Tag: Police Investigation

  • बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल

    बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल


    ढाका।
    बांग्लादेश के रंगपुर में हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या का मामला गंभीर विवाद में बदल गया है। पुलिस ने हत्या के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कुछ अहम साक्ष्य सामने नहीं लाए जा रहे हैं।

    सबसे गंभीर सवाल परिवार की महिला सदस्यों से कथित दुष्कर्म को लेकर उठ रहा है। हालांकि, दुष्कर्म के आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की रिपोर्ट में महिलाओं के साथ दुष्कर्म का उल्लेख नहीं किया गया है।

    शवगृह कर्मचारी के दावे से बढ़ा विवाद

    स्थानीय मीडिया के एक स्टिंग ऑपरेशन में शवगृह के एक कर्मचारी ने महिलाओं के शवों से कथित तौर पर वीर्य मिलने का दावा किया। इस दावे के बाद मामले में दुष्कर्म की आशंका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र फॉरेंसिक या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना कि हत्या से पहले निश्चित तौर पर दुष्कर्म हुआ था, फिलहाल जल्दबाजी होगी।

    चारों की गला घोंटकर हत्या

    पुलिस रिपोर्ट के अनुसार स्कूल शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी, बेटी और बेटे की गला घोंटकर हत्या की गई। मामले में गणपति के रिश्तेदार मुग्धो दास और सिद्धार्थ दास को गिरफ्तार किया गया है।

    स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों का आरोप है कि हत्या में और लोग भी शामिल हो सकते हैं और पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इन आरोपों की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    जांच डिटेक्टिव ब्रांच को सौंपी गई

    विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच स्थानीय पुलिस से हटाकर डिटेक्टिव ब्रांच को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी हत्या की परिस्थितियों के साथ-साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

    इस बीच हिंदू संगठनों का विरोध जारी है। संगठनों ने मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फॉरेंसिक जांच में दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि होती है और क्या हत्या में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। इन दोनों सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • 17 वर्षीय किशोर हत्याकांड में पुलिस के सामने नई चुनौती तीन सर्चिंग के बाद मिली सिर्फ पॉलीथिन, 12 लाख के ट्रांजैक्शन की भी जांच

    17 वर्षीय किशोर हत्याकांड में पुलिस के सामने नई चुनौती तीन सर्चिंग के बाद मिली सिर्फ पॉलीथिन, 12 लाख के ट्रांजैक्शन की भी जांच


    भोपाल । भोपाल के श्यामला हिल्स इलाके में 17 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। हत्या के बाद किशोर के शरीर के एक हिस्से को काटकर छोटे तालाब में फेंके जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर तीन बार तालाब में सर्चिंग की लेकिन अब तक उस अंग की बरामदगी नहीं हो सकी है। तलाशी के दौरान पुलिस को एक पॉलीथिन जरूर मिली लेकिन उसमें वह अंग नहीं था जिसकी तलाश की जा रही थी। अब पुलिस आरोपियों के बयानों के साथ उनके बैंक खातों मोबाइल फोन कॉल डिटेल और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच कर रही है ताकि हत्या के पीछे के पूरे नेटवर्क और कथित आर्थिक लालच की वास्तविकता सामने लाई जा सके।

    पुलिस के अनुसार आरोपियों ने वारदात की साजिश 5 अगस्त को रची थी। इसके अगले दिन 6 अगस्त की रात किशोर को 100 रुपए देने का लालच देकर एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया। इसके बाद किलोल पार्क के आसपास उसकी हत्या कर दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि शरीर के हिस्से को काटने के लिए नया शेविंग ब्लेड खरीदा गया था जबकि हत्या में इस्तेमाल छुरी एक विधि विवादित बालक अपने साथ लेकर आया था। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी जोहेब खान के साथ आमिर और तीन विधि विवादित बालकों को पकड़ा है।

    हत्या के बाद किशोर के शरीर के काटे गए अंग को छोटे तालाब में फेंकने की बात आरोपियों ने पुलिस को बताई थी। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने तालाब में तीन अलग अलग बार सर्चिंग की। हर बार उस इलाके के आसपास तलाश की गई जहां आरोपियों ने अंग फेंकने की बात कही थी। तलाशी के दौरान एक पॉलीथिन मिली और आरोपियों ने दावा किया कि इसी पॉलीथिन में अंग को बांधकर तालाब में फेंका गया था। हालांकि जब पुलिस ने इसकी जांच की तो पॉलीथिन के अंदर वह अंग मौजूद नहीं था।

    अब पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि पानी के बहाव के कारण वह दूसरी जगह पहुंच गया हो या कई दिनों तक पानी में रहने के कारण जैविक अपघटन हो गया हो। पानी में मौजूद जीव जंतुओं और अन्य प्राकृतिक कारणों से भी उसके नष्ट होने की संभावना पर जांच की जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी संभावना को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना है। तालाब की गहराई पानी के बहाव और आसपास की भौगोलिक स्थिति को समझकर आगे की सर्चिंग की रणनीति तैयार की जा रही है।

    मामले की जांच में आर्थिक लेन देन भी पुलिस के लिए अहम कड़ी बन गया है। मुख्य आरोपी जोहेब के बैंक खाते में 12 लाख रुपए आने की सूचना सामने आई थी लेकिन पुलिस की तस्दीक में खाते में इतनी रकम जमा होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के बैंक खातों की लेन देन हिस्ट्री खंगालना शुरू कर दिया है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या वारदात से पहले या बाद में किसी बाहरी व्यक्ति की ओर से आरोपियों को कोई रकम मिली थी।

    पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन कॉल डिटेल और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों के संपर्क में कौन लोग थे और वारदात से पहले तथा बाद में उनकी किस किस व्यक्ति से बातचीत हुई। पुलिस इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है कि कथित आर्थिक लालच की जानकारी आरोपियों को कहां से मिली और क्या इसके पीछे किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका थी।

    पूछताछ में आरोपियों के व्यवहार को लेकर भी पुलिस ने जानकारी जुटाई है। पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपियों में घटना को लेकर पछतावे के स्पष्ट संकेत नहीं दिखे और वे कथित तौर पर घटना के बारे में सामान्य तरीके से बात कर रहे थे। अब जांच एजेंसियां उनके आपसी संपर्क और वारदात से पहले तथा बाद की गतिविधियों को जोड़कर मामले की पूरी कड़ी तैयार करने में जुटी हैं।

    फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती किशोर के शरीर के लापता हिस्से की बरामदगी और हत्या के पीछे के वास्तविक मकसद की पूरी पुष्टि करना है। तीन बार तालाब में तलाश के बावजूद सफलता नहीं मिलने के बाद पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल जांच के आधार पर आगे बढ़ रही है। इस मामले में आने वाले दिनों में बैंक लेन देन और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े नए सुराग सामने आने की उम्मीद है।

  • रात में सोए अफसर की सुबह नहीं खुली आंखें, कमरे में मिला शव; न सुसाइड नोट मिला न चोट के निशान

    रात में सोए अफसर की सुबह नहीं खुली आंखें, कमरे में मिला शव; न सुसाइड नोट मिला न चोट के निशान


    कटनी । मध्य प्रदेश के कटनी जिले में आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रहने वाले मानवेंद्र प्रताप सिंह कटनी में आयकर विभाग में तैनात थे और विभागीय गेस्ट हाउस में रह रहे थे। गुरुवार रात वह अपने कमरे में सोने गए थे लेकिन शुक्रवार सुबह काफी देर तक कमरे से कोई हलचल नहीं हुई। जब सरकारी ड्राइवर उन्हें लेने पहुंचा और कई बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद भीतर से कोई जवाब नहीं मिला तो गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को अनहोनी की आशंका हुई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। वहां अधिकारी बिस्तर पर अचेत अवस्था में मिले।

    घटना माधवनगर थाना क्षेत्र के बरगवां इलाके की बताई जा रही है। पुलिस ने मृतक की पहचान मानवेंद्र प्रताप सिंह के रूप में की है। वह बाराबंकी के निलालडिया असंदा क्षेत्र के रहने वाले विजेंद्र प्रताप सिंह के बेटे थे। शुरुआती जांच में कमरे के भीतर किसी तरह के संघर्ष या हिंसा के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। पुलिस को न तो कोई सुसाइड नोट मिला और न ही अधिकारी के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। यही वजह है कि फिलहाल मौत की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल बने हुए हैं।

    बताया गया है कि शुक्रवार सुबह सरकारी ड्राइवर मानवेंद्र प्रताप सिंह के कमरे पर कार की चाबी लेने पहुंचा था। उसने दरवाजे की घंटी बजाई और कई बार दस्तक दी लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। काफी देर तक कमरे से आवाज या किसी प्रकार की हलचल नहीं आने पर गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम के पहुंचने के बाद कमरे का दरवाजा तोड़ा गया और अधिकारी को बिस्तर पर पड़ा देखा गया। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।

    प्रारंभिक स्तर पर अधिकारी की मौत को हार्ट अटैक से जोड़कर देखा जा रहा है लेकिन पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि अधिकारी की तबीयत पहले से खराब थी या रात के दौरान अचानक कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या हुई। कमरे के अंदर किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश या किसी आपराधिक घटना के संकेत मिले हैं या नहीं इसकी भी जांच की जा रही है।

    मानवेंद्र प्रताप सिंह की कटनी में आयकर विभाग के कार्यालय में पोस्टिंग वर्ष 2024-25 के दौरान हुई थी। पोस्टिंग के बाद से वह बरगवां स्थित विभागीय गेस्ट हाउस में ही रह रहे थे। उनका परिवार बाराबंकी में रहता था और नौकरी के कारण वह कटनी में अकेले रह रहे थे। परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है और उनके कटनी पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।

    माधवनगर थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह यादव के मुताबिक मामले की जांच जारी है। परिवार के सदस्यों के पहुंचने के बाद पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा और रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत की सही वजह सामने आएगी। फिलहाल पुलिस ने घटना को लेकर किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष इस मामले में सबसे अहम होंगे। बंद कमरे में अधिकारी की मौत ने विभागीय गेस्ट हाउस में भी चिंता बढ़ा दी है और पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

  • करोड़ों कमाने के लालच में खौफनाक साजिश! 17 वर्षीय किशोर की हत्या मामले में 20 साल का युवक और तीन नाबालिग पकड़े गए

    करोड़ों कमाने के लालच में खौफनाक साजिश! 17 वर्षीय किशोर की हत्या मामले में 20 साल का युवक और तीन नाबालिग पकड़े गए


    भोपाल । भोपाल में 17 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक एक कथित फर्जी डॉक्टर ने करोड़ों रुपये कमाने का लालच देकर किशोर की हत्या की साजिश रची और इस वारदात को अंजाम देने के लिए तीन नाबालिगों समेत अन्य आरोपियों का इस्तेमाल किया। मामले में 20 वर्षीय जोहेब खान 18 वर्षीय आमिर कुरैशी और तीन विधि-विरुद्ध बालकों को पकड़ा गया है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के साथ यह पता लगाने में जुटी है कि इस साजिश में और कौन लोग शामिल थे।

    पुलिस के अनुसार मृतक किशोर इकबाल मैदान और मोती मस्जिद इलाके में पेन तथा चाबी के छल्ले बेचता था। उसकी मां मजदूर नगर स्थित सुलभ कॉम्प्लेक्स में सफाई का काम करती है। आरोपियों ने करीब एक महीने पहले किशोर से दोस्ती की थी। पुलिस का कहना है कि इसी दोस्ती का फायदा उठाकर उसे वारदात वाली जगह तक ले जाने की योजना बनाई गई।

    बताया गया कि 6 अगस्त को दो नाबालिग किशोर के पास पहुंचे और उसे खट्टापुरा के पास कुछ लड़कों से विवाद होने की बात बताई। उन्होंने किशोर से अपने साथ चलने को कहा और बदले में पैसे देने का लालच दिया। पुलिस के मुताबिक किशोर उनके साथ चला गया। रास्ते में एक और नाबालिग उनके साथ जुड़ गया। इसके बाद वे किशोर को गिन्नौरी और किलोल पार्क होते हुए छोटे तालाब के धोबीघाट की तरफ ले गए।

    पुलिस के अनुसार इस दौरान मुख्य आरोपी जोहेब मोबाइल फोन के जरिए आरोपियों के संपर्क में था। सुनसान जगह पहुंचने के बाद आरोपियों ने किशोर पर हमला कर दिया। पुलिस का दावा है कि इसके बाद उस पर चाकू से वार किए गए जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर वीडियो कॉल के जरिए जोहेब से संपर्क किया और आगे के निर्देश लिए।

    पुलिस पूछताछ में सामने आया कि जोहेब खुद को डॉक्टर बताता था। पुलिस के मुताबिक उसने अपने साथियों को एक वीडियो दिखाकर किशोर के शरीर के एक अंग के बदले बड़ी रकम मिलने का लालच दिया था। इसी कथित लालच को वारदात की मुख्य वजह बताया जा रहा है। पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है कि वास्तव में इस तरह के किसी सौदे की योजना थी या आरोपियों को किसी अन्य मकसद से गुमराह किया गया था।

    श्यामला हिल्स पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू और मृतक का मोबाइल फोन बरामद किया है। पुलिस मोबाइल फोन की जांच कर रही है ताकि हत्या से पहले और बाद में हुई बातचीत की जानकारी सामने आ सके। आरोपियों के मोबाइल फोन और संपर्कों की भी जांच की जा रही है। पुलिस उनके बयानों का मिलान घटनास्थल से मिले साक्ष्यों पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच सामग्री से कर रही है।

    पुलिस को 10 अगस्त को किशोर का शव मिला था। पहचान नहीं होने के कारण शव को दफना दिया गया था। बाद में कपड़ों चप्पलों और हाथ पर बने निशान के आधार पर परिजनों ने उसकी पहचान की। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई और अब शव को कब्र से निकालकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की कार्रवाई की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर हत्या की पूरी साजिश उसके पीछे की वजह और संभावित अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने की कोशिश जारी है। मामले में सामने आए आरोप पुलिस जांच का हिस्सा हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • PWD इंजीनियर आरती यादव की मौत मामले में बड़ा मोड़, पति निलेश यादव पर प्रताड़ना का केस दर्ज

    PWD इंजीनियर आरती यादव की मौत मामले में बड़ा मोड़, पति निलेश यादव पर प्रताड़ना का केस दर्ज


    इंदौर। इंदौर के पलासिया इलाके में PWD की महिला इंजीनियर आरती यादव की मौत के मामले में पुलिस ने करीब 20 दिन बाद उनके पति निलेश यादव के खिलाफ प्रताड़ना से जुड़ी धाराओं में FIR दर्ज की है। आरती की मौत के बाद मायके पक्ष ने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच के लिए SIT का गठन किया था। जांच के बाद पलासिया पुलिस ने गुरुवार देर रात पति के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। पुलिस अब FIR में लगाए गए आरोपों और सामने आए साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच कर रही है।

    आरती यादव PWD में वरिष्ठ इंजीनियर के पद पर पदस्थ थीं। उनके पति निलेश यादव भी लोक निर्माण विभाग में कार्यरत हैं। दोनों की शादी करीब 10 साल पहले हुई थी और दंपती की दो बेटियां हैं। आरती का मायका इंदौर के सुखलिया इलाके में बताया गया है जबकि उनका ससुराल झाबुआ में है। घटना के बाद मायके पक्ष ने आरोप लगाया था कि पति पत्नी के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था और इसी वजह से आरती मानसिक दबाव में थीं।

    पुलिस के मुताबिक आरती ने पलासिया स्थित अपने सरकारी क्वार्टर में फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। इसके बाद उनके पति निलेश उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में उपचार के दौरान अगले दिन आरती की मौत हो गई। घटना के बाद मामला पहले मर्ग के तौर पर जांच में लिया गया था। लेकिन मायके पक्ष की शिकायत और लगाए गए आरोपों के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया।

    जांच के लिए गठित SIT ने मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को खंगाला। पुलिस ने आरती के मायके पक्ष के लोगों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा पति और पत्नी के संबंधों तथा घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने के लिए अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की गई। दंपती की दोनों बेटियों के बयान भी जांच का हिस्सा रहे। पुलिस ने इन बयानों के साथ उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया।

    इससे पहले आरती के भाई उपेन्द्र ने दोनों के बीच लंबे समय से तनाव होने की बात कही थी। मायके पक्ष ने पुलिस से पूरे मामले की गहराई से जांच करने और यदि प्रताड़ना के आरोप सही पाए जाएं तो कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

    आरती की मौत से जुड़े मामले में सामने आए कुछ अन्य दावों की भी अलग-अलग रिपोर्टों में चर्चा हुई थी। मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए थे और घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाए थे। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस सभी तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाकर आगे बढ़ रही है।

    अब पति निलेश यादव के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मामले में कानूनी जांच का नया चरण शुरू हो गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आरती को कथित तौर पर किस तरह की प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था और उसका उनकी मौत से कोई संबंध था या नहीं। जांच में सामने आने वाले बयान और अन्य साक्ष्य आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेंगे।

    फिलहाल पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऐसे संवेदनशील मामले में आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। आरती की मौत के वास्तविक कारणों और पति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • पानी की टंकी में मिली डिकंपोज बॉडी, फिनाइल डालने की सलाह पड़ी भारी; फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने बताया क्यों है खतरनाक

    पानी की टंकी में मिली डिकंपोज बॉडी, फिनाइल डालने की सलाह पड़ी भारी; फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने बताया क्यों है खतरनाक


    इंदौर इंदौर के रावजी बाजार थाना क्षेत्र स्थित जबरन कॉलोनी में एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां एक व्यक्ति का सड़ा-गला शव उसके घर की पानी की टंकी से बरामद किया गया। कई दिनों तक लापता रहने के बाद जब घर से तेज दुर्गंध आने लगी तो पड़ोसियों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने जांच के बाद टंकी से शव बाहर निकलवाया। प्रारंभिक जांच में पानी में डूबने से मौत की आशंका जताई जा रही है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान 45 वर्षीय ओमप्रकाश उर्फ पप्पू मालवीय के रूप में हुई है। वह पेशे से पुताई का काम करता था और जबरन कॉलोनी में अकेले रहता था। परिजनों ने बताया कि उसकी पत्नी और बेटी कई वर्ष पहले उसे छोड़कर चली गई थीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक वह शराब पीने का आदी भी था।

    बताया जा रहा है कि रविवार के बाद से ओमप्रकाश किसी को दिखाई नहीं दिया। पहले लोगों ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन कुछ दिनों बाद उसके घर से तेज बदबू आने लगी। जब लोगों ने घर का गेट खोलकर देखा तो पानी की टंकी से दुर्गंध आ रही थी। सूचना मिलते ही रावजी बाजार थाना पुलिस, एफएसएल टीम और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे।

    करीब सात फीट गहरी और साढ़े तीन फीट चौड़ी पानी की टंकी में लगभग डेढ़ फीट पानी भरा हुआ था। उसी में ओमप्रकाश का शव डूबा मिला। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण शव पूरी तरह डिकंपोज हो चुका था और शरीर की चमड़ी भी निकलने लगी थी। शव की स्थिति इतनी खराब थी कि पूरे इलाके में दुर्गंध फैल गई थी। संकरी टंकी से शव निकालना भी बेहद मुश्किल साबित हुआ। इसके लिए मौके पर मौजूद टीम को फर्श का हिस्सा तोड़ना पड़ा, तब जाकर शव को बाहर निकाला जा सका।

    शव निकालने के दौरान एक दिलचस्प लेकिन महत्वपूर्ण स्थिति भी सामने आई। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बदबू कम करने के लिए पानी की टंकी में फिनाइल डालने की सलाह दी। यहां तक कि कुछ लोग फिनाइल की बोतल भी ले आए थे, लेकिन पुलिस ने तत्काल उन्हें रोक दिया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का रासायनिक पदार्थ डालने से जांच प्रभावित हो सकती है और पोस्टमार्टम के दौरान भी यह गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

    इस पूरे मामले पर फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने भी पुलिस के फैसले को सही बताया। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक विभागाध्यक्ष डॉ. बी.के. सिंह के अनुसार, डिकंपोज शव वाले पानी में फिनाइल या कोई अन्य केमिकल मिलाने से वह शव के हर हिस्से तक पहुंच जाता है। इससे पोस्टमार्टम के दौरान मिलने वाले महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य और निष्कर्ष प्रभावित हो सकते हैं, जिससे मौत के कारणों का सही आकलन करना कठिन हो जाता है।

    उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में शव भले ही अत्यधिक सड़ चुका हो और दुर्गंध असहनीय हो, फिर भी वैज्ञानिक जांच की शुद्धता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। फॉरेंसिक विशेषज्ञ और डॉक्टर कई बार दो से तीन जोड़ी दस्ताने पहनकर पोस्टमार्टम करते हैं, ताकि आवश्यक साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए जांच पूरी की जा सके।

    फिलहाल पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह हादसा था, आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी।

  • शिवपुरी में लेब्राडोर की संदिग्ध मौत, शव लेकर थाने पहुंची महिला ने FIR की मांग की

    शिवपुरी में लेब्राडोर की संदिग्ध मौत, शव लेकर थाने पहुंची महिला ने FIR की मांग की


    शिवपुरी मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक पालतू लेब्राडोर कुत्ते की मौत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शांति नगर क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपने पड़ोसियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उसके आठ माह के पालतू लेब्राडोर को लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला। घटना के विरोध में महिला शुक्रवार को कुत्ते का शव लेकर फिजिकल थाना पहुंची और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    महिला प्रीति परिहार के मुताबिक गुरुवार शाम उनका पालतू लेब्राडोर खाना खाने के बाद घर से बाहर निकल गया था। कुछ देर बाद वह पास स्थित एक आरओ प्लांट संचालक के घर की ओर चला गया। देर रात तक कुत्ता वापस नहीं लौटा तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान आसपास के लोगों से जानकारी मिली कि कुत्ते के साथ मारपीट की गई है।

    प्रीति परिहार का आरोप है कि आरओ प्लांट संचालक, उसके बेटे और ड्राइवर ने मिलकर लाठियों से उनके पालतू कुत्ते की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। उनका यह भी आरोप है कि घटना के बाद कुत्ते के शव को दूर फेंक दिया गया ताकि मामला सामने न आए।

    महिला का कहना है कि जब वह घटना की जानकारी लेने आरोपियों के घर पहुंचीं तो उनके साथ गाली-गलौज की गई। विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और मारपीट करने की कोशिश भी की गई। शुक्रवार सुबह कुत्ते का शव मिलने के बाद वह उसे लेकर सीधे फिजिकल थाना पहुंचीं और पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    अपनी शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित आरओ प्लांट में रात के समय संदिग्ध और अनैतिक गतिविधियां संचालित होती हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    फिजिकल थाना पुलिस का कहना है कि शिकायत प्राप्त हो गई है। मामले में लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • पांच हत्याओं के सनसनीखेज मामले में जांच तेज फरार आरोपी ऋतुराज हिरासत में बुधगांव कनेक्शन और डॉक्टर की डिग्री भी जांच के घेरे में

    पांच हत्याओं के सनसनीखेज मामले में जांच तेज फरार आरोपी ऋतुराज हिरासत में बुधगांव कनेक्शन और डॉक्टर की डिग्री भी जांच के घेरे में


    नरसिंहपुर । नरसिंहपुर जिले के बहुचर्चित पांच हत्याकांड की जांच में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। 19 जुलाई को इंदिरानगर में हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड में फरार चल रहे आरोपी ऋतुराज को पुलिस ने रविवार शाम हिरासत में ले लिया। आरोपी को जबलपुर के मढ़ाताल थाना क्षेत्र से नरसिंहपुर लाया गया है जहां उससे पूरे घटनाक्रम और फरार आरोपियों के संबंध में गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि उसकी पूछताछ से मामले के कई अहम राज सामने आ सकते हैं।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी के जबलपुर में होने की सूचना मिलने के बाद नरसिंहपुर पुलिस की विशेष टीम वहां पहुंची और उसे अभिरक्षा में लेकर जिले आई। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आरोपी ने स्वयं थाने में पहुंचकर आत्मसमर्पण किया था या पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। फिलहाल जांच एजेंसियां उससे हत्या की साजिश वारदात की योजना और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर लगातार पूछताछ कर रही हैं।

    इस हत्याकांड में अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें आनंद लोधी अनुज लोधी और राजा पटेल को दो दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ की गई। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद तीनों आरोपियों को सोमवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पूछताछ के दौरान पुलिस ने हत्या की साजिश पैसों के लेनदेन और फरार आरोपियों की लोकेशन से जुड़े सवाल किए लेकिन पुलिस के अनुसार तीनों आरोपी पहले दिए गए बयानों पर ही कायम रहे और फरार आरोपियों प्रीतम तथा शुभम के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दे सके।

    जांच के दौरान पुलिस का फोकस अब घटना के बाद सामने आए बुधगांव कनेक्शन पर भी है। पुलिस आनंद लोधी के उस दावे की पड़ताल कर रही है जिसमें उसने वारदात के बाद बुधगांव पहुंचकर सतीश पटेल के यहां वाहन छोड़ने की बात कही थी। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इस घटनाक्रम में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी या नहीं और आरोपी के बयान कितने तथ्यात्मक हैं।

    मामले में गिरफ्तार जबलपुर निवासी डॉ. अमित खरे भी जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। पुलिस अब उनकी शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल डिग्री का सत्यापन कराने की प्रक्रिया में जुटी है। इसके लिए जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से पत्राचार किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी डिग्री वैध है या नहीं। पुलिस का मानना है कि जांच के इस पहलू से भी कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

    पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा ने बताया कि फरार आरोपी ऋतुराज से पूछताछ जारी है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं फरार अन्य आरोपियों की तलाश लगातार जारी है। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • नरसिंहपुर हाईवे कांड का सनसनीखेज खुलासा, अवैध रेत कारोबार की दुश्मनी में हाईवा से कुचलकर ली गई पांच जानें

    नरसिंहपुर हाईवे कांड का सनसनीखेज खुलासा, अवैध रेत कारोबार की दुश्मनी में हाईवा से कुचलकर ली गई पांच जानें


    नरसिंहपुर मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में 19 जुलाई को जबलपुर भोपाल नेशनल हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। शुरुआती जांच में जिसे सामान्य सड़क दुर्घटना माना जा रहा था वह दरअसल अवैध रेत कारोबार की खूनी रंजिश का नतीजा निकला। छह दिन तक चली गहन जांच के बाद पुलिस ने खुलासा किया कि यह हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित सामूहिक हत्या थी जिसे दुर्घटना का रूप देने की पूरी तैयारी पहले से कर ली गई थी। इस सनसनीखेज मामले में मुख्य आरोपी शहपुरा जनपद पंचायत सदस्य आनंद पटेल समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं जिनकी तलाश जारी है।

    पुलिस के मुताबिक अवैध रेत खनन और परिवहन के कारोबार में वर्चस्व स्थापित करने के लिए कारोबारी राजेंद्र लोधी को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई थी। वारदात वाले दिन आरोपियों ने राजेंद्र लोधी की हर गतिविधि पर नजर रखी। उसकी लोकेशन लगातार मुख्य आरोपी तक पहुंचाई जाती रही। जैसे ही राजेंद्र अपने साथियों के साथ तय स्थान पर पहुंचा वैसे ही पहले से हाईवे के दोनों ओर खड़े हाईवा वाहनों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और कुचल दिया। इस हमले में राजेंद्र लोधी सहित पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया जिसका इलाज जारी है।

    जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से एक वाहन का टूटा हुआ अंग्रेजी अक्षर ए मिला जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और हत्या में इस्तेमाल हाईवा को हीरापुर बंदरोहा के जंगल से बरामद कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी राजा पटेल ने पूरी साजिश का खुलासा कर दिया जिसके बाद एक के बाद एक आरोपियों की गिरफ्तारी होती चली गई।

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जबलपुर स्थित एक निजी अस्पताल के संचालक डॉ अमित खरे भी इस साजिश का हिस्सा थे। आरोप है कि उन्होंने हत्या को सड़क हादसा दिखाने और सबूत मिटाने के तरीके बताए। वारदात के बाद आरोपियों के बीच हुई बातचीत में मौत की पुष्टि होने पर खुशी जताने जैसी बातें भी सामने आई हैं जो इस साजिश की गंभीरता को दर्शाती हैं।

    पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हाईवा के अलावा थार और फॉर्च्यूनर वाहन भी जब्त कर लिए हैं। शुरुआती जांच के अनुसार राजेंद्र लोधी और मुख्य आरोपी आनंद पटेल के बीच लंबे समय से अवैध रेत कारोबार और आर्थिक हितों को लेकर विवाद चल रहा था। इसी रंजिश ने खूनी रूप ले लिया और पांच लोगों की जान चली गई।

    पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। इस खुलासे के बाद अवैध रेत कारोबार से जुड़े आपराधिक गठजोड़ पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

  • झांसी में महिला प्रधान के बेटे की हत्‍या मामले में खुलासा, पिस्टल से हुई थी हत्या, सिर में फंसी मिली गोली

    झांसी में महिला प्रधान के बेटे की हत्‍या मामले में खुलासा, पिस्टल से हुई थी हत्या, सिर में फंसी मिली गोली

    झांसी। झांसी में महिला प्रधान के बेटे और एलएलबी छात्र संजय सिंह उर्फ संजू (33) की हत्या पिस्टल से किए जाने की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई है। शुक्रवार शाम डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम के दौरान संजय के सिर के भीतर फंसी गोली बरामद की। गोली सिर के पिछले हिस्से में मारी गई थी, जिससे गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई। अब तक पुलिस देशी तमंचे से हत्या की आशंका जता रही थी, लेकिन पोस्टमार्टम के बाद स्पष्ट हो गया कि हमलावर ने पिस्टल का इस्तेमाल किया था।

    रेस्टोरेंट में दोस्तों के साथ खाना खाते समय मारी गोली
    गुरुवार रात संजय अपने चार दोस्तों के साथ इलाइट चौराहे से करीब 300 मीटर दूर स्थित द मेड किचन रेस्टोरेंट में भोजन करने गया था। इसी दौरान एक युवक अंदर पहुंचा और संजय के सिर पर सटाकर गोली मार दी। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। मामले में मृतक के भाई सर्वेश सिंह की शिकायत पर नवाबाद थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

    पेशेवर शूटर होने का शक
    पुलिस का मानना है कि वारदात को जिस तरीके से अंजाम दिया गया, उससे पेशेवर शूटर की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रत्यक्षदर्शियों और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार आरोपी सीधे संजय की टेबल तक पहुंचा, बेहद करीब से एक गोली चलाई और पिस्टल लहराते हुए बाहर निकल गया। पार्किंग में मौजूद गार्ड ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह धक्का देकर बाहर खड़ी बिना नंबर की बाइक पर साथी के साथ फरार हो गया।

    महज छह मिनट में दिया वारदात को अंजाम
    सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक आरोपी रात 9:23 बजे रेस्टोरेंट में दाखिल हुआ और 9:29 बजे हत्या कर बाहर निकल गया। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी बिहारी तिराहा होते हुए रक्सा टोल की दिशा में भागे। एसओजी और सर्विलांस टीम ने घटनास्थल से लेकर रक्सा टोल तक लगे 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है और कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं।

    छह साल से झांसी में रह रहा था संजय
    संजय सिंह मूल रूप से गरौठा क्षेत्र के हैवतपुरा गांव का रहने वाला था। उसकी मां रामदेवी गांव की प्रधान हैं। परिवार में बड़ा भाई सर्वेश और बहन रचना हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। संजय अविवाहित था और पिछले छह वर्षों से झांसी में रिश्तेदार के यहां रहकर अधिवक्ता दशरथ सिंह के पास मुंशी का काम करता था।

    दतिया से लौटने के बाद पहुंचे थे रेस्टोरेंट
    संजय के दोस्त शिवम ने बताया कि गुरुवार शाम वह अधिवक्ता दशरथ सिंह और अन्य साथियों के साथ दतिया स्थित पीतांबरा पीठ के दर्शन कर लौटे थे। वापस आने के बाद सभी लोग द मेड किचन रेस्टोरेंट में खाना खाने पहुंचे, जहां संजय ने अपने मित्र धर्मेंद्र को भी बुला लिया। भोजन समाप्त होने के तुरंत बाद एक युवक आया और संजय को गोली मारकर फरार हो गया।

    परिजनों ने रंजिश से किया इनकार, तीन पहलुओं पर जांच
    मृतक के भाई सर्वेश सिंह ने पुलिस को बताया कि परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और प्रधानी को लेकर भी कोई विवाद नहीं था। हालांकि उन्होंने बताया कि संजय जमीन के कारोबार से भी जुड़ा हुआ था।

    फिलहाल पुलिस जमीन विवाद, लव एंगल और पुरानी रंजिश समेत तीन प्रमुख बिंदुओं पर जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि संजय गांव कम क्यों जाता था और क्या उसके पीछे कोई पुराना विवाद था।