक्शन वॉल बह गई जबकि उसके पीछे भरी गई मिट्टी भी कई स्थानों से कट गई। इस घटना ने निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुल पर आवागमन जारी है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में तेज बारिश या बाढ़ का दबाव बढ़ा तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

    मौके पर निरीक्षण के दौरान पुल के दोनों सिरों पर सुरक्षा दीवार के कई हिस्से क्षतिग्रस्त मिले। जहां मजबूत प्रोटेक्शन वॉल बनाई गई थी वहां अब केवल कंक्रीट के अवशेष और बह चुकी मिट्टी दिखाई दे रही है। पुल के एप्रोच मार्ग के पास भराव मिट्टी के बह जाने से कई स्थानों पर गड्ढेनुमा स्थिति बन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तक नदी में बड़ा उफान भी नहीं आया है। केवल सामान्य बारिश और शिप्रा नदी में छोड़े गए पानी के बहाव से ही यह नुकसान हुआ है। ऐसे में यदि मानसून के अगले दौर में जलस्तर बढ़ा तो पुल की नींव तक खतरा पहुंच सकता है।

    ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इरफान पटेल धीरज बना गोलू वर्मा टेपू शेख रंजन सिंह चौहान लाखन सिंह राठौर नवाब शेख और शेर मोहम्मद पटेल सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। उनका आरोप है कि सरियों और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता कमजोर रही जिसके कारण पहली ही बारिश में सुरक्षा दीवार टिक नहीं सकी। ग्रामीणों के अनुसार मार्च में भूमिपूजन के बाद जल्दबाजी में करीब 28 दिनों के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया था। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए की इस परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    मामला सामने आने के बाद हाटपीपल्या विधायक मनोज चौधरी ने पुल का निरीक्षण किया और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर निर्माण गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है और यदि जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जहां कमी पाई गई है उसे तत्काल दूर कराया जाएगा ताकि भविष्य में किसी तरह की दुर्घटना की आशंका न रहे।

    सिंचाई विभाग की एसडीओ नेहा दुबे ने बताया कि पुल की मुख्य संरचना पूरी तरह सुरक्षित है और नुकसान केवल प्रोटेक्शन वॉल तथा उसके पीछे की भराव मिट्टी तक सीमित है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अभी जारी है और ग्वालियर की कटारे कंस्ट्रक्शन कंपनी इस परियोजना का निर्माण कर रही है। एजेंसी का अंतिम भुगतान भी अभी नहीं किया गया है। विभाग के अनुसार क्षतिग्रस्त हिस्से की दोबारा मरम्मत कराई जाएगी तथा पूरी प्रोटेक्शन वॉल नए सिरे से बनाई जाएगी। बारिश का दौर थमने के बाद शेष निर्माण कार्य भी पूरा कराया जाएगा।

    फिलहाल इस पूरे मामले में ग्रामीणों और विभाग के दावों के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। एक ओर ग्रामीण निर्माण में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी ओर विभाग मुख्य पुल को सुरक्षित बताते हुए केवल सुरक्षा दीवार की मरम्मत की बात कह रहा है। अब सभी की नजर प्रस्तावित तकनीकी जांच और मानसून के अगले दौर पर टिकी है क्योंकि तेज बारिश ही यह तय करेगी कि पुल का निर्माण वास्तव में कितना मजबूत और सुरक्षित है।

  • Weather Update 11 July बारिश का डबल अलर्ट कई राज्यों में गरज चमक के साथ झमाझम बारिश की संभावना

    Weather Update 11 July बारिश का डबल अलर्ट कई राज्यों में गरज चमक के साथ झमाझम बारिश की संभावना


    मध्यप्रदेश । 11 जुलाई को देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत मध्य भारत पश्चिम भारत और दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहेगा। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ तेज बारिश और 40 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली एनसीआर उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मध्य प्रदेश राजस्थान बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल महाराष्ट्र गुजरात कर्नाटक तमिलनाडु और केरल समेत कई राज्यों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है। कुछ इलाकों में जलभराव बिजली गिरने और तेज हवाओं की आशंका भी जताई गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों में जलभराव और नदी नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी अच्छी बारिश होने की संभावना है जिससे किसानों को राहत मिल सकती है लेकिन अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सतर्क रहने की जरूरत होगी।

    दक्षिण भारत में कर्नाटक तमिलनाडु और केरल के कई इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। पश्चिमी तट के कोंकण और गोवा क्षेत्र में भी तेज बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने समुद्र में जाने वाले मछुआरों को स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सक्रिय मानसून प्रणाली के कारण अगले कुछ दिनों तक देश के बड़े हिस्से में बारिश का सिलसिला बना रह सकता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में 15 जुलाई के बाद वर्षा की तीव्रता में बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल लोगों को बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने सुरक्षित स्थान पर शरण लेने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की सलाह दी गई है।

  • देशभर में सक्रिय हुआ मानसून…. दिल्ली-यूपी समेत 18 राज्यों में आज भारी बारिश का अलर्ट!

    देशभर में सक्रिय हुआ मानसून…. दिल्ली-यूपी समेत 18 राज्यों में आज भारी बारिश का अलर्ट!


    नई दिल्ली।
    देशभर में मानसून (Monsoon) अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और कई राज्यों में इसका असर लगातार तेज होता जा रहा है. इसी बीच मौसम विभाग ने 10 जुलाई के लिए दिल्ली (Delhi), उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सहित 18 राज्यों में भारी बारिश (Heavy rain), तेज आंधी और खराब मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है. विभाग के अनुसार कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. ऐसे में लोगों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने और मौसम से जुड़ी आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

    मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले 48 घंटे के दौरान बारिश का दौर और तेज हो सकता है. दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना है. कई स्थानों पर जलभराव, यातायात प्रभावित होने और पेड़ गिरने जैसी घटनाएं भी सामने आ सकती हैं।


    पहाड़ी राज्यों में बढ़ सकता है खतरा

    हिमालयी राज्यों में लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन, चट्टानें गिरने और नदियों-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है. पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. प्रशासन भी संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए है.


    पूर्वी भारत में बिजली गिरने का खतरा

    पूर्वी भारत के कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है. मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है.


    देश के 18 राज्यों में बारिश और तेज आंधी का अलर्ट

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 10 जुलाई के लिए देश के 18 राज्यों में भारी बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की है. प्रभावित राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, महाराष्ट्र और केरल शामिल हैं. विभाग के अनुसार कई इलाकों में 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. वहीं, कुछ राज्यों में बड़े आकार के ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है।


    मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी

    समुद्र और नदी किनारे रहने वाले लोगों के साथ-साथ मछुआरों को भी सतर्क रहने को कहा गया है. विभाग ने खराब मौसम को देखते हुए समुद्र में नहीं जाने और नदी तटीय क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की सलाह जारी की है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. इसके साथ ही मानसून ट्रफ उत्तर-पश्चिम राजस्थान से उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है. यही प्रणाली कई राज्यों में लगातार बारिश और तेज हवाओं की वजह बन रही है।


    किन राज्यों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर?

    मौसम विभाग के अनुसार 10 जुलाई को दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत कुल 18 राज्यों में कहीं भारी तो कहीं बहुत भारी बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक का दौर देखने को मिल सकता है. कई जिलों के लिए अलग-अलग स्तर के अलर्ट भी जारी किए गए हैं. आगे हम राज्यवार और जिला स्तर पर जानेंगे कि 10 जुलाई को कहां सबसे ज्यादा बारिश की संभावना है, किन जिलों में तेज आंधी चल सकती है और किन इलाकों में लोगों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत होगी।

  • बारिश से बेहाल मध्यप्रदेश अंडरब्रिज डूबे नदियां उफान पर कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी

    बारिश से बेहाल मध्यप्रदेश अंडरब्रिज डूबे नदियां उफान पर कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी


    मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश में मानसून अब पूरे शबाब पर है और लगातार हो रही बारिश ने प्रदेश के कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बीते चौबीस घंटे के दौरान 40 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। धार में सबसे अधिक करीब 2.4 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई जबकि राजगढ़ रतलाम शिवपुरी टीकमगढ़ खरगोन भोपाल और उज्जैन सहित कई जिलों में झमाझम बारिश हुई। लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर नदी नाले उफान पर आ गए हैं और लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।

    शाजापुर जिले में हालात ऐसे बन गए कि शिक्षकों को जान जोखिम में डालकर उफनता नाला पार कर स्कूल पहुंचना पड़ा। वहीं रतलाम में सागोद रोड से ईश्वर नगर जाने वाले अंडरब्रिज में पानी भर जाने से आवागमन प्रभावित हो गया। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं और लोगों को लंबा रास्ता तय कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।

    प्रदेश के कई हिस्सों में बुधवार सुबह से रिमझिम और तेज बारिश का दौर जारी है। कहीं पिछले 16 घंटे से लगातार मध्यम और तेज बारिश हो रही है तो कहीं सुबह से आसमान में बादल छाए रहने के साथ लगातार फुहारें पड़ रही हैं। इस बारिश से जहां उमस और गर्मी से राहत मिली है वहीं निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में नदी नालों के उफान ने लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं।

    भोपाल के जलस्रोतों पर भी बारिश का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। कुलांस नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जिससे राजधानी के बड़े तालाब में पानी की आवक तेज हो गई है। दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में लगातार बारिश के कारण कई छोटे बड़े नाले उफान पर हैं। कई गांवों का संपर्क अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ है और प्रशासन लोगों से अनावश्यक रूप से नदी नाले पार नहीं करने की अपील कर रहा है।

    मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए प्रदेश में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार कई स्थानों पर चौबीस घंटे के दौरान चार से आठ इंच तक बारिश हो सकती है। श्योपुर शिवपुरी गुना अशोकनगर सागर और टीकमगढ़ जिलों के लिए अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है जहां लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

    इसके अलावा ग्वालियर मुरैना भिंड दतिया निवाड़ी छतरपुर दमोह कटनी जबलपुर नरसिंहपुर रायसेन नर्मदापुरम विदिशा सीहोर राजगढ़ आगर मालवा उज्जैन इंदौर धार झाबुआ नीमच और मंदसौर में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल देवास हरदा बैतूल खरगोन बड़वानी खंडवा बुरहानपुर छिंदवाड़ा सिवनी मंडला बालाघाट पन्ना सतना रीवा सीधी शहडोल और सिंगरौली सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
    इसके अलावा ग्वालियर मुरैना भिंड दतिया निवाड़ी छतरपुर दमोह कटनी जबलपुर नरसिंहपुर रायसेन नर्मदापुरम विदिशा सीहोर राजगढ़ आगर मालवा उज्जैन इंदौर धार झाबुआ नीमच और मंदसौर में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल देवास हरदा बैतूल खरगोन बड़वानी खंडवा बुरहानपुर छिंदवाड़ा सिवनी मंडला बालाघाट पन्ना सतना रीवा सीधी शहडोल और सिंगरौली सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

    मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान नदी नालों से दूर रहें जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करें। लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए आने वाले दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • उत्तराखंड में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, 32 सड़कें बंद, नदियां उफान पर

    उत्तराखंड में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, 32 सड़कें बंद, नदियां उफान पर


    नई दिल्ली। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में भूस्खलन की घटनाओं के कारण पहाड़ों से चट्टानें और मलबा सड़क पर आ गया है, जिससे आवागमन बाधित हो गया है। वहीं, लगातार बारिश से अलकनंदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और वे उफान पर बह रही हैं।

    राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, भूस्खलन और मलबा आने की वजह से प्रदेश में फिलहाल 32 सड़कें बंद हैं। प्रशासन ने बताया कि प्रभावित मार्गों से चट्टानें और मलबा हटाने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सके। इसके लिए संबंधित विभागों की टीमें लगातार मौके पर जुटी हुई हैं।

    मंगलवार को राज्य के कई इलाकों में भारी वर्षा दर्ज की गई। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के मुताबिक सबसे अधिक 107 मिमी बारिश पंतनगर में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा चोरगलिया में 79.5 मिमी, रुद्रपुर में 43.5 मिमी, यमकेश्वर में 38 मिमी और किच्छा में 32.5 मिमी वर्षा हुई। खानपुर में 27 मिमी, जबकि देहरादून और लक्सर में 19-19 मिमी बारिश दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में हाथीबड़कला में 15 मिमी, पिथौरागढ़ में 8.9 मिमी और लोहाघाट में 8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।

    मौसम विज्ञान केंद्र ने बुधवार को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। साथ ही देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के कुछ इलाकों में भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है।

  • मुंबई-दक्षिण गुजरात में बारिश बनी रेल संकट की वजह, पश्चिम रेलवे की 40 से अधिक ट्रेनें प्रभावित; हजारों यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी

    मुंबई-दक्षिण गुजरात में बारिश बनी रेल संकट की वजह, पश्चिम रेलवे की 40 से अधिक ट्रेनें प्रभावित; हजारों यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी

    नई दिल्ली। मुंबई और दक्षिण गुजरात में मानसून की तेज बारिश ने सोमवार को पश्चिम रेलवे के रेल परिचालन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया। कई स्थानों पर रेल पटरियों पर जलभराव होने से लंबी दूरी की ट्रेनों की आवाजाही बाधित हो गई। इसके चलते 40 से अधिक ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और हजारों यात्रियों को देरी, रद्दीकरण तथा मार्ग परिवर्तन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने राहत एवं सहायता कार्य तेज करते हुए प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों के लिए भोजन, पेयजल और सहायता केंद्रों की व्यवस्था की है।

    सबसे अधिक असर वसई रोड-विरार तथा सफाले-पालघर रेलखंड पर देखने को मिला, जहां भारी जलभराव के कारण ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई। दोपहर तक विरार, वाणगांव, पालघर, दहानू रोड और वलसाड सहित कई स्टेशनों पर लंबी दूरी की अनेक ट्रेनों को रोकना पड़ा। जलभराव के कारण कई रेलगाड़ियों की गति धीमी करनी पड़ी, जबकि कुछ ट्रेनों को सुरक्षा कारणों से निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दिनभर में 40 से अधिक ट्रेन सेवाएं किसी न किसी रूप में प्रभावित रहीं। इनमें कई ट्रेनों का समय बदला गया, कुछ को रद्द करना पड़ा और कई रेलगाड़ियों को उनके निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही समाप्त कर दिया गया। इससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने-जाने वाले यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

    महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण रही, जहां सुबह कुछ ही घंटों के भीतर अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण रेल पटरियां जलमग्न हो गईं, जिससे परिचालन सामान्य बनाए रखना मुश्किल हो गया। इसके प्रभाव से कई प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनें रास्ते में फंस गईं। वहीं, गुजरात की ओर से आने वाली कुछ ट्रेनों को एहतियातन वापी और सूरत जैसे स्टेशनों पर रोक दिया गया ताकि प्रभावित रेलखंड पर अतिरिक्त दबाव न बढ़े।

    यात्रियों की सुविधा के लिए पश्चिम रेलवे ने राहत व्यवस्था भी शुरू की। विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से फंसे यात्रियों को भोजन और पेयजल उपलब्ध कराया गया। प्रमुख स्टेशनों पर सहायता केंद्र स्थापित किए गए, जहां यात्रियों को ट्रेन संचालन से जुड़ी जानकारी और आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    भारी बारिश का असर केवल लंबी दूरी की ट्रेनों तक सीमित नहीं रहा। मुंबई की उपनगरीय लोकल रेल सेवाएं भी प्रभावित हुईं। बोरीवली और चर्चगेट के बीच लोकल ट्रेनें निर्धारित समय से देरी से चलीं, जबकि विरार-दहानू खंड पर परिचालन सबसे अधिक प्रभावित रहा। इससे दैनिक यात्रियों को भी कार्यालय और अन्य गंतव्यों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। अधिकारियों का कहना है कि मौसम की परिस्थितियों के अनुसार परिचालन में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं और जैसे ही जलभराव की स्थिति सामान्य होगी, ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बहाल करने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल प्रभावित रेलखंडों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यक तकनीकी एवं राहत दल मौके पर तैनात हैं।

  • MP में जुलाई में मानसून मेहरबान, आज 23 जिलों में आज भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट

    MP में जुलाई में मानसून मेहरबान, आज 23 जिलों में आज भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून पूरी रफ्तार में है। जुलाई की शुरुआत से ही प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है। अब तक राज्य में औसतन 163.1 मिमी (6.4 इंच) वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है। रविवार को 20 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश हुई, जबकि सोमवार के लिए मौसम विभाग ने 23 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

    मौसम केंद्र, भोपाल के अनुसार सोमवार को सागर, दमोह, बैतूल, देवास, आलीराजपुर, उमरिया, सिवनी, छिंदवाड़ा और अनूपपुर जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं रतलाम, उज्जैन, धार, शाजापुर, सीहोर, विदिशा, गुना, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी और पन्ना में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    इसके अलावा ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, झाबुआ, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, आगर-मालवा, राजगढ़ और भोपाल में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    रविवार को भी कई जिलों में जमकर बरसे बादल
    रविवार को प्रदेश के 25 से ज्यादा जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सीहोर में दिन के समय घने बादलों के कारण अंधेरा छा गया, जबकि मंदसौर में इस मानसून सीजन में अब तक 6.04 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। शाजापुर में सर्वाधिक 28 मिमी वर्षा हुई, जिससे कालीसिंध नदी उफान पर पहुंच गई।

    मौसम विभाग के मुताबिक, छिंदवाड़ा में ढाई इंच से अधिक बारिश हुई। सिवनी, उज्जैन और श्योपुर में करीब पौन इंच, जबकि टीकमगढ़ और ग्वालियर में लगभग आधा इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा दतिया, गुना, इंदौर, राजगढ़, जबलपुर, मंडला, नरसिंहपुर, रीवा, सागर, सीधी, बालाघाट, शाजापुर, भिंड, विदिशा, सीहोर, मंदसौर और पांढुर्णा में भी बारिश और आंधी का असर देखने को मिला।

    तापमान में आई गिरावट
    लगातार हो रही बारिश के चलते प्रदेशभर में तापमान में भी कमी दर्ज की गई। इंदौर का अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री सेल्सियस, भोपाल 32.2 डिग्री, उज्जैन 32.7 डिग्री, जबलपुर 34 डिग्री और ग्वालियर 37.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। खजुराहो सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबकि बैतूल में सबसे कम 27 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    सामान्य से 6 प्रतिशत कम बारिश
    इस वर्ष जून महीने से ही प्रदेश में आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। 5 जुलाई तक मध्य प्रदेश में कुल 163.1 मिमी यानी 6.4 इंच वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि यह सामान्य औसत 172.8 मिमी (6.8 इंच) की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत कम है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 29 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 17 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।