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  • दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित, बाजारों से होटल और पर्यटन उद्योग तक पड़ा असर

    दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित, बाजारों से होटल और पर्यटन उद्योग तक पड़ा असर


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन और सुरक्षा पाबंदियों का व्यापक असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा। व्यापारिक संगठन चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के अनुसार, एक दिन के दौरान दिल्ली में करीब 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। प्रदर्शन के दौरान प्रमुख बाजारों, मेट्रो स्टेशनों और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने से आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इसका असर त्योहारी सीजन की शुरुआत में व्यापारियों के कारोबार पर पड़ा।

    सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, प्रदर्शन के कारण हुए आर्थिक नुकसान का असर केवल खुदरा कारोबार तक सीमित नहीं रहा। सेवा क्षेत्र, होटल और आतिथ्य उद्योग, परिवहन तथा पर्यटन सहित कई क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। संगठन ने 10 अक्टूबर को हुए नुकसान का अनुमान करीब 2000 करोड़ रुपये लगाया है। इस दौरान पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों की आवाजाही कम रही। होटल, रेस्तरां, सिनेमा हॉल, ब्यूटी पार्लर और सैलून में भी पहले से की गई बुकिंग बड़े स्तर पर रद्द होने की जानकारी सामने आई।

    दिल्ली के कई प्रमुख बाजारों में कारोबार सामान्य रूप से नहीं चल सका। सुरक्षा प्रतिबंधों और यातायात जाम की आशंका के कारण सदर बाजार, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, कनॉट प्लेस, करोल बाग और लाजपत राय मार्केट जैसे व्यावसायिक केंद्रों में गतिविधियां प्रभावित रहीं। इन बाजारों में दिल्ली के साथ-साथ आसपास के शहरों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के लिए आते हैं। प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था के चलते इस बार उनकी आवाजाही पर असर पड़ा।

    सीटीआई के अनुसार, दिल्ली के बाहर से प्रतिदिन आने वाले करीब तीन से चार लाख खरीदार 10 अक्टूबर को राजधानी नहीं पहुंच सके। वहीं, सुरक्षा संबंधी आशंकाओं के कारण स्थानीय लोग भी घरों से निकलने से बचते रहे। मेट्रो स्टेशनों के बंद रहने से लोगों की आवाजाही और बाजारों तक पहुंचने में भी परेशानी हुई। ग्राहकों की संख्या घटने से खुदरा व्यापार के अलावा परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबार पर भी दबाव पड़ा।

    व्यापारियों को होने वाले नुकसान को देखते हुए सीटीआई ने सीजेपी सहित सभी राजनीतिक दलों से दिवाली तक दिल्ली में धरना-प्रदर्शन नहीं करने की अपील की है। संगठन ने इस संबंध में राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर मांग की है कि त्योहारों के दौरान राजधानी में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने से बचा जाए। सीटीआई का कहना है कि नवरात्र और रामलीलाओं का आयोजन शुरू हो चुका है। यह अवधि दिल्ली के करीब 20 लाख व्यापारियों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में शामिल है।

    संगठन ने दिल्ली में आयोजित होने वाली करीब 650 रामलीलाओं का भी उल्लेख किया। इन आयोजनों से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और त्योहारों के दौरान विभिन्न कारोबारों को ग्राहकों की बढ़ी हुई आवाजाही से लाभ होता है। सीटीआई के अनुसार, यदि सड़कों और मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंधों का असर जारी रहता है, तो त्योहारों से जुड़े व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से संगठन ने राजनीतिक दलों को सुझाव दिया है कि यदि उन्हें प्रदर्शन करना है, तो दिवाली तक दिल्ली के बजाय किसी दूसरे शहर को आयोजन स्थल के रूप में चुना जाए। संगठन की अपील का उद्देश्य त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियों और राजधानी की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का आंदोलन तेज, सोमवार को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात और दिल्ली में विरोध मार्च का ऐलान

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का आंदोलन तेज, सोमवार को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात और दिल्ली में विरोध मार्च का ऐलान

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी राजनीतिक विवाद के बीच INDIA गठबंधन ने अपने विरोध को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। विपक्षी दलों ने सोमवार को देश के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करने और दिल्ली में विरोध मार्च निकालने की योजना बनाई है। इस दौरान चुनाव आयोग के फैसलों, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की बात कही गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक विरोध के साथ न्यायपालिका तक पहुंचाने की तैयारी में है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने के बाद विपक्ष ने मुख्य न्यायाधीश से मिलने का फैसला किया है। इसके लिए विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात करेगा। इस बैठक में चुनाव आयोग के हालिया फैसलों, प्रशासनिक पाबंदियों और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से संबंधित चिंताओं को सामने रखने की योजना है। गठबंधन का उद्देश्य इन मुद्दों को न्यायपालिका के समक्ष प्रस्तुत करना है। हालांकि, प्रस्तावित मुलाकात के दौरान किन बिंदुओं पर चर्चा होगी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    विपक्षी गठबंधन ने सोमवार को दिल्ली में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन और मार्च निकालने का भी ऐलान किया है। यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जारी विरोध और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच आयोजित किया जाएगा। विपक्षी दल चुनावी पारदर्शिता, निष्पक्षता और संविधान की रक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रदर्शन में विभिन्न विपक्षी नेता और युवा भी शामिल हो सकते हैं। राजधानी में प्रस्तावित मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

    इससे पहले INDIA गठबंधन के सांसदों और नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग के साथ संसद भवन से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक मार्च निकाला था। इस विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा समेत कई नेता शामिल हुए थे। मार्च के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर धरना दिया। विपक्ष ने इस दौरान चुनावी व्यवस्था से संबंधित अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया था।

    इसके बाद विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। अब मुख्य न्यायाधीश से प्रस्तावित मुलाकात को इसी राजनीतिक अभियान के अगले कदम के तौर पर देखा जा रहा है। गठबंधन चुनाव आयोग के फैसलों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखना चाहता है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी इस विरोध का प्रमुख हिस्सा बनी हुई है।

    कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि यह संघर्ष केवल किसी एक पद या व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा है। उन्होंने कहा है कि प्रशासनिक दबाव या पुलिस कार्रवाई से विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता बहाल होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही है। सोमवार को प्रस्तावित मुलाकात और मार्च के जरिए INDIA गठबंधन इस मुद्दे पर अपना विरोध आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने दर्ज कीं 20 एफआईआर, जंतर-मंतर पर विरोध के बीच कई नेता हिरासत में

    दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने दर्ज कीं 20 एफआईआर, जंतर-मंतर पर विरोध के बीच कई नेता हिरासत में

    नई दिल्ली । दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन रविवार, 11 अक्टूबर को भी जारी रहने वाला है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन करने की योजना बनाई। प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। पुलिस ने इस मामले में 20 एफआईआर दर्ज की हैं। वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू की गई है। प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बीच दिल्ली के कई इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है।

    शनिवार को प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के बाद रविवार को भी विरोध प्रदर्शन को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। नई दिल्ली और मध्य दिल्ली में यातायात प्रभावित होने की आशंका के मद्देनजर लोगों को रास्तों पर पाबंदियों के बारे में चेतावनी दी गई है। सुरक्षा प्रबंधों के तहत बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जानकारी भी सामने आई है। प्रदर्शन के दौरान कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में एकत्र हुए कुछ प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कार्रवाई को लेकर तनाव की स्थिति बनी।

    प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके की रिहाई की भी जानकारी सामने आई। रिहा होने के बाद वह अपने घर लौट गए। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास की दिल्ली पुलिस के जवानों से बहस हो गई। पुलिस जब उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश कर रही थी, तब दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय ने प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने इसे भारत के राजनीतिक इतिहास का काला दिन बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश पर ‘काली इमरजेंसी’ थोप दी है। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने ट्रेनों के रद्द होने और दिल्ली मेट्रो के बड़े पैमाने पर बंद रहने का भी उल्लेख किया। गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती लोकतांत्रिक इतिहास के लिए बड़ा झटका है। ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

    मेट्रो सेवाओं और इंटरनेट को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मेट्रो सामान्य रूप से चले और इंटरनेट सेवाओं में कोई बाधा न आए। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के कुल 303 स्टेशनों में से 45 पर ही प्रवेश और निकास पर रोक लगाई गई थी। मेट्रो संचालन को लेकर यह जानकारी अदालत के समक्ष रखी गई।

    इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त एक स्वतंत्र संस्था का हिस्सा हैं और उन्हें अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने चाहिए। खड़गे के अनुसार, उन्हें फैसले लेने की पूरी आजादी नहीं मिल रही है। उन्होंने ‘वोट चोरी’ और लोकतंत्र के साथ धोखे के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात भी कही। प्रदर्शन और उससे जुड़ी राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच दिल्ली में सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • सोनम वांगचुक आज कर सकते हैं बड़ा ऐलान, गिरफ्तार CJP नेताओं के विरोध में उठाएंगे कदम

    सोनम वांगचुक आज कर सकते हैं बड़ा ऐलान, गिरफ्तार CJP नेताओं के विरोध में उठाएंगे कदम


    नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आज कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में अगला कदम उठाने का ऐलान कर सकते हैं। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और गिरफ्तारियों से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। यह समयसीमा पूरी होने पर वांगचुक धरना, अनशन या पदयात्रा जैसे शांतिपूर्ण विरोध के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

    वांगचुक ने दिल्ली में छात्र और युवा नेताओं, वकीलों, पत्रकारों तथा सांसदों को हिरासत में लिए जाने की निंदा की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की अनुमति होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि गिरफ्तारियों को वापस लेकर संबंधित मामलों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाए।

    वांगचुक बोले- देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात

    सोनम वांगचुक ने कहा कि दिल्ली में छात्र नेताओं, युवा नेताओं, वकीलों, पत्रकारों और यहां तक कि सांसदों को भी हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान शांति और एकता बनाए रखने की अपील करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति दी जाएगी।

    वांगचुक ने आरोप लगाया कि देशभर में अघोषित आपातकाल जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि दिन खत्म होने से पहले गिरफ्तारियों को समाप्त किया जाए और विवाद का समाधान निकाला जाए।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले 24 घंटे में गिरफ्तारियों को वापस नहीं लिया गया, तो उन्हें लेह या दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर विचार करना पड़ेगा। इसके लिए धरना, अनशन या पदयात्रा जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार बातचीत के जरिए ही मामले को सुलझा लेगी और उन्हें आंदोलन का अगला कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    7 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का दावा

    दिल्ली में ‘जंतर-मंतर 2.0’ आंदोलन के दौरान पुलिस की भारी तैनाती और बैरिकेडिंग के बीच प्रदर्शन सीमित हो गया। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सात हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इनमें सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल बताए गए हैं।

    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान से ही हिरासत में ले लिया। जंतर-मंतर की ओर जा रहे आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, माकपा नेता पिनराई विजयन और माणिक सरकार सहित कई विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।

    इसके अलावा, ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके आवास से और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाट से हिरासत में लिया गया।

    सीजेपी का ऐलान- मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन

    सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प जताया है। पार्टी ने रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन करने की घोषणा की।

    प्रेस वार्ता में सीजेपी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी और आंदोलन की कमान संभाल रहे अजिंक्य शिंदे ने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बावजूद संगठन पीछे नहीं हटेगा। पार्टी ने अपने आंदोलन को जारी रखने की बात दोहराते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।

    सुप्रीम कोर्ट में आज अवमानना याचिका पर सुनवाई

    इस मामले से जुड़ा एक कानूनी घटनाक्रम भी सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट रविवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 10 अक्टूबर को मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाने संबंधी अदालत के आदेश का उल्लंघन हुआ।

    अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने यह अवमानना याचिका दाखिल की है। इसमें संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर भी नजर रहेगी।

  • अजिंक्य शिंदे कौन हैं, सीजेपी नेताओं की हिरासत के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई उन्हें

    अजिंक्य शिंदे कौन हैं, सीजेपी नेताओं की हिरासत के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई उन्हें

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता आशुतोष रांका और सह-संयोजक सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शन के नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे। इसी बीच अभिजीत दीपके का पहले से रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। इसके बाद शिंदे की राजनीतिक पृष्ठभूमि, पार्टी में उनकी भूमिका और आम आदमी पार्टी से उनके पुराने संबंधों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    अजिंक्य शिंदे मूल रूप से महाराष्ट्र के अलिबाग के रहने वाले हैं। उनके माता-पिता खेती-किसानी करते हैं। उनकी उम्र 35 वर्ष बताई गई है और उनका संबंध महाराष्ट्र के लातूर से भी बताया गया है। शिंदे ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, लोनेरे से बीटेक की पढ़ाई पूरी की है। राजनीति में आने से पहले वह पुणे की एक सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी में नौकरी करते थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2016 में नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में काम करना शुरू किया था। तकनीकी शिक्षा के बाद राजनीति में उनकी सक्रियता ने उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियों तक पहुंचाया।

    अजिंक्य शिंदे का आम आदमी पार्टी से भी जुड़ाव रहा है। वह महाराष्ट्र में पार्टी की युवा इकाई के प्रदेश संयोजक के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें गोवा में आम आदमी पार्टी का सह-प्रभारी भी बनाया गया था। उनके सोशल मीडिया खातों पर वर्ष 2024 तक आम आदमी पार्टी के समर्थन में की गई पोस्ट मौजूद होने की जानकारी दी गई है। सीजेपी में उनकी मौजूदा भूमिका और आम आदमी पार्टी में पहले निभाई गई जिम्मेदारियों के कारण दोनों संगठनों के बीच संभावित राजनीतिक संबंधों को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को अपने आप में दोनों दलों के बीच सीधे संबंध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    सीजेपी में अजिंक्य शिंदे को 6 अगस्त 2026 को घोषित राष्ट्रीय कार्यसमिति के दौरान राष्ट्रीय संगठन प्रभारी नियुक्त किया गया था। यह पद पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से जुड़ा है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सार्वजनिक रूप से शिंदे को दीपके का मार्गदर्शक बताया है। इससे पार्टी के भीतर उनके प्रभाव और नेतृत्व से जुड़े संबंधों का संकेत मिलता है। संगठन में उनकी जिम्मेदारी केवल पद तक सीमित नहीं रही। जून से 25 जुलाई 2026 के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के प्रदर्शनों में भीड़ प्रबंधन, स्वयंसेवकों के समन्वय और पर्दे के पीछे की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी उनके पास होने की जानकारी सामने आई है।

    10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले तीन प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद शिंदे की भूमिका और अहम हो गई। अभिजीत दीपके ने अपने पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो में कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि उनकी अनुपस्थिति में आंदोलन को अजिंक्य शिंदे के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जाए। इस घोषणा के बाद शिंदे को प्रदर्शन की कमान संभालने वाले नेता के रूप में देखा जा रहा है। संगठनात्मक प्रबंधन और पहले के प्रदर्शनों में उनकी भूमिका को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।

    अब जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में अजिंक्य शिंदे की भूमिका पर नजर रहेगी। सीजेपी के शीर्ष नेताओं की हिरासत के बीच उन्हें कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करने और आंदोलन की व्यवस्थाएं संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पाबंदियों के बीच पार्टी अपने कार्यक्रम को किस तरह आगे बढ़ाती है, यह आगे की गतिविधियों से स्पष्ट होगा।

  • दिल्ली एयरपोर्ट पर सीजेपी नेताओं को हिरासत में लेने के दौरान विमान में महिला यात्री और सौरव दास के बीच तीखी बहस, वीडियो वायरल

    दिल्ली एयरपोर्ट पर सीजेपी नेताओं को हिरासत में लेने के दौरान विमान में महिला यात्री और सौरव दास के बीच तीखी बहस, वीडियो वायरल

    नई दिल्ली । दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को विमान के भीतर से हिरासत में लिए जाने के दौरान विवाद सामने आया। इस कार्रवाई के समय पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और एक महिला यात्री के बीच तीखी बहस हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सीजेपी के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के विरोध में जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।

    विमान के एयरपोर्ट पर उतरने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम उसके भीतर पहुंची। पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया। इसी दौरान विमान में मौजूद यात्रियों और पार्टी नेताओं के बीच बहस की स्थिति बनी। सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मियों को सौरव दास को विमान से बाहर ले जाते हुए देखा जा सकता है। उसी समय एक महिला यात्री उनसे कुछ कहती दिखाई देती है, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो जाती है।

    वीडियो में महिला यात्री सौरव दास से नाराजगी जताते हुए उन्हें “शर्म करो” कहती सुनाई देती है। इससे पहले दास भी तल्ख लहजे में प्रतिक्रिया देते नजर आते हैं। इसके बाद महिला यात्री की नाराजगी और बढ़ जाती है। फुटेज के एक हिस्से में पुलिस अधिकारियों के विमान में दाखिल होने के दौरान महिला यात्री को हंसते हुए भी देखा जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध वीडियो से यह स्पष्ट नहीं होता कि महिला और सौरव दास के बीच बहस किस बात को लेकर शुरू हुई थी। इस विवाद के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है।

    इस घटनाक्रम के दौरान सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके भी पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते दिखाई देते हैं। उनके इंस्टाग्राम लाइव से सामने आए वीडियो में महिला पुलिसकर्मियों समेत पुलिस टीम को विमान के भीतर उनकी ओर बढ़ते देखा जा सकता है। दीपके कहते सुनाई देते हैं कि दिल्ली पुलिस विमान में आ गई है और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। इसके बाद वह कहते हैं कि वे गिरफ्तार होने के लिए ही आए हैं और पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर लेना चाहिए।

    वीडियो में अभिजीत दीपके पुलिसकर्मियों के सामने “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाते भी सुनाई देते हैं। उनका यह बयान और विमान के भीतर पुलिस की कार्रवाई से जुड़े दृश्य घटना के प्रमुख हिस्से के रूप में सामने आए हैं। इस दौरान पार्टी के अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। पूरी कार्रवाई उस समय हुई, जब सीजेपी के नेता चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के एसआईआर से जुड़े मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए राजधानी पहुंचे थे।

    प्रदर्शन को लेकर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने बिना पूर्व अनुमति प्रदर्शन या अनधिकृत सभा आयोजित करने पर रोक से संबंधित सुरक्षा कारणों का हवाला दिया। इसी के तहत नेताओं को एयरपोर्ट पर ही रोककर हिरासत में लिया गया। हालांकि, इस मामले में पुलिस कार्रवाई से संबंधित विस्तृत कानूनी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए हिरासत के आधार और आगे की प्रक्रिया को लेकर इससे अधिक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    विमान के भीतर हुई बहस और सीजेपी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। सीजेपी समर्थक पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ प्रतिक्रियाओं में विमान के भीतर हुए विवाद और सह-यात्रियों को हुई संभावित असुविधा पर चर्चा की जा रही है। महिला यात्री और सौरव दास के बीच बहस की वजह स्पष्ट नहीं होने के कारण विवाद के मूल कारण को लेकर स्थिति अब भी साफ नहीं है।

  • CJP नेताओं की हिरासत पर शशि थरूर ने उठाए सवाल, दिल्ली में 22 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और प्रतिबंधों पर जताई चिंता

    CJP नेताओं की हिरासत पर शशि थरूर ने उठाए सवाल, दिल्ली में 22 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और प्रतिबंधों पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में 10 अक्टूबर को सिटिजन जस्टिस एंड पीस (CJP) के प्रदर्शन के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने राजधानी में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती को युद्ध जैसी स्थिति बताते हुए कहा कि शहर में जिस स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है, वैसी स्थिति उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। थरूर के अनुसार, वह रात दो बजे के बाद राष्ट्रीय राजधानी लौटे और इसके बाद उन्होंने शहर में व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त तथा आवाजाही पर प्रतिबंध देखे।

    थरूर ने कहा कि दिल्ली में हर कुछ सौ मीटर की दूरी पर सुरक्षा चौकियां बनाई गई हैं। सड़कों पर कंक्रीट के बैरिकेड और स्पाइक स्ट्रिप्स लगाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि पूरे शहर में लगभग 22,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। उनके बयान के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था के बीच 250 ट्रेनें रद्द कर दी गईं और 45 मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए गए। कांग्रेस सांसद ने इन व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई और राजधानी में आम लोगों की आवाजाही पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया।

    थरूर ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में युवाओं को उनके घरों और सड़कों से हिरासत में लिए जाने की खबरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी चुनावों की निष्पक्षता पर शांतिपूर्ण तरीके से सवाल उठाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने राजधानी के मध्य हिस्से में इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने को भी दमनकारी कदम बताया। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में नागरिकों के लिए अपनी बात रखना और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

    कांग्रेस सांसद ने जंतर-मंतर तक पहुंचने पर लगाई गई पाबंदियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस स्थान को नागरिकों के लिए अपनी असहमति व्यक्त करने के उद्देश्य से निर्धारित किया गया था, लेकिन प्रदर्शन के दौरान वहां जाने वाली सड़कों पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए। थरूर ने इसे आवागमन की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत होती है, तब इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और ऐसी तत्परता क्यों दिखाई नहीं देती।

    थरूर ने हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि यदि प्रदर्शनकारी सोमवार को दोबारा राजधानी में एकत्र होते हैं, तो क्या प्रशासन फिर से इसी तरह प्रतिबंध लगाएगा। उन्होंने कहा कि चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले नागरिकों के साथ सरकार का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि सरकार चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा रखती है, तो उसे सवाल उठाने वालों का स्वागत करना चाहिए। इसके विपरीत, राजधानी को किले में बदलने जैसी व्यवस्था लोगों के संदेह को कम करने के बजाय बढ़ा सकती है।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि केवल बैरिकेड लगाने से चुनाव आयोग के प्रति लोगों का विश्वास बहाल नहीं होगा। उनके मुताबिक, आयोग जितनी जल्दी जनता के सवालों का जवाब देगा, उतनी जल्दी शांति बहाल होने की संभावना बनेगी। उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती को इस बात से जोड़कर देखा कि संस्थाएं अपने कामकाज पर सवाल उठाने वाले लोगों के साथ कैसा व्यवहार करती हैं। थरूर ने दिल्ली में दिखाई गई व्यवस्था को शर्मनाक और अमानवीय बताया। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण असहमति और चुनावों की निष्पक्षता से जुड़े सवालों का जवाब देना जरूरी है। उन्होंने हिरासत, सुरक्षा प्रतिबंधों और सार्वजनिक आवाजाही से जुड़े मुद्दों पर सरकार तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए।

  • दिल्ली पहुंचते ही कॉकरोच जनता पार्टी के तीन नेता हिरासत में, अभिजीत दीपके बोले- मैं गिरफ्तारी देने ही आया हूं

    दिल्ली पहुंचते ही कॉकरोच जनता पार्टी के तीन नेता हिरासत में, अभिजीत दीपके बोले- मैं गिरफ्तारी देने ही आया हूं

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके और पार्टी के दो अन्य नेताओं आशुतोष रांका तथा सौरभ दास को दिल्ली पहुंचते ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। तीनों नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के इरादे से मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें हवाई अड्डे पर विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के कारण तीनों नेता हवाई अड्डे से बाहर निकलकर प्रदर्शन स्थल तक भी नहीं पहुंच सके।

    हिरासत में लिए जाने के दौरान अभिजीत दीपके का बयान सामने आया। उन्होंने कहा, “मैं अरेस्ट होने के लिए ही आया हूं। कर लो अरेस्ट।” दीपके ने विमान के अंदर से एक वीडियो संदेश जारी कर पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा, “आ जाओ, कर लो अरेस्ट। यह अराजकता है। ऐसा तो इंदिरा गांधी के समय में भी नहीं हुआ। मैं डरने वाला नहीं हूं।” उनके इस बयान के बाद हिरासत की कार्रवाई को लेकर मामला चर्चा में आ गया।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीनों नेताओं को हिरासत में लेने के लिए दिल्ली पुलिस की महिला पुलिसकर्मियों को विमान के अंदर भेजा गया था। उनकी मौजूदगी में पुलिस ने अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को हिरासत में लिया। इसके बाद तीनों को एक वैन में बैठाकर वहां से ले जाया गया। हालांकि, उन्हें हिरासत में लेने के बाद पुलिस किस स्थान पर लेकर गई, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी। उनकी हिरासत के स्थान और आगे की कार्रवाई को लेकर भी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर विरोध जताया। पार्टी ने इस कार्रवाई से जुड़ा एक वीडियो साझा कर तीनों नेताओं को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी और पुलिस के कदम को शर्मनाक बताया। पार्टी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। सीजेपी के नेता मुंबई से दिल्ली मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के कारण वे जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच पाए। हिरासत को लेकर पार्टी की ओर से विरोध दर्ज कराया गया।

    इस मामले पर आम आदमी पार्टी ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की। पार्टी ने आरोप लगाया कि शनिवार को जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद आम आदमी पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए देश में ‘काला आपातकाल’ लागू होने का आरोप लगाया। पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए।

    आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल राय ने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा के लिए मेट्रो स्टेशन बंद किए और ट्रेनें रद्द कीं। उन्होंने इन कदमों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संबंधित मेट्रो स्टेशनों के नाम, ट्रेनों की संख्या और बंद रहने की अवधि का विवरण नहीं दिया गया है। इस तरह सीजेपी नेताओं की हिरासत का मामला राजनीतिक बयानबाजी के बीच सामने आया है। एक ओर अभिजीत दीपके ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई, वहीं सीजेपी ने अपने नेताओं की हिरासत का विरोध किया और आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाए।

  • ‘PM का अपमान बर्दाश्त नहीं…’, दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के खिलाफ उतरे ‘हिट जनता पार्टी’ के युवा

    ‘PM का अपमान बर्दाश्त नहीं…’, दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के खिलाफ उतरे ‘हिट जनता पार्टी’ के युवा


    नई दिल्ली। दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन के बीच शुक्रवार, 9 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के पास जनपथ रोड पर ‘लाल हिट जनता पार्टी’ से जुड़े युवाओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के कथित अपमान और विपक्षी दलों की विरोध-प्रदर्शन की शैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने दिल्ली पुलिस और सरकार के समर्थन में नारे लगाए और आरोप लगाया कि विपक्षी दल प्रदर्शन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ एकजुट हुए हैं।

    ‘PM का अपमान नहीं सह सकते, पुलिस की तैयारी पुख्ता हो’

    समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में प्रदर्शन कर रहे एक युवक ने कहा कि वे प्रधानमंत्री का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते, इसलिए सड़कों पर उतरे हैं। उसने कहा कि पुलिस की तैयारियां इतनी पुख्ता होनी चाहिए कि विरोध करने वाले यहां न पहुंच सकें। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि सरकार प्रदर्शन की अनुमति नहीं देगी और कहा कि अब ‘कॉकरोचों’ का अंतिम समय आ गया है।

    एक अन्य युवक ने कहा कि शुक्रवार को उनके साथ जो हुआ, वैसा ही व्यवहार अगले दिन बड़ी संख्या में आने वाले प्रदर्शनकारियों के साथ भी होना चाहिए। उसने दावा किया कि 10 अक्टूबर को दो लाख लोगों की भीड़ जुट सकती है और तब प्रशासन की कार्रवाई देखी जाएगी।

    विपक्ष पर अमर्यादित टिप्पणियां करने का आरोप

    प्रदर्शनकारियों ने विपक्षी दलों पर लगातार इस्तीफे की मांग करने और नेताओं के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियां करने का आरोप लगाया। एक युवक ने कहा कि विपक्ष हर मुद्दे पर किसी न किसी का इस्तीफा मांगने लगता है। उसके मुताबिक, अगर कोई देश के लिए अच्छा काम करेगा, तो विपक्ष एक दिन उसका भी इस्तीफा मांगने लगेगा।

    प्रदर्शनकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। उसने मांग की कि विपक्षी दलों के प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए।

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और जंतर-मंतर का भी किया जिक्र

    प्रदर्शन में शामिल एक अन्य व्यक्ति ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का उल्लेख करते हुए जंतर-मंतर पर चल रही गतिविधियों पर सवाल उठाए। उसने आरोप लगाया कि कभी शिक्षा मंत्री तो कभी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा जा रहा है। प्रदर्शनकारी ने आशंका जताई कि आगे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग भी की जा सकती है।

    उसने कहा कि उनका समूह 10 अक्टूबर को होने वाले विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ एकत्र हुआ है और चाहता है कि यह प्रदर्शन न हो।

    ‘देश का मजाक बनाया जा रहा है’

    ‘लाल हिट जनता पार्टी’ के बैनर तले प्रदर्शन करने पहुंचे एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि उनका समूह पुलिस के समर्थन में प्रदर्शन करने आया है, लेकिन उसे अनुमति नहीं दी जा रही है। उसने एक महिला के रोने वाले वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि घटना को देखकर उन्हें गुस्सा आया है और वे पुलिस को इस तरह की स्थिति में नहीं देख सकते।

    उसने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का अपमान किया जा रहा है और देश में कहीं भी किसी के इस्तीफे की मांग उठने लगती है। प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे देश के मुखिया का अपमान सहन नहीं करेंगे और आगे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।

    फिलहाल, प्रदर्शनकारियों की ये टिप्पणियां विपक्षी दलों के खिलाफ उनके विरोध और नाराजगी को दर्शाती हैं। प्रदर्शन की अनुमति और नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

  • 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सार्वजनिक परिवहन बंद करने पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने आम लोगों की परेशानी दूर करने के लिए संतुलित कदम उठाने को कहा

    10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सार्वजनिक परिवहन बंद करने पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने आम लोगों की परेशानी दूर करने के लिए संतुलित कदम उठाने को कहा

    नई दिल्ली । दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और कुछ रेल सेवाएं रद्द किए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मेट्रो स्टेशन और रेलवे सेवाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के फैसले पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल प्रदर्शन की अनुमति देने के सवाल पर विचार नहीं कर रही, क्योंकि सुनवाई के दौरान कोई आयोजक उसके सामने उपस्थित नहीं हुआ। इस सुनवाई का मुख्य मुद्दा सार्वजनिक परिवहन पर पाबंदियों से आम लोगों को होने वाली परेशानी रहा। अदालत ने केंद्र सरकार से ऐसे कदम उठाने को कहा, जिनसे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जरूरतों के साथ-साथ लोगों की आवाजाही भी प्रभावित न हो।

    यह याचिका भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद एमए बेबी ने दाखिल की थी। इसमें मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर कुछ ट्रेनों को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई। याचिका के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने 8 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को पत्र लिखकर 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने को कहा था। यह व्यवस्था 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से लागू किए जाने और हालात सामान्य होने तक जारी रखने की बात कही गई थी। याचिका में कहा गया कि इस कदम का असर केवल प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों पर नहीं, बल्कि रोजाना काम, पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी कामों के लिए यात्रा करने वाले नागरिकों पर भी पड़ सकता है।

    याचिका में जिन स्टेशनों का उल्लेख किया गया, उनमें सुप्रीम कोर्ट, हौज खास, लाजपत नगर, कश्मीरी गेट, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, शाहदरा और रोहिणी सहित कई स्टेशन शामिल बताए गए। याचिकाकर्ता का कहना था कि इनमें से कई स्टेशन अस्पतालों, कॉलेजों, अदालतों और रिहायशी इलाकों तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण हैं। याचिका में 10 अक्टूबर को नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच पहुंचने वाली कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने पर भी सवाल उठाया गया। इनमें हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस का जिक्र किया गया। याचिका में मरीजों, विद्यार्थियों, यात्रियों और दूसरे नागरिकों को संभावित परेशानी का मुद्दा उठाया गया। साथ ही, दावा किया गया कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे कुछ लोगों को दूसरे राज्यों में रोका गया या हिरासत में लिया गया।

    याचिकाकर्ता ने अदालत से मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का फैसला रोकने, सेवाएं सामान्य करने और रद्द ट्रेनों को जहां तक संभव हो दोबारा चलाने का निर्देश देने की मांग की थी। प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड और वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। याचिका में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आने वाले लोगों को केवल इसी कारण रोकने से बचने का अनुरोध किया गया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियों से लाखों लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि वकीलों के पास निजी वाहन हो सकते हैं, लेकिन अदालतों में काम करने वाले कई कर्मचारी मेट्रो से आते हैं। पीठ ने अधिकारियों से बैरिकेडिंग की जानकारी सार्वजनिक करने और लोगों को वैकल्पिक सड़कों के बारे में बताने की जरूरत पर भी जोर दिया।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार लोगों को होने वाली असुविधा के मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों से चर्चा करेगी। उन्होंने दलील दी कि सुरक्षा संबंधी कदम सभी की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाए जा रहे हैं। उन्होंने पिछली एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि 20 जून को प्रदर्शन की एक दिन की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रदर्शन 17 दिनों तक चला और संसद की ओर जाने की कोशिश भी हुई। उनके अनुसार, उस दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट पर पाबंदी सीमित क्षेत्र में है और महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं हुई थीं। अदालत ने प्रदर्शन की अनुमति के सवाल पर विचार करने से इनकार करते हुए सार्वजनिक परिवहन और नागरिकों की परेशानी पर ध्यान केंद्रित रखा।

    सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जंतर-मंतर की भौगोलिक स्थिति और सीमित जगह को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जगह की कमी के कारण प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, स्वच्छता और एंबुलेंस जैसी व्यवस्थाओं में समस्याएं पैदा हो सकती हैं और उनके अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि मेट्रो, ट्रेन और सड़क परिवहन को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता तथा कदम हालात के अनुरूप होने चाहिए। अदालत ने लोगों को यह स्पष्ट जानकारी देने की जरूरत बताई कि कौन-सी सेवाएं कब उपलब्ध होंगी और किन रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है। केंद्र की ओर से आश्वासन दिया गया कि अधिकारियों से बातचीत के बाद संतुलित कदम उठाए जाएंगे, यातायात का प्रवाह बनाए रखने की कोशिश होगी और लोगों की सुविधा के लिए सलाह जारी की जाएगी।