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  • इंदौर में 2 करोड़ का फायर फाइटिंग रोबोट, आग बुझाने में करेगा मदद

    इंदौर में 2 करोड़ का फायर फाइटिंग रोबोट, आग बुझाने में करेगा मदद


    इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में अब आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। नगर निगम ने करीब ₹2 करोड़ की लागत से एक AI आधारित फायर फाइटिंग रोबोट तैनात किया है, जो उन जगहों पर जाकर आग बुझा सकता है, जहां इंसानों का जाना बेहद खतरनाक होता है। यह रोबोट जयपुर की रोबोटिक्स कंपनी द्वारा विकसित किया गया है और इसे विशेष रूप से औद्योगिक और उच्च जोखिम वाली आग की घटनाओं के लिए तैयार किया गया है।

    कैसे काम करता है यह रोबोट?
    यह फायर फाइटिंग रोबोट पूरी तरह रिमोट ऑपरेटेड है और इसे दूर से नियंत्रित किया जाता है। इसमें लगा कैमरा और डिस्प्ले सिस्टम ऑपरेटर को लाइव स्थिति दिखाता है, जिससे यह पता चलता है कि आगे क्या हो रहा है। यह एक तरह का क्रॉलर टैंक सिस्टम है, जो खराब रास्तों, मलबे और सीढ़ियों पर भी आसानी से चल सकता है।

    500°C की आग में भी काम करने की क्षमता
    इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसकी गर्मी सहने की क्षमता है। यह लगभग 500 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी काम कर सकता है।
    इसके अलावा इसमें-
    थर्मल इमेजिंग कैमरा
    AI आधारित ऑब्जेक्ट डिटेक्शन
    हाई प्रेशर वाटर और फोम सिस्टम
    मजबूत क्रॉलर ट्रैक
    जैसी आधुनिक तकनीकें लगी हैं, जो इसे बेहद प्रभावी बनाती हैं।

    8 से 10 घंटे तक लगातार काम
    यह रोबोट एक बार चार्ज होने पर लगभग 8 से 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। इसकी बैटरी सिस्टम और कूलिंग तकनीक इसे लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद करती है। यह फायर टैंकर से जुड़कर पानी और फोम दोनों के जरिए आग पर काबू पा सकता है।
    इंदौर में इस रोबोट का इस्तेमाल कई बड़े हादसों में किया गया है, जिनमें शामिल हैं-
    नवदा पंथ प्लास्टिक फैक्ट्री आग
    परदेशीपुरा की आग
    सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र की घटना
    पीथमपुर की बड़ी औद्योगिक आग
    इन सभी मामलों में इस रोबोट ने जोखिम भरे हालात में फायरफाइटिंग में अहम भूमिका निभाई।

    क्यों है यह तकनीक खास?
    यह रोबोट खास तौर पर उन जगहों के लिए बनाया गया है जहां-
    तेल और गैस प्लांट
    केमिकल और पेट्रोकेमिकल फैक्ट्री
    बड़े गोदाम और लॉजिस्टिक हब
    बिजली संयंत्र और ट्रांसफॉर्मर यूनिट
    जैसे हाई रिस्क क्षेत्र शामिल हैं।
    यह लगभग 500 किलो तक का भार भी संभाल सकता है और भारी मलबे में भी आसानी से मूव कर सकता है।

    अधिकारियों का बयान
    नगर निगम कमिश्नर के अनुसार, यह रोबोट फायर टैंकर से जुड़कर काम करता है और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में भी लंबे समय तक आग बुझाने में सक्षम है। इससे फायरफाइटर्स की जान का जोखिम काफी कम हो जाता है।

    इंदौर का यह फायर फाइटिंग रोबोट आधुनिक आपदा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह तकनीक न सिर्फ आग बुझाने की क्षमता बढ़ाती है, बल्कि दमकलकर्मियों की सुरक्षा को भी नए स्तर पर ले जाती है।

  • भोपाल के कोलार रोड पर SUV में लगी आग, इलाके में मची अफरा-तफरी

    भोपाल के कोलार रोड पर SUV में लगी आग, इलाके में मची अफरा-तफरी


    नई दिल्ली। राजधानी भोपाल के कोलार रोड इलाके में शनिवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क किनारे खड़ी एक SUV में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया और करीब 10 फीट ऊंची लपटें उठने लगीं। घटना दोपहर करीब 3:30 बजे की बताई जा रही है। कोलार रोड स्थित चूनाभट्टी रेस्ट हाउस के आगे गार्डन रेसिडेंस के गेट के पास SUV खड़ी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले वाहन से धुआं निकलता दिखाई दिया और कुछ ही सेकंड में आग ने विकराल रूप ले लिया।

    EV चार्जिंग स्टेशन और ट्रांसफार्मर के कारण बढ़ा खतरा
    जिस स्थान पर SUV में आग लगी, उसके पास ही इलेक्ट्रिक व्हीकल का चार्जिंग स्टेशन और रहवासी इलाका मौजूद है। वहीं नजदीक में ट्रांसफार्मर भी लगा हुआ था। ऐसे में लोगों को किसी बड़े ब्लास्ट या हादसे का डर सताने लगा।
     आग की लपटें बढ़ते देख आसपास मौजूद लोग तुरंत दूर हट गए। स्थानीय लोगों ने एहतियातन आसपास खड़े वाहनों को हटाया और सड़क के एक हिस्से को खाली कराया। घटना के चलते कुछ देर के लिए इलाके में यातायात भी प्रभावित रहा।

    दमकल पहुंची, लेकिन तब तक जल चुकी थी कार
    सूचना मिलते ही कोलार फायर स्टेशन से दमकल की टीम मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड कर्मियों ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक SUV लगभग पूरी तरह जल चुकी थी। प्रत्यक्षदर्शी राहुल सिंगाड़िया ने बताया कि आग इतनी तेज थी कि वाहन के टायर तक जल गए। मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    शॉर्ट सर्किट की आशंका
    फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। पुलिस और फायर विभाग मामले की जांच कर रहे हैं।

  • झाबुआ में कृषि जागरूकता अभियान शुरू, कलेक्टर ने किया रथ का शुभारंभ

    झाबुआ में कृषि जागरूकता अभियान शुरू, कलेक्टर ने किया रथ का शुभारंभ

    झाबुआ। जिले में किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, तकनीकी जानकारी और शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है। 16 मई को कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने कलेक्टर कार्यालय परिसर से 10 दिवसीय कृषि रथ को हरी झंडी दिखाकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रवाना किया।

    यह कृषि रथ “किसान कल्याण वर्ष 2026” के अंतर्गत शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। यह रथ आने वाले 10 दिनों तक झाबुआ जिले के सभी विकासखंडों और गांवों का भ्रमण करेगा और किसानों को कृषि से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी देगा।

    गांव-गांव पहुंचेगी तकनीकी जानकारी
    इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को उन्नत खेती पद्धतियों से अवगत कराना है। रथ के माध्यम से किसानों को उर्वरक वितरण की नई ई-विकास प्रणाली और ई-टोकन व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

    इसके साथ ही किसानों को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, पराली प्रबंधन, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया जाएगा। कृषि रथ को इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें आधुनिक खेती से जुड़ी सभी जानकारियों को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

    विशेषज्ञ टीम करेगी किसानों का मार्गदर्शन
    इस रथ के साथ हर दिन कृषि विशेषज्ञों की एक विशेष टीम भी मौजूद रहेगी, जो सीधे गांवों में जाकर किसानों से संवाद करेगी। यह टीम खरीफ फसल की बुआई से पहले आवश्यक तैयारियों पर किसानों को मार्गदर्शन देगी और फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत कम करने के व्यावहारिक उपाय बताएगी। कृषि विशेषज्ञ मौके पर ही किसानों की समस्याओं का समाधान करेंगे और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बेहतर खेती के तरीके सुझाएंगे। इससे किसानों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

    किसानों से भागीदारी की अपील
    उप संचालक कृषि एन.एस. रावत ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि जब कृषि रथ उनके गांव पहुंचे तो वे विशेषज्ञों से अधिक से अधिक संवाद करें और इस अवसर का लाभ उठाएं। इस अवसर पर उप संचालक कृषि एन.एस. रावत, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगदीश मोर्य, सहायक संचालक उद्यानिकी बी.एस. चौहान सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम में किसानों के बीच उत्साह देखने को मिला और इस पहल को कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी बताया गया।

  • भोजशाला निर्णय के बाद बड़वानी में आतिशबाजी, माहौल हुआ उत्साहपूर्ण

    भोजशाला निर्णय के बाद बड़वानी में आतिशबाजी, माहौल हुआ उत्साहपूर्ण


    बड़वानी।
    धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में हाईकोर्ट द्वारा आए फैसले के बाद बड़वानी शहर सहित पूरे जिले में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। फैसले में भोजशाला को मंदिर के रूप में मान्यता मिलने के बाद सकल हिंदू समाज के लोगों ने शुक्रवार देर रात बड़े पैमाने पर जश्न मनाया।

    शहर के पाटी नाका, मोटी माता चौक, रणजीत चौक सहित कई प्रमुख स्थानों पर लोग एकत्रित हुए और आतिशबाजी की गई। आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी से पूरा वातावरण जगमगा उठा। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया।

    जय श्रीराम के नारों से गूंजा शहर
    जश्न के दौरान पूरे शहर में “जय श्रीराम” और “भारत माता की जय” के जोरदार नारे लगाए गए। युवाओं की बड़ी संख्या चौराहों पर मौजूद रही, जहां उन्होंने उत्साहपूर्वक आतिशबाजी की और खुशी साझा की। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा बन गया। स्थानीय लोगों ने मां वाग्देवी और भारत माता की पूजा-अर्चना करते हुए महाआरती भी की। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर धार्मिक आस्था व्यक्त की और फैसले को ऐतिहासिक बताया।

    वर्षों के संघर्ष का परिणाम बताया फैसला
    समाज के लोगों ने कहा कि यह निर्णय लंबे समय से चल रहे संघर्ष और जनजागरण का परिणाम है। उनका कहना था कि वर्षों से विभिन्न स्तरों पर आंदोलन और प्रयास किए जा रहे थे, जिनका परिणाम अब सामने आया है। स्थानीय नागरिकों ने इस फैसले को केवल एक कानूनी निर्णय नहीं बल्कि आस्था और भावनाओं से जुड़ा ऐतिहासिक क्षण बताया। लोगों के अनुसार यह निर्णय समाज की एकजुटता और संघर्ष की जीत का प्रतीक है।

    देर रात तक बना रहा जश्न का माहौल
    शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे से शुरू हुआ जश्न देर रात तक जारी रहा। शहर के कई हिस्सों में लोग समूहों में एकत्रित होकर खुशी मनाते रहे। पूरे बड़वानी में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और चौराहों पर युवाओं की भारी भीड़ रही। प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति सामान्य रही और कहीं से किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

  • 242 पन्नों के फैसले का होगा कानूनी परीक्षण, मुस्लिम पक्ष ने जताई अपील की बात

    242 पन्नों के फैसले का होगा कानूनी परीक्षण, मुस्लिम पक्ष ने जताई अपील की बात

    इंदौर/धार। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा भोजशाला मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद अब यह कानूनी विवाद एक नए चरण में प्रवेश करता नजर आ रहा है। फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है। पक्षकारों का कहना है कि वे 242 पन्नों के विस्तृत फैसले का गहन अध्ययन करने के बाद इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।

    हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका को स्वीकार करते हुए भोजशाला परिसर में हिंदू पक्ष को पूजा का विशेष अधिकार प्रदान किया है। साथ ही, वर्ष 2003 में दिए गए उस आदेश को भी निरस्त कर दिया गया है, जिसमें मुस्लिम पक्ष को सीमित समय के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को इस फैसले का प्रमुख आधार माना है।

    ASI की रिपोर्ट को मामले में निर्णायक माना गया है, जिसमें 98 दिनों के सर्वे और लगभग 2100 पन्नों की जांच रिपोर्ट शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, भोजशाला परिसर ऐतिहासिक रूप से मां वाग्देवी और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। कोर्ट ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर परिसर को हिंदू धार्मिक स्वरूप से जुड़ा माना है।

    हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अदालत ने स्पष्ट रूप से माना है कि भोजशाला का स्वरूप मंदिर जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद से अलग प्रकृति का है, क्योंकि यह रिट याचिका के रूप में सुना गया था।

    मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया है कि वे इस निर्णय को स्वीकार नहीं करते और सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देंगे। उनका कहना है कि पूरे फैसले का कानूनी और तथ्यात्मक विश्लेषण करने के बाद ही अगला कदम तय किया जाएगा।

    इस बीच, हिंदू पक्ष ने इस फैसले को अपनी बड़ी जीत बताते हुए इसे ऐतिहासिक न्याय करार दिया है। वहीं, क्षेत्र में फिलहाल स्थिति शांत बनी हुई है, लेकिन कानूनी लड़ाई के अगले चरण को लेकर दोनों पक्षों में सक्रियता बढ़ गई है।

  • भोजशाला में हनुमान चालीसा पाठ, हाईकोर्ट फैसले के बाद बढ़ी श्रद्धा

    भोजशाला में हनुमान चालीसा पाठ, हाईकोर्ट फैसले के बाद बढ़ी श्रद्धा


    धार मध्य प्रदेश। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर बेंच के फैसले के बाद शनिवार सुबह परिसर में धार्मिक गतिविधियों का माहौल देखने को मिला। कोर्ट के निर्णय के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी भोजशाला पहुंचे और पूजा-अर्चना की।

    श्रद्धालुओं ने परिसर में स्थित मां वाग्देवी स्थल और यज्ञ कुंड के पास पहुंचकर विधिवत दर्शन किए और हनुमान चालीसा का पाठ किया। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और प्रशासन की निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

    हाईकोर्ट के फैसले का प्रभाव, पूजा के अधिकार को लेकर चर्चा
    हाईकोर्ट के आदेश में भोजशाला परिसर को ऐतिहासिक रूप से राजा भोज कालीन वाग्देवी मंदिर से संबंधित माना गया है। फैसले के बाद हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार मिलने के बाद परिसर में गतिविधियां बढ़ गई हैं।
    हिंदू पक्ष के वकील के अनुसार, कोर्ट ने वर्ष 2003 के ASI आदेश को आंशिक रूप से निरस्त किया है, जिसमें मुस्लिम समुदाय को तय समय पर नमाज की अनुमति दी गई थी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि परिसर संरक्षित स्मारक रहेगा और इसकी निगरानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन ही होगी।

    श्रद्धालुओं में उत्साह, वर्षों बाद पूजा का अवसर मिलने का दावा
    पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें वर्षों बाद बिना किसी रोक-टोक के दर्शन और पूजा करने का अवसर मिला है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भोजशाला परिसर उनके लिए आस्था का केंद्र है और यह स्थान प्राचीन मंदिर का स्वरूप रखता है। भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने भी परिसर में पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया।

    कानूनी प्रक्रिया अभी जारी, सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना
    मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है। मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष ने पहले से ही कैविएट याचिकाएं दायर कर दी हैं, ताकि मामले में सुनवाई के दौरान उनका पक्ष भी सुना जा सके।

    भोजशाला मामला एक बार फिर धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक दावों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है। फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद परिसर में पूजा-अर्चना शुरू हो गई है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

  • पटाखा फैक्ट्री हादसा: सिस्टम पर उठे सवाल, अधूरी यूनिट को कैसे मिला लाइसेंस?

    पटाखा फैक्ट्री हादसा: सिस्टम पर उठे सवाल, अधूरी यूनिट को कैसे मिला लाइसेंस?


    देवास  देवास जिले की पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस दर्दनाक हादसे में 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हैं। कई मजदूर 90 से 99 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं और अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। यह हादसा केवल एक फैक्ट्री ब्लास्ट नहीं, बल्कि एक बड़े सिस्टम की चुप्पी, लापरवाही और निगरानी तंत्र की विफलता का प्रतीक बन गया है।

    लाइसेंस और नियमों के उल्लंघन पर सवाल
    जानकारी के अनुसार फैक्ट्री को सीमित मात्रा में बारूद रखने और उपयोग करने का लाइसेंस दिया गया था, लेकिन मौके पर कथित रूप से नियमों से अधिक मात्रा में विस्फोटक सामग्री पाई गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में बारूद जमा किया जा रहा था, तो क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी? या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई?

    6 विभागों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
    इस मामले में प्रशासनिक तंत्र के कई विभाग सीधे सवालों के घेरे में हैं-

    राजस्व विभाग: फैक्ट्री की जमीन, सुरक्षा मानक और अनुमति की जांच
    पुलिस विभाग: सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की निगरानी
    श्रम विभाग: मजदूरों की सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों की जांच
    बिजली विभाग: तकनीकी सुरक्षा और वायरिंग की जांच
    प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड: पर्यावरण और रासायनिक जोखिम की निगरानी
    PWD/स्थानीय प्रशासन: भवन संरचना और आपातकालीन निकासी व्यवस्था
    इन सभी विभागों की संयुक्त जिम्मेदारी के बावजूद किसी स्तर पर प्रभावी निरीक्षण न होने के आरोप लग रहे हैं।

    राजनीतिक संरक्षण का आरोप भी चर्चा में
    स्थानीय स्तर पर फैक्ट्री संचालक और राजनीतिक हस्तियों के बीच संबंधों को लेकर भी चर्चा तेज है। सोशल मीडिया और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्रभावशाली संपर्कों के कारण लंबे समय तक कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    निरीक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल
    फैक्ट्री मात्र कुछ महीने पहले ही शुरू हुई थी, लेकिन इतने कम समय में बड़े पैमाने पर विस्फोटक सामग्री का संग्रह कैसे हुआ यह जांच का मुख्य विषय है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी भी विभाग ने पिछले महीनों में मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की थी या केवल कागजों पर ही रिपोर्ट तैयार होती रही?

    हादसे के बाद शुरू हुई कार्रवाई
    घटना के बाद प्रशासन ने जांच टीम गठित कर दी है और फैक्ट्री संचालक के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। मृतकों के परिजनों को मुआवजे की घोषणा भी की गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल मुआवजा ही पर्याप्त है?

     सिर्फ हादसा नहीं, सिस्टम पर सवाल
    देवास का यह विस्फोट अब केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक निगरानी तंत्र की गंभीर विफलता का उदाहरण बन गया है। सवाल यह है कि क्या इस बार भी जांच केवल छोटे स्तर तक सीमित रहेगी, या जिम्मेदार अधिकारियों और पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय होगी?

  • 1500 किमी दूर से आए मजदूरों की हालत गंभीर, देवास हादसे में बढ़ा मौत का खतरा

    1500 किमी दूर से आए मजदूरों की हालत गंभीर, देवास हादसे में बढ़ा मौत का खतरा


    देवास ।  देवास जिले के टोंककलां क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया है। इस हादसे में जहां पांच मजदूरों की मौत हो चुकी है, वहीं करीब 25 लोग घायल हुए हैं। इनमें तीन मजदूरों की हालत बेहद चिंताजनक है, जो 99 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं और जिंदगी-मौत की जंग लड़ रहे हैं। घायलों का इलाज देवास के अमलतास हॉस्पिटल की बर्न यूनिट में किया जा रहा है, जहां डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

    डॉक्टरों ने बताया- शरीर के कई अंग फेल होने का खतर
    अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार इतने गंभीर बर्न केस में शरीर की स्थिति तेजी से बिगड़ती है। डॉक्टरों ने बताया कि 99% तक जलने की स्थिति में मरीज के फेफड़े सबसे पहले प्रभावित होते हैं, जिससे सांस लेने में गंभीर दिक्कत होती है।

    डॉक्टरों के अनुसार विस्फोट में उठे धुएं और गर्म हवा के कारण लंग इंजरी की संभावना बढ़ जाती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी, खून की संरचना में बदलाव और “हेमोलिसिस” जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है, जिसमें रक्त कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं और खून पानी जैसा हो जाता है। इसके चलते किडनी फेलियर, लिवर डैमेज और शॉक में जाने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह ऐसी स्थिति है जिसमें मरीज की जान बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

    त्वचा के साथ सांस नली भी प्रभावित
    विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे मामलों में केवल त्वचा ही नहीं, बल्कि श्वसन तंत्र भी गंभीर रूप से प्रभावित होता है। मरीजों को सांस लेने में भारी कठिनाई होती है और उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा जाता है। शरीर में पानी की कमी, नसों की कार्यक्षमता में गिरावट और संक्रमण का खतरा भी तेजी से बढ़ता है। मरीजों को हाइपोथर्मिया और हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरती जा रही है।

    बिहार से आए थे मजदूर, परिवारों में मातम
    घायल मजदूरों में कई लोग बिहार से करीब 1500 किलोमीटर दूर काम करने आए थे। हादसे के बाद उनके परिवारों में चिंता और सदमे का माहौल है। कुछ मजदूरों की हालत इतनी गंभीर है कि डॉक्टरों ने उनके जीवित बचने की संभावना को बेहद कम बताया है।

    घटना की जांच जारी
    जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है, जिसमें बिजली विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और औद्योगिक सुरक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हैं। टीम फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों, विस्फोट के कारणों और नियमों के उल्लंघन की जांच कर रही है।

    लापता मजदूरों की तलाश भी जारी
    घायलों के बयान के अनुसार दो मजदूर हादसे के बाद से लापता हैं। प्रशासन उनकी तलाश में जुटा हुआ है। वहीं, कई मजदूरों को प्राथमिक उपचार के बाद उनके गृह राज्य भेजा गया है।

    देवास का यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 99% तक झुलसे मजदूरों की जिंदगी के लिए डॉक्टरों की जंग जारी है, लेकिन उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

  • शाजापुर में बिजली कटौती का अलर्ट, कल 3 घंटे बाधित रहेगी सप्लाई

    शाजापुर में बिजली कटौती का अलर्ट, कल 3 घंटे बाधित रहेगी सप्लाई


    शाजापुर  शाजापुर शहर के निवासियों को रविवार, 17 मई 2026 को तीन घंटे की बिजली कटौती का सामना करना पड़ेगा। विद्युत विभाग ने जानकारी दी है कि सुबह 7 बजे से 10 बजे तक लालघाटी उपकेंद्र से जुड़े कई इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित रहेगी। यह कटौती आवश्यक तकनीकी रखरखाव और लाइन सुधार कार्य के चलते की जा रही है। विभाग के अनुसार, 33 केवी धनलक्ष्मी लाइन और न्यू कलेक्टर फीडर पर 11 केवी कंडक्टर बदलने एवं सुधार कार्य किया जाएगा। इस दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 11 केवी जेल फीडर और 11 केवी इमरजेंसी फीडर को भी अस्थायी रूप से बंद रखा जाएगा।

    इन प्रमुख इलाकों में रहेगा असर
    बिजली कटौती के दौरान शहर के कई महत्वपूर्ण क्षेत्र प्रभावित रहेंगे। इनमें हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, सीसीटीवी कंट्रोल रूम, जिला जेल, डाइट कॉलेज, कलेक्ट्रेट सर्कल ऑफिस, मजिस्ट्रेट निवास, बापू की कुटिया, स्टेडियम, राजराजेश्वरी मंदिर, विजय नगर, ज्योति नगर, बस स्टैंड और ट्रॉमा सेंटर सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में सुबह के समय सामान्य जनजीवन, कार्यालय कार्य और घरेलू गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। विशेषकर सरकारी कार्यालयों और अस्पताल क्षेत्र में पहले से तैयारी करने की सलाह दी गई है।

    विद्युत विभाग की अपील: पहले से कर लें जरूरी काम
    विद्युत विभाग ने उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि लोग बिजली कटौती के समय को ध्यान में रखते हुए अपने आवश्यक कार्य पहले ही निपटा लें। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मेंटेनेंस कार्य समय से पहले पूरा हो जाता है, तो बिजली आपूर्ति निर्धारित समय से पहले भी बहाल की जा सकती है। स्थानीय प्रशासन ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और इस तकनीकी कार्य में सहयोग करें, ताकि भविष्य में बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

    तकनीकी सुधार से भविष्य में मिलेगी राहत
    विद्युत विभाग का कहना है कि यह मेंटेनेंस कार्य आने वाले दिनों में ट्रिपिंग, वोल्टेज उतार-चढ़ाव और लाइन फॉल्ट जैसी समस्याओं को कम करेगा। इससे शाजापुर शहर को अधिक स्थिर और मजबूत बिजली आपूर्ति प्रणाली का लाभ मिलेगा।

  • रेलवे फाटक के पास विस्फोटक मिलने से पुलिस अलर्ट, CCTV खंगाल रही जांच

    रेलवे फाटक के पास विस्फोटक मिलने से पुलिस अलर्ट, CCTV खंगाल रही जांच


    शाजापुर (उज्जैन)। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के मक्सी थाना क्षेत्र में शनिवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब देवास रेलवे फाटक के पास संदिग्ध विस्फोटक सामग्री पड़ी मिली। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया।

    मौके से बरामद हुईं 6 पेटी जिलेटिन रॉड
    पुलिस ने मौके से करीब 6 पेटी जिलेटिन रॉड बरामद की हैं, जिनका उपयोग आमतौर पर खदानों में ब्लास्टिंग कार्य के लिए किया जाता है। संदिग्ध सामग्री मिलने के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

    स्थानीय लोगों की सूचना से खुला मामला
    जानकारी के अनुसार, रेलवे फाटक के पास संदिग्ध पेटियां देख स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और विस्फोटक सामग्री को सुरक्षित कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

    CCTV और जांच में जुटी पुलिस, हर एंगल से पड़ताल
    मक्सी थाना प्रभारी संजय वर्मा के अनुसार, बरामद सामग्री फिलहाल जिलेटिन रॉड जैसी प्रतीत हो रही है। सभी पेटियों को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और जांच के लिए विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया है। पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह सामग्री वहां कैसे और किसने रखी।

    ट्रक कटिंग से जुड़ने की आशंका भी जांच में शामिल
    प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि रतलाम क्षेत्र में विस्फोटक भंडारण स्थल से चोरी और ट्रक कटिंग की घटना हुई थी। हालांकि पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    मक्सी में विस्फोटक सामग्री की बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। पुलिस हर संभावना को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसके पीछे कौन और क्या मकसद था।