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  • अस्पताल से सोनम वांगचुक का देश के नाम संदेश, ‘चलो संसद’ मार्च को बताया दूसरा आजादी आंदोलन, हिरासत और स्वास्थ्य को लेकर बढ़ा विवाद

    अस्पताल से सोनम वांगचुक का देश के नाम संदेश, ‘चलो संसद’ मार्च को बताया दूसरा आजादी आंदोलन, हिरासत और स्वास्थ्य को लेकर बढ़ा विवाद

    नई दिल्ली । सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल से देशवासियों के नाम संदेश जारी करते हुए 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च को सफल बनाने की अपील की है। उन्होंने अपने संदेश में इसे भय और अन्याय के खिलाफ जनभागीदारी का अभियान बताते हुए नागरिकों से बड़ी संख्या में शामिल होने का आग्रह किया। उनका संदेश उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंग्मो के माध्यम से सार्वजनिक किया गया, जिसमें उन्होंने इसे देश के लिए महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक पहल बताया और लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की।

    सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि देश को अन्याय और भय से मुक्त बनाने के लिए जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है और इसी भावना के साथ 20 जुलाई के कार्यक्रम को व्यापक समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका संदेश अस्पताल से भेजा गया है, जहां उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध रखा गया है।

    सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से एक जनआंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल पर थे। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद से उनके स्वास्थ्य, इलाज और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। इस बीच उनके समर्थक भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं।

    दूसरी ओर, उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंग्मो ने वांगचुक को किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति देने की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि उन्हें वर्तमान अस्पताल की व्यवस्था पर भरोसा नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक को परिवार, वकीलों और निजी चिकित्सकों से पर्याप्त रूप से मिलने नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है। याचिका में अस्पताल बदलने की अनुमति देने और मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध भी किया गया है।

    गीतांजलि ने यह भी दावा किया कि अस्पताल की ओर से उन्हें बताया गया कि सोनम वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर काफी नीचे चला गया है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर स्थिति मानी जाती है। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से पूरी स्पष्टता के साथ साझा नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें अपनी पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरण की अनुमति नहीं मिली है।

    परिवार का कहना है कि अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिससे मुलाकात और सामान्य आवाजाही प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे सामान्य चिकित्सीय व्यवस्था के बजाय प्रतिबंधात्मक स्थिति बताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है तो संबंधित प्रशासनिक पक्षों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च पर भी सभी की नजरें टिकी हैं। एक ओर आंदोलन के समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा अभियान बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति और उनके अस्पताल में भर्ती रहने को लेकर कानूनी और प्रशासनिक पहलू भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई, चिकित्सकीय निर्णय और आंदोलन की दिशा इस मामले के आगे के घटनाक्रम को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • MP: केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में जल चिता व फांसी सत्याग्रह…. 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे विस्थापित

    MP: केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में जल चिता व फांसी सत्याग्रह…. 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे विस्थापित


    छतरपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बुंदेलखंड क्षेत्र (Bundelkhand region) में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट (Ken-Betwa Link Project) और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में चल रहा आंदोलन शनिवार को 15वें दिन में प्रवेश कर गया. छतरपुर जिले के कुपी गांव के पास बराना नदी किनारे बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं और परियोजना से प्रभावित परिवार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें अब तक उचित पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिला।

    इस आंदोलन का नेतृत्व अमित भटनागर कर रहे हैं और पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन उपवास पर हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस दौरान भटनागर की केवल एक बार औपचारिक मेडिकल जांच की गई. प्रदर्शनकारियों ने ‘जल सत्याग्रह’, ‘चिता सत्याग्रह’ और आंदोलन के आठवें दिन से प्रतीकात्मक ‘फांसी सत्याग्रह’ भी शुरू किया है।

    बता दें कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट का मकसद केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी में पहुंचाना है ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखा-प्रवण बुंदेलखंड इलाके में सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा सके।

    हालांकि, इस प्रोजेक्ट का विस्थापन, पुनर्वास और जंगलों व वन्यजीवों (जिसमें पन्ना टाइगर रिजर्व का हिस्सा भी शामिल है) पर इसके असर से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों के कुछ वर्गों और पर्यावरण समूहों ने विरोध किया है. मौजूदा आंदोलन में रुंझ और मझगांव सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवार भी शामिल हैं, जिनका दावा है कि अधिकारियों द्वारा किए गए पुनर्वास के वादों को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।

    छतरपुर जिला प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शनकारियों में पड़ोसी पन्ना जिले के रुंझ और मझगांव सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित 176 लोग शामिल हैं और इनका छतरपुर जिले में किसी विस्थापन या मुआवजे की प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है.

    एक बयान में प्रशासन ने प्रभावित परिवारों से पन्ना लौटने और पुनर्वास का लाभ उठाने के लिए वहां के जिला अधिकारियों से संपर्क करने का आग्रह किया. इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने पुनर्वास और पुनर्स्थापना के लिए अतिरिक्त 202.50 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं और प्रति प्रभावित परिवार पुनर्वास सहायता को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये कर दिया है।

    प्रशासन ने कहा कि अतिरिक्त आवंटन पात्र लाभार्थियों के समय पर पुनर्वास में मदद करेगा. इसमें कहा गया कि कलेक्टर पार्थ जायसवाल के निर्देश पर मानवीय आधार पर विरोध स्थल पर पीने के पानी, भोजन, स्वास्थ्य सेवा और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम किया गया था. पास के एक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल स्टाफ और दवाइयां भी तैनात की गई थीं, जबकि स्थानीय अधिकारी इंतजामों पर नजर रखे हुए थे।

    प्रशासन ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधि, राजस्व और पुलिस अधिकारी, सरपंच और अन्य स्थानीय प्रतिनिधि प्रभावित परिवारों को पन्ना लौटने और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मना रहे थे. उसने दावा किया कि कुछ लोग प्रोजेक्ट के बारे में गलत जानकारी फैला रहे थे और जनता से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की।

    प्रशासन का कहना था कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का है और इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पीने के पानी की आपूर्ति और समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अप्रैल में प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पूरे नहीं किए गए।

    अमित भटनागर ने दावा किया कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के साथ-साथ मझगांव और रुंझ सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित लोगों को न्याय नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापित परिवारों ने अपनी जमीन, जंगल, जल संसाधन, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान खो दी है, जबकि कुछ लोगों पर झूठे आपराधिक मामले दर्ज किए गए, उन्हें अवैध रूप से बेदखल किया गया, बिजली आपूर्ति काट दी गई और स्कूल तोड़ दिए गए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन ग्रामीणों को डराना-धमकाना बंद करे और हर गांव में प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों की सूची सार्वजनिक रूप से दिखाए।

    बिजावर के SDM विजय द्विवेदी ने कहा कि प्रशासन को मीडिया रिपोर्टों के ज़रिए आंदोलन के बारे में पता चला, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने न तो पहले से कोई जानकारी दी थी और न ही कोई औपचारिक ज्ञापन सौंपा था. उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनकी लंबित मांगों का जायजा लिया।

    द्विवेदी ने कहा कि पन्ना जिले के लोगों की शिकायतों का समाधान स्थानीय प्रशासन करेगा, जबकि छतरपुर के निवासियों से जुड़े मुद्दों का समाधान छतरपुर प्रशासन करेगा. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से घर लौटने की अपील की, खासकर मॉनसून को देखते हुए, और उन आरोपों को खारिज कर दिया कि फ़ायदे चुनिंदा लोगों को दिए गए थे; उन्होंने कहा कि अगर कोई खास मामला प्रशासन के ध्यान में लाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।

  • जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बढ़ा सियासी विवाद, CJP ने पीएम मोदी के इस्तीफे की उठाई मांग

    जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बढ़ा सियासी विवाद, CJP ने पीएम मोदी के इस्तीफे की उठाई मांग

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से जारी अनशन के बीच शनिवार को उस समय नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को धरनास्थल से हटाकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा दिया। लंबे समय से भोजन नहीं करने के कारण उनकी सेहत लगातार कमजोर हो रही थी। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद आंदोलन से जुड़े संगठनों और समर्थकों ने विरोध जताया, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग कर दी।

    सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका अनशन देश में पेपर लीक की घटनाओं के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन के समर्थन में चल रहा था। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी।

    शनिवार सुबह पुलिस ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए वांगचुक को धरनास्थल से हटाकर अस्पताल पहुंचाया। अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक अनशन के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो रही थी और चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक थी। इससे पहले न्यायालय की ओर से भी उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता पर टिप्पणी की गई थी। पुलिस का कहना है कि यह कदम उनकी सुरक्षा और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया।

    वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध किया। कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

    इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजी दीपके ने घोषणा की कि वह स्वयं भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसकी आलोचना की। दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया और उनके साथ भी मारपीट हुई। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए लोगों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखने की अपील की।

    घटना के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े लोग अपनी मांगों पर कायम हैं और उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध, प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य कारणों से यह कदम उठाना आवश्यक था, वहीं आंदोलन से जुड़े संगठन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हस्तक्षेप बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं जारी रहने की संभावना है, जबकि सभी की नजर सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और आंदोलन की आगामी दिशा पर बनी हुई है।

  • सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरीं सोनाक्षी सिन्हा, वीडियो जारी कर बोलीं- अब चुप नहीं बैठ सकती, संवाद की अपील

    सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरीं सोनाक्षी सिन्हा, वीडियो जारी कर बोलीं- अब चुप नहीं बैठ सकती, संवाद की अपील

    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन लगातार 19वें दिन भी जारी है। इस बीच उनके समर्थन में अब बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा भी खुलकर सामने आई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करते हुए अनशन को लेकर चिंता व्यक्त की और सरकार तथा समाज से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। अभिनेत्री ने कहा कि अब वह इस विषय पर चुप नहीं रह सकतीं और संवाद के जरिए समाधान निकालना जरूरी है।

    अपने वीडियो संदेश में सोनाक्षी सिन्हा ने कहा कि सोनम वांगचुक देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्ति हैं और लंबे समय से बिना भोजन के अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि उन छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है, जिनकी शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, यदि किसी नागरिक को अपनी बात मनवाने के लिए इतने लंबे समय तक भूख हड़ताल करनी पड़े, तो यह सभी के लिए चिंतन का विषय होना चाहिए।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद सबसे प्रभावी माध्यम होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने दिनों से चल रहे अनशन के बावजूद सार्थक बातचीत की पहल क्यों नहीं हो रही है। उनका मानना है कि यदि समय रहते बातचीत शुरू की जाए तो किसी भी विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है और हालात को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

    सोनाक्षी सिन्हा ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि देश और उसके भविष्य की चिंता करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार और जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देशहित में अपनी बात रखना किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन या विरोध नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील नहीं कर रहीं, बल्कि संबंधित पक्षों से जल्द बातचीत शुरू करने का आग्रह कर रही हैं ताकि किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोगों ने सोनाक्षी सिन्हा के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने एक महत्वपूर्ण विषय पर अपनी आवाज उठाई है। वहीं कुछ लोगों ने इस मामले पर अलग-अलग दृष्टिकोण भी व्यक्त किए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस वीडियो को बड़ी संख्या में देखा और साझा किया जा रहा है।

    गौरतलब है कि सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं। उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर भी चिंता जताई जा रही है और इस मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भी जारी है। दिल्ली हाईकोर्ट में इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हो रही है, जबकि प्रदर्शन को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और कई सार्वजनिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में यह मुद्दा अब केवल एक आंदोलन तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।

  • जबलपुर के सेंट अलायसियस स्कूल में धर्म परिवर्तन के आरोपों पर बवाल, कर्मचारियों के दावों के बाद हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, पुलिस ने संभाला मोर्चा

    जबलपुर के सेंट अलायसियस स्कूल में धर्म परिवर्तन के आरोपों पर बवाल, कर्मचारियों के दावों के बाद हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, पुलिस ने संभाला मोर्चा

    मध्य प्रदेश:  जबलपुर स्थित सेंट अलायसियस स्कूल में धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर मंगलवार को विवाद खड़ा हो गया। कुछ कर्मचारियों द्वारा स्कूल प्रबंधन पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और नौकरी से निकालने की धमकी देने के आरोप लगाए जाने के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता स्कूल परिसर पहुंच गए। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और विरोध हुआ, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

    विवाद उस समय सामने आया जब स्कूल के कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया गया। कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें नौकरी बनाए रखने के लिए धर्म बदलने के लिए कहा गया और ऐसा नहीं करने पर सेवा समाप्त करने की चेतावनी दी गई। शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए गए, लेकिन धर्म परिवर्तन से इनकार करने के बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया।

    इन आरोपों की जानकारी सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में स्कूल पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान परिसर में लगे कुछ बैनर और पोस्टर भी क्षतिग्रस्त किए गए तथा बैरिकेडिंग को नुकसान पहुंचने की सूचना मिली। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।

    प्रदर्शन में शामिल संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को डर और लालच के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।

    दूसरी ओर, शिकायत करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने धर्म परिवर्तन करने से इनकार किया, जिसके बाद उनकी नौकरी समाप्त कर दी गई। उनका दावा है कि इस कार्रवाई से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सभी पक्षों से प्राप्त शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • देवास में आशा कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन मांगें पूरी नहीं हुईं तो विधानसभा घेराव की चेतावनी

    देवास में आशा कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन मांगें पूरी नहीं हुईं तो विधानसभा घेराव की चेतावनी


    देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में सोमवार को आशा कार्यकर्ताओं और आशा पर्यवेक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचीं दो हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने समय पर वेतन भुगतान, लंबित प्रोत्साहन राशि और एरियर जारी करने की मांग उठाई।

    तेज धूप के बावजूद बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालय परिसर में डटी रहीं। कई महिलाएं धूप से बचने के लिए छाते लेकर धरने पर बैठीं जबकि कुछ अपने छोटे बच्चों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुईं। कार्यकर्ताओं का कहना था कि स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें समय पर भुगतान और निर्धारित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई महीनों तक प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया जाता और भुगतान में मनमानी कटौती भी की जाती है। उनका कहना है कि बकाया राशि का स्पष्ट विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया जाता जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    आशा कार्यकर्ताओं ने वर्ष 2023 में घोषित एक हजार रुपये की वार्षिक वेतन वृद्धि का एरियर तत्काल जारी करने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि सरकार द्वारा घोषणा किए जाने के बावजूद अब तक एरियर का भुगतान नहीं हुआ है। साथ ही छह हजार रुपये मासिक प्रोत्साहन राशि में परिवार का भरण पोषण करना बेहद कठिन हो गया है।

    रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची जहां करीब आधे घंटे तक धरना प्रदर्शन चला। इस दौरान भारत माता की जय और हमारा हक हमें दो जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के माध्यम से सरकार को अपनी मांगों का ज्ञापन भी सौंपा।

    आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगला चरण विधानसभा घेराव का होगा और तब तक आंदोलन जारी रहेगा जब तक लंबित भुगतान और अन्य मांगों का समाधान नहीं किया जाता।

  • जंतर-मंतर आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके की छात्रों से अपील, बोले- लंबी लड़ाई के लिए सेहत बचाना जरूरी, अनशन का जिम्मा सोनम वांगचुक संभालें

    जंतर-मंतर आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके की छात्रों से अपील, बोले- लंबी लड़ाई के लिए सेहत बचाना जरूरी, अनशन का जिम्मा सोनम वांगचुक संभालें

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर राजधानी के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच आंदोलन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। प्रदर्शन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लगातार नौ दिनों से अनशन पर हैं, जबकि उनके समर्थन में कुछ छात्र भी भूख हड़ताल कर रहे हैं। इसी बीच आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने छात्रों से अनशन समाप्त कर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की है।

    अभिजीत दीपके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है, जिसमें वह छात्रों और समर्थकों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि यह आंदोलन जल्द समाप्त होने वाला नहीं है। ऐसे में सभी लोगों का लंबे समय तक सक्रिय और स्वस्थ रहना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में छात्र लगातार अनशन करते रहेंगे तो आंदोलन की संगठनात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    दीपके ने अपने संदेश में कहा कि सोनम वांगचुक को लंबे समय तक शांतिपूर्ण आंदोलनों और अनशन का अनुभव है, इसलिए वह इस जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से निभा सकते हैं। वहीं छात्रों और अन्य समर्थकों को अपनी ऊर्जा आंदोलन के संचालन, जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में लगानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन की सफलता केवल अनशन पर नहीं, बल्कि लगातार सक्रिय जनभागीदारी और समन्वित प्रयासों पर भी निर्भर करती है।

    प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन का समर्थन करने वाले लोगों से संयमित जीवनशैली अपनाने और प्रतीकात्मक रूप से एक दिन का उपवास रखने की अपील की। उनका कहना है कि यदि समर्थक बारी-बारी से एक दिन का उपवास करें तो आंदोलन के प्रति एकजुटता का संदेश भी जाएगा और प्रदर्शन स्थल पर भोजन की व्यवस्था का दबाव भी कम होगा। उन्होंने भोजन में संतुलन और अनुशासन को अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया।

    जानकारी के अनुसार, लंबे समय से जारी अनशन के कारण सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है और उनका वजन कम हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    जंतर-मंतर पर जारी यह आंदोलन लगातार लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। प्रदर्शन में शामिल छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। वहीं आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधि लगातार यह भी प्रयास कर रहे हैं कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण बना रहे और इसमें शामिल लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

    इसी उद्देश्य से अभिजीत दीपके ने छात्रों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय आंदोलन को अन्य माध्यमों से मजबूत करें। उनका मानना है कि किसी भी जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसके सक्रिय और स्वस्थ कार्यकर्ता होते हैं। ऐसे में लंबी अवधि के संघर्ष के लिए संयम, संगठन और सतत भागीदारी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

  • मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    नई दिल्ली। पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। सोशल मीडिया पर लाइव बातचीत के दौरान जब उनसे इस प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते हैं और खुद को केवल एक कलाकार मानते हैं।

    दिलजीत हाल ही में अपने प्रशंसकों के साथ इंस्टाग्राम लाइव के माध्यम से जुड़े थे। इस दौरान उन्होंने अपने आगामी प्रोजेक्ट्स, संगीत और फिल्मों से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। बातचीत के बीच जब एक दर्शक ने उनसे जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है और वह किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

    उन्होंने बातचीत में कहा कि उन्हें ऐसे मामलों से दूर ही रखा जाए क्योंकि वह किसी राजनीतिक भूमिका में नहीं हैं। उनका कहना था कि वह एक कलाकार हैं और उनका काम लोगों का मनोरंजन करना है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है और जीवन में सभी परिस्थितियां कभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकतीं।

    दिलजीत ने अपने अंदाज में यह भी कहा कि जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, वे भी अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं और जिनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है, उनका भी अपना पक्ष हो सकता है। उन्होंने किसी भी पक्ष का समर्थन या विरोध करने से बचते हुए कहा कि बिना पूरी जानकारी के किसी मुद्दे पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने पूरे विवाद पर तटस्थ रुख अपनाया।

    उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने उनके इस रुख को एक कलाकार की पेशेवर सोच बताया, जबकि कुछ लोगों ने सार्वजनिक जीवन से जुड़े चर्चित चेहरों की सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भूमिका को लेकर अलग-अलग राय भी व्यक्त की। हालांकि दिलजीत ने अपने बयान में किसी संगठन, व्यक्ति या प्रदर्शन की प्रकृति पर कोई टिप्पणी नहीं की और केवल राजनीति से दूरी बनाए रखने की बात दोहराई।

    दिलजीत दोसांझ पिछले कुछ समय से अपनी फिल्मों, अंतरराष्ट्रीय कॉन्सर्ट्स और संगीत परियोजनाओं को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। देश और विदेश में उनकी बड़ी प्रशंसक संख्या है और सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रिय मौजूदगी रहती है। ऐसे में उनके किसी भी बयान पर लोगों की नजर रहती है।

    फिलहाल उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता कला और मनोरंजन है तथा वह राजनीतिक या विवादित विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना पसंद करते हैं। इसी वजह से उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

  • मणिपुर में महिलाओं का विशाल आंदोलन, सड़कें बनीं विरोध का केंद्र..

    मणिपुर में महिलाओं का विशाल आंदोलन, सड़कें बनीं विरोध का केंद्र..

    नई दिल्ली।मणिपुर में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां रॉकेट हमले में दो बच्चों समेत तीन लोगों की मौत के बाद व्यापक स्तर पर विरोध-प्रदर्शन जारी है। इस घटना के बाद से राज्य में जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है और कई इलाकों में बंद और प्रदर्शन की स्थिति बनी हुई है। आम जनजीवन प्रभावित है और सड़कों पर सामान्य गतिविधियां काफी हद तक ठप हो गई हैं।

    इस आंदोलन में सबसे आगे मणिपुर की महिलाएं दिखाई दे रही हैं, जो हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज करा रही हैं। ये महिलाएं दिन के समय रास्तों को रोककर धरना दे रही हैं और आवाजाही को नियंत्रित कर रही हैं। कई इलाकों में स्थिति ऐसी है कि वहां न तो आम नागरिकों को आने-जाने की अनुमति है और न ही सुरक्षा बलों की सामान्य आवाजाही हो पा रही है। रात के समय ये महिलाएं मशाल रैलियों के जरिए इलाकों में गश्त कर रही हैं, जिससे आंदोलन और अधिक संगठित और प्रभावी दिखाई दे रहा है।

    प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना है कि वे घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनके अनुसार यह केवल भावनात्मक नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का हिस्सा है, जिसे वे संतुलित तरीके से निभा रही हैं। इस आंदोलन के चलते स्थानीय बाजारों और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है, जिससे कई परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। इसके बावजूद कुछ महिलाएं अपने काम के साथ-साथ आंदोलन में भागीदारी भी जारी रखे हुए हैं।

    इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाली सामुदायिक संरचनाएं लंबे समय से शांति और सामाजिक संतुलन की मांग करती रही हैं। यह संगठन संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। इतिहास में भी इस तरह के आंदोलन सामाजिक मुद्दों और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर सामने आते रहे हैं, जिन्होंने व्यापक जनसमर्थन हासिल किया है।

    यह पूरा विवाद एक रॉकेट हमले से शुरू हुआ था, जिसमें एक घर को निशाना बनाया गया था। इस हमले में एक छोटे बच्चे, एक बच्ची और उनकी मां की मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में गुस्सा फैल गया और धीरे-धीरे यह विरोध बड़े आंदोलन में बदल गया।

    फिलहाल राज्य में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और लोग शांति बहाली की मांग कर रहे हैं। महिलाओं के इस व्यापक आंदोलन ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है, जिससे प्रशासन और समाज दोनों के सामने शांति बहाली की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

  • LPG किल्लत को लेकर विरोध प्रदर्शन सड़क पर उतरे लोग मंत्री का काफिला घिरा

    LPG किल्लत को लेकर विरोध प्रदर्शन सड़क पर उतरे लोग मंत्री का काफिला घिरा


    सीधी । सीधी जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर की कथित किल्लत को लेकर लोगों का गुस्सा उस समय खुलकर सामने आ गया जब महिलाओं ने सड़क पर सिलेंडर रखकर मंत्री राधा सिंह के काफिले का रास्ता रोक दिया। यह पूरा घटनाक्रम उस वक्त हुआ जब पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राधा सिंह “नारी शक्ति वंदन रैली” में शामिल होने सीधी पहुंची थीं।

    जानकारी के अनुसार, मंत्री का काफिला पूजा पार्क से सम्राट चौक, सराफा बाजार और गांधी चौक होते हुए पैदल मार्च के रूप में आगे बढ़ रहा था। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी उनके साथ चल रही थीं और “नारी शक्ति, राष्ट्र शक्ति” के नारे लगाए जा रहे थे। लेकिन इसी बीच पढ़ैनिया गैस एजेंसी के पास कुछ महिलाओं ने सड़क पर सिलेंडर रखकर विरोध शुरू कर दिया और मंत्री के काफिले को रोक दिया।

    प्रदर्शन कर रही महिलाओं का आरोप था कि क्षेत्र में गैस सिलेंडर की भारी किल्लत है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि बुकिंग कराने के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा है, जिससे घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है। कुछ महिलाओं ने कहा कि इंडेन कनेक्शन होने के बावजूद सप्लाई नियमित नहीं है, जबकि प्रताप गैस एजेंसी से भी समय पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

    वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर मंत्री राधा सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश में कहीं कोई किल्लत नहीं है और कुछ लोग जानबूझकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में महिला आरक्षण लागू होने जा रहा है, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को बधाई दी।

    घटना के दौरान स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण रही, हालांकि कुछ ही मिनटों में मौके पर रखे गए सिलेंडर हट गए और प्रदर्शनकारी वहां से हट गए। बताया जा रहा है कि मंत्री अपने काफिले से बाहर नहीं उतरीं और स्थिति सामान्य होने के बाद कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया। इस घटना ने एक बार फिर गैस आपूर्ति व्यवस्था और जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं की परेशानियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।