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  • मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर राजनीतिक दलों ने जताया सम्मान, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने की दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर राजनीतिक दलों ने जताया सम्मान, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने की दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की कामना


    नई दिल्ली । 
    कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के 84वें जन्मदिन पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएं मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना की। राजनीतिक मतभेदों से इतर कई नेताओं ने सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे अनुभव और योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि ईश्वर उन्हें स्वस्थ और लंबा जीवन प्रदान करें। प्रधानमंत्री का यह संदेश सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना और अनेक लोगों ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं का सकारात्मक उदाहरण बताया।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उनके सुखद, स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना करते हुए सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें बधाई देते हुए स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

    कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के जन्मदिन पर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएं दीं। पार्टी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को याद किया। कई नेताओं ने कहा कि उनके नेतृत्व में पार्टी लगातार जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास कर रही है।

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस सहित विभिन्न प्रदेश इकाइयों ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पार्टी की ओर से जारी संदेशों में उन्हें अनुभवी नेता, कुशल संगठनकर्ता और करोड़ों कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत के रूप में बताया गया। साथ ही उनके स्वस्थ और सक्रिय जीवन की कामना भी की गई।

    सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। समाजवादी पार्टी ने भी अपने शुभकामना संदेश में मल्लिकार्जुन खरगे के स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की। विभिन्न दलों के नेताओं की ओर से आए इन संदेशों ने राजनीतिक शिष्टाचार और लोकतांत्रिक परंपराओं को भी रेखांकित किया।

    मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने लंबे समय तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। संगठन और संसदीय राजनीति दोनों में उनका अनुभव व्यापक माना जाता है। वर्तमान में वह कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ राज्यसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभा रहे हैं।

    उनके जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम आयोजित किए। कई स्थानों पर सामाजिक सेवा गतिविधियां, पौधारोपण, रक्तदान शिविर और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके नेतृत्व में संगठन को और मजबूत बनाने का संकल्प भी दोहराया।

  • भोपाल में कांग्रेस विचार विभाग की बैठक, केप्टन डाबर बोले- नेहरू ने आधुनिक भारत बनाया, भाजपा ने अफवाह तंत्र खड़ा किया

    भोपाल में कांग्रेस विचार विभाग की बैठक, केप्टन डाबर बोले- नेहरू ने आधुनिक भारत बनाया, भाजपा ने अफवाह तंत्र खड़ा किया

    मध्यप्रदेश: की राजधानी भोपाल में आयोजित कांग्रेस विचार विभाग की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्र सरकार पर कई राजनीतिक एवं वैचारिक मुद्दों को लेकर तीखे आरोप लगाए। कांग्रेस विचार विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष केप्टन प्रवीण डाबर ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जबकि भाजपा ने देश में अफवाहों का तंत्र खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि नेहरू की सोच वैज्ञानिक दृष्टिकोण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और आधुनिक विकास पर आधारित थी, जिसे आज भी देश की प्रगति का आधार माना जाता है।

    बैठक के दौरान केप्टन डाबर ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों के प्रतीक हैं। मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और प्रबंधन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    डाबर ने राम मंदिर के लिए नए मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यदि नियुक्ति के लिए केवल “राम भक्त” होने की शर्त रखी जाती है तो यह अन्य देवी-देवताओं के श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने सवाल किया कि भगवान को अलग-अलग वर्गों में बांटने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है और धार्मिक संस्थानों में समान भाव की भावना बनाए रखना अधिक आवश्यक है।

    प्रदेश कांग्रेस विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय हितों और देश की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर सतर्क रहने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के ऐसे समझौतों से बचना चाहिए जो देश के हितों को प्रभावित कर सकते हों। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से वैचारिक रूप से सक्रिय रहने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जनता के बीच संवाद बढ़ाने का आह्वान किया।

    बैठक में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मंदिरों के संचालन और धार्मिक संस्थाओं में संघ के प्रचारकों की भूमिका बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिरों का संचालन संतों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों के हाथों में रहना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि धर्म का मूल आधार इंसानियत और मानवता है तथा कांग्रेस सभी धर्मों के सम्मान और समानता में विश्वास करती है। उन्होंने मंदिरों के संचालन में शंकराचार्यों की भूमिका सुनिश्चित किए जाने की भी मांग रखी।

    बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सामाजिक सौहार्द, धार्मिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा को पार्टी की प्राथमिकता बताया। वहीं भाजपा और सरकार पर लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इन बयानों के बाद संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इस तरह के मुद्दे प्रदेश की राजनीति में आगे भी बहस का विषय बने रह सकते हैं।

  • मेरठ छात्रा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रोका, पार्टी ने पुलिस पर लगाए आरोप

    मेरठ छात्रा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रोका, पार्टी ने पुलिस पर लगाए आरोप

    मेरठ। मेरठ छात्रा हत्याकांड को लेकर पीड़ित परिवार की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) तक पहुंचाने जा रहे कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को सोमवार को मेरठ-दिल्ली हाईवे स्थित काशी टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मौके पर विरोध प्रदर्शन करते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

    काशी टोल प्लाजा पर रोका गया काफिला
    कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल एसएसपी कार्यालय जाने के लिए मेरठ पहुंच रहा था। इसी दौरान पुलिस ने काशी टोल प्लाजा पर उनके काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    कांग्रेस ने पुलिस पर लगाए आरोप
    कांग्रेस नेताओं का कहना था कि वे केवल पीड़ित परिवार की शिकायत लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मिलने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जबरन रोक दिया। उनका आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है और इससे प्रदेश का माहौल प्रभावित होता है।

    प्रदेश सरकार पर भी साधा निशाना
    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार की भी आलोचना की। उनका आरोप था कि पुलिस को सरकार का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण आम लोगों के साथ मनमानी की जा रही है। नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इस पर नाराजगी जताई।

    प्रतिनिधिमंडल में ये नेता रहे शामिल
    कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा, उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र गौतम, सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और बाराबंकी से सांसद तनुज पूनिया सहित अन्य नेता शामिल थे।

  • नाना पटवारी ने मानी पुरानी ड्रग्स की लत, बोले- रिहैब के बाद छोड़ा नशा; कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध

    नाना पटवारी ने मानी पुरानी ड्रग्स की लत, बोले- रिहैब के बाद छोड़ा नशा; कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। शुक्रवार को इंदौर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाना पटवारी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वे करीब तीन साल पहले तक ड्रग्स का सेवन करते थे, लेकिन रिहैब सेंटर में इलाज के बाद उन्होंने नशा पूरी तरह छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि आज उनका ड्रग तस्करी से कोई संबंध नहीं है और उनकी सबसे बड़ी गलती सिर्फ इतनी है कि वे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई हैं।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाना पटवारी ने दावा किया कि ड्रग्स मामले में गिरफ्तार आरोपियों से उनका कोई लेन-देन या संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि वे अपनी कार की सर्विसिंग कराने गए थे, तभी पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। उनके अनुसार थाने में उनसे केवल सामान्य पूछताछ की गई, लेकिन हिरासत में लेने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे दिन उन्हें अलग-अलग स्थानों पर घुमाया गया और देर रात बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।

    नाना पटवारी ने कहा कि उनकी कार संजय कौशल उर्फ रॉनी के सर्विस सेंटर पर सर्विस होती है और वहीं काम करने वाले कुछ लोगों के बारे में पुलिस ने उनसे पूछताछ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस स्कॉर्पियो वाहन की चर्चा हो रही है, वह उनकी नहीं बल्कि संजय कौशल की है और उसमें मिले किसी भी सामान से उनका कोई संबंध नहीं है।

    इस पूरे मामले को कांग्रेस ने राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को निशाना बना रही है। उनका कहना है कि नाना पटवारी का ड्रग तस्करी प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें केवल राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से हिरासत में लिया गया।

    दूसरी ओर इंदौर पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह जांच के आधार पर की गई। डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक राजेंद्र नगर क्षेत्र से ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार दो आरोपियों इरफान खान उर्फ गोलू चंदेरी और संजय कौशल उर्फ रॉनी ने पूछताछ के दौरान नाना पटवारी और मानव गंगवानी का नाम लिया था। इसी आधार पर दोनों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि फिलहाल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है और जांच में जिसकी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    नाना पटवारी पहले भी कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनके खिलाफ हत्या के प्रयास सहित लगभग दस आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आ चुकी है। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया था। वहीं वर्ष 2025 में जमीन विवाद और 2018 में महिला से कथित अभद्रता के मामले में भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। उनका नाम खुशी कूलवाल आत्महत्या मामले की जांच के दौरान भी सामने आया था, हालांकि उस मामले में उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।

    फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

  • मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू

    मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू


    भोपाल । भोपाल के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान को लेकर जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक शुक्रवार को राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गई। मास्टर प्लान के लंबे समय से लागू नहीं होने के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने बैठक में तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजधानी के विकास का सबसे अहम दस्तावेज ही लागू नहीं हो पा रहा है तो विकास समीक्षा बैठकों का क्या औचित्य रह जाता है। इसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के हस्तक्षेप से माहौल और अधिक गरमा गया और बैठक में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।

    विवाद के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी बात सांसद से हो रही थी ऐसे में बीच में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसे है। दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि कुछ समय तक बैठक का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है और नाराज होकर बैठक से बाहर निकल गए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने दोनों नेताओं को रोकने और समझाने का प्रयास किया लेकिन वे वापस नहीं लौटे।

    बैठक के बाद सांसद आलोक शर्मा ने भी स्वीकार किया कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात कर मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह किया जाएगा। उनका मानना है कि राजधानी के भविष्य के विकास और बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित बनाने के लिए मास्टर प्लान सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

    बैठक के दौरान केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना भी जनप्रतिनिधियों के निशाने पर रही। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने परियोजना की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़े निर्माण तो हुए लेकिन नागरिक सुविधाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई इमारतों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और दशहरा मैदान जैसी महत्वपूर्ण जगहों का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी के बड़े व्यावसायिक प्लॉट छोटे किए जाएं ताकि उनकी बिक्री आसान हो और परियोजना की आय बढ़ सके।

    महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइट जैसी सामान्य समस्याओं का समाधान भी समय पर नहीं हो पाता जिससे आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इस पर कलेक्टर एवं स्मार्ट सिटी बोर्ड के अध्यक्ष प्रियंक मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि अलग बैठक कर सभी समस्याओं की समीक्षा की जाएगी और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाने का सुझाव दिया ताकि सभी विभाग मिलकर बेहतर तरीके से काम कर सकें। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं तो अधिकारियों को उन्हें गंभीरता से लेकर जल्द समाधान करना चाहिए।

    बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन को लेकर भी पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार संभागायुक्त को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाए जबकि भोपाल और सीहोर के कलेक्टर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के पास भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी बैठक में प्रमुखता से उठाई गई।

  • बंगाल में भ्रष्टाचार की परतें खोलेगी सरकार टीएमसी के 15 साल के कार्यकाल पर तैयार होगा व्हाइट पेपर

    बंगाल में भ्रष्टाचार की परतें खोलेगी सरकार टीएमसी के 15 साल के कार्यकाल पर तैयार होगा व्हाइट पेपर


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के पिछले 15 वर्षों के शासनकाल के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। सरकार इस पूरे कार्यकाल का लेखा जोखा जनता के सामने रखने के लिए एक श्वेत पत्र तैयार करेगी जिसमें विभिन्न विभागों में सरकारी धन के उपयोग और कथित अनियमितताओं का विस्तृत ब्यौरा शामिल रहेगा। इस दिशा में गठित मंत्रियों के उच्च स्तरीय समूह ने राज्य सचिवालय नबन्ना में अपनी पहली बैठक कर आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की।

    बैठक की अध्यक्षता राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने की। इसमें विभिन्न विभागों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया समय सीमा और रिपोर्ट तैयार करने के प्रारूप पर विस्तार से विचार किया गया। सरकार का कहना है कि यह दस्तावेज केवल आरोपों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि विभागवार आधिकारिक रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया जाएगा ताकि पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार श्वेत पत्र में उन मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां सरकारी धन के दुरुपयोग हेरफेर या अनियमित खर्च की आशंका है। खास तौर पर केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए मिले फंड के उपयोग की गहन समीक्षा होगी। यह भी देखा जाएगा कि जिन योजनाओं के लिए धन स्वीकृत किया गया था क्या वह उसी उद्देश्य पर खर्च हुआ या फिर किसी अन्य कार्य में उसका इस्तेमाल किया गया। जिन परियोजनाओं में धन खर्च ही नहीं किया गया उनकी भी अलग से समीक्षा की जाएगी।

    सरकार ने सभी विभागों को अपने पुराने रिकॉर्ड वित्तीय दस्तावेज और संबंधित फाइलों की जांच कर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर मंत्रियों का समूह एक प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपा जाएगा। इसके बाद आवश्यक परीक्षण और समीक्षा पूरी होने पर अंतिम श्वेत पत्र सार्वजनिक किया जाएगा।

    बैठक में वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता के अलावा मंत्री दिलीप घोष तापस रॉय अरूप दास और दीपक बर्मन भी मौजूद रहे। सभी मंत्रियों ने संबंधित विभागों से पारदर्शी और तथ्य आधारित जानकारी जुटाने पर जोर दिया ताकि रिपोर्ट विश्वसनीय और प्रमाणिक बन सके।

    यह कदम राज्य सरकार द्वारा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान की गई घोषणा के बाद उठाया गया है। सरकार पहले ही संकेत दे चुकी थी कि पिछले शासनकाल में हुए कथित वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के मामलों का पूरा ब्यौरा तैयार कर जनता के सामने रखा जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी और भविष्य में सरकारी धन के उपयोग में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    दूसरी ओर इस पहल को लेकर राज्य की राजनीति भी गर्म होने लगी है। आने वाले समय में श्वेत पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि विभागों से जुटाए गए दस्तावेजों और आंकड़ों के आधार पर तैयार होने वाली रिपोर्ट में कौन कौन से तथ्य सामने आते हैं और उसका राज्य की राजनीति पर कितना व्यापक प्रभाव पड़ता है।

  • राम मंदिर और सनातन मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा प्रहार, केजरीवाल बोले— भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं, आस्था जरूरी

    राम मंदिर और सनातन मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा प्रहार, केजरीवाल बोले— भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं, आस्था जरूरी

    नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को भाजपा पर भगवान राम और राम मंदिर के मुद्दे को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी सनातन मूल्यों के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती है, जबकि भाजपा भगवान राम के नाम का उपयोग केवल चुनावी राजनीति के लिए करती है। उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है।

    प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने कहा कि भाजपा चुनावी सभाओं और राजनीतिक अभियानों में भगवान राम तथा राम मंदिर का उल्लेख प्रमुखता से करती है, लेकिन आस्था के अनुरूप व्यवहार नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती है। उनके अनुसार, आस्था केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका व्यवहार में भी प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।

    उन्होंने राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है, ताकि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित मामलों में जिम्मेदारी तय करने के बजाय वास्तविक तथ्यों को सामने लाने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।

    केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की ओर से राम मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना को लेकर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल राजनीतिक बहस का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसी कारण लोग इस पर जवाब चाहते हैं।

    आम आदमी पार्टी के प्रमुख ने अपनी पार्टी की धार्मिक और सामाजिक पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में धार्मिक आयोजनों, भजन संध्याओं, मंदिरों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कई कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है। उनका कहना था कि इन प्रयासों का उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ के बजाय समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं का सम्मान करना है।

    उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने शासन के दौरान धार्मिक यात्राओं को सुविधाजनक बनाने और विभिन्न आस्था स्थलों से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठाए। उनके अनुसार, सनातन परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक मूल्यों के सम्मान को उनकी पार्टी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखती है।

    केजरीवाल के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर आम आदमी पार्टी इसे आस्था और जवाबदेही का विषय बता रही है, वहीं दूसरी ओर यह बयान आगामी राजनीतिक विमर्श में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी के बीच यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में राम मंदिर और सनातन से जुड़े विषय सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बने रह सकते हैं।

  • तमिलनाडु में बदले सियासी समीकरण: DMK से अलग हुई MDMK, विजय की TVK को दिया समर्थन

    तमिलनाडु में बदले सियासी समीकरण: DMK से अलग हुई MDMK, विजय की TVK को दिया समर्थन


    चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डीएमके (DMK) की लंबे समय से सहयोगी रही मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (MDMK) ने डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) से अलग होने की घोषणा कर दी है। पार्टी ने डीएमके पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हुए गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला किया है। साथ ही अभिनेता और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय को आगामी उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों में समर्थन देने का भी ऐलान किया है।

    शनिवार को चेन्नई में आयोजित एमडीएमके की सामान्य परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया। पार्टी की ओर से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि चुनाव पूर्व गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा, लेकिन फिलहाल एमडीएमके डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी।

    DMK पर लगाए गंभीर आरोप

    पार्टी प्रमुख वाइको ने आरोप लगाया कि डीएमके ने हिंदुत्व समर्थक ताकतों के साथ मिलकर एआईएडीएमके (AIADMK) के नेतृत्व वाली सरकार बनाने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि यह राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहा और इस घटनाक्रम के बाद सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस के अस्तित्व का उद्देश्य ही समाप्त हो गया।

    पार्टी के प्रस्ताव में कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए गठबंधन में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया था, इसलिए कार्यकर्ताओं की राय के आधार पर यह निर्णय लिया गया।

    विजय की पार्टी को समर्थन

    एमडीएमके ने अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के प्रति खुला समर्थन जताया। वाइको ने कहा कि टीवीके भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे, दो-भाषा नीति और सी.एन. अन्नादुरै के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का दावा करती है। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में दोनों दलों के बीच राजनीतिक सहयोग और मजबूत हो सकता है।

    विधायकों के इस्तीफे को लेकर दावा

    वाइको ने यह भी दावा किया कि विजय ने एमडीएमके के दोनों विधायकों को इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करने की पेशकश भी की थी। हालांकि दोनों विधायकों ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।

    एमडीएमके के विधायक आर. सेंथिलसेल्वन और टी.एम. राजेंद्रन वर्ष 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके के ‘राइजिंग सन’ चुनाव चिह्न पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में एमडीएमके ने गठबंधन के तहत चार सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें दो पर जीत हासिल की थी।

    ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों पर जवाब

    विजय पर लगाए जा रहे ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों का जवाब देते हुए वाइको ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी के विधायकों को डीएमके में शामिल कराने की कोशिश होती है, तो उसे क्या कहा जाएगा।

    एमडीएमके वर्ष 2017 से डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों से दोनों दलों के रिश्तों में लगातार खटास देखने को मिल रही थी। विजय और वाइको की हालिया मुलाकात तथा एमडीएमके नेताओं की नाराजगी के बाद अब गठबंधन टूटने से तमिलनाडु की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।

  • बात खरी है: छात्र नेता की ट्रांसफर चुनौती, पुलिस की फजीहत और नरोत्तम को मिला ‘सनातनी’ आशीर्वाद

    बात खरी है: छात्र नेता की ट्रांसफर चुनौती, पुलिस की फजीहत और नरोत्तम को मिला ‘सनातनी’ आशीर्वाद


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और सामाजिक घटनाओं में इन दिनों ऐसे कई घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कहीं धार्मिक मंच से राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं, कहीं छात्र राजनीति के तेवर प्रशासन को चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं घरेलू विवाद में पुलिस खुद विवाद का हिस्सा बन गई है। इन घटनाओं ने प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक माहौल को चर्चा का विषय बना दिया है।

    राजधानी भोपाल में चल रही प्रसिद्ध कथावाचक पंडित देवकीनंदन ठाकुर की कथा में उस समय दिलचस्प माहौल बन गया, जब पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा कथा स्थल पर पहुंचे। व्यासपीठ से देवकीनंदन ठाकुर ने नरोत्तम मिश्रा की खुलकर प्रशंसा की और उन्हें सनातन धर्म का सेवक तथा भगवान का सच्चा भक्त बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह शिकायत भी कर दी कि डबरा में सुंदर नवग्रह मंदिर बनवाने के बावजूद नरोत्तम मिश्रा ने उनकी कथा नहीं करवाई। इस टिप्पणी के बाद कथा पंडाल में मौजूद लोगों के चेहरे खिल उठे और माहौल हंसी-मजाक से भर गया।

    राजनीतिक जानकार इस घटना को सिर्फ एक धार्मिक टिप्पणी नहीं मान रहे हैं। दतिया में संभावित उपचुनाव की चर्चाओं के बीच इसे नरोत्तम मिश्रा के लिए एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के भीतर भी उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है और कथावाचक के मंच से मिली यह सार्वजनिक सराहना चर्चा का विषय बनी हुई है।

    उधर शिवपुरी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक नेता का बयान सुर्खियों में आ गया। अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं के बीच संगठन के विभाग संगठन मंत्री देशराज नरोलिया ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि वे चाहें तो कलेक्टर का ट्रांसफर करवा सकते हैं। दरअसल, प्रदर्शन के दौरान लंबे समय तक कलेक्टर के मौके पर नहीं पहुंचने से कार्यकर्ता नाराज थे। जब तहसीलदार बातचीत के लिए पहुंचे तो नाराजगी और बढ़ गई। इसके बाद दिया गया बयान प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। लोगों ने इसे सत्ता और संगठन की ताकत दिखाने वाले बयान के रूप में देखा।

    इसी बीच बैतूल जिले के मुलताई से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। पति-पत्नी के विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। पुलिस का उद्देश्य दोनों पक्षों को समझाकर विवाद समाप्त कराना था, लेकिन स्थिति उलट गई। बातचीत के दौरान माहौल इतना बिगड़ा कि कहासुनी हाथापाई में बदल गई। पुलिसकर्मियों और परिवार के सदस्यों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट हो गई। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिसने पुलिस को बुलाया था, वही पत्नी बाद में अपने पति के बचाव में उतर आई। इस घटना में पुलिसकर्मी और पति दोनों घायल हुए। घटना के बाद लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि पति-पत्नी के झगड़े में तीसरे व्यक्ति का फंसना अक्सर भारी पड़ जाता है।

    राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री राज्यसभा जाने की कोशिशों में लगे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। बताया जा रहा है कि उनकी रणनीति विधानसभा सीट खाली कर अपने परिवार के सदस्य को राजनीतिक अवसर दिलाने की थी। हालांकि यह योजना साकार नहीं हो सकी। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चाओं का दौर जारी है।

    प्रदेश की ये घटनाएं बताती हैं कि राजनीति, प्रशासन और समाज में हर दिन ऐसे प्रसंग सामने आते हैं, जो कभी गंभीर संदेश देते हैं तो कभी लोगों को मुस्कुराने का मौका भी दे जाते हैं।

  • कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव….PM मोदी एक माह में दूसरी बार मिले CM विजय

    कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव….PM मोदी एक माह में दूसरी बार मिले CM विजय


    नई दिल्ली।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (New Chief Minister C. Joseph Vijay) गुरुवार को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल हुए। सीएम विजय का यह कदम पूर्ववर्ती द्रमुक (DMK) सरकार के रुख से बिल्कुल अलग है जो अक्सर केंद्र सरकार के साथ टकराव की नीति अपनाती रही थी।

    नीति आयोग की इस अहम बैठक के बाद मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से अलग से मुलाकात भी की। एक महीने से भी कम समय में प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री की यह दूसरी मुलाकात है। पिछले महीने पदभार संभालने के तुरंत बाद विजय ने 27 मई को दिल्ली जाकर पीएम मोदी से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने राज्य की कल्याणकारी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता, प्रमुख विकास पहलों को मंजूरी और संवेदनशील मेकेदातू जल विवाद में केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलकर तमिलनाडु के लिए अधिक बजटीय सहायता का भी अनुरोध किया था।


    नीति आयोग की बैठक में गूंजा NEET का मुद्दा

    बैठक में शामिल होने के साथ ही मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात मजबूती से रखी। उन्होंने चिकित्सा और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा NEET का तमिलनाडु की ओर से विरोध दोहराया। विजय ने तर्क दिया कि इस परीक्षा ने ग्रामीण पृष्ठभूमि और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों के भविष्य पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव डाला है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि तमिलनाडु को एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS) और आयुष (AYUSH) पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सभी सीटों को केवल कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर भरने की अनुमति दी जाए।

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने भले ही भाजपा को अपनी पार्टी का वैचारिक दुश्मन बताया था, लेकिन सत्ता संभालने के बाद उनके आचरण में केंद्र के प्रति एक व्यावहारिक और परिपक्व दृष्टिकोण दिखाई दे रहा है।


    BJP पर हमला करने से परहेज

    जहां कई विपक्षी नेताओं ने नीट-यूजी परीक्षा विवाद को लेकर सीधे तौर पर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को निशाना बनाया, वहीं विजय ने केंद्र पर सीधा हमला करने के बजाय खुद को परीक्षा प्रणाली की कमियों तक ही सीमित रखा। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रणाली में खामियों और संरचनात्मक कमियों का पुख्ता सबूत बताया। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के रूप में तमिलनाडु विधानसभा में अपने पहले भाषण में भी विजय ने भाजपा या केंद्र सरकार की आलोचना करने से परहेज किया था।


    स्टालिन के रुख से बिल्कुल जुदा

    विजय का यह रुख उनके पूर्ववर्ती एमके स्टालिन से बिल्कुल उलट है। स्टालिन ने यह आरोप लगाते हुए लगातार तीन नीति आयोग की बैठकों का बहिष्कार किया था कि केंद्र सरकार द्वारा तमिलनाडु के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।