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  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे पर संसद परिसर में विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन, साधु के वेश में दिखे पप्पू यादव और राहुल गांधी ने दिया चढ़ावा

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे पर संसद परिसर में विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन, साधु के वेश में दिखे पप्पू यादव और राहुल गांधी ने दिया चढ़ावा

    नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर संसद परिसर में विपक्षी दलों ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने नाटक के माध्यम से कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। इस दौरान पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में दिखाई दिए, जबकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसद प्रदर्शन में शामिल हुए।

    प्रदर्शन के दौरान संसद परिसर में एक प्रतीकात्मक दान पेटी रखी गई थी। विपक्षी नेताओं ने नाटक के जरिए अपनी बात रखने की कोशिश की। इस दौरान राहुल गांधी सहित अन्य सांसद दान पेटी में चढ़ावा डालते हुए नजर आए। वहीं, प्रदर्शन के एक हिस्से में पप्पू यादव साधु के रूप में दान पेटी लेकर जाते हुए दिखाई दिए, जिसके बाद अन्य सांसदों ने उन्हें रोकने और विरोध जताने का अभिनय किया।

    विपक्षी सांसदों ने इस प्रदर्शन के जरिए सरकार पर निशाना साधने की कोशिश की। नेताओं का कहना था कि वे विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं और संसद के भीतर तथा बाहर जनता से जुड़े मामलों को उठाते रहेंगे। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी भी की।

    प्रदर्शन में राम मंदिर चढ़ावा विवाद के साथ-साथ अन्य मुद्दों को भी जोड़ा गया। विपक्षी सांसदों ने पेपर लीक जैसे मामलों का भी जिक्र करते हुए सरकार से जवाब मांगने की बात कही। प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों में चढ़ावा चोरी और पेपर चोरी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

    इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि संसद और उसके परिसर की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सदस्यों को सलाह दी कि संसद परिसर में ऐसे तरीके अपनाने से बचना चाहिए, जिससे सदन की मर्यादा प्रभावित हो।

    लोकसभा अध्यक्ष ने सांसदों से संसदीय परंपराओं और नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक बहस और चर्चा का स्थान है, इसलिए विरोध दर्ज कराने के दौरान भी गरिमा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।

    घटना के बाद संसद की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी हुई। हालांकि विपक्षी नेताओं ने अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए कहा कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे।

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार, संसद सत्र के दौरान विपक्ष अक्सर अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाता है। इस बार राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर किए गए प्रतीकात्मक प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

    वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय गरिमा और विरोध के तरीकों को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की बहस और राजनीतिक बयानबाजी में चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • वरिष्ठ अभिनेता के बयान से बॉलीवुड में नई चर्चा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जताई गहरी श्रद्धा और सम्मान।

    वरिष्ठ अभिनेता के बयान से बॉलीवुड में नई चर्चा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जताई गहरी श्रद्धा और सम्मान।

    नई दिल्ली। फिल्म उद्योग के जाने-माने अभिनेता सुदेश बेरी अपने एक हालिया बयान को लेकर अचानक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बातचीत के दौरान उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त किया है। अभिनेता ने प्रधानमंत्री के संघर्ष और नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि भले ही वे उनसे कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं मिले हैं, लेकिन उनके मन में देश के सर्वोच्च नेता के प्रति ईश्वर तुल्य आदर और निष्ठा का भाव है।

    वार्तालाप के दौरान सुदेश बेरी ने देश में चल रहे विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रदर्शनों की शैली पर भी बेबाक राय रखी। उन्होंने हाल के दिनों में चर्चा में आए एक संगठन और उनके विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल जंतर-मंतर जैसी जगहों पर बैठकर प्रदर्शन करने से समाज का वास्तविक भला नहीं होता। अभिनेता का मानना है कि यदि कोई सच में जनसेवा करना चाहता है, तो उसे बच्चों के लिए खेल के मैदान, बुजुर्गों के लिए आश्रम और जरूरतमंदों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे ठोस सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देना चाहिए।

    प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए अभिनेता ने उनके शुरुआती जीवन के संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से उठकर विश्व पटल पर देश का प्रतिनिधित्व करना कोई साधारण बात नहीं है। उन्होंने भावुक होते हुए व्यक्त किया कि जिस तरह लोग बिना देखे ईश्वर पर विश्वास और उनका सम्मान करते हैं, ठीक उसी तरह वे भी प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व और राष्ट्र-निर्माण के प्रयासों के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा रखते हैं और अवसर मिलने पर उन्हें नमन करना चाहते हैं।

    मनोरंजन जगत में अक्सर कलाकारों के राजनीतिक और सामाजिक बयानों को लेकर काफी बहस देखने को मिलती है। सुदेश बेरी के इस बयान ने भी सोशल मीडिया और सिनेमा प्रेमियों के बीच एक नई वैचारिक चर्चा को जन्म दे दिया है। जहां कुछ लोग उनके बेबाक अंदाज और विचार की सराहना कर रहे हैं, वहीं कुछ अन्य लोग विरोध प्रदर्शनों पर दिए गए उनके सुझावों को लेकर अलग दृष्टिकोण रखते हैं।

    अभिनय क्षेत्र की बात करें तो सुदेश बेरी लंबे समय से भारतीय सिनेमा और टेलीविजन उद्योग से जुड़े रहे हैं। उन्होंने ‘बॉर्डर’ जैसी देशभक्ति पर आधारित ऐतिहासिक फिल्मों से लेकर कई लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी सशक्त अभिनय क्षमता का परिचय दिया है। हाल ही में वे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के सीक्वल में एक संक्षिप्त भूमिका में नजर आए थे। फिलहाल उनके इस बयान के बाद बॉलीवुड के गलियारों में उनकी काफी चर्चा हो रही है।

  • मप्र सरकार के 60 फीसदी उपज खरीदने के फैसले के बाद किसानों का आंदोलन खत्म

    मप्र सरकार के 60 फीसदी उपज खरीदने के फैसले के बाद किसानों का आंदोलन खत्म


    – मप्र सरकार प्रत्येक पात्र किसान से करेगी मूंग का 60 प्रतिशत उपार्जन, स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाई

    भोपाल। मध्य प्रदेश में चल रहे किसान आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने प्रत्येक पात्र किसान से 60 फीसदी तक मूंग खरीदी करने का ऐलान किया है। नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ खरीदी की जाएगी। साथ ही स्लॉट बुकिंग की अवधि 10 अगस्त तक बढ़ा दी है और मूंग खरीदी की अंतिम तारीख 20 अगस्त कर दी गई है।

    बुधवार की रात सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच मंत्रालय में हुई बैठक के बाद किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनने के बाद किसान अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो गए। प्रशासन ने बसों के जरिए किसानों को उनके वाहनों तक पहुंचाया। देर रात तक आंदोलन पूरी तरह समाप्त हो गया।

    एडिशनल सीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि किसानों ने सहमति जता दी है। इसके बाद प्रशासन ने रोशनपुरा चौराहे से किसानों को बसों के जरिए उनकी गाड़ियों तक पहुंचाकर रवाना किया। बाद में रोशनपुरा चौराहा लगभग खाली हो गया। बाणगंगा की ओर जाने वाले मार्ग को छोड़कर बाकी रास्ते यातायात के लिए खोल दिए गए।

    कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर बुधवार को किसानों के साथ चर्चा के लिए गठित मंत्री समूह की किसान प्रतिनिधियों के साथ चर्चा हुई। किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि अब प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 25 प्रतिशत नहीं, बल्कि 60 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जो नर्मदापुरम, सीहोर एवं हरदा जैसे जिलों में लगभग 3 क्विंटल प्रति एकड़ आता है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा और प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिले।

    उन्होंने बताया कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब किसान 30 जुलाई के स्थान पर 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। इसी प्रकार उपार्जन की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त की जा रही है।

    कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार सदैव किसानों के हित में कार्य करती आई है। अन्नदाता प्रदेश की अर्थव्यवस्था और समृद्धि का आधार हैं और उनके परिश्रम से उत्पादित उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है ।

    उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन के लिए मध्य प्रदेश को 4.52 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। भारत सरकार की योजना के अंतर्गत राज्य के कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत उपार्जन किए जाने का प्रावधान है। भारत सरकार के इसी नियम के अंतर्गत निर्णय लिया गया था कि प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों से उनकी उपज का 25 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उपार्जित किया जाएगा।

    उन्होने किसान भाइयों-बहनों को आश्वस्त किया कि मध्य प्रदेश सरकार सदैव किसानों के हित में खड़ी है। जहाँ तक खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था से संबंधित शिकायतों और व्यावहारिक समस्याओं का प्रश्न है, यह व्यवस्था राज्य शासन का एक महत्वपूर्ण सुधार है और आने वाले समय में इससे किसानों को काफी सुविधा एवं लाभ मिलेगा।

    ई-टोकन व्यवस्था में सुधार के लिये समिति गठित होगी

    कृषि मंत्री ने बताया कि चूँकि यह एक नई व्यवस्था है, इसलिए प्रारंभिक स्तर पर सामने आ रही समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी सभी समस्याओं का परीक्षण कर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएँ प्रस्तुत करेगी। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर आवश्यक सुधार तत्काल किए जाएंगे। सुझाव प्राप्त होकर सुधार होने तक ई-टोकन से खाद वितरण की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की जा रही है।

  • PoK में चुनावी विवाद बना खूनी संघर्ष: प्रदर्शनकारियों पर चली गोलियां, रक्षा मंत्री के बयान से और गरमाया मामला

    PoK में चुनावी विवाद बना खूनी संघर्ष: प्रदर्शनकारियों पर चली गोलियां, रक्षा मंत्री के बयान से और गरमाया मामला


    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में चुनावी व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विरोध अब गंभीर राजनीतिक और सुरक्षा संकट में बदल गया है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि प्रदर्शन कर रहे लोगों को वह भारत की तरह पाकिस्तान का दुश्मन मानते हैं और ऐसे लोगों से किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं की जाएगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प में 30 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    पीओके में यह प्रदर्शन विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटों को समाप्त करने की मांग को लेकर किया जा रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के बैनर तले हजारों लोग रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च निकाल रहे थे। संगठन का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान बिना किसी उकसावे के गोलीबारी कर दी जिससे बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए। दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारी आधुनिक हथियारों से लैस थे और उन्होंने पहले सुरक्षाबलों पर हमला किया जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई।

    हिंसा के बाद पूरे पीओके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त सेना पैरामिलिट्री बल और आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी की तैनाती की गई है। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी है और इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

    दरअसल पीओके विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं जिनमें 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं जबकि 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो 1947 और उसके बाद जम्मू कश्मीर से पाकिस्तान चले गए थे। इन सीटों के मतदाता पीओके में नहीं बल्कि पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों में रहते हैं। प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की राजनीतिक पार्टियां पीओके की सरकार के गठन में हस्तक्षेप करती हैं और कई बार इन्हीं सीटों के कारण विधानसभा का बहुमत बदल जाता है।

    जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की मांग है कि पीओके की विधानसभा चुनने का अधिकार केवल वहां रहने वाले लोगों के पास होना चाहिए और शरणार्थी सीटों की मौजूदा व्यवस्था समाप्त की जाए। विपक्षी दलों का भी आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ सहित कई दल पहले भी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुके हैं।

    रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान ने पहले से तनावपूर्ण माहौल को और अधिक गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद स्थापित नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

  • E20 पेट्रोल को लेकर AAP का विरोध तेज, केजरीवाल बोले- सरकार नीति नहीं बदलेगी तो होगा राष्ट्रीय आंदोलन

    E20 पेट्रोल को लेकर AAP का विरोध तेज, केजरीवाल बोले- सरकार नीति नहीं बदलेगी तो होगा राष्ट्रीय आंदोलन

    नई दिल्ली । पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी ई20 ईंधन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा है कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने वाहनों में ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर लोगों की चिंताओं का अब तक स्पष्ट समाधान नहीं किया गया है।

    एक प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने दावा किया कि उन्होंने देश की 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों से यह पूछा था कि क्या वर्ष 2023 से पहले निर्मित वाहनों में ई20 पेट्रोल का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित है। उनका कहना था कि इस संबंध में किसी भी कंपनी ने उन्हें लिखित जवाब नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट रुख अपनाने से बच रही हैं।

    उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों के मन में कई व्यावहारिक सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना जरूरी है। यदि ई20 पेट्रोल के उपयोग से किसी वाहन में तकनीकी खराबी आती है या माइलेज प्रभावित होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, इस पर सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों को स्पष्ट स्थिति बतानी चाहिए। उनके अनुसार लाखों उपभोक्ताओं को अपने वाहनों के लिए उपयुक्त ईंधन की जानकारी पाने का अधिकार है।

    केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि कई ऑटोमोबाइल कंपनियों के अधिकारियों से उनकी फोन पर बातचीत हुई, जिसमें ई20 ईंधन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर चर्चा हुई। हालांकि उन्होंने किसी कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया। उनका आरोप था कि कंपनियां इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखने से बच रही हैं।

    आम आदमी पार्टी प्रमुख ने ई20 नीति को लेकर व्यापक सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों की राय जानने और विशेषज्ञों के विचार सामने लाने के लिए एक टाउनहॉल कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम के आयोजन में प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।

    प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे अपील करते हुए कहा कि सरकार को जनता की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार है और किसी भी नीति पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ई20 नीति पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लेकर देशव्यापी जनआंदोलन शुरू करेगी।

    ई20 नीति का उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है। हालांकि इसके प्रभाव को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग राय सामने आती रही है। इसी बीच केजरीवाल के बयान के बाद इस विषय पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार, ऑटोमोबाइल कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि ई20 नीति को लेकर उठाए गए सवालों और आंदोलन की चेतावनी का आगे क्या असर पड़ता है।

  • कंगना रनौत ने बयान पर दी सफाई, बोलीं- अशोभनीय हरकतों का किया था विरोध, मीडिया पर लगाया बयान तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप

    कंगना रनौत ने बयान पर दी सफाई, बोलीं- अशोभनीय हरकतों का किया था विरोध, मीडिया पर लगाया बयान तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप

    नई दिल्ली । अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत के छात्र विरोध प्रदर्शन को लेकर दिए गए हालिया बयान पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बढ़ते विवाद के बीच कंगना ने एक नया वीडियो जारी कर अपने बयान पर विस्तृत सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया और उनके पूरे बयान को दिखाने के बजाय केवल चुनिंदा हिस्सों को प्रचारित किया गया। उनका कहना है कि उन्होंने किसी वर्ग विशेष को निशाना नहीं बनाया, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर अशोभनीय व्यवहार का विरोध किया था।

    कंगना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि उन्होंने सड़क पर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी में होने वाली अभद्र भाषा और अश्लील हरकतों को सामान्य मानने से इनकार किया था। उनके अनुसार ऐसे व्यवहार को सामाजिक स्वीकृति नहीं दी जा सकती और समाज को इस तरह की प्रवृत्तियों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ सामाजिक वातावरण बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

    अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि उनके बयान के बाद मीडिया के एक वर्ग ने उन्हें लगातार निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि उनके सकारात्मक विचारों और अन्य मुद्दों पर दिए गए बयानों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि विवादित हिस्से को बार-बार प्रसारित किया जा रहा है। उनके मुताबिक टीआरपी, लाइक्स और व्यूज की होड़ में उनके पूरे संदेश को सामने नहीं रखा गया, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी।

    कंगना ने यह भी कहा कि उन्होंने हाल के दिनों में देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों की सराहना की है और युवाओं, विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों तथा देश को आगे बढ़ाने वाली नई पीढ़ी की प्रशंसा भी की है। उनका दावा है कि इन सकारात्मक बयानों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया और केवल विवाद से जुड़े अंशों को प्रमुखता मिली।

    वीडियो में उन्होंने अपने आलोचकों की प्रतिक्रियाओं पर भी टिप्पणी की। कंगना ने कहा कि कुछ लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गलत व्याख्या कर रहे हैं। उनके अनुसार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि सार्वजनिक स्थानों पर ऐसा व्यवहार किया जाए जिससे दूसरे लोगों की भावनाएं, आस्था या सम्मान प्रभावित हों। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में अधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।

    उन्होंने आगे कहा कि समाज में अनुशासन और शालीनता का पालन प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक यदि कोई व्यक्ति सामाजिक या पेशेवर जीवन में मर्यादाओं का पालन नहीं करता तो उसे इसके परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन का उद्देश्य स्वयं को बेहतर बनाना और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ना होना चाहिए, न कि ऐसे आचरण को बढ़ावा देना जिससे सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो।

    वीडियो के अंत में कंगना रनौत ने सभी देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लोगों से अपने गुरुओं के बताए मार्ग पर चलने, जीवन में अनुशासन अपनाने और निरंतर बेहतर इंसान बनने का संदेश दिया। उनके इस नए वीडियो के सामने आने के बाद भी उनके बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है, जबकि समर्थक और आलोचक दोनों अपने-अपने पक्ष पर कायम दिखाई दे रहे हैं।

  • नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली । नीट परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर देश भर में जारी उथल-पुथल के बीच राज्य सरकारों का रुख बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि आंदोलन में भाग लेने वाले सामान्य और निर्दोष छात्रों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कठोर प्रशासनिक कदम नहीं उठाया जाएगा। हालांकि राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक रुख में यह भी साफ कर दिया गया है कि आपराधिक इतिहास रखने वाले या हिंसा में संलिप्त लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

    राज्य सरकार द्वारा जारी औपचारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि नीट परीक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रमों और छात्र असंतोष पर काफी गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया है। गहन समीक्षा के बाद प्रशासन ने यह तय किया है कि जो युवा या विद्यार्थी केवल अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे थे, उनके खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और न ही उन्हें बेवजह परेशान किया जाएगा। लेकिन इस सुरक्षा का दायरा केवल निर्दोष विद्यार्थियों तक ही सीमित रहेगा और पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाले तत्वों पर कानून का शिकंजा कसता रहेगा।

    प्रशासनिक स्तर पर यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के हालिया दिशानिर्देशों और न्यायिक टिप्पणियों के अनुरूप उठाया गया है। शीर्ष अदालत ने भी हाल ही में विभिन्न याचिकाओं पर विचार करते हुए साफ कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए, जबकि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर जांच एजेंसियां नियमानुसार कार्रवाई जारी रख सकती हैं। इसी के तहत राज्य के गृह विभाग ने अपने पुलिस बलों को निर्देश दिए हैं कि वे पुराने दर्ज मामलों की समीक्षा करें और छात्रों की पहचान सुनिश्चित करके ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाएं।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों और अव्यवस्था के सिलसिले में पुलिस में मामला दर्ज किया गया था। इस दर्ज मुकदमे की कड़ी में जांच एजेंसियों ने व्यापक छानबीन की है और अब तक कई संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काने या पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर हमला करने का प्रयास किया था।

    उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल से पहले पूर्वोत्तर राज्य असम और पड़ोसी राज्य बिहार की सरकारों ने भी इसी तरह का उदार रुख अपनाया था। दोनों राज्यों ने घोषणा की थी कि परीक्षा में धांधली के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों और आम नागरिकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकारों का मानना है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किए गए प्रदर्शनों पर दंडात्मक रुख अपनाना उचित नहीं है, बशर्ते उसमें किसी असामाजिक तत्व की साजिश शामिल न हो।

    देशव्यापी स्तर पर नीट परीक्षा को लेकर मचा बवाल जुलाई के अंतिम सप्ताह में केंद्रीय स्तर पर हुए बड़े घटनाक्रमों के बाद थमता नजर आया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद त्यागने के बाद विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के दो दौर की सकारात्मक बातचीत हुई थी। उस वार्ता के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों ने यह सहमति व्यक्त की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को निरस्त किया जाएगा, पुलिसिया उत्पीड़न रोका जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कानून लाया जाएगा। अब राज्य सरकारें उसी समझौते और न्यायिक आदेशों का क्रियान्वयन कर रही हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने दिया दो दिनों में दूसरा अल्टीमेटम

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने दिया दो दिनों में दूसरा अल्टीमेटम


    नई दिल्ली ।
    देश में पेपर लीक मामले को लेकर पिछले दिनों चले बड़े जनांदोलन के बाद एक बार फिर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन की आहट तेज हो गई है। जंतर-मंतर से संसद तक चले प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने केंद्र सरकार को दो दिनों के भीतर दूसरी बार कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। संगठन का साफ कहना है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस मुकदमे तुरंत वापस नहीं लिए गए, तो वे एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

    इस पूरे विवाद की ताजा वजह सुप्रीम कोर्ट में हुई हालिया सुनवाई बनी है। शीर्ष अदालत की चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग से जुड़ी याचिकाओं पर विचार करते हुए पुलिस को मौजूदा प्राथमिकियों की जांच जारी रखने की इजाजत दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन युवाओं का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिन्होंने केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और हिरासत में लिए गए ऐसे निर्दोष लोगों को रिहा किया जाए।

    अदालत के इस रुख के सामने आते ही सीजेपी ने केंद्र सरकार पर अपनी सहमति और लिखित आश्वासनों से पीछे हटने का बड़ा आरोप लगाया है। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि पच्चीस जुलाई को सरकार के साथ हुई वार्ता के दौरान यह लिखित भरोसा दिया गया था कि सभी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले पूरी तरह रद्द किए जाएंगे और किसी भी छात्र के खिलाफ आगे कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। इसी ठोस आश्वासन के आधार पर ही राष्ट्रव्यापी आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया गया था।

    संगठन का आरोप है कि अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी तंत्र ने प्राथमिकियों को बनाए रखने का कड़ा विरोध नहीं किया, जिससे अब भाजपा शासित राज्यों की पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर शिकंजा कसने का रास्ता मिल गया है। अगर सरकार की मंशा साफ होती, तो वह अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकती थी। सरकार का यह ढुलमुल रवैया लाखों युवाओं के भविष्य और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

    उल्लेखनीय है कि जून महीने में नई दिल्ली में शुरू हुआ यह आंदोलन जुलाई के मध्य तक बेहद उग्र रूप ले चुका था। संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भारी झड़प में कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। स्थिति बिगड़ती देख सरकार ने दो दौर की द्विपक्षीय बातचीत की थी, जिसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके अलावा मृतक छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अभयदान देने का समझौता हुआ था। अब उस समझौते के टूटने की आशंका ने एक बार फिर देश के युवाओं और छात्रों को उद्वेलित कर दिया है।

  • प्रदर्शनकारियों पर कंगना रनौत का तीखा हमला, बोलीं- "हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, अब रोने की जरूरत नहीं"

    प्रदर्शनकारियों पर कंगना रनौत का तीखा हमला, बोलीं- "हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, अब रोने की जरूरत नहीं"

    नई दिल्ली। भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में अपनी बात रखने वाले लोगों को आलोचना और प्रतिक्रिया का सामना करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किए गए अपने संदेश में कंगना ने प्रदर्शनकारियों के व्यवहार, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

    कंगना रनौत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सड़कों पर जिन प्रदर्शनकारियों को आम लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, उसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर उनकी अभद्र और आपत्तिजनक सामग्री के कारण जनता में नाराजगी बढ़ी है। कंगना ने कहा कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखता है, तो उसे दूसरों की प्रतिक्रिया सुनने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने आगे लिखा कि यदि कोई सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो जनता भी उसके प्रति नाराजगी व्यक्त कर सकती है। कंगना के अनुसार यदि किसी को सरकार या देश की नीतियों से असहमति है और वह सार्वजनिक मंचों पर अपमानजनक भाषा का प्रयोग करता है, तो उन लोगों को भी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है जो देश और सरकार का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी राय रखने का समान अधिकार है।

    अपनी पोस्ट में कंगना ने न्यूटन के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए लिखा कि हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि यदि अब तक लोग कारण और प्रभाव के सिद्धांत को नहीं समझ पाए हैं, तो मौजूदा परिस्थितियां उन्हें यह बात अच्छी तरह समझा देंगी। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है और समर्थक व आलोचक दोनों अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

    दरअसल, हाल के दिनों में छात्र आंदोलन और उससे जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं। इन्हीं घटनाओं के संदर्भ में कंगना लगातार अपनी प्रतिक्रिया देती रही हैं। इससे पहले भी उन्होंने प्रदर्शनकारियों की भाषा और विरोध के तरीके पर सवाल उठाते हुए कई पोस्ट साझा किए थे। उन्होंने कुछ वायरल वीडियो का उल्लेख करते हुए प्रदर्शनकारियों की भाषा और व्यवहार की आलोचना की थी।

    कंगना ने इससे पहले एक अन्य पोस्ट में प्रदर्शनकारी युवाओं को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए लिखा था कि उन्होंने एक साथ इतनी अभद्रता पहले कभी नहीं देखी। उन्होंने कुछ वीडियो को परेशान करने वाला बताते हुए युवाओं की भाषा, व्यवहार और परवरिश पर भी सवाल उठाए थे। उनके इन बयानों ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस को जन्म दिया था और विभिन्न वर्गों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

    भाजपा सांसद होने के साथ-साथ कंगना रनौत सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं। उनके कई बयान पहले भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुके हैं। इस बार भी उनका ताजा बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हालांकि, इस मुद्दे पर प्रदर्शनकारियों या संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • रावलकोट में प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी से बढ़ा तनाव, PoK में सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

    रावलकोट में प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी से बढ़ा तनाव, PoK में सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलकोट क्षेत्र में मंगलवार को प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हुई कथित झड़प के बाद स्थिति अत्यधिक तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थानीय संगठनों का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा की गई गोलीबारी में कई लोगों की जान गई, जबकि बड़ी संख्या में नागरिक अब भी प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं। घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में असंतोष और विरोध का माहौल गहरा गया है।

    स्थानीय दावों के अनुसार, मंगलवार तड़के बड़ी संख्या में नागरिक अपने विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। आरोप है कि हालात बिगड़ने पर सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। हालांकि, इस संबंध में स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई है।

    जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन को दबाने के लिए सुरक्षा बल लगातार बल प्रयोग कर रहे हैं। संगठन का दावा है कि 5 जून से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक लगभग 70 लोगों की मौत हो चुकी है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन संगठन का कहना है कि हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं और नागरिकों में व्यापक असंतोष व्याप्त है।

    गोलीबारी की खबरों के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे। बड़ी संख्या में लोग चिनार चौक और आसपास के क्षेत्रों में एकत्र रहे तथा आंदोलन जारी रखने की बात कही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक विरोध जारी रहेगा। क्षेत्र में लगातार लोगों की आवाजाही और जुटान के कारण स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

    इस घटनाक्रम पर पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेता डॉ. शहबाज गिल ने सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएं क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बल प्रयोग से हालात सामान्य होने के बजाय और जटिल हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने मृतकों की संख्या और घटनाओं की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    शहबाज गिल ने यह भी दावा किया कि गोलीबारी में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग युवा थे। उन्होंने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनके अनुसार, ऐसे घटनाक्रमों से स्थानीय लोगों में असुरक्षा और असंतोष की भावना बढ़ रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और आधिकारिक पक्ष की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

    इस बीच, कश्मीर एक्शन कमेटी के नेताओं ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि वह आने वाले दिनों में अपनी अगली रणनीति सार्वजनिक करेगा। प्रदर्शन से जुड़े प्रतिनिधियों ने यह भी संकेत दिया है कि विभिन्न स्थानों पर विरोध कार्यक्रम जारी रखे जाएंगे। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    रावलकोट की मौजूदा स्थिति पर स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है। घटनाओं के संबंध में अलग-अलग पक्षों की ओर से विभिन्न दावे किए जा रहे हैं, जबकि वास्तविक स्थिति को लेकर स्पष्ट तस्वीर आधिकारिक जानकारी और आगे आने वाली जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। फिलहाल, क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।