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  • बरसात के मौसम में बढ़ा बुखार का खतरा, जानिए कब सामान्य फीवर है और कब तुरंत डेंगू की जांच कराना बन जाता है जरूरी

    बरसात के मौसम में बढ़ा बुखार का खतरा, जानिए कब सामान्य फीवर है और कब तुरंत डेंगू की जांच कराना बन जाता है जरूरी

    नई दिल्ली । मानसून के आगमन के साथ देश के कई हिस्सों में बुखार और संक्रमण से जुड़े मामलों में तेजी देखी जाती है। बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं यह मच्छरों और वायरस जनित बीमारियों के फैलने के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करता है। ऐसे समय में अधिकांश लोगों को होने वाला बुखार सामान्य वायरल संक्रमण का परिणाम होता है, लेकिन कई मामलों में यही बुखार डेंगू जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इसलिए केवल बुखार को देखकर निष्कर्ष निकालने के बजाय उसके साथ दिखाई देने वाले अन्य लक्षणों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

    सामान्य मौसमी बुखार की शुरुआत प्रायः हल्के लक्षणों के साथ होती है। इसमें हल्का या मध्यम बुखार, शरीर में दर्द, गले में खराश, हल्की खांसी, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। पर्याप्त आराम, पर्याप्त पानी पीने, हल्का भोजन और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवाओं से अधिकांश लोगों की स्थिति दो से तीन दिनों में बेहतर होने लगती है। इस दौरान भूख कम लगना और सामान्य कमजोरी महसूस होना भी आम बात है, लेकिन गंभीर लक्षण आमतौर पर नहीं दिखाई देते।

    इसके विपरीत डेंगू का बुखार अक्सर अचानक और तेज तापमान के साथ शुरू होता है। मरीज को तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में अत्यधिक पीड़ा महसूस हो सकती है। कई मामलों में शरीर पर लाल रंग के छोटे-छोटे दाने दिखाई देने लगते हैं, जो डेंगू का महत्वपूर्ण संकेत माने जाते हैं। बीमारी बढ़ने पर अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, मसूड़ों या नाक से खून आना और प्लेटलेट्स की संख्या में कमी जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि बुखार लगातार तीन दिन से अधिक बना रहे, बार-बार तेज हो जाए, शरीर पर दाने उभर आएं या खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। ऐसे मामलों में रक्त जांच और प्लेटलेट्स की निगरानी से बीमारी की समय पर पहचान संभव होती है, जिससे जटिलताओं का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    मानसून के दौरान बीमारी से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें ताकि मच्छरों का प्रजनन न हो सके। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, मच्छरदानी या रिपेलेंट का उपयोग करें और स्वच्छ भोजन व पर्याप्त पानी का सेवन करें। यदि बुखार हो जाए तो स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक सुरक्षित रहता है, क्योंकि समय पर सही उपचार ही डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • सीहोर में तेज होगा मानसून का दौर, दो दिन भारी बारिश के आसार; किसानों के लिए राहत की खबर

    सीहोर में तेज होगा मानसून का दौर, दो दिन भारी बारिश के आसार; किसानों के लिए राहत की खबर


    सीहोर । सीहोर जिले में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है और आगामी 48 घंटे जिले के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। मौसम विभाग ने 20 और 21 जुलाई को जिले में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी के कारण मध्य प्रदेश के मध्य हिस्सों में मजबूत मौसमी सिस्टम बन रहा है, जिसका असर सीहोर सहित आसपास के क्षेत्रों में साफ दिखाई देगा।

    जिला भू-अभिलेख शाखा के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 19 जुलाई तक जिले में औसतन 14 इंच वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि यह पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले कम है। पिछले साल 19 जुलाई तक जिले में 17.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इसके बावजूद हाल के दिनों में बारिश की रफ्तार बढ़ने से मौसम सुहावना हुआ है और किसानों के चेहरों पर उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी है।

    ब्लॉकवार वर्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो आष्टा जिले का सबसे अधिक बारिश वाला क्षेत्र बनकर सामने आया है, जहां अब तक 19.6 इंच वर्षा दर्ज की गई है। इसके बाद जावर में 16.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। दूसरी ओर श्यामापुर क्षेत्र सबसे पीछे रहा, जहां केवल 7.7 इंच वर्षा हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश के इस अंतर के कारण खेती और जल उपलब्धता पर भी अलग-अलग असर देखने को मिल रहा है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विभाग ने बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े न होने, खुले मैदानों से दूर रहने और खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

    आगामी बारिश को खरीफ फसलों के लिए बेहद लाभकारी माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त वर्षा होने से सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों को आवश्यक नमी मिलेगी, जिससे उनकी बढ़वार बेहतर होगी। साथ ही जिले के बांधों, तालाबों और जलाशयों का जलस्तर भी बढ़ेगा, जिससे सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    प्रशासन भी मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। संभावित भारी बारिश को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।

  • बारिश में बाल झड़ना, डैंड्रफ और फ्रिज से हैं परेशान? मॉनसून में अपनाएं ये 8 आसान आदतें, बाल रहेंगे मजबूत और हेल्दी

    बारिश में बाल झड़ना, डैंड्रफ और फ्रिज से हैं परेशान? मॉनसून में अपनाएं ये 8 आसान आदतें, बाल रहेंगे मजबूत और हेल्दी

    नई दिल्ली ।बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं बालों की सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी पैदा कर देता है। वातावरण में बढ़ी नमी, प्रदूषण और बार-बार बालों के भीगने की वजह से बाल कमजोर, बेजान और रूखे दिखाई देने लगते हैं। इस दौरान हेयर फॉल, डैंड्रफ, फ्रिज और स्कैल्प से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। ऐसे में केवल महंगे हेयर प्रोडक्ट्स पर निर्भर रहने के बजाय सही हेयर केयर रूटीन अपनाना अधिक प्रभावी माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मॉनसून में सबसे पहले बालों को बारिश के पानी से बचाने की कोशिश करनी चाहिए। बारिश के पानी में धूल, प्रदूषण और अन्य अशुद्धियां हो सकती हैं, जो स्कैल्प और बालों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि बाल भीग जाएं तो घर पहुंचकर माइल्ड और सल्फेट-फ्री शैंपू से उन्हें साफ करना बेहतर माना जाता है।

    बारिश के मौसम में स्कैल्प को लंबे समय तक गीला नहीं रहने देना चाहिए। नमी के कारण फंगल संक्रमण और डैंड्रफ का खतरा बढ़ सकता है। बाल धोने या भीगने के बाद उन्हें माइक्रोफाइबर तौलिये से हल्के हाथों से सुखाना या हेयर ड्रायर के कूल मोड का सीमित उपयोग करना फायदेमंद हो सकता है। गीले बालों को लंबे समय तक बांधकर रखना भी नुकसानदायक माना जाता है।

    हवा में अधिक नमी होने के कारण इस मौसम में बाल आसानी से फ्रिजी हो जाते हैं। ऐसे में बाल धोने के बाद हल्का एंटी-फ्रिज हेयर सीरम लगाने से बाल स्मूद रहते हैं और उलझने की समस्या कम हो सकती है। साथ ही गीले बालों में बहुत टाइट पोनीटेल या जूड़ा बनाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे बालों की जड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और टूटने की संभावना बढ़ जाती है।

    बालों को सुलझाने के लिए हमेशा चौड़े दांतों वाली कंघी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। गीले बालों में बारीक कंघी या ब्रश का उपयोग करने से बाल अधिक टूट सकते हैं। इसलिए नीचे से ऊपर की ओर धीरे-धीरे कंघी करने की आदत बालों को सुरक्षित रखने में मदद करती है।

    कई लोग मॉनसून में कंडीशनर लगाना बंद कर देते हैं, जबकि इस मौसम में इसकी जरूरत और बढ़ जाती है। कंडीशनर केवल बालों की लंबाई और सिरों पर लगाना चाहिए, स्कैल्प पर नहीं। इससे बाल मुलायम रहते हैं और उनमें उलझन कम होती है। इसके अलावा लंबे समय तक तेल लगाकर रखने से भी बचना चाहिए। सप्ताह में एक बार हल्के नारियल या आर्गन ऑयल से 15 से 20 मिनट तक मसाज करने के बाद बाल धोना पर्याप्त माना जाता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि मॉनसून में स्ट्रेटनर, कर्लर और अत्यधिक गर्म ब्लो ड्रायर जैसी हीट स्टाइलिंग मशीनों का कम से कम उपयोग करें। लगातार गर्मी मिलने से बाल कमजोर और दोमुंहे हो सकते हैं। जहां तक संभव हो, बालों को प्राकृतिक तरीके से सूखने देना बेहतर विकल्प है।

    नियमित सफाई, संतुलित पोषण, पर्याप्त पानी का सेवन और सही हेयर केयर रूटीन अपनाकर बारिश के मौसम में बालों को स्वस्थ, मजबूत और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाने से हेयर फॉल, फ्रिज और डैंड्रफ जैसी सामान्य समस्याओं का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • बारिश में नरम हो जाते हैं होममेड स्नैक्स? अपनाएं ये 5 आसान स्टोरेज टिप्स, लंबे समय तक रहेंगे कुरकुरे

    बारिश में नरम हो जाते हैं होममेड स्नैक्स? अपनाएं ये 5 आसान स्टोरेज टिप्स, लंबे समय तक रहेंगे कुरकुरे

    नई दिल्ली। बारिश का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं और स्वादिष्ट स्नैक्स का आनंद लेकर आता है। इस दौरान घरों में मठरी, नमकपारे, चकली, सेव, रिबन पकोड़ा और कई तरह के पारंपरिक स्नैक्स बड़ी मात्रा में बनाकर स्टोर किए जाते हैं। हालांकि, मानसून में बढ़ी हुई नमी के कारण ये स्नैक्स जल्दी अपनी कुरकुराहट खो देते हैं और कुछ ही दिनों में नरम पड़ने लगते हैं। यदि सही तरीके से इन्हें स्टोर किया जाए तो लंबे समय तक इनका स्वाद और ताजगी बरकरार रखी जा सकती है।

    स्नैक्स को स्टोर करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वे पूरी तरह ठंडे हो चुके हों। कई बार लोग जल्दबाजी में गर्म या हल्के गुनगुने स्नैक्स को डिब्बे में बंद कर देते हैं, जिससे अंदर भाप बनती है और नमी बढ़ने के कारण स्नैक्स जल्दी नरम हो जाते हैं। इसलिए किसी भी तले हुए स्नैक को पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही कंटेनर में रखें।

    स्टोरेज के लिए हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करना चाहिए। मानसून के दौरान हवा में मौजूद नमी आसानी से खुले डिब्बों या ढीले ढक्कन वाले कंटेनरों में पहुंच जाती है। एयरटाइट कंटेनर स्नैक्स को बाहरी नमी से बचाकर लंबे समय तक कुरकुरा बनाए रखने में मदद करते हैं।

    यदि स्नैक्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखना हो तो फूड-ग्रेड मॉइश्चर एब्जॉर्बर या सिलिका जेल पैक का उपयोग किया जा सकता है। यह अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करता है और स्नैक्स की गुणवत्ता बनाए रखता है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि सिलिका पैक सीधे खाद्य पदार्थ के संपर्क में न आए और केवल फूड-ग्रेड उत्पादों का ही उपयोग किया जाए।

    बार-बार कंटेनर खोलने से भी स्नैक्स की गुणवत्ता प्रभावित होती है। हर बार डिब्बा खोलने पर बाहर की नम हवा अंदर प्रवेश करती है, जिससे स्नैक्स जल्दी नरम होने लगते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि स्नैक्स को छोटे-छोटे एयरटाइट कंटेनरों में अलग-अलग स्टोर करें, ताकि एक बार में केवल जरूरत के अनुसार ही डिब्बा खोला जाए।

    स्नैक्स को हमेशा ठंडी, सूखी और साफ जगह पर रखना चाहिए। गैस स्टोव, सिंक या ऐसी जगह जहां नमी अधिक रहती हो, वहां कंटेनर रखने से बचें। यदि किचन में अधिक सीलन रहती है तो स्नैक्स को पेंट्री या बंद अलमारी में रखना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

    यदि किसी कारण से मठरी, चकली या नमकपारे हल्के नरम हो जाएं, तो उन्हें कुछ मिनट के लिए ओवन या एयर फ्रायर में कम तापमान पर हल्का गर्म किया जा सकता है। इसके बाद ठंडा होने पर उनकी कुरकुराहट काफी हद तक वापस आ जाती है। हालांकि, अधिक देर तक गर्म करने से स्नैक्स जल भी सकते हैं, इसलिए तापमान और समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

  • MP Weather : एमपी में सामान्य से 11% कम बारिश, 35 जिलों में सूखे जैसे हालात, जाने आगे कैसा रहेगा मौसम?

    MP Weather : एमपी में सामान्य से 11% कम बारिश, 35 जिलों में सूखे जैसे हालात, जाने आगे कैसा रहेगा मौसम?


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। लगातार कमजोर मानसूनी गतिविधियों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है। सबसे अधिक असर पूर्वी मध्य प्रदेश पर दिखाई दे रहा है, जहां जबलपुर सहित 35 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 270.3 मिमी (10.6 इंच) होनी चाहिए थी। यानी अब तक प्रदेश में 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां औसतन 24 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसके विपरीत पश्चिमी हिस्से के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में सामान्य से 2 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।

    19 जुलाई से बदलेगा मौसम, तेज बारिश के आसार
    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय होने जा रहा है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में भी नया मौसम तंत्र विकसित हो रहा है और साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी सक्रिय है। इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है।

    आज इन जिलों में हल्की बारिश और आंधी की संभावना
    मौसम विभाग के मुताबिक गुरुवार को इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, भिंड, दतिया, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की बारिश के साथ आंधी चलने का अनुमान है।

    वहीं मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, आगर-मालवा, रतलाम, नीमच और मंदसौर में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।

    जुलाई के दूसरे पखवाड़े में राहत मिलने की उम्मीद
    मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश स्तर पर मानसून की स्थिति फिलहाल संतोषजनक है, लेकिन पूर्वी जिलों में वर्षा की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से चिंता का विषय बनी हुई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी निम्न दाब प्रणाली की दिशा और उसकी तीव्रता तय करेगी कि मानसून कितनी तेजी से दोबारा सक्रिय होगा। यदि मौसम प्रणालियां अनुकूल रहीं तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

    जून के बाद जुलाई में भी बारिश का ग्राफ कमजोर
    मौसम विभाग के अनुसार जून में भी सामान्य से कम बारिश हुई थी। हालांकि जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश के कारण वर्षा का आंकड़ा सुधरा था, लेकिन पिछले सात दिनों से भारी बारिश नहीं होने के कारण लगातार तीसरे दिन प्रदेश की कुल वर्षा सामान्य से नीचे बनी हुई है।

  • MP Weather: मप्र में 16 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम, फिलहाल 22 जिलों में आज हल्की बारिश के आसार

    MP Weather: मप्र में 16 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम, फिलहाल 22 जिलों में आज हल्की बारिश के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। प्रदेश के करीब 60 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल छंट चुके हैं, जिसके चलते अगले पांच दिनों तक कहीं भी भारी या अति भारी बारिश की संभावना नहीं है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 16 जुलाई से एक नया मौसम तंत्र सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश में फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने के संकेत हैं।

    फिलहाल प्रदेश में हल्की बारिश और बूंदाबांदी का सिलसिला जारी रहेगा। सोमवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार और अलीराजपुर जिलों में बादल छाने के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है।

    वहीं, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, आगर-मालवा, इंदौर, उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, देवास, विदिशा, भोपाल, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, दमोह, पन्ना, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया और ग्वालियर में मौसम सामान्य रहने के साथ धूप निकलने के आसार हैं।

    फिलहाल रिमझिम बारिश, भारी बरसात के संकेत नहीं
    मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर बनी हुई है। इसी वजह से पिछले चार-पांच दिनों से प्रदेश में कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। आने वाले कुछ दिनों तक केवल हल्की बारिश या रिमझिम फुहारें पड़ने की संभावना है, जबकि 16 जुलाई के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

    मानसून की रफ्तार क्यों हुई धीमी?
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून को सक्रिय बनाए रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ गई हैं या उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर हो गया है। इसी कारण अधिकांश इलाकों में केवल बादल छाए रहने और हल्की बारिश जैसी स्थिति बनी हुई है।

    बंगाल की खाड़ी से नए सिस्टम का इंतजार
    मौसम विभाग का अनुमान है कि 13 से 19 जुलाई के बीच उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) बनने की संभावना है। यदि यह आगे चलकर निम्न दाब क्षेत्र में परिवर्तित होता है तो मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। इसके अलावा प्रशांत महासागर में तीन नए मौसम तंत्र विकसित होने की संभावना जताई गई है। इनमें से यदि कोई एक बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है, तो मानसून दोबारा सक्रिय होकर प्रदेश में अच्छी बारिश करा सकता है।

    सामान्य से सिर्फ 1 प्रतिशत अधिक बारिश
    पिछले पांच दिनों से भारी बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश में वर्षा का अतिरिक्त आंकड़ा लगातार घटा है। पहले यह सामान्य से करीब 30 प्रतिशत अधिक था, जो अब घटकर सिर्फ 1 प्रतिशत रह गया है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य औसत 239.8 मिमी (9.4 इंच) है। यानी अब तक सामान्य से केवल 1 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है, जो पूरे मानसून कोटे का लगभग 25 प्रतिशत है।

  • 13 जुलाई को उत्तर भारत में गर्मी और उमस का डबल अटैक, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में तेज धूप के आसार, पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

    13 जुलाई को उत्तर भारत में गर्मी और उमस का डबल अटैक, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में तेज धूप के आसार, पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

    नई दिल्ली । 13 जुलाई को देश के मौसम में क्षेत्रवार बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने के कारण लोगों को तेज धूप, बढ़ते तापमान और उमस का सामना करना पड़ सकता है। वहीं पूर्वी भारत के कुछ राज्यों में मानसून सक्रिय रहने से भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का स्वरूप अलग-अलग रहेगा।

    दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के अधिकांश मैदानी क्षेत्रों में सोमवार को तेज धूप निकलने की संभावना है। हवा की गति कम रहने और वातावरण में नमी अधिक होने से उमस का असर काफी बढ़ सकता है। दोपहर के समय तापमान सामान्य से अधिक महसूस होगा और लोगों को लंबे समय तक खुले में रहने से बचने की सलाह दी गई है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, चंडीगढ़ और जयपुर जैसे शहरों में भी गर्म और उमस भरा मौसम बने रहने का अनुमान है।

    उत्तर प्रदेश में मौसम दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धूप और उमस का प्रभाव अधिक रहेगा, जबकि पूर्वी जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। लखनऊ और नोएडा में दिनभर गर्मी और उमस बनी रह सकती है, जबकि गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश से तापमान में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

    बिहार में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पटना, भागलपुर, पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ जलभराव जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। लोगों को आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने और मौसम से जुड़ी स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

    पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों, विशेषकर दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी में भारी वर्षा का अनुमान है। वहीं कोलकाता और दक्षिणी जिलों में हल्की बारिश के साथ उमस बनी रह सकती है। लगातार नमी के कारण लोगों को गर्मी का अधिक अहसास होगा, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और जलभराव जैसी स्थितियों पर भी प्रशासन नजर रख सकता है।

    मध्य प्रदेश में मौसम मिला-जुला रहने की संभावना है। भोपाल और इंदौर में दिन के समय उमस अधिक रह सकती है, जबकि शाम के समय कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी से राहत मिल सकती है। ग्वालियर में तेज धूप और बढ़ते तापमान का असर देखने को मिल सकता है, जबकि जबलपुर के आसपास हल्की वर्षा की संभावना बनी हुई है।

    उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी उमस का असर बना रह सकता है, हालांकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहेगा। देहरादून और हरिद्वार में हल्की बारिश के बावजूद उमस महसूस हो सकती है, जबकि शिमला, मनाली और मसूरी जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में ठंडी हवाओं और हल्के बादलों के कारण मौसम आरामदायक रहने का अनुमान है।

    कुल मिलाकर 13 जुलाई को देश में मौसम का प्रभाव क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग रहेगा। जहां उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में लोगों को तेज धूप और उमस का सामना करना पड़ सकता है, वहीं पूर्वी राज्यों में भारी बारिश जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मौसम के बदलते हालात को देखते हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार आवश्यक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

  • बारिश के मौसम में बढ़ जाता है पेट की बीमारियों का खतरा, इन आसान उपायों से रखें डाइजेशन बेहतर और शरीर फिट

    बारिश के मौसम में बढ़ जाता है पेट की बीमारियों का खतरा, इन आसान उपायों से रखें डाइजेशन बेहतर और शरीर फिट

    नई दिल्ली । मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ पाचन तंत्र से जुड़ी कई स्वास्थ्य चुनौतियां भी लेकर आता है। वातावरण में बढ़ी नमी के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनप सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग, गैस, अपच, दस्त, पेट दर्द और एसिडिटी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में खानपान और व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान देकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में हमेशा ताजा और गर्म भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखा हुआ या बासी भोजन बैक्टीरिया की वृद्धि का कारण बन सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बाहर मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थ, पहले से कटे फल और बिना ढके रखे भोजन से बचना बेहतर माना जाता है। घर पर ताजा तैयार किया गया भोजन पाचन तंत्र के लिए अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित होता है।

    मानसून में सुरक्षित पेयजल का सेवन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूषित पानी पेट संबंधी संक्रमण का प्रमुख कारण बन सकता है। इसलिए फिल्टर किया हुआ या अच्छी तरह उबाला गया पानी पीने की सलाह दी जाती है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और पाचन प्रक्रिया सामान्य रूप से काम करती है। यदि घर से बाहर जा रहे हों, तो अपने साथ साफ पानी की बोतल रखना एक अच्छी आदत हो सकती है।

    पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों को भी आहार में शामिल किया जा सकता है। दही और छाछ जैसे खाद्य पदार्थ आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं। इसके साथ ही खिचड़ी, दलिया, सूप, उबली सब्जियां और अन्य हल्के भोजन का सेवन पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालता और भोजन आसानी से पचने में मदद करता है।

    स्वच्छता का पालन मानसून में बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। भोजन करने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोना, फल और सब्जियों को अच्छी तरह साफ करना तथा रसोई और बर्तनों की नियमित सफाई बनाए रखना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है। छोटी-छोटी स्वच्छता संबंधी आदतें भी स्वास्थ्य की दृष्टि से बड़ा अंतर पैदा कर सकती हैं।

    बारिश के मौसम में तली-भुनी और अत्यधिक मसालेदार चीजें खाने की इच्छा बढ़ जाती है, लेकिन इनका अधिक सेवन पाचन संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है। अधिक तेल और मसाले वाला भोजन एसिडिटी, गैस और अपच जैसी परेशानियों का कारण बन सकता है। इसलिए संतुलित, पौष्टिक और हल्का भोजन चुनना अधिक लाभदायक माना जाता है।

    यदि लगातार पेट दर्द, दस्त, उल्टी, तेज बुखार या निर्जलीकरण जैसे लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकता है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मानसून के मौसम में पाचन तंत्र को बेहतर स्थिति में रखा जा सकता है और पूरे मौसम का आनंद स्वस्थ रहकर लिया जा सकता है।

  • पहली बारिश में बह गई करोड़ों के पुल की सुरक्षा दीवार निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच

    पहली बारिश में बह गई करोड़ों के पुल की सुरक्षा दीवार निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच


    देवास । देवास जिले के होशियारी और मकोडिया गांवों को जोड़ने वाला करोड़ों रुपए की लागत से बना स्टॉप डैम कम पुल पहली ही बारिश के बाद सवालों के घेरे में आ गया है। मानसून की शुरुआती बारिश में ही पुल के दोनों ओर बनाई गई प्रोटेक्शन वॉल बह गई जबकि उसके पीछे भरी गई मिट्टी भी कई स्थानों से कट गई। इस घटना ने निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुल पर आवागमन जारी है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में तेज बारिश या बाढ़ का दबाव बढ़ा तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

    मौके पर निरीक्षण के दौरान पुल के दोनों सिरों पर सुरक्षा दीवार के कई हिस्से क्षतिग्रस्त मिले। जहां मजबूत प्रोटेक्शन वॉल बनाई गई थी वहां अब केवल कंक्रीट के अवशेष और बह चुकी मिट्टी दिखाई दे रही है। पुल के एप्रोच मार्ग के पास भराव मिट्टी के बह जाने से कई स्थानों पर गड्ढेनुमा स्थिति बन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तक नदी में बड़ा उफान भी नहीं आया है। केवल सामान्य बारिश और शिप्रा नदी में छोड़े गए पानी के बहाव से ही यह नुकसान हुआ है। ऐसे में यदि मानसून के अगले दौर में जलस्तर बढ़ा तो पुल की नींव तक खतरा पहुंच सकता है।

    ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इरफान पटेल धीरज बना गोलू वर्मा टेपू शेख रंजन सिंह चौहान लाखन सिंह राठौर नवाब शेख और शेर मोहम्मद पटेल सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। उनका आरोप है कि सरियों और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता कमजोर रही जिसके कारण पहली ही बारिश में सुरक्षा दीवार टिक नहीं सकी। ग्रामीणों के अनुसार मार्च में भूमिपूजन के बाद जल्दबाजी में करीब 28 दिनों के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया था। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए की इस परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    मामला सामने आने के बाद हाटपीपल्या विधायक मनोज चौधरी ने पुल का निरीक्षण किया और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर निर्माण गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है और यदि जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जहां कमी पाई गई है उसे तत्काल दूर कराया जाएगा ताकि भविष्य में किसी तरह की दुर्घटना की आशंका न रहे।

    सिंचाई विभाग की एसडीओ नेहा दुबे ने बताया कि पुल की मुख्य संरचना पूरी तरह सुरक्षित है और नुकसान केवल प्रोटेक्शन वॉल तथा उसके पीछे की भराव मिट्टी तक सीमित है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अभी जारी है और ग्वालियर की कटारे कंस्ट्रक्शन कंपनी इस परियोजना का निर्माण कर रही है। एजेंसी का अंतिम भुगतान भी अभी नहीं किया गया है। विभाग के अनुसार क्षतिग्रस्त हिस्से की दोबारा मरम्मत कराई जाएगी तथा पूरी प्रोटेक्शन वॉल नए सिरे से बनाई जाएगी। बारिश का दौर थमने के बाद शेष निर्माण कार्य भी पूरा कराया जाएगा।

    फिलहाल इस पूरे मामले में ग्रामीणों और विभाग के दावों के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। एक ओर ग्रामीण निर्माण में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी ओर विभाग मुख्य पुल को सुरक्षित बताते हुए केवल सुरक्षा दीवार की मरम्मत की बात कह रहा है। अब सभी की नजर प्रस्तावित तकनीकी जांच और मानसून के अगले दौर पर टिकी है क्योंकि तेज बारिश ही यह तय करेगी कि पुल का निर्माण वास्तव में कितना मजबूत और सुरक्षित है।

  • Weather Update 11 July बारिश का डबल अलर्ट कई राज्यों में गरज चमक के साथ झमाझम बारिश की संभावना

    Weather Update 11 July बारिश का डबल अलर्ट कई राज्यों में गरज चमक के साथ झमाझम बारिश की संभावना


    मध्यप्रदेश । 11 जुलाई को देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत मध्य भारत पश्चिम भारत और दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहेगा। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ तेज बारिश और 40 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली एनसीआर उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मध्य प्रदेश राजस्थान बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल महाराष्ट्र गुजरात कर्नाटक तमिलनाडु और केरल समेत कई राज्यों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है। कुछ इलाकों में जलभराव बिजली गिरने और तेज हवाओं की आशंका भी जताई गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों में जलभराव और नदी नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी अच्छी बारिश होने की संभावना है जिससे किसानों को राहत मिल सकती है लेकिन अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सतर्क रहने की जरूरत होगी।

    दक्षिण भारत में कर्नाटक तमिलनाडु और केरल के कई इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। पश्चिमी तट के कोंकण और गोवा क्षेत्र में भी तेज बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने समुद्र में जाने वाले मछुआरों को स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सक्रिय मानसून प्रणाली के कारण अगले कुछ दिनों तक देश के बड़े हिस्से में बारिश का सिलसिला बना रह सकता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में 15 जुलाई के बाद वर्षा की तीव्रता में बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल लोगों को बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने सुरक्षित स्थान पर शरण लेने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की सलाह दी गई है।