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  • इंदौर के छात्र आंदोलन में टी शर्ट बनी चर्चा का केंद्र ना मर्दों के प्रदेश वाले बयान का युवाओं ने दिया करारा जवाब

    इंदौर के छात्र आंदोलन में टी शर्ट बनी चर्चा का केंद्र ना मर्दों के प्रदेश वाले बयान का युवाओं ने दिया करारा जवाब


    मध्य प्रदेशदिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन की गूंज अब मध्य प्रदेश में भी साफ सुनाई दे रही है। इंदौर का भंवरकुआं चौराहा इन दिनों प्रदेश के छात्र आंदोलन का बड़ा केंद्र बन चुका है जहां लगातार कई दिनों से युवा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मामलों के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। इसी आंदोलन के दौरान एक टी शर्ट ने अचानक पूरे प्रदेश में चर्चा छेड़ दी। टी शर्ट पर लिखा संदेश ना मर्दों के प्रदेश मप्र से भी आए हैं मर्द सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों के बीच बहस का विषय बन गया।

    इस टी शर्ट को आंदोलन की शुरुआत करने वाले पवन अहिरवार और उनके साथियों ने पहनकर प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान इसी संदेश के साथ नारे भी लगाए गए। युवाओं का कहना था कि यह केवल एक टी शर्ट नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के युवाओं के आत्मसम्मान और उनकी आवाज का प्रतीक है। उनका दावा है कि प्रदेश के युवाओं को कमजोर समझने वालों को यह संदेश देना जरूरी था कि यहां के छात्र भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना जानते हैं।

    दरअसल कुछ दिन पहले दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक युवक प्रशांत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में उसने खुद को मध्य प्रदेश का बताते हुए कहा था कि यह ना मर्दों का प्रदेश है जहां कोई आवाज नहीं उठाता। उसने यह भी कहा था कि प्रदेश में कई बड़े मुद्दे सामने आते हैं लेकिन लोग खुलकर विरोध नहीं करते। यही बयान इंदौर के आंदोलनकारियों को नागवार गुजरा और उन्होंने इसका जवाब अपने तरीके से देने का फैसला किया।

    पवन अहिरवार का कहना है कि मध्य प्रदेश के युवाओं को किसी भी तरह से कमजोर नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कई गंभीर मुद्दों पर लोगों ने आवाज उठाई है लेकिन कई मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। चाहे भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद हों स्वास्थ्य व्यवस्था के मामले हों या अन्य जनहित के मुद्दे युवाओं ने हमेशा सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह टी शर्ट उसी सोच के खिलाफ एक प्रतीकात्मक जवाब है जिसने पूरे प्रदेश को गलत नजरिए से पेश करने की कोशिश की।

    भंवरकुआं चौराहे पर जारी धरने में शामिल छात्र नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और जब तक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित नहीं होती तब तक उनका धरना जारी रहेगा। लगातार बारिश और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र आंदोलन में डटे हुए हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और भरोसे से जुड़ा सवाल है।

    आंदोलन को कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का समर्थन भी मिल रहा है। मनावर विधायक डॉ हीरालाल अलावा भी छात्रों के बीच पहुंचे और उन्होंने निष्पक्ष जांच तथा जवाबदेही तय करने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि इंदौर का छात्र आंदोलन अब केवल धरना प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह युवाओं की भावनाओं और आत्मसम्मान का भी प्रतीक बन गया है। वायरल टी शर्ट ने एक नया संदेश दिया है कि मध्य प्रदेश के युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने में पीछे नहीं हैं। आने वाले दिनों में आंदोलन किस दिशा में जाएगा यह भले समय बताए लेकिन फिलहाल यह टी शर्ट पूरे आंदोलन की सबसे चर्चित पहचान बन चुकी है।

  • हाईकोर्ट सख्त, आदेश नहीं मानने पर ACS मनीष रस्तोगी समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ वारंट

    हाईकोर्ट सख्त, आदेश नहीं मानने पर ACS मनीष रस्तोगी समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ वारंट


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और लगातार गैरहाजिर रहने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए बड़ा संदेश दिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने अवमानना मामले में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनीष रस्तोगी, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेलवेन्द्रम और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक अजय गुप्ता के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने तीनों अधिकारियों को 15 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

    यह मामला कृषि विभाग, जबलपुर के सेवानिवृत्त उप संचालक देवदत्त विश्वकर्मा की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के अनुसार 30 जून 2023 को सेवानिवृत्ति के समय उनसे 2.10 लाख रुपए की वसूली की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 8 मई 2024 को आदेश दिया था कि वसूली गई पूरी राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस की जाए। आरोप है कि स्पष्ट न्यायिक आदेश के बावजूद संबंधित विभाग ने राशि वापस नहीं की, जिसके चलते अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद तीनों वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए। एसीएस मनीष रस्तोगी की ओर से न तो कोई अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुआ और न ही व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए कोई आवेदन दिया गया। वहीं अन्य दो अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता तो मौजूद रहे, लेकिन अधिकारी स्वयं कोर्ट नहीं पहुंचे। अदालत ने इसे न्यायालय के आदेशों की गंभीर अवहेलना माना।

    हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि तीनों अधिकारियों के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी किए जाएं। साथ ही संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से इन वारंटों की तामील सुनिश्चित की जाए, ताकि अगली सुनवाई पर सभी अधिकारी अदालत में उपस्थित हों।

    सुनवाई के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी एस.के. निगम और संभागीय पेंशन अधिकारी नमिता भी प्रारंभिक रूप से कोर्ट में उपस्थित नहीं थे। इस पर न्यायालय ने राज्य शासन के अधिवक्ता को तत्काल दोनों अधिकारियों से फोन पर संपर्क कर अदालत में बुलाने के निर्देश दिए। बाद में उनके उपस्थित होने पर अदालत ने उनसे भी यह स्पष्ट करने को कहा कि पहले से आदेश होने के बावजूद वे समय पर कोर्ट में क्यों नहीं पहुंचे।

    हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 तय करते हुए निर्देश दिए हैं कि 8 मई 2024 के मूल आदेश का पूर्ण अनुपालन करते हुए विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति भी अनिवार्य रहेगी। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसे मामलों में और कठोर रुख अपनाया जा सकता है।

  • महिला के पैर पकड़कर बचाई जान इंदौर में जर्जर मकान खाली कराने निगम अधिकारी का मानवीय चेहरा फिर चला बुलडोजर

    महिला के पैर पकड़कर बचाई जान इंदौर में जर्जर मकान खाली कराने निगम अधिकारी का मानवीय चेहरा फिर चला बुलडोजर


    इंदौर  लगातार हो रही बारिश के बीच इंदौर नगर निगम की एक कार्रवाई ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शहर के परदेशीपुरा क्षेत्र में एक जर्जर मकान को गिराने पहुंची निगम की टीम को परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा लेकिन कार्रवाई के दौरान जो दृश्य सामने आया उसने हर किसी को भावुक कर दिया। परिवार को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए नगर निगम के रिमूवल प्रभारी ने एक महिला के पैर पकड़ लिए और हाथ जोड़कर मकान खाली करने की अपील की। आखिरकार समझाइश सफल रही और परिवार के बाहर आने के बाद जर्जर मकान को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।

    नगर निगम की टीम वर्मा नर्सिंग होम के पास स्थित रतिराम खटके के पुराने और जर्जर मकान को हटाने पहुंची थी। अधिकारियों के अनुसार इस भवन को वर्ष 2021 से कई बार नोटिस जारी किए जा चुके थे। हाल ही में हुए निरीक्षण में भवन की नींव कमजोर और पूरी संरचना अत्यंत खतरनाक पाई गई थी। लगातार बारिश के कारण मकान कभी भी गिर सकता था जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका थी।

    कार्रवाई के दौरान मकान में रहने वाली महिला ने घर खाली करने से इनकार करते हुए अपने घरेलू सामान की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उसने कहा कि सामान रखने की व्यवस्था होने के बाद ही वह मकान खाली करेगी। इसके बाद रिमूवल प्रभारी बबलू कल्याणे स्वयं मकान के अंदर गए और पूरा सामान देखा। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि उनका सामान पास की सुरक्षित जगह पर रखवा दिया जाएगा और किसी भी वस्तु को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

    काफी देर तक समझाने के बावजूद जब महिला तैयार नहीं हुई तो स्थिति भावुक हो गई। परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारी बबलू कल्याणे ने महिला के पैर पकड़ लिए और आग्रह किया कि वह अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए मकान खाली कर दे। अधिकारी का यह मानवीय व्यवहार देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। अंततः महिला और उसके परिवार ने अधिकारियों की बात मान ली और सुरक्षित बाहर आ गए।

    परिवार के बाहर निकलने के बाद पुलिस की मौजूदगी में नगर निगम ने करीब दो हजार वर्गफीट क्षेत्र में बने जर्जर मकान को बुलडोजर की मदद से गिरा दिया। इस भवन में अलग अलग परिवार रह रहे थे जिन्हें पहले ही सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी प्रकार की सख्ती दिखाने के लिए नहीं बल्कि संभावित जनहानि को रोकने के उद्देश्य से की गई।

    नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि बारिश के मौसम में शहर के सभी चिन्हित जर्जर भवनों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। जिन भवनों से लोगों की जान को खतरा है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी संभावित हादसे से पहले ऐसे भवनों को हटाना जरूरी है।

    इंदौर की यह घटना केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय जिम्मेदारी का उदाहरण भी बन गई है। एक अधिकारी ने नियमों के साथ इंसानियत को भी प्राथमिकता दी और समय रहते एक संभावित बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई।

  • मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज शादी लिव इन और तलाक के लिए बनेंगे एक समान कानून गुजरात मॉडल पर तैयार ड्राफ्ट

    मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज शादी लिव इन और तलाक के लिए बनेंगे एक समान कानून गुजरात मॉडल पर तैयार ड्राफ्ट


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। राज्य के लिए यूसीसी का प्रारूप तैयार हो चुका है और इसे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत भी किया गया है। मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए सुझावों को शामिल करने के बाद समिति अंतिम ड्राफ्ट सरकार को सौंपेगी। माना जा रहा है कि यह कानून लागू होने के बाद शादी तलाक लिव इन रिलेशनशिप उत्तराधिकार और वसीयत जैसे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करेगा।

    सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश का प्रस्तावित यूसीसी काफी हद तक गुजरात में लागू समान नागरिक संहिता के मॉडल पर आधारित है। बताया जा रहा है कि ड्राफ्ट के अधिकांश प्रावधान गुजरात कानून से प्रेरित हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासी भी इस कानून के दायरे में आएंगे जबकि अपनी पारंपरिक जनजातीय रीति रिवाजों का पालन करने वाले आदिवासियों को इससे बाहर रखा जाएगा।

    प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार धार्मिक परंपराओं में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। सभी समुदाय अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार विवाह कर सकेंगे। हिंदू विवाह के फेरे मुस्लिम निकाह सिख आनंद कारज ईसाई चर्च विवाह और अन्य मान्य पद्धतियां पहले की तरह जारी रहेंगी। अंतर केवल इतना होगा कि विवाह से जुड़े कानूनी अधिकार और जिम्मेदारियां सभी नागरिकों के लिए समान होंगी।

    ड्राफ्ट में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान रखा गया है। विवाह होने के 60 दिन के भीतर उसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यदि निर्धारित समय में पंजीकरण नहीं हो पाता है तो बाद में तय प्रक्रिया के तहत इसे कराया जा सकेगा। हालांकि केवल रजिस्ट्रेशन न होने से विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा लेकिन नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई संभव होगी। नई शादियों के साथ पहले से हुए विवाह और तलाक का भी सरकारी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य में दस्तावेजों और कानूनी विवादों में पारदर्शिता बनी रहे।

    यूसीसी के तहत पति पत्नी और बच्चों के अधिकारों को लेकर भी समान नियम प्रस्तावित किए गए हैं। भरण पोषण की परिभाषा केवल भोजन और आवास तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि शिक्षा स्वास्थ्य वस्त्र और अन्य आवश्यक जरूरतें भी इसमें शामिल होंगी। अदालत परिस्थितियों के अनुसार स्थायी गुजारा भत्ता तय कर सकेगी। बच्चों की अभिरक्षा और देखभाल से जुड़े मामलों में भी समान कानूनी प्रावधान लागू होंगे।

    संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में भी एक समान नियम लागू करने की तैयारी है। यदि कोई व्यक्ति बिना वसीयत के निधन करता है तो उसकी संपत्ति का बंटवारा तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा। गर्भ में पल रहे बच्चे के अधिकारों को भी मान्यता दी जाएगी। वहीं यदि कोई व्यक्ति मृतक की हत्या का दोषी पाया जाता है तो उसे संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा। बीमारी या शारीरिक दिव्यांगता के आधार पर किसी भी उत्तराधिकारी के अधिकार समाप्त नहीं किए जा सकेंगे।

    ड्राफ्ट में वसीयत तैयार करने उसे संशोधित करने या निरस्त करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है। यदि किसी वसीयत के पीछे दबाव धोखाधड़ी या जबरदस्ती साबित होती है तो उसे अमान्य माना जाएगा। संपत्ति विवाद की स्थिति में अदालत संपत्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा सकेगी और जरूरत पड़ने पर संरक्षक नियुक्त कर सकेगी।

    प्रस्तावित कानून के तहत शादी तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए रजिस्ट्रार जनरल और रजिस्ट्रार की नियुक्ति होगी। यदि किसी व्यक्ति का आवेदन अस्वीकार किया जाता है तो उसे अपील का अधिकार भी मिलेगा। रिकॉर्ड में छेड़छाड़ झूठी जानकारी देने या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर दंड का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से पारिवारिक मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी नागरिकों को समान कानूनी संरक्षण मिल सकेगा।

  • रीवा में सिलेंडर ब्लास्ट से बड़ा हादसा, मकान में लगी भीषण आग, परिवार के 4 लोग झुलसे

    रीवा में सिलेंडर ब्लास्ट से बड़ा हादसा, मकान में लगी भीषण आग, परिवार के 4 लोग झुलसे


    रीवा । मध्यप्रदेश के रीवा जिले में गैस सिलेंडर ब्लास्ट से बड़ा हादसा हो गया। शहर के पैपखरा इलाके में हुए इस धमाके के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में एक मकान में भीषण आग लग गई, जिसमें परिवार के चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को इलाज के लिए संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के लोग दहल उठे। कुछ देर तक लोगों को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। देखते ही देखते आग ने पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया और मकान जलकर लगभग खाक हो गया।

    स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर घर में फंसे परिवार के सदस्यों को बाहर निकाला। आग पर काबू पाने के लिए दमकल की टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घर में रखे गैस सिलेंडर का रेगुलेटर खुला हुआ था। इसी दौरान एक बछड़ा वहां टकरा गया, जिससे सिलेंडर की पाइप निकल गई और पूरे घर में गैस फैल गई। बताया जा रहा है कि चूल्हे की आग के संपर्क में आते ही गैस ने विकराल रूप ले लिया और जोरदार धमाका हो गया।

    इस हादसे में यशोदानंद शुक्ला, इंद्रकली शुक्ला और दो मासूम बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए हैं। सभी घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है और उनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही आग लगने और सिलेंडर ब्लास्ट के सही कारणों की भी जांच की जा रही है।

  • इंदौर का रेती मंडी ब्रिज बना इंजीनियरिंग फेलियर का नया उदाहरण, MANIT ने पकड़ी बड़ी खामी

    इंदौर का रेती मंडी ब्रिज बना इंजीनियरिंग फेलियर का नया उदाहरण, MANIT ने पकड़ी बड़ी खामी


    इंदौर । इंदौर का बहुप्रतीक्षित रेती मंडी ब्रिज अब तकनीकी लापरवाही और खराब प्लानिंग को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। भोपाल के चर्चित 90 डिग्री ब्रिज विवाद के बाद अब यह प्रोजेक्ट भी इंजीनियरिंग की गंभीर चूक का उदाहरण बनता नजर आ रहा है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद चार साल से निर्माणाधीन यह ब्रिज अब तक पूरा नहीं हो पाया है और नई तकनीकी खामी सामने आने के बाद इसका काम फिर से करीब छह महीने आगे बढ़ गया है।

    सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यदि समय रहते इस गलती को नहीं पकड़ा जाता तो भविष्य में यहां बड़ा हादसा हो सकता था। दरअसल रेती मंडी ब्रिज के टर्निंग पॉइंट पर सड़क की चौड़ाई केवल 7.50 मीटर रखी गई थी। जब मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी MANIT की विशेषज्ञ टीम ने प्रूफ चेक किया तो इसे गंभीर तकनीकी खामी बताया गया।

    विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी कम चौड़ाई वाले टर्न पर भारी वाहनों और तेज रफ्तार ट्रैफिक के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग को पूरे डिजाइन में बदलाव करना पड़ा है। अब इस टर्निंग पॉइंट की चौड़ाई 7.50 मीटर से बढ़ाकर 10 मीटर की जा रही है।

    नई चौड़ाई को सपोर्ट देने के लिए दो अतिरिक्त पिलर भी लगाए जाएंगे। यानी जो काम शुरुआती प्लानिंग में होना चाहिए था, उसे अब निर्माण के बीच में बदलना पड़ रहा है। इससे न केवल प्रोजेक्ट की लागत बढ़ेगी बल्कि काम पूरा होने में भी और देरी होगी।

    तकनीकी विशेषज्ञ अतुल सेठ ने कहा कि उन्होंने पहले ही इस खामी की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। उनके अनुसार किसी भी बड़े टर्निंग पॉइंट पर इतनी कम चौड़ाई पर्याप्त नहीं मानी जाती। अगर समय रहते सुधार नहीं किया जाता तो भविष्य में यह ब्रिज गंभीर हादसों का कारण बन सकता था।

    मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने लोक निर्माण विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए इसे सरकारी लापरवाही का उदाहरण बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने आरोप लगाया कि इंदौर को प्रयोगशाला बनाकर बिना उचित प्लानिंग के निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी 90 डिग्री ब्रिज बनाया जाता है, कभी पिलर गायब हो जाते हैं और अब रेती मंडी ब्रिज में तकनीकी खामी सामने आ रही है।

    रेती मंडी ब्रिज अब केवल अधूरा प्रोजेक्ट नहीं बल्कि सरकारी सिस्टम की कार्यशैली और इंजीनियरिंग की कमजोरियों पर बड़ा सवाल बन चुका है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

  • सतना में सनसनी, पति-पत्नी के शव घर में फांसी के फंदे पर मिले

    सतना में सनसनी, पति-पत्नी के शव घर में फांसी के फंदे पर मिले


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना जिले में बुधवार को एक दर्दनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया, जहां पति-पत्नी के शव घर के अंदर फांसी के फंदे पर लटके मिले। घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया और इलाके में शोक का माहौल है। यह मामला रामपुर बघेलान थाना क्षेत्र के तिवनी गांव का है। पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान 45 वर्षीय मंगलदीन कोरी और उनकी 43 वर्षीय पत्नी शकुंतला कोरी के रूप में हुई है।

    जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह घर का दरवाजा खुला हुआ था, लेकिन काफी देर तक अंदर से कोई हलचल नहीं होने पर पड़ोसियों को शक हुआ। इसके बाद आसपास के लोगों ने घर के अंदर जाकर देखा तो पति-पत्नी के शव फांसी के फंदे पर लटके मिले। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ भी की।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मामला आत्महत्या का है या इसके पीछे कोई और वजह है। पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा। घटना के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

  • महाकालेश्वर मंदिर का श्रावण महोत्सव 2026, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की होगी प्रस्तुति

    महाकालेश्वर मंदिर का श्रावण महोत्सव 2026, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की होगी प्रस्तुति


    उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में आगामी 30 जुलाई से 21वें अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन शुरू होने जा रहा है। धार्मिक आस्था और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े इस प्रतिष्ठित महोत्सव में देशभर के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में आयोजित होने वाला यह महोत्सव वर्ष 2004 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रावण और भाद्रपद माह में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिसमें संगीत, नृत्य और कला की विविध विधाओं का संगम देखने को मिलेगा।

    मंदिर समिति के अनुसार महोत्सव का आयोजन 30 जुलाई से 7 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। इस दौरान श्रावण और भाद्रपद माह के प्रत्येक शनिवार को विशेष सांस्कृतिक संध्याएं आयोजित होंगी। इन कार्यक्रमों में देश के विभिन्न राज्यों से कलाकारों को आमंत्रित किया जाएगा, जो अपनी कला से श्रद्धालुओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।

    महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित होने वाला यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को मंच देने वाला एक बड़ा सांस्कृतिक उत्सव माना जाता है। हर साल हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं। उज्जैन की आध्यात्मिक गरिमा और सांस्कृतिक विरासत को और भव्य बनाने वाला यह महोत्सव इस बार भी देशभर के कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र रहेगा।

  • मिट्टी धंसने से हुई दर्दनाक मौतें, पन्ना में मृत मजदूरों को आज दी जाएगी अंतिम विदाई

    मिट्टी धंसने से हुई दर्दनाक मौतें, पन्ना में मृत मजदूरों को आज दी जाएगी अंतिम विदाई


    पन्ना । पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में निर्माणाधीन कुएं की मिट्टी धंसने से हुई दर्दनाक दुर्घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल बना हुआ है। हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों का पोस्टमार्टम कराने के बाद आज उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

    यह हादसा अजयगढ़ जनपद की ग्राम पंचायत बीहरपुरवा के नयापुरवा गांव में हुआ था, जहां निर्माणाधीन कुएं में काम के दौरान अचानक मिट्टी धंस गई थी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और गांव में मातम फैल गया। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    सभी मृत मजदूरों का पोस्टमार्टम अजयगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए, जिनका आज अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांव में इस दर्दनाक घटना के बाद लोगों में गहरा दुख और आक्रोश दोनों देखा जा रहा है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए सागर संभाग के कमिश्नर अनिल सुचारी और पुलिस महानिरीक्षक मिथिलेश कुमार शुक्ला अजयगढ़ पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल और अस्पताल का निरीक्षण किया तथा पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।

    अधिकारियों ने परिजनों को शासन और प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को पीड़ित परिवारों की मांगों के समाधान और राहत कार्यों को लेकर आवश्यक निर्देश भी दिए गए। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और ग्रामीण लगातार पीड़ित परिवारों के घर पहुंचकर संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं।

  • 12 घंटे ड्यूटी फिर भी वेतन नहीं, ग्वालियर में 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों का फूटा गुस्सा

    12 घंटे ड्यूटी फिर भी वेतन नहीं, ग्वालियर में 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों का फूटा गुस्सा


    ग्वालियर । ग्वालियर में लोगों की जान बचाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा खुद गंभीर बदहाली का शिकार होती नजर आ रही है। मेंटीनेंस की कमी, खराब वाहनों, डीजल संकट और कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने जैसे आरोपों ने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मंगलवार को 108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े चालक और EMT कर्मचारी अपनी समस्याएं लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा रखी। कर्मचारियों ने सेवा संचालन करने वाली JASS कंपनी पर लापरवाही और व्यवस्थाओं की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए।

    कर्मचारियों के मुताबिक जिले में संचालित सात से आठ एम्बुलेंस लंबे समय से मेंटीनेंस के अभाव में बंद पड़ी हैं। कई वाहनों के एयर कंडीशनर खराब हैं, जिससे भीषण गर्मी में मरीजों और कर्मचारियों दोनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    उन्होंने बताया कि कई एम्बुलेंस की लाइटें खराब हैं और कुछ वाहन डीजल की कमी के कारण रास्ते में ही बंद हो जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो रहा है, जिससे उनकी जान पर भी खतरा बन सकता है।

    एम्बुलेंस कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार 12-12 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा। वेतन में देरी और खराब कार्य परिस्थितियों से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो वे काम बंद करने को मजबूर हो सकते हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद कंपनी की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

    इस पूरे मामले ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति को उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित कंपनी 108 एम्बुलेंस सेवा को पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाते हैं, क्योंकि इसका सीधा असर मरीजों की जिंदगी पर पड़ सकता है।