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  • पीएम मोदी की अपील के बाद नाबालिग लड़की की मां ने जताया आभार, एफआईआर वापस लेने की लगाई गुहार

    पीएम मोदी की अपील के बाद नाबालिग लड़की की मां ने जताया आभार, एफआईआर वापस लेने की लगाई गुहार

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र नारेबाजी करने के आरोप में चर्चा में आई 15 वर्षीय नाबालिग लड़की की मां ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि उनकी बेटी को सुधार का अवसर देकर नया जीवन मिला है। उन्होंने कहा कि कठोर कार्रवाई की बजाय क्षमा और मार्गदर्शन का संदेश समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण है। साथ ही उन्होंने बेटी के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की भी अपील की है।

    यह मामला उस समय चर्चा में आया जब एक प्रदर्शन के दौरान नाबालिग लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वह प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाती दिखाई दी। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू की और इस संबंध में मामला दर्ज किया गया। बाद में यह मामला संबंधित थाने को स्थानांतरित कर दिया गया, जहां आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    इस घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश साझा करते हुए कहा कि प्रदर्शनों के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले कई बच्चे परिस्थितियों और बहकावे का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि गाली-गलौज या अपमानजनक भाषा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। समाज को ऐसे बच्चों को अपराधी की तरह देखने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास करना चाहिए ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

    प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद संबंधित नाबालिग लड़की ने भी सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर माफी मांगी। उसने कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ दिल्ली के कनॉट प्लेस घूमने गई थी और वहीं पास में चल रहे प्रदर्शन के दौरान दूसरों के प्रभाव में आकर आपत्तिजनक नारे लगाने लगी। लड़की ने स्वीकार किया कि उससे गंभीर गलती हुई और उसने इसे अपने जीवन की पहली तथा अंतिम भूल बताते हुए देशवासियों से क्षमा मांगी।

    लड़की की मां ने भावुक होकर कहा कि संयोग से जिस दिन प्रधानमंत्री ने क्षमा का संदेश दिया, उसी दिन उनकी बेटी का जन्मदिन भी था। उनके अनुसार यह उनकी बेटी के लिए सबसे बड़ा उपहार है, क्योंकि उसे अपनी गलती सुधारने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि परिवार अपनी भूल स्वीकार करता है और चाहता है कि गलत नाम और उम्र के साथ दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाए, ताकि उनकी बेटी सामान्य जीवन की ओर लौट सके और अपनी पढ़ाई तथा भविष्य पर ध्यान दे सके।

    मां ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकार से एक व्यापक नीति बनाने की भी मांग की। उनका कहना है कि कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए सख्त नियम बनाए जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण हो और उन्हें राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने से भी रोका जाए, क्योंकि कम उम्र में बच्चे आसानी से दूसरों के प्रभाव में आ सकते हैं।

    इस बीच पूरे घटनाक्रम को लेकर सार्वजनिक स्तर पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के सुधारवादी दृष्टिकोण की सराहना की है, जबकि कुछ ने कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। फिलहाल संबंधित एफआईआर और मामले की आगे की कार्रवाई पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार जारी है। यह प्रकरण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया की भूमिका, नाबालिगों की जिम्मेदारी और कानून के बीच संतुलन को लेकर भी नई चर्चा का विषय बन गया है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में भोजन व्यवस्था संभालने वाले जुनैद की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, परिवार को परेशान करने का लगाया आरोप

    जंतर-मंतर प्रदर्शन में भोजन व्यवस्था संभालने वाले जुनैद की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, परिवार को परेशान करने का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर आयोजित CJP प्रदर्शन से जुड़े मोहम्मद जुनैद ने पुलिस द्वारा कथित उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने शीर्ष अदालत में दायर अपनी याचिका में दावा किया है कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार परेशान किया जा रहा है। याचिका में न्यायालय से हस्तक्षेप कर उचित संरक्षण और राहत देने की मांग की गई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदर्शन से जुड़े कई पहलुओं को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा जारी है।

    याचिका के अनुसार, जुनैद का आरोप है कि पुलिस उन्हें दिल्ली से अपने साथ ले गई और कई घंटे तक अपने कब्जे में रखने के बाद हरिद्वार के पास छोड़ दिया। उनका कहना है कि इस दौरान उन्हें कथित रूप से धमकाया भी गया। उन्होंने अदालत को बताया कि इस पूरी घटना के कारण वे मानसिक दबाव में हैं और उन्हें अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

    जुनैद ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस की कार्रवाई केवल उनके तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी परेशान किया जा रहा है। उनके अनुसार, उनके पिता से पूछताछ की गई और उनकी बहन के ससुराल पक्ष के लोगों को भी अनावश्यक रूप से परेशान किया गया। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराई जाए और उनके परिवार को किसी भी प्रकार के कथित उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान की जाए।

    मोहम्मद जुनैद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के नाहल गांव के निवासी हैं। CJP प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका मुख्य रूप से आंदोलन में शामिल लोगों के लिए भोजन और पीने के पानी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की रही। शुरुआत में वे सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देते थे और पर्दे के पीछे रहकर व्यवस्थाएं संभालते थे, लेकिन प्रदर्शन के अंतिम चरण में उनकी पहचान प्रतिभागियों के बीच एक प्रमुख सहयोगी के रूप में बनने लगी।

    बताया गया है कि उन्होंने आंदोलन के भीतर कोई औपचारिक पद नहीं संभाला था। उनकी जिम्मेदारी प्रदर्शन स्थल पर आने वाले लोगों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना थी। इसी भूमिका के कारण उनका नाम उस समय चर्चा में आया, जब पुलिस उनके घर पहुंची और तलाशी की कार्रवाई की गई।

    परिवार का कहना है कि तलाशी के दौरान कुछ दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए गए। उनके अनुसार, पुलिस उनके पिता को पूछताछ के लिए थाने भी लेकर गई थी। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उनके रिश्तेदारों को भी अलग-अलग स्थानों पर परेशान किया गया, जिससे पूरे परिवार में चिंता का माहौल बना हुआ है।

    दूसरी ओर, संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से पहले इन आरोपों का खंडन किया जा चुका है। विशेष रूप से मेरठ में रिश्तेदारों को हिरासत में लेने या उनके खिलाफ किसी कार्रवाई के दावों को पुलिस ने अस्वीकार करते हुए कहा था कि संबंधित थानों में ऐसी किसी कार्रवाई का रिकॉर्ड नहीं मिला। इस कारण मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

    अब इस पूरे प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके निर्देश महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अदालत याचिका में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध तथ्यों और संबंधित पक्षों के जवाब पर विचार करने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी। ऐसे में इस मामले की अगली सुनवाई और न्यायालय की टिप्पणी पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • अमेरिका के सिएटल में सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान फायरिंग, दो की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    अमेरिका के सिएटल में सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान फायरिंग, दो की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    नई दिल्ली । 
    अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य के सिएटल शहर में आयोजित एक लोकप्रिय फूड फेस्टिवल के दौरान हुई गोलीबारी ने लोगों को झकझोर दिया। इस घटना में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि पांच अन्य घायल हुए हैं। घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है और स्थानीय पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में लेकर आम लोगों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी गई।

    जानकारी के अनुसार यह घटना रविवार शाम सिएटल सेंटर परिसर में आयोजित फूड फेस्टिवल के दौरान हुई। उस समय बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में मौजूद थे। अचानक गोलियां चलने की आवाज सुनते ही वहां अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ ही क्षणों में पूरा आयोजन स्थल दहशत के माहौल में बदल गया।

    आपातकालीन सेवाओं और पुलिस दल ने सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने बताया कि दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घायलों में एक दो वर्षीय बच्चा, एक 23 वर्षीय युवक और दो महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। इसके अलावा करीब 40 वर्षीय एक महिला को मामूली चोटें आईं, जिनका प्राथमिक उपचार मौके पर ही किया गया और उन्होंने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार भर्ती किए गए मरीजों में एक महिला की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका ऑपरेशन किया गया है। अन्य मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। चिकित्सकों की टीम लगातार सभी घायलों की निगरानी कर रही है ताकि उन्हें आवश्यक उपचार समय पर मिल सके।

    घटना के तुरंत बाद पुलिस ने पूरे क्षेत्र को खाली कराया और लोगों से जांच पूरी होने तक सिएटल सेंटर से दूर रहने की अपील की। यह परिसर शहर का प्रमुख सांस्कृतिक और मनोरंजन केंद्र माना जाता है, जहां वर्षभर बड़ी संख्या में सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। घटना के समय भी फूड फेस्टिवल में हजारों लोगों की मौजूदगी बताई जा रही है।

    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने कार्यक्रम स्थल के भीतर लगातार कई गोलियों की आवाज सुनी। गोलीबारी के बाद लोग अपने परिवार और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश करने लगे। कई लोग बिना सामान उठाए ही घटनास्थल से बाहर निकल गए। सुरक्षा एजेंसियों ने मौके से साक्ष्य एकत्र कर आसपास के क्षेत्र की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस ने फिलहाल किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी या गोलीबारी के संभावित कारणों के संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आसपास लगे निगरानी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

    यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब हाल के दिनों में अमेरिका के विभिन्न शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर गोलीबारी की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं। इससे पहले एरिजोना के टक्सन शहर में भी गोलीबारी की एक गंभीर घटना हुई थी, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा और हथियारों से जुड़ी चुनौतियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल सिएटल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और लोगों से किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को साझा करने की अपील की गई है।

  • जंतर-मंतर पर देर रात बवाल: प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प, हालात काबू करने के लिए छोड़े गए आंसू गैस के गोले

    जंतर-मंतर पर देर रात बवाल: प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प, हालात काबू करने के लिए छोड़े गए आंसू गैस के गोले


    नई दिल्ली।
    राजधानी के जंतर-मंतर पर देर रात प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प के बाद स्थिति बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को मोर्चा संभालना पड़ा। हालात नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेडिंग पार करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई।

    पुलिस पर डंडे छीनने की कोशिश का आरोप

    स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस और आरएएफ के जवान मौके पर पहुंच गए। पुलिस का आरोप है कि उग्र प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों से डंडे छीनने का प्रयास किया, जिसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए।

    आंसू गैस छोड़कर भीड़ को हटाया गया

    बढ़ते तनाव को देखते हुए आरएएफ ने आंसू गैस के गोले दागकर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल की मदद से इलाके में स्थिति को नियंत्रित किया गया।

    एसीपी घायल, सुरक्षा बढ़ाई गई

    झड़प के दौरान एक एसीपी के घायल होने की जानकारी सामने आई है। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

    फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

  • जहां जन्मा था एडोल्फ हिटलर, उसी ऐतिहासिक इमारत में खुला पुलिस स्टेशन, चरमपंथी गतिविधियों पर लगेगी रोक

    जहां जन्मा था एडोल्फ हिटलर, उसी ऐतिहासिक इमारत में खुला पुलिस स्टेशन, चरमपंथी गतिविधियों पर लगेगी रोक

    नई दिल्ली । ऑस्ट्रिया ने इतिहास के सबसे विवादित और कुख्यात तानाशाह एडोल्फ हिटलर के जन्मस्थान को नई पहचान देते हुए वहां आधिकारिक तौर पर पुलिस स्टेशन शुरू कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य उस इमारत को नव-नाजी समर्थकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने से रोकना और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करना है। वर्षों तक विवादों में रही इस इमारत का व्यापक पुनर्निर्माण करने के बाद इसे पुलिस प्रशासन के उपयोग के लिए तैयार किया गया है।

    यह ऐतिहासिक भवन ऑस्ट्रिया के ब्राउनाउ-एम-इन शहर में स्थित है, जहां 20 अप्रैल 1889 को एडोल्फ हिटलर का जन्म हुआ था। 17वीं सदी में बने इस भवन को लंबे समय तक लेकर यह बहस चलती रही कि इसका भविष्य क्या होना चाहिए। कई विशेषज्ञों का मानना था कि यदि इसे ऐतिहासिक स्मारक का रूप दिया जाता है तो यह चरमपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों के लिए प्रतीकात्मक स्थल बन सकता है। इसी आशंका को देखते हुए सरकार ने इसे सार्वजनिक प्रशासन के उपयोग में लाने का निर्णय लिया।

    इमारत के पुनर्निर्माण पर लगभग 20 मिलियन यूरो, यानी भारतीय मुद्रा में करीब 220 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह परियोजना तय समय से लगभग तीन वर्ष की देरी से पूरी हुई। बाहरी स्वरूप में भी बदलाव किए गए हैं ताकि भवन की पुरानी पहचान कम दिखाई दे और उसे सामान्य सरकारी भवन जैसा रूप दिया जा सके। अब मुख्य प्रवेश द्वार पर पुलिस स्टेशन का आधिकारिक चिन्ह लगाया गया है।

    हालांकि भवन के बाहर स्थित स्मारक पत्थर को यथावत रखा गया है। इस स्मारक पर शांति, स्वतंत्रता और लोकतंत्र का संदेश अंकित है तथा फासीवाद की पुनरावृत्ति न होने की चेतावनी दी गई है। सरकार का मानना है कि यह स्मारक इतिहास की त्रासदी को याद रखने और भविष्य के लिए सीख लेने का महत्वपूर्ण माध्यम बना रहेगा।

    इतिहास के अनुसार, हिटलर के शासनकाल में लाखों लोगों ने उत्पीड़न और नरसंहार का सामना किया। ऑस्ट्रिया भी उस दौर की घटनाओं को लेकर लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाओं का सामना करता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि आधुनिक ऑस्ट्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानून के शासन और मानवाधिकारों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    इस भवन का स्वामित्व कई दशकों तक एक निजी परिवार के पास रहा। बाद में सरकार इसे लीज पर लेकर सामाजिक कार्यों के लिए इस्तेमाल करती रही, लेकिन भविष्य को लेकर विवाद लगातार बना रहा। निजी मालिक और सरकार के बीच कानूनी प्रक्रिया भी चली, जिसके बाद सरकार ने कानून के तहत भवन का अधिग्रहण किया और मुआवजा देकर इसे अपने नियंत्रण में लिया।

    भवन के उपयोग को लेकर कई विकल्पों पर विचार किया गया था। कुछ लोगों ने इसे संग्रहालय बनाने का सुझाव दिया, जबकि कुछ ने भवन को पूरी तरह ध्वस्त करने की वकालत की। हालांकि इतिहासकारों और विशेषज्ञों की राय थी कि भवन को मिटाने के बजाय उसका ऐसा उपयोग किया जाए जिससे चरमपंथी विचारधारा को किसी प्रकार का प्रतीकात्मक लाभ न मिले। विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर अंततः इसे पुलिस स्टेशन में बदलने का निर्णय लिया गया।

    सरकार का मानना है कि भवन में स्थायी पुलिस उपस्थिति यह स्पष्ट संदेश देगी कि नाजी विचारधारा या उसके किसी भी प्रकार के महिमामंडन के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है। साथ ही यह कदम इतिहास की संवेदनशील विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास भी माना जा रहा है।

  • शादी का वादा कर बनाया शारीरिक संबंध, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करता रहा आरोपी गिरफ्तार

    शादी का वादा कर बनाया शारीरिक संबंध, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करता रहा आरोपी गिरफ्तार


    इंदौर  इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ दुष्कर्म और बाद में आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक कथित शोषण करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    हीरानगर थाना पुलिस के अनुसार 27 वर्षीय युवती ने गौरी नगर निवासी हर्ष उर्फ राज चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में युवती ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले दोनों की पहचान हुई थी। मोबाइल पर बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया।

    पीड़िता का आरोप है कि 7 मार्च 2023 को आरोपी उसे अपने घर ले गया, जहां शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह उसे अपने एक परिचित के घर भी ले गया, जहां भी उसके साथ संबंध बनाए गए। युवती का कहना है कि वह शादी के भरोसे आरोपी पर विश्वास करती रही।

    शिकायत के अनुसार जब युवती ने शादी की बात दोहराई तो आरोपी का व्यवहार बदल गया। उसने कथित रूप से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी लगातार उसका शोषण करता रहा।

    युवती ने पुलिस को बताया कि इस वर्ष जनवरी में शादी को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके दौरान आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद भी वह कथित रूप से फोन कर धमकियां देता रहा और मिलने के लिए दबाव बनाता रहा।

    लगातार मानसिक प्रताड़ना और धमकियों से परेशान होकर युवती ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिवार के साथ वह हीरानगर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की भी जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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    Indore, Crime, RapeCase, MadhyaPradesh, Police, Arrest, Hiranagar, CrimeNewsइंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ दुष्कर्म और बाद में आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक कथित शोषण करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    हीरानगर थाना पुलिस के अनुसार 27 वर्षीय युवती ने गौरी नगर निवासी हर्ष उर्फ राज चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में युवती ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले दोनों की पहचान हुई थी। मोबाइल पर बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया।

    पीड़िता का आरोप है कि 7 मार्च 2023 को आरोपी उसे अपने घर ले गया, जहां शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह उसे अपने एक परिचित के घर भी ले गया, जहां भी उसके साथ संबंध बनाए गए। युवती का कहना है कि वह शादी के भरोसे आरोपी पर विश्वास करती रही।

    शिकायत के अनुसार जब युवती ने शादी की बात दोहराई तो आरोपी का व्यवहार बदल गया। उसने कथित रूप से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी लगातार उसका शोषण करता रहा।

    युवती ने पुलिस को बताया कि इस वर्ष जनवरी में शादी को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके दौरान आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद भी वह कथित रूप से फोन कर धमकियां देता रहा और मिलने के लिए दबाव बनाता रहा।

    लगातार मानसिक प्रताड़ना और धमकियों से परेशान होकर युवती ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिवार के साथ वह हीरानगर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की भी जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • प्रदर्शन में शामिल फहाद अहमद को पुलिस ने हिरासत में लिया, स्वरा भास्कर का तीखा बयान, लोकतंत्र और शांतिपूर्ण विरोध को लेकर उठे सवा

    प्रदर्शन में शामिल फहाद अहमद को पुलिस ने हिरासत में लिया, स्वरा भास्कर का तीखा बयान, लोकतंत्र और शांतिपूर्ण विरोध को लेकर उठे सवा


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों की गूंज मुंबई तक पहुंची, जहां प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ता फहाद अहमद को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के साथ की गई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    बताया गया कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों और परीक्षा प्रणाली को लेकर आयोजित प्रदर्शन में कई लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अनुमति से संबंधित नियमों का हवाला देते हुए कार्रवाई की और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इन्हीं में राजनीतिक कार्यकर्ता फहाद अहमद भी शामिल थे। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद घटनास्थल से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जाने लगे, जिनमें पुलिस प्रदर्शनकारियों को अपने साथ ले जाती दिखाई दे रही है।

    स्वरा भास्कर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि फहाद अहमद और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर माहिम पुलिस थाने में रखा गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताते हुए लिखा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं कही जा सकती। अपने संदेश में उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से एकजुट रहने की भी अपील की।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में फहाद अहमद पुलिसकर्मियों से हिरासत में लिए जाने का कारण पूछते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक अन्य वीडियो में उन्हें पुलिस वाहन के भीतर बैठकर घटनास्थल की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए देखा जा सकता है। इन वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि कई अन्य ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जोड़कर सवाल उठाए।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वहीं प्रशासन की ओर से यह कहा गया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

    लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। ऐसे मामलों में प्रशासन का दायित्व सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है, जबकि प्रदर्शनकारी अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत अपनी बात रखने का दावा करते हैं। यही कारण है कि इस तरह की घटनाएं अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बन जाती हैं।

    फिलहाल फहाद अहमद को हिरासत में लिए जाने और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और विभिन्न पक्षों के बयानों के बीच इस मामले ने राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श को नया आयाम दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन की आगे की कार्रवाई और इस विषय पर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • आमिर खान के नाम कथित धमकी से बढ़ी सुरक्षा चिंता, सोशल मीडिया पोस्ट और ऑडियो संदेश की मुंबई पुलिस कर रही जांच

    आमिर खान के नाम कथित धमकी से बढ़ी सुरक्षा चिंता, सोशल मीडिया पोस्ट और ऑडियो संदेश की मुंबई पुलिस कर रही जांच

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान को लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के नाम पर कथित धमकी मिलने का मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस सतर्क हो गई है। अधिकारियों के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित एक पोस्ट और उससे जुड़े ऑडियो संदेश की जांच की जा रही है। हालांकि, इस मामले में अभी तक अभिनेता आमिर खान या उनकी ओर से किसी प्रतिनिधि ने पुलिस के पास कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और संदेश की प्रामाणिकता सहित सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

    मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट और ऑडियो संदेश का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदेश किसने जारी किया, उसका वास्तविक स्रोत क्या है और उसमें किए गए दावों की सत्यता कितनी है। जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते आकलन किया जा सके।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह कथित संदेश आरजू बिश्नोई और टायसन बिश्नोई नाम से जुड़े सोशल मीडिया खातों के माध्यम से साझा किया गया है। इन व्यक्तियों ने स्वयं को लॉरेंस बिश्नोई का सहयोगी बताया है। संदेश में आमिर खान पर कथित रूप से “लव जिहाद” को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। यह दावा अभिनेता के निजी जीवन और हाल के वैवाहिक संबंधों का उल्लेख करते हुए किया गया है। हालांकि, इन आरोपों या संदेश में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस इन्हें जांच के दायरे में रखकर आगे बढ़ रही है।

    कथित ऑडियो संदेश में राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में एक किशोरी से जुड़े आपराधिक मामले का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही कुछ राजनीतिक नेताओं को चेतावनी देने जैसी बातें भी कही गई हैं। पुलिस इन सभी संदर्भों की अलग-अलग जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संदेश का उद्देश्य क्या था और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

    यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे पहले अभिनेता सलमान खान को भी लंबे समय से लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की ओर से धमकियां मिलने के कई मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 1998 के काले हिरण शिकार प्रकरण के बाद से सलमान खान का नाम इस विवाद से जुड़ता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में उनके आवास के बाहर गोलीबारी की घटना और लगातार मिलती धमकियों के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था भी कई स्तरों पर मजबूत की गई थी।

    आमिर खान से जुड़ी कथित धमकी के मामले में फिलहाल पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार का आपराधिक तत्व सामने आता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले पर सतर्कता बनाए हुए है और किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम को गंभीरता से देखते हुए सभी आवश्यक कदम उठा रही है।

  • हरिद्वार में पुलिस ने धार्मिक स्थलों से हटाए 94 लाउडस्पीकर, दोबारा उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

    हरिद्वार में पुलिस ने धार्मिक स्थलों से हटाए 94 लाउडस्पीकर, दोबारा उल्लंघन पर होगी कार्रवाई


    देहरादून। ध्वनि प्रदूषण को लेकर हरिद्वार पुलिस ने जिलेभर में विशेष अभियान चलाते हुए धार्मिक स्थलों से 94 लाउडस्पीकर हटाए हैं। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान ये लाउडस्पीकर निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में संचालित पाए गए थे, जो ध्वनि प्रदूषण नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन था।

    पुलिस की टीमों ने अभियान के तहत हरिद्वार जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले धार्मिक स्थलों का निरीक्षण किया। जहां भी नियमों का उल्लंघन मिला, वहां कार्रवाई करते हुए लाउडस्पीकर हटाए गए। अभियान के दौरान शहरी क्षेत्रों से 31 लाउडस्पीकर और ग्रामीण इलाकों से 63 लाउडस्पीकर हटाए गए। इस तरह पूरे जिले में कुल 94 लाउडस्पीकरों पर कार्रवाई की गई।

    नियमों की जानकारी भी दी गई
    हरिद्वार पुलिस ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के प्रति जागरूक करना भी है। इस दौरान धार्मिक स्थलों के प्रबंधन और संबंधित समितियों को नियमों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जा सकता। वहीं, अनुमति मिलने के बाद भी निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना अनिवार्य है।

    उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति या संस्था बिना अनुमति लाउडस्पीकर चलाती है या तय मानकों से अधिक आवाज में इसका इस्तेमाल करती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    आगे भी जारी रहेगा अभियान
    दरअसल, ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। इन्हीं नियमों के तहत स्थानीय प्रशासन और पुलिस सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों पर ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल की निगरानी करते हैं।

    हरिद्वार पुलिस के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और जहां भी नियमों का उल्लंघन सामने आएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि कार्रवाई विभिन्न धार्मिक स्थलों पर नियमों के उल्लंघन के मामलों में की गई।

  • श्योपुर में पारिवारिक विवाद बना सार्वजनिक हंगामा, पत्नी को बुलाने की मांग पर पानी की टंकी पर चढ़ा युवक; पुलिस जांच में जुटी

    श्योपुर में पारिवारिक विवाद बना सार्वजनिक हंगामा, पत्नी को बुलाने की मांग पर पानी की टंकी पर चढ़ा युवक; पुलिस जांच में जुटी


    मध्य प्रदेश
    के श्योपुर जिले के विजयपुर कस्बे में शनिवार को पारिवारिक विवाद के चलते उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक युवक 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। सूचना पर पुलिस और प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और करीब दो घंटे तक लगातार समझाइश देने के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।

    घटना विजयपुर के बस स्टैंड क्षेत्र की बताई जा रही है। टंकी पर चढ़े युवक की पहचान धीरज खटीक के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक ऊंचाई पर बैठकर बार-बार अपनी पत्नी को मौके पर बुलाने और मीडिया से बात कराने की मांग कर रहा था। पुलिस अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित कराया और स्थानीय लोगों से भीड़ से दूरी बनाए रखने की अपील की, ताकि किसी प्रकार का जोखिम न हो।

    करीब दो घंटे तक चले प्रयासों के दौरान पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने युवक से लगातार बातचीत की। समझाइश और आश्वासन के बाद वह स्वयं नीचे उतरने के लिए तैयार हो गया। प्रशासन ने राहत की सांस ली क्योंकि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और किसी को कोई चोट नहीं पहुंची।

    नीचे उतरने के बाद युवक ने बताया कि उसकी पत्नी लगभग 15 दिन पहले मायके चली गई थी। उसका आरोप था कि उसने इस संबंध में पुलिस से शिकायत भी की थी, लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। युवक का कहना था कि उसकी बात सुनी जाए और उसकी पत्नी को वापस बुलाया जाए। इसी कारण उसने विरोध दर्ज कराने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ने का कदम उठाया।

    दूसरी ओर पुलिस ने मामले को लेकर अलग पक्ष भी सामने रखा है। थाना प्रभारी के अनुसार युवक की पत्नी पहले ही उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा चुकी थी। पुलिस का कहना है कि पत्नी के आवेदन के आधार पर पहले शांति भंग की कार्रवाई भी की गई थी। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि युवक ने पत्नी पर दबाव बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक स्थान पर इस तरह का कदम उठाया। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    प्रशासनिक अधिकारियों ने युवक को भरोसा दिलाया कि उसकी शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई और पुलिस ने क्षेत्र में यातायात एवं सामान्य गतिविधियां बहाल कर दीं। घटना के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे, जिससे कुछ समय के लिए वहां भीड़भाड़ की स्थिति बन गई थी।

    यह घटना एक बार फिर पारिवारिक विवादों के सार्वजनिक रूप लेने और समय रहते संवाद तथा कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में भावनात्मक आवेश में उठाए गए कदम व्यक्ति और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से पूछताछ कर मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।