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  • सीहोर में शांति भंग के आरोप में हिंदूवादी नेता कालू भट्ट गिरफ्तारपुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई

    सीहोर में शांति भंग के आरोप में हिंदूवादी नेता कालू भट्ट गिरफ्तारपुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई


    सीहोर । सीहोर में शनिवार को उस समय तनाव बढ़ गया जब हिंदूवादी नेता और पूर्व पार्षद कालू भट्ट को शांति भंग करने के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया। कालू भट्ट पर आरोप है कि वह भोपाल नाके पर तिरंगे झंडे के नीचे खड़े होकर भड़काऊ भाषण दे रहे थे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें हिरासत में ले लिया और उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए सीहोर एसडीएम कार्यालय ले जाया गया। इस दौरान एक मीडियाकर्मी को भी पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लियाहालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया।

    सीहोर में पिछले कुछ दिनों से माहौल तनावपूर्ण बना हुआ थाविशेष रूप से हरदा में करणी सेना पर हुए पथराव के बाद। इसके बाद से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। पुलिस ने इस दौरान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था। वहीं मुस्लिम समाज ने भी प्रशासन से सोशल मीडिया पर माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।पुलिस प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और शनिवार को कालू भट्ट के भड़काऊ बयान के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी।

    प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से दूर रहें और शांति बनाए रखें। सीहोर एसडीएम तन्मय वर्मासीएसपी डॉ. अभिनंदन शर्मा सहित अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर उपस्थित थे और सुरक्षा का ध्यान रख रहे थे।
    हालांकिप्रशासन द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रित किया गया हैलेकिन अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और कालू भट्ट को शीघ्र ही कोर्ट में पेश किया जाएगा।

  • MP: गुना में 1 जनवरी से पुलिसकर्मियों को बर्थडे और मैरिज एनिवर्सरी पर मिलेगी छुट्टी, SP ने जारी किए नए नियम

    MP: गुना में 1 जनवरी से पुलिसकर्मियों को बर्थडे और मैरिज एनिवर्सरी पर मिलेगी छुट्टी, SP ने जारी किए नए नियम


    गुना।
    लंबी ड्यूटी और काम के बोझ से परेशान पुलिसवालों (Policemen) के लिए अच्छी खबर है। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गुना जिले (Guna District) के पुलिसकर्मियों के लिए नया साल नई खुशियों की सौगात लेकर आएगा। गुना के पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी (SP Ankit Sony) ने पुलिस बल के लिए नए अवकाश नियम (New Leave Rules) जारी किए हैं। अब पुलिस कर्मियों को अपने, पत्नी और बच्चों के जन्मदिन के साथ-साथ शादी की सालगिरह पर एक दिन का अवकाश मिलेगा। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2026 से लागू होगी।

    बता दें कि, कठिन ड्यूटी और काम के दबाव के चलते पुलिसकर्मी अक्सर परिवार के खास मौकों में शामिल नहीं हो पाते थे। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता था। इसी को ध्यान में रखते हुए एसपी ने यह मानवीय निर्णय लिया है, ताकि जवान परिवार के साथ समय बिता सकें।

    नए आदेश के अनुसार, पुलिसकर्मी अपने जन्मदिन, जीवनसाथी के जन्मदिन, बच्चों के जन्मदिन और शादी की सालगिरह पर एक दिन का अनिवार्य आकस्मिक अवकाश ले सकेंगे।

    आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी पुलिसकर्मी के परिवार में घनिष्ठ परिजन के निधन की स्थिति में मामले को संवेदनशील मानते हुए बिना किसी कागजी देरी के तुरंत अवकाश स्वीकृत किया जाएगा। सभी थानों और कार्यालयों को कर्मचारियों की जन्मतिथि और विवाह वर्षगांठ का कैलेंडर बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि छुट्टी स्वीकृति में कोई बाधा न आए।

    एसपी अंकित सोनी के इस फैसले की जिले ही नहीं पूरे पुलिस विभाग में सराहना हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे जवानों का मनोबल बढ़ेगा और पुलिसकर्मियों व उनके परिवारों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।

  • शुजालपुर में बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन ने दिलाया स्कूल बैगपुलिस ने 24 घंटे में ढूंढ निकाला

    शुजालपुर में बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन ने दिलाया स्कूल बैगपुलिस ने 24 घंटे में ढूंढ निकाला


    इंदौर। मध्यप्रदेश के शुजालपुर में एक तीसरी कक्षा की छात्रा की मासूम जिद और पढ़ाई के प्रति गहरी लगन ने पुलिस को भी भावुक कर दिया। मामला शुजालपुर मंडी थाना क्षेत्र का हैजहां सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाई करने वाली चेरी नायक का स्कूल बैग ऑटो में छूट गया। बैग में उसकी किताबें और वर्कबुक थींजिन्हें लेकर बच्ची बेहद चिंतित थी।

    गुरुवार को चेरी अपनी मां पूजादादी कृष्णा और बुआ रंजना के साथ स्कूल गई थी। घर लौटते समय उसका स्कूल बैग ऑटो में ही छूट गयाऔर जब वह घर पहुंची तो बैग नहीं मिला। यह देखकर चेरी फूट-फूटकर रोने लगीक्योंकि उसे इस बात की चिंता थी कि उसकी सारी किताबें और वर्कबुक उसी बैग में थीं।

    बच्ची की जिद ने पुलिस को प्रेरित किया

    परिवार ने चेरी को नया बैग और किताबें दिलाने का भरोसा दियालेकिन चेरी नहीं मानी। उसने कहा कि उसे वही बैग चाहिए और इसके लिए पुलिस से मदद लेनी होगी। उसकी यह मासूम जिद और पढ़ाई के प्रति प्यार ने उसके पिता संदीप नायक और दादा अशोक नायक को भी प्रेरित कियाऔर वे उसे शुजालपुर मंडी थाने ले गए।

    चेरी ने थाने में जाकर एसडीओपी निमिष देशमुख को अपनी परेशानी बताई। उसकी आंखों में आंसू देखकर एसडीओपी ने तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया और बैग ढूंढने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

    सीसीटीवी और ऑटो चालक से मिली मदद

    पुलिस ने शहर भर के सीसीटीवी कैमरे खंगालने की प्रक्रिया शुरू की। सीसीटीवी फुटेज में चेरी एक ऑटो में बैठी दिखीलेकिन समस्या यह थी कि ऑटो की नंबर प्लेट नहीं थी। हालांकिपुलिस ने हार नहीं मानी और ऑटो पर लिखे नाम और उसके डिजाइन के आधार पर तलाश जारी रखी।

    कुछ पूछताछ और जांच के बाद पुलिस ने ऑटो चालक परवेज की पहचान की और उससे संपर्क किया। परवेज ने बताया कि उसे ऑटो में एक स्कूल बैग मिला थाजिसे वह सुरक्षित घर ले गया था। पुलिस ने परवेज से संपर्क किया और अगले दिन शुक्रवार सुबह वह बैग लेकर थाने पहुंचा।

    बच्ची की खुशी और पुलिस की मदद

    जब बैग पुलिस थाने में पहुंचातो चेरी को बुलाया गया। चेरी ने बैग देखकर खुशी से पुलिस को थैंक यू कहा। उसकी मुस्कान देखकर पुलिस टीम को भी संतोष मिला। बैग के मिलने से बच्ची के चेहरे पर चमक आ गईऔर उसकी पढ़ाई में रुकावट नहीं आई।

    पुलिस ने दी सीख

    एसडीओपी निमिष देशमुख ने बताया कि बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन देखकर पूरी पुलिस टीम ने इस काम में बेहद मेहनत की। उन्होंने आगे कहा कि यह घटना समाज के लिए एक संदेश है कि हमें अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेना चाहिएचाहे वह किसी छोटी बच्ची की पढ़ाई के प्रति हो या किसी अन्य समाजिक काम में। साथ हीपुलिस ने ऑटो चालक परवेज को समझाइश दी कि यदि भविष्य में किसी को कोई सामान मिले तो वह उसे पुलिस के पास सौंपे।

  • उज्जैन में नाबालिग से छेड़छाड़ मामले में आटो चालक गिरफ्तार, हिंसा और तोड़फोड़ के बाद पुलिस ने संभाली स्थिति

    उज्जैन में नाबालिग से छेड़छाड़ मामले में आटो चालक गिरफ्तार, हिंसा और तोड़फोड़ के बाद पुलिस ने संभाली स्थिति


    उज्जैन । उज्जैन के महिदपुर रोड पर बुधवार को एक बड़ी घटना ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया। यहां के एक आटो चालक द्वारा एक नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ करने की घटना सामने आई। इस घटना के बाद गुस्साए स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए और आटो चालक के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लियालेकिन इसके बाद हुई हिंसा और तोड़फोड़ ने क्षेत्र में भारी तनाव पैदा कर दिया।

    आरोपित आटो चालक जुबेर मंसूरी को हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। संगठन ने आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया। इसके बाद हिंसक भीड़ ने दुकानों में तोड़फोड़ की और कुछ दुकानों में आग लगा दी। इसके साथ ही संगठन ने मुस्लिम वाहन चालकों को स्कूलों से हटाने की भी मांग कीजिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई।

    घटना का विवरण

    पुलिस के अनुसारजुबेर मंसूरी नामक आटो चालक नियमित रूप से नाबालिगों को कोचिंग सेंटर ले जाता था। बुधवार को उसने एक नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ की। इस घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। हिंदूवादी संगठन के लोग आरोपित को पकड़कर पुलिस के हवाले करने से पहले उसे जमकर पीट भी चुके थे। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और उसके मोबाइल की जांच की। मोबाइल में 20 से अधिक महिलाओं के अश्लील वीडियो मिलेजिनमें से 12 महिलाएं महिदपुर क्षेत्र की थीं और बाकी आठ आसपास के क्षेत्रों से थीं।

    हिंसा और प्रदर्शन
    घटना के बाद गुस्साए लोग सड़क पर उतर आए और महिदपुर रोड को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपित का जुलूस निकालने और उसके मकान को तोड़ने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने मुस्लिम वाहन चालकों को स्कूलों से हटाने की भी मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ दुकानों में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गईजिससे इलाके में भारी नुकसान हुआ। पुलिस ने तत्काल स्थिति को काबू में करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया। पुलिस के कड़े प्रयासों के बाद ही आरोपित का जुलूस निकाला गया और भारी भीड़ के बीच पुलिस ने उसे बचा लिया।

    पुलिस का बयान और जांच

    उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि पुलिस ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। उन्होंने कहा“हमारी प्राथमिकता शांति बनाए रखना है। हमने आरोपित को एक दिन की रिमांड पर लिया है और उसके मोबाइल से बरामद वीडियो की जांच की जा रही है।” पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपित के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है और जल्द ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहालइलाके में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस सतर्कता बरत रही है।

    यह घटना न केवल नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ के कारण चिंता का विषय हैबल्कि इसके बाद का हिंसा और तोड़फोड़ का सिलसिला भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। पुलिस को इलाके में शांति बनाए रखने के लिए कड़ी सुरक्षा तैनात करनी पड़ीऔर मामले की गहराई से जांच की जा रही है। यह घटना यह दर्शाती है कि समाज में सुरक्षा और कानून व्यवस्था की स्थिति पर विचार करने की आवश्यकता हैखासकर नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर।

  • शिवपुरी में आदिवासियों का मतांतरण कराने का मामलाहिंदू संगठनों के विरोध के बाद प्रशासन ने ढहाया अवैध चर्च

    शिवपुरी में आदिवासियों का मतांतरण कराने का मामलाहिंदू संगठनों के विरोध के बाद प्रशासन ने ढहाया अवैध चर्च


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के बदरवास तहसील के कुछ गांवों में आदिवासी और भील परिवारों का कथित रूप से मतांतरण कराकर उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा रहा था। यह मामला तब सामने आया जब हिंदू संगठनों ने इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन को दी। इन संगठनों का आरोप है कि यह प्रक्रिया अवैध तरीके से की जा रही थी और इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी।

    हिंदू संगठनों की सक्रियता और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
    हिंदू संगठनों ने गुढाल डांग गांव में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और प्रशासन को इस बारे में सूचित किया। पुलिस वन विभाग और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर वहां बन रहे एक चर्च को देखा जो अवैध रूप से निर्माणाधीन था। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस चर्च को ढहा दिया और इसके निर्माण से जुड़े लोगों के खिलाफ जांच शुरू कर दी।

    कथित मतांतरण और प्रशासन की भूमिका

    इस मामले में हिंदू संगठनों का कहना है कि आदिवासी और भील परिवारों को विभिन्न लालच देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के गतिविधियां समाज में अस्थिरता और धार्मिक तनाव उत्पन्न कर सकती हैं। पुलिस और प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की और यह सुनिश्चित किया कि ऐसे किसी भी अवैध धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा न मिले।

    प्रशासन की ओर से कदम उठाए गए

    प्रशासन ने इस मामले में गंभीरता दिखाई और अवैध चर्च को ढहाने के साथ-साथ मामले की पूरी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी व्यक्ति या समूह ने इस प्रकार की गतिविधि की है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इस इलाके में किसी तरह का धार्मिक विवाद उत्पन्न न हो और शांति बनाए रखी जाए।

    शिवपुरी जिले के बदरवास तहसील में आदिवासी और भील परिवारों के कथित मतांतरण के मामले ने एक बार फिर से धार्मिक असहमति और समाज में सद्भाव बनाए रखने की आवश्यकता को उजागर किया है। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध चर्च को ढहा दिया है और अब मामले की जांच चल रही है। यह घटना इस बात का संदेश देती है कि किसी भी अवैध गतिविधि के खिलाफ प्रशासन सख्त कदम उठाएगा और समाज में शांति बनाए रखने के लिए कार्य करेगा।

  • छिंदवाड़ा में कानून की धज्जियाँ जन्मदिन पर तलवार लहराते युवक का वायरल वीडियो कोर्ट परिसर में पुलिसकर्मी के साथ बनाई रील

    छिंदवाड़ा में कानून की धज्जियाँ जन्मदिन पर तलवार लहराते युवक का वायरल वीडियो कोर्ट परिसर में पुलिसकर्मी के साथ बनाई रील


    छिंदवाड़ा । मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा शहर के कुण्डीपुरा थाना क्षेत्र में एक युवक का जन्मदिन पार्टी के दौरान तलवार लहराते हुए वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो ने एक बार फिर शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वीडियो में युवक तेज संगीत पर अपने दोस्तों के साथ नाचते हुए खुलेआम तलवार लहरा रहा है जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया है। यह वीडियो इंस्टाग्राम पर ‘सुमित मालवी’ नाम की एक आईडी से पोस्ट किया गया था और इसके बाद से यह शहर भर में चर्चा का विषय बन गया। विशेष रूप से रिहायशी इलाके में इस तरह के हथियारों का प्रदर्शन स्थानीय लोगों में डर और चिंता का कारण बन रहा है।

    दूसरी ओर हैरान करने वाली बात यह है कि युवक का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें वह छिंदवाड़ा जिला न्यायालय परिसर के भीतर एक पुलिसकर्मी के साथ रील बनाता हुआ नजर आ रहा है। इस वीडियो में बैकग्राउंड में गाने के बोल हैं  कचहरी अपना ठिकाना है” और कोतवाली से रिश्ता पुराना है जो उसकी बेखौफ मानसिकता को उजागर करता है।इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पुलिस का कहना है कि यह घटना कानून और व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती पेश करती है। पुलिस ने इंस्टाग्राम आईडी के आधार पर युवक की पहचान शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक रूप से हथियारों का प्रदर्शन और प्रतिबंधित क्षेत्रों में इस तरह की रील बनाने के लिए युवक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने यह भी दर्शाया कि युवा वर्ग में कानून के प्रति कितनी लापरवाही और बेखौफ मानसिकता फैल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ समाज में असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं और पुलिस प्रशासन को इसे सख्ती से नियंत्रित करना चाहिए।

  • गोवा अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जा सकता है भारतथाइलैंड से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू

    गोवा अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जा सकता है भारतथाइलैंड से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू


    नई दिल्ली । गोवा के बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में 6 दिसंबर को हुए भयंकर अग्निकांड में कम से कम 25 लोग मारे गए थेजिनमें क्लब के कई कर्मचारी भी शामिल थे। इस हादसे के बाद नाइटक्लब के मालिक सौरभ और गौरव लूथरादोनों भाईथाइलैंड के फुकेट भाग गए थे। गोवा पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी थीऔर अब खबर है कि उन्हें अगले 24 से 48 घंटे में भारत लाया जा सकता है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसारलूथरा भाइयों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही हैऔर जल्द ही उन्हें थाइलैंड से भारत लाया जा सकता है। विदेश मंत्रालय ने उनके पासपोर्ट को कैंसल कर दिया है और इंटरपोल ने उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया है। इसके अलावादिल्ली की एक अदालत ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी थीजिसमें उन्होंने यह दावा किया था कि गोवा में उनकी जान को खतरा है और उन्हें पीट-पीट कर मार डाला जाएगा।

    अग्निकांड के बाद गोवा पुलिस ने क्लब के पांच कर्मचारियों और प्रबंधकों को गिरफ्तार किया है। इन कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही हैजबकि सौरभ और गौरव लूथरा की गिरफ्तारी के लिए कार्यवाही चल रही है। जांच समितिजो इस घटना की गहन जांच कर रही हैने गोवा के अन्य प्रमुख व्यक्तियोंजैसे क्लब के जमीन के मालिक प्रदीप घाडी अमोणकर और आरपोरा-नागोवा के सरपंच रोशन रेडकर से भी पूछताछ की है। अमोणकर को गहन पूछताछ के लिए शनिवार देर रात तक तलब किया गया था।
    सरकार की ओर से लूथरा भाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उनके प्रत्यर्पण के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस भीषण अग्निकांड के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को न्याय दिलाया जा सके।

  • बालाघाट से माओवादी आतंक का सफाया आखिरी बचे दीपक और रोहित ने किया आत्मसमर्पण

    बालाघाट से माओवादी आतंक का सफाया आखिरी बचे दीपक और रोहित ने किया आत्मसमर्पण


    बालाघाट । 90 के दशक से माओवादी आतंक का शिकार रहे बालाघाट जिले से अब माओवादी गतिविधियों का पूर्ण रूप से सफाया हो गया है। गुरुवार कोमाओवादी संगठन के आखिरी सक्रिय सदस्य दीपक और रोहित ने अपने साथियों की तरह हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया। हालांकिपुलिस की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई हैलेकिन विश्वस्त सूत्रों के अनुसारदोनों माओवादी ने कोरका स्थित सीआरपीएफ कैंप में आत्मसमर्पण किया है। पुलिस अब समर्पण से जुड़ी आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है और जल्द ही इस बारे में आधिकारिक जानकारी देने के लिए एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर सकती है।

    माओवादी समस्या और बालाघाट का इतिहास

    बालाघाट जिला मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है और यहां 90 के दशक से माओवादियों की उपस्थिति काफी सक्रिय रही थी। इस क्षेत्र में माओवादी संगठन द्वारा हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया गयाजिससे इलाके में लाल आतंक का माहौल बन गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में माओवादियों द्वारा भय फैलाया गयाऔर स्थानीय प्रशासन और पुलिस की ताकत को चुनौती दी गई। इसके कारण न केवल प्रशासन को कठिनाइयों का सामना करना पड़ाबल्कि नागरिकों की जिंदगी भी प्रभावित हुई थी।

    माओवादी संगठन द्वारा इलाके में कई बार हमले किए गएजिसमें पुलिसकर्मियों और नागरिकों की जानें गईं। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय प्रशासन को माओवादी गतिविधियों को समाप्त करने के लिए गंभीर कदम उठाने पर मजबूर किया। समय-समय पर सुरक्षा बलों और माओवादी समूहों के बीच मुठभेड़ें होती रहींलेकिन अंततः यह प्रक्रिया धीरे-धीरे कमजोर पड़ती गई।

    समर्पण और माओवादी संगठन का कमजोर होना

    दीपक और रोहित का आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक है कि माओवादी संगठन अब बालाघाट में पूरी तरह से खत्म हो चुका है। कुछ समय पहले छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ इलाके में भी माओवादियों के एक बड़े समूह ने आत्मसमर्पण किया थाजिनमें एक करोड़ के इनामी माओवादी रामधेर भी शामिल था। इसके बाददीपक और रोहित के समर्पण की खबरें इंटरनेट मीडिया पर तेजी से फैली थींऔर यह माना जा रहा था कि बालाघाट से माओवादी गतिविधियों का अंत निकट है।

    दीपक और रोहित के समर्पण से यह साफ हो गया है कि माओवादी संगठन के अधिकांश सदस्य अब मुख्यधारा में लौट आए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिकइन दोनों के समर्पण से माओवादी संगठन के स्थानीय नेटवर्क पर काफी असर पड़ा है। बालाघाट और आसपास के क्षेत्रों में अब माओवादी गतिविधियों का कोई विशेष खतरा नहीं रहा।

    पुलिस की रणनीति और समर्पण कार्यक्रम

    पुलिस ने माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर देने के लिए समर्पण योजना की शुरुआत की थीजिसके तहत माओवादी संगठनों के सदस्य आत्मसमर्पण करने पर न केवल सुरक्षा प्रदान की जाती हैबल्कि उन्हें समाज में पुनः एकीकृत करने के प्रयास भी किए जाते हैं। इस योजना के तहत कई माओवादी अब आत्मसमर्पण कर चुके हैंऔर सरकार उन्हें पुनर्वासरोजगार और शिक्षा की सुविधाएं मुहैया करा रही है।

    दीपक और रोहित का आत्मसमर्पण इस योजना का ही एक हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि यह समर्पण केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि माओवादी संगठन के लिए भी एक बड़ा संदेश है। यह दिखाता है कि समय के साथ माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और सामाजिक विकास की ओर बढ़ने का समय आ गया है।

    आगे का रास्ता

    दीपक और रोहित के समर्पण के बादपुलिस प्रशासन ने सुरक्षा बलों को उच्चतम स्तर पर अलर्ट कर दिया है ताकि किसी भी प्रकार के विरोधी गतिविधियों को रोका जा सके। साथ हीपुलिस इस समर्पण को लेकर अब जल्द ही एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर रही हैजिसमें इस घटना की पूरी जानकारी दी जाएगी और आगे के कदमों पर भी चर्चा की जाएगी।

    यह कदम बालाघाट जिले के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ हैजहां माओवादी गतिविधियों का अंत हुआ है। इस समर्पण के बादप्रशासन और सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि इस इलाके में शांति और विकास की राह खुली है। साथ हीयह अन्य माओवादी क्षेत्रों के लिए भी एक संदेश है कि अगर वे हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटते हैंतो उन्हें पुनर्वास और समर्थन मिलेगा।

  • छिंदवाड़ा में स्लीपर बस पलटी छह घायल दो की हालत गंभीर

    छिंदवाड़ा में स्लीपर बस पलटी छह घायल दो की हालत गंभीर



    छिंदवाड़ा ।
    छिंदवाड़ा जिले के हर्रई थाना क्षेत्र में सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एक बड़ी सड़क दुर्घटना हुईजिसमें एक स्लीपर बस अनियंत्रित होकर पलट गई। यह बस टीकमगढ़ से नागपुर जा रही थी और दुर्घटना तेदनी के पास हुई। इस हादसे में कुल छह यात्री घायल हुए हैंजिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। के अनुसारयह हादसा रात के लगभग 3 बजे हुआजब बस अचानक असंतुलित हो गई और सड़क किनारे पलट गई। बस पलटते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। घायलों को तुरंत स्थानीय अस्पताल भेजने की व्यवस्था की गईऔर गंभीर रूप से घायल यात्रियों को नरसिंहपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
    बाकी घायल यात्रियों का इलाज छिंदवाड़ा जिले के स्थानीय अस्पतालों में जारी है। हादसे के बाद पुलिस और हाईवे पेट्रोलिंग टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई और राहत कार्य शुरू किया। चूंकि यह हादसा रात में हुआ थाइसलिए बचाव कार्य में कुछ दिक्कतें आईं। लेकिनस्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से सभी घायलों को बस से बाहर निकालकर अस्पताल भेज दिया गया। समय पर किए गए इस राहत कार्य ने यात्रियों के लिए बड़ी राहत प्रदान की।

    दुर्घटना के कारणों का पता अभी तक नहीं चल पाया हैलेकिन यह माना जा रहा है कि बस का संतुलन बिगड़ने के कारण यह हादसा हुआ। दुर्घटना के बादपुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। स्थानीय प्रशासन ने घायल यात्रियों की मदद के लिए अस्पतालों में विशेष इंतजाम किए हैं और उन्हें हर संभव सहायता देने की कोशिश की जा रही है। छिंदवाड़ा जिले में इस प्रकार की सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं। स्लीपर बसों का संचालन लगातार बढ़ रहा हैलेकिन सुरक्षा उपायों की कमी और ओवरस्पीडिंग जैसी समस्याएं इन हादसों को बढ़ावा दे रही हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्त यातायात नियमों का पालन और बेहतर निगरानी की जरूरत है। इस हादसे ने यह भी साफ किया है कि रात के समय होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में बचाव कार्य में समय की अहमियत है। पुलिस और अन्य राहत टीमों द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई ने कई यात्रियों की जान बचाई। आने वाले समय में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को और भी कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।

    अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बस के ड्राइवर की कोई गलती थी या तकनीकी खराबी के कारण यह दुर्घटना हुई। पुलिस और प्रशासन इस मामले की जांच कर रहे हैंताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। घायलों की स्थिति के बारे में बताया गया कि गंभीर रूप से घायल दो यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद नरसिंहपुर भेजा गया हैजहां उनका इलाज किया जाएगा। बाकी घायलों का इलाज स्थानीय अस्पतालों में जारी है और उनकी स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

    इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के मुद्दे को गंभीर बना दिया है। यात्रियों और ड्राइवरों को भी जागरूक करने की आवश्यकता है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और अपनी यात्रा को सुरक्षित बनाएं। कुल मिलाकरयह एक दर्दनाक हादसा थालेकिन समय पर किए गए राहत कार्य ने कई लोगों की जान बचाई। अब देखना होगा कि प्रशासन इस तरह के हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • जानें—कार में ब्लैक-फिल्म लगाने पर कितना जुर्माना लगता है, किसे है छूट..

    जानें—कार में ब्लैक-फिल्म लगाने पर कितना जुर्माना लगता है, किसे है छूट..


    नई दिल्ली/ हाल ही में देश के कई राज्यों में कारों पर ब्लैक या टिंटेड फिल्म लगाने वालों पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई तेज कर दी है। दिल्ली यातायात पुलिस ने सिर्फ एक हफ्ते में 2,235 से अधिक चालान काटे, जबकि उत्तर प्रदेश के मेरठ में ‘ऑपरेशन ब्लैक कैट’ चलाकर तीन दिन में 454 वाहनों पर चालान किए गए। आंकड़े बताते हैं कि लाखों लोग अब भी इस नियम को या तो जानते नहीं, या जानबूझकर उसका उल्लंघन करते हैं। सिर्फ दिल्ली में पिछले एक साल में 20,232 चालान ब्लैक फिल्म को लेकर किए गए। लेकिन आखिर ब्लैक फिल्म हटाने पर इतनी कड़ाई क्यों है? इसका सीधा संबंध सड़क सुरक्षा, कानून व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से है।

    लोग ब्लैक फिल्म क्यों लगवाते हैं?
    अक्सर कार मालिक कुछ कारणों से ब्लैक/टिंटेड फिल्म लगवा लेते हैं- कार के अंदर गर्मी को कम करने के लिए  ज़्यादा प्राइवेसी पाने के लिए मॉडिफिकेशन और लग्जरी लुक के शौक के चलते  कानून की जानकारी न होने के कारण  लेकिन फायदे के बावजूद यह पूरी तरह अवैध है-चाहे फिल्म हल्की ही क्यों न हो या VLT मानकों को पूरा करती हो।

    कानून क्या कहता है?
    इस विषय में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सबसे महत्वपूर्ण है।सुप्रीम कोर्ट का 2012 का आदेश Abhishek Goenka vs Union of India कोर्ट ने साफ कहा- कार खरीदने के बाद बाहर से किसी भी प्रकार की फिल्म लगवाना गैर-कानूनी है, चाहे वह ब्लैक हो, कलर्ड हो, स्मोक्ड हो या हल्की ही क्यों न हो।पुलिस को अधिकार है कि वह मौके पर फिल्म उतरवाए और चालान करे।

    CMVR नियम 100 (1989)
    यह नियम फैक्ट्री में बने ग्लास के VLT Visible Light Transmission मानक तय करता है-फ्रंट और रियर विंडशील्ड – कम से कम 70% विजिबिलिटी साइड विंडो – कम से कम 50% विजिबिलिटी अर्थात् कार कंपनियां हल्का टिंट दे सकती हैं लेकिन यह फैक्ट्री से ही होना चाहिए और मानक के भीतर होना चाहिए। बाजार में लगवाई गई कोई भी फिल्म अवैध है।

    ब्लैक फिल्म से होने वाले खतरे

    1. सड़क सुरक्षा को बड़ा जोखिम
    ब्लैक या स्मोक्ड फिल्म से विजिबिलिटी 40–70% तक कम हो जाती है।
    रात, धुंध, बारिश या हाईवे पर इससे दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

    2. अपराधों को बढ़ावा
    पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि- ब्लैक फिल्म के कारण कार के अंदर क्या हो रहा है, यह बाहर से दिखाई नहीं देता। अपहरण, छेड़छाड़, तस्करी और कई आपराधिक गतिविधियों में ऐसे वाहनों का उपयोग बढ़ता है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें सुरक्षा के लिए खतरा बताया था।

    कितना जुर्माना लगता है?

    अधिकतर राज्यों में चालान- 100 से 1,000 कुछ राज्यों में इसे बढ़ाकर- ₹2,000 तक कर दिया गया है। बार-बार पकड़े जाने पर जुर्माना और अधिक लगाया जा सकता है। पुलिस मौके पर फिल्म उतरवाने का अधिकार भी रखती है।

    किन लोगों को छूट मिलती है?

    केवल Z+ या Z श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त VIPs को वह भी सरकारी अनुमति पत्र के साथ।
    Ministers, MPs, MLAs, Judges-किसी को भी व्यक्तिगत छूट नहीं। छूट सिर्फ विशेष सुरक्षा श्रेणी के लिए है। फिल्म हटाने का सुरक्षित तरीका फिल्म को खींचकर नहीं उतारें। हेयर ड्रायर या हीट गन से ग्लास को हल्का गर्म करें। किनारे से धीरे-धीरे फिल्म निकालें। बचा गोंद ग्लास क्लीनर या साबुन-पानी से साफ करें।

    क्या इससे इंश्योरेंस क्लेम पर असर पड़ता है?

    हाँ! अवैध मॉडिफिकेशन होने पर- क्लेम कम किया जा सकता है या पूरी तरह रिजेक्ट भी हो सकता है अगर पहले चालान हो चुका है  तो बीमा कंपनी इसे रूल वायलेशन मानकर केस और सख्ती से जांचती है।

    पुलिस कैसे जांच करती है?

    VLT मीटर टिंट मीटर से विजुअल इंस्पेक्शन – अगर फिल्म साफ दिख रही हो, तो चालान तुरंत

     किया जाता है।