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  • शिवसेना (यूबीटी) में सब कुछ ठीक है या नहीं? सांसदों की अहम बैठक में अनुपस्थित नेताओं ने बढ़ाया सस्पेंस, उद्धव ने दिखाई एकजुटता की कोशिश

    शिवसेना (यूबीटी) में सब कुछ ठीक है या नहीं? सांसदों की अहम बैठक में अनुपस्थित नेताओं ने बढ़ाया सस्पेंस, उद्धव ने दिखाई एकजुटता की कोशिश

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के संभावित दल-बदल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। मुंबई स्थित मातोश्री में आयोजित इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से लगातार ऐसी अटकलें सामने आ रही थीं कि पार्टी के कई सांसद दूसरे खेमे के संपर्क में हैं और राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

    बैठक ऐसे समय आयोजित की गई जब राज्य की राजनीति में तथाकथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक गलियारों में यह दावा किया जा रहा था कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और वे किसी नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में हैं। इन अटकलों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी थी, जिसके बाद सांसदों को एक मंच पर लाने की पहल की गई।

    मातोश्री में आयोजित बैठक में पार्टी के अधिकांश सांसद शामिल हुए और नेतृत्व के प्रति समर्थन का संकेत दिया। मुंबई दक्षिण से सांसद अरविंद सावंत, मुंबई दक्षिण मध्य से अनिल देसाई, नासिक से राजाभाऊ वाजे तथा मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दिना पाटिल ने बैठक में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया। पार्टी नेतृत्व ने इस बैठक के माध्यम से संगठनात्मक एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया।

    बैठक में कुछ सांसद ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े। यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख और हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने डिजिटल माध्यम के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों सांसदों ने बैठक में भाग लेकर नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट की।

    हालांकि राजनीतिक चर्चा का केंद्र उन सांसदों की अनुपस्थिति रही जो बैठक में शामिल नहीं हो सके। परभणी से सांसद संजय जाधव और शिर्डी से सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे बैठक में मौजूद नहीं थे। इसके अलावा धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर भी बैठक में शामिल नहीं हुए। हालांकि पार्टी सूत्रों के अनुसार निंबालकर ने पहले ही अपनी अनुपस्थिति की जानकारी दे दी थी, क्योंकि उनके पुत्र का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

    इन अनुपस्थितियों ने राजनीतिक अटकलों को नया बल दे दिया है। पिछले कुछ समय से यह चर्चा लगातार जारी है कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद दूसरे राजनीतिक खेमों के संपर्क में हैं। विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में संभावित शामिल होने को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि अब तक किसी भी सांसद की ओर से सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी संभावना की पुष्टि नहीं की गई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैठक का उद्देश्य केवल सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करना नहीं था, बल्कि पार्टी के भीतर विश्वास और संवाद को मजबूत करना भी था। लोकसभा चुनाव के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों और राज्य में गठबंधन राजनीति की नई संभावनाओं के बीच शिवसेना (यूबीटी) अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

    फिलहाल बैठक में शामिल और अनुपस्थित सांसदों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। आने वाले दिनों में इन अटकलों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। हालांकि उद्धव ठाकरे की यह पहल इस बात का संकेत जरूर देती है कि पार्टी नेतृत्व किसी भी संभावित राजनीतिक चुनौती से निपटने के लिए सतर्क और सक्रिय नजर आ रहा है।

  • शेयर बाजार की तेजी से निवेशकों की बल्ले-बल्ले, टॉप-10 कंपनियों की वैल्यू ₹1.90 लाख करोड़ बढ़ी, ICICI बैंक बना सबसे बड़ा लाभार्थी

    शेयर बाजार की तेजी से निवेशकों की बल्ले-बल्ले, टॉप-10 कंपनियों की वैल्यू ₹1.90 लाख करोड़ बढ़ी, ICICI बैंक बना सबसे बड़ा लाभार्थी

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह दर्ज की गई मजबूत तेजी का सीधा फायदा देश की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों को मिला। बाजार में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, वैश्विक माहौल में सुधार और वित्तीय क्षेत्र में मजबूत खरीदारी के चलते देश की शीर्ष 10 कंपनियों में से 8 के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों ने बाजार की तेजी का नेतृत्व किया, जबकि कुछ चुनिंदा कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट भी देखने को मिली।

    सप्ताह के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,284.61 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी मजबूती दिखाते हुए 256.2 अंक ऊपर चढ़ा। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि की और बड़ी कंपनियों के मूल्यांकन को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में मदद की।

    सबसे अधिक लाभ ICICI बैंक को हुआ, जिसका बाजार पूंजीकरण 56,223 करोड़ रुपये बढ़कर 9.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। बैंकिंग क्षेत्र में मजबूत निवेश और वित्तीय शेयरों में बढ़ती मांग के कारण कंपनी का मूल्यांकन तेजी से बढ़ा। इसके अलावा HDFC बैंक ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए अपने मार्केट कैप में 38,571 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की। बैंक का कुल मूल्यांकन बढ़कर लगभग 11.89 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक SBI ने भी शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी के बाजार पूंजीकरण में 36,137 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और इसका कुल मूल्यांकन 9.38 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वित्तीय क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास का लाभ इन प्रमुख बैंकिंग संस्थानों को सबसे अधिक मिला।

    वित्तीय सेवाओं की प्रमुख कंपनी बजाज फाइनेंस के बाजार पूंजीकरण में भी 18,366 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए अपने मूल्यांकन में 14,380 करोड़ रुपये का इजाफा किया। वहीं इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो तथा उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र की अग्रणी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार पूंजीकरण में भी वृद्धि हुई। हालांकि अन्य कंपनियों की तुलना में यह बढ़त सीमित रही, फिर भी कंपनी 17.49 लाख करोड़ रुपये से अधिक के मूल्यांकन के साथ देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बनी रही।

    दूसरी ओर, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को इस सप्ताह नुकसान का सामना करना पड़ा। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 13,296 करोड़ रुपये से अधिक घट गया। इसी तरह भारतीय जीवन बीमा निगम के मूल्यांकन में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई। इन दोनों कंपनियों को छोड़कर बाकी सभी शीर्ष कंपनियों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक माहौल में सुधार, विदेशी निवेशकों की बढ़ती रुचि और वित्तीय स्थिरता से जुड़े कदमों ने भारतीय बाजारों को मजबूती प्रदान की है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों ने भी निवेशकों के विश्वास को मजबूत किया है। यदि यह सकारात्मक माहौल आगे भी बना रहता है तो आने वाले सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार और प्रमुख कंपनियों के मूल्यांकन में नई बढ़त देखने को मिल सकती है।

  • उदय शेट्टी और मजनू भाई के ऑरा पर नाना पाटेकर के बयान का सच; अक्षय कुमार की बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्म को लेकर हुआ बड़ा खुलासा

    उदय शेट्टी और मजनू भाई के ऑरा पर नाना पाटेकर के बयान का सच; अक्षय कुमार की बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्म को लेकर हुआ बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ का आधिकारिक ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म की विशाल स्टारकास्ट के बीच दर्शकों और प्रशंसकों ने पहले दो भागों के मुख्य आकर्षण रहे उदय शेट्टी यानी नाना पाटेकर और मजनू भाई यानी अनिल कपूर को काफी मिस किया। इसी बीच इंटरनेट पर एक स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल होने लगा, जिसमें दावा किया गया कि नाना पाटेकर ने इस तीसरी किस्त में अपनी अनुपस्थिति को लेकर फिल्म मेकर्स पर तीखा तंज कसा है। वायरल पोस्ट में लिखा था कि आप 25 एक्टर्स को तो फिल्म में ले लोगे, लेकिन उदय शेट्टी और मजनू भाई जैसा ऑरा कहां से लाओगे। इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई, लेकिन अब इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ चुकी है।

    तथ्यों की जांच करने पर पता चला है कि इंटरनेट पर घूम रहा यह विवादित पोस्ट पूरी तरह से फर्जी और एआई जनरेटेड है। अभिनेता नाना पाटेकर ने ‘वेलकम टू द जंगल’ या उसकी स्टारकास्ट को लेकर ऐसा कोई भी कमेंट या पोस्ट अपने किसी भी सोशल मीडिया हैंडल पर साझा नहीं किया है। तकनीकी उपकरणों की मदद से तैयार किए गए इस झूठे स्क्रीनशॉट ने कुछ ही घंटों में प्रशंसकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी, जिसे अब पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान खुद मुख्य अभिनेता अक्षय कुमार ने इस विषय पर बात की और स्वीकार किया कि टीम ने नाना पाटेकर और अनिल कपूर को बहुत मिस किया। अक्षय कुमार ने स्पष्ट किया कि इस बार स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार कहानी में बदलाव किए गए हैं।

    फिल्म की नई पटकथा के अनुसार, इस बार उदय और मजनू भाई के भाइयों की एंट्री कहानी में दिखाई गई है। इन नए किरदारों को बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी और अरशद वारसी निभा रहे हैं। सुनील शेट्टी जहां उदय के भाई की भूमिका में नजर आएंगे, वहीं अरशद वारसी ने मजनू के भाई का किरदार निभाया है। फिल्म की विशाल स्टारकास्ट में सुनील शेट्टी, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, अरशद वारसी, जैकी श्रॉफ, परेश रावल, रवीना टंडन, लारा दत्ता, फरीदा जलाल, जॉनी लीवर, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर, राजपाल यादव और कृष्णा अभिषेक जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं।

    रिलीज हुए ट्रेलर की कहानी की बात करें तो इसमें दिखाया गया है कि एक फ्लॉप एक्टर अपने डूबते करियर को बचाने के लिए एक सुपरहिट एक्ट्रेस के साथ फिल्म साइन करता है। इस काल्पनिक फिल्म की पूरी कास्ट और क्रू शूटिंग के सिलसिले में एक सुदूर गांव में जाती है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब गांव वाले इस फिल्मी क्रू को सचमुच की भारतीय सेना समझ बैठते हैं और उनसे गुंडा गैंग के लीडर जैकी श्रॉफ से अपनी सुरक्षा करने की गुहार लगाते हैं। ट्रेलर के अनुसार, इस नकली फिल्म का बजट 2000 करोड़ रुपये दिखाया गया है, जो पूरी कहानी में हास्य और भ्रम की स्थितियां पैदा करता है।

    यह फिल्म सुपरहिट फ्रेंचाइजी ‘वेलकम’ का तीसरा पार्ट है। इस सिलसिले की पहली फिल्म साल 2007 में आई थी, जिसमें अक्षय कुमार, कटरीना कैफ, नाना पाटेकर, अनिल कपूर और परेश रावल मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद साल 2015 में इसका दूसरा भाग ‘वेलकम बैक’ रिलीज हुआ, जिसमें जॉन अब्राहम और श्रुति हासन के साथ नाना पाटेकर और अनिल कपूर की जोड़ी बरकरार रही थी। अब इस फ्रेंचाइजी का यह तीसरा भाग नए किरदारों और नए ट्विस्ट के साथ 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके प्रति दर्शकों में भारी उत्सुकता बनी हुई है।

  • ‘ऐसा लगा जैसे फिर से 26/11 देख रहे हों’: कंगना रनौत की ‘भारत भाग्य विधाता’ को दर्शकों ने बताया दिल छू लेने वाली फिल्म

    ‘ऐसा लगा जैसे फिर से 26/11 देख रहे हों’: कंगना रनौत की ‘भारत भाग्य विधाता’ को दर्शकों ने बताया दिल छू लेने वाली फिल्म

    नई दिल्ली । 26 नवंबर 2008 की भयावह रात को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ ने रिलीज के साथ ही दर्शकों के बीच गहरी चर्चा छेड़ दी है। कंगना रनौत की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म केवल एक आतंकी हमले की कहानी नहीं कहती, बल्कि उन अनदेखे और अक्सर उपेक्षित नायकों को सामने लाती है, जिन्होंने संकट की घड़ी में असाधारण साहस का परिचय दिया था। फिल्म देखने के बाद बड़ी संख्या में दर्शकों ने इसकी कहानी, भावनात्मक प्रभाव और कलाकारों के अभिनय की सराहना की है।

    फिल्म का केंद्र बिंदु कामा अस्पताल की एक नर्स है, जो 26/11 हमलों के दौरान अचानक ऐसी परिस्थिति में पहुंच जाती है, जहां हर निर्णय जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन जाता है। कंगना रनौत ने इस किरदार को संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ निभाया है। दर्शकों का मानना है कि उनका अभिनय कहानी की भावनात्मक गहराई को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।

    सिनेमाघरों से बाहर निकलने वाले कई दर्शकों ने कहा कि फिल्म देखते समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे उस दौर की घटनाओं को दोबारा जी रहे हों। अस्पताल के भीतर फैला तनाव, मरीजों की सुरक्षा की चिंता और लगातार मंडराता खतरा दर्शकों को कहानी से जोड़े रखता है। फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता यह बताई जा रही है कि इसमें आतंकवादी हमलों को नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के नजरिए से प्रस्तुत किया गया है, जो हिंदी सिनेमा में अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है।

    दर्शकों के एक वर्ग ने फिल्म के उस संदेश की भी सराहना की, जिसमें समाज में सामान्य कर्मचारियों की भूमिका और महत्व को रेखांकित किया गया है। फिल्म यह दिखाने का प्रयास करती है कि संकट के समय केवल नेतृत्वकारी पदों पर बैठे लोग ही नहीं, बल्कि अस्पतालों, आपात सेवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े साधारण कर्मचारी भी समाज की सुरक्षा और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

    कई दर्शकों ने विशेष रूप से नर्सिंग पेशे के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उनका कहना था कि फिल्म उन परिस्थितियों को सामने लाती है, जिनका सामना स्वास्थ्यकर्मी अक्सर चुपचाप करते हैं। मरीजों की देखभाल, आपातकालीन स्थितियों में त्वरित निर्णय और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण को फिल्म में प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है। यही कारण है कि फिल्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर करती है।

    हालांकि कुछ दर्शकों ने यह भी माना कि 26/11 हमलों से जुड़े कुछ दृश्यों को और अधिक वास्तविकता के साथ प्रस्तुत किया जा सकता था। वहीं कुछ लोगों ने फिल्म के अंतिम हिस्से को अपेक्षाकृत कमजोर बताया। इसके बावजूद अधिकांश प्रतिक्रियाएं सकारात्मक रही हैं और दर्शकों ने फिल्म की गंभीर विषयवस्तु तथा प्रस्तुति की प्रशंसा की है।

    फिल्म का पहला भाग अस्पताल की सामान्य दिनचर्या, नर्सों के संघर्ष और उनके व्यक्तिगत जीवन की झलक प्रस्तुत करता है। इसके बाद कहानी धीरे-धीरे उस भयावह रात की ओर बढ़ती है, जब मुंबई आतंकी हमलों से दहल उठता है। दूसरे भाग में घटनाओं की तीव्रता बढ़ती है और नर्सों के साहस, जिम्मेदारी तथा मानवता की भावना को केंद्र में रखा जाता है।

    ‘भारत भाग्य विधाता’ उन वास्तविक नायकों को श्रद्धांजलि देने का प्रयास करती है, जिन्होंने कठिनतम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। यही कारण है कि फिल्म दर्शकों को केवल एक ऐतिहासिक घटना की याद नहीं दिलाती, बल्कि साहस, सेवा और मानवता के महत्व को भी मजबूती से सामने लाती है।

  • रणवीर सिंह कंट्रोवर्सी पर आईएफटीडीए अध्यक्ष अशोक पंडित मुखर: कहा- फिल्म उद्योग भरोसे पर टिका, स्टारडम में प्रतिबद्धता भी जरूरी

    रणवीर सिंह कंट्रोवर्सी पर आईएफटीडीए अध्यक्ष अशोक पंडित मुखर: कहा- फिल्म उद्योग भरोसे पर टिका, स्टारडम में प्रतिबद्धता भी जरूरी

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत के प्रमुख संगठन इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) के अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर चल रहे मौजूदा विवाद पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। अभिनेता रणवीर सिंह के फिल्म ‘डॉन 3’ को अचानक छोड़ने के बाद मनोरंजन उद्योग में शुरू हुई तीखी बहस के बीच अशोक पंडित ने साफ किया है कि किसी भी कलाकार की व्यावसायिक सफलता और उसके कानूनी अनुबंधों को अलग-अलग चश्मे से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फेडरेशन का मकसद केवल फिल्म उद्योग के पेशेवर ताने-बाने की रक्षा करना है।

    हाल ही में वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज फेडरेशन द्वारा रणवीर सिंह के खिलाफ जारी किए गए असहयोग निर्देश (नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव) को वापस लिए जाने के बाद इस पूरे मामले ने एक नया मोड़ ले लिया था। इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करते हुए अशोक पंडित ने एक मीडिया बातचीत में बताया कि प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह को उस दौर में अपनी आगामी फिल्म के लिए साइन किया था, जब उनका हालिया स्टारडम वापस नहीं आया था। उन्होंने याद दिलाया कि जब अभिनेता की लगातार चार फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई थीं, तब मेकर्स ने उन पर भरोसा जताते हुए ‘डॉन 3’ के लिए बहुत पहले ही अनुबंधित कर लिया था।

    अशोक पंडित के अनुसार, सिनेमाई दुनिया में जब किसी भी कलाकार का करियर ऊंचाइयों को छूने लगता है, तब भी उसे उद्योग के पुराने रिश्तों और मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले निर्माताओं को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बेहद सुखद बात है कि अभिनेता की हालिया फिल्म सफल रही है और वे वर्तमान में एक बेहद मजबूत स्थिति में काम कर रहे हैं, लेकिन नैतिकता का तकाजा यही कहता है कि विपरीत परिस्थितियों में हाथ थामने वाले लोगों के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए। फिल्म उद्योग पूरी तरह से आपसी विश्वास, लिखित वादों और समय पर किए गए कमिटमेंट के बलबूते ही संचालित होता है।

    बॉलीवुड में स्टारडम के बदलते स्वरूप पर बेहद बेबाकी से टिप्पणी करते हुए फिल्म समीक्षक और संगठन प्रमुख ने कहा कि इस फिल्म नगरी ने समय-समय पर कई ऐतिहासिक और विशाल स्टारडम देखे हैं। उन्होंने महान अभिनेता राजेश खन्ना, शाहरुख खान और सलमान खान के दौर के अभूतपूर्व स्टारडम का उदाहरण देते हुए कहा कि दर्शकों का असीम प्यार निश्चित रूप से अनमोल और सर्वोपरि होता है, परंतु व्यावसायिक प्रोफेशनलिज्म ही इस पूरी इंडस्ट्री की असली और मजबूत बुनियाद है। जनता फिल्मों के लिए तालियां बजाती है और सफलता का जश्न मनाती है, लेकिन फिल्म निर्माण के पर्दे के पीछे आपसी भरोसा सबसे ज्यादा मायने रखता है।

    इसके साथ ही अशोक पंडित ने फिल्म निर्देशक आदित्य धर और उनकी हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ की जमकर तारीफ की। उनका मानना है कि इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने हिंदी फिल्म उद्योग को एक बहुत ही जरूरी और नया जीवनदान दिया है। उन्होंने ‘धुरंधर’ को बिजनेस के लिहाज से एक बेहतरीन ऑक्सीजन बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी शानदार फिल्म है जिसने दर्शकों को दोबारा भारी तादाद में सिनेमाघरों तक खींचने का काम किया है। हालांकि, फिल्म की इस शानदार कामयाबी का जश्न मनाने के साथ ही उन्होंने पुरजोर तरीके से यह स्पष्ट किया कि ‘धुरंधर’ की सफलता को ‘डॉन 3’ के विवाद के साथ मिलाकर बिल्कुल नहीं देखा जाना चाहिए।

    अपनी बात को विराम देते हुए आईएफटीडीए के अध्यक्ष ने कहा कि दो अलग-अलग मामलों को आपस में मिलाने से केवल भ्रम और जटिलताएं पैदा होती हैं। फेडरेशन का एकमात्र और व्यापक उद्देश्य फिल्म उद्योग के पूरे इकोसिस्टम को सुरक्षित रखना और छोटे-बड़े सभी हितधारकों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने एक बार फिर इस बात को दोहराया कि संस्था का किसी भी अभिनेता या निर्माता से कोई व्यक्तिगत झगड़ा या शिकायत नहीं है, बल्कि उनकी एकमात्र चिंता यह सुनिश्चित करना है कि देश की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री के भीतर काम करने का एक पारदर्शी, पेशेवर और भरोसेमंद माहौल हमेशा कायम रहे।

  • बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के समर्थन में उतरे पंजाबी स्टार एमी विर्क, 'डॉन 3' विवाद को लेकर निर्माताओं पर साधा निशाना

    बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के समर्थन में उतरे पंजाबी स्टार एमी विर्क, 'डॉन 3' विवाद को लेकर निर्माताओं पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में फिल्मों के हिट और फ्लॉप होने के साथ ही निर्माताओं और कलाकारों के समीकरण किस तरह बदलते हैं, इसका एक बड़ा उदाहरण हालिया विवाद में देखने को मिल रहा है। पंजाबी फिल्म उद्योग के जाने-माने अभिनेता और गायक एमी विर्क ने बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह के पक्ष में खड़े होते हुए फिल्म ‘डॉन 3’ के निर्माताओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक विशेष साक्षात्कार के दौरान उन्होंने खुलकर कहा कि जब अभिनेता का समय खराब चल रहा था और उनकी कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर लगातार असफल हो रही थीं, तब निर्माताओं ने उनके साथ अपनी फिल्म की शूटिंग शुरू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

    इस पूरे विवाद की जड़ें फिल्म ‘डॉन 3’ की घोषणा और उसके बाद बदले हालातों से जुड़ी हुई हैं। लगभग तीन साल पहले घोषित हुई इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का निर्माण कार्य काफी समय तक अटका रहा। इसी बीच रणवीर सिंह की नई फिल्म ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और वह देश की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शुमार हो गई। एमी विर्क का कहना है कि जैसे ही रणवीर की इस फिल्म ने सफलता के नए आयाम छुए, वैसे ही निर्माताओं ने ‘डॉन 3’ पर जल्द से जल्द काम शुरू करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया ताकि वे अभिनेता की नई स्टार वैल्यू का आर्थिक लाभ उठा सकें।

    विवाद तब और गहरा गया जब ‘धुरंधर’ की भारी सफलता के तुरंत बाद रणवीर सिंह ने किन्हीं कारणों से ‘डॉन 3’ परियोजना से खुद को अलग कर लिया। निर्माताओं का दावा है कि उन्होंने फिल्म की आउटडोर लोकेशंस की रेकी, अनुमति और अन्य प्री-प्रोडक्शन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए थे, जो अभिनेता के हटने से पूरी तरह बर्बाद हो गए। इस नुकसान की भरपाई के लिए निर्माण कंपनी ने अभिनेता से 45 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की मांग की है। हालांकि रणवीर सिंह ने शुरुआत में इस मांग को खारिज करते हुए आंशिक समझौते के तहत केवल 10 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी, जिसे निर्माताओं ने स्वीकार नहीं किया।

    इस गतिरोध के बीच मनोरंजन उद्योग की प्रमुख संस्था फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने भी हस्तक्षेप किया था और अभिनेता के खिलाफ असहयोग का निर्देश जारी किया था, जिसे बाद में हटा लिया गया। मध्य प्रदेश सहित देश भर के फिल्म वितरकों और सिनेमा जगत के विशेषज्ञों की इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनी हुई है। एमी विर्क ने इस वित्तीय मांग को पूरी तरह अनुचित बताते हुए कहा कि यदि निर्माताओं को लगता है कि उनका वास्तविक नुकसान हुआ है तो वे मामूली बकाया राशि लेकर मामला सुलझा सकते हैं, न कि इतनी बड़ी रकम का दबाव बनाएं। उन्होंने अभिनेता को कानूनी राह अपनाने और किसी भी दबाव के आगे न झुकने की सलाह दी है।

    साक्षात्कार के दौरान विर्क ने रणवीर सिंह के साथ अपने पुराने संबंधों और उनकी हालिया व्यक्तिगत खुशियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘धुरंधर’ की सफलता और रणवीर के घर बेटी के जन्म के बाद उनकी अभिनेता से लंबी बातचीत हुई थी, जिसमें रणवीर ने फिल्म के लिए की गई अपनी कड़ी मेहनत को साझा किया था। विर्क ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे सफल फिल्म का मुख्य हिस्सा उनका एक करीबी दोस्त है। फिलहाल यह विवाद अदालती नोटिसों और कानूनी दांव-पेंच के बीच फंसा हुआ है और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मनोरंजन जगत का यह बड़ा विवाद किस मोड़ पर जाकर थमता है।

  • बॉलीवुड की नई रिलीज फिल्मों की रफ्तार पड़ी धीमी, 'है जवानी तो इश्क होना है' और 'बंदर' के कलेक्शन में लगातार छठे दिन भारी गिरावट

    बॉलीवुड की नई रिलीज फिल्मों की रफ्तार पड़ी धीमी, 'है जवानी तो इश्क होना है' और 'बंदर' के कलेक्शन में लगातार छठे दिन भारी गिरावट

    नई दिल्ली । देश के सिनेमाघरों में चल रही बॉक्स ऑफिस की जंग में इस समय क्षेत्रीय और हिंदी सिनेमा के बीच एक बड़ा फासला देखने को मिल रहा है। दक्षिण भारतीय फिल्म जगत की नई पेशकश ने अपनी जबरदस्त व्यावसायिक पकड़ का प्रदर्शन करते हुए दो सौ करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होने की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ भारी-भरकम स्टार कास्ट और बड़े निर्देशकों के मार्गदर्शन में बनी बॉलीवुड की दो प्रमुख फिल्में दर्शकों की कमी के कारण सिनेमाघरों में अपनी पकड़ खोती जा रही हैं। वर्किंग डेज की शुरुआत के साथ ही इन दोनों हिंदी फिल्मों के दैनिक प्रदर्शन ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो फिल्म वितरकों और निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है।

    मेगास्टार राम चरण और जान्हवी कपूर की मुख्य भूमिकाओं से सजी फिल्म ‘पेद्दी’ अपनी रिलीज के पहले दिन से ही बॉक्स ऑफिस पर राज कर रही है। दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ-साथ हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी इस फिल्म की मांग लगातार बनी हुई है। अपनी रिलीज के सातवें दिन भी इस फिल्म ने संतोषजनक कमाई करते हुए बाजार में अपनी निरंतरता साबित की है, जबकि इसके छठे दिन का प्रदर्शन भी काफी मजबूत रहा था। अब तक के कुल संकलन के आंकड़ों को देखा जाए तो यह फिल्म बहुत जल्द एक नया रिकॉर्ड कायम करने की तरफ बढ़ रही है। इस मजबूत व्यावसायिक प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बेहतर विषय-वस्तु और मजबूत स्टार वैल्यू वाली फिल्मों को दर्शक पूरे देश में हाथों-हाथ ले रहे हैं।

    इसके विपरीत बॉलीवुड के बड़े सितारों से सजी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ का जादू बॉक्स ऑफिस पर फीका पड़ता दिखाई दे रहा है। नामचीन सितारों की मौजूदगी और अनुभवी निर्देशन के बावजूद फिल्म छठे दिन अपनी रफ्तार को बरकरार रखने में नाकाम रही। पांचवें दिन के मुकाबले छठे दिन इसके कलेक्शन में बड़ी गिरावट देखने को मिली है, जिससे इसका कुल कारोबार अब तक काफी सीमित रह गया है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों से आ रही रिपोर्ट के अनुसार शाम के शो में दर्शकों की संख्या में काफी कमी आई है, जिसने फिल्म के आगे के सफर को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

    वहीं इसी सप्ताह रिलीज हुई बॉलीवुड की एक अन्य प्रयोगधर्मी और डार्क थ्रिलर फिल्म ‘बंदर’ बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह पस्त नजर आ रही है। गंभीर किरदारों और सस्पेंस से भरपूर होने के बावजूद यह फिल्म शुरुआत से ही दर्शकों को थिएटर्स तक खींचने में नाकाम साबित हुई है। अपनी रिलीज के छठे दिन इस फिल्म का कलेक्शन बेहद निराशाजनक रहा, जो इसकी कुल लागत और उम्मीदों के लिहाज से बहुत मामूली है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि सीमित प्रचार और मुख्यधारा के दर्शकों से जुड़ाव की कमी के कारण इस फिल्म का कुल संकलन अब तक के सबसे निचले स्तर पर बना हुआ है।

    मौजूदा व्यापारिक आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहांत में भी ‘पेद्दी’ का दबदबा इसी तरह जारी रह सकता है क्योंकि दर्शकों के बीच इसकी लोकप्रियता और माउथ पब्लिसिटी काफी मजबूत है। दूसरी तरफ हिंदी बेल्ट की दोनों फिल्मों को अपनी साख बचाने के लिए आने वाले दिनों में असाधारण प्रदर्शन करने की जरूरत होगी, जिसकी संभावना फिलहाल बेहद कम दिखाई दे रही है। सिनेमाघरों के मालिक भी अब अपना पूरा ध्यान उस फिल्म पर केंद्रित कर रहे हैं जो लगातार फुटफॉल दे रही है, जिससे आने वाले दिनों में स्क्रीन्स की संख्या में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।

  • कामा अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के अदम्य साहस पर आधारित सिनेमाई कहानी में स्टाफ नर्स की भूमिका निभाएंगी कंगना रनौत

    कामा अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के अदम्य साहस पर आधारित सिनेमाई कहानी में स्टाफ नर्स की भूमिका निभाएंगी कंगना रनौत

    नई दिल्ली । मुंबई में हुए 26/11 के भीषण आतंकवादी हमलों की त्रासदी के बीच मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की एक ऐसी अनसुनी गाथा अब बड़े पर्दे पर अवतरित होने जा रही है, जिसने चिकित्सा जगत के सर्वोच्च सेवा भाव को रेखांकित किया था। प्रख्यात अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ को लेकर व्यापक रूप से चर्चा में हैं। इस फिल्म के माध्यम से मुंबई आतंकी हमले के दौरान कामा अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दिखाई गई अदम्य वीरता और अप्रतिम साहस की वास्तविक कहानी को देश के सामने लाया जा रहा है।

    इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कंगना रनौत ने एक साक्षात्कार में बताया कि जब पूरा मुंबई शहर आतंकी हमलों और विस्फोटों से थर्रा रहा था, उस भयावह दौर में कामा अस्पताल के भीतर एक अलग ही संघर्ष चल रहा था। अस्पताल परिसर के ठीक बाहर और भीतर लगातार गोलियां चल रही थीं और चारों तरफ दहशत का माहौल था। ऐसी विकट और जानलेवा परिस्थितियों में भी अस्पताल की नर्सों और डॉक्टरों ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। चिकित्सा कर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए न केवल मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि उस भीषण अफरा-तफरी के बीच 20 गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी भी करवाई।

    फिल्म की मुख्य विषयवस्तु और प्रेरणा के संबंध में जानकारी देते हुए अभिनेत्री ने कहा कि संकट के समय स्वास्थ्य कर्मियों का यह समर्पण देश के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर और नर्सें हर परिस्थिति में समाज के रक्षक बनकर सामने आते हैं। कंगना ने विशेष रूप से अस्पताल की उन नर्सों के साहस की सराहना की, जो बम धमाकों के बीच भी मरीजों की सुध लेने के लिए अस्पताल की विभिन्न मंजिलों पर दौड़ती रहीं और अपने मानवीय दायित्वों को पूरा किया।

    व्यावसायिक और रणनीतिक मोर्चे पर इस फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग हाल ही में भुवनेश्वर में आयोजित की गई थी। इस उच्च स्तरीय स्क्रीनिंग के दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव सहित कई वरिष्ठ राजनेता उपस्थित रहे। इस अवसर पर कंगना रनौत ने फिल्म को राष्ट्र निर्माण में अदृश्य भूमिका निभाने वाले मेहनतकश लोगों को समर्पित करते हुए इसे राज्य में टैक्स फ्री करने की आधिकारिक मांग की, जिस पर उन्हें राज्य सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन भी प्राप्त हुआ है।

    फिल्म के शीर्षक ‘भारत भाग्य विधाता’ के चयन के पीछे की पृष्ठभूमि को साझा करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि यह नाम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक विशेष संबोधन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने अपने एक भाषण के दौरान देश के श्रमिकों, कारीगरों और समाज के निचले पायदान पर काम करने वाले मेहनतकश लोगों को ‘भारत भाग्य विधाता’ कहकर सम्मानित किया था। इसी विचार को आत्मसात करते हुए फिल्म का नाम तय किया गया, जिसमें कंगना रनौत स्वयं एक साधारण स्टाफ नर्स के रूप में मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जो व्यवस्था की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है।

    फिल्म के हालिया आधिकारिक ट्रेलर में यह स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि किस प्रकार कुछ बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले वार्ड बॉयज और नर्सों ने 26/11 के उस काले दौर में सूझबूझ का परिचय देते हुए 400 से अधिक नागरिकों की जान बचाई थी। यह फिल्म न केवल एक आतंकी हमले की पृष्ठभूमि पर बनी थ्रिलर है, बल्कि यह देश की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ माने जाने वाले ग्राउंड स्टाफ के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक गंभीर सिनेमाई प्रयास है। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म आगामी 12 जून को देश भर के सिनेमाघरों में आधिकारिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी।

  • ‘विवाह’ की पूनम से बनीं करोड़ों दिलों की पसंद, अमृता राव की सादगी और अभिनय का आज भी कायम है जादू

    ‘विवाह’ की पूनम से बनीं करोड़ों दिलों की पसंद, अमृता राव की सादगी और अभिनय का आज भी कायम है जादू

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा और सादगी के बल पर दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाई। अभिनेत्री अमृता राव भी उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं जिन्होंने बिना किसी बड़े विवाद या अत्यधिक प्रचार के अपने अभिनय और व्यक्तित्व के दम पर अलग पहचान स्थापित की। खासतौर पर फिल्म ‘विवाह’ में निभाया गया उनका ‘पूनम’ का किरदार आज भी दर्शकों की स्मृतियों में जीवंत है।

    7 जून 1981 को मुंबई में जन्मीं अमृता राव का पालन-पोषण एक पारंपरिक कोंकणी परिवार में हुआ। बचपन से ही पढ़ाई और सांस्कृतिक गतिविधियों में रुचि रखने वाली अमृता ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में पूरी की। बाद में उन्होंने मनोविज्ञान विषय के साथ स्नातक की पढ़ाई शुरू की, लेकिन मॉडलिंग और मनोरंजन जगत में बढ़ती संभावनाओं ने उन्हें एक अलग दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    करियर की शुरुआत उन्होंने मॉडलिंग से की। कई विज्ञापनों में दिखाई देने के बाद उन्हें संगीत वीडियो में भी काम करने का अवसर मिला। कैमरे के सामने उनकी सहज उपस्थिति और आत्मविश्वास ने विज्ञापन जगत का ध्यान आकर्षित किया। धीरे-धीरे फिल्म निर्माताओं की नजर उन पर पड़ी और उन्हें फिल्मों में अवसर मिलने लगे।

    साल 2002 में रिलीज हुई फिल्म ‘अब के बरस’ से अमृता ने बॉलीवुड में कदम रखा। हालांकि उनकी वास्तविक पहचान वर्ष 2003 में आई फिल्म ‘इश्क विश्क’ से बनी। इस फिल्म में उनके अभिनय को सराहा गया और युवा दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। फिल्म की सफलता ने उन्हें उद्योग में मजबूत स्थान दिलाया और उनके लिए नए अवसरों के द्वार खोले।

    इसके बाद अमृता ने ‘मस्ती’, ‘मैं हूं ना’, ‘वाह लाइफ हो तो ऐसी’, ‘शिखर’ और ‘प्यारे मोहन’ जैसी फिल्मों में काम किया। हालांकि उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में फिल्म ‘विवाह’ को विशेष स्थान प्राप्त है। इस पारिवारिक फिल्म में निभाए गए ‘पूनम’ के किरदार ने उन्हें देशभर के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। उनके सरल, संस्कारी और संवेदनशील चरित्र को लोगों ने बेहद पसंद किया और यही भूमिका उनके करियर की पहचान बन गई।

    अमृता राव ने हिंदी फिल्मों के अलावा दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने तेलुगू फिल्म उद्योग में भी काम किया और कई चर्चित कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा की। इसके बाद ‘वेलकम टू सज्जनपुर’, ‘जॉली एलएलबी’, ‘सत्याग्रह’, ‘सिंह साहब द ग्रेट’ और ‘ठाकरे’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया।

    निजी जीवन में अमृता ने लंबे समय तक रेडियो जॉकी अनमोल सूद के साथ संबंध में रहने के बाद वर्ष 2016 में विवाह किया। दोनों ने सादगीपूर्ण तरीके से शादी की और आज एक बेटे के माता-पिता हैं। विवाह के बाद अमृता ने परिवार को प्राथमिकता देते हुए फिल्मों में अपनी सक्रियता सीमित कर दी।

    वर्तमान समय में अमृता राव डिजिटल माध्यमों के जरिए अपने प्रशंसकों से जुड़ी हुई हैं। वह अपने पति के साथ एक लोकप्रिय यूट्यूब चैनल संचालित करती हैं, जहां जीवन से जुड़े अनुभव, पारिवारिक किस्से और विभिन्न चर्चित हस्तियों के साथ बातचीत साझा करती हैं। अभिनय, सादगी और संतुलित जीवनशैली के कारण अमृता राव आज भी भारतीय दर्शकों के बीच सम्मान और लोकप्रियता बनाए हुए हैं।

  • बकरीद से पहले मुंबई में हंगामा ,सोसायटी में बकरे लाने पर भिड़े लोग

    बकरीद से पहले मुंबई में हंगामा ,सोसायटी में बकरे लाने पर भिड़े लोग


    नई दिल्ली । मुंबई के मीरा रोड इलाके में बकरीद से पहले एक सोसायटी में बकरों की मौजूदगी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला पूनम स्टेट क्लस्टर-1 सोसायटी का बताया जा रहा है जहां कथित रूप से कुर्बानी के लिए 25 बकरियां परिसर के अंदर लाई गई थीं और उन्हें एक अस्थायी टीन शेड में रखा गया था। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और स्थानीय निवासियों के बीच विरोध शुरू हो गया।

    सोसायटी में रहने वाले कई लोगों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि बिना किसी सामूहिक बैठक और अनुमति के परिसर में टीन शेड बनाकर बकरों को रखना नियमों के खिलाफ है। निवासियों ने यह भी दावा किया कि रहवासी इलाके में इस तरह की गतिविधियों से असुविधा और माहौल खराब हो रहा है। इसके बाद मामला धीरे धीरे गरमाने लगा।

    स्थानीय विरोध के बाद भाजपा से जुड़े नेताओं और हिंदू संगठनों के साथ कुछ निवासियों ने प्रशासन से शिकायत की। शिकायत मिलने पर नगर निगम के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर अस्थायी टीन शेड को हटा दिया। हालांकि इसके बाद भी बकरों की मौजूदगी को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

    स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब सोमवार रात फिर से तनाव बढ़ गया। बताया जाता है कि टीन शेड हटाने के बाद भी बकरे सोसायटी परिसर में ही मौजूद थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। झगड़े के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने ब्लेड से एक युवक पर हमला कर दिया जिसमें वह घायल हो गया।

    घटना के बाद पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही सोसायटी के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे और किसी तरह की और हिंसा न हो।सोसायटी के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परिसर के अंदर कुर्बानी की कोई अनुमति नहीं ली गई थी। उनका कहना है कि टीन शेड केवल अस्थायी रूप से बकरों को रखने के लिए बनाया गया था लेकिन इस पर आपत्ति के बाद उसे हटा दिया गया।

    वहीं मंगलवार को स्थानीय निवासियों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया। उनका कहना था कि हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार किसी भी रहवासी इलाके में बिना अनुमति कुर्बानी जैसी गतिविधियां नहीं की जा सकतीं। इसी आधार पर उन्होंने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।