Tag: Parliament

  • फिलीपींस की सियासत में बड़ा भूचाल: उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते पर महाभियोग, जानिए पूरा मामला

    फिलीपींस की सियासत में बड़ा भूचाल: उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते पर महाभियोग, जानिए पूरा मामला



    नई दिल्ली। फिलीपींस की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। देश की उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते के खिलाफ प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) ने भारी बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दिया है। इस फैसले के बाद अब यह मामला सीनेट में जाएगा, जहां उनके राजनीतिक भविष्य पर अंतिम फैसला होगा।

    क्या है पूरा मामला?
    सारा दुतेर्ते पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, संपत्ति के गलत स्रोत और राष्ट्रपति बोंगबोंग मार्कोस तथा उनके परिवार को कथित धमकी देने जैसे आरोप शामिल हैं। इन आरोपों ने फिलीपींस की राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच टकराव गहरा गया है।

    प्रतिनिधि सभा में हुए मतदान में 255 सांसदों ने महाभियोग के पक्ष में वोट दिया, जबकि केवल 26 सांसदों ने विरोध किया। 9 सांसद मतदान से अनुपस्थित रहे। यह स्पष्ट करता है कि निचले सदन में इस प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला है।

    किन आरोपों में घिरी हैं उपराष्ट्रपति?
    सारा दुतेर्ते पर आरोप है कि उन्होंने उपराष्ट्रपति कार्यालय और शिक्षा मंत्रालय के गोपनीय फंड (Confidential Funds) का गलत इस्तेमाल किया। इसके साथ ही उन पर वित्तीय पारदर्शिता न रखने और संदिग्ध संपत्ति अर्जित करने के भी आरोप हैं।

    सबसे गंभीर आरोपों में एक यह भी है कि उन्होंने एक सार्वजनिक बयान में कथित तौर पर राष्ट्रपति मार्कोस, उनकी पत्नी और संसद अध्यक्ष के खिलाफ हिंसक धमकी जैसी बात कही थी। इस बयान ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया था।

    अब आगे क्या होगा?
    महाभियोग प्रस्ताव अब सीनेट को भेजा जाएगा। सीनेट इस मामले में ट्रिब्यूनल के रूप में कार्य करेगी और आरोपों की गहराई से जांच करेगी। यदि सीनेट उन्हें दोषी ठहराती है, तो सारा दुतेर्ते को अपने पद से हटाया जा सकता है और राजनीतिक प्रतिबंध भी लग सकते हैं।

    सारा दुतेर्ते फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते की बेटी हैं और देश की राजनीति में एक मजबूत चेहरा मानी जाती हैं। उनके खिलाफ पहले भी महाभियोग लाने की कोशिश हुई थी, लेकिन संवैधानिक कारणों से वह मामला आगे नहीं बढ़ सका था।

    राजनीतिक तनाव क्यों बढ़ा?
    यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक भी माना जा रहा है। राष्ट्रपति मार्कोस और दुतेर्ते परिवार के बीच पहले से ही राजनीतिक मतभेद रहे हैं। महाभियोग के बाद यह टकराव और तेज हो गया है, जिससे देश की राजनीति में अस्थिरता के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
    सारा दुतेर्ते के खिलाफ महाभियोग फिलीपींस की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अब सभी की नजरें सीनेट ट्रायल पर हैं, जहां तय होगा कि वे पद पर बनी रहेंगी या उन्हें हटना पड़ेगा। यह मामला आने वाले दिनों में और भी बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।

  • संसद में विवाद के बाद जनरल नरवणे की नई किताब लॉन्च, फिर सेना पर फोकस

    संसद में विवाद के बाद जनरल नरवणे की नई किताब लॉन्च, फिर सेना पर फोकस

    नई दिल्ली। जनरल एम.एम. नरवणे एक बार फिर अपनी नई किताब को लेकर चर्चा में हैं। संसद में उनकी पिछली किताब को लेकर हुए विवाद के बाद अब उन्होंने नई नॉन-फिक्शन पुस्तक ‘The Curious and the Classified: Unearthing Military Myths and Mysteries’ लॉन्च की है, जिसका फोकस भी सेना से जुड़े विषयों पर ही है।

    क्या है नई किताब में खास?
    प्रकाशक रूपा पब्लिकेशंस के मुताबिक, इस किताब में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े कई रोचक किस्से, रहस्य और परंपराओं को सामने लाया गया है।
    यह किताब सैन्य इतिहास और उससे जुड़े मिथकों की गहराई से पड़ताल करती है, साथ ही सैनिकों की जिज्ञासा और साहस की कहानियों को उजागर करती है।

    शशि थरूर से क्या है कनेक्शन?
    इस किताब की प्रेरणा का एक दिलचस्प पहलू भी सामने आया है। जनरल नरवणे ने बताया कि उन्हें यह किताब लिखने का विचार शशि थरूर की किताब ‘A Wonderland of Words’ पढ़ने के बाद आया।
    उन्होंने प्रस्तावना में भी इसका जिक्र किया है कि कैसे थरूर की लेखनी ने उन्हें नई किताब लिखने के लिए प्रेरित किया।

    पहले भी हो चुका है विवाद
    इससे पहले जनरल नरवणे की संस्मरण आधारित किताब ‘Four Stars of Destiny’ को लेकर संसद में बड़ा विवाद हुआ था।

    राहुल गांधी ने संसद में इस अप्रकाशित किताब के कुछ हिस्सों का जिक्र किया था

    इसके बाद स्पीकर ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया

    पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने स्पष्ट किया था कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और उसके अधिकार उनके पास हैं

    क्यों चर्चा में है नई किताब?
    नई किताब भले ही संस्मरण नहीं है, लेकिन सैन्य विषयों पर आधारित होने के कारण यह फिर से चर्चा में है। खासकर उस विवाद के बाद, जिसमें सेना से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गए थे।

    जनरल नरवणे की नई किताब सैन्य दुनिया के अनछुए पहलुओं को सामने लाने की कोशिश करती है। साथ ही, थरूर से मिला प्रेरणा का कनेक्शन इसे और दिलचस्प बनाता है। अब देखना होगा कि यह किताब पाठकों के बीच कितना प्रभाव छोड़ती है।

  • राम मंदिर और संसद भवन को निशाना बनाने की साजिश नाकाम, दिग्ध गिरफ्तार

    राम मंदिर और संसद भवन को निशाना बनाने की साजिश नाकाम, दिग्ध गिरफ्तार

    नई दिल्ली। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश करते हुए चार कट्टरपंथी संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की इस कार्रवाई में महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से जुड़े इन आरोपियों के तार सामने आए हैं।
    जांच में खुलासा हुआ है कि ये लोग देश में कथित ‘खिलाफत’ और ‘गजवा-ए-हिंद’ के नाम पर आतंकी गतिविधियों की योजना बना रहे थे।

    बड़े ठिकाने थे निशाने पर

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के निशाने पर राम मंदिर अयोध्या, संसद भवन और कई सैन्य प्रतिष्ठान थे। इनके पास से आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बरामद की गई है।

    दिल्ली में की थी रेकी

    जांच में सामने आया है कि एक आरोपी सोशल मीडिया के जरिए ग्रुप बनाकर कट्टर विचारधारा से जुड़ी चर्चाएं करता था। इसी प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने की योजना साझा की जा रही थी।

    बताया जा रहा है कि दिसंबर 2025 में आरोपी ने दिल्ली आकर लाल किला और इंडिया गेट की रेकी भी की थी।

    क्राउडफंडिंग से जुटा रहे थे पैसे

    जांच एजेंसियों के अनुसार, मॉड्यूल के कुछ सदस्य रिमोट कंट्रोल से चलने वाले IED तैयार करने के लिए स्थानीय स्तर पर सामान जुटा रहे थे। वहीं एक अन्य आरोपी सोशल मीडिया के जरिए लोगों को हथियार और विस्फोटक इकट्ठा करने के लिए उकसा रहा था।
    क्राउडफंडिंग के लिए बैंक अकाउंट और QR कोड भी साझा किए जा रहे थे।

    सोहेल के मोबाइल से खुला राज

    इस पूरे नेटवर्क में बिहार के कटिहार जिले का एक युवक सोहेल भी शामिल बताया जा रहा है, जिसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली से गिरफ्तार किया।
    जांच में उसका मोबाइल सबसे बड़ा सबूत बना। कॉल डिटेल, सोशल मीडिया अकाउंट और चैट्स की फॉरेंसिक जांच में कई संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं।

    कटिहार के पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसी को मिले इनपुट के आधार पर पहले सोहेल को स्थानीय स्तर पर हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। उसके मोबाइल की वैज्ञानिक जांच के बाद उसे दिल्ली बुलाया गया, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया।

    गांव और परिवार पर निगरानी

    पुलिस अब आरोपी के गांव और उसके संपर्क में आने वाले लोगों पर भी नजर रख रही है। जांच एजेंसियां बैंक खातों और ऑनलाइन गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार, सोहेल पेशे से प्लंबर है और उसकी गतिविधियां लंबे समय से संदिग्ध बताई जा रही थीं।

    कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत

    फॉरेंसिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे और किसी बड़े हमले की साजिश रच रहे थे। एजेंसियां अब इनके संभावित नेटवर्क और विदेशी कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं।

    कुल मिलाकर, समय रहते इस साजिश का खुलासा होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

  • महिलाओं को 33% आरक्षण… आज संसद में पेश होंगे 3 बिल… सत्तापक्ष के पास LS में 67 और RS में 21 सीट कम

    महिलाओं को 33% आरक्षण… आज संसद में पेश होंगे 3 बिल… सत्तापक्ष के पास LS में 67 और RS में 21 सीट कम


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) में आज एकसाथ तीन-तीन विधेयक पेश किए जाने वाले हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के लोकसभा चुनावों (Lok Sabha elections) से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण और परिसीमन की प्रक्रिया को अमली जामा पहना दिया जाए। लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मूर्त रूप देने के लिए आज से संसद का विशेष सत्र रखा गया है। इसमें लोकसभा में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए बिल लाया जाएगा। इसके साथ ही, सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इन्हीं से संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है।

    ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (‘Women’s Empowerment Act’) के तहत महिलाओं को मिलने वाला कोटा परिसीमन और जनगणना से जुड़ा है। केंद्र सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करने और महिला आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है।


    सरकार कैसे पास कराएगी विधेयक? जानें नंबर गेम

    परिसीमन विधेयक को छोड़कर, अन्य दो विधेयक संविधान संशोधन विधेयक हैं। इन्हें पारित करने के लिए संसद में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। विपक्ष का वॉकआउट बहुमत के आंकड़े को कम कर सकता है। लोकसभा दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 है। सत्ताधारी NDA के पास 293 सदस्य हैं। यानी उसे अभी भी 67 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। राज्यसभा में बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 163 है। NDA की वर्तमान ताकत 142 के आसपास है, जो उसे बहुमत के आंकड़े से 21 सीट दूर रखती है।

    विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के समर्थक हैं, लेकिन सरकार द्वारा इसे परिसीमन और 2029 के चुनावों से जोड़ने के कारण वे इन विधेयकों का विरोध करने को मजबूर हैं।


    क्षेत्रीय संतुलन का डर

    विपक्ष का तर्क है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण केवल NDA को लाभ पहुंचाएगा। इसके अलावा, यह दक्षिण भारतीय राज्यों की संसदीय शक्ति को कम कर सकता है और उन्हें हाशिए पर धकेल सकता है।


    राहुल गांधी का आरोप

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया (X) पर आरोप लगाया कि सरकार की योजना 2029 के लिए सीटों का अपनी सुविधानुसार सीमाओं में बदलाव करने की है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संवैधानिक सुरक्षा उपायों को हटाकर पूरी शक्ति सरकार द्वारा नियुक्त आयोग को देता है।


    लोकसभा की सीटों में भारी वृद्धि

    प्रस्तावित विधेयकों के तहत परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 815 तक हो सकती है। केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के लिए यह संख्या 35 हो सकती है। वर्तमान में राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य चुनकर आते हैं।


    क्षेत्रीय दलों का बदलता रुख

    BJD और BRS जैसे दल अक्सर मुद्दों के आधार पर सरकार का समर्थन करते रहे हैं> उन्होंने परिसीमन के मुद्दे पर अपना रुख कड़ा कर लिया है। इससे सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।


    सरकार का भरोसा- सब साथ हैं

    तमाम विरोधों के बावजूद सरकार का दावा है कि उनके पास पर्याप्त आंकड़े हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कोई भी दल सिद्धांत रूप में महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा है और इस भावना के साथ सभी एक साथ हैं।

  • केन्द्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में…. इसी माह फिर बुलाया जाएगा संसद का विशेष सत्र

    केन्द्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में…. इसी माह फिर बुलाया जाएगा संसद का विशेष सत्र


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) के मौजूदा बजट सत्र (Current Budget Session) के समापन पर चल रही अटकलों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू (Kiren Rijiju) ने स्पष्ट किया है कि बजट सत्र को अनिश्चित काल के लिए आज स्थगित नहीं किया जाएगा बल्कि इसे कुछ दिनों के लिए स्थगित किया जाएगा और बहुत जल्द ही संसद के सदस्य फिर से मिलेंगे। राज्यसभा में उन्होंने कहा, ”हमारे पास कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, यह विपक्ष के साथ भी साझा किया गया है। अगले 2-3 हफ्तों में हम एक बहुत महत्वपूर्ण विधेयक (Very Important Bill) लाने वाले हैं। आज सरकार सदन को स्थगित करने का प्रस्ताव रखेगी और हम जल्द ही फिर मिलेंगे; उद्देश्य सदस्यों को ज्ञात है।”

    उनका यह बयान उन अटकलों और मीडिया रिपोर्ट्स के बीच आया, जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार संसद के मौजूदा बजट सत्र को अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित नहीं करेगी और कुछ दिनों के अंतराल पर फिर से दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू करेगी ताकि महिला आरक्षण में संशोधन करने वाले बिल को पेश और पारित कराया जा सके। संसद के बजट सत्र के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बजट सत्र के दूसरे चरण का आज अंतिम दिन है।


    हम जल्दी ही दो-तीन सप्ताह के अंदर फिर मिलेंगे

    यह मुद्दा राज्य सभा में अपराह्न दो बजे गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के आंध प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 को चर्चा और पारित कराने का प्रस्ताव रखने के लिए खड़े होते ही उठा। कांग्रेस के जयराम रमेश ने सभापति सीपी राधाकृष्णन के माध्यम से जानना चाहा कि सरकार सदन की कार्यवाही के विषयों के बारे में क्या सोचती है। क्या सदन को कल भी चलाया जाएया या इसे अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जाएगा। आसन के निर्देश पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि हम जल्दी ही दो-तीन सप्ताह के अंदर फिर मिलेंगे। इसका एक विशेष उद्येश्य है।


    कांग्रेस को क्या आपत्ति, क्यों कर रही विरोध?

    इस पर कांग्रेस अध्यक्ष और सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश ने कहा कि सरकार विधान सभा चुनावों का लाभ लेने के लिए महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने की यह चाल चल रही है। उन्होंने मांग की कि इस के बारे में अब कोई भी बैठक 29 अप्रैल को विधान सभा चुनावों के आखिरी चरण का मतदान हो जाने के बाद ही बुलाया जाना चाहिए। दरअसल, विपक्ष चाहता है कि इस मुद्दे पर काई कार्यवाही अब कुछ राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में चल रहे विधान सभा चुनाव के बाद ही की जानी ठीक रहेगी क्योंकि भाजपा इसका आगामी चुनावों में लाभ उठा सकती है।

    16 से 18 अप्रैल के बीच तीन दिनों का संसद का विशेष सत्र
    इस पर रिजिजू ने कहा कि उन्होंने इस बारे में कांग्रेस सहित विपक्ष के सभी दलों के साथ पत्र लिखा है और चर्चा की है। विपक्ष के नेता ने पत्र का जवाब दिया है। उन्होंने विपक्ष से राजनीति में न पड़ कर सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि ‘ सरकार ने देश और महिलाओं के प्रति एक प्रतिबद्धता व्यक्त कर रखी है। उन्होंने कोई व्याख्या प्रस्तुत किए बिना कहा कि -सरकार समय से बंधी हुई है। समय बहुत कम है। इसका चुनावी राजनीति से कोई संबंध नहीं है।’NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार 16 से 18 अप्रैल के बीच तीन दिनों का संसद का विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है। इस दौरान संविधान संशोधन विधेयक पेश किये जाने की संभावना है जिसके जरिये नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन किया जाएगा।

  • संसद में टी-शर्ट… रिजिजू ने राहुल गांधी के कपड़ों पर उठाए सवाल, बोले- सलाहकारों ने हाईजैक कर लिया उनका दिमाग

    संसद में टी-शर्ट… रिजिजू ने राहुल गांधी के कपड़ों पर उठाए सवाल, बोले- सलाहकारों ने हाईजैक कर लिया उनका दिमाग


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू (Kiran Rijiju) ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress leader Rahul Gandhi) का दिमाग उनके एक्टिविस्ट सलाहकारों (Activist Advisors) ने ‘हाईजैक’ कर लिया है और वे संसद में वही बोलते हैं जो उनके सलाहकार उन्हें बताते हैं। साथ ही उन्होंने विपक्ष के नेता के सदन में टी-शर्ट जैसे कैजुअल कपड़ों में आने पर भी सवाल उठाया। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि उन्हें ऐसे लोगों से बातचीत करना ज्यादा आसान लगता है, जिन्होंने संसद में अपनी बात रखते हुए कोई ठोस योगदान दिया हो।

    उन्होंने आगे कहा, “निजी तौर पर, मुझे राहुल गांधी से कोई दिक्कत नहीं है। हम मिलते हैं, बाहर और मीटिंग रूम में भी एक-दूसरे से बात करते हैं, क्योंकि वे विपक्ष के नेता हैं। यह ठीक है। कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन जब आप औपचारिक रूप से सदन के पटल पर बोल रहे होते हैं, तो आपको परंपराओं, नियमों और शिष्टाचार का पालन करना चाहिए। ये संसदीय लोकतंत्र के बहुत जरूरी हिस्से हैं।”

    उन्होंने आगे कहा, “लेकिन राहुल गांधी का दिमाग उनके एक्टिविस्ट सलाहकारों ने हाईजैक कर लिया है। वे वही बोलते हैं जो उनके सलाहकार उन्हें बताते हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तो उसने कुछ मानकों का पालन किया था और जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किए थे, लेकिन उसने कभी अपनी सीमाएं पार नहीं की थीं।

    संसद में राहुल गांधी के अक्सर कैजुअल कपड़ों में आने के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेता (LoP) के तौर पर, किसी को भी उचित तरीके से व्यवहार करना चाहिए, और कपड़े पहनना भी इसी का एक हिस्सा है। मंत्री ने कहा कि उन्हें नियमों और शिष्टाचार को समझने में दिक्कत होती है। जब आप नेता विपक्ष होते हैं, तो आपको एक खास तरीके से व्यवहार करना होता है। शालीन कपड़े पहनना भी इसी का एक हिस्सा है।

    रिजिजू ने कहा कि अनुभवी कम्युनिस्ट नेता सोमनाथ चटर्जी लोकसभा स्पीकर बनने से पहले ढीली शर्ट और सैंडल पहना करते थे। उन्होंने कहा, “लेकिन जब वे स्पीकर चुने गए, तो वे काफी शालीन तरीके से आने लगे, ताकि वे कुर्सी पर बैठे हुए अच्छे दिखें। इसी तरह, नेता विपक्ष पूरे विपक्ष के नेता होते हैं और इसलिए उन्हें ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जो उनके पद की गरिमा के अनुरूप हों। हो सकता है कि मैं उस व्यक्ति का सम्मान न करता होऊं, लेकिन मुझे उस पद का सम्मान करना ही होगा। इसीलिए बहुत से लोगों को लगता है कि वे (राहुल गांधी) और भी बेहतर तरीके से व्यवहार कर सकते थे, जिसमें बेहतर कपड़ों का चुनाव भी शामिल है। मैं टी-शर्ट पहनने पर कोई आपत्ति नहीं जता रहा हूं, लेकिन यह अच्छा नहीं लगता।”

  • बदलेगा संसद का स्वरूप…! लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें बढ़ाने की तैयारी… 409 होगा बहुमत का आंकड़ा?

    बदलेगा संसद का स्वरूप…! लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें बढ़ाने की तैयारी… 409 होगा बहुमत का आंकड़ा?


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) संसद (Parliament) के मौजूदा सत्र में महिला आरक्षण (Women’s Reservation) को लागू करने के लिए कम से कम दो विधेयक (Bills) (संविधान संशोधन सहित) पेश करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत अगले लोकसभा (Lok Sabha) और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की जाएंगी। इस कदम से देश का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदलने की उम्मीद है।


    लोकसभा की सीटों में 50% का इजाफा

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की योजना के अनुसार लोकसभा की कुल सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं। यानी 273 नई सीटें जोड़ी जाएंगी, जिनमें से अधिकांश महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे संसद में बहुमत का आंकड़ा भी बढ़कर 409 हो जाएगा।

    यह वृद्धि पिछले पांच दशकों में पहली बार होगी। इससे मौजूदा पुरुष सांसदों की राजनीतिक स्थिति पर कोई खतरा नहीं मंडराएगा। राज्यसभा और राज्यों की विधान परिषदों की सदस्य संख्या पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।


    परिसीमन और 2011 की जनगणना का इस्तेमाल

    2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में महिला आरक्षण को नई जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया था। अब सरकार इस प्रावधान को अलग कर रही है। नई जनगणना के आंकड़ों में समय लग सकता है, इसलिए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर ही नया परिसीमन कराने पर विचार कर रही है ताकि 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों में यह कोटा लागू किया जा सके।


    राज्यों और SC/ST सीटों पर असर

    दक्षिण भारतीय राज्यों की यह चिंता थी कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण संसद में उनका प्रतिनिधित्व घट सकता है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर राज्य की सीटों में 50% की वृद्धि होगी, जिससे उनका आनुपातिक प्रतिनिधित्व बरकरार रहेगा।
    उत्तर प्रदेश: सीटें 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी।
    बिहार: सीटें 40 से बढ़कर 60 हो जाएंगी।
    केरल: सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी।

    इसी अनुपात में अनुसूचित जाति (SC) की सीटें 84 से बढ़कर 126 और अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटें 47 से बढ़कर 70 हो जाने का अनुमान है। छोटे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (जहां केवल 1 या 2 सीटें हैं) में हर तीसरे चुनाव में महिलाओं के लिए रोटेशन के आधार पर सीट आरक्षित की जाएगी।


    राजनीतिक सरगर्मी और आगे की राह

    सरकार 4 अप्रैल को समाप्त हो रहे बजट सत्र में ही इन विधेयकों को पारित कराने की इच्छुक है। यदि सहमति बनाने में कुछ और दिन लगते हैं, तो बजट सत्र को बढ़ाया जा सकता है या महिलाओं के कोटे के लिए एक विशेष छोटा सत्र भी बुलाया जा सकता है।


    अमित शाह की बैठकें

    संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो NDA के पास अकेले नहीं है। इसलिए गृह मंत्री अमित शाह समर्थन जुटाने के लिए बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने NDA के सहयोगियों के साथ-साथ सपा, शिवसेना (UBT), बीजेडी और YSR कांग्रेस जैसे विपक्षी और गैर-गठबंधन दलों के साथ भी चर्चा की है।

    कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अमित शाह की बैठक से किनारा कर लिया। वहीं, कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां महिला कोटे के भीतर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से आरक्षण की मांग कर रही हैं।

  • संसद में आज मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने की तैयारी

    संसद में आज मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) में लोकसभा स्पीकर पद (Lok Sabha Speaker’s post) से हटाने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner (CEC) Gyanesh Kumar) के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष (Opposition) गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। नोटिस पर लोकसभा के 120 और राज्यसभा के 60 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। तृणमूल की रणनीति मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को प. बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने की है।


    सीईसी के खिलाफ टीएमसी को मिला कांग्रेस-सपा का साथ

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। योजना दोनों सदनों में नोटिस देने की है। दरअसल, महाभियोग की प्रक्रिया के लिए लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर की जरूरत पड़ती है। सीईसी को हटाने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट के जजों को हटाने की तरह ही प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है।


    जल्दबाजी में क्यों हैं तृणमूल

    दरअसल पार्टी चाहती है कि अप्रैल-मई में बंगाल विधानसभा चुनाव में एसआईआर को बड़ा मुद्दा बनाने के लिए इसी सत्र में महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो। प्रक्रिया शुरू करने और मुख्य रूप से चर्चा के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी है। यदि बृहस्पतिवार को नोटिस दिया गया तो इसी सत्र में प्रस्ताव पर चर्चा हो जाएगी। नोटिस में सीईसी पर सरकार के इशारे पर एसआईआर के बहाने जानबूझकर उचित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का आरोप लगाया गया है।


    क्या है महाभियोग की प्रक्रिया?

    मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही होती है। इसके लिए ‘साबित दुर्व्यवहार’ या ‘अक्षमता’ को आधार बनाना होता है। यह प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है। इसे पास कराने के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और मौजूद व वोट देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।

  • केन्द्र की नई पहल, संसद से लेकर विधानसभाओं में महिलाओं को जल्द 33% आरक्षण देने की तैयारी

    केन्द्र की नई पहल, संसद से लेकर विधानसभाओं में महिलाओं को जल्द 33% आरक्षण देने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण (33 Percent Reservation Women) देने को लेकर केंद्र सरकार (Central Government) नई पहल की तैयारी में है। लंबे समय से चर्चा में रहे महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार अब ऐसा रास्ता तलाश रही है, जिससे इसका लाभ वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ही लागू किया जा सके। इसके लिए कानून में संशोधन किया जा सकता है।

    वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (‘Women’s Empowerment Act’) के तहत महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। लेकिन इस कानून के अनुसार आरक्षण तभी लागू होना था जब अगली जनगणना पूरी हो जाए और उसके बाद नई परिसीमन प्रक्रिया लागू की जाए। चूंकि जनगणना और परिसीमन दोनों प्रक्रियाओं में काफी समय लग सकता है, इसलिए आशंका जताई जा रही थी कि महिलाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिलने में कई वर्ष लग सकते हैं।


    अनौपचारिक बातचीत शुरू

    सूत्रों का कहना है कि इस विषय पर विपक्षी दलों के साथ अनौपचारिक बातचीत भी शुरू कर दी गई है। सरकार का प्रयास है कि संसद में आवश्यक समर्थन जुटाकर महिला आरक्षण को जल्द लागू करने का रास्ता साफ किया जाए। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनती है, तो मौजूदा संसद सत्र में ही संविधान संशोधन विधेयक लाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


    वरिष्ठजनों को रेल किराये में छूट दें, संसद में मांग

    संसदीय समिति ने एक बार फिर वरिष्ठ नागरिकों को रेल किराये में छूट देने की पुरजोर वकालत की है। समिति ने रेलवे के पहले से सभी यात्रियों को छूट देने से होने वाले घाटे के तर्क को दरकिनार करते हुए कहा कि उक्त मद की धनराशि को रेलवे विज्ञापन अथवा अन्य तरीके से पूरा कर सकता है।

    विदित हो कि वरिष्ठ नागरिक सहित अन्य रेल किराये में छूट से रेलवे को सालाना 2,000 करोड़ से अधिक राजस्व का नुकसान होता है। रेलवे संबंधी स्थायी समिति मंगलवार को संसद में पेश अपनी आठवीं रिपोर्ट में भारतीय रेलवे के सामाजिक दायित्व और वित्तीय अनुशासन के बीच तालमेल बिठाने की सलाह दी है। सांसद डा. सीएम रमेश की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायत को फिर से शुरू किया जाता है, तो रेलवे पर सालाना लगभग 2,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।

    समिति ने मंत्रालय को सुझाव दिया है कि इसे केवल स्लीपर और थर्ड एसी (एसी-3) जैसी श्रेणियों तक सीमित रखकर इस बोझ को कम किया जा सकता है, ताकि जरूरतमंद बुजुर्गों को लाभ मिले और रेलवे की आर्थिक स्थिति भी न बिगड़े। वरिष्ठ नागरिक को रियायत देना केवल एक वित्तीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक कर्तव्य है। इसलिए मंत्रालय को मानवीय आधार पर रियायतें बहाल करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

  • संसद में ईरान जंग पर विपक्ष का हंगामा, सरकार बहस के लिए तैयार

    संसद में ईरान जंग पर विपक्ष का हंगामा, सरकार बहस के लिए तैयार


    नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दूसरे फेज के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा में ईरान और अमेरिकी-इजराइल संघर्ष को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। विपक्षी दलों ने पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात और भारत पर असर पर चर्चा की मांग की।

    लोकसभा में स्थिति:
    विपक्ष ने “We want discussion” के नारे लगाए और विदेश नीति पर सवाल उठाए। चेयर के बार-बार निर्देश देने के बावजूद विपक्ष शांत नहीं हुआ। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि विपक्ष प्रस्ताव लाने के नियम का पालन नहीं कर रहा और सदन का समय बेबुनियाद हंगामे में बर्बाद कर रहा है।

    राज्यसभा में हंगामा:
    विदेश मंत्री जयशंकर जब खाड़ी देशों से भारतीयों की वापसी और एनर्जी संकट पर संबोधन दे रहे थे, विपक्ष ने वॉक आउट किया। मंत्री ने बताया कि 67,000 भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर चुके हैं और भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सक्रिय है।

    सरकार का पक्ष:
    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस बहस से भाग रही है और स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर नियमों का पालन किया गया। उन्होंने विपक्ष पर संसद के नियमों और प्रक्रिया का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

    विपक्ष की प्रतिक्रिया:
    कांग्रेस सांसद डॉ. सैयद नसीर हुसैन और केसी वेणुगोपल ने कहा कि वे पश्चिम एशिया संकट, फ्यूल की बढ़ती कीमत और भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा चाहते हैं। उनका आरोप है कि सरकार गंभीर विषयों पर चर्चा से भाग रही है।

    विदेश मंत्री का अपडेट:

    ईरान में स्थिति अस्थिर

    खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय नागरिक

    दो भारतीय नाविकों की मृत्यु, एक अभी लापता

    भारत शांति और बातचीत के पक्ष मेंलोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित। विपक्ष और सरकार के बीच बहस जारी है।