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  • अनूपपुर में युवक ने मां, नाना-नानी और मासूम बहन समेत चार को लाठी-डंडों से पीटा, चार की मौत; कई घायल

    अनूपपुर में युवक ने मां, नाना-नानी और मासूम बहन समेत चार को लाठी-डंडों से पीटा, चार की मौत; कई घायल


    मध्य प्रदेश: के अनूपपुर जिले के ग्राम अमोदा बिजौरा में शनिवार को लाठी-डंडों से किए गए हमले में चार लोगों की मौत की सूचना है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। बताया गया है कि ग्राम मरदरी, थाना नौरोजाबाद निवासी प्रेम सिंह करीब एक सप्ताह पहले अपनी मां अनुपिया बाई के साथ अमोदा बिजौरा स्थित अपने नाना-नानी के घर आया था। सनी धाम के समीप शुक्रवार को किसी बात को लेकर उसका वहां के पंडा गंगा सिंह से विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर प्रेम सिंह ने कथित तौर पर गंगा सिंह के साथ मारपीट की। इसके बाद ग्रामीणों ने युवक को पकड़ लिया और उसके नाना-नानी के घर ले जाकर रस्सी से बांध दिया।

    बताया जा रहा है कि प्रेम सिंह को रस्सी से बंधा देखकर उसकी मां अनुपिया बाई ने उसे खोल दिया। इसके बाद युवक ने कथित तौर पर अपनी ही मां पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। उसने अपने नाना संपत और नानी भन्नी को भी निशाना बनाया। हमले में मां, नाना और नानी की मौत हो गई। इसके बाद आरोपी ने अपने मामा चैन सिंह समेत परिवार के अन्य सदस्यों पर भी हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई।

    इस हमले में करीब पांच वर्षीय मुनका सिंह, भारती सिंह और चंचल समेत कई लोग घायल हो गए। घायलों को तत्काल उपचार के लिए शहडोल मेडिकल कॉलेज भेजा गया। इलाज के दौरान करीब पांच वर्षीय मुनका सिंह ने दम तोड़ दिया। इस तरह घटना में मृतकों की संख्या चार होने की सूचना है। इसी घटनाक्रम में सनी धाम के पंडा गंगा सिंह भी घायल हुए हैं। उन्हें भी उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है।

    वारदात की सूचना मिलते ही अनूपपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंच गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। घटनास्थल पर उमरिया और अनूपपुर, दोनों जिलों की पुलिस मौजूद रही। पुलिस ने आरोपी प्रेम सिंह को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है और वारदात के पीछे के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

    पुलिस द्वारा मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने और घायलों के बयान दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। आरोपी ने परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों पर किस वजह से हमला किया, इसकी जानकारी पूछताछ और जांच के बाद सामने आने की बात कही जा रही है। घटना के बाद अमोदा बिजौरा और आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।

  • नदी में मानव अवशेष मिलने से सनसनी, कमर के नीचे का हिस्सा बरामद, जांच में जुटी पुलिस

    नदी में मानव अवशेष मिलने से सनसनी, कमर के नीचे का हिस्सा बरामद, जांच में जुटी पुलिस


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में नदी के अंदर मानव शरीर का निचला हिस्सा मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मामला रन्नौद थाना क्षेत्र का है जहां अकाझिरी और गुरुकुदवाया गांव के बीच बहने वाली नदी में ग्रामीणों की नजर मानव शरीर के अवशेष पर पड़ी। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और नदी से मिले अवशेष को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि अवशेष किसी महिला के हैं या पुरुष के।

    पुलिस के मुताबिक नदी में कमर से नीचे का हिस्सा मिला है। शरीर का पेट वाला हिस्सा धड़ और सिर मौके पर मौजूद नहीं था। शरीर के अन्य हिस्से नहीं मिलने के कारण मामला और भी उलझ गया है। पुलिस अब नदी के आसपास के इलाके में तलाशी अभियान चला रही है। टीम का प्रयास है कि शरीर के बाकी हिस्सों का पता लगाया जा सके ताकि मृतक की पहचान करने में मदद मिल सके और मौत की परिस्थितियों को समझने के लिए जरूरी सुराग हासिल किए जा सकें।

    मानव शरीर का हिस्सा मिलने की खबर फैलते ही आसपास के गांवों के लोग भी नदी के पास पहुंचने लगे। घटना को लेकर ग्रामीणों में चर्चा का माहौल बन गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और अवशेष को सुरक्षित तरीके से पोस्टमार्टम के लिए भेजा। जांच अधिकारियों का कहना है कि अभी किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से जुड़े दूसरे तथ्यों के सामने आने के बाद ही मौत की वास्तविक स्थिति के बारे में कुछ स्पष्ट हो सकेगा।

    प्रारंभिक जांच में नदी में मौजूद मगरमच्छ को लेकर भी एक संभावना सामने आई है। पुलिस को आशंका है कि नदी में मौजूद मगरमच्छ ने शव के कुछ हिस्सों को खा लिया हो सकता है। इसी वजह से शरीर का बाकी हिस्सा मौके पर नहीं मिला हो ऐसी संभावना जताई जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। इसे केवल शुरुआती जांच के दौरान सामने आया एक संभावित कारण माना जा रहा है। शरीर के अन्य हिस्से मिलने और जांच आगे बढ़ने के बाद ही इस पहलू की सच्चाई स्पष्ट होगी।

    पुलिस मौत की वजह को लेकर भी कई एंगल से जांच कर रही है। यह किसी हादसे का मामला है या व्यक्ति की किसी अन्य कारण से मौत हुई है या फिर मामला आपराधिक घटना से जुड़ा है इसकी पड़ताल की जा रही है। पुलिस आसपास के क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों के दौरान लापता हुए लोगों की जानकारी जुटा रही है। गांवों में ऐसे परिवारों से संपर्क किया जा रहा है जिनके किसी सदस्य के लापता होने की सूचना हो सकती है।

    मृतक की पहचान के लिए पुलिस को शरीर के अन्य हिस्सों के मिलने का इंतजार है। इसके साथ ही पोस्टमार्टम जांच और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों से भी पहचान की दिशा में काम किया जाएगा। पुलिस नदी और आसपास के इलाकों में लगातार तलाश कर रही है। फिलहाल महिला या पुरुष की पहचान नहीं होने और शरीर के कई हिस्से गायब होने के कारण यह मामला रहस्य बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • प्याज गोदाम के पास नाले में मिला नवजात का शव राहगीरों ने दी सूचना पहचान और मौत की वजह तलाश रही पुलिस

    प्याज गोदाम के पास नाले में मिला नवजात का शव राहगीरों ने दी सूचना पहचान और मौत की वजह तलाश रही पुलिस


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के कोलारस कस्बे में सोमवार शाम उस समय हड़कंप मच गया जब राई रोड स्थित प्याज गोदाम के पास एक नाले में नवजात का शव मिला। नाले के पास से गुजर रहे राहगीरों की नजर जब शव पर पड़ी तो उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही कोलारस पुलिस मौके पर पहुंची और रात करीब 8 बजे नवजात के शव को नाले से बाहर निकलवाकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और नवजात की पहचान के साथ उसके जन्म से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।

    पुलिस के अनुसार नवजात की नाभि पर डिलीवरी के दौरान लगाई जाने वाली स्ट्रिप मिली है। इसी वजह से जांच का एक अहम बिंदु यह है कि बच्चे का जन्म अस्पताल में हुआ था या फिर घर पर डिलीवरी हुई थी। पुलिस आसपास के इलाकों में ऐसी महिलाओं और परिवारों से जुड़ी जानकारी जुटा रही है जिनके यहां हाल में बच्चे का जन्म हुआ हो। स्वास्थ्य विभाग से भी आवश्यक जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है ताकि नवजात की पहचान की जा सके।

    घटना के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर नवजात को नाले में किसने और किन परिस्थितियों में छोड़ा। शुरुआती स्तर पर पुलिस इस संभावना को भी जांच में शामिल कर रही है कि किसी महिला ने सामाजिक दबाव या लोकलाज के चलते बच्चे को जन्म देने के बाद उसे वहां छोड़ दिया हो। हालांकि पुलिस के सामने फिलहाल ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे इस संभावना की पुष्टि की जा सके। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।

    नवजात के शव को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाए जाने के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बच्चे की मौत की वजह के साथ यह भी पता लगाने में मदद मिल सकती है कि उसकी मौत जन्म के बाद हुई या वह पहले से मृत था। रिपोर्ट से पुलिस को घटना की परिस्थितियों को समझने में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नवजात को नाले में कब छोड़ा गया। इसके लिए आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस घटनास्थल के आसपास की गतिविधियों और हाल की डिलीवरी से संबंधित जानकारी को भी जांच का हिस्सा बना रही है। आसपास मौजूद लोगों से यह जानकारी जुटाई जा रही है कि उन्होंने किसी महिला या संदिग्ध व्यक्ति को घटनास्थल के आसपास देखा था या नहीं।

    नवजात की नाभि पर मिली डिलीवरी स्ट्रिप जांच में महत्वपूर्ण सुराग मानी जा रही है। इसके जरिए पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि डिलीवरी किस स्थान पर हुई और क्या संबंधित महिला ने किसी स्वास्थ्य केंद्र में उपचार या प्रसव कराया था। फिलहाल पुलिस ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाने की बात कही है।

    कोलारस पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती नवजात की पहचान करना है। पुलिस आसपास के क्षेत्र में जानकारी जुटाने के साथ जन्म और डिलीवरी से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। मामले की पूरी तस्वीर जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • पिता की संदिग्ध मौत का था बदला लेना 21 अगस्त की रात फूफा की हत्या अब पुलिस ने दबोचा आरोपी

    पिता की संदिग्ध मौत का था बदला लेना 21 अगस्त की रात फूफा की हत्या अब पुलिस ने दबोचा आरोपी


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के सिरसौद थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने मोहर सिंह रावत की हत्या के आरोप में उनके भतीजे दिलीप रावत को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी को शक था कि करीब 7 से 8 साल पहले उसके पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के पीछे उसके फूफा मोहर सिंह रावत का हाथ था। इसी बात को लेकर उसके मन में लंबे समय से नाराजगी थी। पुलिस का कहना है कि इसी पुरानी रंजिश के चलते दिलीप ने हत्या की योजना बनाई और वारदात को अंजाम दिया।

    घटना 21 अगस्त की रात रातीकिरार पुलिया के पास हुई। पुलिस के अनुसार दिलीप ने शराब के नशे में मोहर सिंह के साथ मारपीट की। इसके बाद पत्थर से उनके सिर पर हमला किया जिससे उनकी मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी ने शव को सड़क से नीचे ले जाकर छिपाने की कोशिश भी की। हालांकि वह ज्यादा नशे में था और शव को अधिक दूर तक नहीं ले जा सका। इसके बाद वह मौके से फरार हो गया।

    22 अगस्त को जाफरपुर निवासी मिथुन रावत ने सिरसौद थाने में अपने पिता मोहर सिंह के लापता होने की सूचना दी। परिवार के मुताबिक मोहर सिंह 21 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे अपने भतीजे दिलीप के साथ शिवपुरी से छिमछिमा मंदिर जाने की बात कहकर निकले थे। इसके बाद वह घर नहीं लौटे। इसी बीच गांव के युवक दुर्वेन्द्र रावत ने परिजनों को जानकारी दी कि मोहर सिंह रातीकिरार पुलिया के पास पड़े हुए हैं। परिवार के लोग तुरंत वहां पहुंचे तो मोहर सिंह मृत अवस्था में मिले।

    मामले की जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि मृतक के सिर पर गंभीर चोट के निशान थे और सिर बुरी तरह कुचला गया था। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल और साइबर सेल की मदद ली। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई। जांच आगे बढ़ने के साथ ही पुलिस का शक मोहर सिंह के भतीजे दिलीप रावत पर गहराता गया।

    पुलिस के मुताबिक इसी दौरान दिलीप गांव छोड़कर फरार हो गया था। पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। 14 सितंबर को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने दिलीप को शिवपुरी में पकड़ लिया। पुलिस का कहना है कि आरोपी मथुरा से शिवपुरी की ओर आ रहा था। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने कथित तौर पर वारदात और हत्या की वजह के बारे में जानकारी दी।

    पूछताछ में सामने आया कि दिलीप के पिता प्रीतम रावत की करीब 7 से 8 साल पहले संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। यह मौत उसकी बुआ के घर यानी मोहर सिंह के घर पर हुई थी। दिलीप को लंबे समय से शक था कि उसके पिता की मौत के लिए मोहर सिंह जिम्मेदार थे। इसी शक और पुरानी रंजिश को लेकर उसके मन में फूफा के खिलाफ गुस्सा बना हुआ था।

    पुलिस के अनुसार 21 अगस्त की रात शराब के नशे में उसने मोहर सिंह के साथ मारपीट की और पत्थर से सिर पर हमला कर दिया। बाद में शव को ठिकाने लगाने के लिए दोबारा घटनास्थल पर पहुंचा और उसे घसीटकर सड़क से नीचे ले जाने की कोशिश की। लेकिन नशे की हालत में वह सफल नहीं हो सका और मौके से भाग गया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

  • कचरा गाड़ी चोरी का पुलिस ने किया खुलासा: कोलारस से साढ़ौरा तक 50 CCTV ने जोड़ा पूरा रास्ता, डीजल खत्म होने पर छोड़ने का शक

    कचरा गाड़ी चोरी का पुलिस ने किया खुलासा: कोलारस से साढ़ौरा तक 50 CCTV ने जोड़ा पूरा रास्ता, डीजल खत्म होने पर छोड़ने का शक


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के कोलारस में नगर परिषद की कचरा उठाने वाली सरकारी गाड़ी चोरी होने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। 31 अगस्त की रात नगर परिषद परिसर से चोरी हुई टाटा ट्रिपर गाड़ी को पुलिस ने अशोकनगर जिले के साढ़ौरा से बरामद कर लिया है। वाहन की तलाश में पुलिस ने कोलारस से साढ़ौरा तक करीब 50 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और एक के बाद एक मिले सुरागों को जोड़ते हुए चोरी हुई गाड़ी तक पहुंच गई। फिलहाल वाहन को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर कोलारस थाने पहुंचा दिया है जबकि CCTV फुटेज में नजर आए संदिग्ध की तलाश जारी है।

    जानकारी के मुताबिक नगर परिषद कोलारस की टाटा ट्रिपर कचरा गाड़ी क्रमांक MP33L2598 को 31 अगस्त की रात करीब 9:30 बजे नगर परिषद कार्यालय परिसर से चोरी कर लिया गया था। रात में गाड़ी के गायब होने की जानकारी मिलने के बाद नगर परिषद कर्मचारियों ने आसपास के इलाके में तलाश शुरू की लेकिन वाहन का कोई पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और मामले की जांच शुरू हुई।

    जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग उस समय मिला जब CCTV फुटेज में चोरी की गई गाड़ी रात करीब 9:40 बजे रेलवे स्टेशन रोड की तरफ जाती दिखाई दी। इसके कुछ देर बाद रात करीब 10 बजे यही वाहन पूरनखेड़ी टोल प्लाजा से गुजरता हुआ नजर आया। टोल प्लाजा के कैमरों में गाड़ी को ले जाते हुए एक संदिग्ध व्यक्ति भी दिखाई दिया। इस फुटेज ने पुलिस की जांच को नई दिशा दी।

    नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी की शिकायत पर कोलारस थाने में मामला दर्ज किया गया। थाना प्रभारी पुनीत बाजपेई के नेतृत्व में पुलिस टीम ने वाहन की तलाश शुरू की। पुलिस ने केवल एक या दो स्थानों के CCTV पर निर्भर रहने के बजाय पूरे संभावित रास्ते की फुटेज खंगालना शुरू किया। कोलारस से साढ़ौरा तक अलग अलग स्थानों पर लगे करीब 50 CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी गई। कई कैमरों में वाहन की गतिविधियों को जोड़ते हुए पुलिस ने उसके संभावित मार्ग का पता लगाया।

    लगातार जांच के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि चोरी की गई सरकारी गाड़ी अशोकनगर जिले के साढ़ौरा तक पहुंच चुकी है। इसके बाद पुलिस टीम ने साढ़ौरा रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के इलाकों में तलाश शुरू की। इसी दौरान चोरी हुई टाटा ट्रिपर गाड़ी बरामद कर ली गई। वाहन को पुलिस ने कब्जे में लेकर कोलारस थाने भेज दिया।

    पुलिस की जांच में एक और अहम बात सामने आई है। बरामद गाड़ी के टैंक में डीजल नहीं मिला है। ऐसे में प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि रास्ते में डीजल खत्म होने के बाद संदिग्ध ने गाड़ी को साढ़ौरा रेलवे स्टेशन के पास छोड़ दिया और वहां से ट्रेन पकड़कर फरार हो गया। हालांकि यह अभी पुलिस का प्रारंभिक अनुमान है। आरोपी ने वाहन को क्यों छोड़ा और वह किस दिशा में फरार हुआ इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

    अब पुलिस का पूरा ध्यान CCTV फुटेज में दिखाई दे रहे संदिग्ध की पहचान और गिरफ्तारी पर है। पुलिस फुटेज के आधार पर आरोपी की तस्वीर और हुलिए का मिलान कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि चोरी की वारदात अकेले व्यक्ति ने की थी या इसके पीछे कोई और भी शामिल था। नगर परिषद परिसर से सरकारी वाहन चोरी होने के कारण पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है।

    फिलहाल चोरी हुई कचरा गाड़ी बरामद होने से नगर परिषद और पुलिस ने राहत की सांस ली है लेकिन इस मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। 50 CCTV कैमरों से मिले सुरागों ने पुलिस को वाहन तक तो पहुंचा दिया है अब सबसे बड़ी चुनौती उस व्यक्ति तक पहुंचना है जिसने सरकारी गाड़ी को नगर परिषद परिसर से चोरी किया था।

  • बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल

    बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल


    ढाका।
    बांग्लादेश के रंगपुर में हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या का मामला गंभीर विवाद में बदल गया है। पुलिस ने हत्या के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कुछ अहम साक्ष्य सामने नहीं लाए जा रहे हैं।

    सबसे गंभीर सवाल परिवार की महिला सदस्यों से कथित दुष्कर्म को लेकर उठ रहा है। हालांकि, दुष्कर्म के आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की रिपोर्ट में महिलाओं के साथ दुष्कर्म का उल्लेख नहीं किया गया है।

    शवगृह कर्मचारी के दावे से बढ़ा विवाद

    स्थानीय मीडिया के एक स्टिंग ऑपरेशन में शवगृह के एक कर्मचारी ने महिलाओं के शवों से कथित तौर पर वीर्य मिलने का दावा किया। इस दावे के बाद मामले में दुष्कर्म की आशंका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र फॉरेंसिक या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना कि हत्या से पहले निश्चित तौर पर दुष्कर्म हुआ था, फिलहाल जल्दबाजी होगी।

    चारों की गला घोंटकर हत्या

    पुलिस रिपोर्ट के अनुसार स्कूल शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी, बेटी और बेटे की गला घोंटकर हत्या की गई। मामले में गणपति के रिश्तेदार मुग्धो दास और सिद्धार्थ दास को गिरफ्तार किया गया है।

    स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों का आरोप है कि हत्या में और लोग भी शामिल हो सकते हैं और पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इन आरोपों की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    जांच डिटेक्टिव ब्रांच को सौंपी गई

    विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच स्थानीय पुलिस से हटाकर डिटेक्टिव ब्रांच को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी हत्या की परिस्थितियों के साथ-साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

    इस बीच हिंदू संगठनों का विरोध जारी है। संगठनों ने मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फॉरेंसिक जांच में दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि होती है और क्या हत्या में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। इन दोनों सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • 17 वर्षीय किशोर हत्याकांड में पुलिस के सामने नई चुनौती तीन सर्चिंग के बाद मिली सिर्फ पॉलीथिन, 12 लाख के ट्रांजैक्शन की भी जांच

    17 वर्षीय किशोर हत्याकांड में पुलिस के सामने नई चुनौती तीन सर्चिंग के बाद मिली सिर्फ पॉलीथिन, 12 लाख के ट्रांजैक्शन की भी जांच


    भोपाल । भोपाल के श्यामला हिल्स इलाके में 17 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। हत्या के बाद किशोर के शरीर के एक हिस्से को काटकर छोटे तालाब में फेंके जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर तीन बार तालाब में सर्चिंग की लेकिन अब तक उस अंग की बरामदगी नहीं हो सकी है। तलाशी के दौरान पुलिस को एक पॉलीथिन जरूर मिली लेकिन उसमें वह अंग नहीं था जिसकी तलाश की जा रही थी। अब पुलिस आरोपियों के बयानों के साथ उनके बैंक खातों मोबाइल फोन कॉल डिटेल और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच कर रही है ताकि हत्या के पीछे के पूरे नेटवर्क और कथित आर्थिक लालच की वास्तविकता सामने लाई जा सके।

    पुलिस के अनुसार आरोपियों ने वारदात की साजिश 5 अगस्त को रची थी। इसके अगले दिन 6 अगस्त की रात किशोर को 100 रुपए देने का लालच देकर एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया। इसके बाद किलोल पार्क के आसपास उसकी हत्या कर दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि शरीर के हिस्से को काटने के लिए नया शेविंग ब्लेड खरीदा गया था जबकि हत्या में इस्तेमाल छुरी एक विधि विवादित बालक अपने साथ लेकर आया था। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी जोहेब खान के साथ आमिर और तीन विधि विवादित बालकों को पकड़ा है।

    हत्या के बाद किशोर के शरीर के काटे गए अंग को छोटे तालाब में फेंकने की बात आरोपियों ने पुलिस को बताई थी। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने तालाब में तीन अलग अलग बार सर्चिंग की। हर बार उस इलाके के आसपास तलाश की गई जहां आरोपियों ने अंग फेंकने की बात कही थी। तलाशी के दौरान एक पॉलीथिन मिली और आरोपियों ने दावा किया कि इसी पॉलीथिन में अंग को बांधकर तालाब में फेंका गया था। हालांकि जब पुलिस ने इसकी जांच की तो पॉलीथिन के अंदर वह अंग मौजूद नहीं था।

    अब पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि पानी के बहाव के कारण वह दूसरी जगह पहुंच गया हो या कई दिनों तक पानी में रहने के कारण जैविक अपघटन हो गया हो। पानी में मौजूद जीव जंतुओं और अन्य प्राकृतिक कारणों से भी उसके नष्ट होने की संभावना पर जांच की जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी संभावना को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना है। तालाब की गहराई पानी के बहाव और आसपास की भौगोलिक स्थिति को समझकर आगे की सर्चिंग की रणनीति तैयार की जा रही है।

    मामले की जांच में आर्थिक लेन देन भी पुलिस के लिए अहम कड़ी बन गया है। मुख्य आरोपी जोहेब के बैंक खाते में 12 लाख रुपए आने की सूचना सामने आई थी लेकिन पुलिस की तस्दीक में खाते में इतनी रकम जमा होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के बैंक खातों की लेन देन हिस्ट्री खंगालना शुरू कर दिया है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या वारदात से पहले या बाद में किसी बाहरी व्यक्ति की ओर से आरोपियों को कोई रकम मिली थी।

    पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन कॉल डिटेल और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों के संपर्क में कौन लोग थे और वारदात से पहले तथा बाद में उनकी किस किस व्यक्ति से बातचीत हुई। पुलिस इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है कि कथित आर्थिक लालच की जानकारी आरोपियों को कहां से मिली और क्या इसके पीछे किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका थी।

    पूछताछ में आरोपियों के व्यवहार को लेकर भी पुलिस ने जानकारी जुटाई है। पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपियों में घटना को लेकर पछतावे के स्पष्ट संकेत नहीं दिखे और वे कथित तौर पर घटना के बारे में सामान्य तरीके से बात कर रहे थे। अब जांच एजेंसियां उनके आपसी संपर्क और वारदात से पहले तथा बाद की गतिविधियों को जोड़कर मामले की पूरी कड़ी तैयार करने में जुटी हैं।

    फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती किशोर के शरीर के लापता हिस्से की बरामदगी और हत्या के पीछे के वास्तविक मकसद की पूरी पुष्टि करना है। तीन बार तालाब में तलाश के बावजूद सफलता नहीं मिलने के बाद पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल जांच के आधार पर आगे बढ़ रही है। इस मामले में आने वाले दिनों में बैंक लेन देन और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े नए सुराग सामने आने की उम्मीद है।

  • रात में सोए अफसर की सुबह नहीं खुली आंखें, कमरे में मिला शव; न सुसाइड नोट मिला न चोट के निशान

    रात में सोए अफसर की सुबह नहीं खुली आंखें, कमरे में मिला शव; न सुसाइड नोट मिला न चोट के निशान


    कटनी । मध्य प्रदेश के कटनी जिले में आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रहने वाले मानवेंद्र प्रताप सिंह कटनी में आयकर विभाग में तैनात थे और विभागीय गेस्ट हाउस में रह रहे थे। गुरुवार रात वह अपने कमरे में सोने गए थे लेकिन शुक्रवार सुबह काफी देर तक कमरे से कोई हलचल नहीं हुई। जब सरकारी ड्राइवर उन्हें लेने पहुंचा और कई बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद भीतर से कोई जवाब नहीं मिला तो गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को अनहोनी की आशंका हुई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। वहां अधिकारी बिस्तर पर अचेत अवस्था में मिले।

    घटना माधवनगर थाना क्षेत्र के बरगवां इलाके की बताई जा रही है। पुलिस ने मृतक की पहचान मानवेंद्र प्रताप सिंह के रूप में की है। वह बाराबंकी के निलालडिया असंदा क्षेत्र के रहने वाले विजेंद्र प्रताप सिंह के बेटे थे। शुरुआती जांच में कमरे के भीतर किसी तरह के संघर्ष या हिंसा के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। पुलिस को न तो कोई सुसाइड नोट मिला और न ही अधिकारी के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। यही वजह है कि फिलहाल मौत की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल बने हुए हैं।

    बताया गया है कि शुक्रवार सुबह सरकारी ड्राइवर मानवेंद्र प्रताप सिंह के कमरे पर कार की चाबी लेने पहुंचा था। उसने दरवाजे की घंटी बजाई और कई बार दस्तक दी लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। काफी देर तक कमरे से आवाज या किसी प्रकार की हलचल नहीं आने पर गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम के पहुंचने के बाद कमरे का दरवाजा तोड़ा गया और अधिकारी को बिस्तर पर पड़ा देखा गया। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।

    प्रारंभिक स्तर पर अधिकारी की मौत को हार्ट अटैक से जोड़कर देखा जा रहा है लेकिन पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि अधिकारी की तबीयत पहले से खराब थी या रात के दौरान अचानक कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या हुई। कमरे के अंदर किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश या किसी आपराधिक घटना के संकेत मिले हैं या नहीं इसकी भी जांच की जा रही है।

    मानवेंद्र प्रताप सिंह की कटनी में आयकर विभाग के कार्यालय में पोस्टिंग वर्ष 2024-25 के दौरान हुई थी। पोस्टिंग के बाद से वह बरगवां स्थित विभागीय गेस्ट हाउस में ही रह रहे थे। उनका परिवार बाराबंकी में रहता था और नौकरी के कारण वह कटनी में अकेले रह रहे थे। परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है और उनके कटनी पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।

    माधवनगर थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह यादव के मुताबिक मामले की जांच जारी है। परिवार के सदस्यों के पहुंचने के बाद पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा और रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत की सही वजह सामने आएगी। फिलहाल पुलिस ने घटना को लेकर किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष इस मामले में सबसे अहम होंगे। बंद कमरे में अधिकारी की मौत ने विभागीय गेस्ट हाउस में भी चिंता बढ़ा दी है और पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

  • करोड़ों कमाने के लालच में खौफनाक साजिश! 17 वर्षीय किशोर की हत्या मामले में 20 साल का युवक और तीन नाबालिग पकड़े गए

    करोड़ों कमाने के लालच में खौफनाक साजिश! 17 वर्षीय किशोर की हत्या मामले में 20 साल का युवक और तीन नाबालिग पकड़े गए


    भोपाल । भोपाल में 17 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक एक कथित फर्जी डॉक्टर ने करोड़ों रुपये कमाने का लालच देकर किशोर की हत्या की साजिश रची और इस वारदात को अंजाम देने के लिए तीन नाबालिगों समेत अन्य आरोपियों का इस्तेमाल किया। मामले में 20 वर्षीय जोहेब खान 18 वर्षीय आमिर कुरैशी और तीन विधि-विरुद्ध बालकों को पकड़ा गया है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के साथ यह पता लगाने में जुटी है कि इस साजिश में और कौन लोग शामिल थे।

    पुलिस के अनुसार मृतक किशोर इकबाल मैदान और मोती मस्जिद इलाके में पेन तथा चाबी के छल्ले बेचता था। उसकी मां मजदूर नगर स्थित सुलभ कॉम्प्लेक्स में सफाई का काम करती है। आरोपियों ने करीब एक महीने पहले किशोर से दोस्ती की थी। पुलिस का कहना है कि इसी दोस्ती का फायदा उठाकर उसे वारदात वाली जगह तक ले जाने की योजना बनाई गई।

    बताया गया कि 6 अगस्त को दो नाबालिग किशोर के पास पहुंचे और उसे खट्टापुरा के पास कुछ लड़कों से विवाद होने की बात बताई। उन्होंने किशोर से अपने साथ चलने को कहा और बदले में पैसे देने का लालच दिया। पुलिस के मुताबिक किशोर उनके साथ चला गया। रास्ते में एक और नाबालिग उनके साथ जुड़ गया। इसके बाद वे किशोर को गिन्नौरी और किलोल पार्क होते हुए छोटे तालाब के धोबीघाट की तरफ ले गए।

    पुलिस के अनुसार इस दौरान मुख्य आरोपी जोहेब मोबाइल फोन के जरिए आरोपियों के संपर्क में था। सुनसान जगह पहुंचने के बाद आरोपियों ने किशोर पर हमला कर दिया। पुलिस का दावा है कि इसके बाद उस पर चाकू से वार किए गए जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर वीडियो कॉल के जरिए जोहेब से संपर्क किया और आगे के निर्देश लिए।

    पुलिस पूछताछ में सामने आया कि जोहेब खुद को डॉक्टर बताता था। पुलिस के मुताबिक उसने अपने साथियों को एक वीडियो दिखाकर किशोर के शरीर के एक अंग के बदले बड़ी रकम मिलने का लालच दिया था। इसी कथित लालच को वारदात की मुख्य वजह बताया जा रहा है। पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है कि वास्तव में इस तरह के किसी सौदे की योजना थी या आरोपियों को किसी अन्य मकसद से गुमराह किया गया था।

    श्यामला हिल्स पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू और मृतक का मोबाइल फोन बरामद किया है। पुलिस मोबाइल फोन की जांच कर रही है ताकि हत्या से पहले और बाद में हुई बातचीत की जानकारी सामने आ सके। आरोपियों के मोबाइल फोन और संपर्कों की भी जांच की जा रही है। पुलिस उनके बयानों का मिलान घटनास्थल से मिले साक्ष्यों पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच सामग्री से कर रही है।

    पुलिस को 10 अगस्त को किशोर का शव मिला था। पहचान नहीं होने के कारण शव को दफना दिया गया था। बाद में कपड़ों चप्पलों और हाथ पर बने निशान के आधार पर परिजनों ने उसकी पहचान की। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई और अब शव को कब्र से निकालकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की कार्रवाई की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर हत्या की पूरी साजिश उसके पीछे की वजह और संभावित अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने की कोशिश जारी है। मामले में सामने आए आरोप पुलिस जांच का हिस्सा हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • PWD इंजीनियर आरती यादव की मौत मामले में बड़ा मोड़, पति निलेश यादव पर प्रताड़ना का केस दर्ज

    PWD इंजीनियर आरती यादव की मौत मामले में बड़ा मोड़, पति निलेश यादव पर प्रताड़ना का केस दर्ज


    इंदौर। इंदौर के पलासिया इलाके में PWD की महिला इंजीनियर आरती यादव की मौत के मामले में पुलिस ने करीब 20 दिन बाद उनके पति निलेश यादव के खिलाफ प्रताड़ना से जुड़ी धाराओं में FIR दर्ज की है। आरती की मौत के बाद मायके पक्ष ने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच के लिए SIT का गठन किया था। जांच के बाद पलासिया पुलिस ने गुरुवार देर रात पति के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। पुलिस अब FIR में लगाए गए आरोपों और सामने आए साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच कर रही है।

    आरती यादव PWD में वरिष्ठ इंजीनियर के पद पर पदस्थ थीं। उनके पति निलेश यादव भी लोक निर्माण विभाग में कार्यरत हैं। दोनों की शादी करीब 10 साल पहले हुई थी और दंपती की दो बेटियां हैं। आरती का मायका इंदौर के सुखलिया इलाके में बताया गया है जबकि उनका ससुराल झाबुआ में है। घटना के बाद मायके पक्ष ने आरोप लगाया था कि पति पत्नी के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था और इसी वजह से आरती मानसिक दबाव में थीं।

    पुलिस के मुताबिक आरती ने पलासिया स्थित अपने सरकारी क्वार्टर में फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। इसके बाद उनके पति निलेश उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में उपचार के दौरान अगले दिन आरती की मौत हो गई। घटना के बाद मामला पहले मर्ग के तौर पर जांच में लिया गया था। लेकिन मायके पक्ष की शिकायत और लगाए गए आरोपों के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया।

    जांच के लिए गठित SIT ने मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को खंगाला। पुलिस ने आरती के मायके पक्ष के लोगों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा पति और पत्नी के संबंधों तथा घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने के लिए अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की गई। दंपती की दोनों बेटियों के बयान भी जांच का हिस्सा रहे। पुलिस ने इन बयानों के साथ उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया।

    इससे पहले आरती के भाई उपेन्द्र ने दोनों के बीच लंबे समय से तनाव होने की बात कही थी। मायके पक्ष ने पुलिस से पूरे मामले की गहराई से जांच करने और यदि प्रताड़ना के आरोप सही पाए जाएं तो कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

    आरती की मौत से जुड़े मामले में सामने आए कुछ अन्य दावों की भी अलग-अलग रिपोर्टों में चर्चा हुई थी। मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए थे और घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाए थे। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस सभी तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाकर आगे बढ़ रही है।

    अब पति निलेश यादव के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मामले में कानूनी जांच का नया चरण शुरू हो गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आरती को कथित तौर पर किस तरह की प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था और उसका उनकी मौत से कोई संबंध था या नहीं। जांच में सामने आने वाले बयान और अन्य साक्ष्य आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेंगे।

    फिलहाल पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऐसे संवेदनशील मामले में आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। आरती की मौत के वास्तविक कारणों और पति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।