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  • भारत पर पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री का हमला, सिंधु जल संधि को लेकर हिना रब्बानी खार बोलीं— आक्रामक रुख से बढ़ सकता है तनाव

    भारत पर पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री का हमला, सिंधु जल संधि को लेकर हिना रब्बानी खार बोलीं— आक्रामक रुख से बढ़ सकता है तनाव

    नई दिल्ली । पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच दशकों से लागू यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार रहा है। इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने भारत की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि हालिया घटनाक्रम दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा सकते हैं।

    अपने संबोधन में हिना रब्बानी खार ने कहा कि सिंधु जल संधि लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे की एक प्रभावी व्यवस्था के रूप में कार्य करती रही है। उनके अनुसार, यह समझौता कठिन परिस्थितियों और द्विपक्षीय तनाव के बावजूद कायम रहा तथा दोनों देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौतों की स्थिरता क्षेत्रीय शांति और विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

    पूर्व विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि यदि किसी भी स्तर पर इस संधि को कमजोर करने या उसके क्रियान्वयन में अनिश्चितता पैदा करने का प्रयास किया जाता है, तो उसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सम्मान और उनका निरंतर पालन वैश्विक कूटनीतिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उनके अनुसार, ऐसे विषयों पर सभी पक्षों को जिम्मेदारी और संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

    हिना रब्बानी खार ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि सिंधु जल संधि केवल जल बंटवारे का दस्तावेज नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से बने एक संस्थागत ढांचे का प्रतीक भी है। उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग और संवाद को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विवादों का समाधान बातचीत और स्थापित प्रक्रियाओं के माध्यम से ही संभव है।

    सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच संपन्न एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसके तहत सिंधु नदी प्रणाली से संबंधित जल संसाधनों के उपयोग और बंटवारे के लिए विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए थे। पिछले कई दशकों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मतभेदों के बावजूद यह संधि प्रभावी बनी रही है और समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर इसकी समीक्षा और व्याख्या को लेकर चर्चा होती रही है।

    हिना रब्बानी खार का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में उनके वक्तव्य ने एक बार फिर सिंधु जल संधि, क्षेत्रीय कूटनीति और जल सहयोग को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। राजनीतिक और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान दोनों देशों के बीच चल रहे संवाद और भविष्य की रणनीतियों पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जल संसाधनों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते केवल तकनीकी विषय नहीं होते, बल्कि उनका सीधा संबंध क्षेत्रीय स्थिरता, विकास और द्विपक्षीय विश्वास से भी होता है। ऐसे में इस प्रकार के मुद्दों पर दोनों देशों के लिए संवाद, कानूनी प्रावधानों और स्थापित कूटनीतिक प्रक्रियाओं के दायरे में आगे बढ़ना महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल हिना रब्बानी खार के बयान के बाद सिंधु जल संधि और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर राजनीतिक एवं कूटनीतिक चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।

  • Pakistan: लाहौर में ट्यूशन सेंटर में पढ़ रहे थे बच्चे, अचानक भरभराकर गिरी छत …. 14 की मौत. 20 घायल

    Pakistan: लाहौर में ट्यूशन सेंटर में पढ़ रहे थे बच्चे, अचानक भरभराकर गिरी छत …. 14 की मौत. 20 घायल


    लाहौर।
    पाकिस्तान (Pakistan) के लाहौर (Lahore) शहर में मंगलवार को दर्दनाक हादसा हुआ है। घनी आबादी वाले काहना नौ क्षेत्र के बस्ती ईदगाह इलाके (Basti Eidgah area) में एक निजी ट्यूशन सेंटर (Tuition Center) की छत अचानक ढह गई, जिसमें 14 स्कूली बच्चों की मौत हो गई और कम से कम 20 अन्य बच्चे घायल हो गए। हादसे के समय सात से तेरह वर्ष की आयु के बच्चे कक्षाओं में बैठे हुए थे, जो मलबे के नीचे दब गए। पुलिस और बचाव टीमों के अनुसार, यह ट्यूशन सेंटर एक निर्माणाधीन इमारत के अंदर संचालित हो रहा था।

    बताया गया कि इमारत का एक हिस्सा अभी बन रहा था और मजदूर काम में व्यस्त थे, तभी छत का बड़ा हिस्सा अचानक गिर पड़ा। मलबे में दबे बच्चों को निकालने के लिए स्थानीय पुलिस, एधी फाउंडेशन की टीम और रेस्क्यू 1122 के कर्मी पिछले कई घंटों से अथक प्रयास कर रहे हैं।

    लाहौर के उप महानिरीक्षक (ऑपरेशंस) फैसल कामरान ने घटनास्थल पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अब तक मलबे से 14 बच्चों के शव बरामद किए जा चुके हैं। 20 घायल बच्चों और एक महिला शिक्षिका को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हमने तुरंत ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है। जांच चल रही है कि इमारत की सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

    उन्होंने आगे बताया कि इमारत पूरी तरह से निर्माणाधीन अवस्था में थी और उसमें ट्यूशन सेंटर चलाने की अनुमति भी संदिग्ध है। पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है और मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    क्या बोला एधी फाउंडेशन?
    एधी फाउंडेशन ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि काहना नौ क्षेत्र के आवासीय भवन में स्थित अकादमी की छत अचानक गिर गई। फाउंडेशन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में सहयोग कर रही है। बयान में कहा गया है कि मृतकों के शवों को लाहौर जनरल अस्पताल के मुर्दाघर में भेज दिया गया है। कुछ बच्चे अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। एधी फाउंडेशन ने यह भी बताया कि सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

    वहीं, लाहौर जिला शिक्षा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तारिक महमूद ने बताया कि यह निजी ट्यूशन सेंटर स्थानीय एक महिला निवासी द्वारा चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग इस मामले की भी जांच करेगा कि ऐसे संवेदनशील इलाके में अनधिकृत तरीके से ट्यूशन सेंटर चलाने की अनुमति किसने दी

    क्या बोलीं सीएममरियम नवाज?
    पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने पुलिस और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि इमारत ढहने के लिए जिम्मेदार ठेकेदार, मालिक और संबंधित अधिकारियों की तुरंत पहचान की जाए तथा उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की जाए। सीएम ने कहा कि लापरवाही बरतने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

  • अफगानिस्तान का पाकिस्तान में ड्रोन हमला, ISIS-K ठिकानों को बनाया निशाना

    अफगानिस्तान का पाकिस्तान में ड्रोन हमला, ISIS-K ठिकानों को बनाया निशाना


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार तनाव एक बार फिर गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर आतंकी संगठन ISIS-K के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है। तालिबान के अनुसार, यह कार्रवाई उन ठिकानों के खिलाफ की गई है जहां से अफगानिस्तान में नागरिकों पर हमलों की साजिश रची जा रही थी।

    यह घटनाक्रम पाकिस्तान द्वारा हाल ही में किए गए हवाई हमलों के दो दिन बाद सामने आया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हमले का दावा
    तालिबान का कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में की गई। अफगानिस्तान के मीडिया संस्थान ‘टोलो न्यूज’ ने भी इस दावे की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन हमलों के जरिए उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जहां ISIS-K के आतंकी छिपे हुए थे।

    खैबर पख्तूनख्वा के सरान क्षेत्र में एक स्कूल को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है, जिसे कथित तौर पर आतंकियों द्वारा गुप्त ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। तालिबान ने दावा किया है कि इस कार्रवाई में कई आतंकी मारे गए हैं, जबकि किसी भी आम नागरिक के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    पाकिस्तान के हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई का दावा
    तालिबान के इस हमले को पाकिस्तान की हालिया सैन्य कार्रवाई के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। दो दिन पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा के भीतर हवाई हमले किए थे।

    संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट (UNAMA) के अनुसार, उस कार्रवाई में कम से कम 28 नागरिकों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। वहीं, अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने मृतकों की संख्या 38 बताई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।

    भारत की प्रतिक्रिया भी सामने आई
    इस घटनाक्रम पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी देश की सीमा में घुसकर हमला करना उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है और इससे क्षेत्रीय शांति प्रभावित होती है।

    भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक असफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए अक्सर ऐसे कदम उठाता है, जिससे पड़ोसी देशों में अस्थिरता बढ़ती है।

    दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा
    फिलहाल पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान आतंकवादी संगठनों को पनाह देता है, जबकि तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान में आतंकवाद उसकी अपनी आंतरिक नीतिगत विफलताओं का परिणाम है। ताजा एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है तथा हालात आगे और गंभीर रूप लेने की आशंका जताई जा रही है।

  • सिंधु जल संधि पर बढ़ी पाकिस्तान की चिंता, दुनिया से मदद की गुहार, समर्थन जुटाने की कोशिश तेज

    सिंधु जल संधि पर बढ़ी पाकिस्तान की चिंता, दुनिया से मदद की गुहार, समर्थन जुटाने की कोशिश तेज


    नई दिल्ली। सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की चिंता लगातार बढ़ती नजर आ रही है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा संधि को स्थगित किए जाने के फैसले के बाद पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठा रहा है। हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तान के मंत्री, सांसद और वरिष्ठ नेता लगातार वैश्विक समुदाय से इस संधि को बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।

    इसी क्रम में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में पाकिस्तान के कई मंत्री, सांसदों के साथ अंतरराष्ट्रीय कानून और जल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करना बताया गया।

    इशाक डार बोले- संधि क्षेत्रीय शांति की आधारशिला
    पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सिंधु जल संधि केवल जल बंटवारे का समझौता नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और सहयोग की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि साझा जल संसाधनों को कभी भी राजनीतिक या रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। डार ने कहा कि यदि पाकिस्तान के अधिकारों से समझौता किया गया तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता और करीब दो अरब लोगों के हितों पर पड़ सकता है।

    बिलावल भुट्टो ने भी उठाई संधि बहाल करने की मांग
    पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि सिंधु जल संधि किसी एक देश का दूसरे पर एहसान नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच हुआ एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। उन्होंने कहा कि इस संधि का सम्मान किया जाना चाहिए और इसके प्रावधानों का पालन होना चाहिए।

    सीनेटर मुसद्दिक मलिक ने जताई चिंता
    सम्मेलन में पाकिस्तान के सीनेटर मुसद्दिक मलिक ने भी भारत के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि कोई शक्तिशाली देश किसी अंतरराष्ट्रीय संधि को एकतरफा निलंबित कर सकता है, तो इससे दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय समझौतों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। उनके अनुसार, सिंधु जल संधि विश्व के सबसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय समझौतों में से एक मानी जाती है।

    पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था फैसला
    अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था। उस समय भारत ने स्पष्ट किया था कि “खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।” इसके साथ ही पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत और जल प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं को भी तेज गति से आगे बढ़ाया गया।

    पानी और आंकड़ों की अनिश्चितता से बढ़ी पाकिस्तान की चिंता
    सिंधु नदी प्रणाली का पानी पाकिस्तान की कृषि, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संधि स्थगित होने के बाद पाकिस्तान को जल प्रवाह की अनिश्चितता के साथ-साथ भारत से मिलने वाली हाइड्रोलॉजिकल जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो रही है। इसी कारण पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, भारत का रुख स्पष्ट है कि सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई होने तक सिंधु जल संधि को लेकर पहले जैसी स्थिति बहाल नहीं की जाएगी।

  • अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक, हमलों में 34 नागरिकों की मौत, सीमा पर बढ़ा तनाव

    अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक, हमलों में 34 नागरिकों की मौत, सीमा पर बढ़ा तनाव


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अफगान मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने रविवार रात अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें 34 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में सभी आम नागरिक होने का दावा किया गया है।

    स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पाकतिका प्रांत के गयान जिले और पाकतिया प्रांत के समकानी जिले में हवाई हमले किए। इन हमलों में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा कुनार प्रांत के कुछ क्षेत्रों पर भी हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    रिहायशी इलाकों को बनाया गया निशाना
    पाकतिया पुलिस कमांड के प्रवक्ता मुनीब जादरान ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि समकानी जिले में 35 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 40 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। उनके अनुसार, हमला समकानी जिले के मांडोखेल इलाके में बिस्मिल्लाह जान नामक एक नागरिक के घर पर किया गया। आरोप है कि पहले हमले के बाद जब स्थानीय लोग मलबे में फंसे लोगों को बचाने पहुंचे, तभी उसी स्थान पर दूसरा हवाई हमला किया गया, जिससे राहत कार्य में जुटे लोग भी इसकी चपेट में आ गए।

    स्थानीय लोगों का दावा- इलाके में नहीं था कोई सैन्य ठिकाना
    समकानी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों और घायलों का कहना है कि हमले पूरी तरह रिहायशी इलाकों पर हुए। उनका दावा है कि आसपास कोई सैन्य ठिकाना या सैनिक मौजूद नहीं थे, इसके बावजूद घरों को निशाना बनाया गया, जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए।

    पाकिस्तान की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
    इस घटना पर पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। वहीं अफगानिस्तान की ओर से इन हमलों की कड़ी निंदा की गई है और इसे आम नागरिकों पर सीधा हमला बताया गया है। बताया जा रहा है कि हाल ही में कराची में हुए हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था। इसी पृष्ठभूमि में इन ताजा हवाई हमलों की खबर सामने आई है, जिससे सीमा पर हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं।

  • आतंक के ठिकानों पर अज्ञात हमलों का साया: पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध मौतों से मचा हड़कंप

    आतंक के ठिकानों पर अज्ञात हमलों का साया: पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध मौतों से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े तत्वों की रहस्यमयी मौतों को लेकर हाल के दिनों में सुरक्षा और खुफिया हलकों में हलचल तेज हो गई है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है कि क्या देश के भीतर किसी प्रकार का संगठित टारगेट ऑपरेशन चल रहा है या यह आपसी संघर्ष का परिणाम है।

    सूत्रों और सामने आई रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में हाल के दिनों में तीन आतंकियों के शव मिलने से आतंकी नेटवर्क में बेचैनी बढ़ी है। इनमें गाजी मुमताज, मोहम्मद खुजैमा कासिम और खालिद बशीर जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जो कथित रूप से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इन मौतों के कारण संगठन के भीतर असुरक्षा का माहौल गहराने की बात कही जा रही है।

    पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी संगठनों को संरक्षण देने के आरोपों का सामना करता रहा है। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को लेकर भी विभिन्न समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि वर्तमान घटनाक्रम में जिस तरह से एक के बाद एक संदिग्ध मौतों की खबरें सामने आ रही हैं, उसने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

    सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार इस तरह की घटनाएं या तो आंतरिक संघर्ष, गुटीय टकराव या फिर किसी गुप्त ऑपरेशन का संकेत हो सकती हैं। हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय स्तर पर कुछ घटनाओं में हमलों और गोलीबारी का जिक्र भी सामने आया है, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।

    इसी क्रम में खैबर पख्तूनख्वा और अन्य संवेदनशील इलाकों में पहले भी आतंकी कमांडरों पर हमलों की खबरें आती रही हैं, जिनमें अज्ञात हमलावरों की भूमिका की बात कही जाती है। इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी ढांचे की स्थिरता पर सवाल खड़े किए हैं।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी नेटवर्क अब पहले जितना सुरक्षित नहीं रह गया है और आंतरिक व बाहरी दबाव दोनों के बीच उसकी स्थिति कमजोर हो रही है। लगातार हो रही घटनाओं से संगठनों के भीतर नेतृत्व और सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ती दिखाई दे रही है।

    हालांकि इन सभी घटनाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, यह स्पष्ट नहीं है और जांच एजेंसियों की ओर से भी कोई ठोस निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही संदिग्ध मौतों ने आतंकी संगठनों की गतिविधियों और उनकी आंतरिक संरचना को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • Pakistan: कराची में भीषण आतंकी हमला, 6 आतंकवादी और 4 रेंजर्स ढेर…एक पकड़ाया

    Pakistan: कराची में भीषण आतंकी हमला, 6 आतंकवादी और 4 रेंजर्स ढेर…एक पकड़ाया


    कराची।
    पाकिस्तान (Pakistan) के सबसे बड़े शहर कराची (Karachi) में शनिवार रात एक बड़ा आतंकी हमला (Terrorist Attack) हुआ. आतंकियों ने सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर धावा बोल दिया. सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई में छह आतंकवादी (Six Terrorists) मार गिराए गए, जबकि एक हमलावर को जिंदा पकड़ लिया गया. करीब 90 मिनट तक चली इस मुठभेड़ में चार रेंजर्स की भी मौत हो गए. अक्टूबर 2024 के बाद कराची में यह पहला बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है, जिसने एक बार फिर पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विश्वसनीय सुरक्षा सूत्रों के अनुसार प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार के सात आतंकियों ने शनिवार रात करीब 8:30 बजे कराची के घनी आबादी वाले गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित सिंध रेंजर्स के भिट्टाई विंग मुख्यालय पर हमला किया. आतंकियों ने पहले विस्फोटकों से भरे वाहन को मुख्य गेट से टकराकर परिसर में प्रवेश किया और इसके बाद हैंड ग्रेनेड फेंकते हुए अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. हमले के तुरंत बाद रेंजर्स के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया।

    बाद में स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट (एसएसयू) के कमांडो और एंटी टेररिस्ट फोर्स (एटीएफ) की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं. संयुक्त अभियान के दौरान करीब डेढ़ घंटे तक भीषण गोलीबारी हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने छह आतंकियों को मार गिराया और एक घायल हमलावर को जिंदा गिरफ्तार कर लिया. हालांकि इस मुठभेड़ में चार रेंजर्स जवानों ने भी अपनी जान गंवा दी. घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया. रेंजर्स मुख्यालय के आसपास की सभी सड़कों को बंद कर दिया गया और स्थानीय लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई।


    हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली

    सुरक्षा अभियान के दौरान आसपास के कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही. बचाव और राहत एजेंसियों को भी तत्काल मौके पर भेजा गया ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके. हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली है. यह संगठन टीटीपी का एक कट्टरपंथी धड़ा है, जो मुख्य रूप से पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय रहा है. यह संगठन पहले भी सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों पर कई बड़े हमले कर चुका है. हालांकि हाल के वर्षों में इसकी गतिविधियां सीमित मानी जा रही थीं, लेकिन कराची में हुआ यह हमला संगठन की नई रणनीति की ओर इशारा करता है. सिंध के पुलिस महानिरीक्षक जावेद आलम ओधो ने बताया कि शुरुआती जांच से पुष्टि हुई है कि आतंकी एक वाहन में सवार होकर आए थे और मुख्य गेट को तोड़कर परिसर में घुसे।

    उन्होंने कहा कि हमला शुरू होते ही रेंजर्स के जवानों ने तत्काल जवाबी कार्रवाई की और आतंकियों को आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया. उन्होंने यह भी बताया कि हमले के दौरान जोरदार विस्फोट की आवाज सुनी गई थी, जिसकी जांच की जा रही है. सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने घटना का संज्ञान लेते हुए पुलिस महानिदेशक और कराची के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. वहीं रेस्क्यू 1122 सिंध ने बताया कि गुलिस्तान-ए-जौहर ब्लॉक-5 के पास विस्फोट की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दलों को मौके पर रवाना कर दिया गया था।


    अक्टूबर 2024 में बड़ा आतंकी हमला हुआ था

    कराची में इससे पहले अक्टूबर 2024 में बड़ा आतंकी हमला हुआ था, जब कराची एयरपोर्ट के पास हुए आत्मघाती विस्फोट में दो चीनी इंजीनियरों की मौत हो गई थी. उस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली थी. वहीं टीटीपी का कराची में पिछला बड़ा हमला फरवरी 2023 में हुआ था, जब आतंकियों ने कराची पुलिस कार्यालय पर हमला किया था. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर टीटीपी आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने का आरोप लगाता रहा है।

    पाकिस्तान का दावा है कि अफगान सीमा पार मौजूद टीटीपी के ठिकानों से लगातार हमलों की साजिश रची जाती है. इसके जवाब में पाकिस्तान की सेना हाल के महीनों में अफगानिस्तान के भीतर कथित टीटीपी ठिकानों पर कई कार्रवाई भी कर चुकी है. ऐसे में कराची में हुआ यह हमला पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

  • इस्लामिक नाटो’ में शामिल होगा ईरान? राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों से की एकजुट होने की अपील

    इस्लामिक नाटो’ में शामिल होगा ईरान? राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों से की एकजुट होने की अपील


    नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बीते तनाव और संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़े समझौतों की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने और आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की है। उनके इस बयान को क्षेत्रीय स्तर पर एक मजबूत मुस्लिम गठबंधन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    पाकिस्तान दौरे पर पहुंचे पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक घटनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

    संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि पश्चिम एशिया और फारस की खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति, स्थिरता और विकास तभी संभव है जब क्षेत्रीय देश आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग की भावना से आगे बढ़ें। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुस्लिम देशों को अपने साझा हितों और जबड़े के प्रति एकजुट होकर काम करना चाहिए।

    पेजेशकियन ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि मुस्लिम अपने समुदायों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होंगे।” उनके इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि ईरान भविष्य में उस सैन्य-सहयोगी मंच के करीब आ सकता है जिसे मीडिया में अक्सर ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जाता है।

    हालांकि यह ध्यान देने योग्य है कि ‘इस्लामिक नाटो’ कोई औपचारिक नाटो जैसी संस्था नहीं है, बल्कि इस्लामिक मिलिट्री काउंटर टेररिज्म कोएलिशन नामक एक बहुराष्ट्रीय सुरक्षा गठबंधन है, जिसे हासिल सऊदी अरब करता है और जिसमें पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देश शामिल हैं। ईरान वर्तमान में इस गठबंधन का सदस्य नहीं है।

    विश्लेषणों का मानना ​​है कि यदि ईरान और पाकिस्तान के बीच राजनयिक सहयोग बढ़ता है और क्षेत्रीय स्वायत्त अनुकूल रहते हैं, तो मुस्लिम देशों के बीच सुरक्षा और राजनीतिक सहयोग का नया ढांचा विकसित हो सकता है। हालांकि ईरान के किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ वार्ता के बाद पाकिस्तान पहुंचे पेजेशकियां के इस दौरे को क्षेत्रीय आतंकवाद और मुस्लिम देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।

  • पाकिस्तान के बन्नू में दो लगातार धमाकों से दहशत 7 की मौत कई घायल

    पाकिस्तान के बन्नू में दो लगातार धमाकों से दहशत 7 की मौत कई घायल


    नई दिल्ली । पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में एक के बाद एक हुए दो शक्तिशाली धमाकों ने पूरे इलाके को दहला दिया है। इन धमाकों में सात लोगों की मौत हो गई जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने इस घटना को गंभीर आतंकी हमला बताया है और इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।

    घटना बन्नू के वजीर सब डिवीजन के अंतर्गत आने वाले पहाड़ी और अर्ध जनजातीय क्षेत्र मरका बेरा में हुई। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार पहला धमाका उस समय हुआ जब एक निजी वाहन यात्रियों को लेकर डोमेल की दिशा में जा रहा था। इसी दौरान रिमोट कंट्रोल के जरिए लगाए गए विस्फोटक उपकरण को सक्रिय किया गया। धमाका इतना तेज था कि वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया और उसमें सवार पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

    पहले धमाके के बाद जैसे ही राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया और घायलों को अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई तभी लगभग एक किलोमीटर दूर दूसरा विस्फोट हुआ। यह धमाका भी रिमोट कंट्रोल तकनीक से किया गया बताया जा रहा है। इस दूसरे हमले में एक और वाहन निशाना बना और उसमें सवार दो लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

    लगातार दो धमाकों से इलाके में अफरा तफरी फैल गई। स्थानीय लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए। पुलिस और सुरक्षा बल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया। रेस्क्यू टीमों ने घायलों और शवों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में पहुंचाया।

    सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई है कि इलाके में अभी और भी विस्फोटक उपकरण छिपाए गए हो सकते हैं। इसी वजह से पूरे क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। बम निरोधक दस्ते को भी मौके पर तैनात किया गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके।

    पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। वहीं स्थानीय प्रशासन ने भी इसे नागरिकों पर किया गया कायराना हमला बताया है।

    बन्नू जिले में पिछले कुछ महीनों से आतंकी घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इससे पहले भी कई बार सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच झड़पें हो चुकी हैं। हाल ही में एक पुल को विस्फोट से उड़ाने की कोशिश और टारगेट किलिंग की घटनाओं ने सुरक्षा स्थिति को और गंभीर बना दिया था।

    इस ताजा हमले ने एक बार फिर खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है और प्रशासन के सामने शांति बहाली की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

  • जम्मू कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के प्रचार को किया खारिज

    जम्मू कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के प्रचार को किया खारिज


    नई द‍िल्‍ली । जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के बासठवें सत्र में भारत ने पाकिस्तान और इस्लामी सहयोग संगठन की ओर से जम्मू कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। भारत ने स्पष्ट कहा कि जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस विषय पर किसी भी प्रकार का भ्रम या गलत व्याख्या स्वीकार नहीं की जा सकती। भारतीय प्रतिनिधि ने मंच पर कहा कि पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और गलत इरादों पर आधारित हैं तथा इनका उद्देश्य केवल अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना है।

    भारत ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से अपने घरेलू संकट और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे प्रचार का सहारा लेता रहा है। भारतीय पक्ष ने यह भी कहा कि इस्लामी सहयोग संगठन द्वारा की गई टिप्पणियां तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और यह एकतरफा दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। भारत ने यह दोहराया कि जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा था और है तथा हमेशा रहेगा और इस वास्तविकता को कोई भी बयान बदल नहीं सकता।

    भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि असली मुद्दा वह क्षेत्र है जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है और जिसे पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर के रूप में जाना जाता है। भारत ने आरोप लगाया कि वहां दशकों से लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है और सैन्य दबाव के कारण जनता की मूलभूत स्वतंत्रताओं को सीमित किया गया है। भारत ने कहा कि यह स्थिति किसी भी प्रकार से लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और लगातार असंतोष और अशांति का कारण बनी हुई है।

    भारत ने आगे कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी नीति के रूप में इस्तेमाल करता है और फिर खुद को आतंकवाद का शिकार बताने की कोशिश करता है। भारतीय प्रतिनिधि ने इस विरोधाभास को उजागर करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की दोहरी नीति लंबे समय से देखी जा रही है। भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे दावे वास्तविकता को नहीं बदल सकते और न ही तथ्यों को छिपा सकते हैं।

    सिंधु जल संधि पर टिप्पणी करते हुए भारत ने कहा कि यह समझौता उस समय की परिस्थितियों में हुआ था जब क्षेत्रीय स्थिति अलग थी लेकिन अब समय बदल चुका है और जल संसाधनों के प्रबंधन को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार देखना होगा। भारत ने संकेत दिया कि आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते और किसी भी प्रकार की साझेदारी तभी संभव है जब पारस्परिक विश्वास और जिम्मेदारी सुनिश्चित हो।

    भारत ने अपने वक्तव्य में यह भी स्पष्ट किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति और स्थिरता के पक्ष में है लेकिन किसी भी प्रकार के झूठे प्रचार और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित बयानों को स्वीकार नहीं करेगा। भारत ने दोहराया कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना है तथा वह इस दिशा में हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।