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  • MP सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला… गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की डेडलाइन बढ़ाई

    MP सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला… गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की डेडलाइन बढ़ाई


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने किसानों के हित में गेहूं खरीद (Purchasing wheat) के लिए स्लॉट बुकिंग (Slot Booking) की समय-सीमा बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दी है ताकि कोई भी किसान एमएसपी के लाभ से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सोमवार को यह घोषणा की। पहले इसकी अंतिम तिथि नौ मई थी। एक अधिकारी ने बताया कि यह फैसला इस उद्देश्य से लिया गया है कि समर्थन मूल्य योजना से कोई भी किसान वंचित न रह जाए।

    चना और मसूर की खरीद की डेडलाइन
    अधिकारी के अनुसार, दो मई तक राज्य में किसानों से 34.73 टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। साल 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत लगभग 600 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। चना और मसूर की खरीद की डेडलाइन 30 मार्च से 28 मई तक निर्धारित की गई है।

    सरकार ने चना के लिए 6.49 लाख टन और मसूर के लिए 6.01 लाख टन खरीद का लक्ष्य तय किया है, जबकि अरहर की 1.31 लाख टन खरीद का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीदी गई उपज का भुगतान सीधे किसानों के खातों में किया जा रहा है।

    अधिकारी ने बताया कि किसानों की उपज की सुरक्षा के लिए खाद्यान्न भंडारण योजना के तहत लगभग 3.55 लाख टन क्षमता का भंडारण तैयार किया गया है। सामग्री भंडारण योजना के अंतर्गत 1.5 लाख टन क्षमता के आधुनिक गोदाम बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 1.1 लाख टन क्षमता वाले गोदामों का पंजीकरण पूरा हो चुका है।


    भूमि और फसल का होगा पूरा डिजिटल रिकॉर्ड

    सीएम मोहन यादव ने बताया कि ‘ई-विकास’ और ‘ई-किसान’ प्रणाली के जरिए किसानों को योजनाओं, बाजार भाव, मौसम और तकनीकी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराई जा रही है। एक अप्रैल से राज्य के सभी जिलों में लागू ई-किसान प्रणाली के तहत हर किसान को एक विशिष्ट आईडी दी जा रही है, जिसमें उसकी भूमि और फसल का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड होगा।


    हर खेत का किया जा रहा भू-टैगिंग

    किसान रजिस्ट्री के माध्यम से प्रत्येक खेत का भू-टैगिंग किया जा रहा है, जिससे फसल बीमा, नुकसान का आकलन और ड्रोन से छिड़काव में सुविधा होगी।


    1,000 से अधिक कृषि ड्रोन आपरेटरों को ट्रेनिंग

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में मध्य प्रदेश देश और दुनिया में अग्रणी है, जहां 53 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खेती हो रही है और 6,000 से अधिक संकुल बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि आधुनिक कृषि प्रणाली के तहत 1,000 से अधिक कृषि ड्रोन ऑपरेटरों को जैविक कीटनाशकों के छिड़काव के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

  • गेहूं खरीदी में नया रिकॉर्ड संभव एमपी सरकार ने केंद्र से बढ़ाया कोटा मांग

    गेहूं खरीदी में नया रिकॉर्ड संभव एमपी सरकार ने केंद्र से बढ़ाया कोटा मांग


    भोपाल । भोपाल में मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीदी को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार से निर्धारित लक्ष्य बढ़ाने की मांग की है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में इस बार गेहूं का उत्पादन काफी अच्छा हुआ है और मौजूदा लक्ष्य से अधिक खरीदी होने की पूरी संभावना है। ऐसे में किसानों को पूरा लाभ दिलाने के लिए केंद्र से कोटा बढ़ाने को लेकर लगातार संवाद किया जा रहा है।

    रबी विपणन वर्ष 2026 27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य तय किया गया है। लेकिन प्रदेश में बंपर पैदावार और किसानों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए यह लक्ष्य कम पड़ता नजर आ रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि यदि लक्ष्य नहीं बढ़ाया गया तो कई किसानों को समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने का अवसर नहीं मिल पाएगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और खरीदी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। पहले छोटे किसानों से गेहूं खरीदा जा रहा है इसके बाद मध्यम और अंत में बड़े किसानों की बारी आएगी ताकि सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके।

    इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए किसानों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। करीब 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 लाख अधिक है। अब तक 2 लाख 21 हजार 455 किसानों से 95 लाख 17 हजार 550 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इसमें से 75 लाख 57 हजार 580 क्विंटल गेहूं का परिवहन भी किया जा चुका है जिससे भंडारण व्यवस्था पर दबाव कम हुआ है।

    सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने वाले किसानों को तेजी से भुगतान भी किया जा रहा है। अब तक 1 लाख 6 हजार 55 किसानों को 1091 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। यह पहल किसानों के विश्वास को मजबूत करने और खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर भी इस प्रक्रिया पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थितियों के कारण शुरुआती दौर में बारदानों की उपलब्धता चुनौती बनी रही लेकिन सरकार ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था कर स्थिति को संभाल लिया। जूट के नए बारदानों के साथ साथ पीपी बैग और पुनः उपयोग योग्य बारदानों का उपयोग किया गया जिससे खरीदी प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।

    वर्तमान में किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है। यह दर किसानों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है।

    प्रदेश सरकार का यह कदम न केवल किसानों को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण है बल्कि यह भी दर्शाता है कि बेहतर उत्पादन के साथ नीति स्तर पर त्वरित निर्णय कितने जरूरी होते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार राज्य की इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और क्या वास्तव में गेहूं खरीदी का लक्ष्य बढ़ाया जाता है

  • मप्र सरकार का किसान हितैषी निर्णय, गेहूं उपार्जन के पंजीयन की तिथि 10 मार्च तक बढ़ी

    मप्र सरकार का किसान हितैषी निर्णय, गेहूं उपार्जन के पंजीयन की तिथि 10 मार्च तक बढ़ी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के किसानों के हित में मध्य प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन व्यवस्था को और अधिक किसान हितैषी बनाया है। गेहूं उपार्जन के पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च से बढ़ाकर 10 मार्च कर दी गई है। साथ ही सरकार ने गेहूं खरीदी पर 40 रुपये अतिरिक्त बोनस देने का भी महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इस प्रकार अब प्रदेश में गेहूं की खरीदी 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने शुक्रवार को बताया कि किसानों की सुविधा और हित को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा यह निर्णय लिया गया है। इससे अधिक से अधिक किसान अपना पंजीयन कराकर समर्थन मूल्य का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रदेश के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    मंत्री राजपूत ने इस किसान हितैषी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की समृद्धि और कृषि विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री राजपूत ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नागलवाड़ी में आयोजित कृषि कैबिनेट बैठक के पश्चात यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार ऐसे निर्णय ले रहे हैं, जिससे प्रदेश के अन्नदाता को सीधा लाभ मिल सके।


    12 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन

    मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये अब तक 12 लाख 4 हजार 708 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। जिला श्योपुर में 9428, खंडवा में 23017, दमोह में 21390, नरसिंहपुर में 24968, शहडोल में 4710, खरगोन में 11945, कटनी में 25497, रतलाम में 30466, सागर में 46731, राजगढ़ में 65029, शिवपुरी में 7633, डिण्डोरी में 2281, धार में 34283, बुरहानपुर में 206, विदिशा में 62996, मऊगंज में 2727, दतिया में 7420, गुना में 11984, मण्डला में 13391, रीवा में 23380, आगर मालवा में 31318, पन्ना में 11994, जबलपुर में 25698, नीमच में 8122, सीहोर में 80036, बालाघाट में 1766, सिंगरौली में 2811, अलीराजपुर में 248, मैहर में 8625, पांढुर्णा में 305, सिवनी में 35081, बैतूल में 9725, झाबुआ में 5256, शाजापुर में 58982, मंदसौर में 40204, ग्वालियर में 5984, निवाड़ी में 1802, उज्जैन में 95821, इंदौर में 32837, देवास में 57021, रायसेन में 51085, बड़वानी में 1911, अनूपपुर में 192, सतना में 31670, मुरैना में 4428, हरदा में 29805, छतरपुर में 15643, सीधी में 4357, टीकमगढ़ में 7141, अशोकनगर में 7339, नर्मदापुरम में 53086, छिंदवाड़ा में 14945, उमरिया में 5854, भोपाल में 27663 और भिण्ड में 6471 किसानों ने पंजीयन कराया है।


    पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था

    पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है।


    पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था

    पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है।

  • MP में गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन तेज, 4.42 लाख से अधिक किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन; 7 मार्च अंतिम तिथि

    MP में गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन तेज, 4.42 लाख से अधिक किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन; 7 मार्च अंतिम तिथि


    मध्यप्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। राज्य सरकार द्वारा किसानों के पंजीयन की सुविधा पहले से अधिक सरल और सुगम बनाए जाने का दावा किया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार अब तक 4 लाख 42 हजार 288 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए अपना पंजीयन करा लिया है। किसानों को 7 मार्च तक पंजीयन कराने का अवसर दिया गया है।

    इस वर्ष केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपये अधिक है। बढ़ा हुआ समर्थन मूल्य किसानों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में 3186 पंजीयन केंद्र स्थापित किए हैं, ताकि किसानों को रजिस्ट्रेशन के लिए दूर-दराज न जाना पड़े और प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    संभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उज्जैन संभाग में सर्वाधिक 1,48,905 किसानों ने पंजीयन कराया है। भोपाल संभाग में 1,09,134 किसान, इंदौर संभाग में 54,587 किसान और जबलपुर संभाग में 39,885 किसान रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इसके अलावा नर्मदापुरम में 34,181, सागर में 25,398, रीवा में 13,260, ग्वालियर में 9,695, चंबल में 4,692 और शहडोल संभाग में 2,551 किसानों ने पंजीयन कराया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रदेशभर में किसान खरीदी व्यवस्था को लेकर सक्रिय हैं।

    किसानों की सुविधा के लिए पंजीयन की दोहरी व्यवस्था की गई है। नि:शुल्क पंजीयन ग्राम पंचायतों के सुविधा केंद्रों, जनपद पंचायत कार्यालयों, तहसील कार्यालयों और सहकारी समितियों में किया जा सकता है। वहीं सशुल्क पंजीयन के लिए एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर CSC, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे की सुविधा उपलब्ध है। किसान अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी माध्यम से पंजीयन करा सकते हैं।

    खाद्य मंत्री ने बताया कि जिन किसानों के मोबाइल नंबर पिछले रबी और खरीफ सीजन से उपलब्ध हैं, उन्हें पंजीयन संबंधी जानकारी SMS के माध्यम से भेजी जा रही है। इसके साथ ही गांवों में डोंडी पिटवाकर, ग्राम पंचायत सूचना पटल पर सूचना चस्पा कर तथा समितियों और मंडियों में बैनर लगाकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, ताकि कोई भी किसान इस प्रक्रिया से वंचित न रह जाए।

    राज्य सरकार का कहना है कि इस बार खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। पंजीयन से लेकर खरीदी और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो सके और किसी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

    किसानों से अपील की गई है कि वे अंतिम तिथि 7 मार्च से पहले अपना पंजीयन अवश्य करा लें, ताकि समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने में किसी प्रकार की बाधा न आए।

  • वल्लभ, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन में GAD टीम की सख्त कार्रवाई, समय से न आने वाले अधिकारियों पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

    वल्लभ, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन में GAD टीम की सख्त कार्रवाई, समय से न आने वाले अधिकारियों पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई


    मध्यप्रदेश के तीन प्रमुख सरकारी भवन-वल्लभ भवन, विंध्याचल भवन और सतपुड़ा भवन—में कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यालयीन समयपालन की जांच के लिए GAD की विशेष टीम तैनात की गई है। यह कदम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आदेश पर लिया गया है, जो कार्यालयीन समय प्रबंधन को लेकर सख्त रवैया अपना रहे हैं। जानकारी के अनुसार, टीम का उद्देश्य समय से कार्यालय में न पहुँचने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान करना और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश दिया है कि गुरुवार सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक तीनों भवनों में सभी कर्मचारियों की उपस्थिति, आने-जाने का समय और किसी भी प्रकार की अनधिकृत अनुपस्थिति का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इस प्रक्रिया में GAD की टीम हर कार्यालय में तैनात रहेगी और समयपालन की स्थिति का विस्तृत ब्यौरा तैयार करेगी।

    सुरक्षा और प्रशासनिक दक्षता के लिहाज से यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही अधिकारियों को समय से कार्यालय आने की हिदायत दी थी। उनका कहना है कि पांच दिन के कार्य सप्ताह के बावजूद कई अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं पहुँचते, जिससे प्रशासनिक काम प्रभावित होता है। इस कारण उन्होंने सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सभी कार्यालय समय पालन करें और कार्य सुचारू रूप से चले।

    यह निरीक्षण ऐसे समय पर किया जा रहा है जब मुख्यमंत्री राज्य के बाहर हैं। वे वर्तमान में राजस्थान और छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं। आज सीएम भीलवाड़ा में उद्योगपतियों से मुलाकात कर निवेश संभावनाओं पर चर्चा करेंगे, इसके बाद वे अन्य कार्यक्रमों में भाग लेंगे और शाम को रायपुर लौटेंगे। इस दौरे के दौरान सचिवालयों में GAD टीम की तैनाती से यह संदेश स्पष्ट होता है कि समयपालन और प्रशासनिक अनुशासन को सख्ती से लागू किया जाएगा, भले ही मुख्यमंत्री दौरे पर हों।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से अधिकारियों में समय पालन की भावना मजबूत होगी और कार्यालयीन कार्यों में बाधा कम होगी। वहीं, यह भी देखा जा रहा है कि ऐसे निरीक्षण से कर्मचारियों और अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ती है और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आती है। GAD की टीम आने-जाने का पूरा रिकॉर्ड तैयार करेगी और अनाधिकृत अनुपस्थिति पाए जाने पर प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यों में सुचारू संचालन सुनिश्चित करना और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में कोई कमी न रहने देना है। समयपालन और अनुशासन पर यह सख्त रुख मंत्रालयों में एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

  • यूजीसी मानकों के पालन और पारदर्शिता पर बहस, राज्य सरकार को समय मिला..

    यूजीसी मानकों के पालन और पारदर्शिता पर बहस, राज्य सरकार को समय मिला..


    जबलपुर । रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह की अंतिम मोहलत दी है यह आदेश शुक्रवार को न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान दिया अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की गई है

    याचिका में नियुक्ति प्रक्रिया पर प्रश्न उठाए गए
    याचिका एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सचिन रजक द्वारा दायर की गई है याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उत्कर्ष अग्रवाल ने तर्क दिया कि कुलगुरु की नियुक्ति निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं हुई याचिका में कहा गया कि पीएचडी उपाधि के बाद न्यूनतम दस वर्ष का शैक्षणिक अनुभव अनिवार्य होता है जबकि इस मानदंड का पालन नहीं किया गया

    यूजीसी मानकों और चयन प्रक्रिया पर बहस
    सुनवाई के दौरान यह भी मुद्दा उठा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं और चयन प्रक्रिया के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है याचिका में तर्क दिया गया कि यदि प्राध्यापक पद पर मूल नियुक्ति ही नियमों के विरुद्ध रही हो तो कुलगुरु पद पर की गई नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है

    राज्य सरकार ने मांगा अतिरिक्त समय
    राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता वेद प्रकाश तिवारी ने न्यायालय में पक्ष रखा और जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया न्यायालय ने आदेश में कहा कि प्रतिवादियों को 7 अप्रैल 2025 को नोटिस तामील किया जा चुका है लेकिन अब तक कोई जवाब प्रस्तुत नहीं हुआ इसे देखते हुए चार सप्ताह का अंतिम अवसर दिया गया

    सार्वजनिक हित और विशेषज्ञों की राय
    मामला उच्च शिक्षा प्रशासन और नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा होने के कारण इसे सार्वजनिक हित से महत्वपूर्ण माना जा रहा है विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय का अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासनिक नियुक्तियों के मानकों और जवाबदेही के दायरे को स्पष्ट कर सकता है

    आगामी सुनवाई पर सभी की नजरें
    फिलहाल सभी पक्षों की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है जहां राज्य सरकार का जवाब और न्यायालय की टिप्पणी मामले की दिशा तय कर सकती है यह विवाद न केवल आरडीवीवी बल्कि राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक नियुक्तियों के लिए भी उदाहरण बन सकता है

  • मप्र बजट सत्र का पहला दिन: कांग्रेस ने भागीरथपुरा दूष‍ित पानी का उठाया मुद्दा, सरकार को घेरा

    मप्र बजट सत्र का पहला दिन: कांग्रेस ने भागीरथपुरा दूष‍ित पानी का उठाया मुद्दा, सरकार को घेरा


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को कांग्रेस विधायक दल ने राज्य सरकार पर तीखे सवाल उठाए और जनहित के मुद्दों को सदन में जोरदार तरीके से पेश किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसमें सरकार और प्रधानमंत्री की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख है, लेकिन प्रदेशवासियों की वास्तविक समस्याओं और पीड़ा को उचित जगह नहीं मिली।
    उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा में हुई दु:खद घटना का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही से 35 निर्दोष लोगों की जान गई। उन्होंने पूछा कि क्या उन परिवारों का दर्द और उनके सवाल इस सदन के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल इस मामले को गंभीरता से उठाएगा और जिम्मेदारों को चिन्हित करने की मांग करेगा।

    मीडिया से बातचीत में उमंग सिंघार ने कहा कि बजट केवल घोषणाओं का दस्तावेज नहीं होना चाहिए, बल्कि यह प्रदेश की जमीनी हकीकत को उजागर करने का माध्यम होना चाहिए। उन्होंने बढ़ते प्रदेश कर्ज पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की, ताकि जनता को आर्थिक स्थिति की पारदर्शी जानकारी मिल सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस विधायक दल बजट में की गई घोषणाओं और उनकी जमीनी वास्तविकता के बीच के अंतर को सदन में सामने लाएगा। नेता प्रतिपक्ष ने दोहराया कि वह लगातार जनता के मुद्दों को उठाएगी और सरकार को जवाबदेह बनाएगी।

  • प्रधानमंत्री मोदी के क्रांतिकारी विकास मार्ग पर अग्रसर मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री मोदी के क्रांतिकारी विकास मार्ग पर अग्रसर मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    मध्यप्रदेश । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकास मॉडल को अपनाते हुए प्रदेश की आर्थिक प्रगति को नई गति देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में वरिष्ठ संपादक एवं लेखक पद्मश्री श्री आलोक मेहता द्वारा रचित पुस्तक ‘रिवॉल्यूशनरी राज – नरेन्द्र मोदी: 25 इयर्स’ कॉफी टेबल बुक ग्रहण करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर देशी-विदेशी निवेश को आकर्षित कर औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, स्टार्ट-अप्स, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाएँ प्रभावी रूप से क्रियान्वित की जा रही हैं।

    यह भेंट-वार्ता दिल्ली से दावोस स्विट्ज़रलैंड में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक में भाग लेने से पूर्व हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री की नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रदेश में पुस्तकों और पठन-संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गीता भवन निर्माण योजना में पुस्तकालयों का प्रावधान भी किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार पत्रकारों, साहित्यकारों एवं सांस्कृतिक कलाकारों को सामाजिक जागरूकता के लिए हर संभव सहयोग, सहायता एवं प्रोत्साहन देती रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुस्तक में उल्लिखित समाज कल्याण, महिला सशक्तिकरण, युवाओं में अनुशासन तथा आत्मनिर्भर विकसित भारत के प्रधानमंत्री के सपनों को साकार करने के लिए वे पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने पुस्तक की विस्तृत भूमिका केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा लिखे जाने को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय मंत्री श्री शाह, प्रधानमंत्री के संकल्पों को क्रियान्वित करते हुए आतंकवाद और नक्सल समस्या से प्रभावी ढंग से निपट रहे हैं, जिससे देश विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। ऐसे विचारों को जन-जन तक पहुँचाने में यह पुस्तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और इसे शिक्षण संस्थानों व पुस्तकालयों तक पहुँचाया जाना चाहिए।उल्लेखनीय है कि पुस्तक का प्रकाशन शुभी पब्लिकेशंस द्वारा किया गया।

  • कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को फटकारा मंत्री विजय शाह की माफी पर उठाए सवाल

    कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को फटकारा मंत्री विजय शाह की माफी पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने नाराजगी जताई कि एसआईटी ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन राज्य सरकार ने 19 अगस्त 2025 से अब तक कोई निर्णय नहीं लिया।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का सख्त रुख

    CJI सूर्यकांत ने कहा कि एसआईटी ने पूरी जांच कर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश राज्य सरकार को भेजी थी।

    अब तक लंबित निर्णय के चलते कानून के अनुसार कार्रवाई नहीं हो सकी।

    खुफिया विभाग के डीआईजी डी. कल्याण चक्रवर्ती से कोर्ट ने मामले के अन्य पहलुओं पर ध्यान रखने के निर्देश दिए।

    विजय शाह की माफी पर सवाल

    मंत्री की ओर से माफी पेश करने का दावा किया गया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में कोई माफीनामा मौजूद नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने उनकी माफी को मगरमच्छ के आंसू बताते हुए इसे कानूनी राहत से अलग करार दिया।

    ऑनलाइन माफी पर भी कोर्ट ने असंतोष जताया और स्पष्ट किया कि ऐसे कदमों से कार्रवाई से राहत नहीं मिल सकती।

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश

    मध्य प्रदेश सरकार को अभी तुरंत कार्रवाई करने और एसआईटी की सिफारिशों के मुताबिक मंजूरी देने का निर्देश।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब लंबित मामलों में विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • उज्जैन प्रवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव बृहस्पति महादेव के दर्शन आमजन से संवाद और विकास कार्यों का लिया जायजा

    उज्जैन प्रवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव बृहस्पति महादेव के दर्शन आमजन से संवाद और विकास कार्यों का लिया जायजा


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को उज्जैन प्रवास के दौरान धार्मिक सामाजिक और विकास से जुड़े कार्यक्रमों में पूरी तरह सक्रिय नजर आए। महाकाल उत्सव के समापन के अगले ही दिन मुख्यमंत्री का यह दौरा आस्था, संवाद और विकास-तीनों आयामों को एक साथ समेटे रहा। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उन्होंने दिन की शुरुआत गोलामंडी क्षेत्र स्थित प्राचीन बृहस्पति महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन से की और प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

    मुख्यमंत्री अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ मंदिर पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से अभिषेक और आरती की गई। पूजा के बाद उन्होंने कहा कि बृहस्पति महादेव मंदिर से उनका पुराना और भावनात्मक जुड़ाव रहा है। सार्वजनिक जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर वे यहां आशीर्वाद लेने आते रहे हैं। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद यह उनका पहला बृहस्पतिवार दर्शन था, जिसे उन्होंने अपने लिए विशेष और भावुक क्षण बताया।पूजन के उपरांत मुख्यमंत्री ने उज्जैन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि उज्जैन केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों को लेकर उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार पूरी गंभीरता और योजना के साथ काम कर रही है। सड़क, पेयजल, स्वच्छता, यात्री सुविधाएं और आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आने वाले वर्षों में उज्जैन वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत कर सके।

    धार्मिक कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री का अंदाज पूरी तरह बदला नजर आया, जब वे शहर के बीच एक साधारण सी चाय की दुकान पर पहुंचे। यहां उन्होंने आम नागरिकों के साथ बैठकर चाय पी और अनौपचारिक बातचीत की। लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने शहर की समस्याएं, रोजमर्रा की जरूरतें और विकास से जुड़ी अपेक्षाएं रखीं। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ ध्यान से उनकी बातें सुनीं, बल्कि समाधान का भरोसा भी दिया। जब चाय का भुगतान करने की बारी आई और दुकानदार ने पैसे लेने से मना किया, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कराते हुए स्वयं भुगतान किया। इस सरल व्यवहार ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।

    इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय के समीप निर्माणाधीन गीता भवन का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यह भवन जी प्लस टू संरचना में तैयार किया जा रहा है और अप्रैल 2026 तक इसके पूर्ण होने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने निर्माण की गुणवत्ता, प्रगति और समय-सीमा की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और भवन तय समय में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा होना चाहिए।मुख्यमंत्री का यह उज्जैन दौरा साफ संकेत देता है कि उनकी प्राथमिकताओं में आस्था जनता से सीधा संवाद और विकास कार्यों की निगरानी-तीनों समान रूप से शामिल हैं।