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  • दिल्ली कूच पर अड़े किसानों ने ठुकराया सीएम का न्योता, 29 अगस्त तक खनौरी बॉर्डर पर मोर्चा जारी

    दिल्ली कूच पर अड़े किसानों ने ठुकराया सीएम का न्योता, 29 अगस्त तक खनौरी बॉर्डर पर मोर्चा जारी


    नई दिल्ली ।
    विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली की ओर बढ़ने पर अड़े किसान संगठनों ने एक बार फिर अपना रुख कड़ा कर लिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक तथा पुलिस अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें आयोजित की गईं, परंतु बॉर्डर खोलने और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति देने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। सहमति न बन पाने की स्थिति में किसानों ने राजमार्ग के एक हिस्से में तंबू गाड़ दिए हैं और वहां अपना मोर्चा स्थापित कर लिया है।

    किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे 29 अगस्त तक खनौरी सीमा पर ही बने रहेंगे। संगठन की ओर से यह भी साफ किया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के यातायात को पूरी तरह बाधित नहीं किया जाएगा। किसान केवल सड़क के एक किनारे बैठकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे ताकि आम जनता को अत्यधिक असुविधा का सामना न करना पड़े। इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री स्तर की वार्ता का न्योता दिया गया था, जिसे किसान प्रतिनिधियों ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

    किसान प्रतिनिधियों का तर्क है कि उनकी प्रमुख मांगें केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र से संबंधित हैं, इसलिए राज्य स्तर की बैठकों से समाधान निकलना संभव नहीं है। उन्होंने मांग रखी है कि केंद्रीय कृषि मंत्री अथवा केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ उनकी सीधी वार्ता आयोजित कराई जाए। उनका कहना है कि पिछले आंदोलनों के दौरान जिन बिंदुओं पर बातचीत रुक गई थी, वहीं से पुनः नए सिरे से आधिकारिक चर्चा शुरू की जानी चाहिए।

    दूसरी ओर, सीमावर्ती क्षेत्रों पर लगातार दूसरे दिन भी पुलिस और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती देखने को मिली। सुरक्षा के दृष्टिकोण से कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और मुख्य रास्तों को सील कर दिया गया है। इसके चलते दिल्ली और पंजाब को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी वाहनों के साथ-साथ यात्री वाहनों की आवाजाही पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। यातायात को सुचारू रखने के लिए प्रशासन ने विभिन्न वैकल्पिक मार्गों से गाड़ियों को डाइवर्ट किया है।

    मध्य प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों के किसान संगठन भी देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे किसान आंदोलनों और उनकी मांगों पर लगातार नजर बनाए रखते हैं। कृषि नीतियों, न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा अन्य वित्तीय राहत से जुड़े मुद्दे देश भर के किसान समुदायों के लिए अत्यंत संवेदनशील और प्रासंगिक माने जाते हैं।

    वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्वयं बॉर्डर पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था तथा कंक्रीट बैरिकेडिंग का जायजा ले रहे हैं। गश्त बढ़ा दी गई है और सभी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पंजाब और हरियाणा दोनों पक्षों के पुलिस अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों से संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

    किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि वे किसी भी स्थिति में कानून और व्यवस्था को अपने हाथ में नहीं लेंगे और उनका यह प्रदर्शन पूरी तरह से अनुशासित तथा शांतिपूर्ण रहेगा। हालांकि जब तक केंद्रीय स्तर पर उनकी वार्ता की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे खनौरी बॉर्डर पर ही अपना ठहराव जारी रखेंगे।

    फिलहाल, सुरक्षा बल पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं और पुलिस प्रशासन स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहा है। सीमा से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं। अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में केंद्रीय स्तर से संवाद की प्रक्रिया शुरू होती है या प्रदर्शन स्थल पर गतिरोध इसी प्रकार बरकरार रहता है।

  • झारखंड भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज, अब सोरेन और राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी

    झारखंड भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज, अब सोरेन और राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी

    नई दिल्ली । झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार लंबा होता जा रहा है। प्रदर्शन 23वें दिन में पहुंच गया है और अब आंदोलनकारी छात्रों का निशाना मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ कांग्रेस और राहुल गांधी भी बन गए हैं। छात्रों ने अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई है।

    आंदोलनकारी छात्रों ने 16 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी का पुतला जलाने का ऐलान किया है। इसके बाद 20 अगस्त को रांची में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी है। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों पर सरकार को स्पष्ट और प्रभावी कदम उठाना चाहिए।

    राहुल गांधी को लेकर छात्रों की नाराजगी की वजह उनके साथ हुई बातचीत के बाद कार्रवाई नहीं होने को बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बातचीत के दौरान उन्हें उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर भरोसा दिया गया था, लेकिन इसके बाद उनकी मांगों पर कोई बड़ा कदम सामने नहीं आया।

    छात्रों का कहना है कि अब केवल बातचीत और आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उनका कहना है कि यदि राहुल गांधी वास्तव में उनकी समस्याओं के समर्थन में हैं तो उन्हें आंदोलन के बीच पहुंचकर छात्रों से संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों के समाधान के लिए ठोस पहल करनी चाहिए।

    आंदोलनकारियों ने कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि झारखंड सरकार में कांग्रेस के 16 विधायक हैं। यदि सरकार छात्रों की मांगों को स्वीकार नहीं करती है तो कांग्रेस को अपने समर्थन को लेकर निर्णय लेना चाहिए। छात्रों का तर्क है कि समर्थन वापस लेने से सरकार पर उनकी मांगों को लेकर दबाव बढ़ सकता है।

    छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा है कि आंदोलन अब तक शांतिपूर्ण तरीके से चलाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन का तरीका बदला जा सकता है। इससे आने वाले दिनों में प्रदर्शन के और व्यापक होने की संभावना है।

    20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को आंदोलन का अहम चरण माना जा रहा है। छात्रों की मुख्य मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर कार्रवाई से जुड़ी है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उनकी शिकायतों पर निर्णय करे और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

    इस पूरे घटनाक्रम का असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है। राज्य विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और बहुमत के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार इंडिया ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं। इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के चार और सीपीआईएमएल के दो विधायक शामिल हैं।

    यदि कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस लेती है तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 40 विधायक रह जाएंगे, जो बहुमत के आंकड़े से एक कम है। हालांकि, विधानसभा में जेकेएलएम का एक विधायक भी है। उसका समर्थन मिलने पर झारखंड मुक्ति मोर्चा 41 विधायकों के आंकड़े तक पहुंच सकता है। ऐसे में छात्रों का आंदोलन भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे से आगे बढ़कर राज्य की राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित करने वाला विषय बनता जा रहा है।

  • संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता और छात्र आंदोलनों के कारण बैकफुट पर आई एनडीए सरकार।

    संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता और छात्र आंदोलनों के कारण बैकफुट पर आई एनडीए सरकार।

    नई दिल्ली । संसद के हाल ही में संपन्न हुए मानसून सत्र के दौरान देश की राजनीतिक फिजां में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सत्र की शुरुआत से पहले जहां सत्तारूढ़ गठबंधन मजबूत स्थिति में नजर आ रहा था, वहीं सत्र के दौरान हुए घटनाक्रमों और छात्र आंदोलनों के कारण विपक्षी दल सरकार पर रणनीतिक दबाव बनाने में पूरी तरह सफल रहे।

    मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले राजनीतिक समीकरण एनडीए के पक्ष में दिखाई दे रहे थे। विभिन्न राज्यों के राजनीतिक घटनाक्रमों से विपक्षी दल मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस कर रहे थे। हालांकि, सत्र के दौरान देश के कई हिस्सों में शुरू हुए छात्र आंदोलनों, पेपर लीक विवादों और पुलिस कार्रवाई के मुद्दों ने पूरे परिदृश्य को बदलकर रख दिया।

    संसद भवन के भीतर और बाहर कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट हुए विपक्षी दलों ने इन संवेदनशील मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सरकार के खिलाफ बने इस माहौल को बांकीपुर और दतिया उप-चुनावों में सत्तारूढ़ दल को मिली शिकस्त ने और अधिक बल दिया। इन चुनावी नतीजों से विपक्षी सांसदों का उत्साह और आक्रामकता दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    विपक्ष के कड़े तेवरों और लगातार जारी हंगामे के कारण सरकार को कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर अपने कदम पीछे खींचने पड़े। एफसीआरए संशोधन विधेयक को आगे की समीक्षा के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े विधेयकों पर भी विस्तृत चर्चा संभव नहीं हो सकी।

    सत्र के दौरान विभिन्न क्षेत्रीय दलों के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने अलग-अलग मुद्दों पर एक-दूसरे का पुरजोर समर्थन किया। नीट परीक्षा में अनियमितताओं और छात्रों पर हुई कार्रवाई के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एक सुर में गृह मंत्री से जवाब मांगने पर अड़ा रहा, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

    संसदीय गतिरोध का असर देश के विभिन्न राज्यों की राजनीति पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश के दतिया उप-चुनाव में आए नतीजों और राज्य के युवाओं से जुड़े रोजगार व परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। मध्य प्रदेश में भी छात्र संगठनों द्वारा इन मुद्दों को लेकर लगातार संवाद और प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

    मानसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा विवाद, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा अधूरी रह गई। लगातार होते स्थगन के कारण विभिन्न क्षेत्रों के सांसदों द्वारा उठाए जाने वाले शून्यकाल के मुद्दे भी सदन के पटल पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र में जिस तरह से विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई है, उससे आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। छात्र आंदोलनों और जनहित के मुद्दों को आगे भी बरकरार रखना विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती सिद्ध होगा।

  • JPSC-JSSC विवाद में झारखंड पुलिस की कार्रवाई, विधानसभा घेराव के बाद करीब 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज

    JPSC-JSSC विवाद में झारखंड पुलिस की कार्रवाई, विधानसभा घेराव के बाद करीब 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज

    नई दिल्ली । झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन विधानसभा घेराव के बाद और तेज हो गया है। 10 अगस्त को रांची में विधानसभा की ओर मार्च के दौरान हुए हंगामे के बाद पुलिस ने करीब 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें लगभग 100 लोग नामजद हैं, जबकि करीब 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों को आरोपी बनाया गया है।

    छात्र संगठन लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए आंदोलन कर रहे हैं। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़े थे। प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर जाने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी।

    स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। पुलिस की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पथराव किया और स्थिति को हिंसक बनाने की कोशिश की। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

    हंगामे के बाद दर्ज की गई प्राथमिकी में नामजद लोगों के अलावा बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब उपलब्ध CCTV फुटेज और मौके पर बनाए गए वीडियो के आधार पर प्रदर्शन में कथित तौर पर हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है।

    पुलिस की जांच का मुख्य आधार घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरे और उपलब्ध वीडियो फुटेज हैं। अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर हिंसा में शामिल लोगों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से तय नहीं किया जा सकता।

    छात्र संगठनों की प्रमुख मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराना है। प्रदर्शनकारी विवादित परीक्षाओं की समीक्षा या उन्हें रद्द करने, कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे मामले की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

    आंदोलन कई सप्ताह से जारी है और विधानसभा घेराव के बाद सरकार तथा प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के बीच विवाद और बढ़ गया है। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि अभ्यर्थियों के भविष्य पर किसी प्रकार का असर न पड़े।

    FIR दर्ज होने के बावजूद छात्र आंदोलन के पूरी तरह समाप्त होने के संकेत नहीं हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदर्शनकारी 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए रांची प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की तैयारी की है।

    मुख्यमंत्री आवास के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है। प्रशासन के सामने अब एक ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर भर्ती परीक्षाओं से जुड़े छात्रों के आरोपों और मांगों को लेकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

    JPSC और JSSC से जुड़ा विवाद अब परीक्षा संबंधी शिकायतों से आगे बढ़कर पुलिस कार्रवाई और बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में प्रस्तावित प्रदर्शन और जांच की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि सरकार और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के बीच गतिरोध किस दिशा में जाता है।

  • संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का अनोखा विरोध, पवन खेड़ा के नेतृत्व में सरकार से सदन में जवाब मांगा

    संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का अनोखा विरोध, पवन खेड़ा के नेतृत्व में सरकार से सदन में जवाब मांगा

    नई दिल्ली । संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ समाप्त हो गया। सत्र के अंतिम दिन भी विपक्ष और सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर राजनीतिक टकराव देखने को मिला। कार्यवाही समाप्त होने से पहले विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

    कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने एक खिलौना बंदर को प्रदर्शन का हिस्सा बनाया। इस दौरान सांसदों ने नारे लगाते हुए सरकार पर सदन के भीतर विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान 56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर जैसे नारे लगाए गए।

    विपक्षी सांसदों का यह प्रदर्शन संसद के मॉनसून सत्र में लगातार बने रहे राजनीतिक तनाव के बीच हुआ। विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार से चर्चा और जवाब की मांग करता रहा, जबकि सदन की कार्यवाही कई मौकों पर व्यवधान के कारण प्रभावित हुई।

    निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सत्र के समापन के बाद सरकार पर विपक्ष और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर चर्चा नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बड़ी-बड़ी बातें की गईं, लेकिन छात्रों के मुद्दों, चंदे से जुड़े सवालों और लोगों की आस्था से जुड़े विषयों पर सदन में अपेक्षित चर्चा नहीं हुई।

    पप्पू यादव ने बच्चों से जुड़े मामलों में लाठी और गोली चलने के आरोपों का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार को इन मुद्दों पर जवाब देना चाहिए था। उनके अनुसार, संसद में चर्चा की जिम्मेदारी सरकार की है और विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना तथा जवाब मांगना है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार चर्चा से बचती रही। विपक्ष की ओर से लगातार मुद्दे उठाए जाने के बावजूद सदन में उन पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनका जवाब दे।

    राजद सांसद मनोज झा ने भी संसद की कार्यवाही में बार-बार हो रहे व्यवधान को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन घटनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी जिम्मेदारी किसकी थी।

    मनोज झा ने पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी जवाबदेही का सवाल उठाया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में किसी घटना की जिम्मेदारी तय किए बिना व्यवस्था का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने इस मुद्दे को सीधा और स्पष्ट सवाल बताते हुए सरकार से जवाब की अपेक्षा जताई।

    मॉनसून सत्र के अंतिम दिन लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही समय बाद स्थगित हो गई, जबकि राज्यसभा की कार्यवाही भी बाद में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही संसद का यह सत्र समाप्त हो गया।

    सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए। विपक्ष ने जहां विभिन्न मामलों पर तत्काल चर्चा और सरकार की जवाबदेही की मांग की, वहीं सरकार की ओर से भी विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने के आरोप लगाए गए।

    अंतिम दिन संसद परिसर में हुआ खिलौना बंदर वाला प्रदर्शन विपक्ष की सरकार के खिलाफ राजनीतिक रणनीति का एक प्रतीकात्मक हिस्सा रहा। प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार को सदन के भीतर उठाए गए सवालों का जवाब देना चाहिए और महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा से बचना नहीं चाहिए।

  • मॉनसून सत्र में शाह पर संजय राउत का हमला, बोले बयान से मत भागिए, भविष्य में इस्तीफा देना होगा

    मॉनसून सत्र में शाह पर संजय राउत का हमला, बोले बयान से मत भागिए, भविष्य में इस्तीफा देना होगा

    नई दिल्ली । मॉनसून सत्र के दौरान संसद में छात्रों के प्रदर्शन पर हुई कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्ष इन दोनों मुद्दों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आने और स्पष्ट बयान देने की मांग कर रहा है। इसी बीच शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने शाह पर तीखा हमला बोला है।

    संजय राउत ने कहा कि विपक्ष पिछले कई दिनों से दो प्रमुख मुद्दों को लेकर सदन में चर्चा की मांग कर रहा है। उनके अनुसार पहला मामला राम मंदिर के चंदे से जुड़ा है, जबकि दूसरा छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर पैलेट गन और हिंसा के इस्तेमाल के निर्देश से संबंधित है। राउत का कहना है कि इन दोनों विषयों पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

    राउत ने गृह मंत्री अमित शाह के संभावित बयान को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बयान से बचने की कोशिश नहीं होनी चाहिए और सवालों का सामना सदन में किया जाना चाहिए। उन्होंने भविष्य को लेकर दावा करते हुए कहा कि आने वाले समय में शाह को इस्तीफा देना होगा। हालांकि, यह राउत का राजनीतिक बयान है और इस पर सरकार या गृह मंत्री की ओर से संबंधित प्रतिक्रिया का उल्लेख सामने नहीं आया है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही उनकी मांग स्पष्ट रही है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष केवल एक स्पष्ट बयान चाहता है। उनका सवाल है कि छात्रों के खिलाफ पैलेट गोली और हिंसा का निर्देश किस स्तर से दिया गया था। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि गृह मंत्री ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था, तो फिर उनके मंत्रालय में यह आदेश किसने दिया।

    महुआ मोइत्रा ने राम मंदिर के चंदे से जुड़े मामले को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा नहीं कर रही है। उनका तर्क था कि विपक्ष गृह मंत्री को सदन में आने से नहीं रोक रहा, बल्कि वह खुद सदन में आकर जवाब देने की मांग कर रहा है।

    कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी गृह मंत्री के सदन में आने की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई और राम मंदिर के चंदे से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर चर्चा और स्पष्टीकरण संसद के भीतर होना जरूरी है।

    मॉनसून सत्र में इन मुद्दों को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। विपक्ष जहां गृह मंत्री के जवाब को लेकर दबाव बना रहा है, वहीं इन मांगों के कारण सदन की कार्यवाही भी राजनीतिक तनाव के बीच आगे बढ़ रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों और विपक्ष की मांगों पर सदन में किस तरह प्रतिक्रिया देती है।

  • JPSC-JSSC विवाद: लाठीचार्ज के विरोध में आज झारखंड बंद, 17वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलन

    JPSC-JSSC विवाद: लाठीचार्ज के विरोध में आज झारखंड बंद, 17वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलन


    रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन 17वें दिन भी जारी है। सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद विवाद और बढ़ गया। छात्रों के समर्थन में बीजेपी ने मंगलवार, 11 अगस्त को झारखंड बंद का आह्वान किया है। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से शांति बनाए रखने और सरकार पर भरोसा रखने की अपील की है।

    आंदोलन के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते की गिरफ्तारी, तीन भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की ED जांच को मंजूरी जैसे कदम भी सामने आए हैं। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।

    विधानसभा घेराव में पुलिस से भिड़े छात्र
    JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा का घेराव करने पहुंचे थे। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कई छात्र विधानसभा के गेट तक पहुंच गए। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

    घटना के दौरान कई छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई। तनाव के चलते विधानसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। बाद में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया। अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की देर शाम तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    छात्र नेता रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि छात्र पूरे दिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन शाम को पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्रों के साथ मारपीट भी हुई। पासवान के मुताबिक, आंदोलन अब सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जन आंदोलन का रूप ले चुका है।

    सीएम सोरेन ने की शांति की अपील
    घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से सुन रही है। मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वरिष्ठ मंत्री लगातार छात्रों से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, सोरेन ने कुछ विपक्षी नेताओं पर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप भी लगाया और छात्रों से किसी के बहकावे में नहीं आने की अपील की।

    लाठीचार्ज के खिलाफ बीजेपी का आज बंद
    10 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद बीजेपी ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार, 11 अगस्त को झारखंड बंद का ऐलान किया। रांची में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और बाबूलाल मरांडी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। बीजेपी नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए था। पार्टी ने प्रदेश के लोगों से बंद को समर्थन देने की अपील की है।

    राहुल गांधी ने भी उठाया लाठीचार्ज का मुद्दा
    छात्रों का आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग पर सवाल उठाते हुए झारखंड सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की। उनके बयान पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों में छात्रों के मुद्दे उठाते हैं, जबकि सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में उनका रुख अलग होता है।

    कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि झारखंड सरकार में कांग्रेस भागीदार है, लेकिन JPSC-JSSC मामले में पार्टी किसी भी तरह से शामिल नहीं है। उन्होंने परीक्षाओं में गड़बड़ी की बात स्वीकार करते हुए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और लाठीचार्ज व आंसू गैस के इस्तेमाल को गलत बताया।

    अंबा प्रसाद ने मामले की CBI जांच की मांग की। उनका तर्क है कि शिक्षा, गृह और पुलिस विभाग मुख्यमंत्री के अधीन हैं और JPSC का गठन भी सरकार की सिफारिश पर होता है। ऐसे में CID की जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

    सरकार तीन परीक्षाएं कर चुकी है रद्द
    सरकार JPSC-JSSC विवाद के बीच तीन भर्ती परीक्षाएं रद्द करने का फैसला पहले ही ले चुकी है। इनमें 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी शामिल है। सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच ED से कराने की मांग भी स्वीकार कर ली है। हालांकि, छात्र संगठन अभी भी CBI जांच की मांग पर कायम हैं।

    पूर्व JPSC चेयरमैन एल खियांग्ते गिरफ्तार
    विवाद के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले 3 अगस्त को उनसे करीब 7 घंटे तक पूछताछ की गई थी। यह कार्रवाई JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत हुई। इसी मामले में CID ने राज्यभर में 18 स्थानों पर छापेमारी भी की थी।

    22 जुलाई 2026 को CID की छापेमारी के बाद खियांग्ते ने JPSC चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि निष्पक्ष जांच के लिए पद छोड़ना उचित है। खियांग्ते पर JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के लिए पहले से ब्लैकलिस्टेड कंपनी TSR Data Processing Limited (TDPL) को काम देने का आरोप है। प्रदर्शनकारी छात्र TDPL से जुड़ी सभी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। रविवार को JPSC के तीन सदस्यों ने भी इस्तीफा दिया था।

    मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद बने थे चेयरमैन
    एल खियांग्ते राज्य के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पिछले साल फरवरी में JPSC के चेयरमैन नियुक्त हुए थे। उन पर झारखंड में कई परीक्षाओं के संचालन का ठेका TDPL को देने का आरोप है। TDPL को JSSC ने कथित अनियमितताओं के चलते ब्लैकलिस्ट किया था। इसके बावजूद एजेंसी को परीक्षा संबंधी काम दिए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने आरोप लगाया था कि खियांग्ते ने ठेका देने के बदले 2 करोड़ रुपये और सभी भुगतानों पर 20 फीसदी कमीशन की मांग की थी। हालांकि, ये आरोप हैं और झारखंड CID की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    अभय तिवारी के पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र
    विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के हाथों में अभय तिवारी के पोस्टर भी नजर आए। छात्र उनके खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। CID के अनुसार, अभय तिवारी पहले TDPL में मार्केटिंग मैनेजर था और बाद में गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर बना। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में उसका नाम सामने आया है।

    अभय तिवारी पर आरोप है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘गारंटीड सिलेक्शन’ का दावा कर अभ्यर्थियों से 25 से 40 लाख रुपये तक मांगता था। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है। प्रदर्शनकारियों के पोस्टरों में उसके कथित रिश्तेदारों के अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में चयन और रैंक का भी दावा किया गया।

    अब बातचीत से निकलेगा रास्ता या बढ़ेगा आंदोलन?
    JPSC-JSSC विवाद को लेकर छात्र अभी भी CBI जांच समेत अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। सरकार बातचीत और परीक्षा व्यवस्था में सुधार का भरोसा दे रही है, जबकि बीजेपी ने लाठीचार्ज के विरोध में बंद का ऐलान कर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में मंगलवार के झारखंड बंद और सरकार-छात्र संगठनों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार की ओर से उठाए गए कदम आंदोलन को शांत कर पाते हैं या छात्रों का प्रदर्शन और व्यापक रूप लेता है।

  • झारखंड छात्र आंदोलन में पुष्पा राज और स्पाइडरमैन से लेकर तिरंगा मार्च तक, रांची प्रदर्शन के प्रमुख दृश्य चर्चा में

    झारखंड छात्र आंदोलन में पुष्पा राज और स्पाइडरमैन से लेकर तिरंगा मार्च तक, रांची प्रदर्शन के प्रमुख दृश्य चर्चा में

    नई दिल्ली । झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को राजधानी रांची में बड़े प्रदर्शन में बदल गया। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा घेराव मार्च के लिए पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच कई जगह टकराव की स्थिति बनी और बैरिकेडिंग पार करने की कोशिशों के बीच पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए।

    विधानसभा मार्च के दौरान प्रदर्शन का तरीका भी कई जगह अलग-अलग नजर आया। कुछ छात्रों ने पुलिस की बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश की, जबकि कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ते दिखाई दिए। कई स्थानों पर कंटीले तार लगाए गए थे, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों ने उन्हें भी पार करने का प्रयास किया। प्रदर्शन के बीच बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे।

    प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने अपनी बात रखने के लिए अलग-अलग प्रतीकों और तरीकों का इस्तेमाल किया। एक छात्र हाथ में गुलाब और तिरंगा लेकर पहुंचा और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का संदेश देता दिखाई दिया। दूसरी ओर कुछ प्रदर्शनकारियों ने लोकप्रिय फिल्मों और किरदारों से प्रेरित अंदाज अपनाकर भी अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की।

    प्रदर्शन के दौरान एक युवक पुष्पा राज के अंदाज में नजर आया। बताया गया कि वह महाराष्ट्र से कुल्हाड़ी लेकर प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचा था। इसके अलावा एक छात्र स्पाइडरमैन की पोशाक में दिखाई दिया। इन अलग-अलग रूपों ने प्रदर्शन के दृश्य को चर्चा का विषय बना दिया।

    छात्रों ने अपनी नाराजगी जताने के लिए रचनात्मक तरीकों का भी सहारा लिया। परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के मुद्दे को उजागर करने के लिए कुछ प्रदर्शनकारी नौकरी को तौलकर बेचने जैसी प्रस्तुति करते दिखाई दिए। इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों की नाराजगी और सवालों को प्रतीकात्मक तरीके से सामने रखना था।

    पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया गया। इसके बावजूद कुछ छात्र पानी की बौछार के बीच नाचते और विरोध जताते दिखाई दिए। इस दौरान प्रदर्शन का माहौल कुछ समय के लिए अलग रूप लेता नजर आया, लेकिन छात्रों की मुख्य मांगें भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई से जुड़ी रहीं।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की। बाद में लाठीचार्ज की कार्रवाई किए जाने और कुछ छात्रों को पुलिस द्वारा वहां से ले जाने की जानकारी सामने आई।

    छात्रों ने कई जगह फ्लैश लाइट और तिरंगा मार्च भी निकाला। भारत माता की जय के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। कुछ छात्र भगत सिंह के पोस्टर लेकर भी आंदोलन में शामिल हुए। इन गतिविधियों के जरिए प्रदर्शनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं को लेकर अपनी मांगों को व्यापक स्तर पर सामने रखने का प्रयास किया।

    JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। रांची में हुए विधानसभा मार्च के दौरान सामने आए अलग-अलग दृश्य यह दिखाते हैं कि छात्रों ने अपनी नाराजगी दर्ज कराने के लिए पारंपरिक विरोध के साथ कई रचनात्मक तरीकों का भी इस्तेमाल किया।

  • झारखंड में जेपीएससी जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, बैरिकेड तोड़ विधानसभा की ओर बढ़े आंदोलनकारी

    झारखंड में जेपीएससी जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, बैरिकेड तोड़ विधानसभा की ओर बढ़े आंदोलनकारी

    नई दिल्ली । झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को उस समय तेज हो गया, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने प्रशासन की ओर से लगाए गए बैरिकेड पार किए और कई जगह उन्हें हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।

    आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक आठ बैरिकेड तोड़ दिए। मुख्य सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किए जाने के बाद कई छात्र कच्चे और पहाड़ी रास्तों से विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड खींचकर रास्ते से हटाए और फिर समूह के साथ आगे बढ़ते रहे।

    आंदोलन की अगुवाई जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मोर्चा के स्वयंसेवकों ने की। मोर्चा के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शनकारियों को विधानसभा के गेट की तरफ आगे नहीं बढ़ने की अपील की। उन्होंने छात्रों से जगन्नाथ मंदिर तक मार्च करने और वहीं धरना जारी रखने का आग्रह किया। भीड़ में किसी असामाजिक तत्व की मौजूदगी की जानकारी देने की अपील भी की गई।

    प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान मोर्चा के प्रतिनिधियों और कुछ छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। इसके बाद आंदोलनकारियों को नियंत्रित करने के लिए तीन स्तर की मानव शृंखला बनाई गई। बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शन स्थल पर वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे भी सुनाई दिए।

    इस आंदोलन में नौ दिनों से अनशन कर रहे जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो की मौजूदगी भी खास रही। जयपाल सिंह स्टेडियम में अनशन पर बैठे महतो को उनके समर्थक कपड़े और डंडों से तैयार पालकी में कंधों पर लेकर विधानसभा के करीब पहुंचे। इससे पहले एंबुलेंस से विधानसभा की ओर जाते समय उन्हें जगन्नाथ मंदिर के पास रोक दिया गया था।

    रोक दिए जाने के बाद समर्थकों ने महतो को कंधों पर उठा लिया और कुछ दूरी तक उन्हें इसी तरह आगे ले गए। बाद में वह पालकी पर बैठकर धरना स्थल तक पहुंचे। इस दौरान उनके हाथ में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर भी दिखाई दी। महतो की मौजूदगी ने छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन का भी संकेत दिया।

    सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के बाद जेएलकेएम के विधायक भी प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों से विधानसभा के गेट तक नहीं जाने और उससे पहले ही रुकने की अपील की। विधायक ने आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने का आग्रह किया और प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने को कहा।

    प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर बढ़ने से रोकने के लिए कई स्तर पर बैरिकेडिंग की थी। वाटर कैनन के इस्तेमाल के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम रहे। पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई और ड्रोन के जरिए प्रदर्शन की निगरानी तथा रिकॉर्डिंग भी की गई।

    प्रदर्शन के दौरान विरोध का अलग अंदाज भी देखने को मिला। कुछ छात्र स्पाइडरमैन और वनमानुष की वेशभूषा में पहुंचे और अपने हाथों में संदेश लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। भीड़ में फिल्म पुष्पा के किरदार जैसी वेशभूषा में भी एक प्रदर्शनकारी नजर आया।

    छात्रों का यह आंदोलन अब विधानसभा के आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामलों को लेकर अपनी मांगों पर कायम हैं। वहीं प्रशासन प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर की ओर आगे बढ़ने से रोकने और स्थिति को नियंत्रित रखने में जुटा है।

  • छात्र आंदोलन पर लोकसभा में चर्चा को सरकार तैयार, किरन रिजिजू बोले गृह मंत्री अमित शाह देंगे जवाब

    छात्र आंदोलन पर लोकसभा में चर्चा को सरकार तैयार, किरन रिजिजू बोले गृह मंत्री अमित शाह देंगे जवाब

    नई दिल्ली । मानसून सत्र के दौरान छात्र आंदोलन को लेकर लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए अपनी सहमति जताई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों से जुड़े विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब देंगे।

    रिजिजू ने कहा कि सरकार की ओर से चर्चा से पीछे हटने का सवाल नहीं है। छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर सदन में विस्तार से बातचीत होगी और उठाए जाने वाले सवालों का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब गृह मंत्री सदन में सरकार का पक्ष रखेंगे तो विपक्षी सांसदों को उनका जवाब सुनना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही के दौरान व्यवधान पैदा नहीं करने की अपील की। उनका कहना था कि सरकार जवाब देने के लिए तैयार है, इसलिए चर्चा को हंगामे में बदलने के बजाय संसदीय तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार चाहती है कि मुद्दे पर पूरी चर्चा हो और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले।

    वहीं विपक्ष ने छात्र आंदोलन के साथ अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा भी उठाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि गृह मंत्री छात्रों के मामले में सदन में बयान देने के लिए तैयार हैं, तो राम मंदिर से जुड़े मामले पर भी उन्हें अपना पक्ष रखना चाहिए। विपक्ष ने दोनों मुद्दों पर जवाब की मांग को संसद में जारी गतिरोध से जोड़ दिया है।

    संसद के मानसून सत्र में पिछले कई दिनों से विपक्षी दल अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। सोमवार को भी सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई तथा राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े आरोपों को लेकर गृह मंत्री से जवाब देने की मांग की।

    हंगामे के कारण प्रश्नकाल भी प्रभावित हुआ। विपक्षी सांसदों ने सदन के भीतर अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और कार्यवाही सामान्य तरीके से चलाने में बाधा आई। इससे पहले विपक्षी दल संसद परिसर में भी अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन करते रहे हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद सोमवार को पानी और दूध लेकर परिसर में पहुंचे और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

    कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने भी कहा है कि जब तक गृह मंत्री दोनों प्रमुख मुद्दों पर सदन में जवाब नहीं देते, तब तक गतिरोध समाप्त होने की संभावना कम है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि सरकार संसद के भीतर इन मामलों पर स्पष्ट स्थिति रखे।

    अब सरकार की ओर से छात्र आंदोलन पर चर्चा के लिए सहमति जताए जाने के बाद सदन की अगली कार्यवाही पर सभी की नजरें हैं। हालांकि विपक्ष की दूसरी मांग को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या इन मुद्दों पर संसद में टकराव आगे भी जारी रहता है।