Tag: Mumbai

  • बीमारी से जंग लड़ रहे सोनू निगम, नस दबने की समस्या के कारण इलाज जारी, फैंस के लिए परफॉर्मेंस का किया वादा

    बीमारी से जंग लड़ रहे सोनू निगम, नस दबने की समस्या के कारण इलाज जारी, फैंस के लिए परफॉर्मेंस का किया वादा

    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत के प्रतिष्ठित गायक Sonu Nigam इन दिनों स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने प्रशंसकों को अपनी मौजूदा स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि वह गर्दन की नसों से जुड़ी समस्या से जूझ रहे हैं, जिसके कारण उन्हें पिछले कई दिनों से लगातार दर्द और असहजता का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सकीय जांच और उपचार के बीच भी उन्होंने अपने पेशेवर दायित्वों को निभाने की प्रतिबद्धता जताई है।

    सोनू निगम ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किए गए एक वीडियो में अपनी स्वास्थ्य स्थिति पर खुलकर बात की। वीडियो में उनके कंधे पर मेडिकल पैच दिखाई दिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उनका उपचार जारी है। उन्होंने बताया कि गर्दन की नसों पर दबाव पड़ने के कारण उन्हें काफी तकलीफ हो रही है और डॉक्टरों की सलाह पर वह आवश्यक दवाइयों का सेवन कर रहे हैं। इसके साथ ही उनकी कई चिकित्सकीय जांचें भी कराई गई हैं ताकि समस्या की सही प्रकृति और गंभीरता का आकलन किया जा सके।

    गायक ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से उन्हें लगातार दर्द महसूस हो रहा है। इस दौरान उनकी MRI, CT स्कैन और फिजियोथेरेपी जैसी प्रक्रियाएं चल रही हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि दर्द को नियंत्रित करने के लिए उन्हें पेनकिलर दवाइयों का सहारा लेना पड़ रहा है। दवाइयों के प्रभाव के कारण उनके गले पर भी असर पड़ा है, जिससे आवाज में भारीपन महसूस हो रहा है। एक पेशेवर गायक के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा सकती है, क्योंकि उनकी पहचान और करियर उनकी आवाज से ही जुड़ा हुआ है।

    हालांकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद सोनू निगम ने अपने प्रशंसकों को निराश न करने का संकल्प व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि वह लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर मंच पर लौटने की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बीमारी और शारीरिक असुविधा के कारण आत्मविश्वास में कुछ कमी महसूस हो रही है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने कार्यक्रमों को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। उन्होंने ईश्वर से शक्ति और ऊर्जा मिलने की उम्मीद भी जताई।

    संगीत प्रेमियों के लिए राहत की बात यह है कि सोनू निगम ने अपने आगामी कार्यक्रम को लेकर कोई पीछे हटने का संकेत नहीं दिया है। वह 27 जून को आयोजित होने वाले एक विशेष संगीत कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले हैं। यह आयोजन संगीत और आध्यात्मिकता को समर्पित एक भव्य कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें देश के कई प्रतिष्ठित कलाकार भी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम को लेकर उनके प्रशंसकों में पहले से ही काफी उत्साह बना हुआ है।

    सोनू निगम भारतीय संगीत उद्योग के उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने पिछले कई दशकों में अपनी आवाज और बहुमुखी गायन शैली से करोड़ों लोगों का दिल जीता है। हिंदी फिल्म संगीत के अलावा उन्होंने विभिन्न भारतीय भाषाओं में भी अनेक लोकप्रिय गीत गाए हैं। यही कारण है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर सामने आई जानकारी के बाद प्रशंसकों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

    फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है और वे आवश्यक चिकित्सकीय सलाह का पालन कर रहे हैं। उनके प्रशंसक उम्मीद कर रहे हैं कि वह जल्द पूरी तरह स्वस्थ होकर अपनी पुरानी ऊर्जा और शानदार आवाज के साथ फिर से मंच पर दिखाई देंगे। स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच भी काम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने एक बार फिर उनके पेशेवर समर्पण को उजागर किया है।

  • कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट का असर: एशियन पेंट्स में निवेशकों के लिए क्या बन रहे हैं

    कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट का असर: एशियन पेंट्स में निवेशकों के लिए क्या बन रहे हैं


    नई दिल्ली:
      वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार में पेंट सेक्टर के स्टॉक्स पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान-अमेरिका तनाव में नरमी और आपूर्ति परिस्थितियों में सुधार के चलते क्रूड ऑयल करीब 20 प्रतिशत तक टूटकर 76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। इस बदलाव ने निवेशकों का ध्यान उन कंपनियों की ओर खींचा है, जिनकी लागत संरचना में कच्चा तेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन्हीं में प्रमुख नाम है Asian Paints Ltd का, जो भारतीय पेंट उद्योग की अग्रणी कंपनी मानी जाती है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार क्रूड ऑयल में गिरावट का सीधा लाभ पेंट कंपनियों को मिल सकता है क्योंकि इनके प्रमुख कच्चे माल पेट्रोकेमिकल आधारित होते हैं। लागत घटने की संभावना से कंपनी के मार्जिन में सुधार की उम्मीद बढ़ती है, जिसका सकारात्मक असर शेयर कीमतों पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, मौजूदा स्तरों पर बाजार पहले ही इस कारक को काफी हद तक कीमतों में समाहित कर चुका है।

    डेली चार्ट पर तकनीकी विश्लेषण के अनुसार एशियन पेंट्स के शेयर ने हाल के सत्र में 2829 रुपये का उच्च स्तर बनाया था, जिसके बाद इसमें हल्का प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली है। इसके बावजूद स्टॉक अभी भी अपने प्रमुख मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है, जो इसकी मध्यम अवधि की मजबूती को दर्शाता है। पिछले कुछ महीनों में स्टॉक ने हायर हाई और हायर लो का पैटर्न बनाए रखा है, जिससे इसमें अपट्रेंड की संरचना बनी हुई है।

    ट्रेडिंग विश्लेषकों का मानना है कि नीचे की ओर 2650 से 2700 रुपये का जोन मजबूत सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। इस स्तर पर यदि स्टॉक आता है तो इसमें खरीदारी की दिलचस्पी बढ़ने की संभावना बनी रहती है। वहीं ऊपर की ओर 2828 रुपये का हालिया हाई महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है तो स्टॉक 2900 से 2928 रुपये के 52-सप्ताह उच्च स्तर की ओर बढ़ सकता है।

    बाजार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि क्रूड ऑयल में आई मौजूदा गिरावट का प्रभाव अब सीमित रह सकता है क्योंकि हालिया रैली के दौरान इस फैक्टर का काफी हद तक असर स्टॉक प्राइस में पहले ही दिख चुका है। ऐसे में आगे की चाल मुख्य रूप से बाजार की मांग, तिमाही नतीजों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी। अल्पकाल में स्टॉक में कंसोलिडेशन की स्थिति बनी रह सकती है, जबकि मध्यम अवधि में ट्रेंड अभी भी सकारात्मक माना जा रहा है।

    निवेशकों के लिए फिलहाल रणनीति यह मानी जा रही है कि मजबूत सपोर्ट जोन पर ही एंट्री की जाए और ऊपरी स्तरों पर सावधानी बरती जाए। पेंट सेक्टर में लागत घटने का लाभ लंबे समय में ग्रोथ सपोर्ट कर सकता है, लेकिन तात्कालिक तेजी की संभावना सीमित दायरे में रह सकती है।

  • वैश्विक तनाव घटा, घरेलू बाजार चमका; बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर, मिडकैप-स्मॉलकैप में भी जोरदार तेजी

    वैश्विक तनाव घटा, घरेलू बाजार चमका; बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर, मिडकैप-स्मॉलकैप में भी जोरदार तेजी

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र की मजबूती ने भारतीय पूंजी बाजार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तक पहुंचा दिया है। निवेशकों के बढ़ते भरोसे, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक बार फिर 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर गया। यह लगभग छह सप्ताह का सर्वोच्च स्तर माना जा रहा है और इससे बाजार की सकारात्मक धारणा को नई मजबूती मिली है।

    हाल के दिनों में वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में आए बदलावों का असर भारतीय बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। पश्चिम एशिया से जुड़े तनावों में नरमी और अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर सामने आए सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों की चिंताओं को कम किया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए राहत का माहौल बनाया है। इसका सीधा प्रभाव निवेशकों के विश्वास और बाजार की दिशा पर देखा गया।

    विश्लेषकों का मानना है कि तेल की कीमतों में कमी से महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही चालू खाते के घाटे पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। इन परिस्थितियों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल मजबूत हुआ है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान बाजार में आई तेजी ने कंपनियों के कुल मूल्यांकन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।

    बाजार की यह मजबूती केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही है। व्यापक बाजार में भी उत्साह दिखाई दिया है। मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप श्रेणी के शेयरों ने हाल के महीनों में बड़े शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में तेजी केवल चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेशकों की भागीदारी विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों में फैल रही है। व्यापक भागीदारी को किसी भी तेजी के टिकाऊ होने का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।

    हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बिकवाली का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है, फिर भी घरेलू निवेशकों की लगातार सक्रियता बाजार को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। व्यवस्थित निवेश योजनाओं और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने बाजार को स्थिरता देने में अहम भूमिका निभाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में विदेशी निवेश का प्रवाह भी सकारात्मक होता है तो बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।

    भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाएं भी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। संरचनात्मक सुधारों, मजबूत कॉरपोरेट बैलेंस शीट, बढ़ते पूंजीगत निवेश और बेहतर नकदी प्रवाह जैसे कारक कंपनियों की विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कॉरपोरेट क्षेत्र ने कर्ज के स्तर को नियंत्रित करने और परिचालन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है, जिसका लाभ अब बाजार मूल्यांकन में दिखाई दे रहा है।

    बुधवार के कारोबार में भी प्रमुख सूचकांकों ने सकारात्मक रुख बनाए रखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जिससे निवेशकों का उत्साह और मजबूत हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चरण में बैंकिंग, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    कुल मिलाकर, वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और घरेलू आर्थिक मजबूती के संयुक्त प्रभाव ने भारतीय शेयर बाजार को नई ऊर्जा प्रदान की है। बीएसई का बाजार पूंजीकरण 5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचना न केवल निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।

  • सुपरहिट गाने पर तमन्ना का बड़ा खुलासा, 'कावाला' में अपने प्रदर्शन को लेकर जताई कमी, बताया क्यों नहीं थीं पूरी तरह खुश

    सुपरहिट गाने पर तमन्ना का बड़ा खुलासा, 'कावाला' में अपने प्रदर्शन को लेकर जताई कमी, बताया क्यों नहीं थीं पूरी तरह खुश

    मुंबई । फिल्म जगत में अक्सर कलाकारों के काम को दर्शकों और समीक्षकों से भरपूर सराहना मिलती है, लेकिन कई बार स्वयं कलाकार अपने प्रदर्शन को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते। ऐसा ही कुछ अभिनेत्री Tamannaah Bhatia के साथ भी हुआ। साउथ सुपरस्टार Rajinikanth की फिल्म Jailer के बेहद लोकप्रिय गाने Kaavaalaa ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई, लेकिन अभिनेत्री का कहना है कि वह अपने प्रदर्शन को और बेहतर बना सकती थीं।

    हाल ही में एक बातचीत के दौरान तमन्ना ने अपने करियर, डांस और अभिनय को लेकर खुलकर विचार साझा किए। चर्चा के दौरान जब ‘कावाला’ गाने का जिक्र हुआ तो उन्होंने स्वीकार किया कि शूटिंग पूरी होने के बाद उन्हें महसूस हुआ था कि उनके प्रदर्शन में और सुधार की गुंजाइश थी। अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें लगा था कि वह गाने में कुछ और बेहतर कर सकती थीं और शायद अपनी प्रस्तुति को अगले स्तर तक ले जा सकती थीं।

    तमन्ना की इस आत्ममूल्यांकन वाली सोच को लेकर निर्देशक और कोरियोग्राफर Farah Khan ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तमन्ना हमेशा अपने काम को बेहतर बनाने की कोशिश करती हैं और यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। फराह के अनुसार, अभिनेत्री उन कलाकारों में शामिल हैं जो सफलता के बाद भी खुद को चुनौती देना नहीं छोड़ते और हर बार पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की कोशिश करते हैं।

    बातचीत के दौरान तमन्ना ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद को स्वाभाविक रूप से प्रशिक्षित डांसर नहीं मानतीं। यही कारण है कि किसी भी डांस नंबर को परफेक्ट बनाने के लिए उन्हें अतिरिक्त मेहनत और अभ्यास करना पड़ता है। उनका मानना है कि रिहर्सल किसी भी प्रस्तुति की सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है और तैयारी जितनी बेहतर होगी, प्रदर्शन भी उतना ही प्रभावशाली होगा।

    अभिनेत्री ने अपने एक अन्य चर्चित गीत Aaj Ki Raat का उदाहरण देते हुए बताया कि उसके लिए उन्होंने लगभग पंद्रह दिनों तक लगातार अभ्यास किया था। वह चाहती थीं कि गाने का हर स्टेप, हर मूवमेंट और हर भाव पूरी तरह समझने के बाद ही कैमरे के सामने प्रस्तुत किया जाए। उनके अनुसार तैयारी में लगाया गया समय कलाकार के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और स्क्रीन पर उसका असर साफ दिखाई देता है।

    ‘कावाला’ गाना रिलीज के बाद सोशल मीडिया से लेकर मनोरंजन जगत तक चर्चा का विषय बन गया था। इसके संगीत, नृत्य और प्रस्तुति को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। बावजूद इसके, तमन्ना का मानना है कि एक कलाकार के रूप में निरंतर सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है। यही सोच उन्हें हर नए प्रोजेक्ट में और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि किसी सफल प्रस्तुति के बाद भी स्वयं का निष्पक्ष मूल्यांकन करने की क्षमता ही कलाकार को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखती है। तमन्ना भाटिया का यह नजरिया भी उनके पेशेवर दृष्टिकोण और अपने काम के प्रति गंभीरता को दर्शाता है, जिसने उन्हें भारतीय मनोरंजन उद्योग की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल किया है।

  • जुबली गर्ल आशा पारेख के त्याग की अनकही दास्तान: शादीशुदा फिल्ममेकर से बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी ताउम्र क्यों कुंवारी रहीं दिग्गज अभिनेत्री

    जुबली गर्ल आशा पारेख के त्याग की अनकही दास्तान: शादीशुदा फिल्ममेकर से बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी ताउम्र क्यों कुंवारी रहीं दिग्गज अभिनेत्री

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में साठ और सत्तर के दशक में सिल्वर स्क्रीन
     राज करने वाली सदाबहार अभिनेत्री आशा पारेख की पेशेवर जिंदगी जितनी चकाचौंध और सफलताओं से भरी रही, उनकी निजी जिंदगी में उतनी ही खामोशी और त्याग की एक अनूठी कहानी छिपी रही। अपनी बेमिसाल खूबसूरती और बेहतरीन अभिनय के दम पर करोड़ों प्रशंसकों को अपना दीवाना बनाने वाली इस महान अदाकारा ने अपनी असल जिंदगी में प्यार की एक ऐसी गरिमापूर्ण मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा आज भी बॉलीवुड के गलियारों में बेहद सम्मान के साथ की जाती है। उन्होंने एक शादीशुदा मर्द से सच्ची मोहब्बत तो की, लेकिन समाज में ‘घर तोड़ने वाली’ कहलाने का कलंक झेलने की बजाय ताउम्र कुंवारी रहने का रास्ता चुना।

    इस निश्छल और मूक प्रेम कहानी की शुरुआत वर्ष उन्नीस सौ उनसठ में हुई थी, जब मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक नासिर हुसैन ने युवा आशा पारेख की प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें अपनी फिल्म ‘दिल देके देखो’ में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर एक बड़ा ब्रेक दिया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसके बाद इस जोड़ी ने एक के बाद एक कई शानदार और जुबली फिल्में सिनेमा जगत को दीं। सेट पर एक साथ लगातार काम करने के दौरान आशा पारेख कब अपने निर्देशक को दिल दे बैठीं, उन्हें खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ और दूसरी तरफ नासिर हुसैन के दिल में भी उनके लिए वही सम्मानजनक भावनाएं थीं।

    नासिर हुसैन के लिए अपने दिल में बेइंतहा मोहब्बत और कशिश होने के बावजूद आशा पारेख ने कभी भी अपने हक के लिए उनके सामने कोई जिद या शर्त नहीं रखी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह थी कि नासिर हुसैन पहले से ही शादीशुदा थे और बाल-बच्चों के साथ एक खुशहाल जीवन बिता रहे थे। अभिनेत्री के भीतर के नैतिक मूल्यों ने उन्हें कभी इस बात की इजाजत नहीं दी कि उनके व्यक्तिगत सुख या प्यार की खातिर किसी दूसरी औरत का सुहाग और एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखर जाए। उन्होंने अपने दिल की आवाज को दबाकर दूसरे के आशियाने की हिफाजत करना ज्यादा जरूरी समझा।

    दशकों तक इस खामोश दर्द और मोहब्बत को अपने सीने में दफन रखने के बाद, आशा पारेख ने वर्ष दो हजार सत्रह में प्रकाशित हुई अपनी आत्मकथा ‘द हिट गर्ल’ में इस राज से पर्दा उठाया था। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में स्वीकार किया था कि नासिर हुसैन ही उनकी जिंदगी के एकमात्र ऐसे पुरुष थे जिनसे उन्होंने बेहद शिद्दत से प्यार किया था। लेकिन किसी का घर उजाड़कर अपनी खुशियों का महल खड़ा करना उनके संस्कारों के खिलाफ था, यही वजह थी कि उन्होंने नासिर हुसैन पर शादी का दबाव बनाने की बजाय खुद अकेले जिंदगी काटने का एक बेहद कठिन और साहसिक निर्णय लिया।

    अपनी पूरी जिंदगी तन्हाई और अकेलेपन में गुजारने के बाद भी इस उम्र में पद्मश्री और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अभिनेत्री के मन में अपने अतीत के फैसलों को लेकर कोई मलाल, कड़वाहट या शिकायत नहीं है। उनका हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि किसी दूसरे को दुख देकर हासिल की गई खुशी कभी भी स्थायी और सच्ची नहीं हो सकती। आज बयासी वर्ष से अधिक की उम्र पार कर चुकीं आशा पारेख अपने इस फैसले पर अडिग रहते हुए पूरे आत्मसम्मान, सुकून और गरिमा के साथ अपनी एकाकी जिंदगी का आनंद ले रही हैं, जो आज के दौर के रिश्तों के लिए एक बहुत बड़ी नजीर है।

  • सिनेमाई इतिहास का वो विवादित वाकया: जब फिल्म 'प्रेम धर्म' के इंटीमेट सीन के दौरान बेकाबू हुए विनोद खन्ना, गुस्से में डिंपल कपाड़िया ने उठाया था बड़ा कदम

    सिनेमाई इतिहास का वो विवादित वाकया: जब फिल्म 'प्रेम धर्म' के इंटीमेट सीन के दौरान बेकाबू हुए विनोद खन्ना, गुस्से में डिंपल कपाड़िया ने उठाया था बड़ा कदम


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं जो फिल्मों की सफलता से इतर सेट पर घटित विवादित वाकयों के लिए हमेशा चर्चा में रहे। अस्सी के दशक में भी एक ऐसा ही वाकया सामने आया था, जिसने तत्कालीन फिल्म जगत में भारी सनसनी मचा दी थी। यह पूरा मामला हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर के सुपरस्टार विनोद खन्ना और दिग्गज अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया से जुड़ा हुआ है। वर्ष उन्नीस सौ अस्सी में आई फिल्म ‘प्रेम धर्म’ की शूटिंग के दौरान एक बेहद संवेदनशील और अंतरंग दृश्य को फिल्माते समय ऐसा घटनाक्रम हुआ कि सेट पर मौजूद हर व्यक्ति हैरान रह गया।

    इस बहुचर्चित फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्मकार महेश भट्ट कर रहे थे, जो अपनी फिल्मों में दृश्यों को बेहद यथार्थवादी और भावुक बनाने के लिए जाने जाते हैं। फिल्म के एक खास सीक्वेंस के लिए विनोद खन्ना और डिंपल कपाड़िया के बीच एक बेहद इंटीमेट और इमोशनल सीन शूट किया जाना तय हुआ था। इस दृश्य को अधिक वास्तविक रूप देने और कलाकारों की झिझक दूर करने के उद्देश्य से निर्देशक महेश भट्ट ने सेट की सभी लाइटों को काफी धीमा करवा दिया था और मुख्य कैमरा टीम को छोड़कर बाकी पूरी यूनिट को भी उस स्थान से थोड़ा दूर रहने के निर्देश दिए गए थे।

    जैसे ही कैमरे ने रोल करना शुरू किया, विनोद खन्ना ने स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार अपनी सह-कलाकार डिंपल कपाड़िया को चूमना शुरू कर दिया। दृश्य के पूरा होते ही निर्देशक महेश भट्ट ने लाउडस्पीकर पर ‘कट’ की घोषणा की, लेकिन विनोद खन्ना दृश्य की भावुकता और तीव्रता में इस कदर खो चुके थे कि उन्होंने निर्देशक की आवाज नहीं सुनी। ‘कट’ बोले जाने के बाद भी वे लगातार डिंपल कपाड़िया को किस करते रहे, जिससे सेट पर असहज स्थिति पैदा हो गई। डिंपल कपाड़िया को शुरुआत में समझ ही नहीं आया कि उनके सह-कलाकार आखिर क्या कर रहे हैं।

    माहौल को अचानक गंभीर और अजीब होते देख निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी जगह से उठकर बेहद जोर-जोर से ‘कट’ बोलना शुरू किया, जिसके बाद कहीं जाकर विनोद खन्ना होश में आए और पीछे हटे। इस अप्रत्याशित और अचानक हुई घटना से युवा अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया पूरी तरह स्तब्ध और गहरे सदमे में आ गईं। उन्हें विनोद खन्ना के इस अनपेक्षित व्यवहार पर भारी गुस्सा भी आया और वे तुरंत सेट से भागकर सीधे अपने मेकअप रूम की तरफ चली गईं।

    अपने स्वाभिमान और गरिमा को ठेस पहुंचने से आहत अभिनेत्री ने मेकअप रूम के भीतर पहुंचकर खुद को अंदर से पूरी तरह बंद कर लिया और बाहर आने से साफ मना कर दिया। सेट पर पैदा हुए इस गंभीर तनाव को देखते हुए निर्देशक महेश भट्ट ने तुरंत स्थिति को संभाला और वे स्वयं डिंपल कपाड़िया के कमरे के बाहर पहुंचे। उन्होंने अभिनेत्री से इस पूरी घटना के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगी और उन्हें आश्वस्त किया कि यह केवल एक भूल थी। दूसरी तरफ, सुपरस्टार विनोद खन्ना भी अपनी इस अनियंत्रित हरकत के बाद बेहद शर्मिंदा महसूस कर रहे थे।

    बॉलीवुड के गलियारों में आज भी इस किस्से को संवेदनशीलता के साथ याद किया जाता है, जो यह दर्शाता है कि चकाचौंध भरी फिल्मों के निर्माण के दौरान कई बार कलाकारों के लिए स्थितियां कितनी असहज और चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। हालांकि, बाद में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे सुलझा लिया गया था, लेकिन सेंसर बोर्ड की कैंची और सेट पर मचे इस बवाल के कारण यह फिल्म और इससे जुड़ा यह विवाद हमेशा-कहमेशा के लिए फिल्मी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।

  • भाई का आरोप- काम की कमी और मानसिक अपमान झेल रही थीं अभिनेत्री, सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ा आखिरी पोस्ट

    भाई का आरोप- काम की कमी और मानसिक अपमान झेल रही थीं अभिनेत्री, सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ा आखिरी पोस्ट

    नई दिल्ली । टेलीविजन मनोरंजन उद्योग से आई एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर ने पूरी इंडस्ट्री सहित प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। कई लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेर चुकीं बाईस वर्षीय उभरती हुई अभिनेत्री संचिता उगले के अचानक निधन से एक बार फिर चकाचौंध भरी इस दुनिया के पीछे छिपे मानसिक तनाव और दबाव की कड़वी सच्चाई सामने आ गई है। शुरुआती पुलिस जांच में इस घटना को कथित तौर पर आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, जिसकी बारीकी से तफ्तीश की जा रही है।

    अभिनेत्री के असमय चले जाने के बाद उनके परिजनों और करीबी सहयोगियों की तरफ से आ रहे बयानों ने इस मामले में दुख और आक्रोश को और बढ़ा दिया है। संचिता की सह-कलाकार और बेहद करीबी दोस्त मेघा शर्मा ने मीडिया से बातचीत में खुलासा किया कि अभिनेत्री पिछले कुछ महीनों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और मानसिक अवसाद के दौर से गुजर रही थीं। जनवरी महीने से ही उनका नियमित इलाज चल रहा था और वे अपनी कुछ निजी उलझनों को लेकर लगातार मानसिक रूप से परेशान चल रही थीं।

    करीबी सूत्रों के मुताबिक, संचिता अक्सर जिंदगी से हार मानने और हताशा से भरी बातें किया करती थीं, जिसके बाद उनके दोस्तों और परिजनों ने हमेशा उन्हें ढांढस बंधाया और सकारात्मक रहने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, बीते कुछ दिनों से उनका फोन लगातार बंद आ रहा था, जिसने उनके करीबियों की चिंता बढ़ा दी थी। अपनी मौत से करीब दस दिन पहले वे एक ऑडिशन के सिलसिले में अपनी दोस्त के साथ गई थीं, जहां वे अपने भविष्य और अभिनय करियर को लेकर काफी आश्वस्त और सकारात्मक नजर आ रही थीं।

    दूसरी तरफ, इस संवेदनशील मामले में पुलिसिया कार्रवाई के बीच संचिता के भाई अविनाश उगले ने मनोरंजन जगत की कार्यशैली पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए हैं। उनके भाई का कहना है कि ग्लैमर की इस दुनिया में लगातार मिलने वाला मानसिक दबाव, काम की अत्यधिक कमी और कार्यस्थल पर वरिष्ठों द्वारा कथित तौर पर किया जाने वाला अपमान उनकी बहन की मानसिक स्थिति बिगड़ने की मुख्य वजह बना। वह लंबे समय से इस बेइज्जती और उपेक्षा को चुपचाप सहन कर रही थीं, जिससे उनका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट चुका था।

    मृतक अभिनेत्री के भाई ने इस पूरे घटनाक्रम का संबंध दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की त्रासदी से भी जोड़ा है। उन्होंने बताया कि संचिता का आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट भी सुशांत सिंह राजपूत को ही समर्पित था, जिससे यह साफ झलकता है कि वे किस कदर अंदरूनी तौर पर अकेलेपन और मानसिक तनाव से जूझ रही थीं। गौरतलब है कि चौदह जून की शाम को संचिता अपने आवास पर अचेत अवस्था में पाई गई थीं, जिसके बाद अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

    टेलीविजन शोज के अलावा हाल ही में एक बड़ी फिल्म का हिस्सा रहीं संचिता उगले के इस कदम ने फिल्म सिटी के भीतर कलाकारों की मानसिक सुरक्षा पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। पुलिस प्रशासन ने इस मामले में अप्राकृतिक मृत्यु का मुकदमा दर्ज कर शव को अंत्यपरीक्षण के लिए भेज दिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने और अभिनेत्री के कॉल डिटेल्स व सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहन पड़ताल के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पूरी तरह खुलासा हो सकेगा।

  • परदे पर शराबी का अमर अभिनय करने वाले केष्टो मुखर्जी की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते वक्त सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

    परदे पर शराबी का अमर अभिनय करने वाले केष्टो मुखर्जी की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते वक्त सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के सुनहरे इतिहास में कई ऐसे कलाकारों ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है, जिनकी रील और रीयल लाइफ में जमीन-आसमान का अंतर था। एक ऐसे ही बेमिसाल अभिनेता थे केष्टो मुखर्जी, जिन्होंने परदे पर हमेशा एक पक्के शराबी का किरदार निभाकर दर्शकों को लोटपोट किया, लेकिन असल जिंदगी में उन्होंने कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया। अपनी खास कॉमिक टाइमिंग, अनूठी शारीरिक भाषा और लड़खड़ाती जुबान से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले केष्टो मुखर्जी ने अपने करियर में ९० से भी अधिक फिल्मों में काम किया, मगर उनका यह मुकाम कड़े संघर्षों और बेहद अजीबो-गरीब दौर से गुजरकर हासिल हुआ था। कोलकाता के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे केष्टो को बचपन से ही अभिनय का गहरा शौक था, जिसके चलते उन्होंने शुरुआती दिनों में नुक्कड़ नाटकों और रंगमंच का रुख किया था।

    कोलकाता के रंगमंच पर सक्रियता के दौरान मशहूर फिल्मकार ऋत्विक घटक की पारखी नजर उन पर पड़ी। घटक ने केष्टो की असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें अपनी बांग्ला फिल्म ‘नागरिक’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका दे दी। किस्मत का खेल देखिए कि यह फिल्म साल १९५२ में बनकर पूरी हो चुकी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे सिनेमाघरों तक पहुंचने में पूरे २५ साल लग गए। जब यह फिल्म १९७७ में रिलीज हुई, तब तक ऋत्विक घटक इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। अपने गुरु और मार्गदर्शक के निधन के गहरे सदमे के कारण केष्टो मुखर्जी ने इस फिल्म को अपने जीवन में कभी नहीं देखा। कोलकाता में कई बंगाली फिल्मों का हिस्सा रहने के बावजूद केष्टो को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था, जिससे न तो उनके भीतर की अभिनय की भूख मिट रही थी और न ही परिवार का गुजारा हो पा रहा था।

    आर्थिक तंगहाली से जूझते हुए केष्टो मुखर्जी ने एक दिन आंखों में बड़े सपने लिए मायानगरी बॉम्बे का रुख किया। बॉम्बे आकर उन्होंने नए सिरे से काम की तलाश शुरू की और किसी तरह दिग्गज निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से संपर्क साधे रखा। ऋषिकेश मुखर्जी ने उनकी अभिनय क्षमता का सम्मान करते हुए अपनी फिल्म ‘मुसाफिर’ में उन्हें एक स्ट्रीट डांसर का बेहद छोटा सा रोल दिया। इस छोटे से ब्रेक के बाद भी बॉम्बे जैसे बड़े शहर में खुद को स्थापित करने के लिए उनका संघर्ष थमा नहीं था। इसी जद्दोजहद के बीच एक दिन वह महान फिल्मकार बिमल रॉय से मिलने उनकी फिल्म के सेट पर पहुंच गए। बिमल रॉय उस समय शूटिंग के बेहद व्यस्त शेड्यूल में व्यस्त थे, इसलिए केष्टो वहीं एक कोने में बैठकर घंटों तक उनके फ्री होने का इंतजार करने लगे।

    काफी देर बाद जब बिमल रॉय फुर्सत में आए और केष्टो उनके सामने पहुंचे, तो उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि फिलहाल उनके पास कोई काम नहीं है और वह बाद में आएं। इस साफ इनकार के बाद भी केष्टो वहां से हिले नहीं, जिससे चिढ़कर बिमल रॉय ने उनसे पूछ लिया कि क्या तुम भौंक सकते हो, क्योंकि उन्हें अपनी फिल्म के एक दृश्य के लिए कुत्ते की आवाज की जरूरत थी। आम तौर पर ऐसा तीखा सवाल सुनकर कोई भी स्वाभिमानी कलाकार वहां से चला जाता, लेकिन केष्टो ने धैर्य रखा और तुरंत पूरी शिद्दत के साथ सेट पर ही कुत्ते की आवाज निकालने लगे। उनकी इस अप्रत्याशित हरकत और अभिनय के प्रति गजब का समर्पण देखकर बिमल रॉय पूरी तरह हैरान रह गए और उन्होंने तुरंत केष्टो को अपनी फिल्म के लिए साइन कर लिया।

    इस ऐतिहासिक घटना के बाद केष्टो मुखर्जी की बॉलीवुड में राह आसान हो गई और उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद हास्य कलाकारों में शुमार हो गए, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। महज ५६ वर्ष की उम्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने उनके इस सुनहरे सफर पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया। वह मुंबई के समीप स्थित एक प्रसिद्ध गणपति मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान अगले ही दिन दिल का दौरा पड़ने के कारण इस महान कलाकार का असमय निधन हो गया।

  • दो दिनों की तेजी के बाद सोने-चांदी में बड़ी मुनाफावसूली, घरेलू और वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ा, निवेशकों की सतर्कता से कीमतों में आई तेज गिरावट

    दो दिनों की तेजी के बाद सोने-चांदी में बड़ी मुनाफावसूली, घरेलू और वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ा, निवेशकों की सतर्कता से कीमतों में आई तेज गिरावट

    नई दिल्ली । लगातार दो कारोबारी सत्रों तक मजबूत बढ़त दर्ज करने के बाद मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार से लेकर हाजिर बाजार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में कीमतों में आई तेज बढ़त के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिसके चलते दोनों धातुओं के भाव कमजोर पड़े।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने के अगस्त 2026 वायदा अनुबंध की शुरुआत मामूली कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में स्थिरता दिखाई देने के बावजूद बाद के सत्रों में दबाव बढ़ता गया और कीमतें लाल निशान में कारोबार करती रहीं। दोपहर तक सोने के भाव में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे हालिया तेजी का कुछ हिस्सा कम हो गया। कारोबार के दौरान सोने ने ऊपरी और निचले दोनों स्तरों को छुआ, जो बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।

    चांदी के बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। जुलाई वायदा अनुबंध में शुरुआत से ही कमजोरी दिखाई दी और दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद लाभ सुरक्षित करने को प्राथमिकता दी। कारोबार के दौरान चांदी के भाव में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव भी दर्ज किया गया।

    हाजिर बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतों में नरमी देखने को मिली। 24 कैरेट सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम आधार पर महत्वपूर्ण कमी दर्ज की गई। इसी प्रकार 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव भी नीचे आए। ज्वेलरी कारोबार और खुदरा बाजार पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि कीमतों में गिरावट से उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती है।

    चांदी के हाजिर भाव में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रति किलोग्राम के आधार पर कीमतों में हजारों रुपये की कमी देखने को मिली, जिससे औद्योगिक और निवेश दोनों श्रेणियों के खरीदारों की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। चांदी का उपयोग निवेश के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों में भी व्यापक रूप से किया जाता है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का प्रभाव कई क्षेत्रों तक पहुंचता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में कमजोरी का असर भी घरेलू कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी दोनों के दाम दबाव में रहे, जिससे भारतीय बाजार में भी नकारात्मक संकेत मिले। वैश्विक निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश साधनों में नई रणनीति अपनाने और हालिया तेजी के बाद लाभ बुक करने की प्रवृत्ति ने कीमतों को प्रभावित किया है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि कीमती धातुओं में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशक अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे माहौल में सोने और चांदी की कीमतें आने वाले दिनों में नई दिशा तय कर सकती हैं। फिलहाल मंगलवार का कारोबारी सत्र यह संकेत देता है कि हालिया रिकॉर्ड स्तरों के बाद बाजार में संतुलन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और निवेशक सावधानीपूर्वक अपने निवेश निर्णय ले रहे हैं।

  • ‘रेडी वॉटर’ से ‘सरबरी’ तक: बोलचाल की भाषा में छिपी सृजनात्मकता को अमिताभ बच्चन ने बताया भारतीय समाज की बड़ी ताकत

    ‘रेडी वॉटर’ से ‘सरबरी’ तक: बोलचाल की भाषा में छिपी सृजनात्मकता को अमिताभ बच्चन ने बताया भारतीय समाज की बड़ी ताकत

    नई दिल्ली । भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सोच, संस्कृति और रचनात्मकता का प्रतिबिंब भी होती है। यही संदेश वरिष्ठ अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने हालिया ब्लॉग के माध्यम से साझा किया है। उन्होंने आम लोगों की बोलचाल में दिखाई देने वाली भाषाई सृजनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि लोग अक्सर विदेशी शब्दों को अपनी सुविधा, समझ और स्थानीय प्रभाव के अनुरूप नया रूप दे देते हैं, जिससे वे शब्द और भी आत्मीय तथा रोचक बन जाते हैं।

    अमिताभ बच्चन ने अपने प्रशंसकों को संबोधित करते हुए ब्लॉग की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्लॉग लिखने में हुई देरी का कारण आलस्य नहीं, बल्कि कार्य व्यस्तता थी। उन्होंने कहा कि दिनभर के कार्यों के बाद अपने प्रशंसकों से संवाद करना उनके लिए एक विशेष अनुभव होता है और यही उनके दैनिक कार्यों की पूर्णता का एहसास भी कराता है।

    अपने विचारों को समझाने के लिए उन्होंने अपने आवास ‘जलसा’ से जुड़ा एक रोचक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके यहां काम करने वाले एक माली को अंग्रेजी शब्दों का उच्चारण करने में कठिनाई होती थी। विशेष रूप से एक शब्द को वह सही ढंग से नहीं बोल पाता था, इसलिए उसने उसे अपनी सुविधा के अनुसार बदलकर नया रूप दे दिया। अभिनेता के अनुसार, यह नया उच्चारण इतना सहज और आत्मीय लगा कि कई बार वह मूल शब्द की तुलना में अधिक प्रभावशाली प्रतीत हुआ।

    उन्होंने एक अन्य उदाहरण का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ लोग ‘रेडिएटर’ शब्द को अपने तरीके से ‘रेडी वॉटर’ कहने लगे। इसके पीछे उनका अपना तर्क भी था कि जिस उपकरण में पानी भरा जाता है, उसके लिए ऐसा नाम अधिक उपयुक्त लगता है। अमिताभ बच्चन ने कहा कि यद्यपि यह तकनीकी रूप से सही शब्द नहीं है, लेकिन यह लोगों की सोचने और भाषा को अपने अनुरूप ढालने की क्षमता को दर्शाता है।

    अभिनेता का मानना है कि भाषा का वास्तविक सौंदर्य उसकी लचीलापन और स्वीकार्यता में निहित होता है। समाज के विभिन्न वर्ग, क्षेत्र और भाषाई पृष्ठभूमि वाले लोग जब किसी शब्द को अपनाते हैं, तो उसमें अपनी संस्कृति और अनुभवों का रंग भी जोड़ देते हैं। यही प्रक्रिया भाषा को स्थिर नहीं रहने देती, बल्कि उसे समय के साथ विकसित और समृद्ध बनाती है।

    उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए किसी विदेशी भाषा या उसके जटिल शब्दों का शुद्ध उच्चारण करना आसान नहीं होता। ऐसे में लोग अपनी समझ और सुविधा के अनुसार नए शब्द गढ़ लेते हैं। यह केवल उच्चारण की त्रुटि नहीं, बल्कि भाषा के प्रति मानवीय अनुकूलन क्षमता का उदाहरण है। इसी वजह से ऐसे शब्द लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों और दैनिक जीवन का हिस्सा बने रहते हैं।

    अमिताभ बच्चन ने यह भी कहा कि भाषा की यही सहजता उसे आम लोगों से जोड़ती है। जब कोई शब्द स्थानीय संदर्भों और बोलचाल में ढल जाता है तो वह केवल शब्द नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक अनुभव का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने अपने प्रशंसकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से मिलने वाला उनका स्नेह और समर्थन उनके जीवन को निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है।

    भाषा और समाज के संबंध पर व्यक्त किए गए उनके विचार यह संकेत देते हैं कि रचनात्मकता केवल साहित्य या कला तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य बातचीत और दैनिक जीवन में भी उतनी ही प्रभावशाली रूप से दिखाई देती है। यही विशेषता भाषा को जीवंत, प्रासंगिक और समय के साथ विकसित होने योग्य बनाती है।