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  • MP: OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर CM बोले- कांग्रेस सरकार का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की करेंगे समीक्षा

    MP: OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर CM बोले- कांग्रेस सरकार का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की करेंगे समीक्षा


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण (27 Percent OBC reservation ) से जुड़े मामले में हाईकोर्ट (High Court) के फैसले पर मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी और इसके प्रावधानों में गंभीर कानूनी खामियां थीं। राज्य सरकार हाईकोर्ट के निर्णय का विधिक परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 से 2022 के बीच की गई नियुक्तियों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। उनके मुताबिक, न्यायालय ने 13 प्रतिशत अतिरिक्त नियुक्तियों को संरक्षण देते हुए आगामी भर्ती में समायोजित करने का निर्देश दिया है। वहीं, वर्ष 2022 के बाद से फैसले की तारीख तक की गई भर्तियों में 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए हैं।


    कांग्रेस सरकार की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

    सीएम मोहन यादव ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के जरिए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी। उनके अनुसार, इस संबंध में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से भी परामर्श नहीं लिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से तत्कालीन सरकार की प्रक्रिया और आरक्षण लागू करने के तरीके पर सवाल उठे हैं।


    विधिक परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले का विधिक परीक्षण करेगी और इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ओबीसी आरक्षण के मामले में फैसले के प्रभाव और राज्य सरकार के अगले कदम को लेकर अब कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

  • MP में GIS से पहले निवेश जुटाने की बड़ी तैयारी… CM कल मुम्बई में निवेशकों से करेंगे संवाद

    MP में GIS से पहले निवेश जुटाने की बड़ी तैयारी… CM कल मुम्बई में निवेशकों से करेंगे संवाद


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में जनवरी 2027 में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) (Global Investors Summit – GIS) से पहले सरकार ने निवेशकों से सीधा संपर्क बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) 8 अक्तूबर को मुंबई में देश के प्रमुख उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। मुंबई के लोअर परेल स्थित द सेंट रेजिस होटल में होने वाले निवेश संवाद में मुख्यमंत्री उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगे। मुंबई देश के बड़े औद्योगिक और कारोबारी समूहों का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में मुख्यमंत्री का उद्योगपतियों से सीधे संवाद का मकसद मध्य प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी देने के साथ ही कंपनियों की जरूरत और उनके निवेश प्रस्तावों को समझना भी है।


    उद्योगपतियों के सामने रखेंगे एमपी का रोडमैप

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के अवसर, औद्योगिक अधोसंरचना और अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स की जानकारी दी जाएगी। औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण देंगे। सरकार की ओर से निवेशकों को प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और लॉजिस्टिक्स से जुड़े फायदे भी बताए जाएंगे। मध्यप्रदेश देश के मध्य में होने के कारण बड़े बाजारों तक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा उद्योगों की जरूरत के मुताबिक अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को मजबूत करने की जानकारी भी साझा की जाएगी।


    वन-टू-वन बैठक में निवेशकों की जरूरत समझेंगे सीएम

    मुख्यमंत्री की उद्योगपतियों के साथ होने वाली व्यक्तिगत बैठकों को इस संवाद का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इन बैठकों में कंपनियों के निवेश प्रस्ताव, उनकी व्यावसायिक जरूरतें और प्रदेश में निवेश को लेकर आने वाली संभावित दिक्कतों पर सीधे चर्चा होगी। सरकार निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने, जरूरी अनुमतियों को सुगम करने और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के अपने प्रयासों की जानकारी भी निवेशकों को देगी। अलग-अलग उद्योग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा होगी।

  • MP: ₹450 करोड़ के स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसे इंतजाम, लेकिन प्लेटफॉर्म पर घूम रहीं भैंसें… उठे सवाल

    MP: ₹450 करोड़ के स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसे इंतजाम, लेकिन प्लेटफॉर्म पर घूम रहीं भैंसें… उठे सवाल


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (Rani Kamlapati Railway Station) को देश के वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशनों (World-class railway stations) में शुमार किया जाता है, जहां एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं का दावा किया जाता है, उसी स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर भैंसों के घूमने का वीडियो सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. प्लेटफॉर्म पर दो भैंसें ट्रेन के बिल्कुल बगल से गुजरती हुई दिखाई दे रही हैं. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

    वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दो भैंसें प्लेटफॉर्म पर आराम से टहल रही हैं और यात्रियों के बीच से होते हुए ट्रेन के पास तक पहुंच गईं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर भैंसें प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचीं?


    450 करोड़ के स्टेशन पर सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल

    रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया गया है. इसे देश के पहले विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशनों में शामिल किया गया है। स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं, एस्केलेटर, लिफ्ट, एसी लाउंज, फूड कोर्ट और आधुनिक यात्री सुविधाएं मौजूद हैं. लेकिन प्लेटफॉर्म पर आवारा पशुओं के पहुंचने का वीडियो सामने आने के बाद करोड़ों रुपये की लागत से तैयार स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।


    रेलवे बोला- मामले को दिखवा रहे हैं

    मामले को लेकर जनसंपर्क अधिकारी शिव शंकर शाह ने कहा कि वह पूरे मामले को दिखवाएंगे. उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन की सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे और बंसल के पास है. सुरक्षा में कहीं कोई चूक सामने आती है तो रेलवे, बंसल के साथ मिलकर उसे सुधारने का काम करता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि कई बार आउटर की तरफ का हिस्सा खुला रह जाता है, जिसकी वजह से जानवर स्टेशन परिसर में प्रवेश कर सकते हैं. इसके अलावा रेलवे पटरी के आसपास लोग खाने-पीने का सामान भी फेंक देते हैं. खाने की तलाश में जानवर रेलवे ट्रैक और स्टेशन की तरफ आ जाते हैं।


    यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

    हालांकि रेलवे का तर्क अपनी जगह है, लेकिन सवाल यह है कि अगर एक भैंस प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकती है तो सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है? प्लेटफॉर्म पर ट्रेनें लगातार आती-जाती हैं और बड़ी संख्या में यात्री मौजूद रहते हैं. ऐसे में किसी आवारा पशु के अचानक ट्रेन की चपेट में आने या यात्रियों से टकराने की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है।

    फिलहाल रेलवे ने मामले को संज्ञान में लेकर जांच कराने की बात कही है. अब देखना होगा कि भैंसें स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचीं और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए रेलवे और स्टेशन प्रबंधन क्या कदम उठाता है।

  • MP में Air कनेक्टिविटी के बड़े विस्तार की तैयारी, 10 एयरपोर्ट… 230 विधानसभा में बनेंगे स्थायी हेलीपैड

    MP में Air कनेक्टिविटी के बड़े विस्तार की तैयारी, 10 एयरपोर्ट… 230 विधानसभा में बनेंगे स्थायी हेलीपैड


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में हवाई कनेक्टिविटी (Air Connectivity) को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) के नेतृत्व वाली सरकार प्रदेश में एयरपोर्ट (Airport), एयरस्ट्रिप और हेलीपैड का नेटवर्क मजबूत कर रही है. सरकार की योजना के तहत आने वाले समय में प्रदेश में 10 एयरपोर्ट, हर 150 किमी पर एयरपोर्ट, हर 75 किमी पर एयरस्ट्रिप और हर 45 किमी पर हेलीपैड विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    इतना ही नहीं, प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में स्थायी हेलीपैड विकसित करने की योजना है. सरकार का दावा है कि इससे आम नागरिकों के साथ-साथ स्वास्थ्य, आपातकालीन सेवाओं, पर्यटन और निवेश को भी बेहतर हवाई संपर्क मिलेगा।

    अभी MP में कितने एयरपोर्ट हैं?
    मध्य प्रदेश में फिलहाल 8 एयरपोर्ट, 20 से अधिक एयरस्ट्रिप और करीब 220 हेलीपैड हैं. साल 2023-24 में प्रदेश में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और खजुराहो के 5 प्रमुख एयरपोर्ट संचालित थे। इसके बाद रीवा, दतिया और सतना को जोड़कर एयरपोर्ट की संख्या 8 हो गई. अब उज्जैन और शिवपुरी में एयरपोर्ट विकसित किए जा रहे हैं. इनके तैयार होने के बाद प्रदेश में एयरपोर्ट की संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी।


    5 नए एयरपोर्ट की मंजूरी का इंतजार

    राज्य सरकार पांच नए एयरपोर्ट विकसित करने के प्रस्ताव पर भी काम कर रही है. इनकी स्वीकृति केंद्र सरकार के स्तर पर प्रक्रियाधीन है. इनमें सिंगरौली को प्राथमिकता दी गई है. इसके अलावा उड़ान योजना के तहत प्रदेश की 10 मौजूदा एयरस्ट्रिप को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है. इनमें सिंगरौली, सागर, नीमच, छिंदवाड़ा, मंडला, खंडवा, रतलाम, मंदसौर, उमरिया और शहडोल शामिल हैं।


    हर 45 किमी पर हेलीपैड का लक्ष्य

    सरकार प्रदेश में हवाई सुविधाओं को जिला मुख्यालयों तक सीमित रखने के बजाय ज्यादा व्यापक नेटवर्क तैयार करना चाहती है. इसके तहत हर 150 किमी पर एयरपोर्ट, 75 किमी पर एयरस्ट्रिप और 45 किमी पर हेलीपैड विकसित करने की योजना है। साथ ही प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में स्थायी हेलीपैड बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इससे आपात स्थिति, वीआईपी मूवमेंट, मेडिकल इमरजेंसी और दूरदराज के क्षेत्रों तक तेज पहुंच में मदद मिलने की उम्मीद है।


    एयर एंबुलेंस से अब तक 186 मरीजों को मदद

    मध्य प्रदेश में पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा 29 मई 2024 से संचालित है. आयुष्मान कार्डधारियों को प्रदेश के भीतर और प्रदेश से बाहर सरकारी तथा आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों तक निःशुल्क हवाई परिवहन की सुविधा दी जाती है. गैर-आयुष्मान हितग्राहियों को प्रदेश के सरकारी अस्पताल तक निःशुल्क और प्रदेश के बाहर निर्धारित दरों पर यह सुविधा उपलब्ध है. सरकार के अनुसार अब तक 186 मरीजों और दुर्घटना पीड़ितों को इस सेवा का लाभ मिल चुका है।


    हेली टूरिज्म से उज्जैन, ओंकारेश्वर और चंदेरी तक पहुंच आसान

    मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा भी शुरू की गई है. इसके तहत आध्यात्मिक, हेरिटेज और वाइल्डलाइफ पर्यटन के लिए अलग-अलग सेक्टर निर्धारित किए गए हैं।
    – आध्यात्मिक पर्यटन: इंदौर-उज्जैन-ओंकारेश्वर
    – हेरिटेज पर्यटन: भोपाल-चंदेरी-ओरछा
    – वाइल्डलाइफ पर्यटन: जबलपुर-मैहर-चित्रकूट-कान्हा-बांधवगढ़

    चंदेरी और ओरछा में जॉय राइड की सुविधा भी उपलब्ध है. सरकार के मुताबिक अब तक 5,200 से ज्यादा यात्रियों ने हेली सेवा का इस्तेमाल किया है और 680 से अधिक जॉय राइड संचालित की जा चुकी हैं।


    इंदौर से अबूधाबी की सीधी उड़ान

    मध्य प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय एयर कनेक्टिविटी भी लगातार बढ़ रही है. इंदौर से पहले दुबई के लिए हवाई संपर्क स्थापित हुआ और अब अबूधाबी के लिए सीधी उड़ान शुरू हुई है. इंदौर-अबूधाबी सीधी उड़ान मध्य प्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 के तहत वित्त पोषित प्रदेश की पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान बताई गई है. करीब 3 घंटे 15 मिनट की इस उड़ान से मध्य प्रदेश का खाड़ी क्षेत्र से सीधा हवाई संपर्क मजबूत हुआ है।


    सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में नया एयरपोर्ट

    सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन के दताना-मताना एयरपोर्ट का विकास महत्वपूर्ण माना जा रहा है. आरसीएस उड़ान 5.2 के तहत शुरुआती चरण में 1,800 मीटर लंबा रनवे विकसित किया जा रहा है. भविष्य में इसे बढ़ाकर 2,700 मीटर किया जाएगा. एयरपोर्ट के तैयार होने के बाद सिंहस्थ के दौरान देशभर से उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए हवाई कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिल सकता है।


    MP को मिलेगा अपना सरकारी विमान

    मध्य प्रदेश सरकार के बेड़े में नया शासकीय विमान भी शामिल होने जा रहा है. सरकार के मुताबिक अभी चार्टर्ड विमान के इस्तेमाल पर होने वाला खर्च ज्यादा है. नया सरकारी विमान मिलने के बाद विमान संचालन पर होने वाला मासिक खर्च करीब एक-तिहाई रह जाने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार कोविड-19 के दौरान प्रदेश का विमान रेमडेसिविर जैसी जरूरी दवाओं की आपूर्ति करते समय ग्वालियर में क्षतिग्रस्त हो गया था. इसके बाद से राज्य सरकार चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल कर रही है।

    MP का हवाई नेटवर्क कितना बड़ा होने वाला है?
    मध्य प्रदेश सरकार की योजना सिर्फ नए एयरपोर्ट बनाने तक सीमित नहीं है. एयरपोर्ट, एयरस्ट्रिप, हेलीपैड, एयर एंबुलेंस, हेली टूरिज्म और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को एक साथ विस्तार देने की तैयारी है। 10 एयरपोर्ट + 75 किमी पर एयरस्ट्रिप + 45 किमी पर हेलीपैड + 230 विधानसभा क्षेत्रों में स्थायी हेलीपैड का यह नेटवर्क आने वाले वर्षों में प्रदेश की कनेक्टिविटी को नया स्वरूप दे सकता है. खासतौर पर सिंहस्थ-2028, मेडिकल इमरजेंसी, पर्यटन और निवेश के लिहाज से इसे अहम माना जा रहा है।

  • MP: विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने की Gen-Z की बजाय युवाओं को तरुण भारत कहने की वकालत

    MP: विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने की Gen-Z की बजाय युवाओं को तरुण भारत कहने की वकालत


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर (Assembly Speaker Narendra Singh Tomar) ने ‘Gen-Z’ के बजाय ‘तरुण भारत’ (‘Tarun Bharat’) शब्द का इस्तेमाल करने की वकालत की. उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी का खुले मन से स्वागत किया जाना चाहिए क्योंकि बदलाव जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है।

    इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब द्वारा आयोजित भारतीय पत्रकारिता से जुड़े एक कार्यक्रम में तोमर ने कहा, “आज हर जगह ‘Gen-Z’ की चर्चा हो रही है, लेकिन मेरा आग्रह है कि ‘Gen-Z’ शब्द के बजाय अगर हम ‘तरुण भारत’ शब्द का इस्तेमाल करें, तो यह कहीं बेहतर होगा.”

    उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी देश और विदेश में उल्लेखनीय काम कर रही है, जिससे हर कोई हैरान है. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मौजूदा समय पीढ़ियों के बदलाव का दौर है. ऐसे में हम सभी को अपनी सोच का दायरा बढ़ाना चाहिए, नए पहलुओं पर गौर करना चाहिए और उस पीढ़ी का स्वागत और सम्मान करना चाहिए जो भविष्य में हमसे कमान संभालेगी.”

    बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पीढ़ीगत अंतर हो सकता है, लेकिन ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि युवा पीढ़ी हमेशा गलत दिशा में ही सोचेगी. उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं बदलाव को प्रकृति का नियम मानती हैं और हर दौर में बदलाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया रही है।

    पुराने मुगल शासकों का जिक्र करते हुए तोमर ने कहा कि ऐसी संस्कृतियां भी रही हैं जिनमें बेटा साम्राज्य पाने के लिए अपने ही पिता को कैद कर लेता था. उन्होंने कहा, “कुछ लोग जनता को गुमराह करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि देश के युवाओं ने पिछले 10-15 सालों में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रयोग किए हैं. युवाओं की इस उपलब्धि पर हम जितना भी गर्व करें, कम है।

    तोमर ने पीएम मोदी के नेतृत्व की तारीफ की और कहा कि भारत को वैश्विक पहचान मिली है, जबकि भारतीय युवा वैश्विक अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि विदेशों में प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में शामिल होने वाले भारतीय मूल के बड़ी संख्या में युवा सदस्य, विकसित देशों की तरक्की में भारतीयों के योगदान को दिखाते हैं।


    स्टार्ट-अप क्रांति में युवाओं का योगदान

    पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मोदी के नेतृत्व में भारत की स्टार्ट-अप यात्रा का भी जिक्र किया. उन्होंने आगे कहा, “जब हम सरकार में आए थे, तब देश में सिर्फ 300-400 स्टार्ट-अप हुआ करते थे. आज कॉम्पिटिशन की वजह से हजारों स्टार्ट-अप हैं. इन स्टार्ट-अप्स में वही युवा हैं जिन्हें आप ‘जेन-जी’ कहते हैं, जबकि मैं उन्हें ‘तरुण भारत’ कहता हूं।

    बता दें कि ‘Gen-Z’ का मतलब उस पीढ़ी से है जो मुख्य रूप से 1997 और 2012 के बीच पैदा हुई थी. देश में अलग-अलग मुद्दों पर बढ़ते युवा आंदोलनों के बीच राजनीतिक चर्चाओं में इस शब्द का इस्तेमाल बढ़ा है।

  • MP के डिंडोरी और मंडला जिले में काटे जा रहे 1.47 लाख साल के पेड़, जानिए क्या है वजह?

    MP के डिंडोरी और मंडला जिले में काटे जा रहे 1.47 लाख साल के पेड़, जानिए क्या है वजह?


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के डिंडोरी-मंडला (Dindori-Mandla) में एक कीड़ा साल के जंगलों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। यह कीड़ा (Worm) पेड़ों को अंदर से खोखला कर देता है। अब जंगलों के अस्तीत्व को बचाने और कीड़े के संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार अभियान चला रही है। इसके लिए प्रभावित पेड़ों को काटा जा रहा है। साथ ही कीड़ों को पकड़ा भी जा रहा है। ग्रामीण कीड़ों को हाथों से पकड़कर प्रति कीड़ा 2 रुपये तक की कमाई कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने 1.47 लाख प्रभावित पेड़ों को काटने के लिए मंजूरी दी है।


    साल के पेड़ों के लिए मुसीबत बना ‘साल हार्टवुड बोरर’

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में डिंडोरी-मंडला रोड के पास साल के जंगलों में बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं। इन पेड़ों की छाल हटा ली जाती है। गांव के लोग इन कटे पेड़ों के तनों पर नजर डालते हें और एक कीड़े को पकड़ते हैं। इस कीड़े का नाम ‘होप्लोसेरामबिक्स स्पिनिकॉर्निस’ है जिसे ‘साल हार्टवुड बोरर’ के नाम से जाना जाता है। यह एक लॉन्गहॉर्न बीटल है।


    कीड़ों का हार बनाते हैं ग्रामीण

    यह कीड़ा एक सदी से भी ज्यादा समय से साल के पेड़ों के लिए मुसीबत बना हुआ है। गांव के लोग इन कीड़ों को हाथों से पकड़ते हैं और बैग में डाल लेते हैं। गांव के लोग इन कीड़ों का हार बनाते हैं। इन बीटल के लंबे एंटीना हार बनाने के लिए गूंथने में मददगार साबित होते हैं। ग्रामीण इन कीड़ों को जिले के 8 कलेक्शन सेंटरों तक ले जाते हैं। गांव के लोगों को प्रति बीटल 2 रुपये मिलते हैं। इस सीजन में अब तक 19,25,118 बीटल जमा किए गए हैं। इससे राज्य के वन विभाग पर 38.5 लाख रुपये का बोझ पड़ा है।


    1.47 लाख पेड़ों को काटने की मंजूरी

    साल के पेड़ों के लिए खतरा बने इस कीड़े को पहली बार 1897 में दर्ज किया गया था। अब इस कीड़े का प्रकोप बड़े पैमाने पर फैल गया है। इस कारण डिंडोरी में एक बड़ा साल पेड़ कटाई अभियान चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने संक्रमण से प्रभावित 1.47 लाख पेड़ों को काटने की मंजूरी दी है। साल या ‘शोरिया रोबस्टा’ मध्य भारत के जंगलों में पाई जाने वाली प्रमुख पेड़ प्रजातियों में शुमार है। साल के पेड़ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में फैले जंगलों में पाए जाते हैं।


    आदिवासी समुदाय में साल के वृक्ष की अहमियत

    साल की लकड़ी अपनी मजबूती और सड़न-रोधी क्षमता के कारण बहुत कीमती होती है। आदिवासी समुदाय साल के पेड़ों पर बहुत ज्यादा निर्भर रहता है। साल के बीज से तेल निकाला जाता है। इसका इस्तेमाल खाना पकाने, साबुन और मिठाई बनाने में होता है। साल के पत्तों से दोने भी बनाए जाते हैं। यही नहीं तने से निकलने वाली राल का इस्तेमाल धूप के तौर पर भी होता है। यही कारण है कि आदिवासी समुदाय के लिए साल के जंगलों का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है।


    साल बोरर के 21 से ज्यादा प्रकोप

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘साल हार्टवुड बोरर’ शाल के पेड़ों को निशाना बनाता है। अब तक पूरे भारत में साल बोरर के 21 से ज्यादा प्रकोप देखे जा चुके हैं। मध्य प्रदेश और पड़ोसी छत्तीसगढ़ में 1997 और 2000 के बीच इसका तगड़ा प्रकोप सामने आया था। डिंडोरी से सटे मंडला जिले में पेड़ काटने के आदेश दिए गए हैं। वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि प्रकोप से निपटने के लिए कीड़ों को पकड़ना और पेड़ काटना दोनों उपाय चल रहे हैं।


    संक्रमण के खिलाफ ऐसे चलता है अभियान

    संक्रमित खड़े पेड़ों को काटना भी प्रकोप से बचने का एक उपाय है। बारिश के मौसम में कीड़ों को पकड़ने का अभियान चलाया जाता है। संक्रमित और बेकार हो चुके पेड़ों को काटा जाता है। उनकी छाल हटाई जाती है ताकि कीड़े बाहर आ जाएं। कीड़े बाहर आकर पेड़ का रस पीते हैं। ये रात में दिखाई देते हैं। पेड़ों को काटने और छाल हटाने के बाद तीन दिन के लिए तने को छोड़ दिया जाता है। इससे कीड़े बाहर निकल आते हैं। सुबह बाहर आ चुके कीड़ों को ग्रामीण हाथ से पकड़कर एक बैग में डाल लेते हैं।

  • UP में MP के पूर्व सीएम की पुश्तैनी जमीन को हड़पने का प्रयास… मां का नाम बदला, नकली वसीयत बनवाई

    UP में MP के पूर्व सीएम की पुश्तैनी जमीन को हड़पने का प्रयास… मां का नाम बदला, नकली वसीयत बनवाई


    भोपाल।
    फर्जी कब्जे और जाली दस्तावेजों को लेकर लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री को भी नहीं छोड़ा। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh ) के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Former Chief Minister Kamal Nath) की पुश्तैनी जमीन उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बिजनौर में है। इसपर कब्जा करने के लिए आरोपियों ने कमलनाथ के पिता का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र और वसीयत तक बनवा डाली। कमलनाथ को जब पता चला कि कुछ लोग उनकी जमीन हथियाने में लगे हैं और उनका उनके परिवार से कोई संबंध नहीं है तो वह भी हैरान रह गए। पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ फर्जीवाड़े का केस दर्ज किया है। इनमें से दो की गिरफ्तारी हो गई है जबकि एक अब भी फरार है। पुलिस पता लगाने में जुटी है कि ये लोग इसी तरह की अन्य संपत्तियों को हड़पने की कोशिश में तो नहीं लगे थे।


    लेखपाल भी आरोपी

    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के गांव अमीखानपुर स्थित करीब 26 बीघा बेशकीमती जमीन को हड़पने के लिए गुपचुप तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला सामने आया। जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार होने की जानकारी मिलने पर पूर्व मुख्यमंत्री के परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि लेखपाल समेत एक अन्य आरोपी की तलाश की जा रही है।


    26 बीघे जमीन बटाई पर

    पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के गांव अमीखानपुर में करीब 90 बीघा जमीन है। जमीन के वारिस उनके बेटे हैं। 26 बीघा जमीन बटाई पर दी गई है और बटाईदार ही खेती करने के साथ उसकी देखरेख करता है। पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार की ओर से नियमित रूप से जमीन की देखभाल के लिए कोई नहीं आता था। बटाईदार ही समय-समय पर जमीन के संबंध में परिजनों को जानकारी देता रहता था।

    वसीयत दर्ज कराने पहुंचे तो खुला खेल
    पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे ने जब जमीन की वसीयत दर्ज कराने के लिए नजीबाबाद तहसील में प्रार्थना पत्र दिया, तब फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। अभिलेखों में पिता की जमीन को हड़पने को फर्जी दस्तावेज तैयार करने की जानकारी सामने आई। इसके बाद परिजनों को पूरे मामले का पता चला।


    बदल दिया कमलनाथ की मां का भी नाम

    एफआईआर के मुताबिक रतन सिंह नाम के शख्स के बेटे धर्मपाल सिंह ने नजीबाबाद में तहसीलदार के सामने फर्जी वसीयत पेश की थी। आरोपियों ने कमलनाथ के पिता महेंद्र नाथ का मृत्यु प्रमाणपत्र भी बनवा लिया था। इसमें उनके निधन की तारीख 10 अप्रैल 2003 बताई गई जबकि महेंद्र नाथ का निधन 7 सितंबर 2004 को हुआ था। महेंद्र नाथ की पत्नी का नाम इसमें प्रेमलता लिखा गया था। कमलनाथ ने बताया कि यह भी गलत है। इस मामले में धर्मपाल सिंह के साथ ही जसबिंदर सिंह ढिल्लों, विजय शंकर पांडे और लेखपाल डेविड कुमार को आरोपी बनाया गया है।

  • MP: पन्ना की धरती ने फिर उगले हीरे…. चमकी महिला की किस्मत, 2 दिन में मिले चार डायमंड

    MP: पन्ना की धरती ने फिर उगले हीरे…. चमकी महिला की किस्मत, 2 दिन में मिले चार डायमंड


    पन्ना।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के पन्ना जिले (Panna district) में छह महीने से पति के साथ हीरा खदान (Diamond Mine) में मेहनत कर रही झांसी की रहने वाली गुड्डी देवी (Guddi Devi) की किस्मत दो दिन में चार हीरे मिलने के बाद चमक गई। इस मामले की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि सरकोहा क्षेत्र स्थित पट्टा खदान से मिले 5.16 कैरेट के इन हीरों की अनुमानित बाजार कीमत करीब 12 लाख रुपये है।


    सोशल मीडिया से सुनकर शुरू किया था काम

    गुड्डी देवी और उनके पति राजकुमार श्रीवास ने बताया कि झांसी में आर्थिक तंगी और काम ठीक नहीं चलने के कारण उन्होंने सोशल मीडिया पर पन्ना के हीरों से जुड़ी खबरें देखीं और यहां किस्मत आजमाने का फैसला किया। दोनों अपने बच्चों के साथ गुड्डी के मायके पन्ना आए और खदान पट्टे पर लेकर खुदाई शुरू की। अब उनकी किस्मत खुल गई है। 6 महीने की मेहनत के बाद अब पति-पत्नी खुश हैं।


    6 की मेहनत के बाद मिले हीरे

    सोशल मीडिया पर सुनने के बाद काम शुरू किया और करीब छह महीने की लगातार मेहनत के बाद उन्हें दो दिन में चार हीरे मिले, जिनमें 1.62 और 1.29 कैरेट के दो अच्छी गुणवत्ता के हीरे तथा 1.44 और 0.81 कैरेट के दो मध्यम गुणवत्ता के हीरे शामिल हैं। सूचना मिलने पर हीरा पारखी अनुपम सिंह गांधी जयंती के अवकाश के बावजूद कार्यालय पहुंचे और हीरों को आधिकारिक रूप से जमा कराया। सिंह ने बताया कि जमा किए गए हीरों को आगामी शासकीय नीलामी में रखा जाएगा। नीलामी से प्राप्त राशि में से शासकीय रॉयल्टी और कर की कटौती के बाद शेष रकम संबंधित खदान पट्टाधारक को सौंप दी जाएगी।


    क्या करेंगे इतनी बड़ी राशि का?

    दंपति ने इस सफलता को अपनी मेहनत और ईश्वर की कृपा का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि नीलामी से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल बच्चों की बेहतर शिक्षा, परिवार का भविष्य सुरक्षित करने और अपना व्यवसाय बढ़ाने में करेंगे।

  • MP से 2-3 दिन में मानसून की विदाई, अब सिर्फ बूंदाबांदी के आसार, भारी बारिश का अलर्ट नहीं

    MP से 2-3 दिन में मानसून की विदाई, अब सिर्फ बूंदाबांदी के आसार, भारी बारिश का अलर्ट नहीं


    भोपाल। मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई अगले 2 से 3 दिन में हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले तीन दिन नमी के असर से कुछ जिलों में बूंदाबांदी और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है, लेकिन प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। मानसून की विदाई के साथ ही बारिश का यह दौर भी खत्म हो जाएगा।

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य पीरियड 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस बार मानसूनी सीजन के आखिरी सप्ताह में प्रदेश में अति भारी या भारी बारिश नहीं हुई। इसका असर सीजन के कुल बारिश के आंकड़ों पर भी पड़ा है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से 30 जिलों में अब तक सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है। भोपाल और ग्वालियर समेत 25 जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो चुका है। आलीराजपुर में सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी रिकॉर्ड नहीं हुई, जबकि निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से ज्यादा बारिश हुई है।

    अब जो बारिश होगी, वह ‘बोनस’ जैसी

    मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की आधिकारिक विदाई होने तक नमी के कारण बूंदाबांदी का दौर जारी रह सकता है। इसे मानसूनी सीजन की सामान्य बारिश के आंकड़े में शामिल नहीं किया जाएगा। यानी विदाई से पहले होने वाली यह बारिश सीजन के आंकड़ों के लिहाज से एक तरह से अतिरिक्त यानी ‘बोनस’ बारिश होगी।

    आज इन जिलों में बूंदाबांदी-गरज चमक

    मौसम विभाग ने गुरुवार को मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बूंदाबांदी के साथ गरज-चमक का अनुमान जताया है।

    वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, जबलपुर समेत प्रदेश के अन्य जिलों में मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा और तेज धूप खिलने के आसार हैं।

    प्रदेश में अब तक 35.8 इंच बारिश

    IMD के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब तक 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। यह सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच के मुकाबले करीब 1.5 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में कुल मिलाकर सामान्य से 4% कम बारिश हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4% ज्यादा बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम पानी गिरा है।

    पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा बारिश, 9 जिलों में कमी

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 4% ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है। पूर्वी हिस्से के अधिकांश जिलों में सामान्य कोटा पूरा हो चुका है। हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश रिकॉर्ड हुई है।

    इनमें आलीराजपुर में स्थिति सबसे कमजोर रही, जहां सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी पूरी नहीं हो सकी। इसके उलट निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    मानसून की विदाई के साथ अब प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने लगेगा। अगले कुछ दिनों तक जहां कहीं-कहीं बूंदाबांदी और गरज-चमक हो सकती है, वहीं ज्यादातर हिस्सों में धूप बढ़ने के आसार हैं।

  • MP: स्वामित्व योजना पर गतिरोध जारी….सरकार ने शुरू की पटवारियों पर कार्रवाई की तैयारी

    MP: स्वामित्व योजना पर गतिरोध जारी….सरकार ने शुरू की पटवारियों पर कार्रवाई की तैयारी


    भोपाल।
    स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) के तहत रजिस्ट्री से जुड़े काम को लेकर सरकार और पटवारियों (Government and Patwaris) के बीच गतिरोध खत्म नहीं हुआ है। सरकार के निर्देश के बावजूद पटवारी इस काम को करने के लिए तैयार नहीं हैं। अब सरकार ने पटवारियों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जिलों से उनके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों और शिकायतों की जानकारी मांगी गई है।

    राजस्व विभाग (Department of Revenue) ने सभी जिलों को एक प्रारूप भेजकर पटवारियों के खिलाफ लंबित मामलों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। इसमें भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के साथ लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जांच और प्रकरणों की जानकारी भी मांगी गई है। सरकार ने ऐसे मामलों का भी ब्योरा मांगा है, जिनमें पटवारियों की आय से अधिक संपत्ति की शिकायत या प्रकरण सामने आए हों। इसके अलावा लंबे समय से अभियोजन की मंजूरी लंबित मामलों और जांच एजेंसियों की जांच में दोषी पाए गए पटवारियों की जानकारी भी मांगी गई है। जिलों से यह भी पूछा गया है कि संबंधित मामलों में आगे क्या कार्रवाई की जा सकती है।


    रजिस्ट्री के काम को लेकर नहीं बनी सहमति

    स्वामित्व योजना के तहत होने वाली रजिस्ट्री के काम से पटवारियों ने दूरी बना रखी है। पटवारी संघ का कहना है कि वे योजना से जुड़े काम के अलावा दूसरे राजस्व कार्य कर रहे हैं। संघ का कहना है कि सरकार के साथ बातचीत के बावजूद अभी तक इस मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बनी है। पटवारियों की आपत्ति को दूर करने के लिए सरकार की ओर से उन्हें कुछ आश्वासन भी दिए गए थे। इनमें रजिस्ट्री के दस्तावेजों में पटवारियों के नाम नहीं लिखे जाने और विवादित मामलों की रजिस्ट्री का काम नहीं सौंपे जाने की बात शामिल थी। चार मंत्रियों की समिति ने भी पटवारियों के प्रतिनिधियों से चर्चा की थी। इसके बावजूद पटवारियों ने स्वामित्व योजना से जुड़े रजिस्ट्री कार्य से दूरी बनाए रखी है।


    अब पुराने प्रकरणों पर कार्रवाई की तैयारी

    पटवारियों के काम नहीं करने के रुख के बाद मुख्य सचिव ने स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री का काम गुरुवार से शनिवार तक करने के निर्देश दिए थे। साथ ही काम से इनकार करने वाले पटवारियों पर कार्रवाई की बात भी कही गई थी। अब सरकार ने जिलों से पुराने प्रकरणों की जानकारी मांगकर अगला कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि पटवारी संघ का कहना है कि स्वामित्व योजना के काम को लेकर उनका रुख अभी नहीं बदला है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और पटवारियों के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं।