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  • तपिश से मिली बड़ी राहत, दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं संग हुई बारिश; मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए जारी किया अलर्ट

    तपिश से मिली बड़ी राहत, दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं संग हुई बारिश; मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए जारी किया अलर्ट

    नई दिल्ली । कई दिनों से भीषण गर्मी और उमस का सामना कर रहे दिल्ली-एनसीआर के लोगों को सोमवार शाम मौसम ने बड़ी राहत दी। अचानक तेज हवाएं चलने के बाद राजधानी और आसपास के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई और वातावरण सुहावना हो गया। लंबे समय से गर्मी से परेशान लोगों ने राहत महसूस की और शाम के समय मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आया।

    दिनभर तेज धूप और उमस के बाद शाम होते-होते आसमान में बादल छा गए। इसके बाद तेज हवा चलने लगी और कई स्थानों पर बारिश शुरू हो गई। मौसम में आए इस बदलाव से गर्मी का असर काफी कम हो गया। बारिश के चलते सड़कों पर लोगों की आवाजाही भी बढ़ी और कई इलाकों में लोगों ने खुले मौसम का आनंद लिया। हालांकि कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के कारण यातायात की रफ्तार भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुई।

    मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को भी राजधानी में राहत का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पूरे दिन आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। दोपहर या रात के समय हल्की बारिश के साथ गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जबकि हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

    मंगलवार को अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सुबह पश्चिमी दिशा से हवाएं लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलेंगी, जो दोपहर के समय बढ़ सकती हैं। शाम और रात के दौरान हवा की रफ्तार कुछ कम होने का अनुमान है, लेकिन मौसम में नमी बनी रहेगी।

    बुधवार, 1 जुलाई को भी मौसम का मिजाज लगभग इसी तरह रहने की संभावना जताई गई है। दिनभर बादल छाए रहने के साथ कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक हो सकती है। तेज हवाओं का दौर भी जारी रह सकता है और हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं, जिससे मौसम और अधिक सुहावना बना रहेगा।

    एक जुलाई को अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। सुबह उत्तर-पश्चिम दिशा से हवाएं चलेंगी, जबकि दोपहर और शाम के दौरान पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बना रहेगा। मौसम विभाग का मानना है कि बादलों की आवाजाही और हल्की वर्षा के कारण तापमान सामान्य के आसपास बना रह सकता है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और तेज हवाओं की वजह से लोगों को फिलहाल भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि गरज-चमक और तेज हवा के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों तथा कमजोर ढांचों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियां और सक्रिय होने की संभावना है, जिससे राजधानी और एनसीआर के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे न केवल तापमान नियंत्रित रहेगा बल्कि लंबे समय से पड़ रही गर्मी और उमस से भी लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

  • मॉनसून की जोरदार बारिश से पानी-पानी हुई मुम्बई….. सड़कें बनी तालाब, ट्रैफिक हुआ ठप

    मॉनसून की जोरदार बारिश से पानी-पानी हुई मुम्बई….. सड़कें बनी तालाब, ट्रैफिक हुआ ठप


    मुंबई।
    मुंबई (Mumbai) में मॉनसून (Monsoon) की जोरदार बारिश (Heavy Rain) ने शहर के कई इलाकों को पानी-पानी कर दिया है. सड़कें तालाब बन गई हैं, ट्रैफिक ठप हो गया है. लोगों को घरों से निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अंधेरी सबवे (अंडरपास) में इतना पानी भर गया है कि उसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।

    रातभर की बारिश से अंधेरी, बांद्रा, खार, मालाड, गोरेगांव, जुहू, वर्सोवा जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखा गया है. वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर भी पानी भरने से गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के मुताबिक, अंधेरी सबवे में पानी भर गया है, जिसके बाद उसे बंद करना पड़ा।

    बता दें कि अंधेरी सबवे मुंबई का एक ऐसा रास्ता है जो पूर्व और पश्चिम को जोड़ता है. हर रोज हजारों गाड़ियां और लोग यहां से गुजरते हैं. मॉनसून की बारिश में अंधेरी सबवे में जलजमाव होना पुरानी समस्या है।

    शहर के निचले इलाकों में कई जगहों पर भारी जलभराव की तस्वीरें सामने आ रही हैं. जलजमाव को देखते हुए एहतियातन अंधेरी सबवे को देर रात 1:45 बजे से यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है. किसी भी अप्रिय घटना या हादसे को रोकने के लिए सबवे के बाहर पुलिस बंदोबस्त किया गया है।

    एक तरफ जोरदार बारिश से मुंबईवासियों को उमस और गर्मी से तो बड़ी राहत मिली है, तो वहीं सुबह-सुबह दफ्तर और काम पर जाने वालों को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है.

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और आसपास के इलाकों के लिए आज भी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है. बता दें कि मॉनसून इस बार 13 दिन देरी से मुंबई पहुंचा था।

  • देश में अब तक 43% कम बारिश… मानसून कमजोर रहने की संभावना, सूखे की आहट ने बढ़ाई टेंशन

    देश में अब तक 43% कम बारिश… मानसून कमजोर रहने की संभावना, सूखे की आहट ने बढ़ाई टेंशन


    नई दिल्ली।
    देश में मानसून (Monsoon) की रफ्तार धीमी पड़ने से 27 जून तक सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. मौसम वैज्ञानिकों (Meteorologists) का कहना है कि इस बार अल नीनो के साथ इंडियन ओशन डाइपोल (Indian Ocean Dipole- IOD) भी न्यूट्रल स्थिति में है, जिससे मानसून को अतिरिक्त मजबूती मिलने की संभावना कम हो गई है. कई राज्यों में 50 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई में भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है. हालांकि IMD को उम्मीद है कि अगले महीने मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने पर कुछ सुधार संभव है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों का मानना है कि अभी सूखे की आधिकारिक घोषणा जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन यदि जुलाई में भी बारिश सामान्य से काफी कम रही तो कई राज्यों में हालात गंभीर हो सकते हैं. अल नीनो की सक्रियता पहले से ही मानसून को कमजोर कर रही है और न्यूट्रल IOD के कारण उसे अतिरिक्त ताकत नहीं मिल रही. यही वजह है कि वैज्ञानिक पूरे मानसून सीजन पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. आने वाले कुछ सप्ताह खेती और जल संसाधनों दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार भारत के मानसून को प्रभावित करने वाले दो बड़े कारक अल नीनो और इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) हैं. अल नीनो सक्रिय (El Nino Affect) होने पर सामान्य तौर पर मानसून कमजोर पड़ जाता है. यदि उसी समय पॉजिटिव IOD मौजूद हो तो वह बारिश की कमी की भरपाई करने में मदद करता है. लेकिन इस बार हिंद महासागर में न्यूट्रल IOD की स्थिति बनी हुई है. इसका मतलब है कि यह मानसून को न तो मजबूत करेगा और न ही कमजोर, जिससे अल नीनो का असर ज्यादा प्रभावी दिखाई दे सकता है।

    1 जून से 27 जून के बीच देशभर में 43 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है. कई राज्यों में हालात और ज्यादा खराब हैं. मेघालय में 82 प्रतिशत, गुजरात में 79 प्रतिशत, मणिपुर में 71 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 68 प्रतिशत, झारखंड में 66 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 59 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत, ओडिशा में 52 प्रतिशत और बिहार में 50 प्रतिशत तक बारिश की कमी रिकॉर्ड की गई है. मध्य प्रदेश में भी 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो खेती के लिहाज से चिंताजनक मानी जा रही है।

    देश के चार प्रमुख मौसम क्षेत्रों में भी बारिश सामान्य से काफी कम रही है. मध्य भारत में सबसे अधिक 57 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है. इसके बाद पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में 44 प्रतिशत, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 30 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 27 प्रतिशत कम बारिश हुई है. कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में मानसून पहुंचने के बावजूद अपेक्षित बारिश नहीं हुई है।

    दिल्ली में भी उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. शनिवार को अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस रहा, लेकिन अधिक आर्द्रता के कारण ‘फील्स लाइक’ तापमान 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. मौसम विभाग के अनुसार हवा में नमी बढ़ने से गर्मी और ज्यादा महसूस हो रही है. यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्तर भारत में उमस और गर्मी का असर कुछ दिन और बना रह सकता है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अभी मानसून का पूरा सीजन बाकी है और जुलाई में पूरे देश में मानसून के फैलने के बाद बारिश के आंकड़ों में सुधार की संभावना है. हालांकि अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए विभाग ने पहले ही सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जुलाई और अगस्त की बारिश ही तय करेगी कि यह मानसून सामान्य रहेगा या फिर देश को सूखे जैसी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

    फिलहाल वैज्ञानिक लगातार मौसम के वैश्विक संकेतकों पर नजर रख रहे हैं. यदि अल नीनो लंबे समय तक प्रभावी रहा और IOD न्यूट्रल ही बना रहा तो कई राज्यों में खरीफ फसलों, जलाशयों और पेयजल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि अंतिम तस्वीर पूरे मानसून सीजन के समाप्त होने के बाद ही साफ होगी. फिलहाल किसानों और आम लोगों दोनों की नजर अब जुलाई की बारिश पर टिकी हुई है।

  • एमपी में मानसून की रफ्तार थमी, एंट्री के बाद ठहरा, 43 जिलों में आज बारिश की चेतावनी

    एमपी में मानसून की रफ्तार थमी, एंट्री के बाद ठहरा, 43 जिलों में आज बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में 24 जून को दक्षिण-पूर्वी हिस्से के 15 जिलों में दस्तक देने के बाद मानसून की रफ्तार फिलहाल थम गई है। पिछले तीन दिनों से मानसून आगे नहीं बढ़ा है और मौसम विभाग के अनुसार इसके अगले 2 से 3 दिन तक भी इसी स्थिति में रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि अनुकूल परिस्थितियां बनने पर मानसून सबसे पहले भोपाल और उज्जैन संभाग में आगे बढ़ेगा, जबकि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में इसकी एंट्री सबसे आखिर में होगी।

    24 जून को मानसून के प्रदेश में प्रवेश के साथ आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में इसके पहुंचने की घोषणा की गई थी। इसके बाद से मानसून की प्रगति रुकी हुई है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिनों में प्रदेश के अन्य हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना जताई है।

    आज 43 जिलों में बारिश के आसार
    शनिवार को भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह और छतरपुर में बारिश का पूर्वानुमान है। वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी और टीकमगढ़ जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    शुक्रवार को कई जिलों में झमाझम बारिश
    शुक्रवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला। सिवनी में करीब 2 इंच बारिश दर्ज की गई। शाजापुर जिले के शुजालपुर, अकोदिया और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई, जबकि उज्जैन में डेढ़ इंच से अधिक पानी बरसा। इसके अलावा दतिया, इंदौर, राजगढ़, शिवपुरी, मंडला, रीवा, सागर, बालाघाट, खंडवा, शाजापुर, आगर-मालवा और मंदसौर समेत कई जिलों में भी आंधी और बारिश का असर रहा।

    तापमान में आई गिरावट
    बारिश और तेज हवाओं के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। खरगोन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके अलावा खंडवा में 30.1, सागर में 31.1, छिंदवाड़ा में 31.8, बैतूल में 32.7, सिवनी और उमरिया में 33.2, धार में 33.4 तथा नर्मदापुरम में 33.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में भोपाल और इंदौर का अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री, उज्जैन में 33.5 डिग्री, जबलपुर में 36.7 डिग्री और ग्वालियर में 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    बारिश के आंकड़ों में सुधार
    पिछले 72 घंटे से प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार बारिश होने से वर्षा के आंकड़ों में सुधार दर्ज किया गया है। कई स्थानों पर 4 इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 99 मिमी (करीब 4 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, जबकि अब तक 58.5 मिमी (करीब 2.1 इंच) वर्षा हुई है। यह सामान्य से 41 प्रतिशत कम है। 24 जून तक यह कमी 50 प्रतिशत थी, यानी हालिया बारिश से करीब 9 प्रतिशत का सुधार हुआ है। फिलहाल प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 68 प्रतिशत कम और पश्चिमी हिस्से में 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

  • मध्य प्रदेश में मानसून ने दी दस्तक, आज 46 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    मध्य प्रदेश में मानसून ने दी दस्तक, आज 46 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    भोपाल। मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र के 15 जिलों में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो चुकी है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 2 से 3 दिनों में मानसून प्रदेश के शेष हिस्सों को भी कवर कर लेगा। हालांकि ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे आखिर में पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं सीधी जिले में लू चलने की आशंका है। इसके अलावा नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, रीवा और सिंगरौली में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।

    विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, सतना, सीधी, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी के साथ बारिश होने का अनुमान है।

    इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून

    आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में मानसून के आगमन की घोषणा की जा चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों के भीतर मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय हो जाएगा।

    इस बार सामान्य से कम बारिश के संकेत

    मौसम केंद्र (आईएमडी) के पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। प्रदेश में औसत 37.3 इंच बारिश के मुकाबले 30 से 32 इंच तक वर्षा दर्ज होने का अनुमान लगाया गया है।

    मानसून की देरी से बारिश में 50 प्रतिशत की कमी

    मानसून के विलंब से पहुंचने के कारण 24 जून तक प्रदेश में सूखे जैसे हालात बने रहे। एक जून से अब तक जहां औसतन 84.8 मिमी (3.6 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, वहीं केवल 42 मिमी (1.6 इंच) वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर समेत प्रदेश के 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

  • मानसून की सुस्ती से बढ़ी कृषि क्षेत्र की चिंता, कपास-सोयाबीन की बुआई घटी, टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ सकता है असर

    मानसून की सुस्ती से बढ़ी कृषि क्षेत्र की चिंता, कपास-सोयाबीन की बुआई घटी, टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ सकता है असर

    नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की धीमी रफ्तार ने देश में खरीफ सीजन की तैयारियों पर असर डालना शुरू कर दिया है। अब तक सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश दर्ज होने के कारण कपास और सोयाबीन जैसी प्रमुख नकदी फसलों की बुआई अपेक्षा से काफी पीछे चल रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो इसका असर कृषि उत्पादन के साथ-साथ उद्योगों पर भी दिखाई दे सकता है।

    कृषि मंत्रालय के 19 जून तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में कपास की बुआई 17.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 22.82 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार करीब 5.69 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में कपास बोई गई है। कपास के रकबे में आई यह गिरावट संकेत दे रही है कि किसान फिलहाल इस फसल की ओर कम रुझान दिखा रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि अगले कुछ सप्ताह में कपास की बुआई में तेजी नहीं आई तो कच्चे कपास और यार्न की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे वस्त्र उद्योग की लागत बढ़ने की आशंका है।

    सोयाबीन की सुस्ती से तिलहन क्षेत्र भी प्रभावित

    कपास के साथ-साथ तिलहन फसलों की बुआई भी दबाव में है। इसकी प्रमुख वजह सोयाबीन की धीमी बुआई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में सोयाबीन का रकबा 2.50 लाख हेक्टेयर था, जो इस बार घटकर 1.30 लाख हेक्टेयर रह गया है। यानी करीब 1.20 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है।

    सोयाबीन के कमजोर प्रदर्शन का असर कुल तिलहन क्षेत्र पर भी पड़ा है। पिछले साल जहां तिलहन फसलों का रकबा 8.11 लाख हेक्टेयर था, वहीं इस बार यह घटकर 7.24 लाख हेक्टेयर रह गया है। हालांकि मूंगफली और सूरजमुखी की खेती में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन वह सोयाबीन की कमी की भरपाई नहीं कर पा रही है।

    धान और बाजरा किसानों की पहली पसंद बने

    इसके विपरीत धान और मोटे अनाजों की बुआई में वृद्धि दर्ज की गई है। धान का रकबा 4.26 लाख हेक्टेयर बढ़कर 12.36 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। वहीं बाजरा सहित मोटे अनाजों का क्षेत्रफल 2.14 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.05 लाख हेक्टेयर हो गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धान और मोटे अनाजों में सरकारी खरीद की मजबूत व्यवस्था और अपेक्षाकृत कम जोखिम किसानों को आकर्षित कर रहे हैं। दूसरी ओर कपास और सोयाबीन में वैश्विक बाजार की अनिश्चितता तथा कीट प्रकोप का खतरा किसानों को सतर्क बना रहा है।

    जल प्रबंधन व्यवस्था पर मूडीज की चिंता

    इस बीच, मूडीज रेटिंग्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत की जल प्रबंधन व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। एजेंसी का कहना है कि पानी के आवंटन, मूल्य निर्धारण और वितरण से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाएं देश के लिए वित्तीय और क्रेडिट जोखिम पैदा कर रही हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार यदि जल प्रबंधन ढांचे में समय रहते सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में राज्यों की वित्तीय स्थिति और उनकी क्रेडिट रेटिंग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    खेती में खप रहा 80 फीसदी ताजा पानी

    मूडीज के मुताबिक भारत में पानी की कीमतें विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लिए अत्यधिक रियायती हैं। देश के कुल ताजे जल संसाधनों का लगभग 80 फीसदी हिस्सा खेती में उपयोग हो रहा है। सब्सिडी आधारित व्यवस्था के कारण पानी का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिससे भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।

    एआई और डाटा सेंटर भी बढ़ा रहे दबाव

    रिपोर्ट में एक नए उभरते खतरे की ओर भी संकेत किया गया है। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और क्लाउड कंप्यूटिंग के विस्तार के साथ बड़े पैमाने पर डाटा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है।

    मूडीज का मानना है कि डाटा सेंटरों की बढ़ती जल मांग पहले से दबाव झेल रही जल आपूर्ति व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन सकती है। आने वाले वर्षों में सरकारों और यूटिलिटी कंपनियों को इस अतिरिक्त दबाव से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति बनानी होगी।

  • एमपी में मानसून की रफ्तार सुस्त, 48 जिले बारिश में पिछड़े, आज 30 जिलों में वर्षा और 4 जिलों में लू का अलर्ट

    एमपी में मानसून की रफ्तार सुस्त, 48 जिले बारिश में पिछड़े, आज 30 जिलों में वर्षा और 4 जिलों में लू का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की देरी का असर साफ दिखाई दे रहा है। जून के अधिकांश दिन सूखे गुजरने से प्रदेश में अब तक सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 70.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि केवल 34.3 मिमी वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर सहित 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है।

    मानसून में देरी बनी कम बारिश की बड़ी वजह

    प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार तय समय से 8 दिन बाद भी मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिनों में मानसून के आगमन की संभावना जताई है। आमतौर पर मानसून के जल्द सक्रिय होने पर तेज बारिश का दौर शुरू हो जाता है, जिससे वर्षा के आंकड़ों में तेजी आती है।

    हालांकि पूरे जून माह में प्री-मानसूनी गतिविधियां जारी हैं, फिर भी पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में औसत से 71 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में औसत से 33 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    इन जिलों में बारिश सामान्य से कम

    अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

    इन जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा

    भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर ऐसे जिले रहे जहां औसत से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

    प्री-मानसून सक्रिय, कई जिलों में बरसे बादल

    सोमवार को प्रदेश में प्री-मानसूनी गतिविधियां तेज रहीं। धार में करीब 2 इंच और भोपाल में लगभग पौन इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा इंदौर, खंडवा, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना, सिवनी, बड़वानी, शाजापुर और सीहोर समेत कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला।

    पचमढ़ी रहा सबसे ठंडा, दतिया सबसे गर्म

    सोमवार को पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धार में 32.9, सिवनी में 34.2, रायसेन में 35.4 और शाजापुर में 35.7 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। वहीं दतिया सबसे गर्म रहा, जहां पारा 42.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सीधी, खजुराहो, टीकमगढ़-नौगांव और नरसिंहपुर में भी तापमान 40 डिग्री या उससे अधिक रहा। प्रदेश के प्रमुख शहरों में इंदौर का तापमान 34.7 डिग्री, उज्जैन 35 डिग्री, भोपाल 35.2 डिग्री, जबलपुर 36 डिग्री और ग्वालियर 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    आज का मौसम: 4 जिलों में लू, 30 जिलों में बारिश की संभावना

    मौसम विभाग ने मंगलवार को जबलपुर, मंडला, दमोह और उमरिया जिलों में हीटवेव (लू) का अलर्ट जारी किया है। वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, भोपाल, सीहोर, हरदा, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, इंदौर, धार, बड़वानी, आलीराजपुर और झाबुआ में तेज आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है।

    इसके अलावा नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, कटनी, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गर्मी का असर बना रह सकता है।

  • एमपी में चार दिन तक लू और उमस का कहर, 25 जून के बाद मानसून की दस्तक के संकेत

    एमपी में चार दिन तक लू और उमस का कहर, 25 जून के बाद मानसून की दस्तक के संकेत


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम के तेवर फिलहाल राहत देने वाले नहीं हैं। प्रदेश में 26 जून तक लू, उमस भरी गर्मी और कहीं-कहीं आंधी-बारिश का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। मानसून की एंट्री में देरी और प्री-मानसून गतिविधियों के कमजोर पड़ने से गर्मी का प्रभाव बढ़ गया है। पिछले दो दिनों से जबलपुर संभाग के कई इलाकों में हीटवेव का असर भी महसूस किया जा रहा है।

    मौसम विभाग के भोपाल केंद्र ने जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के जिलों के लिए अगले चार दिनों तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। सोमवार को नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, उमरिया और डिंडौरी में दिन के समय गर्म हवाएं चलने की संभावना है। हालांकि शाम के बाद कुछ क्षेत्रों में आंधी और बारिश हो सकती है।

    इसके अलावा ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, गुना, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, देवास, सीहोर, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में भी गर्मी का असर बना रहने का अनुमान है।


    21 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश की संभावना

    हीटवेव और गर्मी के बीच प्रदेश के 21 से अधिक जिलों में आंधी और बारिश का दौर भी जारी रह सकता है। झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, मैहर, अनूपपुर, कटनी, दमोह, सागर, विदिशा और अशोकनगर में तेज आंधी चलने का अलर्ट जारी किया गया है।

    रायसेन में सबसे ज्यादा बारिश
    रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश दर्ज की गई। रायसेन में 61 मिमी यानी करीब ढाई इंच बारिश हुई। भोपाल में दोपहर के समय जोरदार बारिश हुई, जबकि सतना में लगभग पौन इंच पानी गिरा। जबलपुर, खजुराहो, नौगांव और सिवनी में भी बारिश का सिलसिला बना रहा।

    तापमान में आई गिरावट
    बारिश के असर से रविवार को अधिकतम तापमान में कुछ कमी दर्ज की गई। भोपाल में तापमान 35.3 डिग्री सेल्सियस, इंदौर में 37.1 डिग्री, ग्वालियर में 39.7 डिग्री, उज्जैन में 36 डिग्री और जबलपुर में 38 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी में सबसे कम 32.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। वहीं सिवनी और शिवपुरी में 35 डिग्री, रायसेन में 36 डिग्री तथा सागर और टीकमगढ़ में 36.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। दतिया प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां पारा 40.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

    मानसून की दस्तक में अभी और इंतजार

    मध्य प्रदेश में मानसून निर्धारित समय से करीब सात दिन देरी से चल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून को प्रदेश में प्रवेश करने में अभी लगभग चार दिन और लग सकते हैं। अनुमान है कि 25 जून के बाद मानसून प्रदेश में दस्तक देगा। वहीं 23 जून तक इसके छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर आगे बढ़ने की संभावना है।

  • मानसून से पहले भोपाल की बड़ी पोल खुली! एक साल से धंसी सड़क नहीं हुई दुरुस्त, एमपी नगर में घुटनों तक भर रहा पानी

    मानसून से पहले भोपाल की बड़ी पोल खुली! एक साल से धंसी सड़क नहीं हुई दुरुस्त, एमपी नगर में घुटनों तक भर रहा पानी


    भोपाल  मानसून की आमद से पहले राजधानी भोपाल में तैयारियों की वास्तविक तस्वीर सामने आने लगी है। शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल एमपी नगर में एक साल पहले धंसी सड़क आज भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि थोड़ी सी बारिश होते ही सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाता है और हजारों वाहन चालकों व राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय भी नहीं हुआ है।

    एमपी नगर स्थित बोर्ड ऑफिस चौराहे और एमपी नगर चौराहे के बीच की सड़क 17 जुलाई 2025 को अचानक धंस गई थी। जांच में सामने आया था कि यह सड़क एक पुराने नाले के ऊपर बनी हुई थी। शुरुआती स्तर पर सड़क की मरम्मत की गई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद आसपास का हिस्सा भी कमजोर पड़ने लगा और फिर सड़क के दूसरे हिस्से में भी धंसाव की आशंका पैदा हो गई। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने स्थायी समाधान के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू करने का निर्णय लिया।

    बताया जाता है कि जिस नाले के ऊपर सड़क बनी हुई है, वह लगभग 50 साल पुराना है। इसे मजबूत बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने रेलवे अंडरपास की तर्ज पर प्री-कास्ट तकनीक से नया स्ट्रक्चर तैयार करने की योजना बनाई। हालांकि यह परियोजना शुरुआत से ही बाधाओं में घिरी रही। दो बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी एजेंसी ने काम में रुचि नहीं दिखाई। दोनों बार टेंडर निरस्त करने पड़े। तीसरी बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सका।

    पिछले चार महीनों से चल रहे इस काम ने क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। ज्योति टॉकीज चौराहे से बोर्ड ऑफिस चौराहे तक आने-जाने वाले लोगों को रोज लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। सड़क की एक लेन बंद होने के कारण ट्रैफिक का दबाव दूसरी सड़कों पर बढ़ गया है। चेतक ब्रिज से आने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।

    स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब बारिश होती है। हाल ही में हुई बारिश के दौरान निर्माणाधीन क्षेत्र में इतना पानी भर गया कि पैदल चलना मुश्किल हो गया। सड़क पर घुटनों तक पानी जमा हो गया और वाहन रेंगते हुए निकलते दिखाई दिए। कई कारें पानी में फंस गईं और लोगों को घंटों जाम तथा अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।

    चिंता की बात यह है कि जिस नई तकनीक के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान खोजा जा रहा था, उसके बावजूद जलभराव की समस्या बरकरार दिखाई दे रही है। सड़क की जिस लेन का निर्माण कार्य पूरा बताया जा रहा है, वहां भी पानी भरने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे परियोजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

    एमपी नगर जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र में रोजाना लाखों लोगों की आवाजाही होती है। अनुमान है कि करीब पांच लाख लोग प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में सड़क निर्माण की धीमी गति और जलनिकासी व्यवस्था की खामियां नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी हैं। मानसून शुरू होने से पहले यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

  • तेजी से आगे बढ़ रहा मानसून…. 25 राज्यों में 18 जून तक आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट

    तेजी से आगे बढ़ रहा मानसून…. 25 राज्यों में 18 जून तक आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    तेजी से आगे बढ़ रहे दक्षिण्-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) और उत्तरी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से मौसम (Weather:) में व्यापक बदलाव आया है। पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) से तटीय कर्नाटक तक गरज और चमक के साथ बारिश हुई है। साथ ही, अलग-अलग क्षेत्रों में 50-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान ने भी कहर बरपाया है। बिहार में बिजली गिरने से 10 लोगों की जान चली गई है, पंजाब में भी वर्षा जनित घटनाओं में 3 लोगों की जान चली गई है। मौसम में यह बदलाव कम से कम 18 जून तक जारी रहने की प्रबल संभावना है।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर, हापुड़, बिजनौर, शामली, मुरादाबाद, संभल, हाथरस और मथुरा में आंधी-तूफान और गरज के साथ बारिश हुई। हरियाणा के गोहाना, सोनीपत और रोहतक समेत कई जिलों में भी ऐसा ही हाल रहा। राजस्थान के डीग, भरतपुर, बयाना और धौलपुर में भी तेज हवाएं चलीं और छिटपुट बारिश दर्ज की गई। बिहार में बारिश के दौरान बिजली गिरने से खगड़िया में पांच लोगों की मौत हो गई और 7 लोग झुलस गए, जबकि भागलपुर, मधेपुरा, सहरसा और भोजपुर जिलों में भी वज्रपात से एक-एक लोगों की जान चली गई।

    जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, चंडीगढ़, पंजाब और छत्तीसगढ़ में भी व्यापक वर्षा हुई। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, झारखंड, ओडिशा और तटीय कर्नाटक में भारी बारिश दर्ज की गई। हिमाचल प्रदेश में रोहतांग सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई। कुल्लू और लाहौल घाटी में झमाझम बारिश दर्ज की गई। केरल में कुछ जगहों पर 12-20 सेमी तक वर्षा रिकॉर्ड की गई। असम, बंगाल, त्रिपुरा और तमिलनाडु में कुछ जगहों पर 7-11 सेमी वर्षा हुई। मध्य प्रदेश, कोंकण, महाराष्ट्र और गुजरात में कुछ जगहों पर 40-60 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। उधर, विदर्भ में कई जगहों पर लू जैसी स्थिति रही और रातें गर्म रहीं।


    18 तक उत्तर-पश्चिम में बदला रहेगा मौसम

    मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 18 जून तक अलग-अलग स्थानों पर गरज और चमक के साथ बारिश होने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया है। इस दौरान कुछ जगहों पर बिजली भी गिर सकती है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और पूर्वोत्तर भारत के असम समेत सभी राज्यों में भी अगले तीन से चार दिनों तक 40-50 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई है।


    बदरीनाथ हाईवे पांच घंटे बंद रहा

    उत्तराखंड में बदरीनाथ हाईवे पर भनेरपाणी में पहाड़ी से भूस्खलन होने पर करीब पांच घंटे तक वाहनों की आवाजाही ठप रही। इस दौरान हाईवे के दोनों ओर करीब 2,000 तीर्थयात्री फंसे रहे। बाद में कार्यदायी संस्था एनएचआईडीसीएल की जेसीबी ने मलबे का निस्तारण किया। इसके बाद शुक्रवार सुबह आठ बजे वाहनों की आवाजाही सुचारु हो पाई। भनेरपाणी में थोड़ी बारिश होने पर भी मलबा और पत्थर हाईवे पर गिर रहे हैं।


    पूर्वी उत्तर प्रदेश की दहलीज पर मानसून

    दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वी-उत्तरी उत्तर प्रदेश की सीमा के करीब पहुंच गया है। आईएमडी के अनुसार, शुक्रवार को मानसून प. बंगाल और बिहार के कुछ और भागों एवं ओडिसा व झारखंड के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है। अगले 2-3 दिनों में मानसून के मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाकी हिस्सों, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं। इस तरह, तीन दिन की देरी से केरल पहुंचा मानसून 9 दिनों के भीतर ही 19 राज्यों तक पहुंच गया है।


    अल नीनो का साया

    मौसम विभाग के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में इस समय अल नीनो की स्थितियां सक्रिय हैं। मौसम विभाग ने कहा कि समुद्र की सतह के बढ़ते तापमान का असर अब हमारे वायुमंडल पर भी दिखने लगा है। महासागर और वायुमंडल की यह साझा प्रणाली अब पूरी तरह से अल नीनो के लक्षणों को दर्शा रही है। आने वाले महीनों में अल नीनो का प्रभाव और अधिक गहराने की आशंका है। आमतौर पर अल नीनो के सक्रिय होने से भारत में कम बारिश या सूखे जैसे हालात पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। भारत में इससे पहले आखिरी बार अल नीनो की स्थितियां साल 2023 में देखी गई थीं।