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  • बारिश ने खोली इंतजामों की पोल! भोपाल में 35 जलभराव वाले स्पॉट के बाद अब 8 नए स्थान सामने आए

    बारिश ने खोली इंतजामों की पोल! भोपाल में 35 जलभराव वाले स्पॉट के बाद अब 8 नए स्थान सामने आए


    भोपाल । भोपाल में बारिश के साथ जलभराव की पुरानी समस्या एक बार फिर सामने आ गई है। पिछले साल ट्रैफिक पुलिस ने शहर में जलभराव वाले 35 स्थानों को चिह्नित कर नगर निगम पीडब्ल्यूडी और दूसरी संबंधित एजेंसियों को इनकी सूची भेजी थी। इन जगहों पर जलभराव की वजह तलाशने के साथ जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद संबंधित एजेंसियों ने 17 स्थानों पर सुधार कार्य पूरा होने का दावा किया। कहीं नालों की सफाई और मरम्मत कराई गई तो कहीं सड़क का लेवल ठीक किया गया। कुछ स्थानों पर गड्ढे भरने और सीसी रोड बनाने का काम भी किया गया। लेकिन इस बार बारिश ने इन दावों की जमीनी हकीकत सामने ला दी है।

    बारिश के दौरान जिन जगहों पर सुधार किए जाने की बात कही गई थी उनमें से कई स्थानों पर फिर पानी जमा हो गया। हालात इतने खराब हुए कि कुछ जगहों पर सड़क तक बंद करनी पड़ी। 11 अगस्त को हुई बारिश में भी शहर के कई हिस्सों में भारी जलभराव देखने को मिला था। अब समस्या सिर्फ पुराने स्थानों तक सीमित नहीं रही है। इस मानसून के दौरान शहर में जलभराव के 8 नए स्थान भी सामने आए हैं। ट्रैफिक पुलिस इन नए स्पॉट की सूची तैयार कर संबंधित एजेंसियों को भेजने की तैयारी कर रही है।

    इस बार किलोल पार्क डिपो चौराहा आरआरएल से एम्स रोड बाणगंगा रानी कमलापति बंसल प्लाजा वीआईपी रोड पर सेल्फी पार्क से पहले और लालघाटी से बैरागढ़ लेफ्ट टर्न तक के क्षेत्र नए जलभराव वाले स्थान के रूप में सामने आए हैं। इन जगहों पर बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा होने से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

    पुराने जलभराव वाले स्थानों की स्थिति भी राहत देने वाली नहीं है। गणेश मंदिर तिराहे पर जलभराव रोकने के लिए साइड वर्ज हटाकर पानी की निकासी का रास्ता बनाने की कोशिश की गई थी। इसके बावजूद बारिश के दौरान यहां रास्ता बाधित होने की स्थिति बन गई। अब पीडब्ल्यूडी की ओर से निकासी व्यवस्था को और बेहतर करने का काम किया जा रहा है।

    ओल्ड केम्पियन तिराहे पर सड़क का लेवल सुधारने के लिए उसे ऊंचा किया गया और सीसी रोड भी बनाई गई। इसके बावजूद बारिश में यहां पानी जमा हो गया। खटलापुरा मंदिर क्षेत्र में जलभराव रोकने के लिए सड़क का समतलीकरण कराया गया था लेकिन बारिश के बाद यहां भी पानी रुकने की समस्या सामने आई। नर्मदापुरम रोड की सर्विस रोड पर गड्ढे भरने सहित कई सुधार कार्य किए गए थे लेकिन बारिश के दौरान यहां भी पानी की निकासी ठीक नहीं रही।

    बैरागढ़ क्षेत्र की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। ईसाइ कब्रिस्तान से सीहोर नाके तक सड़क के दोनों तरफ 150 से अधिक बड़े गड्ढे होने की बात सामने आई है। इन गड्ढों को भरने का दावा भी किया गया था लेकिन बारिश के बाद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आया। जलभराव के साथ सड़क पर गड्ढे होने से वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।

    ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि पिछले साल चिह्नित किए गए 35 स्थानों की सूची संबंधित एजेंसियों को दी गई थी और इनमें अधिकांश जगहों पर सुधार कार्य किए गए हैं। इस बारिश में सामने आए 8 नए स्थानों की सूची भी संबंधित विभागों को भेजी जाएगी। वहीं नगर निगम का कहना है कि इन स्थानों पर जलभराव के बजाय जल रुकाव की समस्या है और इसका समाधान किया जा रहा है। विभाग से जुड़े स्थानों पर सुधार कार्य किए जाने की बात भी कही गई है।

    हालांकि लगातार सामने आ रही तस्वीरें यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि अगर सुधार कार्य किए जा चुके हैं तो मामूली बारिश में कई स्थानों पर दोबारा पानी क्यों भर रहा है। भोपाल जैसे बड़े शहर में जलभराव सिर्फ यातायात की समस्या नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं से भी जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में नए स्पॉट के साथ पुराने स्थानों की निकासी व्यवस्था की भी दोबारा जांच जरूरी हो गई है ताकि हर बारिश में वही समस्या दोबारा खड़ी न हो।

  • भोपाल से गुजरने वाली ट्रेनों का बदलेगा शेड्यूल, 16 ट्रेनें कैंसिल और 48 का रूट डायवर्ट; सफर से पहले देखें लिस्ट

    भोपाल से गुजरने वाली ट्रेनों का बदलेगा शेड्यूल, 16 ट्रेनें कैंसिल और 48 का रूट डायवर्ट; सफर से पहले देखें लिस्ट


    भोपाल । मध्य प्रदेश में रेल यात्रियों के लिए सितंबर और अक्टूबर के दौरान सफर की योजना बनाने से पहले ट्रेनों का नया शेड्यूल देखना जरूरी होगा। बीना स्टेशन पर आगासौद से बीना के बीच तीसरी रेल लाइन को जोड़ने के लिए यार्ड में बड़े स्तर पर काम किया जाना है। इस निर्माण कार्य के चलते 20 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच कई ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया जाएगा। रेलवे की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार अलग अलग तारीखों में 16 ट्रेनें निरस्त रहेंगी जबकि 48 ट्रेनों को बदले हुए मार्ग से चलाया जाएगा। इसके अलावा कुछ ट्रेनों के शुरुआती और अंतिम स्टेशन में भी बदलाव किया जाएगा।

    इस बदलाव का असर भोपाल और रानी कमलापति से चलने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनों पर भी पड़ेगा। भोपाल ग्वालियर एक्सप्रेस को 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक निरस्त रखा जाएगा। इसी तरह रानी कमलापति से रीवा के बीच चलने वाली ट्रेन भी कुछ दिनों तक अपने निर्धारित रास्ते के बजाय दूसरे मार्ग से चलेगी। ऐसे में जिन यात्रियों ने अक्टूबर में भोपाल से रीवा या दूसरे शहरों की यात्रा की योजना बनाई है उन्हें टिकट बुक करने या स्टेशन पहुंचने से पहले ट्रेन की स्थिति जरूर जांचनी होगी।

    रानी कमलापति रीवा ट्रेन 12186 को 8 से 14 अक्टूबर तक इटारसी कटनी जबलपुर और रीवा के रास्ते चलाया जाएगा। वापसी में रीवा से रानी कमलापति आने वाली ट्रेन 12185 भी इसी अवधि में कटनी जबलपुर और इटारसी होकर चलेगी। भोपाल धनबाद ट्रेन 11631 को 9 12 और 15 अक्टूबर को इटारसी जबलपुर कटनी साउथ और न्यू कटनी के रास्ते चलाया जाएगा। वहीं धनबाद से भोपाल आने वाली ट्रेन 11632 भी निर्धारित तारीखों पर बदले हुए मार्ग से संचालित होगी।

    भोपाल सिंगरौली ट्रेन 22165 को 10 13 और 14 अक्टूबर को इटारसी जबलपुर कटनी साउथ और न्यू कटनी के रास्ते चलाया जाएगा। सिंगरौली से भोपाल आने वाली ट्रेन 22166 को भी 9 और 13 अक्टूबर को बदले हुए मार्ग से चलाया जाएगा। भोपाल जोधपुर ट्रेन 14814 को 1 से 15 अक्टूबर तक संत हिरदाराम नगर मक्सी नागदा और कोटा होकर चलाया जाएगा। वापसी में जोधपुर भोपाल ट्रेन 14813 भी 1 से 14 अक्टूबर तक कोटा नागदा संत हिरदाराम नगर और मक्सी होकर भोपाल पहुंचेगी।

    भोपाल हावड़ा ट्रेन 13026 को 14 अक्टूबर और हावड़ा भोपाल ट्रेन 13025 को 12 अक्टूबर को इटारसी जबलपुर कटनी साउथ और न्यू कटनी के रास्ते चलाया जाएगा। इसी तरह भोपाल चोपन ट्रेन 11633 को 11 अक्टूबर और चोपन भोपाल ट्रेन 11634 को 12 अक्टूबर को बदले हुए मार्ग से संचालित किया जाएगा।

    कुछ ट्रेनों के प्रारंभिक और अंतिम स्टेशन में भी बदलाव रहेगा। बिलासपुर भोपाल ट्रेन 18236 को 6 से 14 अक्टूबर तक मालखेड़ी में ही समाप्त किया जाएगा। वहीं भोपाल बिलासपुर ट्रेन 18235 को 7 से 15 अक्टूबर तक मालखेड़ी से शुरू किया जाएगा। भोपाल बीना की ट्रेन 61631 को 7 से 15 अक्टूबर तक मंडीबामोरा में समाप्त किया जाएगा। इसी अवधि में कुछ अन्य भोपाल बीना ट्रेनों के शुरुआती और अंतिम स्टेशन में भी बदलाव किया जाएगा।

    रेलवे के इस काम का उद्देश्य बीना क्षेत्र में तीसरी रेल लाइन को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ना और भविष्य में ट्रेनों के संचालन को अधिक सुगम बनाना है। हालांकि निर्माण कार्य के दौरान यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। खासकर भोपाल बीना और उत्तर भारत तथा पूर्वी भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय का ध्यान रखना होगा। इसलिए यात्रा से पहले ट्रेन के निर्धारित समय मार्ग और प्रारंभिक या अंतिम स्टेशन की जानकारी रेलवे के आधिकारिक माध्यम से जांच लेना बेहतर रहेगा।

  • रिश्तों को किया शर्मसार, शादी से इनकार पर रिश्तेदार की हैवानियत; पीड़िता ने सुनाई आपबीती

    रिश्तों को किया शर्मसार, शादी से इनकार पर रिश्तेदार की हैवानियत; पीड़िता ने सुनाई आपबीती


    ग्वालियर  मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली और शर्मनाक वारदात सामने आई है, जहाँ रिश्तेदारी के ही एक युवक ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। बहोड़ापुर थाना क्षेत्र में 15 वर्षीय एक नाबालिग किशोरी का अपहरण कर उसके साथ होटल के कमरे में दुष्कर्म करने का मामला दर्ज किया गया है। आरोपी ने शादी का प्रस्ताव ठुकराए जाने से नाराज होकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद आरोपी पीड़िता को जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गया था, जिसके चलते डरी-सहमी किशोरी कई दिनों तक खामोश रही। आखिरकार हिम्मत जुटाकर जब पीड़िता ने परिजनों को अपनी आपबीती सुनाई, तो थाने पहुँचकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर उसकी सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी है।

    पूरी घटना बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के शंकरपुर इलाके की है। 15 वर्षीय पीड़िता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि बीते 25 जुलाई की शाम करीब 5 बजे उसकी तबीयत खराब थी, जिसके चलते वह किशनबाग स्थित एक मेडिकल स्टोर से दवा लेने के लिए घर से बाहर निकली थी। इसी दौरान उसका दूर का रिश्तेदार साहिद अहमद अपनी ऑल्टो कार लेकर वहाँ आ पहुँचा। जान-पहचान और रिश्तेदारी होने के कारण उसने बातचीत करने के बहाने किशोरी को कार में बैठा लिया। जब किशोरी को अनहोनी की आशंका हुई और उसने कार से उतरकर साथ जाने से साफ मना किया, तो आरोपी साहिद अपने असली रूप में आ गया। उसने किशोरी को डराया-धमकाया और जबरन कार में बंद कर तेजी से गाड़ी लेकर मौके से निकल गया।

    अपरहण करने के बाद आरोपी साहिद किशोरी को जबरदस्ती पुरानी छावनी इलाके में स्थित एक होटल में ले गया। वहाँ उसने होटल के कमरा नंबर 105 में किशोरी को बंद कर दिया और किसी को कुछ भी बताने पर जान से मारने की सीधी धमकी दी। खौफ के साए में लाचार किशोरी गिड़गिड़ाती रही, लेकिन आरोपी ने उसकी एक न सुनी और उसके साथ दरिंदगी करते हुए दुष्कर्म किया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी किशोरी को वापस किशनबाग के पास सुनसान जगह पर छोड़कर मौके से फरार हो गया। आरोपी की धमकियों और लोक-लाज के डर से किशोरी इतनी खौफजदा हो गई थी कि उसने छह दिनों तक इस खौफनाक घटना का जिक्र किसी से नहीं किया और घुट-घुट कर जीती रही।

    शुक्रवार को जब पीड़िता की तबीयत बिगड़ने लगी और उसका मानसिक तनाव बढ़ा, तो उसने किसी तरह हिम्मत जुटाई और अपनी माँ तथा मौसी को पूरी सच्चाई बता दी। बेटी के साथ हुई इस दरिंदगी की बात सुनते ही परिजनों के होश उड़ गए। परिजन तुरंत किशोरी को लेकर बहोड़ापुर थाने पहुँचे और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ समय पहले आरोपी साहिद के परिजनों ने किशोरी के घर शादी का प्रस्ताव भेजा था। हालाँकि, किशोरी के नाबालिग होने के कारण उसके परिजनों ने सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी समझते हुए बालिग होने तक सगाई और शादी की बात को टाल दिया था। इसी बात से आरोपी साहिद रंजिश रख रहा था और उसने मौका पाकर इस वारदात को अंजाम दे डाला।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए बहोड़ापुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। थाना प्रभारी आलोक परिहार ने बताया कि पीड़िता के बयानों और परिजनों की शिकायत के आधार पर आरोपी साहिद अहमद के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और होटल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं, जो उसके संभावित ठिकानों और रिश्तेदारों के यहाँ लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी साहिद अहमद को जल्द ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा

  • लोक सेवा गारंटी से बाहर हुई मिट्टी और बीज जांच, देरी होने पर किसान नहीं कर सकेंगे अपील

    लोक सेवा गारंटी से बाहर हुई मिट्टी और बीज जांच, देरी होने पर किसान नहीं कर सकेंगे अपील


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों से जुड़ी दो महत्वपूर्ण सेवाओं को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने खेतों की मिट्टी परीक्षण और प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण को मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया है। इस फैसले के बाद किसानों को इन सेवाओं के लिए समयबद्ध रिपोर्ट मिलने की कानूनी गारंटी समाप्त हो गई है। साथ ही यदि रिपोर्ट मिलने में देरी होती है तो अब किसान लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अपील भी नहीं कर सकेंगे। ऐसे समय में यह निर्णय सामने आया है जब प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में बने हुए हैं।

    लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने 29 जुलाई को अधिसूचना जारी कर वर्ष 2017 में अधिसूचित दोनों सेवाओं को डी नोटिफाई कर दिया। इसके साथ ही मिट्टी नमूना परीक्षण और प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण अब लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 के तहत मिलने वाली सेवाओं की सूची से बाहर हो गए हैं। इसका सीधा असर उन किसानों पर पड़ेगा जो खेती से पहले मिट्टी की गुणवत्ता और बीज की प्रमाणिकता की जांच के लिए सरकारी प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहते हैं।

    वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने किसानों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन दोनों सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया था। इसके तहत मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट 30 कार्य दिवस के भीतर उपलब्ध कराने का प्रावधान था। इसके लिए सहायक मिट्टी परीक्षण अधिकारी सहायक मृदा सर्वेक्षण अधिकारी और संबंधित प्रयोगशाला प्रभारी को जिम्मेदार बनाया गया था। वहीं प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण की रिपोर्ट 60 कार्य दिवस के भीतर देने की व्यवस्था थी जिसकी जिम्मेदारी संभागीय राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशाला के बीज परीक्षण अधिकारी पर निर्धारित की गई थी।

    यदि निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जाती थी तो किसानों को कानूनी रूप से अपील करने का अधिकार प्राप्त था। मिट्टी परीक्षण के मामलों में किसान पहले जिले के उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास के समक्ष प्रथम अपील कर सकते थे। यदि वहां भी समाधान नहीं मिलता था तो संभागीय संयुक्त संचालक के पास द्वितीय अपील का विकल्प मौजूद था। इसी तरह बीज परीक्षण के मामलों में भी दो स्तर की अपील व्यवस्था लागू थी जिससे किसानों को समय पर सेवा सुनिश्चित कराने का अधिकार मिलता था।

    नई अधिसूचना लागू होने के बाद अब यह पूरी व्यवस्था समाप्त हो गई है। यानी अब मिट्टी और बीज परीक्षण की रिपोर्ट देने के लिए कोई वैधानिक समय सीमा लागू नहीं होगी। यदि रिपोर्ट में देरी होती है तो किसान लोक सेवा गारंटी कानून के तहत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ शिकायत या अपील भी नहीं कर पाएंगे। इससे समयबद्ध सेवा की कानूनी बाध्यता खत्म हो गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी परीक्षण खेती की उत्पादकता बढ़ाने और सही उर्वरक प्रबंधन के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया है जबकि प्रमाणित बीज परीक्षण किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इन सेवाओं के लिए समयबद्ध व्यवस्था समाप्त होने से किसानों को रिपोर्ट मिलने में देरी का सामना करना पड़ सकता है जिसका असर बुवाई और फसल प्रबंधन पर भी पड़ सकता है।

    सरकार की ओर से इस बदलाव के पीछे प्रशासनिक कारण बताए जा सकते हैं लेकिन किसानों के लिए यह फैसला कई सवाल भी खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लोक सेवा गारंटी से बाहर होने के बावजूद कृषि विभाग इन सेवाओं को कितनी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध करा पाता है।

  • धरती आबा योजना में एमपी का विरोधाभासी प्रदर्शन, बुनियादी सुविधाओं में आगे लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में फिसड्डी

    धरती आबा योजना में एमपी का विरोधाभासी प्रदर्शन, बुनियादी सुविधाओं में आगे लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में फिसड्डी


    भोपाल। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत आदिवासी क्षेत्रों के समग्र विकास को लेकर संसद में पेश हुई रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश की तस्वीर को दो अलग-अलग पहलुओं में सामने ला दिया है। एक ओर राज्य को देश में सबसे अधिक 308 करोड़ 65 लाख रुपए का आवंटन मिला है और कई योजनाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज हुई हैं वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण और जनजातीय छात्रावास जैसे बुनियादी विकास कार्यों में शून्य प्रगति ने गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

    राज्यसभा में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में सबसे अधिक वित्तीय सहायता मिली। इस राशि का उद्देश्य आदिवासी बहुल गांवों में पेयजल आवास सड़क बिजली मोबाइल नेटवर्क शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करना है। हालांकि जमीनी स्तर पर सभी योजनाओं का प्रदर्शन एक समान नहीं रहा।

    नल जल योजना के तहत मध्य प्रदेश ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य के 11309 लक्षित गांवों में से 6112 गांवों तक नल से जल पहुंच चुका है जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर माना गया है। इसी तरह ग्रामीण आवास योजना में भी राज्य को सबसे अधिक 368395 मकानों की स्वीकृति मिली जिनमें से 152309 मकान बनकर तैयार हो चुके हैं। बिजली कनेक्शन के मामले में भी राज्य का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर दर्ज किया गया है और हजारों आदिवासी परिवारों तक बिजली पहुंचाई गई है।

    मोबाइल नेटवर्क विस्तार के क्षेत्र में भी प्रगति देखने को मिली है। नेटवर्क विहीन 776 आदिवासी गांवों में से 571 गांवों तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में संचार व्यवस्था मजबूत हुई है। हालांकि इस क्षेत्र में भी अभी काफी काम बाकी है।

    सबसे बड़ी चिंता सड़क निर्माण और छात्रावास परियोजनाओं को लेकर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में 913 किलोमीटर लंबाई की 345 सड़कें स्वीकृत की गई थीं लेकिन अब तक एक भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो सका। इसी तरह आदिवासी विद्यार्थियों के लिए 104 छात्रावासों की स्वीकृति और करोड़ों रुपए जारी होने के बावजूद एक भी छात्रावास का निर्माण पूरा नहीं हुआ। यह स्थिति दर्शाती है कि शिक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित गति नहीं मिल सकी है।

    इन कमियों के बावजूद राज्य ने एलपीजी गैस कनेक्शन वितरण में पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। स्वीकृत दो लाख से अधिक कनेक्शनों में से लगभग चालीस हजार गैस कनेक्शन आदिवासी परिवारों तक पहुंचाए जा चुके हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन पशुधन विकास और अन्य आजीविका से जुड़ी योजनाओं में भी सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बजट आवंटित करना पर्याप्त नहीं होता बल्कि योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक है। यदि सड़क और छात्रावास जैसी बुनियादी परियोजनाओं में तेजी लाई जाए तो आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है। आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि जिन योजनाओं में काम पूरी तरह रुका हुआ है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए ताकि धरती आबा अभियान का वास्तविक लाभ आदिवासी समाज तक पहुंच सके।

  • भोपाल को मिली आधुनिक AC ई-बसों की सौगात, तीन रूटों पर शुरू हुई सेवा, सिर्फ ₹7 से करें आरामदायक सफर

    भोपाल को मिली आधुनिक AC ई-बसों की सौगात, तीन रूटों पर शुरू हुई सेवा, सिर्फ ₹7 से करें आरामदायक सफर


    भोपाल । राजधानी भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। शहर की सड़कों पर पहली बार वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो गया है। टिकटिंग सॉफ्टवेयर की सफल टेस्टिंग और खाली बसों के ट्रायल रन के बाद गुरुवार सुबह से इन बसों में आम यात्रियों का सफर भी शुरू हो गया। शुरुआती चरण में तीन प्रमुख रूटों पर 10 एसी ई बसें चलाई जा रही हैं। सबसे खास बात यह है कि यात्रियों को एयर कंडीशनर सुविधा का लाभ लेने के लिए कोई अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा। न्यूनतम किराया 7 रुपए और अधिकतम 40 रुपए निर्धारित किया गया है जो पहले से संचालित लाल सिटी बसों के बराबर ही है।

    नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन चिरायु हॉस्पिटल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन होते हुए बैरागढ़ और चिचली तक तथा चिरायु हॉस्पिटल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन होकर कोच फैक्ट्री तक किया जा रहा है। इसके अलावा कोलार से एमपी नगर के बीच भी तीन बसें चलाई जा रही हैं जिससे शहर के हजारों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    ई बसों की शुरुआत से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा जो रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। कोलार निवासी ममता जोशी ने बताया कि उन्होंने नयापुरा से एमपी नगर तक एसी बस में सफर किया और केवल 17 रुपए किराया लगा। उनके अनुसार सफर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आरामदायक और सुविधाजनक रहा।

    इन इलेक्ट्रिक बसों में आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। पहली बार दिव्यांग यात्रियों के लिए हाइड्रोलिक डोर की व्यवस्था की गई है जिससे व्हीलचेयर या ट्राइसाइकिल के साथ आसानी से बस में चढ़ा और उतरा जा सकेगा। बस के भीतर इतनी जगह भी उपलब्ध कराई गई है कि दो व्हीलचेयर एक साथ खड़ी रह सकें। इसके अलावा प्रत्येक बस में छह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिनकी निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    भोपाल की ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इन बसों का आकार भी विशेष रूप से तैयार किया गया है। नई इलेक्ट्रिक बसों की लंबाई करीब 9 मीटर है जबकि पुरानी सिटी बसें लगभग 12 मीटर लंबी थीं। कम लंबाई होने के कारण ये बसें संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से संचालित हो सकेंगी और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी।

    फिलहाल शहर में 30 इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं जिनमें से पहले चरण में 10 बसों का संचालन शुरू किया गया है। दूसरे चरण में 10 और बसें सड़कों पर उतरेंगी जबकि 15 अगस्त को प्रदेश स्तरीय लोकार्पण कार्यक्रम के बाद सभी 30 बसें नियमित रूप से यात्रियों के लिए उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही अगले 10 से 12 दिनों में 20 और नई इलेक्ट्रिक बसें भोपाल पहुंचने की संभावना है जिससे शहर का इलेक्ट्रिक बस बेड़ा और मजबूत होगा।

    इन बसों के संचालन के लिए बैरागढ़ डिपो में आधुनिक चार्जिंग स्टेशन तैयार किए गए हैं जहां 11 चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए गए हैं। इससे नियमित संचालन के दौरान बसों की चार्जिंग में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। नगर निगम का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी और शहर के लोगों को सुरक्षित आरामदायक तथा पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी।

  • शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में गुरुवार को राजनीति प्रशासन और जनआक्रोश से जुड़ी कई घटनाओं ने पूरे दिन सुर्खियां बटोरीं। कहीं बिजली कटौती से परेशान लोगों ने ऊर्जा मंत्री के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया तो कहीं बारिश के बाद जलभराव को लेकर महापौर और नगर निगम कमिश्नर आमने सामने आ गए। वहीं कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक भावुक गीत भी राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया।

    शिवपुरी जिले के सिरसौद क्षेत्र में लंबे समय से बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाल दी। ग्रामीणों ने पहले मंत्री की प्रतीकात्मक अर्थी बनाई फिर उसके पास बैठकर मातम मनाया और बाद में अंतिम यात्रा निकालकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली संकट को लेकर कई बार अधिकारियों और मंत्री तक शिकायत पहुंचाई गई लेकिन केवल आश्वासन मिले जबकि हालात जस के तस बने रहे। नाराज लोगों ने कहा कि जब समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो विरोध का यह तरीका अपनाना पड़ा।

    प्रद्युम्न सिंह तोमर अक्सर सफाई अभियान निरीक्षण और जनसंपर्क जैसे कार्यक्रमों को लेकर चर्चा में रहते हैं लेकिन इस बार विरोध प्रदर्शन ने बिजली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिजली व्यवस्था सुधारने पर उतना ही ध्यान दिया जाता जितना प्रचार और जनसंपर्क पर दिया जाता है तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

    उधर मुरैना में बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई। हालात का जायजा लेने पहुंचीं महापौर शारदा सोलंकी ने नगर निगम की तैयारियों पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से पूछा कि बारिश से पहले नालों की सफाई क्यों नहीं कराई गई। निरीक्षण के दौरान महापौर और नगर निगम कमिश्नर के बीच तीखी बहस भी हुई। बताया गया कि कमिश्नर ने अपने तरीके से काम करने की बात कही जिस पर महापौर ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यदि प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बात नहीं मानेगा तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की तैयारियों और प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए।

    इधर इंदौर में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया जिसमें वह जाने कहां गए वो दिन गीत गाते नजर आए। विजयवर्गीय पहले भी कई बार अपनी गायकी का शौक दिखा चुके हैं लेकिन इस बार उनके गीत को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हाल ही में उन्होंने एक कार्यक्रम में भाजपा संगठन के कुछ नेताओं के अच्छे समय का जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि शायद उनका भी अच्छा समय आ जाए। इसके बाद अब उनके गीत को भी उसी बयान से जोड़कर देखा जा रहा है हालांकि मंत्री की ओर से इस पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की गई है।

    इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज रही कि हाल ही में राजधानी भोपाल में हुए मूंग खरीदी आंदोलन के पीछे एक पूर्व मंत्री की रणनीति काम कर रही थी। हालांकि इस संबंध में किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में जनता की मूलभूत समस्याएं प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा के केंद्र में बनी हुई हैं।

  • इंदौर में हाथी के हमले से गई ऑटो चालक की जान एक्सपर्ट ने बताया कब और क्यों सबसे ज्यादा आक्रामक हो जाता है गजराज

    इंदौर में हाथी के हमले से गई ऑटो चालक की जान एक्सपर्ट ने बताया कब और क्यों सबसे ज्यादा आक्रामक हो जाता है गजराज


    इंदौर । इंदौर में हाथी के हमले में एक ऑटो चालक की दर्दनाक मौत के बाद लोगों के बीच दहशत का माहौल है। इस घटना ने न केवल सार्वजनिक स्थानों पर हाथियों की मौजूदगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके व्यवहार को समझने की जरूरत भी सामने ला दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी सामान्य परिस्थितियों में शांत स्वभाव का होता है लेकिन कुछ विशेष अवस्थाओं में वह बेहद आक्रामक और खतरनाक हो सकता है।

    घटना रविवार को राजनगर क्षेत्र में हुई जहां एक हाथी ने अचानक ऑटो चालक विजय होलकर पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथी ने पहले अपनी सूंड से उन्हें उठाकर जमीन पर पटक दिया और इसके बाद कई बार पैरों से कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल विजय को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने महावत के खिलाफ मामला दर्ज किया हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया। पूरे मामले की जांच जारी है।

    इंदौर चिड़ियाघर के प्रभारी और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. उत्तम यादव के अनुसार हाथी के अचानक आक्रामक होने के पीछे सबसे बड़ा कारण उसका मस्त काल हो सकता है। यह एक प्राकृतिक अवस्था होती है जिसमें विशेष रूप से नर हाथियों के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन तेजी से होते हैं। इस दौरान उनका व्यवहार सामान्य से बिल्कुल अलग हो जाता है और वे बिना किसी स्पष्ट उकसावे के भी हमला कर सकते हैं।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि मस्त काल के दौरान हाथी की कनपटी के पास स्थित ग्रंथियों से लगातार स्राव निकलता है और बार बार पेशाब आना भी इस अवस्था का प्रमुख संकेत होता है। यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें तो महावत को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और हाथी को भीड़भाड़ वाले इलाके से हटाकर सुरक्षित और एकांत स्थान पर रखना चाहिए। इस दौरान हाथी अपने महावत तक पर हमला कर सकता है इसलिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी अत्यंत संवेदनशील और बुद्धिमान जीव है। तेज आवाज भीड़ पटाखों का शोर अपरिचित वातावरण या लगातार तनाव भी उसे असहज बना सकता है। यदि ऐसे हालात में वह पहले से मस्त काल में हो तो उसके हिंसक होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए धार्मिक आयोजनों जुलूसों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हाथियों को शामिल करते समय सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करना आवश्यक है।

    इंदौर में पहले भी हाथियों से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों के बाद यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि क्या हाथियों की नियमित स्वास्थ्य जांच उनके व्यवहार की निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन पर्याप्त रूप से किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महावतों को हाथियों के व्यवहार और मस्त काल की पहचान का विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि समय रहते संभावित खतरे को टाला जा सके।

    इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन्यजीवों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। हाथी भले ही शांत और समझदार जीव माना जाता हो लेकिन उसकी प्राकृतिक प्रवृत्तियों को नजरअंदाज करना इंसानों और स्वयं पशु दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए सुरक्षा नियमों का पालन और वैज्ञानिक समझ के साथ वन्यजीवों का प्रबंधन ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • संघर्ष से निकला छात्र बना आंदोलन का चेहरा बड़वानी के अरुण बड़ोले ने 26 दिन तक उठाई हजारों विद्यार्थियों की आवाज

    संघर्ष से निकला छात्र बना आंदोलन का चेहरा बड़वानी के अरुण बड़ोले ने 26 दिन तक उठाई हजारों विद्यार्थियों की आवाज


    बड़वानी  मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के छोटे से गांव लिंबई के रहने वाले अरुण बड़ोले की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। मां आज भी खेतों में मजदूरी करके परिवार का पेट पालती हैं जबकि पिता की आंखों की रोशनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमजोर होती जा रही है। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई का सफर आसान नहीं था लेकिन अरुण ने सिर्फ अपने भविष्य के बारे में नहीं सोचा बल्कि हजारों विद्यार्थियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने का फैसला किया।

    देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे अरुण पिछले छह वर्षों से इंदौर में किराए के कमरे में रह रहे हैं। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए वे ड्राइवरी का काम भी करते हैं। परिवार में तीन बहनों की जिम्मेदारी और सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने संघर्ष को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जब देशभर में नीट परीक्षा को लेकर विवाद और छात्रों का आंदोलन तेज हुआ तब अरुण ने भी इंदौर में छात्रों की आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया।

    उन्होंने 30 जून से आंदोलन की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में उनके साथ केवल चार साथी थे। पहले दस से बारह दिनों तक धरना स्थल पर गिने चुने छात्र ही मौजूद रहते थे। कई बार ऐसा भी लगा कि आंदोलन आगे नहीं बढ़ पाएगा लेकिन अरुण और उनके साथियों ने हार नहीं मानी। लगातार डटे रहने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का असर यह हुआ कि धीरे धीरे छात्रों सामाजिक संगठनों और शहर के लोगों का समर्थन मिलने लगा। देखते ही देखते यह आंदोलन प्रदेश के सबसे लंबे छात्र आंदोलनों में शामिल हो गया और पूरे 26 दिनों तक लगातार चलता रहा।

    अरुण का कहना है कि अगर वे अपने जैसे लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के लिए आवाज नहीं उठाते तो खुद को कभी माफ नहीं कर पाते। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता हर छात्र का अधिकार है। यही सोच उन्हें लगातार संघर्ष करने की ताकत देती रही। आर्थिक परेशानियां और रोजमर्रा की जिम्मेदारियां भी उनके हौसले को कमजोर नहीं कर सकीं।

    आंदोलन के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बारिश हो या कम होती भीड़ उन्होंने धरना स्थल नहीं छोड़ा। धीरे धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल होने लगे। इस दौरान शहर के कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी उनका समर्थन किया जिससे आंदोलन को नई ऊर्जा मिली।

    आंदोलन समाप्त होने के बाद भी अरुण का कहना है कि उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। उनका मानना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता और विद्यार्थियों के अधिकारों का सवाल है। यदि भविष्य में भी छात्रों के साथ किसी प्रकार का अन्याय होता है तो वे फिर से आंदोलन के लिए तैयार रहेंगे। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए वे हमेशा आवाज उठाते रहेंगे।

    अरुण बड़ोले की कहानी बताती है कि सीमित संसाधन कभी बड़े सपनों और मजबूत इरादों के सामने बाधा नहीं बनते। कठिन परिस्थितियों में भी यदि उद्देश्य स्पष्ट हो और हौसला मजबूत हो तो एक साधारण छात्र भी हजारों लोगों की उम्मीद और संघर्ष का प्रतीक बन सकता है।

  • ऊर्जा विभाग का बड़ा फैसला 6500 संविदा अधिकारी और कर्मचारी बन सकेंगे नियमित एक बार मिलेगा सुनहरा मौका

    ऊर्जा विभाग का बड़ा फैसला 6500 संविदा अधिकारी और कर्मचारी बन सकेंगे नियमित एक बार मिलेगा सुनहरा मौका


    मध्यप्रदेश मध्य प्रदेश सरकार ने बिजली कंपनियों में कार्यरत 6500 से अधिक संविदा अधिकारी और कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए नियमित नियुक्ति का रास्ता खोल दिया है। ऊर्जा विभाग ने संविदा कर्मचारियों के लिए नई नियुक्ति योजना लागू कर दी है जिसके तहत पात्र कर्मचारियों को नियमित रिक्त पदों पर भर्ती का अवसर मिलेगा। इसके लिए अक्टूबर से पहले ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों की मेरिट परीक्षा के अंकों और संविदा सेवा के अनुभव के आधार पर दिए जाने वाले बोनस अंकों को जोड़कर तैयार की जाएगी।

    ऊर्जा विभाग ने इस योजना को संविदा आधार पर कार्यरत कार्मिकों की समकक्ष नियमित पदों पर नवीन नियुक्ति योजना 2026 नाम दिया है। योजना का उद्देश्य लंबे समय से संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को नियमित सेवा में आने का अवसर देना है। हाल ही में नियमितीकरण की मांग को लेकर संविदाकर्मियों ने प्रदर्शन भी किया था जिसके बाद सरकार ने यह अहम फैसला लिया है।

    योजना का लाभ एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी तथा मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को मिलेगा। हालांकि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

    इस योजना के तहत लाइन अटेंडेंट टेस्टिंग अटेंडेंट जूनियर इंजीनियर असिस्टेंट इंजीनियर सहित अन्य समकक्ष पदों पर कार्यरत संविदा अधिकारी और कर्मचारी आवेदन कर सकेंगे। संबंधित बिजली कंपनियों के प्रबंध संचालकों को योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    योजना में आवेदन के लिए वही कर्मचारी पात्र होंगे जिन्होंने योजना की स्वीकृति तिथि तक संबंधित कंपनी में कम से कम दो वर्ष की संविदा सेवा पूरी कर ली हो। यदि किसी कर्मचारी की दो संविदा नियुक्तियों के बीच अंतराल रहा है तो उसे सेवा में व्यवधान नहीं माना जाएगा लेकिन उस अवधि को अनुभव में नहीं जोड़ा जाएगा। पुनः नियुक्ति की स्थिति में भी वास्तविक सेवा अवधि के आधार पर अनुभव की गणना होगी। अनुभव प्रमाण पत्र कार्यपालन अभियंता या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जारी किया जाएगा।

    नियमित पदों पर चयन पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम से होगा। केवल उन्हीं पदों पर भर्ती की जाएगी जिनके समकक्ष नियमित रिक्तियां उपलब्ध होंगी। परीक्षा में प्राप्त अंकों के साथ संविदा सेवा के अनुभव के आधार पर बोनस अंक जोड़े जाएंगे और इसी आधार पर अंतिम मेरिट सूची तैयार होगी। इससे लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धा में अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी नियुक्तियां मध्य प्रदेश शासन के आरक्षण नियमों के अनुसार की जाएंगी। संविदा कर्मचारियों को आवेदन के लिए अधिकतम आयु सीमा में भी छूट दी जाएगी ताकि अधिक से अधिक पात्र कर्मचारी इस अवसर का लाभ उठा सकें।

    यदि कोई संविदा कर्मचारी नियमित पद पर चयनित होता है तो उसे पहले अपने संविदा पद से त्यागपत्र देना होगा। इस प्रक्रिया में एक महीने की नोटिस अवधि की अनिवार्यता को शिथिल किया गया है। त्यागपत्र स्वीकार होने के बाद संविदा सेवा समाप्त मानी जाएगी और भविष्य में उसी सेवा के आधार पर वरिष्ठता पदोन्नति या अन्य किसी लाभ का दावा मान्य नहीं होगा।

    सरकार के इस फैसले को बिजली कंपनियों में वर्षों से संविदा पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब उनकी नजर अक्टूबर से पहले होने वाली परीक्षा पर रहेगी जो नियमित सरकारी सेवा का रास्ता तय करेगी।