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  • MP में आग का कहर उज्जैन के कालभैरव मंदिर के सामने दुकानों में लगी आग ,इंदौर में मोबाइल शॉप जली

    MP में आग का कहर उज्जैन के कालभैरव मंदिर के सामने दुकानों में लगी आग ,इंदौर में मोबाइल शॉप जली


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मंगलवार को आगजनी की दो अलग-अलग घटनाओं ने लोगों को दहला दिया। उज्जैन और इंदौर में लगी आग से लाखों रुपये के सामान के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

    पहली घटना धार्मिक नगरी उज्जैन में सामने आई जहां प्रसिद्ध कालभैरव मंदिर के सामने स्थित पूजा सामग्री की दुकानों में अचानक आग लग गई। सुबह करीब साढ़े पांच बजे आग लगने की सूचना फायर कंट्रोल रूम को मिली। मंदिर क्षेत्र में आग की खबर फैलते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड के कई वाहन मौके पर रवाना किए गए। अधिकारियों के अनुसार आग बुझाने के लिए तीन दमकल वाहनों और एक पानी के टैंकर की मदद ली गई। आग ने दो दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया था जिनमें एक छोटी और एक बड़ी दुकान शामिल थी। दोनों दुकानों में पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाली सामग्री रखी हुई थी।

    दमकल कर्मियों ने समय रहते आग पर नियंत्रण पा लिया जिससे आग आसपास की अन्य दुकानों तक नहीं फैल सकी। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है लेकिन वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। घटना के बाद व्यापारियों और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल देखा गया।

    दूसरी घटना इंदौर में सामने आई जहां एयरपोर्ट क्षेत्र के 60 फीट रोड स्थित एक मोबाइल दुकान में देर रात अचानक आग लग गई। आग लगते ही आसपास के लोगों ने धुआं और लपटें देखीं तथा तत्काल इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी। स्थानीय लोगों ने भी अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण सफलता नहीं मिल सकी।

    फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और दुकान का शटर तोड़कर अंदर प्रवेश किया। इसके बाद काफी प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया गया। आग की चपेट में आने से दुकान में रखे मोबाइल एसेसरीज और अन्य सामान पूरी तरह जलकर राख हो गए। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है और जांच जारी है।

    दोनों घटनाओं ने एक बार फिर दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को उजागर किया है। प्रशासन ने लोगों से विद्युत उपकरणों और वायरिंग की नियमित जांच कराने तथा सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील की है। वहीं पुलिस और संबंधित विभाग आग लगने के कारणों की जांच में जुटे हुए हैं।

  • खर्च पर लगाम! अब दिल्ली जाने से पहले लेनी होगी परमिशन, MP सरकार का बड़ा फैसला

    खर्च पर लगाम! अब दिल्ली जाने से पहले लेनी होगी परमिशन, MP सरकार का बड़ा फैसला


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों पर नियंत्रण लगाने और संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आदेशों के अनुसार अब प्रदेश के आईएएस, आईपीएस और सचिव स्तर के अधिकारियों को सरकारी खर्च पर दिल्ली, गुजरात, अन्य राज्यों या विदेश यात्रा करने से पहले मुख्य सचिव की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वहीं अन्य अधिकारियों को राज्य से बाहर की शासकीय यात्रा के लिए अपने विभागीय सचिव से मंजूरी लेनी होगी।

    सरकार का मानना है कि अनावश्यक यात्राओं और प्रशासनिक खर्चों में कटौती कर राज्य के वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से सभी विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    ऑनलाइन बैठकों को मिलेगा बढ़ावा
    सरकार ने स्पष्ट किया है कि विभागीय बैठकों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सेमिनारों को अधिकतम डिजिटल माध्यमों के जरिए आयोजित किया जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अधिकारियों की अनावश्यक यात्रा कम हो और समय व धन दोनों की बचत हो सके। इसके अलावा अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालय आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, बस सेवा और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

    ऊर्जा बचत पर सरकार का विशेष फोकस
    राज्य सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। कार्यालयों में ऊर्जा ऑडिट कराने, बिजली खपत की निगरानी करने तथा शाम 7 बजे के बाद अनावश्यक रूप से चल रहे पंखे, लाइट, कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य उपकरण बंद रखने को कहा गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर सिस्टम को बढ़ावा देने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया है।

    प्राकृतिक खेती और हरित विकास को प्रोत्साहन
    कृषि विभाग को प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं निर्माण एजेंसियों को फ्लाई ऐश, प्लास्टिक वेस्ट बिटुमिन और अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्री का अधिक उपयोग करने के लिए कहा गया है। सरकार का लक्ष्य विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ना है।

    PNG और LPG कनेक्शनों की होगी जांच
    सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क के विस्तार में सहयोग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उज्ज्वला योजना और सामान्य एलपीजी कनेक्शनों में डुप्लीकेट तथा अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर कार्रवाई करने का अभियान भी चलाया जाएगा।

    फूड ऑयल के कम उपयोग पर चलेगा अभियान
    लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को खाद्य तेल के अत्यधिक उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए व्यवहार परिवर्तन आधारित अभियान चलाए जाएंगे, जिससे लोगों में स्वस्थ खानपान की आदत विकसित हो सके।

    90 दिन का जन-जागरूकता अभियान
    जनसंपर्क विभाग को ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर 90 दिनों का व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पर्यटन विभाग को “देखो अपना देश” और “सबसे पहले मध्यप्रदेश” जैसे अभियानों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकार ने सभी विभागों को इन निर्देशों के पालन की मासिक रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने के लिए भी कहा है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी बल्कि ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।

  • सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार: उज्जैन में बन रहे 4 नए सबस्टेशन, 750 मेगावाट बिजली आपूर्ति का लक्ष्य

    सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार: उज्जैन में बन रहे 4 नए सबस्टेशन, 750 मेगावाट बिजली आपूर्ति का लक्ष्य

    मध्यप्रदेश । उज्जैन शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर शहर के दौरे पर पहुंचेंगे। दोनों नेता विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ-साथ राज्य की महत्वपूर्ण विकास और जनकल्याण योजनाओं की समीक्षा भी करेंगे।

    जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ओंकारेश्वर दौरे के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद इंदौर एयरपोर्ट पर उन्हें विदाई देंगे। इसके बाद वे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ इंदौर में निर्धारित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और वहां से उज्जैन के लिए रवाना होंगे। दोनों नेताओं के शाम करीब 4:30 बजे उज्जैन पहुंचने की संभावना है।

    उज्जैन पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। कार्यक्रमों में कपिला गौशाला का दौरा भी प्रस्तावित माना जा रहा है। प्रशासन ने दोनों नेताओं के दौरे को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं।

    दौरे का मुख्य केंद्र प्रशासनिक संकुल भवन में आयोजित होने वाली दो महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें रहेंगी। पहली बैठक शाम 6 बजे आयोजित होगी, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में चल रहे कार्यों और उपलब्धियों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स, कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई अभियान और जनभागीदारी के प्रयासों पर चर्चा की जाएगी।

    इसके बाद दूसरी बैठक पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) को लेकर होगी। इस बैठक में प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने, बिजली नुकसान कम करने, अधोसंरचना विकास और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना की समीक्षा में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

    केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी को देखते हुए इन बैठकों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेता प्रदेश में चल रही प्रमुख योजनाओं की प्रगति का आकलन करने के साथ आगामी कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा करेंगे।

    उज्जैन में होने वाली ये बैठकें न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि प्रदेश में स्वच्छता, शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को गति देने की दिशा में भी अहम मानी जा रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन बैठकों से कई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई दिशा तय होगी।

  • NEET-UG 2026 के लिए हाई अलर्ट: सेंटरों पर CCTV-जैमर, डॉक्टर और टाइम डिस्प्ले की व्यवस्था, छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन भी चलेगी

    NEET-UG 2026 के लिए हाई अलर्ट: सेंटरों पर CCTV-जैमर, डॉक्टर और टाइम डिस्प्ले की व्यवस्था, छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन भी चलेगी


    मध्यप्रदेश । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए मध्य प्रदेश में व्यापक तैयारियां की गई हैं। 21 जून को आयोजित होने वाली इस परीक्षा को लेकर जिला प्रशासन, पुलिस और रेलवे समेत सभी संबंधित विभाग हाई अलर्ट पर हैं। प्रदेश के सभी परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरे और सिग्नल जैमर लगाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की नकल या तकनीकी गड़बड़ी की संभावना को खत्म किया जा सके।

    राजधानी भोपाल में इस बार 13,774 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। इसके लिए 32 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिला कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सभी केंद्र प्रभारियों के साथ वन-टू-वन बैठक कर परीक्षा प्रबंधन की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि कई बार एक जैसे नाम वाले केंद्रों के कारण अभ्यर्थी भ्रमित हो जाते हैं, इसलिए केंद्रों के नाम और लोकेशन स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं। परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए दिशा-सूचक बोर्ड भी लगाए जाएंगे।

    परीक्षार्थियों को समय का सही अंदाजा रहे, इसके लिए प्रत्येक केंद्र के बाहर बड़ी डिजिटल घड़ी लगाई जाएगी। वहीं किसी छात्र की तबीयत खराब होने की स्थिति में तुरंत उपचार उपलब्ध कराने के लिए डॉक्टर और मेडिकल टीम भी तैनात रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    भोपाल के अलावा छिंदवाड़ा में 4,303, गुना में 1,839, विदिशा में 1,709, नर्मदापुरम में 1,283 और अशोकनगर में 865 अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने की संभावना है। ग्वालियर में 25 केंद्रों पर करीब 5 हजार छात्र परीक्षा देंगे। यहां बायोमैट्रिक अटेंडेंस, CCTV निगरानी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोपहर 1 बजे के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

    परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इंदौर, भोपाल और रतलाम के बीच विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन 20 जून को संचालित होगी, जिससे विभिन्न शहरों से आने वाले छात्र समय पर अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकेंगे। ट्रेन में 13 स्लीपर, 2 जनरल और 2 एसएलआर कोच सहित कुल 17 कोच लगाए जाएंगे।

    जबलपुर में पहली बार परीक्षार्थियों के लिए विशेष बस सेवा शुरू की जा रही है। यहां 23 परीक्षा केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र परीक्षा देंगे। अभिभावकों के लिए शेड, बैठने की व्यवस्था, कूलर, पंखे और अस्थायी कैंटीन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। सभी केंद्रों पर 20 जून को सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं का ट्रायल भी किया जाएगा।

    प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्रों की आवाजाही बेहद सुरक्षित तरीके से होगी। सुरक्षा व्यवस्था में वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी रहेगी और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए विशेष कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहेगा। कुल मिलाकर NEET-UG 2026 को लेकर प्रदेश में अभूतपूर्व तैयारियां की गई हैं, ताकि लाखों छात्रों का भविष्य तय करने वाली यह परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल में संपन्न हो सके।

  • भोपाल में 24 घंटे में बदली पटवारियों की ट्रांसफर लिस्ट, 46 में से 24 के तबादले रद्द होने पर उठे सवाल

    भोपाल में 24 घंटे में बदली पटवारियों की ट्रांसफर लिस्ट, 46 में से 24 के तबादले रद्द होने पर उठे सवाल


    भोपाल । राजधानी भोपाल में पटवारियों के तबादलों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कलेक्टर कार्यालय द्वारा 15 जून को जारी स्थानांतरण आदेश में जिन 46 पटवारियों का तबादला किया गया था, उनमें से 24 पटवारियों को महज 24 घंटे के भीतर राहत मिल गई। 16 जून को जारी संशोधित सूची में इन कर्मचारियों के नाम हटा दिए गए, जिससे उनके तबादले स्वतः निरस्त हो गए। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार, 15 जून को जारी सूची में ऐसे पटवारियों को शामिल किया गया था जो लंबे समय से एक ही तहसील या क्षेत्र में पदस्थ थे। इनमें अधिकांश कर्मचारी हुजूर और कोलार तहसीलों में पांच से आठ वर्षों से कार्यरत थे। कुछ पटवारी अपनी गृह तहसील में भी पदस्थ थे। स्थानांतरण नीति के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों को दूसरे क्षेत्र में भेजने का प्रावधान है, जिसके तहत यह कार्रवाई की गई थी।

    हालांकि अगले ही दिन कैबिनेट बैठक के बाद स्थानांतरण की समय-सीमा बढ़ने के फैसले के बीच देर रात एक संशोधित सूची जारी की गई। इस नई सूची में 24 पटवारियों के नाम हटा दिए गए। सूत्रों के अनुसार संशोधित आदेश में शामिल अधिकांश कर्मचारी भी हुजूर और कोलार क्षेत्र से जुड़े हुए थे। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि प्रभावशाली संपर्कों और राजनीतिक पहुंच के चलते कुछ कर्मचारियों ने अपने नाम सूची से हटवा लिए।

    विवाद को और हवा तब मिली जब उन नामों को भी राहत मिलने की जानकारी सामने आई, जो पूर्व में एक चर्चित मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में सामने आ चुके थे। इनमें निधि नेमा और किशोर सिंह दांगी के नाम प्रमुख रूप से शामिल बताए जा रहे हैं। इससे पूरे मामले को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।

    स्थानांतरण से राहत पाने वाले कर्मचारियों में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जो वर्ष 2015 से लेकर 2022 तक लगातार एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहे हैं। इनमें सदाशिव गौंड, नरेंद्र रैकवार, केवल सिंह कौर, रेनु पटेल, बुजकिशोर नागर, अभिषेक शर्मा, मुकुल सराठे, दीक्षा शर्मा, संदीप शर्मा, प्रियंका सिंह, सौरभ सोलंकी, प्रदीप पटेल, पूजा ठाकुर, प्रियंका दुबे और अन्य कर्मचारी शामिल हैं।

    इस मामले में राजनीतिक प्रभाव की चर्चा भी जोरों पर है। संशोधित सूची से बाहर हुए 24 पटवारियों में से 20 हुजूर तहसील और 4 कोलार क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं। ये दोनों क्षेत्र विधायक रामेश्वर शर्मा के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। वहीं बैरसिया क्षेत्र से केवल एक नाम हटने की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से राजनीतिक हस्तक्षेप की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

    स्थानांतरण नीति के तहत जिले में कुल कर्मचारियों के 20 प्रतिशत से अधिक तबादले नहीं किए जा सकते। भोपाल जिले में वर्तमान में 243 पटवारी पदस्थ हैं, जिसके अनुसार अधिकतम 47 तबादले संभव हैं। पहले 46 पटवारियों के तबादले किए गए और फिर संशोधित सूची जारी होने से कुल 76 स्थानांतरण संबंधी आदेशों की स्थिति बन गई। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि निरस्त किए गए आदेश भी प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, इसलिए नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

    इसके अलावा आदेश जारी करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है। स्थानांतरण नीति की कंडिका-42 के अनुसार सभी आदेश ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से जारी किए जाने चाहिए। जबकि 15 जून का आदेश हस्ताक्षरित स्वरूप में जारी हुआ था और 16 जून का संशोधित आदेश ई-ऑफिस से निकाला गया। इतना ही नहीं, संशोधित आदेश में पूर्व आदेश को स्पष्ट रूप से निरस्त करने का उल्लेख भी नहीं किया गया है।

    अब इस पूरे मामले के सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंचने और उच्चस्तरीय जांच की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

  • बेरोजगारी से ‘किन्नर गैंग’ तक: ट्रेनों में वसूली का नया नेटवर्क, यूपी–बिहार के युवक निकले मास्टरमाइंड

    बेरोजगारी से ‘किन्नर गैंग’ तक: ट्रेनों में वसूली का नया नेटवर्क, यूपी–बिहार के युवक निकले मास्टरमाइंड


    मध्य प्रदेश । जबलपुर रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में यात्रियों से वसूली के नाम पर चल रहे एक संगठित नेटवर्क का रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि कई किन्नर के वेश में दिखने वाले लोग असल में युवक हैं, जो बेरोजगारी और आसान कमाई के लालच में यह तरीका अपना रहे थे।

    RPF की हालिया कार्रवाई में पकड़े गए तीन संदिग्धों के बाद यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि वे महिलाएं या वास्तविक किन्नर नहीं, बल्कि युवक हैं जो पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से वेश बदलकर ट्रेनों में यात्रियों से पैसे वसूलते हैं।

    सूत्रों के अनुसार, यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहा नेटवर्क है, जिसमें यूपी और बिहार के कई युवक शामिल हैं। ये लोग जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर और इटारसी जैसे बड़े रेलवे जंक्शन वाले क्षेत्रों में सक्रिय हैं और किराए के मकानों में रहकर अपना संचालन करते हैं।

    पकड़े गए आरोपियों में कानपुर के रहने वाले आशीष (बदला हुआ नाम आशी), महेश (माही) और पिंचू (तरन्नुम) शामिल हैं। ये लोग घर से सामान्य कपड़ों में निकलते हैं, लेकिन स्टेशन के पास पहुंचते ही साड़ी और सूट पहनकर किन्नर का रूप धारण कर लेते हैं। भारी मेकअप, सिंदूर और व्यवहारिक शैली अपनाकर ये यात्रियों को भ्रमित करते हैं और वसूली करते हैं।

    RPF जांच में सामने आया कि ये लोग यात्रियों से प्रति व्यक्ति ₹10 से ₹100 तक वसूलते हैं। रोजाना इनकी कमाई ₹1,500 से ₹2,000 तक पहुंच जाती है। कई मामलों में तो ये QR कोड के जरिए डिजिटल भुगतान भी स्वीकार करते हैं।

    पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि इनमें से कुछ युवकों ने पहले नौकरी की तलाश की, लेकिन रोजगार न मिलने पर उन्होंने सोशल मीडिया से प्रेरित होकर यह रास्ता चुना। आसान कमाई और कम कानूनी जोखिम को देखते हुए यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।

    RPF अधिकारियों के अनुसार, पिछले छह महीनों में करीब 120 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से 60 प्रतिशत युवक निकले हैं। यह गिरोह यात्रियों की असहज स्थिति और डर का फायदा उठाकर लगातार अवैध वसूली कर रहा था।

    इस मामले के सामने आने के बाद असली किन्नर समुदाय ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि नकली वसूली करने वाले युवक पूरे समुदाय की छवि खराब कर रहे हैं और प्रशासन को ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

    रेलवे सुरक्षा बल अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहा है, ताकि इसके पीछे मौजूद बड़े गिरोह और आर्थिक कनेक्शन का पता लगाया जा सके।

  • शिवपुरी में धरना दे रहे कांग्रेसियों पर हमला, नामजद शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप

    शिवपुरी में धरना दे रहे कांग्रेसियों पर हमला, नामजद शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप


    मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में कांग्रेस के धरने के दौरान हिंसा का मामला सामने आया है। 27 मई को नवीन नगर परिषद भवन के पास चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच अचानक हालात बिगड़ गए, जब करीब 10 से 12 मोटरसाइकिलों पर सवार होकर 25 से 30 लोग मौके पर पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों के हाथों में लाठी-डंडे और प्लास्टिक पाइप थे। धरना स्थल पर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाकर भागने लगे।

    वीडियो वायरल, हमले की पुष्टि का दावा
    घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ नकाबपोश युवक बाइक से आते और फिर अचानक मारपीट करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में भगदड़ और हंगामे जैसी स्थिति भी देखी जा सकती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह वीडियो हमले की पुष्टि करता है और इसी आधार पर आरोपियों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

    कांग्रेस का आरोप: सुनियोजित हमला, कार्रवाई में देरी
    ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अनिल गुप्ता के अनुसार इस हमले में कई कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जिनमें अतुल पाराशर, राजवीर सिंह परमार, रामस्वरूप कुशवाह और चंद्रशेखर गौतम सहित अन्य शामिल हैं। कांग्रेस का आरोप है कि यह हमला पूरी तरह सुनियोजित था और विपक्षी आवाज को दबाने की कोशिश की गई। जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित अग्रवाल ने भी आरोप लगाया कि नामजद शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

    नामजद शिकायत और पुलिस की स्थिति
    कांग्रेस द्वारा दी गई शिकायत में मंगल लोधी, सुनील लोधी, आजाद लोधी, सौरव लोधी, जीवन लोधी, असवेन्द्र लोधी, कपूर लोधी और आकाश लोधी सहित कई लोगों के नाम शामिल हैं। हालांकि, पिछोर थाना प्रभारी नीतू सिंह अहिरवार का कहना है कि कुछ नामजद आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) जांच में घटना स्थल पर मौजूदगी साबित नहीं हुई है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज में कई लोग चेहरा ढके हुए नजर आए हैं, जिससे पहचान में कठिनाई हो रही है।

    पुलिस के अनुसार पहले अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की बात कही गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता नामजद एफआईआर पर अड़े रहे। फिलहाल मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    जांच जारी, तनाव बरकरार
    घटना के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है और कांग्रेस लगातार कार्रवाई की मांग कर रही है। वहीं पुलिस जांच और साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।

  • एकतरफा कार्रवाई का आरोप, झाबुआ में पटवारी सस्पेंड; कर्मचारियों ने उठाया विरोध का बिगुल

    एकतरफा कार्रवाई का आरोप, झाबुआ में पटवारी सस्पेंड; कर्मचारियों ने उठाया विरोध का बिगुल


    मध्य प्रदेश । झाबुआ जिले के ग्राम गुंदीपाड़ा में 12 वर्षीय बच्ची शिवानी की कुएं में गिरने से हुई दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन द्वारा हल्का पटवारी नीलेश अखाड़े को निलंबित किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई के बाद जिले के राजस्व कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। पटवारी संघ ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने पहले संबंधित पटवारी को कारण बताओ नोटिस तो जारी किया, लेकिन जवाब देने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना ही सीधे निलंबन की कार्रवाई कर दी गई। संघ का कहना है कि यह निर्णय एकतरफा और नियमों के विपरीत है।

    संघ का दावा: पहले ही दी गई थी खतरनाक संरचनाओं की जानकारी
    पटवारी संघ ने अपने ज्ञापन में मध्यप्रदेश खुले नलकूप सुरक्षा अधिनियम 2024 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में प्राथमिक जिम्मेदारी भूमि स्वामी और बोरवेल/कुआं खोदने वाली एजेंसी की होती है। ऐसे में सीधे पटवारी को दोषी ठहराकर निलंबित करना अनुचित है। संघ ने यह भी दावा किया कि जिले के पटवारियों द्वारा पहले ही बिना मुंडेर वाले कुओं और खुले बोरवेल की सूची संबंधित तहसील कार्यालयों को सौंप दी गई थी। इसके बावजूद कार्रवाई केवल एक कर्मचारी पर केंद्रित करना अन्यायपूर्ण है।

    राजस्व कर्मचारियों में बढ़ा असंतोष
    निलंबन आदेश के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों में असंतोष तेजी से बढ़ा है। कई पटवारियों का कहना है कि यदि प्रशासन इस तरह त्वरित और कठोर कार्रवाई करेगा, तो जमीनी स्तर पर काम करना मुश्किल हो जाएगा। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि फील्ड में संसाधनों की कमी और सीमित अधिकारों के बावजूद पूरी जिम्मेदारी पटवारियों पर डाल दी जाती है, जो सही नहीं है।

    चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
    पटवारी संघ ने प्रशासन के खिलाफ तीन चरणों में आंदोलन की घोषणा की है। पहले चरण में झाबुआ, रामा और रानापुर तहसीलों के सभी पटवारी तीन दिन के सामूहिक अवकाश पर रहेंगे।

    यदि इसके बाद भी निलंबन आदेश वापस नहीं लिया गया तो दूसरे चरण में जिले के सभी पटवारी तीन दिन के सामूहिक अवकाश पर जाएंगे और सरकारी सोशल मीडिया समूहों से भी बाहर हो जाएंगे। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि फिर भी मांगें नहीं मानी गईं तो आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल की स्थिति बन सकती है।

    प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
    फिलहाल इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, यह विवाद अब प्रशासन और राजस्व कर्मचारियों के बीच टकराव का रूप लेता दिख रहा है।

  • रेलवे का बड़ा फैसला, सांची स्टेशन पर बनी रहेगी 4 ट्रेनों की रोक; आसान होगी यात्रा

    रेलवे का बड़ा फैसला, सांची स्टेशन पर बनी रहेगी 4 ट्रेनों की रोक; आसान होगी यात्रा


    मध्य प्रदेश । पश्चिम मध्य रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और बढ़ती मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया है कि सांची और विदिशा स्टेशनों पर चार प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव अब अगले आदेश तक जारी रहेगा। पहले यह ठहराव प्रायोगिक तौर पर शुरू किया गया था, लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद इसे आगे बढ़ा दिया गया है।

    कौन-कौन सी ट्रेनें रुकेंगी
    इन प्रमुख ट्रेनों का ठहराव जारी रहेगा:
    कर्नाटक संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12629 / 12630)  -विदिशा में ठहराव
    श्री माता वैष्णो देवी कटरा–चेन्नई एक्सप्रेस (16031 / 16032) -सांची में ठहराव

    धार्मिक और लंबी दूरी की यात्रा में सुविधा
    इस निर्णय से सांची और विदिशा के यात्रियों को देश के कई हिस्सों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। खासकर वैष्णो देवी, चेन्नई, कर्नाटक और दिल्ली जैसे बड़े रूटों पर यात्रा करने वालों को सीधा लाभ मिलेगा।

     रेलवे अधिकारियों का बयान
    रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी सौरभ कटारिया ने बताया कि यात्रियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और जनप्रतिनिधियों की मांग के आधार पर यह ठहराव जारी रखने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में धार्मिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा को बढ़ावा मिलेगा।

     स्थानीय लोगों को फायदा
    इस फैसले से आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को अब बड़े स्टेशनों तक जाने की जरूरत कम पड़ेगी और समय व खर्च दोनों की बचत होगी।

  • विदिशा में सड़कों की दुर्दशा पर तंज, कांग्रेस ने गड्ढों का पूजन कर साधा निशाना

    विदिशा में सड़कों की दुर्दशा पर तंज, कांग्रेस ने गड्ढों का पूजन कर साधा निशाना


    मध्य प्रदेश । विदिशा जिले में सड़क की खराब हालत और बढ़ते गड्ढों को लेकर कांग्रेस ने सांकेतिक विरोध किया। कार्यकर्ताओं ने शहर के अलग-अलग इलाकों में सड़क के गड्ढों की पूजा-अर्चना कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि बरसात में गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है।

     भाजपा सरकार और जनप्रतिनिधियों पर निशाना
    कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित रघुवंशी ने आरोप लगाया कि जिले में भाजपा सांसद, विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष होने के बावजूद सड़कें बदहाल हैं। उनका कहना है कि जनता ने विकास के लिए जनप्रतिनिधियों को चुना था, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है।

     पूरे जिले में सड़कें खराब होने का दावा
    कांग्रेस नेताओं के अनुसार केवल शहर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले में सड़कों की स्थिति खराब है। कई जगह लंबे समय से मरम्मत और निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक खींचतान के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

    “सद्बुद्धि” की प्रार्थना और विरोध का संदेश
    कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि गड्ढों की पूजा कर उन्होंने जिम्मेदारों को “सद्बुद्धि” देने और जल्द सड़क सुधार की प्रार्थना की है। यह प्रदर्शन पूरी तरह सांकेतिक था, जिसका उद्देश्य जनता की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करना था।

     आगे आंदोलन की चेतावनी
    कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़कों की मरम्मत शुरू नहीं हुई तो पार्टी कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी। साथ ही आने वाले दौरों में वरिष्ठ नेताओं से भी इस मुद्दे पर जवाब मांगा जाएगा।