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  • बिना अनुमति प्रतिमा स्थापना पर बवाल, हटाने की अपील के विरोध में प्रदर्शन

    बिना अनुमति प्रतिमा स्थापना पर बवाल, हटाने की अपील के विरोध में प्रदर्शन


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के दिनारा थाना क्षेत्र स्थित छितीपुर गांव में एक खेल मैदान अब विवाद का केंद्र बन गया है। यहां शासकीय मैदान के बीच अचानक बिना प्रशासनिक अनुमति एक मूर्ति स्थापित किए जाने से माहौल तनावपूर्ण हो गया है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन मामला शांत होने के बजाय और उलझ गया।

    खेल मैदान के बीच रखी गई मूर्ति, ग्रामीणों की भीड़ जुटी

    जानकारी के अनुसार, छितीपुर गांव का यह मैदान स्थानीय युवाओं के लिए क्रिकेट और अन्य खेल गतिविधियों का मुख्य केंद्र है। इसी मैदान के बीच अज्ञात लोगों द्वारा मूर्ति रख दी गई। जैसे ही यह खबर गांव में फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण खासतौर पर बहुजन समाज की महिलाएं मौके पर पहुंच गईं और मूर्ति के समर्थन में जुट गईं।

    पुलिस की अपील ठुकराई, धरने पर बैठे ग्रामीण

    मौके पर पहुंची दिनारा थाना पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस ने बताया कि किसी भी सार्वजनिक या सरकारी जमीन पर मूर्ति स्थापित करने के लिए प्रशासन से अनुमति लेना जरूरी होता है। साथ ही, मैदान के बीच मूर्ति होने से खेल गतिविधियां प्रभावित होंगी।
    हालांकि, पुलिस की समझाइश का ग्रामीणों पर कोई असर नहीं पड़ा। इसके विरोध में ग्रामीण मूर्ति के चारों ओर बैठकर धरने पर बैठ गए और हटाने से साफ इनकार कर दिया।

    तनावपूर्ण माहौल, प्रशासन सतर्क

    घटना के बाद से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सतर्क है।

    अधिकारियों को दी गई सूचना, निर्देश का इंतजार

    दिनारा थाना प्रभारी रविन्द्र सिंह ने बताया कि शासकीय भूमि पर अज्ञात लोगों द्वारा मूर्ति रखी गई है। मामले की सूचना अनुविभागीय अधिकारी (SDO) को दे दी गई है और उनके निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    छितीपुर गांव का यह मामला अब प्रशासन और ग्रामीणों के बीच टकराव का रूप लेता दिख रहा है। एक ओर नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर स्थानीय लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजर टिकी हुई है।

  • डॉ. अंबेडकर जयंती पर बड़ा फैसला: उम्रकैद काट रहे 9 बंदी हुए रिहा

    डॉ. अंबेडकर जयंती पर बड़ा फैसला: उम्रकैद काट रहे 9 बंदी हुए रिहा


    नई दिल्ली। ग्वालियर की सेंट्रल जेल में अंबेडकर जयंती के अवसर पर एक अहम मानवीय निर्णय लिया गया। इस मौके पर आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 बंदियों को रिहा किया गया, जिनमें एक महिला बंदी भी शामिल है। शासन द्वारा यह निर्णय उनके अच्छे आचरण और सुधारात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी को देखते हुए लिया गया।

    14 साल से अधिक सजा काट चुके थे सभी बंदी
    रिहा किए गए सभी बंदी हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए थे और 14 साल से अधिक समय तक जेल में सजा काट चुके थे। वे एक ही प्रकरण से जुड़े थे और लंबे समय से उनके व्यवहार और सुधार को लगातार परखा जा रहा था।

    शासन की मंजूरी के बाद पूरी हुई प्रक्रिया
    जेल प्रशासन ने इन बंदियों के नाम और आचरण से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेजी थी। प्रस्ताव पर स्वीकृति मिलने के बाद उनकी रिहाई की औपचारिकताएं पूरी की गईं। जेल अधीक्षक विदित सरवईया के अनुसार, सभी बंदियों का आचरण संतोषजनक रहा, जिसके आधार पर उनकी शेष सजा माफ की गई।

    परिजनों से मिलकर भावुक हुए बंदी
    जेल से बाहर आते ही बंदियों ने अपने परिवारजनों से मुलाकात की। लंबे समय बाद मिलन के इस भावुक क्षण में कई बंदी और उनके परिजन भावुक नजर आए और एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी जताई।

    सम्मान के साथ दी गई विदाई
    रिहाई से पहले जेल प्रशासन द्वारा सभी बंदियों को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान जेल अधिकारी और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल को पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    अब अन्य अवसरों पर भी मिल रही राहत
    पहले केवल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर ही इस तरह की सजा माफी दी जाती थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से अंबेडकर जयंती और गांधी जयंती जैसे अवसरों पर भी यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे सुधार की दिशा में बंदियों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

    रिहा हुए बंदियों के नाम
    रिहा किए गए बंदियों में सुरेश उर्फ सज्जन, पंचम जाटव, आशीष शर्मा, जमुना अहिरवार, छोटे और छोटया माली, अजय तोमर, मोहर सिंह, महेंद्र सिंह और लीलाबाई शामिल हैं।

  • ओंकारेश्वर में बड़ा हादसा टला: नाव पलटने से 10 श्रद्धालु डूबे, समय रहते सभी को बचाया गया

    ओंकारेश्वर में बड़ा हादसा टला: नाव पलटने से 10 श्रद्धालु डूबे, समय रहते सभी को बचाया गया


    खंडवा । मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में शुक्रवार को नर्मदा नदी में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। झारखंड से आए श्रद्धालुओं से भरी एक नाव पलट गई, जिससे उसमें सवार 10 लोग डूब गए। हालांकि, समय रहते रेस्क्यू कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इनमें से दो श्रद्धालुओं की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    नौका विहार के दौरान हुआ हादसा

    जानकारी के मुताबिक, झारखंड के रांची से करीब 52 श्रद्धालुओं का समूह ओंकारेश्वर दर्शन के लिए पहुंचा था। दोपहर के समय सभी लोग अलग-अलग नावों में बैठकर नर्मदा नदी में नौका विहार कर रहे थे। इसी दौरान एक नाव में सवार 10 लोग ब्रह्मपुरी घाट से संगम घाट की ओर जा रहे थे।

    चट्टान से टकराने के बाद पलटी नाव

    नवीन घाट के पास नाव अचानक एक चट्टान से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि लकड़ी की नाव का एक हिस्सा टूट गया और उसमें पानी भरने लगा। कुछ ही पलों में नाव असंतुलित होकर पलट गई, जिससे उसमें सवार सभी लोग नदी में गिर गए।

    होमगार्ड की तत्परता से बची जानें

    घटना के समय मौके पर मौजूद होमगार्ड जवानों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। आठ लोगों की हालत सामान्य है, जबकि दो श्रद्धालुओं ने ज्यादा पानी निगल लिया, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई।

    गंभीर घायलों को अस्पताल में भर्ती

    दोनों गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सनावद भेजा गया है। चिकित्सकों के अनुसार उनके फेफड़ों में पानी चला गया है, जिससे उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

    पुलिस कर रही जांच
    खंडवा पुलिस के अनुसार, हादसे में शामिल लोगों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल घटना के कारणों की जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

  • गुफानुमा खदानों का अंत शहडोल में अवैध कोयला माफिया पर बड़ी कार्रवाई

    गुफानुमा खदानों का अंत शहडोल में अवैध कोयला माफिया पर बड़ी कार्रवाई

    शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में अवैध कोयला खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है लंबे समय से जानलेवा खतरा बनी गुफानुमा सुरंगों पर आखिरकार बुलडोजर चला दिया गया यह कार्रवाई न सिर्फ अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए की गई बल्कि स्थानीय लोगों और मवेशियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी बेहद जरूरी मानी जा रही थी

    जिले के अमलाई थाना क्षेत्र के बटुरा और टिकुरीटोला इलाकों में जमीन के नीचे बनाई गई ये खदानें किसी हादसे का इंतजार करती नजर आ रही थीं संकरी और गहरी सुरंगों के जरिए अवैध रूप से कोयला निकाला जा रहा था जो कभी भी धंस सकती थीं और बड़ी जनहानि का कारण बन सकती थीं

    लगातार मिल रही शिकायतों और बढ़ते खतरे को देखते हुए अमलाई पुलिस और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की टीम ने संयुक्त अभियान चलाया मौके पर पहुंची टीम ने जेसीबी मशीनों की मदद से करीब पांच गुफानुमा सुरंगों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और उन्हें मिट्टी से पाटकर बंद कर दिया गया

    कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र को पुलिस की निगरानी में सुरक्षित किया गया और खुले गड्ढों को भी भर दिया गया ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना की आशंका को खत्म किया जा सके प्रशासन का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है

    बताया जा रहा है कि इन अवैध खदानों को पहले भी कई बार बंद कराया जा चुका है लेकिन खनन माफिया हर बार नए तरीके से सुरंगें खोदकर फिर से कोयला निकालना शुरू कर देते हैं यही वजह है कि इस बार प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए व्यापक कार्रवाई की है

    यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि अवैध खनन सिर्फ कानून का उल्लंघन ही नहीं बल्कि लोगों की जान के लिए भी गंभीर खतरा है ऐसे में जरूरी है कि इस तरह की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके

  • छिंदवाड़ा सड़क दुर्घटना में 10 की मौत, मंत्री राकेश सिंह ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया

    छिंदवाड़ा सड़क दुर्घटना में 10 की मौत, मंत्री राकेश सिंह ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया


    छिंदवाड़ा । मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में बीते गुरुवार रात हुई बस-पिकअप टक्कर के बाद प्रदेश के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह देर रात जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल लिया। मंत्री ने चिकित्सकों से घायलों के उपचार की विस्तृत जानकारी ली और सुनिश्चित किया कि सभी को बेहतर और समय पर चिकित्सा सुविधा मिले।

    इस हादसे में कुल 10 लोगों की मौत हुई थी जिनमें 6 पुरुष 3 महिलाएं और 1 बच्चा शामिल हैं। सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज जारी है। दो गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए नागपुर रेफर किया गया है।

    मंत्री राकेश सिंह ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवारों को प्रत्येक को चार-चार लाख रुपए और गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को एक-एक लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हर तरह से पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।

    इस दौरान जबलपुर से डॉक्टरों की विशेष टीम भी अस्पताल पहुँची और उन्होंने सभी घायलों का परीक्षण किया। मंत्री ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए ताकि उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे। घटना स्थल छिंदवाड़ा से नागपुर रोड पर था जहां बस और पिकअप में जोरदार टक्कर हुई। यह हादसा न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पूरे जिले के लिए सदमे की स्थिति पैदा कर गया।

    प्रभारी मंत्री राकेश सिंह की रातभर की पहल ने न केवल घायलों को बेहतर इलाज सुनिश्चित किया बल्कि प्रशासनिक तंत्र को भी सक्रिय किया। इसके अलावा यह कदम पीड़ित परिवारों के लिए सरकार की तत्परता और संवेदनशीलता का संदेश भी है। यह हादसा सड़क सुरक्षा की गंभीरता और समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता को उजागर करता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में मृतकों और घायलों को तत्काल मदद मिल सके।

  • 5 मौतें और भीड़ का बेरहम चेहरा ग्वालियर हादसे में मदद से ज्यादा मोबाइल उठा

    5 मौतें और भीड़ का बेरहम चेहरा ग्वालियर हादसे में मदद से ज्यादा मोबाइल उठा


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने न सिर्फ सड़क सुरक्षा बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। थाठीपुर थाना क्षेत्र के परशुराम चौराहे के पास हुए भीषण सड़क हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भयावह था कि टक्कर के बाद घटनास्थल पर चीख पुकार मच गई लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि वहां मौजूद लोगों का व्यवहार इंसानियत को शर्मसार करने वाला था।

    जानकारी के मुताबिक एक तेज रफ्तार बोलेरो कार ने ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। ऑटो में चालक सहित कुल नौ लोग सवार थे जो शीतला माता के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ऑटो के परखच्चे उड़ गए और पांच लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतकों में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं चार अन्य घायल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं और उनका इलाज अस्पताल में जारी है।

    हादसे के बाद जो दृश्य सामने आया उसने सभी को झकझोर कर रख दिया। जहां एक तरफ घायल लोग दर्द से तड़प रहे थे वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग उनकी मदद करने के बजाय मोबाइल फोन निकालकर वीडियो बनाने और सेल्फी लेने में जुट गए। वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक युवक लाशों के पास खड़ा होकर सेल्फी ले रहा है मानो वह किसी सामान्य घटना का हिस्सा हो। आसपास खड़े कुछ लोग इस हरकत पर नाराजगी जताते हुए यह कहते भी सुनाई दे रहे हैं कि क्या किसी में हिम्मत नहीं है कि घायलों को अस्पताल पहुंचाया जाए।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर मौजूद कुछ लोग लगातार चिल्लाते रहे कि घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया जाए लेकिन भीड़ में से बहुत कम लोगों ने आगे आकर मदद की। यह स्थिति न सिर्फ दुखद बल्कि चिंताजनक भी है क्योंकि ऐसे समय में हर सेकंड कीमती होता है और समय पर मदद मिल जाए तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

    इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं जहां इंसान की जान से ज्यादा अहमियत वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को दी जा रही है। कई यूजर्स ने इसे मानवता का पतन बताया है और ऐसी मानसिकता पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा रही है।

    यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि समाज के लिए एक आईना भी है जो दिखाता है कि तकनीक के इस दौर में हम संवेदनाओं से कितनी दूर होते जा रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि ऐसे हादसों के समय लोग तमाशबीन बनने के बजाय जिम्मेदार नागरिक बनें और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं क्योंकि कई बार एक छोटा सा कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।

  • प्रदेश में पेट्रोल पंपों पर पैनिक खरीद की कोई आवश्यकता नहीं, स्टॉक पूरा उपलब्ध : मंत्री

    प्रदेश में पेट्रोल पंपों पर पैनिक खरीद की कोई आवश्यकता नहीं, स्टॉक पूरा उपलब्ध : मंत्री


    भोपाल। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बुधवार को स्पष्ट किया कि प्रदेश के पेट्रोल पंपों में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पूरी तरह निर्बाध है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि 24 मार्च 2026 को कुछ जिलों में अफवाह के कारण आम जनता के बीच पेट्रोल की पैनिक खरीद और पेट्रोल पंपों पर लंबी लाईनों की स्थिति बन गई थी लेकिन वास्तविकता यह है कि स्टॉक पर्याप्त मात्रा में मौजूद है।

    मंत्री राजपूत ने कहा कि डिपो से पेट्रोल पंपों को नियमित आपूर्ति की जा रही है और किसी भी तरह की अफवाह से भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घबराहट में न तो अतिरिक्त खरीदारी करें और न ही पेट्रोल या डीजल का संग्रह करें। उनका कहना था कि अफवाहें आम जनता को भ्रमित करने का साधन बन सकती हैं जबकि वास्तविक स्थिति पूरी तरह सामान्य और नियंत्रण में है।

    ऑयल कंपनियों की ओर से भी पुष्टि की गई है कि वर्तमान में प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है। राज्य स्तर से नियंत्रण कक्ष और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं ताकि किसी भी आपूर्ति या स्टॉक से संबंधित समस्या का त्वरित समाधान किया जा सके।

    खाद्य मंत्री ने यह भी बताया कि पेट्रोल पंपों पर लगातार निगरानी की जा रही है और सभी पंप नियमित रूप से डिपो से सामग्री प्राप्त कर रहे हैं। जनता को सलाह दी गई कि अफवाहों के आधार पर कोई भी निर्णय न लें और पेट्रोल पंपों पर अनुचित भीड़ या झुंझलाहट पैदा न करें।

    प्रदेश सरकार की यह स्पष्टता उन लोगों के लिए राहत की खबर है जिन्होंने अफवाहों के कारण पेट्रोल खरीद में असमंजस का सामना किया। मंत्री राजपूत ने कहा कि आम जनता की सुरक्षा और सुविधा के लिए आपूर्ति प्रणाली पूरी तरह सक्षम और नियंत्रण में है। उन्होंने अपील की कि लोग सामान्य स्थिति बनाए रखें और केवल जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें।

    इस प्रकार खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की निरंतर निगरानी और ऑयल कंपनियों के त्वरित वितरण तंत्र ने सुनिश्चित किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी न हो और सामान्य जीवन प्रभावित न हो।

  • मंडला में जनपद CEO के खिलाफ सरपंचों का प्रदर्शन, 42 जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर से की शिकायत; 7 दिन में कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

    मंडला में जनपद CEO के खिलाफ सरपंचों का प्रदर्शन, 42 जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर से की शिकायत; 7 दिन में कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी


    मंडला। मध्यप्रदेश के मंडला जिले में बीजाडांडी जनपद पंचायत क्षेत्र के सरपंचों और जनप्रतिनिधियों ने जनपद पंचायत CEO के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जनपद सीईओ बसंती दुबे को पद से हटाने की मांग को लेकर 42 सरपंचों जनपद अध्यक्ष और सदस्यों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

    प्रदर्शन कर रहे जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। सरपंचों ने सीईओ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हर कार्य में कमीशन की मांग की जाती है और काम समय पर नहीं किए जाते जिससे पंचायतों का कामकाज प्रभावित हो रहा है।

    शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जनपद स्तर पर जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा की जा रही है और अधिकारियों द्वारा मनमानी तरीके से कार्य किया जा रहा है। सरपंचों का कहना है कि प्रशासनिक सहयोग के बजाय उन्हें अनावश्यक दबाव का सामना करना पड़ रहा है जिससे विकास कार्य बाधित हो रहे हैं।

    जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पंचायतों में कोई भी काम सुचारू रूप से नहीं चल पा रहा है और स्थानीय स्तर पर समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इससे पहले भी निवास जनपद क्षेत्र में इसी तरह के आरोपों को लेकर एक अन्य सीईओ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा चुका है जिससे यह मुद्दा और गंभीर हो गया है।

    इस मामले में जनपद सीईओ की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं शिकायतकर्ताओं में राजेंद्र पुटा मदन सिंह और पुष्पा मरकाम शामिल हैं जिन्होंने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पूरे मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि तय समय सीमा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो जिले में बड़ा जनआंदोलन देखने को मिल सकता है।

  • दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देने पर जोर, भोपाल में हुई क्षेत्रीय बैठक में जागरूकता अभियान की जरूरत बताई गई

    दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देने पर जोर, भोपाल में हुई क्षेत्रीय बैठक में जागरूकता अभियान की जरूरत बताई गई


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित क्षेत्रीय परामर्श बैठक में दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण और पुनर्वास को लेकर गंभीर मंथन हुआ। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को संस्थाओं से निकालकर परिवार का स्नेह दिलाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी है।

    मंत्री भूरिया ने कहा कि समाज की सकारात्मक सोच और संवेदनशीलता से ही इन बच्चों को सुरक्षित और बेहतर भविष्य मिल सकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिव्यांग शब्द के उपयोग से समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में गैर संस्थागत पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के माध्यम से स्पॉन्सरशिप और आफ्टर केयर जैसी सुविधाएं देकर बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

    बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जी. वी. रश्मि ने कहा कि भारतीय समाज में संस्कारों का महत्व होने के बावजूद दिव्यांग बच्चों को गोद लेने में सामाजिक रूढ़ियां बाधा बनती हैं। उन्होंने जोर दिया कि समाज की संवेदनशीलता ही इन बच्चों का भविष्य बदल सकती है।

    वहीं केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की उप निदेशक ऋचा ओझा ने बताया कि देशभर में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश में दत्तक ग्रहण का प्रतिशत अभी भी काफी कम है और इसे बढ़ाने के लिए नीति सुधार और जागरूकता जरूरी है।

    मंत्री भूरिया ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2024 25 में देश में 4 155 बच्चों को गोद लिया गया जिनमें केवल 7 प्रतिशत दिव्यांग बच्चे थे। इनमें से अधिकांश को विदेशी दंपत्तियों ने अपनाया जो देश में जागरूकता की कमी को दर्शाता है।

    उन्होंने सुझाव दिया कि सफल दिव्यांग व्यक्तियों को ब्रांड एम्बेसडर बनाकर समाज में सकारात्मक संदेश फैलाया जा सकता है। साथ ही ऐसे बच्चों को गोद लेने वाले परिवारों के लिए चिकित्सा फिजियोथेरेपी शिक्षा सहायता और बीमा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

    बैठक में उत्तर प्रदेश उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान दत्तक ग्रहण की वर्तमान स्थिति कानूनी प्रक्रियाओं की चुनौतियों और बेहतर समन्वय के उपायों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में बालिका गृह भोपाल और जवाहर बाल भवन के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दत्तक ग्रहण के महत्व का संदेश भी दिया।

  • मध्यप्रदेश में गेहूँ खरीदी 1 अप्रैल से शुरू, 19 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन; बोनस के साथ समर्थन मूल्य ₹2625 प्रति क्विंटल

    मध्यप्रदेश में गेहूँ खरीदी 1 अप्रैल से शुरू, 19 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन; बोनस के साथ समर्थन मूल्य ₹2625 प्रति क्विंटल


    भोपाल। मध्यप्रदेश के मध्य प्रदेश में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी का कार्यक्रम जल्द शुरू होने जा रहा है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि इंदौर उज्जैन भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में गेहूँ खरीदी 1 अप्रैल से होगी जबकि शेष संभागों में यह 7 अप्रैल से शुरू होगी। खरीदी शासकीय कार्य दिवसों में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि इस वर्ष गेहूँ खरीदी पर किसानों को 40 रुपये अतिरिक्त बोनस भी मिलेगा। इसके साथ प्रदेश में गेहूँ की दर 2625 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है।

    इस रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन हेतु कुल 19,04,651 किसानों ने पंजीयन कराया है जो पिछले वर्ष 15,44,000 से अधिक है। जिलेवार पंजीयन की बात करें तो इंदौर में 71,713 उज्जैन में 1,23,281 भोपाल में 37,129 और नर्मदापुर में 71,831 किसानों ने पंजीयन कराया है। अन्य जिलों में भी हजारों किसानों ने अपना पंजीयन कराया है जिससे इस वर्ष खरीदी की तैयारी मजबूत दिखाई दे रही है।

    मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित समय और केंद्रों पर पहुंचकर अपने गेहूँ का पंजीयन और विक्रय सुनिश्चित करें। राज्य सरकार ने किसानों को समर्थन मूल्य और बोनस का लाभ सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं। इस कार्यक्रम से मध्यप्रदेश में गेहूँ उत्पादन करने वाले किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है और खरीदी के साथ ही रबी विपणन वर्ष का संचालन सुचारू रूप से होगा।