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  • MP: BJP विधायक का छलका दर्द, 'कुछ साल पहले तक CM, आधी कैबिनेट हमारी होती थी, अब कुछ…'

    MP: BJP विधायक का छलका दर्द, 'कुछ साल पहले तक CM, आधी कैबिनेट हमारी होती थी, अब कुछ…'


    मध्य प्रदेश ।मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने सागर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। प्रदेश के सबसे वरिष्ठ विधायकों में शुमार गोपाल भार्गव ने मंच से ब्राह्मण समाज और मौजूदा हालात को लेकर अपनी पीड़ा खुलकर जाहिर की। उनका कहना था कि आज कई संगठनों का एक ही एजेंडा रह गया है ब्राह्मणों को दबाना, उन्हें हाशिए पर ले जाना और उनके खिलाफ माहौल बनाना।

    आज ब्राह्मण समाज आंखों में खटक रहा है

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोपाल भार्गव ने कहा कि ब्राह्मण समाज आज कई लोगों की आंखों में खटक रहा है। उन्होंने चिंता जताते हुए सवाल किया कि आखिर नियम-कानून बनाते समय हमेशा ब्राह्मण समाज को ही क्यों निशाना बनाया जाता है। भार्गव ने कहा कि अब समय आ गया है कि ब्राह्मण समाज एकजुट होकर अपनी सामाजिक और धार्मिक पहचान की रक्षा के लिए आगे आए।

    कुछ साल पहले तक सीएम और आधी कैबिनेट हमारी होती थी

    अपने संबोधन में वरिष्ठ विधायक ने राजनीतिक परिदृश्य में आए बदलावों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक मुख्यमंत्री हमारे होते थे, प्रशासन में अधिकारी हमारे होते थे और यहां तक कि आधी से ज्यादा कैबिनेट भी ब्राह्मण समाज से आती थी। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि गिने-चुने लोग ही बचे हैं। भार्गव का यह बयान न केवल समाज की स्थिति पर सवाल उठाता है, बल्कि सत्ता और प्रतिनिधित्व में आए बदलाव की ओर भी संकेत करता है।

    यूजीसी और नियमों पर उठाए सवाल

    गोपाल भार्गव ने यूजीसी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और अन्य संस्थाओं के नियमों को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकतर नियम और नीतियां ब्राह्मण समाज के खिलाफ ही बनाई जा रही हैं। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए समाज से जागरूक होने और संगठित रहने की अपील की।

    पहले भी आ चुके हैं संवेदनशील बयान

    यह मामला इसलिए और गंभीर माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में कुछ आईएएस अधिकारियों के बयान भी चर्चा में रहे हैं। पहले आईएएस संतोष वर्मा का ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिया गया विवादित बयान सामने आया, फिर आईएएस नियाज खान ने सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समाज के समर्थन में टिप्पणी की। अब एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता का ऐसा बयान पूरे मुद्दे को और संवेदनशील बना रहा है।

    सम्मान समारोह में दिया गया बयान

    गौरतलब है कि विधायक गोपाल भार्गव रविवार 1 फरवरी 2026 को सागर शहर के रविंद्र भवन में आयोजित ब्राह्मण समाज की पत्रिका के विमोचन एवं मेधावी छात्रों के सम्मान समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इसी मंच से उन्होंने यह बयान दिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे चुका है।
  • भारतीय लुटेरे बयान पर सियासत गरमाई: BJP ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर किया हमला, कांग्रेस पर इतिहास तोड़ने का आरोप

    भारतीय लुटेरे बयान पर सियासत गरमाई: BJP ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर किया हमला, कांग्रेस पर इतिहास तोड़ने का आरोप


    नई दिल्ली। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान ने राजनीतिक गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। अंसारी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि इतिहास में जिन “विदेशी आक्रांताओं” को लाया जाता है, उन्हें असल में भारतीय लुटेरे माना जाना चाहिए। उन्होंने इस संदर्भ में महमूद गजनवी और लोदी वंश जैसे आक्रमणकारियों का उदाहरण भी दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया।

    BJP का कड़ा रुख
    बीजेपी ने इस बयान को देश की भावनाओं के खिलाफ करार दिया और इसे “बीमार मानसिकता” बताया।

    पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुदांशु त्रिवेदी ने कहा कि यह वक्तव्य इतिहास और देश की स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाला है।

    उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं को भारत की मिट्टी में जन्मा लुटेरा बताना देश की बदनामी का कारण बनता है और ऐसे बयान से भ्रम फैलता है।

    कांग्रेस पर आरोपों की झड़ी
    बीजेपी के नेताओं ने सीधे कांग्रेस को निशाना बनाया।

    शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर दावा किया कि कांग्रेस और उसके समर्थक उन आक्रांताओं की महिमा मंडित करते हैं जिन्होंने मंदिरों को नष्ट किया।

    प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है और आक्रांताओं के कृत्यों को नजरअंदाज करती है। उन्होंने कांग्रेस को ‘आधुनिक मुस्लिम लीग’ भी कहा।

    BJP का तर्क: इतिहास तोड़ा जा रहा है
    BJP प्रवक्ता सुदांशु त्रिवेदी ने कहा कि मुगल शासक बगदाद के खलीफा के नाम पर शासन करते थे, जैसे ब्रिटिश वायसराय ब्रिटिश राजाओं के प्रतिनिधि होते थे।
    उनका कहना है कि अंसारी का यह बयान देश की भावना के खिलाफ और भ्रम फैलाने वाला है।
    इस मामले ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक घमासान बढ़ा दिया है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और यह विवाद अभी भी जारी है।

  • चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    नई दिल्ली । देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थलों बद्रीनाथ केदारनाथ और गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने की सुगबुगाहट ने देश के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर इसे लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने इस संभावित फैसले का पुरजोर समर्थन कर सबको चौंका दिया है। इमाम इलियासी ने इसे पूरी तरह आस्था का विषय करार देते हुए तर्क दिया है कि जिस प्रकार इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है उसी तरह हिंदू धर्मस्थलों को भी अपने नियम तय करने का पूरा अधिकार है।

    आस्था और मर्यादा की दलील इमाम उमर अहमद इलियासी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर धर्मस्थल की अपनी गरिमा और मर्यादा होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक मुसलमान का गंगोत्री या केदारनाथ जैसे पवित्र सनातनी केंद्रों में क्या काम? उनके अनुसार यदि कोई मुस्लिम ऐसी जगहों पर जाता है जहां सदियों पुरानी सनातनी परंपराएं जुड़ी हैं तो वहां वैचारिक या शारीरिक टकराव की स्थिति बन सकती है। उन्होंने नसीहत दी कि मुसलमानों को दूसरे धर्मों की अत्यंत पवित्र जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। इमाम ने तिरुपति बालाजी मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इसी प्रकार के कड़े नियम लागू हैं और सभी समुदायों को एक-दूसरे के धार्मिक नियमों और सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। उनके मुताबिक इस मुद्दे पर राजनीति करना व्यर्थ है क्योंकि यह सीधे तौर पर किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है।

    मंदिर समितियों की एकजुटता वर्तमान स्थिति यह है कि गंगोत्री मंदिर समिति ने पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय ले लिया है। वहीं बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी संबंधित हितधारकों और तीर्थ पुरोहितों के साथ इस विषय पर आम सहमति बना ली है। अब बस बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाना बाकी है। हालांकि समितियों ने यह स्पष्ट किया है कि सनातन धर्म में सच्ची आस्था रखने वाले किसी भी व्यक्ति का स्वागत किया जाएगा चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि का हो। दूसरी ओर हरिद्वार की गंगा सभा ने भी हर की पौड़ी पर इसी तरह की पाबंदी लगाने की मांग तेज कर दी है जिससे यह अभियान पूरे उत्तराखंड में फैलता दिख रहा है।

    सियासी घमासान और विरोध के स्वर जैसे-जैसे यह मामला चर्चा में आ रहा है उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति बताया है। उत्तराखंड कांग्रेस का आरोप है कि सरकार बेरोजगारी और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के भावनात्मक विवाद पैदा कर रही है। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गंगोत्री जैसे ऊंचे और पवित्र स्थानों पर पहले से ही कोई मुसलमान नहीं जाता लेकिन वहां पहचान साबित करने जैसी अनिवार्य शर्तें लगाना समाज में नफरत का जहर घोलने जैसा है। फिलहाल उत्तराखंड सरकार ने इस संवेदनशील विषय पर फूंक-फूंक कर कदम रखने का संकेत दिया है और कहा है कि सभी मंदिर समितियों का पक्ष सुनने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।

  • BJP का कांग्रेस पर हमला: थरूर की गंभीर की तारीफ पर फिर उठे ‘फतवे’ के सवाल

    BJP का कांग्रेस पर हमला: थरूर की गंभीर की तारीफ पर फिर उठे ‘फतवे’ के सवाल



    नई दिल्ली। नागपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 से पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय क्रिकेट कोच गौतम गंभीर के साथ सेल्फी शेयर की और उनकी तारीफ की, जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। BJP का आरोप है कि थरूर की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस की राजनीति के खिलाफ है और अब उन्हें पार्टी से ‘फतवा’ मिल सकता है।

    भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस को थरूर की नागपुर यात्रा, गंभीर से मुलाकात या उनकी प्रशंसा में से कौन सी बात ज्यादा खलती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या थरूर के खिलाफ एक और “कांग्रेस फतवा” जारी होने वाला है।

    थरूर ने गंभीर को “प्रधानमंत्री मोदी के बाद सबसे कठिन काम करने वाला इंसान” बताया और कहा कि लाखों लोग उनके फैसलों पर सवाल उठाते हैं, फिर भी वह शांत रहते हैं और आगे बढ़ते हैं। उन्होंने गंभीर की नेतृत्व क्षमता की तारीफ करते हुए उन्हें सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

    गंभीर ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि जब समय आएगा, तब कोच के कथित ‘असीमित अधिकार’ पर सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने लिखा कि खुद के खिलाफ खड़ा देखकर उन्हें हंसी आ रही है।

    यह विवाद राजनीतिक स्तर पर बढ़ता जा रहा है, क्योंकि थरूर की आलोचना और प्रशंसा दोनों ही पक्षों के बीच नई बहस का कारण बन गई है।

  • हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”

    हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”


    नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर तीखा हमला बोला है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान मीडिया से बातचीत में सरमा ने दावा किया कि भाजपा में शामिल होने से पहले वे राहुल और प्रियंका की अंदरूनी लड़ाई के शिकार रहे।

    सरमा ने कहा, “गांधी परिवार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। हाल के राजनीतिक फैसलों से यह साफ दिखता है कि राहुल गांधी नहीं चाहते कि प्रियंका गांधी केरल में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करें।

    उन्हें असम में भेजा गया, इसका यही मतलब है।”

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस में राहुल गांधी अपने करीबी नेताओं और गुट के जरिए सत्ता बनाए रखना चाहते हैं, जबकि प्रियंका उस गुट का हिस्सा नहीं हैं। सरमा ने बताया, “मैं 22 साल तक कांग्रेस में रहा हूं, मुझे अंदर की पूरी जानकारी है। यही वजह है कि प्रियंका को केरल की बजाय असम में जिम्मेदारी दी गई।”

    हिमंत सरमा बीजेपी में शामिल होने के बाद से लगातार कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमलावर रहे हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सियासी जानकार अब इस सवाल पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या वाकई राहुल और प्रियंका के बीच अंदरूनी मतभेद हैं, या यह विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

  • दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी

    दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मच गया है लेकिन उनके राजनीतिक गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल में अब तक इस मामले पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिग्विजय सिंह ने हाल ही में संघ और भाजपा की प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट किया था जिस पर विवाद छिड़ गया है। इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने नाराजगी जताई है लेकिन ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खामोशी का माहौल बना हुआ है।

    कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि यह पोस्ट पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक खासकर उनके बेटे जयवर्धन सिंह और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह उनके समर्थन में खड़े हैं। जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के संगठन के प्रति समर्पण को व्यक्त करते हुए राहुल गांधी की यात्रा से जुड़े कुछ फोटो भी पोस्ट किए और कहा कि उनके पिता के लिए संगठन सर्वोपरि है।पूर्व मुख्यमंत्री के संगठन के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाने वालों को डॉ. गोविंद सिंह ने गलत बताया।

    उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के संगठन के प्रति समर्पण पर संदेह करना अनुचित है और उनके द्वारा की गई पोस्ट केवल एक व्यंग्य है न कि भाजपा या संघ की प्रशंसा।दिग्विजय सिंह की पोस्ट के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में उनके कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेताओं जैसे पूर्व मंत्री केपी सिंह और राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके साथ ही उनके विरोधी भी फिलहाल चुप हैं जिससे यह साफ है कि कांग्रेस के नेता शायद पार्टी नेतृत्व के रूख का इंतजार कर रहे हैं।

    वहीं भाजपा के नेताओं ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ हमलावर रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दिया जबकि नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सरदार पटेल के रूप में निरूपित किया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे दिग्विजय सिंह की राज्यसभा में दोबारा जाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश बताया। अब देखना होगा कि दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट का असर कांग्रेस पार्टी और उनके गढ़ ग्वालियर-चंबल में किस प्रकार होता है और क्या इस विवाद से पार्टी में कोई बड़े बदलाव होते हैं।

  • कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र अभियान: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासत में गरमा गए पारे

    कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र अभियान: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासत में गरमा गए पारे




    बेंगलुरु।
    कर्नाटक कांग्रेस सरकार का बुलडोज़र अभियान अब राजनीति का नया विवाद बन गया है। 22 दिसंबर को सुबह 4 बजे कोगिलु गांव के फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट में 400 से ज्यादा घरों को गिराया गया। अधिकांश प्रभावित परिवार मुस्लिम समुदाय से हैं। इस कार्रवाई से सैकड़ों लोग बेघर हो गए और ठंड में सड़कों पर या अस्थायी शेल्टरों में रात गुजारने को मजबूर हैं।कर्नाटक सरकार का कहना है कि ये घर उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास झील किनारे सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बने थे।
    निवासियों की आपत्ति
    स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और पुलिस ने जबरदस्ती उन्हें बेदखल किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई लोग 25 सालों से इलाके में रह रहे हैं और उनके पास वैध आधार कार्ड व वोटर आईडी हैं। निकाले गए ज्यादातर लोग प्रवासी और मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं।

    विरोध प्रदर्शन और सियासी हलचल
    इस कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के घर के पास भी प्रदर्शन हुआ।

    दलित संघर्ष समिति और कई अन्य संगठन भी इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।

    केरल सरकार की निंदा
    पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे “अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति” करार दिया। उन्होंने कहा कि डर और ज़बरदस्ती से शासन करने वाली सरकारें संवैधानिक मूल्यों और मानवीय गरिमा का उल्लंघन करती हैं। केरल के मंत्री वी शिवनकुट्टी ने इसे “अमानवीय कार्रवाई” बताया और कहा कि यह इमरजेंसी के दौर की याद दिलाती है।

    कर्नाटक उपमुख्यमंत्री का जवाब
    कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि यह इलाका अवैध कब्ज़े और कचरा फेंकने की जगह था, जिसे लैंड माफिया झुग्गी बस्ती में बदलने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों को नई जगह शिफ्ट करने का समय पहले ही दिया गया था। शिवकुमार ने पिनाराई विजयन पर तंज कसते हुए कहा कि नेताओं को ज़मीनी हकीकत जाने बिना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

    यह मामला न केवल बेंगलुरु बल्कि पूरे कर्नाटक की राजनीति में गर्मागरम बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस सरकार के बुलडोज़र अभियान ने शहर के गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को सीधे प्रभावित किया है, जबकि विपक्ष और पड़ोसी राज्यों ने इसे लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

  • दोस्तों के साथ नए साल की शुरुआत को बनाएं यादगार भारत की इन 5 जगहों पर करें न्यू ईयर ट्रिप प्लान

    दोस्तों के साथ नए साल की शुरुआत को बनाएं यादगार भारत की इन 5 जगहों पर करें न्यू ईयर ट्रिप प्लान


    नई दिल्ली । नया साल आने में अब गिनती के ही दिन बचे हैं और ऐसे में घूमने-फिरने की प्लानिंग जोरों पर है. ज्यादातर लोग चाहते हैं कि साल की शुरुआत किसी ऐसी जगह से हो जहां मस्ती सुकून और नए अनुभव एक साथ मिलें

    मनाली कसोल

    बर्फ से ढकी वादियां बोनफायर और पहाड़ी कैफे मनाली और कसोल नए साल के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन हैं. यहां दिन में स्नो एक्टिविटीज और रात में म्यूजिक व पार्टी का माहौल मिलता है.

    उदयपुर

    राजस्थान का रॉयल अंदाज न्यू ईयर को यादगार बना देता है. महलों में खास डिनर लोक कलाकारों की प्रस्तुति और आतिशबाजी सेलिब्रेशन को अलग रंग देती है.

    पुडुचेरी

    यहां नया साल शोर से नहीं बल्कि सुकून और खूबसूरती से मनाया जाता है. बीच के किनारे जश्न और व्हाइट टाउन की गलियां अलग ही अनुभव देती हैं.
    ग्रेट रण ऑफ कच्छ
    अगर कुछ हटकर करना चाहते हैं तो रण उत्सव बेहतरीन विकल्प है. सफेद रेगिस्तान लोक संगीत और टेंट स्टे न्यू ईयर को खास बनाते हैं.

    गोकर्ण


    कम भीड़ और शांत माहौल पसंद करने वालों के लिए गोकर्ण सही जगह है. यहां बीच पर म्यूजिक बोनफायर और दोस्तों के साथ लंबी बातचीत का मजा लिया जा सकता है. चाहे पहाड़ हों समंदर या रेगिस्तान ये डेस्टिनेशन नए साल की शुरुआत को यादगार बना सकती हैं.

  • उद्धव गुट का कांग्रेस पर तंज: 'मुंबई में कांग्रेस एक पर्यटक की तरह आती हैहार कर चली जाती है'

    उद्धव गुट का कांग्रेस पर तंज: 'मुंबई में कांग्रेस एक पर्यटक की तरह आती हैहार कर चली जाती है'


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में आगामी बृहन्मुंबई महानगर पालिका बीएमसी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। महाविकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह इस चुनाव को अकेले लड़ेगीजिसके बाद उद्धव गुट और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ गया है। उद्धव गुट के प्रवक्ता आनंद दुबे ने रविवार को कांग्रेस पर तीखा तंज करते हुए कहामुंबई में कांग्रेस पार्टी को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। वह पिछले तीन दशकों से लगातार मुंबई नगर निगम चुनाव हारती आ रही हैतो ऐसे में वह 2026 में कौन सा चमत्कार कर देंगे? कांग्रेस एक पर्यटक की तरह मुंबई आती हैहोर्डिंग्स लगाती हैचुनाव हारती है और फिर घर लौट जाती है।

    उद्धव गुट के प्रवक्ता ने यह बयान वीडियो के माध्यम से दियाजिसमें उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना का बीएमसी से गहरा रिश्ता रहा है और पार्टी पिछले 30 सालों से मुंबई नगर निगम पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को इस चुनाव में गंभीरता से लेने की कोई वजह नहीं हैक्योंकि वे हमेशा चुनाव हारते हैं। कांग्रेस ने इस तंज का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी इस चुनाव में अकेले मैदान में उतरेगी और इसके पीछे वैचारिक विचार है। कांग्रेस नेता सचिव सावंत ने बयान दियाहम पहले ही अपनी स्थिति को स्पष्ट कर चुके हैं। कांग्रेस पार्टी चुनाव में अकेले बढ़ना चाहती है और उसके पीछे वैचारिक विचार है। हमें इस मामले पर कोई जल्दबाजी नहीं है। पूरी पार्टी ने सोच-समझ कर यह फैसला लिया है। हम उन सभी पार्टियों के खिलाफ लड़ेंगे जो धर्मजातिक्षेत्र और भाषा के आधार पर टकराव पैदा करती हैं।

    यह विवाद तब शुरू हुआ जब उद्धव गुट ने महाविकास अघाड़ी में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। कांग्रेस इसके पक्ष में नहीं थीक्योंकि वह राज ठाकरे के साथ चुनाव लड़ने में असमंजस महसूस कर रही थी। इसके चलते महाविकास अघाड़ी के भीतर एकता बनी रहीलेकिन कांग्रेस और उद्धव गुट के बीच मतभेद उभर आए। बीएमसी पर पिछले कई सालों से शिवसेना का कब्जा रहा है। शुरूआत से ही शिवसेना भाजपा के साथ मिलकर यहां शासन चला रही थी

    । 2017 में हुए बीएमसी चुनाव में अविभाजित शिवसेना ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जीत दर्ज की थीजबकि भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। उद्धव गुट अब 2022 में विभाजन के बाद बीएमसी पर पुनः कब्जा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैहालांकि इसे पहले से कहीं ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस का कहना है कि वह इस चुनाव में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए तैयार है और इस बार किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगीचाहे वह महाविकास अघाड़ी हो या कोई अन्य गठबंधन।

  • मोहन भागवत ने कहाआरएसएस को भाजपा के नजरिए से देखना गलतमुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को खारिज किया

    मोहन भागवत ने कहाआरएसएस को भाजपा के नजरिए से देखना गलतमुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को खारिज किया


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कोलकाता में आरएसएस 100 व्याख्यान माला कार्यक्रम के दौरान संघ के बारे में अहम बयान दिया। भागवत ने कहा कि आरएसएस का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है और इसे भारतीय जनता पार्टी भा,ज,पा, के नजरिए से देखना गलत है। उन्होंने साफ किया कि संघ और भाजपा अलग-अलग संगठन हैंजिनकी भूमिकाएं भी अलग हैंभले ही भाजपा के कई नेता संघ से जुड़े हुए हों।

    भागवत ने कहायदि आप संघ को समझना चाहते हैंतो इसका अनुभव करना पड़ेगा। अगर आप इसे सिर्फ एक और सेवा संगठन मानते हैंतो आप गलत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संघ का काम कभी भी संकीर्ण दृष्टिकोण से नहीं समझा जाना चाहिए। बहुत से लोग संघ को भाजपा से जोड़कर देखते हैंलेकिन यह एक बड़ी गलती है। संघ को राजनीति से परे और समाज की भलाईसुरक्षा और एकता के लिए काम करने वाला संगठन माना जाना चाहिए।

    संघ प्रमुख ने मुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को भी पूरी तरह से नकारा किया। भागवत ने कहाऐसी धारणा पूरी तरह से तथ्यों के बजाय कथाओं पर आधारित है। हमारा काम पारदर्शी है और जो लोग हमारे काम को समझते हैंउन्होंने यह निष्कर्ष निकाला है कि हम कट्टर राष्ट्रवादी हैंजो हिंदुओं की सुरक्षा के लिए काम करते हैंलेकिन हम मुस्लिम विरोधी नहीं हैं। उन्होंने आलोचकों से आग्रह किया कि वे संघ का दौरा करें और इसे सीधे समझें। भागवत ने संघ के मुख्य उद्देश्य को भी स्पष्ट कियाजिसमें नैतिक रूप से ईमानदार और गुणी व्यक्तियों का निर्माण करना हैजो सेवामूल्यों और राष्ट्रीय गौरव से प्रेरित हों और देश के विकास में योगदान करें। उन्होंने कहासंघ का उद्देश्य किसी से दुश्मनी रखना नहीं हैबल्कि समाज में एकता और सहयोग को बढ़ावा देना है।

    इसके अलावाभागवत ने भारतीय समाज को एकजुट करने की आवश्यकता पर बल दिया और हिंदू समुदाय को अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों की ओर लौटने की अपील की। बंगाल की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंदराजा राम मोहन रॉय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी महान हस्तियों को याद कियाजिनकी सामाजिक सुधार में अहम भूमिका थी। उन्होंने खास तौर पर राजा राम मोहन रॉय की तारीफ कीजो सामाजिक बदलाव की दिशा में अग्रणी थेऔर कहा कि आरएसएस उसी सुधारात्मक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

    भागवत ने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य भारत को एक बार फिर विश्वगुरु बनाना है और इसके लिए समाज को तैयार करना संघ का कर्तव्य है। इसके तहतसंघ ने अपनी शताब्दी समारोह के अवसर पर कोलकातादिल्लीमुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में लेक्चर और सेशन आयोजित करने की योजना बनाई हैताकि जनता को संघ के काम और उद्देश्य को समझने का मौका मिल सके। इस दौरानभागवत ने लोगों से अपील की कि वे संघ के बारे में राय बनाने से पहले तथ्यों का अध्ययन करेंऔर अन्य स्रोतों की बजाय खुद संघ के काम को देखें।