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  • Madhya Pradesh News: गुना में टैंकर हादसे के बाद सड़क पर फैला रिफाइंड ऑयल, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति

    Madhya Pradesh News: गुना में टैंकर हादसे के बाद सड़क पर फैला रिफाइंड ऑयल, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति

    मध्य प्रदेश। के गुना जिले में सोमवार को रिफाइंड ऑयल से भरा एक टैंकर पलटने के बाद सड़क पर तेल फैल गया। घटना चाचौड़ा थाना क्षेत्र में बीनागंज वेयरहाउस के पास हुई। टैंकर के पलटने और सड़क पर बड़ी मात्रा में तेल फैलने की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते कई लोग बाल्टी और डिब्बे लेकर सड़क पर फैला तेल भरने लगे।

    घटना के बाद सड़क पर कुछ समय के लिए अफरा तफरी जैसी स्थिति बन गई। टैंकर से तेल निकलकर सड़क पर फैल गया था। आसपास मौजूद लोगों ने इसे अपने बर्तनों में भरना शुरू कर दिया। कई लोग बाल्टी, डिब्बे और अन्य कंटेनर लेकर मौके पर पहुंचे। सड़क पर तेल जमा होने के कारण वहां से गुजरने वाले लोगों और वाहनों के लिए भी स्थिति असामान्य हो गई।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने वहां मौजूद लोगों को नियंत्रित करने और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने के कारण दुर्घटनास्थल पर भीड़ बढ़ गई थी। पुलिस की मौजूदगी के बाद मौके की स्थिति को व्यवस्थित किया गया और दुर्घटनाग्रस्त टैंकर के आसपास लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया।

    रिफाइंड ऑयल से भरा टैंकर किस वजह से अनियंत्रित होकर पलटा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। हादसे के समय सड़क की स्थिति, वाहन की गति और अन्य परिस्थितियों की जांच की जा सकती है। दुर्घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती सड़क पर फैले तेल के कारण पैदा हुई स्थिति को नियंत्रित करना रही।

    सड़क पर तेल फैलने से फिसलन का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में दुर्घटनास्थल से गुजरने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है। तेल को बर्तनों में भरने के लिए लोगों के बड़ी संख्या में सड़क पर पहुंचने से जोखिम और बढ़ सकता था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को नियंत्रित किया और स्थिति को संभाला।

    बीनागंज क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद दुर्घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुटने का वीडियो और तस्वीरें भी चर्चा में हैं। इनमें लोग बाल्टी और डिब्बे लेकर सड़क पर फैले तेल को इकट्ठा करते नजर आए। टैंकर के पलटने के बाद सड़क पर फैले तेल को लेकर लोगों में उत्सुकता देखी गई और कुछ लोग अपने साथ बर्तन लेकर वहां पहुंच गए।

    घटना ने सड़क दुर्घटनाओं के बाद भीड़ के व्यवहार को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। किसी वाहन से खाद्य तेल या अन्य सामग्री सड़क पर गिरने की स्थिति में लोगों का मौके पर पहुंचना दुर्घटना स्थल को और असुरक्षित बना सकता है। खासकर जब सड़क पर तेल जैसा फिसलन पैदा करने वाला पदार्थ फैला हो, तब वहां मौजूद लोगों और गुजरने वाले वाहनों दोनों के लिए खतरा बढ़ सकता है।

    पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया। दुर्घटनाग्रस्त टैंकर के आसपास लोगों की भीड़ को व्यवस्थित करने के साथ सड़क पर यातायात की स्थिति संभालने की कोशिश की गई। प्रशासन के लिए ऐसे मामलों में दुर्घटना के बाद राहत व्यवस्था के साथ भीड़ नियंत्रण भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

    गुना के चाचौड़ा थाना क्षेत्र में हुई यह घटना इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि टैंकर पलटने के बाद सड़क पर फैले रिफाइंड ऑयल को भरने के लिए बड़ी संख्या में लोग बाल्टी और डिब्बे लेकर पहुंच गए। फिलहाल दुर्घटना के कारणों और टैंकर के पलटने की परिस्थितियों को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और दुर्घटनास्थल पर बढ़ती भीड़ को संभाला।

  • हथकड़ी में नजर आया इंग्लैंड का स्टार तेज गेंदबाज, पुलिस ले गई थाने, मचा हड़कंप

    हथकड़ी में नजर आया इंग्लैंड का स्टार तेज गेंदबाज, पुलिस ले गई थाने, मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज ब्राइडन कार्स से जुड़ी एक घटना ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में डरहम के इस तेज गेंदबाज को डर्बी स्थित एक क्लब के बाहर पुलिस अधिकारियों के साथ हथकड़ी में जाते देखा गया। पुलिस शनिवार रात हुई एक घटना के सिलसिले में मामले की जांच कर रही है।

    इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने रविवार को घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि उसे डर्बी में हुई घटना की जानकारी है और मामले की जांच की जा रही है। बोर्ड ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद जरूरत के मुताबिक आगे की जानकारी साझा की जाएगी।

    पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट की टीम में हैं कार्स

    ब्राइडन कार्स इंग्लैंड की उस टीम का हिस्सा हैं, जिसे पाकिस्तान के खिलाफ लॉर्ड्स में होने वाले दूसरे टेस्ट मैच में उतरना है। हालांकि, पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट के लिए टीम में शामिल होने के बावजूद उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली थी।

    फिलहाल ECB ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि पुलिस जांच के बावजूद कार्स दूसरे टेस्ट के लिए इंग्लैंड की टीम में बने रहेंगे या नहीं।

    इंग्लैंड टीम के अनुशासन पर पहले भी उठे सवाल

    कार्स के खिलाफ जांच ऐसे समय शुरू हुई है, जब इंग्लैंड की टेस्ट टीम में खिलाड़ियों के मैदान से बाहर के व्यवहार और अनुशासन को लेकर चर्चा चल रही है। टेस्ट कप्तान जो रूट ने हाल ही में खिलाड़ियों के जिम्मेदार व्यवहार और अच्छे रोल मॉडल बनने पर जोर दिया था।

    रूट ने एक क्रिकेट पॉडकास्ट में कहा था कि टीम में खिलाड़ियों पर कोई सख्त कर्फ्यू लागू नहीं किया जाएगा, लेकिन उनसे मैदान के बाहर भी समझदारी और जिम्मेदारी से फैसले लेने की उम्मीद की जाती है। उन्होंने कहा था कि इंग्लैंड के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों को अपनी मैदान के बाहर की जिम्मेदारियों का भी एहसास होना चाहिए।

    बेन स्टोक्स भी तोड़ चुके हैं टीम प्रोटोकॉल

    इंग्लैंड की टीम में अनुशासन को लेकर इस साल जून में भी विवाद हुआ था। पूर्व कप्तान बेन स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन पर टीम के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का मामला सामने आया था। इसके बाद दोनों को ओवल में न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट से बाहर कर दिया गया था।

    बाद में स्टोक्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया, जबकि ब्रेंडन मैकुलम ने टेस्ट कोच का पद छोड़ दिया। ऐसे में ब्राइडन कार्स से जुड़ी ताजा घटना ने इंग्लैंड की टीम के अनुशासन और खिलाड़ियों के व्यवहार को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • कटनी में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन, निलंबन के निर्देश और कार्यालय सील

    कटनी में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन, निलंबन के निर्देश और कार्यालय सील

    मध्य प्रदेश:के कटनी में पुलिस प्रशासन से जुड़े गंभीर आरोपों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीएसपी नेहा पच्चीसिया को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के मुख्य सचिव को इस संबंध में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    यह मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के एक प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि हत्या के मामले में नामजद आरोपी रमेश लोधी पर दबाव बनाकर उसकी कंहवारा स्थित जमीन को कथित तौर पर वास्तविक मूल्य से काफी कम कीमत पर दूसरे व्यक्ति के नाम हस्तांतरित कराया गया। इसी प्रकरण में सीएसपी नेहा पच्चीसिया की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।

    जांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार, संबंधित जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.86 लाख रुपये बताया गया है, जबकि उसे कथित रूप से 18.20 लाख रुपये में मारूफ अहमद हनफी के नाम हस्तांतरित कराया गया। मामले में मारूफ अहमद हनफी को कथित फ्रंटमैन के तौर पर बताया गया है। जमीन के लेनदेन को लेकर पुलिस प्रशासन के स्तर पर भी जांच की जा रही है।

    आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कटनी में सीएसपी कार्यालय को भी सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद प्रशासनिक टीम ने की। कार्यालय सील करने का उद्देश्य मामले से संबंधित केस डायरी, सरकारी रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखना बताया गया है, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार की छेड़छाड़ या साक्ष्यों पर प्रभाव की आशंका न रहे।

    मामले में कुठला थाने में एफआईआर संख्या 0738/2026 दर्ज की गई है। सीएसपी नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। दर्ज धाराओं में 61, 198, 199(बी), 308(7) और 318(4) शामिल हैं।

    जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि जमीन के कथित सौदे में सीएसपी से करीबी बताए जा रहे क्षितिज राज बारापत्रे के खातों से धनराशि की फंडिंग की गई थी। इस पहलू की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे लेनदेन की प्रकृति और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या पद के कथित दुरुपयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

    निलंबन की कार्रवाई के साथ गृह विभाग की ओर से विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी जांच को भी तेज किए जाने की बात सामने आई है। अब जांच के दौरान जमीन सौदे, कथित वित्तीय लेनदेन, पुलिस पद के संभावित दुरुपयोग और संबंधित दस्तावेजों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।

    सरकार की इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

  • दिल्ली कूच पर अड़े किसानों ने ठुकराया सीएम का न्योता, 29 अगस्त तक खनौरी बॉर्डर पर मोर्चा जारी

    दिल्ली कूच पर अड़े किसानों ने ठुकराया सीएम का न्योता, 29 अगस्त तक खनौरी बॉर्डर पर मोर्चा जारी


    नई दिल्ली ।
    विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली की ओर बढ़ने पर अड़े किसान संगठनों ने एक बार फिर अपना रुख कड़ा कर लिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक तथा पुलिस अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें आयोजित की गईं, परंतु बॉर्डर खोलने और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति देने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। सहमति न बन पाने की स्थिति में किसानों ने राजमार्ग के एक हिस्से में तंबू गाड़ दिए हैं और वहां अपना मोर्चा स्थापित कर लिया है।

    किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे 29 अगस्त तक खनौरी सीमा पर ही बने रहेंगे। संगठन की ओर से यह भी साफ किया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के यातायात को पूरी तरह बाधित नहीं किया जाएगा। किसान केवल सड़क के एक किनारे बैठकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे ताकि आम जनता को अत्यधिक असुविधा का सामना न करना पड़े। इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री स्तर की वार्ता का न्योता दिया गया था, जिसे किसान प्रतिनिधियों ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

    किसान प्रतिनिधियों का तर्क है कि उनकी प्रमुख मांगें केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र से संबंधित हैं, इसलिए राज्य स्तर की बैठकों से समाधान निकलना संभव नहीं है। उन्होंने मांग रखी है कि केंद्रीय कृषि मंत्री अथवा केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ उनकी सीधी वार्ता आयोजित कराई जाए। उनका कहना है कि पिछले आंदोलनों के दौरान जिन बिंदुओं पर बातचीत रुक गई थी, वहीं से पुनः नए सिरे से आधिकारिक चर्चा शुरू की जानी चाहिए।

    दूसरी ओर, सीमावर्ती क्षेत्रों पर लगातार दूसरे दिन भी पुलिस और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती देखने को मिली। सुरक्षा के दृष्टिकोण से कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और मुख्य रास्तों को सील कर दिया गया है। इसके चलते दिल्ली और पंजाब को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी वाहनों के साथ-साथ यात्री वाहनों की आवाजाही पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। यातायात को सुचारू रखने के लिए प्रशासन ने विभिन्न वैकल्पिक मार्गों से गाड़ियों को डाइवर्ट किया है।

    मध्य प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों के किसान संगठन भी देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे किसान आंदोलनों और उनकी मांगों पर लगातार नजर बनाए रखते हैं। कृषि नीतियों, न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा अन्य वित्तीय राहत से जुड़े मुद्दे देश भर के किसान समुदायों के लिए अत्यंत संवेदनशील और प्रासंगिक माने जाते हैं।

    वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्वयं बॉर्डर पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था तथा कंक्रीट बैरिकेडिंग का जायजा ले रहे हैं। गश्त बढ़ा दी गई है और सभी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पंजाब और हरियाणा दोनों पक्षों के पुलिस अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों से संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

    किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि वे किसी भी स्थिति में कानून और व्यवस्था को अपने हाथ में नहीं लेंगे और उनका यह प्रदर्शन पूरी तरह से अनुशासित तथा शांतिपूर्ण रहेगा। हालांकि जब तक केंद्रीय स्तर पर उनकी वार्ता की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे खनौरी बॉर्डर पर ही अपना ठहराव जारी रखेंगे।

    फिलहाल, सुरक्षा बल पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं और पुलिस प्रशासन स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहा है। सीमा से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं। अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में केंद्रीय स्तर से संवाद की प्रक्रिया शुरू होती है या प्रदर्शन स्थल पर गतिरोध इसी प्रकार बरकरार रहता है।

  • मुजफ्फरनगर के जज की सुरक्षा पर खतरा, 22 को फांसी सुनाने के बाद बिना अनुमति हटाया गया गनर

    मुजफ्फरनगर के जज की सुरक्षा पर खतरा, 22 को फांसी सुनाने के बाद बिना अनुमति हटाया गया गनर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में अत्यंत संवेदनशील मामलों में कड़े फैसले सुनाने वाले फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपनी जान को खतरा बताते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक पत्र लिखा है। न्यायाधीश ने पुलिस महकमे के जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही, मनमानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।

    उल्लेखनीय है कि संबंधित न्यायाधीश ने महज 129 दिनों के अल्प समय में 9 अत्यंत चर्चित और जघन्य आपराधिक मामलों की सुनवाई पूरी करते हुए कुल 22 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। लगातार कठोर फैसले सुनाए जाने के कारण उनकी सुरक्षा व्यवस्था बेहद संवेदनशील मानी जा रही थी। ऐसे में सुरक्षा घेरे में अचानक किए गए बदलाव ने न्यायिक हलकों और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

    डीजीपी को भेजे गए पत्र में न्यायाधीश ने स्पष्ट किया है कि उनकी सुरक्षा में तैनात गनर को बिना किसी ठोस वजह और बिना उनकी पूर्व अनुमति के अचानक हटा दिया गया। पत्र के अनुसार प्रतिसार निरीक्षक द्वारा लिया गया यह निर्णय प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन की श्रेणी में आता है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि गनर को हटाए जाने के तुरंत बाद संबंधित पुलिसकर्मी ने भी बिना कोई सूचना दिए अपनी ड्यूटी छोड़ दी।

    न्यायाधीश ने अपने पत्र में प्रशासनिक अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों के बीच सुरक्षा प्रोटोकॉल में किए जाने वाले भेदभाव की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि आमतौर पर जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या अन्य उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के गनरों को उनकी सहमति या जानकारी के बिना नहीं बदला जाता, लेकिन संवेदनशील न्यायिक पदों पर आसीन अधिकारियों के मामले में इस निर्धारित प्रक्रिया का अनदेखा किया जा रहा है।

    यह मामला केवल मुजफ्फरनगर तक सीमित न होकर पूरे देश के न्यायिक वर्ग की सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय बन गया है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाले न्यायाधीशों की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। सुरक्षा में इस प्रकार की चूक न्यायिक कार्यों के निष्पक्ष और निडर संपादन में बड़ी बाधा बन सकती है।

    पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। इसके साथ ही न्यायाधीश की सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से कड़ा करने और पूर्ववत प्रोटोकॉल को बहाल करने का आग्रह किया गया है, ताकि संवेदनशील मुकदमों की सुनवाई निर्भीक वातावरण में जारी रह सके।

  • कालकाजी में बुजुर्ग संगीतकार की मौत के बाद बेटों ने आने से किया इनकार, पुलिस के समझाने पर पहुंचे अस्पताल

    कालकाजी में बुजुर्ग संगीतकार की मौत के बाद बेटों ने आने से किया इनकार, पुलिस के समझाने पर पहुंचे अस्पताल

    नई दिल्ली ।मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों को झकझोर देने वाली एक दुखद घटना राजधानी के कालकाजी थाना क्षेत्र में सामने आई है। यहां गोविंदपुरी एक्सटेंशन स्थित एक किराए के मकान में रहने वाले 64 वर्षीय संगीतकार रवि डे का शव उनके घर में लगभग पांच दिनों तक संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा रहा। हैरान करने वाली बात यह है कि मृतक के दो बेटे महज साढ़े पांच किलोमीटर की दूरी पर लाजपत नगर में रहते हैं, लेकिन पिता की मृत्यु की सूचना मिलने के बाद भी उन्होंने शुरुआत में आने से साफ इनकार कर दिया।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब पड़ोसियों को बंद मकान से असहनीय बदबू आने लगी। स्थानीय निवासियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही कालकाजी थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। मकान का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे पुलिसकर्मियों ने दरवाजा तोड़कर खोला। अंदर का दृश्य अत्यंत भयावह था, जहां बुजुर्ग का शव बाथरूम के पास गंभीर रूप से क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा हुआ था।

    पुलिस ने तत्काल परिजनों की जानकारी जुटाई और लाजपत नगर में रह रहे उनके दोनों बेटों से संपर्क साधकर घटना की जानकारी दी। हालांकि, बेटों ने मौके पर आने में कोई रुचि नहीं दिखाई और आने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शवगृह में सुरक्षित रखवा दिया।

    पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार समझाने-बुझाने और कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देने के बाद आखिरकार परिजन 16 अगस्त को अस्पताल पहुंचे। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम संपन्न कराया गया और अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया।

    यह घटना समाज में बुजुर्गों के प्रति बढ़ती उपेक्षा और टूटते पारिवारिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी समय-समय पर बुजुर्गों के एकाकीपन और अपनों से दूरी की ऐसी दुखद खबरें सामने आती रही हैं। कालकाजी थाना पुलिस ने इस पूरे मामले में केस दर्ज कर आसपास के लोगों और परिजनों के बयान दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • नैनीताल पुलिस पर पर्यटकों से 18 हजार रुपये वसूली के आरोप, यूपीआई लेनदेन से जियोलिकोट चौकी की भूमिका पर सवाल

    नैनीताल पुलिस पर पर्यटकों से 18 हजार रुपये वसूली के आरोप, यूपीआई लेनदेन से जियोलिकोट चौकी की भूमिका पर सवाल

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के नैनीताल में जियोलिकोट पुलिस चौकी से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें चार पर्यटकों ने तीन कांस्टेबलों पर मारपीट, चालान और इसके बाद करीब 18 हजार रुपये मांगने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों के मुताबिक कथित रकम यूपीआई के माध्यम से अलग-अलग खातों में भेजी गई। भुगतान विवरण सामने आने के बाद मामले में पुलिस की भूमिका के साथ संबंधित बैंक खातों की जांच की मांग भी उठ रही है।

    जानकारी के अनुसार सुनील कुमार, मनीष सिंह, श्रियांश साहू और सुशील राजपूत स्कॉर्पियो से नीम करौली की ओर से लौट रहे थे। जियोलिकोट के पास बच्चों की तिरंगा यात्रा निकल रही थी। पीड़ितों के मुताबिक, वाहन में सवार दो युवकों ने यात्रा में शामिल बच्चों को तिरंगे दिए थे। इसी दौरान 112 पर वाहन सवार युवकों द्वारा स्कूल की बच्चियों के साथ छेड़छाड़ किए जाने की शिकायत की गई।

    इसके बाद पुलिस ने आगे जाकर स्कॉर्पियो को रोका और चारों युवकों को जियोलिकोट चौकी लाया गया। पीड़ितों का आरोप है कि चौकी में उनके साथ मारपीट की गई और बाद में ढाई-ढाई सौ रुपये के चालान काटे गए। हालांकि, उनका दावा है कि कार्रवाई यहीं खत्म नहीं हुई और उनसे उनकी आर्थिक स्थिति तथा पेशे के बारे में जानकारी ली गई।

    पीड़ित पक्ष के अनुसार, एक युवक के पार्लर संचालक होने की जानकारी मिलने पर उससे पांच हजार रुपये मांगे गए। वहीं स्कॉर्पियो मालिक के ठेकेदार होने की बात सामने आने पर कथित तौर पर उससे दस हजार रुपये देने को कहा गया। अन्य युवकों से भी अलग-अलग रकम मांगने का आरोप लगाया गया है।

    मामले का सबसे गंभीर पहलू कथित यूपीआई भुगतान से जुड़ा है। पीड़ितों के मुताबिक, कुल करीब 18 हजार रुपये डिजिटल माध्यम से लिए गए। उपलब्ध भुगतान विवरण के अनुसार, रकम का एक हिस्सा नैनी फिलिंग स्टेशन के खाते में और कुछ राशि वहां कार्यरत एक कर्मचारी के बैंक खाते में भेजी गई।

    इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि भुगतान पुलिस कार्रवाई से संबंधित था तो रकम सीधे आरोपित पुलिसकर्मियों के खातों में जाने के बजाय अन्य खातों में क्यों भेजी गई। इसी वजह से संबंधित बैंक खातों के लेनदेन की विस्तृत जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पीड़ितों ने जियोलिकोट चौकी में तैनात चंदन आर्या, नीरज कुमार और धर्मेंद्र कुमार पर मारपीट तथा रकम मांगने और लेने के आरोप लगाए हैं। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन भुगतान के स्क्रीनशॉट और यूपीआई विवरण होने का दावा मामले को गंभीर बनाता है।

    यह भी जांच का विषय है कि नैनी फिलिंग स्टेशन और संबंधित कर्मचारी के खाते में इससे पहले पुलिसकर्मियों या पुलिस से जुड़े लोगों की ओर से कोई संदिग्ध भुगतान हुआ था या नहीं। बैंक रिकॉर्ड के जरिए तारीख, रकम, भेजने वाले और भुगतान के उद्देश्य की पड़ताल की जा सकती है।

    बताया गया है कि बाद में पीड़ितों को रकम वापस किए जाने की बात सामने आई। हालांकि, रकम लौटाए जाने के बावजूद कथित भुगतान की परिस्थितियों और उसमें शामिल लोगों की भूमिका से जुड़े सवाल बने हुए हैं।

    नैनीताल देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है और यहां पुलिस की कार्यशैली सीधे पर्यटकों के अनुभव तथा क्षेत्र की छवि से जुड़ती है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यूपीआई लेनदेन किन परिस्थितियों में हुआ। जांच से ही यह भी सामने आएगा कि मामला एक घटना तक सीमित था या इसके पीछे कोई व्यापक पैटर्न मौजूद था।

  • बिहार के मोतिहारी में घोड़ागाड़ी से विदेशी शराब की तस्करी का भंडाफोड़, पुलिस ने दो सौ बोतलें जब्त कीं

    बिहार के मोतिहारी में घोड़ागाड़ी से विदेशी शराब की तस्करी का भंडाफोड़, पुलिस ने दो सौ बोतलें जब्त कीं


    नई दिल्ली । 
    बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी क्षेत्र में अवैध शराब की तस्करी को लेकर एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए पारंपरिक परिवहन साधनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए स्थानीय पुलिस ने एक घोड़ागाड़ी को रोककर भारी मात्रा में विदेशी शराब जब्त की है।

    पुलिस को सूचना मिली थी कि तस्कर वाहनों की नियमित जांच से बचने के लिए घोड़े का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस आधार पर पुलिस टीम ने बेघर गांव के पास नाकाबंदी कर संदिग्ध घोड़ागाड़ी को रोका। तलाशी के दौरान उसमें विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खानों से विभिन्न ब्रांडों की लगभग दो सौ बोतलें विदेशी शराब बरामद की गईं।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से तस्करी में संलिप्त एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि उसका एक अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क के मुख्य आपूर्तिकर्ताओं और खरीदारों का पता लगाया जा सके।

    जांच अधिकारियों के अनुसार, राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद से तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। आमतौर पर चार पहिया वाहनों, ट्रकों या यात्री बसों का उपयोग किया जाता था, लेकिन पुलिस की सख्ती के कारण अब ग्रामीण इलाकों के कच्चे रास्तों और जानवरों का सहारा लिया जा रहा है।

    प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह खेप पड़ोसी क्षेत्रों से लाकर स्थानीय स्तर पर ऊंचे दामों में खपाने की योजना थी। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय तस्करों से जुड़े हैं और क्या पूर्व में भी इस माध्यम का उपयोग किया गया था।

    शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुलिस प्रशासन ने सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। संदेह के आधार पर कृषि कार्यों या माल ढुलाई में लगे पारंपरिक साधनों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है ताकि तस्करी के किसी भी प्रयास को विफल किया जा सके।

    उल्लेखनीय है कि अवैध मादक पदार्थों और शराब की अंतरराज्यीय तस्करी की रोकथाम के लिए बिहार पुलिस के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों जैसे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी विशेष जांच अभियान चलाए जाते रहे हैं, जिससे तस्करों के नेटवर्क पर अंकुश लगाया जा सके।

    पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भागे हुए आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। जब्त शराब और वाहन को कानूनी प्रक्रिया के तहत सील कर दिया गया है तथा संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है।

  • बस में सवार बदमाशों ने चालाकी से वारदात को अंजाम देकर व्यापारी का पांच किलो सोने से भरा बैग छीना।

    बस में सवार बदमाशों ने चालाकी से वारदात को अंजाम देकर व्यापारी का पांच किलो सोने से भरा बैग छीना।

    मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में महू-नीमच हाईवे पर एक भीषण और सनसनीखेज लूट की वारदात सामने आई है। बड़नगर से रतलाम लौट रहे एक सराफा व्यापारी को निशाना बनाते हुए अज्ञात बदमाशों ने चलती बस के भीतर से लगभग पांच किलोग्राम सोने के जेवरों से भरा बैग लूट लिया। लूटे गए आभूषणों की अनुमानित कीमत साढ़े सात करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, रतलाम के जैन कॉलोनी निवासी सराफा व्यवसायी अर्पित चौरड़िया आसपास के क्षेत्रों में स्वर्ण आभूषणों का व्यापार करते हैं। वे गुरुवार शाम बड़नगर क्षेत्र में व्यापारियों को जेवर दिखाने और व्यापारिक सिलसिले में गए थे। काम निपटाने के बाद वे रात करीब आठ बजे बड़नगर से रतलाम जाने वाली एक निजी बस में सवार हुए थे।

    व्यापारी के साथ ही बड़नगर से चार-पांच संदिग्ध यात्री भी उसी बस में सवार हुए थे। रात करीब सवा नौ बजे जब बस बिलपांक थाना क्षेत्र के अंतर्गत रेन-मऊ फंटे के पास पहुंची, तब एक यात्री ने उतरने के बहाने चालक से बस रुकवाई। बस के रुकते ही भीतर मौजूद दो अन्य बदमाशों ने झपट्टा मारकर व्यापारी से जेवरों का बैग छीन लिया और बाहर खड़े अपने अन्य साथियों के साथ अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

    घटना के तुरंत बाद पीड़ित व्यापारी ने धराड़ पुलिस चौकी पहुंचकर अधिकारियों को मामले की सूचना दी। साढ़े सात करोड़ रुपये मूल्य के पांच किलो सोने की लूट की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही बिलपांक थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी।

    वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार तथा अपर पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में त्वरित कार्रवाई करते हुए जिले की सभी सीमाओं पर सख्त नाकाबंदी लागू कर दी गई है और संदिग्ध वाहनों की तलाशी ली जा रही है।

    मध्य प्रदेश के मालवा अंचल में हाईवे पर हुई इस बड़ी आपराधिक वारदात के बाद व्यापारिक जगत और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल है। रतलाम और उज्जैन संभाग के सराफा व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन से आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने और लूटे गए आभूषणों को बरामद करने की मांग की है।

    जांच प्रक्रिया को गति देने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वाड की टीमों को मौके पर बुलाया गया है। पुलिस द्वारा बड़नगर से लेकर बिलपांक टोल नाके और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि बदमाशों ने व्यापारी की रेकी की थी और योजनाबद्ध तरीके से बस में सवार होकर वारदात को अंजाम दिया।

    फिलहाल बिलपांक थाना पुलिस ने व्यापारी के बयानों के आधार पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की विशेष टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और दावा किया जा रहा है कि जल्द ही इस बड़ी लूट की गुत्थी सुलझा ली जाएगी।

  • शहडोल में सरकारी क्वार्टर में ASI कैलाश मिश्रा का शव मिला, ड्यूटी पर नहीं पहुंचने के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने खोला दरवाजा

    शहडोल में सरकारी क्वार्टर में ASI कैलाश मिश्रा का शव मिला, ड्यूटी पर नहीं पहुंचने के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने खोला दरवाजा

    मध्य प्रदेश : के शहडोल में पुलिस विभाग से जुड़ी एक घटना सामने आई है, जहां कोतवाली में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक कैलाश मिश्रा का शव उनके सरकारी आवास से बरामद किया गया। ASI के निर्धारित समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंचने के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया। जब काफी कोशिशों के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला तो पुलिसकर्मी उनके सरकारी क्वार्टर पहुंचे।

    साथी पुलिसकर्मियों ने आवास पर पहुंचकर दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद जब दरवाजा खोला गया तो ASI कैलाश मिश्रा का शव बिस्तर पर पड़ा मिला। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की सूचना दी गई।

    सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी की गई। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कैलाश मिश्रा शहडोल कोतवाली में सहायक उप निरीक्षक के पद पर तैनात थे और सरकारी आवास में रह रहे थे। रोजाना की तरह उनके ड्यूटी पर पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी जब वे थाने नहीं पहुंचे तो सहकर्मियों को चिंता हुई।

    पुलिसकर्मियों ने पहले फोन के माध्यम से उनसे संपर्क करने की कोशिश की। लगातार फोन किए जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने सरकारी आवास जाकर स्थिति देखने का निर्णय लिया। वहां पहुंचने के बाद कमरे के भीतर उनका शव मिलने से साथी पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।

    फिलहाल पुलिस ने मौत की वजह को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ASI की तबीयत घटना से पहले कैसी थी और उनकी किसी व्यक्ति से बातचीत या मुलाकात हुई थी या नहीं।

    पुलिस जांच में आसपास की परिस्थितियों और घटनास्थल से प्राप्त जानकारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों की निगरानी में आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।

    सरकारी आवास में पुलिस अधिकारी का शव मिलने की घटना के बाद विभाग में शोक का माहौल है। साथी पुलिसकर्मी और अधिकारी घटना को लेकर जानकारी जुटा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने पर पुलिस का मुख्य फोकस है।