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  • NEET मुद्दे पर जंतर-मंतर बना देशभर के छात्रों का मंच, भोजन-पानी से लेकर समर्थन तक कई हाथ आए साथ

    NEET मुद्दे पर जंतर-मंतर बना देशभर के छात्रों का मंच, भोजन-पानी से लेकर समर्थन तक कई हाथ आए साथ

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े मुद्दों को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। आंदोलन में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे छात्र शामिल हैं, जो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं की मौजूदगी ने इसे विविधता और सहभागिता का प्रतीक बना दिया है।

    धरनास्थल पर मौजूद छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की पूरी भर्ती और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग से जुड़ा है। उनका मानना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष और भरोसेमंद होगी तो लाखों युवाओं का भविष्य अधिक सुरक्षित होगा। इसी उद्देश्य से वे कठिन परिस्थितियों के बावजूद लगातार प्रदर्शन में शामिल हैं।

    गर्मी और उमस के बीच जंतर-मंतर पर बने अस्थायी शिविरों में बड़ी संख्या में छात्र दिन-रात डटे हुए हैं। प्रदर्शन में शामिल कई छात्र विभिन्न राज्यों से लंबी यात्रा कर दिल्ली पहुंचे हैं। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह संघर्ष शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

    धरने के दौरान स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों की ओर से भी लगातार सहयोग किया जा रहा है। कई लोग प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि इस सहयोग से उन्हें आंदोलन जारी रखने का मनोबल मिलता है और यह दर्शाता है कि समाज के विभिन्न वर्ग भी उनकी मांगों के प्रति संवेदनशील हैं।

    प्रदर्शन स्थल पर अपनी बात रखने के लिए विशेष बोर्ड भी लगाए गए हैं, जहां छात्र अपनी मांगों और सुझावों को लिखकर साझा कर रहे हैं। इनमें परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शी चयन प्रक्रिया, तकनीकी प्रशिक्षण और शिक्षा क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव जैसी मांगें प्रमुख रूप से सामने आ रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि सुधार के लिए ठोस सुझाव देना भी है।

    आंदोलन में शामिल कई छात्रों ने बताया कि उनके परिवारों की राय अलग-अलग रही, लेकिन उन्होंने अपने स्तर पर इस अभियान का हिस्सा बनने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत भविष्य का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास है। इसी भावना के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं।

    इसी बीच कुछ स्थानीय परिवार भी प्रदर्शनकारियों की सहायता के लिए आगे आए हैं। कई लोग अपने घरों से भोजन तैयार कर छात्रों तक पहुंचा रहे हैं। स्वयंसेवकों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों में बैठे छात्रों की सहायता करना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। इस सहयोग को प्रदर्शनकारी भी आंदोलन की बड़ी ताकत मान रहे हैं।

    जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के समानांतर सरकार और CJP के बीच बातचीत की प्रक्रिया भी चल रही है। हालांकि अब तक किसी अंतिम सहमति की घोषणा नहीं हुई है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं, जबकि बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने की कोशिश जारी है। फिलहाल धरना शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं।

  • स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद आंदोलन में सक्रिय अभिजीत दीपके, जंतर-मंतर को लेकर समर्थकों से की भावुक अपील

    स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद आंदोलन में सक्रिय अभिजीत दीपके, जंतर-मंतर को लेकर समर्थकों से की भावुक अपील


    नई दिल्ली ।
    जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों और प्रदर्शनकारियों से एक भावुक अपील की है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वह तेज बुखार और शरीर में दर्द से जूझ रहे हैं। इसी कारण उन्होंने कहा कि यदि वह निर्धारित समय पर प्रदर्शन स्थल पर दिखाई न दें तो इसे उनकी मजबूरी समझा जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि कुछ घंटे आराम करने के बाद वह फिर से आंदोलन में शामिल होंगे।

    अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में बताया कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के बावजूद वह लगातार पेनकिलर की मदद से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार चल रहे बुखार और बॉडी पेन के कारण चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कुछ समय आराम करना जरूरी हो गया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि यदि वह कुछ समय के लिए जंतर-मंतर पर मौजूद न रहें तो इसे आंदोलन से दूरी के रूप में न देखा जाए।

    उन्होंने अपने संदेश में यह भी कहा कि स्वास्थ्य में सुधार होते ही वह शाम तक दोबारा प्रदर्शन स्थल पर लौटने का प्रयास करेंगे। उनके इस संदेश के बाद समर्थकों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और आंदोलन जारी रखने का भरोसा भी जताया। पार्टी के नेताओं का कहना है कि आंदोलन अपनी निर्धारित रणनीति के अनुसार चलता रहेगा और कार्यक्रमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित किए जाने का आरोप भी लगाया है। पार्टी का दावा है कि प्रदर्शन स्थल के आसपास इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं, जिससे आंदोलन से जुड़े लोगों को संवाद और समन्वय में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई कि कहीं प्रशासन किसी नई कार्रवाई की तैयारी तो नहीं कर रहा। हालांकि इस संबंध में प्रशासन या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है।

    जानकारी के अनुसार अभिजीत दीपके पिछले कई सप्ताह से लगातार जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आंदोलन की तैयारियों, समर्थकों से मुलाकात, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा और लगातार व्यस्त कार्यक्रम के कारण उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल सका। पार्टी का कहना है कि लगातार व्यस्त रहने और शारीरिक थकान के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी है।

    इससे पहले भी अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन स्थल पर तैनात पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों से शांतिपूर्ण व्यवहार बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से चलाया जा रहा है तथा किसी भी प्रकार के टकराव से बचना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सुरक्षा बलों से प्रदर्शनकारियों के प्रति संयम बरतने का अनुरोध भी किया था।

    राजधानी में जारी इस आंदोलन पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लगातार नजर बनी हुई है। विभिन्न संगठनों और समर्थकों की मौजूदगी के बीच प्रदर्शन जारी है, जबकि प्रशासन भी स्थिति पर निगरानी रखे हुए है। अभिजीत दीपके के स्वास्थ्य संबंधी संदेश के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि उनकी अस्थायी अनुपस्थिति केवल चिकित्सकीय कारणों से हो सकती है और स्वास्थ्य में सुधार होने पर वह फिर से आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

  • मेदांता में वांगचुक से मिलने पहुंचे 15 सांसद, पुलिस ने रोका तो धरने पर बैठे

    मेदांता में वांगचुक से मिलने पहुंचे 15 सांसद, पुलिस ने रोका तो धरने पर बैठे


    गुरुग्राम।
    देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों के समर्थन में पिछले 25 दिनों से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से मिलने बुधवार शाम को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के साथ 15 विपक्षी सांसद वांगचुक से मिलने मेदांता पहुंचे। पुलिस ने उन्हें अस्पताल गेट पर ही रोक लिया।

    सांसद संजय सिंह की पुलिस से इसको लेकर तीखी बहस हुई। अंदर प्रवेश न मिलने पर सभी सांसद अस्पताल के गेट पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान वांगचुक की पत्नी गीतांजलि भी वहां पहुंचीं। गीतांजलि ने कहा कि सोनम ने सरकार को चिट्ठी लिखी है, जिसमें अपनी शर्तें और मांगें बताई हैं। सरकार को ये मांगें मान लेनी चाहिए।

    करीब एक घंटे तक हंगामा चलने के बाद वांगचुक की निगरानी कर रही मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। टीम ने हेल्थ अपडेट दिया और मेडिकल कारणों का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ ब्लड रिलेशन वाले ही मरीज से मिल सकते हैं। इसके बाद सांसद वहां से चले गए। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार वांगचुक को अनशन तोड़ने नहीं देना चाहती, उन्हें मारना चाहती है।

    वांगचुक ने सरकार के सामने रखीं ये शर्तें

    वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में उन्होंने सरकार की पहल का आभार जताया और कहा कि उनकी तीन मुख्य मांगें हैं। पहली यह कि पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। दूसरी मांग जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा हो। तीसरी मांग है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार किया जाए।

    वांगचुक ने अनशन तोड़ने की शर्त भी रखी। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई 2026 को हुआ ‘चलो संसद’ मार्च पुलिस की कार्रवाई के बावजूद शांतिपूर्ण रहा। प्रदर्शनकारियों पर कोई कानूनी केस या उत्पीड़न जैसी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, इस आश्वासन के बाद वे अनशन खत्म कर देंगे।

    मेदांता ने जारी किया हेल्थ बुलेटिन

    मेदांता अस्पताल प्रबंधन ने बुधवार शाम हेल्थ बुलेटिन जारी किया। इसमें बताया गया कि वांगचुक को आईसीयू में रखा गया है।
    उनका इलाज मल्टी-डिसिप्लिनरी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही है। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है और वे पूरी तरह होश में हैं। उनका हर इलाज उनकी सहमति से किया जा रहा है।

  • छात्रों के मुद्दे पर लोकसभा में बढ़ा राजनीतिक टकराव, अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का दिया हवाला

    छात्रों के मुद्दे पर लोकसभा में बढ़ा राजनीतिक टकराव, अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का दिया हवाला

    नई दिल्ली । लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान छात्रों से जुड़े मुद्दों और विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा को लेकर सदन में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चर्चा के दौरान केवल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को बोलने का अवसर दिया गया, जबकि अन्य विपक्षी दलों को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद सदन में कुछ समय के लिए तीखी बहस देखने को मिली।

    अखिलेश यादव ने सदन में कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं हैं। उनके अनुसार यह पूरे देश के युवाओं का विषय है और सभी राजनीतिक दलों को इस पर अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस और भाजपा को बोलने का मौका दिया गया तो अन्य विपक्षी दलों को क्यों नहीं सुना गया। उन्होंने इसे संसदीय प्रक्रिया में समान अवसर के सिद्धांत से जुड़ा मुद्दा बताया।

    सपा प्रमुख ने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और उनकी आवाज दबाने का प्रयास हुआ। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना गया तो विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से उनके समर्थन में सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

    अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार को सदन के भीतर विस्तृत चर्चा करनी चाहिए। उनके अनुसार यदि संसद में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता और सरकार खुलकर जवाब देती तो विपक्ष को अलग से विरोध प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल छात्रों की समस्याओं को सरकार के सामने प्रभावी ढंग से रखना है।

    इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों ने चर्चा की इच्छा जताई है और सरकार भी इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संसदीय नियमों के तहत व्यवस्थित तरीके से ही चर्चा कराई जा सकती है और सदन की कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही चलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों के आपसी मतभेदों का समाधान अध्यक्ष के स्तर पर नहीं किया जा सकता।

    सदन में जारी बहस के बीच कुछ समय के लिए हंगामे जैसी स्थिति भी बनी। इसके बाद कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया। संसदीय कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क रखे। सरकार की ओर से यह दोहराया गया कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष ने मांग की कि चर्चा सभी दलों की भागीदारी के साथ कराई जाए।

    संसद के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान भी अखिलेश यादव ने अपने रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार संसद के भीतर छात्रों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा करती तो विपक्ष को अलग से प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने युवाओं और छात्रों से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए कहा कि इन मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर समाधान खोजा जाना चाहिए।

    लोकसभा में हुई इस बहस के बाद छात्रों के मुद्दे, संसदीय प्रक्रिया और विपक्ष की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में मानसून सत्र के दौरान इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच विस्तृत बहस होने की संभावना बनी हुई है, क्योंकि दोनों पक्ष इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए अपने-अपने पक्ष पर कायम हैं।

  • लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव उस समय बढ़ गया, जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया। मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

    दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता लाठी लेकर परिसर में तैनात नजर आईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता शांतिप्रिय है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और उनके पोस्टरों पर जूते-चप्पल भी बरसाए। दोनों दलों के समर्थकों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही।

    यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन की प्रतिक्रिया के रूप में आयोजित किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय के घेराव का ऐलान किया गया था। विपक्ष के उस प्रदर्शन में राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया था, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

    पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी की व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

  • भारतीय सिनेमा में छात्र राजनीति और सामाजिक क्रांति को दर्शाती प्रमुख फिल्में..

    भारतीय सिनेमा में छात्र राजनीति और सामाजिक क्रांति को दर्शाती प्रमुख फिल्में..


    नई दिल्ली ।
    देश भर में वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था, प्रवेश परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विमर्श छिड़ा हुआ है। इस माहौल के बीच भारतीय सिनेमा के उस दौर की चर्चा पुनः तेज हो गई है, जिसने छात्रों के आक्रोश, उनके सामाजिक संघर्ष और व्यवस्था विरोधी आंदोलनों को बड़े पर्दे पर अत्यंत यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत किया था। बॉलीवुड में निर्मित कई ऐसी फिल्में रही हैं, जिन्होंने केवल बॉक्स ऑफिस पर व्यावसायिक सफलता ही हासिल नहीं की, बल्कि समाज में राजनीतिक चेतना और छात्र राजनीति के प्रभाव को भी रेखांकित किया।

    छात्र आंदोलनों की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों में वर्ष 2006 में आई ‘रंग दे बसंती’ को सबसे प्रभावशाली रचना माना जाता है। इस फिल्म में कॉलेज के बेफिक्र युवाओं द्वारा भ्रष्ट शासन तंत्र के खिलाफ उठाई गई आवाज और उसके एक बड़े जनआंदोलन में बदलने की प्रक्रिया को दिखाया गया है। इसी प्रकार, मणिरत्नम द्वारा निर्देशित फिल्म ‘युवा’ छात्र राजनीति के सकारात्मक पहलू और युवाओं की सीधे शासन प्रणाली में भागीदारी को प्रेरित करती है। वहीं, 1970 के दशक की राजनीतिक हलचलों और सेंट स्टीफंस कॉलेज के छात्रों के वैचारिक संघर्ष पर आधारित ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ ने युवा चेतना के गंभीर पक्षों को उजागर किया है।

    विश्वविद्यालयों के भीतर पनपने वाली चुनावी राजनीति, हिंसा और सत्ता के संघर्ष को अनुराग कश्यप की ‘गुलाल’ और तिग्मांशु धूलिया की ‘हासिल’ जैसी फिल्मों में बेहद यथार्थवादी तरीके से दर्शाया गया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति पर केंद्रित ‘हासिल’ यह स्पष्ट करती है कि किस तरह शैक्षणिक संस्थानों में छात्र संघ चुनाव बाहुबल और अपराध से प्रभावित होकर युवाओं के भविष्य को दिशाहीन कर देते हैं। ये फिल्में दिखाती हैं कि छात्र आंदोलन केवल आदर्शवाद तक सीमित न रहकर कई बार जटिल राजनीतिक ताने-बाने में भी उलझ जाते हैं।

    सामाजिक न्याय और नीतिगत निर्णयों के खिलाफ हुए ऐतिहासिक छात्र आंदोलनों को भी सिनेमा ने अपनी विषय-वस्तु बनाया है। प्रकाश झा की ‘आरक्षण’ जहां शिक्षा प्रणाली और आरक्षण नीति के सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश डालती है, वहीं फिल्म ‘हुड़दंग’ 1990 के दशक में मंडल आयोग की सिफारिशों के विरोध में हुए देशव्यापी छात्र प्रदर्शनों को दर्शाती है। आज के दौर में जब युवा वर्ग अपनी मांगों को लेकर मुखर है, तब ये फिल्में यह साबित करती हैं कि सिनेमा ने हमेशा से समाज और युवाओं के वास्तविक संघर्षों को एक सशक्त माध्यम प्रदान किया है।

  • NEET विवाद पर कांग्रेस ने बदली रणनीति, छात्र आंदोलन में बढ़ाई सक्रियता; सरकार पर संसद से सड़क तक बनाया दबाव

    NEET विवाद पर कांग्रेस ने बदली रणनीति, छात्र आंदोलन में बढ़ाई सक्रियता; सरकार पर संसद से सड़क तक बनाया दबाव


    नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। शुरुआत में आंदोलन से सीमित दूरी बनाए रखने वाली पार्टी अब खुलकर छात्रों के समर्थन में उतर आई है। संसद के भीतर से लेकर सड़क तक कांग्रेस ने सरकार को घेरने की तैयारी तेज कर दी है, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक मुकाबला और तीखा हो गया है।

    शुरुआत में दूरी, बाद में बदला रुख

    पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस ने देशभर में छात्रों से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत तो की, लेकिन जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन से खुद को अलग रखा। पार्टी के भीतर यह धारणा थी कि सीजेपी का आंदोलन राजनीतिक रूप से भाजपा को लाभ पहुंचाने वाला हो सकता है। हालांकि, सीजेपी की अपील पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे, लेकिन उन्होंने केवल भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात की।

    पार्टी ने औपचारिक रूप से आंदोलन का समर्थन नहीं किया।

    छात्र जुटे तो कांग्रेस ने बदली रणनीति

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संसद मार्च के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी और पूरे दिन चले विरोध प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि युवाओं में सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष है। इसके बाद पार्टी ने आंदोलन को अधिक सक्रियता से आगे बढ़ाने का फैसला किया।

    रणनीति बदलने के साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद के भीतर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। राहुल गांधी ने सदन में इस मामले पर चर्चा कराने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की।

    कानूनी सहायता का भी ऐलान

    कांग्रेस ने प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों और युवाओं को कानूनी मदद उपलब्ध कराने की घोषणा भी की है।

    पार्टी का कहना है कि आंदोलन के दौरान किसी भी छात्र के साथ अन्याय होने पर उसकी हरसंभव सहायता की जाएगी। इससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस अब इस आंदोलन में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के पक्ष में है।

    धरना, हिरासत और फिर रिहाई

    मंगलवार को राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के निकट निषेधाज्ञा वाले क्षेत्र में धरने पर बैठ गए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। कुछ घंटों तक हिरासत में रखने के बाद रात में सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।

    राजनीतिक मुकाबला हुआ तेज

    NEET पेपर लीक विवाद अब केवल शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह विपक्ष और सरकार के बीच बड़ा राजनीतिक संघर्ष बनता जा रहा है। कांग्रेस की सक्रियता के बाद संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना मानी जा रही है।

  • प्रदर्शन में शामिल फहाद अहमद को पुलिस ने हिरासत में लिया, स्वरा भास्कर का तीखा बयान, लोकतंत्र और शांतिपूर्ण विरोध को लेकर उठे सवा

    प्रदर्शन में शामिल फहाद अहमद को पुलिस ने हिरासत में लिया, स्वरा भास्कर का तीखा बयान, लोकतंत्र और शांतिपूर्ण विरोध को लेकर उठे सवा


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों की गूंज मुंबई तक पहुंची, जहां प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ता फहाद अहमद को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के साथ की गई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    बताया गया कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों और परीक्षा प्रणाली को लेकर आयोजित प्रदर्शन में कई लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अनुमति से संबंधित नियमों का हवाला देते हुए कार्रवाई की और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इन्हीं में राजनीतिक कार्यकर्ता फहाद अहमद भी शामिल थे। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद घटनास्थल से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जाने लगे, जिनमें पुलिस प्रदर्शनकारियों को अपने साथ ले जाती दिखाई दे रही है।

    स्वरा भास्कर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि फहाद अहमद और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर माहिम पुलिस थाने में रखा गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताते हुए लिखा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं कही जा सकती। अपने संदेश में उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से एकजुट रहने की भी अपील की।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में फहाद अहमद पुलिसकर्मियों से हिरासत में लिए जाने का कारण पूछते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक अन्य वीडियो में उन्हें पुलिस वाहन के भीतर बैठकर घटनास्थल की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए देखा जा सकता है। इन वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि कई अन्य ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जोड़कर सवाल उठाए।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वहीं प्रशासन की ओर से यह कहा गया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

    लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। ऐसे मामलों में प्रशासन का दायित्व सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है, जबकि प्रदर्शनकारी अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत अपनी बात रखने का दावा करते हैं। यही कारण है कि इस तरह की घटनाएं अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बन जाती हैं।

    फिलहाल फहाद अहमद को हिरासत में लिए जाने और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और विभिन्न पक्षों के बयानों के बीच इस मामले ने राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श को नया आयाम दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन की आगे की कार्रवाई और इस विषय पर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • दिल्ली छात्र प्रदर्शन पर बॉलीवुड की तीखी प्रतिक्रिया, लाठीचार्ज के बाद सोनू सूद, हुमा कुरैशी और अनुराग कश्यप समेत कई सितारों ने उठाए सवाल

    दिल्ली छात्र प्रदर्शन पर बॉलीवुड की तीखी प्रतिक्रिया, लाठीचार्ज के बाद सोनू सूद, हुमा कुरैशी और अनुराग कश्यप समेत कई सितारों ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली । दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज को लेकर बॉलीवुड के कई कलाकारों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों के बाद अभिनेता, अभिनेत्री और फिल्म निर्माताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी राय साझा करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद, संयम और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। कई कलाकारों ने कहा कि युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और किसी भी विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालना अधिक उचित है।

    प्रदर्शन के बाद अभिनेता आयुष शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती केवल चुनावों तक सीमित नहीं होती, बल्कि नागरिकों की बात सुनने और उनकी चिंताओं को समझने में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि छात्रों सहित हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है। उनके अनुसार, यदि अंततः छात्रों की मांगों पर विचार किया जाना था तो शुरुआत से ही संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि अपनी मांग रखने के दौरान छात्रों को आंसू गैस और लाठीचार्ज जैसी परिस्थितियों का सामना करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

    अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने भी इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान सामने आई तस्वीरें लंबे समय तक लोगों की स्मृति में बनी रहेंगी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों को धैर्य, बातचीत और परस्पर विश्वास के जरिए सुलझाया जा सकता है। उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले छात्रों और नागरिकों के साहस की सराहना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति को सम्मानपूर्वक सुनना आवश्यक है।

    अभिनेता सोनू सूद ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के छात्रों को कठोर कार्रवाई नहीं, बल्कि सहयोग और विश्वास की आवश्यकता है। वहीं अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा से नहीं निकल सकता। उन्होंने युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संवाद की संस्कृति लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। उनके अनुसार, किसी भी आंदोलन का उद्देश्य सकारात्मक बदलाव होना चाहिए और सभी पक्षों को संयम बनाए रखना चाहिए।

    फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि कार्रवाई की प्रकृति और उसके प्रभाव पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने अपने संदेश में पुलिस की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक समाज में जवाबदेही और संवेदनशीलता दोनों का समान महत्व है।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने लगे, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर झड़पें भी हुईं। दूसरी ओर प्रदर्शन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखने का प्रयास किया जा रहा था और बल प्रयोग से बचा जा सकता था।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर लोकतांत्रिक विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है। राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के साथ-साथ फिल्म जगत की ओर से आई टिप्पणियों ने भी इस मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि छात्रों की मांगों और पूरे घटनाक्रम पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद फिल्मी हस्तियों की प्रतिक्रिया, छात्रों की आवाज सुनने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील तेज

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद फिल्मी हस्तियों की प्रतिक्रिया, छात्रों की आवाज सुनने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील तेज

    नई दिल्ली । दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग की खबरों के बाद बॉलीवुड के कई कलाकार छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं। अभिनेत्री पूजा भट्ट, सोनाक्षी सिन्हा, अदिति राव हैदरी और जेनेलिया देशमुख सहित कई फिल्मी हस्तियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए छात्रों की बात सुने जाने और उनकी चिंताओं का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की आवश्यकता पर जोर दिया। कलाकारों की इन प्रतिक्रियाओं ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सार्वजनिक चर्चा को और तेज कर दिया है।

    प्रदर्शन उस समय चर्चा का विषय बन गया जब संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान कथित तौर पर आंसू गैस और अन्य भीड़ नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किए जाने की खबरें सामने आईं। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस घटनाक्रम पर अपनी राय व्यक्त की। फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों ने भी छात्रों के पक्ष में संवेदनशीलता और संवाद की जरूरत पर बल देते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं।

    अभिनेत्री पूजा भट्ट ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि जब छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग की घटनाएं सामने आती हैं तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि विरोध की आवाज को दबाने के बजाय उसकी बात सुनना अधिक जरूरी है। उनका मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति को सम्मानपूर्वक सुना जाना चाहिए और समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से तलाशा जाना चाहिए।

    अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर संक्षिप्त लेकिन भावनात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए लिखा कि इस दिन ने केवल लोगों को शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि पूरे देश को भावनात्मक रूप से भी प्रभावित किया है। उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गई और कई लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी।

    अदिति राव हैदरी ने इस विषय पर विस्तृत संदेश साझा करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन सबसे पहले इंसानियत और संवेदनशीलता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों और अपनी बात रखने वाले प्रत्येक नागरिक के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और गरिमापूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। उनके अनुसार संवाद और एक-दूसरे की बात सुनना ही किसी भी लोकतांत्रिक समाज की वास्तविक ताकत है तथा देश के युवाओं को सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

    जेनेलिया देशमुख ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि देश के युवाओं की आवाज बिना किसी भय के सुनी जानी चाहिए। उन्होंने युवाओं को लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए कहा कि उनके विचार, ऊर्जा और सपने ही देश के भविष्य की दिशा तय करते हैं। उन्होंने समाज से अपील की कि युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।

    यह पूरा विरोध प्रदर्शन मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे रहे, जिन्हें बाद में चिकित्सकीय देखरेख के लिए अस्पताल ले जाया गया। इस घटनाक्रम के बाद छात्रों के आंदोलन, परीक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के तरीकों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है, जबकि विभिन्न वर्गों की ओर से संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता लगातार रेखांकित की जा रही है।