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  • Pakistan: उत्तर वजीरिस्तान में सुसाइड बॉम्बर ने सैन्य चौकी को उड़ाया, 4 सैनिकों की मौत

    Pakistan: उत्तर वजीरिस्तान में सुसाइड बॉम्बर ने सैन्य चौकी को उड़ाया, 4 सैनिकों की मौत


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के उत्तर-पश्चिमी इलाके उत्तर वजीरिस्तान (North Waziristan) में शुक्रवार को एक बड़ा आतंकी हमला (Major terrorist attack) हुआ। सुसाइड कार बॉम्बर (Suicide car bomber) और तीन बंदूकधारियों ने एक गांव के पास स्थित सैन्य चौकी पर हमला किया, जिसके बाद घंटों चली गोलीबारी में चार पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। इस हमले में कम से कम 15 नागरिक घायल हो गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

    पाकिस्तानी सेना और स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह इलाका खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आता है, जो अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है और अतीत में पाकिस्तानी तालिबान तथा अन्य उग्रवादी संगठनों का गढ़ रहा है। पुलिस ने बताया कि धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के कई मकान ढह गए, जिससे स्थानीय नागरिकों को गंभीर चोटें आईं। सेना के बयान में कहा गया कि सभी हमलावरों को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ के दौरान मार गिराया।

    सेना के मुताबिक, हमलावरों ने पहले चौकी की सुरक्षा घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने पर विस्फोटकों से लदी एक गाड़ी को चौकी की बाहरी दीवार से टकरा दिया। इस विस्फोट से पास के घरों और एक मस्जिद को भी नुकसान पहुंचा। हालांकि किसी भी संगठन ने तुरंत हमले की जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने इस हमले के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को जिम्मेदार ठहराया है। सेना का दावा है कि इस हमले की योजना अफगान सीमा के उस पार बनाई गई और वहीं से इसे निर्देशित किया गया।

    इस पर अफगानिस्तान की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। अफगान तालिबान लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि वे किसी भी देश के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देते, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि अफगानिस्तान के तालिबान शासक अपने क्षेत्र से आतंकियों को पाकिस्तान पर हमले करने से रोकेंगे। साथ ही यह भी कहा कि पाकिस्तान को आतंकियों और उनके मददगारों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है।

    हमले के कुछ घंटे बाद ही पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय सक्रिय हुआ। मंत्रालय ने इस्लामाबाद में अफगान तालिबान के उप-मिशन प्रमुख को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि पाकिस्तान ने अफगान भूमि से संचालित आतंकवादी हमलों के दोषियों और मददगारों के खिलाफ पूर्ण जांच और निर्णायक कार्रवाई की मांग की है। बयान में यह भी कहा गया कि अफगान तालिबान से यह अपेक्षा की गई है कि वह अपने क्षेत्र में सक्रिय सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस, तत्काल और सत्यापन योग्य कदम उठाए तथा पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद के लिए अफगान जमीन के इस्तेमाल को पूरी तरह रोके।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव हाल के महीनों में बढ़ा है। अक्टूबर में सीमा पर झड़पें हुई थीं, जब काबुल में 9 अक्टूबर को हुए विस्फोटों के लिए अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था। बाद में कतर की मध्यस्थता से युद्धविराम तो हुआ, लेकिन नवंबर में तुर्की में हुई बातचीत में दोनों देश किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सके।

  • पाकिस्तान को बड़ा झटका… सऊदी अरब ने 50 हजार से ज्यादा भिखारियों को किया डिपोर्ट

    पाकिस्तान को बड़ा झटका… सऊदी अरब ने 50 हजार से ज्यादा भिखारियों को किया डिपोर्ट


    दुबई।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) और संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates- UAE) पाकिस्तानी नागरिकों (Pakistani citizens) पर कड़ी नजर रखे हुए है। उसने पाकिस्तान को उसकी सही जगह दिखाते हुए 50 हजार से ज्यादा भिखारियों (More than 50,000 beggars) को अपने देश से वापस भगा दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि यह ट्रेंड पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। सऊदी अरब ने लगभग 56,000 पाकिस्तानी भिखारियों को डिपोर्ट कर दिया है, जबकि UAE ने वीजा नियमों को और सख्त कर दिया है। पिछले महीने ही, UAE ने ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिकों को वीजा देना बंद कर दिया था, क्योंकि उसे इस बात की चिंता थी कि लोग खाड़ी देश में जाकर क्रिमिनल एक्टिविटीज और भीख मांगने में शामिल हो रहे हैं।

    पाकिस्तान के अधिकारियों ने इस साल 50 हजार से ज्यादा नागरिकों को विदेश यात्रा करने से रोक दिया, क्योंकि देश ने मानव तस्करी पर रोक लगाने और संभावित भिखारियों को रोकने के प्रयास तेज कर दिए हैं। यह जानकारी आगा रफीउल्लाह की अध्यक्षता में नेशनल असेंबली की ओवरसीज पाकिस्तानी और मानवाधिकार मामलों की स्थायी समिति की बैठक के दौरान साझा की गई।

    फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के डायरेक्टर जनरल, रिफत मुख्तार रजा ने संसदीय पैनल को ब्रीफिंग देते हुए लागू किए गए उपायों का विवरण दिया। उन्होंने कहा, “इस साल अकेले विभिन्न हवाई अड्डों पर कम से कम 51,000 पाकिस्तानियों को उतारा गया।” उन्होंने कहा कि यात्रा करने से रोके गए कई लोग यूरोप और सऊदी अरब जाने की कोशिश कर रहे थे। किंगडम जाने वाले लोग उमराह करने का बहाना बना रहे थे, जबकि यूरोपीय देशों में जाने वालों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं थे।

    UAE ने भी इसी आधार पर 6,000 पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किया, जबकि अजरबैजान ने लगभग 2,500 भिखारियों को देश से निकाल दिया। समिति को उन पाकिस्तानियों के बारे में भी बताया गया जो अलग-अलग देशों में गए लेकिन कभी वापस नहीं लौटे। रजा ने कहा कि इस साल 24,000 पाकिस्तानी कंबोडिया गए, जिनमें से 12,000 अभी तक वापस नहीं आए हैं, जबकि 4,000 टूरिस्ट वीज़ा पर म्यांमार गए और लगभग 2,500 वापस नहीं आए।

    FIA प्रमुख ने कहा कि सख्त नियंत्रण से पाकिस्तान की पासपोर्ट रैंकिंग 118 से 92 हो गई है, यह देखते हुए कि पाकिस्तान पहले अवैध प्रवासन के लिए शीर्ष पांच देशों में से था, लेकिन अब संशोधित नीतियों के कारण उस सूची से बाहर हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि यूरोप में अवैध प्रवासन में कमी आई है, पिछले साल 8,000 पाकिस्तानियों ने अवैध रूप से यात्रा की थी, जबकि इस साल यह संख्या 4,000 थी। FIA DG ने समिति को यह भी बताया कि दुबई और जर्मनी ने आधिकारिक पासपोर्ट के लिए वीज़ा-फ्री कर दिया है, जबकि जनवरी के मध्य तक एक ई-इमिग्रेशन एप्लिकेशन लॉन्च किया जाएगा।

  • बूंद-बूंद पानी को तरसेगा पाकिस्तान…! अफगानिस्तान से पंगा लेना पड़ा भारी, $4.5 अरब का नुकसान

    बूंद-बूंद पानी को तरसेगा पाकिस्तान…! अफगानिस्तान से पंगा लेना पड़ा भारी, $4.5 अरब का नुकसान


    इस्लामाबाद।
    पिछले दिनों अफगानिस्तान और पाकिस्तान (Pakistan-Afghanistan) के बीच तनावपूर्ण माहौल हो गया था। दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति भी आ गई, जहां पाकिस्तान ने तालिबान के शासन वाले अफगानिस्तान (Afghanistan) में कई हवाई हमले भी किए। इसके बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से होने वाले सीमा व्यापार को भी बंद कर दिया। पाकिस्तान को लगा था कि इस कदम से तालिबान को आर्थिक झटका लगेगा, लेकिन अब उलटा हो गया। व्यापार को बंद करने से पाकिस्तान (Pakistan) को साढ़े चार अरब डॉलर का नुकसान (Loss of $4.5 billion) हुआ है। इससे शहबाज शरीफ के देश की कमर टूट गई है।

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान जॉइंट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PAJCCI) का कहना है, ”बॉर्डर बंद होने से अब तक पाकिस्तान के व्यापार को $4.5 बिलियन से ज़्यादा का नुकसान हुआ है।” पाकिस्तानी मीडिया ने चैंबर के हवाले से बताया कि खेती और कंस्ट्रक्शन के पीक टाइम में रोजाना एक्सपोर्ट $50 मिलियन से $60 मिलियन के बीच पहुंच गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो दिसंबर और मार्च के बीच संतरे और आलू जैसे मौसमी एक्सपोर्ट को लगभग $200 मिलियन का और नुकसान हो सकता है।

    बता दें कि पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) के लड़ाके उसके देश में आतंकी हमलों को अंजाम दे रहे हैं। टीटीपी के कथित हमलों में पाकिस्तानी सेना के कई जवानों की मौत हो चुकी है, जबकि आम नागरिकों की भी जान गई है। इसी के चलते पाकिस्तान ने लगभग दो महीने पहले अफगानिस्तान के साथ सभी व्यापार मार्ग बंद कर दिए थे, जिसके जवाब में अफगान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी।

    अफगानिस्तान ने भी की थी जवाबी कार्रवाई
    इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान (IEA) ने भी पाकिस्तान के साथ व्यापार निलंबित कर दिया और उद्योगपतियों और व्यापारियों से वैकल्पिक व्यापार मार्गों का उपयोग करने का आग्रह किया। अफगान अधिकारियों का कहना है कि व्यापार मार्गों को बार-बार बंद करने और वाणिज्यिक और मानवीय मामलों के राजनीतिकरण के कारण IEA के पास यह कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।


    पाक को उलटा पड़ा अपना कदम

    पाकिस्तान के अखबार ने PAJCCI का हवाला देते हुए बताया कि इस बंद होने की वजह से महत्वपूर्ण व्यापार गलियारे को लगभग खत्म कर दिया, जिसकी कीमत सालाना अरबों डॉलर थी। बंदी से पहले, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग $2-3 बिलियन प्रति वर्ष था, जिसमें पाकिस्तान उच्च मूल्य वाले सामान निर्यात करता था, जबकि अफगानिस्तान आवश्यक वस्तुओं के लिए पाकिस्तान पर निर्भर था और बदले में कृषि उत्पाद निर्यात करता था। पाकिस्तान को अब अपना ही कदम उलटा पड़ गया है। एक तरफ भारत उसे सालों से आर्थिक झटका देता रहा है, तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान से भी उसे अरबों का नुकसान होने लगा।

    भारत के बाद अफगानिस्तान का बड़ा कदम

    भारत के बाद अब अफगानिस्तान पाकिस्तान का पानी रोकने वाला है। तालिबान सरकार यह योजना बना रही है कि कुनार नदी का बहाव अफगानिस्तान नांगरहार क्षेत्र की तरफ मोड़ दिया जाए। अगर ऐसा होता है कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पानी की भारी किल्लत हो जाएगी। बता दें कि भारत द्वारा सिंधु नदी समझौता रद्द करने के बाद पाकिस्तान पहले ही पानी के लिए मुहाल है। ऐसे में अगर अफगानिस्तान ने भी पानी रोक दिया तो पाकिस्तान के लिए मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ जाएंगी। वहीं, पहले ही पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर जारी तनाव के बीच एक नया मोर्चा भी खुलने का अंदेशा है।

    जानकारी के मुताबिक इसको लेकर बैठकें भी हो चुकी हैं और फैसले पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है। अफगानिस्तान की खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री के आर्थिक आयोग की तकनीकी कमेटी की बैठक में एक प्रस्ताव पास हुआ है। यह प्रस्ताव कुनार नदी के पानी को नांगरहार के दारुंता डैम में ट्रांसफर करने को लेकर है। अब इसे अंतिम फैसले के लिए आर्थिक आयोग के पास भेजा गया है। एक बार यह प्रस्ताव लागू हो गया तो अफगानिस्तान के नांगरहार इलाके में बड़ी संख्या में खेती वाली जमीनों के लिए पानी की समस्या हल हो जाएगा। लेकिन पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में पानी की बेहद कमी हो जाएगी।


    पाकिस्तान कैसे होगा प्रभावित

    कुनार नदी करीब 500 किमी लंबी है। यह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चित्रल जिला स्थित हिंदुकुश पहाड़ी से निकलती है। इसके बाद यह दक्षिणी अफगानिस्तान में कुनार और नांगरहार प्रांतों में बहती है। इसके बाद यह काबुल नदी में जाकर मिल जाती है। इन दोनों नदियों से पेच नदी भी जुड़ती और यह फिर से पूरब की तरफ मुड़ती हुई पाकिस्तान पहुंच जाती है। यहां पर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित अटॉक सिटी में सिंधु नदी से मिलती है।

    इस नदी का पाकिस्तान में बहाव सबसे ज्यादा है। सिंधु नदी की तरह यह वहां पर सिंचाई, पीने के पानी और हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर के इस्तेमाल में आती है। खासतौर पर यह खैबर पख्तूनख्वा इलाके लिए बेहद अहम, जहां अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच भिड़ंत होती है। अब अगर अफगानिस्तान उस जगह पर बांध बना देता है, जहां से कुनार पाकिस्तान में एंट्री करती है तो वहां पर हालात खराब हो जाएंगे। इसके चलते पाकिस्तान में सिंचाई, पीने के पानी और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के लिए पानी मिलना मुहाल हो जाएगा। बता दें कि भारत द्वारा सिंधु नदी जल समझौता रद्द होने के चलते पाकिस्तान के लोग पहले ही परेशान हैं।


    यह भी परेशानी का सबब

    सबसे खास बात यह है कि अफगानिस्तान को रोकने के लिए पाकिस्तान कोई दबाव भी नहीं बना सकता। वजह, भारत के साथ तो पाकिस्तान का सिंधु नदी जल समझौता था, लेकिन अफगानिस्तान के साथ उसका कोई ऐसा समझौता नहीं है।

  • कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'

    कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'


    नई दिल्ली । कांग्रेसी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर पर एक विवादित बयान दिया है जिसके बाद राजनीति में हलचल मच गई है। चव्हाण का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय वायु सेना ने अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि उस दिन भारतीय विमानों के पाकिस्तान द्वारा मार गिराए जाने की संभावना बहुत अधिक थी।

    पृथ्वीराज चव्हाण ने एक इंटरव्यू में कहा ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन अगर ग्वालियर बठिंडा या सिरसा से कोई विमान उड़ान भरता तो उसे पाकिस्तान द्वारा बहुत आसानी से मार गिराया जा सकता था। यही कारण था कि एयर फोर्स को पूरी तरह से ग्राउंडेड रखा गया था। चव्हाण ने आगे कहा कि पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे लेकिन ऑपरेशन के अगले चरणों में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने अपनी ताकत दिखाई।

    यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना के एक्शन को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर जो कि 1999 में कारगिल युद्ध के बाद भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किया गया था एक बड़ा सैन्य अभियान था जिसमें भारतीय वायु सेना और सेना ने एकजुट होकर पाकिस्तान की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाया था। चव्हाण के बयान के बाद विपक्षी दलों और रक्षा विशेषज्ञों ने उनकी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    चव्हाण का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायु सेना और सेना के संचालन पर लगातार चर्चा हो रही है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान भारतीय सेना और वायु सेना की कार्यप्रणाली को गलत तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि चव्हाण ने अपनी बात तथ्यों पर आधारित रखते हुए रखी है और ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय विमानों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त उपाय किए गए थे।

    इससे पहले भारतीय वायु सेना और सेना के कई अधिकारियों ने भी माना था कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन कुछ फैसले धीमे थे क्योंकि पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों को निशाना बनाने का खतरा बहुत ज्यादा था। हालांकि बाद में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने दुश्मन के ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।

    चव्हाण के बयान ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि क्या भारतीय वायु सेना के लिए ऐसे ऑपरेशनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई कमजोरी रही थी। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयानों से भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता पर सवाल उठते हैं जो एक संवेदनशील मामला हो सकता है।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हमेशा बना रहता है और ऐसे बयान से दोनों देशों के सैन्य इतिहास और रणनीति पर चर्चा और विवाद दोनों का सामना करना पड़ सकता है। चव्हाण के बयान को लेकर भारतीय रक्षा मंत्रालय और वायु सेना से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन इस बयान ने राजनीतिक और रक्षा हलकों में हंगामा मचा दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में चव्हाण का यह बयान भारतीय राजनीति में एक नई बहस का कारण बन सकता है और अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

  • पाकिस्तान में बढ़ता फर्जी शादियों का ट्रेंड, युवाओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया..

    पाकिस्तान में बढ़ता फर्जी शादियों का ट्रेंड, युवाओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया..


    नई दिल्ली /पाकिस्तान में हाल ही में एक नया ट्रेंड उभरकर सामने आया है-फर्जी शादियां। इन शादियों में हिस्सा लेने वाले युवा केवल मनोरंजन और सामाजिक अनुभव के लिए शादी करते हैं। इसमें कोई भी पारिवारिक दबाव या जीवन भर की जिम्मेदारी नहीं होती। यह ट्रेंड खासकर शहरों और विश्वविद्यालयों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    शादी दक्षिण एशियाई समाज में हमेशा से एक बड़ा उत्सव रही है। भारत और पाकिस्तान में शादी का आयोजन कई दिनों तक चलता है, जिसमें हल्दी, मेहंदी, संगीत और विदाई जैसी रस्में शामिल होती हैं। पारंपरिक शादियों में दूल्हा-दुल्हन के अलावा परिवार और समाज की जिम्मेदारियां भी बड़ी होती हैं। लेकिन फर्जी शादियों में इसका उल्टा माहौल होता है-युवाओं को केवल अनुभव और मनोरंजन का अवसर मिलता है।पाकिस्तान में इस ट्रेंड की शुरुआत लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज से हुई। वहां दो छात्राओं ने एक फर्जी शादी का आयोजन किया, जिसमें शादी की सारी रस्में और सजावट वही थी जो असली शादी में होती हैं। सोशल मीडिया पर इस शादी के वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश में ध्यान खींचा गया। युवाओं में इसे लेकर उत्सुकता और उत्साह बढ़ा।

    हालांकि, इस घटना ने विरोध भी खड़ा किया। कुछ लोगों ने इसे समलैंगिक विवाह समझकर आपत्ति जताई। वीडियो वायरल होने के बाद दुल्हन बनने वाली छात्रा को ऑनलाइन ट्रोलिंग और आलोचना का सामना करना पड़ा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा और निजता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए। सबसे पहले वीडियो और फोटो को ऑनलाइन पोस्ट करने पर रोक लगा दी गई। साथ ही केवल उन लोगों को ही इस आयोजन में आने की अनुमति दी जाने लगी, जो इसे केवल मनोरंजन के रूप में लेते हों।

    फर्जी शादी में दुल्हन बनने वाली छात्रा के परिवार को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके विपरीत, दूल्हा बनी छात्रा का परिवार इस पूरे मामले में अपेक्षाकृत शांत रहा। इस अनुभव के बावजूद, इस ट्रेंड ने युवाओं में लोकप्रियता हासिल की और कई समूहों ने इसे व्यवस्थित रूप से आयोजित करना शुरू कर दिया।एक ऐसा ही समूहहुनर क्रिएटिव मार्केट है, जिसकी संस्थापक रिदा इमरान ने महिलाओं के लिए विशेष फर्जी शादियों और मेहंदी पार्टियों का आयोजन किया। इसमें कारीगरों, कलाकारों, कंटेंट क्रिएटर्स और इवेंट मैनेजर्स ने हिस्सा लिया। इस तरह की घटनाएं खासतौर पर उन लोगों के लिए वरदान साबित हुईं जो पारंपरिक शादियों की थकावट और सामाजिक दबाव के कारण शादी का असली आनंद नहीं ले पाते।

    फर्जी शादियों का यह ट्रेंड युवा पीढ़ी में खुद को व्यक्त करने और सामाजिक अनुभव का मज़ा लेने का एक नया तरीका बन गया है। इसमें विवाह के वास्तविक दायित्वों की कमी होने के बावजूद लोग शादी की रस्मों, उत्सव और उत्साह का आनंद ले सकते हैं।पाकिस्तान में फर्जी शादियों का यह चलन यह दिखाता है कि समाज में नई पीढ़ी पारंपरिक धारणाओं और सामाजिक दबावों से हटकर, स्वतंत्र और रचनात्मक तरीके से अपनी खुशियों का अनुभव करना चाहती है। यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि युवाओं के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक प्रयोग का एक नया रूप बन चुका है।

  • पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी

    पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तालिबान सरकार अब इस्लामाबाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा डिप्लोमैटिक अभियान शुरू करने की तैयारी में है। अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान उसकी सीमा के भीतर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए सैन्य हमले कर रहा है और आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। इसी को लेकर तालिबान प्रशासन दुनिया के अलग-अलग देशों में अपने प्रतिनिधि भेजने की योजना बना रहा है।

    तालिबान की ओर से तैयार किए गए एक विस्तृत डोजियर में पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने, मानवाधिकारों के उल्लंघन और अफगान नागरिकों व शरणार्थियों पर दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस डोजियर में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान आर्थिक दबाव और जबरन निर्वासन के जरिए अफगानिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगान विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने मिलकर यह दस्तावेज तैयार किया है, जिसे तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा की मंजूरी के बाद प्रभावशाली और पड़ोसी देशों को सौंपा जाएगा। इसमें पाकिस्तान को “आतंकवादियों के लिए सुविधा केंद्र” बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां ISIS और अन्य आतंकी संगठनों को लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता दे रही हैं।

    अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान इन आतंकी संगठनों का इस्तेमाल अफगानिस्तान, भारत और ईरान जैसे देशों को अस्थिर करने के लिए कर रहा है और उसके पास इन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत मौजूद हैं। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार अफगान तालिबान पर टीटीपी को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा बंद है और हाल के महीनों में तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है।

    इस डिप्लोमैटिक अभियान के जरिए तालिबान का उद्देश्य पाकिस्तान की कथित नीतियों को वैश्विक मंच पर उजागर करना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचना बताया जा रहा है।

  • जेल में सुरंग खोदने की विफल कोशिश पर मसूद अजहर ने खुद खोली पोल, बताया कैसे पीटा गया

    जेल में सुरंग खोदने की विफल कोशिश पर मसूद अजहर ने खुद खोली पोल, बताया कैसे पीटा गया


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान(Pakistan) स्थित आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सरगना मसूद अजहर ने 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir)की जेल से भागने की अपनी कोशिश की विफलता पर पछतावा व्यक्त किया है। एक ऑडियो क्लिप में संभवतः पाकिस्तान में हुए एक कार्यक्रम में उसे जेल से सुरंग खोदकर भागने की अपनी असफल कोशिश का विवरण देते हुए सुना गया है। उसकी आवाज लाउडस्पीकर(Loudspeaker) में गूंज रही थी, जिससे संकेत मिलता है कि यह कार्यक्रम एक खुले क्षेत्र में आयोजित किया गया था।

    खुफिया सूत्रों ने भारत के सबसे वांटेड आतंकवादी की इस ऑडियो क्लिप को प्रामाणिक बताया है। मसूद अजहर 2001 में संसद, 2008 में मुंबई और कई अन्य हमलों का मास्टरमाइंड है।

    ऑडियो में मसूद अजहर को यह याद करते हुए टूटते हुए सुना गया कि जम्मू-कश्मीर की कोट भलवाल जेल से सुरंग खोदकर भागने की उसकी योजना कैसे विफल हो गई। यह जेल जम्मू क्षेत्र में एक उच्च सुरक्षा वाली सुविधा है जो भारत द्वारा पकड़े गए कुछ सबसे वांटेड आतंकवादियों को रखने के लिए जानी जाती है।

    जैश सरगना ने ऑडियो क्लिप में बताया कि वह कोट भलवाल में कुछ उपकरणों का इस्तेमाल करके काफी समय से सुरंग खोद रहा था। जिस दिन उसने सुरंग के रास्ते भागने की योजना बनाई थी, उसी दिन जेल अधिकारियों ने उसकी इस गतिविधि का पता लगा लिया।

    मसूद अजहर ने कहा कि आज भी वह उन जेल अधिकारियों से डरता है, जिन्होंने भागने की योजना बनाने के लिए उसे और अन्य आतंकवादियों को पीटा था। उसने रोते हुए कहा, “भागने की मेरी योजना के आखिरी दिन उन्हें सुरंग के बारे में पता चल गया था।”

    भागने की नाकाम कोशिश के बाद जेल उसके और कुछ अन्य कैदियों के लिए एक कठिन जगह बन गई, क्योंकि नियमों को सख्ती से लागू किया गया, जिसमें उल्लंघन के लिए शारीरिक दंड भी शामिल था। मसूद अजहर को यह कहते हुए सुना गया कि उसे जंजीरों से बांधा गया था, और नियमित गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए थे।

    आतंकवादी द्वारा अपनी विफलता को स्वीकार करना एक बार फिर यह साबित करता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को भारत को परेशान करने के लिए एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है।

    मसूद अजहर फरवरी 1994 में एक नकली पहचान और पुर्तगाली पासपोर्ट के साथ भारत आया था। उसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में जिहाद फैलाना और आतंकवादियों की भर्ती करना था। उसी साल उसे अनंतनाग में गिरफ्तार कर लिया गया था। वह 1994 से 1999 तक जेल में रहा। हालांकि, दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC-814 के अपहरण के बाद, भारत सरकार ने बंधकों के बदले में मसूद अजहर को रिहा कर दिया था। इसके बाद उसने आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की और तब से वह भारत में कई आतंकवादी हमलों से जुड़ा रहा है।

    मसूद अजहर ने यह भी बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर भारत के क्रूज मिसाइल हमलों में उसके परिवार के कम से कम 10 सदस्य और चार करीबी सहयोगी मारे गए थे। यह हमला जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश आतंकवादियों द्वारा 26 नागरिकों की हत्या के जवाब में किया गया था।

  • CDS जनरल अनिल चौहान का कड़ा संदेश, कहा- 'खोखले दावों से नहीं जीती जाती जंग', पाकिस्तान पर परोक्ष हमला

    CDS जनरल अनिल चौहान का कड़ा संदेश, कहा- 'खोखले दावों से नहीं जीती जाती जंग', पाकिस्तान पर परोक्ष हमला


    भारत । के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने युद्ध जीतने के लिए साफ उद्देश्य, अनुशासन और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका यह बयान पाकिस्तान के खिलाफ परोक्ष रूप से था, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान द्वारा की जा रही जीत के दावों पर प्रतिक्रिया के रूप में।

    जनरल चौहान एयर फोर्स अकादमी, डुंडीगल में दिसंबर 2025 की संयुक्त दीक्षांत परेड के दौरान युवा सैन्य अधिकारियों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, “युद्ध केवल बयानबाज़ी और दिखावे से नहीं जीते जाते, बल्कि तैयारी, सही फैसलों और उनका ज़मीन पर लागू करने से जीते जाते हैं।” यह टिप्पणी पाकिस्तान के झूठे दावों के संदर्भ में थी, जहां ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारी नुकसान के बावजूद पाकिस्तान ने अपनी जीत का दावा किया था।

    सीडीएस ने आगे कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में अस्थिरता इसलिए बढ़ रही है क्योंकि वहां के संस्थान कमजोर हैं और निर्णय जल्दबाजी में लिए जाते हैं। इसके विपरीत, भारत की ताकत उसकी मजबूत संस्थाएं, लोकतांत्रिक व्यवस्था और पेशेवर सोच वाले सशस्त्र बलों में है।

    उन्होंने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा कि अनुशासन और जिम्मेदारी के प्रति समर्पण ही देश की सुरक्षा का मुख्य आधार है। नए अधिकारियों से उन्होंने अपील की कि वे इस मजबूत परंपरा के संरक्षक बनें और हर स्थिति में सतर्क और तैयार रहें।

    जनरल चौहान ने अंत में युवा अधिकारियों से कहा कि वे खुद को उदाहरण के रूप में पेश करें। उनका मानना था कि सतर्कता, तैयारी और पेशेवर रवैया ही किसी भी सैन्य अधिकारी की सफलता की कुंजी है, चाहे वह युद्ध का समय हो या शांति का।

    यह बयान पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश था, और यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की सैन्य शक्ति केवल बातों में नहीं, बल्कि असलियत में उस शक्ति को जमीन पर लागू करने में है।

  • IMP ने कसी पाकिस्तान पर नकेल… 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम के साथ जोड़ी 11 नई शर्तें

    IMP ने कसी पाकिस्तान पर नकेल… 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम के साथ जोड़ी 11 नई शर्तें


    इस्लामाबाद।
    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) ने पाकिस्तान (Pakistan) के लिए अपने 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम ($7 Billion Bailout program) के तहत 11 नई शर्तें जोड़ दी हैं। गुरुवार को जारी दूसरी समीक्षा की स्टाफ-लेवल रिपोर्ट में शामिल इन शर्तों के बाद पिछले 18 महीनों में लगाई गई कुल शर्तों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है। नई शर्तें पाकिस्तान के सुशासन ढांचे की पुरानी खामियों, व्यापक भ्रष्टाचार जोखिमों और घाटे वाले क्षेत्रों में सुधार से जुड़ी हैं।


    उच्च अधिकारियों की संपत्ति का सार्वजनिक खुलासा अनिवार्य

    सबसे अहम शर्तों में से एक यह है कि दिसंबर 2026 तक सभी उच्च स्तरीय केंद्रीय सिविल सेवकों (ग्रेड-19 और ऊपर) की संपत्ति घोषणाएं आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएंगी। आईएमएफ का कहना है कि इससे आय और संपत्ति में विसंगतियों का पता लगाना आसान होगा। सरकार ने प्रांतीय स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी यह नियम लागू करने का इरादा जाहिर किया है। बैंकिंग क्षेत्र को इन घोषणाओं की पूरी जानकारी दी जाएगी।


    भ्रष्टाचार पर बड़ा हमला

    आईएमएफ ने अक्टूबर 2026 तक 10 सबसे अधिक जोखिम वाले विभागों में भ्रष्टाचार के खतरे को कम करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना जारी करने को कहा है। नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) इन योजनाओं का समन्वय करेगा। प्रांतीय एंटी-करप्शन संस्थाओं को वित्तीय खुफिया जानकारी प्राप्त करने और वित्तीय अपराधों की जांच क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। ये कदम आईएमएफ-प्रायोजित गवर्नेंस एंड करप्शन डायग्नोस्टिक असेसमेंट की सिफारिशों पर आधारित हैं, जिसमें पाकिस्तान के कानूनी, प्रशासनिक और निगरानी ढांचे में व्यापक कमियां उजागर हुई थीं।


    सीमा-पार भुगतान और रेमिटेंस लागत की समीक्षा

    आईएमएफ ने पाकिस्तान को मई 2026 तक विदेशी रेमिटेंस भेजने की लागत और बाधाओं की व्यापक समीक्षा पूरी करने को कहा है। अनुमान है कि रेमिटेंस लागत आने वाले वर्षों में 1.5 अरब डॉलर तक बढ़ सकती है, जबकि यही राशि पाकिस्तान के सीमित आयातों के लिए सबसे बड़ा वित्तीय स्रोत है। सितंबर 2026 तक स्थानीय मुद्रा बॉन्ड मार्केट के विकास में बाधाओं की जांच कर सुधारों की रणनीतिक योजना प्रकाशित करनी होगी।


    चीनी उद्योग में एकाधिकार तोड़ने की कवायद

    जून 2026 तक कंद्र और प्रांतीय सरकारों को मिलकर राष्ट्रीय चीनी बाजार उदारीकरण नीति पर सहमति बनानी होगी। इस नीति में लाइसेंसिंग नियम, मूल्य नियंत्रण, आयात-निर्यात अनुमति, जोनिंग मानदंड और कार्यान्वयन की स्पष्ट समय-सीमा शामिल होगी। नीति को संघीय कैबिनेट से मंजूरी लेनी होगी। इसे लंबे समय से शक्तिशाली माने जाने वाले शुगर उद्योग में प्रभाव के केंद्रीकरण को खत्म करने का प्रयास माना जा रहा है।


    एफबीआर (FBR) की खराब कार्यक्षमता पर सख्ती

    दिसंबर 2025 के अंत तक एफबीआर सुधारों का पूरा रोडमैप तैयार करना होगा जिसमें प्राथमिकता वाले क्षेत्र, स्टाफिंग जरूरतें, समय-सारिणी, माइलस्टोन, अपेक्षित राजस्व परिणाम और KPI शामिल होंगे। इसके बाद कम-से-कम तीन प्राथमिकता वाले सुधारों को पूरी तरह लागू करना होगा। दिसंबर 2026 तक मध्यम अवधि की टैक्स सुधार रणनीति भी प्रकाशित करनी होगी।

    बिजली क्षेत्र में निजीकरण की तैयारी
    अगले केंद्रीय बजट से पहले हैदराबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी (HESCO) और सुक्कूर इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (SEPCO) में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए आधार तैयार करने होंगे और सात सबसे बड़ी बिजली वितरण कंपनियों के साथ पब्लिक सर्विस ऑब्लिगेशन समझौते पूरे करने होंगे। कंपनीज एक्ट 2017 में संशोधन संसद में पेश करने होंगे ताकि गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अनुपालन जरूरतें बढ़ाई जा सकें। विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) कानून में प्रस्तावित संशोधनों के लिए कॉन्सेप्ट नोट भी जारी करना होगा।


    राजस्व कम हुआ तो मिनी-बजट लाना होगा

    आईएमएफ रिपोर्ट में दर्ज है कि यदि दिसंबर 2025 के अंत तक राजस्व लक्ष्य से चूक हुई तो सरकार मिनी-बजट लाएगी। इसमें उर्वरक और कीटनाशकों पर फेडरल एक्साइज ड्यूटी 5% बढ़ाना, उच्च चीनी वाले उत्पादों पर नया एक्साइज ड्यूटी लगाना और कई वस्तुओं को स्टैंडर्ड सेल्स टैक्स दर में लाना शामिल होगा। आईएमएफ ने गवर्नेंस और भ्रष्टाचार डायग्नोस्टिक रिपोर्ट में चिह्नित कमियों को दूर करने की कार्ययोजना प्रकाशित करने की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। पाकिस्तान पहले ही 7 अरब डॉलर के EFF कार्यक्रम के तहत कड़ी निगरानी में है और इन नई शर्तों से आर्थिक सुधारों की गति और तेज करने का दबाव बढ़ गया है।

  • पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पहुंचे नॉर्वे के राजदूत, शहबाज सरकार ने भेजा समन

    पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पहुंचे नॉर्वे के राजदूत, शहबाज सरकार ने भेजा समन


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान (Pakistan)के सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) की एक सुनवाई में नॉर्वे के राजदूत अल्बर्ट इलसास(Ambassador Albert Ilsas) भी पहुंच गए। इससे पाकिस्तानी सरकार इतना भड़क गई कि इलसास को समन भेज दिया गया। जानकारी के मुताबिक मानवाधिकार से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान नॉर्वे के राजदूत सुप्रीम कोर्ट में मौजूद थे। ऐक्टिविस्ट इणान जैनब मजारी और उनके पति हादी अली चत्ता की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इलसास को समन किया है और कहा है कि देश के आंतरिक मामलों में दखल देना उचित नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में उपस्थित होकर नॉर्वे के राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है।

    अंदराबी ने कहा, उन्होंने जो कुछ भी किया है उसे देश के आंतरिक मामलों में दखल माना जा रहा है। किसी भी देश के राजदूत से उम्मीद की जाती है कि वह विएना कन्वेंशन के नियमों का पालन करे। वहीं इमान ने राजदूत का पक्ष लेते हुए कहा है कि राजदूत का सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान उपस्थित रहना यह कतई नहीं दिखाता है कि वह किसी पक्ष में थे। यह एक आम बात है, हालांकि पाकिस्तान की सरकार एक राजदूत की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है।

    बता दें कि इमान और उनके पति के खिलाफ पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक ऐक्ट 2016 के तहत केस दर्ज किया गया है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट में उन्होंने अंतरिम राहत के लिए अपील की थी। उनकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद दंपती ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।