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  • उमंग सिंघार ने आदिवासी इलाकों से बढ़ते पलायन पर सरकार पर साधा निशाना, बोले- ये गंभीर मानवीय संकट है

    उमंग सिंघार ने आदिवासी इलाकों से बढ़ते पलायन पर सरकार पर साधा निशाना, बोले- ये गंभीर मानवीय संकट है


    भोपाल। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचलों से लगातार हो रहे पलायन को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रोजगार, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की तलाश में अपने ही राज्य से बाहर जाने को मजबूर हो रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान और अस्तित्व से जुड़ा गंभीर मानवीय संकट है।

    सिंघार ने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन से जुड़े आदिवासी समुदाय आज अपने गांव और खेत छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए विवश हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का यह पलायन उनकी पहचान और सम्मान से जुड़ा एक गहरा सामाजिक संकट बनता जा रहा है।

    भाजपा सरकार की नीतियों को ठहराया जिम्मेदार

    आदिवासियों के पलायन के मुद्दे पर उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि वर्षों से सत्ता में रही सरकार दलित और आदिवासी समाज के मुद्दों पर केवल घोषणाएं और प्रचार तक सीमित रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी गौरव के नाम पर कार्यक्रम तो आयोजित किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आदिवासी परिवारों को रोजगार और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिसके कारण उन्हें प्रदेश छोड़कर जाना पड़ रहा है।

    सरकार की नीतियों की विफलता का स्पष्ट संकेत

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की भी कमी बनी हुई है। उनका कहना है कि जब किसी प्रदेश के मूल निवासी ही अपनी जमीन और गांव छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएं, तो यह सरकार की नीतियों की विफलता का स्पष्ट संकेत है।

    उल्लेखनीय है कि मध्‍य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों से हर वर्ष बड़ी संख्या में मजदूर काम की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करते हैं। इस मुद्दे को लेकर अब कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आदिवासी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया है।

  • JDU में शामिल हुए नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार, कहा पापा ने जो 20 साल में किया उसे

    JDU में शामिल हुए नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार, कहा पापा ने जो 20 साल में किया उसे


    नई दिल्‍ली । बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब दिल्ली की ओर चल पड़े हैं तो वहीं उनके बेटे निशांत कुमार आखिरकार सक्रिय राजनीति का हिस्सा हो गए हैं। परिवारवाद से दूर रहने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने रविवार को जनता दल यूनाइटेड जॉइन कर ली है। पार्टी में आधिकारिक रूप से शामिल होने के बाद निशांत कुमार पिता नीतीश से मिलने पहुंचे और उन्हें मिठाई खिलाकर उनका आशीर्वाद लिया।

    इस मौके पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, संजय झा, बिजेंद्र यादव, विजय चौधरी जैसे बड़े नेता उपस्थित रहे। सदस्यता ग्रहण के दौरान निशांत कुमार ने सबका आभार व्यक्त किया।

    निशांत कुमार ने कहा, यहां पर मौजूद आप सभी लोगों का अभिनंदन करता हूं। आभार व्यक्त करता हूं। मैं जेडीयू कार्यालय आया हूं। यहां जेडीयू की सदस्यता ग्रहण करने आया हूं। मैं एक सक्रिय सदस्य के रूप में पार्टी का ख्याल रखने की कोशिश करूंगा। मेरे पिता ने राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है, ये उनका निजी फैसला है। मैं इसको स्वीकार करता हूं। आदर करता हूं।

    पापा ने जो 20 साल में किया उसे

    निशांत ने कहा पार्टी ने और जनता ने जो विश्वास मुझ पर किया है मैं उस पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा। पार्टी कार्यकर्ता के हिसाब से मैं पार्टी संगठन को मजबूत करने की कोशिश करूंगा। पापा ने जो 20 साल में किया उसे जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश करूंगा। मेरे पिता जी ने जो 20 साल में किया वो सबको याद रहेगा। पिता ने जो 20 साल में किया है उससे पूरे देशवासियों को गर्व है।

    इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद नहीं थे। नीतीश कुमार के कभी करीबी रहे आरसीपी सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है, प्रिय निशांत आपको सक्रिय राजनीति में आने के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद।

    इस सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम को लेकर काफी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता उपस्थित हुए। कार्यकर्ता निशांत कुमार जिंदाबाद का नारा लगाते नजर आए। बता दें कि इससे पहले निशांत कुमार ने जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष के घर पर बीते शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और युवा विधायकों के साथ बैठक की थी। बैठक में पार्टी की आगे की रणनीति और पार्टी को कैसे अच्छे से आगे बढ़ाया जाए, इस पर चर्चा हुई थी।

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सियासत तेज, अखिलेश यादव ने दिया खुला समर्थन

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सियासत तेज, अखिलेश यादव ने दिया खुला समर्थन


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इस घटनाक्रम के बाद मामला धार्मिक दायरे से निकलकर सियासी अखाड़े में पहुंच गया है। विपक्षी दलों ने इसे गंभीर विषय बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।

    अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा हमला

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सच्चे संतों का अपमान कर भाजपा ने अपनी कार्यशैली उजागर कर दी है। उनके मुताबिक जो भी व्यक्ति या संत सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है उसे झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की जाती है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा का मकसद सत्ता के जरिए धन अर्जित करना है और इसके लिए वह किसी भी स्तर तक जा सकती है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के भीतर भी आपसी मतभेद हैं जिनकी आहट समय-समय पर सुनाई देती रहती है।

    कार्रवाई उन पर होनी चाहिए थी जिन्होंने रोका
    अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि जिस धार्मिक आयोजन में अविमुक्तेश्वरानंद शामिल होना चाहते थे उस दौरान प्रशासन को उनके तय मार्ग पर आपत्ति थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी ने उन्हें स्नान से रोका तो कार्रवाई उन लोगों पर होनी चाहिए थी न कि संत पर।उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक भगवाधारी संत के साथ ऐसा व्यवहार तब हो रहा है जब राज्य में खुद भगवाधारी मुख्यमंत्री सत्ता में हैं।

    भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार

    फिलहाल इस मामले में भाजपा की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है। धार्मिक आस्था कानून और राजनीति के बीच खिंची इस रेखा ने उत्तर प्रदेश की सियासत को नया मोड़ दे दिया है। अब नजर इस बात पर है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आरोपों की सच्चाई क्या सामने आती है। वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास बता रहा है तो सत्ता पक्ष कानून की प्रक्रिया का हवाला दे रहा है।

  • राजस्थान बजट सत्र में BJP विधायक के विवादित बयान ने मचाया हंगामा: 'BJP सरकार ने छोरा, गहलोत ने छोरी पैदा की'

    राजस्थान बजट सत्र में BJP विधायक के विवादित बयान ने मचाया हंगामा: 'BJP सरकार ने छोरा, गहलोत ने छोरी पैदा की'


    नई दिल्ली । राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एक बार फिर सियासी और सांस्कृतिक विवाद उभर गया है। सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के विधायक बहादुर सिंह कोली ने सदन में एक विवादित बयान देते हुए बजट की तुलना ‘बेटे’ और ‘बेटी’ से कर दी। बहादुर सिंह कोली जो भरतपुर जिले से विधायक और पूर्व लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं ने कहा कि भजनलाल शर्मा की बीजेपी सरकार का बजट छोरा था जबकि अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार का बजट ‘छोरी’ था और इसी वजह से कांग्रेस चुनाव में हार गई।

    बीजेपी विधायक ने बजट सत्र के दौरान रात करीब 8 बजे सदन में कहा हमारी सरकार ने पहले बजट में छोरा पैदा किया फिर दूसरे और तीसरे बजट में भी छोरा पैदा किया। जो जवानी में छोरा पैदा करता है वह हमेशा काम आता है। जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे उन्होंने अपने आखिरी बजट में घोषणाएं कीं लेकिन छोरा नहीं पैदा हुआ छोरी पैदा हुई और इसी वजह से आप विपक्ष में बैठे हैं। इस बयान ने सदन में मौजूद सदस्यों को झकझोर दिया और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया।

    कांग्रेस ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी के अनुसार यह बयान लड़कों और लड़कियों में भेदभाव को दर्शाता है और सदन में इस तरह की संवेदनहीन टिप्पणी देना महिलाओं के प्रति पक्षपात को उजागर करता है। कांग्रेस के मुख्य सचेतक रफीक खान ने कहा कि बीजेपी विधायक के इस बयान ने उनकी पार्टी की सोच को सार्वजनिक कर दिया है। बीजेपी के लोग महिलाओं को लेकर क्या सोच रखते हैं यह अब साफ हो गया है। कांग्रेस का आरोप है कि इस तरह के बयान केवल राजनीतिक लाभ के लिए महिलाओं के प्रति नजरिए को हल्के में दिखाने वाले हैं।

    वहीं बीजेपी की तरफ से गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम ने बहादुर सिंह कोली के बयान की व्याख्या करते हुए कहा कि विधायक बजट पर चर्चा कर रहे थे और कांग्रेस केवल हंगामा कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी और हमारी सरकार बेटियों का सम्मान करती है और उन्हें देवी स्वरूप में पूजती है। मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि भाजपा सरकार ने संसद में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिलाने का काम किया है और महिलाओं के सम्मान को सर्वोपरि माना जाता है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह बयान न केवल बजट सत्र में विवाद पैदा करने वाला है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी संवेदनशील है। महिलाओं और लड़कियों के प्रति राजनीतिक दलों की सोच पर भी बहस छिड़ा है। सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह केवल बजट पर व्यंग्य था जबकि विपक्ष इसे महिलाओं के प्रति पक्षपातपूर्ण टिप्पणी मान रहा है। यह घटना राज्य में आगामी चुनावों के मद्देनजर भी राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर सकती है।

    कुल मिलाकर बहादुर सिंह कोली के बयान ने विधानसभा में बहस का नया मुद्दा खड़ा किया है जहां बजट पर चर्चा के दौरान संवेदनशील सामाजिक मुद्दों को भी राजनीति की भेंट चढ़ाया गया। बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी और प्रतिक्रिया जारी रही और राज्य की सियासत में यह विवाद केंद्र में बन गया।

  • बुड्ढा लड़का लोफर है…', RJD ने सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार पर की अभद्र टिप्पणी

    बुड्ढा लड़का लोफर है…', RJD ने सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार पर की अभद्र टिप्पणी


    नई दिल्ली । बिहार में विधान परिषद में सत्र की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पूर्व सीएम राबड़ी देवी को लड़की कहे जावने के मामले पर विवाद बढ़ता चला जा रहा है। पहले रोहिणी आचार्य ने इस मामले को लेकर सीएम नीतीश पर निशाना साधा था। इसके बाद तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश को डिमेंशिया और अल्जाइमर का शिकार बता दिया था। वहीं अब राजद ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है। राजद ने सीएम नीतीश को लोफर और बुड्ढा तक कह दिया था।

    RJD ने क्या ट्वीट किया?
    राजद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए विवादित टिप्पणी की। राजद ने कहा संवैधानिक पद पर बैठ महिलाओं के लिए अश्लील बातें करने वाला बिहार का बुड्ढा लड़का लोफर है।
    आज विधान परिषद में मार्शल बुलाए गए
    मंगलवार को बिहार विधानसभा में लगातार हंगामा देखने को मिला। इसके बाद विपक्ष के लगातार हंगामे के बाद सभापति ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों को मार्शल से दिन भर के लिए बाहर करवा दिया। सभापति ने बार बार कहा कि प्रश्नकाल को बाधित नहीं करें सदन की कार्यवाही में व्यवधान न डालें बावजूद विपक्ष के सदस्य बेल तक पहुंचकर नारेबाजी और हंगामा करते रहे। इसके बाद सभापति ने कड़ी कार्रवाई करते हुए विपक्षी सदस्यों को पूरे दिन के लिए सदन से बाहर करने का आदेश दे दिया। बाहर भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा।
    सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच तीखी नोकझोंक
    सभापति के आदेश से मार्शल बुलाए गए जिन्होंने बीच-बचाव करते हुए सदस्यों को अलग किया। सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मंत्री अशोक चौधरी काफी गुस्से में दिखाई दिए वहीं विपक्ष के नेता भी आक्रोशित नजर आए। इस दौरान अशोक चौधरी ने सुनील सिंह से कहा तुम क्या हो जिस पर सुनील सिंह ने जवाब देते हुए उन्हें नौटंकीबाज तक कह दिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में भारी शोर-शराबा और हंगामे का माहौल बना रहा।

  • हम दो-हमारे दो दर्जन, AIMIM यूपी अध्यक्ष शौकत अली बोले- ज्यादा जनसंख्या देश की ताकत

    हम दो-हमारे दो दर्जन, AIMIM यूपी अध्यक्ष शौकत अली बोले- ज्यादा जनसंख्या देश की ताकत


    नई दिल्ली । एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने एक बार फिर विवादित राग छेड़ा है। जनसंख्या नियंत्रण की सरकारी नीतियों और सामाजिक विमर्श के उलट, उन्होंने आबादी बढ़ाने को देश की मजबूती से जोड़कर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली अपने बयानों के चलते एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। सोमवार को मुरादाबाद के रामपुर दोराहा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने जनसंख्या वृद्धि को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। शौकत अली ने मुसलमानों से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील करते हुए नारा दिया कि “हम दो, हमारे दो नहीं, बल्कि हमारे दो दर्जन होने चाहिए।
    शौकत अली ने अपने संबोधन में जनसंख्या नियंत्रण के वैश्विक और राष्ट्रीय तर्कों को दरकिनार करते हुए दावा किया कि किसी भी देश की असली मजबूती उसकी बड़ी आबादी में निहित होती है। उन्होंने धार्मिक भावनाओं को जोड़ते हुए कहा, “जब अल्लाह बच्चों की नेमत दे रहा है, तो उसे पूरी खुशी के साथ स्वीकार करना चाहिए। बच्चे ऊपर वाले की देन हैं और उन्हें रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने तर्क दिया कि आबादी बढ़ने से देश कमजोर नहीं बल्कि और अधिक ताकतवर होकर उभरेगा।
    कुंवारे नेताओं पर कसा तंज
    जनसंख्या नियंत्रण की वकालत करने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए शौकत अली ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद शादी नहीं करते या जिनका अपना परिवार नहीं है, वही दूसरों को जनसंख्या नियंत्रण का ज्ञान बांटते फिर रहे हैं। उनका यह इशारा सीधे तौर पर सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं की ओर माना जा रहा है। साथ ही, उन्होंने मुरादाबाद के मदरसों का जिक्र करते हुए नाराजगी जताई कि यहाँ मदरसों का विस्तार शिक्षा के लिए किया गया है, लेकिन कुछ लोग इन्हें जानबूझकर ‘आतंकवाद का अड्डा’ बताकर बदनाम करने की कोशिश करते हैं।
    सपा और बी टीम के आरोपों पर पलटवार
    जनसभा के दौरान शौकत अली केवल जनसंख्या तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी जमकर भड़ास निकाली। सपा के एक विधायक द्वारा एआईएमआईएम को भाजपा की बी टीम बताए जाने पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि सपा खुद अपनी जमीन खो रही है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए मजलिस पर झूठे आरोप मढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का सच्चा रहनुमा वही है जो उनके हक की बात डंके की चोट पर करे, न कि वह जो केवल वोट बैंक की राजनीति करे।
    बयान पर छिड़ा सियासी घमासान
    शौकत अली के इस ‘दो दर्जन’ वाले बयान के बाद भाजपा और अन्य दलों ने उन पर कड़ा प्रहार किया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देते हैं और विकास के मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

  • देवेंद्र फडणवीस का आधी रात दिल्ली दौरा, महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, बड़े बदलाव के आसार

    देवेंद्र फडणवीस का आधी रात दिल्ली दौरा, महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, बड़े बदलाव के आसार


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के देर रात अचानक दिल्ली दौरे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सोमवार, 9 फरवरी की रात बीजेपी के शीर्ष नेताओं से बंद कमरे में मुलाकात करने के बाद फडणवीस तड़के मुंबई लौट आए। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस दौरे से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP के विलय और सहयोगी दलों के साथ नई बातचीत की अटकलें तेज हो गई हैं।

    सुनेत्रा पवार का भी दिल्ली दौरा

    फडणवीस के बाद महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार मंगलवार, 10 फरवरी को शाम 6:45 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगी। उनके साथ NCP प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी मौजूद रहेंगे। वे बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगी। उनकी यह यात्रा शिष्टाचार भेंट के रूप में बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक संकेत भी इसे जोड़कर देखे जा रहे हैं।

    जिला परिषद और पंचायत चुनावों में बीजेपी का दबदबा
    महाराष्ट्र की हालिया जिला परिषद 12 और पंचायत समिति 125 चुनावों में बीजेपी ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। जिला परिषद की 731 सीटों में से बीजेपी ने 233 और पंचायत समितियों की 1462 सीटों में सबसे ज्यादा कब्जा जमाया। अजित पवार गुट की NCP को जिला परिषद में 167 और शिंदे गुट की शिवसेना को 162 सीटें मिलीं। महायुति गठबंधन ने कुल 562 सीटें जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की। दूसरी ओर, कांग्रेस 56, शरद पवार गुट 26 और उद्धव ठाकरे गुट 43 सीटें ही जीत सका। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि फडणवीस का दिल्ली दौरा और सुनेत्रा पवार की यात्रा आगामी महीनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलावों की शुरुआत हो सकती है।

  • राजपाल यादव के समर्थन में आए सोनू सूद, बढ़ाया मदद का हाथ, 9 करोड़ के कर्ज से दिलाएंगे मुक्ति

    राजपाल यादव के समर्थन में आए सोनू सूद, बढ़ाया मदद का हाथ, 9 करोड़ के कर्ज से दिलाएंगे मुक्ति


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के चर्चित कॉमिक एक्टर राजपाल यादव इन दिनों गंभीर कानूनी और आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। चेक बाउंस और करीब 9 करोड़ रुपये के बकाया कर्ज के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 फरवरी को उनकी आखिरी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद अदालत के आदेश पर उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया।इस मुश्किल घड़ी में अभिनेता सोनू सूद सामने आए और राजपाल यादव के समर्थन में खुलकर अपनी मदद का प्रस्ताव रखा। सोनू ने स्पष्ट किया कि यह मदद किसी चैरिटी के लिए नहीं, बल्कि एक कलाकार के लिए प्रोफेशनल सहयोग और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने इंडस्ट्री से भी अपील की कि वे आगे आएं और राजपाल को इस कठिन दौर से बाहर निकलने में मदद करें।

    सोनू सूद की अपील

    मंगलवार को राजपाल यादव का भावुक बयान सामने आने के बाद, सोनू सूद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और इंस्टाग्राम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने न सिर्फ राजपाल यादव को अपनी आने वाली फिल्म में काम देने की बात कही, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री से भी अपील की कि वे इस कठिन समय में कलाकार के साथ खड़े हों।सोनू ने लिखा कि राजपाल यादव बेहद प्रतिभाशाली अभिनेता हैं, जिन्होंने सालों तक इंडस्ट्री को यादगार किरदार दिए। उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका सहयोग भविष्य के काम के साथ एडजस्ट होने वाला एक छोटा साइनिंग अमाउंट है, जो कलाकार के सम्मान का प्रतीक है। सोनू ने आगे कहा, जब कोई अपना मुश्किल हालात से गुजर रहा हो, तो इंडस्ट्री उसका सपोर्ट करे, ताकि वह महसूस करे कि वह अकेला नहीं है। यही एकता दिखाती है कि फिल्म जगत सिर्फ काम करने की जगह नहीं, बल्कि एक परिवार भी है।

    राजपाल यादव की आर्थिक तंगी
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिहाड़ जेल में सरेंडर करने से कुछ समय पहले, राजपाल यादव ने अधिकारियों के सामने खुलकर अपनी आर्थिक बदहाली का दर्द साझा किया। उन्होंने कहा, सर, मेरे पास पैसे नहीं हैं कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा।  राजपाल की कानूनी उलझनें लगभग एक दशक पुरानी हैं। साल 2010 में उन्होंने अपनी पहली निर्देशित फिल्म अता पता लापता के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म फ्लॉप होने के बाद कर्ज की अदायगी नहीं हो पाई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

    कोर्ट का रुख और जेल की सजा

    शिकायतकर्ता को दिए गए सातों चेक बाउंस होने के कारण अदालत ने राजपाल यादव को छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई। हाई कोर्ट तक लंबी सुनवाई और रिवीजन याचिकाओं के बावजूद बकाया रकम बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। 4 फरवरी 2026 को उनकी अंतिम याचिका खारिज हो गई। अदालत ने कहा कि एक्टर पहले भी लगभग 20 बार भुगतान में असफल रहे हैं। 5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव ने छह महीने की जेल की सजा काटने के लिए तिहाड़ में सरेंडर किया।

    सोनू सूद ने की मदद की अपील
    सोनू ने यह स्पष्ट किया कि उनका सहयोग चैरिटी नहीं, बल्कि पेशेवर सम्मान और इंडस्ट्री में एकता का प्रतीक है। उन्होंने इंडस्ट्री से अपील की कि वे फिल्म प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और सह-कलाकार मिलकर राजपाल यादव का सहयोग करें, ताकि वह इस कठिन दौर से बाहर निकल सकें।

  • मऊगंज से बीजेपी विधायक का लंबा सस्पेंस: एक माह से गायब प्रदीप पटेल, ‘गैंग से डर’ की बात पर सियासत गरम, विपक्ष ने कहा शर्मनाक

    मऊगंज से बीजेपी विधायक का लंबा सस्पेंस: एक माह से गायब प्रदीप पटेल, ‘गैंग से डर’ की बात पर सियासत गरम, विपक्ष ने कहा शर्मनाक


    भोपाल । मऊगंज से बीजेपी विधायक प्रदीप पटेल का एक माह से गायब रहना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इस दौरान उनके न मिलने की वजह के रूप में एक गैंग से डर की बातें सामने आईं। मामले ने सियासी तूल पकड़ लिया है और कांग्रेस ने इसे राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था और सत्ता की अक्षमता बताया है।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने इस मामले को गंभीर बताया और कहा कि प्रदेश में पहले लाडली बहन जैसी घटनाएँ हो रही थीं अब बीजेपी के विधायक भी गायब हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदीप पटेल मूसा गैंग से डरकर गायब हुए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मध्य प्रदेश में कितनी गैंगें चल रही हैं और माफियाओं का राज है। कांग्रेस ने इसे नया माफिया कहकर सरकार पर हमला किया।

    पीसी शर्मा ने कहा कि सरकार अपने ही विधायक को ढूंढ नहीं पा रही जबकि कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। आम जनता पहले से ही परेशान है और अब विधायक भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला विधानसभा में उठाया जाएगा और सड़कों पर भी आवाज़ उठेगी। उनका कहना था कि बीजेपी का विधायक गायब है और सरकार उसे खोज नहीं पा रही इससे शर्मनाक स्थिति और कुछ नहीं हो सकती।

    दूसरी ओर डिप्टी सीएम और विंध्य क्षेत्र के नेता राजेंद्र शुक्ल ने इस खबर को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रदीप पटेल सक्रिय विधायक हैं और जनता की समस्याओं के लिए संघर्ष करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में किसी भी तरह की जानकारी नहीं है और गैंग की खबरों में कोई वास्तविकता नहीं है। राजेंद्र शुक्ल ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं है और यह सारी बातें अफवाहें हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विधायक लगातार काम कर रहे हैं और उनकी स्थिति सामान्य है।

    मामले को लेकर सियासत और आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है और सरकार को अपने ही विधायक की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। वहीं सरकार की ओर से इसे निराधार बताते हुए मामला शांतिपूर्ण रूप से टाला जा रहा है। अब यह देखना बाकी है कि विधायक की असल स्थिति क्या है और प्रशासन इस मामले में कब तक स्पष्टता देगा।

  • पूरे देश में हो रहा पंडितों का अपमान; ब्राह्मणों के सम्मान में, मायावती मैदान में, केंद्र सरकार से यह मांग

    पूरे देश में हो रहा पंडितों का अपमान; ब्राह्मणों के सम्मान में, मायावती मैदान में, केंद्र सरकार से यह मांग


    नई दिल्ली। वेब सीरीज घूसखोर पंडत पर अब सियासत भी गरमाने लगी है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सीरीज भी इस विवाद में कूद गई हैं। उन्होंने इसे ब्राह्मण समाज के अपमान से जोड़ते हुए फिल्मकारों पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने आरोप लगाया कि सोची-समझी रणनीति के तहत फिल्मों में ‘पंडित’ को ‘घुसपैठिया’ बताकर पूरे समाज का अनादर किया जा रहा है। इसे लेकर मायावती ने एक्स पर पोस्ट लिखा है।
    केंद्र सरकार से तत्काल इस पर रोक लगाने की मांग की है।मायावती ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा कि यह बड़े दुख और चिंता की बात है कि पिछले कुछ समय से केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि अब फिल्मों में भी ब्राह्मण समाज को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा फिल्मों में ’पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है, उससे समूचे ब्राह्मण समाज में जबरदस्त रोष व्याप्त है। हमारी पार्टी इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है।
    घुसपैठिया शब्द पर जताई कड़ी आपत्ति
    मायावती के बयान में सबसे अहम बिंदु ‘घुसपैठिया’ शब्द का इस्तेमाल रहा। दरअसल, विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि इस वेब सीरीज में ब्राह्मण पात्रों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है और उन्हें व्यवस्था को नुकसान पहुxचाने वाले ‘घुसपैठियों’ की तरह पेश किया गया है। मायावती ने इसे ‘जातिसूचक’ करार देते हुए केंद्र सरकार से मांग की है कि ऐसी फिल्म पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

    वेब सीरीज में क्या दिखाया गया है?
    यह वेब सीरीज मुख्य रूप से सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी पर प्रहार करने का दावा करती है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक सरकारी कर्मचारी, जो ब्राह्मण समुदाय से संबंध रखता है और ‘पंडत’ उपनाम का उपयोग करता है, अपने पद का दुरुपयोग कर लोगों से काम के बदले अवैध वसूली करता है। सीरीज में सिस्टम की खामियों और एक व्यक्ति के लालच को कहानी का आधार बनाया गया है। आरोप है कि इसमें कुछ ऐसे दृश्य और संवाद भी शामिल किए गए हैं जो सरकारी दफ्तरों में होने वाले ‘लेनदेन’ के काले खेल को दर्शाते हैं।

    विवाद और आपत्ति के मुख्य कारण

    वेब सीरीज को लेकर मुख्य रूप से ‘सनातन रक्षक दल’ और अन्य ब्राह्मण संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनकी मुख्य आपत्ति इसके नाम को लेकर ही है। विरोध करने वालों का कहना है कि सीरीज का नाम घूसखोर पंडत रखना सीधे तौर पर एक पूरी जाति और समुदाय को अपमानित करने की कोशिश है। उनका तर्क है कि पंडत शब्द ज्ञान और सम्मान का प्रतीक है, उसके साथ ‘घूसखोर’ विशेषण जोड़ना समाज में गलत संदेश फैलाता है।

    आपत्ति दर्ज कराने वाले लोगों का मानना है कि भ्रष्टाचार किसी भी जाति का व्यक्ति कर सकता है, लेकिन जानबूझकर एक विशिष्ट जाति (ब्राह्मण) को भ्रष्ट के रूप में पेश करना एक एजेंडा का हिस्सा लगता है। सीरीज के पोस्टर और ट्रेलर में कुछ ऐसे दृश्यों पर भी सवाल उठाए गए हैं जहां पात्र को धार्मिक वेशभूषा या प्रतीकों के साथ गलत काम करते दिखाया गया है। विरोधियों का कहना है कि यह धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है।