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  • मुरैना में हैरान करने वाला कांड, स्कूटर पर पिस्टल लोड करते समय चली गोली, दोनों घायल

    मुरैना में हैरान करने वाला कांड, स्कूटर पर पिस्टल लोड करते समय चली गोली, दोनों घायल


    मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दो युवकों ने खुद पर चली गोलियों को गैंगवार और हमले का रूप देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस जांच और CCTV फुटेज ने पूरी सच्चाई उजागर कर दी।

    घटना मंगलवार को गर्ल्स स्कूल रोड इलाके में हुई, जब अचानक गोलियों की आवाज सुनकर इलाके में हड़कंप मच गया। स्कूटर पर सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए और दोनों को तीन-तीन गोलियां लगीं। शुरुआत में मामला किसी आपसी रंजिश या गैंगवार जैसा दिखाई दिया, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर कहानी पूरी तरह बदल गई।

    पुलिस के अनुसार घायल युवकों की पहचान गोपालपुरा निवासी राहुल सिकरवार और पुराना चुंगी नाका निवासी निखिल तिवारी के रूप में हुई है। दोनों एक स्कूटर पर सवार होकर जा रहे थे। इसी दौरान पीछे बैठे युवक ने अपनी अवैध पिस्टल निकाली और चलते वाहन पर ही उसे लोड करने लगा।

    जांच में सामने आया कि जैसे ही स्कूटर एक स्पीड ब्रेकर से गुजरा, जोरदार झटका लगने से युवक का संतुलन बिगड़ गया और पिस्टल से लगातार कई राउंड फायर हो गए। अचानक हुई फायरिंग में दोनों युवक खुद ही गोलियों की चपेट में आ गए।

    पुलिस ने जब सड़क किनारे लगे CCTV कैमरों की फुटेज देखी तो पूरी घटना साफ हो गई। फुटेज में स्कूटर के झटके के बाद गोली चलने और दोनों युवकों के घायल होने की घटना कैद हो गई। इसके बाद पुलिस को समझ आ गया कि यह किसी गैंगवार का मामला नहीं बल्कि लापरवाही और अवैध हथियार के इस्तेमाल का मामला है।

    इस घटना ने एक बार फिर चंबल क्षेत्र में अवैध हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल और युवाओं में हथियारों के क्रेज को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस्तेमाल की गई पिस्टल प्रतिबंधित श्रेणी की और बेहद खतरनाक मानी जा रही है। फिलहाल दोनों घायलों का इलाज जारी है। उनकी हालत स्थिर होने के बाद पुलिस आधिकारिक बयान दर्ज करेगी। इसके बाद आर्म्स एक्ट सहित अन्य धाराओं में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • श्योपुर में हड़कंप, दुकान विवाद में न्याय न मिलने पर बुजुर्ग ने कलेक्ट्रेट में की आत्मघाती कदम

    श्योपुर में हड़कंप, दुकान विवाद में न्याय न मिलने पर बुजुर्ग ने कलेक्ट्रेट में की आत्मघाती कदम

    श्योपुर । श्योपुर कलेक्ट्रेट में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां शिकायतों से परेशान एक बुजुर्ग ने सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली। गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    मृतक की पहचान देवेंद्र गोयल के रूप में हुई है, जो सब्जी मंडी क्षेत्र में दुकान के मालिक थे। बताया जा रहा है कि उनकी दुकान पर उनके ही परिवार के कुछ सदस्यों द्वारा कब्जा कर लिया गया था। इस मामले को लेकर वह लंबे समय से न्याय की गुहार लगा रहे थे।

    परिजनों और जानकारी के अनुसार, देवेंद्र गोयल ने 28 फरवरी को दुकान पर कब्जे की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद उन्होंने 2 मार्च से लेकर 26 मई तक कई बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन आरोप है कि उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे वे लगातार परेशान चल रहे थे।

    मंगलवार को वह अपनी समस्या लेकर श्योपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां जनसुनवाई चल रही थी। उस समय कलेक्टर शीला दाहिमा मौजूद नहीं थीं। डेप्युटी कलेक्टर देवेंद्र मीणा ने उनका आवेदन लिया। इसके बाद बाहर निकलते ही बुजुर्ग ने सल्फास खा लिया और मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।

    घटना के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वह तीन बार जनसुनवाई में आ चुके हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई।

    बताया जा रहा है कि पहले उन्होंने पुलिस में भी शिकायत दी थी, लेकिन मामला राजस्व विभाग से जुड़ा होने के कारण उन्हें वहां भेज दिया गया था। इसके बाद से वह लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। इस घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

  • सतना में सुरक्षा में बड़ी चूक वन स्टॉप सेंटर से तीन लड़कियां फरार पहले भी घर से भाग चुकी थीं

    सतना में सुरक्षा में बड़ी चूक वन स्टॉप सेंटर से तीन लड़कियां फरार पहले भी घर से भाग चुकी थीं


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना शहर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहां जवाहर नगर स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर से तीन नाबालिग लड़कियां देर रात खिड़की तोड़कर फरार हो गईं। यह मामला सामने आते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार तीनों बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के आदेश पर वन स्टॉप सेंटर में अस्थायी आश्रय दिया गया था। इनमें से एक लड़की उत्तर प्रदेश के बिजनौर की रहने वाली बताई जा रही है जबकि अन्य दो सतना जिले के पौराणिक टोला और रामपुर बघेलान क्षेत्र से हैं। ये सभी पहले भी अपने घरों से भाग चुकी थीं जिसके बाद उन्हें सुरक्षा और देखरेख के लिए सेंटर में रखा गया था।

    बताया जा रहा है कि जिस डोरमेट्री में तीनों रह रही थीं वहां की खिड़की को उन्होंने रात के समय तोड़ दिया और एक-एक कर बाहर निकल गईं। इसके बाद वे सेंटर परिसर से बाहर निकलने में सफल हो गईं। हैरानी की बात यह है कि सेंटर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और मुख्य द्वार पर चौकीदार की तैनाती भी रहती है इसके बावजूद लड़कियों का इस तरह भाग जाना सुरक्षा में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।

    प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि सेंटर के पीछे स्थित मैदान की ओर से तीनों ने भागने का रास्ता चुना। पीछे की दिशा में सीएम राइज स्कूल मैदान होने के कारण वहां निगरानी अपेक्षाकृत कम थी और इसी का फायदा उठाकर वे फरार हो गईं।

    घटना की जानकारी मिलते ही सेंटर की अधीक्षिका नीता श्रीवास्तव ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। इसके बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने अलग-अलग टीमें गठित की हैं जो संभावित स्थानों पर लड़कियों की तलाश कर रही हैं। रेलवे स्टेशन बस स्टैंड और शहर के अन्य प्रमुख स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

    इसके साथ ही स्मार्ट सिटी और रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि लड़कियों की मूवमेंट का पता लगाया जा सके। पुलिस उनके परिजनों और परिचितों से भी संपर्क कर रही है जिससे यह अंदाजा लगाया जा सके कि वे किन संभावित ठिकानों पर जा सकती हैं।

    यह घटना केवल एक फरारी का मामला नहीं है बल्कि यह बालिकाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह भी खड़ा करती है। जिस जगह को सुरक्षित आश्रय माना जाता है वहीं से इस तरह नाबालिगों का भाग जाना चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि पुलिस कितनी जल्दी इन लड़कियों को सुरक्षित ढूंढ पाती है और साथ ही प्रशासन इस घटना से सबक लेकर सुरक्षा व्यवस्था को कितना मजबूत करता है।

  • पन्ना में स्वास्थ्य व्यवस्था फेल प्रसव पीड़ा में तड़पती महिला को अस्पताल में मिला ताला

    पन्ना में स्वास्थ्य व्यवस्था फेल प्रसव पीड़ा में तड़पती महिला को अस्पताल में मिला ताला

    पन्ना । मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान बंद अस्पताल के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह घटना न केवल सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत भी सामने लाती है।

    जानकारी के अनुसार घटना कल्दा क्षेत्र की है जहां ग्राम सकतरा निवासी वंदना वर्मा को सोमवार रात अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस को सूचना दी और भारी बारिश व तेज हवाओं के बीच महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कल्दा पहुंचाया गया। लेकिन वहां पहुंचने के बाद जो दृश्य सामने आया उसने सभी को हैरान कर दिया।

    अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ था और वहां कोई डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था। तेज बारिश और असहनीय दर्द के बीच परिजन अस्पताल के बाहर खड़े होकर मदद की गुहार लगाते रहे। उन्होंने बार बार डॉक्टरों और स्टाफ को फोन किया लेकिन किसी ने कॉल उठाना तक जरूरी नहीं समझा।

    इस बीच महिला की हालत बिगड़ती जा रही थी और हर मिनट की देरी जोखिम बढ़ा रही थी। ऐसे में मजबूरी में परिजनों को बड़ा फैसला लेना पड़ा और गर्भवती महिला को करीब 27 किलोमीटर दूर सलेहा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। गनीमत रही कि एम्बुलेंस समय रहते वहां पहुंच गई और महिला को इलाज मिल सका।

    पीड़िता के परिजनों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताया है। उनका कहना है कि वे अस्पताल इस उम्मीद से पहुंचे थे कि समय पर इलाज मिलेगा लेकिन वहां ताला लटका मिला जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई। उनका कहना है कि अगर समय पर दूसरे अस्पताल नहीं ले जाते तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था।

    यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है खासकर उन क्षेत्रों में जहां लोगों की निर्भरता पूरी तरह सरकारी अस्पतालों पर होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि यह सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा मामला है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

  • कोतवाली क्षेत्र में पुलिस कमिश्नर की सख्ती रॉन्ग साइड एंट्री बंद करने के निर्देश

    कोतवाली क्षेत्र में पुलिस कमिश्नर की सख्ती रॉन्ग साइड एंट्री बंद करने के निर्देश


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कानून व्यवस्था और यातायात सुधार को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। इसी क्रम में पुलिस कमिश्नर संजय कुमार इमामी ने कोतवाली थाना क्षेत्र में नागरिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और उनकी समस्याएं सुनीं। इस जनसंवाद कार्यक्रम का उद्देश्य शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और जनता की भागीदारी बढ़ाना रहा।

    जनसंवाद के दौरान पुलिस कमिश्नर ने साफ तौर पर निर्देश दिए कि दुकानों के सामने होने वाली अवैध पार्किंग को तत्काल हटाया जाए क्योंकि इससे न केवल ट्रैफिक बाधित होता है बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस तरह की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए।

    इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल के आसपास रॉन्ग साइड एंट्री को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस क्षेत्र में गलत दिशा से आने वाले वाहनों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

    कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए कहा गया कि यदि कहीं भी कोई संदिग्ध या अवैध गतिविधि नजर आए तो तुरंत डायल 112 पर सूचना दें। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी और शिकायतों का जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    जनसंवाद में ट्रैफिक नियमों को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया और उन्हें नियमों का पालन करने की शपथ दिलाई गई। साथ ही साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए साइबर सुरक्षा के प्रति भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई।

    पुलिस कमिश्नर ने मादक पदार्थों और अवैध हथियारों के खिलाफ भी लोगों से सहयोग मांगा और अपील की कि ऐसी किसी भी जानकारी को तुरंत पुलिस तक पहुंचाएं ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

    इस पहल के जरिए पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश की जा रही है जिससे शहर को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके। पुलिस का मानना है कि आम नागरिकों की भागीदारी के बिना सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाना संभव नहीं है।

  • दिल दहला देने वाली घटना सागर में दंपती ने एक साथ दी जान कारण बना रहस्य

    दिल दहला देने वाली घटना सागर में दंपती ने एक साथ दी जान कारण बना रहस्य


    सागर । मध्यप्रदेश के सागर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां एक दंपती ने एक साथ आत्महत्या कर ली जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। मामला शाहगढ़ थाना क्षेत्र के वाल्मीकि वार्ड का है जहां पति और पत्नी अपने ही घर में फांसी के फंदे पर लटके हुए मिले।

    जानकारी के अनुसार मृतकों की पहचान उत्तम अहिरवार उम्र करीब 45 वर्ष और उनकी पत्नी हरिबाई उम्र 42 वर्ष के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों पति पत्नी रात तक अपने घर के बाहर पड़ोसियों के साथ सामान्य बातचीत करते हुए बैठे थे और किसी तरह की परेशानी के संकेत भी नहीं मिले थे। लेकिन सुबह जब परिवार और आसपास के लोगों ने दरवाजा खोला तो दोनों को कमरे के अंदर फंदे पर लटका देख सभी के होश उड़ गए।

    घटना की सूचना मिलते ही मध्य प्रदेश पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई करते हुए दोनों शवों को फंदे से उतारा और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। बाद में शवों को परिजनों को सौंप दिया गया।

    प्रारंभिक जांच में आत्महत्या के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और परिजनों तथा आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस घटना के पीछे की असली वजह सामने आ सके।

    इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। पड़ोसियों और परिचितों का कहना है कि दंपती का व्यवहार सामान्य था और उन्होंने कभी किसी बड़ी परेशानी का जिक्र नहीं किया था। ऐसे में दोनों का एक साथ यह कदम उठाना कई सवाल खड़े कर रहा है। परिवार के लोगों के लिए यह घटना गहरे सदमे से कम नहीं है। वहीं पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर किन परिस्थितियों ने इस दंपती को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया।

  • सिंगरौली में ब्लास्टिंग का कहर पहाड़ों से गिर रहे पत्थर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

    सिंगरौली में ब्लास्टिंग का कहर पहाड़ों से गिर रहे पत्थर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी


    सिंगरौली । मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र में इन दिनों ब्लास्टिंग को लेकर हालात बेहद चिंताजनक बन गए हैं जहां विकास कार्यों के नाम पर हो रही गतिविधियां अब ग्रामीणों के लिए खतरे का कारण बनती जा रही हैं। मिसिरगवा आयरन ब्लॉक में टेस्टिंग के नाम पर लगातार की जा रही ब्लास्टिंग से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है और लोग अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार चितरंगी के केकराव चितावल शिवपुरवा और मिसिरगवा गांवों में इन दिनों तेज धमाकों के साथ ब्लास्टिंग की जा रही है। इन धमाकों के कारण पहाड़ियों से बड़े बड़े पत्थर टूटकर नीचे गिर रहे हैं जिससे न सिर्फ ग्रामीणों के मकानों को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि राहगीरों की जान भी हर समय खतरे में बनी हुई है। कई घरों में दरारें पड़ चुकी हैं और कुछ मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

    स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि चितरंगी लमसरई मुख्य मार्ग पर भी पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं जिससे आवागमन करने वाले लोगों में डर का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो बड़ा हादसा हो सकता है।

    इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। युवा नेता लक्ष्मण सिंह बैस के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए साफ शब्दों में कहा कि या तो ब्लास्टिंग के दौरान पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए या फिर इस काम को तत्काल बंद किया जाए।

    ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में क्षतिग्रस्त मकानों का तुरंत मुआवजा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कंपनी और प्रशासन के बीच खुली बैठक और लोगों की जान जोखिम में डालने वाले कार्यों पर रोक शामिल है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    हालांकि तहसीलदार ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है लेकिन अब भी बड़ा सवाल यही है कि अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद प्रशासन की धीमी कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर एक सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और प्रशासनिक कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। ऐसे में अब सबकी नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह समय रहते कदम उठाता है या किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होती है।

  • नियम तोड़े तो नहीं मिलेगी राहत इंदौर में अवैध बिल्डिंग पर निगम की सख्त कार्रवाई

    नियम तोड़े तो नहीं मिलेगी राहत इंदौर में अवैध बिल्डिंग पर निगम की सख्त कार्रवाई


    इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर में अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम का सख्त रुख लगातार देखने को मिल रहा है। शहर के साउथ तोड़ा इलाके में निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक निर्माणाधीन भवन के अवैध हिस्सों पर बुलडोजर चला दिया जिससे इलाके में हड़कंप मच गया और अन्य निर्माणकर्ताओं के बीच भी संदेश साफ पहुंच गया कि नियमों के उल्लंघन पर अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

    जानकारी के मुताबिक साउथ तोड़ा क्षेत्र में करीब तीन हजार स्क्वेयर फीट में एक भवन का निर्माण किया जा रहा था लेकिन जांच में पाया गया कि इस निर्माण में कई हिस्से स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनाए जा रहे थे। जैसे ही इसकी सूचना नगर निगम को मिली टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बिना देरी किए कार्रवाई शुरू कर दी गई।

    नगर निगम के अधिकारियों ने जेसीबी मशीन की मदद से अवैध हिस्सों को तोड़ दिया। यह कार्रवाई मोहम्मद शरीफ के निर्माणाधीन भवन पर की गई जहां नियमों का खुला उल्लंघन सामने आया था। कार्रवाई के दौरान मौके पर पुलिस बल भी मौजूद रहा ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

    निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर में अवैध निर्माण को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    इस कार्रवाई के बाद आसपास के क्षेत्रों में भी निर्माण कार्य कर रहे लोगों में हलचल देखी गई है। कई लोगों ने अपने निर्माण की वैधता को लेकर दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है ताकि किसी भी तरह की कार्रवाई से बचा जा सके।

    नगर निगम की इस सख्ती को शहर में व्यवस्थित विकास और कानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि शहर के मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना की स्थिति न बने। इंदौर में लगातार हो रही इस तरह की कार्रवाइयों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि अवैध निर्माण करने वालों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं और नियमों का पालन ही एकमात्र रास्ता बचा है।

  • आस्था पर शराब का साया, नर्मदा तट पर अवैध कारोबार से उठे बड़े सवाल

    आस्था पर शराब का साया, नर्मदा तट पर अवैध कारोबार से उठे बड़े सवाल


    मंडला । मध्य प्रदेश के मंडला में बहने वाली नर्मदा नदी के किनारे आज एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है जो आस्था और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करती है। यह वही पवित्र धरा है जहां हर दिन श्रद्धालु पूजा अर्चना और शांति की तलाश में पहुंचते हैं लेकिन अब इसी आस्था के केंद्र के आसपास अवैध शराब का कारोबार खुलेआम फलता फूलता नजर आ रहा है।

    कभी इस क्षेत्र की पवित्रता को बनाए रखने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट घोषणा की थी कि नर्मदा तट से पांच किलोमीटर के दायरे में शराब की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इस फैसले का उद्देश्य था कि आस्था और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा हो सके और नर्मदा किनारे का वातावरण स्वच्छ और पवित्र बना रहे। लेकिन आज यह घोषणा सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है।

    जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। नगर के पान ठेले छोटे दुकानों होटल और ढाबों पर खुलेआम शराब बेची जा रही है। न केवल बिक्री बल्कि लोगों को बैठाकर वहीं शराब पिलाई जा रही है। यह सब इतनी बेखौफी से हो रहा है जैसे नियम कानून का कोई अस्तित्व ही न हो।

    सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं दे रहा या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा है और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं ही की जाती हैं। कभी कभार छापेमारी होती है कुछ बोतलें जब्त होती हैं और फिर सब कुछ पहले जैसा शुरू हो जाता है।

    यह मामला सिर्फ कानून के उल्लंघन तक सीमित नहीं है बल्कि आस्था के साथ भी सीधा खिलवाड़ है। मंडला की पहचान ही नर्मदा तट की पवित्रता से जुड़ी हुई है। लोग यहां दूर दूर से आते हैं मोक्ष और शांति की कामना लेकर लेकिन जब इसी पवित्र स्थान पर शराब का कारोबार खुलेआम हो तो यह श्रद्धा को ठेस पहुंचाने वाला है।

    स्थिति यह दर्शाती है कि कहीं न कहीं सिस्टम कमजोर पड़ रहा है या फिर अवैध कारोबार करने वालों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें किसी का डर नहीं रह गया है। यह भी सवाल उठता है कि जिम्मेदारी किसकी है प्रशासन की स्थानीय पुलिस की या फिर समाज की जो सब कुछ देखकर भी चुप है।

    आज जरूरत सिर्फ खबर दिखाने की नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई की है। उन वादों को जमीन पर उतारने की है जो कभी जनता से किए गए थे। अगर समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई तो वह दिन दूर नहीं जब आस्था की यह नगरी अपनी पहचान खोने लगेगी।

    यह मामला केवल एक अवैध कारोबार का नहीं बल्कि आस्था कानून और व्यवस्था तीनों की परीक्षा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार तंत्र इस चुनौती का सामना कैसे करता है और क्या नर्मदा तट की पवित्रता को फिर से स्थापित किया जा सकेगा या नहीं।

  • जब्त टैंकर से तेल उड़ गया हनुमना थाने की थ्योरी पर बवाल थाना प्रभारी पर आरोप

    जब्त टैंकर से तेल उड़ गया हनुमना थाने की थ्योरी पर बवाल थाना प्रभारी पर आरोप


    मऊगंज ।
    मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस व्यवस्था और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हनुमना थाना क्षेत्र के पिपराही चौकी में जब्त किया गया करीब दो हजार लीटर डीजल रहस्यमय तरीके से गायब हो गया और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस का दावा है कि यह डीजल बंद टैंकर के भीतर से ही ‘उड़ गया’। यह घटना अब चर्चा और विवाद का केंद्र बन चुकी है।

    जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में मऊगंज निवासी सुमित कुमार गुप्ता की पिकअप वाहन को पुलिस ने अवैध डीजल परिवहन के आरोप में जब्त किया था। वाहन में लगभग दो हजार लीटर डीजल भरा हुआ था। मामले को कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया जहां लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सुमित गुप्ता ने एक लाख इक्यासी हजार छह सौ तीस रुपये का जुर्माना जमा किया। उसे उम्मीद थी कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसकी गाड़ी और जब्त किया गया डीजल उसे वापस मिल जाएगा।

    लेकिन जब सुमित गुप्ता पिपराही चौकी पहुंचा तो उसके सामने एक चौंकाने वाली स्थिति आई। टैंकर बाहर से बंद था ताला भी सही सलामत था लेकिन अंदर से पूरा डीजल गायब था। टैंकर में एक बूंद तक नहीं बची थी। इस पर जब उसने पुलिस से जवाब मांगा तो कथित तौर पर उसे बताया गया कि डीजल ‘उड़ गया’। यह जवाब सुनकर पीड़ित ही नहीं बल्कि हर सुनने वाला हैरान है कि आखिर बंद टैंकर से इतनी बड़ी मात्रा में डीजल कैसे गायब हो सकता है।

    इस मामले में अब संदेह की सुई हनुमना थाना प्रभारी अनिल काकड़े की ओर घूम रही है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि उनके कार्यकाल के दौरान कई मामलों में विवाद सामने आ चुके हैं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि संदिग्ध परिस्थितियों में मामलों का निपटारा किया जाता है और प्रभावशाली लोगों का संरक्षण उन्हें प्राप्त है हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    पीड़ित सुमित गुप्ता का कहना है कि वह पहले ही आर्थिक नुकसान झेल चुका है और अब उसे न्याय मिलने की उम्मीद भी कम होती जा रही है। उसका आरोप है कि उससे शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है जिससे पूरे मामले पर और भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    यह घटना केवल एक व्यक्ति के नुकसान तक सीमित नहीं है बल्कि यह पुलिस की जिम्मेदारी और पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न उठाती है। जब जब्त की गई संपत्ति सुरक्षित नहीं रह पा रही है तो आम जनता के मन में अविश्वास पैदा होना स्वाभाविक है।

    अब निगाहें जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में किस तरह की जांच करते हैं और क्या दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं। यह मामला साफ तौर पर बताता है कि जवाबदेही और पारदर्शिता के बिना व्यवस्था पर भरोसा कायम रखना मुश्किल होता जा रहा है।