ब्रेकिंग न्यूज: राजनीति में मचा घमासान: AAP के नेताओं के पार्टी छोड़ने की खबरों से सियासी पारा हाई


नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति में उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए दावा किया कि वह राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे। दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह घोषणा की। इस दौरान उनके साथ सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद रहे। चड्ढा ने कहा कि उन्होंने संविधान के प्रावधानों के तहत यह निर्णय लिया है और जल्द ही औपचारिक रूप से भाजपा में विलय की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

“AAP अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई” राघव चड्ढा का आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में चड्ढा ने भावुक होते हुए कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने खून-पसीने से सींचा, वह अब अपने मूल सिद्धांतों और नैतिकता से भटक चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP अब देशहित के बजाय निजी फायदे के लिए काम कर रही है। चड्ढा ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों से मुझे लगने लगा था कि मैं गलत पार्टी में सही व्यक्ति हूं। इसलिए अब जनता के करीब जाने और नई दिशा में काम करने का फैसला लिया है।”

पार्टी में पहले ही शुरू हो चुका था विवाद

गौरतलब है कि 2 अप्रैल को AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया था। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजकर उन्हें बोलने का समय न देने की भी सिफारिश की थी। उनकी जगह अशोक मित्तल को उपनेता बनाया गया। चड्ढा 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनकी कार्यकाल 2028 तक है।

“मेरी खामोशी को कमजोरी मत समझना” चड्ढा का वीडियो संदेश

इस कार्रवाई के बाद 3 अप्रैल को राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि संसद में जनता के मुद्दे उठाना अगर अपराध है, तो वह इसे जारी रखेंगे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना, मैं वह दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।”

AAP नेताओं का पलटवार-‘पार्टी लाइन से हटे’

राघव चड्ढा के बयानों के बाद AAP के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला। सौरभ भारद्वाज, आतिशी मार्लेना और भगवंत मान सहित अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि चड्ढा पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे थे। नेताओं का कहना था कि जब अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई, तब चड्ढा विदेश में थे और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर उन्होंने पार्टी का साथ नहीं दिया।

सियासी समीकरण बदलने की आहट

राघव चड्ढा का यह कदम न सिर्फ AAP बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अगर उनका दावा सही साबित होता है, तो राज्यसभा में AAP की स्थिति कमजोर हो सकती है और भाजपा को मजबूती मिल सकती है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम के और भी बड़े राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।