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  • पेपर लीक कानून को मिली मंजूरी, राहुल गांधी के आरोपों और विवादित शब्दों पर लोकसभा में जोरदार हंगामा

    पेपर लीक कानून को मिली मंजूरी, राहुल गांधी के आरोपों और विवादित शब्दों पर लोकसभा में जोरदार हंगामा


    नई दिल्ली । लोकसभा ने बुधवार को सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों पर रोक लगाने से जुड़े पब्लिक एग्जामिनेशन अनुचित साधनों की रोकथाम संशोधन विधेयक 2026 को विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया। हालांकि सदन में सबसे ज्यादा चर्चा बिल से अधिक नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण और उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को लेकर रही। करीब पचास मिनट के भाषण के दौरान कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए जिससे सदन का माहौल बेहद गर्म हो गया।

    राहुल गांधी ने परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र मेहनत के बावजूद परीक्षा प्रक्रिया की खामियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल परीक्षा व्यवस्था की नहीं बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में सरकार असफल रही है और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    भाषण के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिन पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत खड़े हो गए और कहा कि नेता प्रतिपक्ष को संसदीय मर्यादा का पालन करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से अपने शब्द वापस लेने और सदन से माफी मांगने की मांग की। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कई बार हस्तक्षेप करते हुए असंसदीय शब्दों के प्रयोग पर आपत्ति जताई और उन्हें कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए।

    राहुल गांधी ने अपने संबोधन में यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान गृह मंत्री की ओर से पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इस दावे का सरकार ने कड़ा विरोध किया। किरेन रिजिजू ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि गोली चलाने जैसे आदेश किसी मंत्री द्वारा नहीं बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सक्षम अधिकारी देते हैं। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर आरोप बिना किसी प्रमाण के लगाना उचित नहीं है और नेता प्रतिपक्ष को सदन से माफी मांगनी चाहिए।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अध्यक्ष से अनुरोध किया कि विवादित शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए। हंगामे के बीच कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने नारेबाजी की जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई। बाद में कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

    राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि देश का भविष्य सड़कों पर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है और प्रदर्शन कर रहे छात्र किसी राजनीतिक एजेंडे से नहीं बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को केवल औपचारिक कदम बताते हुए कहा कि इससे समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है।

    उधर सरकार ने संशोधन विधेयक को परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता और मजबूत होगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी बल्कि उसे प्रभावी तरीके से लागू करना भी उतना ही जरूरी है।

  • लोकसभा में राहुल गांधी के संबोधन पर हंगामा, किरेन रिजिजू ने असंसदीय भाषा के इस्तेमाल पर जताई कड़ी आपत्ति

    लोकसभा में राहुल गांधी के संबोधन पर हंगामा, किरेन रिजिजू ने असंसदीय भाषा के इस्तेमाल पर जताई कड़ी आपत्ति

    नई दिल्ली । लोकसभा में एंटी पेपर लीक विषय पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संबोधन पर बुधवार को सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। भाषण के दौरान इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों पर सत्तापक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष ने अपने संबोधन में असंसदीय भाषा का प्रयोग किया, जो संसदीय परंपराओं और नियमों के अनुरूप नहीं है।

    राहुल गांधी अपने संबोधन के दौरान एंटी पेपर लीक से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जिन पर सत्तापक्ष के सांसदों ने आपत्ति दर्ज कराई। विरोध बढ़ने के साथ ही सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया और कई सदस्य अपनी सीटों से खड़े होकर विरोध जताने लगे।

    स्थिति को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार किसी भी सदस्य को मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उनका कहना था कि सरकार विपक्ष की बात सुनने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन चर्चा के दौरान असंसदीय शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष से आग्रह किया कि वे अपनी बात पूरी मजबूती से रखें, लेकिन संसदीय परंपराओं का पालन भी करें। उन्होंने कहा कि नियम सरकार ने नहीं बनाए हैं, बल्कि संसद की स्थापित प्रक्रियाओं के तहत सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होते हैं। उनके अनुसार किसी भी सदस्य को ऐसे शब्दों से बचना चाहिए, जिनसे सदन की कार्यवाही प्रभावित हो।

    इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए कथित असंसदीय शब्दों को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाया जाए। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने स्थिति पर संज्ञान लिया और सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। हंगामे के शांत होने के बाद अध्यक्ष ने राहुल गांधी को अपना भाषण आगे जारी रखने का अवसर भी दिया।

    चर्चा के दौरान किरेन रिजिजू ने यह भी कहा कि पहले भी कई अवसरों पर विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों के संबोधन के दौरान व्यवधान उत्पन्न किया गया था। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के समय हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि संसद में स्वस्थ और सार्थक बहस लोकतंत्र की पहचान है, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों को संसदीय मर्यादाओं का सम्मान करना आवश्यक है।

    दूसरी ओर, विपक्ष एंटी पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरता रहा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा युवाओं के हितों से जुड़े सवाल उठाता रहा। इस विषय पर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

    लोकसभा की कार्यवाही के दौरान हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर संसदीय भाषा, सदन की गरिमा और बहस के स्तर को लेकर चर्चा तेज कर दी है। अब आगे की कार्यवाही में अध्यक्ष के निर्णय और संसदीय नियमों के तहत उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा से पहले एनडीए बैठक में शामिल हुए नए सहयोगी सांसद, पीएम मोदी की मौजूदगी में हुई रणनीतिक चर्चा

    एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा से पहले एनडीए बैठक में शामिल हुए नए सहयोगी सांसद, पीएम मोदी की मौजूदगी में हुई रणनीतिक चर्चा

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित की गई। संसद भवन परिसर स्थित लाइब्रेरी भवन में हुई इस बैठक की खास बात यह रही कि पहली बार एनसीपीआई के सांसद भी इसमें शामिल हुए। ये सांसद पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे और बाद में अपनी नई राजनीतिक भूमिका के तहत एनडीए का समर्थन कर चुके हैं।

    बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सहित कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और एनडीए के सांसद मौजूद रहे। संसदीय रणनीति और आगामी विधायी कार्यों को लेकर हुई इस बैठक में गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच समन्वय बढ़ाने और संसद में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।

    बैठक में शामिल होने के बाद एनसीपीआई सांसद सायोनी घोष ने इसे सकारात्मक और ज्ञानवर्धक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुई चर्चा से कई महत्वपूर्ण विषयों को समझने का अवसर मिला। उनके अनुसार बैठक में मुक्त व्यापार समझौतों सहित विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, जिससे सांसदों को व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ।

    सायोनी घोष के साथ एनसीपीआई की अन्य सांसद काकोली घोष और शताब्दी रॉय भी पहली बार एनडीए संसदीय दल की बैठक में शामिल हुईं। तीनों सांसद पहले तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थीं। एनसीपीआई में शामिल होने के बाद उन्होंने एनडीए के प्रति अपना समर्थन दोहराया और गठबंधन की संसदीय गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की शुरुआत की।

    बैठक के दौरान सरकार ने सांसदों से ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ के समर्थन की भी अपील की। यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून के जरिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।

    प्रस्तावित संशोधनों के तहत परीक्षा में अनियमितताओं के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। इसमें दोषी पाए जाने पर लंबी अवधि की सजा, भारी आर्थिक दंड, अवैध गतिविधियों से जुड़ी संपत्ति जब्त करने तथा मामलों के शीघ्र निपटारे की व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन उपायों से संगठित परीक्षा अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

    यह बैठक ऐसे समय आयोजित हुई, जब संसद के भीतर एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा की तैयारी चल रही है और दूसरी ओर विपक्ष जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन तथा प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस बल प्रयोग के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे राजनीतिक माहौल में एनडीए की यह बैठक संसदीय समन्वय और रणनीतिक तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    ‘मंगल मिलन’ बैठक एनडीए संसदीय दल की नियमित रणनीतिक बैठक का नया स्वरूप है। इसका उद्देश्य सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, संसद में विभिन्न विषयों पर प्रभावी चर्चा सुनिश्चित करना और फ्लोर मैनेजमेंट को मजबूत बनाना है। साथ ही यह मंच गठबंधन के सभी घटक दलों को अपनी भूमिका स्पष्ट करने, जिम्मेदारियों का समन्वय करने और संसद के भीतर साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करता है।

  • लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश, जितेंद्र सिंह बोले- तेज जांच और त्वरित सजा होगी

    लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश, जितेंद्र सिंह बोले- तेज जांच और त्वरित सजा होगी

    नई दिल्ली । देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित परीक्षा घोटालों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से सरकार ने लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब पहले से अधिक सख्त और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    उन्होंने बताया कि यह संशोधन वर्ष 2024 में लागू किए गए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में सामने आए परीक्षा घोटालों ने लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित किया है। इसलिए कानून को और मजबूत बनाकर ऐसी घटनाओं पर निर्णायक रोक लगाने की आवश्यकता महसूस की गई।

    विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके बाद संबंधित अदालत को तीन महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाना होगा। इस प्रकार किसी भी मामले में घटना से लेकर न्यायिक निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया अधिकतम पांच महीने में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

    सरकार ने अपील प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाने का प्रस्ताव रखा है। यदि कोई पक्ष अदालत के फैसले से असंतुष्ट होता है तो उसे 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी। साथ ही ऐसे मामलों की सुनवाई को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचने के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया है, जिससे दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

    लोकसभा में चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं किसी एक राज्य या किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं रही हैं। विभिन्न राज्यों में समय-समय पर कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। उनका कहना था कि सरकार ऐसे संगठित अपराधों को समाप्त करने के लिए व्यापक कानूनी ढांचा तैयार कर रही है ताकि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

    उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अतीत में रेलवे भर्ती परीक्षा और चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं सहित कई बड़े पेपर लीक मामलों के बावजूद ठोस कानूनी व्यवस्था विकसित नहीं की गई। उनके अनुसार पहले गठित विभिन्न समितियों ने केंद्रीय परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की सिफारिशें की थीं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का गठन किया और वर्ष 2024 में इस विषय पर व्यापक कानून लागू किया।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों को लगातार लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विशेषज्ञ समूहों और टास्क फोर्स की अधिकांश प्रमुख सिफारिशों को पहले ही लागू किया जा चुका है, जबकि शेष सुझावों पर भी चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से अधिक सुरक्षित बनाना भी है।

    सरकार का मानना है कि यह संशोधन लाखों विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता तथा पारदर्शिता को मजबूत करेगा। चर्चा के दौरान यह भी दोहराया गया कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता या संगठित धोखाधड़ी को अब गंभीर अपराध माना जाएगा और दोषियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रस्तावित संशोधन से छात्रों का भरोसा और मजबूत होगा तथा भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

  • संसद में सरकार का खुलासा, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आय बताने वाले करदाताओं की संख्या 142 से बढ़कर 576 हुई

    संसद में सरकार का खुलासा, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आय बताने वाले करदाताओं की संख्या 142 से बढ़कर 576 हुई

    नई दिल्ली ।देश में 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय घोषित करने वाले आयकरदाताओं की संख्या में पिछले पांच वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि आकलन वर्ष 2025-26 में ऐसे करदाताओं की संख्या बढ़कर 576 हो गई, जबकि आकलन वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा केवल 142 था। इस प्रकार पांच वर्षों में इस श्रेणी के करदाताओं की संख्या में लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश में उच्च आय वर्ग के करदाताओं की बढ़ती संख्या को दर्शाती है।
    लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि विभिन्न आकलन वर्षों के दौरान इस श्रेणी के करदाताओं की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद समग्र रूप से वृद्धि का रुझान स्पष्ट दिखाई देता है। उनके अनुसार आकलन वर्ष 2022-23 में 301 करदाताओं ने 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय घोषित की थी। इसके बाद आकलन वर्ष 2023-24 में यह संख्या घटकर 284 रह गई, लेकिन अगले वर्षों में फिर तेजी से बढ़ोतरी हुई। आकलन वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 415 तक पहुंचा और 2025-26 में बढ़कर 576 हो गया।
    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत ‘अरबपति’ शब्द की कोई कानूनी या वैधानिक परिभाषा निर्धारित नहीं की गई है। इसलिए संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़े केवल उन आयकर रिटर्न पर आधारित हैं, जिनमें संबंधित व्यक्तियों ने अपनी वार्षिक आय 100 करोड़ रुपये से अधिक घोषित की है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंकड़े घोषित आय के आधार पर तैयार किए गए हैं।
    आय असमानता से जुड़े प्रश्न के उत्तर में सरकार ने कहा कि हाल के वर्षों में आय वितरण की स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं। सरकार के अनुसार घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आय असमानता में कमी दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों का जिनी गुणांक 2022-23 के 0.266 से घटकर 2023-24 में 0.237 हो गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 0.314 से घटकर 0.284 पर आ गया। सरकार का मानना है कि यह बदलाव आय वितरण में अपेक्षाकृत संतुलन आने की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।
    सरकार ने रोजगार के मोर्चे पर भी सुधार का दावा किया। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों की बेरोजगारी दर वर्ष 2023-24 में घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई। सरकार का कहना है कि रोजगार सृजन, कौशल विकास और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से श्रम बाजार की स्थिति में सुधार हुआ है।
    सरकार ने संसद में यह भी कहा कि आय असमानता कम करने के लिए प्रगतिशील कर व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही रोजगार सृजन कार्यक्रमों, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि लक्षित कर प्रोत्साहनों और विकास आधारित निवेश के माध्यम से रोजगार के अवसरों का विस्तार करने तथा समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के प्रयास जारी रहें

  • परिसीमन बिल पर बढ़ी सियासी हलचल, मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच निर्णायक टकराव के आसार

    परिसीमन बिल पर बढ़ी सियासी हलचल, मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच निर्णायक टकराव के आसार

    नई दिल्ली ।संसद के मानसून सत्र में अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र संभावित परिसीमन बिल बनता दिखाई दे रहा है। शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रारंभिक बहस के बाद अब लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नए राजनीतिक समीकरण उभरते नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि 27 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाला सत्र इस विषय पर आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    परिसीमन प्रक्रिया का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर संसदीय क्षेत्रों की सीमाओं और लोकसभा सीटों का पुनर्गठन करना है। प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा की कुल सीटों में वृद्धि का रास्ता खुल सकता है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की संवैधानिक प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस विषय पर व्यापक राजनीतिक सहमति अभी तक बनती दिखाई नहीं दे रही है।

    संविधान संशोधन से जुड़े किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। इसी कारण सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित करने की मानी जा रही है। राजनीतिक दलों के बीच लगातार संवाद और समर्थन जुटाने की कोशिशों को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी ओर विपक्ष भी साझा रुख अपनाकर अपनी रणनीति तैयार करने में जुटा हुआ है।

    परिसीमन को लेकर सबसे अधिक चिंता दक्षिण भारत के कई राज्यों ने व्यक्त की है। इन राज्यों का तर्क है कि उन्होंने लंबे समय से जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में प्रभावी प्रयास किए हैं। ऐसे में यदि भविष्य में केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया जाता है तो उनका संसदीय प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम हो सकता है। इसी कारण कई क्षेत्रीय दल इस विषय पर विस्तृत चर्चा और संतुलित व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार विभिन्न दलों से संवाद के जरिए व्यापक समर्थन जुटाने का प्रयास कर सकती है। वहीं कुछ क्षेत्रीय दलों ने संकेत दिए हैं कि यदि सभी राज्यों के हितों को संतुलित करने वाला समाधान सामने आता है तो वे अपने रुख पर विचार कर सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी व्यापक सहमति की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

    संसद के मौजूदा सत्र को लेकर राजनीतिक हलकों में कई संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। पहली संभावना यह मानी जा रही है कि यदि पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित नहीं होता तो सरकार विधेयक को फिलहाल पेश करने से बच सकती है। दूसरी संभावना यह है कि विधेयक सदन में प्रस्तुत हो, लेकिन पर्याप्त बहुमत नहीं मिलने के कारण पारित न हो सके। तीसरी संभावना यह मानी जा रही है कि आवश्यक समर्थन मिलने की स्थिति में विधेयक आगे बढ़े और संवैधानिक प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश करे।

    भारत में लोकसभा सीटों के परिसीमन का इतिहास कई दशकों पुराना है। पिछले लंबे समय से संसदीय सीटों की संख्या स्थिर बनी हुई है, जबकि इस अवधि में देश की जनसंख्या और जनसांख्यिकीय स्वरूप में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में नए परिसीमन की आवश्यकता पर चर्चा लगातार होती रही है। यदि भविष्य में इस दिशा में कोई संवैधानिक निर्णय लिया जाता है तो उसका प्रभाव देश की चुनावी राजनीति, राज्यों के प्रतिनिधित्व और संसदीय व्यवस्था पर व्यापक रूप से दिखाई दे सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें संसद के मानसून सत्र और आगे बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई हैं।

  • पेपर लीक को लेकर सख्त कानून…. 10 साल कैद और 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान, कल संसद में पेश होगा बिल

    पेपर लीक को लेकर सख्त कानून…. 10 साल कैद और 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान, कल संसद में पेश होगा बिल


    नई दिल्ली।
    दो साल पुराने पेपर लीक रोधी कानून (Anti-paper leak law) में संशोधन करने के उद्देश्य से एक विधेयक सोमवार को लोकसभा (Lok Sabha) में पेश किया जायेगा। इस विधेयक में आरोपियों की त्वरित सुनवाई के लिए हर राज्य में त्वरित अदालतें स्थापित करने और सजा को और कड़ा करने का प्रस्ताव किया गया है। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के अनुसार प्रश्नपत्र लीक मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।

    विधेयक को पेश किए जाने से पहले सदस्यों को वितरित की गई इसकी प्रति के अनुसार, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। संगठित अपराधों के लिए विधेयक में कम से कम सात वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।

    मौजूदा कानून में व्यक्तिगत रूप से शामिल लोगों के लिए तीन से पांच साल तक की कैद का प्रावधान है, जबकि संगठित रूप से धोखाधड़ी और प्रश्नपत्र लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए पांच से 10 साल तक की कैद और कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। यह विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश करने, उस पर विचार करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। आमतौर पर किसी विधेयक को एक ही दिन पेश करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जाता है।

    सरकार ने घोषणा की कि वह प्रस्तावित कानून लेकर आ रही है। यह घोषणा ऐसे समय में की गई, जब हाल के दिनों में नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों ने जोर पकड़ लिया था। नीट मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के विरोध के कारण संसद के मानसून सत्र के पहले सप्ताह की कार्यवाही बाधित रही। नये विधेयक पर विपक्ष का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वह आम सहमति के आधार पर कदम उठाएंगे।

    शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Education Minister Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे और सरकार द्वारा अन्य मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद कॉजपा ने शनिवार को 36 दिनों से जारी प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इस विधेयक में 15 अवैध कृत्यों का उल्लेख किया गया है, जिनमें प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ करना, फर्जी वेबसाइट बनाना और फर्जी प्रवेश पत्र जारी करना शामिल हैं।

  • राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक पेपर लीक पर बहस में शामिल नहीं होगा विपक्ष

    राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक पेपर लीक पर बहस में शामिल नहीं होगा विपक्ष

    नई दिल्ली । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष इस मुद्दे पर संसद में होने वाली किसी भी चर्चा में भाग नहीं लेगा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है, जबकि विपक्ष की मांग है कि पहले जिम्मेदारी तय की जाए और उसके बाद ही सदन में बहस आगे बढ़े।

    संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें लोकसभा में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि जब उनका नाम लेकर चर्चा की गई और वे उसका जवाब देने के लिए खड़े हुए, तब उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला। उनके अनुसार संसदीय परंपरा के तहत जिस सदस्य का नाम लिया जाता है, उसे अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया और उन्हें अपनी बात पूरी करने का अवसर नहीं दिया गया।

    इससे पहले लोकसभा की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने राहुल गांधी से भी आग्रह किया था कि वे अपने दल के सांसदों को सदन में बहस में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। हालांकि इसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया और कार्यवाही निर्धारित समय से पहले स्थगित कर दी गई।

    राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। उनके अनुसार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बिना पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार तीन प्रमुख मांगों पर कायम है। इनमें शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करना, छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई शामिल है। उनका कहना है कि केवल चर्चा से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

    पेपर लीक के मुद्दे को लेकर पिछले कुछ समय से संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। विभिन्न विपक्षी दल परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठा रहे हैं, जबकि सरकार परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा जता चुकी है। इसी बीच केंद्र सरकार पेपर लीक से जुड़े कानून को और सख्त बनाने की दिशा में भी कदम उठा रही है, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक और विधायी दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

    संसद में जारी गतिरोध के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और विपक्ष के बीच इस विषय पर सहमति बन पाती है या नहीं। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ता है तो पेपर लीक, परीक्षा सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा संभव हो सकती है। फिलहाल विपक्ष अपने रुख पर कायम है और सरकार सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील कर रही है।

  • 20% से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर अभी निर्णय नहीं, सरकार बोली- वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही बढ़ेगा कदम

    20% से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर अभी निर्णय नहीं, सरकार बोली- वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही बढ़ेगा कदम

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की अटकलों पर विराम लगाते हुए संसद में स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने कहा कि यदि भविष्य में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर विचार किया जाता है तो उससे पहले विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक परामर्श किया जाएगा। सरकार का कहना है कि किसी भी नए निर्णय का आधार केवल वैज्ञानिक प्रमाण और व्यावहारिक अनुभव होंगे।

    लोकसभा में लिखित उत्तर के दौरान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि ई85 ईंधन केवल फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए उपलब्ध कराया गया है। ऐसे वाहन विशेष रूप से इस ईंधन के उपयोग के लिए डिजाइन और प्रमाणित किए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि सामान्य पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक करने का निर्णय लिया जा चुका है।

    सरकार ने बताया कि भारत में एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम को चरणबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया है। इस प्रक्रिया में नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, ऑटोमोबाइल कंपनियों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों सहित विभिन्न संस्थानों की भागीदारी रही है। व्यापक परीक्षणों और फील्ड वैलिडेशन के बाद ही ई20 ईंधन को लागू किया गया।

    सरकार के अनुसार उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययन और वास्तविक उपयोग के अनुभव बताते हैं कि निर्धारित मानकों के अनुरूप इस्तेमाल किए जाने पर ई20 पेट्रोल सुरक्षित और तकनीकी रूप से उपयुक्त ईंधन है। सरकार ने कहा कि यह निष्कर्ष केवल प्रयोगशाला परीक्षणों पर आधारित नहीं है, बल्कि देशभर में इसके व्यावहारिक उपयोग से प्राप्त अनुभवों से भी इसकी पुष्टि हुई है।

    संसद को दी गई जानकारी के अनुसार देश में ई15 से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग साढ़े तीन वर्षों से और ई19-ई20 ईंधन का उपयोग ढाई वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा है। इस अवधि में करोड़ों दोपहिया वाहन और लाखों पेट्रोल कारें इस ईंधन पर संचालित हुई हैं, लेकिन एथेनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या असामान्य तकनीकी समस्या का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया है। वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड में भी ई20 के कारण अतिरिक्त घिसावट या इंजन की आयु कम होने के प्रमाण नहीं मिले हैं।

    सरकार ने यह भी बताया कि प्रमुख वाहन निर्माताओं के सर्विस डेटा में ई20 उपयोग करने वाले वाहनों में इंजन डैमेज या असामान्य खराबी की दर सामान्य ईंधन वाले वाहनों की तुलना में अधिक नहीं पाई गई। साथ ही कंपनियां ऐसे वाहनों पर सामान्य वारंटी भी जारी रख रही हैं। विभिन्न अनुसंधान संस्थानों द्वारा किए गए परीक्षणों में भी ई20 ईंधन को तकनीकी रूप से अनुकूल पाया गया है।

    माइलेज को लेकर सरकार ने कहा कि ईंधन दक्षता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें वाहन की स्थिति, ड्राइविंग शैली और सड़क की परिस्थितियां शामिल हैं। कुछ पुराने ई10 आधारित वाहनों में माइलेज में सीमित कमी संभव है, लेकिन ई20 ईंधन बेहतर ऑक्टेन रेटिंग, साफ दहन, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता और कम कार्बन उत्सर्जन जैसे लाभ भी प्रदान करता है। सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम से विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत, कच्चे तेल के आयात में कमी, कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट और किसानों की आय बढ़ाने में भी सकारात्मक योगदान मिला है।

  • पेपर लीक पर न हो राजनीति, संसद में चर्चा करने के लिए सरकार तैयार: भाजपा

    पेपर लीक पर न हो राजनीति, संसद में चर्चा करने के लिए सरकार तैयार: भाजपा


    नई दिल्ली।
    पेपर लीक के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह विषय देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माध्यम बनाने के बजाय संसद में गंभीरता से चर्चा का विषय बनाया जाना चाहिए। पार्टी ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और चाहती है कि सदन में इसकी हर बारीकी पर विचार हो, ताकि छात्रों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो।

    भाजपा मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। पार्टी के अनुसार, देश के बच्चे ही भारत का भविष्य हैं और उनकी मेहनत तथा सपनों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी कारण सरकार इस विषय पर गंभीर है और हर पहलू पर चर्चा के लिए तैयार है।

    उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने अपने आरोपों में केवल कुछ राज्यों का जिक्र क्यों किया, जबकि कांग्रेस और इंडी गठबंधन शासित राज्यों में भी कई बार पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि छात्रों के हित की बात की जा रही है, तो फिर सभी राज्यों की घटनाओं पर समान रूप से चर्चा क्यों नहीं हो रही है।

    नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का रवैया चयनात्मक है और उनका उद्देश्य छात्रों को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेना है। पार्टी ने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर चिंतित है, तो उसे सभी राज्यों में हुई घटनाओं पर समान दृष्टि रखनी चाहिए।

    भाजपा ने उदाहरण देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में सर्विस सेलेक्शन बोर्ड की परीक्षा का पेपर लीक हुआ, जहां कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार है। हिमाचल प्रदेश में स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला सामने आया, जहां कांग्रेस की सरकार है। झारखंड में झारखंड एकेडमिक काउंसिल की हिंदी और विज्ञान परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जहां कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार है।

    इसी तरह तेलंगाना में इंटरमीडिएट भाषा परीक्षा तथा एसएससी भाषा परीक्षा में पेपर लीक के मामले सामने आए। भाजपा ने कहा कि वहां कांग्रेस की सरकार है, जिसे सीपीआई का समर्थन प्राप्त है। तमिलनाडु में बी.एड. पाठ्यक्रम की परीक्षा का पेपर लीक हुआ। पश्चिम बंगाल में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया, जहां तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी। पंजाब में पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड की ग्रुप-डी भर्ती परीक्षा में भी पेपर लीक की घटना हुई, जबकि केरल में लोक सेवा आयोग (पीएससी) की 26 परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लगे। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक में, जहां कांग्रेस की सरकार है, वहां भी परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला सामने आया।

    नड्डा ने कहा कि ये केवल कुछ उदाहरण हैं और देश के विभिन्न राज्यों में ऐसी घटनाओं की सूची काफी लंबी है। इसलिए किसी एक सरकार या एक राजनीतिक दल को निशाना बनाने के बजाय पूरे देश में परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने पर चर्चा होनी चाहिए।

    भाजपा ने कहा कि छात्रों की मांगों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। यह एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या है, जिस पर संसद में गहन और सार्थक चर्चा की आवश्यकता है। पार्टी ने कहा कि वह इस विषय पर सभी तथ्यों के साथ चर्चा करने और समाधान निकालने के लिए तैयार है।

    उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने शाम चार बजे अपने प्रस्तुतीकरण में लगभग 150 पेपर लीक मामलों का उल्लेख किया। पार्टी के अनुसार, इन सभी दावों की जांच की जाएगी और सरकार हर तथ्य तथा हर सवाल का जवाब जनता के सामने रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा ने दोहराया कि इस विषय पर राजनीति के बजाय तथ्यों और समाधान पर आधारित चर्चा होनी चाहिए, ताकि देश के छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।