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  • बारिश में भीग गया स्मार्टफोन? घबराने की बजाय तुरंत अपनाएं ये आसान उपाय, सही समय पर उठाया कदम बचा सकता है आपका मोबाइल

    बारिश में भीग गया स्मार्टफोन? घबराने की बजाय तुरंत अपनाएं ये आसान उपाय, सही समय पर उठाया कदम बचा सकता है आपका मोबाइल

    नई दिल्ली । मानसून के मौसम में अचानक होने वाली बारिश अक्सर लोगों के स्मार्टफोन के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। बाहर निकलते समय जेब या बैग में रखा मोबाइल कई बार पानी की चपेट में आ जाता है। ऐसे में घबराकर जल्दबाजी में उठाया गया एक गलत कदम फोन को हमेशा के लिए खराब कर सकता है। इसलिए मोबाइल भीगने के बाद सही तरीके अपनाना बेहद जरूरी होता है।

    अगर फोन बारिश में भीग जाए तो सबसे पहले उसे तुरंत स्विच ऑफ कर देना चाहिए। यदि डिवाइस पहले से बंद है तो उसे चालू करने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। पानी के संपर्क में आने के बाद फोन के अंदर शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में फोन ऑन रहने या बार-बार चालू करने का प्रयास करने से मदरबोर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

    भीगे हुए मोबाइल को तुरंत चार्जिंग पर लगाना भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। कई लोग यह जांचने के लिए कि फोन काम कर रहा है या नहीं, उसे चार्जर से जोड़ देते हैं। ऐसा करने से शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है और फोन पूरी तरह खराब हो सकता है। इसलिए जब तक फोन पूरी तरह सूख न जाए, उसे चार्जिंग से दूर रखना ही सुरक्षित माना जाता है।

    फोन बंद करने के बाद सिम कार्ड और मेमोरी कार्ड को बाहर निकाल लेना चाहिए। यदि मोबाइल की बैटरी निकालना संभव हो तो उसे भी अलग कर देना बेहतर रहता है। इससे डिवाइस के अंदर हवा का प्रवाह बढ़ता है और नमी जल्दी सूखने में मदद मिलती है। साथ ही सिम और मेमोरी कार्ड को भी संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है।

    इसके बाद फोन के बाहरी हिस्से को साफ और सूखे सूती कपड़े या टिश्यू पेपर से धीरे-धीरे पोंछना चाहिए। स्क्रीन, बैक पैनल और किनारों पर मौजूद पानी को सावधानी से हटाएं। इस दौरान फोन को जोर से हिलाने या झटकने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पानी अंदर तक पहुंच सकता है और नुकसान बढ़ सकता है।

    मोबाइल को सुखाने के लिए हेयर ड्रायर या किसी अन्य गर्म हवा वाले उपकरण का उपयोग नहीं करना चाहिए। तेज गर्म हवा फोन के अंदर मौजूद प्लास्टिक और अन्य संवेदनशील हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा हवा का दबाव पानी को बाहर निकालने के बजाय अंदर की ओर धकेल सकता है, जिससे समस्या और गंभीर हो सकती है।

    मानसून के दौरान मोबाइल को सुरक्षित रखने के लिए वॉटरप्रूफ कवर या सुरक्षित पाउच का इस्तेमाल करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यदि फोन लंबे समय तक पानी में रहा हो या पूरी तरह सूखने के बाद भी सामान्य रूप से काम न करे, तो उसे स्वयं खोलने की बजाय सर्विस सेंटर में जांच कराना बेहतर रहेगा। सही समय पर बरती गई सावधानियां स्मार्टफोन को गंभीर नुकसान से बचाने के साथ उसकी कार्यक्षमता बनाए रखने में भी मदद करती हैं।

  • बारिश में जूतों से आने वाली बदबू से हैं परेशान? घर की 4 आसान चीजें मिनटों में दूर करें नमी, बैक्टीरिया और दुर्गंध की समस्या

    बारिश में जूतों से आने वाली बदबू से हैं परेशान? घर की 4 आसान चीजें मिनटों में दूर करें नमी, बैक्टीरिया और दुर्गंध की समस्या

    नई दिल्ली । मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ कई छोटी-बड़ी परेशानियां भी लेकर आता है। इनमें जूतों से आने वाली बदबू एक आम समस्या है, जिससे कई लोग रोजमर्रा की जिंदगी में असहज महसूस करते हैं। ऑफिस, स्कूल, कॉलेज या किसी सामाजिक कार्यक्रम में जूते उतारते समय अगर उनमें से तेज दुर्गंध आने लगे तो यह शर्मिंदगी का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी मुख्य वजह बारिश के मौसम में बढ़ी हुई नमी और बैक्टीरिया का तेजी से पनपना है।

    बारिश के दिनों में पैर अक्सर पसीने या पानी के संपर्क में रहते हैं। जब नमी लंबे समय तक जूतों के अंदर बनी रहती है तो बैक्टीरिया और फंगस विकसित होने लगते हैं। यही सूक्ष्म जीव दुर्गंध पैदा करते हैं। यदि समय रहते जूतों की सफाई और देखभाल न की जाए तो समस्या और बढ़ सकती है।

    इस परेशानी से राहत पाने के लिए महंगे उत्पादों की जरूरत नहीं होती। घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों का सही तरीके से उपयोग कर जूतों की बदबू को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे प्रभावी उपायों में बेकिंग सोडा शामिल है। रात में सोने से पहले जूतों के अंदर थोड़ा-सा बेकिंग सोडा छिड़कने से यह अतिरिक्त नमी और दुर्गंध को सोख लेता है। सुबह जूतों को अच्छी तरह झाड़कर साफ कर दें। इससे जूते अधिक ताजगी भरे महसूस होते हैं।

    सूखी चाय की पत्ती या इस्तेमाल किए गए और अच्छी तरह सुखाए गए टी-बैग भी इस समस्या में उपयोगी साबित हो सकते हैं। इन्हें कुछ घंटों के लिए जूतों के अंदर रखने से नमी कम होती है और दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया की सक्रियता घटती है। यह तरीका विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक है जो रोजाना लंबे समय तक जूते पहनते हैं।

    अगर बारिश में जूते भीग गए हों तो उन्हें तुरंत सुखाना बेहद जरूरी है। इसके लिए पुराने अखबार का इस्तेमाल किया जा सकता है। अखबार को मोड़कर जूतों के अंदर भर देने से वह तेजी से नमी सोख लेता है। यदि अखबार पूरी तरह गीला हो जाए तो उसे बदलकर दूसरा सूखा अखबार रख दें। इससे जूतों के अंदर नमी जमा नहीं होती और बैक्टीरिया के पनपने की संभावना कम हो जाती है।

    इसके अलावा, जब भी मौसम साफ हो और धूप निकले, जूतों को कुछ समय के लिए खुली हवा और धूप में जरूर रखें। सूर्य की किरणें प्राकृतिक रूप से नमी कम करने के साथ बैक्टीरिया और फंगस की वृद्धि को भी रोकने में मदद करती हैं। नियमित रूप से जूतों को हवा लगने देने से उनमें ताजगी बनी रहती है और दुर्गंध की समस्या दोबारा होने की संभावना कम होती है।

    मानसून के दौरान जूतों की साफ-सफाई और सही देखभाल पर थोड़ा-सा ध्यान देकर बदबू की समस्या से आसानी से बचा जा सकता है। घरेलू उपाय न केवल किफायती हैं, बल्कि नियमित उपयोग से जूतों की स्वच्छता बनाए रखने और पैरों को संक्रमण से सुरक्षित रखने में भी मददगार साबित होते हैं।

  • पूरे देश में सक्रिय हुआ मानसून….. आज दिल्ली-NCR समेत 20 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट

    पूरे देश में सक्रिय हुआ मानसून….. आज दिल्ली-NCR समेत 20 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    मानसून (Monsoon) देश के सभी राज्यों में पहुंच चुका है। गुजरात (Gujarat) में शुक्रवार रात और शनिवार सुबह तेज बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। गुजरात (Gujarat) के मेंडरडा इलाके (Mendarda) में समधियाला गांव के पास बाढ़ के पानी में चार गाड़ियां फंस गईं, जिसमें से 19 लोगों का बचाया गया। महाराष्ट्र (Maharashtra) के भिवंडी में बाजार में करीब 3 फीट तक पानी भर गया। दुकानें बंद हो गईं। लोग कमर तक डूबकर सड़क पार कर रहे हैं।

    राजस्थान के जयपुर में तेज बारिश के बाद सवाई मानसिंह हॉस्पिटल के माइनर ओटी में पानी भर गया। यहां से मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। मध्य प्रदेश के भोपाल-इंदौर समेत 26 से ज्यादा जिलों में शुक्रवार को तेज बारिश हुई। उज्जैन में दो दिन पहले पुलिया पार करते समय बाइक समेत बहे पंचायत सहायक का शव भी बरामद हुआ है। उत्तर प्रदेश के 20 जिलों में बारिश हुई। कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पानी भर गया। कारें-बाइक आधी डूब गईं।

    वहीं जम्मू-कश्मीर में शनिवार सुबह रामनगर-उधमपुर रोड पर कौघा के पास भूस्खलन (लैंडस्लाइड)से सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर और मलबा आ गया, जिसके कारण रास्ता बंद कर दिया गया। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग स्थित केदारघाटी में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से जेसीबी और उसके दो कर्मचारी नदी के तेज बहाव में फंस गए। एसडीआरएफ और जल पुलिस की टीम ने तत्काल बचाव अभियान चलाकर चालक और उसके सहयोगी को सुरक्षित बाहर निकाला।


    किन 20 राज्यों के लिए आंधी-बारिश का अलर्ट हुआ जारी?

    मौसम विभाग ने रविवार के लिए 20 राज्यों में आंधी-बारिश और तूफान को लेकर अलर्ट जारी किया है। बारिश की चेतावनी वाले राज्यों में दिल्ली से लेकर यूपी-बिहार और राजस्थान सहित पंजाब-हरियाणा भी शामिल है। 61 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अलर्ट भी जारी किया गया है। अगले चार दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून गुजरात, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के बाकी हिस्सों में आगे बढ़ेगा। विभाग के अनुसार, अगले चार-पांच दिनों तक मध्य भारत में मानसून सक्रिय रहेगा।


    दिल्ली एनसीआर के लिए मौसम विभाग ने यलो अलर्ट किया जारी

    दिल्ली एनसीआर के कई इलाकों में भी शनिवार को बारिश हुई, जिससे लोगों की गर्मी से राहत मिली। दिन के ज्यादातर समय आसमान में बादल छाए रहे और सुबह के समय हवा में नमी 77 प्रतिशत थी। मौसम विभाग ने रविवार के लिए भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ आंधी-तूफान की संभावना है।


    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट, स्कूल-कॉलेज बंद कराए

    बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने मुंबई में स्कूल और कॉलेज दोपहर के सत्र के लिए बंद करा दिए हैं। मौसम विभाग ने यहां बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। बीएमसी ने नागरिकों से यह भी अपील की है कि वे घर से तभी निकलें जब बहुत जरूरी हो। इस बीच मुंबई के ठाणे शहर के कलवा इलाके में शनिवार सुबह भारी बारिश के दौरान दो-पहिया वाहनों पर पेड़ गिरने से दो लोग घायल हो गए। दहिसर ईस्ट और अंधेरी वेस्ट के बीच मेट्रो में तकनीकी खराबी के कारण पीक आवर्स में ट्रेनों की सर्विस डेढ़ घंटे प्रभावित रही। लाइन 2-ए पर दहिसर ईस्ट और कंदरपाड़ा मेट्रो स्टेशनों के बीच भी तकनीकी खराबी के कारण परिचालन प्रभावित हुआ।


    हिमाचल : लाहौल में सड़क बही नीलकंठ झील यात्रा रुकी

    हिमाचल प्रदेश में लाहौल घाटी में उफनाए चोखंग नाले ने मूरिंग-नैनगार सड़क का करीब 200 मीटर हिस्सा बहा दिया। इससे प्रसिद्ध नीलकंठ झील यात्रा रोक दी गई है। रामपुर के गानवी खड्ड पर बना अस्थायी पुल भी बह गया, जिससे कई पंचायतों का संपर्क कट गया। कुल्लू में ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ने पर राफ्टिंग पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। चंबा-तीसा मार्ग भूस्खलन से कुछ समय के लिए बंद रहा, जबकि 12 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।


    भारी बारिश से उड़ानों पर असर, पांच विमान दूसरे हवाई अड्डों पर उतारे गए

    मुंबई में शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा। खराब मौसम, कम दृश्यता और सुरक्षित लैंडिंग में दिक्कत के कारण मुंबई आने वाली पांच उड़ानों को दूसरे हवाई अड्डों की ओर मोड़ना पड़ा। हवाई अड्डे के सूत्रों के अनुसार, इनमें इंडिगो की तीन और एअर इंडिया की दो उड़ानें शामिल थीं। इसके अलावा 17 अन्य उड़ानों के पायलटों ने भी मौसम की स्थिति को देखते हुए मार्ग में बदलाव किया।

  • एमपी में आज इंदौर समेत 20 जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट, 9 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी

    एमपी में आज इंदौर समेत 20 जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट, 9 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और लगातार हो रही बारिश से प्रदेश का अधिकांश हिस्सा तरबतर हो गया है। शनिवार को 20 से अधिक जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई, जबकि मौसम विभाग ने रविवार के लिए प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में सबसे अधिक असर रहने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, रविवार को रतलाम, धार, बड़वानी, शाजापुर, बैतूल, पांढुर्णा, मंडला, बालाघाट और डिंडौरी जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    इसके अलावा नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, उज्जैन, इंदौर, खरगोन, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, सीहोर, नर्मदापुरम, रायसेन, छिंदवाड़ा, सिवनी, अनूपपुर, कटनी, पन्ना, झाबुआ और अलीराजपुर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 से 8 इंच तक वर्षा होने का अनुमान है।

    वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, विदिशा, भोपाल, सागर, नरसिंहपुर, जबलपुर, उमरिया, शहडोल, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सतना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है।

    लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित
    शनिवार को प्रदेश के कई हिस्सों में हुई तेज बारिश से जनजीवन प्रभावित रहा। कई नदियां और नाले उफान पर आ गए, जिससे अनेक गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया। कई स्थानों पर घरों और खेतों में पानी भर गया, जबकि पुल-पुलियों और सड़कों पर पानी बहने से यातायात बाधित हुआ।

    हरदा जिले में भारी बारिश के कारण कई गांवों का संपर्क कट गया। ग्राम मांदला के पास कालीमाचक नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी पुल से करीब तीन फीट ऊपर बहने लगा, जिसके चलते नर्मदापुरम-खंडवा स्टेट हाईवे पर आवागमन रोकना पड़ा।

    20 से अधिक जिलों में बरसे बादल, तापमान में आई गिरावट
    शनिवार को बैतूल, धार, इंदौर, खरगोन, पचमढ़ी, उज्जैन, दमोह, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, हरदा, सीहोर, पन्ना, बड़वानी, देवास और रतलाम सहित 20 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई।

    बारिश के चलते दिन के तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट आई। धार प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बैतूल में 26 डिग्री, मलाजखंड में 26.5 डिग्री, खंडवा में 28.1 डिग्री और सिवनी में 29.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में इंदौर का अधिकतम तापमान 26.2 डिग्री, भोपाल का 30.8 डिग्री, उज्जैन का 31.8 डिग्री, जबलपुर का 33.8 डिग्री और ग्वालियर का 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

  • Monsoon: कहीं मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त -व्यस्त.. तो कहीं बूंदाबांदी

    Monsoon: कहीं मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त -व्यस्त.. तो कहीं बूंदाबांदी


    नई दिल्ली
    । देश के लगभग 95 फीसदी क्षेत्रों में पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) कहीं आंधी-तूफान (Thunderstorm) और मूसलाधार बौछारों (Torrential downpours) से कहर बरपा रहा है तो कहीं बूंद-बूंद के लिए तरसा रहा है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से लेकर पूर्वी भारत के ओडिशा, पश्चिम के गुजरात और मध्य के मुंबई में आफत की बारिश हो रही है। हिमाचल में फिर बादल फटा है, जिसके बाद पानी के साथ आए मलबे में कई वाहन दब गए। मुंबई में जल प्रलय जैसे हालात हो गए हैं और पांच घंटे के भीतर ही 70 मिमी तक वर्षा हुई है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में बादल मंडरा तो रहे हैं, लेकिन बूंदा-बांदी से ज्यादा बरस नहीं रहे।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, बीते 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, असम, नागालैंड और कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई है। ओडिशा, गुजरात, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी) हुई है। वहीं, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी राजस्थान और मध्य महाराष्ट्र में 60-125 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान ने तबाही मचाई है। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा और गुजरात राज्य में कुछ जगहों पर 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली हैं। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी देते हुए रेड अलर्ट जारी किया है।

    आदि कैलाश यात्रा की गई निलंबित
    मानसूनी बारिश में भूस्खलन के जोखिम और श्रद्धालुों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा को निलंबित कर दिया गया है। धारचुला के एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि 1 मई को यात्रा शुरू होने के दो महीनों के अंदर 52,441 तीर्थयात्रियों ने आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट अब आगे के आदेशों के बाद ही जारी किए जाएंगे। यात्रा रोके जाने से पहले, एक जुलाई को आखिरी बार 103 तीर्थयात्रियों को परमिट जारी किए गए थे।

    मुंबई में जल प्रलय जैसे हालात, और बारिश की चेतावनी जारी
    देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के कई इलाके भारी बारिश के कारण जलमग्न हो गए हैं। शुक्रवार को पांच घंटे की झमाझम बरसात ने जलप्रलय जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। सबसे ज्यादा बांद्रा में 73.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। बीएमसी ने कहा कि शुक्रवार सुबह 8 बजे तक बीते 24 घंटों के दौरान 100 मिमी वर्षा हुई है। हालांकि, प्रशासन ने मेट्रो, उपनगरीय रेल और बस सेवा के सामान्य संचालन का दावा किया है, लेकिन यात्रियों ने कहा कि उपनगरीय ट्रेन और बसें देर से चलीं। मौसम विभाग ने और बारिश की संभावना जताई है और अलर्ट जारी किया है।

    बारिश से मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर जगह-जगह गड्डे बन जाने से पालघर के पास एक के बाद एक कम से कम 15 आपस में टकरा गए। हालांकि, इसमें किसी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। वहीं, नांदेड़ में लगातार हो रही बारिश से बाढ़ की आशंका बढ़ गई है, जिसको देखते हुए 30 सितंबर तक राज्य आपदा मोचन बल की एक टीम को तैनात किया गया है।

    उज्जैन में शिप्रा का जलस्तर बढ़ा
    मध्य प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण शुक्रवार को उज्जैन के कई हिस्सों में गंभीर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। भारी बारिश के बाद शिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे राम घाट के पास स्थित कई मंदिर पानी में डूब गए हैं।

    उत्तराखंड में उफान पर नदी-नाले
    उत्तराखंड में भी बारिश से हालात बदहाल होने लगे हैं। उत्तरकाशी जिले की हर्षिल घाटी में मूसलाधार बारिश के बाद तेलगाड नदी उफान पर आ गई है जिससे मलबा गंगोत्री हाईवे तक पहुंचने से पुल निर्माण के लिए रखी सामग्री मलबे में दब गई है। साथ ही वहां पर पुल की निर्माणाधीन दीवारों को भी नुकसान हुआ है। भागीरथी नदी के बाद अब तेलगाड नदी का जलस्तर बढ़ने से लोग भयभीत हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गत वर्ष भी तेलगाड के मुहाने पर भूस्खलन के कारण झील बन गई थी। तेज बारिश से इसके टूटने का खतरा बढ़ गया है।

  • पूरे मध्य प्रदेश में सक्रिय हुआ मानसून, खंडवा-हरदा में रेड अलर्ट, 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

    पूरे मध्य प्रदेश में सक्रिय हुआ मानसून, खंडवा-हरदा में रेड अलर्ट, 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। 24 जून को नौ दिन की देरी से प्रदेश में प्रवेश करने वाला मानसून गुरुवार को उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग तक पहुंच गया। इसके साथ ही महज नौ दिनों में मानसून ने पूरे प्रदेश को कवर कर लिया है। हालांकि, अब भी 38 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि भोपाल, इंदौर और देवास में सबसे अधिक वर्षा हुई है।

    खंडवा और हरदा में रेड अलर्ट
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के भोपाल केंद्र ने शुक्रवार को खंडवा और हरदा जिलों के लिए अति भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, बुरहानपुर और बैतूल में भी अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में इन जिलों में 4 से 8 इंच तक वर्षा हो सकती है।

    19 जिलों में भारी बारिश का अनुमान
    रतलाम, उज्जैन, राजगढ़, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी और अनूपपुर सहित कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है।

    इसके अलावा अलीराजपुर, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, इंदौर, शाजापुर, सीहोर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, जबलपुर, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, कटनी, शहडोल और मंडला में भी गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    सीजन का पहला रेड अलर्ट
    मौसम विभाग ने प्रदेश में 6 जुलाई तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। अगले दो दिनों के लिए रेड अलर्ट घोषित किया गया है, जो इस मानसून सीजन का पहला रेड अलर्ट है। गुरुवार को भोपाल समेत 15 से अधिक जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई।

    जुलाई में बेहतर बारिश की उम्मीद
    मौसम विभाग के अनुसार, जून में अपेक्षाकृत कम वर्षा हुई, लेकिन जुलाई में मानसून के अधिक सक्रिय रहने की संभावना है। आमतौर पर प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग एक-तिहाई हिस्सा जुलाई में होता है।

    उदाहरण के तौर पर भोपाल में सामान्य मानसूनी वर्षा करीब 39 इंच मानी जाती है, जिसमें लगभग 14 इंच बारिश केवल जुलाई में दर्ज होती है। वहीं, बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा शहर है, जहां जुलाई के दौरान 17 इंच से अधिक वर्षा होती है। मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई में प्रदेश की कुल मानसूनी वर्षा का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रिकॉर्ड किया जाता है।

  • एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, आज 13 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी

    एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, आज 13 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। बुधवार को मानसून ने भोपाल और सागर संभाग के कई जिलों में दस्तक दी। अब मौसम विभाग का अनुमान है कि गुरुवार को मानसून उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग के शेष हिस्सों तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही प्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    13 जिलों में भारी और अति भारी बारिश का अलर्ट
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भोपाल ने हरदा, नर्मदापुरम, रायसेन, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बालाघाट जिलों के लिए अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अगले 24 घंटों के दौरान इन क्षेत्रों में 4 से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं अशोकनगर, देवास, खंडवा, बैतूल, सागर, मंडला और डिंडौरी जिलों में भारी बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है।

    भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में बारिश और आंधी की चेतावनी
    मौसम विभाग ने भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, बैतूल, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में गुरुवार को तेज बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की है। बुधवार को इंदौर के कई इलाकों में तेज बारिश हुई, जिससे वार्ड क्रमांक 80 में पानी दुकानों तक पहुंच गया और कई सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई।

    5 जुलाई तक जारी रहेगा तेज बारिश का दौर
    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 5 जुलाई तक कई इलाकों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। 3 जुलाई को धार और बड़वानी जिलों के लिए अति भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 4 जुलाई को खरगोन जिले में भी रेड अलर्ट घोषित किया गया है।

    अब तक सामान्य से 28 प्रतिशत कम बारिश
    प्रदेश में जून महीने के दौरान कई स्थानों पर आंधी और बारिश का दौर बना रहा। 1 जुलाई को भी अनेक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। इसके बावजूद प्रदेश में अब तक कुल 100.2 मिमी (करीब 4 इंच) वर्षा हुई है, जो सामान्य 139.7 मिमी (करीब 5.4 इंच) की तुलना में 28 प्रतिशत कम है।

    जुलाई से बेहतर बारिश की उम्मीद
    मौसम विभाग का कहना है कि जून में बारिश अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन जुलाई में मानसून के सक्रिय रहने की संभावना है। आमतौर पर प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग एक-तिहाई हिस्सा जुलाई में होता है।

    उदाहरण के तौर पर, भोपाल में सामान्य मानसूनी वर्षा करीब 39 इंच मानी जाती है, जिसमें से लगभग 14 इंच बारिश केवल जुलाई में होती है। वहीं, जबलपुर प्रदेश के प्रमुख शहरों में सबसे अधिक वर्षा वाला शहर है, जहां जुलाई में 17 इंच से अधिक बारिश दर्ज की जाती है। मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई के दौरान प्रदेश में पूरे मानसून की करीब 40 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान रहता है।

  • एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, सात जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट; सड़कों पर बही बाइकें, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

    एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, सात जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट; सड़कों पर बही बाइकें, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात


    मध्य प्रदेश :
    में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और इसके साथ ही कई जिलों में भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने बालाघाट और डिंडौरी में अति भारी वर्षा तथा देवास, हरदा, बैतूल, पांढुर्णा और छिंदवाड़ा सहित कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई स्थानों पर जलभराव, तेज बहाव और यातायात बाधित होने जैसी स्थितियां सामने आई हैं।

    प्रदेश में मानसून अब जबलपुर, भोपाल, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, सागर और इंदौर संभाग के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले एक-दो दिनों में मानसून उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के शेष क्षेत्रों को भी पूरी तरह कवर कर लेगा। इसके साथ ही प्रदेशभर में बारिश की गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई गई है।

    सीहोर जिले के आष्टा में मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद सड़कें नदी जैसी दिखाई देने लगीं। कई इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया और तेज बहाव के कारण सड़क किनारे खड़ी मोटरसाइकिलें बहने लगीं। स्थानीय लोगों ने वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का प्रयास किया, जबकि कई स्थानों पर आवागमन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। इस घटना के वीडियो भी व्यापक रूप से सामने आए, जिनमें बारिश की तीव्रता स्पष्ट दिखाई दे रही है।

    बालाघाट में बुधवार तड़के से लगातार हो रही बारिश ने किसानों के लिए राहत लेकर आई है। लंबे इंतजार के बाद अच्छी वर्षा मिलने से अब खेतों में बोनी का कार्य तेज होने की उम्मीद है। हालांकि प्रशासन ने लोगों को आकाशीय बिजली, तेज हवाओं और भारी वर्षा के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। लगातार बारिश को देखते हुए कुछ सरकारी सेवाओं के संचालन समय में भी बदलाव किया गया है।

    मौसम विभाग ने भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, सतना, सिवनी, मंडला, सीधी, सिंगरौली और कई अन्य जिलों में तेज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना व्यक्त की है। वहीं प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया गया है।

    लगातार वर्षा के कारण कई स्थानों पर जोखिम भरी घटनाएं भी सामने आई हैं। खरगोन जिले में तेज बहाव के बावजूद यात्रियों से भरी एक निजी बस को पुलिया पार कराए जाने का मामला चर्चा में रहा। दूसरी ओर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आकाशीय बिजली गिरने और तेज बहाव की घटनाओं में जनहानि की भी सूचना मिली है। प्रशासन ने लोगों से नदी, नालों और पुल-पुलियों को पार करने में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

    मौसम विभाग के अनुसार जून महीने में प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने के संकेत हैं। प्रदेश की वार्षिक औसत वर्षा का बड़ा हिस्सा जुलाई में ही दर्ज होता है और इसी अवधि में खेती-किसानी के लिए सबसे महत्वपूर्ण बारिश होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में वर्षा का यह क्रम बना रहता है तो कृषि गतिविधियों को गति मिलेगी, हालांकि अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों पर लगातार निगरानी बनाए रखना आवश्यक होगा।

  • जुलाई में भी धीमी रहेगी मानसून की रफ्तार…. सामान्य से कम बारिश का अनुमान

    जुलाई में भी धीमी रहेगी मानसून की रफ्तार…. सामान्य से कम बारिश का अनुमान


    नई दिल्ली।
    देश में इस बार जुलाई (July 2026) के महीने में मानसून (Monsoon) की रफ्तार धीमी रहने के आसार हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी-IMD) ने मंगलवार को अपना मासिक पूर्वानुमान (Monthly Forecast) जारी करते हुए बताया कि जुलाई में देश भर में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है। आईएमडी के अनुसार, जुलाई में दीर्घकालिक औसत (एलपीए – 1971-2020) की तुलना में केवल 94 फीसदी बारिश होने की संभावना है। देश में जुलाई महीने का एलपीए लगभग 280.4 मिमी होता है। एलपीए से तात्पर्य किसी निश्चित अवधि (जैसे एक महीने या एक सीजन) के दौरान किसी विशेष क्षेत्र में दर्ज की गई वर्षा से है, जिसे एक लंबी अवधि (आमतौर पर 30 से 50 वर्ष) में औसत निकाला जाता है।

    पूरे देश में एक जैसे हालात रहने की उम्मीद नहीं है। आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि देश के अधिकांश हिस्सों में भले ही सूखा या कम बारिश देखने को मिले, लेकिन कुछ क्षेत्रों में राहत की उम्मीद है। उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्से, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक होने की उम्मीद है।


    जून में 1901 के बाद पांचवीं सबसे कम बारिश

    आईएमडी के अनुसार, जून का महीना देश के लिए काफी सूखा रहा। पूरे भारत में जून के दौरान करीब 40 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई। मध्य भारत सबसे ज्यादा प्रभावित रहा और यहा सबसे अधिक 50.4 फीसदी कम बारिश हुई। इस साल जून में केवल 99.5 मिमी बारिश हुई, जो 1901 के बाद से अब तक की पांचवीं सबसे कम जून की बारिश है।


    कम बारिश के पीछे कई मुख्य कारण

    मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम वर्षा के पीछे कई मुख्य कारक रहे। मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन का प्रतिकूल चरण…यह हवा, बादल और दबाव की एक गतिशील प्रणाली है और भूमध्य रेखा के चक्कर लगाते समय बारिश लाती है। कम दबाव वाले क्षेत्रों का न बनना…जून में कम दबाव का क्षेत्र नहीं बना। चूंकि हवाएं उच्च दबाव से कम दबाव वाले क्षेत्रों की ओर चलती हैं, इसलिए ये प्रणालियां चुंबक की तरह काम करती हैं, जो नमी से भरी हवाओं को खींचती हैं, जिससे बारिश होती है।

  • एमपी के 7 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, अगले 2-4 दिनों में पूरे प्रदेश में सक्रिय होगा मानसून

    एमपी के 7 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, अगले 2-4 दिनों में पूरे प्रदेश में सक्रिय होगा मानसून


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने बुधवार को बालाघाट और डिंडौरी में अति भारी बारिश, जबकि देवास, हरदा, बैतूल, पांढुर्णा और छिंदवाड़ा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में तेज बारिश के साथ स्थानीय स्तर पर जलभराव की स्थिति बन सकती है।

    2 से 4 दिनों में पूरे प्रदेश को कवर करेगा मानसून
    मौसम विभाग के अनुसार, मानसून मंगलवार को आगे बढ़ते हुए जबलपुर, भोपाल, रीवा और शहडोल संभाग के अधिकांश जिलों तक पहुंच गया है। अगले 2 से 4 दिनों के भीतर भोपाल, सागर, ग्वालियर, उज्जैन और चंबल संभाग के शेष जिलों में भी मानसून की दस्तक होने की संभावना है।

    इन जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी
    मौसम विभाग ने भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, शाजापुर, नर्मदापुरम, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में तेज आंधी के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा और रतलाम में हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    23 जिलों में बरसे बादल, तापमान में आई गिरावट
    मंगलवार को प्रदेश के 23 जिलों में बारिश दर्ज की गई। सतना में करीब डेढ़ इंच वर्षा रिकॉर्ड हुई। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, बैतूल, धार, नर्मदापुरम, खरगोन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी, सीधी, बालाघाट, पांढुर्णा, सीहोर, शाजापुर, डिंडौरी, हरदा और मैहर सहित कई जिलों में अच्छी बारिश हुई।

    बारिश के कारण अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। भोपाल में 30.6 डिग्री, इंदौर में 33 डिग्री, उज्जैन में 35 डिग्री, जबलपुर में 32 डिग्री और ग्वालियर में 40 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ।

    सबसे कम अधिकतम तापमान बैतूल में 26.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा सिवनी, छिंदवाड़ा, दमोह, मलाजखंड, खंडवा, सागर, मंडला और खरगोन में भी तापमान सामान्य से नीचे रहा।

    जून में कमी, जुलाई से बेहतर बारिश की उम्मीद
    मौसम विभाग के अनुसार, जून महीने में प्रदेश में कुल 88.2 मिमी (करीब 3.5 इंच) बारिश हुई, जो सामान्य 131.1 मिमी की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत कम रही। हालांकि विभाग का अनुमान है कि जुलाई में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। सामान्य तौर पर प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा जुलाई में ही दर्ज होता है, इसलिए इस महीने अच्छी बारिश की उम्मीद जताई जा रही है।