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  • PM मोदी ने मालदा रैली में की TMC सांसद के पिता की तारीफ, भाषण के दौरान दी श्रद्धांजलि

    PM मोदी ने मालदा रैली में की TMC सांसद के पिता की तारीफ, भाषण के दौरान दी श्रद्धांजलि


    कोलकाता।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने विभाजन के दौरान मालदा (Malda) को भारत (India) में शामिल कराने में भूमिका निभाने को लेकर अनुभवी वकील और हिंदू महासभा के नेता शिवेंदु शेखर राय (Shivendu Shekhar Rai) को अपने भाषण के दौरान श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राय को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई। शिवेंदु के बेटे एवं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के राज्यसभा सदस्य सुखेन्दु शेखर राय (Sukhendu Shekhar Roy) ने संयमित प्रतिक्रिया व्यक्त की है।


    शिवेंदु शेखऱ के प्रयास से बचा मालदा

    मोदी ने शनिवार को मालदा में एक जनसभा में अपने भाषण की शुरुआत शिवेंदु शेखर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने 1947 में शिवेंदु शेखर के योगदान को याद किया जब मुस्लिम लीग द्वारा जिले को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में शामिल करने की मांगों के बीच मालदा का भविष्य अनिश्चित बना हुआ था। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैं सर्वप्रथम मालदा के महान सपूत शिवेंदु शेखर राय को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं, जिनके प्रयासों से मालदा की पहचान बची रही।’’ उनके इस बयान से श्रोताओं में मौजूद कई लोग चकित हो गये।

    इससे पूर्व दिन में, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने कार्यक्रम में पहले स्मृति चिन्ह के रूप में मोदी को शिवेंदु शेखर राय की एक फ्रेम की हुई तस्वीर भेंट की। यह तस्वीर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने प्रधानमंत्री को दी, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया क्योंकि शिवेंदु शेखर राय के पुत्र तृणमूल सांसद हैं।


    श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सहयोगी थे शिवेंदु शेखर

    स्वतंत्रता-पूर्व मालदा के एक प्रख्यात दीवानी वकील और हिंदू महासभा के नेता शिवेंदु शेखर राय, राजनीतिक विचारधाराओं से परे अपनी व्यापक लोकप्रियता के लिए जाने जाते थे। वह विश्वविद्यालय के दिनों से ही शिक्षाविद और महासभा नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के घनिष्ठ सहयोगी थे और विभाजन वार्ता के दौरान उन्होंने पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    उनके बेटे सुखेन्दु शेखर राय का कहना है कि जब मालदा को पूर्वी पाकिस्तान में शामिल किए जाने की संभावना आसन्न प्रतीत हुई, तो उनके पिता ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के पिता, प्रख्यात बैरिस्टर एन सी चटर्जी से संपर्क करके इस कदम को चुनौती देने के प्रयास शुरू किए।

    सुखेन्दु शेखर राय के अनुसार चूंकि एन सी चटर्जी दक्षिण बंगाल और कोलकाता को सुरक्षित रखने में व्यस्त थे, इसलिए शिवेंदु शेखर राय ने फिर श्यामा प्रसाद मुखर्जी से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें आगे की कार्रवाई के बारे में सलाह दी और उन्हें बंगाल सीमा आयोग के समक्ष मालदा का ऐतिहासिक, जनसांख्यिकीय और प्रशासनिक मामला व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत करने में सहयोग किया।

    राज्यसभा सदस्य ने बताया कि बिधु शेखर शास्त्री और इतिहासकार सर जदुनाथ सरकार जैसे विद्वानों ने भी आयोग के सामने प्रस्तुत किये गये ज्ञापन तैयार करने में सहायता की।लप्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सुखेन्दु शेखर राय ने संयमित लेकिन भावुक स्वर में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘‘यह इतिहास है और इसे नकारने की कोई गुंजाइश नहीं है।’’

    उन्होंने कहा कि मालदा भारत में इसलिए बना हुआ है क्योंकि उनके पिता ने इसे भारत में बनाए रखने के आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा, ‘‘कोई राजनीतिक दल इतिहास को अपने हिसाब से ढालने या अस्वीकार करने की कोशिश कर सकता है, इससे मुझे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन एक ऐसे व्यक्ति के पुत्र के रूप में, जिन्होंने मालदा को भारत में बनाए रखने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, अगर प्रधानमंत्री उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, तो क्या मुझे दुखी होना चाहिए? बिल्कुल नहीं।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि मेरे भाई-बहन, रिश्तेदार और परिवार के सभी सदस्य गर्व महसूस करते हैं। सिर्फ इसलिए कि मैं तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हूं, क्या मुझे दुखी होना चाहिए? यह तो सरासर बेतुका होगा।’’ मोदी द्वारा भाजपा के मंच से तृणमूल सांसद के पिता का जिक्र करना राजनीतिक रूप से भले ही महत्वपूर्ण हो, लेकिन सुखेन्दु शेखर राय ने इसे समकालीन राजनीतिक संदेश के बजाय लंबे समय से प्रतीक्षित ऐतिहासिक मान्यता के रूप में प्रस्तुत करना बेहतर समझा। उन्होंने कहा, ‘‘यह मालदा के विभाजन काल के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जिसे आज के राजनीतिक मतभेदों से परे याद रखा जाना चाहिए।’’

  • देश की जेन-जी को भाजपा के विकास मॉडल पर सबसे ज्यादा भरोसा: पीएम मोदी

    देश की जेन-जी को भाजपा के विकास मॉडल पर सबसे ज्यादा भरोसा: पीएम मोदी


    नई दिल्ली। मालदा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मालदा में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस सपने को साकार करने में पूर्वी भारत की भूमिका सबसे अहम है और अब यह क्षेत्र तेजी से विकास की राजनीति को अपना रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों तक पूर्वी भारत को नफरत भ्रम और तुष्टिकरण की राजनीति में उलझाकर रखा गया जिससे यहां विकास की रफ्तार धीमी रही। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और जनता विकास सुशासन और पारदर्शिता को प्राथमिकता दे रही है। पीएम मोदी ने दावा किया कि देश की जेन-जी भाजपा के विकास मॉडल पर सबसे ज्यादा भरोसा कर रही है क्योंकि युवा वर्ग को अवसर रोजगार और स्थायी भविष्य चाहिए।पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के राजनीतिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा में पहली बार भाजपा सरकार बनी है त्रिपुरा कई वर्षों से भाजपा पर भरोसा जता रहा है और असम में लगातार पार्टी को मजबूत जनसमर्थन मिल रहा है। हाल ही में बिहार में भी भाजपा-एनडीए की सरकार बनी है। उन्होंने कहा कि अब पश्चिम बंगाल में भी सुशासन की बारी है।

    पीएम मोदी ने दावा किया कि जहां-जहां वर्षों तक भाजपा को लेकर गलत जानकारी फैलाई गई वहां भी अब लोग सच्चाई समझ रहे हैं और पार्टी को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार बंगाल की जनता भी भाजपा को विजयी बनाएगी।प्रधानमंत्री ने हालिया शहरी निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली है। खासतौर पर मुंबई की बृहन्मुंबई नगर निगमबीएमसी में पहली बार भाजपा को रिकॉर्ड सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि जिन जगहों पर कभी भाजपा की जीत को असंभव माना जाता था वहां भी अब अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में भाजपा का मेयर बनना देश की बदलती राजनीतिक सोच का संकेत है।

    विपक्ष पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल के हर गरीब परिवार को पक्का घर मिले और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार केंद्र से भेजे गए गरीबों के पैसे का सही इस्तेमाल नहीं होने दे रही है।आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल देश का एकमात्र राज्य है जहां यह योजना लागू नहीं की गई है। इससे गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा है और इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है।

    प्रधानमंत्री ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना पर भी बात की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत देशभर में लाखों परिवारों ने अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बिल शून्य किया है और इसके लिए केंद्र सरकार ने हजारों करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल के लाखों परिवार भी इसका लाभ उठाएं लेकिन राज्य सरकार इस दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है।मालदा और पश्चिम बंगाल के विकास को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए जाएंगे। उन्होंने मालदा की ‘मैंगो इकोनॉमी’ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का वादा किया।

    जूट किसानों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले जूट का समर्थन मूल्य करीब 2400 रुपये था जो अब बढ़कर साढ़े 5500 रुपये से अधिक हो गया है। पहले दस वर्षों में जूट किसानों को केवल 400 करोड़ रुपये मिले थे जबकि पिछले 11 वर्षों में यह राशि बढ़कर 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है। पीएम मोदी ने कहा कि यह बदलाव भाजपा की किसान-हितैषी नीतियों का प्रमाण है।

  • प. बंगाल में चुनावी हलचल… जहां ममता बनर्जी का सियासी उदय हुआ… वहां अब PM मोदी की रैली

    प. बंगाल में चुनावी हलचल… जहां ममता बनर्जी का सियासी उदय हुआ… वहां अब PM मोदी की रैली


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में इस साल विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) है. चुनाव को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है. बंगाल की सियासत एक बार फिर उसी जगह पर आ गई है, जहां से कभी ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का सियासी उदय हुआ था. जी हां, सिंगूर (Singur) में पीएम मोदी (PM Modi) की रैली होने वाली है. यहीं से भाजपा को उम्मीद की किरण दिख रही है. सिंगूर वही जगह है, जहां कभी टाटा नैनो की फैक्ट्री हुआ करती थी. अब भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 18 जनवरी को होने वाली रैली के लिए इसी जगह को चुना है. पीएम मोदी की रैली से यहां के लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं।

    बात अक्टूबर 2008 की है. पश्चिम बंगाल के सिंगूर में करीब 1000 एकड़ उपजाऊ जमीन पर एक अजीब सी खामोशी छा गई. यह खामोशी टाटा ग्रुप के तत्कालीन चेयरमैन रतन टाटा की एक नाटकीय घोषणा के बाद आई थी. वह घोषणा थी टाटा के नैनो कार प्रोजेक्ट से जुड़ी. जी हां, खराब कारोबारी माहौल का हवाला देते हुए टाटा ने नैनो कार प्रोजेक्ट को सिंगूर से गुजरात के सानंद में शिफ्ट करने की घोषणा की. तब टाटा ने एक अच्छा एम (गुड एम) और एक बुरा एम (बैड एम) का जिक्र किया था. टाटा की नजर में शायद इसका अर्थ था बुरा एम मतलब ममता बनर्जी और अच्छा एम मतलब गुजरात के तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी. उन्होंने कहा था कि उनके सिर पर बंदूक तान दी गई थी और ट्रिगर दबा दिया गया था.

    अठारह साल बाद भी सिंगूर की वह जमीन ज्यादातर बंजर पड़ी है. खेती वापस शुरू नहीं हुई है. और सिंगूर एक प्रतीक बना हुआ है- खोए हुए मौके, राजनीतिक टकराव और अधूरे वादों का. दरअसल, सिंगूर विवाद के दौरान रतन टाटा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण पश्चिम बंगाल से टाटा मोटर्स का नैनो प्लांट हटाने का फैसला किया था. यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण और ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए किसान आंदोलन से जुड़ा था. इसी के बाद टाटा समूह को प्लांट गुजरात ले जाना पड़ा.


    सिंगूर के किसानों का दुख

    आज इस जमीन के ज़्यादातर हिस्से पर खेती के कोई निशान नहीं दिखते। जिन्होंने अपनी मर्जी से और बिना मर्ज़ी के ज़मीन दी थी, जिनकी जिंदगी सिंगूर आंदोलन से बदल गई थी. सिंगूर के रहने वाले कौशिक बाग अब 60 के दशक में हैं. उन्होंने बताया कि वह अपनी मर्ज़ी से जमीन देने वाले किसान थे. उन्होंने टाटा फैक्ट्री के लिए सरकार को छह बीघा जमीन दी थी. उन्होंने उस समय तीन महीने की ट्रेनिंग भी ली थी, इस उम्मीद में कि उन्हें रोजगार मिलेगा. लेकिन कुछ नहीं हुआ.


    जमीन मिली मगर अब खेती लायक नहीं

    हालांकि जमीन आखिरकार वापस मिल गई. कौशिक कहते हैं कि अब वह खेती के लायक नहीं रही. 18 साल की रुकावट के बाद अब उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से बदलाव आ सकता है. हालांकि, कौशिक बाग अकेले नहीं हैं. श्यामापदो दास कहते हैं कि वह बिना मर्जी के जमीन देने वाले किसान थे, जिन्होंने तीन बीघा जमीन दी थी. उन्होंने आंदोलन के दौरान मीटिंग और रैलियों में हिस्सा लिया था, यह मानते हुए कि जमीन वापस मिल जाएगी और खेती फिर से शुरू हो जाएगी.


    सिंगूर की बंजर जमीन

    श्यामापदो दास आज कहते हैं कि खेतों में जंगली जानवर घूमते हैं और खेती असंभव है. पीछे मुड़कर देखें तो श्यामापदो का मानना​है कि सिंगूर एक राजनीतिक अखाड़ा बन गया था और आखिरकार किसानों के साथ धोखा हुआ. वहीं, स्वपन मित्रा कहते हैं कि उस समय उनके परिवार ने राजनीतिक आश्वासनों पर भरोसा किया था. स्वपन मित्रा के पिता ने एक बीघा जमीन दी थी.


    पीएम मोदी आने वाले हैं सिंगूर

    बहरहाल, इस इलाके को अब भी उम्मीद है, वह भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से. इस इलाके को आज भी स्थानीय लोग ‘टाटा की जमीन’ कहते हैं. आज उम्मीद एक अलग रूप में वापस आई है. कारण कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिंगूर आने वाले हैं. कई निवासियों के लिए, इस दौरे से पुनरुद्धार, पहचान और एक संभावित नई शुरुआत की उम्मीदें जुड़ी हैं।


    क्या है सिंगूर विवाद?

    कोलकाता से करीब 40 किलोमीटर दूर सिंगूर में नैनो परियोजना के लिए सरकार ने कुल 997.11 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था. मगर तृणमूल कांग्रेस और किसानों के संगठन कृषि जमीं जिबिका रक्षा कमेटी (केजेजेआरसी) का कहना था कि इसमें से 400 एकड़ जमीन किसानों से उनकी मर्जी के खिलाफ ली गई है, लिहाजा यह जमीन उन्हें लौटा दी जानी चाहिए. तब तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी इस मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गई थीं. इस दौरान हिंसा भी हुई थी. प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित रूप से संयंत्र के कर्मचारियों को डराए-धमकाए जाने की वजह से टाटा मोटर्स ने संयंत्र में कामकाज बंद कर दिया. बाद में टाटा ने नैनो प्रोजेक्ट को गुजरात शिफ्ट कर दिया. तब ममता बनर्जी विपक्ष में थीं।

  • राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस की बधाई. बोले– देश के युवा अब जॉब सीकर नहीं. जॉब क्रिएटर बन रहे

    राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस की बधाई. बोले– देश के युवा अब जॉब सीकर नहीं. जॉब क्रिएटर बन रहे


    भोपाल । राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश और देश के युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए स्टार्टअप संस्कृति की सराहना की है। उन्होंने कहा कि आज का युवा आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत कर रहा है और रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने वाला बनकर सफलता के नए अध्याय लिख रहा है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2016 में आज ही के दिन राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में ‘स्टार्टअप इंडिया’ की शुरुआत की थी।
    यह पहल देश में नवाचार. उद्यमिता और निवेश आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर साबित हुई है। सीएम ने लिखा कि राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। हमारे देश के युवा नौकरी मांगने वाले नहीं. बल्कि नौकरी देने वाले बनकर सफलता के नित नए अध्याय लिख रहे हैं। स्टार्टअप के लिए समर्पित सभी युवाओं के लिए मेरी मंगलकामनाएं हैं।सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया अभियान ने युवाओं की सोच को बदला है। आज युवा अपने विचारों और नवाचार के दम पर न केवल स्वयं आगे बढ़ रहे हैं. बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने की दिशा में मजबूत कदम है।

    उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस की शुरुआत देश में स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने और इसे महानगरों से निकालकर दूरदराज और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। इसका मुख्य लक्ष्य युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित करना. नए रोजगार के अवसर पैदा करना और भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। स्टार्टअप दिवस के माध्यम से सरकार नवाचार आधारित सोच. तकनीकी विकास और निवेश को प्रोत्साहित करती है।स्टार्टअप इंडिया के तहत अब तक हजारों स्टार्टअप्स को मान्यता मिल चुकी है. जिससे लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। शिक्षा. स्वास्थ्य. कृषि. आईटी. फिनटेक और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में भारतीय स्टार्टअप्स ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश सरकार स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राज्य में स्टार्टअप नीति. इनक्यूबेशन सेंटर और फंडिंग सपोर्ट के जरिए युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में प्रदेश के युवा नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएंगे।कुल मिलाकर. राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं. बल्कि यह युवाओं की सोच. आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का प्रतीक है. जिसमें देश का युवा भविष्य की अर्थव्यवस्था को आकार दे रहा है।

  • 77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोप के दो शीर्ष पदाधिकारी होंगे चीफ गेस्ट… PM मोदी के निमंत्रण पर आ रहे भारत

    77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोप के दो शीर्ष पदाधिकारी होंगे चीफ गेस्ट… PM मोदी के निमंत्रण पर आ रहे भारत


    नई दिल्ली।
    देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह (77th Republic Day celebrations) में इस बार यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा (European Council President Antonio Luis Santos da Costa) और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (European Commission President Ursula von der Leyen) मुख्य अतिथि होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के निमंत्रण पर ये शीर्ष पदाधिकारी 25 से 27 जनवरी 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की कि यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी तक 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के राजकीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरे के दौरान, ये नेता 27 जनवरी को 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे, जहाँ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा की जाएगी।


    भारत और EU के बीच आर्थिक संबंध होंगे मजबूत

    उम्मीद है कि FTA भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच आर्थिक संबंधों को मज़बूत करेगा, जिसमें व्यापार, निवेश और बाज़ार पहुँच जैसे क्षेत्र शामिल होंगे, और अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को कुछ राहत मिलेगी। इस समझौते के लिए पिछले कई महीनों से गहन बातचीत चल रही है और बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों ने व्यापार से जुड़े अधिकांश जटिल मुद्दों को सुलझा लिया है।


    प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता का कार्यक्रम

    इन दोनों शीर्ष अधिकारियों का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता का कार्यक्रम है। इसके अतिरिक्त, शिखर सम्मेलन के इतर एक ‘भारत-यूरोपीय संघ बिजनेस फोरम’ के आयोजन की भी संभावना है। वर्ष 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे भारत और यूरोपीय संघ के बीच फरवरी 2025 में यूरोपीय संघ के आयुक्तों की ऐतिहासिक भारत यात्रा के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में काफी विस्तार हुआ है। गणतंत्र दिवस समारोह में इनकी भागीदारी से दोनों पक्षों के बीच सहयोग और आपसी हितों के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को और मजबूती मिलेगी।


    द्विपक्षीय संबंध कई क्षेत्रों में फैले हैं

    मंत्रालय ने कहा है कि पिछले साल फरवरी में EU कॉलेज ऑफ़ कमिश्नर्स की भारत की ऐतिहासिक यात्रा के बाद, द्विपक्षीय संबंध कई क्षेत्रों में फैले हैं। EU अभी भारत का सामान के लिए सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 136 अरब डॉलर से ज़्यादा हो गया है। 27 देशों के राजनीतिक और आर्थिक समूह के साथ FTA भारत का 19वां व्यापार समझौता होगा और इसकी व्यापार रणनीति में एक मुख्य स्तंभ होगा।

  • तमिल संस्कृति भारत की साझा विरासत पोंगल समारोह में बोले पीएम मोदी- भरी रहे थाली और जेब सुरक्षित रहे धरती

    तमिल संस्कृति भारत की साझा विरासत पोंगल समारोह में बोले पीएम मोदी- भरी रहे थाली और जेब सुरक्षित रहे धरती


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पोंगल के पावन अवसर पर तमिल संस्कृति और परंपराओं के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित भव्य पोंगल समारोह में शामिल होकर प्रधानमंत्री ने न केवल इस उत्सव की खुशियों को साझा किया बल्कि इसे भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखने का एक नया मंत्र भी दिया।

    ग्लोबल फेस्टिवल बना पोंगल: पीएम मोदी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पोंगल केवल एक क्षेत्रीय पर्व नहीं बल्कि एक ग्लोबल फेस्टिवल बन चुका है। उन्होंने कहा दुनिया भर में फैला तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग इसे बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। मैं भी उन प्रेम करने वालों में से एक हूँ और इस विशेष पर्व को आप सभी के साथ मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने तमिल संस्कृति को दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक बताते हुए इसे सदियों को जोड़ने वाली कड़ी करार दिया।

    अन्नदाता के प्रति आभार और प्रकृति का संतुलन प्रधानमंत्री ने पोंगल के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस त्योहार में हमारे अन्नदाता की कड़ी मेहनत छिपी है। यह सूर्य देव और धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। पीएम मोदी ने कहा हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हमारी थाली भी भरी रहे हमारी जेब भी भरी रहे और हमारी धरती भी सुरक्षित रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगली पीढ़ी के लिए मिट्टी की सेहत बनाए रखना और जल संरक्षण करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।तमिल विरासत से प्रधानमंत्री का गहरा जुड़ाव अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने पिछले एक साल में तमिल संस्कृति से जुड़े अपने सुखद अनुभवों को साझा किया। उन्होंने गंगई कोंडा चोलपुरम मंदिर में प्रार्थना वाराणसी के ‘काशी तमिल संगमम’ की जीवंत ऊर्जा और रामेश्वरम में पंबन ब्रिज के उद्घाटन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये अनुभव तमिल विरासत की समृद्धि और महानता का साक्षात् प्रमाण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत है जो एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को और अधिक सशक्त बनाती है।

    एक भारत-श्रेष्ठ भारत का संदेश प्रधानमंत्री ने कहा कि पोंगल जैसे पर्व हमें सिखाते हैं कि प्रकृति के प्रति आभार केवल शब्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने संसाधनों के समझदारीपूर्ण उपयोग का आह्वान करते हुए कहा कि जब हम प्रकृति की देखभाल करेंगे तभी हमारा भविष्य सुरक्षित होगा। केंद्रीय मंत्री के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक तमिल वेशभूषा संगीत और पकवानों ने मिनी तमिलनाडु का दृश्य उत्पन्न कर दिया जहाँ प्रधानमंत्री ने सभी को पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

  • साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी

    साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी


    नई दिल्ली। जेएनयू के साबरमती हॉस्टल के बाहर कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की। यह घटना 5 जनवरी 2020 की हिंसक रात की छठी बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई।

    जेएनयू प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन माना। सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 30-35 छात्र इस नारेबाजी में शामिल थे, जिसमें प्रमुख नाम आदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आजमी, मेहबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान और शुभम शामिल हैं।

    प्रशासन ने दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज थाने को शिकायत पत्र भेजकर FIR दर्ज करने और मामले की गहन जांच की मांग की। पत्र में उल्लेख है कि सुरक्षा अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद थे और नारे जानबूझकर और दोहराए गए, जो सामान्य अभिव्यक्ति नहीं बल्कि सुनियोजित कदाचार दिखाते हैं।

    छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा कि यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि 5 जनवरी की हिंसक रात और ABVP के कथित हमले को याद करने के लिए एक सभा थी। उन्होंने हिंसा और भड़काऊ विचारधारा की निंदा की और कहा कि नारों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    वहीं, ABVP ने कड़ा विरोध जताया। दिल्ली के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि नारे लगाने वाले छात्रों की मानसिकता हिंदुओं और हिंदू धर्म के खिलाफ है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने बताया कि अब तक कोई औपचारिक शिकायत प्रशासन की ओर से प्राप्त नहीं हुई है।

    जेएनयू प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन और हेट स्पीच के बीच अंतर बहुत बारीक होता है। विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत इस तरह की नारेबाजी पूरी तरह से प्रतिबंधित है, क्योंकि यह शैक्षणिक माहौल और परिसर की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। प्रशासन ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे परिसर में शांति बनाए रखें और विवादास्पद गतिविधियों से दूर रहें, ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
  • PM मोदी आज लखनऊ में करेंगे राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण… म्यूजियम का उद्घाटन भी होगा

    PM मोदी आज लखनऊ में करेंगे राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण… म्यूजियम का उद्घाटन भी होगा

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ (Lucknow) में बसंतकुंज योजना (Basant Kunj Scheme) में बने राष्ट्र प्रेरणा स्थल (National Inspiration Site) का लोकार्पण आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) करेंगे। कार्यक्रम की तैयारियां पूरी हो गई हैं। पीएम यहां पर लगी तीन विभूतियों अटल बिहारी वापजेयी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं. दीन दयाल उपाध्याय की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण भी करेंगे। इन विभूतियों के संस्मरणों को संजोने के लिए बने म्यूजियम का लोकार्पण भी होगा।

    इस आयोजन में डेढ़ लाख से अधिक लोगों के शामिल होने का अनुमान है। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे। प्रधानमंत्री करीब दो बजे आयोजन स्थल पर हेलीकाॅप्टर से पहुंचेंगे। लोकार्पण के लिए आयोजन स्थल के साथ पूरे शहर को सजाया व संवारा गया है। आयोजन स्थल को भव्य बनाने के लिए कई प्रदेशों से बेहतरीन फूल वाले पौधे मंगाए गए हैं।

    पूरे शहर में डिवाइडरों को साफ कर रंगा गया है। प्रमुख चौराहों और मार्गों पर स्ट्रीट लाइट के पोल पर रंगीन लाइट वाली झालरें लगाई गई हैं। दीवारों पर आकर्षक चित्रकारी कराई गई है। सुरक्षा को लेकर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आयोजन में आसपास के कई जिलों से करीब 2000 बसें आ रही हैं। इनकी पार्किंग के खास इंतजाम किए गए हैं। कुल 13 पार्किंग बनाई गई हैं। इनमें 2600 बसें और 2000 कारें खड़ी हो सकेंगी। व्यवस्था बनी रहे इसके लिए अफसरों और कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है।


    आकर्षित करती हैं भव्य प्रतिमाएं

    – प्रेरणा स्थल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की 65 फीट ऊंची भव्य कांस्य प्रतिमाएं लगी हैं।
    – राष्ट्र प्रेरणा स्थल 65 एकड़ में फैला है और इसके निर्माण पर 232 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसका निर्माण दिसंबर 2022 में शुरू हुआ था।
    – पंडित दीन दयाल उपाध्याय की प्रतिमा का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार राम सुतार ने किया है जिन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया था।
    – डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का निर्माण मूर्तिकार माटू राम ने पूरा किया है।
    – तीनों विभूतियों की प्रतिमाओं के निर्माण पर 21 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।


    पहले प्रतिमाओं को होगा अनावरण

    बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री सबसे पहले राष्ट्र नायकों की प्रतिमाओं का अनावरण कर श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीयता की भावना के संचार के लिए तिरंगा गुब्बारे छोड़े जाएंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्र नायकों को समर्पित म्यूजियम को लोकार्पण करेंगे। वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित गैलरियों को देखेंगे। पहली गैलरी में डिजिटल सिस्टम के जरिये राष्ट्र नायकों का संक्षिप्त जीवन परिचय दिखाया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री म्यूजियम परिसर में ही बनाए गए भारत माता, जनसंघ के प्रतीक चिह्न दीपक और सुदर्शन चक्र गैलरी में जाएंगे। राष्ट्र नायकों जुड़ी हुई वस्तुओं को देखने के लिए प्रथम तल पर बनी गैलरी में भी जाएंगे। म्यूजियम से बाहर निकल कर प्रधानमंत्री प्रेरणा स्थल पर बने मंच से कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित करेंगे।


    बदला रहेगा शहर का यातायात

    25 दिसंबर को प्रधानमंत्री राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण करने राजधानी आ रहे हैं। कार्यक्रम के मद्देनजर ट्रैफिक पुलिस ने डायवर्जन जारी किया है। 24 दिसंबर की रात 12 बजे से बृहस्पतिवार को कार्यक्रम की समाप्ति तक यातायात बदला रहेगा। इमरजेंसी की स्थिति में प्रतिबंधित मार्ग पर एंबुलेंस, फायर सर्विस, स्कूली वाहन, शव वाहन को रास्ता दिया जाएगा। इसके लिए ट्रैफिक कंट्रोल नंबर 9454405155 पर संपर्क किया जा सकता है।


    आंतरिक डायवर्जन

    – मलीहाबाद चौराहे से बाजनगर किसान पथ, छंदोईया की ओर भारी या अन्य वाहन नहीं जा सकेंगे। इन्हें जीरो पॉइंट मोहान रोड होकर जाना होगा।
    – मुंजासा तिराहे से बाजनगर किसान पथ, छंदोईया की ओर वाहन नहीं जाएंगे। ये वाहन जीरो पॉइंट मोहान रोड होकर जा सकेंगे।
    – बाजनगर किसान पथ अंडरपास से छंदोईया बाईपास तिराहे की ओर वाहन नहीं जा सकेंगे। ये वाहन बाजनगर किसान पथ अंडरपास से किसान पथ होकर जाएंगे।
    – कसमंडी (हमसफर लॉन) अंडरपास से अंधे की चौकी तिराहे की ओर वाहन नहीं जाएंगे। इन्हें किसानपथ होकर जाना होगा।
    – छंदोईया बाईपास तिराहे से कार्यक्रम स्थल, भिठौली तिराहे की तरफ वाहन नहीं जा सकेंगे। ये वाहन अंधे की चौकी तिराहे, बाजनगर किसान पथ अंडरपास से किसान पथ या दुबग्गा तिराहे होकर जाएंगे।
    – तिकोनिया तिराहे से दुबग्गा तिराहे, छंदोईया बाईपास तिराहे की तरफ भारी वाहन नहीं जाएंगे। ये वाहन नहर तिराहे मोहान रोड, खुशहालगंज बाजार होते हुए खुशहालगंज किसान पथ अंडरपास से किसानपथ होकर जाएंगे।
    – भिठौली तिराहे से कार्यक्रम स्थल, छंदोईया बाईपास तिराहे की तरफ वाहन नहीं जाएंगे। इन्हें सैरपुर तिराहे, अस्ति क्राॅसिंग, बख्शी का तालाब होकर इंदौराबाग अंडरपास से किसान पथ या इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे से होकर जाना होगा।
    – नया पक्कापुल तिराहे, कुड़ियाघाट तिराहे से कार्यक्रम स्थल, घैला तिराहे की ओर वाहन नहीं जाएंगे। इन्हें रूमी गेट, कोनेश्वर चौराहे, बालागंज चौराहे, दुबग्गा तिराहे से होकर जाना होगा।
    – दुबग्गा तिराहे से वाहन छंदोईया या सीतापुर बाईपास की तरफ नहीं जाएंगे। इन्हें तिकोनिया तिराहे से होकर जाना होगा।
    – नहरपुल तिराहे से वाहन बुद्धेश्वर की तरफ नहीं जाएंगे। इन्हें जीरो पॉइंट या किसान पथ के ऊपर से होकर जाना होगा।


    कुछ ऐसा रहेगा बाहर से आने वाले वाहनों का डायवर्जन

    – कानपुर की तरफ से आने वाले भारी वाहन अंबेडकरनगर, बस्ती, संत कबीरनगर, गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़ समेत अन्य जिलों की ओर जाने के लिए कानपुर, फतेहपुर, लालगंज, बछरांवा, हैदरगढ़, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर जाएंगे।
    – उन्नाव की तरफ से आने वाले भारी वाहन उन्नाव के दही चौकी से पुरवा, मौरावां, बछरावां, हैदरगढ़, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर जा सकेंगे। इसके अलावा उन्नाव (ललऊखेड़ा) से बीघापुर लालगंज, गुरुबक्शगंज, बछरावां से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर भी जा सकेंगे।
    – सीतापुर की तरफ से आने वाले भारी वाहन चाहलारी होते हुए बहराईच से गोंडा व बलरामपुर होकर जा सकेंगे।
    – हरदोई की तरफ से आने वाले भारी वाहन बघौली, बांगरमऊ, उन्नाव (ललऊखेड़ा), बीघापुर लालगंज, गुरुबक्शगंज, बछरांवा से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर जा सकेंगे।
    – सुल्तानुपर रोड / हैदरगढ़ (जनपद बाराबंकी) की तरफ से आने वाले भारी वाहन हैदरगढ़ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर जाएंगे।
    – रायबरेली रोड की तरफ से आने वाले भारी वाहन बछरावां से हैदरगढ़ होकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जाएंगे।
    – बाराबंकी रोड की तरफ से आने वाले भारी वाहन हैदरगढ, बछरावां, लालगंज, फतेहपुर, चौडगरा होकर जा सकेंगे। इसके अलावा बाराबंकी रोड से बहराईच के चहलारी घाट से सीतापुर होकर भी जा सकते हैं।


    चप्पे-चप्पे पर रहेगी की पुलिस की नजर

    प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं। जेसीपी एलओ बबलू कुमार ने बताया कि कार्यक्रम स्थल व उसके आसपास के पूरे इलाके पर पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है। हर जगह चेकिंग की जा रही है। सुरक्षा के लिए 18 पुलिस उपायुक्त, 26 अपर पुलिस उपायुक्त, 80 सहायक पुलिस आयुक्त, 189 इंस्पेक्टर, 1367 दरोगा, 214 महिला दरोगा, 4312 सिपाही, 997 महिला सिपाही, 18 कंपनी पीएसी, 4 कंपनी आरएएफ, 8 बम निरोधक दस्ता, एनएसजी की दो टीमें, एटीएस की एक टीम, एंटी ड्रोन की दो टीमें, एक एंटी माइन टीम, 14 एंटी सबोटाज टीम तैनात की गई है। 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी की जा रही है। क्विक रिस्पांस टीम का भी गठन किया गया है। पुलिस की चार टीमों को रिजर्व में रखा गया है।


    अलर्ट पर लखनऊ के सरकारी अस्पताल

    शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से केजीएमयू, पीजीआई और लोकबंधु अस्पताल को सेफ हाउस बनाया गया है। लोकबंधु की टीम एयरपोर्ट पर मुस्तैद रहेगी। इसके अलावा एंबुलेंस, प्रधानमंत्री के ब्लड ग्रुप के लाइव डोनर की भी पुख्ता व्यवस्था कर रखी गई है।

    सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए पीजीआई, केजीएमयू को सेफ हाउस बनाया गया है। वहां अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बेड आरक्षित किए गए हैं। डॉक्टर और स्टाफ की ड्यूटी लगाई है। ऐसे ही लोकबंधु अस्पताल के डॉक्टर, स्टाफ की ड्यूटी तीसरे सेफ हाउस के तौर पर एयरपोर्ट पर रहेगी।

    प्रधानमंत्री के शहर में आगमन से लेकर जाने तक 20 बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) और चार एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस अलर्ट रहेंगी। प्रधानमंत्री के ब्लड ग्रुप के दो लाइव डोनर उनकी फ्लीट में रहेंगे। सभी ब्लड बैंकों में प्रधानमंत्री के ब्लड ग्रुप वाले रक्त को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके अलावा कार्यक्रम स्थल की पार्किंग में डॉक्टर व स्टॉफ की 20 टीमें रहेंगी। पीएम की फ्लीट के साथ चार टीमें रहेंगी।

  • नेतन्याहू ने PM मोदी से की फोन पर बातचीत, 'बहुत जल्द मुलाकात पर जताई सहमति'

    नेतन्याहू ने PM मोदी से की फोन पर बातचीत, 'बहुत जल्द मुलाकात पर जताई सहमति'


    येरूशलम।
    इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने बुधवार (10 दिसंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से फोन पर बातचीत की। जिसमें दोनों नेताओं ने ‘बहुत जल्द’ मुलाकात करने पर सहमति जताई है। यह जानकारी इस्राइल प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने साझा की। नेतन्याहू और पीएम मोदी के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बारे में बताते हुए इस्राइल पीएमओ (Israel PMO) ने एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर किया।


    इस्राइली पीएमओ ने साझा किया पोस्ट

    पीएमओ की ओर से सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में कहा गया, “गर्मजोशी भरी और मित्रतापूर्ण बातचीत के अंत में दोनों नेताओं ने बहुत जल्द मिलने पर सहमति दी।” मालूम हो कि दोनों नेताओं ने आपसी बातचीत में भारत–इस्राइल रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इस्राइली प्रधानमंत्री की यह बहुप्रतीक्षित यात्रा दोनों तरफ से कई उच्च-स्तरीय मंत्री स्तरीय यात्राओं के बाद होगी।

    फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के अंतिम चरण में दोनों देश
    इस साल इस्राइल के पर्यटन मंत्री हैम काट्ज, अर्थव्यवस्था और उद्योग मंत्री नीर बरकत, कृषि और खाद्य सुरक्षा मंत्री एवी डिचटर तथा वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच भारत का दौरा कर चुके हैं। ये सभी दौरे दोनों रणनीतिक साझेदार देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में बढ़ते कदमों को दर्शाते हैं।

    दोनों देशों ने स्मोट्रिच की यात्रा के दौरान एक द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर हस्ताक्षर किए और फिर पिछले महीने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की इस्राइल यात्रा के दौरान FTA की ओर ले जाने वाले नियमों और शर्तों (TOR) पर हस्ताक्षर किए।


    भारत की यात्रा को लेकर किया था ये दावा खारिज

    हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि दिल्ली धमाकों के बाद सुरक्षा कारणों से नेतन्याहू ने भारत की यात्रा स्थगित कर दी है, लेकिन इस्राइल पीएमओ ने इन दावों को खारिज कर दिया था। साथ ही इस्राइल ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर ‘पूरा भरोसा’ जताते हुए कहा कि नेतन्याहू की यात्रा को लेकर दोनों देश तारीखों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं।

  • पुतिन की भारत यात्रा: राष्ट्रपति भवन पहुंचे पीएम मोदी, पुतिन का होगा औपचारिक स्वागत

    पुतिन की भारत यात्रा: राष्ट्रपति भवन पहुंचे पीएम मोदी, पुतिन का होगा औपचारिक स्वागत



    नई दिल्ली ।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 4 दिसंबर 2025 को दो दिवसीय भारत यात्रा शुरू की। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही है और चार साल बाद उनकी भारत यात्रा है। इस दौरान भारत और रूस के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग को बढ़ाने व्यापारिक रिश्तों को प्रगाढ़ करने और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

    भारत-रूस साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ

    पुतिन की यात्रा भारत और रूस के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर हो रही है। यह साझेदारी अक्टूबर 2000 में शुरू हुई थी और दिसंबर 2010 में इसे स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया गया। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है  खासकर रक्षा ऊर्जा और व्यापारिक संबंधों में।

    यात्रा का मुख्य उद्देश्य

    पुतिन की इस यात्रा में प्रमुख रूप से रक्षा सहयोग, व्यापारिक रिश्तों और बाहरी दबावों से दोनों देशों को बचाने पर ध्यान दिया जाएगा। भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में पुराने संबंध रहे हैं, और दोनों देशों के बीच यह सहयोग और मजबूत हो सकता है। साथ ही  भारत में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी पर विचार हो सकता है।

    शिखर सम्मेलन और RT इंडिया चैनल का शुभारंभ

    5 दिसंबर को पुतिन का औपचारिक स्वागत होगा जिसके बाद 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेंगे जिनमें रक्षा ऊर्जा व्यापार और सामरिक साझेदारी से संबंधित मुद्दे शामिल होंगे।

    सम्मेलन के बाद पुतिन रूस के प्रसारक रूसी टेलीविजन के नए भारतीय चैनल का शुभारंभ करेंगे। यह चैनल भारत में रूसी मीडिया की पहुंच को बढ़ाने में मदद करेगा और भारत-रूस के संबंधों को और मजबूत बनाएगा।

    राजकीय भोज और भविष्य की दिशा

    यात्रा के अंतिम दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पुतिन के सम्मान में एक राजकीय भोज आयोजित करेंगी। यह भोज भारत-रूस संबंधों की गहरी साझेदारी और मित्रता का प्रतीक होगा।

    इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामरिक साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा। भारत और रूस के रिश्ते खासकर रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण रहे हैं और यह यात्रा इन रिश्तों को एक नए दौर में प्रवेश दिला सकती है।

    भारत-रूस का सामरिक महत्व

    भारत और रूस के बीच सामरिक रिश्ते बहुत मजबूत रहे हैं विशेषकर रक्षा क्षेत्र में। रूस ने हमेशा भारत को उन्नत रक्षा प्रणाली प्रदान की है जिसमें विमान मिसाइलें और अन्य तकनीकी सहयोग शामिल है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा विज्ञान तकनीकी और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा है।

    यह यात्रा भारत और रूस के रिश्तों में एक नई दिशा का संकेत देती है, जिसमें दोनों देशों के साझा हितों के साथ-साथ वैश्विक राजनीति में सामरिक समन्वय भी बढ़ेगा। पुतिन की यात्रा विशेष रूप से रक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में भारत-रूस साझेदारी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।