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  • पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, गुलिस्तान सेक्टर में झड़प के बाद कई तालिबान सदस्यों के मारे जाने का दावा

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, गुलिस्तान सेक्टर में झड़प के बाद कई तालिबान सदस्यों के मारे जाने का दावा


    नई दिल्ली ।पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच करीब तीन महीने तक बनी शांति के बाद एक बार फिर सीमा क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से कथित हमले का जवाब देने और उसे नाकाम करने का दावा किया है। सीमा से सटे गुलिस्तान सेक्टर में हुई झड़प के दौरान कई तालिबान सदस्यों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है।

    पाकिस्तान की ओर से दावा किया गया है कि अफगान तालिबान की तरफ से की गई कार्रवाई का जवाब दिया गया। इसके तहत गुरुवार को पाकिस्तानी वायुसेना ने तालिबान के करीब 10 ठिकानों पर हमला किया। पाकिस्तान का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल ड्रोन लॉन्च करने और उन्हें रखने के लिए किया जा रहा था।

    सीमा क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव फिर बढ़ गया है। दोनों पड़ोसी देशों के बीच इससे पहले भी सीमा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर टकराव हो चुका है। लंबे समय तक चले तनाव के बाद करीब तीन महीने तक स्थिति अपेक्षाकृत शांत रहने की बात सामने आई थी।

    पिछले सप्ताह पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाके में एक पुलिस प्रतिष्ठान को निशाना बनाकर हमला किया गया था। इस घटना में कम से कम 24 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद सीमा पार से होने वाली गतिविधियों और सुरक्षा स्थिति को लेकर पाकिस्तान की ओर से चिंता बढ़ी थी।

    दोनों देशों के बीच इस साल फरवरी में भी संघर्ष हुआ था। इसके बाद मार्च में पाकिस्तान की ओर से काबुल में हवाई हमला किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इस कार्रवाई में 400 से अधिक लोगों के मारे जाने की बात कही गई थी। अफगान तालिबान ने उस समय दावा किया था कि मार्च में किया गया हवाई हमला एक मादक पदार्थ पुनर्वास केंद्र को निशाना बनाकर किया गया था।

    इसी दौरान बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी की गतिविधियों का भी उल्लेख सामने आया है। संगठन ने बलूचिस्तान में 25 अभियानों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। 20 सितंबर को नुश्की में बाईपास रोड पर शहीद बालाच खान स्टेडियम के पास पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई थी।

    इस हमले में दो पाकिस्तानी सैनिकों की मौत और चार अन्य के घायल होने की बात सामने आई थी। इसके बाद 21 सितंबर को लड़ाकों द्वारा मांड में रादिग पर कब्जा किए जाने की जानकारी भी दी गई।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मौजूदा तनाव में सीमा पर हुई ताजा झड़प को महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तान ने जहां तालिबान के हमले को नाकाम करने और उसके कई सदस्यों के मारे जाने का दावा किया है, वहीं सीमा क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति फिर सामने आई है।

    तीन महीने की शांति के बाद हुई इस ताजा कार्रवाई से दोनों पड़ोसी देशों के बीच सुरक्षा संबंधी विवाद दोबारा उभरता दिखाई दे रहा है। गुलिस्तान सेक्टर में झड़प और तालिबान के ठिकानों पर कार्रवाई के दावे के बीच सीमा क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनी हुई है।

  • इमरान खान की तीनों बहनें हिरासत में, PTI के इस्लामाबाद मार्च से पहले पाकिस्तान में बढ़ा सियासी तनाव

    इमरान खान की तीनों बहनें हिरासत में, PTI के इस्लामाबाद मार्च से पहले पाकिस्तान में बढ़ा सियासी तनाव


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तीनों बहनों को हिरासत में लिए जाने के बाद देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उज्मा खान और नूरीन नियाजी को सोमवार को हिरासत में लिया गया, जबकि इससे एक दिन पहले उनकी तीसरी बहन अलीमा खान को 30 दिन की हिरासत में लिया गया था। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई लाहौर के डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर की गई है।

    यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर मार्च और प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया है।

    सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताकर कार्रवाई

    रिपोर्ट के मुताबिक, उज्मा खान और नूरीन नियाजी के खिलाफ पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर ऑर्डिनेंस, 1960 के तहत कार्रवाई की गई है। आदेश में उनकी गतिविधियों को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से नुकसानदेह बताया गया है।

    दोनों को कोट लखपत सेंट्रल जेल के अधीक्षक की निगरानी में रखे जाने की बात कही गई है। इससे पहले रविवार को PTI के अध्यक्ष गोहर अली खान ने अलीमा खान को हिरासत में लिए जाने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे हालात बिगाड़ने की दिशा में उठाया गया कदम बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की थी।

    बेटे ने कहा- सभी मामलों में जमानत मिली हुई है

    अलीमा खान को हिरासत में लिए जाने के बाद उनके बेटे शाहरेज खान ने आरोप लगाया कि रविवार सुबह घर से निकलने के बाद उनकी मां को हिरासत में ले लिया गया। शाहरेज के मुताबिक, लाहौर में अलीमा खान के खिलाफ चल रहे सभी मामलों में उन्हें जमानत मिली हुई है।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अधिकारियों से अलीमा खान की लोकेशन सार्वजनिक करने और उनकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की।

    पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, लाहौर के डिप्टी कमिश्नर ने अलीमा खान के ड्राइवर मुहम्मद आमिर को भी 30 दिनों के लिए हिरासत में लेने का आदेश दिया था।

    इमरान के बेटे कासिम ने भी लगाए आरोप

    इमरान खान के बेटे कासिम खान ने भी दावा किया कि पुलिस ने उनकी बुआ अलीमा खान को लाहौर में हिरासत में लिया है। उन्होंने अधिकारियों से अलीमा खान के परिवार और वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति देने तथा उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।

    कासिम ने एक्स पर आरोप लगाया कि परिवार को यह जानकारी नहीं दी गई कि अलीमा खान को कहां रखा गया है और परिवार तथा वकील उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले उनके पिता को जेल भेजा गया और अब उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।

    तीनों बहनों की हिरासत और PTI के प्रस्तावित 27 सितंबर के इस्लामाबाद मार्च से पहले हुई कार्रवाई ने पाकिस्तान के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

  • पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार में की एयरस्ट्राइक, तीन की मौत और कई घायल; तालिबान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

    पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार में की एयरस्ट्राइक, तीन की मौत और कई घायल; तालिबान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी कुनार प्रांत में एयरस्ट्राइक की है। इस हमले में तीन लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हमले के बाद तालिबान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

    बताया गया है कि पाकिस्तान की ओर से यह कार्रवाई साझा सीमा पर बढ़ती चरमपंथी गतिविधियों और दोनों देशों के बीच लगातार बने मतभेदों के बीच की गई। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के सदस्य अफगानिस्तान की जमीन से उसके खिलाफ गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

    अफगानिस्तान में तालिबान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर ध्यान देना चाहिए। इसी आरोप-प्रत्यारोप के कारण दोनों पड़ोसी देशों के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं।

    कुनार में हुई एयरस्ट्राइक के बाद तालिबान की ओर से पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी गई है। तालिबान ने कहा है कि अफगानिस्तान की जमीन पर इस तरह के हमले स्वीकार नहीं किए जाएंगे और कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।

    पाकिस्तान की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब उसके उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं। हाल ही में एक पुलिस स्टेशन परिसर में आत्मघाती बम धमाके और उसके बाद हुई हिंसा ने स्थिति को और गंभीर किया था। पाकिस्तान इन घटनाओं के लिए अफगानिस्तान से सक्रिय होने वाले चरमपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराता रहा है।

    पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी से जुड़े तत्व अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकानों का इस्तेमाल करते हैं और वहां से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाते हैं। दूसरी ओर तालिबान इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करता रहा है।

    दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और चरमपंथी गतिविधियों को लेकर पहले भी सैन्य टकराव की स्थिति बन चुकी है। तालिबान ने पहले भी चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान के भीतर किसी तरह का हमला उसकी संप्रभुता का उल्लंघन माना जाएगा। उसका कहना है कि यदि अफगानिस्तान की जमीन पर हमला किया गया तो वह सैन्य जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।

    ताजा एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की स्थिति बन गई है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान और तालिबान की ओर से उठाए जाने वाले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकते हैं।

    इस बीच दोनों देशों के बीच मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की संभावना भी चर्चा में है। सऊदी अरब के दोनों देशों के साथ संबंधों को देखते हुए मध्यस्थता की भूमिका निभाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, फिलहाल तत्काल प्राथमिकता सीमा पर तनाव कम करने और आगे किसी सैन्य टकराव को रोकने की है।

    कुनार में हुई एयरस्ट्राइक और उसके बाद तालिबान की चेतावनी ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों को एक बार फिर संवेदनशील स्थिति में ला दिया है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रहने के साथ अब निगाह इस बात पर है कि आगे कोई जवाबी सैन्य कार्रवाई होती है या तनाव को बातचीत के जरिए नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है।

  • पाकिस्तान में ईंधन संकट… शादियों में सिंगल डिश, मार्केट रात 9 बजे बंद… विदेश यात्रा-सरकारी डिनर पर भी रोक

    पाकिस्तान में ईंधन संकट… शादियों में सिंगल डिश, मार्केट रात 9 बजे बंद… विदेश यात्रा-सरकारी डिनर पर भी रोक


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) ने पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) बचाने के लिए कई फैसले लागू किए हैं. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में अब सभी दुकानें बाज़ार, किराना स्टोर, ग्रोसरी और जनरल स्टोर, शॉपिंग मॉल पूरे हफ़्ते रात 9 बजे बंद हो जाएंगे. शादी हॉल और मैरिज टेंट रात 10 बजे तक बंद हो जाने चाहिए. रेस्टोरेंट और खाने-पीने की जगहें रात 11 बजे तक बंद हो जानी चाहिए. यही नहीं शादी समारोहों (Wedding Ceremonies) में सिर्फ़ एक ही डिश परोसी जा सकेगी. पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) ने सरकारी डिनर पर भी रोक लगा दी है।

    पाकिस्तान ईरान जंग की वजह से भीषण ईंधन संकट से गुजर रहा है. किफ़ायत के ये नए उपाय फ़िलहाल इस्लामाबाद तक ही सीमित हैं, लेकिन पाकिस्तान की फेडरल सरकार ने राज्यों को कहा है कि वे भी इस उपाय को अपनाएं। यही नहीं पाकिस्तान में अपनाए गए नए उपायों में सरकारी गाड़ियां खरीदने पर पूरी तरह रोक, सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन आवंटन में 50% की कटौती शामिल है।

    खर्चा बचाने के लिए पाकिस्तान ने फ़ेडरल सरकार के कर्मचारियों के विदेश यात्रा करने पर तीन महीने की रोक लगा दी है. अगर मंत्री विदेश यात्रा पर जाएंगे तो उन्हें इकोनॉमी क्लास में ट्रेवल करने को कहा गया है. बता दें कि ईरान युद्ध, इकोनॉमी की खस्ताहालत और कर्जों ने पाकिस्तान को बुरा हाल कर रखा है. इसलिए पाकिस्तान सरकार को ये फैसले लेने पड़े हैं।

    पाकिस्तान ने मार्च में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद इसी तरह के खर्च में कटौती के उपाय लागू किए थे. उन उपायों के तहत इस्लामाबाद ने दो हफ़्ते के लिए स्कूल बंद कर दिए थे, सरकारी अधिकारियों के लिए ईंधन की खपत कम कर दी थी, और ईंधन बचाने व सरकारी खर्च घटाने के मकसद से ऑफ़िस कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा था. अब पाकिस्तान एक बार फिर से ऐसे ही उपायों को अपना रहा है।

    पाकिस्तान सरकार के कैबिनेट डिवीज़न ने गुरुवार को इस बारे में नोटिफ़िकेशन जारी किया और ये उपाय तुरंत लागू हो गए. ईंधन की खपत में कटौती और फ़ेडरल अधिकारियों के विदेश यात्रा पर प्रतिबंध समेत कुछ पाबंदियां कम से कम तीन महीने तक लागू रहेंगी।

    PAK के एक अखबार के अनुसार आम लोगों पर असर डालने वाले उपायों में पाकिस्तान सरकार ने निर्देश दिया है कि शादी से जुड़े सभी कार्यक्रमों और आयोजनों में सिर्फ़ एक ही डिश परोसी जाए. सरकार ने कहा है कि कमर्शियल जगहों के लिए जल्दी बंद होने का समय भी तय किया गया है. दुकानों, बाज़ारों, शॉपिंग मॉल, डिपार्टमेंटल और ग्रोसरी स्टोर को रात 9 बजे तक बंद करना होगा।

    शादी-ब्याह के हॉल, टेंट और दूसरे कमर्शियल वेन्यू जहां जश्न वाले कार्यक्रम होते हैं, उन्हें रात 10 बजे तक बंद करना होगा, जबकि रेस्टोरेंट, कैफ़े, खाने-पीने की जगहों और फ़ूड आउटलेट को रात 11 बजे तक बंद करना होगा. टेकअवे और होम-डिलीवरी सेवाओं को इस पाबंदी से छूट दी गई है।


    सरकारी खर्च में 5% की कटौती

    – पाकिस्तान ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान कर्मचारियों से जुड़े खर्चों को छोड़कर अन्य खर्चों (Non-ERE) में हर महीने 5% की कटौती की जाएगी.
    – यह नियम पाकिस्तान के विदेशी मिशनों और विदेशों में तैनात अधिकारियों पर भी लागू होगा. विकास परियोजनाओं को खर्च में कटौती के दायरे से बाहर रखा गया है.
    – सरकार ने तीन महीने के लिए विदेश दौरों और यात्राओं पर पूरी तरह रोक लगाने की भी घोषणा की है, जिसमें अनिवार्य दौरे भी शामिल हैं.
    – जिन मामलों में विदेश यात्रा ज़रूरी है वहां सरकारी प्रतिनिधियों और अधिकारियों को इकॉनमी क्लास में यात्रा करने का निर्देश दिया गया है.
    – एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये पाबंदियां मंत्रियों, सलाहकारों, राज्य मंत्रियों, प्रधानमंत्री के विशेष सहायकों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों पर लागू होती हैं.


    सरकारी डिनर और सेमिनार पर भी रोक

    – पाकिस्तान ने सरकारी डिनर पर भी रोक लगा दी है, लेकिन विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े कार्यक्रमों में इसमें छूट दी गई है. पाकिस्तान ने अपने सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे शहर के भीतर होने वाली बैठकों को छोड़कर, ज़्यादातर टेलीकॉन्फ़्रेंस के ज़रिए बैठकें करें. सरकार के फ़ंड से होने वाले सरकारी सेमिनार, ट्रेनिंग सेशन और कॉन्फ़्रेंस पर भी रोक लगा दी गई है. अगर ऐसे कार्यक्रम करना ज़रूरी हो, तो विभागों से कहा गया है कि वे बाहरी जगहों पर पैसे खर्च करने के बजाय सरकारी सुविधाओं, जैसे ऑडिटोरियम और कमिटी रूम का इस्तेमाल करें।

  • उधमपुर में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, दो आतंकियों का एनकाउंटर, पाकिस्तानी होने और आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका

    उधमपुर में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, दो आतंकियों का एनकाउंटर, पाकिस्तानी होने और आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका


    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों को आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। जिले के ब्रत्तल इलाके में 16 और 17 सितंबर की दरम्यानी रात चलाए गए अभियान के दौरान दो आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया। इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने लक्षित अभियान शुरू किया था। ऑपरेशन के दौरान दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें दोनों आतंकी मारे गए।

    यह कार्रवाई मजालता क्षेत्र में की गई। अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को खराब मौसम, कम विजिबिलिटी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। रात के समय इलाके में तलाशी और अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सुरक्षा बलों ने परिस्थितियों के बीच ऑपरेशन जारी रखा। मुठभेड़ के बाद इलाके में तलाशी अभियान भी चलाया गया, जिसमें हथियार और गोला-बारूद बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    मारे गए दोनों आतंकियों की पहचान अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। शुरुआती आशंका है कि दोनों पाकिस्तान के नागरिक हो सकते हैं। इसके साथ ही उनके कश्मीर टाइगर्स या जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने की भी आशंका जताई गई है। हालांकि, उनकी पहचान और किसी आतंकी संगठन से उनके संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां बरामद हथियारों और अन्य सुरागों के आधार पर दोनों की पहचान तथा उनके नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं।

    उधमपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद आसपास के इलाकों में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। सुरक्षाबलों की ओर से अभियान के दौरान सामने आए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। खासतौर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दोनों आतंकी इलाके में कब पहुंचे थे और क्या उनके साथ कोई अन्य सहयोगी या स्थानीय संपर्क भी मौजूद था।

    इससे पहले 15 सितंबर को राजौरी में भी सुरक्षाबलों ने आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी। पीर पंजाल क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क का खुलासा करते हुए जाकिर हुसैन, मोहम्मद आजम और मोहम्मद मुश्ताक को गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई को क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उसके सहयोगी तंत्र के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा माना गया।

    जम्मू-कश्मीर में इस साल अब तक 15 आतंकी घटनाओं की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं में 15 आतंकियों के मारे जाने की बात सामने आई है, जबकि दो सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं। इसके अलावा तीन नागरिकों की भी मौत हुई है। उधमपुर जिले में इस वर्ष सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच दो बार मुठभेड़ हो चुकी है। ताजा ऑपरेशन में दो आतंकियों के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में निगरानी और तलाशी गतिविधियां जारी रखी हैं।

  • सर क्रीक-सिंध सीमा पर पाकिस्तान ने बढ़ाई युद्धक क्षमता, विशेष होवरक्राफ्ट किए तैनात

    सर क्रीक-सिंध सीमा पर पाकिस्तान ने बढ़ाई युद्धक क्षमता, विशेष होवरक्राफ्ट किए तैनात


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) गुजरात (Gujarat) से सटे सर क्रीक और सिंध (Sir Creek and Sindh) के तटीय इलाकों में अपनी सैन्य तैयारियों को चुपचाप धार दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में इस इलाके में पाकिस्तान (Pakistan) ने अपनी एम्फीबियस (जल और थल) युद्धक क्षमताओं को तेजी से मजबूत किया है। दलदली पानी में चलने वाले विशेष होवरक्राफ्ट की तैनाती, नए ड्रोन प्रोजेक्ट और तीनों सेनाओं के बड़े युद्धाभ्यास यह बताते हैं कि पाकिस्तान इस जलीय और दुर्गम इलाके को भारत के खिलाफ एक नए मोर्चे के रूप में विकसित करने की जुगत में है।

    पाकिस्तान ने सर क्रीक के आसपास के बैकवाटर में कई तटीय सुरक्षा अभ्यास चलाए हैं। पिछले साल अगस्त में तुर्की की स्पेशल फोर्सेज और फरवरी में सऊदी अरब की नौसेना के साथ कराची/सिंध तट पर क्लोज-क्वार्टर कॉम्बैट अभियानों का अभ्यास किया गया। पिछले साल जून व अगस्त में पोर्ट कासिम और कराची बंदरगाहों पर गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए पोर्ट सिक्योरिटी और हार्बर डिफेंस अभ्यास भी आयोजित किए।


    पाकिस्तान की हालिया तैयारियां

    पाकिस्तान नौसेना ने इसी महीने उत्तरी अरब सागर में सी-स्पार्क युद्धाभ्यास की शुरुआत की है। इस अभ्यास में युद्धपोत, पनडुब्बियां, विमान और मानव रहित (ड्रोन) प्रणालियां शामिल हैं। अभ्यास का मुख्य फोकस पारंपरिक नौसैनिक युद्ध के साथ-साथ हवाई, जमीनी और साइबर समेत मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की क्षमता मजबूत करना है, जिसमें पाकिस्तानी सेना और वायुसेना भी भाग ले रही हैं।

    पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद अक्तूबर में पाकिस्तान नौसेना प्रमुख एडमिरल नावेद अशरफ क्रीक के दौरे पर गए। इस दौरान तीन नए 2400 टीडी होवरक्राफ्ट मरीन बेड़े में शामिल किए गए। इस साल जुलाई में पाकिस्तानी नौसेना ने अबाबील नाम से एक एम्फीबियस और ड्रोन एकीकरण प्रशिक्षण चलाया। इसमें मरीन कमांडोज, यूएवी और समुद्र से तट पर उतरने वाले अभ्यासों को आपस में जोड़ा गया।


    पाकिस्तान की मंशा

    सर क्रीक इलाके में पाकिस्तान की इस बहुआयामी तैयारी के पीछे कई सामरिक कारण हैं। पारंपरिक रूप से भारत-पाकिस्तान संघर्ष का केंद्र कश्मीर और पंजाब सीमा रही है। पाकिस्तान गुजरात के कच्छ और सर क्रीक मोर्चे को एक वैकल्पिक या आक्रामक मोर्चे के रूप में विकसित कर रहा है, ताकि भारतीय सेना को कई दिशाओं में उलझाया जा सके। सर क्रीक का इलाका बेहद जटिल, दलदली और जलीय है। जहां भारी टैंक या सेना के पारंपरिक वाहन काम नहीं करते। पाकिस्तान इन भौगोलिक बाधाओं का लाभ उठाकर तेजी से घुसपैठ या हमले की क्षमता परख रहा है। गुजरात सीमा पर हमले के पीछे मनोवैज्ञानिक पहलू भी जुड़े हैं। पाकिस्तान का आकलन है कि इस क्षेत्र में किसी तरह की सफलता भारत के राष्ट्रीय मनोबल को कमजोर कर सकती है।


    भारत की जवाबी तैयारी

    पिछले साल मई में भारत-पाक सैन्य टकराव के दौरान गुजरात मोर्चे पर पाकिस्तानी ड्रोनों की गतिविधियों को भारत ने नाकाम किया था। इसके बाद जून में सेना, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने इस क्षेत्र में एक बड़ा संयुक्त अभ्यास किया, जिसमें दलदली क्षेत्र में स्पीड बोट्स, ड्रोन-विरोधी प्रणालियों और अंडरवाटर ऑपरेशन्स का परीक्षण किया गया।


    पाक का हवाई मार्ग भारत के लिए 24 अक्तूबर तक बंद

    पाकिस्तान ने बुधवार को भारतीय विमानों के लिए हवाई क्षेत्र पर लगी रोक को एक और महीने के लिए बढ़ा दिया। पाकिस्तान के विमानपत्तन प्राधिकरण (पीएए) के मुताबिक, अब यह पाबंदी 24 अक्तूबर तक बढ़ाई गई है। यह रोक बुधवार सुबह 10:45 बजे से लागू हुई और 24 अक्तूबर 2026 सुबह 04:59 बजे तक जारी रहेगी। रोक की पिछली समय-सीमा 24 सितंबर को खत्म हो रही है।

  • पश्चिम एशिया में चल रही जंग से पाकिस्तान की हालत हुई खराब… बनी लॉकडाउन वाली स्थिति

    पश्चिम एशिया में चल रही जंग से पाकिस्तान की हालत हुई खराब… बनी लॉकडाउन वाली स्थिति


    इस्लामाबाद।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रही जंग से पाकिस्तान (Pakistan) बेदम हो चुका है। महीनों से जंग में चौधरी बनने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान (Pakistan) के हाथ कुछ नहीं लग पाया और अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध (America and Iran War) अब भी जारी है। बीते सप्ताह क्षेत्र में तनाव तब बढ़ गया जब सऊदी अरब (Saudi Arabia) और हूती विद्रोहियों के बीच भी जंग शुरू हो गई है। ऐसे में तेल संकट बढ़ गया है। पाकिस्तान में तो अब हालात ऐसे हैं कि लॉकडाउन वाली स्थिति बन गई है।

    बता दें कि पाकिस्तान का फॉरेन रिजर्व पहले ही खाली पड़ा है और उसने हाल ही में माना था कि वह जल्द ही अमेरिका के पास गिड़गिड़ाने जाएगा। इस बीच पाकिस्तान की मुसीबत तब बढ़ गई जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक अब पाकिस्तान की सरकार ‘पेट्रोलियम स्मार्ट लॉकडाउन’ लगाने की योजना बना रही है।


    हफ्ते में 4 दिन ही होगा कामकाज

    रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की हालत इतनी बुरी है कि कामकाज भी ठप हो सकता है। पेट्रोल लॉकडाउन के तहत सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के लिए हफ्ते में केवल 4 दिन काम करने का नियम लागू हो सकता है। वहीं छुट्टियों को शुक्रवार से रविवार तक बढ़ाकर सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही को कम करने का प्लान है।

    इसके अलावा सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों को रोटेशन बेसिस पर बुलाया जाएगा और अधिकतर लोगों को घर से काम करने का निर्देश दिया जाएगा। वहीं पेट्रोल-डीजल और बिजली बचाने के लिए शॉपिंग मॉल्स, व्यावसायिक बाजारों और मैरिज हॉल को शाम को जल्दी बंद करने का फैसला लिया जा सकता है।


    भत्ता भी कटेगा

    शहबाज शरीफ की सरकार मजबूरी में अपने कर्मचारियों का वेतन तक काटेगी। सरकारी तंत्र में ईंधन बचाने के लिए लगभग 50 फीसदी सरकारी गाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। वहीं अधिकारियों के गैर-जरूरी दौरों और सरकारी पेट्रोल भत्तों में भी भारी कटौती की जाएगी। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने इससे पहले भी इस तरह के उपाय लागू किए थे। अधिकारियों के वेतन तक काटने के आदेश दे दिए गए थे। हालांकि फायदा कुछ नहीं मिला।

  • BRICS में ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल, बोले- पीएम मोदी की कूटनीति के आगे आसिम मुनीर की भूमिका कमजोर

    BRICS में ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल, बोले- पीएम मोदी की कूटनीति के आगे आसिम मुनीर की भूमिका कमजोर

    नई दिल्ली ।भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया के बदलते कूटनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा हुई। ईरान से आए पत्रकार बसीम लालेह ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत संवाद और कूटनीति के स्तर पर अधिक प्रभावी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कूटनीतिक सक्रियता की सराहना की और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर पर भी टिप्पणी की।

    लालेह के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान पाकिस्तान ने मध्यस्थता में अपनी भूमिका को प्रमुखता से पेश करने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं रहा। इसके विपरीत, भारत ने विभिन्न देशों के साथ सीधे संवाद के जरिए अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत की है। उन्होंने कहा कि BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ईरान और यूएई के नेताओं के साथ बातचीत इसका उदाहरण है।

    ईरानी पत्रकार ने बताया कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच बातचीत हुई। इसके साथ ही अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के साथ भी प्रधानमंत्री की चर्चा हुई। उनके अनुसार, इसके बाद यूएई और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बनना पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीतिक भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी संवाद के जरिए आगे बढ़ने की संभावना बन सकती है।

    आसिम मुनीर को लेकर लालेह ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुनीर कई मोर्चों पर असफल रहे हैं और भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के बाद पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भूमिका कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आसिम मुनीर की छुट्टी कर दी है। हालांकि, यह टिप्पणी राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव के संदर्भ में की गई थी।

    लालेह ने BRICS सम्मेलन की मेजबानी और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने मतभेदों को पीछे छोड़कर बातचीत और सहयोग पर जोर दिया है। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संकट के समाधान के लिए संवाद महत्वपूर्ण है और भारत इस दिशा में उपयोगी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो महीनों में क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को लेकर सकारात्मक बदलाव दिखाई दे सकते हैं।

    पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए लालेह ने कहा कि पाकिस्तान खुद कई मामलों में दूसरे देशों पर निर्भर है। उनके अनुसार, इसी वजह से पाकिस्तान के लिए स्वतंत्र तरीके से विदेश नीति तय करना मुश्किल है। उन्होंने पाकिस्तान की कूटनीति को कमजोर बताते हुए कहा कि वह क्षेत्रीय शांति को लेकर कोई प्रभावी उदाहरण स्थापित नहीं कर पाया है।

    ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर आतंकवाद के मुद्दे को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद से जुड़े आरोपों का सामना करता रहा है, उसके लिए शांति की पहल का नेतृत्व करना मुश्किल होता है। उन्होंने पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को लगातार अधिक महत्व मिल रहा है।

    लालेह ने सऊदी अरब की सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, सऊदी अरब पर हमले करने वालों के खिलाफ पाकिस्तान अपेक्षित भूमिका नहीं निभा पाया है। उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ पाकिस्तान और तुर्की से जुड़े मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट का भी उल्लेख किया और कहा कि इस मामले में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    BRICS सम्मेलन के दौरान भारत की सक्रिय कूटनीति और पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर बहस तेज है। ईरानी पत्रकार बसीम लालेह की टिप्पणियों ने इस चर्चा को और बढ़ा दिया है। वहीं, भारत की ओर से विभिन्न देशों के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने की कोशिशों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।

  • कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी की गोली मारकर हत्या, चार अज्ञात हमलावरों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां जुटीं

    कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी की गोली मारकर हत्या, चार अज्ञात हमलावरों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां जुटीं

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी की गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार चार अज्ञात हमलावरों ने इस वारदात को अंजाम दिया और गोलीबारी के बाद मौके से फरार हो गए। मारे गए व्यक्ति को लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद का करीबी बताया जा रहा है।

    घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी मिलने पर पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और मामले की जांच शुरू की। एजेंसियों ने हमलावरों की तलाश के साथ-साथ हत्या के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए भी जांच शुरू कर दी है।

    अभी तक मारे गए आतंकी की पहचान को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसी तरह लश्कर-ए-तैयबा में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी, इस बारे में भी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल जांच एजेंसियां वारदात से जुड़े तथ्यों को जुटाने में लगी हैं।

    बताया गया है कि हमलावर बाइक पर सवार थे और उनकी संख्या चार थी। उन्होंने लश्कर से जुड़े व्यक्ति को निशाना बनाया और वारदात को अंजाम देने के बाद वहां से निकल गए। हमले के पीछे कौन लोग थे, इस बारे में फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि इस हत्या के पीछे किसी प्रतिद्वंद्वी आतंकी गुट का हाथ था या इसके पीछे कोई अन्य कारण रहा। सुरक्षा एजेंसियां इसी दिशा में भी जानकारी जुटा रही हैं। अभी किसी संभावित गुट या व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि नहीं की गई है।

    कराची में हुई इस घटना को पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, मौजूदा मामले में हत्या की वास्तविक वजह और हमलावरों के उद्देश्य के बारे में जांच पूरी होने से पहले कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    इस घटना के बाद पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों की गतिविधियों और उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चार अज्ञात हमलावरों द्वारा संगठन से जुड़े व्यक्ति को निशाना बनाए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने हमले की पूरी कड़ी का पता लगाने की चुनौती है।

    फिलहाल जांच एजेंसियां हमलावरों की पहचान और उनकी तलाश पर काम कर रही हैं। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हत्या की योजना किस तरह बनाई गई और इसके पीछे क्या मकसद था। मारे गए व्यक्ति की पहचान तथा लश्कर-ए-तैयबा में उसकी भूमिका से जुड़ी जानकारी भी जांच के दौरान स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    मामले में अभी तक आधिकारिक स्तर पर सीमित जानकारी ही सामने आई है। इसलिए हत्या के पीछे किसी विशेष संगठन, व्यक्ति या वजह की पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच आगे बढ़ने के साथ ही वारदात से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की संभावना है।

  • मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने बढ़ाया इनाम, FIA की नई सूची में 70 लाख रुपये का इनाम और गिरफ्तारी वारंट जारी

    मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने बढ़ाया इनाम, FIA की नई सूची में 70 लाख रुपये का इनाम और गिरफ्तारी वारंट जारी


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई का दावा करते हुए उसे गिरफ्तार करने के लिए वारंट जारी किया है। पाकिस्तान की जांच एजेंसी फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी FIA की नई मोस्ट वांटेड सूची में मसूद अजहर पर 70 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब अक्टूबर में एफएटीएफ की बैठक प्रस्तावित है।

    FIA की नई सूची में मसूद अजहर को वांछित बताया गया है। पाकिस्तान का कहना है कि वह देश से गायब है और अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। वहीं, भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़ी जानकारी में उसके पाकिस्तान में छिपे होने की संभावना जताई गई है। पिछले कुछ महीनों में ऐसी जानकारी सामने आने का दावा किया गया है कि वह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह इलाके में हो सकता है।

    मसूद अजहर पर इससे पहले भी पाकिस्तान की ओर से इनाम घोषित किया जा चुका है। वर्ष 2021 में FIA ने उस पर 50 लाख रुपये का इनाम रखा था। अब पांच साल बाद इस रकम में 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे कुल इनाम 70 लाख रुपये हो गया है।

    FIA की नई मोस्ट वांटेड सूची में 26/11 मुंबई हमले से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इन लोगों पर हमले में अलग-अलग तरह से मदद करने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ पर हमलावरों को समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचाने में सहायता करने का आरोप है, जबकि कुछ पर हमले के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

    नई सूची में 17 लोगों की तस्वीरें और उनके काम से जुड़ी जानकारी दी गई है। वहीं दो लोगों के नाम सूची में मौजूद होने के बावजूद उनकी तस्वीर और संगठन से संबंधित विवरण हटा दिए गए हैं। तुर्बत के मोहम्मद खान पर हमलावरों को मुंबई पहुंचाने वाली नाव उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया था। नई सूची में उसके नाम के साथ तस्वीर और अन्य जानकारी नहीं दी गई है।

    बहावलनगर के अब्दुल रहमान का नाम भी सूची में मौजूद है, लेकिन उसकी तस्वीर और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी जानकारी हटा दी गई है। वर्ष 2021 की पुरानी सूची में दोनों के बारे में अधिक विवरण मौजूद था।

    नई सूची में 11 ऐसे लोगों के नाम भी हैं, जिन पर हमलावरों को दो नावों के जरिए समुद्र पार कराने में मदद करने का आरोप लगाया गया है। इनमें मुहम्मद अमजद खान, शाहिद गफूर, मुहम्मद उस्मान, अतीक उर रहमान, रियाज अहमद, मुहम्मद मुश्ताक, मुहम्मद नईम, अब्दुल शकूर, मुहम्मद साबिर सल्फी, मुहम्मद उस्मान और शकील अहमद शामिल हैं।

    इसके अलावा छह लोगों पर हमले के लिए आर्थिक मदद देने का आरोप लगाया गया है। मुहम्मद इफ्तिखार अली पर VOIP कनेक्शन के लिए करीब 70 हजार पाकिस्तानी रुपये खर्च करने का आरोप है। मोहम्मद जिया पर 80 हजार रुपये, मोहम्मद अब्बास नासिर पर 2.53 लाख रुपये, जावेद इकबाल पर 1.86 लाख रुपये और मुख्तार अहमद पर करीब 2.98 लाख रुपये देने का आरोप है। अहमद सईद पर करीब 21 लाख रुपये देने का आरोप लगाया गया है।

    FIA के मुताबिक 26/11 हमले से जुड़े ये लोग करीब 18 साल से फरार हैं। वहीं भारतीय खुफिया सूत्रों का दावा है कि इनमें से कई पाकिस्तान में ही मौजूद हैं। भारत का कहना है कि केवल नाम मोस्ट वांटेड सूची में शामिल करना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। पाकिस्तान की 2021 की सूची में 1,330 मोस्ट वांटेड आतंकियों के नाम थे, जबकि नई सूची में यह संख्या बढ़कर 1,804 हो गई है।