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  • MP Weather Update: प्रदेश के 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, मानसून फिर हुआ एक्टिव; 50 से ज्यादा जिलों में बरसेंगे बादल

    MP Weather Update: प्रदेश के 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, मानसून फिर हुआ एक्टिव; 50 से ज्यादा जिलों में बरसेंगे बादल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को प्रदेश के पांच जिलों-श्योपुर, मंदसौर, रतलाम, आलीराजपुर और पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान चार इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान है।

    मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, झाबुआ, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, उज्जैन, देवास, आगर-मालवा, शाजापुर, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत अधिकांश जिलों में बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी।

    गुरुवार को भी प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा डेढ़ इंच वर्षा टीकमगढ़ में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा रतलाम, छतरपुर, श्योपुर, धार, नर्मदापुरम, शिवपुरी, सीधी, इंदौर, उज्जैन, उमरिया, जबलपुर, रायसेन, राजगढ़, सागर, सतना, भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, शाजापुर, सीहोर, विदिशा और देवास सहित कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई।

    प्रदेश में 24 जून को मानसून की दस्तक के बाद से अब तक औसतन 12.8 इंच (325.1 मिमी) बारिश रिकॉर्ड की गई है। हालांकि यह सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत कम है। इस समय तक प्रदेश में 14.1 इंच (359.6 मिमी) बारिश होनी चाहिए थी। राहत की बात यह है कि पिछले तीन दिनों में बारिश की कमी लगातार कम हुई है। 20 जुलाई तक जहां प्रदेश में वर्षा सामान्य से 17 प्रतिशत कम थी, वहीं अब यह अंतर घटकर 10 प्रतिशत रह गया है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 13 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 6 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार जुलाई के अंतिम सप्ताह में प्रदेशभर में तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। लगातार सक्रिय हो रहे मानसूनी सिस्टम के कारण कई जिलों में अच्छी वर्षा होने की संभावना है, जिससे बारिश की कमी और कम हो सकती है।

    बारिश का असर कई इलाकों में दिखाई देने लगा है। रायसेन जिले के बेगमगंज क्षेत्र में बीना नदी का जलस्तर बढ़ने से एक दर्जन से अधिक गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। वहीं बड़वानी के सेंधवा स्थित बिजासन घाट में लगातार तीसरे दिन घना कोहरा और धुंध छाई रही। टीकमगढ़ में भी रुक-रुककर हो रही बारिश से मौसम सुहावना बना हुआ है।

    प्रदेश के वर्षा आंकड़ों पर नजर डालें तो फिलहाल 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई है, जबकि 41 जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। मौसम विभाग का मानना है कि आगामी दिनों में होने वाली लगातार बारिश से अधिकांश जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर के करीब पहुंच सकता है।

  • बिजली कंपनी के इंजीनियर पर लोकायुक्त का बड़ा शिकंजा आय से 258 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा करोड़ों की फैक्ट्री आलीशान बंगले और लग्जरी गाड़ियां बरामद

    बिजली कंपनी के इंजीनियर पर लोकायुक्त का बड़ा शिकंजा आय से 258 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा करोड़ों की फैक्ट्री आलीशान बंगले और लग्जरी गाड़ियां बरामद


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच लोकायुक्त ने एक बड़ी छापेमार कार्रवाई करते हुए पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर फाइनेंस शिवराम सेमिल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का बड़ा मामला उजागर किया है। मंगलवार सुबह तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई में इंदौर धार पीथमपुर बगदून मुरैना और अन्य स्थानों सहित कुल नौ ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए। शुरुआती जांच में सामने आया कि अधिकारी के पास उनकी वैध आय की तुलना में लगभग 258 प्रतिशत अधिक संपत्ति मौजूद है। इस खुलासे ने सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    लोकायुक्त की टीम ने जांच के दौरान कई अहम दस्तावेजों के साथ बड़ी मात्रा में नकदी और कीमती आभूषण भी बरामद किए। अधिकारियों के अनुसार घर से करीब चार किलो चांदी तीन सौ ग्राम सोना और लगभग तीन लाख रुपए नकद मिले हैं। इसके अलावा कई बैंक खातों निवेश संबंधी दस्तावेज और अचल संपत्तियों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लिए गए हैं। टीम को कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे करोड़ों रुपए की संपत्तियों और निवेश का पता चला है।

    जांच में यह भी सामने आया कि अधिकारी ने केवल अपने नाम पर ही नहीं बल्कि बेटे बहू दामाद और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर भी कई संपत्तियां खरीदी थीं। इनमें आलीशान बंगले प्लॉट व्यावसायिक भवन और औद्योगिक इकाइयां शामिल हैं। पीथमपुर क्षेत्र में करोड़ों रुपए की फैक्ट्री और अन्य निर्माण कार्य भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। लोकायुक्त अब इन संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व और उनमें लगाए गए धन के स्रोत की गहन जांच कर रही है।

    छापेमारी के दौरान कई लग्जरी वाहन और महंगे घरेलू सामान भी जांच के दायरे में आए हैं। टीम ने संपत्तियों के मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञों की मदद ली है ताकि वास्तविक बाजार मूल्य का आकलन किया जा सके। जांच एजेंसियों का मानना है कि आगे की पड़ताल में और भी कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

    लोकायुक्त पुलिस ने शिवराम सेमिल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एसपी राजेश सहाय के नेतृत्व में डीएसपी सुनील तालान आनंद चौहान दिनेश पटेल दीपक शेजवार सहित कई अधिकारी अलग अलग स्थानों पर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच में जुटे हैं। बैंक खातों लेनदेन बेनामी संपत्तियों और निवेश के हर पहलू की पड़ताल की जा रही है।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि संपत्ति के स्रोत संतोषजनक नहीं पाए गए तो संबंधित संपत्तियों की जब्ती और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इस कार्रवाई को मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

  • पत्नी दो महीने से मायके में थी, मानसिक तनाव में युवक ने दी जान; आखिरी कॉल से खुली घटना की परत

    पत्नी दो महीने से मायके में थी, मानसिक तनाव में युवक ने दी जान; आखिरी कॉल से खुली घटना की परत


    मध्य प्रदेश। इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में रविवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। 39 वर्षीय युवक ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उसने अपने एक दोस्त को फोन कर कहा कि परिवार से कह देना कि अब मैं नहीं रहा। इसके कुछ ही देर बाद उसने यह कदम उठा लिया। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और उसे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान साईं सुमन नगर निवासी विशाल चौहान के रूप में हुई है। वह एक निजी कंपनी में कार्यरत था। रविवार को अवकाश होने के कारण वह घर पर ही मौजूद था। घटना के समय परिवार के अन्य सदस्य घर से बाहर थे।

    मृतक के चचेरे भाई अनिल ने बताया कि उन्हें विशाल के दोस्त का फोन आया था, लेकिन बाइक चलाने के कारण वह कॉल नहीं उठा सके। कुछ देर बाद जब उन्होंने वापस फोन किया तो दोस्त ने बताया कि विशाल ने आखिरी बार फोन कर कहा था कि वह अब इस दुनिया में नहीं रहेगा और परिवार को इसकी जानकारी दे देना। यह सुनते ही अनिल ने विशाल के भाई से संपर्क किया, लेकिन वह भी घर पर मौजूद नहीं था। बाद में मां को सूचना दी गई। जब परिवार के लोग घर पहुंचे तो विशाल कमरे में फंदे से लटका मिला।

    परिजन उसे तुरंत पास के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों के मुताबिक विशाल अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ अलग रहता था। उसकी पत्नी पिछले करीब दो महीने से एरोड्रम क्षेत्र स्थित अपने मायके में रह रही थी। परिवार का कहना है कि पत्नी के वापस नहीं आने से वह मानसिक तनाव में था। हालांकि, पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, इसलिए आत्महत्या के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। परिजनों और परिचितों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहा है, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें या तुरंत स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अथवा हेल्पलाइन से संपर्क करें। समय पर मदद मिलना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

  • इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक, इंजीनियर से ₹1.12 लाख और छात्रा से ₹40 हजार की ऑनलाइन ठगी

    इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक, इंजीनियर से ₹1.12 लाख और छात्रा से ₹40 हजार की ऑनलाइन ठगी


    इंदौर । इंदौर में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। शहर में ऑनलाइन ठगी के दो अलग-अलग मामलों में बदमाशों ने एक सिविल इंजीनियर और एक छात्रा को अपना शिकार बनाकर कुल 1.52 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी कर ली। दोनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र का है, जहां धनवंतरी नगर स्थित साईं विला अपार्टमेंट निवासी सिविल इंजीनियर आनंद बनवडीकर के क्रेडिट कार्ड से बिना उनकी अनुमति के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर दिए गए। आनंद के मुताबिक 8 जुलाई को दोपहर उनके मोबाइल पर लगातार ट्रांजेक्शन के मैसेज आए। जांच करने पर पता चला कि उनके आईसीआईसीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड से दो बार 51-51 हजार रुपए और दूसरे क्रेडिट कार्ड से 10 हजार रुपए का भुगतान किया गया। इस तरह कुल 1 लाख 12 हजार रुपए उनके खाते से निकल गए।

    घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने बैंक से संपर्क कर दोनों क्रेडिट कार्ड तत्काल ब्लॉक करवा दिए। शिकायत में बताया गया है कि ट्रांजेक्शन अमेजन सेलर सर्विस और कैशफ्री इनोवेटिव रिटेल आईडी के माध्यम से किए गए। पुलिस अब संबंधित बैंक खातों और ऑनलाइन भुगतान के स्रोत की जांच कर रही है।

    दूसरा मामला भंवरकुआ थाना क्षेत्र का है, जहां एक छात्रा इंस्टाग्राम पर ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान साइबर ठगी का शिकार हो गई। छात्रा मोना नागर ने पुलिस को बताया कि उसने इंस्टाग्राम पर ‘सुमन वूमन’ नाम के अकाउंट से 999 रुपए की ड्रेस ऑर्डर की थी। ऑर्डर के बाद एक युवक ने फोन कर वेरिफिकेशन के नाम पर पहले 500 रुपए जमा कराने को कहा।

    युवक ने बातचीत के दौरान अलग-अलग प्रक्रिया बताकर कई बार ऑनलाइन भुगतान कराया। छात्रा उसकी बातों में आ गई और कुछ ही देर में उसके बैंक खाते से करीब 40 हजार रुपए निकल गए। ठगी का एहसास होने पर उसने तत्काल साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराई।

    दोनों मामलों में पुलिस डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित ऑनलाइन अकाउंट की जांच कर रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वेरिफिकेशन लिंक या सोशल मीडिया शॉपिंग ऑफर पर बिना पुष्टि किए भुगतान न करें और संदिग्ध ट्रांजेक्शन होने पर तुरंत बैंक तथा साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।

  • बारिश से पहले इंदौर में जर्जर भवनों पर चला बुलडोजर, जेल रोड का मकान ढहाया, एक मालिक को दो दिन की मोहलत

    बारिश से पहले इंदौर में जर्जर भवनों पर चला बुलडोजर, जेल रोड का मकान ढहाया, एक मालिक को दो दिन की मोहलत


    मध्य प्रदेश। मानसून के दौरान जर्जर भवनों से होने वाले संभावित हादसों को रोकने के लिए इंदौर नगर निगम ने शहरभर में विशेष अभियान शुरू कर दिया है। इसी क्रम में सोमवार को निगम की टीम ने जेल रोड स्थित एक खतरनाक मकान को मशीनों की मदद से ध्वस्त कर दिया। वहीं पास ही स्थित एक अन्य भवन की जर्जर गैलरी को हटाने के लिए मकान मालिक को दो दिन का अंतिम समय दिया गया है। इसके अलावा कुमार मोहल्ला में नगर निगम के पुराने और जर्जर क्वार्टरों को भी हटाने की कार्रवाई की गई।

    नगर निगम की कार्रवाई जोन क्रमांक-3 के अंतर्गत जेल रोड क्षेत्र में की गई, जहां लंबे समय से जर्जर हालत में खड़ा भवन लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ था। भवन अधिकारी पल्लवी पाल ने बताया कि नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर शहर के जर्जर भवनों का सर्वे कराया जा रहा है और जिन इमारतों से दुर्घटना की आशंका है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जा रहा है।

    अधिकारियों के अनुसार जेल रोड स्थित भवन के समीप मेट्रो स्टेशन का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य के दौरान लगातार हो रहे कंपन के कारण भवन की गैलरी हिलने लगी थी और उसके कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई थी। इसी खतरे को देखते हुए निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे भवन को गिरा दिया, ताकि बारिश के दौरान कोई बड़ा हादसा न हो।

    कार्रवाई के दौरान पास के एक अन्य मकान की गैलरी भी बेहद जर्जर पाई गई। भवन स्वामिनी विनोदिनी अग्रवाल मौके पर मौजूद नहीं थीं, इसलिए निगम ने उन्हें नोटिस जारी कर गैलरी हटाने के लिए दो दिन का समय दिया है। यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं की गई तो नगर निगम स्वयं गैलरी हटाकर खर्च की वसूली नियमानुसार करेगा।

    इसके बाद निगम का अमला कुमार मोहल्ला पहुंचा, जहां नगर निगम के पुराने और अनुपयोगी क्वार्टरों को हटाने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई से पहले कर्मचारियों ने भवनों से सामान सुरक्षित बाहर निकलवाया और उसके बाद मशीनों की मदद से जर्जर ढांचों को तोड़ दिया गया।

    नगर निगम ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके मकान का कोई हिस्सा कमजोर या जर्जर हो चुका है तो उसे समय रहते हटवा लें। इससे बारिश के दौरान भवन गिरने जैसी घटनाओं से बचा जा सकेगा और जनहानि की आशंका भी कम होगी। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के पूरे मौसम में शहरभर में ऐसे जर्जर भवनों की पहचान कर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

  • 5 दिन की राहत के बाद फिर बदलेगा मौसम, 16 जुलाई से एक्टिव होगा नया सिस्टम, मध्यप्रदेश में तेज बारिश की संभावना

    5 दिन की राहत के बाद फिर बदलेगा मौसम, 16 जुलाई से एक्टिव होगा नया सिस्टम, मध्यप्रदेश में तेज बारिश की संभावना


    मध्य प्रदेश। इंदौर के सुमन नगर इलाके में 23 जून को हुए गैस पाइपलाइन विस्फोट की भयावहता अब भी लोगों के जेहन में ताजा है। इस हादसे में गंभीर रूप से झुलसे 38 वर्षीय विजय पटेल उर्फ लल्ला पिछले 20 दिनों से अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। उनका पूरा शरीर आग की लपटों में घिर गया था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। जलती हुई हालत में करीब 200 मीटर तक दौड़ने और सड़क पर लेट-लेटकर आग बुझाने के बाद किसी तरह अपनी जान बचाई। अब उनका परिवार इलाज, मुआवजे और सरकारी मदद की उम्मीद लगाए बैठा है।

    23 जून की दोपहर सुमन नगर जैन मंदिर के पास अवंतिका गैस पाइपलाइन में अचानक विस्फोट हुआ। धमाके के साथ आग का विशाल गुबार उठा और कुछ ही सेकेंड में आसपास का इलाका उसकी चपेट में आ गया। विजय पटेल उस समय बाइक से ड्यूटी पर जा रहे थे और सीधे आग की लपटों में घिर गए। कुछ ही पलों में उनका पूरा शरीर जलने लगा। आसपास मौजूद लोग हादसा देखते रहे, लेकिन कोई उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया।

    अपनी जान बचाने के लिए विजय ने जलती हुई बाइक छोड़ दी और दौड़ना शुरू कर दिया। करीब 200 मीटर तक भागने के बाद भी जब कहीं पानी नहीं मिला तो उन्होंने सड़क पर बार-बार लेटकर शरीर में लगी आग बुझाने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद आग तो बुझ गई, लेकिन तब तक उनका शरीर करीब 40 प्रतिशत तक झुलस चुका था।

    गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद विजय ने हिम्मत नहीं छोड़ी। किसी तरह अपने घर पहुंचे और पत्नी माया को आवाज लगाकर बताया कि वह आग में झुलस गए हैं। पति की हालत देखकर माया तुरंत उन्हें रिक्शे से नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचीं, लेकिन वहां बर्न यूनिट नहीं होने के कारण पहले अरविंदो अस्पताल और बाद में बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। फिलहाल उनकी दो सर्जरी हो चुकी हैं, जबकि तीसरी सर्जरी अभी बाकी है।

    माया पटेल का आरोप है कि हादसे के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से समय पर मदद नहीं मिली। उनका कहना है कि कई बार गुहार लगाने के बावजूद शुरुआती दो दिनों तक किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने सुध नहीं ली। विरोध दर्ज कराने के बाद तीसरे दिन उनके पति को बेहतर इलाज के लिए बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहत और मुआवजा प्रक्रिया में शुरुआत में उनके पति का नाम तक शामिल नहीं किया गया था। बाद में कानूनी मदद लेकर दस्तावेज पूरे किए गए, तब जाकर कार्रवाई आगे बढ़ सकी।

    डॉक्टरों के अनुसार विजय को पूरी तरह स्वस्थ होने में छह से सात महीने लग सकते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी अब गंभीर संकट में है क्योंकि विजय ही घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। लंबे इलाज और काम करने में असमर्थता के कारण परिवार पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

    माया ने राज्य सरकार से पति के इलाज का पूरा खर्च उठाने, उचित मुआवजा देने और परिवार के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस हादसे ने केवल उनके पति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को संकट में डाल दिया है। अब उन्हें सरकार से सिर्फ न्याय, सहारा और संवेदनशील सहयोग की उम्मीद है।

  • शिवपुरी हाईवे पर बड़ा हादसा टला, अनियंत्रित बस मीडियन में उतरी, चालक फरार, यात्रियों ने लगाए लापरवाही के आरोप

    शिवपुरी हाईवे पर बड़ा हादसा टला, अनियंत्रित बस मीडियन में उतरी, चालक फरार, यात्रियों ने लगाए लापरवाही के आरोप


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र में बुधवार तड़के राष्ट्रीय राजमार्ग 46 पर एक बड़ा सड़क हादसा होते होते टल गया। इंदौर से ग्वालियर जा रही कृष्णा ट्रेवल्स की स्लीपर कोच बस अचानक अनियंत्रित होकर हाईवे के मीडियन में उतर गई। राहत की बात यह रही कि मीडियन की गीली और नरम मिट्टी में बस फंस गई जिससे वह पलटने से बच गई और बस में सवार यात्रियों की जान सुरक्षित रही। यदि बस पलट जाती तो हादसा बेहद भयावह हो सकता था और बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था।

    जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना बुधवार सुबह करीब साढ़े चार बजे बदरवास के सड़ बाईपास के पास हुई। बस इंदौर से ग्वालियर की ओर जा रही थी और उसमें कई यात्री सवार थे। अचानक संतुलन बिगड़ने के बाद बस सीधे हाईवे के मीडियन में उतर गई। तेज झटके के कारण बस में बैठे यात्रियों में अफरा तफरी मच गई। कई लोग घबरा गए और चीख पुकार शुरू हो गई लेकिन कुछ ही देर में सभी को यह एहसास हुआ कि बस पलटी नहीं है जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।

    घटना की सूचना मिलते ही बदरवास थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस ने बस में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला और उनके गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक वाहन की व्यवस्था कराई। हादसे में बामौरकला निवासी मोनिका जाटव सहित कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आईं जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। किसी भी यात्री को गंभीर चोट नहीं आई जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

    हादसे के बाद बस चालक और बस का अन्य स्टाफ मौके से फरार हो गया। इससे यात्रियों में नाराजगी देखी गई। यात्रियों का आरोप है कि चालक शुरुआत से ही तेज रफ्तार में बस चला रहा था और कई बार यात्रियों ने उसे सावधानी से वाहन चलाने की सलाह भी दी थी लेकिन उसने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया। यात्रियों का कहना है कि यदि चालक समय रहते गति नियंत्रित कर लेता तो यह हादसा नहीं होता।

    स्थानीय लोगों का भी मानना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना लगातार हादसों का कारण बन रहा है। परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियों को ऐसे मामलों में सख्ती बरतने की जरूरत है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी दूरी की बसों के चालकों की नियमित निगरानी और समय समय पर फिटनेस जांच भी जरूरी है।

    फिलहाल बदरवास थाना पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है और बस चालक की तलाश भी की जा रही है। पुलिस यात्रियों के बयान दर्ज कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा तेज रफ्तार की वजह से हुआ या इसके पीछे कोई तकनीकी खराबी भी जिम्मेदार थी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • रीलबाजी से लेकर सड़क पर विरोध तक, मध्यप्रदेश की राजनीति के तीन वीडियो बने चर्चा का विषय

    रीलबाजी से लेकर सड़क पर विरोध तक, मध्यप्रदेश की राजनीति के तीन वीडियो बने चर्चा का विषय


    मध्यप्रदेश। । मध्यप्रदेश की राजनीति में मंगलवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना जिन्होंने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छेड़ दी। कहीं मंत्री खेत में हल चलाते नजर आए तो कहीं विधायक कार्यकर्ताओं के दिए गुलदस्ते फेंकते दिखाई दिए। दूसरी ओर मुख्यमंत्री के काफिले के लिए ट्रैफिक रोके जाने से नाराज लोगों ने वीआईपी संस्कृति पर सवाल उठाए। इन तीनों घटनाओं ने आम लोगों के बीच शासन व्यवस्था नेताओं की कार्यशैली और जनता की अपेक्षाओं को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी।

    बड़वानी दौरे के दौरान प्रदेश के मंत्री गौतम टेटवाल अचानक सड़क किनारे एक खेत में पहुंच गए और किसानों की तरह बैलों के साथ हल चलाने लगे। इस दौरान कैमरे भी चालू रहे और पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारित किया गया। हालांकि यह प्रयास उस समय चर्चा का विषय बन गया जब बैलों की रफ्तार तेज होने पर मंत्री उनके पीछे खिंचते चले गए और उनका संतुलन बिगड़ गया। यह वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    वीडियो सामने आने के बाद लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे किसानों से जुड़ने का प्रयास बताया तो कई लोगों ने इसे केवल प्रचार और रीलबाजी करार दिया। कई यूजर्स का कहना था कि किसानों की वास्तविक समस्याओं जैसे खाद बीज सिंचाई और फसल की कीमतों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। वहीं कुछ लोगों ने मंत्री के प्रयास को सकारात्मक बताते हुए इसे खेतों से जुड़ाव का प्रतीक भी माना।

    इसी दिन भोपाल से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। जन्मदिन के अवसर पर समर्थक उन्हें लगातार गुलदस्ते भेंट कर रहे थे लेकिन विधायक उन्हें लेते ही एक ओर रख या फेंकते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे कार्यकर्ताओं की भावनाओं के प्रति असम्मान बताया जबकि कुछ लोगों का कहना था कि बड़ी संख्या में आए समर्थकों के कारण गुलदस्ते संभालना संभव नहीं था इसलिए ऐसा दृश्य दिखाई दिया।

    उधर ग्वालियर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के काफिले के गुजरने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के तहत कुछ समय के लिए ट्रैफिक रोक दिया गया। इससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और लोगों को इंतजार करना पड़ा। कई वाहन चालकों ने नाराजगी जताई और हॉर्न बजाकर विरोध दर्ज कराया। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया जिसमें वीआईपी मूवमेंट के कारण आम नागरिकों को होने वाली असुविधा पर सवाल उठाए गए। कुछ स्थानों पर लोगों और पुलिस के बीच बहस भी देखने को मिली।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि जनप्रतिनिधियों की सार्वजनिक गतिविधियों और आम जनता की अपेक्षाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। सोशल मीडिया के दौर में नेताओं का हर कदम कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाता है और उस पर तुरंत प्रतिक्रिया भी सामने आने लगती है। ऐसे में राजनीतिक व्यक्तित्वों के व्यवहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर लोगों की संवेदनशीलता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का जनता से संवाद और जुड़ाव महत्वपूर्ण है लेकिन साथ ही सार्वजनिक आचरण और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में जनता की सुविधा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यही कारण है कि दिनभर की इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया और सोशल मीडिया पर भी लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहीं।

  • NEET पेपर लीक के विरोध में इंदौर में सातवें दिन भी धरना जारी: कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    NEET पेपर लीक के विरोध में इंदौर में सातवें दिन भी धरना जारी: कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    इंदौर । इंदौर में NEET पेपर लीक मामले और छात्रों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। टंट्याभील चौराहे पर छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बारिश के बावजूद धरनास्थल पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने टेंट लगाकर अपना आंदोलन जारी रखा और नारेबाजी, कैंडल मार्च, हवन तथा क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र संगठनों का कहना है कि देशभर में सामने आए NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के संबंध में कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।

    धरने में केवल NEET परीक्षा का मुद्दा ही नहीं बल्कि प्रदेश के छात्रों से जुड़े कई अन्य विषय भी शामिल किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान, छात्रावास की बेहतर सुविधाएं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कुल 23 मांगों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखा है। उनका कहना है कि छात्रों की समस्याओं का लंबे समय से समाधान नहीं हो रहा है, इसलिए उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    धरनास्थल पर पिछले सात दिनों के दौरान कई प्रतीकात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने दिवंगत छात्रों की स्मृति में कैंडल मार्च निकाला, हवन किया और थाली बजाकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य छात्रों की आवाज शासन तक पहुंचाना है।

    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों के सामने सभी मांगें रखी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में आगामी दिनों में विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

    छात्र संगठनों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। उनका आग्रह है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में भी शीघ्र कदम उठाए जाएं।

  • राजगढ़ में दर्दनाक हादसा पानी से भरी खदान में समा गया पूरा परिवार भाई बहन और बुआ की मौत से गांव में मातम

    राजगढ़ में दर्दनाक हादसा पानी से भरी खदान में समा गया पूरा परिवार भाई बहन और बुआ की मौत से गांव में मातम


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। ब्यावरा के जगनियापुरा गांव स्थित पानी से भरी क्रेशर खदान में डूबने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे में पांच वर्षीय मासूम निखरा पारदी उसकी ग्यारह वर्षीय बहन नम्रता पारदी और दोनों को बचाने के लिए पानी में कूदी उनकी पैंतीस वर्षीय बुआ सायराबाई पारदी की जान चली गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।

    जानकारी के अनुसार सोमवार शाम करीब चार बजे गांव के कुछ बच्चे क्रेशर की खदान के पास खेल रहे थे। खेलते समय उनकी गेंद गहरे पानी से भरी खदान में गिर गई। गेंद निकालने के प्रयास में निखरा और उसकी बहन नम्रता खदान के किनारे पहुंचे लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरे पानी में गिर गए। देखते ही देखते दोनों बच्चे डूबने लगे और मदद के लिए चीखने लगे।

    बच्चों की आवाज सुनते ही उनकी बुआ सायराबाई पारदी दौड़कर मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए दोनों बच्चों को बचाने के लिए तुरंत खदान में छलांग लगा दी। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक बच्चे को पकड़कर बाहर निकालने की कोशिश भी की लेकिन दूसरे बच्चे को बचाने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया। खदान का पानी काफी गहरा होने के कारण वह भी खुद को संभाल नहीं सकीं और तीनों कुछ ही पलों में पानी में समा गए।

    घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस तथा प्रशासन को सूचना दी गई। ब्यावरा सिटी थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों की मदद से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद तीनों को पानी से बाहर निकाला गया और तुरंत सिविल अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया है। मामले में मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दुर्घटना पानी से भरी गहरी खदान के किनारे खेलते समय हुई।

    यह घटना एक बार फिर परित्यक्त और पानी से भरी खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी खदानों के आसपास मजबूत घेराबंदी चेतावनी बोर्ड और निगरानी की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है ताकि बच्चे अनजाने में वहां न पहुंच सकें। अभिभावकों को भी बच्चों को खतरनाक और गहरे जलाशयों के पास अकेले खेलने से रोकना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी कई अनमोल जिंदगियों को बचा सकती है।