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  • पाकिस्तान ने रिहा किए सात भारतीय नागरिक, अटारी बाघा बार्डर से पहुंचे भारत

    पाकिस्तान ने रिहा किए सात भारतीय नागरिक, अटारी बाघा बार्डर से पहुंचे भारत


    चंडीगढ़।
    पाकिस्तान (Pakistan) ने शनिवार को सात भारतीय नागरिकों (7 Indian Citizens) को रिहा कर दिया। सातों भारतीय नागरिकों ने अटारी-बाघा सीमा (Attari-Wagah border) के रास्ते भारत में प्रवेश किया। भारतीय सीमा में आने के बाद सभी नागरिकों की जांच प्रक्रिया के बाद परिजनों के हवाले किया जाएगा।

    दस्तावेज के मुताबिक, यह निर्णय पाकिस्तान के गृह मंत्रालय और नारकोटिक्स कंट्रोल मंत्रालय, इस्लामाबाद के परामर्श से लिया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि भारत सरकार की ओर से संबंधित कैदियों की भारतीय नागरिकता की पुष्टि कर दी गई है और सभी कैदी अपनी-अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं। इसके बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया शुरू की गई।

    पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गृह विभाग की ओर से जारी आदेशों के बाद इन भारतीयों को शनिवार को अटारी बॉर्डर के रास्ते सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के हवाले किया गया। यह सभी लाहौर की केंद्रीय जेल में बंद थे। रिहा किए जा रहे भारतीय नागरिकों में चंदर सिंह उर्फ छिंदर सिंह, गुरमीत सिंह उर्फ गुरमेज सिंह, जोगिंदर सिंह, हरविंदर सिंह, विशाल, रतन पाल और सुनील आदे उर्फ प्रसंजीत शामिल हैं। ये सभी लाहौर की केंद्रीय जेल में बंद थे।

    भारतीय सीमा में आने के बाद सभी नागरिकों के दस्तावेजों की जांच की गई है। इसके अलावा इन सभी के बयान दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बयान दर्ज होने के बाद जरूरत व परिस्थितियों के अनुसार बॉडी स्कैनिंग भी जा सकती है। पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद सभी नागरिकों को संबंधित क्षेत्रों की पुलिस के माध्यम से परिजनों को सौंपा जाएगा।

  • ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने की हामी भरकर संकट में फंसा पाकिस्तान…. फीस के लिए भी लेना पड़ेगा कर्ज

    ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने की हामी भरकर संकट में फंसा पाकिस्तान…. फीस के लिए भी लेना पड़ेगा कर्ज


    इस्लामाबाद।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने अपनी नई वैश्विक नीतियों (New Global Policies) से पिछले एक साल में हालात को काफी बदल दिया है। यूरोपीय देशों समेत दुनिया के तमाम मुल्क अब अमेरिका का विकल्प खोज रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी परेशानी पाकिस्तान के लिए खड़ी हो गई है। एक तरफ वह ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Trump’s ‘Board of Peace’) में शामिल होने के लिए हामी भर चुका है, लेकिन इसकी फीस चुकाने के लिए शायद उसे एक बार फिर से कर्ज का सहारा लेना पड़े। दावोस में ट्रंप द्वारा घोषित किए गए इस बोर्ड में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Pakistan’s Prime Minister Shahbaz Sharif) भी शामिल हुए। इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य मध्य-पूर्व में शांति को स्थापित करके गाजा के पुननिर्माण का है। लेकिन पाकिस्तान के लिए एक परेशानी का सबब बन गया है। एक तरफ तो पैसे वाली बात है, दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर भी शहबाज सरकार को विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

    पाकिस्तान में इसका विरोध होने का सबसे बड़ा कारण इस बोर्ड की संरचना पर है। इस बोर्ड के अध्यक्ष ट्रंप होंगे और सदस्यता और इसकी दिशा तय करने का पूरा हक उनके पास ही होगा। इस बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र संघ के एक विकल्प के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तानी विपक्ष का कहना है कि आखिर ट्रंप के कार्यकाल के बाद इस बोर्ड का क्या होगा इस पर बहुत बड़ा संशय है। क्योंकि यह बोर्ड मुख्य तौर पर ट्रंप के भरोसेमंद देशों का एक समूह नजर आता है।


    ट्रंप के भरोसेमंद पिछलग्गू देश बोर्ड ऑफ पीस में शामिल

    इस बोर्ड में अब तक दो दर्जन से ज्यादा देशों ने शामिल होने की पेशकश की है। हालांकि ट्रंप ने लगभग 100 से ज्यादा देशों को इसके लिए बुलाया था, लेकिन भारत समेत ज्यादातर देशों ने इससे दूरी ही बनाए रखी। वर्तमान में इसमें हंगरी, बुल्गारिया, इजराइल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, तुर्की, बेलारूस, बहरीन, जॉर्डन, कतर, आर्मेनिया, अजरबैजान, मोरक्को, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, कोसोवो, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, पैराग्वे और वियतनाम शामिल हैं।


    नाटो ने किया किनारा

    सबसे बड़ी और दिलचस्प बात है कि इसमें अमेरिका के अलावा संयुक्त राष्ट्र स्थायी सुरक्षा समिति का कोई और देश शामिल नहीं है और न ही नाटो सदस्य देशों ने इसमें शामिल होने का उत्साह दिखाया है। यहां तक की यूरोप में ट्रंप समर्थक मानी जाने वाली इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने भी इससे दूरी बनाकर रखी है। इसके अलावा अमेरिका से सीमा साझा करने वाले कनाडा ने भी इसको नकार दिया है और तो और पीएम कार्नी की बातों से ट्रंप इतने नाराज हुए कि उन्होंने उनको दिया हुआ निमंत्रण भी कैंसिल कर दिया।

    दरअसल, इस बोर्ड में शामिल होने को लेकर देशों के बीच असमंजस की स्थिति है। इसमें ट्रंप अमेरिका का भी नहीं, बल्कि स्वयं का एकाधिकार चाहते हैं। विदेशी मामलों के जानकारों की मानें तो ट्रंप इसके जरिए सीधे-सीधे संयुक्त राष्ट्र संघ के वर्चस्व को चुनौती देना चाहते हैं। एक बार यह प्रयास गाजा में सफल हुआ तो उसके बाद इसे दुनिया के दूसरे युद्धों और मसलों की तरफ भी आगे बढ़ाने की कोशिश है।


    एक अरब डॉलर है फीस

    इस बोर्ड के लिए ट्रंप का सीधा प्रयास है कि 1 अरब डॉलर दीजिए और अपने लिए एक सीट ले लीजिए। उनके मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल गाजा के पुनर्निर्माण के लिए होगा। बोर्ड के चार्टर के मसौदे के मुताबिक प्रत्येक सदस्य देश अधिकतम तीन वर्षों के लिए कार्यकाल निभाएगा, जिसे अध्यक्ष द्वारा नवीनीकृत किया जा सकता है। हालांकि, जो देश पहले वर्ष के भीतर 1 अरब डॉलर से अधिक नकद योगदान देते हैं, उन पर यह तीन साल की सीमा लागू नहीं होगी।”

    पाकिस्तान इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि कर चुका है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि संघीय कैबिनेट ने इस फैसले को मंजूरी दे दी है। उन्होंने लंदन में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बताया कि दावोस में उन्हें ट्रंप के निमंत्रण पर चर्चा में बुलाया गया था और वहीं उनसे बोर्ड में शामिल होने को कहा गया। लेकिन पाकिस्तान के लिए पैसा भी एक परेशानी है। बाकी जो इस्लामिक देश इसमें शामिल हुए हैं, वह पैसा चुकाने की स्थिति में हैं, लेकिन पाकिस्तान के साथ ऐसा नहीं है।


    विदेशी कर्ज से बेहाल है पाकिस्तान

    पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार दबाव में है, छोटी-छोटी चीजों के लिए भी वह विदेशी कर्ज पर निर्भर है। हाल ही में आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए 1.2 अरब डॉलर के फंड की मंजूरी दी है। आईएमएफ की इस कार्यक्रम के तहत कुल मिलाकर पाकिस्तान को 3.3 अरब डॉलर दिए जाने हैं। अभी तक पाकिस्तान के ऊपर आईएमएफ का 7.35 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज है।

    पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालात इस कदर पतली है कि अभी उसके ऊपर जीडीपी का 70 फीसदी से अधिक सार्वजनिक कर्ज है। यूएई और चीन से मिले कई कर्जों को पाकिस्तान चुकाने की स्थिति में नहीं होने की वजह से उन्हें रोल ओवर करने की मांग कर रहा है। 1958 से लेकर अब तक आईएमएफ करीब 12 बार पाकिस्तान की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को संभालने की मदद कर चुका है। 2023 में जब पाकिस्तान पूरी तरह से डिफॉल्ट होने की स्थिति में आ गया था, तब भी आईएमएफ ने ही उसे अरबों डॉलर की मदद दी थी। इसके बाद पिछले साल भी कुछ शर्तों पर पाकिस्तान को 7 अरब डॉलर मिले थे।

    पाकिस्तान अपनी वैश्विक राजनीति को चमकाने के लिए भले ही बड़े-बड़े दांव खेलने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इतना साफ है कि उसकी अर्थव्यवस्था इसके लिए तैयार नहीं है। हालांकि, भारत के साथ ईयू और रूस के रिश्तों को देखते हुए और इन सभी देशों की बोर्ड ऑफ पीस से दूरी अमेरिका को पाकिस्तान के करीब रखने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी लगातार अपने चाटुकारिता से ट्रंप को खुश करने में लगे रहते हैं। अब पाकिस्तान इसके पैसे चुकाएगा या ट्रंप से उधार की बात करेगा यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना तय है कि अगर वह पाकिस्तानी जनता के पैसे को इसमें खर्च करता है, तो इस्लामाबाद में इससे विरोध की लहर तो जरूर उठेगी।

  • अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026: भारत-पाकिस्तान मुकाबले से तय होगी सेमीफाइनल की तस्वीर

    अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026: भारत-पाकिस्तान मुकाबले से तय होगी सेमीफाइनल की तस्वीर


    नई दिल्ली। अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2026 अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है और ग्रुप-2 में भारत व पाकिस्तान के बीच होने वाला महामुकाबला पूरे टूर्नामेंट की दिशा तय कर सकता है। इस ग्रुप में सेमीफाइनल की दौड़ फिलहाल तीन टीमोंभारत, इंग्लैंड और पाकिस्तानके बीच सिमटी हुई है।

    भारत बनाम पाकिस्तान: करो या मरो की जंग
    भारत और पाकिस्तान की अंडर-19 टीमें रविवार, 1 फरवरी को बुलावायो के क्वींस स्पोर्ट्स क्लब में आमने-सामने होंगी। दोनों टीमों के बीच पिछली भिड़ंत एशिया कप 2025 के फाइनल में हुई थी, जहां पाकिस्तान ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में भारतीय टीम के पास बदला लेने का मौका होगा, जबकि पाकिस्तान के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा है।
    ग्रुप-1 से ऑस्ट्रेलिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने चारों मुकाबले जीत लिए हैं और 8 अंकों के साथ सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली है।
    वेस्टइंडीज: 4 अंक (कमजोर नेट रन रेट)
    अफगानिस्तान: 4 अंक, नेट रन रेट +1.020
    श्रीलंका: 4 अंक, नेट रन रेट -0.181

    अगर अफगानिस्तान अपने आखिरी मैच में आयरलैंड को हरा देता है, तो उसका सेमीफाइनल में पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है।ग्रुप-2 में न्यूज़ीलैंड, जिम्बाब्वे और बांग्लादेश पहले ही सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो चुके हैं।

    भारत: 3 मैच, 3 जीत – 6 अंक (NRR +3.337)
    इंग्लैंड: 3 मैच, 3 जीत – 6 अंक (NRR +1.989)
    पाकिस्तान: 3 मैच, 2 जीत – 4 अंक (NRR +1.484)
    नेट रन रेट के मामले में भारत इस ग्रुप में सबसे मजबूत स्थिति में है।

    सेमीफाइनल के संभावित परिदृश्य
    अगर भारत पाकिस्तान को हरा देता है
    पाकिस्तान टूर्नामेंट से बाहर
    भारत सीधे सेमीफाइनल में इंग्लैंड का परिणाम अप्रासंगिक

    अगर इंग्लैंड न्यूजीलैंड को हरा देता है
    इंग्लैंड 8 अंकों के साथ सेमीफाइनल मेंपाकिस्तान को भारत के खिलाफ बड़ी जीत चाहिएभारत का बेहतर नेट रन रेट पाकिस्तान की राह बेहद मुश्किल बना देगा अगर न्यूजीलैंड इंग्लैंड को हरा देता है
    भारत, इंग्लैंड और पाकिस्तानतीनों के 6-6 अंक हो सकते हैंऐसे में नेट रन रेट निर्णायक भूमिका निभाएगा

    नजरें टिकीं महामुकाबले पर
    भारत-पाकिस्तान का यह मुकाबला सिर्फ अंक तालिका नहीं, बल्कि पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर साफ कर देगा। एशिया की इस पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता में रोमांच अपने चरम पर होगा और हर गेंद सेमीफाइनल की कहानी लिखेगी।क्रिकेट फैंस के लिए यह मुकाबला किसी फाइनल से कम नहीं होगा।

  • पाक की नापाक हरकत, LoC पर सर्विलांस कैमरे लगाते समय की गोलीबारी, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब

    पाक की नापाक हरकत, LoC पर सर्विलांस कैमरे लगाते समय की गोलीबारी, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब


    जम्मू।
    उत्तरी कश्मीर (North Kashmir) के कुपवाड़ा जिले (Kupwara district) के केरन सेक्टर में 20-21 जनवरी की रात भारत और पाकिस्तानी (India and Pakistan) सैनिकों के बीच गोलीबारी हुई। रक्षा सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह झड़प तब हुई जब 6 राष्ट्रीय राइफल्स के सैनिक केरन बाला इलाके में सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और लाइन ऑफ कंट्रोल (Line of Control) के साथ ब्लाइंड स्पॉट को खत्म करने के लिए हाई-टेक सर्विलांस कैमरे लगा रहे थे। पाकिस्तानी सैनिकों की गोलीबारी का भारतीय जवानों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया।

    पाकिस्तानी सैनिकों ने इंस्टॉलेशन को रोकने के लिए छोटे हथियारों से दो राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में भारतीय पक्ष से एक, सोच-समझकर जवाबी गोली चलाई गई। हालांकि दोनों तरफ से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन भारतीय सेना ने घने जंगल वाले इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया है, क्योंकि उन्हें शक है कि आग का इस्तेमाल घुसपैठ की कोशिश से ध्यान भटकाने के लिए किया गया हो सकता है।

    पूरे सेक्टर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, क्योंकि सेना सर्दियों के महीनों में पारंपरिक घुसपैठ के रास्तों पर नजर रखने के लिए टेक्निकल सर्विलांस को अपग्रेड कर रही है।

    इससे पहले, जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के ऊपरी इलाकों में आतंकवादियों का पता लगाने के लिए अभियान चलाया गया। इसके तीसरे दिन मंगलवार को सुरक्षा बलों ने कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। चतरू क्षेत्र के मन्द्राल-सिंहपुरा के पास सोनार गांव में रविवार को अभियान शुरू किया गया था और इस बीच हुई मुठभेड़ में एक ‘पैराट्रूपर’ शहीद हो गया तथा छिपे हुए आतंकवादियों द्वारा अचानक किए गए ग्रेनेड हमले से सात अन्य घायल हो गए।

    आतंकवादी घने जंगल में भाग गए, लेकिन खाने-पीने की चीजें, कंबल और बर्तनों सहित बड़ी मात्रा में सर्दियों के सामान से भरे उनके ठिकाने का भंडाफोड़ किया गया। जम्मू जोन के पुलिस महानिरीक्षक भीम सेन तुती और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जम्मू महानिरीक्षक आर. गोपाल कृष्ण राव सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मुठभेड़ स्थल पर पहुंच गए तथा वे अभियान की निगरानी के लिए वर्तमान में कई सेना अधिकारियों के साथ वहीं डेरा डाले हुए हैं।

  • आसिम मुनीर का इशारा, जिस मकसद से बना पाकिस्तान वो हासिल करेंगे

    आसिम मुनीर का इशारा, जिस मकसद से बना पाकिस्तान वो हासिल करेंगे

    लाहोर। पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक बयान काफी चर्चा में है। इस बयान में आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर अस्तित्व में आया था। अब वह इस मोड़ पर है, जहां वह अपने इस लक्ष्य को हासिल कर सकता है। खास बात यह है कि जब मुनीर ने यह बात कही तब वहां पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज समेत कई अन्य वरिष्ठ सिविल और मिलिट्री अधिकारी मौजूद थे। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री, पॉलिटिकल लीडर्स और शरीफ परिवार के सदस्य मौजूद थे। मौका था, नवाज शरीफ के नाती और मरियम नवाज के बेटे जुनैद सफदर की शादी का रिसेप्शन का।

    कहां बोल रहे थे मुनीर
    इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान तेजी से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है।

    इंडिया टुडे के मुताबिक मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान को इस्लाम के नाम पर बनाया गया था। आज यह इस्लामिक देशों में अलग अहमियत रखता है। उन्होंने आगे कहा कि अल्लाह के रास्ते पर आगे बढ़ना खास नियामत है। पाकिस्तान ने हाल के दिनों में मुस्लिम एकता के नाम पर कुछ देशों से डिफेंस और फाइनेंस की डील की है। इन देशों में सऊदी अरब और तुर्की का नाम प्रमुख है। इसके अलावा पाकिस्तान इस्लामिक नाटो बनाने की भी योजना बना रहा है।

    अंतर्राष्ट्रीय पहचान की बात
    इतना ही नहीं, मुनीर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का दबदबा बढ़ाने की बात की। संभवत: वह डोनाल्ड ट्रंप के साथ वाइट हाउस में मीटिंग और डिनर की तरफ इशारा कर रहे थे। इसके अलावा पाकिस्तान के गाजा पीस में शामिल होने का भी उन्होंने जिक्र किया। इतना ही नहीं, मुनीर ने यह भी बताने की कोशिश की कि मई 2025 में भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान हावी रहा था।

    कैसे अलग हैं मुनीर
    बता दें कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अपने पूर्ववर्तियों से काफी अलग हैं। पिछले आर्मी चीफ ज्यादातर सैंडहर्स्ट-प्रशिक्षित अधिकारी थे, जो औपचारिक रूप से राजनीति और धर्म दोनों से दूर रहते थे, और उन्हें पश्चिमी संगीत और व्हिस्की का शौक था। इसके उलट मुनीर, हाफिए-ए-कुरान हैं। हाफिज-ए-कुरान उसे कहते हैं, जिसे कुरान याद है। ऐसे में मुनीर के लिए धर्म एक बड़ा आधार है। मुनीर, मिलिट्री इंटेलीजेंस और आईएसआई दोनों के मुखिया हैं। उनके पद ग्रहण करने के बाद से ही पाकिस्तानी सेना में धर्म की तरफ रुझान दिखाई देने लगा है।

    सेना में धर्म का बढ़ता प्रभाव
    मुनीर के नेतृत्व में, सेना ने न केवल राज्य की रक्षा करने के रूप में ही नहीं, बल्कि इस्लाम की रक्षा करने के रूप में भी अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है। इसमें 7वीं सदी के अरबी और इस्लामी प्रतीकों का भारी इस्तेमाल किया गया है। सशस्त्र विरोधियों, जिनमें बलोचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के विद्रोही शामिल हैं, को ‘फितना अल-खवारिज’ और ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ कहा गया है, जिससे उन्हें धर्मभ्रष्ट विद्रोही और भारतीय दलाल के रूप में चित्रित किया गया है।

  • पाकिस्तान में शुरू हुआ स्टेबलकॉइन का नया दौर… ट्रंप फैमिली की क्रिप्टो कंपनी ने की है बड़ी डील

    पाकिस्तान में शुरू हुआ स्टेबलकॉइन का नया दौर… ट्रंप फैमिली की क्रिप्टो कंपनी ने की है बड़ी डील


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच संबंध कैसा है, यह बताने की जरूरत नहीं। खासकर ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद। अब तक अमेरिकी प्रशासन और पाकिस्तानी सरकार के बीच बात होती थी, लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का परिवार भी पाकिस्तान से जुड़ रहा है। असल में ट्रंप परिवार से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल ने पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वर्ल्ड लिबर्टी का किसी राष्ट्रीय सरकार के साथ सार्वजनिक रूप से घोषित पहला बड़ा समझौता है। बता दें कि कंपनी की शुरुआत सितंबर 2024 में हुई थी।

    इस समझौते के तहत वर्ल्ड लिबर्टी की सहयोगी कंपनी एससी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के साथ मिलकर काम करेगी। यह MoU (समझौता) पिछले साल पाकिस्तानी अधिकारियों और अमेरिकी पक्ष के बीच हुई कई बैठकों के बाद हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ल्ड लिबर्टी के USD1 स्टेबलकॉइन को एक नियंत्रित डिजिटल भुगतान व्यवस्था में शामिल करना है। इससे यह स्टेबलकॉइन पाकिस्तान के मौजूदा डिजिटल करेंसी सिस्टम के साथ काम कर सकेगा और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में इस्तेमाल हो सकेगा। पाकिस्तान वर्चुअल एसेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (PVARA) ने बुधवार को इस MoU पर हस्ताक्षर किए।


    पाकिस्तान के लिए काफी अहम

    माना जा रहा है कि यह समझौता पाकिस्तान के लिए काफी अहम है। पाकिस्तान सरकार नकदी के इस्तेमाल को कम करना चाहती है और विदेशों से रेमिटेंस (पैसे भेजना) को आसान व सस्ता बनाना चाहती है। क्रिप्टोकरेंसी, खासकर स्टेबलकॉइन, इसमें बड़ी मदद कर सकते हैं। पाकिस्तान में लाखों लोग पहले से क्रिप्टो का इस्तेमाल करते हैं और हर साल बड़ी रकम रेमिटेंस के रूप में आती है। माना जा रहा है कि इस डील से पाकिस्तान नई डिजिटल तकनीक को समझ सकेगा, उसे नियमों के दायरे में लाएगा और राष्ट्रीय हित सुनिश्चित करेगा।

    बता दें कि स्टेबलकॉइन ऐसी डिजिटल मुद्रा होती है जिसकी कीमत अमेरिकी डॉलर जैसी स्थिर चीज से जुड़ी रहती है, इसलिए इसमें मूल्य में उतार-चढ़ाव का जोखिम बहुत कम होता है। वर्ल्ड लिबर्टी एक क्रिप्टो-आधारित फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म है, जो डिजिटल वॉलेट की तरह काम करता है और दुनिया भर में पैसे भेजने-पाने को आसान बनाता है। दुनिया की कई सरकारें अब स्टेबलकॉइन को भुगतान प्रणाली और बड़े वित्तीय सिस्टम में शामिल करने के तरीके तलाश रही हैं।


    समझौते के बाद उठ रहे सवाल

    ट्रंप की पाकिस्तान से निकटता पर अमेरिका में कुछ सवाल भी उठे हैं। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि ट्रंप परिवार अपने व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान में परिवार के व्यापारिक सौदों के चलते भारत से संबंध प्रभावित हुए। ट्रंप परिवार के पाकिस्तान में क्रिप्टो कारोबार से जुड़े सवाल पर सुलिवन ने कहा कि यह ट्रंप की विदेश नीति की उन कहानियों में से एक है, जिन पर कम ध्यान दिया गया है।

  • अमेरिका-ईरान के बीच तनाव से पाकिस्तान टेंशन में, आसिम मुनीर ने बुलाई आपात बैठक

    अमेरिका-ईरान के बीच तनाव से पाकिस्तान टेंशन में, आसिम मुनीर ने बुलाई आपात बैठक


    इस्लामाबाद।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को यह कहकर और हवा दे दी है कि प्रदर्शनकारी संस्थाओं पर कब्जा करें, मदद पहुंच रही है। अब इस बात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों को किस तरह की मदद पहुंचाने जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई का भी प्लान बना रहा है। दूसरी तरफ, ईरान ने भी अमेरिका को दो टूक कहा है कि वह चुप बैठने वाला नहीं है और किसी भी सैन्य कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देगा।

    इन सबके बीच, पाकिस्तान (Pakistan) टेंशन में आ गया है। वह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से परेशान है। पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को अब चिंता सता रही है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच जंग छिड़ी तो उसकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। पहले से ही कई मोर्चों पर बदहाली झेल रहे पाकिस्तान में अब नए मोर्चों पर हालात बिगड़ने की आशंका के बीच पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने आपात बैठक की है।


    दो सीमाई मोर्चों पर दबाव

    सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हाई लेवेल मीटिंग में ISI प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल असीम मलिक, साउदर्न कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राहत नसीम, मिलिट्री इंटेलिजेंस प्रमुख, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ और अन्य वरिष्ठ जनरल शामिल हुए। इस बैठक में सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान–ईरान सीमा को लेकर जताई गई है। अधिकारियों ने चेताया कि पाकिस्तान पहले ही अफगानिस्तान के साथ डूरंड लाइन पर तनाव झेल रहा है और ऐसे में ईरान सीमा पर नया संकट देश के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।


    अमेरिका मांग सकता है पाकिस्तानी ठिकाने?

    सूत्रों के मुताबिक, बैठक में इस आशंका पर भी गंभीर चर्चा हुई कि अगर अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो वह पाकिस्तान से हवाई क्षेत्र या सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की मांग कर सकता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान के लिए फैसला लेना बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि इससे देश के भीतर राजनीतिक विरोध और क्षेत्रीय तनाव, दोनों बढ़ सकते हैं।


    पाक के अंदर अशांति और विद्रोह का डर

    पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि ईरान-अमेरिका जंग में अगर पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया तो उसे आंतरिक समस्या का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि देश की लगभग 30 फीसदी आबादी शिया है, जो ईरान के प्रति सहानुभूति रखती है। ऐसे में अगर ईरान पर अमेरिकी हमला होता है या वहां सत्ता परिवर्तन की कोशिश होगी। इससे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर शियाओं का विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकता है। इसके अलावा, ईरान से शरणार्थियों के आने से सीमा पर दबाव और बढ़ सकता है।


    हाई अलर्ट पर पाक सेना

    सूत्रों के अनुसार, जनरल आसिम मुनीर ने सभी वरिष्ठ कमांडरों को हाई अलर्ट पर रहने और हालात पर करीबी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं ISI प्रमुख को ईरान, तुर्की, कतर, यूएई, सऊदी अरब और अमेरिका के साथ राजनयिक और सुरक्षा स्तर की बातचीत तेज करने को कहा गया है, ताकि हालात को बिगड़ने से रोका जा सके।


    क्षेत्रीय अस्थिरता की चेतावनी

    खुफिया आकलन में कहा गया है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और तुर्की पहले ही अमेरिका को यह संदेश दे चुके हैं कि ईरान पर हमला पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने मानना कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सरकार आगे बढ़ती है और पाकिस्तान पर सहयोग का दबाव डालती है, तो इस्लामाबाद को गंभीर रणनीतिक और राजनीतिक नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।

    देश के भीतर एकजुटता की कोशिश
    ऐसे में बाहरी दबावों के बीच पाकिस्तान की सेना ने घरेलू मोर्चे पर भी तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, सेना मुख्यालय में नेशनल पैग़ाम-ए-अमन कमेटी के तहत धार्मिक विद्वानों का एक प्रतिनिधिमंडल बुलाया गया है। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एकजुट संदेश देने पर ज़ोर दिया गया है। बैठक में यह भी कहा गया कि भारत और सीमा पार सक्रिय आतंकी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे कथित मनोवैज्ञानिक युद्ध का जवाब एक साझा राष्ट्रीय नैरेटिव से दिया जाना चाहिए।

  • पाक-चीन की कारस्तानी पर भड़के लद्दाख के LG, बोले- ये 1962 नहीं, खुद हो जाएगा टुकड़े-टुकड़े

    पाक-चीन की कारस्तानी पर भड़के लद्दाख के LG, बोले- ये 1962 नहीं, खुद हो जाएगा टुकड़े-टुकड़े


    जम्मू
    । लद्दाख (Ladakh) के उप राज्यपाल कविंदर गुप्ता (Lieutenant Governor Kavinder Gupta) ने मंगलवार को शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) पर चीन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir- PoK) का पूरा क्षेत्र भारत का है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी विस्तारवादी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शक्सगाम घाटी में कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए चीन की आलोचना करते हुए गुप्ता ने कहा है कि यह इलाका भारत का हिस्सा है और ऐसी गतिविधियों को तुरंत रोका जाना चाहिए। भारत की आपत्तियों के मद्देनजर, चीन ने सोमवार को शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावों को दोहराते हुए जोर दिया कि इस क्षेत्र में चीनी अवसंरचना परियोजनाएं ‘संदेह से परे’ हैं।

    गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोग भी भारत का हिस्सा बनना चाहते हैं और जल्द ही पाकिस्तान ‘खुद टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा’। जम्मू में उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘पूरा कश्मीर (पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से समेत) हमारा है। हमें नहीं पता कि पाकिस्तान ने चीन के साथ क्या सौदा किया है। चीन को यह समझना चाहिए कि उसकी विस्तारवादी नीति से कुछ भी हासिल नहीं होगा। भारत सक्षम है। यह 1962 का भारत नहीं, 2026 का भारत है। ऐसे किसी भी प्रयास को विफल कर दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय इसका संज्ञान ले रहा है।’’


    पहले से हम ज्यादा मजबूत, ये बात समझ ले चीन

    गुप्ता ने कहा कि ऐसे किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चीन को यह समझना होगा कि आज भारत पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने पहले अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर भी दावा किया था। पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए राज्यपाल ने आरोप लगाया कि पड़ोसी देश अपने ही लोगों को छल चुका है और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त है।


    बेचा जा रहा पाकिस्तान

    गुप्ता ने कहा, “पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसे बेचा जा रहा है। उसे अपनी संप्रभुता या अपने लोगों की कोई परवाह नहीं है। बलूचिस्तान, सिंध और कराची में आवाजें उठ रही हैं और वहां पाकिस्तानी सेना द्वारा अत्याचार किए जा रहे हैं। उन क्षेत्रों पर वस्तुतः सेना का ही शासन है।’’ गुप्ता ने संवेदनशील मुद्दों पर भड़काऊ बयानों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि पीओके पर संसद का स्पष्ट रुख है।


    ऐसे बयान नहीं दें जो भड़काऊ हो

    उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए जो भड़काऊ प्रकृति के हों। 1994 का एक संसदीय प्रस्ताव है जो स्पष्ट रूप से कहता है कि पूरा पीओके भारत का है।’’ सेना प्रमुख के हालिया बयान (जिसमें कहा गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी है) पर प्रतिक्रिया देते हुए गुप्ता ने कहा कि सशस्त्र बलों को पूर्ण राष्ट्रीय समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा, ‘‘पूरा देश सेना के साथ खड़ा है। सेना प्रमुख ने एक जिम्मेदार बयान दिया है और मैं इसका स्वागत करता हूं।’’ पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से शक्सगाम घाटी में स्थित 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र चीन को सौंप दिया था, जिसे उसने अवैध रूप से कब्जा करके हासिल किया था।

  • Pakistan: इस्लामाबाद में शादी समारोह में हुआ गैस सिलेंडर में ब्लास्ट… दूल्हा-दुल्हन समेत 8 लोगों की मौत

    Pakistan: इस्लामाबाद में शादी समारोह में हुआ गैस सिलेंडर में ब्लास्ट… दूल्हा-दुल्हन समेत 8 लोगों की मौत

    इस्लामाबाद । पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में रविवार की सुबह शादी समारोह (Wedding ceremony.) के बाद घर में रखा गैस सिलेंडर (Gas Cylinder suddenly exploded) अचानक फट गया। इसकी चपेट में आन से 8 लोगों की मौत हो गई, जिसमें दुल्हन और दूल्हा भी शामिल हैं। पुलिस और अधिकारियों ने यह जानकारी दी। विस्फोट तब हुआ जब शादी में शामिल मेहमान जोड़े के उत्सव के बाद घर में सो रहे थे। इस धमाके से घर का एक हिस्सा ढह गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ। इस्लामाबाद पुलिस ने यह जानकारी दी है। इस घटना में 7 अन्य लोग घायल भी हुए हैं।

    पुलिस के बयान में कहा गया कि यह विस्फोट शहर के दिल में स्थित एक आवासीय इलाके में हुआ। सरकारी प्रशासक साहिबजादा यूसुफ ने बताया कि रविवार की सुबह जल्दी इस धमाके की सूचना मिली और अधिकारी अभी भी जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आसपास के कुछ घरों को भी नुकसान पहुंचा है। पुलिस ने कहा कि जांच अभी जारी है। यह दुखद घटना शादी के उत्सव को मातम में बदल देने वाली एक बड़ी त्रासदी बन गई।

    घटना पर प्रधानमंत्री ने जताया गहरा दुख
    प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Prime Minister Shehbaz Sharif) ने इस घटना में जान गंवाने वालों पर गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उनके कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि घायलों को बेहतरीन इलाज उपलब्ध कराया जाए और पूर्ण जांच के आदेश दिए। पाकिस्तान के कई घरों में कम प्राकृतिक गैस दबाव के कारण तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जाता है और गैस रिसाव के कारण ऐसे सिलेंडरों से जुड़े घातक हादसे अक्सर होते हैं।

  • पाकिस्‍तान को इजरायल की दो टूक; गाजा पट्टी में मुनीर के मंसूबों पर फेरा पानी

    पाकिस्‍तान को इजरायल की दो टूक; गाजा पट्टी में मुनीर के मंसूबों पर फेरा पानी

    नई दिल्‍ली। इजरायल ने दो टूक कहा है कि गाजा में अमेरिका के प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबलाइज़ेशन फोर्स (ISF) में पाकिस्तानी सेना को एंट्री नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही इजरायल ने कहा है कि हमास के साथ उसके संबंधों की वजह से उसकी गाजा में भागीदारी संदिग्ध है।
    भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि इजरायल अमेरिका द्वारा प्रस्तावित किसी भी गाजा स्थिरीकरण बल में पाकिस्तानी सेना को शामिल करने का स्पष्ट रूप से विरोध करता है। उन्होंने कहा कि हमास और आतंकी संगठनों के रिश्तों के कारण पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कर सकते।

    एक विशेष साक्षात्कार में अज़ार ने कहा कि हमास और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों, खासकर लश्कर-ए-तैयबा, के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर इज़रायल को गहरी चिंता है। इजरायल की तरफ से यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में आई है, जब पाकिस्तान गाजा में इंटरनेशनल फोर्स में शामिल होने पर अमेरिका की प्रतिक्रिया का अभी इंतजार ही कर रहा है।

    बता दें कि ट्रंप के गाजा में शांति बहाली और सत्ता हस्तांतरण के फार्मूले के तहत वहां एक अंतरराष्ट्रीय स्तिरिकरण बल की तैनाती की जानी है, जिसमें कई देश शामिल होंगे। पाकिस्तान ने भी इस बल में शामिल होने की इच्छा जताई थी लेकिन इजरायल ने उसे खारिज कर दिया है।

    हमास के खात्मे के बिना कोई व्यवस्था संभव नहीं
    इजरायली राजदूत अज़ार ने स्पष्ट तौर पर कहा कि हमास को एक आतंकवादी संगठन के रूप में पूरी तरह खत्म किए बिना गाज़ा के भविष्य को लेकर कोई भी व्यवस्था संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में एक स्थिरीकरण बल (Stabilisation Force) का विचार तब तक निरर्थक है, जब तक हमास को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता। यह पहली बार है जब इजरायल आधिकारिक तौर पर और खुले तौर पर पाकिस्तानी सेना की भूमिका के खिलाफ सामने आया है।

    यह आसिम मुनीर के लिए बड़ा झटका है, जो गाजा में अपनी सेना की तैनाती के बड़े ख्वाव देख रहे थे।
    पाक समेत कई देशों से अमेरिका ने किया था संपर्क
    हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने गाज़ा में सुरक्षा और पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित बल में योगदान देने को लेकर पाकिस्तान समेत कई देशों से संपर्क किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अज़ार ने कहा, “कई देशों ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे हमास से लड़ने के लिए अपने सैनिक नहीं भेजना चाहते। ऐसे में यह योजना व्यावहारिक नहीं लगती।” जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या इज़रायल गाज़ा में पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी को स्वीकार करेगा, तो उनका जवाब साफ था “नहीं।”
    “केवल उन्हीं के साथ काम करेंगे जो भरोसेमंद”
    पाकिस्तान की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए इज़रायली राजदूत ने कहा,“देश आमतौर पर उन्हीं के साथ सहयोग करते हैं जिनके साथ उनके भरोसेमंद राजनयिक संबंध हों। इस समय पाकिस्तान के साथ ऐसी स्थिति नहीं है।” इस बयान से इज़रायल की पाकिस्तान को लेकर गहरी अविश्वास की भावना साफ झलकती है।
    हमास–पाकिस्तान संपर्कों पर इजरायल की नजर
    राजदूत अज़ार के बयान ऐसे समय आए हैं जब हाल ही में यह बात सामने आई है कि हमास के वरिष्ठ कमांडर नाजी ज़हीर पिछले तीन वर्षों से लगातार पाकिस्तान की यात्राएं कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, नाजी ज़हीर ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से कई बैठकें और मुलाकातें की थीं। ये बैठकें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK)में भी हुईं हैं। यह बात भी सामने आ चुकी है कि 7 अक्टूबर को इज़रायल पर हुए हमले के कुछ ही दिनों बाद ज़हीर पेशावर में मौजूद था।अज़ार ने पुष्टि की कि इज़रायली खुफिया एजेंसियां इन गतिविधियों पर करीबी नजर रखे हुए हैं।