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  • लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक का शहीद दिवस कार्यक्रम, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा

    लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक का शहीद दिवस कार्यक्रम, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा

    नई दिल्ली ।लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा में मारे गए लोगों की पहली बरसी के मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 23 सितंबर को एक दिवसीय सांकेतिक पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। इसके साथ ही 24 सितंबर को शहीद दिवस से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य मृतकों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके परिवारों के लिए उचित मुआवजे और संबंधित मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग उठाना है।

    वांगचुक के अनुसार, 24 सितंबर को हुई मौतों की पहली बरसी पर उन लोगों को याद किया जाएगा, जिन्होंने लद्दाख की संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा तथा संरक्षण के लिए अपनी जान गंवाई। इस अवसर पर शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

    पहले वांगचुक ने 19 से 23 सितंबर तक छह दिवसीय पदयात्रा की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि यदि सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलता है तो यह यात्रा निकाली जाएगी। बाद में उन्होंने अपने कार्यक्रम में बदलाव करते हुए छह दिवसीय यात्रा को स्थगित कर दिया।

    अब तय कार्यक्रम के मुताबिक 23 सितंबर को केवल एक दिन की सांकेतिक पदयात्रा होगी। यह पदयात्रा लेह की दिशा में निकाली जाएगी और इसकी दूरी करीब 20 किलोमीटर बताई गई है। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने की बात कही गई है।

    वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाते रहे हैं। उनके आंदोलन में लद्दाख के लिए राजनीतिक अधिकारों के साथ क्षेत्र की संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रहे हैं।

    शहीद दिवस कार्यक्रम के तहत पिछले वर्ष मारे गए लोगों के परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग दोहराई जाएगी। इसके अलावा मृतकों से जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

    इस बीच लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल और केंद्र सरकार के बीच बातचीत का मुद्दा भी चर्चा में है। गृह मंत्रालय की सब-कमेटी के साथ बैठक के बाद लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित चुनी हुई संस्था से संबंधित ड्राफ्ट पेश नहीं किए जाने पर निराशा जताई थी।

    नए कार्यक्रम के अनुसार, 23 सितंबर को कारगिल में शांतिपूर्ण विरोध रैली भी आयोजित की जाएगी। इसके बाद 24 सितंबर को शहीद दिवस से जुड़े अन्य कार्यक्रम होंगे। इस दौरान पिछले साल की घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और उनकी मांगों को फिर से सामने रखा जाएगा।

    वांगचुक को पिछले वर्ष लद्दाख में हुई हिंसा के सिलसिले में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था और वह करीब छह महीने तक हिरासत में रहे थे। अब पहली बरसी के मौके पर प्रस्तावित कार्यक्रमों के जरिए लद्दाख से जुड़ी लंबित मांगों को फिर सार्वजनिक रूप से उठाने की तैयारी है।

  • आगर-मालवा में दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल, विक्रेताओं ने सड़क पर बहाया कई लीटर दूध

    आगर-मालवा में दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल, विक्रेताओं ने सड़क पर बहाया कई लीटर दूध

    मध्य प्रदेश: के आगर-मालवा जिले के सुसनेर में दूध के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर दूध विक्रेताओं ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के कारण क्षेत्र में दूध की सप्लाई प्रभावित होने लगी है और कई डेयरियां बंद बताई जा रही हैं। दूध विक्रेता मौजूदा कीमतों को लेकर असंतोष जताते हुए भाव बढ़ाने की मांग पर अड़े हुए हैं।

    दूध विक्रेताओं की मुख्य मांग दूध का भाव बढ़ाकर 100 रुपये प्रति लीटर करने की है। इसके साथ ही फैट का दाम 12 रुपये करने की मांग भी रखी गई है। विक्रेताओं का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर दूध का कारोबार करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। दूध उत्पादन और उसे बाजार तक पहुंचाने से जुड़ी लागत बढ़ने का हवाला देते हुए वे कीमतों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

    हड़ताल के बीच सुसनेर में विरोध-प्रदर्शन भी देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों से दूध लेकर सुसनेर की ओर आ रहे पिकअप वाहनों को रोककर प्रदर्शनकारियों ने दूध सड़क पर बहा दिया। विरोध के दौरान सड़क पर काफी मात्रा में दूध फैल गया। इस घटना के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें वाहनों को रोककर दूध सड़क पर बहाते हुए लोग दिखाई दे रहे हैं।

    विरोध के दौरान दूध विक्रेताओं और दूध लेकर आने वाले वाहनों को रोकने की बात सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में दूध सड़क पर बहाकर विरोध दर्ज कराया। हालांकि, इस दौरान किसी अप्रिय घटना की जानकारी सामने नहीं आई है।

    सुसनेर में एक होटल से पैकेट और अन्य दूध भी प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क पर बहाए जाने का दावा किया गया है। इस घटना से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं। दूध की बर्बादी के जरिए प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताई।

    दूध विक्रेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण सुसनेर क्षेत्र के अलावा आगर-मालवा के ग्रामीण इलाकों में भी दूध की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। कई डेयरियों के बंद रहने से स्थानीय स्तर पर दूध की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है।

    विक्रेताओं की मांग में दो प्रमुख बिंदु शामिल हैं। पहला, दूध का भाव 100 रुपये प्रति लीटर किया जाए और दूसरा, फैट का दाम बढ़ाकर 12 रुपये किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान कीमतों पर दूध का कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है और बढ़ती लागत के कारण उन्हें आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

    फिलहाल हड़ताल को समाप्त करने को लेकर कोई समाधान सामने नहीं आया है। दूध विक्रेताओं ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है। ऐसे में हड़ताल कितने समय तक चलती है और प्रशासन तथा संबंधित पक्षों के स्तर पर इस मुद्दे को लेकर क्या बातचीत होती है, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा।

    यदि हड़ताल लंबी चलती है, तो सुसनेर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की सप्लाई और उपलब्धता पर इसका प्रभाव बढ़ सकता है। फिलहाल दूध विक्रेता 100 रुपये प्रति लीटर कीमत और 12 रुपये फैट के दाम की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।

  • प्रदर्शन से पहले इमरान की PTI को झटका, CM अफरीदी समेत 25 नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक

    प्रदर्शन से पहले इमरान की PTI को झटका, CM अफरीदी समेत 25 नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तेहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के खिलाफ कानूनी शिकंजा और कस गया है। इस्लामाबाद की आतंकवाद विरोधी अदालत ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल अफरीदी समेत 25 PTI नेताओं के पासपोर्ट अगले आदेश तक ब्लॉक रखने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई राजधानी के एक पुलिस थाने में दर्ज मामले से जुड़ी है। फैसला ऐसे समय आया है, जब PTI ने 27 सितंबर को देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया है।

    FIA को पासपोर्ट ब्लॉक रखने के निर्देश

    जज अबुल हसनात मुहम्मद जुल्करनैन ने पुलिस की अर्जी स्वीकार करते हुए फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) को सभी 25 नेताओं के पासपोर्ट अगले आदेश तक ब्लॉक रखने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि इन सभी को मामले में आरोपी बनाया गया है।

    जांच अधिकारी ने अदालत में आशंका जताई कि आरोपी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए देश छोड़कर फरार हो सकते हैं। पुलिस ने नेताओं पर सरकारी संस्थानों पर हमले और आतंकवाद को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप होने की बात कही।

    पुलिस की दलीलों पर अदालत ने यह भी गौर किया कि आरोपी अदालत में पेश नहीं हुए हैं। जिन नेताओं को अंतरिम जमानत मिली थी, उनके बारे में भी पुलिस ने बताया कि वे अभी तक जांच में शामिल नहीं हुए हैं। इसके बाद अदालत ने पासपोर्ट ब्लॉक करने की मांग मंजूर कर ली।

    असद कैसर समेत कई बड़े नाम सूची में

    अदालत के आदेश के दायरे में वरिष्ठ PTI नेता और नेशनल असेंबली के पूर्व स्पीकर असद कैसर भी शामिल हैं। इनके अलावा सांसद शहराम खान तरकई, शाह अहमद, शेर अली अरबाब, मुहम्मद इकबाल अफरीदी, डॉ. अमजद अली, जुनैद अकबर, शाहिद खट्टक, जुबैर वजीर, अरशद उमरज़ई, जर आलम, मियां उमर और अख्तर खान के नाम भी सूची में हैं।

    इन सभी के खिलाफ राजधानी के एक पुलिस थाने में दर्ज मामले के सिलसिले में कार्रवाई की गई है। पुलिस की ओर से पेश जांच के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपियों की गैरहाजिरी और जांच में सहयोग नहीं करने की स्थिति में उनके देश छोड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

    27 सितंबर के प्रदर्शन के लिए समर्थन जुटा रहे थे अफरीदी

    पासपोर्ट ब्लॉक करने का आदेश उस वक्त आया, जब मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल अफरीदी 27 सितंबर के देशव्यापी प्रदर्शन के लिए समर्थन जुटाने पंजाब के दौरे पर थे। इसी दौरान उन्होंने पंजाब पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।

    अफरीदी का आरोप है कि पंजाब पुलिस ने उनका अपहरण करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया और बाद में उन्हें सड़क किनारे छोड़ दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पुलिस को इस हरकत का जवाब देना होगा और यह कोई मजाक नहीं है।

    पंजाब सरकार से स्पष्टीकरण मांगा

    अफरीदी ने एक प्रांत के मुख्यमंत्री के साथ दूसरे प्रांत की पुलिस के इस कथित व्यवहार को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने पंजाब सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए सवाल किया कि उनके साथ दुर्व्यवहार क्यों किया गया और उन्हें सड़क किनारे क्यों छोड़ा गया।

    उनके इन आरोपों के बीच PTI की ओर से 27 सितंबर के विरोध-प्रदर्शन की तैयारियां भी जारी हैं। पार्टी के नेताओं और समर्थकों के खिलाफ पहले से ही विरोध-प्रदर्शनों तथा सरकारी संस्थानों के खिलाफ कथित हिंसा से जुड़े कई मामले चल रहे हैं।

    प्रदर्शन से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव

    एक तरफ अदालत ने PTI के 25 नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक करने का आदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल मुख्यमंत्री अफरीदी ने पंजाब पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में 27 सितंबर के प्रस्तावित देशव्यापी प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान में राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

  • 14 हजार से 30 हजार स्टाइपेंड की मांग को लेकर डॉक्टर सड़क पर उतरे, हमीदिया में पुलिस से हुई झड़प

    14 हजार से 30 हजार स्टाइपेंड की मांग को लेकर डॉक्टर सड़क पर उतरे, हमीदिया में पुलिस से हुई झड़प

    भोपाल: के हमीदिया अस्पताल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन सोमवार को तनावपूर्ण हो गया। मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च निकालने की कोशिश कर रहे डॉक्टरों को रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान वाटर कैनन की चपेट में आने से एक इंटर्न डॉक्टर के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों की मुख्य मांग स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की है। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें हर महीने 14,337 रुपये स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि वे इसे बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इस संबंध में शासन की ओर से निर्णय लेने का मौखिक आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ।

    इसी के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए मार्च निकालने का फैसला किया। डॉक्टरों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात कर अपनी समस्या रखना चाहते थे। हालांकि मार्च शुरू होने से पहले ही अस्पताल परिसर में पुलिस बल तैनात कर दिया गया और बाहर निकलने वाले रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

    पुलिस की तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विवाद बढ़ गया। कुछ इंटर्न डॉक्टरों ने हमीदिया अस्पताल के गेट और बैरिकेड तोड़ दिए। इसके बाद वे अस्पताल परिसर से बाहर निकलकर फतेहगढ़ की मुख्य सड़क पर पहुंच गए और वहीं बैठकर विरोध जताने लगे। प्रदर्शन के दौरान सड़क पर डॉक्टरों के बैठने से इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

    अस्पताल परिसर में पुलिस की ओर से इमरजेंसी गेट को भी ब्लॉक किए जाने की बात सामने आई। मौके पर वाटर कैनन वाहन सहित पुलिस के अन्य वाहन तैनात रहे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान वाटर कैनन चलाया गया और एक छात्र के घायल होने की जानकारी सामने आई।

    इंटर्न डॉक्टर मोहित मिश्रा ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर पहले संवैधानिक तरीके से अपनी बात रख चुके हैं और सभी नियमों का पालन किया गया, लेकिन जब उनकी मांग पर निर्णय नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने का फैसला लिया गया।

    डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं चाहिए। उनकी मांग है कि स्टाइपेंड बढ़ाने का फैसला लिखित सरकारी आदेश के रूप में जारी किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें 14,337 रुपये नहीं, बल्कि न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड चाहिए।

    मोहित मिश्रा के मुताबिक उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की ओर से पहले कहा गया था कि यदि उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाया जाता है तो मध्य प्रदेश में भी उस दिशा में निर्णय लिया जाएगा। अब उत्तर प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाने का आदेश जारी होने के बाद मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर भी अपने राज्य में इसी तरह के निर्णय की मांग कर रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों के अनुसार मध्य प्रदेश में करीब दो हजार शासकीय इंटर्न डॉक्टर हैं, जबकि प्रदेश में कुल इंटर्न डॉक्टरों की संख्या लगभग 3,600 बताई जा रही है। दूसरे मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों के भी आंदोलन में शामिल होने का दावा किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सागर के इंटर्न डॉक्टरों की बस को नादरा बस स्टैंड पर रोका गया।

    डॉक्टरों ने कहा है कि जब तक मुख्यमंत्री स्वयं सामने आकर स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल हमीदिया अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के प्रदर्शन और पुलिस की तैनाती के कारण स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

  • NEET प्रोटेस्ट से रातोंरात स्टार बनीं रिया अहीर को जनता ने नकारा, बिग बॉस के मंच से महज दो मिनट में लौटना पड़ा

    NEET प्रोटेस्ट से रातोंरात स्टार बनीं रिया अहीर को जनता ने नकारा, बिग बॉस के मंच से महज दो मिनट में लौटना पड़ा


    नई दिल्ली । NEET प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों की आवाज बनीं रिया अहीर बिग बॉस 20 में शामिल नहीं हो सकीं। जनता ने उन्हें सपोर्ट नहीं किया और उनकी जगह लव गिल को शो में एंट्री मिली।

    NEET प्रोटेस्ट के दौरान रिया अहीर अचानक सुर्खियों में आई थीं। छात्रों के प्रदर्शन के बीच पुलिस वैन को रोकने के बाद उनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हुए थे। इस घटना के बाद रिया को बड़ी पहचान मिली और वह सोशल मीडिया पर चर्चा का चेहरा बन गईं।

    रिया अहीर के इस अंदाज ने लोगों का ध्यान खींचा था। प्रदर्शन के दौरान छात्रों के समर्थन में सामने आने के बाद उन्हें अलग-अलग मंचों पर अपनी बात रखने का मौका भी मिला। देखते ही देखते उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ गई और वह युवाओं के बीच पहचान बनाने में कामयाब रहीं।

    इसके बाद रिया अहीर का नाम बिग बॉस 20 से जुड़ा। शो में उनकी एंट्री का फैसला सीधे जनता के हाथ में दिया गया। रिया अहीर के सामने लव गिल थीं और दर्शकों को दोनों में से किसी एक को चुनना था।

    बिग बॉस के मंच पर रिया अहीर ने अपना बेबाक और आत्मविश्वास से भरा अंदाज दिखाया। उनकी और लव गिल के बीच बहस भी देखने को मिली। रिया ने अपनी तरफ से दर्शकों को प्रभावित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन अंतिम फैसला जनता के वोट से होना था।

    वोटिंग के बाद रिया अहीर को झटका लगा। दर्शकों ने लव गिल को अधिक समर्थन दिया और उन्हें बिग बॉस के घर में जाने का मौका मिल गया। वहीं रिया अहीर को मंच से ही वापस लौटना पड़ा।

    रिया अहीर का बिग बॉस का सफर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। खास बात यह रही कि कुछ समय पहले जिस रिया अहीर को NEET प्रोटेस्ट के दौरान लोगों का समर्थन मिला था, उसी जनता के वोट ने उन्हें बिग बॉस के घर में प्रवेश नहीं दिलाया।

    रिया के अचानक बाहर होने से उनके प्रशंसकों को निराशा हुई। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर चर्चा देखने को मिली। रिया को उम्मीद थी कि प्रोटेस्ट के दौरान बनी उनकी पहचान और उनके समर्थकों की संख्या उन्हें बिग बॉस के घर तक पहुंचाने में मदद करेगी, लेकिन वोटिंग का परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि सोशल मीडिया पर मिली लोकप्रियता और किसी रियलिटी शो में जनता का समर्थन हमेशा एक जैसा नहीं होता। रिया अहीर ने प्रोटेस्ट के दौरान अपनी अलग पहचान बनाई थी, लेकिन बिग बॉस के मंच पर उन्हें लव गिल से मुकाबला करना पड़ा और जनता ने लव गिल को चुना।

    इस तरह NEET प्रोटेस्ट से मिली अचानक लोकप्रियता के बाद रिया अहीर ने बिग बॉस के मंच तक तो सफर तय किया, लेकिन घर के अंदर प्रवेश नहीं कर सकीं। महज कुछ मिनटों के मंचीय मुकाबले के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा और बिग बॉस में उनकी एंट्री का इंतजार खत्म हो गया।

  • CJP के कार्यक्रम में हंगामा, ABVP और BJP युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने दीवार फांदी; पुलिस ने दो को पकड़ा

    CJP के कार्यक्रम में हंगामा, ABVP और BJP युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने दीवार फांदी; पुलिस ने दो को पकड़ा


    नई दिल्ली। जोधपुर में रविवार को CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका के कार्यक्रम के दौरान उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब ABVP और बीजेपी युवा मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ता गांधी शांति प्रतिष्ठान परिसर में दीवार फांदकर अंदर पहुंच गए। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा और नई पीढ़ी से जुड़े मुद्दों पर किया गया था। आशुतोष रांका कार्यक्रम में संविधान की किताब लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान परिसर के बाहर अचानक विरोध और नारेबाजी का माहौल बन गया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों में शामिल एक व्यक्ति ने कार्यक्रम स्थल के बाहर मौजूद युवक को थप्पड़ मार दिया और इसके बाद हॉल में प्रवेश करने की कोशिश की गई। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर तैनात पुलिसकर्मी तुरंत सक्रिय हुए और दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए रातानाडा थाने ले गए।

    पुलिस के मुताबिक दो लोग दीवार फांदकर कार्यक्रम स्थल के भीतर पहुंचे थे। DCP ईस्ट मनीष चौधरी ने बताया कि दोनों को डिटेन किया गया है और उनसे पूरे घटनाक्रम को लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कार्यक्रम स्थल में प्रवेश करने और हंगामा करने के पीछे क्या वजह थी तथा क्या किसी तरह की पूर्व योजना के तहत वहां पहुंचा गया था।

    घटना के दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच भी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। बताया गया कि ABVP के संयोजक ललित दाधीच और बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता राजवीर बांता को पुलिस मौके से बाहर लेकर गई। हालांकि घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं और पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।

    यह विवाद ऐसे समय हुआ है जब CJP की ओर से हाल के दिनों में ‘लीगल कॉकरोचेज’ जैसे विरोध प्रदर्शनों और विभिन्न मुद्दों को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। आशुतोष रांका का जोधपुर कार्यक्रम भी इसी सिलसिले का हिस्सा बताया गया। कार्यक्रम में शिक्षा और नई पीढ़ी से जुड़े सवालों पर चर्चा होनी थी लेकिन विरोध और हंगामे के चलते माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के साथ कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आशुतोष रांका को पुलिस सुरक्षा में जोधपुर से जयपुर रवाना किया गया। पुलिस की मौजूदगी में उन्हें शहर से बाहर ले जाया गया ताकि रास्ते में किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

    बताया गया है कि CJP के कार्यकर्ताओं का जोधपुर में आगे भी कार्यक्रम प्रस्तावित था। ऐसे में रविवार की घटना के बाद पुलिस की सतर्कता बढ़ गई है। प्रशासन की कोशिश है कि आगामी कार्यक्रमों के दौरान किसी तरह का विवाद या टकराव न हो। फिलहाल पुलिस हिरासत में लिए गए दोनों लोगों से पूछताछ कर रही है और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

  • E20 के खिलाफ प्रदर्शन से पहले तहसीन पूनावाला नजरबंद, पुलिसवालों को ऑफर किया गन्ने का जूस

    E20 के खिलाफ प्रदर्शन से पहले तहसीन पूनावाला नजरबंद, पुलिसवालों को ऑफर किया गन्ने का जूस


    नई दिल्ली। E20 फ्यूल पॉलिसी और चीनी की बढ़ती कीमतों के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से पहले एक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला ने दिल्ली पुलिस पर उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने देने का आरोप लगाया है। पूनावाला का दावा है कि शनिवार को पुलिस उनके घर पहुंची और उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर जाने से रोक दिया।

    पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई वीडियो शेयर किए हैं। इनमें वह पुलिसकर्मियों से सवाल करते नजर आ रहे हैं कि उन्हें जंतर-मंतर जाने से क्यों रोका जा रहा है। वीडियो में एक पुलिस अधिकारी कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए कहता नजर आता है कि प्रदर्शन स्थल पर उनके पहुंचने से समर्थक जुट सकते हैं और भीड़ में कुछ गलत लोग शामिल हो सकते हैं। पूनावाला ने इस पर सवाल उठाया कि महज आशंका के आधार पर पुलिस किसी व्यक्ति को घर से बाहर निकलने से कैसे रोक सकती है।

    ‘मैं हाउस अरेस्ट हूं, कोई दस्तावेज नहीं मिला’
    पूनावाला ने इंडिया टुडे डिजिटल से बातचीत में दावा किया कि उनके सिटिजन एडवोकेसी ग्रुप ‘टीम भारत’ ने चीनी की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की योजना बनाई थी। उनका आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनके घर पहुंचकर उन्हें बाहर जाने से रोक दिया।

    उन्होंने कहा, ‘मैं हाउस अरेस्ट हूं। कोई दस्तावेज नहीं दिया गया है।’ पूनावाला ने पुलिसकर्मियों पर तंज कसते हुए उन्हें गन्ने का जूस भी ऑफर किया। इसका वीडियो भी उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह चीनी और एथेनॉल से जुड़ी नीतियां आगे बढ़ रही हैं, आने वाले समय में गन्ने का जूस भी महंगा हो सकता है।

    E20 नीति को लेकर भी विरोध
    पूनावाला का विरोध केंद्र सरकार की E20 फ्यूल पॉलिसी को लेकर भी है। इस नीति के तहत पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाने का प्रावधान है। पूनावाला का आरोप है कि एथेनॉल और चीनी से जुड़ी नीतियों का असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। उन्होंने इन नीतियों को ‘शुगर स्कैम’ और ‘एथेनॉल स्कैम’ बताते हुए दावा किया कि इससे राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के परिवारों को फायदा पहुंच रहा है।

    हालांकि, पूनावाला द्वारा साझा किए गए वीडियो में पुलिस की ओर से उन्हें नजरबंदी या हिरासत का कोई लिखित आदेश देते हुए नहीं दिखाया गया है। वीडियो में पुलिसकर्मी उन्हें जंतर-मंतर नहीं जाने की बात कहते हुए संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते नजर आते हैं।

    पहले भी पुलिस से हुआ है टकराव
    E20 के विरोध को लेकर पूनावाला और दिल्ली पुलिस के बीच पहले भी टकराव हो चुका है। 31 जुलाई को उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम रोड से तीस जनवरी मार्ग स्थित गांधी स्मृति तक अकेले मार्च और दिनभर की भूख हड़ताल का ऐलान किया था।

    इससे पहले भी उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस ने संसद तक ‘टीम भारत’ की प्रस्तावित ‘गाड़ी मार्च’ को अनुमति नहीं दी थी। पूनावाला का कहना है कि उनका विरोध शांतिपूर्ण है और सरकार की चीनी तथा एथेनॉल नीति पर सवाल उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।

  • जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी के बीच पार्क में जुटे CJP समर्थकों को रेजिडेंट्स ने बैठक से रोका, पुलिस पहुंची

    जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी के बीच पार्क में जुटे CJP समर्थकों को रेजिडेंट्स ने बैठक से रोका, पुलिस पहुंची

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनकी टीम से जुड़ा दिल्ली का एक मामला सामने आने के बाद राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार दीपके अपनी टीम के कुछ सदस्यों और समर्थकों के साथ दिल्ली की एक रेजिडेंट सोसाइटी के पार्क में जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी को लेकर बैठक कर रहे थे। इसी दौरान सोसाइटी के कई निवासी वहां पहुंच गए और बैठक का विरोध किया।

    बताया गया कि दीपके के साथ सौरभ दास, आशुतोष रंका और कुछ समर्थक मौजूद थे। बैठक के दौरान आगामी कार्यक्रम की रणनीति पर चर्चा की जा रही थी। इसी बीच स्थानीय लोगों को वहां राजनीतिक बैठक होने की जानकारी मिली। इसके बाद कई निवासी पार्क में पहुंचे और टीम से बैठक बंद कर वहां से जाने को कहा।

    स्थानीय लोगों की आपत्ति का आधार यह बताया गया कि सोसाइटी का पार्क निवासियों के घूमने और सामान्य गतिविधियों के लिए है। उनका कहना था कि पार्क में धरना या राजनीतिक प्रदर्शन की योजना नहीं बनाई जानी चाहिए। विरोध के दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस की स्थिति भी बनी। बाद में पुलिसकर्मियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया और दीपके तथा उनके साथ मौजूद लोगों को पार्क से जाना पड़ा।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अभिजीत दीपके जंतर-मंतर सीजन 2 शुरू करने की बात कह चुके हैं। इससे पहले जून में CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। उस दौरान संगठन की ओर से केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया गया था। दीपके ने बाद में आंदोलन को आगे बढ़ाने के संकेत भी दिए थे।

    पार्क में बैठक करने की वजह को लेकर दीपके की ओर से कहा गया कि टीम को दिल्ली में अपने वॉलंटियर्स के साथ बैठक करनी थी। उनके अनुसार इसके लिए इनडोर स्थान तलाशने का प्रयास किया गया था, लेकिन हॉल उपलब्ध कराने में कठिनाई आई। उनका दावा है कि पहले एक हॉल की व्यवस्था हुई थी, लेकिन बाद में वहां भी बैठक की अनुमति नहीं मिली।

    इसके बाद टीम ने सोसाइटी के पार्क में बैठक करने का फैसला किया। दीपके के अनुसार बैठक के दौरान समर्थकों से आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। इसी दौरान उन्होंने समर्थकों से पूछा कि अब किसके इस्तीफे की मांग की जानी चाहिए। समर्थकों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया गया।

    पार्क में हुए विरोध के बाद दीपके ने आरोप लगाया कि उनकी टीम को बैठक करने से रोकने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इसके पीछे बीजेपी का हाथ होने का दावा किया। उनका आरोप है कि लोगों को CJP से दूरी बनाए रखने के लिए डराया धमकाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    पूरे घटनाक्रम में एक तरफ सार्वजनिक स्थान के इस्तेमाल को लेकर सोसाइटी के निवासियों की आपत्ति सामने आई, तो दूसरी तरफ CJP ने इसे अपने राजनीतिक कार्यक्रमों को रोकने की कोशिश बताया। मामले में किसी बड़ी झड़प की जानकारी नहीं है और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई।

    अभिजीत दीपके की टीम अब जंतर-मंतर सीजन 2 की आगे की रणनीति पर काम करने की बात कह रही है। ऐसे में दिल्ली में उनके अगले कार्यक्रम को लेकर गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, सोसाइटी पार्क की घटना ने राजनीतिक बैठकों के लिए सार्वजनिक और निजी सामुदायिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

  • सोनाक्षी सिन्हा की ट्रोलिंग पर भड़के शत्रुघ्न सिन्हा, बीजेपी आईटी सेल पर लगाए गंभीर आरोप, जानिए पूरा मामला

    सोनाक्षी सिन्हा की ट्रोलिंग पर भड़के शत्रुघ्न सिन्हा, बीजेपी आईटी सेल पर लगाए गंभीर आरोप, जानिए पूरा मामला


    नई दिल्ली ।
    अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा को सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने के मुद्दे पर उनके पिता और तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने दावा किया है कि उनकी बेटी के खिलाफ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर किया जा रहा विरोध स्वाभाविक नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से सुनियोजित और प्रायोजित है। शत्रुघ्न सिन्हा ने इस प्रकार की गतिविधियों के पीछे सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल से जुड़े लोगों और उनकी नीतियों का समर्थन करने वाले समूहों को जिम्मेदार ठहराया है।

    एक समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि जो लोग उनकी बेटी को ट्रोल कर रहे हैं और विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं, वे पेशेवर और पेड ट्रोल्स हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों को स्वतंत्र रूप से अपनी राय व्यक्त करने की समझ नहीं होती, बल्कि उन्हें जो लिखित सामग्री दी जाती है, वे उसी के आधार पर अभियानों को अंजाम देते हैं। उन्होंने इसे एक बनावटी और राजनीतिक रूप से प्रेरित हमला करार दिया।

    यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोनाक्षी सिन्हा ने छात्र आंदोलनों और नागरिक अधिकारों से जुड़ी पहलों के समर्थन में अपनी बात रखी थी। इस दौरान जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को रोके जाने और प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कार्रवाई की उन्होंने खुलकर निंदा की थी। सोनाक्षी ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे युवाओं की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर संदेश साझा किए थे, जिसके बाद वे कुछ वर्गों के निशाने पर आ गईं।

    बेटी के रुख का समर्थन करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि सोनाक्षी ऐसे भ्रामक और नकारात्मक अभियानों पर ध्यान नहीं देती हैं। उन्होंने अपनी बेटी के मानसिक धैर्य और निडरता की तारीफ की। जब उनसे सवाल किया गया कि क्या सोनाक्षी भविष्य में सक्रिय राजनीति में कदम रख सकती हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस विषय पर पहले से कोई दावा नहीं कर सकते, हालांकि उन्होंने सोनाक्षी की क्षमताओं पर पूरा विश्वास व्यक्त किया।

    साक्षात्कार के दौरान शत्रुघ्न सिन्हा से यह भी पूछा गया कि क्या सोनाक्षी का समर्थन केवल चुनिंदा मुद्दों तक सीमित है। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बेटी ने विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के छात्रों से जुड़े विषयों पर भी समय-समय पर अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने राजनीतिक आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि जनहित के मुद्दों पर बोलना किसी भी नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और राजनीतिक बहसों के स्वरूप पर चर्चा को जन्म दे दिया है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी इस विषय को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। शत्रुघ्न सिन्हा के इस बयान के बाद आईटी सेल और ऑनलाइन ट्रोल्स की भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।

  • CJI सूर्यकांत ने सरकार से जांच जारी रखने वाली FIR की सूची मांगी, सभी पक्षों को कमेटी के सामने रखने होंगे अपने तर्क

    CJI सूर्यकांत ने सरकार से जांच जारी रखने वाली FIR की सूची मांगी, सभी पक्षों को कमेटी के सामने रखने होंगे अपने तर्क

    नई दिल्ली ।पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर हुए प्रदर्शनों के दौरान दर्ज FIR को रद्द करने की मांग पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में प्रदर्शनकारियों की ओर से सभी FIR खत्म करने की मांग रखी गई, जबकि सरकार ने इसका विरोध करते हुए कुछ मामलों में जांच जारी रखने की जरूरत बताई।

    सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने पूरे मामले के लिए हाई पावर्ड कमेटी गठित करने की बात कही। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित पक्ष कमेटी के सामने अपनी बात रख सकेंगे। कमेटी मामले से जुड़े तथ्यों और विभिन्न पक्षों के तर्कों पर विचार करने के बाद अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।

    प्रदर्शनकारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत से सभी FIR रद्द करने का आदेश देने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों पर व्यापक स्तर पर विचार किया जाना चाहिए। वहीं सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया और कुछ मामलों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले आरोपियों को राहत देने पर आपत्ति जताई गई।

    सरकार की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को अलग-अलग देखना जरूरी है। उनका तर्क था कि यदि सभी FIR एक साथ रद्द कर दी जाती हैं तो इससे गलत संदेश जा सकता है। संसद मार्च का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान उठाया गया और इसे कानून के दायरे में रहने की आवश्यकता से जोड़ा गया।

    इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि संविधान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार देता है। हालांकि, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रदर्शन के दौरान कानून का उल्लंघन या गंभीर आपराधिक गतिविधि के आरोपों वाले मामलों को अलग नजरिए से देखा जा सकता है।

    सरकार की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट से अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर सभी FIR खत्म करने की मांग की जा रही है। अदालत ने सरकार की आपत्तियों और सुझावों को सुनते हुए कहा कि सभी पक्षों की बात को प्रस्तावित कमेटी के समक्ष रखा जा सकता है।

    सुनवाई के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से भी अपनी बात रखने की मांग की गई। उनके पक्ष का कहना था कि FIR या अन्य मामलों में कोई निर्णय लेने से पहले प्रभावित पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की स्थिति पर भी विचार किया जाना चाहिए।

    मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से उन मामलों की सूची भी मांगी जिनमें जांच आगे जारी रखना आवश्यक समझा जा रहा है। अदालत ने संकेत दिया कि प्रस्तावित कमेटी सभी मामलों को देखने के बाद यह समझने में मदद करेगी कि किन मामलों में कार्रवाई जारी रहनी चाहिए और किन मामलों में राहत पर विचार किया जा सकता है।

    कमेटी की संरचना को लेकर अदालत ने बताया कि एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश, पूर्व पुलिस महानिदेशक और पूर्व सीबीआई निदेशक से सहमति ली गई है। इसके अलावा कमेटी में अन्य सदस्यों को शामिल करने के सुझावों पर भी विचार किया जाएगा।

    अदालत की इस पहल से अब FIR से जुड़े सभी पक्षों को अपनी स्थिति विस्तार से रखने का अवसर मिलेगा। कमेटी की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा। फिलहाल अदालत ने सभी संबंधित मामलों की सूची और पक्षों की दलीलों को एक व्यापक प्रक्रिया के तहत देखने का रास्ता तैयार किया है।