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  • शेयर बाजार में दो दिन बाद रिकवरी, सेंसेक्स 333 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,217 पर बंद, आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

    शेयर बाजार में दो दिन बाद रिकवरी, सेंसेक्स 333 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,217 पर बंद, आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

    नई दिल्ली ।अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के फैसले से पहले बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने पिछले दो कारोबारी सत्रों की गिरावट से उबरते हुए बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया। तेल की कीमतों में नरमी और एफएमसीजी, पीएसयू बैंक तथा रियल्टी शेयरों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में रहे।

    सेंसेक्स 332.63 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,336.45 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 99 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,217.60 अंक पर बंद हुआ। इस तरह दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों ने पिछले दो दिनों की कमजोरी के बाद बाजार में रिकवरी दर्ज की।

    हालांकि व्यापक बाजार में स्थिति पूरी तरह सकारात्मक नहीं रही। निफ्टी मिडकैप में 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.18 प्रतिशत नीचे रहा। इससे संकेत मिला कि प्रमुख शेयरों में खरीदारी के बावजूद व्यापक बाजार में दबाव बना रहा।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी एफएमसीजी सबसे ज्यादा बढ़ने वाले प्रमुख सूचकांकों में रहा। इसमें 1.63 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी पीएसयू बैंक 1.44 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 0.99 प्रतिशत चढ़ा। इन क्षेत्रों में खरीदारी ने बाजार की रिकवरी को मजबूती दी।

    इसके विपरीत निफ्टी आईटी पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। इसके अलावा निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी50 में टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एलएंडटी और बजाज फिनसर्व के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी रही। वहीं एचडीएफसी लाइफ, एसबीआई लाइफ, एसबीआई और आईटीसी के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।

    बाजार के तकनीकी रुझान को लेकर विशेषज्ञों ने निफ्टी के लिए 23,300 से 23,400 के स्तर को अहम बाधा बताया है। उनके मुताबिक व्यापक तकनीकी स्थिति में सुधार के लिए निफ्टी का 23,500 के ऊपर टिकना जरूरी होगा। दूसरी ओर 23,100 से 23,070 का स्तर तत्काल समर्थन क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि निफ्टी 23,070 के नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में सूचकांक 23,000 से 22,800 के दायरे तक जा सकता है। इसलिए आने वाले सत्रों में इन स्तरों पर बाजार की दिशा पर नजर रहेगी।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के नतीजों पर है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक आगे ब्याज दरों को लेकर किस तरह का रुख अपनाता है। फेड की टिप्पणी से वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार की दिशा भी प्रभावित हो सकती है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फेड की टिप्पणी संतुलित रहती है तो बाजार में आगे रिकवरी की संभावना बनी रह सकती है। वहीं सख्त रुख, बॉन्ड यील्ड में दोबारा तेजी या ब्रेंट क्रूड के 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने की स्थिति में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और बाजार की रिकवरी सीमित हो सकती है।

    विश्लेषकों के मुताबिक अब निवेशकों का ध्यान फेड चेयरमैन की टिप्पणियों पर रहेगा। भविष्य की ब्याज दरों को लेकर मिलने वाले संकेत वैश्विक तरलता, पूंजी प्रवाह और वित्तीय बाजारों की निकट अवधि की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

  • सेंसेक्स और निफ्टी में बन सकता है बड़ा मूवमेंट शेयर बाजार में निवेश से पहले जानें जरूरी बातें

    सेंसेक्स और निफ्टी में बन सकता है बड़ा मूवमेंट शेयर बाजार में निवेश से पहले जानें जरूरी बातें


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए बाजार की चाल हमेशा महत्वपूर्ण रहती है। कभी तेजी निवेशकों का उत्साह बढ़ाती है तो कभी अचानक गिरावट बाजार की चिंता बढ़ा देती है। ऐसे में शेयर बाजार की दिशा को समझने के लिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी के उतार चढ़ाव को देखना पर्याप्त नहीं होता बल्कि देश और दुनिया की आर्थिक गतिविधियों का भी असर बाजार पर पड़ता है। निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे बाजार में किसी भी फैसले से पहले मौजूदा परिस्थितियों और प्रमुख संकेतकों को ध्यान से समझें।

    शेयर बाजार पर सबसे बड़ा असर वैश्विक बाजारों की चाल का भी पड़ता है। अमेरिका समेत दूसरे प्रमुख बाजारों में होने वाली हलचल का असर भारतीय बाजार पर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंकों के फैसले महंगाई के आंकड़े और आर्थिक विकास से जुड़े संकेत भी बाजार की धारणा को प्रभावित करते हैं। यदि आर्थिक माहौल मजबूत दिखाई देता है तो निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है वहीं कमजोर संकेतों की स्थिति में बाजार में दबाव देखने को मिल सकता है।

    भारतीय बाजार के लिए कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बेहद अहम होते हैं। किसी कंपनी के मुनाफे में बढ़ोतरी बिक्री में सुधार और भविष्य के कारोबार को लेकर सकारात्मक संकेत उसके शेयर को मजबूती दे सकते हैं। इसके उलट कमजोर नतीजे या कारोबार से जुड़ी चिंता किसी शेयर में बिकवाली बढ़ा सकती है। यही वजह है कि निवेशकों को केवल शेयर की कीमत देखकर फैसला लेने के बजाय कंपनी के कारोबार और वित्तीय स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।

    बाजार में कच्चे तेल की कीमतों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और इसका असर अर्थव्यवस्था के साथ बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत का संकेत मानी जा सकती है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है जबकि लगातार बिकवाली से दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा देने का काम कर सकती है।

    ऐसे माहौल में छोटे निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें। शेयर बाजार में तेजी देखकर केवल मुनाफे की उम्मीद में पैसा लगाना और गिरावट देखकर घबराकर बिकवाली करना नुकसान का कारण बन सकता है। निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर रणनीति बनानी चाहिए। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है इसलिए मजबूत कंपनियों और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

    शेयर बाजार में किसी भी निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति बाजार की मौजूदा दिशा और आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन करना जरूरी है। बाजार में अवसर लगातार बनते रहते हैं इसलिए धैर्य और सोच समझकर लिया गया फैसला निवेशकों के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।

  • वैश्विक तनाव और बढ़ते क्रूड दबाव से बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 121 अंक टूटा और निफ्टी 0.34 प्रतिशत नीचे बंद

    वैश्विक तनाव और बढ़ते क्रूड दबाव से बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 121 अंक टूटा और निफ्टी 0.34 प्रतिशत नीचे बंद

    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन प्रमुख सूचकांक शुरुआती गिरावट के बाद निचले स्तर से संभले, लेकिन कारोबार का अंत लाल निशान में हुआ। आईटी, एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों से बाजार को कुछ सहारा मिला, इसके बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई।

    कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,781.76 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 79.70 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,398.10 पर रहा। दिन के दौरान दोनों सूचकांकों ने निचले स्तर से कुछ सुधार किया, जिससे अंतिम गिरावट शुरुआती दबाव की तुलना में सीमित रही।

    सेंसेक्स पिछले बंद स्तर 74,902.59 के मुकाबले 593.42 अंक यानी 0.79 प्रतिशत नीचे 74,309.16 पर खुला था। कारोबार के दौरान यह एक समय 74,917.15 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि दिन के निचले स्तर पर 74,160.16 तक फिसल गया। इस तरह सेंसेक्स ने अपने दिन के निचले स्तर से 621.59 अंक की रिकवरी की।

    निफ्टी भी पिछले बंद स्तर 23,477.80 के मुकाबले 207 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,270.30 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 23,448.10 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि 23,231.40 का निचला स्तर भी देखा गया।

    व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.26 प्रतिशत और 0.58 प्रतिशत नीचे रहे। सेक्टरों में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा कमजोर रहे। रियल्टी इंडेक्स में 2.7 प्रतिशत और मेटल इंडेक्स में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ऑटो, ऑयल एंड गैस, पीएसयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी दबाव रहा।

    इसके विपरीत प्राइवेट बैंक, मीडिया और आईटी सूचकांकों में बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 50 में एचडीएफसी बैंक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी लाइफ और विप्रो प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। वहीं हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जेएसडब्ल्यू स्टील, आयशर मोटर्स, टाटा स्टील और ओएनजीसी में सबसे ज्यादा कमजोरी रही।

    बाजार पर दबाव के प्रमुख कारणों में पश्चिम एशिया का तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली शामिल रही। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर 110 डॉलर की ओर बढ़ा, जिससे आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ी।

    कच्चे तेल की महंगाई ने वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर भी दबाव बढ़ाया। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंचने से इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की आशंकाएं मजबूत हुईं। इस बीच रुपया कमजोर होकर 95.6 प्रति डॉलर पर आ गया।

    पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी 50 में 2.1 प्रतिशत की गिरावट रही। मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 0.3 प्रतिशत और 0.6 प्रतिशत की कमजोरी आई। प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.5 प्रतिशत चढ़ा, जबकि रियल्टी क्षेत्र कमजोर रहा।

    बैंक यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल से भी बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं। कर्मचारी पांच दिन के कार्य सप्ताह और पीएलआई योजना में बदलाव जैसी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। इस महीने के अंत में और 26 अक्टूबर से भी हड़ताल प्रस्तावित है।

    प्राइमरी बाजार में एनएसई के आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। इश्यू 17 सितंबर को खुलेगा और इससे करीब 22,662 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। अगले सप्ताह निवेशकों की नजर भारत के अगस्त सीपीआई और डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के साथ अमेरिकी फेड के नीतिगत फैसले, रिटेल सेल्स और औद्योगिक उत्पादन पर रहेगी। क्रूड, रुपया और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

  • सेंसेक्स 74,902 और निफ्टी 23,477 पर बंद, पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने गिरावट का सिलसिला तोड़ा

    सेंसेक्स 74,902 और निफ्टी 23,477 पर बंद, पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने गिरावट का सिलसिला तोड़ा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीन कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला गुरुवार को थम गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 138.36 अंक यानी 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,902.59 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 46.30 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की तेजी रही और यह 23,477.80 के स्तर पर बंद हुआ।

    कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,764.23 से 21.69 अंक नीचे 74,742.54 पर खुला। इसके बाद दिन में यह 146.73 अंक यानी 0.19 प्रतिशत बढ़कर 74,910.96 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 165.75 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,598.47 के निचले स्तर तक भी गया।

    निफ्टी 50 ने पिछले बंद स्तर 23,431.50 की तुलना में 15 अंक की बढ़त के साथ 23,446.60 पर कारोबार की शुरुआत की। दिन के दौरान इंडेक्स 63.45 अंक यानी 0.27 प्रतिशत चढ़कर 23,494.95 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। वहीं एक समय यह 51.40 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 23,380.10 के इंट्रा-डे निचले स्तर पर भी पहुंचा।

    व्यापक बाजार में हालांकि दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 0.38 प्रतिशत और 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। यानी प्रमुख सूचकांकों में तेजी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी मीडिया, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके विपरीत निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी एफएमसीजी में दबाव देखा गया।

    निफ्टी 50 में एचसीएल टेक, हिंडाल्को और टाटा स्टील सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर एचडीएफसी लाइफ, पावरग्रिड, ओएनजीसी, भारतीय एयरटेल और टेक महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई।

    गुरुवार के कारोबार के दौरान बाजार के लिए पश्चिम एशिया का तनाव भी महत्वपूर्ण कारक बना रहा। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं। तेल की कीमतों में यह मजबूती भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का कच्चा तेल आयात करता है।

    ईरान की ओर से कहा गया कि छह महीने से चल रहे संघर्ष के दौरान जहाजों पर हुए सबसे बड़े हमलों में अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को डुबो दिया। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों पर हमला करने की बात कही। इस घटनाक्रम के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर असर बना रहा।

    ऊंची कच्चे तेल की कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसके साथ ही इससे मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ने और आर्थिक विकास तथा कंपनियों की लाभप्रदता पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका रहती है। गुरुवार के सत्र में इन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी भारतीय बाजार ने तीन सत्रों की लगातार गिरावट के बाद कारोबार बढ़त के साथ समाप्त किया।

  • पश्चिम एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल के दबाव में शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन गिरा, सेंसेक्स 813 अंक टूटा

    पश्चिम एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल के दबाव में शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन गिरा, सेंसेक्स 813 अंक टूटा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी रही। कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे और बाजार लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही, जबकि निफ्टी भी कमजोर होकर 23,500 के स्तर से नीचे चला गया।

    बाजार बंद होने पर बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत टूटकर 74,764.23 पर पहुंच गया। एनएसई का निफ्टी 50 भी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,431.50 पर बंद हुआ। लगातार तीसरे सत्र की गिरावट ने बाजार में बनी कमजोर धारणा को और मजबूत किया।

    सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 75,577.58 के स्तर के मुकाबले 361.36 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,216.22 पर खुला था। कारोबार के दौरान बिकवाली बढ़ने से यह दिन के निचले स्तर 74,764.23 तक पहुंच गया। इस स्तर पर सूचकांक में 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

    निफ्टी 50 भी अपने पिछले बंद स्तर 23,635.10 के मुकाबले 113 अंक यानी 0.47 प्रतिशत नीचे 23,522.05 पर खुला। दिन के कारोबार में यह और फिसलकर 23,431.50 के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस तरह निफ्टी में दिन के दौरान 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    व्यापक बाजारों में भी निवेशकों का रुख कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप 0.51 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। क्षेत्रवार कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ और इसमें 3.24 प्रतिशत की गिरावट रही। निफ्टी रियल्टी 2.23 प्रतिशत तथा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.23 प्रतिशत कमजोर हुए। निफ्टी एफएमसीजी, प्राइवेट बैंक, मीडिया और फार्मा सूचकांक भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    इसके विपरीत निफ्टी मेटल में 1.79 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी 50 में अदाणी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थ, अदाणी पोर्ट्स, कोल इंडिया, टाटा स्टील, हिंडाल्को, अपोलो हॉस्पिटल और एनटीपीसी प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में रहे। इन कंपनियों के शेयरों में करीब पांच से एक प्रतिशत तक की तेजी दर्ज हुई। दूसरी तरफ इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा कमजोर शेयरों में शामिल रहे।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की आशंका को ध्यान में रखते हुए बाजार की कीमतों का आकलन कर रहे हैं। लगातार जारी लड़ाई और जवाबी कार्रवाई के कारण निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने की संभावना बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

    विशेषज्ञों ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रहने पर प्रमुख केंद्रीय बैंकों के सामने आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन कायम करने की चुनौती बढ़ सकती है। ऊर्जा की बढ़ती लागत आर्थिक गतिविधियों और कीमतों की स्थिरता दोनों के लिए जोखिम पैदा कर रही है। बॉन्ड यील्ड और करेंसी बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के सतर्क रहने की संभावना है। इससे जोखिम लेने की उनकी क्षमता सीमित रह सकती है और बाजार की धारणा पर दबाव बना रह सकता है।

  • भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 75,577 और निफ्टी 23,635.10 अंक पर बंद हुआ

    भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 75,577 और निफ्टी 23,635.10 अंक पर बंद हुआ

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बीच भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में कमजोरी रही। कारोबार के अंत में निफ्टी 50 में 0.61 प्रतिशत और सेंसेक्स में 0.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    एनएसई निफ्टी 50 मंगलवार को 144.05 अंक यानी 0.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,635.10 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं बीएसई सेंसेक्स 555.23 अंक यानी 0.73 प्रतिशत टूटकर 75,577 के स्तर पर पहुंच गया। प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के बावजूद व्यापक बाजार में कुछ मजबूती देखने को मिली।

    निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.18 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसी तरह निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स भी 0.12 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। यानी प्रमुख बेंचमार्क में दबाव रहने के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सीमित तेजी बनी रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में सबसे अधिक कमजोरी रही। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.98 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 0.93 प्रतिशत गिरा। इसके अलावा निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सीमेंट और निफ्टी आईटी इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई।

    दूसरी तरफ कुछ सेक्टरों ने बाजार में मजबूती बनाए रखने का काम किया। निफ्टी मीडिया इंडेक्स में 1.31 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि निफ्टी फार्मा 0.77 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.63 प्रतिशत बढ़ा। निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी केमिकल्स में भी बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मेटल इंडेक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ।

    एक मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, अप्रैल में मिडकैप और मार्च में स्मॉलकैप शेयरों के 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद इन दोनों सेगमेंट ने करीब 20 से 30 प्रतिशत का मजबूत रिटर्न दिया है। इस तेजी के पीछे घरेलू निवेश में सुधार और कम कीमत पर बेहतर शेयरों की खरीदारी को प्रमुख कारण बताया गया।

    एक्सपर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक आर्थिक मंदी, ऊंची महंगाई और व्यापार शुल्क जैसी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण कंपनियों की कमाई को लेकर बनी चिंताओं में कमी आई थी। वहीं पहली तिमाही के नतीजों से कॉरपोरेट कमाई में सुधार के संकेत भी मिले हैं।

    हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से कमाई में सुधार की उम्मीदों को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। एक्सपर्ट ने कहा कि चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी रह सकती है, लेकिन बाजार में अभी भी काफी उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है। ऐसे माहौल में अल्पकालिक निवेशकों के लिए कुछ मुनाफा बुक करना समझदारी भरा कदम हो सकता है।

    पिछले पांच-छह महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों के शानदार प्रदर्शन को आगे भी बनाए रखना मुश्किल माना जा रहा है। रणनीतिक नजरिए से लार्जकैप शेयरों और नॉन-इक्विटी ईटीएफ पर अधिक ध्यान देना अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प बताया गया है। सेक्टर के स्तर पर हेल्थकेयर, टेलीकॉम और एफएमसीजी पर ध्यान देने की बात कही गई है।

  • सेंसेक्स और निफ्टी के लिए अगले सप्ताह अहम रहेंगे ये स्तर, जानिए सपोर्ट रेजिस्टेंस और बाजार की संभावित दिशा

    सेंसेक्स और निफ्टी के लिए अगले सप्ताह अहम रहेंगे ये स्तर, जानिए सपोर्ट रेजिस्टेंस और बाजार की संभावित दिशा

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह उतार चढ़ाव वाला और सतर्क कारोबार का रह सकता है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू राजनीतिक तनाव, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर सेंसेक्स और निफ्टी के महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों पर रहेगी।

    पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहा, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन दोनों प्रमुख सूचकांकों ने गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए बढ़त दर्ज की। शुक्रवार को सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 23,897.70 के स्तर पर पहुंचा। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 24,000 का स्तर पार किया, लेकिन अंतिम चरण में इसकी ज्यादातर बढ़त कम हो गई।

    तकनीकी संकेतों के लिहाज से सेंसेक्स के लिए 77,000 से 77,500 का क्षेत्र शुरुआती रेजिस्टेंस माना जा रहा है। इसके ऊपर 77,700 से 78,000 का दायरा महत्वपूर्ण बाधा बन सकता है। यदि सूचकांक 78,000 के ऊपर मजबूती से टिकने में कामयाब रहता है तो बाजार में तेजी का नया दौर देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में सेंसेक्स 78,500 से 78,800 की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर सकता है।

    हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में सेंसेक्स अभी सुधार और समेकन के दौर में दिखाई दे रहा है। यदि ऊपरी स्तरों पर खरीदारी का समर्थन कमजोर रहता है तो मुनाफावसूली बढ़ सकती है। इससे सूचकांक सीमित दायरे में रह सकता है और निवेशकों को हर तेजी के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। इस स्तर के ऊपर टिके रहना बाजार की मजबूती के लिए अहम होगा। यदि निफ्टी लगातार 23,800 के नीचे बंद होता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और सूचकांक 23,600 के आसपास पहुंच सकता है। इसके विपरीत ऊपर की ओर 24,000 से 24,200 का क्षेत्र प्रमुख रेजिस्टेंस रहेगा।

    विशेषज्ञों के मुताबिक जब तक निफ्टी 24,000 से 24,200 के दायरे को निर्णायक रूप से पार नहीं करता, तब तक बाजार में पूरी तरह मजबूत तेजी की पुष्टि नहीं मानी जा सकती। इस दौरान निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली कर सकते हैं और कारोबार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

    बाजार की धारणा पर कच्चे तेल की कीमतों का असर भी महत्वपूर्ण रहेगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच जारी टकराव से ऊर्जा बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर किसी भी तरह की बाधा की आशंका कच्चे तेल की कीमतों को और प्रभावित कर सकती है। ऊंची तेल कीमतें भारत के लिए महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी घरेलू बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही है और बड़ी गिरावट को सीमित करने में मदद कर रही है। आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर विदेशी निवेश प्रवाह, रुपये की चाल, अमेरिकी ब्याज दरों के संकेत और वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर भी रहेगी।

    यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार आता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी होती है तो भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है। इसके विपरीत नकारात्मक वैश्विक संकेतों से निफ्टी के 23,800 और सेंसेक्स के 76,000 के आसपास के स्तरों की मजबूती की परीक्षा हो सकती है। ऐसे में अगले सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में तकनीकी स्तरों के साथ वैश्विक घटनाक्रम की भूमिका अहम रहने की संभावना है।

  • चार सत्रों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 362 अंक चढ़कर 76,500 के पार बंद

    चार सत्रों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 362 अंक चढ़कर 76,500 के पार बंद

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद शुक्रवार को राहत की सांस ली और बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। घरेलू बाजार में मेटल और कमोडिटी शेयरों में खरीदारी का असर प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया। हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार की तेजी सीमित रही।

    कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 23,897.70 पर पहुंच गया। लगातार गिरावट के बाद प्रमुख सूचकांकों में आई यह तेजी निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आई।

    शुक्रवार के कारोबार में मेटल और कमोडिटी क्षेत्र बाजार की तेजी के प्रमुख आधार रहे। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 1.07 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह दिन के प्रमुख प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। निफ्टी कमोडिटीज में भी 0.55 प्रतिशत की मजबूती देखने को मिली।

    इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.49 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया डिफेंस में 0.39 प्रतिशत की बढ़त रही। निफ्टी मीडिया 0.30 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.28 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.21 प्रतिशत मजबूत होकर बंद हुए। निफ्टी पीएसई में भी मामूली 0.04 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    दूसरी ओर कई प्रमुख सेक्टरों में दबाव बना रहा। निफ्टी रियल्टी में 0.90 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी हेल्थकेयर 0.87 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 0.68 प्रतिशत कमजोर रहे। निफ्टी आईटी में 0.47 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो में 0.45 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी 0.43 प्रतिशत नीचे रहा।

    व्यापक बाजार में कारोबार मिश्रित रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 156.15 अंक यानी 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 63,079.05 पर बंद हुआ। इसके विपरीत निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 44.70 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 20,095.45 पर पहुंच गया। इससे संकेत मिला कि छोटे शेयरों में चुनिंदा खरीदारी बनी रही, जबकि मिडकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका कम होने से भारतीय बाजार को समर्थन मिला। ब्याज दरों के रुख को लेकर बदलती उम्मीदों का असर वैश्विक बाजारों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर भी पड़ रहा है।

    हालांकि बाजार में तेजी पूरी तरह मजबूत नहीं रही। ऊंचे स्तरों पर निवेशकों की मुनाफावसूली ने बढ़त को सीमित किया। इसके साथ ही मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे माहौल में विदेशी बाजारों के संकेतों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर घरेलू निवेशकों की नजर बनी हुई है।

    अमेरिका से आने वाले रोजगार संबंधी आंकड़े भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इसके बाद अगले सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगी। महंगाई के आंकड़े अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी ब्याज दर नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।

    जानकारों का मानना है कि अगस्त में कोर महंगाई में मामूली नरमी की उम्मीद फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की संभावना को कमजोर कर सकती है। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में स्थिरता आने और वैश्विक शेयर बाजारों पर दबाव कम होने की संभावना बन सकती है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम के साथ घरेलू निवेश धारणा बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • सितंबर को बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक, ग्लोबल संकेतों से लेकर तेल कीमतों तक कई फैक्टर तय करेंगे Nifty-Sensex की दिशा

    सितंबर को बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक, ग्लोबल संकेतों से लेकर तेल कीमतों तक कई फैक्टर तय करेंगे Nifty-Sensex की दिशा


    नई दिल्ली। 1 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। अगस्त के आखिरी कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार दबाव में नजर आया और अब नए महीने की शुरुआत कई महत्वपूर्ण संकेतों के बीच हो रही है। सोमवार को Nifty 50 और Sensex में गिरावट दर्ज की गई थी जबकि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंता ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया। 31 अगस्त को Nifty 50 करीब 0.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23997.10 के स्तर तक पहुंच गया था जबकि Sensex भी करीब 0.66 प्रतिशत नीचे 76751.32 के आसपास रहा।

    1 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा फोकस MSCI रीबैलेंसिंग पर रहने वाला है। इंडेक्स में बदलाव प्रभावी होने के साथ कई शेयरों में फंड फ्लो बढ़ सकता है। बाजार रिपोर्टों के मुताबिक Laurus Labs Adani Energy Solutions Lenskart और Groww जैसे शेयरों को इंडेक्स बदलाव से फायदा मिल सकता है जबकि Reliance Industries और Jio Financial Services जैसे बड़े शेयरों में आउटफ्लो का दबाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में बाजार का मुख्य सूचकांक भले ही सीमित दायरे में रहे लेकिन कुछ खास शेयरों में तेज खरीदारी या बिकवाली देखने को मिल सकती है।

    MSCI रीबैलेंसिंग के साथ बाजार में नए Closing Auction Session को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। यह व्यवस्था अगस्त की शुरुआत से लागू हुई है और 1 सितंबर का MSCI बदलाव इस नई व्यवस्था के लिए पहला बड़ा परीक्षण माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कम ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले शेयरों में इंडेक्स से जुड़े बड़े फंड फ्लो आने पर कीमतों में सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि व्यापक बाजार पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद जताई गई है।

    इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार के लिए अहम संकेत बनी हुई हैं। तेल की कीमतों में तेजी से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और इससे महंगाई तथा रुपये की चाल पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर 31 अगस्त को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 0.2 प्रतिशत मजबूत होकर 95.1625 पर बंद हुआ और करीब चार सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। बाजार में MSCI से जुड़े प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक के समर्थन को रुपये की मजबूती के प्रमुख कारणों में गिना गया।

    बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों को सतर्क नजर रखनी होगी। HDFC Bank के शेयरों में हालिया कमजोरी ने बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया है। 31 अगस्त को बैंक के शेयर में करीब 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं बाजार में वैश्विक ब्याज दरों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित नीति को लेकर संकेत आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    ऐसे माहौल में 1 सितंबर का कारोबार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। बाजार में किसी एक दिशा में तेजी या गिरावट के बजाय शेयर आधारित गतिविधियां ज्यादा देखने को मिल सकती हैं। इसलिए निवेशकों को केवल बाजार की तेजी देखकर खरीदारी करने या गिरावट देखकर घबराकर बिकवाली करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और बाजार के जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए। खासतौर पर MSCI बदलाव से प्रभावित शेयरों में अचानक आने वाली हलचल को समझना जरूरी होगा। कुल मिलाकर नए महीने की शुरुआत घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक बाजार कच्चे तेल रुपये और इंडेक्स रीबैलेंसिंग के बीच होने जा रही है और यही फैक्टर मंगलवार को शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • दलाल स्ट्रीट पर फिर दिखेगा उतार चढ़ाव सेंसेक्स निफ्टी के रुख से तय होगी निवेशकों की रणनीति

    दलाल स्ट्रीट पर फिर दिखेगा उतार चढ़ाव सेंसेक्स निफ्टी के रुख से तय होगी निवेशकों की रणनीति

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए हर कारोबारी दिन नई संभावनाओं और जोखिमों के साथ आता है। सेंसेक्स और निफ्टी में होने वाला उतार चढ़ाव केवल बाजार की मौजूदा स्थिति को नहीं दर्शाता बल्कि इसका असर निवेशकों के फैसलों और शेयरों की खरीद बिक्री पर भी पड़ता है। ऐसे समय में बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले घरेलू और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना बेहद जरूरी हो जाता है। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर लगातार उत्सुकता बनी रहती है कि बाजार में तेजी का सिलसिला आगे बढ़ेगा या ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिलेगी।

    शेयर बाजार की चाल पर सबसे पहले वैश्विक संकेतों का असर दिखाई देता है। अमेरिका समेत दुनिया के प्रमुख बाजारों का प्रदर्शन भारतीय बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बिकवाली भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। अगर विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयरों में पैसा लगाते हैं तो बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है जबकि लगातार बिकवाली से दबाव बढ़ने की संभावना रहती है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार को सहारा देने में अहम भूमिका निभाती हैं।

    घरेलू मोर्चे पर कंपनियों के तिमाही नतीजे कारोबार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहते हैं। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं उनके शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी जैसे प्रमुख सेक्टरों में होने वाली गतिविधियां भी पूरे बाजार के रुख को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी को देखना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि अलग अलग सेक्टर के प्रदर्शन पर भी नजर रखना जरूरी है।

    बाजार में ब्याज दरें महंगाई कच्चे तेल की कीमतें और रुपये की स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ा सकती है। वहीं रुपये में कमजोरी का असर आयात लागत और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है। दूसरी ओर ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकती है क्योंकि इससे कंपनियों और कारोबार के लिए कर्ज की लागत कम होने की संभावना बनती है।

    निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी या गिरावट देखकर घबराहट में बिकवाली करने से बचा जाए। शेयर बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है और किसी भी शेयर की पिछली तेजी उसके भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होती। इसलिए निवेश से पहले कंपनी के कारोबार वित्तीय स्थिति मुनाफे कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को समझना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियां ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं जबकि अल्पकालिक कारोबार करने वालों को बाजार की अस्थिरता और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक बाजारों की दिशा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां घरेलू आर्थिक आंकड़े और कंपनियों से जुड़ी खबरें भारतीय शेयर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए बाजार में अवसर जरूर हैं लेकिन हर अवसर के साथ जोखिम भी जुड़ा हुआ है। समझदारी इसी में है कि निवेशक भावनाओं के बजाय तथ्यों और अपनी जोखिम क्षमता के आधार पर फैसला लें।