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  • ब्लैकमेलिंग के आरोपों में घिरे मीडियाकर्मी पर दूसरी एफआईआर भाई और महिला साथी सहित चार लोगों पर पुलिस ने दर्ज किया मामला

    ब्लैकमेलिंग के आरोपों में घिरे मीडियाकर्मी पर दूसरी एफआईआर भाई और महिला साथी सहित चार लोगों पर पुलिस ने दर्ज किया मामला


    इंदौर । इंदौर में एक मीडियाकर्मी के खिलाफ सात दिन के भीतर दूसरी एफआईआर दर्ज होने से मामला चर्चा में आ गया है। इस बार बाणगंगा थाना पुलिस ने एमपीईबी के कार्यपालक निदेशक की शिकायत पर मीडियाकर्मी अनवर खान उसके भाई एक महिला साथी और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ ब्लैकमेलिंग धमकी देकर रुपए वसूलने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप में प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी आरोपों की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

    बाणगंगा थाना प्रभारी सियाराम गुर्जर के अनुसार शिकायत एमपीईबी के कार्यपालक निदेशक शिवलाल पुत्र दयाराम करबाडिया ने दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर अनवर खान साधना शक्वातव सिद्दीकी खान और फारूख सिद्दीकी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

    शिकायतकर्ता के अनुसार उनका कार्यालय और निवास पोलोग्राउंड क्षेत्र में स्थित है। आरोप है कि चारों आरोपी कई वर्षों से रिपोर्टिंग के सिलसिले में वहां आते जाते थे। इसी दौरान उन्होंने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े मामलों में कथित रूप से भ्रामक और दबाव बनाने वाली खबरें प्रकाशित करने की बात कहकर मानसिक दबाव बनाया।

    एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता को रेप के झूठे मामले में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकी देकर रुपए की मांग की। शिकायत के मुताबिक जून 2024 से दिसंबर 2025 के बीच करीब डेढ़ लाख रुपये विभिन्न किस्तों में वसूल किए गए। आरोप है कि रकम लेने के बाद भी लगातार और पैसे की मांग की जाती रही जिससे शिकायतकर्ता मानसिक रूप से परेशान हो गया।

    शिवलाल करबाडिया ने पुलिस को बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें जानकारी मिली कि अनवर खान के खिलाफ पहले से ही बाणगंगा थाने में ब्लैकमेलिंग का एक अन्य मामला दर्ज है। इसके बाद उन्होंने भी अपने साथ हुई कथित घटनाओं की शिकायत पुलिस से की और पूरी जानकारी उपलब्ध कराई।

    पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। मामले से जुड़े दस्तावेज साक्ष्य और अन्य तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस ने किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियां मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं ताकि आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सके और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

  • अंधविश्वास बना मौत की वजह? झाड़-फूंक के दौरान युवक की मौत, मौलवी पर बलि देने का आरोप

    अंधविश्वास बना मौत की वजह? झाड़-फूंक के दौरान युवक की मौत, मौलवी पर बलि देने का आरोप


    बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बुखार से पीड़ित एक युवक की कथित झाड़-फूंक के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने मौलवी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि झाड़-फूंक के नाम पर युवक की जीभ काट दी गई, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उसकी जान चली गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    यह मामला टिकैतनगर थाना क्षेत्र के सिहोरिया गांव का है। मृतक की पहचान सुकई गौतम के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक सुकई पिछले चार दिनों से तेज बुखार से पीड़ित था। इसी दौरान उसके एक परिचित ने इलाज के लिए खजुरी गांव के मौलवी गुल्ले हिदायत रसूल को बुलाने की सलाह दी। परिवार का कहना है कि मौलवी ने घर पहुंचकर युवक पर किसी प्रेत बाधा का साया होने की बात कही और झाड़-फूंक से उसे ठीक करने का दावा किया।

    परिजनों के अनुसार अगले दिन रात करीब आठ बजे मौलवी दोबारा घर पहुंचा और झाड़-फूंक शुरू की। उस समय परिवार के कुछ सदस्य गांव में ताजिया देखने गए हुए थे जबकि घर पर केवल सुकई और उसका भाई राजेश मौजूद थे। आरोप है कि इसी दौरान मौलवी ने युवक को नहलाया, फूल-पत्ती चढ़ाई, कुछ मंत्र पढ़े और ताबीज का पानी पिलाया। इसके बाद उसने धारदार हथियार से युवक की जीभ काट दी। परिजनों का आरोप है कि इस घटना के बाद मौलवी मौके से फरार हो गया।

    बताया गया कि युवक की चीख-पुकार सुनकर उसका भाई मौके पर पहुंचा और अन्य परिजनों को सूचना दी। परिवार ने तुरंत उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने आरोपी मौलवी गुल्ले बाबा उर्फ हिदायत रसूल को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों और घटना की परिस्थितियों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

     

  • संदिग्ध हालात में युवती की मौत, बिना सूचना अंतिम संस्कार की कोशिश ने बढ़ाए सवाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    संदिग्ध हालात में युवती की मौत, बिना सूचना अंतिम संस्कार की कोशिश ने बढ़ाए सवाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार


    मुगलसराय। कोतवाली क्षेत्र के सुभाष नगर में शुक्रवार देर रात एक 19 वर्षीय युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। युवती का शव घर के एक कमरे में फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और आसपास के लोग भी बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। मृतका की पहचान खुशी सिंह के रूप में हुई है, जो अपने परिवार के साथ किराए के मकान में रहती थी।

    बताया गया कि खुशी के पिता ऑटो चालक हैं और परिवार का पालन-पोषण करते हैं। वह पांच बहनों में चौथे स्थान पर थी। घटना के बाद परिजन बिना पुलिस को सूचना दिए अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए। इसी दौरान किसी ने पुलिस को सूचना दे दी। सूचना मिलते ही मुगलसराय कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और अंतिम संस्कार रुकवाकर शव को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई।

    प्रारंभिक जांच में मामला फंदे से लटककर आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। फिलहाल हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।

    पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों की पूरी जानकारी मिल सके। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि परिजन बिना पुलिस को सूचना दिए अंतिम संस्कार क्यों करना चाहते थे। इसी वजह से मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि युवती कुछ समय पहले अपने दोस्तों के साथ बिना परिवार को बताए दार्जिलिंग घूमने गई थी। घर लौटने पर उसे इस बात को लेकर डांट भी पड़ी थी। हालांकि पुलिस ने इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और कहा है कि जांच केवल तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। यदि जांच में किसी प्रकार की संदिग्ध परिस्थिति सामने आती है तो उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस मामले की हर संभावित दिशा में जांच कर रही है और सभी तथ्यों को एकत्र किया जा रहा है।

  • इंदौर में जुए के विवाद ने लिया खूनी मोड़, बर्थडे पार्टी में युवक पर चाकू से हमला; पुलिस जांच में नए खुलासे

    इंदौर में जुए के विवाद ने लिया खूनी मोड़, बर्थडे पार्टी में युवक पर चाकू से हमला; पुलिस जांच में नए खुलासे


    इंदौर । इंदौर के भंवरकुआं थाना क्षेत्र में बर्थडे पार्टी के दौरान हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। शुरुआत में इसे शराब पार्टी में हुई कहासुनी और मारपीट का मामला माना जा रहा था लेकिन अब जांच में इसके तार जुए के अड्डे और लेनदेन से जुड़ते नजर आ रहे हैं। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और सामने आए नए तथ्यों के आधार पर मामले के विभिन्न पहलुओं को खंगाला जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार शुभ संप्रदा कॉलोनी निवासी राहुल धामेलिया ने शिकायत दर्ज कराई है कि वह अपने भाई लखन धामेलिया के साथ सीएनजी पंप के पास चोइथराम मंडी क्षेत्र में अपने परिचित शानू और शुभम से मिलने गया था। वहां पहले से सज्जू सिधवानी गिरी महाराज और अन्य लोग मौजूद थे जो एक बर्थडे पार्टी मना रहे थे। पार्टी के दौरान शराब पीने के बाद माहौल बिगड़ गया और मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।

    शिकायत के मुताबिक सज्जू सिधवानी ने पहले लखन के साथ गाली गलौज और अभद्रता की। विरोध करने पर उसने अपने साथियों को बुला लिया जिसके बाद सभी ने मिलकर राहुल और लखन के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान सज्जू ने चाकू निकालकर लखन के चेहरे और गले पर कई वार कर दिए जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं एक अन्य आरोपी ने राहुल के सिर पर कांच की बोतल मार दी जिससे उसे भी चोटें आईं। दोनों घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

    घटना के बाद मामले को दबाने की कोशिश भी सामने आई। जानकारी के अनुसार घायल लखन को पहले एमवाय अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने चोट का कारण पूछा तो परिजनों ने वाहन से गिरने की बात कही और पुलिस को सूचना देने से इनकार कर दिया। बाद में जब घटना की जानकारी बाहर आने लगी तो घायल को निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।

    इस बीच पुलिस जांच में एक नया एंगल सामने आया है। सूत्रों के अनुसार हाल ही में क्राइम ब्रांच ने महालक्ष्मी नगर स्थित एक इमारत में संचालित जुए के अड्डे पर कार्रवाई की थी। जांच में यह बात भी सामने आई थी कि वहां पराग रघुवंशी शानू उर्फ कौआ और जीतू मिलकर जुए का संचालन करते थे। कार्रवाई के बाद कथित तौर पर भंवरकुआं क्षेत्र में नई बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ था।

    पुलिस को आशंका है कि चाकूबाजी की यह घटना जुए के लेनदेन या उससे जुड़े विवाद का नतीजा हो सकती है। हालांकि फिलहाल दर्ज एफआईआर में इसे बर्थडे पार्टी के दौरान हुए विवाद के रूप में शामिल किया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि घायल लखन ताश पहुंचाने का काम करता था और घटना वाले दिन अपने भाई के साथ वहीं पहुंचा था।

    पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में जुए के लेनदेन या अन्य आपराधिक गतिविधियों की पुष्टि होती है तो संबंधित धाराओं में भी कार्रवाई की जा सकती है।

  • शादी की शान बनी घोड़ी पर क्रूरता का वार डंडे से पिटाई का VIDEO वायरल पुलिस से कार्रवाई की मांग

    शादी की शान बनी घोड़ी पर क्रूरता का वार डंडे से पिटाई का VIDEO वायरल पुलिस से कार्रवाई की मांग


    इंदौर । इंदौर में एक घोड़ी के साथ कथित क्रूरता का मामला सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी फैल गई है। शहर के नृसिंह बाजार चौराहे के पास एक घोड़ी को डंडों से पीटकर जबरन नचाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पशु प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना को अमानवीय बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंच चुकी है और वीडियो की जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार घटना 25 जून की रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है। वायरल वीडियो में एक युवक घोड़ी को नियंत्रित करने और उससे जबरन प्रदर्शन कराने के लिए लगातार डंडे मारता दिखाई दे रहा है। इस दौरान आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे लेकिन किसी ने भी घोड़ी को बचाने या युवक को रोकने का प्रयास नहीं किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी।

    पशु कल्याण के क्षेत्र में कार्य करने वाले नीडीटेल फाउंडेशन के प्रियांश जैन ने पंढरीनाथ थाना पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घोड़ी को दर्द और भय के जरिए प्रदर्शन करने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने पुलिस से मामले में एफआईआर दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

    इस घटना से जुड़ा एक और वीडियो भी सामने आया है जिसमें उसी घोड़ी को सड़क पर नचाते हुए देखा जा सकता है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जानवर को उसकी इच्छा के विरुद्ध प्रताड़ित कर प्रदर्शन कराया गया जिससे उसे शारीरिक और मानसिक पीड़ा पहुंची।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि जांच में यह साबित होता है कि घोड़ी को अनावश्यक पीड़ा पहुंचाई गई या उसे बेरहमी से पीटा गया तो आरोपियों के खिलाफ पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इस कानून के तहत किसी भी पशु को मारना पीटना या अनावश्यक कष्ट पहुंचाना दंडनीय अपराध है।

    इसके अलावा यदि जांच में यह सामने आता है कि घोड़ी को गंभीर चोट पहुंची है या उसे स्थायी नुकसान हुआ है तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रावधान के तहत पशु को घायल करने या अपंग बनाने पर पांच वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

    फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता और उनके संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • जिसे पुलिस ने बताया MD ड्रग्स वह निकला यूरिया बर्खास्त पुलिसकर्मी बरी अब अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

    जिसे पुलिस ने बताया MD ड्रग्स वह निकला यूरिया बर्खास्त पुलिसकर्मी बरी अब अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप


    इंदौर । इंदौर में कथित एमडी ड्रग्स बरामदगी के चर्चित मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जिस पदार्थ को पुलिस ने करोड़ों रुपए की एमडी ड्रग्स बताकर बड़ी कार्रवाई का दावा किया था वह दोनों सरकारी फॉरेंसिक जांच में साधारण यूरिया निकला। इसके बाद अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए पुलिसकर्मी समेत तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। अब बर्खास्त पुलिसकर्मी ने दो आईपीएस अधिकारियों सहित 19 पुलिसकर्मियों पर झूठे मामले में फंसाने का गंभीर आरोप लगाया है।

    करीब 16 महीने पहले इंदौर पुलिस ने विजय पाटीदार और शाहनवाज शेख को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 198 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद होने का दावा किया था। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने पुलिसकर्मी लखन गुप्ता का नाम लिया जिसके बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बाद में विभागीय कार्रवाई करते हुए लखन गुप्ता को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।

    मामले की जांच के दौरान जब्त किए गए पदार्थ के नमूने भोपाल स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजे गए। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जब्त पदार्थ किसी भी प्रकार का मादक पदार्थ नहीं बल्कि सामान्य यूरिया है। इसके बाद पुलिस ने दोबारा हैदराबाद की केंद्रीय प्रयोगशाला से भी परीक्षण कराया लेकिन वहां भी रिपोर्ट में पदार्थ यूरिया ही पाया गया।

    दोनों प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की गई जिसके आधार पर विशेष अदालत ने लखन गुप्ता सहित तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अदालत के फैसले के बाद लखन गुप्ता ने इंदौर जिला कोर्ट की विशेष अदालत में परिवाद दायर कर दो आईपीएस अधिकारियों सहित 19 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    लखन गुप्ता का आरोप है कि उन्हें सुनियोजित साजिश के तहत इस मामले में फंसाया गया। उनका कहना है कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने मुखबिर के जरिए पहले से गिरफ्तार आरोपियों से उनका नाम कहलवाया और फिर उन्हें आजाद नगर क्षेत्र से उठाकर तेजाजी नगर थाने ले जाया गया। वहां पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और बाद में नौकरी से भी बर्खास्त कर दिया गया।

    लखन गुप्ता के अधिवक्ता नितिन पाराशर के अनुसार अदालत में दायर परिवाद में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 27 जून की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान अदालत जांच के आदेश एफआईआर दर्ज कराने या अन्य कानूनी कार्रवाई को लेकर निर्णय ले सकती है।

    यह मामला अब इंदौर पुलिस की जांच प्रक्रिया और कार्रवाई की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामले में आगे अदालत के आदेश और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

  • भोपाल में बंद मकान से रिटायर्ड दंपती के शव मिलने से सनसनी शरीर पर चोट के निशान हत्या के एंगल से जांच शुरू

    भोपाल में बंद मकान से रिटायर्ड दंपती के शव मिलने से सनसनी शरीर पर चोट के निशान हत्या के एंगल से जांच शुरू


    भोपाल भोपाल के ऐशबाग थाना क्षेत्र में एक बंद मकान से रिटायर्ड दंपती के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। दो दिन तक घर से बाहर नहीं निकलने और मकान से तेज दुर्गंध आने पर किराए पर रहने वाले छात्रों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो पति पत्नी मृत अवस्था में मिले। शवों पर चोट के निशान मिलने के बाद पुलिस ने हत्या की आशंका सहित सभी पहलुओं से जांच शुरू कर दी है।

    मृतकों की पहचान 64 वर्षीय हेमंत बारीक और उनकी 62 वर्षीय पत्नी शकुंतला बारीक के रूप में हुई है। हेमंत बारीक भारतीय रेलवे से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे जबकि उनकी पत्नी शकुंतला बारीक कस्तूरबा अस्पताल में नर्स के पद से रिटायर हुई थीं। दंपती ऐशबाग के सुदामा नगर स्थित अपने मकान में रहते थे। मकान के एक हिस्से में कुछ छात्र किराए पर रहते हैं। दंपती की कोई संतान नहीं थी।

    छात्रों के अनुसार पिछले दो दिनों से दोनों घर से बाहर नहीं निकले थे। शुक्रवार को मकान से तेज दुर्गंध आने लगी तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बंद मकान का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। अंदर दोनों के शव पड़े मिले जिनकी स्थिति काफी खराब हो चुकी थी।

    एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि शव पूरी तरह से डीकंपोज हो चुके हैं और उनके शरीर पर चोट के निशान भी मिले हैं। फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस हत्या की संभावना से भी इनकार नहीं कर रही है और सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।

    पुलिस ने घटनास्थल को सील कर फॉरेंसिक टीम को जांच के लिए बुलाया है। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। साथ ही एक्सरे और अन्य वैज्ञानिक परीक्षण भी कराए जा रहे हैं ताकि मौत के कारणों का स्पष्ट पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आएगी।

    परिजनों से पूछताछ में पता चला कि शकुंतला बारीक ने बुधवार को आखिरी बार अपनी भाभी से फोन पर बातचीत की थी। उस दौरान उन्होंने बताया था कि उनके पति की आंख में परेशानी है और वह उन्हें कस्तूरबा अस्पताल लेकर जा रही हैं। बातचीत में उन्होंने किसी तरह के खतरे या विवाद का जिक्र नहीं किया था। हालांकि परिजनों के अनुसार पति पत्नी के बीच अक्सर घरेलू विवाद होते रहते थे लेकिन उनकी किसी से पुरानी रंजिश की जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल पुलिस आसपास के लोगों और परिजनों से पूछताछ कर रही है। साथ ही घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है ताकि मामले की सच्चाई जल्द सामने आ सके।

  • MLA रेस्ट हाउस विवाद ने लिया नया मोड़ आरोपी पक्ष ने थाने में पिटाई का लगाया आरोप अब होगी पुलिस जांच

    MLA रेस्ट हाउस विवाद ने लिया नया मोड़ आरोपी पक्ष ने थाने में पिटाई का लगाया आरोप अब होगी पुलिस जांच


    नई दिल्ली। भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित एमएलए रेस्ट हाउस के बाहर कांग्रेस विधायक दिनेश गुर्जर के बेटे देवराज सिंह गुर्जर से कथित मारपीट के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। घटना में आरोपी बनाए गए लक्की यादव की मां ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत कर पुलिस कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। शिकायत के बाद पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

    आरोपी पक्ष की ओर से की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घटना के दौरान पहले उनके बेटों के साथ एमएलए रेस्ट हाउस के बाहर मारपीट की गई। इसके बाद अरेरा हिल्स थाने में भी पुलिस की मौजूदगी में उनके बेटों के साथ कथित रूप से मारपीट हुई। शिकायत में कहा गया है कि दोनों युवकों के शरीर पर गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिवार का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण उनकी शिकायत पर तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई।

    पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने शिकायत मिलने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    दूसरी ओर विधायक पुत्र देवराज सिंह गुर्जर ने भी पूरे घटनाक्रम को लेकर अपना पक्ष रखा है। उनके अनुसार 24 जून की रात वह मालवीय नगर स्थित एमएलए रेस्ट हाउस स्थित अपने आवास की बालकनी में टहल रहे थे। इसी दौरान घर के बाहर कुछ युवक शराब पी रहे थे। उन्हें वहां से हटने के लिए कहने पर विवाद शुरू हो गया।

    देवराज का आरोप है कि विरोध करने पर चारों युवक उनके घर की सीढ़ियों तक पहुंच गए और शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगे। मना करने पर उनके साथ मारपीट और छीनाझपटी की गई। उन्होंने बताया कि शोर सुनकर उनके दोस्त मौके पर पहुंचे और बीच बचाव कर उन्हें बचाया। आरोप है कि जाते समय युवक उन्हें धमकी देकर वहां से चले गए।

    घटना के बाद देवराज ने जेपी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया और अरेरा हिल्स थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उनकी शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।

    अब आरोपी पक्ष की ओर से लगाए गए नए आरोपों के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। पुलिस दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान क्या हुआ और किस पक्ष के आरोप सही हैं। फिलहाल पुलिस ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है और कहा है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • 500 करोड़ की जमीन विवाद में नया मोड़: पुलिस गाड़ी से आरोपी को छोड़ने और सबूत मिटाने के आरोप

    500 करोड़ की जमीन विवाद में नया मोड़: पुलिस गाड़ी से आरोपी को छोड़ने और सबूत मिटाने के आरोप

    इंदौर। इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये की बहुमूल्य जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मामला केवल जमीन पर कब्जे या पुलिसकर्मियों पर हमले तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब इसमें सबूत गायब होने, कथित आर्थिक लेनदेन और आरोपियों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप भी जुड़ गए हैं। पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार विवादित जमीन को लेकर हुए संघर्ष के दौरान बीट पर तैनात पुलिस जवानों पर हमला किया गया था। घटना स्थल के पास स्थित एक दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी वारदात रिकॉर्ड होने की बात सामने आई थी। बताया जा रहा है कि पुलिस ने जांच के लिए सीसीटीवी का डीवीआर अपने कब्जे में लिया था, लेकिन बाद में वही डीवीआर गायब हो गया। इस घटनाक्रम ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या आरोपियों को बचाने के लिए महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई।

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब इसकी जानकारी सार्वजनिक हुई। खबर सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस कमिश्नर ने कनाड़िया थाना प्रभारी सहर्ष यादव को तलब कर पूरे मामले की जानकारी ली और उनकी भूमिका की विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए। जांच के आदेश के बाद अब पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब घटना के वीडियो उपलब्ध थे और आरोपियों की पहचान भी कथित रूप से हो चुकी थी, तब एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ क्यों दर्ज की गई। इस निर्णय ने पुलिस की मंशा को लेकर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लोगों का कहना है कि यदि पहचान स्पष्ट थी तो नामजद मामला दर्ज किया जाना चाहिए था।

    सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि विवाद से एक दिन पहले मोहसिन नामक व्यक्ति द्वारा थाने में 10 लाख रुपये पहुंचाए गए थे। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह चर्चा पूरे मामले को और गंभीर बना रही है। यह भी आरोप है कि इसी प्रभाव के चलते संबंधित व्यक्ति ने थाना प्रभारी से अभद्र व्यवहार किया और उसका वीडियो भी मौजूद है। बताया जा रहा है कि यह फुटेज वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचाया गया।

    मामले में एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है कि उज्जैन का एक व्यक्ति जो इस विवाद से जुड़ा हुआ था, उसे पुलिस वाहन के माध्यम से वहां से रवाना किया गया। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह होगा।

    घटना में घायल हुए पुलिस जवानों पर मीडिया से दूरी बनाए रखने का दबाव बनाए जाने की भी चर्चा है। यदि ऐसा हुआ है तो यह केवल हमले का मामला नहीं बल्कि पूरे घटनाक्रम को दबाने के प्रयास के रूप में देखा जाएगा।

    फिलहाल विभागीय जांच शुरू हो चुकी है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यह मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।