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  • TISS दीक्षांत समारोह में बड़ा बदलाव, CJI सूर्यकांत की जगह डॉ. सीएस प्रमेश होंगे 22 अगस्त को मुख्य अतिथि

    TISS दीक्षांत समारोह में बड़ा बदलाव, CJI सूर्यकांत की जगह डॉ. सीएस प्रमेश होंगे 22 अगस्त को मुख्य अतिथि

    नई दिल्ली । मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने अपने 86वें दीक्षांत समारोह के लिए मुख्य अतिथि के रूप में किए गए बदलाव की जानकारी दी है। 22 अगस्त को आयोजित होने वाले समारोह में अब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मुख्य अतिथि नहीं होंगे। उनकी जगह टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सीएस प्रमेश को मुख्य अतिथि बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब हाल के दिनों में CJI को लेकर हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में छात्रों के विरोध का मामला चर्चा में रहा है।

    TISS के दीक्षांत समारोह के लिए पहले CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्हें समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित भी करना था। हालांकि अब संस्थान ने कार्यक्रम में बदलाव करते हुए डॉ. सीएस प्रमेश को मुख्य अतिथि बनाया है। डॉ. प्रमेश टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के निदेशक होने के साथ मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर में थोरैसिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष भी हैं।

    TISS का यह दीक्षांत समारोह पहले 2 अगस्त को आयोजित किया जाना था, लेकिन आयोजन से ठीक दो दिन पहले इसे स्थगित कर दिया गया था। संस्थान ने उस समय अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला देते हुए कार्यक्रम को टालने का फैसला किया था। संस्थान के अनुसार, उस समय छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और आमंत्रित अतिथियों की सुरक्षा के साथ सामान्य कैंपस गतिविधियों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता थी।

    कार्यक्रम स्थगित किए जाने के बाद CJI सूर्यकांत की संभावित मौजूदगी को लेकर कैंपस में विरोध की आशंका भी सामने आई थी। इसके बाद अब 22 अगस्त के कार्यक्रम के लिए मुख्य अतिथि बदलने का निर्णय लिया गया है। हालांकि संस्थान की ओर से बदलाव के पीछे किसी एक कारण को औपचारिक रूप से अंतिम आधार के रूप में नहीं बताया गया है।

    इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में NALSAR का विवाद भी महत्वपूर्ण है। हैदराबाद स्थित इस प्रमुख विधि विश्वविद्यालय में CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर छात्रों के एक वर्ग ने आपत्ति जताई थी। शुरुआत में करीब 70 छात्रों के विरोध से शुरू हुआ मामला बाद में 450 से अधिक छात्रों तक पहुंच गया था।

    छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र देकर निमंत्रण वापस लेने की मांग की थी। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से पूरे 2026 बैच के छात्रों के वकील के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया गया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद CJI सूर्यकांत ने छात्रों को अपनी बात रखने के अधिकार पर जोर दिया और दंडात्मक कार्रवाई से बचने की बात कही।

    इसके बाद संबंधित निर्देश वापस ले लिया गया और विवाद कुछ हद तक शांत हुआ। CJI सूर्यकांत ने बाद में यह भी स्पष्ट किया था कि उन्होंने NALSAR के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया था। ऐसे में उनके समारोह में शामिल होने का प्रश्न भी नहीं उठता था।

    TISS के मामले में मुख्य अतिथि के बदलाव ने उच्च शिक्षा संस्थानों में दीक्षांत समारोहों के आयोजन, कैंपस वातावरण और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल 22 अगस्त के समारोह में डॉ. सीएस प्रमेश विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे और दीक्षांत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की भूमिका निभाएंगे।

  • अमिताभ बच्चन ने मुंबई में तीन फ्लोर 33 लाख मासिक किराए पर दिए, पांच साल में 21.88 करोड़ की डील

    अमिताभ बच्चन ने मुंबई में तीन फ्लोर 33 लाख मासिक किराए पर दिए, पांच साल में 21.88 करोड़ की डील


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन फिल्मों के साथ अपने रियल एस्टेट निवेश को लेकर भी लगातार चर्चा में रहते हैं। अब मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित ओशिवारा इलाके में उनकी एक नई प्रॉपर्टी डील सामने आई है। उन्होंने सिग्नेचर बिल्डिंग की तीन ऊपरी मंजिलें एक न्यूट्रिशन ब्रांड को पांच साल की लीज पर दी हैं। इस सौदे से उन्हें हर महीने 33 लाख रुपये किराए के तौर पर मिलने की जानकारी सामने आई है।

    प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, यह लीज अंधेरी वेस्ट में लिंक रोड पर स्थित सिग्नेचर बिल्डिंग के तीन फ्लोर के लिए हुई है। इन तीनों मंजिलों का कुल कारपेट एरिया करीब 8,428 वर्ग फुट बताया गया है। पांच साल की लीज 15 अगस्त 2026 से शुरू हुई है।

    इस पूरे लीज एग्रीमेंट की अवधि में किराए की कुल रकम करीब 21.88 करोड़ रुपये बैठती है। मौजूदा दर के हिसाब से प्रति वर्ग फुट मासिक किराया लगभग 392 रुपये है। समझौते में किराए में हर साल पांच प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान भी रखा गया है। यानी लीज आगे बढ़ने के साथ अमिताभ बच्चन की मासिक आय में भी निर्धारित वृद्धि होती रहेगी।

    इस सौदे में सिर्फ कार्यालय या व्यावसायिक जगह का इस्तेमाल ही शामिल नहीं है, बल्कि पार्किंग की सुविधा भी दी गई है। दस्तावेजों के मुताबिक, किरायेदार को बिल्डिंग की निर्धारित पार्किंग में नौ गाड़ियां खड़ी करने का अधिकार मिला है। इसके अलावा करीब 1.98 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा की गई है।

    जिस कंपनी ने ये तीन फ्लोर लीज पर लिए हैं, वह न्यूट्रिशन क्षेत्र में काम करने वाली TruNativ F&B Private Limited है। इस नए सौदे के साथ अमिताभ बच्चन के मुंबई स्थित कमर्शियल रियल एस्टेट पोर्टफोलियो में एक और संपत्ति जुड़ गई है। इससे पहले भी वह अपनी कई व्यावसायिक संपत्तियों को कॉरपोरेट कंपनियों को किराए पर दे चुके हैं।

    साल 2023 में अमिताभ बच्चन ने मुंबई की लोटस सिग्नेचर बिल्डिंग में चार ऑफिस यूनिट्स वॉर्नर म्यूजिक प्राइवेट लिमिटेड को किराए पर दी थीं। उस सौदे में उन्हें करीब 17.30 लाख रुपये प्रति माह किराया मिलने की जानकारी सामने आई थी। उस लीज में 12 समर्पित पार्किंग स्पेस भी शामिल थे।

    अमिताभ बच्चन का रियल एस्टेट निवेश मुंबई तक सीमित नहीं है। अयोध्या में भी उन्होंने जमीन में निवेश किया है। मार्च 2026 में उन्होंने करीब 2.67 एकड़ जमीन 35 करोड़ रुपये में खरीदी थी। यह अयोध्या में संबंधित डेवलपर के साथ उनका तीसरा निवेश बताया गया है।

    अयोध्या की जमीन को लेकर डेवलपर की ओर से यह भी बताया गया था कि अमिताभ बच्चन ने खुद जमीन खरीदने को लेकर संपर्क किया था। इस निवेश के साथ अभिनेता की रियल एस्टेट गतिविधियों का दायरा मुंबई से बाहर भी बढ़ता दिखाई देता है।

    मुंबई में तीन फ्लोर की ताजा लीज यह बताती है कि अमिताभ बच्चन की संपत्ति से नियमित आय का एक महत्वपूर्ण माध्यम कमर्शियल रियल एस्टेट भी है। पांच साल में 21.88 करोड़ रुपये की अनुमानित किराया राशि और सालाना पांच प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान इस सौदे को खास बनाता है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में बंद, सेंसेक्स 113 अंक फिसला लेकिन 78 हजार के स्तर के ऊपर रहा

    भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में बंद, सेंसेक्स 113 अंक फिसला लेकिन 78 हजार के स्तर के ऊपर रहा


    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को पूरे कारोबारी सत्र के दौरान सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला। वैश्विक संकेतों, महंगाई के आंकड़ों और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिमों के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 113.61 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,079.96 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 40.10 अंक यानी 0.16 प्रतिशत टूटकर 24,395.85 पर बंद हुआ।

    बाजार में शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद कारोबार का रुख अपेक्षाकृत सीमित रहा। प्रमुख सूचकांकों में मामूली गिरावट के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी का रुझान दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 97.15 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 64,121.55 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 53.45 अंक यानी 0.27 प्रतिशत बढ़कर 19,875 पर पहुंच गया।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले इंडेक्स में रहा और इसमें 1.55 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। निफ्टी रियल्टी में भी 0.97 प्रतिशत की तेजी रही। इसके अलावा एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, आईटी, कंजम्पशन, मीडिया, पीएसई और ऑटो से जुड़े शेयरों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला।

    दूसरी ओर निफ्टी मेटल, प्राइवेट बैंक, कमोडिटीज, ऑयल एंड गैस, फाइनेंशियल सर्विसेज और पीएसयू बैंक सूचकांकों में कमजोरी रही। इससे बाजार में अलग-अलग क्षेत्रों के बीच प्रदर्शन में अंतर दिखाई दिया और व्यापक स्तर पर निवेशकों का रुख पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में इंडिगो, एनटीपीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एलएंडटी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इटरनल, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, एचसीएल टेक, आईटीसी, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा और एमएंडएम में बढ़त रही।

    इसके विपरीत आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट्स, इंफोसिस, टाटा स्टील, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी और एक्सिस बैंक दबाव में रहे। इन शेयरों में कमजोरी का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया।

    बाजार की धारणा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में भारत और अमेरिका के महंगाई आंकड़े भी शामिल रहे। बाजार जानकारों के अनुसार, दोनों देशों में महंगाई के आंकड़े अपेक्षाओं से कम रहने के कारण निवेशकों को कुछ राहत मिली। इससे यह उम्मीद मजबूत हुई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक निकट अवधि में मौद्रिक नीति को लेकर सतर्क और संयमित रुख अपना सकते हैं।

    हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजार के लिए अभी भी महत्वपूर्ण जोखिम बनी हुई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए तेल कीमतों में लंबे समय तक तेजी का असर मुद्रास्फीति, व्यापार संतुलन और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।

    मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता भी निवेशकों को जोखिम लेने से रोक रही है। इसके बावजूद कंपनियों के तिमाही नतीजों से घरेलू मांग और कॉरपोरेट प्रदर्शन को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। मजबूत कंपनियों के नतीजों ने बाहरी दबावों के प्रभाव को सीमित करने में मदद की है।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, विदेशी निवेश के प्रवाह और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत संकेतों से प्रभावित हो सकती है। फिलहाल प्रमुख सूचकांकों में सीमित गिरावट और मिडकैप-स्मॉलकैप में मजबूती यह संकेत देती है कि निवेशकों का रुख सतर्क होने के बावजूद पूरी तरह नकारात्मक नहीं है।

  • तेज डिलीवरी के पीछे की चुनौतियां उजागर, डार्क स्टोर की स्वच्छता और गिग वर्कर्स की सुरक्षा पर बढ़ी सरकारी सख्ती

    तेज डिलीवरी के पीछे की चुनौतियां उजागर, डार्क स्टोर की स्वच्छता और गिग वर्कर्स की सुरक्षा पर बढ़ी सरकारी सख्ती


    नई दिल्ली । शहरी जीवन में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने खरीदारी का तरीका तेजी से बदल दिया है। दूध, सब्जियां, ब्रेड, स्नैक्स और रोजमर्रा की जरूरत का सामान अब कुछ ही मिनटों में घर तक पहुंचने लगा है। Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसी सेवाओं ने तेज डिलीवरी को अपनी पहचान बनाया, लेकिन इस मॉडल की चुनौतियां भी अब सामने आ रही हैं।

    सबसे बड़ा सवाल डिलीवरी की रफ्तार को लेकर है। जनवरी 2026 में केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय ने प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनियों के साथ चर्चा कर 10 मिनट की डिलीवरी के प्रचार से पीछे हटने को कहा था। इसके पीछे डिलीवरी पार्टनर्स पर पड़ने वाले समय के दबाव और उनकी सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता प्रमुख थी। इसके बाद कंपनियों ने अपने प्रचार और ब्रांडिंग से 10 मिनट में डिलीवरी के दावे हटाने शुरू किए।

    इस कदम ने यह सवाल खड़ा किया कि ग्राहक को सामान जल्दी उपलब्ध कराने की होड़ का वास्तविक दबाव किस पर पड़ता है। डिलीवरी पार्टनर को ऑर्डर स्वीकार करने, डार्क स्टोर तक पहुंचने, सामान लेने और ट्रैफिक के बीच ग्राहक तक पहुंचने के लिए सीमित समय में कई काम करने होते हैं। ऐसे माहौल में जल्दबाजी सड़क सुरक्षा के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।

    क्विक कॉमर्स की दूसरी बड़ी चुनौती खाद्य सुरक्षा और डार्क स्टोर की स्वच्छता से जुड़ी है। डार्क स्टोर ऐसे केंद्र होते हैं जहां ग्राहकों के लिए सामान रखा, संभाला और पैक किया जाता है। ग्राहक इन जगहों पर सीधे खरीदारी नहीं करते, लेकिन उनके घर पहुंचने वाले खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता काफी हद तक इन्हीं केंद्रों की व्यवस्था पर निर्भर करती है।

    हाल में मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित Blinkit से जुड़े एक डार्क स्टोर पर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कार्रवाई की। निरीक्षण के दौरान परिसर में स्वच्छता से जुड़ी गंभीर कमियां और कॉकरोच की मौजूदगी सामने आने के बाद खाद्य लाइसेंस निलंबित किया गया। यह कार्रवाई इस बात को रेखांकित करती है कि तेज डिलीवरी के साथ भंडारण और साफ सफाई के मानकों का पालन भी जरूरी है।

    इसी तरह बेंगलुरु के होस्कोटे क्षेत्र में Zepto से जुड़े एक वेयरहाउस पर भी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कार्रवाई की। निरीक्षण में खाद्य पदार्थों की स्टोरेज और हैंडलिंग, लेबलिंग तथा स्वच्छता से संबंधित कई कमियां पाई गईं। इसके बाद संबंधित वेयरहाउस को सील किया गया। इन घटनाओं ने क्विक कॉमर्स कंपनियों की सप्लाई चेन और डार्क स्टोर संचालन पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत को सामने रखा है।

    क्विक कॉमर्स मॉडल में सुविधा और गति दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन खाद्य पदार्थों के मामले में केवल कम डिलीवरी समय पर्याप्त नहीं है। दूध, फल, सब्जियां, ब्रेड और पैकेज्ड फूड जैसे उत्पादों की सही स्थिति बनाए रखने के लिए उचित तापमान, साफ-सफाई, स्टोरेज और हैंडलिंग जरूरी है। यदि इन मानकों में कमी रहती है तो कुछ मिनट की बचत ग्राहक के लिए वास्तविक लाभ नहीं रह जाती।

    इसके साथ ही गिग वर्कर्स के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा भी चर्चा के केंद्र में हैं। सरकार की ओर से क्विक कॉमर्स और अन्य प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स को ई-श्रम व्यवस्था से जोड़ने तथा सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि इस क्षेत्र का भविष्य केवल तेज डिलीवरी पर नहीं, बल्कि सुरक्षित कामकाज और बेहतर नियमन पर भी निर्भर करेगा।

    क्विक कॉमर्स उद्योग के लिए अब चुनौती यह है कि वह सुविधा और गति के साथ सुरक्षा, स्वच्छता और श्रमिक हितों के बीच संतुलन बनाए। ग्राहक के लिए कुछ मिनट कम महत्वपूर्ण हैं, यदि उसके बदले डिलीवरी पार्टनर की सुरक्षा या खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता से समझौता करना पड़े। आने वाले समय में इस क्षेत्र की विश्वसनीयता इसी संतुलन से तय होगी।

  • 6 सितंबर से शुरू होगा बिग बॉस 20, नए जीवनदान कॉन्सेप्ट के साथ प्रतियोगियों को मिल सकता है गेम में अतिरिक्त मौका

    6 सितंबर से शुरू होगा बिग बॉस 20, नए जीवनदान कॉन्सेप्ट के साथ प्रतियोगियों को मिल सकता है गेम में अतिरिक्त मौका

    नई दिल्ली ।सलमान खान एक बार फिर लोकप्रिय रियलिटी शो बिग बॉस के नए सीजन के साथ दर्शकों के बीच लौटने के लिए तैयार हैं। बिग बॉस 20 को लेकर पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है और अब नए प्रोमो ने शो के इस सीजन में होने वाले एक बड़े बदलाव की झलक दिखा दी है। इस बार मेकर्स ने एक्स्ट्रा जीवनदान का कॉन्सेप्ट पेश किया है, जो प्रतियोगियों के गेम खेलने के तरीके और घर में बने रहने की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

    नए सीजन के प्रोमो में सलमान खान ने भी इस खास ट्विस्ट के बारे में संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि बिग बॉस में हर साल गेम बदलता है, लेकिन इस बार केवल गेम में बदलाव नहीं होगा, बल्कि उसे खेलने का तरीका भी बदलने वाला है। सलमान ने जीवनदान को लेकर यह भी कहा कि सुनने में यह जितना सीधा लगता है, वास्तव में उतना आसान नहीं है। उनके इस बयान ने नए कॉन्सेप्ट को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है।

    सलमान खान ने शो के नए प्रोमो की झलक अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा की है। प्रोमो के साथ उन्होंने बताया कि सभी घरवालों के लिए दो जिंदगियों का वरदान होगा। इसी के साथ उन्होंने बिग बॉस 20 के 6 सितंबर से शुरू होने की जानकारी भी दी। नए सीजन में सलमान खान एक बार फिर शो की मेजबानी करते दिखाई देंगे।

    प्रोमो की शुरुआत अखाड़े जैसे माहौल में दो योद्धाओं के बीच मुकाबले से होती है। दोनों के बीच टकराव के बाद सलमान खान की एंट्री होती है और वह इस सीजन के खास ट्विस्ट का खुलासा करते हैं। प्रोमो में एक्स्ट्रा जीवनदान को प्रतियोगियों के लिए अतिरिक्त अवसर के तौर पर पेश किया गया है।

    इस कॉन्सेप्ट के तहत प्रतियोगियों को गेम में टिके रहने का एक अतिरिक्त मौका मिलने की संभावना है। यदि किसी कंटेस्टेंट के सामने एलिमिनेशन जैसी स्थिति आती है, तो यह जीवनदान उसके सफर को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इसका इस्तेमाल किस नियम के तहत होगा और किन परिस्थितियों में प्रतियोगी इसका लाभ उठा सकेंगे।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सभी प्रतियोगियों को यह जीवनदान शुरुआत में ही उपलब्ध होगा या इसे किसी टास्क के जरिए हासिल करना पड़ेगा। यह भी साफ नहीं है कि इसका इस्तेमाल सीधे नॉमिनेशन के दौरान किया जा सकेगा या इसके लिए बिग बॉस की ओर से कोई विशेष प्रक्रिया निर्धारित होगी।

    अगर जीवनदान सीमित परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाता है, तो प्रतियोगियों के लिए सही समय पर इसका उपयोग करना भी रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है। इससे घर के अंदर नॉमिनेशन, आपसी समीकरण और टास्क के दौरान लिए जाने वाले फैसलों पर असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, इन नियमों की वास्तविक तस्वीर शो शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

    बिग बॉस 20 का प्रीमियर 6 सितंबर को होगा। शो कलर्स टीवी पर प्रसारित होने के साथ जियो हॉटस्टार पर भी स्ट्रीम किया जाएगा। सलमान खान की वापसी और एक्स्ट्रा जीवनदान जैसे नए कॉन्सेप्ट ने सीजन की शुरुआत से पहले ही दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घर के अंदर यह नया ट्विस्ट प्रतियोगियों के गेम को किस तरह प्रभावित करता है।

  • सेबी प्रमुख ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन को बाजार सुधार बताया, कहा हेरफेर के सबूत नहीं मिले, भागीदारी बढ़ाना अब प्राथमिकता

    सेबी प्रमुख ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन को बाजार सुधार बताया, कहा हेरफेर के सबूत नहीं मिले, भागीदारी बढ़ाना अब प्राथमिकता


    नई दिल्ली ।भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बुधवार को कहा कि शेयर बाजारों में हाल ही में लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में अब तक हेरफेर या किसी तरह की अनियमितता के प्रमाण नहीं मिले हैं। उन्होंने नई व्यवस्था को भारतीय पूंजी बाजार की संरचना में महत्वपूर्ण सुधार बताते हुए कहा कि इससे देश का बाजार वैश्विक मानकों के और करीब आएगा।

    मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में पांडे ने कहा कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन बाजार की माइक्रोस्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव है और नियामक इस व्यवस्था के पीछे मजबूती से खड़ा है। उनके मुताबिक दुनिया के कई प्रमुख बाजार पहले से इस तरह की प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं। जापान ने 2024 में इसे लागू किया था, जबकि हांगकांग, अमेरिका, जर्मनी, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी क्लोजिंग ऑक्शन जैसी व्यवस्था मौजूद है।

    सेबी प्रमुख ने कहा कि किसी शेयर के क्लोजिंग प्राइस का सही और निष्पक्ष निर्धारण पूंजी बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी कीमत के आधार पर कई प्रमुख शेयर सूचकांकों, पैसिव निवेश उत्पादों और म्यूचुअल फंडों की नेट एसेट वैल्यू तय होती है। ऐसे में दिन के अंतिम मूल्य को अधिक पारदर्शी तरीके से निर्धारित करने की जरूरत रहती है।

    नई व्यवस्था में नियमित कारोबार समाप्त होने के बाद 20 मिनट का विशेष क्लोजिंग ऑक्शन सेशन आयोजित किया जाता है। इस दौरान शेयरों की खरीद और बिक्री से जुड़े ऑर्डर एकत्र किए जाते हैं और उस स्तर पर क्लोजिंग प्राइस निर्धारित किया जाता है, जहां अधिकतम संभव मात्रा में सौदों का मिलान हो सके। इसका उद्देश्य बाजार बंद होने के समय किसी शेयर के उचित मूल्य का बेहतर निर्धारण करना है।

    इससे पहले क्लोजिंग प्राइस निर्धारित करने के लिए नियमित कारोबार के अंतिम 30 मिनट के दौरान हुए सौदों के भारित औसत मूल्य को आधार बनाया जाता था। नई व्यवस्था इसी प्रक्रिया का स्थान लेती है और अंतिम कीमत तय करने में ऑर्डर मिलान की प्रक्रिया को अधिक प्रमुख भूमिका देती है।

    पांडे ने कहा कि इस समय सेबी का मुख्य ध्यान नई प्रणाली में बाजार सहभागिता बढ़ाने पर है। कई ब्रोकरों की ओर से भी यह संकेत मिला है कि निवेशकों और अन्य बाजार प्रतिभागियों की भागीदारी को बढ़ाने की आवश्यकता है। नियामक का मानना है कि व्यवस्था की बेहतर समझ विकसित होने के साथ इसमें भागीदारी भी बढ़ सकती है।

    उन्होंने कहा कि क्लोजिंग ऑक्शन एक पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसमें बाजार गतिविधियां दिखाई देती हैं और उपलब्ध खरीद तथा बिक्री आदेशों के आधार पर निष्पक्ष मूल्य निर्धारित करने का प्रयास किया जाता है। सेबी इस व्यवस्था के संचालन की लगातार निगरानी कर रही है और बाजार से मिलने वाले फीडबैक का भी आकलन किया जा रहा है।

    सेबी प्रमुख के अनुसार नियामक विभिन्न हितधारकों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। यदि व्यवस्था में भागीदारी बढ़ाने या प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत महसूस होती है तो उन सुझावों पर विचार किया जाएगा। फिलहाल किसी हेरफेर के प्रमाण नहीं मिलने को उन्होंने बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बताया।

    नई व्यवस्था का महत्व विशेष रूप से उन बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए भी माना जा रहा है, जिनके बड़े ऑर्डर अक्सर कारोबारी सत्र के अंतिम समय में निष्पादित होते हैं। नियामक की उम्मीद है कि अधिक भागीदारी और बेहतर समझ के साथ क्लोजिंग ऑक्शन सेशन भारतीय पूंजी बाजार में मूल्य निर्धारण को अधिक कुशल, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में मदद करेगा।

  • टाटा संस में नेतृत्व बदलाव की आहट से निवेशक सतर्क, टाटा मोटर्स, टाइटन और टाटा स्टील के शेयर फिसले

    टाटा संस में नेतृत्व बदलाव की आहट से निवेशक सतर्क, टाटा मोटर्स, टाइटन और टाटा स्टील के शेयर फिसले

    नई दिल्ली ।टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के लिए खुद को उपलब्ध नहीं कराने की घोषणा के बाद बुधवार को टाटा समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने नेतृत्व परिवर्तन की खबर पर सतर्क प्रतिक्रिया दी और समूह की प्रमुख कंपनियों में बिकवाली बढ़ गई। कारोबार के दौरान कुछ शेयरों में करीब छह प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

    सबसे अधिक दबाव टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के शेयरों पर दिखाई दिया। कारोबार के दौरान टीसीएस का शेयर करीब 5.9 प्रतिशत तक टूटकर 2,300.10 रुपये के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और यह लगभग 4.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,328 रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया।

    टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयरों में भी करीब चार प्रतिशत तक कमजोरी रही। सत्र के दौरान यह 334.20 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया, जो लगभग 3.85 प्रतिशत की गिरावट थी। टाटा स्टील के शेयर भी दो प्रतिशत से अधिक फिसले और एक समय 2.4 प्रतिशत गिरकर 183.60 रुपये के स्तर तक पहुंच गए।

    टाइटन के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली और यह करीब 2.65 प्रतिशत गिरकर 4,992 रुपये के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयर भी लगभग दो प्रतिशत कमजोर रहे। समूह की अन्य कंपनियों में टाटा एलेक्सी, टाटा कम्युनिकेशंस, टाटा टेक्नोलॉजीज, टाटा पावर और ट्रेंट के शेयरों में भी करीब दो प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

    टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल कारोबार से जुड़े शेयर, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और तेजस नेटवर्क्स भी दबाव में रहे। हालांकि कारोबार आगे बढ़ने के साथ कुछ कंपनियों के शेयरों में निचले स्तर से सुधार देखने को मिला। दूसरी ओर टाटा केमिकल्स ने इस कमजोर माहौल में मजबूती दिखाई और उसके शेयरों में करीब दो प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    चंद्रशेखरन ने बुधवार को घोषणा की कि वह टाटा संस के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। हालांकि वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे, जो 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। उनका यह फैसला टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक से पहले सामने आया है।

    इस घोषणा के साथ टाटा समूह में करीब नौ वर्षों से चले आ रहे चंद्रशेखरन के शीर्ष नेतृत्व के अगले वर्ष समाप्त होने की स्थिति स्पष्ट हो गई है। चंद्रशेखरन वर्ष 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे और करीब तीन दशक तक टीसीएस में विभिन्न भूमिकाओं में काम किया। वर्ष 2009 में वह टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने। जनवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया।

    टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। समूह की विभिन्न कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, धातु, ऊर्जा, विमानन और एफएमसीजी समेत कई क्षेत्रों में कारोबार करती हैं। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाइटन जैसी बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के प्रदर्शन पर समूह के नेतृत्व से जुड़े फैसलों का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ता है।

    अब बाजार की नजर टाटा संस के अगले चेयरमैन के चयन और नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पर रहेगी। निवेशक यह भी देखेंगे कि नया नेतृत्व समूह की मौजूदा कारोबारी रणनीति, निवेश प्राथमिकताओं और विभिन्न कंपनियों के विकास को किस दिशा में आगे बढ़ाता है। फिलहाल चंद्रशेखरन के कार्यकाल से जुड़े इस फैसले ने टाटा समूह के शेयरों में निकट अवधि की अनिश्चितता बढ़ा दी है।

  • उतार-चढ़ाव के बीच मामूली बढ़त पर बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 43 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,583 पर पहुंचा

    उतार-चढ़ाव के बीच मामूली बढ़त पर बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 43 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,583 पर पहुंचा


    नई दिल्ली । हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में पूरे सत्र के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर समझौते की अनिश्चितता का असर निवेशकों के रुख पर दिखाई दिया। कारोबार के दौरान बाजार में कई बार तेजी और कमजोरी के दौर आए, लेकिन अंत में प्रमुख सूचकांक मामूली बढ़त के साथ बंद हुए।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 43.27 अंक यानी 0.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,542.44 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 13.15 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली तेजी दर्ज की गई और यह 24,583.80 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों की सीमित बढ़त से संकेत मिला कि निवेशकों ने मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख बनाए रखा।

    व्यापक बाजार में हालांकि तस्वीर कुछ अलग रही। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.62 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.27 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ। इसके बावजूद दोनों सूचकांक अपने-अपने रिकॉर्ड उच्च स्तरों के आसपास बने हुए हैं। इससे व्यापक बाजार में अब भी मजबूती कायम रहने का संकेत मिलता है।

    क्षेत्रवार कारोबार में निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा और इसमें करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। फार्मा और एफएमसीजी क्षेत्र के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इसके विपरीत निफ्टी रियल्टी ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार की कमजोरी के बीच मजबूती दिखाई।

    निफ्टी50 में टाइटन, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम और टाटा स्टील प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। इन कंपनियों के शेयरों में खरीदारी का रुख दिखाई दिया और इन्होंने सूचकांक को संभालने में योगदान दिया।

    दूसरी ओर एसबीआई, इटरनल, आईटीसी, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टीसीएस, विप्रो और कोल इंडिया के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इन प्रमुख शेयरों में बिकवाली के कारण बाजार की बढ़त सीमित रही और कारोबार का समग्र रुख सपाट बना रहा।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 24,750 से 24,800 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस क्षेत्र माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस दायरे के ऊपर मजबूती से टिकता है तो आगे 24,950 और फिर 25,100 के स्तर की ओर बढ़ने की संभावना बन सकती है।

    वहीं, बाजार में कमजोरी आने पर 24,450 से 24,420 का क्षेत्र निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट जोन रहेगा। इस स्तर के ऊपर सूचकांक के बने रहने तक बाजार की व्यापक संरचना सकारात्मक रहने की उम्मीद है। ऐसे में वैश्विक घटनाक्रम, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी स्थिति, आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बनी रहेगी।

  • शेयर बाजार की शीर्ष कंपनियों में बड़ा बदलाव, एसबीआई की वैल्यूएशन में सबसे ज्यादा बढ़त

    शेयर बाजार की शीर्ष कंपनियों में बड़ा बदलाव, एसबीआई की वैल्यूएशन में सबसे ज्यादा बढ़त

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार की शीर्ष 10 सबसे अधिक मूल्यवान कंपनियों में बीते सप्ताह बाजार पूंजीकरण के स्तर पर मिला-जुला रुझान देखने को मिला। शीर्ष दस में शामिल चार कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यूएशन में 1.43 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जबकि छह कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये घट गया। इस दौरान भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई सबसे अधिक लाभ पाने वाली कंपनी रही।

    एसबीआई के बाजार पूंजीकरण में सप्ताह के दौरान 63,922.03 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही बैंक की कुल बाजार वैल्यूएशन बढ़कर 10,11,721.84 करोड़ रुपये हो गई। बैंक के वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन को इस बढ़त की प्रमुख वजहों में माना गया।

    मार्केटकैप में बढ़ोतरी के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज दूसरे प्रमुख लाभार्थियों में रही। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 32,816.4 करोड़ रुपये बढ़कर 18,01,925.19 करोड़ रुपये पहुंच गई। इससे कंपनी शीर्ष मूल्यवान कंपनियों की सूची में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रही।

    सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के बाजार पूंजीकरण में भी अच्छी बढ़त दर्ज हुई। कंपनी की वैल्यूएशन 31,875.35 करोड़ रुपये बढ़कर 8,87,770.13 करोड़ रुपये हो गई। इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो का मार्केटकैप भी 14,637.76 करोड़ रुपये बढ़ा और 5,56,482.45 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    दूसरी ओर, शीर्ष 10 कंपनियों में छह कंपनियों को बाजार पूंजीकरण के स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा। इनमें सबसे बड़ी गिरावट भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी में रही। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 40,543.23 करोड़ रुपये कम होकर 4,96,891.82 करोड़ रुपये रह गई।

    बजाज फाइनेंस के बाजार पूंजीकरण में 37,168.96 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। इसके बाद कंपनी की कुल वैल्यूएशन 6,73,648.55 करोड़ रुपये रह गई। एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप भी 24,183.16 करोड़ रुपये घटकर 11,27,967.47 करोड़ रुपये पर आ गया।

    आईसीआईसीआई बैंक की बाजार वैल्यूएशन में 9,507.67 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह 10,20,370.63 करोड़ रुपये रह गई। भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण 7,581.65 करोड़ रुपये घटकर 12,22,423.98 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    हिंदुस्तान यूनिलीवर भी उन कंपनियों में शामिल रही जिनके मार्केटकैप में गिरावट दर्ज की गई। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 4,793.16 करोड़ रुपये घटकर 4,88,808.97 करोड़ रुपये रह गई। इस तरह शीर्ष 10 कंपनियों के बीच सप्ताह के दौरान बाजार मूल्यांकन में स्पष्ट रूप से अलग-अलग दिशा देखने को मिली।

    इसी अवधि में भारतीय शेयर बाजार कुल मिलाकर बढ़त के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 404.53 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में 187.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। बाजार की इस तेजी के बीच कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ी, जबकि कई प्रमुख कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट रही।

    बाजार पूंजीकरण में हुए इस बदलाव से शीर्ष कंपनियों के बीच निवेशकों के रुझान में अंतर भी सामने आया। खास तौर पर एसबीआई की मजबूत बढ़त ने सप्ताह के दौरान उसके कुल बाजार मूल्यांकन को 10 लाख करोड़ रुपये के स्तर से ऊपर पहुंचा दिया। वहीं, कुछ अन्य बड़ी कंपनियों में गिरावट के कारण उनके बाजार पूंजीकरण में कमी दर्ज हुई।

  • तेजस्वी प्रकाश ने बताया क्यों एकता कपूर की लोकप्रियता आज भी कायम है, बदलाव की क्षमता को बताया सबसे बड़ी ताकत

    तेजस्वी प्रकाश ने बताया क्यों एकता कपूर की लोकप्रियता आज भी कायम है, बदलाव की क्षमता को बताया सबसे बड़ी ताकत

    नई दिल्ली । टेलीविजन और मनोरंजन की दुनिया में बदलते दर्शकों की पसंद के बीच अभिनेत्री तेजस्वी प्रकाश ने निर्माता एकता कपूर की कार्यशैली और बदलाव को अपनाने की क्षमता की सराहना की है। तेजस्वी का कहना है कि एकता कपूर ने खुद को केवल टेलीविजन सीरियल्स तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समय के साथ अपने काम और कंटेंट के तरीके में जरूरी बदलाव किए हैं। उनके मुताबिक लंबे समय से मनोरंजन उद्योग में सक्रिय रहने के बावजूद एकता कपूर की प्रासंगिकता बनी हुई है।

    तेजस्वी प्रकाश इन दिनों गेमिंग रियलिटी शो ‘प्लेग्राउंड’ के पांचवें सीजन को लेकर चर्चा में हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने एकता कपूर के काम और उनके व्यावसायिक नजरिए पर अपनी राय साझा की। तेजस्वी ने कहा कि एकता को केवल टेलीविजन की निर्माता के रूप में देखना उनके काम के व्यापक दायरे को सीमित करना होगा। उन्होंने एकता को एक कुशल रणनीतिकार और समझदार बिजनेसवुमन बताया।

    तेजस्वी के अनुसार, एकता कपूर को यह समझने की क्षमता है कि किसी समय दर्शकों के बीच किस तरह का कंटेंट पसंद किया जा रहा है। इसी समझ के आधार पर वह अपने काम की दिशा में बदलाव करती हैं। तेजस्वी ने कहा कि मनोरंजन उद्योग में दर्शकों की पसंद लगातार बदलती रहती है और ऐसे माहौल में पुराने तरीकों पर लगातार निर्भर रहने के बजाय बदलाव को स्वीकार करना जरूरी है।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने आसपास कई ऐसे लोगों को देखा है, जो काम करने के पुराने तरीकों को बदलने के लिए तैयार नहीं होते। चाहे उनका तरीका प्रभावी रहे या नहीं, वे उसी दिशा में काम करते रहते हैं। तेजस्वी के मुताबिक ऐसी सोच विकास की संभावनाओं को सीमित कर सकती है। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने के लिए यह समझना जरूरी है कि कब अपने तरीके में बदलाव किया जाना चाहिए।

    तेजस्वी ने एकता कपूर के संदर्भ में कहा कि उन्होंने अपने काम के दौरान हुई गलतियों को समझा और उनसे सीख लेकर आवश्यक बदलाव किए। उनके अनुसार, अपनी गलतियों से सीखना और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण है। यही क्षमता एकता कपूर के लंबे करियर में भी दिखाई देती है।

    तेजस्वी प्रकाश का एकता कपूर के साथ काम करने का अनुभव भी रहा है। वह चर्चित टेलीविजन शो ‘नागिन 6’ में नजर आई थीं। इस दौरान उन्हें एकता कपूर के प्रोडक्शन से जुड़े काम को करीब से देखने का अवसर मिला। तेजस्वी ने अपने अनुभव के आधार पर एकता की कार्यशैली को लेकर सकारात्मक बात कही।

    उन्होंने रियलिटी शो ‘लॉक अप’ को लेकर भी एकता कपूर की टीम की प्रशंसा की। तेजस्वी ने कहा कि शो के दूसरे सीजन की सफलता से उन्हें खुशी और गर्व महसूस हुआ। वह खुद भी ‘लॉक अप’ का हिस्सा रह चुकी हैं और उन्होंने बताया कि शो से उनका जुड़ाव भले ही सीमित स्तर पर रहा हो, लेकिन उसके मंच का हिस्सा बनना उनके लिए अच्छा अनुभव था।

    तेजस्वी ने यह भी कहा कि एकता कपूर की पहचान केवल टेलीविजन तक सीमित नहीं है। वह फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं और आने वाले समय में उनके कई नए प्रोजेक्ट्स हैं। तेजस्वी का मानना है कि एकता कपूर ने बदलते मनोरंजन बाजार के अनुरूप अपनी भूमिका और काम के दायरे को लगातार विस्तार दिया है। इसी कारण उन्हें लगता है कि एकता कपूर की लोकप्रियता और चमक अभी भी कायम है।