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  • अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुल्तानपुर कोर्ट में अगली सुनवाई 21 मई को तय

    अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुल्तानपुर कोर्ट में अगली सुनवाई 21 मई को तय

    नई दिल्ली ।
    सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई एक बार फिर हुई, जिसमें अब अगली तारीख 21 मई 2026 तय कर दी गई है। यह मामला कई साल पुराने उस बयान से जुड़ा बताया जाता है, जो कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान गृहमंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए कथित टिप्पणी से संबंधित है। इसी टिप्पणी को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

    कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई, लेकिन फिलहाल किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सका। इसी वजह से अदालत ने अगली सुनवाई के लिए नई तारीख निर्धारित कर दी। यह मामला लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में चल रहा है और समय-समय पर इसकी सुनवाई होती रही है।

    इस केस में वादी पक्ष की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि वे कोर्ट के एक पुराने आदेश के खिलाफ उच्च अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। वकील की ओर से यह भी कहा गया कि आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें राहुल गांधी की आवाज का नमूना जांच के लिए देने की बात शामिल थी। इस फैसले के बाद भी मामला आगे बढ़ता रहा और अब अदालत ने वादी पक्ष को अपनी दलीलों के लिए अंतिम मौका भी दिया है।

    यह पूरा मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत में चल रही प्रक्रिया के बीच दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों को मजबूती से पेश कर रहे हैं। अब सभी की नजरें 21 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।

  • तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, थलपति विजय के नेतृत्व में नई सरकार, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा

    तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, थलपति विजय के नेतृत्व में नई सरकार, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में लंबे इंतजार और गहन राजनीतिक हलचलों के बाद आखिरकार वह क्षण आ गया जिसने राज्य की सत्ता संरचना को नया रूप दे दिया। चेन्नई में आयोजित एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह में लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बने Thalapathy Vijay ने आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस घटना को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां परंपरागत राजनीतिक ढांचे से बाहर निकलकर एक नए नेतृत्व ने जिम्मेदारी संभाली है।

    इस समारोह की खास बात यह रही कि इसमें राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख राजनीतिक नेता भी शामिल हुए। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने कार्यक्रम में मौजूद रहकर नई सरकार को शुभकामनाएं दीं और इसे जनता की बदलती सोच का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने इस बार नई पीढ़ी, नए विचार और नई राजनीतिक कल्पना को अवसर दिया है, जो आने वाले समय में शासन की दिशा तय कर सकता है।

    इसी अवसर पर Mallikarjun Kharge ने भी विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से सामाजिक न्याय, समानता और प्रगतिशील विचारों पर आधारित रही है और उम्मीद है कि नई सरकार इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाएगी। उनके अनुसार यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक सोच के विकास का संकेत है।

    शपथ ग्रहण समारोह चेन्नई के प्रमुख आयोजन स्थल पर बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया, जहां राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। माहौल में उत्साह और ऐतिहासिक बदलाव की झलक साफ दिखाई दे रही थी। लंबे समय से चल रही राजनीतिक अनिश्चितता अब समाप्त हो गई है और राज्य को एक नई सरकार और नया नेतृत्व मिल गया है।

    मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले संबोधन में थलपति विजय ने खुद को जनता का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक सफर किसी पारंपरिक राजनीतिक परिवार से नहीं जुड़ा है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन ने उन्हें इस स्थान तक पहुंचाया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार झूठे वादों की बजाय ठोस काम और पारदर्शी प्रशासन पर ध्यान देगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिवर्तन तमिलनाडु की राजनीति में एक नई दिशा का संकेत है, जहां जनता ने एक गैर-पारंपरिक नेतृत्व को मौका दिया है। यह बदलाव न केवल सत्ता परिवर्तन है, बल्कि राजनीतिक सोच और जन अपेक्षाओं में आए बदलाव का भी प्रतीक है।

    नई सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरे और प्रशासनिक अनुभव के साथ विकास कार्यों को गति दे। रोजगार, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दे आने वाले समय में सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।

    इस तरह तमिलनाडु ने एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत की है, जहां नेतृत्व, उम्मीदें और जनता की भूमिका मिलकर एक नए शासन मॉडल की ओर इशारा कर रही हैं।

  • केरल में CM फेस पर सस्पेंस: राहुल का फॉर्मूला लागू, विधायक तय करेंगे मुख्यमंत्री; सतीशन-वेणुगोपाल-चेन्नीथला रेस में आगे

    केरल में CM फेस पर सस्पेंस: राहुल का फॉर्मूला लागू, विधायक तय करेंगे मुख्यमंत्री; सतीशन-वेणुगोपाल-चेन्नीथला रेस में आगे


    नई दिल्ली। केरल में चुनावी जीत के बाद सत्ता की तस्वीर तो साफ हो गई है, लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सरकार बनने जा रही है, लेकिन कांग्रेस के भीतर सीएम फेस को लेकर मंथन तेज हो गया है। इस बीच राहुल गांधी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस बार फैसला हाईकमान नहीं, बल्कि विधायक करेंगे।

    सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी चाहते हैं कि विधायक दल की बैठक में आम सहमति से नेता चुना जाए और वही मुख्यमंत्री बने। उन्होंने अपने इस रुख की जानकारी पार्टी पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन को भी दे दी है, जो तिरुअनंतपुरम जाकर विधायकों की राय जानेंगे।

    सीएम पद की रेस में फिलहाल तीन बड़े नाम सबसे आगे चल रहे हैं। पहला नाम है केसी वेणुगोपाल का, जो कांग्रेस संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं और राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। हालांकि, पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि उन्हें दिल्ली की राजनीति में बनाए रखना ज्यादा जरूरी है, जिससे उनकी दावेदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    दूसरा बड़ा नाम वी. डी. सतीशन का है, जो युवा चेहरा हैं और नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उनकी लोकप्रियता और आक्रामक राजनीतिक शैली उनके पक्ष में जाती है, लेकिन हाल के कुछ विवाद उनकी राह में बाधा बन सकते हैं।

    तीसरे दावेदार रमेश चेन्नीथला हैं, जिन्हें अनुभव और वरिष्ठता का बड़ा फायदा मिल सकता है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि लंबे समय से संगठन और सरकार में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें मौका मिलना चाहिए।

    इसके अलावा शशि थरूर का नाम भी चर्चा में है, लेकिन सांसद होने के कारण उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि इससे उपचुनाव का जोखिम खड़ा हो सकता है।

    राजनीतिक समीकरणों के बीच यह भी साफ है कि अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान के शीर्ष नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी की राय से प्रभावित होगा, लेकिन राहुल गांधी का रुख इस बार निर्णायक माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर केरल में मुख्यमंत्री का चेहरा तय करने की जिम्मेदारी अब विधायकों के कंधों पर है। कांग्रेस इस बार किसी तरह का विवाद या असंतोष नहीं चाहती, इसलिए आम सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि विधायक किस नेता पर भरोसा जताते हैं और किसके सिर पर केरल का ताज सजता है।

  • राहुल गांधी पर CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में बड़ा मामला… क्या आज आएगा अहम फैसला? देशभर की नजर लखनऊ बेंच पर!

    राहुल गांधी पर CBI जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में बड़ा मामला… क्या आज आएगा अहम फैसला? देशभर की नजर लखनऊ बेंच पर!



    नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर एक याचिका पर आज महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। यह मामला कथित आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़ा बताया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, याचिका में मांग की गई है कि राहुल गांधी और उनके परिवार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा विस्तृत जांच की जाए और इस मामले में नियमित आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

    यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफर अहमद की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई है। मामले की सुनवाई पहले 6 मई को नए मामलों की सूची में शामिल थी, लेकिन याची की अर्जेंट अपील पर इसे चैंबर में सुनवाई के लिए मंजूरी दी गई। अब इस पर आज दोपहर 2:15 बजे सुनवाई होनी है।

    याचिकाकर्ता कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दावा किया है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीर जांच आवश्यक है। याचिका में सीबीआई के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग, गृह मंत्रालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय को भी पक्षकार बनाया गया है।

    इस पूरे मामले में आरोप है कि राहुल गांधी की संपत्ति उनके ज्ञात आय स्रोतों से अधिक हो सकती है, जिसकी जांच की मांग की गई है।

    फिलहाल अदालत में इस याचिका की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है।

  • कंगना रनौत ने फेक न्यूज पर जताई नाराजगी: राहुल गांधी संग शादी वाली अफवाह को बताया पूरी तरह झूठा दावा

    कंगना रनौत ने फेक न्यूज पर जताई नाराजगी: राहुल गांधी संग शादी वाली अफवाह को बताया पूरी तरह झूठा दावा



    नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर वायरल एक फर्जी पोस्ट को लेकर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने कड़ा रुख अपनाया है। इस पोस्ट में यह झूठा दावा किया गया था कि उनका नाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ जोड़कर शादी से जुड़ी टिप्पणी की गई है, जो पूरी तरह असत्य और भ्रामक पाया गया।

    क्या था वायरल दावा?
    इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हुआ, जिसमें यह गलत दावा किया गया कि कंगना रनौत ने कहा है कि अगर राहुल गांधी किसी शर्त को पूरा करते हैं तो वह उनसे शादी कर सकती हैं। इस पोस्ट ने लोगों के बीच भ्रम फैलाया।

    कंगना ने दी सख्त प्रतिक्रिया
    कंगना रनौत ने इस खबर को पूरी तरह फर्जी बताते हुए सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है और यह सिर्फ अफवाह है।कंगना ने फेक न्यूज फैलाने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की झूठी खबरें न केवल गलत हैं बल्कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

    सोशल मीडिया पर बढ़ती फेक न्यूज की समस्या
    यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया पर बिना जांच के खबरें कितनी तेजी से फैल जाती हैं। कई यूजर्स ने भी इस पोस्ट को गलत बताया और कहा कि यह राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों को बदनाम करने की कोशिश है।

    फिलहाल क्या स्थिति है?
    इस पूरे मामले पर राहुल गांधी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, यह स्पष्ट हो चुका है कि वायरल दावा पूरी तरह फर्जी था।वर्क फ्रंट की बात करें तो कंगना रनौत हाल ही में फिल्म इमरजेंसी में नजर आई थीं और आने वाले समय में वे अपने नए प्रोजेक्ट्स को लेकर भी चर्चा में बनी हुई हैं।

  • ओम बिड़ला ने राहुल गांधी पर ली चुटकी, संसद में माइक टिप्पणी से बना हल्का-फुल्का माहौल

    ओम बिड़ला ने राहुल गांधी पर ली चुटकी, संसद में माइक टिप्पणी से बना हल्का-फुल्का माहौल


    नई दिल्ली:
    संसद के विशेष सत्र के दौरान उस समय माहौल कुछ देर के लिए हल्का और अनौपचारिक हो गया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की एक टिप्पणी पर सदन में मौजूद सांसदों के बीच हंसी का माहौल बन गया। यह घटना उस समय हुई जब सदन में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा चल रही थी और राजनीतिक बहस अपने चरम पर थी।

    चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से एक सांसद अपना वक्तव्य रख रहे थे, तभी यह बात उठी कि उनका माइक्रोफोन सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। इसी दौरान विपक्षी बेंचों की ओर से भी माइक को लेकर प्रतिक्रिया दी गई और सदन में कुछ देर के लिए हल्की अफरा तफरी जैसी स्थिति बन गई।

    इसी मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने मुस्कुराते हुए टिप्पणी की कि माइक चालू है, केवल कुछ लोगों का ही माइक बंद रहता है। उनकी इस बात पर सदन में मौजूद कई सांसदों ने हंसी और मेज थपथपाकर प्रतिक्रिया दी, जिससे कुछ क्षणों के लिए कार्यवाही का माहौल गंभीरता से हटकर हल्का हो गया।

    यह टिप्पणी राजनीतिक चर्चा में भी एक अलग विषय बन गई क्योंकि इससे पहले भी विपक्ष की ओर से समय समय पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि उन्हें संसद में पर्याप्त रूप से बोलने नहीं दिया जाता या उनकी आवाज को दबाया जाता है। इसी पृष्ठभूमि में यह घटना एक प्रतीकात्मक हल्के पल के रूप में देखी जा रही है।

    हालांकि इस हल्के क्षण के बाद सदन की कार्यवाही फिर से गंभीर मुद्दों पर केंद्रित हो गई। विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधान और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा जारी रही, जिन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।

    परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को लेकर कुछ राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताएं भी व्यक्त कीं, विशेष रूप से इस बात को लेकर कि जनसंख्या आधारित बदलाव से राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार की ओर से इन विधेयकों को संवैधानिक और प्रशासनिक सुधारों के लिए आवश्यक बताया गया।

    सदन में दिन भर गंभीर बहसों के बीच यह छोटा सा हास्यपूर्ण क्षण भी चर्चा में रहा, जिसने कुछ समय के लिए माहौल को तनावपूर्ण राजनीति से हटाकर हल्केपन की ओर मोड़ दिया।

  • राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा

    राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा


    नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित रन फॉर अंबेडकर और रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन मैराथन 2026 को हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला।

    राहुल गांधी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का सबसे बड़ा संदेश देश का संविधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़े लोग अंबेडकर के सिद्धांतों और संविधान को खत्‍म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये ताकतें देश में सभी को समान अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं। राहुल गांधी के मुताबिक भाजपा के नेता अंबेडकर की प्रतिमा के सामने सम्मान जताते जरूर हैं लेकिन असल में उनका उद्देश्य संविधान को नुकसान पहुंचाना है।

    इस कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार संविधान पर प्रहार कर रही है और उसके नेता आक्रामक रवैया अपना रहे हैं। उनके अनुसार सरकार परोक्ष रूप से संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कर रही है। पुनिया ने कहा कि यह मैराथन लोगों को जागरूक करने के लिए आयोजित की गई है ताकि सभी मिलकर अंबेडकर की विचारधारा और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हो सकें।

    महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा इसके समर्थन में रही है लेकिन भाजपा के लागू करने के तरीके पर सवाल उठते हैं। उनका कहना था कि बिना नई जनगणना और परिसीमन के इस बिल को लागू करना उचित नहीं है। कांग्रेस की मांग है कि इसे नई जनगणना के आधार पर ही लागू किया जाना चाहिए न कि 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर।

  • सोनिया गांधी के स्वास्थ्य को लेकर पीएम मोदी ने लिया हालचाल, राहुल गांधी ने दी जानकारी..

    सोनिया गांधी के स्वास्थ्य को लेकर पीएम मोदी ने लिया हालचाल, राहुल गांधी ने दी जानकारी..


    नई दिल्ली। संसद भवन परिसर में उस समय एक सौहार्दपूर्ण और ध्यान खींचने वाला दृश्य सामने आया जब प्रधानमंत्री Narendra Modi और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi एक कार्यक्रम के दौरान आमने सामने आए और उनके बीच लंबी बातचीत हुई। यह मुलाकात महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती से जुड़े कार्यक्रम के दौरान हुई, जिसमें देश के कई प्रमुख नेता मौजूद थे।

    इस मौके पर संसद परिसर का माहौल सामान्य राजनीतिक तनाव से अलग और अधिक सहज दिखाई दिया। दोनों नेताओं को एक साथ बातचीत करते देखा गया, जहां वे कुछ समय तक गंभीर लेकिन शिष्टाचारपूर्ण संवाद में व्यस्त रहे। आमतौर पर तीखी राजनीतिक बहसों के लिए पहचाने जाने वाले इन दोनों नेताओं के बीच इस तरह की सहज बातचीत ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

    सूत्रों के अनुसार बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी से उनकी मां और वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। हाल ही में उनके स्वास्थ्य को लेकर कुछ चिंताएं सामने आई थीं, जिसके चलते यह मानवीय संवाद और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राहुल गांधी ने इस दौरान बताया कि उनकी मां की तबीयत में अब सुधार हो रहा है। इस जानकारी पर प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दीं। बातचीत का यह हिस्सा पूरी तरह मानवीय और औपचारिकता से परे सहज भावनाओं से जुड़ा हुआ था।

    संसद परिसर में इस तरह की मुलाकातें भले ही सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हों, लेकिन जब देश के दो शीर्ष राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इस तरह शांति और सहजता के साथ बातचीत करते नजर आते हैं तो यह दृश्य अपने आप में चर्चा का विषय बन जाता है। इस मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में एक सकारात्मक संदेश भी दिया है।

    बातचीत के दौरान दोनों नेताओं की बॉडी लैंग्वेज भी काफी सहज और सामान्य दिखाई दी। न किसी प्रकार की औपचारिक दूरी दिखी और न ही किसी तरह की राजनीतिक टकराव की झलक, बल्कि एक सामान्य शिष्टाचार और मानवीय संवाद का वातावरण नजर आया।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र में ऐसे क्षण यह दर्शाते हैं कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद संवाद और सम्मान की परंपरा बनी रहती है। संसद जैसे सर्वोच्च मंच पर इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक परिपक्वता का संकेत मानी जाती हैं।

    हालांकि यह मुलाकात संक्षिप्त थी, लेकिन इसने राजनीतिक माहौल में चर्चा जरूर पैदा कर दी है। यह दृश्य इस बात की याद दिलाता है कि सार्वजनिक जीवन में संवाद के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं, चाहे राजनीतिक मतभेद कितने भी गहरे क्यों न हों।

  • शिवराज सिंह के बेटे के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, अब कोर्ट में आमने-सामने होंगे राहुल-कार्तिकेय

    शिवराज सिंह के बेटे के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, अब कोर्ट में आमने-सामने होंगे राहुल-कार्तिकेय


    जबलपुर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मानहानि मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान के बीच कानूनी टकराव तेज हो गया है। राहुल गांधी ने भोपाल स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जारी समन को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ अगले सप्ताह सुनवाई करेगी।

    2018 के बयान से शुरू हुआ विवाद
    पूरा मामला 29 अक्टूबर 2018 का है, जब झाबुआ में एक चुनावी सभा के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स लीक का जिक्र करते हुए कार्तिकेय चौहान का नाम लिया था। हालांकि बाद में उन्होंने इसे भ्रम बताया, लेकिन यह बयान विवाद का कारण बन गया।

    कार्तिकेय ने दर्ज कराया मानहानि केस
    इस बयान को अपनी छवि खराब करने की साजिश बताते हुए कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जानबूझकर उनके और उनके परिवार के खिलाफ गलत बयान दिया। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज किया गया।

    समन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल
    भोपाल एमपी-एमएलए कोर्ट की विशेष मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले को एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है। अब इस केस में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां दोनों पक्ष आमने-सामने होंगे।

  • बस यात्रा में ‘यमराज’ से मिले राहुल गांधी, मजेदार बातचीत का VIDEO वायरल; अनोखा प्रचार

    बस यात्रा में ‘यमराज’ से मिले राहुल गांधी, मजेदार बातचीत का VIDEO वायरल; अनोखा प्रचार


    नई दिल्ली। राहुल गांधी का चुनाव प्रचार के दौरान एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। केरल में बस यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात ‘यमराज’ के वेश में एक व्यक्ति से हुई, जिसने माहौल को हल्का-फुल्का बना दिया।
    इस दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि बेहतर इलाज मिलने से ‘यमराज’ अब बेरोजगार हो सकते हैं। उनका यह मजाकिया अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

    बताया जा रहा है कि यह घटना बालुस्सेरी में बस यात्रा के दौरान हुई। वीडियो में राहुल गांधी आम यात्रियों के बीच बैठे नजर आते हैं। तभी ‘यमराज’ की वेशभूषा में एक व्यक्ति गदा लेकर उनके पास पहुंचता है।

    दोनों के बीच हल्की-फुल्की बातचीत होती है, जिसने प्रचार अभियान को दिलचस्प बना दिया।

    राहुल गांधी ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा कि उनकी मुलाकात बस में ‘यमराज’ से हुई, जो कुछ खास खुश नहीं दिखे। उन्होंने मजाक में कहा कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की ‘ओमान चांडी स्वास्थ्य बीमा योजना’ लागू होने पर लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा और वे ज्यादा समय तक जीवित रहेंगे, जिससे ‘यमराज’ की नौकरी पर खतरा आ सकता है।

    दरअसल, यह पूरा दृश्य यूडीएफ की प्रस्तावित स्वास्थ्य बीमा योजना के प्रचार से जुड़ा था। इस योजना के तहत हर परिवार को 25 लाख रुपये तक का हेल्थ कवर देने का वादा किया गया है। इस अनोखे अंदाज में प्रचार ने लोगों का ध्यान खींचा और संदेश को प्रभावी ढंग से पहुंचाने का काम किया।

    यूडीएफ ने चुनावी अभियान के तहत ‘पांच इंदिरा गारंटी’ का भी ऐलान किया है। इसमें स्वास्थ्य बीमा के अलावा महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, छात्राओं को मासिक आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर 3,000 रुपये करने और छोटे व्यापारियों को 5 लाख रुपये तक ब्याज-मुक्त ऋण देने जैसे वादे शामिल हैं।

    चुनावी माहौल के बीच राहुल गांधी का यह हल्का-फुल्का अंदाज चर्चा का विषय बन गया है और इसे प्रचार की रचनात्मक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।