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  • फरवरी में घूमने की परफेक्ट लिस्ट: न ठंड की मार, न गर्मी की तपिश, ये 6 जगहें बना देंगी ट्रिप यादगार

    फरवरी में घूमने की परफेक्ट लिस्ट: न ठंड की मार, न गर्मी की तपिश, ये 6 जगहें बना देंगी ट्रिप यादगार



    नई दिल्ली। अगर भारत में घूमने का सबसे परफेक्ट महीना कोई है, तो वह फरवरी है। इस दौरान सर्दी धीरे-धीरे विदा लेने लगती है, गर्मी आने में अभी समय होता है और मौसम एकदम सुहावना रहता है। यही वजह है कि फरवरी में नॉर्थ से साउथ तक भारत की कई जगहें घूमने के लिए बेस्ट बन जाती हैं। साथ ही इस महीने देशभर में कला, साहित्य, संगीत और संस्कृति से जुड़े बड़े आयोजन भी होते हैं, जो यात्रा को और खास बना देते हैं।
    1. जयपुर – इतिहास और रंगों की रॉयल झलक
    फरवरी में जयपुर की सुबहें हल्की ठंडक लिए होती हैं और दिन धूप से भरे रहते हैं। आमेर किला, सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर-मंतर घूमने का यही सबसे अच्छा वक्त है।
    इसी महीने होने वाला जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल और जयपुर आर्ट वीक शहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाते हैं। हेरिटेज वॉक, लोक संगीत और हस्तशिल्प जयपुर को एक यादगार अनुभव बना देते हैं।

    2. दिल्ली – इतिहास, संस्कृति और आधुनिकता का संगम
    फरवरी की हल्की ठंड दिल्ली को एक्सप्लोर करने के लिए परफेक्ट बना देती है। लाल किला, कुतुब मीनार, इंडिया गेट और लोधी गार्डन इस मौसम में बेहद खूबसूरत लगते हैं।
    इंडिया आर्ट फेयर, म्यूजियम्स और कैफे कल्चर दिल्ली को सांस्कृतिक रूप से जीवंत बना देते हैं। पुरानी दिल्ली की गलियों में घूमना और स्ट्रीट फूड का मजा लेना फरवरी की खास पहचान है।

    3. अहमदाबाद – विरासत और स्वाद का शहर
    गुजरात का अहमदाबाद फरवरी में घूमने के लिए शानदार है। साबरमती रिवरफ्रंट, ऐतिहासिक पोल्स, बावड़ियां और साबरमती आश्रम शहर की ऐतिहासिक पहचान को दर्शाते हैं।
    उत्तरायण के बाद भी उत्सव का माहौल बना रहता है और उंधियू जैसे पारंपरिक गुजराती व्यंजन स्वाद को यादगार बना देते हैं।

    4. मुंबई – समुद्र, कला और संगीत
    फरवरी में मुंबई की समुद्री हवा मौसम को बेहद खुशनुमा बना देती है। कला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल और महिंद्रा ब्लूज़ फेस्टिवल शहर को रचनात्मक ऊर्जा से भर देते हैं।
    आर्ट डेको इमारतें, गैलरी, ईरानी कैफे और मरीन ड्राइव की शामें मुंबई को घूमने के लिए खास बनाती हैं।

    5. ओडिशा – संस्कृति और प्रकृति का अनोखा मेल
    फरवरी में ओडिशा का मौसम बेहद सुखद रहता है। कोणार्क डांस एंड म्यूजिक फेस्टिवल सूर्य मंदिर की पृष्ठभूमि में शास्त्रीय नृत्य और संगीत का अद्भुत अनुभव देता है।
    चिलिका झील में हजारों प्रवासी पक्षी दिखाई देते हैं, जो नेचर और फोटोग्राफी लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं।

    6. काजीरंगा – वाइल्डलाइफ का रोमांच
    असम का काजीरंगा नेशनल पार्क फरवरी में घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। यहां सफारी के दौरान एक-सींग वाला गैंडा, हाथी, हिरण और कभी-कभी बाघ भी देखने को मिल जाते हैं।ठंड कम होने के कारण जंगल सफारी आरामदायक और रोमांचक दोनों होती है।
    फरवरी यात्रा के लिए ऐसा महीना है, जहां मौसम, संस्कृति और प्रकृति का परफेक्ट बैलेंस मिलता है। अगर आप सुकून, रोमांस या एडवेंचर की तलाश में हैं, तो ये 6 जगहें आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।

  • सुशांत सिंह राजपूत: टीवी से बॉलीवुड तक, चमकते सितारे का सफर और 6 साल बाद भी दिलों में बसे सवाल

    सुशांत सिंह राजपूत: टीवी से बॉलीवुड तक, चमकते सितारे का सफर और 6 साल बाद भी दिलों में बसे सवाल



    नई दिल्ली । कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिन्होंने छोटे पर्दे से अपनी शुरुआत की और फिर बड़े परदे पर भी अपना जलवा बिखेरा। सुशांत सिंह राजपूत भी उन्हीं में से एक थे। टीवी से लेकर बॉलीवुड तक उनका सफर प्रेरणा से कम नहीं था। लेकिन 6 साल पहले एक दुखद घटना ने उनके करोड़ों चाहने वालों को चौंका दिया और वे हमारे बीच नहीं रहे। आज, 21 जनवरी को उनके जन्मदिन पर हम याद करते हैं उनके फिल्मी सफर को।

    टीवी से चमकती शुरुआत
    सुशांत ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत 2008 में टीवी शो ‘किस देश में है मेरा दिल’ से की थी।

    इस शो ने उन्हें इंडस्ट्री में पहचान दिलाई।
    लेकिन 2009 में उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ आया जब उन्होंने ‘पवित्र रिश्ता’ में मानव का किरदार निभाया। इस भूमिका ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। शो में उनकी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री अंकिता लोखंडे के साथ बेहद पसंद की गई।

    बॉलीवुड में कदम और सितारा बनना
    टीवी पर कामयाबी के बाद सुशांत ने 2013 में बॉलीवुड में कदम रखा। उनकी पहली फिल्म ‘काय पो छे’ थी, जिसने उन्हें बड़े पर्दे पर स्थापित कर दिया।
    इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में शानदार काम किया, जैसे:शुद्ध देसी रोमांस, पीके,डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शीलेकिन 2016 में आई ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। इस बायोपिक ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी और सुशांत को असली पहचान मिली।

    फिर अचानक बुझा सितारा
    सुशांत ने कई यादगार फिल्मों में काम किया जैसे:राब्ता, केदारनाथ, सोनचिड़िया, छिछोरे, दिल बेचारा।इन फिल्मों ने उनके फैंस के दिलों में उनके लिए प्यार और सम्मान और बढ़ाया।

    लेकिन 2020 में एक दुखद घटना ने सबको हिला दिया। सुशांत अपने मुंबई स्थित घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उनके निधन ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार मानसिक दबाव और चुनौतियों के कारण उन्होंने यह कदम उठाया, जबकि परिवार ने इस मामले में अलग राय भी जताई।आज भी सुशांत की याद उनके फैंस के दिलों में जिंदा है और उनकी फिल्मों का जादू लोगों के बीच बरकरार है।

  • इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में हाई-प्रोफाइल ड्रग पार्टियां: 15000 में एंट्री, युवतियों को पैडलर बनाकर 5 राज्यों में एमडी ड्रग सप्लाई

    इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में हाई-प्रोफाइल ड्रग पार्टियां: 15000 में एंट्री, युवतियों को पैडलर बनाकर 5 राज्यों में एमडी ड्रग सप्लाई


    नई दिल्ली। इंदौर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें भोपाल का अबान शकील मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। पुलिस ने अबान को इंदौर में ड्रग डिलीवरी के इंतजार के दौरान गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि अबान गोवा, इंदौर, मुंबई, दिल्ली और भोपाल जैसे कई बड़े शहरों में एमडी ड्रग की सप्लाई में सक्रिय था। इस गिरोह में दो युवतियां भी पैडलर के रूप में शामिल थीं, जिन्हें अबान और उसके साथी वैभव उर्फ बाबा शर्मा मोटे कमीशन और ड्रग की फ्री खुराक का लालच देकर तस्करी के काम में जोड़ते थे।
    पुलिस ने अबान की निशानदेही पर दो युवतियों और बाबा शर्मा को भी गिरफ्तार किया है।

    इंदौर पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि अबान और बाबा शर्मा अंतरराज्यीय एमडी तस्कर गिरोह के सदस्य हैं और यह गिरोह चार से पांच राज्यों में ड्रग तस्करी कर रहा था। जांच के दौरान यह तथ्य भी उजागर हुआ कि इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में आरोपी बाबा शर्मा, अलीशा मसीह और नेहा पार्टीज का आयोजन करते थे। इन पार्टियों में एंट्री फीस 10 से 15 हजार रुपए तक ली जाती थी और रईसजादों को ड्रग खपाने का काम किया जाता था।

    पुलिस ने बताया कि अबान अपनी पार्टीज के जरिए युवाओं को आकर्षित करता था और बाद में उन्हें एमडी की खुराक देकर पार्टी कल्चर के नाम पर नशे का आदी बनाता था। इसके बाद वही युवतियां और अन्य सदस्य ड्रग सप्लाई के लिए आगे काम करते थे। गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से गोवा, दिल्ली, इंदौर, भोपाल, मुंबई सहित अन्य शहरों में पार्टीज आयोजित करते रहे हैं।

    अब तक इस मामले में कुल चार गिरफ्तारियां हुई हैं।

    इंदौर पुलिस ने अबान के साथ कनाड़िया, मुंबई और देवास से गिरोह के तीन और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी वैभव उर्फ बाबा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह अबान और युवतियों के साथ मिलकर एमडी ड्रग्स की तस्करी करता था।

    पुलिस के मुताबिक, गिरोह गोवा सहित कई राज्यों के पब, बार और क्लबों में एमडी ड्रग की सप्लाई करता था और इसकी कीमत लगभग 10 हजार रुपए प्रति ग्राम थी। पुलिस अभी आरोपी से एमडी ड्रग्स के सोर्स के बारे में पूछताछ कर रही है और उसके बाद गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी भी संभव है।

    इस बीच, अबान शकील का नाम ड्रग तस्करी में फंसने के बाद भोपाल डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (बीडीसीए) ने उसे अपनी प्रारंभिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया है। बीडीसीए ने एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है। अबान बीडीसीए का आजीवन सदस्य भी था। पुलिस ने बताया कि अबान कोहेफिजा इलाके में स्थित सैफिया कॉलेज मैदान के पास बने करोड़ों रुपए कीमत के बंगले में रहता था और उसके घर के पोर्च पर लग्जरी कारें खड़ी रहती थीं।
    इस मामले में इंदौर के कनाड़िया थाने में अपराध क्रमांक 37/2025 के तहत धारा 8/22 एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। अब तक आरोपियों से कुल 15.95 ग्राम एमडी ड्रग्स, बिना नंबर की इको स्पोर्ट्स कार, थार और एक एसयूवी जब्त की गई है। पुलिस का कहना है कि अबान थार जीप से भोपाल-इंदौर के पब और लाउंज में ड्रग सप्लाई करता था और उसके लिए लड़कियां भी पैडलर का काम करती थीं।

    इंदौर क्राइम ब्रांच और कनाड़िया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अबान की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस ने मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच तेज कर दी है, जिससे जल्द ही गिरोह के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना है।

  • BMC चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत…. मुम्बई में पहली बार बनेगा BJP का मेयर

    BMC चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत…. मुम्बई में पहली बार बनेगा BJP का मेयर


    मुम्बई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) के निकाय चुनाव (Local Body Elections.) में शुक्रवार को भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन (Mahayuti Alliance) को बड़ी जीत मिली। बीएमसी में भी भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के गठबंधन ने मिलकर ठाकरे बंधुओं की शिवसेना यूबीटी और एमएनएस को हरा दिया। शुक्रवार रात साढ़े नौ बजे तक के आंकड़े के अनुसार, भाजपा 88, शिवसेना 28, शिवसेना यूबीटी 65, एमएनएस 6, कांग्रेस 24 वार्डों में या तो जीत चुकी है या फिर बढ़त बनाए हुए है। बीएमसी में भाजपा का पहली बार मेयर बनने जा रहा है, जोकि भगवा दल के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पिछले तीन दशक से बीएमसी की कमान ठाकरे परिवार के पास ही रही है। ऐसे में अब इसमें बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भाजपा की इस जीत के पीछे 5 बड़ी वजहे हैं।


    पीएम मोदी पर जनता का भरोसा

    पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से भाजपा पीएम मोदी के नेतृत्व में विभिन्न चुनावों में जीत दर्ज करती आई है। लोकसभा में लगातार तीन बार से सत्ता में आ रही भाजपा पिछले साल हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी बंपर सीटों से जीती। एक दशक में विपक्ष को भाजपा ने बुरी तरह से उन राज्यों में भी पराजित किया है, जहां कुछ दशक पहले कोई सोच नहीं सकता था। मुंबई में मिली इस जीत के पीछे भी पीएम मोदी का बहुत बड़ा योगदान है। जीत के बाद देवेंद्र फडणवीस ने भी इसका जिक्र किया और कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में विकास के विजन के साथ भाजपा ने चुनाव लड़ा और जीत मिली। फिलहाल, विपक्ष के पास पीएम मोदी का तोड़ ढूंढ पाना बहुत मुश्किल दिखाई दे रहा है।


    शिवसेना में टूट

    साल 2019 में शिवसेना और भाजपा की राह तब अलग हो गई, जब विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने ढाई साल के लिए सीएम पद की मांग कर दी। इसके बाद, शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने साथ मिलकर सरकार बनाई और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने। हालांकि, 2022 में शिवसेना टूट गई और एकनाथ शिंदे कई विधायकों और सांसदों को अपने साथ ले गए। भाजपा ने शिंदे को सीएम बना दिया। बाद में शिंदे की पार्टी को शिवसेना नाम से जाना गया और उद्धव ठाकरे को शिवसेना यूबीटी। इसके बाद से उद्धव ठाकरे की ताकत लगातार कमजोर होती चली गई। इस बीएमसी चुनाव में भी एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 28 वार्ड्स में जीत हासिल की और उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के वोट काटे, जिसका सीधा लाभ भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति को मिला।


    मनसे के साथ आने पर उत्तर भारतीय शिवसेना यूबीटी से नाराज?

    साल 2006 में अलग पार्टी बनाने वाले राज ठाकरे ने बीएमसी चुनाव के लिए उद्धव के साथ गठबंधन किया था। मुंबई में रहने वाले मराठी वोटर्स का मनसे को काफी सपोर्ट मिलता रहा है और इस चुनाव में भी शिवसेना और मनसे के गठबंधन को मराठी मतदाताओं के जमकर वोट पड़े। लेकिन एग्जिट पोल की मानें तो उत्तर भारतीयों का समर्थन भाजपा को ज्यादा मिला। दरअसल, राज ठाकरे की मनसे उत्तर भारतीयों के खिलाफ लंबे समय से हिंसा करती आई है और यही वजह है कि इसका फायदा भाजपा गठबंधन को सीधे तौर पर मिला। मनसे और शिवसेना के गठबंधन ने कुछ खास कमाल नहीं दिखाया और महायुति के सामने हार गया।


    भाजपा ने लगा दी पूरी ताकत, खुद फडणवीस ने संभाली कमान

    बीएमसी चुनाव में जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी। खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी कमान संभाली और जमकर प्रचार किया। भाजपा के तमाम महाराष्ट्र के मंत्रियों ने भी चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया और जनता का समर्थन हासिल किया। उद्धव और राज ठाकरे ने भी चुनावी रैलियां कीं और भीड़ भी इकट्ठी हुई, लेकिन वोटों में यह तब्दील नहीं हो सकी। शिवसेना यूबीटी और मनसे के मुकाबले भाजपा और शिवसेना का चुनाव प्रचार ज्यादा मजबूत रहा और यही नतीजों में भी दिखाई दिया।


    उद्धव के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी का भाजपा को फायदा

    देश के सबसे अमीर नगर निगम बीएमसी पर पिछले लगभग तीन दशकों से ठाकरे परिवार का कब्जा रहा है। पहली बार भाजपा को जीत मिली है। शिवसेना (अविभाजति) को पिछले बार तक भाजपा से ज्यादा वार्ड पर जीत मिली, जिससे उसका लंबे समय तक मेयर रहा। लंबे समय तक राज करने की वजह से शिवसेना यूबीटी के खिलाफ एक एंटी इनकमबेंसी भी बनी और जिसका फायदा सीधे तौर पर भाजपा को मिला। साथ ही, एकनाथ शिंदे की शिवसेना का साथ होने के कारण भाजपा का पलड़ा भारी रहा।

  • बीएमसी चुनाव: बहुमत में तो कभी नहीं आई शिवसेना, आज उद्धव के लिए चुनौती

    बीएमसी चुनाव: बहुमत में तो कभी नहीं आई शिवसेना, आज उद्धव के लिए चुनौती

    मुंबई। बीएमसी चुनाव में आज वोटिंग का दिन है. फैसला 16 जनवरी यानी कल आएगा. उद्धव ठाकरे के लिए पार्टी को बचाने की निर्णायक लड़ाई है. कभी ठाकरे परिवार के दबदबे वाली बीएमसी में पिछले तीस सालों में जो कुछ हुआ, आज उद्धव को सारी बातें याद आ रही होंगी. इसमें ‘बिग ब्रदर’ की हैसियत उन्हें सबसे ज्यादा चुभ रही होगी जो पहले जूनियर था लेकिन बाद में पार्टी को ही चुनौती दे बैठा.
    वैसे तो भाजपा का गठबंधन भी भारत के सबसे अमीर नगर निगम पर फतह के लिए जोर लगा रहा है लेकिन कोई और है जिसके लिए यह अग्निपरीक्षा है. जून 2022 में पार्टी के विभाजन के बाद यह तीसरी चुनावी फाइट है. करीब तीन दशक से लगातार शिवसेना मुंबई पर राज करती आई है.
    बीएमसी का मतलब ही शिवसेना बन चुका था. ऐसे में 2017 के बाद होने जा रहे इस हाई प्रोफाइल चुनाव पर देश की नजरें हैं क्योंकि अब शिवसेना दो हिस्सों में बंट चुकी है. उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे दोनों अपनी शिवसेना को सही और असली साबित करने के लिए यह निर्णायक लड़ाई जीतना चाहेंगे.

    उद्धव ठाकरे इस चुनाव की अहमियत समझते हैं शायद इसीलिए उन्होंने अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन हासिल करने के लिए सबसे पहले परिवार को एकजुट करने की सोची. महाराष्ट्र में दशकों से बाल ठाकरे का ही नाम बोलता है. शिंदे भी ठाकरे की तस्वीर लेकर अपनी सियासत चमका रहे हैं. आज भी सोशल मीडिया के प्रोफाइल में उन्होंने बैकग्राउंड में ठाकरे को लगा रखा है. ऐसे में उद्धव के सामने चुनौती बड़ी है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने मराठी वोटों को एकसाथ लाने के लिए चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ गठबंधन किया है. राज ने नवंबर 2005 में शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) बना ली थी. हालांकि इतने से ही बीएमसी में जीत की गारंटी नहीं मिल जाती. उद्धव की सबसे बड़ी चुनौती वो जूनियर है जो आज ‘बिग ब्रदर’ बनकर सामने खड़ा है.
    – ग्रेटर मुंबई नगर निगम के तौर पर इसे 1873 में स्थापित किया गया.
    – 1931 में प्रेसिडेंट की जगह बीएमसी चीफ को मेयर कहा जाने लगा.
    – आजादी के बाद 1948 में वयस्क मताधिकार के आधार पर बीएमसी में पहले चुनाव हुए.
    – 1972 में बीएमसी ने मराठी को आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया.
    – 1991 में सीटों की संख्या 221 पहुंची. 1992 और 1997 में चुनाव कराए गए
    – 2002 में सीटें 227 हुईं. इसका वार्षिक बजट कई छोटे राज्यों से भी ज्यादा है.

    उद्धव शिवसेना की चुनौती
    – मुंबई ही नहीं, पूरे देश में यह धारणा है कि बीएमसी का मतलब शिवसेना है लेकिन कम लोग जानते होंगे कि ठाकरे पार्टी ने अपने दम पर कभी बहुमत हासिल नहीं किया. शिवसेना ने हमेशा गठबंधन से ही नगर निगम की सरकार चलाई है.
    – इसने 1985 में चुनाव जीता था और 170 में से 74 सीटें मिलीं. तब पार्टी ने 140 सीटों पर चुनाव लड़ा था.
    – अविभाजित शिवसेना का सबसे जबर्दस्त प्रदर्शन 1997 में दिखा जब शिवसेना ने 221 में 103 सीटें जीत लीं.
    – इसके बाद ग्राफ गिरने लगा और 100 से नीचे आ गया. 2012 में 75 सीटें मिली थीं.
    – 2017 में यह 84 सीटों पर आकर सिमट गई.
    – 2019 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त शिवसेना ने 16 प्रतिशत वोट हासिल किए थे. पांच साल बाद दोनों गुटों को मिलाकर 20 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले.

    इसमें शिंदे ग्रुप को ज्यादा 12 प्रतिशत और उद्धव गुट को 10 प्रतिशत मिले थे. इस बार उद्धव चाहेंगे कि बीएमसी में शिंदे ग्रुप से ज्यादा वोट अपने साथ खींचा जाए.
    भाजपा का बढ़ना
    हां, शिवसेना के साथ अलायंस में जूनियर के तौर पर शामिल हुई भाजपा लगातार बढ़ती गई. 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में वह ‘बिग ब्रदर’ बन गई. बीएमसी चुनाव में भी वह पहले 20-30 सीटें निकाल रही थी लेकिन 2017 में यह 82 के आंकड़े पर पहुंच गई. तब यह शिवसेना से केवल 2 सीटें पीछे थी. इस बार के चुनाव में भाजपा शिंदे सेना की मदद से पहली बार बीएमसी पर कब्जा करना चाहती है. आसान नहीं है लेकिन पहले से कम मुश्किल है. इसका मैसेज बड़ा होगा- ठाकरे अब भाजपा के लिए किसी भी तरह से चुनौती नहीं हैं.
  • ‘मराठी मुंबई’ बचाने की चुनौती, किरीट सोमैया ने शिवसेना और विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

    ‘मराठी मुंबई’ बचाने की चुनौती, किरीट सोमैया ने शिवसेना और विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप


    मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और AIMIM पर ‘मराठी मुंबई’ को ‘मुस्लिम मुंबई’ बनाने की साजिश का आरोप लगाया। सोमैया ने दावा किया कि 1947 में मुंबई की मुस्लिम आबादी 8.8% थी, जो 2011 तक बढ़कर 20.58% हो गई और वर्तमान में लगभग 25% तक पहुँच चुकी है। उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि 2050 तक मुस्लिम आबादी 30% और हिंदू आबादी 50% हो जाएगी।

    किरीट सोमैया ने शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट पर कोविड काल के दौरान कफन और बॉडी बैग घोटाले का भी आरोप लगाया।

    उन्होंने बताया कि पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर ने 1,500 रुपए में उपलब्ध बॉडी बैग की जगह 6,719 रुपए प्रति बैग की दर से ठेका कंपनी को दिया, जिससे 2,000 करोड़ रुपए का कथित घोटाला हुआ। सोमैया ने कहा कि किशोरी पेडनेकर इस मामले में जमानत पर हैं, बावजूद इसके उद्धव ठाकरे ने उन्हें चुनावी टिकट दिया।

    उन्होंने जोर देकर कहा, हम मुंबई को मुस्लिम नहीं होने देंगे। सोमैया ने जनसंख्या आंकड़ों, मेयर पद और चुनावी साजिशों को लेकर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।

  • प्रभास की फिल्‍म 'द राजा साब' में मालविका मोहनन की जोरदार एंट्री

    प्रभास की फिल्‍म 'द राजा साब' में मालविका मोहनन की जोरदार एंट्री

    मुंबई। टीम ‘द राजा साब’ ने फिल्म से  के किरदार भैरवी का आधिकारिक खुलासा कर दिया है, जिसने फिल्म के प्रमोशन को एक नया मोड़ दे दिया है। इस अनाउंसमेंट के साथ ही दर्शकों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है। भैरवी को एक रहस्यमयी, स्टाइलिश और ताकतवर शख्सियत के रूप में पेश किया गया है, जिससे साफ है कि कहानी में उनका रोल बेहद अहम होने वाला है। भारत की सबसे बड़ी अपकमिंग हॉरर-फैंटेसी फिल्मों में गिनी जा रही इस फिल्म के लिए यह खुलासा काफी चर्चा में है।

    जारी किए गए नए पोस्टर में मालविका मोहनन ब्लैक साड़ी, स्टेटमेंट ब्लाउज, लेयर्ड ब्रेसलेट्स, टेक्सचर्ड हैंडबैग और सनग्लासेस के साथ बेहद एलिगेंट अंदाज में नजर आ रही हैं। उनकी शांत लेकिन आत्मविश्वास से भरी नजरें एक साथ रहस्य और आकर्षण दोनों का एहसास कराती हैं। बैकग्राउंड में दिखता सुनसान कॉरिडोर फिल्म के भूतिया माहौल को और गहराई देता है, जिससे यह साफ हो जाता है कि भैरवी कहानी के सस्पेंस से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

    फिल्म के गानों और ट्रेलर को पहले ही दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल चुकी है, जिसके बाद ‘द राजा साब’ लगातार मजबूत पकड़ बना रही है। दर्शक इसके म्यूजिक, भव्य विजुअल्स और अलग अंदाज की खूब तारीफ कर रहे हैं। खास बात यह है कि प्रभास को इस बार एक नए, हल्के लेकिन लेयर्ड अवतार में देखने को मिलेगा, जहां उनका चार्म फिल्म की रहस्यमयी और सुपरनैचुरल दुनिया से मेल खाता है।

    मारुति द्वारा लिखित और निर्देशित ‘द राजा साब’ का निर्माण पीपल मीडिया फैक्ट्री और आईवीवाई एंटरटेनमेंट ने किया है। फिल्म में प्रभास, संजय दत्त, बोमन ईरानी, मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल और ऋद्धि कुमार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। यह हॉरर-फैंटेसी फिल्म हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में 9 जनवरी 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

  • अंगकृष रघुवंशी को अस्पताल से मिली छुट्टीविजय हजारे ट्रॉफी मैच में सिर और कंधे में लगी चोट

    अंगकृष रघुवंशी को अस्पताल से मिली छुट्टीविजय हजारे ट्रॉफी मैच में सिर और कंधे में लगी चोट


    नई दिल्ली । मुंबई के सलामी बल्लेबाज अंगकृष रघुवंशी को विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान सिर और कंधे में गंभीर चोट लगने के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। शुक्रवार को उत्तराखंड के खिलाफ खेले गए मैच में रघुवंशी ने एक मुश्किल कैच लपकने की कोशिश कीलेकिन इस दौरान वह गिर पड़े और उनके सिर और कंधे में चोट लग गई।

    यह घटना पारी के 30वें ओवर में हुईजब ऑफ स्पिनर तनुष कोटियान गेंदबाजी कर रहे थे। सौरभ रावत ने स्लॉग-स्वीप खेलते हुए डीप मिडविकेट पर खड़े रघुवंशी की दिशा में गेंद मारी। रघुवंशी ने एक हाथ से गेंद को लपकने की कोशिश कीलेकिन यह प्रयास विफल रहा और वह गिर पड़े। इस गिरावट के दौरान उनके कंधे में चोट लगी और सिर जमीन से टकरायाजिससे उन्हें कनकशन सिर में चोटहो गया।

    चोट के बाद रघुवंशी कुछ सेकंड के लिए घुटनों के बल बैठेफिर जमीन पर लेट गए। तुरंत मुंबई के फिजियो मैदान पर पहुंचे और चूंकि रघुवंशी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पा रहे थेतो स्ट्रेचर मंगवाया गया। उन्हें पास के एसडीएमएच अस्पताल ले जाया गयाजहां उनके सिर और गर्दन का सीटी स्कैन किया गया। रिपोर्ट्स में कोई गंभीर चोट नहीं पाई गई और अंगकृष को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उन्हें बीसीसीआई के ‘कनकशन प्रोटोकॉल’ के तहत कुछ दिनों का आराम करने की सलाह दी गई है।

    विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई ने उत्तराखंड को 51 रनों से हराया। मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 331 रन बनाएजिसमें हार्दिक तमोरे ने 93 रनसरफराज खान ने 55 रन और मुशीर खान ने 55 रन बनाए। मुशीर ने गेंदबाजी में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 57 रन पर दो विकेट लिए। उत्तराखंड की टीम युवराज चौधरी की 96 रनों की आक्रामक पारी के बावजूद 280 रन ही बना सकी। अंगकृष रघुवंशी की चोट के बाद क्रिकेट प्रेमी उनके जल्दी ठीक होने की कामना कर रहे हैं।

  • उद्धव गुट का कांग्रेस पर तंज: 'मुंबई में कांग्रेस एक पर्यटक की तरह आती हैहार कर चली जाती है'

    उद्धव गुट का कांग्रेस पर तंज: 'मुंबई में कांग्रेस एक पर्यटक की तरह आती हैहार कर चली जाती है'


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में आगामी बृहन्मुंबई महानगर पालिका बीएमसी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। महाविकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह इस चुनाव को अकेले लड़ेगीजिसके बाद उद्धव गुट और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ गया है। उद्धव गुट के प्रवक्ता आनंद दुबे ने रविवार को कांग्रेस पर तीखा तंज करते हुए कहामुंबई में कांग्रेस पार्टी को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। वह पिछले तीन दशकों से लगातार मुंबई नगर निगम चुनाव हारती आ रही हैतो ऐसे में वह 2026 में कौन सा चमत्कार कर देंगे? कांग्रेस एक पर्यटक की तरह मुंबई आती हैहोर्डिंग्स लगाती हैचुनाव हारती है और फिर घर लौट जाती है।

    उद्धव गुट के प्रवक्ता ने यह बयान वीडियो के माध्यम से दियाजिसमें उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना का बीएमसी से गहरा रिश्ता रहा है और पार्टी पिछले 30 सालों से मुंबई नगर निगम पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को इस चुनाव में गंभीरता से लेने की कोई वजह नहीं हैक्योंकि वे हमेशा चुनाव हारते हैं। कांग्रेस ने इस तंज का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी इस चुनाव में अकेले मैदान में उतरेगी और इसके पीछे वैचारिक विचार है। कांग्रेस नेता सचिव सावंत ने बयान दियाहम पहले ही अपनी स्थिति को स्पष्ट कर चुके हैं। कांग्रेस पार्टी चुनाव में अकेले बढ़ना चाहती है और उसके पीछे वैचारिक विचार है। हमें इस मामले पर कोई जल्दबाजी नहीं है। पूरी पार्टी ने सोच-समझ कर यह फैसला लिया है। हम उन सभी पार्टियों के खिलाफ लड़ेंगे जो धर्मजातिक्षेत्र और भाषा के आधार पर टकराव पैदा करती हैं।

    यह विवाद तब शुरू हुआ जब उद्धव गुट ने महाविकास अघाड़ी में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। कांग्रेस इसके पक्ष में नहीं थीक्योंकि वह राज ठाकरे के साथ चुनाव लड़ने में असमंजस महसूस कर रही थी। इसके चलते महाविकास अघाड़ी के भीतर एकता बनी रहीलेकिन कांग्रेस और उद्धव गुट के बीच मतभेद उभर आए। बीएमसी पर पिछले कई सालों से शिवसेना का कब्जा रहा है। शुरूआत से ही शिवसेना भाजपा के साथ मिलकर यहां शासन चला रही थी

    । 2017 में हुए बीएमसी चुनाव में अविभाजित शिवसेना ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जीत दर्ज की थीजबकि भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। उद्धव गुट अब 2022 में विभाजन के बाद बीएमसी पर पुनः कब्जा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैहालांकि इसे पहले से कहीं ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस का कहना है कि वह इस चुनाव में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए तैयार है और इस बार किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगीचाहे वह महाविकास अघाड़ी हो या कोई अन्य गठबंधन।

  • भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की

    भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की


    भोपाल । भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए रेल किराए में वृद्धि का ऐलान किया है जिसका असर भोपाल से देश के प्रमुख शहरों की यात्रा पर पड़ेगा। यह वृद्धि 2 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से की गई है और इसमें 5 प्रतिशत जीएसटी और राउंड-ऑफ का असर भी देखा जाएगा। इस बदलाव के चलते यात्रियों को अब पहले से अधिक किराया चुकाना पड़ेगा।
    यदि आप भोपाल से नई दिल्ली की यात्रा करते हैं तो आपको लगभग 15 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। मुंबई जाने पर किराए में करीब 18 रुपये की वृद्धि होगी। पुणे के लिए यह वृद्धि लगभग 19 रुपये नागपुर के लिए 8 रुपये और इंदौर तथा जबलपुर के लिए यह वृद्धि लगभग 6-6 रुपये होगी। लखनऊ जाने वाले यात्रियों को करीब 12 रुपये अतिरिक्त देना होगा।

    इस बदलाव से रेल यात्रा के खर्च में थोड़ा सा इजाफा होगा लेकिन यह वृद्धि यात्रा की सुविधाओं और रेलवे के रख-रखाव में हो रहे सुधारों को ध्यान में रखते हुए की गई है। यात्री अब इन बदलावों के साथ यात्रा की योजना बनाते हुए अतिरिक्त खर्च के बारे में सोच सकते हैं।इस नई वृद्धि से जहां एक ओर यात्रियों की जेब पर असर पड़ेगा वहीं दूसरी ओर रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं और सुविधाओं के विकास के लिए यह कदम उठाया गया है।