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  • MP: उज्जैन की महिदपुर उपजेल से भागे तीन कैदी, रेप और मर्डर के आरोप में पहुंचे थे जेल

    MP: उज्जैन की महिदपुर उपजेल से भागे तीन कैदी, रेप और मर्डर के आरोप में पहुंचे थे जेल


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की उज्जैन जिले (Ujjain district) की खाचरोद उपजेल से गुरुवार शाम 7 बजे तीन कैदी फरार (Prisoner Escaped) हो गए। फरार हुए कैदियों में 2 बलात्कार और 1 हत्या के मामले में जेल में बंद थे। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने तीनों फरार कैदियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जारी की हैं। पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि इन कैदियों के बारे में कोई जानकारी मिलती है, तो तत्काल पुलिस को सूचित करें।

    फरार कैदियों के नाम नारायण पिता भेरुलाल जाट (31), गोविंद पिता आत्माराम (35), गोपाल पिता बापुलाल (22) वर्ष बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, तीनों कैदी महिला सेल से फरार हुए हैं। फरारी की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन ने तत्काल सीनियर अधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद पुलिस बल मौके पर पहुंचा और जेल परिसर सहित आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान शुरू की गई।

    घटना के बाद से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में जेल की सुरक्षा, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका और महिला सेल से कैदियों के भागने के कारणों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

    थाना प्रभारी धन सिंह ने बताया की सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची थी।जांच पड़ताल के बाद तीन पुलिस टीम बनाई गई है। इसके साथ ही फरार हुए कैदियों की फुटेज जारी किए गए हैं। लोगों से सोशल मीडिया पर अपील की गई है कि उन्हें पकड़ने में मदद करें। पुलिस उनके संभावित ठिकानों पर रेड डालने की तैयारी कर रही है। पुलिस ने उन्हें जल्द ही पकड़ लेने की बात कही है।

  • MP: सतना में नवनिर्मित सड़क को मंत्री ने जूते से रगड़ा तो उखड़ गई डामर… रद्द किया टेंडर

    MP: सतना में नवनिर्मित सड़क को मंत्री ने जूते से रगड़ा तो उखड़ गई डामर… रद्द किया टेंडर


    सतना।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिले (Satna district) में PWD के भ्रष्टाचार की पोल उस वक्त खुल गई है, जब नवनिर्मित डामर की सड़क (Newly Constructed Road) प्रदेश की राज्यमंत्री के पैरों की मार/चोट भी नहीं सह सकी। नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी (Pratima Bagri) ने जब नवनिर्मित डामर की सड़क पर अपना पैर रगड़ा, तो डामर उखड़कर बिखर गया। सड़क की यह दुर्दशा देख मंत्री का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मौके पर ही PWD के कार्यपालन यंत्री की क्लास लगा दी और ठेकेदार राजेश कैला का टेंडर तत्काल निरस्त करने का फरमान सुना दिया है।


    सड़क पर पैर रगड़ते ही उखड़ गया डामर

    दरअसल मामला कोठी तहसील के पोड़ी-मनकहरी मार्ग का है। यहाँ लोक निर्माण विभाग द्वारा करीब 3 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कराया जा रहा था। रविवार शाम जब मंत्री प्रतिमा बागरी नैना कोठी क्षेत्र से गुजर रही थीं, तो चमचमाती नई सड़क देख उन्होंने काफिला रुकवा दिया। मंत्री गाड़ी से उतरीं और गुणवत्ता परखने के लिए सड़क पर पैर रखा। हल्की सी रगड़ लगते ही डामर की परत उखड़कर अलग हो गई। यह देख मंत्री ने अफसरों से पूछा शर्म आनी चाहिए! जो सड़क मेरे पैर रखने भर से खिसक रही है, वो भारी वाहनों का बोझ कैसे सहेगी? यह निर्माण नहीं, शुद्ध लीपापोती है।


    मॉनिटरिंग करने वाले सो रहे थे क्या?

    निरीक्षण के दौरान यह साफ हो गया कि पूरी सड़क मानकों के विपरीत बनी है। मंत्री ने मौके पर है फोन पर अफसरों से तीखे सवाल किए है। आपकी निगरानी में ऐसा घटिया काम कैसे हुआ?”जिन सब-इंजीनियर्स (Sub-Engineers) की ड्यूटी मॉनिटरिंग पर थी, वे कहां थे?”मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी पैसे की बर्बादी और गुणवत्ता से समझौता कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    राज्यमंत्री ने सिर्फ फटकार नहीं लगाई, बल्कि स्पष्ट अल्टीमेटम भी दिया। उन्होंने मीडिया को बताया की संविदाकार राजेश कैला का अनुबंध तुरंत निरस्त करने के निर्देश दिए है। जिस इंजीनियर ने आंखें मूंदकर यह सड़क बनने दी और निरीक्षण नहीं किया, उस पर विभागीय कार्रवाई हो। मंत्री ने दो टूक कहा, मैंने EE को निर्देश दिए हैं। यदि वे ठेकेदार और दोषी इंजीनियर पर कार्रवाई नहीं करते, तो मैं PWD मंत्री से आग्रह करूँगी कि सीधे EE के विरुद्ध ही कार्रवाई की जाए। मंत्री के इस औचक निरीक्षण और ‘ऑन द स्पॉट’ फैसले से जिले के निर्माण विभागों और ठेकेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।

  • MP: सिक्स लेन रोड व गौ अभ्यारण्य की मांग… ग्वालियर में साधु-संत करेंगे टोल फ्री आंदोलन

    MP: सिक्स लेन रोड व गौ अभ्यारण्य की मांग… ग्वालियर में साधु-संत करेंगे टोल फ्री आंदोलन


    ग्वालियर।
    ग्वालियर भिंड हाईवे (Gwalior Bhind Highway) को सिक्स लेन बनाने, सड़क हादसों पर रोक और गौ अभ्यारण (Cow Sanctuary) की मांग को लेकर संत समाज अब खुलकर आंदोलन के रास्ते पर उतर रहा है। इसी कड़ी में 29 दिसंबर को बरेठा टोल प्लाजा पर संत सभा के साथ एक दिवसीय टोल फ्री आंदोलन (Toll-free movement) किया जाएगा। भिंड जिले के कालिका माता मंदिर बघेली बहादुरपुरा में अखिल भारतीय संत समिति के तत्वावधान में संत समाज की बैठक आयोजित की गई।

    बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 29 दिसंबर, सोमवार को मालनपुर टोल प्लाजा पर संत सभा होगी। इसी दिन “नो रोड, नो टोल” थीम पर एक दिवसीय सांकेतिक टोल फ्री आंदोलन किया जाएगा और आगे के आंदोलन की रणनीति का उद्घोष किया जाएगा। संत समाज जिला अध्यक्ष संत कालीदास महाराज ने बताया कि संत समाज पहले संवाद के माध्यम से समाधान चाहता है।

    इसी उद्देश्य से सोमवार सुबह 10 बजे भिंड कलेक्टर के साथ बैठक होगी। बैठक में जिले में प्रस्तावित गौ अभ्यारण में अब तक कोई ठोस प्रगति न होने, ग्वालियर भिंड हाईवे पर लगातार हो रहे हादसों को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय, तथा भिंड जिले की जनता की भावनाओं से राज्य और केंद्र सरकार को अवगत कराने जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

    संत कालीदास महाराज ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि मानव जीवन और गौ वंश की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो संत समाज इस “धर्म युद्ध” में किसी भी त्याग से पीछे नहीं हटेगा। संत समाज ने सभी वर्गों से अपील की कि वे जाति धर्म से ऊपर उठकर गौ संरक्षण और सड़क सुरक्षा के इस अभियान में साथ खड़े हों। बैठक में बड़ी संख्या में संत समाज की उपस्थिति रही।

  • MP: ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला में 15 गायों की की मौत, सैकड़ों बीमार

    MP: ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला में 15 गायों की की मौत, सैकड़ों बीमार


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की आदर्श गौशाला (Model cow shelter) मानी जाने वाली ग्वालियर (Gwalior) की मशहूर लाल टिपारा गौशाला (Lal Tipara Gaushala) से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। गौशाला में अचानक 15 गायों की मौत हो गई और सबसे शर्मनाक बात यह रही कि गौशाला का स्टाफ इन मौतों को छिपाने की कोशिश करता रहा। मरी हुई गायों के शरीर एक-दूसरे के ऊपर ऐसे फेंके गए थे जैसे वे कोई बेजान कूड़ा हों।

    नगर निगम इस गौशाला पर हर साल 25 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा करता है। इस गौशाला में 10 हजार से ज्यादा गायें रखी गई हैं। दावे यह भी हैं कि यहां डॉक्टर भी तैनात हैं, लेकिन बीमार गायों की मौत सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मेडिकल ऑफिसर आशुतोष आर्या एक घायल गाय को ठीक करने के बाद वहां छोड़ने पहुंचे।

    उन्होंने बताया कि जिस गाय का उन्होंने 15 दिन तक अपने खर्चे पर इलाज किया था, उसे वहां मरते देखा और साथ ही टिनशेड में 15 अन्य गायों की लाशें भी ढेर की तरह पड़ी मिलीं। जब उन्होंने स्टाफ से पूछा, तो कोई सही जवाब नहीं मिला। यह भी कहा गया कि शायद गायें आपस में टकराकर मर गई होंगी। इस मामले में कलेक्टर से भी शिकायत की गई है।

    वहीं नगर निगम कमिश्नर संघ प्रिय का कहना है कि गौशाला में गायों के मरने की जानकारी मिली है। मामले की जांच कराई जाएगी। फिलहाल गौशाला के बीमार सेक्शन में 400 से 500 के करीब गायें भर्ती हैं, जिनमें से 60 की हालत बेहद नाजुक है। इनका इलाज किया जा रहा है। मामला बढ़ने पर ग्वालियर की कलेक्टर रुचिका चौहान ने खुद गौशाला का दौरा किया।

    कलेक्टर रुचिका चौहान ने गौशाला के रजिस्टर चेक किए। उन्होंने बीमार और मृत गायों के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। कलेक्टर ने इलाज के बाद स्वस्थ होकर छोड़ी गई गायों का रिकॉर्ड भी तलब किया। साथ ही मृत गायों के निपटान की व्यवस्था से संबंधित दस्तावेज देखे और अधिकारियों से जानकारी ली। इतनी रकम खर्च होने के बावजूद गायों की ऐसी हालत से इंतजामों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

  • MP: सतना में हो रहा था खून का काला कारोबार, SDM ने फिल्मी अंदाज में स्टिंग कर 3 को दबोचा

    MP: सतना में हो रहा था खून का काला कारोबार, SDM ने फिल्मी अंदाज में स्टिंग कर 3 को दबोचा


    सतना।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिला अस्पताल (Satna District Hospital) की साख तार-तार हो चुकी है। एक तरफ अस्पताल के भीतर दिल्ली और भोपाल की टीमें थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों (Thalassemia Children) को HIV संक्रमित खून चढ़ाए जाने के मामले की फाइलें खंगाल रही हैं, तो दूसरी तरफ अस्पताल के गेट पर ही खून के सौदागर इंसानी मजबूरी का फायदा उठाकर 5000 रुपए में खून बेच रहे हैं। गुरुवार को प्रशासन ने इस ‘काले खेल’ का पर्दाफाश करने के लिए बिल्कुल फिल्मी अंदाज में जाल बिछाया। एसडीएम सिटी राहुल सिलाड़िया (SDM City Rahul Siladia) और कोतवाली टीआई रावेंद्र द्विवेदी (TI Ravindra Dwivedi) ने एक सुनियोजित स्टिंग ऑपरेशन कर खून की दलाली करने वाले 3 लोगों को रंगे हाथों दबोच लिया।


    नोटों के नंबर नोट किए, वीडियो बनाया और भेजा ‘नकली ग्राहक’

    दलालों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए एसडीएम ने पुख्ता सबूत तैयार किए थे। इसके लिए उन्होंने 500, 200 और 100 के नोटों से 4500 रुपए की एक गड्डी तैयार की और इन सभी नोटों के सीरियल नंबर पहले से एक रजिस्टर में दर्ज कर लिए। सबूत के तौर पर नोटों का टाइम स्टैम्प वाला एक वीडियो भी बनाया गया, फिर एक व्यक्ति को ‘नकली ग्राहक’ बनाकर खून खरीदने भेजा गया।

    ग्राहक के रूप में पहुंचे शख्स ने जैसे ही दलाल को पैसे दिए और दलाल ने उससे कहा कि डोनर आ रहा है, वैसे ही इशारा मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम ने धावा बोल दिया। दलाल की जेब की तलाशी लेने पर वही चिन्हित नोट बरामद हुए, जिनका नंबर प्रशासन ने पहले से नोट कर रखा था।


    ऐसे चल रहा था नेटवर्क

    इस कार्रवाई ने अस्पताल परिसर के बाहर चल रहे खून के अवैध धंधे की पोल खोल दी है। जांच में सामने आया कि अस्पताल के ठीक सामने मौजूद चाय की टपरियों और फलों के ठेलों पर ये दलाल बैठे रहते थे। मरीज के परेशान परिजनों को देखते ही ये उन्हें घेर लेते थे और ब्लड दिलाने के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे। पुलिस ने मौके से तीन दलालों को गिरफ्तार किया है, इसमें रजनीश साहू (निवासी करसरा), मोहम्मद कैफ (निवासी कामता टोला), अनिल गुप्ता (निवासी टिकुरिया टोला) शामिल हैं।


    एसडीएम ने किया पर्दाफाश

    इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए एसडीएम राहुल सिलाड़िया ने बताया कि हमें ब्लड की दलाली की सूचना मिली थी। इस पर हमने योजना बनाकर कुछ नोटों को चिन्हित किया और उनका वीडियो रिकॉर्ड कर एक व्यक्ति को ग्राहक बनाकर भेज दिया। अस्पताल के सामने खड़े फल के ठेले पर मिले एक दलाल ने बदले में 4500 रुपए की मांग की। जैसे ही दलाल ने पैसे लिए, हमने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के पास से वही चिन्हित नोट बरामद हुए हैं। इससे साफ है कि दुकानों की आड़ में खून का अवैध कारोबार चल रहा है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।


    अंदर से कौन कर रहा है मदद?

    सूत्रों के मुताबिक अस्पताल के भीतर की मिलीभगत के बिना यह रैकेट चलना नामुमकिन है। बड़ा सवाल यह है कि दलाल बाहर पैसा ले रहा है, तो अंदर से ब्लड या डोनर कौन मैनेज कर रहा है? क्या ब्लड बैंक का कोई कर्मचारी इस सिंडिकेट का हिस्सा है? फिलहाल पुलिस आरोपियों से कड़ी पूछताछ करते हुए इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश कर रही है।

  • MP: उज्जैन में महाकाल मंदिर विस्तार को चुनौती वाली तकिया मस्जिद की याचिका SC ने की खारिज

    MP: उज्जैन में महाकाल मंदिर विस्तार को चुनौती वाली तकिया मस्जिद की याचिका SC ने की खारिज


    उज्जैन।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उज्जैन (Ujjain) में महाकाल मंदिर परिसर (Mahakal Temple complex) के विस्तार (महाकाल लोक फेज-2) के लिए तकिया मस्जिद (Takiya Mosque) की जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता जमीन का मालिक नहीं, बल्कि केवल एक उपासक (भक्त) है, इसलिए उसे अधिग्रहण को चुनौती देने का कानूनी अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला मोहम्मद तैय्यब बनाम शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग मामले में सुनाया।


    अदालत ने क्या कहा

    सुनवाई के दौरान पीठ ने पाया कि याचिका में अधिग्रहण की अधिसूचनाओं को सीधे तौर पर चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि आपत्ति केवल मुआवजा तक सीमित है। ऐसे मामलों में कानून के तहत वैकल्पिक वैधानिक उपाय मौजूद हैं। पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता हूज़ेफ़ा अहमदी, जो याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए, से कहा- “मूल प्रश्न वही है। अधिग्रहण को चुनौती नहीं दी गई है, केवल अवॉर्ड को।” अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता भूमि का स्वामी नहीं, केवल उपासक है, इसलिए अधिग्रहण की वैधता पर सवाल उठाने का उसे अधिकार नहीं है।


    याचिकाकर्ता की दलीलें

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत सामाजिक प्रभाव आकलन अनिवार्य है, जिसे नहीं कराया गया। इसके अलावा कहा गया कि हाई कोर्ट ने यह मानकर फैसला दिया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही पुष्टि हो चुकी है, जबकि ऐसा नहीं था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इस दलील से सहमत नहीं हुआ।


    पहले भी खारिज हो चुकी हैं याचिकाएं

    गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट तकिया मस्जिद के ध्वस्तीकरण को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका भी खारिज कर चुका है। उस मामले में अदालत ने राज्य सरकार के इस रुख को स्वीकार किया था कि जमीन अधिग्रहित हो चुकी है और मुआवजा भी दिया जा चुका है, जबकि किसी भी आपत्ति के लिए 2013 कानून के तहत वैधानिक रास्ते उपलब्ध हैं।

    हाई कोर्ट का फैसला
    इससे पहले 11 जनवरी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी महाकाल लोक फेज-2 परियोजना से जुड़ी जमीन के मुआवजे को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता न तो रिकॉर्डेड भू-स्वामी हैं और न ही टाइटल-होल्डर, इसलिए वे अधिग्रहण को नहीं, बल्कि केवल मुआवजे को लेकर धारा 64 के तहत संदर्भ मांग सकते हैं।


    याचिका में क्या कहा गया था

    याचिका में दावा किया गया था कि अधिग्रहित जमीन 1985 से मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दर्ज वक्फ संपत्ति है और 11 जनवरी 2025 को मस्जिद को गिरा दिया गया। साथ ही यह तर्क दिया गया कि महाकाल मंदिर परिसर के लिए पार्किंग और अन्य सुविधाओं के विस्तार हेतु भूमि लेना सार्वजनिक उद्देश्य की परिभाषा में नहीं आता और इससे संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 300-A का उल्लंघन होता है। इसके अलावा वक्फ अधिनियम की धारा 91 के उल्लंघन और आपात शक्तियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया था।

    अब आगे क्या?

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ महाकाल लोक फेज-2 परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को अंतिम कानूनी मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर और उससे जुड़े सार्वजनिक स्थलों के बड़े पुनर्विकास का हिस्सा है। याचिका अधिवक्ता वैभव चौधरी के माध्यम से दाखिल की गई थी।

  • MP: जबलपुर और कटनी में कई ठिकानों पर आयकर विभाग की रेड…

    MP: जबलपुर और कटनी में कई ठिकानों पर आयकर विभाग की रेड…


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh) के कटनी (Katni) में आय से अधिक संपत्ति के मामले में आयकर विभाग (Income Tax Department) की टीम ने बुधवार सुबह बड़ी छापामार कार्रवाई (Guerrilla Action) की। भोपाल,जबलपुर,कटनी के आयकर विभाग के अधिकारियों ने मारा छापा मारा है। लगभग 25 सदस्यों ने छापामार कार्रवाई की। इस कार्रवाई में महिलाएं भी शामिल थीं। जबलपुर में सिविल लाइन स्थित खनन कारोबारी राजीव चड्ढा (Mining businessman Rajiv Chadha) और नितिन शर्मा के घर आयकर विभाग की टीम अचानक से पहुंची और सर्चिग शुरू कर दी।

    इसके साथ ही कटनी में जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता अशोक विश्वकर्मा (BJP leader Ashok Vishwakarma) तथा उनके तीन भाईयों के ठिकानों पर भी एक साथ छापे मारे गए। तीनों ही स्थानों पर इंदौर और भोपाल से आई आयकर विभाग की टीमें कार्रवाई कर रही हैं। जानकारी के अनुसार आय से अधिक संपत्ति टैक्स चोरी और अवैध लेनदेन की शिकायतें मिलने के बाद यह कार्यवाही हुई है। फिलहाल अभी टीम को क्या मिला है इसकी जानकारी सामने नही आई है,कार्रवाई पूरी होते ही आयकर टीम बताएगी।

    जबलपुर जिले में सिविल लाइन रसल चौक स्थित खनन कारोबारियों पर राजीव चड्ढा ओर नितिन शर्मा के घर आयकर की टीम ने छापा मारा है। चड्डा माइन्स के ऑफिस राजीव चड्ढा के बाद नितिन शर्मा के घर से भी टीम को कई दस्तावेज मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि इस जांच में बड़ी टैक्स चोरी का खुलासा हो सकता है।

    आयकर विभाग की टीम ‘स्वच्छता जागरूकता अभियान 2025’ का पोस्टर लगी हुई कार से सिविल लाइन स्थित कारोबारी के घर पहुंची थी, कारोबारी के चौकीदार को पहले लगा कि नगर निगम की टीम किसी सर्वे के लिए आई है, लेकिन कुछ ही देर में स्पष्ट हो गया कि यह आयकर विभाग की छापामार कार्रवाई के लिए आई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति, टैक्स चोरी और अवैध लेन-देन से जुड़े मामलों को लेकर की जा रही है। सर्चिग के दौरान क्या-क्या सामने आता है, इसको लेकर फिलहाल आयकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    मिली जानकारी के अनुसार खनन कारोबारी राजीव चड्डा और उनके कुछ साथियों के खिलाफ आयकर विभाग को शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर जबलपुर, कटनी में एक साथ कार्रवाई की गई है। आयकर विभाग की टीमें फिलहाल कारोबारियों के घर और कार्यालयों में दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।

    कटनी जिले के जिला पंचायत उपाध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अशोक विश्वकर्मा के भाई शंकर लाल विश्वकर्मा के यहां तड़के 4 बजे से आयकर विभाग की टीम ने अशोक विश्वकर्मा के निवास, फर्म और बॉक्साइट माइनिंग से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापा मारा है। विश्वकर्मा माइनिंग कारोबारी हैं और उनकी फर्म वीएमसी विश्वकर्मा माइंस के नाम से संचालित है। विश्वकर्मा और उनके अन्य तीन भाइयों के जलपा वार्ड स्थित घर फर्म ग्राम टिकरिया और सिघनपुरी में खदान है। यह कार्यवाही भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में आयकर विभाग की ओर घर और ऑफिस में दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

  • MP: ग्वालियर में अपात्र लोगों को मिल रही पुलिस सुरक्षा… HC ने शासन को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

    MP: ग्वालियर में अपात्र लोगों को मिल रही पुलिस सुरक्षा… HC ने शासन को नोटिस जारी कर मांगा जवाब


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में अपात्र लोगों (Ineligible People) को दी जा रही पुलिस सुरक्षा (Police Protection) का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट (High Court) के संज्ञान में आया है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि निजी व्यक्तियों को दी जाने वाली पुलिस सुरक्षा की समीक्षा के लिए पूर्व में कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके चलते कई अपात्र लोग आज भी पुलिस सुरक्षा में घूम रहे हैं, जबकि उनके साथ तैनात पुलिसकर्मियों के अनैतिक गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप भी सामने आए हैं।

    मामले को जनहित से जुड़ा मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता नवल किशोर शर्मा की ओर से पैरवी कर रहे वकील डीपी सिंह ने बताया कि पुलिस बल की कमी के बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी निजी व्यक्तियों की सुरक्षा में लगाए गए हैं। इन पर लाखों रुपए का सरकारी खर्च हो रहा है, जबकि संबंधित व्यक्ति सुरक्षा के पात्र नहीं हैं।

    उन्होंने विनय सिंह को दी गई पुलिस सुरक्षा का उदाहरण देते हुए बताया कि सुरक्षा के दौरान ही उनके खिलाफ वसूली सहित पांच आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए, जो सुरक्षा के दुरुपयोग को दर्शाता है।

    हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बाद सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी में सामने आया कि 19 व्यक्तियों की सुरक्षा में 33 पुलिसकर्मी तैनात थे, जिनमें से अधिकांश अपात्र पाए गए। इससे पहले भी हाईकोर्ट दिलीप शर्मा और संजय शर्मा को दी गई सुरक्षा के मामले में कड़ी टिप्पणी कर चुका है। कोर्ट ने दोनों भाइयों से सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश दिए थे और स्पष्ट कहा था कि किसी तुच्छ या अपात्र व्यक्ति को पुलिस सुरक्षा नहीं दी जानी चाहिए।

    न्यायालय ने यह भी कहा था कि पुलिस सुरक्षा देने के लिए स्पष्ट और ठोस नियम बनाए जाने चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया था कि यदि किसी परिवार के पास लाइसेंसी हथियार हैं और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के कारण जान का खतरा है, तो ऐसे मामलों में निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था की जा सकती है, जो पुलिसकर्मियों की तुलना में अधिक सजग और प्रभावी हो सकते हैं।

  • MP: भारी विरोध के बाद उज्जैन सिंहस्थ की लैंड पूलिंग योजना निरस्त, आदेश जारी

    MP: भारी विरोध के बाद उज्जैन सिंहस्थ की लैंड पूलिंग योजना निरस्त, आदेश जारी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने मंगलवार को उज्जैन में सिंहस्थ (कुंभ मेले) (Ujjain Simhastha (Kumbh Mela) के लिए लाई गई लैंड पूलिंग योजना (Land pooling scheme) को पूरी तरह से निरस्त कर दिया। सरकार की ओर से इस संबंध में एक आदेश जारी किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने यह फैसला भारतीय किसान संघ (बीकेएस) की लगातार मांग और 26 दिसंबर से फिर से आंदोलन की चेतावनी के बाद लिया।

    उज्जैन उत्तर से सत्तारूढ़ भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा (MLA Anil Jain Kaluheda) ने भी मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) को पत्र लिखकर योजना को किसान हित में निरस्त करने की मांग की थी और किसानों के आंदोलन में शामिल होने की मजबूरी जताई थी।

    अगला सिंहस्थ मेला 2028 में आयोजित किया जाएगा। इसे देखते हुए मोहन यादव सरकार ने स्थायी निर्माण के लिए किसानों की जमीन हासिल करने की यह नीति शुरू की थी जबकि पहले किसानों से सिंहस्थ के लिए केवल 5 से 6 महीनों के लिए ही जमीन ली जाती थी, इसलिए किसान संगठन इसका कड़ा विरोध कर रहे थे।

    भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने इस योजना को लेकर विरोध किया था। बीकेएस के आह्वान पर 18 नवंबर को ‘डेरा डालो, घेरा डालो’ आंदोलन की घोषणा के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने लैंड पूलिंग अधिनियम को निरस्त करने की घोषणा की‌ थी। हालांकि बाद में इसे केवल संशोधित करने का पत्र जारी किया गया था। इससे किसान नाराज हो गए थे।

    किसानों ने नए सिरे से अनिश्चितकालीन आंदोलन की घोषणा कर दी थी। मध्य प्रदेश के राज्यपाल के आदेशानुसार, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपसचिव की ओर से हस्ताक्षरित आदेश में उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित नगर विकास योजना क्रमांक 8, 9, 10, 11 को संशोधित करने वाले प्रस्ताव को लोकहित में अब पूर्ण रूप से निरस्त करने की बात कही गई है।

  • MP: बालाघाट के जंगल से नक्सली डंप से लाखों रुपये बरामद, भारी मात्रा में हथियार भी मिले

    MP: बालाघाट के जंगल से नक्सली डंप से लाखों रुपये बरामद, भारी मात्रा में हथियार भी मिले


    बालाघाट।
    मध्य प्रदेश पुलिस (Madhya Pradesh Police) को हाल ही में उस वक्त एक बड़ी सफलता मिली, जब उसने बालाघाट (Balaghat) में नक्सलियों (Naxalites) से अबतक की सबसे बड़ी रिकवरी की। इस दौरान पुलिस ने जंगलों में छुपाकर रखी गई माओवादियों की करीब साढ़े ग्यारह लाख रुपए की नगद राशि बरामद (Cash Amount Recovered) की। पुलिस ने इस कार्रवाई को आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिली गोपनीय जानकारी के आधार पर अंजाम दिया।

    इस बारे में एक प्रेस नोट जारी करते हुए बालाघाट पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से उनके सहयोगियों एवं जंगल मे छिपाए गए डंप के संबध मे लगातार पूछताछ की जा रही है। इसी दौरान आत्मसमर्पित नक्सलियों से पूछताछ के आधार पर बालाघाट के विभिन्न जंगलों में डम्प करके छिपाए गए 11 लाख 57 हजार 385 रुपए नगद की रिकवरी की गई, जो बालाघाट में नक्सलियों से की गई अब तक की सबसे बडी कैश रिकवरी है।

    पुलिस ने बताया कि इसके अलावा आत्मसमर्पण किए हुए नक्सलियों की निशादेही से बालाघाट के विभिन्न जंगल से भारी मात्रा मे डम्प किए गए रायफल, पिस्टल, एम्युनेशन, ग्रेनेड लॉन्चर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, IED निर्माण सामग्री एवं विस्फोटक सहित अन्य सामग्रियां जब्त की गई हैं।


    इन हथियारों व विस्फोटक सामग्री की हुई बरामदगी

    4 सेमीऑटोमैटिक राइफल, 1 ग्रेनेड लॉन्चर, 1 बोल्ट एक्शन राइफल, 8 पम्प एक्शन सिंगल शॉट राइफल, 1 हैंड मेड देशी कट्टा, 5 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 1 वोल्ट मीटर, 4 बैटरीसेल, 451 राउंड कारतूस, 26 मैगजीन, 1 क्लेमोर माइन्स पाइप, 500 ग्राम बारूद, 16 किलो विस्फोटक सामग्री, 22 नग मेटल स्पाइक्स, 2 किलो बोल्ट व छर्रे, 4 मोटोरोला मैन पैक सेट, 1 कैमरा व बड़ी संख्या में अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस।

    इसके अलावा दैनिक उपयोग कि सामग्री टेंट बनाने का सामान, नक्सल वर्दी, पिड्डु बैग, नक्सल साहित्य, राशन सामग्री, खाना पकाने का सामान, हथियार मेंटेनेंस सामग्री, ड्रिल मशीन, अन्य सामग्री भी बरामद हुई है।


    आखिरी दो नक्सलियों ने किया था आत्मसमर्पण

    बता दें कि मध्यप्रदेश में नक्सल विरोधी सर्चिग अभियान के दौरान मुठभेड़ में मारे जाने के डर से 11 दिसंबर को मध्यप्रदेश में बचे हुए अंतिम 2 नक्सलियों DVCM दीपक उर्फ सुधाकर एवं ACM रोहित उर्फ मंगलू ने भी आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने यह कदम शासन की नीतियों पर विश्वास जताते हुए किया था। पुलिस के अनुसार मध्यप्रदेश में इस साल अब तक सबसे ज्यादा 13 हार्डकोर सशस्त्र वर्दीधारी नक्सलियों ने भारत के संविधान पर अपनी निष्ठा जताते हुए हथियार त्याग कर आत्मसमर्पण किया है, जबकि 10 हार्डकोर नक्सलियों को सुरक्षाबलों द्वारा धराशायी कर दिया गया है।

    भारत सरकार द्वारा नक्सलवाद के उन्मूलन हेतु मार्च 2026 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पुलिस द्वारा लगातार चलाए जा रहे सर्चिंग अभियानों के परिणाम स्वरूप मध्य प्रदेश से सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त किया जा चुका है।