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  • सलमान खान, बाबा सिद्दीकी और रोहित शेट्टी के बाद टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग, बॉलीवुड सितारों की सुरक्षा और मुंबई की कानून-व्यवस्था पर सवाल

    सलमान खान, बाबा सिद्दीकी और रोहित शेट्टी के बाद टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग, बॉलीवुड सितारों की सुरक्षा और मुंबई की कानून-व्यवस्था पर सवाल


    नई दिल्ली । मुंबई को सपनों की नगरी कहा जाता है। देशभर से लोग यहां अपनी किस्मत आजमाने आते हैं और बॉलीवुड के सितारे लाखों लोगों के दिलों पर राज करते हैं। लेकिन जब फिल्मी हस्तियों के घरों के बाहर गोलियां चलने लगें, उन्हें धमकियां मिलने लगें और चर्चित लोगों की हत्या हो जाए, तो मामला केवल सितारों की निजी सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता। इससे महानगर की कानून-व्यवस्था और अपराधियों के बढ़ते हौसले पर भी सवाल खड़े होते हैं। हाल के वर्षों में मुंबई में फिल्म जगत से जुड़े लोगों को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आई हैं। अब अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई गोलीबारी ने इस चिंता को एक बार फिर बढ़ा दिया है।

    18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना सामने आई। बताया गया कि अभिनेता फुटबॉल मैच खेलने के बाद लौट रहे थे, तभी उनकी कार को निशाना बनाया गया। इस घटना में टाइगर सुरक्षित रहे, हालांकि उनके ड्राइवर और अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। इस दावे में सलमान खान से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की धमकी भी दी गई। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही स्पष्ट किया जा सकेगा।

    सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग

    फिल्मी हस्तियों से जुड़ी ऐसी घटनाओं में सबसे चर्चित मामला 14 अप्रैल 2024 का है। उस दिन मुंबई के बांद्रा स्थित सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर बाइक सवार दो हमलावरों ने गोलियां चलाई थीं। पुलिस की जांच में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े कथित सदस्यों की भूमिका सामने आई। जांच के अनुसार, इस वारदात को विक्की गुप्ता और सागर पाल ने अंजाम दिया था। सलमान खान को इससे पहले भी धमकियां मिलती रही थीं। उनके घर के बाहर हुई गोलीबारी ने फिल्म उद्योग में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी।

    बाबा सिद्दीकी की हत्या से बढ़ी चिंता
    12 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता बाबा सिद्दीकी की मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बाबा सिद्दीकी को सलमान खान का करीबी माना जाता था। इस हत्याकांड के बाद पुलिस की जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों के नाम सामने आए और मामले में गिरफ्तारियां भी हुईं। जांच में यह आरोप सामने आया कि सलमान खान से बाबा सिद्दीकी की नजदीकी उन्हें निशाना बनाए जाने की वजहों में से एक हो सकती थी। इस घटना ने राजनीतिक और फिल्मी जगत में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी थी।

    रोहित शेट्टी के घर के बाहर भी हुई थी गोलीबारी
    31 जनवरी और 1 फरवरी 2026 की दरमियानी रात मुंबई के जुहू इलाके में फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर के बाहर भी फायरिंग हुई थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर शुभम लोनकर और आरजू बिश्नोई नाम के लोगों ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। पोस्ट में रोहित शेट्टी को पहले संदेश भेजे जाने और उनकी बात नहीं मानने पर हमले की बात कही गई थी।

    जांच के अनुसार, आरोपी ने रोहित शेट्टी के घर से कुछ दूरी पर बाइक खड़ी की और पैदल शेट्टी टावर तक पहुंचा। इसके बाद इमारत की ओर कई राउंड फायरिंग कर वह मौके से फरार हो गया। इस वारदात ने एक बार फिर फिल्मी हस्तियों के घरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

    बॉलीवुड में दबदबा कायम करने की आशंका
    इन घटनाओं में बार-बार लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आने से पुलिस की जांच और गिरोह के कथित मकसद पर चर्चा तेज हुई है। पुलिस की जांच और दाखिल चार्जशीट में यह पहलू सामने आया है कि चर्चित हस्तियों को निशाना बनाकर गिरोह फिल्म उद्योग में भय और दबदबा कायम करने की कोशिश कर सकता है। ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य कथित तौर पर रंगदारी और दूसरी अवैध गतिविधियों के लिए दबाव बनाना भी हो सकता है।

    हालांकि, हर घटना में आरोपों, सोशल मीडिया पर किए गए दावों और जांच से स्थापित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है। टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में भी हमले की वजह, हमलावरों की पहचान और गिरोह की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएंगे। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने बॉलीवुड सितारों की सुरक्षा के साथ-साथ मुंबई में कानून-व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • मुंबई के विद्याविहार पुल के नाम पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान, शिवसेना यूबीटी ने नाना पाटेकर तो भाजपा ने स्मित मच्छार का नाम सुझाया

    मुंबई के विद्याविहार पुल के नाम पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान, शिवसेना यूबीटी ने नाना पाटेकर तो भाजपा ने स्मित मच्छार का नाम सुझाया


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में विद्याविहार के नए ईस्ट-वेस्ट पुल के नाम को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पुल का उद्घाटन होने से पहले ही इसे किसके नाम पर रखा जाए, इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रस्ताव सामने आए हैं। शिवसेना (यूबीटी) इस पुल का नाम दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर के नाम पर रखने की मांग कर रही है, जबकि भाजपा विधायक पराग शाह ने कैप्टन स्मित मच्छार के नाम का सुझाव दिया है। दोनों नामों के पीछे अलग-अलग वजहें बताई जा रही हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

    शिवसेना (यूबीटी) ने पुल पर ‘पद्मश्री नाना पाटेकर सेतु’ नाम का बैनर भी लगाया है। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े से मुलाकात कर उन्हें एक पत्र सौंपा। इस पत्र में मांग की गई कि नए पुल का नाम नाना पाटेकर के नाम पर रखा जाए। पार्टी का मानना है कि नाना पाटेकर ने फिल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों के जरिए भी महाराष्ट्र के लोगों के बीच विशेष पहचान बनाई थी।

    दूसरी ओर, भाजपा विधायक पराग शाह ने पुल का नाम कैप्टन स्मित मच्छार के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया है। मच्छार ने 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में अपहरण की कोशिश को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी। इस घटना के दौरान गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने विमान की सुरक्षा से जुड़ी परिस्थितियों का सामना किया। उनके साहस और यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों के कारण उनका नाम भी पुल के नामकरण की चर्चा में शामिल हो गया है।

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में सदन के नेता गणेश खनकर ने शिवसेना (यूबीटी) पर इस मामले में राजनीतिक श्रेय लेने के लिए विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नाना पाटेकर को सम्मान देने के लिए पुल के बजाय किसी थिएटर या थिएटर परिसर का नाम उनके नाम पर रखना अधिक उपयुक्त होगा। इस तरह पुल के नाम को लेकर दोनों पक्षों की राय अलग-अलग है। फिलहाल नामकरण को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

    बीएमसी के अनुसार, विद्याविहार का यह पुल लगभग 650 मीटर लंबा और दो लेन वाला है। यह विद्याविहार स्टेशन के पूर्वी हिस्से में रामचंद्र चेंबूरकर मार्ग को घाटकोपर के पश्चिमी हिस्से में लाल बहादुर शास्त्री मार्ग से जोड़ता है। पुल का लगभग 100 मीटर हिस्सा रेलवे पटरियों के ऊपर बनाया गया है। इस संपर्क मार्ग से पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    नाना पाटेकर का जन्म महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उन्होंने अपने अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल किए और वर्ष 2013 में पद्मश्री से सम्मानित हुए। फिल्मों के अलावा किसानों की मदद के लिए किए गए कार्यों के कारण भी उन्हें पहचान मिली। उन्होंने राज कपूर पुरस्कार के तहत मिली 10 लाख रुपये की राशि सूखा राहत के लिए दान कर दी थी। वर्ष 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ नाम फाउंडेशन की स्थापना की।

    यह संस्था सूखे से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों की मदद करती है। उसी वर्ष उन्होंने विदर्भ के 62 परिवारों और लातूर तथा उस्मानाबाद के 113 परिवारों को चेक वितरित किए थे। उन्होंने प्रादेशिक सेना में भी सेवा दी थी और 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया जाता है। 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में 75 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।

    कैप्टन स्मित मच्छार का परिवार मुंबई के घाटकोपर पूर्व में रहता है। वह कपड़ा कारोबारी परिवार से आते हैं और उन्होंने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। एक पॉडकास्ट में उन्होंने बताया था कि बचपन से पायलट बनना उनका सपना नहीं था। उन्होंने स्पाइसजेट में 11 साल काम करने के बाद वर्ष 2022 में फ्लाईदुबई में नौकरी शुरू की।

    30 सितंबर को वह उड़ान एफजेड-1073 के कप्तान थे। दुबई से तेल अवीव जा रहे इस विमान में 174 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान उनके सह-पायलट ने उन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में मदद की।

    अब विद्याविहार पुल के नामकरण पर अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरणों को लेना है। नाना पाटेकर के सामाजिक योगदान और स्मित मच्छार के साहसिक कार्य, दोनों को उनके समर्थक सम्मान देने योग्य बता रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि मुंबई के इस नए पुल को आखिर किस नाम से पहचान मिलती है।

  • मार्को रुबियो के मुंबई दौरे पर राहुल गांधी का पीएम मोदी से सवाल, विदेश मंत्रालय की भूमिका पर उठाए सवाल

    मार्को रुबियो के मुंबई दौरे पर राहुल गांधी का पीएम मोदी से सवाल, विदेश मंत्रालय की भूमिका पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के प्रस्तावित भारत दौरे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रुबियो की मुंबई यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया है। उन्होंने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के बीच कथित भ्रम का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। रुबियो इसी महीने भारत आने वाले हैं और उनके मुंबई के साथ गुजरात के जामनगर जाने का भी कार्यक्रम बताया गया है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणी में कहा कि रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर क्या हो रहा है। राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो अधिकारियों को स्थिति समझा सकते हैं, या फिर वह स्वयं इस बारे में समझाने के लिए तैयार हैं।

    राहुल गांधी की यह टिप्पणी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भी मुंबई में मार्को रुबियो से मिलने की उम्मीद है। इसी बयान को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि भारतीय विदेश मंत्री की संभावित मुलाकात के बारे में आधिकारिक जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से सामने क्यों नहीं आई।

    विपक्ष का सवाल मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठक से जुड़ी जानकारी किस माध्यम से सार्वजनिक की जा रही है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री से विदेश मंत्रालय में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि रुबियो और जयशंकर की मुलाकात का अंतिम कार्यक्रम क्या होगा।

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजदूत की ओर से मार्को रुबियो की आगामी मुंबई यात्रा के बारे में अतिरिक्त जानकारी दिया जाना आश्चर्यजनक नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस बात को असाधारण बताया कि अमेरिकी राजदूत ने यह भी कहा कि डॉ. एस. जयशंकर के अन्य लोगों के साथ वहां शामिल होने की उम्मीद है।

    जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठकों की जानकारी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के बजाय किसी दूसरे पक्ष की ओर से कब से दी जाने लगी। उनके बयान का केंद्र यह था कि ऐसी महत्वपूर्ण राजनयिक गतिविधियों के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी भारतीय विदेश मंत्रालय की होनी चाहिए।
    इस विवाद के बीच जयराम रमेश ने ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि भारत को 10 मई 2025 की शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के माध्यम से पहली बार जानकारी मिली थी कि ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया गया है। इस संदर्भ को उठाते हुए उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच संवेदनशील कूटनीतिक मामलों में संवाद और आधिकारिक जानकारी के तरीके पर सवाल खड़े किए।

    मार्को रुबियो का प्रस्तावित दौरा ऐसे समय चर्चा में आया है, जब उनकी मुंबई यात्रा और जामनगर जाने की योजना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल राहुल गांधी और जयराम रमेश की टिप्पणियों में विदेश मंत्रालय की संचार प्रक्रिया और संभावित उच्चस्तरीय बैठक की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। रुबियो और जयशंकर की मुलाकात को लेकर अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • मुंबई के मॉल में गरबा देखकर भावुक हुईं रोमानिया की मारिया एलेक्जेंड्रा, बोलीं- भारत छोड़ने पर इन खूबसूरत पलों को बहुत याद करूंगी

    मुंबई के मॉल में गरबा देखकर भावुक हुईं रोमानिया की मारिया एलेक्जेंड्रा, बोलीं- भारत छोड़ने पर इन खूबसूरत पलों को बहुत याद करूंगी

    नई दिल्ली । नवरात्रि के दौरान मुंबई के एक मॉल में गरबा कर रहे लोगों को देखकर रोमानिया की मारिया एलेक्जेंड्रा भावुक हो गईं। पारंपरिक कपड़ों में सजे लोगों, ढोल की थाप पर थिरकते कदमों और मां दुर्गा की भक्ति से भरे माहौल ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। इस अनुभव के दौरान उनकी आंखें भर आईं और उन्हें एहसास हुआ कि जब वह भारत से जाएंगी, तो यहां की संस्कृति और त्योहारों से जुड़े ऐसे यादगार पलों को बहुत याद करेंगी। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    मारिया नवरात्रि के दौरान मुंबई के एक मॉल में आयोजित गरबा कार्यक्रम देख रही थीं। वहां बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक परिधानों में एक साथ नृत्य कर रहे थे। कोई गोल घेरे में घूमकर गरबा कर रहा था, तो कोई संगीत की लय के साथ अपने कदम मिला रहा था। चारों ओर उत्सव का माहौल था। मारिया ने इस दृश्य का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में वह सफेद कुर्ते और झुमकों में दिखाई दे रही हैं। हालांकि, लोगों का ध्यान उनके पहनावे से ज्यादा उस भावुक प्रतिक्रिया पर गया, जो गरबा देखते समय उनके चेहरे पर नजर आई।

    मारिया ने बताया कि उस समय उन्हें खुद भी पूरी तरह समझ नहीं आ रहा था कि वह इतनी भावुक क्यों हो गईं। भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव, भारत छोड़ने का विचार या फिर बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ खुशी मनाते देखना, इनमें से कोई भी वजह उनकी भावनाओं से जुड़ी हो सकती थी। उनके लिए यह केवल किसी उत्सव को देखने का अनुभव नहीं था, बल्कि भारत के साथ बने उनके भावनात्मक जुड़ाव को महसूस करने का एक खास अवसर था।

    उन्होंने कहा कि इस पल ने उन्हें एहसास कराया कि भारत छोड़ने के बाद वह ऐसे नजारों को बहुत याद करेंगी। त्योहार के दौरान लोगों की खुशी, एक-दूसरे के साथ उनका जुड़ाव और पूरे वातावरण में दिखाई देने वाली उमंग उनके लिए खास बन गई। किसी दूसरे देश में रहकर वहां की संस्कृति को करीब से देखना और उसके भावनात्मक पक्ष को महसूस करना उनके लिए यादगार अनुभव रहा।

    मारिया ने गरबा के धार्मिक महत्व पर भी बात की। उनके अनुसार, गरबा केवल संगीत पर किया जाने वाला नृत्य नहीं है, बल्कि नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के प्रति आस्था व्यक्त करने का माध्यम भी है। इस आयोजन में लोगों की खुशी और उनकी धार्मिक श्रद्धा एक साथ दिखाई देती है। नृत्य करते हुए लोग अपनी परंपराओं से जुड़े रहते हैं और सामूहिक रूप से त्योहार मनाते हैं। मारिया को यही मेल विशेष रूप से प्रभावित कर गया कि यहां उत्सव और भक्ति को एक साथ अनुभव किया जा सकता है।

    वीडियो के साथ उन्होंने यह भी लिखा कि इस अनुभव ने उन्हें याद दिलाया कि उन्हें भारत से प्यार क्यों हुआ था। उन्होंने नवरात्रि मनाने वाले लोगों से पूछा कि उनके लिए इस त्योहार का क्या अर्थ है। उनकी इस बात से पता चलता है कि वह केवल उत्सव का दृश्य देखने तक सीमित नहीं रहना चाहती थीं, बल्कि उसके पीछे की आस्था और परंपरा को भी समझना चाहती थीं।

    मारिया के वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने उनकी भावनाओं की सराहना की और कहा कि किसी संस्कृति को समझने का अर्थ उसके रीति-रिवाजों के साथ-साथ उनसे जुड़ी भावनाओं को जानना भी है। कुछ लोगों ने उनके अनुभव को प्रेरणादायक बताया, जबकि अन्य ने उन्हें भारत के दूसरे त्योहारों को देखने की सलाह दी। इनमें दुर्गा पूजा और दिवाली का अनुभव लेने के सुझाव भी शामिल थे।

    भारत के अलग-अलग हिस्सों में त्योहारों को विविध परंपराओं और तरीकों से मनाया जाता है। मारिया के लिए मुंबई के मॉल में गरबा देखना ऐसा ही एक अनुभव बना, जिसने उन्हें भारतीय संस्कृति से अपने जुड़ाव का एहसास कराया। उनकी भावुक प्रतिक्रिया ने यह दिखाया कि कभी-कभी किसी जगह के लोगों को खुशी मनाते देखना भी ऐसी याद बना सकता है, जिसे वहां से दूर जाने के बाद लंबे समय तक याद किया जाए।

  • 11 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम में राहत या बदलाव, दिल्ली, मुंबई, नोएडा, पटना और लखनऊ समेत 10 शहरों के ताजा रेट

    11 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम में राहत या बदलाव, दिल्ली, मुंबई, नोएडा, पटना और लखनऊ समेत 10 शहरों के ताजा रेट

    नई दिल्ली ।रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर वाहन चालकों की नजर अपने शहर के ताजा भाव पर है। रोजाना वाहन से सफर करने वाले लोगों से लेकर लंबी दूरी की यात्रा की तैयारी कर रहे लोगों के लिए ईंधन की कीमतें खर्च का अहम हिस्सा होती हैं। उपलब्ध दरों के अनुसार, अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल के भाव में अंतर बना हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।

    नोएडा में पेट्रोल की कीमत 101.96 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.44 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 111.31 रुपये और डीजल 97.97 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा है। वहीं, कोलकाता में पेट्रोल का भाव 113.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल का दाम 99.82 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रमुख शहरों में दोनों ईंधनों की कीमतें एक समान नहीं हैं।

    चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की दर 99.55 रुपये प्रति लीटर है। गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपये और डीजल 95.64 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल का भाव 101.86 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.36 रुपये प्रति लीटर है। इन शहरों में ईंधन खरीदने वाले वाहन चालकों को अपने स्थानीय पंप पर लागू दर के अनुसार भुगतान करना होता है।

    बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल 113.37 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा है। जयपुर में पेट्रोल का भाव 112.66 रुपये और डीजल का दाम 98.25 रुपये प्रति लीटर है। बेंगलुरु में पेट्रोल 111.68 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। इस तरह दिल्ली, नोएडा, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना, जयपुर और बेंगलुरु में ईंधन के अलग-अलग भाव सामने आए हैं।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर के पीछे कई कारण होते हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाले कर अंतिम खुदरा कीमत को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा डीलर का कमीशन और ईंधन की आपूर्ति से जुड़ी लागत भी कीमत तय करने में शामिल होती है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में एक ही ईंधन के लिए ग्राहकों को अलग-अलग रकम चुकानी पड़ सकती है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का भी पेट्रोल और डीजल की लागत पर असर पड़ता है। हालांकि, कच्चे तेल के भाव में बदलाव का घरेलू खुदरा कीमतों पर कितना और कब असर होगा, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव और पेट्रोल पंप पर मिलने वाली कीमतों के बीच सीधा और तत्काल संबंध होना जरूरी नहीं है।

    ईंधन की कीमतें बढ़ने पर आम लोगों के परिवहन खर्च पर असर पड़ सकता है। पेट्रोल महंगा होने से बाइक और कार चलाने वालों का बजट प्रभावित होता है, जबकि डीजल की कीमतें ट्रक, बस और माल ढुलाई की लागत को प्रभावित कर सकती हैं। ईंधन की खपत कम रखने के लिए वाहन की नियमित सर्विस कराना, टायरों में उचित हवा बनाए रखना और लंबे समय तक इंजन चालू रखकर वाहन खड़ा करने से बचना उपयोगी हो सकता है।

  • डोसे में चूहा मिलने के बाद होटल मालिक से 25 लाख की वसूली मांग, दो आरोपी गिरफ्तार

    डोसे में चूहा मिलने के बाद होटल मालिक से 25 लाख की वसूली मांग, दो आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई। के बोरीवली वेस्ट स्थित एक होटल में डोसे के अंदर चूहा मिलने के बाद बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले ने नया मोड़ ले लिया। होटल मालिक ने आरोप लगाया कि वीडियो को दोबारा फैलाने और अन्य कार्रवाई की धमकी देकर उससे पैसे मांगे गए। बोरीवली पुलिस ने 5 अक्टूबर को इस मामले में FIR दर्ज की है। मामले में मानसी अमित आचार्य और किंजल सुभाष भाटिया को आरोपी बनाया गया है। यह पूरा मामला 24 सितंबर को राधाकृष्ण होटल-बुफे-फास्ट फूड में हुई घटना से जुड़ा है।

    जानकारी के अनुसार, 24 सितंबर को होटल में आए लोगों में से एक ने डोसा मंगाया था। आरोप है कि डोसे के अंदर चूहा मिलने के बाद उसका वीडियो बनाया गया। यह वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। घटना के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने 28 सितंबर को होटल का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। लाइसेंस निलंबित होने के बाद होटल बंद रहा।

    होटल मालिक ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने उसका इस्तेमाल पैसे मांगने के लिए करना शुरू किया। शिकायत के मुताबिक, वीडियो को सोशल मीडिया पर और फैलाने तथा दूसरे कदम उठाने की धमकी दी गई। शुरुआत में होटल मालिक से 25 लाख रुपये मांगे गए थे। बाद में कथित तौर पर यह रकम घटाकर 20 लाख रुपये और फिर 15 लाख रुपये कर दी गई।

    आरोप है कि बातचीत के बाद आखिरकार 7 लाख रुपये में मामला तय करने की बात हुई। होटल मालिक ने इसमें से 1 लाख रुपये नकद बतौर टोकन देने का दावा किया। इसके बाद भी बाकी रकम को लेकर मांग जारी रही। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 30 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच उसे लगातार फोन कॉल और वाट्सऐप संदेशों के जरिए पैसे देने के लिए दबाव बनाया गया।

    होटल मालिक का आरोप है कि उसे लगातार चेतावनी दी जाती रही कि अगर बाकी रकम नहीं दी गई तो वायरल वीडियो को फिर से फैलाया जा सकता है और उसे अन्य नतीजे भी भुगतने पड़ सकते हैं। होटल मालिक ने 29 सितंबर को पुलिस से संपर्क किया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और पैसों की मांग जारी रहने के दौरान आरोपियों को पकड़ने की योजना बनाई गई।

    5 अक्टूबर को पुलिस की योजना के तहत शिकायतकर्ता से बाकी 6 लाख रुपये की व्यवस्था करने को कहा गया। शाम करीब 5:45 बजे जब आरोपी कथित तौर पर यह रकम लेने पहुंचे, तब उन्हें गवाहों की मौजूदगी में पकड़ लिया गया। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2) और धारा 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया है।

    पुलिस की जांच अब केवल होटल में डोसे के अंदर चूहा मिलने की मूल घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके बाद हुई पैसों की मांग पर भी केंद्रित है। जांच में वायरल वीडियो, फोन कॉल, वाट्सऐप पर हुई बातचीत और नकद लेन-देन से जुड़े पहलुओं को देखा जा रहा है। होटल का लाइसेंस निलंबित किए जाने और उसके बाद पैदा हुए हालात की भी जांच की जा रही है। FIR में होटल मालिक की ओर से लगाए गए आरोप दर्ज हैं और पूरे मामले की जांच जारी है।

  • सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली; दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में आज इतने हुए भाव

    सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली; दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में आज इतने हुए भाव

    नई दिल्ली । भारतीय सर्राफा बाजार में 24 सितंबर 2026, गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। दोनों प्रमुख कीमती धातुओं के भाव में कमजोरी दर्ज की गई है। सोने की कीमत में 390 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई, जबकि चांदी का भाव करीब 1,460 रुपये प्रति किलोग्राम तक फिसल गया।

    सोने की कीमतों में आई इस गिरावट के बाद 22 कैरेट गोल्ड का भाव अधिकांश प्रमुख शहरों में 1,39,060 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे पहुंच गया है। वहीं 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,750 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम हो गई है। अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर दर्ज किया गया है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,700 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। दिल्ली में दोनों कैरेट के भाव में गिरावट के बाद ये कीमतें सामने आई हैं।

    मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि 22 कैरेट गोल्ड का भाव 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना 1,51,600 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,38,958 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    कोलकाता में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट का भाव 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,51,700 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    बेंगलुरु में 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट की कीमत 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। लखनऊ में 24 कैरेट सोना 1,51,700 रुपये और 22 कैरेट गोल्ड 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी सोने की कीमतें प्रमुख शहरों के करीब रहीं। यहां 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,38,958 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

    सोने के साथ चांदी के भाव में भी आज कमजोरी आई है। पिछले दिन की तुलना में चांदी की कीमत में करीब 1,460 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद अधिकांश शहरों में चांदी का भाव 2,34,620 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया है।

    24 सितंबर को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में आई गिरावट से सर्राफा बाजार में दोनों धातुओं के भाव नीचे आए हैं। अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में मामूली अंतर है, जबकि चांदी का भाव अधिकांश शहरों में करीब 2,34,620 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है।

    अगर आप सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने शहर में लागू ताजा भाव की जानकारी लेना जरूरी है, क्योंकि शहर के अनुसार कीमतों में अंतर हो सकता है।

  • रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का 75 साल की उम्र में निधन, परिवार ने की निजता का सम्मान करने की अपील

    रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का 75 साल की उम्र में निधन, परिवार ने की निजता का सम्मान करने की अपील

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मंगलवार दोपहर आखिरी सांस ली। उनके निधन की जानकारी परिवार की ओर से दी गई है। परिवार ने इस मुश्किल समय में लोगों से निजता का सम्मान करने की अपील की है।

    कृष्णा मुखर्जी के निधन की खबर सामने आने के बाद रानी मुखर्जी के प्रशंसकों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों के बीच शोक की लहर है। रानी अपनी मां के बेहद करीब थीं और दोनों के बीच गहरा भावनात्मक रिश्ता था। कृष्णा अक्सर बेटी के साथ सार्वजनिक मौकों पर नजर आती थीं और उनके करियर में भी उनका लगातार साथ रहा।

    कृष्णा मुखर्जी के निधन की पुष्टि रानी मुखर्जी के पति आदित्य चोपड़ा की कंपनी की ओर से की गई। जानकारी के अनुसार, कृष्णा ने मंगलवार दोपहर दुनिया को अलविदा कहा। परिवार ने लोगों से अपील की है कि इस कठिन समय में उन्हें निजी समय दिया जाए। परिवार की ओर से मिले प्यार और प्रार्थनाओं के लिए भी आभार जताया गया है।

    हालांकि, कृष्णा मुखर्जी के निधन की वजह अभी सामने नहीं आई है। परिवार की ओर से भी उनकी मौत के कारण को लेकर कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल उनके निधन की परिस्थितियों के बारे में किसी तरह की पुष्टि नहीं हुई है।

    कृष्णा मुखर्जी का फिल्मों से पुराना जुड़ाव रहा था। उन्होंने फिल्म निर्माता राम मुखर्जी से शादी की थी। कृष्णा ने अभिनय के क्षेत्र में काम नहीं किया, लेकिन बंगाली सिनेमा से उनका नाता रहा। उन्होंने कई बंगाली फिल्मों के लिए प्लेबैक सिंगर के तौर पर अपनी आवाज दी थी।

    रानी मुखर्जी अपने माता-पिता दोनों से बेहद जुड़ी हुई थीं। उनके पिता राम मुखर्जी का निधन वर्ष 2017 में हुआ था। राम मुखर्जी फिल्म निर्माण से जुड़े हुए थे और बंगाली तथा हिंदी सिनेमा में उनका योगदान रहा। पिता के निधन के बाद कृष्णा मुखर्जी परिवार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी रहीं।

    रानी मुखर्जी के फिल्मी सफर में भी उनकी मां का खास योगदान रहा। रानी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत बंगाली सिनेमा से की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई।

    रानी मुखर्जी ने अपने लंबे करियर में कई चर्चित फिल्मों में काम किया है। इनमें कुछ कुछ होता है, गुलाम, साथिया, हम तुम, ब्लैक और मर्दानी जैसी फिल्में शामिल हैं। अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी खास जगह बनाई।

    रानी मुखर्जी के निजी जीवन में उनकी मां कृष्णा मुखर्जी का हमेशा अहम स्थान रहा। मां-बेटी के इस रिश्ते की झलक कई सार्वजनिक मौकों पर भी देखने को मिलती रही है। कृष्णा अपनी बेटी के काम और उपलब्धियों को लेकर हमेशा साथ खड़ी नजर आती थीं।

    रानी मुखर्जी को आखिरी बार मर्दानी 3 में देखा गया था। अब मां कृष्णा मुखर्जी के निधन के बाद अभिनेत्री और उनका परिवार निजी तौर पर शोक के दौर से गुजर रहा है। परिवार की ओर से लोगों से इस कठिन समय में उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की गई है।

  • गिरगांव चा राजा गणपति की पर्यावरण-अनुकूल परंपरा ने बनाया खास, 24 फीट की मूर्ति में दिखती है अनोखी कलात्मक झलक

    गिरगांव चा राजा गणपति की पर्यावरण-अनुकूल परंपरा ने बनाया खास, 24 फीट की मूर्ति में दिखती है अनोखी कलात्मक झलक

    नई दिल्ली । मुंबई के गिरगांव इलाके में स्थापित होने वाला ‘गिरगांव चा राजा’ गणपति अपनी भव्यता के साथ पर्यावरण-अनुकूल परंपरा के लिए भी खास पहचान रखता है। हर साल गणेशोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस गणपति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी मूर्ति मिट्टी से तैयार की जाती है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लंबे समय से इस परंपरा का हिस्सा रहा है।

    ‘गिरगांव चा राजा’ की परंपरा की शुरुआत वर्ष 1928 में दक्षिण मुंबई की निकडवारी लेन से हुई थी। उस समय पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय आज की तरह सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा नहीं थे। इसके बावजूद इस गणपति मंडल से जुड़े लोगों ने मिट्टी की मूर्ति स्थापित करने का फैसला किया।

    उस समय कई गणपति मूर्तियां प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनाई जाती थीं, लेकिन ‘गिरगांव चा राजा’ के लिए मिट्टी को प्राथमिकता दी गई। इसका उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों में मूर्ति विसर्जन से होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना था। यह परंपरा कई दशकों से लगातार निभाई जा रही है और आज भी इसकी मूर्ति पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से तैयार की जाती है।

    गणपति उत्सव के दौरान इस परंपरा को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से भी जोड़ा जाता है। मिट्टी से बनी मूर्ति के कारण विसर्जन के बाद इसके प्राकृतिक रूप से घुलने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होती है। यही वजह है कि यह गणपति पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव की चर्चा में विशेष स्थान रखता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2017 में अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में ‘गिरगांव चा राजा’ का उल्लेख किया था। उन्होंने पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली इसकी परंपरा की सराहना की थी। इसके बाद यह गणपति प्रधानमंत्री मोदी के पसंदीदा गणपति के तौर पर भी चर्चित हुआ।

    इस गणपति की मूर्ति अपनी कलात्मक विशेषताओं के कारण भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है। इसकी ऊंचाई करीब 24 फीट बताई जाती है। मूर्ति की सूंड पर भगवान कृष्ण की तस्वीर बनाई जाती है, जो इसे एक अलग और विशिष्ट स्वरूप देती है।

    गिरगांव चा राजा का विसर्जन भी गणेशोत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। विशाल मूर्ति को गिरगांव की ऐतिहासिक गलियों से होते हुए गिरगांव चौपाटी तक ले जाया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुलूस में शामिल होते हैं।

    विसर्जन यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा में युवा ढोल और लेजिम के साथ शामिल होते हैं। संगीत और पारंपरिक नृत्य के बीच गणपति को विदाई दी जाती है। गिरगांव की गलियों से अरब सागर तक पहुंचने वाली यह यात्रा स्थानीय गणेशोत्सव की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।

    ‘गिरगांव चा राजा’ की खासियत केवल उसकी विशाल मूर्ति या कलात्मक सजावट तक सीमित नहीं है। करीब एक सदी से चली आ रही मिट्टी की मूर्ति बनाने की परंपरा इसे पर्यावरण संरक्षण से जोड़ती है। यही वजह है कि गणपति उत्सव के दौरान यह पंडाल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण जागरूकता का भी संदेश देता है।

    वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में आधुनिक समय के पर्यावरणीय सरोकार भी जुड़े हैं। मिट्टी की मूर्ति, अनोखी कलाकारी और पारंपरिक विसर्जन जुलूस ने ‘गिरगांव चा राजा’ को मुंबई के प्रमुख गणपति उत्सवों में अलग पहचान दिलाई है।

  • विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से निकासी का रुख, सितंबर में आउटफ्लो 23,676 करोड़ रुपये

    विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से निकासी का रुख, सितंबर में आउटफ्लो 23,676 करोड़ रुपये


    नई दिल्ली ।
    विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली सितंबर में अब तक 23,676 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। 1 से 19 सितंबर के दौरान विदेशी निवेशकों ने सेकेंडरी मार्केट से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली। इससे पहले जुलाई और अगस्त में एफपीआई भारतीय बाजार में शुद्ध खरीदार बने हुए थे।

    सितंबर में विदेशी निवेशकों का रुख पूरी तरह नकारात्मक नहीं रहा है। सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली के बावजूद एफपीआई प्राइमरी मार्केट में लगातार निवेश कर रहे हैं। सितंबर में अब तक प्राइमरी बाजार में करीब 2,703 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।

    इसके साथ ही वर्ष 2026 में एफपीआई का कुल निवेश करीब 48,550 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में दिलचस्पी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, लेकिन सेकेंडरी मार्केट में मौजूदा परिस्थितियों के कारण उनका रुख सतर्क बना हुआ है।

    बाजार रणनीतिकारों के अनुसार, सेकेंडरी मार्केट के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन के बीच प्राइमरी मार्केट में जारी तेजी को एफपीआई निवेश से भी जोड़कर देखा जा सकता है। नए इश्यू और प्राथमिक बाजार से जुड़े अवसरों में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बनी हुई है।

    पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। ऊर्जा कीमतों में तेजी से महंगाई पर संभावित असर और आर्थिक विकास की रफ्तार को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं।

    सप्ताह के अंत में सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,294.46 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 0.22 प्रतिशत गिरकर 23,346.40 अंक पर रहा। कई सप्ताह तक बेहतर प्रदर्शन करने के बाद मिडकैप और स्मॉलकैप जैसे प्रमुख सूचकांकों में भी उतार-चढ़ाव वाले सप्ताह के दौरान कोई खास बदलाव नहीं देखने को मिला।

    बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड शामिल रहे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी के बाद वैश्विक स्तर पर तरलता की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ी है।

    आने वाले समय में एफपीआई निवेश की दिशा पर ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव का भी असर पड़ सकता है। इस तनाव से कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है।

    ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर भारतीय शेयर बाजार के लिए दबाव पैदा करने वाला कारक माना जा रहा है। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के 5 प्रतिशत के स्तर पर रहने से विदेशी निवेशकों के लिए वैश्विक निवेश विकल्पों का संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।

    हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और कंपनियों की कमाई में सुधार की उम्मीद बाजार के लिए सकारात्मक पहलू बने हुए हैं। ऐसे में एफपीआई के मौजूदा रुख के बावजूद घरेलू आर्थिक मजबूती और बेहतर आय संभावनाएं आगे बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक रहेंगे।