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  • मुंबई कोस्टल रोड पर BMW हादसे में तीन की मौत, 200 किमी प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की बात सामने आई

    मुंबई कोस्टल रोड पर BMW हादसे में तीन की मौत, 200 किमी प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की बात सामने आई

    नई दिल्ली । मुंबई के कोस्टल रोड पर रविवार तड़के एक तेज रफ्तार BMW कार के ब्रिज से नीचे गिरने से बड़ा सड़क हादसा हो गया। दुर्घटना में कार सवार तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है। घायल का अस्पताल में उपचार चल रहा है।

    जानकारी के मुताबिक काले रंग की BMW कार मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही थी। सुबह करीब 5:20 बजे कार अचानक अनियंत्रित हो गई। इसके बाद वाहन ने ब्रिज की बाउंड्री वॉल और रेलिंग को टक्कर मारी और उसे तोड़ते हुए नीचे जा गिरा।

    हादसा इतना भीषण था कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना के बाद वाहन के कई हिस्से टूट गए। घटनास्थल की तस्वीरों में कार की स्थिति से टक्कर की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    बताया गया है कि कार में कुल चार लोग सवार थे। हादसे के बाद तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक करीब 20 वर्षीय युवक गंभीर रूप से घायल हुआ। उसे उपचार के लिए नायर अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में भर्ती कराया गया है।

    मृतकों में 21 वर्षीय शनाय गज्जल और 17 वर्षीय धैर्य सेठ की पहचान हुई है। तीसरे मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है। करीब 25 वर्षीय इस युवक को अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद मृत घोषित किया गया।

    हादसे के बाद घटनास्थल पर राहत और बचाव का काम किया गया। दुर्घटनाग्रस्त BMW को हटाने और मौके पर मौजूद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संबंधित टीमों ने कार्रवाई की। गंभीर रूप से घायल युवक का अस्पताल में इलाज जारी है।

    प्रारंभिक पुलिस रिपोर्ट में BMW की रफ्तार 200 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने की बात सामने आई है। बताया गया है कि तेज गति के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। हालांकि हादसे की परिस्थितियों और वाहन की वास्तविक गति से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार अनियंत्रित होने के बाद कार पहले सड़क के डिवाइडर से टकराई। इसके बाद यह कोस्टल रोड के किनारे लगे बिजली के खंभे से टकराई और फिर ब्रिज की संरचना को नुकसान पहुंचाते हुए नीचे जा गिरी।

    हादसे के कारण कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वाहन किस परिस्थिति में अनियंत्रित हुआ और हादसे से पहले सड़क पर उसकी गति कितनी थी।

    मुंबई कोस्टल रोड शहर के प्रमुख मार्गों में शामिल है और यहां वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में तेज गति से वाहन चलाने की स्थिति में नियंत्रण खोने पर गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

    रविवार सुबह हुए इस हादसे में तीन लोगों की जान चली गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया और दुर्घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच आगे जारी है।

  • दीपावली-छठ पर यात्रियों को राहत, कटिहार से मुंबई-अमृतसर और कानपुर-गुवाहाटी के बीच स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू

    दीपावली-छठ पर यात्रियों को राहत, कटिहार से मुंबई-अमृतसर और कानपुर-गुवाहाटी के बीच स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू


    नई दिल्ली ।दीपावली और छठ पूजा के दौरान घर जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ ट्रेनों में बुकिंग का दबाव भी बढ़ गया है। नियमित ट्रेनों में बुकिंग शुरू होने के कुछ समय बाद ही सीटें भरने की स्थिति को देखते हुए रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए कई स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया है। इनमें कटिहार-मुंबई, कटिहार-अमृतसर और कानपुर-गुवाहाटी के बीच चलने वाली ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों के जरिए त्योहार के दौरान अलग-अलग शहरों के बीच अतिरिक्त रेल सेवा उपलब्ध कराई जा रही है।

    मुंबई सेंट्रल-कटिहार के बीच 09189/09190 नंबर की स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। यह ट्रेन सप्ताह में एक दिन संचालित होती है। मुंबई सेंट्रल से कटिहार जाने वाली ट्रेन प्रत्येक शनिवार को रवाना होती है, जबकि कटिहार से मुंबई सेंट्रल लौटने वाली ट्रेन प्रत्येक मंगलवार को चलती है। इस ट्रेन में सेकेंड एसी, थर्ड एसी, स्लीपर और जनरल क्लास के डिब्बे उपलब्ध हैं। सुपरफास्ट श्रेणी की यह ट्रेन 2292 किलोमीटर की दूरी करीब 42 घंटे 25 मिनट में तय करती है।

    मुंबई-कटिहार स्पेशल ट्रेन बोरीवली, वापी, वलसाड, भरूच, वडोदरा, रतलाम, उज्जैन, संत हिरदाराम नगर जंक्शन, विदिशा, बीना, झांसी और कानपुर समेत कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकती है। इसके अलावा ऐशबाग, गोंडा, मनकापुर, बस्ती, खलीलाबाद, गोरखपुर, देवरिया सदर, सिवान, छपरा, हाजीपुर, बरौनी, बेगुसराय, खगड़िया और नौगछिया भी इसके ठहराव में शामिल हैं।

    अमृतसर और कटिहार के बीच 05735/05736 नंबर की स्पेशल ट्रेन सप्ताह में एक दिन चल रही है। अमृतसर से कटिहार जाने वाली ट्रेन प्रत्येक शुक्रवार को रवाना होती है, जबकि कटिहार से अमृतसर जाने वाली ट्रेन प्रत्येक बुधवार को चलती है। इस मेल एक्सप्रेस ट्रेन में सभी डिब्बे जनरल क्लास के हैं। ट्रेन 1676 किलोमीटर की दूरी करीब 36 घंटे 45 मिनट में तय करती है।

    इस ट्रेन के प्रमुख ठहरावों में ब्यास, जालंधर सिटी, ढंडारी कलां, राजपुरा जंक्शन, अंबाला कैंट, सहारनपुर, रुड़की, लकसर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, सीतापुर, गोंडा, बस्ती और गोरखपुर शामिल हैं। इसके बाद ट्रेन कप्तानगंज, नरकटियागंज, रक्सौल, सीतामढ़ी, जनकपुर रोड, शीशो, सकरी, झंझारपुर, निर्मली, सरायगढ़, राघोपुर, ललितग्राम, फारबिसगंज, अररिया कोर्ट और पूर्णिया से होकर गुजरती है।

    कानपुर सेंट्रल और गुवाहाटी के बीच 04127/04128 नंबर की स्पेशल ट्रेन भी सप्ताह में एक दिन संचालित हो रही है। दी गई जानकारी के अनुसार, यह सेवा गुरुवार को रवाना होती है और गुवाहाटी से कानपुर सेंट्रल वापसी सेवा शुक्रवार को चलती है। ट्रेन में सेकेंड एसी, थर्ड एसी, स्लीपर और जनरल क्लास के डिब्बे हैं। यह मेल एक्सप्रेस ट्रेन 1447 किलोमीटर की दूरी करीब 35 घंटे में तय करती है।

    कानपुर-गुवाहाटी स्पेशल ट्रेन फतेहपुर, प्रयागराज जंक्शन, ज्ञानपुर रोड, बनारस, वाराणसी, गाजीपुर सिटी, बलिया, छपरा, सोनपुर, हाजीपुर, शाहपुर पटोरी, बरौनी, बेगुसराय, खगड़िया, मानसी, नौगछिया और कटिहार समेत कई स्टेशनों पर रुकती है। आगे इसके ठहराव बारसोई, किशनगंज, अलुआबाड़ी रोड, न्यू जलपाईगुड़ी, न्यू कूचबिहार, न्यू अलीपुरद्वार, कोकराझार, न्यू बंगाईगांव, बरपेटा रोड, रंगिया और कामाख्या में हैं।

    स्पेशल ट्रेनों के समय, ठहराव और अन्य जानकारी के लिए रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 से जानकारी ली जा सकती है। यात्री NTES के माध्यम से भी ट्रेनों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

  • मराठा आरक्षण की मांग पर जरांगे मुंबई रवाना, पुलिस की अनुमति नहीं; फडणवीस ने गणेशोत्सव में बाधा न डालने की अपील की

    मराठा आरक्षण की मांग पर जरांगे मुंबई रवाना, पुलिस की अनुमति नहीं; फडणवीस ने गणेशोत्सव में बाधा न डालने की अपील की

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं। मुंबई पुलिस की ओर से आजाद मैदान में प्रस्तावित आंदोलन की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद उन्होंने जालना जिले के अंतरवाली सराटी से मुंबई की ओर कूच किया। जरांगे के 19 सितंबर को मुंबई पहुंचने की संभावना है। उनका यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्य में गणेशोत्सव चल रहा है और मुंबई में बड़ी संख्या में लोग धार्मिक आयोजनों में शामिल हो रहे हैं।

    जरांगे पिछले कई दिनों से मराठा आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। मुंबई पहुंचने के लिए उन्हें करीब 400 किलोमीटर का सफर तय करना है। शुरुआती योजना में बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ मुंबई जाने की बात थी, लेकिन पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बाद उन्होंने अपने साथ सीमित संख्या में लोगों को लेकर आगे बढ़ने का फैसला किया। रास्ते में मराठा समुदाय के लोग उनसे जुड़ रहे हैं। उनके काफिले के बीड के पाटोदा, अहिल्यानगर के श्रीगोंदा, पुणे के हडपसर और रायगढ़ के खोपोली से होते हुए मुंबई पहुंचने की योजना है।

    आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुलिस ने अधिकारियों, होमगार्ड और रैपिड सिटी पुलिस की टुकड़ियों समेत 648 जवानों की तैनाती की है। प्रशासन की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि जरांगे के साथ रास्ते में बड़ी संख्या में समर्थक जुड़ सकते हैं और उनका मुंबई पहुंचना गणेशोत्सव के दौरान भीड़ तथा यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि गणेशोत्सव के दौरान आम लोगों और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आंदोलन के समय को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि त्योहार के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए। फडणवीस के अनुसार सरकार ने जरांगे की 13 में से 12 मांगों को स्वीकार कर उन पर कार्रवाई की है, जबकि बची हुई मांग से जुड़ी कानूनी अड़चनें भी उन्हें बताई गई हैं।

    दूसरी ओर, जरांगे ने मुंबई जाने के अपने फैसले का बचाव किया है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के अधिकार को रोका नहीं जा सकता। हाईकोर्ट ने 11 सितंबर की सुनवाई में भी लोकतंत्र और शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार को लेकर टिप्पणी की थी।

    जरांगे ने सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं और दावा किया है कि उन्हें नुकसान पहुंचाने की साजिश की जा रही है। ये आरोप उनके और सरकार के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आए हैं। वहीं उनकी पत्नी सुमित्रा ने कहा कि सरकार की ओर से समय पर निर्णय नहीं लिए जाने के कारण उन्हें मुंबई जाने का फैसला करना पड़ा। उन्होंने फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस से भी अपने पति से जरांगे की आरक्षण संबंधी मांग पर बात करने की अपील की।

    मराठा आरक्षण को लेकर जरांगे का आंदोलन पहले भी मुंबई तक पहुंच चुका है। अगस्त 2025 में उन्होंने आजाद मैदान में बड़ा आंदोलन किया था, जिसके बाद सरकार द्वारा उनकी कई मांगें स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त हुआ था। अब एक बार फिर मुंबई की ओर उनके कूच से मराठा आरक्षण का मुद्दा राज्य में केंद्र में आ गया है।

  • प्रणव अदाणी और करण अदाणी ने गणेश चतुर्थी पर चिंचपोकली चा चिंतामणि में परिवार संग पूजा-अर्चना कर दर्शन किए

    प्रणव अदाणी और करण अदाणी ने गणेश चतुर्थी पर चिंचपोकली चा चिंतामणि में परिवार संग पूजा-अर्चना कर दर्शन किए

    नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी के अवसर पर अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अदाणी और अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक करण अदाणी ने परिवार के साथ मुंबई के ऐतिहासिक चिंचपोकली चा चिंतामणि गणपति के दर्शन किए। दोनों ने गणपति की पूजा-अर्चना कर उत्सव में भाग लिया।

    प्रणव अदाणी अदाणी एंटरप्राइजेज में एग्रो, ऑयल एंड गैस कारोबार के प्रबंध निदेशक और निदेशक भी हैं। उन्होंने चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल के साथ जुड़ने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि चिंचपोकली चा चिंतामणि की समृद्ध विरासत भक्ति, एकता और मुंबई की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रही है। यह उत्सव इस वर्ष अपने 107वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।

    चिंचपोकली चा चिंतामणि को मुंबई के दूसरे सबसे पुराने सार्वजनिक गणपति उत्सव के रूप में माना जाता है। इसकी परंपरा शहर के पुराने कपड़ा मिल क्षेत्रों परेल, गिरगांव और लालबाग से जुड़ी रही है। शुरुआती दौर में कपड़ा मिलों के श्रमिकों ने इस उत्सव को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    इस सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की उस पहल से भी जुड़ी मानी जाती है, जिसके तहत 1890 के दशक में गणेश चतुर्थी को घरों तक सीमित धार्मिक आयोजन से आगे बढ़ाकर सार्वजनिक उत्सव का स्वरूप दिया गया था।

    इस वर्ष चिंचपोकली चा चिंतामणि का आयोजन दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला से प्रेरित विशेष थीम पर किया गया है। गणेश प्रतिमा को तिरुमला तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की शैली में सजाया गया है। प्रतिमा की सजावट में गरुड़, कीर्तिमुख, शंख, चक्र और कपूर तिलक जैसे पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को शामिल किया गया है।

    उत्सव के लिए तैयार किए गए भव्य पंडाल की वास्तुकला हैदराबाद और भुवनगिरि स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर, स्वर्णगिरि की शैली से प्रेरित है। पंडाल में ऊंचे गोपुरम, दीप स्तंभ और याली तथा व्याल जैसे संरक्षक शिल्प बनाए गए हैं, जो इसकी विशेष थीम का हिस्सा हैं।

    चिंचपोकली चा चिंतामणि की परंपरा ने मुंबई में हुए बड़े सामाजिक और औद्योगिक बदलावों के दौर को भी देखा है। वर्ष 1982 की ऐतिहासिक बॉम्बे कपड़ा मिल हड़ताल और उसके बाद शहर में हुए बदलावों के बावजूद यह उत्सव अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    करीब 5,000 योगदानकर्ताओं के सहयोग से संचालित चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल की गतिविधियां केवल गणेशोत्सव तक सीमित नहीं हैं। मंडल की ओर से स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े सामाजिक कार्य भी किए जाते हैं।

    वर्ष 1939 से चिंचपोकली रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से के पास गणेशोत्सव का आयोजन लगातार किया जा रहा है। चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल ही इन वर्षों में इस आयोजन का संचालन करता रहा है। गणेशोत्सव के अलावा मंडल रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यक्रम और बच्चों के लिए विभिन्न कल्याणकारी पहल भी आयोजित करता है।

  • मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने बढ़ाया इनाम, FIA की नई सूची में 70 लाख रुपये का इनाम और गिरफ्तारी वारंट जारी

    मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने बढ़ाया इनाम, FIA की नई सूची में 70 लाख रुपये का इनाम और गिरफ्तारी वारंट जारी


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई का दावा करते हुए उसे गिरफ्तार करने के लिए वारंट जारी किया है। पाकिस्तान की जांच एजेंसी फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी FIA की नई मोस्ट वांटेड सूची में मसूद अजहर पर 70 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब अक्टूबर में एफएटीएफ की बैठक प्रस्तावित है।

    FIA की नई सूची में मसूद अजहर को वांछित बताया गया है। पाकिस्तान का कहना है कि वह देश से गायब है और अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। वहीं, भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़ी जानकारी में उसके पाकिस्तान में छिपे होने की संभावना जताई गई है। पिछले कुछ महीनों में ऐसी जानकारी सामने आने का दावा किया गया है कि वह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह इलाके में हो सकता है।

    मसूद अजहर पर इससे पहले भी पाकिस्तान की ओर से इनाम घोषित किया जा चुका है। वर्ष 2021 में FIA ने उस पर 50 लाख रुपये का इनाम रखा था। अब पांच साल बाद इस रकम में 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे कुल इनाम 70 लाख रुपये हो गया है।

    FIA की नई मोस्ट वांटेड सूची में 26/11 मुंबई हमले से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इन लोगों पर हमले में अलग-अलग तरह से मदद करने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ पर हमलावरों को समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचाने में सहायता करने का आरोप है, जबकि कुछ पर हमले के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

    नई सूची में 17 लोगों की तस्वीरें और उनके काम से जुड़ी जानकारी दी गई है। वहीं दो लोगों के नाम सूची में मौजूद होने के बावजूद उनकी तस्वीर और संगठन से संबंधित विवरण हटा दिए गए हैं। तुर्बत के मोहम्मद खान पर हमलावरों को मुंबई पहुंचाने वाली नाव उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया था। नई सूची में उसके नाम के साथ तस्वीर और अन्य जानकारी नहीं दी गई है।

    बहावलनगर के अब्दुल रहमान का नाम भी सूची में मौजूद है, लेकिन उसकी तस्वीर और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी जानकारी हटा दी गई है। वर्ष 2021 की पुरानी सूची में दोनों के बारे में अधिक विवरण मौजूद था।

    नई सूची में 11 ऐसे लोगों के नाम भी हैं, जिन पर हमलावरों को दो नावों के जरिए समुद्र पार कराने में मदद करने का आरोप लगाया गया है। इनमें मुहम्मद अमजद खान, शाहिद गफूर, मुहम्मद उस्मान, अतीक उर रहमान, रियाज अहमद, मुहम्मद मुश्ताक, मुहम्मद नईम, अब्दुल शकूर, मुहम्मद साबिर सल्फी, मुहम्मद उस्मान और शकील अहमद शामिल हैं।

    इसके अलावा छह लोगों पर हमले के लिए आर्थिक मदद देने का आरोप लगाया गया है। मुहम्मद इफ्तिखार अली पर VOIP कनेक्शन के लिए करीब 70 हजार पाकिस्तानी रुपये खर्च करने का आरोप है। मोहम्मद जिया पर 80 हजार रुपये, मोहम्मद अब्बास नासिर पर 2.53 लाख रुपये, जावेद इकबाल पर 1.86 लाख रुपये और मुख्तार अहमद पर करीब 2.98 लाख रुपये देने का आरोप है। अहमद सईद पर करीब 21 लाख रुपये देने का आरोप लगाया गया है।

    FIA के मुताबिक 26/11 हमले से जुड़े ये लोग करीब 18 साल से फरार हैं। वहीं भारतीय खुफिया सूत्रों का दावा है कि इनमें से कई पाकिस्तान में ही मौजूद हैं। भारत का कहना है कि केवल नाम मोस्ट वांटेड सूची में शामिल करना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। पाकिस्तान की 2021 की सूची में 1,330 मोस्ट वांटेड आतंकियों के नाम थे, जबकि नई सूची में यह संख्या बढ़कर 1,804 हो गई है।

  • गणेश उत्सव से पहले बिजली कंपनी की तैयारी, 167 से अधिक विसर्जन स्थलों पर 2,958 फ्लडलाइट्स से होगी रोशनी

    गणेश उत्सव से पहले बिजली कंपनी की तैयारी, 167 से अधिक विसर्जन स्थलों पर 2,958 फ्लडलाइट्स से होगी रोशनी

    नई दिल्ली ।मुंबई में आगामी गणेश उत्सव को देखते हुए गणेश पंडालों के लिए अस्थायी बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत पंडालों को घरेलू दर पर अस्थायी बिजली कनेक्शन देने की सुविधा मिलेगी। आवेदन जमा करने के 48 घंटे के भीतर कनेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, ताकि उत्सव के दौरान पंडालों में बिजली आपूर्ति को लेकर परेशानी न हो।

    गणेश उत्सव के दौरान शहरभर में बड़ी संख्या में पंडाल लगाए जाते हैं, जहां रोशनी और अन्य व्यवस्थाओं के लिए बिजली की जरूरत होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिजली आपूर्ति से जुड़ी तैयारियां की गई हैं। पंडाल आयोजक अस्थायी बिजली कनेक्शन के लिए ‘न्यू कनेक्शन’ सेक्शन के जरिए आवेदन कर सकते हैं।

    बिजली कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य गणेश पंडालों को भरोसेमंद अस्थायी बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना है, ताकि उत्सव के दौरान बिजली व्यवस्था निर्बाध बनी रहे। कंपनी ने बताया कि पिछले वर्ष पूरे मुंबई में 1,000 से अधिक गणेश पंडालों को निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई गई थी।

    इस वर्ष कनेक्शन की मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने और पूरे उत्सव के दौरान भरोसेमंद बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। बिजली से जुड़ी किसी भी समस्या का तेजी से समाधान करने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम को रणनीतिक रूप से तैनात किया जाएगा।

    पंडालों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयोजकों से बिजली की वायरिंग के लिए केवल अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर का इस्तेमाल करने की अपील की गई है। आयोजकों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि पंडाल स्थल पर बिजली की वायरिंग पूरी तरह तैयार हो और मीटर केबिन में केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही प्रवेश मिले।

    सुरक्षा व्यवस्था के तहत कनेक्शन में मानक वायर और स्विच का इस्तेमाल करने, आपात स्थिति के लिए एक सिंगल आइसोलेशन पॉइंट रखने और तारों को मानक इंसुलेशन टेप से सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। मीटर केबिन और स्विच तक पहुंचने का रास्ता भी साफ रखने को कहा गया है।

    इसके अलावा पंडाल आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कनेक्टेड लोड स्वीकृत लोड से अधिक न हो। मीटर केबिन के पास स्पष्ट संचालन निर्देशों वाला फायर एक्सटिंग्विशर और डेंजर बोर्ड रखने के साथ उचित अर्थिंग सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है।

    पंडालों में अनधिकृत एक्सटेंशन या सीधे बिजली कनेक्शन का इस्तेमाल नहीं करने तथा वायरिंग में अनावश्यक जोड़ से बचने की हिदायत दी गई है। मीटर केबिन के प्रवेश द्वार तक पहुंच भी बाधित नहीं होनी चाहिए।

    सुरक्षा निर्देशों के तहत आम लोगों को फ्लडलाइट्स, पेडेस्टल्स, पंखों या इंसुलेटेड वायरिंग जॉइंट्स तक पहुंचने की अनुमति नहीं देने को कहा गया है। इसके साथ ही स्वीकृत सीमा से अधिक बिजली का इस्तेमाल न करने की अपील की गई है।

    गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान रोशनी की व्यवस्था के लिए 167 से अधिक विसर्जन स्थलों पर 2,958 फ्लडलाइट्स लगाए जाने की भी जानकारी दी गई है। इस तरह गणेश पंडालों के अस्थायी बिजली कनेक्शन के साथ विसर्जन स्थलों पर प्रकाश व्यवस्था की भी तैयारी की गई है।

  • कचरे और गंदगी से बेहाल मुंबई पर हाईकोर्ट नाराज, 26 वार्डों के अधिकारियों की सूची मांगकर दी कड़ी चेतावनी

    कचरे और गंदगी से बेहाल मुंबई पर हाईकोर्ट नाराज, 26 वार्डों के अधिकारियों की सूची मांगकर दी कड़ी चेतावनी

    नई दिल्ली ।मुंबई में कचरे और गंदगी की समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी BMC की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कंजूरमार्ग डंपिंग ग्राउंड के आसपास प्रदूषण से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत ने शहर की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए नगर निकाय को सख्त चेतावनी दी। न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने कहा कि मुंबई को अंतरराष्ट्रीय शहर कहा जाता है, लेकिन सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे की स्थिति इस दावे पर सवाल खड़े करती है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि शहर में जगह-जगह कचरा और गंदगी दिखाई दे रही है। अदालत ने BMC की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि क्या नगर निकाय की मशीनरी पूरी तरह निष्क्रिय हो गई है। अदालत के मुताबिक, सफाई व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी की स्थिति पैदा न हो और जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों का प्रभावी तरीके से पालन करें।

    हाईकोर्ट ने BMC को मुंबई के सभी 26 वार्डों में सार्वजनिक सड़कों की सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी करने वाले अधिकारियों की सूची पेश करने को कहा है। अदालत का यह निर्देश शहर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर वार्ड स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी अपना काम नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

    अदालत ने सुनवाई के दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की चेतावनी भी दी। कोर्ट ने कहा कि यदि वार्ड अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करते हैं तो अवमानना की कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इसके साथ ही BMC को सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए आखिरी मौका दिए जाने की बात कही गई।

    कचरे की समस्या पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की प्रवृत्ति का भी जिक्र किया। कोर्ट ने इस संदर्भ में सिंगापुर के सख्त नियमों का उदाहरण दिया। अदालत ने कहा कि वहां लोग केवल निर्धारित स्थानों पर ही कचरा डालते हैं और नियमों के पालन पर जोर दिया जाता है। मुंबई में भी सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर अदालत ने जोर दिया।

    हाईकोर्ट ने सफाई व्यवस्था के लिए स्पष्ट और प्रभावी मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP तैयार करने की आवश्यकता बताई। अदालत ने सवाल उठाया कि जब शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार गंदगी दिखाई दे रही है, तो मुंबई को अंतरराष्ट्रीय शहर कहने का आधार क्या है। अदालत की सख्ती से स्पष्ट है कि सफाई व्यवस्था में लापरवाही को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

    कंजूरमार्ग डंपिंग ग्राउंड से जुड़े प्रदूषण के मामलों की सुनवाई के दौरान सामने आई टिप्पणियों में अदालत ने नगर निकाय की जिम्मेदारी और अधिकारियों की जवाबदेही को प्रमुखता दी। BMC के सामने अब शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार करने और वार्ड स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सुनिश्चित करने की चुनौती है।

  • मुंबई में 20 बिल्लियों की हत्या से सनसनी, क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद पुलिस ने शुरू की जांच, CCTV फुटेज खंगाली

    मुंबई में 20 बिल्लियों की हत्या से सनसनी, क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद पुलिस ने शुरू की जांच, CCTV फुटेज खंगाली

    मुंबई: के चेंबूर इलाके में करीब 20 बिल्लियों की हत्या और उनके क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुंबई पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि इस घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।

    मामला चेंबूर के पंजरापोल इलाके का है। स्थानीय स्तर पर बिल्लियों की देखभाल करने वाली रूबीना पठान ने इन बिल्लियों के क्षत-विक्षत शव देखे। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। पशुओं के साथ क्रूरता के इस मामले में PETA India ने भी दखल दिया और स्थानीय कैट केयरगिवर तथा RCF पुलिस स्टेशन के साथ मिलकर FIR दर्ज कराने में मदद की।

    CCTV फुटेज से खुलेगा राज

    पुलिस के मुताबिक, फिलहाल आरोपियों की पहचान नहीं हो पाई है। जांच टीम इलाके में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिल्लियों को किसने और किस वजह से निशाना बनाया। इसके अलावा घटनास्थल और आसपास के इलाकों से भी जरूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

    इस घटना ने पशु प्रेमियों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ा दी है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बिल्लियों की हत्या और उनके शवों का क्षत-विक्षत हालत में मिलना सामान्य घटना नहीं माना जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या सभी घटनाएं एक ही व्यक्ति या समूह से जुड़ी हैं।

    PETA ने रखा 50 हजार रुपये का इनाम

    मामले में सुराग देने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए PETA India ने भी इनाम की घोषणा की है। संगठन ने ऐसी जानकारी देने वाले व्यक्ति को 50,000 रुपये तक का इनाम देने का ऐलान किया है, जिससे बिल्लियों की हत्या के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या व्यक्तियों की गिरफ्तारी और दोषसिद्धि में मदद मिल सके।

    मुंबई पुलिस ने इस मामले में BNS की धारा 325 और पशु क्रूरता रोकथाम कानून की धारा 11 के तहत केस दर्ज किया है। BNS की धारा 325 के तहत किसी जानवर को मारना, जहर देना या उसे गंभीर रूप से घायल करना अपराध है। दोषी साबित होने पर 5 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

  • कोफोर्ज के बोर्ड मूल्यांकन में सामने आई खामियों के बाद चेयरमैन ओपी भट्ट ने इस्तीफा दिया, शेयर करीब नौ प्रतिशत तक टूटा

    कोफोर्ज के बोर्ड मूल्यांकन में सामने आई खामियों के बाद चेयरमैन ओपी भट्ट ने इस्तीफा दिया, शेयर करीब नौ प्रतिशत तक टूटा

    नई दिल्ली । मिडकैप आईटी कंपनी कोफोर्ज के इंटरनल ऑडिट में बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर चिंताएं सामने आने के बाद कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और चेयरमैन ओपी भट्ट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। भट्ट के इस्तीफे की जानकारी सामने आने के बाद बुधवार को कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली और कारोबार के दौरान स्टॉक करीब नौ प्रतिशत तक नीचे चला गया।

    कारोबार के दौरान कोफोर्ज के शेयर ने 1,780.70 रुपये का इंट्राडे निचला स्तर दर्ज किया। यह स्तर कंपनी के पिछले बंद भाव 1,950 रुपये की तुलना में करीब 8.71 प्रतिशत कम था। हालांकि बाद में शेयर में कुछ सुधार दिखाई दिया। सुबह 10:45 बजे तक कोफोर्ज का शेयर 4.50 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,862 रुपये पर कारोबार कर रहा था।

    कंपनी की रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के इंटरनल ऑडिट प्लान के तहत इंटरनल ऑडिटर ने बोर्ड इवैल्यूएशन प्रक्रिया की समीक्षा की। इसके साथ ही उस प्रक्रिया से तैयार की गई बोर्ड इवैल्यूएशन रिपोर्ट यानी बीईआर की भी जांच की गई। यह पूरी प्रक्रिया ओपी भट्ट की देखरेख में हुई थी।

    ऑडिट के दौरान बोर्ड के मूल्यांकन से संबंधित जानकारी को प्रोसेस करने और उसके डिस्क्लोजर से जुड़ी कुछ कमियां सामने आईं। इन कमियों में चेयरमैन के प्रदर्शन के मूल्यांकन से संबंधित जानकारी भी शामिल थी। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जब बोर्ड इवैल्यूएशन रिपोर्ट को बोर्ड के सामने रखा गया, तब उसमें मौजूद या उससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां बोर्ड के सदस्यों के सामने पूरी तरह प्रस्तुत नहीं की गई थीं।

    इंटरनल ऑडिटर की रिपोर्ट सामने आने के बाद बोर्ड ने ओपी भट्ट से इस मामले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। भट्ट ने अपने पक्ष का बचाव करते हुए कहा कि बोर्ड के मूल्यांकन की प्रक्रिया के दौरान उन्होंने नेक नीयत से काम किया था। हालांकि, बोर्ड की ओर से उनके स्पष्टीकरण की समीक्षा पूरी होने और मामले पर कोई अंतिम निर्णय लिए जाने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।

    ओपी भट्ट ने 8 सितंबर को अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद कंपनी ने मौजूदा नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर विवेक शर्मा को अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 31 जनवरी, 2027 तक प्रभावी रहेगी।

    कंपनी के अनुसार, ओपी भट्ट वॉकहार्ट लिमिटेड के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर भी हैं। वहां वह ऑडिट, स्टेकहोल्डर्स रिलेशनशिप और कैपिटल जुटाने से संबंधित कमेटियों के सदस्य के तौर पर जुड़े हुए हैं। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद कोफोर्ज के शेयर में आई तेज गिरावट ने बाजार में तत्काल प्रतिक्रिया को स्पष्ट किया।

  • 2018 की टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत की कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार, छह सप्ताह की राहत जारी

    2018 की टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत की कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार, छह सप्ताह की राहत जारी



    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2018 में की गई टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने उनके खिलाफ मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से जारी समन और मामले की आगे की कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, राहुल गांधी को तत्काल राहत देते हुए अदालत ने 2021 में जारी अंतरिम आदेश को छह सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है।

    पूरा मामला सितंबर 2018 का है। उस समय राजस्थान में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने राफेल डील का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। अपने भाषण में उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए ‘कमांडर-इन-चीफ’ और ‘चौकीदार चोर है’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद उन्होंने भाषण का वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया था।

    राहुल गांधी की इस टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने वर्ष 2019 में मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। ऐसे में उनके खिलाफ चोरी से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणी से पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

    शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अगस्त 2019 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने समन को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने अदालत से मानहानि मामले की कार्यवाही के साथ मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी समन को भी रद्द करने का अनुरोध किया था।

    राहुल गांधी के वकीलों ने हाई कोर्ट में दलील दी कि शिकायत दर्ज कराने वाला व्यक्ति इस मामले में सीधे तौर पर पीड़ित पक्ष नहीं है। उनका कहना था कि राहुल गांधी की टिप्पणी किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि एक व्यक्ति विशेष को लेकर थी। इसी आधार पर वकीलों ने दावा किया कि किसी पार्टी कार्यकर्ता को इस तरह की टिप्पणी के आधार पर मानहानि का मुकदमा दायर करने का कानूनी अधिकार नहीं बनता।

    इस दलील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एन. आर. बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने शशि थरूर से संबंधित पुराने फैसले का भी संदर्भ दिया। कोर्ट ने कहा कि भाजपा एक पंजीकृत और पहचान योग्य राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी है तथा प्रधानमंत्री उसके प्रमुख प्रतिनिधि हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी से पार्टी के कार्यकर्ताओं की मानहानि होने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

    हाई कोर्ट ने यह भी माना कि मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश में ऐसा कोई गैर-कानूनी या अनुचित आधार नहीं है, जिसके चलते उसे रद्द किया जाए। इसी कानूनी आधार पर राहुल गांधी की याचिका को खारिज कर दिया गया।

    हालांकि, फैसले के बावजूद राहुल गांधी को छह सप्ताह की अंतरिम राहत मिली है। उनके वकीलों के अनुरोध पर अदालत ने 2021 में जारी अंतरिम आदेश की अवधि बढ़ा दी है। इसके तहत अगले छह सप्ताह तक मजिस्ट्रेट अदालत में मामले की सुनवाई स्थगित रहेगी और राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने से भी छूट मिलेगी। इस अवधि में वह हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।